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कमलनाथ सरकार ने 8 महीने में 11 बार किया तबादला: परेशान थाना प्रभारी पहुँचा हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ के सत्ता संभालने के बाद से ही कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा अधिकारियों के ख़बरें सामने आती रही हैं लेकिन एक थानेदार का इतनी बार तबादला किया गया कि वह हाईकोर्ट पहुँच गया है। थानेदार सुनील लाटा अपने लगातार तबादलों के ख़िलाफ़ जबलपुर हाईकोर्ट पहुँच गए हैं। कमलनाथ सरकार द्वारा पिछले 8 महीने में उनका 11 बार ट्रान्सफर किया गया है।

अभी लाटा बैतूल जिले के सारणी थाने के प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं। उनके तबादलों का दौर भी तभी शुरू हुआ, जब मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार बनी। अब उन्हें निवाड़ी जिले के एक थाने में योगदान देने का आदेश आया है। जरा पिछले 8 महीनों में थाना प्रभारी लाटा के तबादलों की एक बानगी देखिए:

  • सबसे पहले उन्हें बैतूल से आईजी ऑफिस होशंगाबाद ट्रान्सफर किया गया।
  • होशंगाबाद से उन्हें पुलिस मुख्यालय भेज दिया गया। वहाँ उन्हें आदिम जाति कल्याण शाखा में रखा गया।
  • इसके बाद उन्हें बैतूल के आदिम जाति कल्याण में भेज दिया गया।
  • इसके बाद उनका तबादला सागर और छतरपुर के लिए हुआ। वहाँ वह आमद दर्ज करा पाते, उससे पहले ही उनका तबादला भोपाल के लिए कर दिया गया।
  • उन्हें फिर भोपाल से बैतूल भज दिया गया, जहाँ वह कोतवाली थाना के प्रभारी रहे।
  • लाटा को फिर लाइन हाज़िर कर दिया गया।
  • अंत में उन्हें सारणी थाने का चार्ज दिया गया लेकिन ट्रान्सफर का दौर यहीं ख़त्म नहीं हुआ।
  • सारणी में चार्ज सम्भाले एक सप्ताह भी नहीं हुए थे कि लाटा का ट्रान्सफर निवाड़ी जिले में कर दिया गया।

थानेदार लाटा ने बताया कि तबादलों से परेशान होकर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है, जहाँ सुनवाई चल रही है। उन्होंने यह याचिका शुक्रवार (अगस्त 30, 2019) को दायर की।

जनसंख्या पर काबू नहीं होने से मंदी: कॉन्ग्रेस नेता जितिन प्रसाद ने मनमोहन की ‘चिंता’ की निकाली हवा

अर्थव्यवस्था पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के ‘चिंता’ की हवा उनकी ही पार्टी के एक युवा नेता जितिन प्रसाद ने निकाल दी है। ​मनमोहन की कैबिनेट में रह चुके जितिन ने मंदी और बेरोजगारी का कारण बढ़ती जनसंख्या को बताया है। इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री ने इसे ‘मानव रचित संकट’ बताते हुए मोदी सरकार से बदले की राजनीति छोड़ अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए कदम उठाने को कहा था।

जितिन प्रसाद ने कहा, “जनसंख्या नियंत्रण पर देशभर में व्यापक बहस होनी चाहिए। इस पर क़ानून भी बनाया जाना चाहिए। अगर देश को आगे बढ़ना है तो ठोस क़दम उठाने होंगे। मैं सरकार से माँग करता हूँ कि इस मुद्दे पर जो भी क़ानून लाना है, वह लाए।”

उन्होंने कहा, “अर्थव्यवस्था डूब रही है, बेरोज़गारी बढ़ रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि आबादी को नियंत्रित नहीं किया गया। पर्यावरण पर इसका प्रभाव पड़ रहा। जल संकट, प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव भारत में आबादी बढ़ने के कारण हैं।”

जितिन प्रसाद ने सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें जनसंख्या नियंत्रण जैसे गंभीर मुद्दे पर एकसाथ खड़े होना चाहिए। बता दें कि इस साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसंख्या का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि जो लोग छोटा परिवार रख रहे हैं, वे भी एक तरह से देशभक्ति कर रहे हैं।

लाल किले की प्राचीर से जनसंख्या विस्फोट को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते हुए पीएम मोदी ने देशवासियों से छोटे परिवार की अपील की थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में जनसंख्या विस्फोट पर चिंता जताते हुए कहा था कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए नयी चुनौतियाँ पेश करता है। इससे निपटने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों को क़दम उठाने चाहिए।


मध्य प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में लागू नहीं होंगे ट्रैफिक से जुड़े नए कानून

ट्रैफिक नियमों की धज्जियाँ उड़ाने वालों के लिए सरकार ने 1 सितंबर से नया मोटर व्हीकल कानून लागू कर दिया है। कानून में हुए संशोधन के बाद अब ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर 10 गुना तक अधिक जुर्माना भरना पड़ेगा। अब देश भर में अनाधिकृत रूप से सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर वाहन खड़े रखने वालों पर 500 रुपए प्रति घंटा का जुर्माना लगेगा। नए मोटर व्हीकल एक्ट के तहत शराब पीकर गाड़ी चलाने पर 10 हजार रुपए जुर्माना और 6 महीने की जेल का प्रावधान है और कोई ऐसा करते हुए दोबारा पकड़ा जाता है, तो उसे 2 साल की जेल और 15 हजार रुपए का जुर्माना भरना पड़ेगा।

जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार और राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार और मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने अपने-अपने राज्यों में इस अधिनियम को लागू करने से मना कर दिया है। मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने इसे लागू करने से इनकार करते हुए कहा कि जुर्माने की राशि काफी अधिक है। प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने नए नियमों का विरोध किया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार ने जुर्माने की दरें जरूरत से ज्यादा बढ़ा दी है। इसी वजह से मोटर व्हीकल एक्ट की नई दरें मध्य प्रदेश में अभी लागू नहीं होगी।

सरकार पहले इसकी विवेचना करेगी और उसके बाद लागू करने पर निर्णय लेगी। इसमें प्रावधान के तहत काम करने का फिलहाल कोई नोटिफिकेशन नहीं है, लेकिन केन्द्र से बात की जा रही है। मध्य प्रदेश शासन के तरफ से निर्देश नहीं मिलने की वजह से पुलिस 1 सितंबर से नए एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं करेगी, जबकि केंद्र सरकार संशोधित एक्ट को लेकर नोटिफिकेशन जारी कर चुकी है।

कमिश्नर ने मुझे लाठी से मारा, गालियाँ दी: दफ्तर से TMC गुंडों को हटाने गए BJP सांसद का दावा

पश्चिम बंगाल में भाजपा सांसद अर्जुन सिंह ने तृणमूल कॉन्ग्रेस और पुलिस पर साँठगाँठ का आरोप लगाया है। भाजपा सांसद कार्यकर्ताओं के साथ विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे, तभी तृणमूल के गुंडों ने उनकी गाड़ी में तोड़फोड़ की। सिंह बैरकपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। उन्होंने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस कमिश्नर ने उनके सिर पर लाठी से वार किया। उन्होंने बंगाल पुलिस द्वारा भाजपा कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया।

अर्जुन सिंह ने आरोप लगाया कि बैरकपुर के पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा ने उनके सिर पर लाठी से मारा और गालियाँ दी। सिंह ने कहा कि उनके आवास पर भी पुलिस और तृणमूल कार्यकर्ताओं ने हमला किया। उन्होंने बताया कि उनके सिर में 12 टाँके लगे हैं। स्थानीय अस्पताल में इलाज करा कर बाहर निकले सांसद ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए अपनी व्यथा सुनाई

पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री और वरिष्ठ तृणमूल नेता ज्योतिप्रिया मालिक ने सांसद अर्जुन सिंह पर झूठ का रोना रोने का आरोप लगाते हुए पुलिस कमिश्नर का बचाव किया। मलिक ने कहा कि कमिश्नर वर्मा उस स्थान पर मौजूद ही नहीं थे, जहाँ सांसद सिंह प्रदर्शन कर रहे थे। मलिक ने कहा कि अर्जुन सिंह झूठे हैं और उनके आरोप आधारहीन हैं।

विवाद तब शुरू हुआ जब भाजपा सांसद को सूचना मिली कि पार्टी के श्यामनगर स्थित दफ्तर को तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों ने अपने कब्जे में ले लिया है। वह तुरंत वहाँ के लिए निकल पड़े। भाजपा के कार्यकर्ता जब वहाँ पहुँचे थे उन्होंने देखा कि तृणमूल के गुंडों ने न सिर्फ़ भाजपा दफ्तर पर अपनी पार्टी का झंडा लगा रखा था, बल्कि सीएम ममता की फोटो भी टाँग रखी थी। भाजपा नेताओं ने ममता बनर्जी के फोटो और तृणमूल के अन्य साजो-सामान वहाँ से हटाना शुरू कर दिया

इसके बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों ने सांसद की गाड़ी में तोड़फोड़ की और उन पर हमला कर दिया। सांसद ने कहा कि अगर हमले नहीं रुके तो तृणमूल के लोगों के साथ ही ऐसा ही सलूक किया जाएगा। उन्होंने बंगाल में सिविल वार की आशंका जताई। वहीं, दूसरी तरफ़ ज्योतिप्रिया मलिक ने दावा किया कि भाजपा ने भंगवा रंग से पेंट कर-कर के उनके 180 दफ्तर हथिया लिए हैं, जिन्हें वापस छीन लिया जाएगा।

पश्चिम बंगाल के मंत्री ने याद दिलाया कि ऐसे ही भाजपा के एक दफ्तर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ख़ुद कब्ज़ा किया था। इसी तरह तृणमूल के बाकी नेता भी भाजपा दफ्तरों पर कब्ज़ा करेंगे। फिलहाल घटनास्थल पर पुलिस कैम्प कर रही है।

श्रीराम हमारे भी पूर्वज: मुस्लिम महिलाओं ने राम मंदिर के लिए किया हवन, 125 करोड़ राम नाम जाप

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए अब मुस्लिम समुदाय के लोग भी सामने आने लगे हैं। संत परमहंस दास के नेतृत्व में न सिर्फ़ हिन्दुओं ने बल्कि मुस्लिम मंच की महिलाओं ने भी राम नाम जाप में हिस्सा लिया। मुस्लिमों ने हवन में भी हिस्सा लेकर राम मंदिर निर्माण का संकल्प जताया। तपस्वी छावनी के स्वामी परमहंस दास, हाजी सईद और बबलू खान की अगुवाई में मुस्लिम मंच के सदस्यों, ख़ासकर महिलाओं ने सवा सौ करोड़ राम नाम जाप में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने ‘जय श्री राम’ के नारे भी लगाए

ज्ञात हो कि हाल ही में शिया बोर्ड ने कहा था कि राम मंदिर वाली ज़मीन हिन्दुओं को दे देनी चाहिए। शिया वक्फ बोर्ड ने खुल कर हिन्दू पक्ष का समर्थन किया था। सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड पर आरोप लगाते हुए शिया वक्फ बोर्ड ने कहा कि उन्होंने उनके सारे दस्तावेज जब्त कर रखे थे, जिस कारण उन्हें अदालत का रुख करने में इतना ज्यादा समय लग गया।

स्वामी परमहंस ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए हवन का आयोजन किया गया था। वहाँ उपस्थित मुस्लिमों ने कहा कि श्रीराम उनके भी पूर्वज हैं और वे अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण में हिस्सा लेना चाहते हैं। हवन में हिस्सा ले रहे मुस्लिमों ने साफ़ कर दिया कि अयोध्या श्रीराम की भूमि है।

मुस्लिम मंच ने कहा कि विवादित स्थल पर नमाज नहीं पढ़ी जा सकती, इसीलिए वह मस्जिद नहीं है। महंत दास ने कहा कि राम नाम के जाप से बड़ी से बड़ी बाधाएँ दूर हो जाती हैं। ज्ञात हो कि राम मंदिर मामले की अभी सुप्रीम कोर्ट में नियमित सुनवाई चल रही है।

कश्मीर की इन लड़कियों का भारतीय सेना ने रेप कर मार डाला? #SaveKashmir की सच्चाई

केंद्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निष्क्रीय करने के बाद से सोशल मीडिया पर लगातार कुछ ऐसे प्रोपेगेंडा चलाए जा रहे हैं, जिनके द्वारा यह दिखाने का प्रयास किया जा रहा है कि इसे हटाने के बाद कश्मीर में लोगों पर बहुत जुर्म किए जा रहे हैं।

इस मामले में JNU की फ्रीलांस प्रोटेस्टर शेहला रशीद को सीधे भारतीय सेना फटकार भी लगा चुकी है कि वो झूठे आरोपों के आधार पर आर्मी की छवि ख़राब करने का काम ना करे। इस पूरे प्रकरण में शेहला ही एकमात्र चेहरा नहीं है, जो कि भ्रम और अफवाहों के जरिए घाटी का माहौल बिगाड़ने के प्रपंचों में लिप्त है बल्कि BBC जैसे मीडिया गिरोह भी इसमें सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

इसी तरह से सोशल मीडिया पर एक तस्वीर दिखाई जा रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि इन दो महिलाओं को भारतीय सेना ने बलात्कार करने के बाद मार दिया। अगस्त 30, 2019 को Twitter पर मोहम्मद हसन रजा ने यह तस्वीर #SaveKashmir हैशटैग के साथ ट्वीट की है।

क्या है सच्चाई?

इस तस्वीर को Google करने पर सर्च रिजल्ट से पता चलता है कि इस फोटो को सबसे पहले 2016 में Popular Acdmi SuKkur नाम के एक पेज ने फेसबुक पर पोस्ट किया था। साथ में कैप्शन दिया गया था- “यह तस्वीर कश्मीर की। है इन दो लड़कियों को भारतीय सेना ने बलात्कार के बाद मार दिया था।”

इसी तस्वीर को thevoiceofuk.com वेबसाइट ने भी 10 अगस्त 2019 को खबर बनाकर पब्लिश किया था, जिसमें हेडलाइन थी- “Thousands of Kashmiri people including women,children and elderly persons protested against New Delhi’s action of abrogating special status of the occupied territory.”

यानी, “महिला, बच्चे, बुजुर्गों को मिलाकर हजारों कश्मीरी लोग ने ऑक्युपाइड क्षेत्र से विशेष राज्य का दर्जा हटाने के नई दिल्ली के फैसले के विरोध में प्रदर्शन किया।” इस फर्जी खबर में अलग-अलग फर्जी तस्वीरों को कश्मीर में हो रहे अत्याचार बताकर दिखाया गया है।

इस तस्वीर की जाँच करने पर आगे पता चलता है कि यह तस्वीर Orlibonurb नाम के यूट्यूब चैनल द्वारा मई 31, 2010 को पब्लिश किए गए एक वीडियो में इस्तेमाल किया गया थंबनेल है। इस वीडियो में यह थंबनेल 1.56 सेकंड पर देखा जा सकता है।

तस्वीर का सच-

यह तस्वीर चीन की एक वेबसाइट ने 2008 में शेयर की थी। इसके विवरण में बताया गया है कि यह तस्वीर एक भारतीय फोटोग्राफर रफ़ीक़ मार्कबूलर (Rafik Markbuler) द्वारा जनवरी 4, 2007 में खींची गई थी।

बताया गया है कि इस तस्वीर को ‘वॉर एंड डिजास्टर’ (युद्ध और आपदा) खबरों के लिए कांस्य पदक भी मिल चुका है। यह तस्वीर एक पुलिस की गाड़ी में बैठी कश्मीरी पत्थरबाजों द्वारा घायल मुस्लिम महिला को दिखाती है।

यह स्पष्ट है कि यह तस्वीर घाटी में अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय करने के बाद के कश्मीर की नहीं है। इस महिला को भारतीय सेना द्वारा रेप करने के बाद मार दिए जाने का आरोप झूठ है, जबकि हकीकत में यह पुरानी तस्वीर कश्मीरी पत्थरबाजों द्वारा घायल की गई महिला की है।

कश्मीर के नाम पर इसी तरह की कई फर्जी ख़बरों और तस्वीरों के जरिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने का काम जा रहा है। इस मामले में पाकिस्तानी मीडिया और कुछ भारतीय लेफ्ट लिबरल वर्ग लोगों को गुमराह करने के लगातार प्रयास कर रहा है। जिसके कुछ उदाहरण ये ट्वीट और तस्वीरें हैं –

हाई TRP के बावजूद अनिल अम्बानी के स्वामित्व वाला BTVi चैनल अचानक बंद

अनिल अम्बानी के स्वामित्व वाली बीटीवीआई लाइव चैनल अचानक से बंद कर दिया गया है। बिजनेस-इकोनॉमी जॉनर के इस चैनल की टीआरपी रेटिंग भी अच्छी थी। ऐसे में इसे अचानक बंद किया जाना लोगों की समझ में नहीं आया। चैनल ने शनिवार (अगस्त 31, 2019) की अर्धरात्रि से प्रसारण ठप्प किए जाने की घोषणा की। बिजनेस टेलीविजन इंडिया (बीटीवीआई) ने उन सभी लोगों का धन्यवाद किया, जो पिछले 3 वर्षों में चैनल के साथ रहे और इसमें योगदान दिया।

बीटीवीआई की टीआरपी काफ़ी अच्छी थी और अंग्रेजी भाषा के बिजनेस चैनलों में ये लगातार दूसरे स्थान पर रहा था। बीटीवीआई ने बिना किसी चैनल का नाम लिए कहा कि उसने टीआरपी के मामले में कई ऐसे चैनलों को भी पीछे छोड़ दिया, जो पिछले 2 दशक से सक्रिय थे। बीटीवीआई की टीआरपी ‘एनडीटीवी प्रॉफिट’ से काफ़ी अच्छी थी।

बीटीवीआई को 2008 में यूटीवी द्वारा लॉन्च किया गया था और इसका नाम यूटीवीआई था। इसके बाद ब्लूमबर्ग ने इसमें हिस्सेदारी ख़रीदी, जिसके बाद 2009 में इसका नाम ब्लूमबर्ग यूटीवी हो गया। 2012 में अनिल अम्बानी की कम्पनी द्वारा हिस्सेदारी खरीदे जाने के बाद इसका नाम ब्लूमबर्ग टीवी इंडिया हो गया। इसके बाद 2016 में अनिल अम्बानी की कम्पनी और ब्लूमबर्ग के बीच का लाइसेंस एक्सपायर हो गया और इसे रिन्यू नहीं कराया गया। इसी वर्ष चैनल का नाम बीटीवीआई रखा गया।

इंडिया टुडे के पत्रकार शिव अरूर ने ट्वीट कर लिखा कि तिरंगा टीवी और बीटीवीआई का बंद होना बताता है कि मीडिया जगत के लिए यह कठिन परिस्थिति है। बीटीवीआई के पत्रकार आदित्य राज कौल ने लिखा कि हर यात्रा का एक अंत होता है और रात के अँधेरे के बाद ही नया सवेरा निकलता है।

‘जानता है मेरा बाप कौन है’ – यह बीमारी सिर्फ कॉन्ग्रेस में नहीं, हिंदी साहित्य के ठेकेदारों में भी

श्रीलाल शुक्ल जी की महान कृति राग दरबारी में वैद्य जी के पुत्र रुप्पन बाबू के पात्र का परिचय एक कालजयी वाक्य से किया गया है। रुप्पन बाबू का परिचय करवाते हुए शुक्ल जी लिखते हैं, “वे पैदायशी नेता थे क्योंकि उनके बाप भी नेता थे।”

जिस समय 1968 में शुक्ल जी ने राग दरबारी लिखा था, परिवारवाद नया ही था और स्वतंत्र भारत में कॉन्ग्रेस के प्रथम परिवार की दूसरी ही पीढ़ी उतरी थी। हालाँकि कॉन्ग्रेस के भीतर प्रथम परिवार के लिए नेतृत्व की तीसरी पीढ़ी थी, परन्तु अंग्रेजी राज से ताजा जमींदारी बना देश तब परिवारवाद के दुर्गुणों से पूर्णतया अवगत नहीं हुआ था। यह परिवारवाद राजनीति के अलावा और भी क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा था, यह खुलने में समय लगा जब सम्मान में झुके आम नागरिकों के सर और कृतज्ञता के तले दबे कंधे सीधे होने लगे। तब दिखने लगा कि राजनीति ही नहीं, कला, साहित्य, सिनेमा में भी कई लोग शक्ति का गल्ला थामे इसलिए बैठे हैं, क्योंकि उनके बाप भी सिनेकार या साहित्यकार थे।

साहित्य और भाषा के क्षेत्र में ऐसे सुधिजनों को साहित्य का ठेकेदार या भाषा का दारोगा कहा जा सकता है। भारत की स्थापना के बाद से ही एक शासक दीर्घा बना दी गई और चुने हुए गणमान्य इसमें स्वयं को स्थापित करके बैठ गए। जब-जब ये सत्ता और महत्ता से दूर हुए, इन्होंने प्रयास किया कि भारत विखंडित हो जाए और उससे निकले एक छोटे से भाग में इनकी सत्ता निर्बाध चले। ऐसे लोगों ने भाषा को भाला बनाया और जब-जब इनकी स्थिति पर प्रश्न उठा, ये उससे भारतीय आत्मा को कोंचते रहे। भारतीय भाषा को सूत्र रूप में बाँधने का विरोध करने वाले ये लोग विदेशी भाषा को गौरव पूर्वक अपनाने को तैयार दिखे।

इस सब के बाद भी भाषा का जैसा नुक़सान तथाकथित हिंदी के ठेकेदारों ने किया है, वह संभवतः हिंदी विरोधियों ने नहीं किया। स्वतन्त्रता के बाद के भारत का इतिहास लिखा जाएगा तो उसमे ठेकेदारों का विशेष स्थान होगा। जब भारत में कोई पुल बनाया जाता है, सबसे पहले अभियन्ता, श्रमिक और सीमेंट वाला नहीं ठेकेदार ढूँढा जाता है। यह ठेकेदार बड़े साहब का साला या साला तुल्य व्यक्ति होता है, जिसकी साहब से सेटिंग होती है जो पुल बनाने की ज़िम्मेदारी प्राप्त करने की प्राथमिक आवश्यकता होती है। ऐसे ही साहित्य के ठेकेदार होते हैं जो स्वयं तो कम लिखते हैं, परन्तु साहित्य के समाज के दरबान बन कर चुँगी वसूलते हैं।

जिस प्रकार पुल का नक्शा पास करवाने की चाभी ठेकेदार के पास होती है, नए लेखकों के लेखन को पास कराने की चाभी इनके पास होती है। आम तौर पर ये उसी कर्तव्यनिष्ठता के साथ अकादमियों पर राज करते हैं जैसे राजनेता आदमियों पर शासन करते हैं। दीक्षा और समीक्षा के मध्य इनका बुद्धिजीवी अस्तित्व होता है। जिसकी दीक्षा इन्हें भाती है, उसकी सकारात्मक समीक्षा ये करते हैं और एक सफल लेखक का निर्माण करके ठेकेदारों की अगली पीढ़ी का निर्माण करते हैं।

पुस्तक प्रदर्शनियों में ये मास्टरशेफ की भॉंति एक प्रकाशक पंडाल से दूसरे पंडाल की ओर शाल संभालते हुए, पुस्तकों का लोकार्पण करते हुए पाए जाते हैं। जुगाड़ वाले लेखक की अनपढ़ी पुस्तकों को ये क्रांतिकारी और ऐतिहासिक घोषित करते हैं और जुगाड़विहीन लेखक भीड़ में इनके पीछे धकियाए जाते हुए, बमुश्किल संतुलन रख कर सेल्फ़ी खिंचा कर धन्य हो जाता है, क्योंकि वह भी मानता है कि ये महान हैं, क्योंकि इनके बाप भी महान थे और हमारे बाप भी इनके बाप को महान जानते थे।

इसी महानता के दम पर इन्हें “चूहा, फ्रिज, चाय का पतीला” जैसे गद्य और पद्य के मध्य संतुलित संकलन के लिए मित्र सरकारें इन्हें पुरस्कार देती हैं, जिन्हें ये शत्रु राजनैतिक दल के सरकार में आने पर लौटा कर अपने कर्त्तव्य और राजनैतिक निष्ठा का निर्वहन करते हैं। ये अपने खेमे को ऐसे दौर में रचनात्मक निष्पेक्षता का वज़न देते हैं जिसे आम तौर पर इंटेलेक्चुअल हेफ्ट या बौद्धिक पौष्टिकता कहा जा सकता है। क्योंकि इनके पास खाली समय बहुतायत में होता है। ये अमरीका जाकर भारत में हिंदी के विस्तार पर विचार करते हैं।

इस खाली समय में ये हिंदी लिखने में प्रयासरत सामान्य जन के हिज्जे और मात्राएँ सुधारते हैं। सोशल मीडिया इसमें इनकी मदद करता है, जहाँ भोले-भाले लोग निर्दोषमना कुछ लिखते हैं और ये अपने चंद्र बिंदुओं से लैस हो कर उस गरीब पर आक्रमण कर देते हैं। हिंदी के प्रति इनकी प्रतिबद्धता इसी से परिलक्षित होती है कि गंभीर लेखन के नाम पर इन्हें सबसे मौलिक विचार वह लगता है, जिसमें अंग्रेजी लेख के माध्यम से हिंदी को मैथिली और अवधी जैसी भाषाओं का हत्यारा घोषित किया जाता है।

अपने आप में भाषा के उचित उपयोग को सार्वजनिक विस्तार देना बहुत अच्छा कार्य है। किन्तु यह महती कार्य ये केवल विपरीत राजनैतिक दृष्टिकोण के व्यक्तियों के लिए सुरक्षित रखते हैं। हिंदी में हर स्वर के लिए अक्षर और मात्राएँ हैं। यह भी सत्य है कि भाषा में मात्रा का वही महत्व है जो कॉन्ग्रेस में पारिवारिक उपनाम का और दादी जैसी नाक का। मात्रा के बदलने से मातृ भाषा मात्र भाषा रह जाती है। ऐसे में यदि भाषा में सुधार का ज्ञान विरोधी दृष्टिकोण वालों को धमकाने को न किया जाए तो निस्संदेह सम्मान-योग्य है। परन्तु अनुकूल राजनैतिक दृष्टिकोण के व्यक्तियों की त्रुटियों को ‘नर-मादा’ के प्रसाद की भाँति शिरोधार्य करके ये नरपुंगव विपरीत विचारों वालों को पाणिनि बनाने पर डँटे रहते हैं।

जैसे एक कुशल ठेकेदार सीमेंट में रेती मिलाने का विरोध करने वाले इंजीनियर को तत्काल पहचान कर उसे साइट से भगा देता है, हमारे ये भाषायी ठेकेदार नवागंतुक लेखकों को डरा धमका कर भगाने में व्यस्त रहते हैं। दुख का विषय है कि वर्तमान में हिंदी की हिंदी, ऐसी रुप्पन बाबू-नुमा संतानों ने कर रखी है। ये स्वयं को प्रधानमंत्री की अवमानना के लिए स्वतंत्र मानते हैं परन्तु अपने विरोध में उठे एक स्वर पर भी दिल्ली-सुलभ ‘जानता है मेरा बाप कौन है’ का फ़िकरा फ़ेंक के मारते हैं। यह संसार रुप्पनों का है और इसी रुप्पन रीति से चलेगा। प्रसिद्ध पिता के प्रताप से वंचित लेखक व्यंग्य ही लिखेगा और आशा करेगा कि बिना दीक्षा और समीक्षा के न सिर्फ वह छपे वरन पढ़ा भी जाए, इससे पहले कि कोई नाके पर चुँगी वसूलने को प्रस्तुत हो जाए।

घाटी में रक्तपात की पाकिस्तान की नई साजिश, AUM को हमलों के लिए तैयार कर रहा

अपने आतंकी मंसूबों को पूरा करने के लिए पाकिस्तान नई साजिश रच रहा है। घाटी और उसके बाहर भारत के अलग-अलग हिस्सों में रक्तपात की इस साजिश को अंजाम देने की फिराक में बदनाम खुफिया एजेंसी आईएसआई जुटा है।

जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 के बाद से ही पाकिस्तानी घुसपैठ को लेकर लगातार खुफिया इनपुट आ रहे हैं। हालॉंकि सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के कारण पाकिस्तान अब तक अपने मंसूबों में सफल नहीं हो पाया है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जैश और लश्कर की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पोल खुलने के कारण आईएसआई ने एक नए नाम से आतंकी संगठन तैयार किया है। इसका नाम अल-उमर-मुजाहिद्दीन (AUM) है। इसका अगुआ मुश्ताक अहमद जरगर उर्फ मुश्ताक लातराम है।

12 जून को अनंतनाग में जवानों पर हुए हमले के पीछे इसका ही हाथ माना जाता है। आईबी की रिपोर्ट के मुताबिक जरगर ने पीओके से नए लड़कों की बहाली की है। AUM का मुख्यालय मुजफ्फराबाद में है, जहां वह ISI की निगरानी में एक आतंकी शिविर चलाता है। बताया जाता है कि आईएसआई फिदायीन हमले और बड़े शहरों में अंधाधुंध फायरिंग करवाना चाहता है।

एक अन्य मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आईएसआई अधिकारियों और मौलवियों के एक दल ने बीते हफ्ते बलूचिस्तान और पाकिस्तानी पंजाब के इलाकों का दौरा किया है। इसका मकसद आतंकी मंसूबों को पूरा करने के लिए नए लड़कों की बहाली करना है। बताया जाता है कि आईएसआई निहत्थे पाकिस्तानियों की कश्मीर में घुसपैठ कराकर रक्तपात की एक और साजिश पर काम कर रहा है।

सूत्र के हवाले से बताया गया है कि आईएसआई चाहता है कि भारतीय सेना मजबूर होकर निहत्थे लोगों पर गोली चलाए ताकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के प्रोपगेंडा को मजबूती मिल सके। सूत्रों के मुताबिक इसी कड़ी में फेक तस्वीरें और न्यूजों को भी योजनाबद्ध तरीके से फैलाया जा रहा है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान के प्रोपगेंडा को अभी तक दुनिया में किसी ने समर्थन नहीं दिया है। सभी मुल्कों ने कश्मीर को भारत का आंतरिक मसला बताया है। इससे पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। इस बौखलाहट में उसके प्रधानमंत्री इमरान खान परमाणु जंग की धमकी भी दे चुके हैं।

भामाशाह पर राजनीति: वसुंधरा राजे के काम को CM गहलोत ने बताया – क्रांति, किया राजीव गाँधी को याद

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य में वसुंधरा राजे सरकार के दौरान लागू किए गए भामाशाह स्वास्थ्य योजना को बंद कराने के बाद अब उसी भामाशाह के नाम पर उसी सरकार द्वारा शुरू किए गए भामाशाह टेक्नो हब की जमकर तारीफ की है। बता दें कि सीएम गहलोत ने भामाशाह स्वास्थ्य योजना को बंद करने के पीछे तर्क दिया था कि केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना लागू की जाएगी। मगर, गहलोत सरकार ने राजस्थान में लागू होने वाली केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना का नाम बदल कर आयुष्मान भारत महात्मा गाँधी स्वास्थ्य योजना कर दिया था।

शनिवार (अगस्त 31, 2019) को उन्होंने भामाशाह के नाम पर ही चल रहे टेक्नोहब और स्टेट डेटा सेंटर का निरीक्षण किया। इस दौरान सीएम ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक टेक्नोलॉजी, थ्री-डी प्रिंटर तकनीक एवं एक्स आर-वी आर तकनीक पर हो रहे काम की काफी प्रशंसा की।

उन्होंने कहा कि वो इसे आईटी की क्रांंति के रूप में देखते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट को देखकर उन्हें राजीव गाँधी की याद आती है और इस प्रोजेक्ट के जरिए उनके उस समय के सपने अभी भी पूरे होने की संभावना बनी हुई है। अशोक गहलोत ने कहा कि राजीव गाँधी ने जो सपना देखा था, उसे यह सेंटर पूरा कर रहा है। उन्होंने इस काम और भी आगे बढ़ाने की बात कही। सीएम गहलोत के ट्वीट को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने री-ट्वीट करते हुए उनका आभार जताया।

गौरतलब है कि साल 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए जयपुर में भामाशाह टेक्नो हब (BTH) का उद्घाटन किया था। वसुंधरा राजे ने कहा था कि इसमें 700 उद्यमियों को एक छत के नीचे काम करने की सुविधा मिलेगी। इस योजना के तहत 1,000 से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत करने के साथ ही स्टार्टअप को सभी तरह की सुविधाएँ देने के लिए कई ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनियों जैसे सिस्को नेटवर्किंग एकेडमी, आईबीएम आईएक्स एकेडमी, एचपी एकेडमी, इंफोसिस कैंपस कनेक्ट व ओरेकल वर्कफोर्स के साथ साझेदारी की गई थी।