Home Blog Page 5538

कौन है मिस ‘A’, जिसका सुप्रीम कोर्ट के 2 जज 5 घंटों तक करते रहे इंतजार

भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने के बाद लापता हुई LLM की छात्रा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को देर रात तक सुनवाई की।

जस्टिस आर बानुमति और जस्टिस ए. एस. बोपन्ना ने करीब 5 घंटे तक छात्रा का इंतजार किया। पहली सुनवाई दिन में 1.15 मिनट पर हुई, जब पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से लड़की की लोकेशन माँगी और पूछा कि कितने समय में उसे सुप्रीम कोर्ट लाया जा सकता है?

दोपहर 1.35 मिनट पर उत्तर प्रदेश सरकार के अधिवक्ता AAG (Assistant Attorney General) ऐश्वर्या भाटी ने न्यायालय को सूचित किया कि कानून की यह छात्रा शुक्रवार को राजस्थान में मिली है और उसे उसके माता-पिता से मिलाने के लिए शाहजहाँपुर ले जाया जा रहा है। उन्होंने पीठ को बताया कि पुलिस की सुरक्षा में छात्रा फतेहपुर सीकरी के पास है और सुप्रीम कोर्ट आने में उसे ढाई घंटे लगेंगे। पीठ ने कहा कि वो उसका इंतजार करेंगे।

लेकिन यूपी पुलिस की टीम 2 गाड़ियों में छात्रा को शाम 6.30 बजे लेकर पहुँची। इसके बाद दोनों जजों ने अलग से अकेले में उससे बात की। ये बातचीत करीब 1 घंटे तक चली और इसके बाद शाम 7.40 बजे पीठ ने अदालत में सुनवाई शुरू की ओर फैसला सुनाया। पीठ ने साफ कर दिया कि वो इस मामले में सोमवार (सितंबर 02, 2019) को एक बार फिर ‘मिस A’ यानी छात्रा से अलग से बातचीत करेगी और फिर निर्देश जारी करेगी।

वकीलों के एक समूह ने प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई को पत्र लिख कर इस मामले का संज्ञान लेने का अनुरोध किया था, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने इसका स्वत: संज्ञान लिया था।

छात्रा के मिलने की जानकारी देते हुए उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओपी सिंह ने बताया, “हमारी टीमें पिछले चार-पाँच दिनों से कई जगहों पर फैली हुई थीं। छात्रा राजस्थान में मिली है। उसे शाहजहाँपुर लाया जा रहा है।”

बता दें कि शाहजहाँपुर स्थित स्वामी शुकदेवानंद विधि महाविद्यालय से एलएलएम कर रही छात्रा ने 24 जून को सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया था। इस वीडियो में उसने पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर कई लड़कियों की जिंदगी बर्बाद करने का आरोप लगाया था एवं उनसे खुद को तथा अपने परिवार को जान का खतरा बताया था।

इसके बाद चिन्मयानंद के खिलाफ अपहरण और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। चिन्मयानंद महाविद्यालय की प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हैं। हालाँकि, 72 वर्षीय स्वामी चिन्मयानंद ने दावा किया है कि उनकी छवि खराब करने के लिए षड्यंत्र किया जा रहा है।

2025 तक खत्म हो जाएगा पाकिस्तान, कराची-रावलपिंडी में खरीद सकेंगे मकान: RSS नेता

आरएसएस नेता और राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के प्रमुख इंद्रेश कुमार ने शनिवार को दावा किया कि आने वाले 2025 तक पाकिस्तान खत्म हो जाएगा। उसका हिंदुस्तान में विलय हो जाएगा। उन्होंने कहा, “आप लिखकर ले लीजिए 5-7 साल में आप कराची, लाहौर, रावलपिंडी, सियालकोट में मकान खरीदेंगे और बिज़नेस करने का मौका मिलेगा।” वे कश्मीर पर एक सभा को सम्बोधित कर रहे थे।

उन्होंने याद दिलाया कि 1947 के पहले पाकिस्तान हिंदुस्तान का ही हिस्सा था और दावा किया कि 2025 के बाद वह फिर से हिंदुस्तान का ही हिस्सा बन जाएगा। उन्होंने “अखंड भारत” का भी ज़िक्र किया।

“हम ये सपने लेकर बैठे हैं कि लाहौर जाकर बैठेंगे”

इंद्रेश ने राजनीतिक इच्छशक्ति में बदलाव की भी बात की। उन्होंने कहा, “अब विलपावर पॉलिटिकली चेंज हो गई। इसीलिए हम ये सपने लेकर बैठे हैं कि लाहौर जाकर बैठेंगे और कैलाश मानसरोवर के लिए चीन से इजाज़त नहीं लेनी पड़ेगी। ढाका में भी हमने अपने हाथ की सरकार बनाई है।”

इंद्रेश ने यूरोपियन यूनियन की तर्ज पर “भारतीय यूनियन ऑफ़ अखंड भारत” के जन्म का रास्ता तैयार होने की भी बात कही। इसके साथ ही उन्होंने पुलवामा आतंकी हमले के बाद बालाकोट में हुए वायुसेना के ऑपरेशन का सबूत माँगने के लिए विपक्ष को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “जब सेना की तारीफ होती है तो वे सबूत माँगने लगते हैं। मोदी का विरोध करने में पाकिस्तान की तारीफ़ करने लगते हैं। ऐसे गद्दारों के लिए एक नया कानून होना चाहिए, चाहे वे JNU में पढ़ रहे हों, या महाराष्ट्र में हों। उसके बाद कोई नसीरुद्दीन, हामिद अंसारी या सिद्धू नहीं होगा।”

बिहार में लगेगी पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की मूर्ति, जयंती पर सालाना कार्यक्रम भी

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दिवंगत नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के सम्मान में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनकी मूर्ति लगवाने का ऐलान किया है। इसके साथ ही अरुण जेटली के जन्मतिथि (28 दिसंबर) को हर साल राजकीय समारोह के तौर पर मनाया जाएगा। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार (अगस्त 31, 2019) को खुद इसकी घोषणा की।

इसी माह 24 अगस्त को पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का दिल्ली के एम्स में निधन हो गया था। वे पिछले कई दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। जेटली के निधन पर पटना स्थित कृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित शोक सभा के दौरान सीएम नीतीश कुमार ने यह ऐलान किए। इस सभा में डिप्टी सीएम सुशील मोदी सहित बीजेपी और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के तमाम बड़े नेता मौजूद थे।

बीजेपी नेता के निधन पर शोक प्रकट करते हुए नीतीश ने कहा- “अरुण जेटली जी असाधरण और प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे। उन्होंने भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारी बखूबी सँभाली। वह कानून के जानकार भी थे।”

थरूर-मेहर तरार ने साथ बिताईं थीं दुबई में तीन रातें: सुनंदा पुष्कर मामले में सामने आई बात

कॉन्ग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले में लोक अभियोजक ने पुष्कर की मित्र और पत्रकार नलिनी सिंह का बयान पढ़ते हुए दावा किया कि थरूर ने दुबई में तीन रातें पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार के साथ बिताईं थीं। अतुल श्रीवास्तव ने यह बयान दिल्ली की अदालत में पढ़ा

बेटे, भाई ने कहा सुनंदा आत्महत्या नहीं कर सकतीं थीं

विशेष सीबीआई जज अजय कुमार कुहर की अदालत में पुष्कर के बेटे शिव मेनन ने दावा किया कि उनकी माँ बहुत ही (मानसिक रूप से) ताकतवर महिला थीं, और वे आत्महत्या नहीं कर सकतीं थीं। इसके अलावा उनके भाई आशीष ने भी कहा कि सुनंदा हालाँकि हालिया विवादों को लेकर तनावग्रस्त थीं, लेकिन वे अपनी शादी में बहुत खुश थीं। उन्होंने भी सुनंदा पुष्कर के आत्महत्या करने वालों में से होने पर अविश्वास जताया।

क्या 2014 चुनावों के बाद पुष्कर को तलाक देने वाले थे थरूर?

अदालत में पढ़े गए नलिनी सिंह के बयान में कहा गया, “मैं सुनंदा को 3-4 साल से जानती थी। पिछले एक साल में उन्होंने मुझे अपने निजी जीवन की बातें बतानी शुरू की थीं। उन्होंने मुझे बताया कि थरूर और तरार ने तीन रातें साथ बिताईं थीं।”

“मुझे उनकी मौत के एक दिन पहले (सुनंदा का) फ़ोन आया, वे रो रहीं थीं कि थरूर और तरार के बीच रोमांटिक संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है। उनमें से एक संदेश यह भी था कि 2014 के चुनावों के बाद थरूर सुनंदा को तलाक दे देंगे। उनका परिवार भी इस निर्णय का समर्थन करेगा।”

अगर क़त्ल नहीं तो 498A-आत्महत्या के लिए उकसावे का मामला बनाया जाए

दिल्ली पुलिस ने अदालत से गुज़ारिश की है कि थरूर पर अगर आईपीसी की धारा 302 के तहत हत्या का मामला नहीं बन सकता तो कम-से-कम 498A (ससुराल में क्रूरता), 306 (आत्महत्या के लिए उकसावे) के तहत तो थरूर पर आरोप तय किए ही जाएँ। लोक अभियोजक ने दावा किया कि अपनी मौत के पहले सुनंदा पुष्कर आईपीएल मामले पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करना चाहतीं थीं।

अमृता प्रीतम: जिन्हें दो मर्दों के बीच छुपा दिया गया

अमृता प्रीतम 31 अगस्त 1919 को पैदा हुई थीं। आज 2019 में अगर वो ज़िंदा होतीं तो 100 साल की होतीं। सबसे पहले अमृता को उनकी सालगिरह मुबारक!

जब हम अमृता की बात करते हैं तो उनका ये परिचय हमारे ज़हन में आता है (या आना चाहिए); कि अमृता एक शानदार लेखिका थीं, पंजाबी भाषा की प्रसिद्ध लेखिका। अमृता ने पंजाबी के अलावा हिन्दी में भी कविताएँ लिखीं, उपन्यास लिखे। उनकी पंजाबी नज़्म “अज्ज आखां वारिस शाह नू” ने पंजाब में तक़सीम के वक़्त महिलाओं पर हुए ज़ुल्मों की बात कही। अमृता का उपन्यास “पिंजर” महिलाओं पर हुए ज़ुल्मों की बात करता है और उसका किरदार “पूरो” तो जैसे अमर ही हो गया। अमृता, जो साहित्य अकादमी पुरस्कार पाने वाली पहली महिला बनीं। अमृता, जिन्होंने अपने जीवन के साथ देश की तमाम महिलाओं के जीवन को जोड़ के लिखा और तक़सीम के बाद भी हिंदुस्तान के अलावा पाकिस्तान में भी बराबर मशहूर रहीं।

लेकिन रुकिए, और आज ज़रा अपने फेसबुक टाइमलाइन, अपने इनबॉक्स पर नज़र दौड़ाइए। क्या अमृता का ये परिचय आपने विकिपीडिया के अलावा कहीं भी और पढ़ा है? मुझे यक़ीन है कि 80 प्रतिशत लोगों का जवाब “नहीं” होगा। अगर ये परिचय किसी ने पढ़ा भी हो, तो उसमें एक बात और जोड़ी गई होगी, जिस पर ज़्यादा ज़ोर दिया गया होगा। वो बात ये, कि अमृता प्रीतम साहिर लुधियानवी की प्रेमिका थीं, कि वे साहिर से बेहद प्यार करती थीं, कि वे उनकी छोड़ी हुई सिगरेट पीती थीं। या ये बात कि इमरोज़ अमृता से बहुत प्यार करते थे लेकिन अमृता को साहिर से ज़्यादा प्यार था।

ये कोई अच्छी बात नहीं है कि इतनी उम्दा लेखिका का जीवन सिर्फ़ दो मर्दों तक सीमित कर दिया गया। कि एक मर्द से वो इश्क़ करती थी, और दूसरा मर्द उनसे इश्क़ करता था। दुनिया इसको लव ट्रायंगल यानी प्रेम त्रिकोण कहती है, और इस प्यार को अपनी प्रेरणा के रूप में भी देखती है। बाज़ औक़ात (कई बार) मैंने ये देखा है कि लोग अमृता को सिर्फ़ साहिर की सिगरेट की वजह से याद रखते हैं।

इस बात को बढ़ावा दिया है बड़े-बड़े शहरों में हो रहे Poetry Open Mics ने, जिसमें Yourquote जैसी पोयट्री कंपनियाँ शामिल हैं। ऐसी जगहों पर नए लिखने वाले अपनी कविताओं (जो कविता नहीं है) में अमृता, साहिर, इमरोज़, सिगरेट का ज़िक्र करते हैं और इसे मशहूर कर के ट्रेंडिंग हो जाते हैं।

ज़ाहिर बात है कि अमृता के जीवन का एक बड़ा हिस्सा इश्क़ में बीता था, सबका बीतता है। क्या एक लेखिका को सिर्फ़ इसलिए याद किया जाना चाहिए कि वो इश्क़ करती थी, या इसलिए याद रखा जाना चाहिए कि वो किसी मर्द के इश्क़ में दीवानी हो गई थी? और वो मर्द कौन, जो बहुत बड़ा शायर था, फ़िल्मों में गाने लिखता था। उस लेखिका को उसके अपने लेखन, अपने कामों के लिए याद कभी नहीं रखा जाता।

ये बात सच है कि अमृता साहिर से इश्क़ करती थीं, और जब वो इमरोज़ की दोस्त थीं, तब उन्हें इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि वो कभी इमरोज़ के साथ जीवन गुज़ारेंगी। इस बात का एतराफ़ अमृता ने ख़ुद किया है। अपनी किताब “रसीदी टिकट” के एक चैप्टर “आधी रोटी पूरा चाँद” में अमृता इमरोज़ के साथ खाना खाने के बारे में लिखती हैं,

“बहुत बरसों बाद इमरोज़ ने कहीं इस घटना को लिखा था – ‘आधी रोटी, पूरा चाँद’ पर उस दिन हम दोनों को सपना-सा भी नहीं था कि वक़्त आएगा, जब हम दोनों जो रोटी कमाएँगे, आधी-आधी बाँट लेंगे।”

आज सोशल मीडिया और मेनस्ट्रीम मीडिया और तमाम प्रोग्राम में इस बात पर ज़्यादा ज़ोर दिया जाता है कि अमृता का साहिर से कैसा रिश्ता था, और इमरोज़ से कैसा रिश्ता था। लेकिन इस सब के दौरान इसकी बात नहीं होती कि साहिर ने कभी इज़हार नहीं किया और उन्हें छोड़ कर चले गए। अमृता के बारे में ये भी कहा जाता है कि जितनी भी प्रेम कविताएँ अमृता ने लिखीं, वो इस दु:ख में लिखीं कि साहिर उन्हें छोड़ कर चले गए थे।

अमृता का ज़िक्र हमेशा मर्दों के साथ होने के पीछे वो पितृसत्ता है जिसका ये यक़ीन है कि महिलाओं को कुछ भी करने के लिए एक ऐसे इंसान से प्रेरणा चाहिए, जो मर्द हो। इसको आप पितृसत्तात्मक मानसिकता भी कह सकते हैं जिसका यक़ीन ये है कि महिलाएँ ख़ुद से कुछ लिख नहीं सकतीं।

बात अमृता पर ही नहीं रुकती

ये “बदतमीज़ी” अमृता प्रीतम तक ही सीमित नहीं है। आपको हर क्षेत्र की महिलाओं के बारे में ये बातें मिल जाएँगी जिसमें उनका ज़िक्र किसी मर्द से जोड़ कर किया जाता है। मसलन आप फ़िल्मों की ही बात करें!

किसी से पूछ लें कि रत्ना पाठक कौन हैं! जवाब आएगा, नसीरुद्दीन शाह की पत्नी; पुछें कि सुप्रिया पाठक कौन हैं! जवाब आएगा, पंकज कपूर की पत्नी। शबाना आज़मी का ज़िक्र आज भी जावेद अख़्तर या कैफ़ी आज़मी से जोड़ कर किया जाता है। इसी दिल्ली शहर में जब कोई मुशायरा हो, और कोई शायरा अच्छे शेर सुनाए, तो उनके उस्ताद का ज़िक्र किया जाता है।

ये महज़ कुछ ही उदाहरण हैं, ऐसे हज़ारों उदाहरण हर क्षेत्र में मौजूद हैं।

देश-दुनिया-समाज इतना आगे जा चुका है, आधुनिक हो चुका है। लेकिन एक वक़्त पर लड़कियों को पढ़ने तक की इजाज़त न देने वाले इस समाज में आज भी एक रत्ती का फ़र्क़ देखने को नहीं मिलता। आज भी ये सोच बनी हुई है कि यदि कोई महिला कुछ कर रही है, तो उसकी वजह उसके जीवन का कोई मर्द ही होगा। हम आज भी महिलाओं को उनकी आज़ाद पहचान देने में नाकाम हैं।

अमृता के जन्म को 100 साल हो गए हैं और उनकी मौत को 14 साल। आज ज़रूरी है कि अमृता को पढ़ा जाए। अमृता के अलावा भी हर महिला को पढ़ा जाए, उसके काम को देखा जाए, अच्छे कामों को सराहा जाए ताकि इस समाज को किसी महिला की बात करने के लिए किसी मर्द के सहारे की ज़रूरत न पड़े।

लेखक: सत्यम तिवारी

JDS को नहीं BJP कार्यकर्ताओं को कहा था वेश्या: कॉन्ग्रेसी सिद्धारमैया की सफाई

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया अपने बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। जेडीएस कार्यकर्ताओं को वेश्या बताने वाले अपने बयान पर मचे बवाल के बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा है कि उनका संदर्भ बीजेपी से था।

असल में, सिद्धारमैया से पूछा गया था कि राज्य में गठबंधन सरकार के गिरने के लिए जेडीएस उन्हें जिम्मेदार ठहरा रहा है। जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री ने एक कन्नड़ के एक कहावत का इस्तेमाल किया, जिसका मतलब होता है कि जो वेश्याएँ नाच नहीं सकती वे डॉंस फ्लोर का रोना रोती हैं। एएनआई के अनुसार बाद में सफाई देते हुए उन्होंने इस बयान को बीजेपी से जोड़ दिया।

गौरतलब है कि 14 महीने पुरानी कॉन्ग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार इसी साल 22 जुलाई को अपने ही विधायकों की बगावत के कारण गिर गई थी। जेडीएस कार्यकर्ताओं ने सरकार गिरने का सीधा आरोप सिद्धारमैया पर लगाया था। उनका कहना था कि एसटी सोमशेखर, ब्यारथी बासवाराज, एमटीबी नागराज, के सुधाकर जैसे कॉन्ग्रेस के बागी विधायक सिद्धारमैया के इशारे पर ही काम कर रहे थे।


उन्नाव रेप पीड़िता के चाचा के ड्राइवर पर हमला, कोर्ट से लौट रहा था घर

उन्नाव रेप मामले में एक नया मोड़ आ गया है। जानकारी के अनुसार, उन्नाव पीड़िता के चाचा के ड्राइवर पर गुरुवार (29 अगस्त) की रात को जानलेवा हमला हुआ। इसके बाद से पूरा परिवार सदमे में है। 

ख़बर के अनुसार, ड्राइवर पीड़िता के चाचा के वकील से मिलकर उन्नाव कोर्ट से वापस लौट रहा था। वापसी के दौरान अचानक 5 हमलावरों ने उसकी गाड़ी रोकी और उसे डराया-धमकाया। जैसे ही वो घर पहुँचा, उसके थोड़ी ही देर बाद उस पर अचानक जानलेवा हमला किया गया।

पीड़ित ड्राइवर ने इस संदर्भ में एसपी को प्रार्थना पत्र देकर सुरक्षा की माँग की है। एसपी के निर्देश पर 3 नामज़द और 2 अज्ञात के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है। फ़िलहाल, पुलिस इस हमले की गहनता से जाँच कर रही है।

ग़ौरतलब है कि उन्नाव रेप पीड़िता के चाचा पर अलग-अलग कोर्ट में 6 केस चल रहे हैं। इसी सिलसिले में शुक्रवार (30 अगस्त) को अलग-अलग न्यायालयों में पाँच मामलो की सुनवाई हुई थी। इस दौरान कड़ी सुरक्षा के बीच दिल्ली पुलिस की गाड़ी में पीड़िता के चाचा को तिहाड़ जेल से उन्नाव लाया गया था। साथ ही ख़ुफ़िया पुलिस को भी लगाया गया था। बता दें कि पीड़िता के चाचा दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।

मुस्लिम महिला सबसे गोरी, ब्राह्मण सबसे काले: Cadbury वालो, धंधा करो ज्ञान मत बाँटो

Cadbury का मूल काम-धंधा क्या है? चॉकलेट बनाना-बेचना। Zomato का? खाना रेस्तराँ से उठा कर घर पहुँचाना। Gillette का काम है दाढ़ी बनाने वाले ब्लेड और रेज़र बनाना-बेचना। लेकिन पिछले कुछ महीनों में ये ब्रांड किसी बिज़नेस कारण से नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय (social justice) के पहरुए बनने या सोशल मीडिया पर दूसरों को ज्ञान बाँचने को लेकर खबरों में रहे हैं। और यह काम भी वे ढंग से करने की बजाय मूर्खता करते ही अधिक नज़र आ रहे हैं।

ताज़ातरीन मामला Cadbury का है, जिसने अपने ‘नस्लभेद-विरोधी’ unity bar को भारतीय बाजार में 15 अगस्त के मौके पर उतारा था। इसके लिए उसने ज्ञान बाँचा कि आइए उस देश का सम्मान करें जहाँ विभिन्नता में एकता है। और इसका प्रतीक बताया अपना यूनिटी बार- जिसमें ‘गोरी वाली’ (मिल्क चॉकलेट) और ‘काली वाली’ (डार्क चॉकलेट) चॉकलेट से लेकर दो और रंगों की चॉकलेट यानी “हर रंग (‘नस्ल’ पढ़ें) की चॉकलेट में एकता” है।

इस विज्ञापन में Cadbury दो बातें करता दिख रहा है: न केवल यह कि भारत में नस्लभेदी/रंगभेदी माहौल है (वरना इस तरह के संदेश की कोई ज़रूरत क्यों थी?), बल्कि वह इतना गंभीर भी है कि इससे निबटने के लिए विदेशी कंपनियों को यहाँ के लोगों को “नस्लभेदी मत बनो” सिखाने उतरना पड़ रहा है।

पहली बात तो यह ज्ञान-बाजी ही बोगस है, क्योंकि भारत में कभी भी नस्लभेद का इतिहास रहा ही नहीं है। लाख साम्प्रदायिकता, जातिवाद, क्षेत्रवाद, भाषाई टकराव भले हों भारत में, लेकिन रंग और नस्ल के आधार पर सामाजिक भेदभाव एक ऐसी बुराई है जो बड़े-छोटे किसी भी स्तर पर भारत में पैर नहीं जमा पाई है।

जब भी इसकी कोशिश हुई, सरकारों ने इसे कुचल दिया है। याद करें कुछ साल पहले जैसे ही खबर आई कि उत्तर-पूर्व के लोगों को दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में कुछ चिरकुट उनकी नस्ल को लेकर निशाना बना रहे हैं, तो तत्कालीन केंद्र सरकार ने कानून बनाकर उनके लिए नस्लभेदी और अपमानजनक शब्द “चिंकी” को ही पाँच साल सजा वाला अपराध बना दिया था। इसके पहले पेरियार ने उत्तर-दक्षिण भारत को विभाजित करने के लिए अंग्रेज़ों के झूठे ‘आर्य आक्रमण सिद्धांत’ को नस्ल का रूप देकर हिंदी-संस्कृत-भाषियों को तमिल-मलयालम-भाषियों से अलग नस्ल साबित कर देश के एक और विभाजन की नींव रखने की कोशिश की थी, लेकिन लोगों ने ही उनको ज्यादा भाव नहीं दिया। (गोरे रंग को लेकर भारतीयों में थोड़ा-बहुत आकर्षण ज़रूर है, लेकिन यह औपनिवेशिक हैंगओवर है जो बिना Cadbury की ज्ञान-बाजी के तेज़ी से जा रहा है। इसके अलावा हमारे पुराणों में न केवल गहरे रंग की द्रौपदी को मानव इतिहास की सबसे खूबसूरत महिला बताया गया था, बल्कि श्री कृष्ण भी काले होने के बावजूद आकर्षण का पर्याय माने गए हैं। देवी का सबसे अधिक पूजित रूप भी माँ काली का है।)

और अगर Cadbury के इसी विज्ञापन को देखें तो यह तथाकथित नस्लभेद को खत्म कर रहा है या फिर नस्लवादी स्टीरियोटाइप को बढ़ावा ही दे रहा है? इसका रैपर देखिए:

सबसे गोरी मुस्लिम महिला, और सबसे काले दक्षिण भारतीय ब्राह्मण। रेशियल स्टीरियोटाइपिंग हुई कि नहीं? क्या Cadbury के अधिकारियों ने कभी गहरे रंग की या साँवली मुस्लिम महिला नहीं देखी? और अगर ‘गोरे’ दक्षिण भारतीय ब्राह्मण कैडबरी वालों को देखने हों तो सुब्रमण्यम स्वामी या आनंद रंगनाथन को देख लें। और या फिर यह सब करने से बेहतर होगा कि कैडबरी वाले चॉकलेट बनाने पर ध्यान दें, समाज-सुधार कॉर्पोरेट जगत के Social Justice Warriors का खिलौना नहीं है।

Gillette ने गँवाए 800 करोड़ डॉलर

कॉर्पोरेट वालों को सोशल मीडिया पर Social Justice Warrior बनना या ज्ञान-बाजी करना कितना महंगा पड़ता है, किसी को यह Gillette वालों से पूछना चाहिए। “Toxic Masculinity” के वैचारिक कैंसर को बढ़ावा देने और पुरुषों को ज़लील करने के नारीवादी अंधेपन में वह भूल गया कि उसका 99% से अधिक बिज़नेस मर्दों से ही आता है। नतीजा यह हुआ कि “Toxic Masculinity” वाला वाहियात विज्ञापन YouTube पर प्रकाशित करने के बाद उसकी अभिवावक/होल्डिंग कंपनी प्रॉक्टर एंड गैम्बल को Gillette के मूल्य के आकलन में 8 अरब डॉलर की कमी करनी पड़ी। बनाने को बहाना “मर्दों ने शेव करना ही बंद कर दिया होगा” का बनाया जा सकता है, लेकिन सच्चाई हर बहाने से और साफ़ ही हो जाती है।

Zomato को हलाल-“खाने का मज़हब नहीं होता” विवाद में ठीक-ठीक कितना आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, यह तो समय बता ही देगा, लेकिन एक ब्रांड के तौर पर उसकी छवि निश्चित रूप से खराब हुई है। यही नहीं, इसी विवाद के चलते रेस्तराँ मालिकों द्वारा किसी और मुद्दे पर की गई आलोचना को भी मीडिया और सोशल मीडिया पर और तूल मिला।

कॉर्पोरेट को यह समझना होगा कि उसके HR और एडवरटाइजिंग विभाग में सामाजिक न्याय का झंडा गाड़ कर बैठे लोग किसी मुद्दे का समाधान करने की कोशिश कर रहे लोग नहीं, प्रोफेशनल एजेन्डाबाज और राजनीतिक रूप से वामपंथी झुकाव वाले हैं। उनकी बकवास में आकर यदि कॉर्पोरेट जगत अपने मूल व्यवसाय से ज्यादा ऐसी फ़िज़ूल की गतिविधियों में ऊर्जा खपाएगा तो न ही वह किसी मुद्दे पर कुछ कर पाएगा, न ही अपना खुद का व्यवसाय बचा पाएगा। बेहतर होगा कि बिना किसी मुद्दे की गहरी समझ के और एजेंडेबाज लोगों के झाँसे में आकर, अपना समय व्यर्थ करने की बजाय बिज़नेस एग्जीक्यूटिव उसे अपने काम में ही लगाएँ।

Article 370: भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया, उच्चायुक्त ने कश्मीर को बताया आंतरिक मसला

दुनिया भर के कई अन्य देशों की तरह, ऑस्ट्रेलिया ने भी जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय करने के भारत के कदम का समर्थन किया है। ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त हरिंदर सिद्धू ने शुक्रवार (अगस्त 30, 2019) को कश्मीर पर भारत के फैसले के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने का भारत का निर्णय, देश का आंतरिक मामला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कश्मीर मुद्दे को दोनों देशों को द्विपक्षीय रूप से हल करना चाहिए।

एएनआई से बात करते हुए सिद्धू ने कहा, “भारत सरकार ने कहा कि यह उसका आंतरिक मामला है। हम इस पर भारतीय स्थिति का सम्मान करते हैं। ऑस्ट्रेलिया का कश्मीर पर लंबे समय से विचार है कि इसे भारत और पाकिस्तान द्वारा द्विपक्षीय रूप से हल किया जाना चाहिए।”

उन्होंने उम्मीद जताई है कि इससे क्षेत्र में शाँति होगी और फिर बाद में घाटी में धीरे-धीरे आर्थिक विकास होगा। उन्होंने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि दोनों देश संयम से काम लेंगे और इस प्रक्रिया में लोगों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखेंगे।” इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई है कि दोनों देशों में स्थिति सामान्य और शांतिपूर्ण होने से आर्थिक विकास में वृद्धि होगी।

गौरतलब है कि, 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म कर दिया थे। साथ ही जम्मू-कश्मीर को दो भागों में विभाजित कर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, दो केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। इसके बाद से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और परमाणु युद्ध की धमकी भी दे रहा है। पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे पर विश्व से मदद की गुहार लगाई और संयुक्त राष्ट्र से भी संपर्क किया। लेकिन पाकिस्तान को मुँह की खाना पड़ी। सभी ने इस मुद्दे को द्विपक्षीय करार देते हुए टिप्पणी से इनकार कर दिया।

‘यह जमीन अब आजम खान की है, घर खाली कर दो वरना जान से मार दूॅंगा’: भूमाफिया सपा सांसद पर FIR

भूमाफिया आज़म खान की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। हर दिन प्राय: उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो रहा है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने शनिवार (अगस्त 31, 2019) को फिर से समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद आज़म खान और कुछ अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने उनके खिलाफ रामपुर जिले में घर खाली करने के लिए एक परिवार को मजबूर करने को लेकर मामला दर्ज किया है।

पीड़ित ने पुलिस से की शिकायत में दावा किया है कि 15 अक्टूबर 2016 को 15 से 20 लोगों का एक समूह उसके घर में घुस गया और उसे खाली करने के लिए कहा। घर खाली न करने पर जाने से मारने की धमकी दी।

शिकायतकर्ता के मुताबिक उससे कहा गया कि यह जमीन अब आजम खान की है। यहाँ वह एक स्कूल बनाएँगे और फिर बाद में उन्होंने उनके घर पर बुलडोजर चला दिया। साथ ही पीड़ित ने उन पर 20 हजार रुपए का सामान चुराने का भी आरोप लगाया।

पीड़ित का कहना है कि उस वक़्त पुलिस ने उसकी शिकायत दर्ज करने से मना करते हुए धमकी भी दी थी। बता दें कि आज़म खान और उनके साथियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 452, 427, 323, 504 ,506, 395 और 120 बी के तहत मामला दर्ज किया गया है। 

गौरतलब है कि, हाल ही में सपा सांसद के खिलाफ ऐसा ही एक और मामला दर्ज किया गया था। उस मामले में पीड़ित ने जबरन मकान खाली कराने के साथ ही लूटपाट और मारपीट का आरोप लगाया था। रामपुर के एसपी अजयपाल शर्मा ने FIR की पुष्टि करते हुए बताया था, “कुछ लोगों के द्वारा शिक़ायत की गई थी कि पहले उनको लालच दिया गया, कहा गया कि उनको दूसरी जगह विस्थापित किया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उनके घरों को तोड़ा गया, मारपीट की गई और सामान आदि को लूट लिया गया। प्रथम दृष्टया जाँच में ये मामले सही पाए गए हैं।”