Home Blog Page 5537

मीडिया में बने रहने के लिए PAK की भाषा बोलते हैं दिग्विजय और उनके नेता: शिवराज सिंह चौहान

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मीडिया में बने रहने के लिए दिग्विजय सिंह और उनके नेता पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं। भाजपा उपाध्यक्ष ने कह कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी के बयान का जिक्र पाकिस्तान अपने पत्र में करता हैं। जहॉं तक भाजपा और आरएसएस का सवाल है तो उनकी देशभक्ति से पूरा देश वाकिफ है।

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री​ दिग्विजय सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने यह बात कही है। दिग्विजय ने मध्य प्रदेश के भिंड में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि भाजपा और बजरंग दल के लोग पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से पैसा लेते हैं। साथ ही कहा था कि ISI के लिए जासूसी समुदाय विशेष वाले कम और दूसरे धर्म वाले ज्यादा कर रहे हैं।

इसके जवाब में शिवराज सिंह ने ट्वीट किया, “दिग्विजय सिंह जानबूझकर ऐसी बयानबाज़ी करते हैं। वह और उनके नेता पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं। उनकी विश्वसनीयता बची नहीं है। मैं उनके बयान को इसलिए गंभीरता से नहीं लेता, क्योंकि सारा देश संघ और भाजपा की देशभक्ति से परिचित है, हमें दिग्विजय सिंह के प्रमाण की ज़रूरत नहीं है। दिग्विजय सिंह, ओसामा जी और हाफीज़ जी कहने वाले नेता हैं। वह विवादित बयान इसलिए देते हैं, ताकि सुर्खियों में बने रहें। वे और उनके नेता जो पाकिस्तान चाहता है, वो बोलते हैं। ऐसे नेता को मैं गंभीरता से नहीं लेता और न देश लेता है।”

वहीं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने मीडिया से बात करते हुए दिग्विजय सिंह के बयान को बेहद आपत्तिजनक बताया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को इस बारे में अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने दिग्विजय सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा कि वो पहले भी भाजपा और संघ को लेकर आधारहीन बयान देते आए हैं।

आरिफ मोहम्मद ने कहा- भारत में पैदा होना खुशनसीबी, लोग बोले- आप सच्चे मुस्लिम

केरल के राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर आरिफ़ मोहम्मद खान ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, “यह सेवा करने का अवसर है। मैं खुशनसीब हूँ कि भारत जैसे देश में जन्म लिया, जो अपनी व्यापकता और अपनी विविधताओं के कारण धनी है। मेरे लिए भारत के इस हिस्से को जानने का ये बहुत बड़ा अवसर है, ये भारत की सीमा का निर्माण करता है, जिसे भगवान का अपना देश भी कहा जाता है। “

गौरतलब है कि 1986 में शाह बानो मामले में राजीव गाँधी की कैबिनेट से इस्तीफा देने वाले आरिफ़ मोहम्मद अभी हाल ही में ‘द वायर’ के एक इंटरव्यू में बेबाकी से अपनी राय रखते नजर आए थे। इस साक्षात्कार में केरल के नए राज्यपाल ने कई भ्रांतियों को ध्वस्त करते हुए अपनी बात रखी थी। इसके अलावा बीते दिनों तीन तलाक को गैर कानूनी बनाने जैसे कई मुद्दों पर मोदी सरकार के फैसलों का समर्थन कर चुके हैं।

उनके राज्यपाल नियुक्त होने से सोशल मीडिया पर यूजर्स भी काफी खुश नजर आ रहे हैं। लोग अपनी-अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कह रहे हैं कि वो इस पद के काबिल थे और वो एक सच्चे मुस्लिम हैं, जिन्होंने हमेशा भारत के लिए सोचा।

यूजर्स इस खबर के बाद मोदी सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि आरिफ मोहम्मद जैसे नेताओं को राजनीति में बढ़ावा देकर देशभक्ति को परिभाषित करे।

इसके अलावा केरल के नए राज्यपाल की सोच और उनके ज्ञान को भी लोग खूब सराह रहे हैं और उनके केरल के गवर्नर के रूप में उत्कृष्ट विकल्प मान रहे हैं।

प्रगतिशील मुस्लिम चेहरे के तौर पर पहचान रखने वाले आरिफ़ मोहम्मद ख़ान वंदे मातरम का उर्दू में अनुवाद कर चुके हैं। शाहबानो मामले में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया था और मुस्लिम कट्टरपंथियों के सामने घुटने टेकने के लिए कॉन्ग्रेस सरकार का विरोध किया था। तीन तलाक बिल पर बहस के दौरान प्रधानमंत्री ने उनके बयान का हवाला भी दिया था।

हमारे पास सभी आकार के स्मार्ट बम हैं, भारत के 22 टुकड़े करेंगे: करंट लगने के बाद पाक मंत्री का नया दावा

पाकिस्तान के रेलमंत्री शेख रशीद अहमद ने अजीबोगरीब दावे किए हैं। लंदन में अंडों से पिट चुके पाकिस्तानी मंत्री ने दावा किया कि उनके देश के पास बड़ी संख्या में ‘स्मार्ट बम’ हैं। शेख रशीद वही मंत्री हैं, जिन्हें मोदी का नाम लेते ही करंट लगा था। जम्मू-कश्मीर की जनता के प्रति कथित एकजुटता दिखाने समय शेख रशीद ने जैसे ही माइक लेकर पीएम मोदी को कोसना शुरू किया, उन्हें जोर का झटका लगा। हमेशा विवादों में रहने वाले शेख रशीद सुर्ख़ियों में रहने के लिए अपना ही मज़ाक बनाते रहते हैं।

शेख रशीद ने दावा किया कि पाकिस्तान के पास हर आकार के ‘स्मार्ट बम’ हैं। पाकिस्तानी मंत्री ने भारत के टुकड़े कर के 22 पाकिस्तान बनाने का दावा भी किया। उन्होंने एनआरसी जैसे भारत के आंतरिक मुद्दों पर भी टिप्पणी की। रशीद ने कहा कि एनआरसी का उद्देश्य उनके मजहब वालों को रास्ते से हटाने के लिए किया गया है। बता दें कि घुसपैठियों को चिह्नित कर उन्हें वापस प्रत्यर्पित करने के लिए भारत सरकार ने एनआरसी सूची तैयार की है।

पाकिस्तानी मंत्री ने कहा कि भारतीय अल्पसंख्यकों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाने के लिए एनआरसी तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि असम, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में उनके मजहब के लोगों को नीचा दिखाया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हिटलर और मुसलोनी जैसे तानाशाहों की सूची में रखते हुए कहा कि उनके लिए समुदाय विशेष के 25 करोड़ का सामना करना असंभव होगा। उन्होंने इमरान ख़ान की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्हीं की बदौलत आज अंतरराष्ट्रीय मीडिया जम्मू-कश्मीर पर ध्यान दे रहा है और उसके बारे में आर्टिकल लिख रहा है।

पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रशीद ने दावा किया कि पाकिस्तानी फ़ौज की तैयारियों पर बयान देने के लिए फ़ौज ने उन्हें रखा हुआ है। हालाँकि, आधिकारिक रूप से पाकिस्तान में यह काम आसिफ गफूर का है लेकिन आजकल वे बॉलीवुड पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हाल ही में गफूर ने शाहरुख़ ख़ान को कश्मीरियों के लिए कथित आवाज़ उठाने को कहा था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास 75% ‘मिसाइल टेक्नोलॉजी’ है और 25% ‘एयर टेक्नोलॉजी’ है।

शेख रशीद ने अपने देश के विदेश मंत्री से अपील की कि वे जम्मू-कश्मीर को लेकर इस्लामी राष्ट्रों को लगातार पत्र लिखते रहें और प्रतिदिन ऐसा करें। ख़ुद को फ़ौज द्वारा नियुक्त बताते समय शेख रशीद ये भूल गए कि पाकिस्तान की सरकार लोकतान्त्रिक रूप से चुनी होने का दावा करती है।

हिन्दू होने के नाते भारत की राष्ट्रीयता मिल जाने का प्रावधान जब तक लागू नहीं होगा, तब तक…

थोड़े ही दिन पहले सोशल मीडिया की बड़ी बहसों का मुद्दा रहा – ज़ोमैटो। मेट्रो ही नहीं, टायर टू कहे जाने वाले पटना, इंदौर, भोपाल, लखनऊ जैसे शहरों में भी इसके कर्मी सड़कों पर निकलते ही बड़ी आसानी से नजर आ जाते हैं। हाल में इनके बारे में परिवहन विभाग में पूछताछ की तो पता चला कि वैसे तो मोटरसाइकिल के लिए भी कमर्शियल और प्राइवेट के नियम बने हैं, मगर ये कंपनी अपने लिए चलने वाली मोटरसाइकिल को कमर्शियल की लिस्ट में डालती है या नहीं ये आरटीआई के लायक मुद्दा है। इस बारे में कोई भी सीधा बताने को तैयार नहीं हुआ।

मोटे तौर पर खाना पहुँचाने वाली ये कंपनी करती क्या है? इनके खुद के कोई किचन-रेस्तरां हैं क्या? जी नहीं, इनका खुद का खाना बनाने का कोई इंतजाम नहीं होता। इनके पास एक लिस्ट ग्राहकों की होती है और दूसरी शहर भर के रेस्तरां की लिस्ट होती है। उन्हें पता है कि आपके बजट में आपकी पसंद का व्यंजन कहाँ मिलेगा। वो बस आपके लिए आपकी पसंद का व्यंजन आपके घर पहुँचाने के दलाल हैं। बिलकुल ऐसे ही दलाल ओला/उबर या फिर ओयो वाले भी हैं। ओला/उबर वालों के पास अपनी कोई टैक्सी नहीं, ओयो वालों के पास अपना कोई होटल नहीं। ये आपकी जरुरत को आपके बजट में पूरा कर देने की दलाली लेते हैं।

दलालों का ये परिष्कृत और स्वीकार्य रूप जब देख चुके तो सोचिए कि सरकारी दफ्तरों पर क्या होता है? आपको फॉर्म भरना नहीं आता, फॉर्म कहाँ जमा करना है ये नहीं पता। ऐसी दर्जन भर जरुरतें होती हैं जिसकी वजह से पासपोर्ट ऑफिस, ड्राइविंग लाइसेंस बनने की जगह या ऐसे दूसरे सरकारी दफ्तरों के बाहर दलालों की पूरी एक व्यवस्था ही काम करती है। ऐसे ही दलालों ने पिछले दशकों में वोटर कार्ड से लेकर आधार कार्ड तक बनवा डाले होंगे। यानी आप जिसे घुसपैठिया समझ रहे हैं, वो सरकारी दस्तावेजों के हिसाब से एक साधारण नागरिक से ज्यादा नागरिकता रखता है। ऐसे में एनआरसी का क्या होगा?

बात यहीं ख़त्म हो जाती तो कोई बात नहीं थी। एनआरसी के हालिया समाचार बताते हैं कि करीब-करीब 19 लाख लोगों का आँकड़ा जो उन्होंने निकाला है, उसमें से अधिकांश हिन्दू ही हैं। ये संभवतः वो गरीब मजदूर होंगे, जो एक पीढ़ी पहले वहाँ गए और वहीं के होकर रह गए। दूसरी तरफ बांग्लादेश पहले से ही अड़ा हुआ है कि उसकी सीमा से भारत में कोई अवैध घुसपैठ हुई ही नहीं है! पिछले महीने मंत्री एस जयशंकर कह चुके हैं कि एनआरसी एक आतंरिक प्रक्रिया है और इससे बांग्लादेश को चिंतित होने की जरूरत नहीं। वहीं अमित शाह कहते हैं कि अवैध घुसपैठ बांग्लादेश से जुड़ा मुद्दा ही है!

जिन उन्नीस लाख लोगों को एनआरसी से बाहर किया गया है, उनकी अपील को अगर फोरेनर ट्रिब्यूनल ने ठुकरा दिया तो उन्हें लम्बी कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ेगी। इन सबके बीच याद दिला दें कि एक सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल भी आया था, जिसे भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। करीब पाँच साल का वक्त और 1000 करोड़ से ऊपर की धनराशी खर्च करने के बाद अगर एनआरसी के जरिए भारतीय नौकरशाही कोई फायदा नहीं पहुँचा पाई है, तो उसके निकम्मेपन पर ये एक और मेडल ही होगा। अगर गौर से सोचा जाए तो शायद एनआरसी की सोच में ही कमी है। सेक्युलर सोच के साथ बने इस नियम के बदले भारत को हिन्दुओं का नैसर्गिक देश मान कर काम शुरू होना चाहिए था।

वो बांग्लादेश या पाकिस्तान में जारी शोषण और लड़कियों के जबरन अपहरण, बलात्कार, और फिर विवाह का सामना नहीं कर सकते, ये काफी पहले ही तय हो गया था। जब इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री जोगेंद्र नाथ मंडल इस जय भीम के साथ जय मीम को जोड़ने के मुगालते से बाहर आए, तभी वो सब कुछ छोड़ कर 1950 के दौर में भारत लौट आए थे। गुमनामी की मौत मरे जोगेंद्र नाथ मंडल की गलतियों से सीखकर सिर्फ हिन्दू होने के नाते भारत की राष्ट्रीयता मिल जाने का प्रावधान जब तक लागू नहीं होगा, तब तक ऐसी समस्याएँ जारी रहेंगी।

बाकी रहा कागज़ी तौर पर नागरिकता सिद्ध करने का सवाल तो उसके लिए दलाली की अर्थव्यवस्था को तोड़ना होगा। अफसरशाही के शामिल रहते और नागरिकों के दलाली को एक जीवनशैली मानने के दौर में ये दलाली ख़त्म होगी, ये सोचना भी एक सपने जैसा ही है!

बंगाल: BJP सांसद अर्जुन सिंह की कार पर TMC गुंडों का हमला, पार्टी कार्यालय पर कब्जे की कोशिश

पश्चिम बंगाल के भाजपा सांसद अर्जुन सिंह की कार पर हमला हुआ है। हमलावार सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस से जुड़े बताए जा रहे। हमला उत्तर 24 परगना के श्यामनगर रेलवे स्टेशन के पास हुआ।

अर्जुन सिंह के मुताबिक टीएमसी के लोग भाजपा के कार्यालय पर कब्जे की कोशिश कर रहे थे। इसकी जानकारी मिलने पर जब सिंह मौके पर पहुॅंचे तो उनकी कार में तोड़फोड़ की गई। सिंह ने बताया कि घटना के वक़्त पुलिस भी मौके पर मौजूद थी।

https://platform.twitter.com/widgets.js

गौरतलब है कि राजनीतिक हिंसा के लिए बदनाम रहे पश्चिम बंगाल में अरसे से भाजपा से जुड़े लोगों को टीएमसी कार्यकर्ता निशाना बनाते आ रहे हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष पर बीते शुक्रवार को ही हमला किया गया था। उसी दिन उत्तर 24 परगना जिले के उत्तर बनगांव क्षेत्र के विधायक व भाजपा नेता विश्वजीत दास पर भी हमला हुआ था।

सांसद अर्जुन सिंह पर भी पूर्व में हमला हो चुका है। अर्जुन सिंह पहले TMC में ही थे। वो 14 मार्च 2019 को बीजेपी में शामिल हुए थे। पार्टी ने उन्हें बैरकपुर लोकसभा सीट से दिनेश त्रिवेदी के ख़िलाफ़ खड़ा किया था। कड़े मुक़ाबले में अर्जुन सिंह ने त्रिवेदी को 14857 मतों से हरा दिया था।

ख़बर के अनुसार, 25 जुलाई की रात अर्जुन सिंह के आवास पर गोलीबारी करते हुए बम फेंक कर हमला किया गया था। इस घटना से संबंधित मामला 24 परगना ज़िले में जगतदल पुलिस थाने में दर्ज है। लोकसभा चुनाव में वोटिंग के दौरान भी बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह ने ख़ुद पर TMC के कार्यकर्ताओं के द्वारा हमले का आरोप लगाया था।

‘Oxford English’ से नहीं, मोदी-विरोध से ही जीते हो लोकसभा चुनाव: थरूर को कॉन्ग्रेस सांसद ने लताड़ा

कॉन्ग्रेस वालों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंधे विरोध की कितनी बुरी लत लग गई है, इसका नज़ारा हर दूसरे-तीसरे दिन सामने आ रहा है। केरल प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी द्वारा स्पष्टीकरण माँगने, सोनिया गाँधी द्वारा ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताए जाने और वीरप्पा मोइली द्वारा ‘पब्लिसिटी का भूखा’ कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर अब केरल के साथी सांसद के मुरलीधरन के निशाने पर हैं।

वडकर से सांसद मुरलीधरन ने कहा है कि थरूर मोदी विरोध के चलते ही सांसदी जीते हैं, अपनी ‘Oxford English‘ से नहीं। गौरतलब है कि शशि थरूर आम तौर पर अंग्रेज़ी शब्दावली के शीर्ष समकालीन जानकारों में गिने जाते हैं और इसी के चलते कभी प्रशंसा तो कभी मज़ाकिया आलोचना का भी केंद्र बने रहते हैं।

मुरलीधरन ने बिना थरूर का नाम लिए कटाक्ष करते हुए कहा कि (थरूर की लोकसभा सीट) तिरुवनंतपुरम के पूर्व सांसद ए चार्ल्स “Oxford English” नहीं जानते थे, तब भी वे वहाँ से तीन बार जीतने में सफल रहे थे।

बवाल काटना शुरू हुआ जब शशि थरूर ने अपने साथी जयराम रमेश और अभिषेक मनु सिंघवी द्वारा दी गई नसीहत का समर्थन किया। रमेश ने कहा था कि हर समय मोदी की आलोचना करने से कुछ हासिल नहीं होगा। उनकी सरकार के सही कामों की तारीफ होनी चाहिए। उसी में जोड़कर सिंघवी ने कह दिया कि उज्ज्वला योजना सहित मोदी सरकार के अच्छे काम भी हैं और थरूर ने उस पर एक ट्विटर यूज़र के सवाल के जवाब में लिखा कि वे तो 6 साल से मोदी की न्यायोचित तारीफ पर ज़ोर दे रहे हैं, ताकि जब वे आलोचना करें तो उसमें कोई विश्वसनीयता हो।

आलोचनाओं का बवंडर

उसके बाद मोदी की आलोचना तो थमी नहीं, थरूर के खिलाफ कॉन्ग्रेस नेताओं का पूरा सैलाब उमड़ पड़ा। ‘अंतरिम’ अध्यक्षा सोनिया गाँधी ने उनके बयान को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया, पार्टी के सांसद ही उन पर टूट पड़े और फिर केरल की प्रदेश कॉन्ग्रेस ने उनसे स्पष्टीकरण माँग लिया। वीरप्पा मोइली ने उन्हें ‘पब्लिसिटी का भूखा’ बताया। इस बीच खिसियाए थरूर ने भी कॉन्ग्रेस वालों को नसीहत दे डाली

“मैं नरेंद्र मोदी सरकार का एक कठोर आलोचक रहा हूँ और मुझे उम्मीद है कि सकारात्मक आलोचक रहा हूँ। समावेशी मूल्यों और संवैधानिक सिद्धांतों के कारण ही मैंने लगातार 3 बार चुनाव जीता है। मैं अपने कॉन्ग्रेस के साथियों से निवेदन करता हूँ कि मेरे विचारों की कद्र करें, यदि वे उससे सहमत नहीं हैं, तब भी।”

जब बल्ले से छक्का मार सकता हूँ तो तलवार से इंसान क्यों नहीं मार सकता: दाऊद का समधी जावेद मियांदाद

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से पाकिस्तान के नेता और सेना ही बौखलाए हुए नहीं है। कुछ खिलाड़ी भी हिले हुए हैं। इनमें डॉन दाऊद इब्राहिम के समधी पूर्व क्रिकेटर जावेद मियांदाद का नाम महत्वपूर्ण है। पूर्व में भारत पर हमले को लेकर बड़बोलापन दिखा चुके मियांदाद अब हाथ में तलवार लेकर लहराते नजर आए हैं।

सोशल मीडिया में वायरल हो रहे वीडियो में वे कहते नजर आ रहे हैं- जब बल्ले से छक्का मार सकता हूॅं तो इससे इंसान क्यों नहीं मार सकता। वे कह रहे हैं, “कश्मीरी भाइयों फ़िक्र ना करो, हम आपके साथ हैं। मेरे पास बल्ला भी है छक्का मारा था अब ये (तलवार) चलेगा। जब बल्ले से छक्का मार सकता हूँ तो इससे (तलवार) से इंसान क्यों नहीं मार सकता।” यह वीडियो कश्मीर को लेकर पाकिस्तान में हुए हालिया प्रदर्शन का बताया जा रहा है।

पिछले दिनों मियांदाद और एक अन्य क्रिकेटर शाहिद अफरीदी ने एलओसी का दौरा करने की बात कही थी। अपने प्रधानमंत्री इमरान खान के प्रोपगेंडा का समर्थन करते हुए मियांदाद ने ट्विटर पर वीडियो शेयर कर कहा था, “हम वहॉं जाएँगे और शांति के लिए प्रार्थना करेंगे।”

गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के हाथों कूटनीतिक हार झेल चुका पाकिस्तान पूरी तरह से बौखला गया है और परमाणु युद्ध की धमकी भी दे रहा है। पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे पर विश्व से मदद की गुहार लगाई और संयुक्त राष्ट्र से भी संपर्क किया। लेकिन पाकिस्तान को मुँह की खाना पड़ी। सभी ने इस मुद्दे को द्विपक्षीय करार देते हुए टिप्पणी से इनकार कर दिया। G-7 समिट के दौरान पीएम मोदी ने ट्रंप के सामने ही साफ कर दिया कि कश्मीर का मुद्दा भारत-पाकिस्तान का द्विपक्षीय मसला है और इसमें वो किसी तीसरे देश का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेंगे।

सेक्स वर्कर ने निक़ाह से किया इनकार, अयूब ख़ान ने 5 टुकड़े कर नहर में फेंका

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 20 अगस्त को हुई सेक्स वर्कर की हत्या की गुत्थी सुलझा ली है। इस मामले में पुलिस ने 32 वर्षीय मोहम्मद अयबू ख़ान को गिरफ्तार किया है। अयूब ने सेक्स वर्कर को निकाह का प्रस्ताव दिया था। प्रस्ताव ठुकराए जाने पर उसने हत्या कर दी। अयबू पहले से शादीशुदा है। उसका 2008 में रेशमा से निकाह हुआ था और उसके तीन बच्चे हैं।

ख़बर के अनुसार, सेक्स वर्कर से अयूब की मुलाक़ात जीबी रोड पर चार साल पहले हुई थी। समय बीतने के साथ-साथ अयूब और महिला के बीच मुलाक़ातों ने प्यार का रूप ले लिया। इसके बाद अयूब ने उस महिला से सेक्स वर्कर का पेशा छोड़ निक़ाह करने को कहा। महिला यह बात जानती थी कि वो पहले से शादीशुदा है इसलिए उसने इनकार कर दिया। इस बात से वो काफ़ी नाराज़ हुआ और उसके मन में बदले की भावना ने घर कर लिया।

20 अगस्त 2019 को अयूब ने सेक्स वर्कर को उसके साथ शाम को घूमने के लिए राज़ी कर लिया। बवाना नहर के पास पहुँचते ही मौक़ा पाकर उसने महिला का गला घोंट दिया। फिर अयूब ने उसके शरीर के पाँच टुकड़े कर नहर में फ़ेंक दिए।

हत्या के अगले दिन महिला की लाश बवाना नहर से बरामद की गई थी। 30 अगस्त को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम ने एक मुखबिर की सूचना के आधार पर अयूब को गिरफ़्तार किया। साथ ही हत्या के दौरान वो जिस स्कूटी से महिला से मिलने पहुँचा था, उसे भी बरामद कर लिया गया।

केरल के राज्यपाल बने आरिफ मोहम्मद खान: शाहबानो मामले में राजीव गॉंधी की सरकार से दिया था इस्तीफा

पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान केरल के नए राज्यपाल होंगे। तीन तलाक को गैर कानूनी बनाने वाले बिल सहित कई मसलों पर वे हाल में केंद्र की मोदी सरकार के फैसले का समर्थन कर चुके हैं। 1986 में शाहबानो मामले में राजीव गॉंधी और कांग्रेस के स्टैंड से नाराज होकर खान ने पार्टी और केंद्रीय कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। इस मामले में राजीव गॉंधी की सरकार ने मुस्लिम नेताओं के दबाव में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कानून संसद से पास करवाया था।

खान के अलावा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तीन और नए राज्यपाल नियुक्त किए हैं। राष्ट्रपति भवन की ओर से रविवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार डॉ. टी सुंदरराजन तेलंगाना की राज्यपाल बनाई गईं हैं। तमिलनाडु भाजपा की कमान उन्हीं के हाथों में है। बंडारू दत्तात्रेय हिमाचल प्रदेश और भगत सिंह कोशियारी महाराष्ट्र के गवर्नर बनाए गए हैं। इनके अलावा हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कलराज मिश्र का तबादला कर उन्हें राजस्थान का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

प्रगतिशील मुस्लिम चेहरे के तौर पर पहचान रखने वाले आरिफ़ मोहम्मद ख़ान 1951 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में पैदा हुए। उनका परिवार बाराबस्ती से ताल्लुक रखता है। बुलंदशहर ज़िले में 12 गाँवों को मिलाकर बने इस इलाक़े में शुरुआती जीवन बिताने के बाद ख़ान ने दिल्ली के जामिया मिलिया स्कूल से पढ़ाई की। उसके बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और लखनऊ के शिया कॉलेज से उच्च शिक्षा हासिल की।

ख़ान छात्र जीवन से ही राजनीति से जुड़ गए थे। भारतीय क्रांति दल नाम की स्थानीय पार्टी के टिकट पर पहली बार उन्होंने बुलंदशहर की सियाना सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे। इसके बाद 26 साल की उम्र में 1977 में वो पहली बार विधायक चुने गए।

1980 में कानपुर और 1984 में बहराइच से लोकसभा चुनाव जीतकर वो सांसद बने। राजीव गाँधी की सरकार में मंत्री बने। शाहबानो के पक्ष में आए सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की आरिफ़ मोहम्मद ने ज़बरदस्त पैरवी की थी और 23 अगस्त 1985 को लोकसभा में दिया गया उनका भाषण आज भी याद किया जाता है।

कॉन्ग्रेस से दो बार, जनता दल और बसपा से से एक-एक बार लोकसभा सदस्य रह चुके आरिफ़ मोहम्मद ख़ान 2004 में भाजपा में शामिल हुए थे। भाजपा के टिकट पर कैसरगंज सीट से चुनाव लड़ा लेकिन वो हार गए। 2007 में उन्होंने भाजपा भी छोड़ दिया। उन्होंने वंदे मातरम का उर्दू में अनुवाद भी किया है। 

असम के बाद दिल्ली-मुंबई में NRC की माँग, अवैध प्रवासियों को बाहर करने के लिए NDA नेता लामबंद

असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) की कवायद से 19 लाख से अधिक अवैध अप्रवासी चिह्नित होने के बाद देश भर के कई हिस्सों में अपने-अपने यहाँ NRC लागू किए जाने की माँग ज़ोर पकड़ने लगी है। माँग उठाने वालों में इस समय सबसे बड़ा नाम केंद्र की सत्तारूढ़ भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी और केंद्रीय मंत्री व शिवसेना नेता अरविन्द सावंत का है। दोनों ने अपने-अपने प्रदेश में NRC लागू कर अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों को बाहर निकालने की माँग की है।

“हमने असम में समर्थन किया, अब मुंबई में होना चाहिए”

केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री अरविन्द सावंत ने असम की NRC कवायद की तारीफ़ करते हुए संवाददाताओं से कहा, “NRC की असम में बहुत ज़्यादा ज़रूरत थीा। वहाँ के मूल निवासियों की समस्या का समाधान के लिए यह आवश्यक था। इसलिए हमने सरकार के NRC कदम का समर्थन किया। अब हम ऐसी ही कवायद मुंबई में चाहते हैं, ताकि यहाँ रह रहे बांग्लादेशियों को बाहर किया जा सके।”

उन्होंने मुंबई में NRC को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी अहम बताया। उन्होंने कहा, “NRC से असम में पता चलेगा कि बांग्लादेश के कितने लोग यहाँ अवैध रूप से रह रहे हैं। इसे यहाँ (मुंबई में) करना बहुत ज़रूरी है।”

“बांग्लादेशियों-रोहिंग्यों के चलते हालात खतरनाक”

दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने दिल्ली में NRC की माँग को दोहराते हुए इसके लिए जल्दी ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मिलने की बात की है। उनके अनुसार आपराधिक गतिविधियों में शामिल बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं समेत अवैध अप्रवासियों की बड़ी संख्या के चलते शहर की स्थिति खतरनाक है। उन्होंने इस मुद्दे पर शाह के पूर्ववर्ती गृह मंत्री राजनाथ सिंह को भी पत्र लिखकर दिल्ली में NRC कराए जाने की माँग की थी।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “यह एक बहुत ही अनिश्चित स्थिति है जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। मैं जल्द ही गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर उनसे अनुरोध करूंगा कि राष्ट्रीय राजधानी में भी एनआरसी तैयार कराई जाए।”

मनोज तिवारी ने दावा किया कि दिल्ली में रहने वाले समुदाय विशेष के लोग भी NRC के पक्ष में हैं, क्योंकि “अवैध अप्रवासियों की आपराधिक गतिविधियों की वजह से उनके समुदाय की छवि खराब हुई है।” उन्होंने साथ ही दावा किया कि दिल्ली में अवैध प्रवासी स्थानीय लोगों को उनके अधिकारों और अवसरों से वंचित कर रहे हैं।