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सोशल मीडिया के साथ सड़क पर उतरकर संघर्ष करें- सोनिया का कार्यकर्ताओं को आदेश

कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने पार्टी के महासचिवों, राज्यों के प्रभारियों और प्रदेश अध्यक्षों के साथ बैठक की। कॉन्ग्रेस मुख्यालय में हुई इस बैठक पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, गुलाम नबी आजाद, केसी वेनुगोपाल और एके एंटनी समेत पार्टी के तमाम बड़े नेता शामिल हुए। इस बैठक को आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों और पार्टी में जरूरी निर्देशों के लिए बुलाया गया था, हालाँकि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष इस पार्टी से नदारद रहे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मौके पर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने के साथ ही सड़क पर उतरकर संघर्ष करें और जनता से सीधा संपर्क स्थापित करें।

इस बैठक में सोनिया ने पार्टी के महासचिवों-प्रभारियों, प्रदेश अध्यक्षों, मुख्यमंत्रियों और विधायक दल के नेताओं के समक्ष देश की अर्थव्यवस्था की मौजूदा हालात पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने केंद्र सरकार पर संस्थाओं को कमजोर करने के भी आरोप लगाए।

सोनिया गाँधी ने कहा कि विरोध करने वाले लोगों की आवाज को दबाया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने कहा कि हम ऐसे वक्त मिल रहे हैं, जब प्रतिशोध की राजनीति अपने चरम पर है और यह वो समय है जब सत्ता के खिलाफ आवाज उठाने वालों को धमकी दी जा रही है।

‘हमें सड़कों पर उतरना होगा’

सोनिया गाँधी ने कहा- “लोकतंत्र को इतना खतरा कभी नहीं रहा जितना आज है। मैंने कुछ हफ्ते पहले भी कहा था कि सत्ता का बहुत ही खतरनाक ढंग से दुरुपयोग किया जा रहा है। देश उन ताकतों का मुकाबले करने को तैयार है जो महात्मा गाँधी, सरदार पटेल और बीआर अम्बेदकर के संदेशों को गलत तरीके से पेश कर रहा है। हमें इनका मुकाबला करने के लिए सड़कों पर उतरना होगा, गाँव-कस्बों और शहरों में लोगों तक पहुँचना होगा।”

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सिर्फ सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना या इस पर आक्रामक रहने से कुछ नहीं होने वाला है। उसकी अपेक्षा सीधे जनता तक पहुँचना ज्यादा महत्वपूर्ण है। हाल ही में कई कॉन्ग्रेस नेताओं के पार्टी छोड़ने के संदर्भ में सोनिया ने कहा- “लोग समय आने पर अपना रंग दिखा ही देते हैं, यह अवसरवादी चरित्र को दर्शाता है। हम जल्द ही तीन राज्यों में चुनावों का सामना करने जा रहे हैं। हालात चुनौतीपूर्ण हैं और अगर हम सिर्फ पार्टी हित को ऊपर रखें तो फिर से अपनी खोई जमीन वापस पा सकते हैं।”

कॉन्ग्रेस जनता के बीच घट रही अपनी लोकप्रियता के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में, आम जनता की नजरों में कॉन्ग्रेस पार्टी की गिरती हुई छवि को सुधारने के लिए पार्टी ने अब अपनी कार्यप्रणाली और विचारधारा के प्रचार के लिए ‘प्रेरक’ रखने का निर्णय लिया है। ये प्रेरक कॉन्ग्रेस के खिलाफ चल रही नकारात्मक ख़बरों के खिलाफ जमीनी स्तर पर पार्टी हित में काम करेंगे।

ये प्रेरक कार्यकर्ताओं को पार्टी की विचारधारा और इतिहास के बारे में ‘प्रेरित और सूचित’ करेंगे, इसके अलावा उन्हें नियमित आधार पर जनता के साथ जुड़ने के लिए तैयार किया जाएगा।

संकट में है कॉन्ग्रेस

कॉन्ग्रेस इस समय बहुत बड़े संकट की स्थिति से गुजर रही है। हाल ही में अनुच्छेद 370 को लेकर जहाँ राष्ट्रीय स्तर के नेताओं पर आपसी मतभेद उभरकर सामने आए, तो वहीं राज्यों में भी आपस में तालमेल नहीं बैठ पा रहा है। एक ओर मध्य प्रदेश में सीएम कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच टकराव जारी है, तो दूसरी ओर राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मनमुटाव भी साफ दिखाई दे रहा है। इस सबके बीच कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़कर बीजेपी के साथ जा रहे हैं नेताओं ने पार्टी को अलग से सरदर्द दे रखा है।

जैश आतंकी उबेद, जहाँगीर, सबील अहमद हथियारों-विस्फोटकों के साथ कठुआ में गिरफ्तार

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आज (सितंबर 12, 2019) पंजाब से कश्मीर घाटी की ओर AK-47 और विस्फोटक लेकर आते 3 आतंकियों को कठुआ में गिरफ्तार किया। इलाके के एसएसपी श्रीधर पाटिल ने इस गिरफ्तारी की सूचना देते हुए बताया कि ये तीनों आतंकी जैश-ए मोहम्मद के हैं। इनके पास से 4 AK-56, 2 AK-47, 6 मैग्जीन और 180 लाइव राउंड के साथ 11,000 रुपए नकद बरामद किए गए हैं। जिसके बाद अब पंजाब बॉर्डर पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जम्मू के आईजी मुकेश सिंह ने बताया है कि ये गिरफ्तार हुए संदिग्ध आतंकी कश्मीर के रहने वाले हैं। इनकी पहचान पुलवामा निवासी उबेद-उल-इस्लाम, बड़गाम निवासी जहाँगीर अहमद पारे और पुलवामा निवासी सबील अहमद बाबा के रूप में हुई हैं।

जानकारी के अनुसार इन आतंकियों की सूचना पुलिस को सुरक्षाबल द्वारा मिली थी कि हथियारों से भरा ट्रक लेकर ये अमृतसर के रास्ते आ रहे हैं।

इसके बाद ही कठुआ में नाकेबंदी के दौरान ट्रक में रखे सेब के कार्टन से ये हथियार और विस्फोटक चीजें बरामद हुईं और ट्रक में बैठे इन तीनों संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया गया। अब फिलहाल इनसे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ये हथियार इन्हें कहाँ पर पहुँचाने थे और कहाँ से लाए जा रहे थे।

मुहर्रम में तलवारबाजी करते हुए मोहम्मद सयूम ने गलती से काट ली अपनी ही गर्दन, मौत

मुहर्रम के जुलूस के दौरान तलवारबाजी में एक व्यक्ति की मौत की घटना सामने आई है। यह दर्दनाक हादसा बिहार के नालंदा जिले में बुधवार (सितंबर 11, 2019) को मुहर्रम के जुलूस के दौरान हुआ, जब एक व्यक्ति ने तलवारबाजी करते हुए गलती से खुद की गर्दन काट ली और उसकी मौत हो गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बिहार शरीफ में लहेरी थाना क्षेत्र इलाके के सोगरा कॉलेज के पास मोहर्रम के जुलूस में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक जुलूस में शामिल एक 60 वर्षीय मोहम्मद सयूम की तलवारबाजी के दौरान उनकी गर्दन खुद की तलवार से कटने के कारण हो गई। आनन-फानन में उसे जुलूस में शामिल लोगों के द्वारा प्रशासन की वाहन के सहारे सदर अस्पताल लाया गया लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

तलवार से गर्दन कटने के कारण 60 वर्षीय वृद्ध मोहम्मद सयूम का खून काफी बह चुका था, जिसके कारण उसकी रास्ते में ही मौत हो गई थी। वहीं इस घटना के संबंध में मृतक सैयद के पुत्र मोहम्मद फिरोज ने बताया कि हर साल की तरह थवई मोहल्ले से मोहर्रम के दिन जुलूस निकलता था और मोहम्मद सयूम भी इसी जुलूस में शामिल थे। इसी जुलूस में मोहम्मद सयूम का पुत्र मोहम्मद फिरोज भी शामिल था, जिसने पूरे वाकये को खुद देखा।

सन्मार्ग न्यूज़ के अनुसार, पूर्व में मोहर्रम और गणेश पूजा को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की गई थी, जिसमें ताजिया जुलूस के दौरान सभी तरह से हथियारों पर पूर्ण रूप से रोक लगाई गई थी। इसके बाबजूद भी तलवारबाजी की गई जिस दौरान ये हादसा हुआ।

इस घटना की सूचना मिलते ही एसपी निलेश कुमार, एसडीएम जनार्दन प्रसाद अग्रवाल, सीओ अरुण कुमार सिंह, थानाध्यक्ष दीपक कुमार ने सदर अस्पताल पहुँचकर मामले की जाँच की। फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बिहार शरीफ और अस्पताल भेज दिया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

74 साल का हूँ, 9 बीमारियाँ हैं… मुझ पर रहम करें: कोर्ट से चिदंबरम ने लगाई गुहार

पूर्व वित्तमंत्री, वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और वकील होने के साथ-साथ भ्रष्टाचार मामलों में आरोपित पी चिदंबरम ने 12 सितंबर को दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी दो याचिकाएँ दाखिल कीं। उनकी एक याचिका जमानत से संबंधी थी जबकि दूसरी याचिका न्यायिक हिरासत के फैसले को खारिज करने के संबंध में दाखिल की गई।

मजेदार बात यह रही कि इनमें से एक याचिका में लगभग-लगभग गिड़गिड़ाने वाली भाषा-शैली का प्रयोग किया गया है। संसद में बैठ कर कल तक जो देश के आम नागरिकों पर लागू होने वाले कानून बनाते थे, आज अपने ही बनाए कानून से बचने के लिए उम्र और बीमारी का बहाना ढूंढ रहे हैं।

वो 9 ‘भयंकर’ बीमारियाँ, जो चिदंबरम को हैं। इनमें से कुछ तो तब से हैं, जब वो मंत्री भी थे। मतलब सही मायनों में चिदंबरम ने खून-पसीने से इस देश की सेवा की है!

वकील रहे पी चिदंबरम का यह मामला भारतीय कानून के इतिहास में संभवत चुनिंदा मामलों में से एक होगा, जहाँ खुद आरोपित ही न्यायिक हिरासत के बजाय संस्थागत हिरासत (CBI/ED) में जाना चाहते हैं। जानकारों की मानें तो तिहाड़ जेल में चिदंबरम को वो सुख-सुविधाएँ नहीं मिल पा रही हैं, जो 15 दिनों तक CBI कस्टडी में मिल रही थी। जानकारी के लिए बता दें कि CBI कस्टडी में उन्हें VIP सेल में रखा गया था।

आपको बता दें कि INX मीडिया घोटाले में कोर्ट के आदेश के बाद पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम के तिहाड़ जाने के बाद कपिल सिब्बल ने ट्विटर के जरिए सवाल किया था कि अब आखिर हमारे मौलिक अधिकारों की रक्षा कौन करेगा?

5 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की कस्टडी में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था और उसी रात ही उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया था।

भू-माफिया आजम खान पर भैंस के बाद अब बकरी चोरी का हुआ केस, अब तक कुल 82 मामलों में FIR दर्ज

रामपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद भू-माफिया आजम खान की परेशानी बढ़ती ही जा रही है अब उनके खिलाफ रामपुर में 82वां FIR दर्ज किया गया है। इस बार जिस मामले में FIR दर्ज हुआ है वह आपको हैरत में डाल सकता है। आजम खान पर भैंस चोरी के आरोप तो पहले से ही थे लेकिन इस बार बकरी चोरी के मामले में केस दर्ज हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आज़म खान के साथ पूर्व सीओ आलेहसन, शिया बोर्ड अध्यक्ष वसीम रिजवी, ज़फर फारूकी सहित आठ लोगों पर FIR दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है इस केस में 20 से 25 अज्ञात लोग भी आरोपी बनाए गए हैं।

बता दें कि नसीमा खातून की शिकायत पर शहर कोतवाली में FIR दर्ज की गई है। इस FIR में उन्होंने 15 अक्टूबर 2016 को घर में घुसकर मारपीट, तोड़फोड़ करने, जान से मारने की धमकी देने, सोने के कीमती समान लूटने, गाली गलौच करने, चरस रखने के झूठे मुक़दमे में फँसाने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं।

इतना ही नहीं मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नसीमा खातून ने 4 बकरियाँ, भैंसे, गाय और बछड़ा भी ले जाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने धारा 452, 427, 448, 389, 395, 504, 506, 323 और 120B के तहत मुक़दमा दर्ज कर लिया है।

गौरतलब है कि इससे पहले आजम खान के हमसफर रिसॉर्ट में एक नलकूप और पानी की टंकी और जौहर यूनिवर्सिटी में तीन नलकूप लगने के मामले में भी FIR दर्ज हुई है, साथ ही उन पर बिजली चोरी के भी आरोप हैं, जिसके तहत कार्रवाई करते हुए उनके हमसफ़र रिसॉर्ट की बिजली काट दी गई थी।

कश्मीर हमारा था, है, और रहेगा, जहाँ भारत है वहाँ हम; NRC भी सही: जमीयत उलेमा-ए-हिंद

पाकिस्तान के दावों को खारिज करते हुए कि कश्मीर मामले पर भारत के अल्पसंख्यक भारत के खिलाफ़ हैं, जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने गुरुवार (सितंबर 12,2019) को एक प्रस्ताव पारित किया है। जमीयत के महासचिव महमूद मदनी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि महासभा की बैठक में ये प्रस्ताव पारित हुआ है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, जम्मू-कश्मीर के लोग भी भारतीय ही हैं। वे हमसे किसी प्रकार अलग नहीं हैं।

महमूद मदनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, “पाकिस्तान वैश्विक स्तर पर ये बात उछालने की कोशिश कर रहा है कि भारतीय मुस्लिम भारत के ख़िलाफ़ हैं। हम पाकिस्तान की इस कोशिश का विरोध करते हैं। भारत के मुस्लिम अपने देश के साथ हैं।“

इसके बाद उन्होंने बताया, “हमने आज प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें बताया गया है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। हम अपने देश की सुरक्षा और एकता के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। भारत हमारा देश है और हम इसके साथ खड़े रहेंगे।”

मदनी ने इस दौरान ये भी कहा कि देश में रहते हुए बहुत से मुद्दों पर हमारी असहमति हो सकती हैं, लेकिन जब देश की बात आती है तो हम सब एक हैं।

उनके मुताबिक, “कुछ दुश्मनी ताकतें ये दिखाने की कोशिश कर रही हैं कि देश के मुस्लिम और बाकी लोग अलग-अलग रास्तों में जा रहे हैं। हम ऐसे मनसूबों को खारिज करते हैं।”

इसके अलावा जब जमीयत उलेमा-ए-हिंद की बैठक में उनसे एनआरसी को पूरे देश में लागू करने पर बात पूछी गई को उन्होंने बोला,”मेरी इच्छा होती है मैं इसे सारे मुल्क में करने की माँग करूँ, जिससे पता चल जाएगा कि घुसपैठिए कितने हैं। जो असली हैं, उन पर भी दाग लगाया जाता है, तो पता चल जाएगा। मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है।”

POK के लिए सेना तैयार है, सरकार जब आदेश करेगी हम अपना काम करेंगे – जनरल रावत

मंगलवार को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के PoK पर दिए गए बयान के बाद सेना प्रमुख बिपिन रावत ने भी PoK (पाक अधिकृत कश्मीर) मुद्दे पर भारतीय सेना की स्थिति स्पष्ट की है। मंगलवार (सितम्बर 10, 2019) को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बयान दिया था कि मोदी सरकार का अगला एजेंडा पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) को भारत में मिलाना है। इस बयान पर आज सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा है कि भारतीय सेना हमेशा तैयार है।

भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को लेकर सरकार जो आदेश करेगी, सेना उस आदेश के साथ जाएगी। जनरल बिपिन रावत ने कहा कि भारतीय सेना हमेशा तैयार है। सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत से पत्रकारों ने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के उस बयान के बारे में सवाल पूछा था जिसमें जितेंद्र सिंह ने कहा था कि सरकार का अगला एजेंडा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाना है।

सेना प्रमुख बिपिन रावत ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा कि इस तरह के मामलों में सरकार कदम उठाती है। भारत सरकार के आदेश पर संस्थाएँ काम करती हैं। उन्होंने कहा कि सेना इसके लिए हमेशा तैयार है।

जितेंद्र सिंह ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के मुद्दे पर हाल ही में बयान दिया था- “यह केवल मेरी या मेरी पार्टी की प्रतिबद्धता नहीं है बल्कि यह 1994 में पीवी नरसिंह राव के नेतृत्व वाली तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा सर्वसम्मति से पारित संकल्प है। यह एक स्वीकार्य रुख है।”

माना जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को बैकफुट पर डालने के बाद केंद्र सरकार ने PoK के मुद्दे पर भी पाकिस्तान पर दबाव बनाने के प्रयास तेज कर दिए हैं।

60 की उम्र पार करते ही किसानों-दुकानदारों को हर माह मिलेंगे ₹3000: प्रधानमंत्री मानधन योजना

झारखंड की जमीन से प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार (सितंबर 12, 2019) को ‘प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना’ की शुरुआत करते हुए किसानों को नई सौगात दी। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत अब हर किसान को 60 की उम्र पार करते ही हर महीने 3000 रुपए दिए जाएँगे।

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य में प्रधानमंत्री लघु व्यापारिक मानधन योजना और स्वरोजगार जैसी पेंशन योजनाओं की भी शुरूआत की। प्रधानमंत्री ने दुकानदारों, खुदरा विक्रेताओं और खुद का कारोबार करने वालों के लिए पेंशन योजना की भी घोषणा की। इस पेंशन योजना के तहत खुदरा विक्रेताओं और दुकानदारों को 60 साल की उम्र होने के बाद न्यूनतम 3,000 रुपए मासिक पेंशन दी जाएगी।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने झारखंड विधानसभा के नए भवन का और सचिवालय के नए भवन का भी लोकार्पण किया। साथ ही साहिबगंज में मल्टी मॉडल टर्मिनल का भी शिलान्यास हुआ।

साहिबगंज मल्टी मॉडल टर्मिनल के शिलान्यास के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि ये सिर्फ़ एक प्रोजेक्ट नहीं बल्कि ये इस पूरे क्षेत्र को परिवहन का नया विकल्प दे रहा है। पीएम मोदी ने बताया, “ये जल मार्ग झारखण्ड को पूरे देश से ही नहीं, बल्कि विदेश से भी जोड़ेगा। इस टर्मिनल से यहाँ के आदिवासी भाई-बहनों को, यहाँ के किसानों को, अपने उत्पाद अब पूरे देश के बाज़ारों में और आसानी से पहुँचा पाने में सुविधा होगी। इसी तरह, जल मार्ग के कारण, उत्तर भारत से झारखंड समेत पूर्वोत्तर के राज्यों तक अनाज पहुँचाना और भी सरल हो जाएगा”

इसके अलावा राज्य के मुख्यमंत्री रघुबर दास ने भी कहा कि इस टर्मिनल के कारण झारखंड के लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री दास ने इस बात की भी जानकारी दी कि प्रधानमंत्री ऑनलाइन 462 एकलब्य मॉडल स्कूलों की नींव रखने वाले हैं, जिनमें से 69 की स्थापना भारत में होगी। इन स्कूलों के बारे में खुद प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार, हर आदिवासी बच्चे पर साल में एक लाख रुपए से अधिक खर्च करेगी।

राज्य के मुख्यमंत्री रघुबर दास ने इस बात को साझा किया कि किसानों की सामाजिक सुरक्षा के लिए ‘प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना’ के तहत मासिक पेंशन दिया जाएगा, जिसके लिए 18 से 40 उम्र तक के किसान खुद को इस स्कीम में पंजीकृत कर सकते हैं। इसके बाद 60 की उम्र पार करते ही उन्हें 3000 रुपए हर महीने मिलने लगेंगे। जानकारी के मुताबिक अभी तक 1, 16, 183 किसानों ने खुद को इस योजना के तहत पंजीकृत करवा लिया हैं।

दुनिया हमारी नहीं भारत की बात मानती है, सरकार के इशारे पर लड़ रहे आतंकी: पाकिस्तान के गृहमंत्री ने कबूला

कश्मीर मुद्दे पर हर मोर्चे पर नाकाम रही पाकिस्तान सरकार अब अपने ही घर में घिरती नजर आ रही है। एक ओर जहाँ पाकिस्तानी नागरिक विदेशी सड़क और दूतावासों पर हिंसक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं वहीं, दूसरी ओर खुद पाकिस्तान के गृह मंत्री (आंतरिक) ब्रिगेडियर एजाज अहमद शाह ने स्वीकार कर लिया है कि पूरा विश्व पाकिस्तान नहीं बल्कि भारत के साथ खड़ा है। यही नहीं, उन्होंने पाकिस्तान के आतंकवादियों पर भी बड़ा खुलासा किया है।

इमरान खान सरकार आतंकियों को मुख्यधारा में शामिल कराएगी

इस समय पकिस्तान की हालत ये है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को हर बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर नाकामी का सामना करना पड़ा है। इसी समय पाकिस्तान के गृह मंत्री एजाज अहमद शाह ने कबूल किया है कि इमरान खान की सरकार अब जैश और लश्कर जैसे आतंकी संगठनों के दहशतगर्दों को मुख्यधारा में शामिल कराएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एजाज अहमद शाह ने एक डिबेट शो में कहा है कि ये आतंकी उनके कहने पर अफगानिस्तान में लड़ रहे थे और ये उनकी जिम्मेदारी है कि वो उन आतंकियों को नौकरी और पैसे दें। टीवी शो में चर्चा के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि इमरान खान की वजह से पूरे पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे पर शर्मिंदा होना पड़ा है। एजाज अहमद शाह ने प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके मंत्रियों को इसके लिए कसूरवार ठहराया है। उन्होंने साथ ही कहा कि पाकिस्तान, कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समर्थन पाने में नाकाम रहा है।

सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे इस टीवी इंटरव्यू में इमरान खान सरकार के मंत्री मोस्ट वांटेड आतंकी हाफिज सईद को ‘साहेब’ कहकर बुला रहे हैं साथ ही कह रहे हैं कि हाफिज सईद ने पाकिस्तान के खिलाफ कोई काम नहीं किया है। उन्होंने कहा कि हाफिज सईद को लड़ाई लड़ने के लिए खड़ा किया गया था, लेकिन अब उन्हें काबू में करने की जरूरत है।

‘दुनिया को ये लगने लगा है कि हम एक गंभीर राष्ट्र नहीं हैं’

एक पाकिस्तानी न्यूज चैनल पर बात करते हुए पाकिस्तान के गृह मंत्री ब्रिगेडियर एजाज शाह ने कहा- “लोग हम पर भरोसा नहीं करते, अंतरराष्ट्रीय समुदाय हम पर विश्वास नहीं करते हैं। हम कहते हैं कि वे (भारत) कर्फ्यू लगा रहे हैं और जम्मू-कश्मीर के लोगों को दवाएँ नहीं दे रहे हैं। लोग हम पर विश्वास नहीं करते हैं, बल्कि वे उन्हें मानते हैं। पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पार्टी ने देश को बर्बाद कर दिया है। उसने इस देश के नाम को खराब किया है। पूरी दुनिया में लोगों को ये लगने लगा है कि हम एक गंभीर राष्ट्र नहीं हैं।”

चीन के अलावा नहीं आया कोई भी देश पाकिस्तान के साथ

कश्मीर मामले पर भारत सरकार द्वारा लिए गए फैसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों ने उसका आंतरिक मामला बताया और इसका समर्थन भी किया। दूसरी तरफ, पाकिस्तान ने इस मुद्दे के अंतरराष्ट्रीयकरण करने की कोशिशों में खुद को अलग-थलग पाया, चीन के अलावा कोई भी देश पाकिस्तान के समर्थन में आगे नहीं आया।

ध्वस्त हुआ FactChecker.in का हिन्दूफ़ोबिक ‘हेट क्राइम वॉच’, पलता था कॉन्ग्रेस के फंडिंग पर

IndiaSpend का FactChecker.in ने, जो अपने प्रोपेगंडा के लिए तथ्यों के साथ तोड़-मरोड़ के लिए बदनाम था, आख़िरकार अपने प्रोपेगंडा के सबसे बड़े ‘प्रतिष्ठान’ ‘Hate Crime Watch’ को बंद करने का फैसला कर लिया है। इसकी घोषणा FactChecker.in ने ट्विटर पर की, जहाँ उन्होंने खुद यह माना कि उनकी क्राइम रिपोर्टिंग में गंभीर खामी थी।

हालाँकि ‘रस्सी जल जाए…’ वाली कहावत की तर्ज पर उन्होंने ‘एक नए घर’ जाने की बात की है, लेकिन चूँकि साथ में Hate Crime Watch की प्रासंगिकता खत्म हो जाने (क्योंकि स्वराज्य और ऑपइंडिया ने उसका हिन्दूफ़ोबिया और हिन्दू-विरोधी रवैया उजागर कर दिया था) की बात मानी है, अतः इसे Hate Crime Watch और FactChecker.in का अलविदा ही माना जा रहा है।

इतिहास: हिन्दूफ़ोबिया और समुदाय विशेष के अपराधों को ढँकना

IndiaSpend ने FactChecker.in की जब से शुरुआत की थी, तभी से हिन्दू-विरोधी प्रोपेगंडा के सबसे मुखर स्वरों में इसकी गिनती होने लगी थी (और इसी कारण छद्म-लिबरल-गैंग ने इन्हें हाथों-हाथ लिया)। जिस भी अपराध में आरोपित हिन्दू हो और पीड़ित गैर-हिन्दू, वह अपने-आप ‘Hate Crime’ हो जाता था (मसलन तबरेज़ अंसारी का मामला, जिसमें हत्या तो हुई थी, लेकिन अब तक सामने आए तथ्यों के अनुसार उसकी हत्या कथित चोरी के अपराध के चलते हुई थी, न कि मजहब विशेष से होने, या ‘जय श्री राम’ बोलने से मना करने के कारण)। इसी के उलट, जब ‘शांतिप्रिय’ हिन्दुओं को उनकी आस्था के चलते ही निशाना बनाते थे, तो ऐसे मामले को न केवल FactChecker.in के ‘Hate Crime Database’ में जगह नहीं मिलती थी, बल्कि मामले की सक्रिय लीपापोती की कोशिश होती थी। इसका ताज़ातरीन उदाहरण बेगूसराय में महादलित परिवार के साथ कथित बलात्कार की कोशिश का मामला है, जिसमें FactChecker.in के पत्रकार को पीड़ित परिवार पर उनके आरोप में से आरोपितों पर मज़हबी कारण से हमला करने की बात हटाने का दबाव डालते हुए सुना गया।

इसके अलावा पुलवामा हमला, जिसका हमलावर आदिल डार बाकायदा हिन्दुओं को आस्था के आधार पर गाली देता और इसे हमले का कारण करार देता अपना वीडियो पीछे छोड़ कर जिहादी हमला करता है, भी FactChecker.in के ‘Hate Crime Database’ में जगह नहीं पाया था। इसके पीछे कुतर्क यह दिया गया कि नहीं, उसने हमला ‘एंडियन्स’ पर किया था, “गौ-मूत्र पीने वाले काफ़िरों” पर नहीं।

स्वाति गोयल के हज़ार प्रहारों के आगे टेके घुटने

हालाँकि FactChecker.in के ‘Hate Crime Database’ को गालियाँ हर ओर से ही पड़ रहीं थीं, लेकिन उसे बेनकाब करने में जिस एक पत्रकार का नाम सबसे प्रमुख है, वह हैं स्वराज्य पत्रिका की स्वाति गोयल शर्मा। उन्होंने लगातार, महीनों तक FactChecker.in के दोहरेपन को लगातार ट्विटर पर, और अपनी पत्रिका में उजागर किया। हर बार, बार-बार किया, और सतत दबाव से उसे बैकफ़ुट पर धकेलना चालू रखा। उनकी ट्विटर टाइमलाइन इसकी नज़ीर है।

इसके अलावा ऑपइंडिया ने पिछले ही साल FactChecker.in के हितों के टकराव के बारे में खबर प्रकाशित की थी। रिपोर्ट के अनुसार FactChecker.in को फंडिंग देने वालों में प्रवीण चक्रवर्ती भी थे, जोकि इस साल हुए लोकसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस के डाटा एनालिटिक्स विभाग के प्रमुख थे। यानी FactChecker.in भाजपा और हिंदूवादियों-राष्ट्रवादियों के खिलाफ नकारात्मक खबरें चलाने के लिए सीधे-सीधे उनकी वैचारिक-राजनीतिक विरोधी कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता से पैसा ले रहा था!