Home Blog Page 5547

पी चिदंबरम की गिरफ़्तारी से ख़ुश हूँ, अब कार्ति भी गिरफ़्तार होंगे: इन्द्राणी मुख़र्जी

इन्द्राणी मुखर्जी ने सरकारी जाँच एजेंसियों को आईएनएक्स मीडिया केस में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम के बारे में अहम जानकारियाँ दी थीं। इन्द्राणी इस केस में अप्रूवर बन गई और उनके ही बयानों के कारण पी चिदंबरम की गिरफ़्तारी का रास्ता साफ हुआ। इन्द्राणी ने चिदंबरम की गिरफ़्तारी पर ख़ुशी जताई है। बेटी की हत्या के आरोप में जेल में बंद इन्द्राणी ने पी चिदंबरम की गिरफ़्तारी को अच्छी ख़बर बताया। उन्होंने सेशन कोर्ट में मीडिया से बात करते हुए अपनी बात साझा की।

इन्द्राणी मुखर्जी ने आशा जताई कि कार्ति चिदंबरम की ज़मानत भी कैंसल कर दी जाएगी और वह गिरफ़्तार होंगे। इन्द्राणी ने कहा कि वो इस पूरे घटनाक्रम पर नज़र रख रही थीं।

इन्द्राणी मुखर्जी और उनके पति पीटर मुखर्जी भी आईएनएक्स मीडिया केस में आरोपित हैं। फिलहाल दोनों ही शीना बोरा हत्याकांड के आरोप में जेल में बंद हैं। शीना इन्द्राणी और उनके पहले पति की बेटी थी। इन्द्राणी ने खुलासा किया था कि आईएनएक्स मीडिया को एफआईपीबी अप्रूवल दिलाने के बदले में चिदंबरम ने उन्हें अपने बेटे के व्यापार में मदद करने को कहा था। कार्ति चिदंबरम ने भी मुखर्जी दम्पति से रिश्वत की माँग की थी। एफआईपीबी क्लीयरेंस में हुई अनियमितताओं को ठीक काटने के लिए कार्ति पर 1 मिलियन डॉलर रिश्वत माँगने का आरोप है।

ज्ञात हो कि पी चिदंबरम को अगस्त 21, 2019 को उनके दिल्ली के ज़ोर बाग़ स्थित आवास से गिरफ़्तार किया गया था। गिरफ़्तारी के बाद कोर्ट ने उन्हें सीबीआई की कस्टडी में भेज दिया। बाद में उनकी कस्टडी की अवधि बढ़ा दी गई। इस तरह से अब चिदंबरम 30 अगस्त तक सीबीआई की कस्टडी में रहेंगे। उन्हें गिरफ़्तार करने के लिए सीबीआई के अधिकारियों को उनके घर की दीवार लाँघनी पड़ी थी। अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज होने के बाद गायब चिदंबरम अचानक से कॉन्ग्रेस मुख्यालय के प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रकट हुए थे।

जुलाई 2019 में इन्द्राणी मुखर्जी आईएनएस मीडिया केस में अप्रूवर बनी थीं। उन्होंने माँग की थी कि अप्रूवर बनने और सबकुछ सही-सही खुलासा करने के लिए उन्हें सज़ा से माफ़ी दी जाए। 2007 में आईएनएक्स मीडिया को 307 करोड़ के विदेशी निवेश के लिए अप्रूवल मिला था। इस मामले में कार्ति चिदंबरम की भी गिरफ़्तारी हो चुकी है लेकिन उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया गया था।

‘कश्मीर भारतीय लोकतंत्र का आंतरिक मुद्दा, इस मसले पर इमरान का बयान भड़काऊ और बेहूदा’

हाल ही में पाकिस्तान के मुद्दे पर हुई बैठक में शामिल हुए अमेरीकी सांसद ने कश्मीर को भारत का आंतरिक मामला बताया है और साथ ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को नसीहत दी कि उन्हें अब अपनी बयानबाजी को शांत करने की जरूरत है।

भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने कहा, “कश्मीर भारतीय लोकतंत्र का आंतरिक मुद्दा है और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को अपने बयानों को शांत करने की जरुरत है एवं उन्हें भारत से युद्ध और संघर्ष को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।” उनकी मानें तो इमरान खान की ऐसी बयानबाजी बहुत हास्यास्पद है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रो खन्ना ने ये बात कैलिफोर्निया के फ्रीकमेंट में भारतीय-अमेरिकी समुदाय से मुखातिब होते हुए कही। उन्होंने इस दौरान इमरान खान द्वारा परमाणु युद्ध की धमकी को बेहूदा और नफरत से भरा बताया, साथ ही कहा कि इमरान खान अपने भड़काऊ बयानों में गुस्से को शांत करें और किसी विवाद या युद्ध की स्थिति को बढ़ावा न दें।

इसके अलावा बता दें कि सिलिकॉन वैली का प्रतिनिधित्व कर रहे रो खन्ना के साथ कार्यक्रम में मौजूद कश्मीरी मूल के लोगों ने गरीबी और आतंकवाद से लोकतांत्रित तरीके से समाधान को लेकर भारत सरकार की तारीफ की है। जिससे साफ़ हो गया है कि भले ही पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के पास पहुँचकर उलटी सीधी बयानबाजी कर रहा है लेकिन वास्तविकता में कश्मीरी मुद्दे पर अमेरिका में न केवल शीर्ष अधिकारी और नेता बल्कि वहाँ की आम जनता भी भारत के ख़िलाफ़ और पाकिस्तान के समर्थन में बोलने को तैयार नहीं हैं।

इमरान ख़ान केवल कठपुतली, सारे अहम फैसले ले रही पाकिस्तानी फौज: US रिपोर्ट से लगी मुहर

पाकिस्तान में फौज का दखल नई बात नहीं है। जब से इमरान खान प्रधानमंत्री बने हैं तभी से कहा जा रहा है कि फौज की कठपुतली से ज्यादा उनकी कोई हैसियत नहीं है। अब अमेरिकी कॉन्ग्रेस की एक रिसर्च रिपोर्ट ने भी इन दावों पर मुहर लगाई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक इमरान के कार्यकाल में भी सरकारी कामकाज में फौज का दखल बरकरार है। सुरक्षा और विदेश जैसे अहम मामलों में फैसले पाकिस्तानी फौज ही लेती है।

रिपोर्ट बाईपार्टीशन कॉन्ग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS) ने तैयार किया है। रिपोर्ट तैयार करने वाली टीम में यूएस कॉन्ग्रेस के सदस्य शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री बनने से पहले इमरान खान के पास कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं था। साथ ही कहा गया है कि आम चुनाव में पाक फ़ौज ने अच्छा-खासा दखल दिया ताकि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ की हार हो सके।

अमेरिकी रिपोर्ट की मानें तो पाकिस्तानी फ़ौज ने आम चुनाव में अपने हिसाब से हेरफेर किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इमरान खान ने ‘नया पाकिस्तान’ का नारा देकर युवाओं को रोज़गार, अच्छी शिक्षा और सभी नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ इत्यादि देने का वादा तो कर दिया था, लेकिन उनकी सारी बातें हवा-हवाई साबित हो रही हैं। यूएस की रिपोर्ट में इसका कारण पाकिस्तान की बदहाल अर्थव्यवस्था को बताया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, अगर इमरान खान को अपने वादे पूरे करने हैं तो पाकिस्तान सरकार को अन्य राष्ट्रों से क़र्ज़ लेना पड़ेगा और ख़र्च में भारी कमी करनी पड़ेगी। सीआरएस अमेरिका के कॉन्ग्रेस की एक स्वतंत्र रिसर्च इकाई है जो समय-समय पर विभिन्न विषयों पर रिपोर्ट तैयार करती रहती है। इस रिपोर्ट के आधार पर अमेरिकी कॉन्ग्रेस के नेताओं को किसी भी विषय पर अध्ययन करने के बाद उचित निर्णय लेने में आसानी होती है।

इमरान खान की जीत के लिए अमेरिकी एजेंसी ने पाकिस्तान में फ़ौज और न्यायपालिका के गठजोड़ को ज़िम्मेदार ठहराया है। रिपोर्ट का कहना है कि इन दोनों से मिल कर नवाज़ शरीफ की हार सुनिश्चित की। 2018 में हुए उस चुनाव में कई बार लोकतान्त्रिक मूल्यों को ताक पर रखा गया और आतंकी संगठनों को भी चुनाव में हिस्सा लेने की छूट दी गई।

अलवर पुलिस ने पूर्व फौजी को बेरहमी से पीटा, Video Viral

राजस्थान पुलिस का बर्बर चेहरा अब अलवर में देखने को मिला है। पुलिस ने यहॉं शांतिपूर्वक चल रहे एक आंदोलन को खत्म करने के लिए जमकर लाठियाँ बरसाई। साथ ही पूर्व फौजी अमर चंद मीणा को बेरहमी से पीटा।

आदिवासी समाज से आने वाले मीणा के पुलिस ने कपड़े फाड़ दिए और उनसे बदसलूकी भी की। आदिवासी मीणा समाज के प्रदेशाध्यक्ष के साथ हुई इस पूरी घटना का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें देखा जा सकता है कि किस बेरहमी से बुजुर्ग पर लाठियाँ भाँजी गई हैं।

जानकारी के मुताबिक लाठी चार्ज में एबीवीपी के संगठन मंत्री शमशेर सिंह, चेतन जैमन, समर्थक अमरचंद मीणा, राकेश चौधरी, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित चतुर्वेदी, छात्रनेता रजनीश जैमन, सचिन यादव, माेहित चाैधर अनेक छात्रों को भी चाेटें आई हैं।

घटना आरआर कॉलेज चौराहे के पास हुई। यहाँ छात्र मतगणना में धांधली को विरोध करने के लिए जुटे थे। अमरचंद ने बताया कि चुनाव में 2 मत से हारी पूजा ने उन्हें फोन पर कर धांधली के बारे में बताया। मीणा समाज का प्रदेशाध्यक्ष होने के नाते वे वहाँ पहुँचे थे। वे एएसपी से बात कर रहे थे तभी पीछे से पुलिस ने निर्ममता से मारपीट की।

उल्लेखनीय है कि आदिवासी समाज या दलित समाज पर राजस्थान पुलिस की दिखाई क्रूरता का ये पहला मामला नहीं हैं। कॉन्ग्रेस के सत्ता में आने के बाद पुलिस और प्रशासन की मनमानिया दिन पर दिन बढ़ रही हैं और कानून व्यवस्था की हालत चरमराती जा रही है।

कोयंबटूर में NIA की छापेमारी, अगरतला से पकड़ा गया JMB आतंकी नज़ीर शेख

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने तमिलनाडु के कोयंबटूर शहर में पाँच जगहों पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और पेन ड्राइव ज़ब्त किया गया है। खबर लिखे जाने तक छापेमारी जारी थी। NIA ने बांग्लादेशी आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिद्दीन (JMB) के आतंकवादी नज़ीर शेख को भी गिरफ्तार किया है।

NIA ने 26 अगस्त को अगरतला से JMB के प्रमुख संचालक नज़ीर शेख को गिरफ़्तार किया है। आतंकी को 7 जुलाई को बेंगलुरु के एक घर से विस्फोटकों की बरामदगी के सिलसिले में गिरफ़्तार किया गया है।

ख़बर के अनुसार, पिछले दिनों NIA ने इस्लामिक स्टेट के मॉड्यूल्स की तलाश में कोयंबटूर शहर में सात जगहों पर छापा मारा था और आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (IS) के सरगना को हिरासत में लिया था। इस IS मॉड्यूल का सरगना मोहम्मद अजहरुद्दीन श्रीलंका में ईस्टर को हुए बम धमाका करने वाले जहरान हाशिम से बहुत प्रभावित था। NIA ने इस संबंध में एक नया मामला दर्ज किया था। 

आतंकी संगठन ISIS के एक मॉड्यूल का सरगना मोहम्मद अजहरुद्दीन आरोपित जहरान हाशिम के साथ फेसबुक के ज़रिए लगातार सम्पर्क में था। दोनों के बीच बातचीत होती रहती थी, इसी सिलसिले में NIA ने छापेमारी की थी और मोहम्मद अजहरुद्दीन को उसके घर से गिरफ़्तार किया था।

हाल ही में, कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स (STF) की टीम ने बिहार के गया शहर से आतंकी संगठन JMB के कुख्यात आतंकी एजाज़ अहमद को गिरफ़्तार किया था। पुलिस ने उसके पास से भारी मात्रा में जिहादी दस्तावेज़ बरामद किए थे। अहमद लम्बे समय से बिहार के गया में वेश और नाम बदलकर रह रहा था। STF के सूत्रों ने इस बात का भी ख़ुलासा किया था कि वो किसी बड़े हमले की साजिश रच रहा था।

पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले के पारुई इलाक़े का निवासी एजाज़ अहमद आतंकी संगठन JMB के आला नेताओं के साथ मिलकर काम कर रहा था। उसका मुख्य कार्य इस आतंकी संगठन से युवाओं को जोड़ना था।

AMU में भाजपा विधायक के नाती के साथ रैगिंग, 60 सीनियर छात्रों ने घेर कर किया गाली-गलौज

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भाजपा विधायक के नाती के साथ रैगिंग की ख़बर सामने आई है। अलीगढ़ स्थित बरौली विधानसभा क्षेत्र के विधायक दलवीर सिंह चौधरी के नाती विजय कुमार सिंह का दाखिला इस साल एएमयू के विदेशी भाषा विभाग (स्पेनिश) में हुआ है। बुधवार (अगस्त 28, 2019) को यूनिवर्सिटी में उनका पहला दिन था। तभी शिक्षकों के सामने ही कुछ सीनियर छात्र कक्षा में घुस आए और नए छात्रों से जबरन उनका नाम-पता पूछने लगे।

सीनियर छात्र सभी जूनियर छात्रों को खड़ा करा कर उनसे सवाल पूछ रहे थे। जब विजय ने खड़ा होने से मना कर दिया तो उनके साथ ज्यादतियाँ की गईं। नाम बताने से इनकार करने पर सीनियर छात्र गाली-गलौज पर उतर आए। भड़के हुए सीनियर छात्रों ने अपने अन्य साथियों को भी बुला लिया। जब यूनिवर्सिटी प्रशासन को सूचना दी गई तो प्रोक्टोरियल टीम ने पहुँच कर मामला शांत कराया। विजय ने बताया कि वह गली-गलौज करने वाले छात्रों की पहचान कर सकते हैं।

इसके बाद दोपहर को विजय जब फिर से क्लास करने जा रहे थे, तब 60 सीनियर छात्रों ने उन्हें घेर लिया और फिर से अभद्रता करनी शुरू कर दी। अन्य छात्र भी वहाँ पर जुट गए और काफ़ी देर तक बहस होती रही। इसके बाद अन्य छात्रों के वहाँ जुटने के बाद सीनियर्स पीछे हट गए। विजय ने बताया कि वह दिल्ली जाकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय में इस घटना की शिकायत करेंगे, क्योंकि एएमयू जैसे बड़े संस्थान में इस तरह की घटना नहीं होनी चाहिए।

विजय ने बताया कि प्रॉक्टर कार्यालय की टीम भी उनके ख़िलाफ़ ही बातें कर रही थीं। यूनिवर्सिटी प्रशासन की टीम चर्चा कर रही थी कि अजय सिंह ने उन्हें परेशान कर रखा था, अब ये भी परेशान करने आ गया। बता दें कि छात्र नेता अजय सिंह ने यूनिवर्सिटी में तिरंगा यात्रा निकाली थी, जिसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उन पर और उनके अन्य साथियों पर गंभीर आरोप लगा कर कार्रवाई की थी। पुलिस ने कहा है कि यूनिवर्सिटी की जाँच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

‘CM योगी के पास अपार शक्ति, उनके कार्यकाल में ही बनेगा राम मंदिर’

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले पर सुनवाई चल रही है। इस बीच, उत्तर प्रदेश के श्रम कल्याण परिषद के अध्यक्ष व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री पंडित सुनील भराला ने कहा है कि भगवान राम का मंदिर निश्चित रूप से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में ही बनेगा। मुख्यमंत्री के बारे में उन्होंने कहा कि वो एक निर्णायक व्यक्ति हैं, वो ख़ुद अपने हाथों से मंदिर का निर्माण कार्य करेंगे, उनके पास ‘अपार शक्ति’ है।

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में आज (29 अगस्त) 15वें दिन सुनवाई चल रही है। चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया (CJI) रंजन गोगोई की अगुआई में पाँच सदस्यीय पीठ के समक्ष दलीलें दी जा रही हैं। इस पीठ में जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं।

बता दें कि बुधवार (28 अगस्त) को एक हिंदु संस्था ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह दावा पेश किया था कि मुगल बादशाह बाबर न तो अयोध्या गए थे और न ही विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल पर 1528 में मस्जिद बनाने के लिए मंदिर ध्वस्त करने का आदेश दिया था। 

राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने दलीलें रखते हुए कहा था कि विवादित ढाँचा बाबर ने बनवाई, इसका कोई सटीक प्रमाण नहीं है। इसके लिए उन्होंने बाबरनामा, आईने अकबरी, हुमायूँनामा, तुजुक-ए-जहाँगीरी जैसी ऐतिहासिक पुस्तकों का हवाला दिया। साथ ही उन्होंने कहा की मंदिर औरंगजेब ने तोड़ा था।

ख़बर के अनुसार, रामजन्मभूमि पुनरुद्धार समिति ने अपनी दलीलें रखते हुए कहा कि तीन गुंबद वाली इमारत मस्जिद नहीं थी। मस्जिद में जिस तरह की चीज़ें ज़रूरी होती हैं, वो उसमें नहीं थी। समिति ने कहा कि विवादित इमारत बनवाने वाला कौन था, इस पर संदेह है। मीर बाकी नाम का बाबर का कोई सेनापति था ही नहीं।

राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने सुनवाई की शुरुआत में बाबरनामा के कुछ अंश पढ़े और कहा कि कोई भी ऐतिहासिक दस्तावेज ऐसा नहीं है जो यह बताता हो कि विवादित स्ट्रक्चर (बाबरी मस्जिद) 520 ईस्वी में बना हो। बाबरनामा में मीर बाकी के बारे में ज़िक्र नहीं है। बाकी तश्किन्दी 1529 में अवध (अयोध्या) से बाबर से मिलने गया था। उन्होंने कहा कि बाबर सिर्फ इस बात से वाकिफ़ था कि ज़मीन वक़्फ़ की है।

अरुंधति रॉय की माफी का सच: भारतीय सेना को बर्बर बताने पर चुप, पाक फौज के गुणगान पर बोली- मैं मूर्ख

लेखिका अरुंधति रॉय ने 2011 में भारतीय सेना को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। भारतीय सेना को बर्बर और अत्याचारी साबित करते-करते उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान की फौज ऐसा कभी नहीं करती। इस बयान के लिए उनको न केवल भारतीयों, बल्कि बलूचिस्तानियों और बांग्लादेशियों ने भी जमकर लताड़ लगाई।

अब खबर आ रही है कि आठ साल पुराने इस बयान के लिए अरुंधति रॉय ने माफी मॉंग ली है। लेकिन, रॉय के माफीनामे से साफ है कि भारतीय सेना के लिए की गई टिप्पणियों पर वह अब भी चुप हैं। अपने बयान के जिस हिस्से को लेकर उन्हें खेद है वह पाकिस्तानी सेना के गुणगान से जुड़ा है। माफी मॉंगते हुए उन्होंने अपने इस बयान को मूर्खतापूर्ण करार दिया है।

बता दें कि 2011 में रॉय ने कहा था कि भारतीय सेना कश्मीर, मणिपुर, नागालैंड, तेलंगाना, पंजाब और गोवा में अपने ही लोगों के ख़िलाफ़ युद्ध लड़ रही है। साथ यह भी कहा था कि पाकिस्तान की फौज ऐसा कभी नहीं करती। अभी हाल ही में जम्मू कश्मीर को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने के बाद रॉय का वह क्लिप सोशल मीडिया पर फिर से सर्कुलेट होने लगा। नाराज़ बलूच नेताओं ने रॉय को याद दिलाया कि कैसे पाक फौज बलूचिस्तान की जनता पर अत्याचार कर रही है।

इसके बाद बंगलादेशी मीडिया ने भी अरुंधती रॉय की आलोचना की। बांग्लादेश लिबरेशन युद्ध के दौरान और उससे पहले पाक फौज ने बांग्लादेशियों पर ख़ूब अत्याचार किए थे। महिलाओं का बलात्कार और बच्चों-बूढों तक को भी मार डालना पाकिस्तानी फौज का पेशा बन गया था। बलूचिस्तान और बांग्लादेश से आने वाली आलोचना के बाद अरुंधति रॉय ने अपने 8 वर्ष पुराने बयान को मूर्खतापूर्ण करार दिया है। उन्होंने कहा कि सभी लोग अपने जीवन में कभी न कभी कुछ ‘मूर्खतापूर्ण और बेहूदगी भरा’ कह जाते हैं।

‘द प्रिंट’ को दिए गए बयान में रॉय ने कहा कि उस विडियो क्लिप में वह जो भी कहती दिख रही हैं, वो उनकी सोच, विचारों और रचनाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करता। वे लोगों से किसी बातचीत के दौरान कही अपनी बातों बजाय अपने लिखे पर विश्वास करने की सलाह देती है। वह कहती हैं अगर इस विडियो क्लिप से कोई भी कन्फ्यूजन पैदा हुआ है तो वह माफ़ी माँगती हैं। अरुंधति रॉय ने कहा:

“पाक फौज बलूचिस्तान में जो कुछ भी कर रही है या बांग्लादेश में उसने जो नरसंहार किया- इस बारे में मेरी राय कभी भी अस्पष्ट नहीं रही है। मैंने इस बारे में काफ़ी कुछ लिखा है। हिन्दू राष्ट्रवादी मेरे पुराने विडियो क्लिप को निकाल कर हंगामा मचा रहे हैं। जिसनें भी मुझे पढ़ा है वो इन बातों पर एक सेकंड के लिए भी विश्वास नहीं करेगा। नैतिक रूप से पाकिस्तान, बांग्लादेश और भारत में से कोई भी एक-दूसरे से बढ़ कर नहीं है। भारत में अभी फासिज्म का वातावरण तैयार हो रहा है। जो इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता है, उसे बदनाम होने, ट्रोल किए जाने, जेल में भेजे जाने और पिटाई किए जाने का डर है।”

बांग्लादेश और बलूचिस्तान के सम्बन्ध में कही गई अपनी बातों को ग़लत साबित करने के लिए रॉय ने अपने उपन्यास का उदाहरण दिया। उनके उपन्यास ‘मिनिस्ट्री ऑफ अटमोस्ट हैप्पीनेस’ में एक भारतीय ख़ुफ़िया अधिकारी कहता है कि कश्मीर में भारत ने कई भयावह चीजें की हैं, लेकिन पूर्वी पाकिस्तान में जो पाक फौज ने किया वह नरसंहार है।

जयपुर में फिर तनाव: ‘कान्हा मटकी फोड़’ के दौरान पथराव, पुलिस को भी नहीं छोड़ा

जयपुर में शांति समिति की बैठक में कमिश्नर की अपील के बावजूद 10 घंटे के अंदर इलाके में फिर तनाव का माहौल बन गया। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कल्याण जी रास्ते में बुधवार देर रात उपद्रवियों ने आतंक मचाया और पथराव किया। कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। पुलिस पर भी पत्थर फेंके गए।

जानकारी के मुकाबिक कल्याण जी रास्ते से पहले चौराहे पर ‘कान्हा मटकी फोड़’ कार्यक्रम चल रहा था। इसमें भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुँचे थे। इसी दौरान एक बच्चे को जेब काटने के आरोप में लोगों ने पकड़ लिया। लोगों ने उसे चोरी किया पर्स लौटाने के लिए धमकाया लेकिन मौक़ा पाते ही वह फरार हो गया।

पत्रिका का स्क्रीनशॉट

इसी बीच अचानक थराव शुरू हो गया। आयोजन में आए लोगों ने देखा तो सामने से बच्चों, किशोंरो और युवकों की एक भीड़ कार्यक्रम स्थल के नजदीक चली आ रही थी। जिसने कार्यक्रम स्थल के पास पहुँचकर आयोजन में शामिल लोगों पर पथराव किया। इसके बाद वहाँ भगदड़ मच गई।

सूचना मिलने पर पुलिस मौक़े पर पहुँची। लेकिन उपद्रवियों ने पुलिस पर भी पथराव किया। माहौल बिगड़ा तो आला अधिकारियों को सूचित किया गया और अतिरिक्त जाब्ता बुलाकर इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

गौरतलब है कि राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सरकार बनने के बाद से कानून-व्यवस्था की स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। जयपुर में दूसरे समुदाय के लोगों द्वारा पत्थरबाजी की हाल में कई घटनाएँ सामने आई है। बकरीद पर उत्पात के बाद तो धारा 144 लगानी पड़ी थी।

फारूक अब्दुल्ला की बेटी से हाईकोर्ट: आप भी दूसरे नागरिकों की तरह, प्रतिबंध झेलने पड़ेंगे

जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की बेटी को रियायत देने से इनकार करते हुए कहा है कि कानून की नजर में सब समान हैं। साफिया खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि वह भी दूसरे नागरिकों की ही तरह हैं। यदि प्रशासन को लगता है कि राज्य में शांति-व्यवस्था बहाल रखने के लिए कुछ प्रतिबंध जरूरी हैं तो उन्हें भी ये प्रतिबंध झेलने पड़ेंगे।

साफ़िया ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि वो शांतिप्रिय भारतीय नागरिक हैं और किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं हैं। बावजूद इसके उन्हें 5 अगस्त से घर में नज़रबंद कर रखा गया है। उन्होंने अपनी याचिका में बीमारी का हवाला देते हुए लिखा था कि उन्हें नियमित डॉक्टर से परामर्श और दवाइयाँ लेनी पड़ती हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों को हटाया जाए जिससे वो अपनी मर्जी से बाहर आ-जा सकें।

याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि वो (साफ़िया) भी देश के अन्य नागरिकों की तरह है और अगर प्रशासन को लगता है कि राज्य में अमन-शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबंध ज़रूरी हैं तो उन्हें भी इन प्रतिबंधों को झेलना पड़ेगा। इस मामले में 16 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान राज्य के एडवोकेट डीसी रैना ने कोर्ट को इस इस बात से अवगत कराया था कि याचिकाकर्ता (साफ़िया ख़ान) को न तो किसी हिरासत में रखा गया है और न ही उन्हें नज़रबंद किया गया है। घाटी में जान-माल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ नितांत आवश्यक प्रतिबंध लगाए गए हैं।

डीसी रैना ने याचिकाकर्ता की चिकित्सीय सुविधाओं के बारे में ज़िक्र करते हुए कहा कि श्रीनगर के एडिशनल डिप्टी कमिश्नर की अगुआई में डॉक्टर्स की टीम उनके घर गई थी, लेकिन याचिकाकर्ता ने उनकी सुविधाएँ लेने से इनकार कर दिया। इस बारे में जब याचिकाकर्ता के वकील इशाक क़ादरी को सूचित किया गया, तो उन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए कहा कि वो साफ़िया ख़ान से मिलने नहीं जा सके हैं।

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने सभी दलीलों को सुनने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता को सुविधाएँ मुहैया कराने के लिए हरसंभव प्रयास किया गया। साथ ही यह बात भी स्पष्ट हो गई कि उन्हें न तो हिरासत में लिया गया है और न ही नज़रबंद किया गया है।