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अपने साँप और मगरमच्छ भेज दूँगी, भारत के लोग नरक में मरेंगे: पाक गायिका ने वीडियो में दी धमकी

पाकिस्तान में न सिर्फ़ वहाँ के मंत्री और फ़ौज के अधिकारी बल्कि सेलेब्रिटीज भी भारत के ख़िलाफ़ ज़हर उगल कर अपने ही देश का लगातार मज़ाक बना रहे हैं। अब पाकिस्तानी गायिका रबी पीरज़ादा ने भारत पर साँपों से आक्रमण करने की धमकी दी है। उन्होंने ट्विटर पर वीडियो डाल कर भारत और ख़ासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अजीबोगरीब धमकियाँ दी है। इस वीडियो में वह साँपों और मगरमच्छों के साथ खेलती हुई दिख रही हैं।

‘शोर शराबा’ नामक रोमांटिक कॉमेडी फ़िल्म में अभिनय कर चुकी रबी पीरज़ादा ने वीडियो के माध्यम से कहा कि उनके दोस्त (साँप और मगरमच्छ) सीमा पार कर के भारत के लोगों को मारने के लिए तैयार हैं। इतना ही नहीं, वो ये भी कहती दिख रही हैं कि भारत के लोग नरक में जाकर मरेंगे। साँपों और मगरमच्छों की बात करते हुए पीरज़ादा ने कहा कि उनके ये सभी दोस्त शांतिप्रिय हैं।

खुद को कश्मीरी लड़की बताते हुए पीरज़ादा ने कहा कि वे इन सभी साँपों व मगरमच्छों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गिफ्ट के रूप में भेजना चाहती हैं। इसके बाद वह जम्मू-कश्मीर पर एक गाना भी गाती हैं। पीरज़ादा पहले भी अजीबोगरीब व्यवहार के कारण सुर्ख़ियों में रही हैं। इससे पहले जब पाक पीएम ने महिलाओं को मुर्गीपालन कर रुपए कमाने की सलाह दी थी, तब पीरज़ादा ने कई मुर्गियाँ ख़रीद कर अपने घर में रखा था और वीडियो भी पोस्ट किया था।

2017 में पीरज़ादा ने बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान ख़ान की आलोचना की थी। उन्होंने सलमान ख़ान पर युवाओं को अपराधी बनाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि सलमान युवाओं के बीच अपराध को बढ़ावा दे रहे हैं।

वायरल एटीएम चोर की पुलिस हिरासत में मौत, टॉर्चर सेल में पिटाई का VIDEO वायरल

हाल ही में सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में एटीएम चोर सीसीटीवी कैमरे की ओर देखता है। जीभ निकालकर कैमरे को चिढ़ाने जैसी हरकत करता है और पैसे निकाल फुर्र हो जाता है।

वीडियो वायरल होने के बाद चोर सलाहुद्दीन अयूबी को पाकिस्तान की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। अब रहीम यार खान पुलिस की हिरासत में उसकी मौत होने की खबर सामने आई। पाकिस्तानी पुलिस थर्ड डिग्री के इस्तेमाल के लिए बेहद कुख्यात है।

अयूबी की मौत किन कारणों से हुई है यह तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही खुलासा हो पाएगा। कुछ पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि पुलिस की पिटाई से उसके दिल ने धड़कना बंद कर दिया। पंजाब पुलिस के आईजी रिटायर्ड कैप्टन आरिफ नवाज खान ने घटना की जॉंच के आदेश देते हुए हिरासत में मौत को लेकर मातहतों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि ऐसी घटनाओं में संलिप्त लोग बख्शे नहीं जाएँगे।

https://www.youtube.com/watch?v=WjRRV9YvOvo&feature=youtu.be

इसके अलावा लाहौर में भी अमजद अली नाम के एक अधेड़ की हिरासत में मौत का मामला सामने आया है। उसे गुज्जरपुरा के एक गैर कानूनी टॉर्चर सेल में कठोर यातना दी गई थी। यह सेल वन विभाग की एक इमारत में चलाया जा रहा था और वहॉं अमजद सहित नौ लोगों को पुलिस ने कैद कर रखा था।

गंभीर हालत में अमजद को चरपाई पर लिटा अस्पताल ले जाने का वीडियो वायरल होने के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। वीडियो में अमजद बताता है कि पुलिस वालों ने उसे घर से उठाया और जमकर पीटा। उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई और उसे जिंदा बचने की उम्मीद नहीं है। वह पुलिस वालों पर अपने परिवार के साथ बदसलूकी करने और घर से पैसे एवं अन्य कीमती समान उठाने का आरोप लगाता भी नजर आता है।

‘J&K में नरसंहार’ के सबूत नहीं, पाक के केस में कोई दम नहीं: पाकिस्तान का ICJ वकील

पाकिस्तान जम्मू कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मसला बनाने के लिए हाथ-पाँव रगड़ तो रहा है लेकिन इसमें उसे कोई ख़ास सफलता मिलती दिख नहीं रही है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से लेकर अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों तक, पाकिस्तान को हर जगह निराशा ही हाथ लगी है। यहाँ तक कि इस्लामिक देशों ने भी भारत का समर्थन किया है, जिसका जिक्र ख़ुद इमरान ख़ान ने अपने देश को सम्बोधित करते समय किया था। उन्होंने अपने लोगों को भरोसा दिलाया था कि समय आने पर इस्लामिक राष्ट्र पाकिस्तान के समर्थन में आ जाएँगे।

अब अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पाकिस्तान के वकील खावर कुरैशी ने भी स्वीकार किया है कि वे बैकफुट पर हैं। खावर कुरैशी ने कहा कि ‘जम्मू कश्मीर में हो रहे नरसंहार’ के ख़िलाफ़ उनके देश के पास किसी भी प्रकार का सबूत नहीं है। पाकिस्तान के आईसीजे वकील ने कहा कि बिना सबूतों के पाकिस्तान के केस में कोई दम नहीं होगा, अगर वह इंटरनेशनल कोर्ट में जाने का फ़ैसला लेता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जम्मू कश्मीर को भारत से अलग नहीं किया जा सकता।

पाकिस्तान ने पहले भी धमकी दे रखी है कि वह कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ले जाएगा। अब उसके ही वकील के बयान के बाद इमरान ख़ान के दावों की पोल खुल गई है। पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मध्यस्थता की दरख्वास्त की थी लेकिन फ्रांस में हुए जी-7 समिट के इतर ट्रम्प से मुलाक़ात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने साफ़ कर दिया कि जम्मू कश्मीर भारत का आंतरिक मुद्दा है और इसमें किसी भी प्रकार की मध्यस्तथा की ज़रूरत नहीं है।

हाल ही में पाकिस्तान कुलभूषण जाधव को काउंसलर एक्सेस देने को मजबूर हुआ है। इस मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में उसकी किरकिरी हो चुकी है। अब जब उसका वकील ही कह रहा है कि पाकिस्तान का केस आईसीजे में लेकर जाना काफ़ी मुश्किल है, इमरान ख़ान की कश्मीर के अंतरराष्ट्रीयकरण की कोशिशों को तगड़ा धक्का लगना तय है।

भारतीय वायु सेना में शामिल हुआ 8 Apache AH-64E हेलिकॉप्टर, एक साथ कई टारगेट पर अटैक करने में सक्षम

दुनिया के सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमानों में से एक अपाचे हेलिकॉप्टर अब भारतीय वायुसेना का हिस्सा है। मंगलवार (सितंबर 3, 2019) सुबह एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ की मौजूदगी में 8 अमेरिकी निर्मित बोइंग अपाचे AH-64E हेलिकॉप्टर को वायु सेना के बेड़ें में शामिल किया गया। इन 8 अपाचे हेलीकॉप्टरों को पठानकोट एयरबेस पर तैनात किया गया है। यह अपाचे, पठानकोट एयरबेस पर पहले से तैनात वायुसेना के MI-35 चॉपर्स की जगह लेगा।

पठानकोट एयरबेस पर आयोजित एक विशेष इंडक्शन प्रोग्राम में वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा के बाद यह भारतीय वायु सेना का हिस्सा बन गया। इंडक्शन प्रोग्राम के तहत अपाचे हेलीकॉप्टर को वॉटर कैनन से सलामी दी गई और फिर फ्लाय पास्ट किया गया। इस दौरान बीएस धनोआ ने कहा, “यह दुनिया के सबसे उन्नत हेलीकॉप्टरों में से एक है। यह कई मिशनों को अंजाम देने में सक्षम है। आज अपाचे AH-64E के शामिल होने के साथ भारतीय वायु सेना ने अपने लेटेस्ट जेनरेशन के लड़ाकू हेलीकाप्टरों की सूची को अपडेट कर लिया है।” इसके बाद एक छोटी सी पूजा और मंत्रोच्चार किया गया और फिर अपाचे ने अपनी उड़ान भरी।

बता दें कि, वायुसेना ने 22 अपाचे हेलिकॉप्टरों के लिए सितंबर 2015 में अमेरिकी सरकार और बोइंग लिमिटेड के साथ अनुबंध किए थे। बोईंग द्वारा 27 जुलाई को 22 हेलिकॉप्टरों में से पहले चार को वायु सेना को सौंप दिया गया था।

अपाचे AH-64E की खास बातें:-

  • इस हेलिकॉप्टर के अगले हिस्से में नाइट विजन सेंसर लगे हैं, जिससे यह रात में भी मार कर सकता है। भारी मात्रा में हथियार ले जाने की क्षमता से भी लैस है।
  • यह AGM-114 हेलीफायर मिसाइल और हाइड्रा 70 रॉकेट पॉड्स से लैस है और इससे 1 मिनट में 128 लक्ष्यों पर निशाना साधा जा सकता है। 
  • इसकी अधिकतम रफ्तार 280 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसे रडार से पकड़ना बेहद मुश्किल है।
  • इसका सबसे खतरनाक हथियार 16 एंटी टैंक मिसाइल छोड़ने की क्षमता है।
  • हेलीकॉप्टर के नीचे लगी राइफल में एक बार में 30 एमएम की 1,200 गोलियाँ भरी जा सकती हैं। यह बेहद कम ऊँचाई पर उड़कर हवाई हमले के साथ ही जमीनी हमले करने में भी सक्षम है।
  • यह हेलीकॉप्टर थर्मल इमेजिंग सेंसर का इस्तेमाल करके छिपे हुए आतंकवादियों का भी पता लगा सकता है और आतंकियों से अपनी 30 mm गन या एंटी पर्सनल रॉकेट्स से निपट सकता है।

तुम पूजा में आओगी तो पंडाल अपवित्र हो जाएगा: TDP नेताओं की गुंडागर्दी से रो पड़ीं दलित MLA

आंध्र प्रदेश में वाईएससीआरपी की महिला विधायक डॉक्टर उंडवल्ली श्रीदेवी के साथ टीडीपी नेताओं ने दुर्व्यवहार किया। यह सब गणेश चतुर्थी के एक कार्यक्रम के दौरान हुआ। विधायक उंडवल्ली श्रीदेवी दलित समुदाय से आती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टीडीपी के नेताओं ने उनकी जाति को लेकर टिप्पणी की और दुर्व्यवहार किया। टीडीपी नेताओं ने महिला विधायक के साथ गाली-गलौज भी की। सार्वजनकि कार्यक्रम में इस तरह के बर्ताव के कारण विधायक वहीं पर रो पड़ीं।

इसी साल लोकसभा के साथ हुए विधानसभा चुनावों में जगन मोहन रेड्डी की पार्टी ने डॉक्टर श्रीदेवी को तादिकोंडा से प्रत्याशी बनाया था। उन्होंने टीडीपी के तेनाली श्रवण कुमार को मात दी थी। विधायक ने कहा कि टीडीपी नेताओं के व्यवहार को देख कर लगता है कि वे आज भी सत्ता में होने के भ्रम में जी रहे हैं। कई लोगों ने टीडीपी के नेताओं की गुंडागर्दी की आलोचना की।

ख़बर के मुताबिक़, तुल्लूरु मंडल के अनंतवरम में गणेश पूजा का आयोजन किया गया था। इस पूजा में हिस्सा लेने के लिए विधायक जैसे ही पहुँचीं, टीडीपी नेताओं ने उन्हें रोकने की कोशिश की। नेताओं ने अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि अगर दलित महिला विधायक ने पंडाल में क़दम रखा तो पूजा स्थल अशुद्ध हो जाएगा।

विधायक श्रीदेवी ने टीडीपी नेताओं पर आरोप लगाते हुए पूछा कि अगर सत्ताधारी पार्टी की एक विधायक के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है तो टीडीपी के लोग आम आदमी के साथ कैसा व्यवहार करते होंगे, यह सोचने लायक बात है। उन्होंने दोषी टीडीपी नेताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग करते हुए संघर्ष छेड़ने की बात कही।

गणपति के आगे सारा अली खान ने जोड़े हाथ, शांतिदूतों ने दिखा दी औकात

केदारनाथ फिल्म से एक्ट्रेस के रूप अपनी पहचान बनाने वाली सारा अली खान ने सोमवार को अपने इंस्टाग्राम पर गणपति के साथ एक फोटो शेयर की। इस तस्वीर के नीचे उन्होंने गणपति बप्पा मोरया लिखते हुए लोगों को गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएँ दी और उनके अच्छे स्वास्थ्य-भविष्य की कामना की।

यह पोस्ट और शुभकामना देने का तरीका बहुत ही आम था। लेकिन विशेष समुदाय के लोगों की भावना इससे आहत हो गई और वह सारा से सोशल मीडिया पर ही गाली-गलौच पर उतर आए। इन लोगों ने सारा के मजहब पर अपना दुख प्रकट किया और उन्हें जमकर ज्ञान दिया।

किसी ने उनसे बहुत उदास मन से पूछा कि क्या वो वाकई समुदाय विशेष की हैं? तो किसी ने उन्हें समझाया कि वो पढ़ी-लिखी हैं, उन्हें समझना चाहिए भगवान कुछ नहीं कर सकता। इसलिए वो अल्लाह पर यकीन करें, क्योंकि अल्लाह सब कुछ दे सकता है, बस उसपर यकीन बनाने की जरूरत हैं। एक शांतिदूत ने तो सारा से सवाल भी किया कि ये मिट्टी का बुत क्या कर सकता है? और जब इतने पर भी मन नहीं भरा तो केवल गणपति के साथ खड़े होने पर उन्हें गंदी-गंदी गाली दे डाली गई।

गणपति, सोशल मीडिया, सारा अली खान
गणपति के साथ फोटो डालने पर सारा को बंधुओं ने दिया ज्ञान

अब सोचने वाली बात है…सारा अली खान ने ऐसी क्या गलती की थी कि उन्हें मजहब विशेष के बंधुओं द्वारा ट्रोल किया जाने लगा और सबसे बड़ी हैरानी की बात कि किसी भी लिबरल गिरोह के व्यक्ति ने इस अभद्रता पर सवाल नहीं उठाए। उन्हें गंदी-गंदी गालियाँ दी गई लेकिन किसी भी लिबरल चेहरे को ये याद नहीं आया कि सारा भी एक धर्मनिरपेक्ष देश की नागरिक हैं, उनके हिस्से भी कुछ मानवाधिकार आते हैं, उनके पिता भले ही मजहब के हैं, लेकिन उनकी माँ अमृता सिंह हिंदू हैं। उनका तो अधिकार है कि वो जितना अल्लाह को मानें उतना हिंदू भगवानों के प्रति भी समर्पित रहे। फिर क्यों ओछी हरकत पर आँखे बंद कर ली गई? आखिर क्यों कमेंट से हेडलाइन बनाने वाले दौर में सारा के सोशल अकाउंट पर किसी की नजर नहीं गई?

हिंदू की संलिप्तता देखते ही हर विषय की बखिया उधेड़ देने वाले लिबरलों ने आखिर समुदाय विशेष को इतनी आजादी क्यों दी है कि वे किसी के धर्म और भगवान के बारे में अपशब्द बोले और उनके औचित्य पर सवाल उठाए।

हम मानें चाहे न मानें लेकिन बीते कुछ सालों में सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड चला है। जिसके मुताबिक अगर आप हिंदू हैं और अपने धर्म के बारे में नियमित कुछ न कुछ लिखते, पढ़ते और बोलते हैं तो आप असहिष्णुता और कट्टरता का चेहरा हैं। वहीं अगर आप विशेष मजहब से हैं और सोशल मीडिया पर गंद भी परोस रहे हैं तो आप देश का वो अल्पसंख्यक चेहरा हैं, जो बेचारा खुद के अस्तित्व को बचाए रखने की लड़ाई लड़ रहा है। उसे अधिकार है कि वो खुद के मजहब को बचाने के लिए किसी के भी धर्म-त्योहारों को गाली दे।

एक देश के दो समुदायों के लिए ये विशेष परिभाषा गढ़ने वाला कोई और नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर पसरा लिबरल मीडिया गिरोह है। जो एक समय तक लुप्त था लेकिन अब वह खुलकर एक पटल पर एक साथ है। इस मीडिया गिरोह की खास बात है कि अगर किसी घटना में हिंदू शामिल है तो वो घटना के आखिरी तह तक तफ्तीश करेंगे और किसी भी रूप में हिंदू को खतरे का चेहरा बता देंगे। लेकिन वहीं अगर एक निश्चित समुदाय का व्यक्ति अपने कुकर्मों पर लताड़ा जाए तो इनकी इंसानियत और मानवता जाग पड़ती है। ये न केवल उसके लिए अपनी संवेदनाएँ प्रकट करते हैं, बल्कि उसकी मानसिकता को अपने पोर्टल और अपनी खबर का हिस्सा बनाने से भी बचते हैं।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। जब भी समुदाय विशेष के सेलिब्रिटी ऐसा कुछ करते हैं जिसे सेक्युलर कहा जा सके तो उन्हें इस तरह सोशल मीडिया में जलील किया जाता है। न केवल गंदी-गंदी गालियॉं दी जाती हैं, बल्कि रेप तक की भी धमकी देने से समुदाय विशेष के लोग गुरेज नहीं करते।

कॉन्ग्रेस में लौट सकती हैं AAP विधायक अलका लांबा, सोनिया गाँधी से की मुलाकात

दिल्ली के चॉंदनी चौक से आम आदमी पार्टी (आप) की विधायक अलका लांबा कॉन्ग्रेस ज्वाइन कर सकती हैं। उन्होंने मंगलवार को कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी से मुलाकात की। आप में शामिल होने से पहले अलका कॉन्ग्रेस में ही थीं।

दिल्ली में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में अलका का कॉन्ग्रेस में जाना दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के लिए बड़ा झटका होगा। हालाँकि काफी समय से दोनों के रिश्ते बेहद तल्ख़ हैं।

बता दें कि, लांबा ने बीते दिनों ट्वीट कर आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देने की बात कही थी। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था, “आम आदमी पार्टी में सम्मान से समझौता करके रहने से बेहतर है कि मैं पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दूँ और अगला चुनाव चाँदनी चौक विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लडूँ।” हाल में उन्होंने केजरीवाल पर बदले की भावना से काम करने का भी आरोप लगाया था।

गौरतलब है कि, आम आदमी पार्टी में शामिल होने से पहले अलका लाम्बा कॉन्ग्रेस पार्टी की सदस्य रह चुकी हैं, वह कॉन्ग्रेस पार्टी की छात्र इकाई नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) की नेता के तौर पर दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र इकाई के अध्यक्ष पद का चुनाव जीत चुकी हैं।

छत्तीसगढ़ के पूर्व CM अजित जोगी के बेटे अमित जोगी गिरफ़्तार: जन्म को लेकर गलत जानकारी देने का मामला

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार किया। बिलासपुर स्थित घर से उन्हें हिरासत में लिया गया। उन पर चुनाव के दौरान अपने जन्म स्थान को लेकर गलत जानकारी देने का आरोप है।

बिलासपुर के एसपी (ग्रामीण) संजय कुमार ध्रुव ने बताया कि जोगी को अदालत में पेश किया जाएगा। उन पर 2013 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान अपने शपथ पत्र में ग़लत जानकारी देने का आरोप है।

अजित जोगी की जनता कॉन्ग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रवक्ता अहमद रिजवी ने कहा कि अमित जोगी की गिरफ़्तारी दंतेवाड़ा उपचुनाव में दबाव बनाने के लिए की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार बदले की राजनीति कर रही है। सोमवार को समीरा पैकरा समेत मरवाही के आदिवासियों ने अमित जोगी की गिरफ़्तारी की माँग को लेकर बिलासपुर एसपी ऑफ़िस का घेराव किया था।

दूसरी तरफ, अमित जोगी की गिरफ़्तारी मामले पर क़ॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम का कहना है कि कोई अगर ग़लत काम करेगा तो उसकी गिरफ़्तारी होगी ही। क़ानून सबसे लिए एक समान है। अगर उन्होंने (अमित जोगी) ग़लती की है तो उन्हें सार्वजनिक रूप से उसके लिए माफ़ी माँग लेनी चाहिए। मरकाम ने बताया कि अमित जोगी की गिरफ़्तारी भाजपा नेता समीरा पैकरा की शिक़ायत पर हुई है।

ख़बर के अनुसार, 3 फरवरी को मरवाही के पूर्व विधायक अमित जोगी के ख़िलाफ़ गौरेला थाने में धारा-420 के तहत मामला दर्ज किया गया था। ये मामला 2013 में मरवाही विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की प्रत्याशी रहीं समीरा पैकरा ने दर्ज कराया था। दर्ज की गई शिक़ायत के अनुसार जोगी ने शपथ-पत्र में अपना जन्म स्थान ग़लत बताया था। जिस पर गौरेला थाने में अमित जोगी के विरुद्ध धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया। चुनाव हारने के बाद समीरा पैकरा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके अमित जोगी की जाति एवं जन्मतिथि को चुनौती दी थी।

इस मामले पर हाईकोर्ट ने चार दिन पहले ही फ़ैसला सुनाया था, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि छत्तीसगढ़ विधानसभा का सत्र समाप्त हो चुका है, इसलिए अब इस याचिका को ख़ारिज किया जाता है। इसके बाद समीरा गौरेला थाने पहुँची और उन्होंने इस मामले में शिक़ायत दर्ज कराई। 

उन्होंने अपनी शिक़ायत में कहा है कि अमित जोगी ने शपथ-पत्र में अपना जन्म वर्ष 1978 में गाँव सारबहरा गौरेला में होना बताया है, जबकि उनका जन्म 1977 में अमेरिका के डगलस में हुआ था।

हाल ही में, अजित जोगी के आदिवासी के दर्जे के दावे को भी सरकार ने ख़ारिज कर दिया था। जोगी की जाति के मामले की जाँच कर रही हाई-पावर कमिटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। कमिटी ने उन्हें आदिवासी मानने से इनकार कर दिया है।

दरअसल, फ़रवरी 2018 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश पर डीडी सिंह की अध्यक्षता में बनी समिति ने 21 अगस्त 2019 को अपनी जाँच रिपोर्ट सरकार के समक्ष रखी। इस रिपोर्ट में कहा गया कि अजित जोगी कोई भी ऐसा प्रमाण नहीं दे सके जिससे वह यह साबित कर सकें कि वह आदिवासी जाति से ताल्लुक रखते हैं।

लिहाज़ा बिलासपुर के कलेक्टर को छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी नियम 2013 के तहत उन पर एक्शन लेने के लिए कहा गया है। अजित जोगी मारवाही से विधायक हैं और अगर इस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होती है, तो उनकी विधायकी जा सकती है। यह विधानसभा सीट आदिवासी प्रत्याशी के लिए आरक्षित है।

उन्नाव रेप पीड़िता के वकील को हाईकोर्ट का नोटिस, पूछा- क्यों ना चलाएँ अवमानना का मामला

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार (सितंबर 2, 2019) को उन्नाव रेप पीड़िता के वकील को नोटिस जारी किया। इसमें वकील से पूछा गया है कि सुनवाई के दौरान बार-बार हस्तक्षेप करके न्यायिक कार्यवाही में बाधा उत्पन्न करने के लिए उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए।

दरअसल, कोर्ट यूपी के कांस्टेबल आमिर खान की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो कि न्यायिक हिरासत में है। उसके खिलाफ उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में हत्या और आपराधिक साजिश के आरोप हैं। उन्होंने इसी संदर्भ में याचिका दायर करते हुए आरोपों को रद्द करने की माँग की है। वकील डीके मिश्रा पर आरोप है कि वो याचिकाकर्ता आमिर की याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत की कार्यवाही में बाधा उत्पन्न करने की कोशिश कर रहे थे, ताकि आमिर पर पीड़िता के पिता की कथित हत्या के लिए आरोप तय किए जा सके।

हालाँकि, वकील मिश्रा ने दावा किया कि उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया जिसके कारण उनके खिलाफ बताओ नोटिस जारी किया जा सके। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में उनकी एक शिकायत पेंडिंग है और इसी आधार पर वे जस्टिस सुरेश कुमार कैत से गुहार लगा रहे थे। साथ ही मिश्रा ने कथित तौर पर जज पर असभ्य भाषा बोलने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जज ने भरी अदालत में  उनके लिए असभ्य भाषा का इस्तेमाल करते हुए अवमानना का आदेश पारित कर दिया।

बता दें कि, आमिर खान द्वारा दायर किए गए इस याचिका में कहा गया है कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान ट्रायल जज ने स्वीकार किया कि पीड़िता के पिता के साथ मारपीट या पिटाई की साजिश में याचिकाकर्ता की कोई भूमिका नहीं है। इसलिए हत्या के लिए याचिकाकर्ता (खान) सहित पुलिस अधिकारियों को उत्तरदायी बनाना गैरकानूनी है। फिलहाल कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए 5 सितंबर का वक्त तय किया है।

वहीं, जाँच एजेंसी सीबीआई ने सोमवार को पीड़िता का बयान भी दर्ज किया है। फिलहाल, पीड़िता की हालत में सुधार बताया जा रहा है। उसे आईसीयू से निकाल कर वार्ड में शिफ्ट किया गया है।

त्रिमूर्ति की लड़ाई से बेबस कॉन्ग्रेस, क्या फिर पार्टी का बॅंटाधार करेंगे दिग्विजय सिंह?

अटकलें तो बीते साल के अंत में मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार बनने के बाद ही लगने शुरू हो गए थे। एक तो खुद के पास बहुमत का जादुई आँकड़ा न होना और उस पर से धड़ों में बॅंटी कॉन्ग्रेस। एक तरफ मौजूदा मुख्यमंत्री कमलनाथ, दूसरी ओर पर्दे के पीछे से कथित तौर पर सरकार चला रहे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और तीसरे पार्टी महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के अपने-अपने हित।

प्रदेश अध्यक्ष पद पर सिंधिया के समर्थकों की दावेदारी के बाद जिस तरह कमलनाथ के वन मंत्री उमंग सिंघार ने दिग्विजय पर आरोप लगाते हुए पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी को पत्र लिखा है उसने इस खेल को सार्वजनिक कर दिया है। इससे कई सवाल उठने लगे हैं। पहला, कमलनाथ सरकार कब तक बची रहेगी? दूसरा, सिंधिया प्रदेश अध्यक्ष बन पाएँगे? तीसरा, जो सबसे महत्वपूर्ण भी है कि क्या दिग्विजय फिर से प्रदेश में पार्टी की कब्र खोद कर ही मानेंगे?

दिग्विजय सिंह लगातार 10 साल (1993-2003) तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे। लेकिन, अपनी नीतियों से उन्होंने पार्टी को ऐसा नुकसान पहुॅंचाया कि कभी गढ़ रहे एमपी की सत्ता में लौटते-लौटते कॉन्ग्रेस को 15 साल लग गए और जब पहुॅंची तो भी बैसाखियों के सहारे। 2003 के विधानसभा चुनावों में उमा भारती ने दिग्विजय को ‘मिस्टर बॅंटाधार’ का नाम दिया था, जो जनता की जुबान पर चढ़ गया। चुनाव हारने के बाद दिग्विजय केंद्र की राजनीति में आ गए और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी के शुरुआती राजनीतिक गुरुओं में माने जाते हैं। राहुल के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस ने जो उपलब्धियॉं हासिल की है उस पर गौर करें तो साफ हो जाता है कि विवादित बयानों के मसीहा दिग्विजय सिंह अपनी ही पार्टी का बॅंटाधार करने में किस कदर उस्ताद हैं। लिहाजा, सिंघार के खत से पार्टी में हलचल तो मचनी ही थी।

सिंघार का दावा है कि दिग्विजय सिंह कमलनाथ सरकार को पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे हैं। सोनिया गाँधी को लिखे खत में उन्होंने कहा है कि दिग्विजय खुद को प्रदेश में ‘पावर सेंटर’ के रूप में स्थापित कर कमलनाथ सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। वे मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके मंत्रिमंडल सहयोगियों को पत्र लिख उसे सोशल मीडिया में वायरल कर रहे हैं।

आगे उन्होंने दिग्विजय सिंह पर हमला करते हुए लिखा है कि व्यापमं घोटाला, ई-टेंडरिंग घोटाला, वृक्षारोपण घोटाला को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखा। लेकिन सिंहस्थ घोटाले को लेकर वे कुछ नहीं कहते, क्योंकि इससे संबंधित विभाग उनके पुत्र जयवर्धन सिंह के पास है।

प्रदेश के एक और मंत्री सज्जन सिंह वर्मा भी सिंघार के समर्थन में आगे आए हैं। दबी जुबान राज्य के कई मंत्री दिग्विजय पर लगे आरोपों को सही बता रहे। पर कॉन्ग्रेस की परेशानी यह है कि राज्य के 5 मंत्री दिग्विजय सिंह के भी साथ हैं।

यह सब ऐसे वक्त में हो रहा है जब ज्योतिरादित्य पहले से ही प्रदेश अध्यक्ष बनने को लेकर पार्टी को अल्टीमेटम दे चुके हैं। फिलहाल इस पर फैसला पार्टी ने हरियाणा और झारखंड के विधानसभा चुनावों का हवाला देकर टाल दिया है।

संकट को लेकर फौरन हरकत में नहीं आने की यह आदत कहीं एमपी में कॉन्ग्रेस सरकार को ही न डूबो दे। वैसे भी, मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता गोपाल भार्गव जुलाई में ही कह चुके हैं कि यदि उनके नंबर 1 या नंबर 2 का आदेश आया तो कमलनाथ सरकार 24 घंटे भी नहीं चलेगी।