Home Blog Page 5546

पाक में अब 15 साल की ईसाई लड़की का धर्मांतरण, स्कूल प्रिंसिपल ने मदरसा ले जाकर बदलवाया धर्म

पाकिस्तान से जबरन धर्म परिवर्तन की ख़बरें लगातार सामने आ रही हैं। सिख और हिंदू लड़की के बाद अब 15 साल की एक ईसाई लड़की के जबरन धर्मांतरण का मामला सामने आया है।

जानकारी के मुताबिक, पीड़ित ईसाई लड़की जिस स्कूल में पढ़ती थी वहाँ की प्रिंसिपल ने ही उसका धर्म परिवर्तन करवाया है। घटना लाहौर के पंजाब प्रांत की है। ईसाई लड़की के पिता मुख्तार मसीह का कहना है कि स्कूल प्रिंसिपल उनकी बेटी फैजा को लाहौर से करीब 50 किमी दूर शेखपुरा जिले के एक मदरसे में लेकर गई और उसके जबरन धर्म परिवर्तन कराया। प्रिंसिपल का नाम सलीमा बीबी है।

दरअसल, जब बुधवार (सितंबर 4, 2019) को फैजा स्कूल से अपने घर नहीं पहुँची तो उसके पिता मुख्तार स्कूल पहुँचे। वहाँ जब उन्होंने अपनी बेटी के बारे में पूछताछ की, तो एक क्लास टीचर ने उन्हें बताया कि प्रिंसिपल उनकी बेटी का धर्म परिवर्तन कराने के लिए मदरसा ले गई है। जिसके बाद लड़की के पिता ने उसे पास के तीन मदरसों में तलाशा। उन्हीं में से एक मदरसे में बच्ची उन्हें दिखाई दी, लेकिन मदरसे के कर्मचारियों नें उन्हें अपनी बच्ची से नहीं मिलने दिया।

मुख्तार की शिकायत पर पुलिस ने मदरसे में छापा मारकर लड़की को बरामद कर लिया और उसे शेखपुरा के एक शेल्टर होम में शिफ्ट कर दिया। पुलिस अधिकारी मुहम्मद नवाज ने बताया कि पिता की शिकायत पर तुरंत एक्शन लेकर बच्ची को बरामद कर लिया गया है। लेकिन फिलहाल किसी के खिलाफ FIR दर्ज नहीं की गई है। जाँच जारी है।

लड़की ने अभिभावकों ने बताया कि जब वो स्कूल में अरबी पढ़ रही थी तो उसकी स्कूल टीचर ने उससे कहा कि उसने अपने आप धर्मांतरण किया है। बच्ची के पिता ने बताया कि प्रिंसिपल ने उन्हें भी धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपनाने के लिए कहा था और बदले में उनकी जरूरतों के हिसाब से पैसा देने की बात कही थी। लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।

गौरतलब है कि, 3 सितंबर को पाकिस्तान के सिंध प्रांत में दो हिंदू लड़की को अगवा कर उनका धर्म परिवर्तन करवाया गया था। इससे पहले एक सिख युवती को भी अगवा कर उसका धर्म परिवर्तन करवाने के बाद उसकी मोहम्मद हसन से शादी करवा दी गई, जो कि हाफ़िज़ सईद के आतंकवादी संगठन जमात-उद-दावा का सदस्य है।

सबरीमाला पर कब्जे की तैयारी में केरल की वामपंथी सरकार, 150 मंदिरों के लिए बना रही नया विधान

सबरीमाला में भक्तों की भावना को पुलिस के इस्तेमाल से कुचलने वाली केरल की वामपंथी सरकार क्या इस मंदिर पर शिंकजा कसने की तैयारी कर रही है? क्या उसकी नजर मंदिर की कमाई पर है? यह सवाल इसलिए उठ खड़ा हुआ है, क्योंकि केरल की सरकार सबरीमाला श्राइन के 150 से अधिक मंदिरों के लिए नया नियम-कानून तैयार कर रही है। राज्य सरकार ने खुद सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी है।

राज्य सरकार की इस कवायद पर कई लोगों ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई है। त्रावणकोर देवासम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष पी. गोपालकृष्णन ने कहा है कि मंदिरों और उनके राजस्व पर कब्ज़ा करने के लिए सरकार यह कदम उठा रही है। हालॉंकि, केरल सरकार के मंत्री के. सुरेंद्रन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मंदिर के शासन-व्यवस्था से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।

गौरतलब है कि सबरीमाला मंदिर महिलाओं के प्रवेश को लेकर काफी चर्चा में रहा था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के बाद लाखों श्रद्धालु (जिनमें महिलाएँ भी शामिल थीं) सड़क पर उतरे थे। केरल की वामपंथी सरकार ने इस विरोध-प्रदर्शन को दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल किया था। हालाँकि, राज्य सरकार का कहना है कि नए नियम-क़ायदों का इस विवाद से कोई लेना-देना नहीं है।

केरल सरकार के वकील जी. प्रकाश ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि न सिर्फ़ सबरीमाला, बल्कि त्रावणकोर देवासम बोर्ड के अंतर्गत आने वाले सबरीमाला हॉल श्राइन के 150 से अधिक मंदिरों के लिए एक नया विधान बनाया जा रहा है। बोर्ड 1240 मंदिरों का शासन-प्रबंध देखता है।

मंदिरों के लिए नियम-क़ानून बनाने की प्रक्रिया ड्राफ्टिंग के अंतिम चरण में है। जी. प्रकाश ने यह भी बताया कि इसका सबरीमाला मंदिर में महिलाओं द्वारा पूजा-पाठ या प्रवेश करने से कोई लेना-देना नहीं है। सरकार इसे मुख्य रूप से शासन-प्रबंधन से सम्बंधित क़दम बता रही है।

इसके अलावा बोर्ड ने निर्णय लिया है कि सभी 1,240 मंदिरों के लिए पूजा सम्बंधित साजो-सामान की सेंट्रलाइज्ड यानी केंद्रीकृत ख़रीद की जाएगी और उन्हें सभी मंदिरों में बाँटा जाएगा। इससे पहले मंदिर पूजा साजो-सामान की ख़रीद के लिए टेंडर जारी करते थे और बोली लगाया जाता था। अब बोर्ड इसके लिए स्टोर्स की स्थापना करने जा रहा है, जिसका प्रबंधन उसके कर्मचारी करेंगे।

दूल्हा 8 साल का, दुल्हन 7 साल की: MP में महिला एवं बाल विकास मंत्री के जिले में बाल विवाह

मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार के आने के बाद से कानून व्यवस्था चौपट होती जा रही है। अब प्रदेश के गुना जिले में बाल विवाह का मामला सामने आया है। वो भी प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी के जिले में। इमरती देवी गुना से ही महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं। इन्हीं के जिले में इस तरह का गैरकानूनी काम हो रहा था। मगर इन्हें भनक तक नहीं लगी।

गुना के फतेहगढ़ में 8 साल के लड़के का विवाह 7 साल की एक लड़की के साथ किया गया है। इस बाल विवाह में दोनों पक्षों की रजामंदी थी। दोनों पक्षों ने बकायदा कार्ड भी छपवाए और पूरे रीति-रिवाज के साथ मासूमों की शादी करवाई। इस बाल विवाह के बारे में पूरे गाँव को पता था, लेकिन पुलिस-प्रशासन को इसकी खबर नहीं थी। पूरे मामले का खुलासा उस वक्त हुआ जब शादी के बाद मासूम बच्ची के पिता ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पहुँच कर दहेज मामलों से संबंधित शिकायत दर्ज कराई।

दरअसल, शादी के बाद दहेज को लेकर दोनों पक्षों में झगड़ा शुरू हो गया। जिसके बाद गुस्से में लड़की के पिता ने पुलिस में जाकर इस बात की शिकायत कर दी। शादी करने वाले बच्चों की उम्र जानकर पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। पुलिस ने तुरंत 4 महिलाओं और 7 पुरुषों के खिलाफ FIR दर्ज किया।

पुलिस ने उस पंडित को भी नही बख्शा, जिसने फेरे लगवाए थे। बाल विवाह अधिनियम के तहत फतेहगढ़ थाने में कुल 11 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने आनन-फानन में 6 आरोपितों को गिरफ्तार करते हुए न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है। बाल विवाह के इस मामले में जिला प्रशासन भी चुप्पी साधे बैठा है। शायद इसलिए, क्योंकि जिले की प्रभारी महिला और बाल विकास मंत्री इमरती देवी हैं।

बिहार: 4 दिन में मारे 300 नीलगाय, JCB से गड्ढे में धकेल जिंदा ही कर दिया दफन

बिहार में फसल सुरक्षा के लिए सरकार ने नीलगायों को सशर्त मारने की इजाजत दी है। इस आदेश के आने के बाद बिहार के वैशाली में ही सिर्फ 4 दिनों के भीतर 300 से ज्यादा नीलगाय मारे जा चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वन विभाग ही इस काम को अंजाम दे रहा है। एक अधिकारी ने मीडिया को बताया है कि फसलों की सुरक्षा के लिए नीलगायों को मारना एक जरूरी काम है।

3 चरण में मारने की प्रकिया

वन संरक्षक ने वैशाली जिले के 3 प्रखंडों में नीलगायों का शिकार कर उन्हें निर्धारित प्रक्रिया से दफ़नाने का निर्देश दिया। लेकिन, आदेश का पालन करते समय वन विभाग के कर्मचारियों ने नीलगायों को जिंदा दफनाना शुरू कर दिया।

जिले के वन विभाग ने पिछले 4 दिनों में 300 से ज्यादा नीलगाय को मारने का दावा किया है। लेकिन सामने आ रहे वीडियो और तस्वीरों से बेहद हैरान करने वाली सच्चाई सामने आई है। वीडियो में जेसीबी मशीन द्वारा ज़िंदा नीलगाय को गड्ढे में धकेलने के बाद दफ़न किया जा रहा है।

इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक नीलगाय को पहले गोली मारी गई, लेकिन वह मरी नहीं। इसके बाद जिंदा ही उसे जेसीबी की मदद से एक गड्ढे में दफना दिया गया। घटना 1 सितंबर की है। मामला सामने आने के बाद 3 सितंबर को जाँच के आदेश दिए गए।

वैशाली वन प्रमंडल प्राधिकारी का कहना है कि जानवर को मारने के बाद दफनाने की प्रक्रिया है। अगर जाँच में वीडियो सही पाया जाता है तो सम्बंधित लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।

इस वीडियो को आप इस लिंक में देख सकते हैं-

कार चलाते समय हेलमेट नहीं पहनी तो कटा चालान, हेलमेट पहन कर विरोध करने पहुँचा चालक

अलीगढ़ में यातायात पुलिस ने एक ऐसी चूक कर दी, जिससे सोशल मीडिया पर उनका मज़ाक बन गया। दरअसल, हुआ यूँ कि एक कार चालक का इसीलिए चालान काट दिया गया क्योंकि उसने हेलमेट नहीं पहन रखी थी। हेलमेट वाला नियम 2 चक्कों वाली गाड़ी के लिए है लेकिन चार चक्कों वाली गाड़ी के लिए हेलमेट लगाने का कोई नियम नहीं है। चालान कटने के बाद उक्त कार चालक ने भी विरोध के लिए अनोखा तरीका अपनाया।

बन्नादेवी थाना क्षेत्र के सराय हकीम के रहने वाले हार्डवेयर कारोबारी सुरेश चंद गुप्ता मारुती सुजुकी कम्पनी की इस क्रॉस कार से जब शिकायत दर्ज कराने पहुँचे, तो उन्होंने ड्राइविंग करते समय हेलमेट भी पहन रखी थी। उन्होंने बताया कि उनका ऑनलाइन इ-चालान इसीलिए काट दिया गया क्योंकि उन्होंने कार चलाते समय हेलमेट नहीं पहन रखी थी।

उन्होंने सीनियर एसपी और यातायात एसपी के पास अपनी शिकायत दर्ज कराई। हालाँकि, ये मामला 23 अगस्त का है और चालान पुराने नियमों के तहत 500 रुपए का ही काटा गया था। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक पुलिस चालान काटने में इतनी व्यस्त है कि अब वो बाइक और कार के बीच का फ़र्क़ ही भूल चुकी है। उन्होंने ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों से मिल कर पूछा कि क्या अब हेलमेट लगा कर कार चलनी पड़ेगी?

ऐसी ही एक घटना बरेली में भी हुई, जहाँ ईज्जतनगर थाने के अंतर्गत रहने वाले व्यापारी अनीश नरूला का चालान काट दिया गया क्योंकि उन्होंने कार ड्राइव करते समय हेलमेट नहीं पहन रखी थी। पुलिस ने उनके कार के नंबर को स्कूटी का नंबर बता कर चालान काट दिया। बरेली की ट्रैफिक पुलिस ने सफाई देते हुए कहा कि उक्त कार्रवाई सिविल पुलिस द्वारा की गई है।

₹7.1 करोड़ के सौर ऊर्जा पैनल भारत ने दिए UN को, होगा 50KW बिजली का स्वच्छ उत्पादन

दुनिया में अस्थिर तेल के दामों और बढ़ते जलवायु परिवर्तन व प्रदूषण के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र (United Nations) को छत पर लगने वाले सौर पैनल उपहार में दिए हैं। ऐसा इसलिए किया गया है जिससे UN का भी कार्बन उत्सर्जन में योगदान घटे, और स्वच्छ ऊर्जा के मुद्दे पर दुनिया में जागरुकता और आम सहमति बढ़े। इसके अलावा इससे स्वच्छ ऊर्जा के पक्ष में और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ भारत की प्रतिबद्धता का भी पता चलता है। इन पैनलों की कीमत $1 million (₹7.1 करोड़) के करीब बताई जा रही है।

UN ने किया ट्वीट

UN के फोटो-शेयरिंग ट्विटर हैंडल ने भारत से उपहार में मिले सौर ऊर्जा पैनलों और उन्हें संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय की छत पर लगाने में लगे कर्मियों की फोटो ट्वीट की है। इस फोटो में लिखा है कि भारत से उपहार में मिले इन पैनलों से 50 किलो वॉट बिजली का उत्पादन हो सकता है। इसके साथ ही एक और फोटो ट्वीट कर जानकारी दी गई है कि इन पैनलों के बगल में संयुक्त राष्ट्र ‘green roof’ भी लगा रहा है। ग्रीन रूफ़ सामान्य कंक्रीट की छत पर पेड़-पौधे लगा कर हरी-भरी की गई छत को कहते हैं।

पर्यावरण को लेकर सजगता दिखाता रहा है भारत

भारत ने हमेशा ही पर्यावरण को लेकर सजगता का प्रदर्शन किया है। 2017 में अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ट्रम्प के पेरिस समझौते से बाहर जाने की घोषणा के बाद भी भारत ने इस करार का सम्मान किया था। इसके अलावा अपने हालिया रूस दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी ने 2022 तक 175 गीगावॉट स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन की प्रतिबद्धता को दोहराया था।

चंद्रयान-2 पर ‘हाहा’ रिएक्शन देने वालों का भी कोई मजहब नहीं?

चंद्रयान-2 का लैंडर विक्रम चाँद पर उतरने ही वाला ही था कि इसरो के साथ उसका कनेक्शन टूट गया। कुछ अनपढ़ लोगों ने इसे इस तरह से समझा कि चंद्रयान-2 फेल हो गया। जैसे ही ये न्यूज़ मीडिया में आई कि लैंडर विक्रम से कनेक्शन टूट गया, कुछ लोग फेसबुक पर ख़ुशी से झूम उठे। हमने कुछेक मीडिया संस्थानों के ऐसे पोस्ट्स खंगाले, जिसमें इस न्यूज़ को ब्रेक किया गया था या फिर इस सम्बन्ध में जानकारी दी गई थी। ऐसे पोस्ट्स पर ‘हाहा’ का रिएक्शन देने वाले वही लोग थे, जिनका ‘कोई मज़हब नहीं होता’।

उदाहरण के तौर पर ज़ी न्यूज़ की इस वीडियो पर हाहा रिएक्शन देने वाले लोगों के नाम देखिए। इनकी संख्या क़रीब हज़ार में है लेकिन 90% से भी ज्यादा लोगों की ख़ासियत यह है कि ‘इनका कोई मज़हब नहीं है’।

चंद्रयान-2 की लैंडिंग से सम्बंधित वीडियो पर ‘हाहा’ रिएक्शन

जैसा कि आप ऊपर देख सकते हैं, ‘हाहा’ का रिएक्शन देने वालों में सभी मजहबी नाम वाले शख्स हैं। अगर आप सोच रहे हैं कि ये सभी पाकिस्तानी हैं तो आप ग़लत हैं। इसमें कई भारतीय भी हैं। कहने का अर्थ यह कि हर क्षेत्र के समुदाय विशेष ने इसरो के मिशन का मज़ाक उड़ाया। अब उन्हें कौन बताए कि चंद्रयान-2 का जो लक्ष्य था, उसका 95% प्राप्त करने में भारत सफल रहा है और भविष्य में यह और बड़ी सफलता का आधार बनेगा।

सिर्फ़ ज़ी न्यूज़ ही नहीं बल्कि कई अन्य मीडिया संस्थानों के फेसबुक पेज पर भी ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला। ट्विटर पर भी कई लोगों ने जम कर इसरो का मज़ाक बनाया। हालाँकि, इस दौरान ट्विटर पर अधिकतर सकारात्मक ट्वीट्स ही दिखे, जिसमें लोगों ने इसरो की तारीफ की और वैज्ञानिकों का हौंसला बढ़ाया। यहाँ तक कि विश्व की सबसे बड़ी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का भी चाँद को लेकर 40% मिशन फेल हुए हैं लेकिन ‘हाहा’ का रिएक्शन देने वालों को यह भी पता नहीं।

ताजिया जुलूस में शामिल लोगों को दुर्गा मंदिर में आतिशबाजी और उपद्रव करने से रोकने पर पत्थरबाजी

बिहार के किशनगंज जिले में बृहस्पतिवार (सितंबर 06, 2019) को एक साम्प्रदायिक तनाव की घटना सामने आई है। जिसमें पत्थरबाजी में तीन लोग घायल हो गए। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, घटना के बाद सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील शहर में मुहर्रम से एक सप्ताह पहले सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

इस मामले में बिहार के किशनगंज जिले में नगर थाना क्षेत्र के माधवनगर (महादलित टोला) में दो समुदाय के बीच हुई हिंसक झड़प के मामले में आज 25 नामजद समेत 275 लोगों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।

प्रभात खबर के अनुसार, मुहर्रम के पूर्व सौदागर पट्टी कमिटी द्वारा निकला गया ताजिया जुलूस माधव नगर से होकर गुजर रहा था। इसी दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग माधव नगर स्थित दुर्गा मंदिर के बाँस के घेरे को तोड़कर आतिशबाजी करने लगे। इसका विरोध करने पर जब स्थानीय लोगों ने उन्हें मंदिर परिसर को हानि पहुँचाने से रोका तो दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प हो गई, जिसमें दर्जनों लोग घायल हो गए। 

इस झड़प में दो वयस्क समेत और एक बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों का अभी अस्पताल में चल रहा है। इस घटना में गंभीर रूप से घायलों में गौरी देवी, दीपक नल्लीक और 12 वर्षीय मिस्टी शामिल है। घटना की सूचना मिलते ही डीएम हिमांशु शर्मा, एसपी कुमार आशीष दल बल के साथ वहाँ पहुँच गए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बृहस्पतिवार की शाम माधवनगर दलित बस्ती में एक मज़हबी जुलूस निकालने से रोकने के दौरान दो पक्षों के बीच विवाद के बाद पथराव में तीन लोग घायल हो गए थे। मामले की जानकारी मिलने के बाद जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक समेत अन्य अधिकारियों ने मौके पर पहुँच कर आक्रोशित लोगों को शांत कराया।

किशनगंज के पुलिस अधीक्षक कुमार आशीष ने बताया कि मजहबी जुलूस निकालने का विरोध करने पर रात को माधवनगर महादलित टोला में पथराव की घटना हुई थी। उन्होंने बताया कि घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ FIR दर्ज कराई हैं। हालाँकि, इस संबंध में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है लेकिन इलाके में किसी सांप्रदायिक तनाव की आशंका के चलते गश्त बढ़ा दी गई हैं।

बौखलाया पाक आतंकियों से पूछ रहा- चूड़ियॉं भिजवा दें, कश्मीर पर डोभाल ने दिया हर सवाल का जवाब

जम्मू-कश्मीर को लेकर हरेक सवाल का जवाब शनिवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल ने दिया। उन्होंने बताया कि किस तरह पाकिस्तान राज्य में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की फिराक में है और अपने मंसूबे पूरे होते नहीं देख वह बौखलाया हुआ है।

डोभाल ने बताया, “सीमा से 20 किमी की दूरी पर पाकिस्तान के कम्युनिकेशन टावर हैं। हमने उनकी बातचीत सुनी है जिसमें कह रहे हैं कि तुम लोग क्या कर रहे हो? वहॉं (कश्मीर में) इतने सारे सेब से भरे ट्रक कैसे चल रहे हैं? तुम लोग उन्हें बंद नहीं कर सकते। तुम्हारे लिए क्या अब चूड़ियॉं भिजवा दें?”

बकौल डोभाल श्रीनगर से रोजाना 750 ट्रक गुजर रहे हैं। दहशत पैदा करने के लिए आतंकी दुकानदारों और सेब बगान के मालिकों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी कड़ी में दुकान खोल रहे एक व्यक्ति को आतंकियों ने गोली मार दी। गुरुवार को फल व्यापारी हमीदुल्लाह को आतंकी निशाना बनाने की कोशिश में थे। लेकिन, वे नमाज पढ़ने गए थे और आतंकियों को नहीं मिले। आतंकियों ने सोपोर में ढाई साल की बच्ची आस्मा को गोली मार दी। डोभाल ने बताया कि उसकी हालत नाजुक है और उसे इलाज के लिए एम्स दिल्ली लाने के निर्देश दिए गए हैं।

कैसे हैं हालात?

राज्य के 199 थाना क्षेत्रों में से केवल 10 में ही अब निषेधात्मक प्रतिबंध हैं। लैंडलाइन सेवा पूरी तरह बहाल कर दी गई है। 92.5 फीसदी इलाका प्रतिबंध से मुक्त है। प्रतिबंध पूरी तरह हटाया जाना इस बात पर निर्भर करता है कि भविष्य में पाकिस्तान कैसी हरकतें करता है।

हिरासत में नेता क्यों?

डोभाल ने बताया कि राजनीतिक दलों के लोगों को कानून के अनुसार हिरासत में लिया गया है। वे अपनी हिरासत को अदालत में चुनौती दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि किसी पर भी आपराधिक या राजद्रोह का मामला दर्ज नहीं किया गया है। उन्हें कानून-व्यवस्था की स्तिथि काबू में रखने के लिए एहतियातन हिरासत में लिया गया। आशंका थी कि आतंकी उनकी सभाओं का फायदा उठा सकते हैं।

आर्टिकल 370

डोभाल के अनुसार बहुसंख्यक कश्मीरी आबादी आर्टिकल 370 हटाए जाने के पक्ष में है। वे जानते हैं कि इससे भविष्य में तरक्की के दरवाजे खुलेंगे। रोजगार के मौके पैदा होंगे। कुछ गिने-चुने लोग जो राज्य में शांति नहीं देखना चाहते इस फैसले का विरोध कर रहे।

सैन्य प्रताड़ना का सवाल नहीं

डोभाल ने कहा कि सेना द्वारा किसी को प्रताड़ित करने का सवाल ही नहीं उठता। सेना की भूमिका आतंकियों से निपटने तक ही सीमित है। कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य पुलिस और कुछ केंद्रीय बलों के हाथ में है।

आतंक ही पाक का हथियार

डोभाल ने कहा कि पाकिस्तान के पास सिर्फ आतंकवाद ही हथियार है और उसे हम कामयाब नहीं होने देंगे। सीमा पार आतंकियों के सक्रिय होने की पुष्टि करते हुए कहा कि 230 आतंकी घुसपैठ की फिराक में हैं। इनमें से कुछ पकड़े गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी की मौत की केवल एक घटना छह अगस्त को हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ है कि उसकी भी मौत गोली लगने से नहीं हुई।

प्रोपगेंडा से सावधान

डोभाल ने कहा पाकिस्तान एक तरफ कश्मीर के हालात खराब करने की लगातार कोशिश कर रहा है, दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रोपगेंडा भी फैला रहा है। कुछ लोग एकाध घटनाओं और अपुष्ट जानकारी के आधार पर इसे आगे बढ़ा रहे हैं।

चर्च के झगड़े में हाई कोर्ट जज को SC की फटकार – ‘आप भी भारत का हिस्सा, हमारा निर्णय सब पर लागू’

केरल हाई कोर्ट द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरुद्ध फैसला सुनाने पर SC के जस्टिस अरुण मिश्रा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। मालंकारा चर्च में अंतिम संस्कार के मामले में जस्टिस अरुण मिश्रा ऑर्थोडॉक्स ईसाई धड़े के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के जुलाई, 2017 के फैसले के बावजूद हाई कोर्ट द्वारा यथास्थिति बरकरार रखने (यानी ऑर्थोडॉक्स धड़े के विरोधी जैकोबाइट धड़े को भी वहाँ अधिकार देने) के आदेश के बारे में बोल रहे थे। 1934 के मालंकारा चर्च संविधान के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने 3 जुलाई, 2017 को ऑर्थोडॉक्स और जैकोबाइट ईसाईयों के बीच विवाद में व्यवस्था दी थी कि उपरोक्त चर्च संविधान ऑर्थोडॉक्स धड़े को चर्चों का प्रशासन करने का अधिकार देता है।

वर्चस्व के लिए आपस में लड़ रहे ईसाई धड़े

दरअसल मामला यह है कि ऑर्थोडॉक्स धड़े ने एक सिविल सूट दायर कर एर्नाकुलम (केरल) चर्च पर अपना एकाधिपत्य स्थापित करने और किसी अन्य के इसमें हस्तक्षेप को रोकने के लिए निषेधाज्ञा जारी करने की माँग की थी। इसके निचली अदालत में ख़ारिज होने पर ऑर्थोडॉक्स धड़ा उच्च न्यायालय गया, जिसने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ यथास्थिति बनाए रखने (यानी ऑर्थोडॉक्स धड़े के अतिरिक्त जैकोबाइट धड़े को भी वहाँ अधिकार देने) का अंतरिम आदेश तीन हफ्ते के लिए जारी कर दिया। इसी के विरुद्ध ऑर्थोडॉक्स धड़ा सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया।

“न्यायिक अनुशासनहीनता की अति है”

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना को न्यायिक अनुशासनहीनता की अति बताते हुए जस्टिस अरुण मिश्रा, जो इस केस को सुप्रीम कोर्ट में सुनने वाली बेंच का नेतृत्व कर रहे थे, ने कहा कि उच्च न्यायालय को उच्चतम न्यायालय के आदेश के साथ छेड़छाड़ करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने जोड़ा कि केरल के जजों को यह बताया जाना चाहिए कि वे भी भारत का ही अंग हैं (अतः सुप्रीम कोर्ट का निर्णय उनके लिए भी बाध्यकारी है।)