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जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश के आतंकी असदुल्लाह शेख को NIA ने चेन्नई से किया गिरफ्तार

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को मंगलवार (सितम्बर 10, 2019) को बड़ी कामयाबी मिली है। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से मंगलवार सुबह एक आतंकवादी को एनआईए ने जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश (जेएमबी) के एक आतंकवादी को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आतंकवादी का नाम असदुल्लाह शेख है। 

पुलिस ने बताया कि असदुल्लाह पश्चिम बंगाल के बर्दवान शहर का निवासी है। उसे उसके चेन्नई के किराए वाले घर से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कहा कि उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। असदुल्लाह को कल (सितम्बर 11, 2019) अदालत में पेश किया जाएगा, जहाँ उसकी ट्रांजिट रिमांड माँगी जाएगी।

आतंकवादी की गिरफ्तारी के बाद से ही पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। एनआइए ने पूरे इलाके को घेर लिया है। इससे पहले 2 सितंबर को कोलकाता पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश (जेएमबी) के संदिग्ध सदस्य को गिरफ्तार किया था। सूचना मिलने पर एसटीएफ के दल ने गजनबी ब्रिज के पास कनाल ईस्ट रोड से 22 वर्षीय मोहम्मद अब्दुल कासिम उर्फ कासिम को गिरफ्तार किया था। कासिम बर्दवान जिले के मंगलकोटे पुलिस थाना क्षेत्र के दुरमुट गाँव का रहने वाला है।

भीमा कोरेगाँव हिंसा: DU प्रोफेसर के घर पुणे पुलिस ने मारा छापा, नक्सलियों से सम्बन्ध की आशंका

भीमा कोरेगाँव हिंसा मामले में पुणे पुलिस और नोएडा पुलिस की संयुक्त टीम ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हनी सिंह के नोएडा स्थित आवास पर छापेमारी की। यह छापेमारी प्रोफेसर सिंह के नक्सलियों से सम्बन्ध को लेकर की गई। भीमा कोरेगाँव मामले में कई अर्बन नक्सल पहले से ही जेल में बंद हैं। 2018 में भड़की हिंसा के पीछे इन्हीं अर्बन नक्सलियों का हाथ सामने आ रहा है।

हनी बाबू डीयू के प्रोफ़ेसर हैं और ‘द कमिटी ऑफ सिविल राइट्स एक्टिविस्ट्स’ के सदस्य हैं। इस कमिटी का गठन जीएन साईबाबा द्वारा किया गया था। डीयू प्रोफ़ेसर साईबाबा को 2017 में महाराष्ट्र की एक अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी। साईबाबा के प्रतिबंधित माओवादी संगठन सीपीआई से सम्बन्ध सामने आए थे।

इस मामले में वकील सुधा भारद्वाज, कथित सामाजिक कार्यकर्ता वेरनॉन गोंजाल्विस, पी वरावरा राव, अरुण फरेरा और ख़ुद को पत्रकार कहने वाले गौतम नवलखा का नाम आरोपितों में शामिल है। अर्बन नक्सल सुरेंद्र गाडलिंग और सुधीर धावले ने एसआईटी के समक्ष बयान देने की बात कही थी लेकिन बाद में वे पलट गए और कहा कि इससे ट्रायल कोर्ट में चल रहे मामले पर प्रभाव पड़ेगा। इसके बाद एसआईटी के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस जय नारायण पटेल ने दोनों को वापस पुणे स्थित यरवदा जेल में भेजने का आदेश दिया।

वेरनॉन गोंजाल्विस के घर से कई आपत्तिजनक पुस्तकें बरामद की गई थीं, जिसके बाद कोर्ट ने उनसे पूछा था कि ये पुस्तकें और सीडी उनके घर में क्या कर रही थीं? सुधा भारद्वाज ने भी उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल की थी।

जब लगेज मशीन के अदंर से सामान की जगह निकलने लगे पाकिस्तानी… देखें Video

अपनी उल-जुलूल हरकतों के कारण पहचाना जाने वाला पाकिस्तान एक बार फिर से एक वायरल होती वीडियो के कारण चर्चा का विषय है। ये वीडियो पाकिस्तान के पेशावर एयरपोर्ट का है। जहाँ पर भारी संख्या में पाकिस्तानी लोग हज करके लौटते दिखाई दे रहे हैं। लेकिन अब आप सोचेंगे इसमें ऐसा खास क्या है?

तो बता दें, इस वीडियो में खास ये हैं कि पाकिस्तानी जो भारत को समय आने पर परमाणु बम और क्रिकेट के बल्ले से उड़ाने की धमकियाँ देने से नहीं चूँकते, वो इस वीडियो में लगेज मशीन से बाहर निकलते दिख रहे हैं। जी हाँ। एयरपोर्ट पर जहाँ आम लोग चेकिंग के लिए लगेज डालते हैं, वहाँ से हज करके लौटे यात्री बाहर आ रहे हैं। अब ये सुरक्षा के लिहाज से या पाकिस्तानियों का कोई नया कारनामा है? आइए जानते हैं।

दरअसल, जानकारी के अनुसार, वीडियो में हज से लौटे ये हज यात्री मक्का-मदीना से पानी लेकर आए हैं, जिसे आबे जमजम कहा जाता है। इस्लाम मजहब में इसका बहुत महत्त्व है। जिस वजह से ये हज यात्री फ्लाइट लैंड होने के बाद अपने आबे जमजम का केन लेने लगेज मशीन के पास खड़े थेे, लेकिन इन्हें डर था कि उनका आबे जमजम कोई और न ले जाए। इसलिए उन्होंने इसका तरीका खोजा और अपने जल को सुरक्षित रखने के लिए एक के बाद एक करके ये भी मशीन में बैठते गए और दूसरी ओर से निकलते गए।

हालाँकि, वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि हाजियों की इस हरकत से वहाँ के सुरक्षाकर्मी सकपका गए और उन्हें रोकने की कोशिश करने लगे, लेकिन फिर भी आबे जमजम को सुरक्षित रखने के लिए ये लोग नहीं मानें तो काफ़ी देर तक एक्स-रे मशीन में ये सिलसिला चलता रहा।

अब इस वीडियो के वायरल होते ही भारत के लोग सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की चुटकी ले रहे हैं और कह रहे हैं कि जो लोग हमें चंद्रयान पर ज्ञान दे रहे हैं उनकी हरकतें तो देखो कैसी है।

सपा विधायक नाहिद हसन ने गाड़ी का कागज माँगने पर समर्थकों के साथ SDM से की गाली-गलौज

कहते हैं, क़ानून सब पर समान रूप से लागू होता है चाहे वह आम जनता हो या कथित वीआईपी। लेकिन, भारत में अक्सर नेताओं द्वारा क़ानून का पालन न करने व गर्व से अपने आप को सबसे ऊपर दिखाने की भावना का प्रदर्शन किया जाता है। ताज़ा मामला कैराना के समाजवादी पार्टी विधायक नाहिद हसन से जुड़ा है। नाहिद हसन अपने आप को पुलिस और क़ानून से ऊपर मानते हैं, तभी तो एसडीएम ने उनसे गाड़ी का कागज़ माँग लिया तो वह बिफर गए और समर्थकों संग मिलकर अधिकारी के साथ ही बदतमीजी की।

एसडीएम ने एक गाडी का संदिग्ध नंबर देख कर उसे रोका। जब गाड़ी रुकी तो पता चला कि उसमें विधायक नाहिद हसन भी बैठे हैं। एसडीम द्वारा गाड़ी की कागज़ात की माँग की गई, जिसे विधायक नहीं दिखा सके। गाड़ी में सपा का झंडा भी लगा हुआ था। विधायक हसन का कहना था कि वह खेत में किसी काम से जा रहे हैं, इसीलिए उन्होंने कागज़ साथ लाना उचित नहीं समझा। देखें झड़प का वीडियो:

विधायक ने एसडीएम को डरपोक तक बता दिया और बदतमीजी भरे लहजे में उन्हें अपमानित किया। विधायक हसन के साथ उनके समर्थक भी डटे हुए थे। जब एसडीएम ने विधायक से कहा कि वह सरकारी व्यक्ति के साथ इस तरह बदतमीजी नहीं सकते तो विधायक ने अपने समर्थकों की तरह इशारा करते हुए कहा कि ये लोग लिख कर देंगे कि आपने बदतमीजी की है।

एसडीएम ने कहा कि पूरे मामले की वीडियोग्राफ़ी हुई है और उसे देख कर उचित कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद सपा विधायक ने अधिकारी का मखौल बनाते हुए कहा, “डर गया! बोलो? डरपोक।” इस घटना के बाद रात को भी विधायक के आवास के बाहर भारी संख्या में समर्थक जमा हो गए और उन्होंने प्रशासन के ख़िलाफ़ नारेबाजी की। समर्थकों ने कहा कि पूरा पुलिस-प्रशासन हाथ धो कर विधायक हसन के पीछे पड़ा हुआ है।

शामली के एसपी ने कहा कि अधिकारियों द्वारा गाड़ी के कागज़ात दिखाने को कहना एक सामान्य प्रक्रिया है और इसके लिए हंगामा उचित नहीं। विधायक को कहा गया है कि वह मंगलवार (सितम्बर 10, 2019) को कागज़ दिखाएँ।

कश्मीर में इंटरनेट बैन पर सीख देने वाले PAK ने मुहर्रम पर बंद की इंटरनेट-मोबाइल सेवाएँ

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के बाद प्रदेश में संचार सेवा बंद किए जाने को लेकर भारत पर निशाना साधता रहा है, लेकिन अब उसी पाकिस्तान में सभी तरह की इंटरनेट सेवाएँ बंद करने की खबर आ रही है। बता दें कि, मंगलवार (सितंबर) को मुहर्रम से पहले पाकिस्तान ने इस्लामाबाद, कराची, रावलपिंडी और पेशावर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी है।

पाकिस्तान दूरसंचार प्राधिकरण (PTA) ने बताया कि जब शिया मुस्लिम मुहर्रम की अपनी सबसे महत्वपूर्ण रस्म निभाएँगे, उस दौरान मोबाइल फोन सेवाएँ और इंटरनेट बंद रहेंगे। इसके अलावा इस मौके के लिए पाकिस्तान के कुछ खास इलाकों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। हालाँकि, PTA ने बैन के लिए सही समय की घोषणा अभी नहीं की है, लेकिन जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान में मोबाइल सेवाएँ सुबह से शाम 6 बजे तक बंद रहेंगी। यह सेवाएँ विशेष रूप से उन क्षेत्रों में बाधित रहेंगीं, जहाँ से मुहर्रम का जुलूस गुजरेगा।

पाकिस्तान के आंतरिक मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बैन के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि मुहर्रम के जुलूस के दौरान शोक मनाने वालों की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान में जिला प्रशासन के जरिए चिन्हित इलाकों में मोबाइल और इंटरनेट सर्विस बंद की गई है। इन इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती भी की गई है।

उर्मिला मातोंडकर ने कॉन्ग्रेस की अंदरूनी राजनीति से तंग आकर दिया इस्तीफ़ा

लोकसभा चुनाव के दौरान कॉन्ग्रेस ज्वाइन करने वाली एक्ट्रेस उर्मिला मातोंडकर ने मंगलवार (सितम्बर 10, 2019) को कॉन्ग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। बता दें कि कॉन्ग्रेस ने उत्तरी मुंबई सीट से लोकसभा चुनाव में उन्हें अपना उम्मीदवार चुना था। लेकिन उनकी उम्मीदवारी भी कॉन्ग्रेस के लिए कोई कमाल नहीं दिखा सकी उन्हें लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था।

इस्तीफा देते वक़्त उर्मिला ने ANI से कहा, “मेरी राजनीतिक और सामाजिक संवेदनशीलता का एक बड़े लक्ष्य पर काम करने के बजाय मुंबई कॉन्ग्रेस में कुछ लोग आपसी लड़ाई के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।”

आपको बता दें कि उर्मिला ने कॉन्ग्रेस ज्वाइन करते वक़्त कहा था कि राजनीति में वो ग्लैमर की वजह से नहीं आई हैं बल्कि विचारधारा के कारण कॉन्ग्रेस में शामिल हुई हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी के नेतृत्व पर कहा था, “देश को सबको साथ में लेकर चलने वाला नेता चाहिए, ऐसा नेता जो भेदभाव नहीं करता हो। राहुल एकमात्र ऐसे नेता हैं जो सबको साथ लेकर चल सकते हैं।”

अब इतनी जल्दी ही उन्हें पार्टी की कमियाँ नज़र आने लगी। न्यूज़ एजेंसी ANI के अनुसार उर्मिला ने नाखुशी जताते हुए कॉन्ग्रेस पार्टी से इस्तीफा दिया है। उर्मिला मातोंडकर इसी साल मार्च में कॉन्ग्रेस में शामिल हुई थीं। कॉन्ग्रेस ने उन्हें लोकसभा चुनाव-2019 में उत्तर मुंबई से अपना उम्मीदवार बनाया था। लेकिन वो बीजेपी के गोपाल शेट्टी से चुनाव हार गई थीं।

गौरतलब है कि इससे पहले भी उर्मिला मातोंडकर ने पत्र लिख कर कॉन्ग्रेस नेताओं को बताई थी चुनाव में हार की वजह, जिसमें उन्होंने पार्टी पर गंभीर आरोप भी लगाए थे। उन्होंने 16 मई को 9 पेजों का एक पत्र मुंबई के तत्कालीन कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा को लिखा था। जिसमें उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ न देने, कमजोर प्लानिंग, प्रचार तंत्र की नाकामी के साथ चुनाव प्रचार के लिए नियुक्त चीफ कॉर्डिनेटर सन्देश कोंडविलकर, दूसरे पदाधिकारी भूषण पाटिल को जिम्मेदार ठहराया था।

TMC, CPI और NCP ने राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा बरकरार रखने के लिए चुनाव आयोग से माँगा एक और मौका

तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने चुनाव आयोग से ‘राष्ट्रीय दल’ का उनका दर्जा बरकरार रखने का अनुरोध करते हुए कहा है कि उन्हें आगामी चुनावों में प्रदर्शन बेहतर करने का एक मौका दिया जाना चाहिए। आयोग ने पिछले लोकसभा चुनाव में इन पार्टियों का प्रदर्शन राष्ट्रीय दल की मान्यता के अनुरूप नहीं रहने का हवाला देते हुए इन्हें नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों न इनका राष्ट्रीय दल का दर्जा समाप्त कर दिया जाए।

तीनों राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव आयोग के सामने पेश अपने जवाब में दलील दी है कि पुराने राजनीतिक दल होने के साथ-साथ, राष्ट्रीय राजनीति में उनका अहम योगदान रहा है। इसलिए राष्ट्रीय दल के रूप में उनकी मान्यता का आकलन पिछले चुनावी प्रदर्शन के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) सुनील अरोड़ा सहित चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में तीनों दलों के प्रतिनिधियों ने इस साल झारखंड, महाराष्ट्र और हरियाणा में और जनवरी 2020 में दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनावों में प्रदर्शन को सुधारने का मौका माँगा। 

सीपीआई महासचिव डी राजा ने कहा कि उन्होंने अपने जवाब में आयोग से कहा है उनकी पार्टी कॉन्ग्रेस के बाद देश की सबसे पुरानी पार्टी है और स्वतंत्रता आंदोलन में भी उसकी अग्रणी भूमिका रही। उन्होने पूर्व में लोकसभा में मुख्य विपक्षी दल होने का भी हवाला देते हुए पार्टी का राष्ट्रीय दल का दर्जा बहाल रखने का आयोग से अनुरोध किया है। पार्टी ने अपने जवाब में कहा कि भले ही पिछले लोकसभा चुनाव में सीपीआई का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा लेकिन विभिन्न राज्यों में वामदल की सरकार रहने और संविधान को मजबूत बनाने में पार्टी की महत्वपूर्ण भूमिका को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

वहीं, टीएमसी के कल्याण बनर्जी और एनसीपी के माजिद मेमन ने कहा, “चुनाव आयोग ने 2016 में दो चुनावों के बाद एक राजनीतिक पार्टी की स्थिति की समीक्षा करने के लिए अपने नियमों में संशोधन किया था। अगर 2014 के चुनाव को भी शामिल कर लिया जाए, तो भी चुनाव आयोग को हमारी पार्टी की स्थिति पर समीक्षा करने के लिए 2024 तक का इंतजार करना चाहिए।”

साथ ही मेमन ने कहा कि यह किसी भी राजनीतिक दल की स्थिति का पुनर्मूल्यांकन करने का सही समय नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने चुनाव आयोग से महाराष्ट्र, झारखंड और हरियाणा में विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी का दर्जा वापस न लेने का आग्रह किया है। 

बता दें कि, चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968 के अंतर्गत किसी राजनीतिक दल को राष्ट्रीय दल का दर्जा तब मिलता है जब उसके प्रत्याशी लोकसभा चुनाव में कम से कम 6 फीसदी मत प्राप्त करें या उसके चार सदस्य चुने जाएँ या विधानसभा चुनावों में कम से कम 4 या इससे ज्यादा राज्यों में 6 प्रतिशत वोट प्राप्त हों। इन मानकों के तहत कॉन्ग्रेस, भाजपा, बसपा, सीपीआई, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, तृणमूल कॉन्ग्रेस, एनसीपी और नेशनल पीपुल्स पार्टी ऑफ मेघालय को राष्ट्रीय दल का दर्जा मिला हुआ है।

दुनिया मेट्रो में घूम रही, तुम्हारी औकात रिक्शे की ही है: POK समाजसेवी ने पाक नेताओं को जम कर धोया

जहाँ पाकिस्तान पूरे जम्मू कश्मीर पर अपना हक़ जताता रहा है, उसके अवैध कब्जे वाले कश्मीर के ही नागरिक उसे खरी-खरी सुना रहे हैं। पाक अधिकृत कश्मीर के एक निवासी आरिफ आजाकिया ने पाकिस्तानी मंत्रियों को जम कर लताड़ा। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में पाकिस्तान का मज़ाक बन कर रह गया है। आरिफ ने कहा कि जहाँ पूरी दुनिया मेट्रो की सवारी कर रही है, पाकिस्तान रिक्शा और साइकिल से ही बाहर नहीं निकल पा रहा है। समाजसेवी आरिफ ने कहा कि पाकिस्तानी नेता सिर्फ़ चंद्रयान-2 और कश्मीर की बात करते हैं।

पाकिस्तान के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद चौधरी को लताड़ते हुए आरिफ ने कहा:

“फवाद चौधरी तुम विज्ञान मंत्री हो। अब रिक्शा और साइकिल से बाहर आओ। तुम्हारी औकात यही है कि जब दुनिया मेट्रो में घूम रही है, तुम रिक्शे पर ही सवार हो। आप दूसरों को उपदेश देते फिरते हो लेकिन अपने ही देश का मज़ाक बना रखा है। चंद्रयान-2 भारत का ऐतिहासिक मिशन है। यह एक बड़ी उपलब्धि है। तुम सब चाहते हो कि यह असफल हो। तुम सब बस कश्मीर और चंद्रयान-2 को लेकर ही चिंतित हो। तुम लोग ये सब क्या कर रहे हो?”

बता दें कि चंद्रयान-2 मिशन के दौरान जब लैंडर विक्रम से इसरो का संपर्क टूट गया था, तब पाक मंत्री फवाद चौधरी ने भारत का मज़ाक उड़ाने के चक्कर में अपनी ही खिल्ली उड़ा ली थी। इसके बाद उन्हें न सिर्फ़ भारतीयों ने औकात दिखाई बल्कि पाकिस्तानियों तक ने पूछा कि उनका देश अंतरिक्ष के क्षेत्र में क्या कर रहा है? इसके अलावा पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता आशिफ गफूर को भी पीओके निवासी आरिफ ने आड़े हाथों लिया।

आशिफ गफूर कहीं की भी फोटो को कश्मीर में ‘भारतीय सेना द्वारा अत्याचार’ बता कर ट्वीट करने के लिए कुख्यात हैं। आरिफ ने गफूर से पूछा कि पाक की अर्थव्यवस्था संभालने का दावा करने वालों ने आज इसे आईसीयू में लाकर क्यों छोड़ दिया है? अभी ख़बर आई थी कि श्रीलंकाई क्रिकेटरों ने पाकिस्तान जाने से मना कर दिया है। आरिफ ने इस ख़बर का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान में शांति व्यवस्था नाकाम हो चुकी है। उन्होंने याद दिलाया कि हाल ही में क्वेटा में 2 बम धमाके हुए हैं।

तबरेज की मौत तनाव और हृदयाघात से, 11 आरोपितों पर नहीं चलेगा हत्या का मामला: झारखंड पुलिस

झारखंड पुलिस ने तबरेज अंसारी की मौत के मामले में दायर आरोप-पत्र से हत्या की धारा को हटा दिया है। पुलिस ने डॉक्टरों की रिपोर्ट (पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट) का हवाला देते हुए कहा है कि तबरेज की मौत तनाव और कार्डियक अरेस्ट (हृदयाघात) की वजह से हुई थी। इसलिए अब वह इसी तथ्य के आधार पर चार्जशीट दाखिल करेंगे। झारखंड पुलिस के इस फैसले के बाद सभी 11 आरोपितों के ऊपर से हत्या संबंधी IPC की धारा (धारा 302) हटा ली गई है।

इंडियन एक्सप्रेस की मानें तो उनसे बातचीत में सरायकेला-खरसावां के एसपी कार्तिक एस ने बताया है कि उन्होंने इस मामले को आईपीसी की धारा 304 के तहत जो चार्जशीट दाखिल किया है, उसकी 2 वजहें हैं – पहला यह कि तबरेज अंसारी की मौत घटनास्थल पर नहीं हुई थी, और ग्रामीणों का भी अंसारी को मारने का कोई इरादा नहीं था। दूसरा, मेडिकल रिपोर्ट में भी हत्या के आरोपों की पुष्टि नहीं हो पाई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी ये बात सामने आई कि उसकी मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई है और सिर पर लगी चोट गहरी नहीं थी।

गौरतलब है कि कुछ समय पहले पुलिस ने अंसारी की पत्नी की शिकायत के आधार पर आरोपितों पर हत्या के आरोप में 302 के तहत मामला दर्ज कर लिया था। जिसके बाद उन पर लगे आरोपों की जाँच की जा रही थी। जबकि दूसरी ओर विसरा रिपोर्ट में भी इस बात का खुलासा हो चुका था कि तबरेज की मौत जहर देने या फिर ब्रेन हैमरेज जैसे कारणों से नहीं हुई है बल्कि उसकी मौत दिल का दौरा पड़ने के कारण हुई। लेकिन फिर भी उस समय पुलिस ने आश्वासन दिया था जाँच पूरी होने पर इस मामले में दोषियों के खिलाफ़ उचित कार्यवाई होगी।

इस मामले के संबंध में पुलिस ने 11 लोगो को गिरफ्तार किया था। जिनमें कमल महतो, सुमंत महतो, नामो प्रधान, भीमसेन मंडल, प्रकाश मंडल, कुशल महली, प्रेमचंद महली, महेश महली, सत्यनारायण नायक व चामू नायक समेत 11 आरोपितों का नाम शामिल था।

तमिलनाडु: मंदिरों के 25,868 एकड़ से अधिक भूमि पर अवैध कब्जा, कीमत ₹10,000 करोड़

तमिलनाडु में हिदू मंदिरों के तकरीबन 25,868 एकड़ भूमि पर अवैध रूप से कब्ज़ा कर लिया गया है, जिसकी कीमत लगभग 10,000 करोड़ रुपए होगी। जानकारी के मुताबिक, तमिलनाडु में हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्त (HR & CE) विभाग के नियंत्रण में मंदिरों के सभी भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल करने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू करने वाली राज्य सरकार ने पाया विभिन्न हिंदू मंदिरों से संबंधित लगभग 10,000 करोड़ रुपए की कीमत वाली 25,868 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। इन जमीनों को अवैध रूप से विभिन्न लोगों को हस्तांतरित कर दिया गया है।

वैसे मंदिर की भूमि का अतिक्रमण कोई नई बात नहीं है। 2018 में मंदिर की 9000 एकड़ भूमि पर विभिन्न लोगों द्वारा अवैध रूप से अतिक्रमण किया गया था। लेकिन अब राज्य सरकार द्वारा तमिलनाडु सरकार ने पाया कि लगभग 10,000 करोड़ रुपए की कम से कम 25,868 एकड़ जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, कुछ वर्षों पहले शुरू हुए 38,000 से अधिक मंदिरों और मठों के भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण का काम पूरा हो गया है। जमीनी विवरण को डिजिटलीकरण करने के लिए अपडेटिंग रजिस्ट्री स्कीम (URS) के तहत दो जिला राजस्व अधिकारियों को नियुक्त किया गया था। 

मार्च 2019 में, ऑर्गेनाइजर में बताया गया था कि कांचीपुरम में तिरुपुर के प्राचीन मुरुगन मंदिर से संबंधित 76 एकड़ भूमि पर कब्जा कर एक आवास परिसर में बदल दिया गया था। इस जमीन की कीमत 750 करोड़ रुपए से अधिक थी। बाद में जाँच से पता चला था कि इस तरह से मंदिरों की जमीन का अतिक्रमण कर 10 से अधिक स्थानों पर इमारतों और अन्य संरचनाओं का निर्माण किया गया था। इन स्थानों पर मंदिर से संबंधित सबूत मिले थे।

इस साल जुलाई में, थिरुथोंडार्गल सबाई के संस्थापक और अध्यक्ष ए राधाकृष्णन ने दावा किया था कि राज्य भर के मंदिरों की 70% भूमि का अतिक्रमण किया गया है। इनमें से अधिकांश भूमि सदियों से मंदिरों के हितकरों, जमींदारों और भक्तों द्वारा दान की गई थी। अब भू-माफियाओं द्वारा उन पर हमला किया जा रहा है। सरकार भी इसे नजरअंदाज कर रही है।