Home Blog Page 5587

370 के पक्ष में नहीं थे अम्बेडकर, इस पर राजनीति बंद हो, सरकार को समय दो: मायावती ने विपक्षी नेताओं को लताड़ा

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कश्मीर की यात्रा के लिए कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को फ़टकार लगाई है। मायावती ने इस दौरे के पीछे उनकी मंशा की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं को इंतज़ार करना चाहिए था और जम्मू-कश्मीर के हालात को सामान्य करने के लिए सरकार को कुछ समय दिया जाना चाहिए।

ट्विटर पर मायावती ने अनुच्छेद-370 पर केंद्र सरकार के फ़ैसले का समर्थन किया और इस फ़ैसले का विरोध करने वाली कॉन्ग्रेस और अन्य दलों को कहा कि वो जम्मू-कश्मीर के हालात का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं।

मायावती ने ट्वीट किया, “जैसा कि विदित है कि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर हमेशा ही देश की समानता, एकता व अखण्डता के पक्षधर रहे हैं। इसलिए, वे जम्मू-कश्मीर राज्य में अलग से अनुच्छेद 370 का प्रावधान रखने के कतई भी पक्ष में नहीं थे। इसी खास वजह से बीएसपी ने संसद में इस अनुच्छेद को हटाए जाने का समर्थन किया।”

उन्होंने आगे कहा कि भारत का संविधान लागू होने के 69 साल बाद सरकार द्वारा यह क़दम उठाया गया है और फ़िलहाल वहाँ स्थिति सामान्य होने में अभी कुछ समय लगेगा। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी कहा है कि सरकार को स्थिति पर क़ाबू पाने के लिए कुछ समय और दिया जाना चाहिए।

मायावती ने आगे कहा कि इस स्थिति में, कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के लिए कश्मीर जाना और स्थिति का राजनीतिकरण करने का प्रयास करना उचित नहीं था। उन्होंने आगे कहा कि पार्टियों को कश्मीर जाने से पहले थोड़ा इंतज़ार करना चाहिए।

यहाँ यह बात ग़ौर करने वाली है कि मायावती उन प्रमुख क्षेत्रीय नेताओं में से एक थीं जिन्होंने विपक्ष का हिस्सा होने के बावजूद अनुच्छेद-370 के बारे में सरकार के फ़ैसले का समर्थन किया था।

आंध्र के सीएम और वाईएसआरसीपी के प्रमुख वाईएस जगन मोहन रेड्डी, बीजेडी के नवीन पटनायक एनडीए के बाहर अन्य पार्टी के नेता थे, जिन्होंने संसद में इस फ़ैसले का काफी समर्थन किया था। इनके अलावा टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने भी सरकार का समर्थन किया था।

मध्य प्रदेश: मदरसों ने कमलनाथ से अलग से मॉंगा मिड डे मील, कहा- एक रसोई का बना नहीं खाएँगे

मध्य प्रदेश में जब से कमलनाथ के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार बनी है तुष्टिकरण की आवाज जोर पकड़ने लगी है। राज्य के उज्जैन शहर में मदरसों ने सरकार से मिड डे मील के लिए अलग से व्यवस्था करने की मॉंग की है। मदरसों ने केंद्रीयकृत किचन से भोजन लेने से मना कर दिया है। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार सभी शासकीय और अनुदान प्राप्त स्कूलों में केंद्रीयकृत किचन से ही भोजन उलब्ध कराने का प्रावधान है। जिला पंचायत ने मदरसों की माँग पर प्रदेश शासन से राय माँगी है।

वैसे, ये पहली बार नहीं है, जब उज्जैन के मदरसों ने अपने लिए अलग से मिड डे मील की माँग की हो। यहाँ के मदरसों ने मिड डे मील को लेकर पहले भी विरोध किया है और अपने लिए अलग से भोजन की व्यवस्था की माँग करते रहे हैं। अगस्त 2015 में उज्जैन के मदरसों ने यह कहकर भोजन लेने से इनकार कर दिया था कि भोजन बनाने वाली संस्था इस्कॉन हिन्दुओं का धार्मिक संगठन है। उन्होंने इस संस्था पर आरोप लगाया था कि भोजन बनाने के बाद उसे भगवान को भोग लगाया जाता है और इसमें गंगाजल मिलाकर स्कूलों में भेजा जाता है।

दैनिक जागरण में छपी खबर का स्क्रीनशॉट

इसके बाद 2016 में मध्यान्ह भोजन का ठेका इस्कॉन से लेकर माँ पृथ्वी साँवरी और बीआरके फूड को दे दिया गया, मगर फिर भी मदरसा समिति ने भोजन लेने से इनकार कर दिया। तभी से शहर के मदरसे मिड डे मील नहीं लेते हैं।

बता दें कि, उज्जैन शहर में 35 मदरसे हैं, जिनमें लगभग 2 हजार विद्यार्थी हैं। अभी चूँकि मदरसों में मिड डे मील नहीं पहुँच रहा है, इसलिए उनके विद्यार्थियों के लिए पैसा भी जारी नहीं हो रहा है। फिलहाल, पिछले आठ महीने से मिड डे मील की व्यवस्था उज्जैन शहर में शानू स्वसहायता समूह संभाल रहा है।

जिला पंचायत के मिड डे मील प्रभारी कीर्ति मिश्र ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मदरसों के लिए मदरसा समिति ने अलग भोजन व्यवस्था की माँग की है। चूँकि शासन की बनी व्यवस्था अनुसार सभी स्कूलों को एक ही किचन में बना भोजन मुहैया कराने का प्रावधान है, इसलिए मध्यान्ह भोजन प्रकोष्ठ से अभिमत माँगा है। वहीं, जिला मदरसा समिति के अध्यक्ष अशफाकउद्दीन ने कहा कि मदरसों में भी विद्यार्थियों को मध्यान्ह भोजन मिले, इसके लिए अलग भोजन निर्माण की माँग का पत्र जिला पंचायत को भेजा था। इस पर अब निर्णय नहीं हुआ है। 

इसके अलावा, उज्जैन जिला पंचायत के सीईओ ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि मदरसों में मध्यान्ह भोजन की अलग व्यवस्था करने की माँग जिला मदरसा समिति ने की है। मौजूदा प्रावधान के अनुसार यह संभव नहीं है। उनकी माँग पर क्या निर्णय लिया जाए, इस संबंध में शासन से अभिमत माँगा गया है।

सोनिया गॉंधी के ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताते ही मोदी की तारीफ करने के लिए शशि थरूर पर टूट पड़े कॉन्ग्रेसी

लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद ही यह जाहिर हो गया था कि कॉन्ग्रेस के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। आर्टिकल 370 और प्रधानमंत्री मोदी के कामकाज को लेकर पार्टी का विभाजन साफ-साफ दिखने लगा है।

कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी ने पिछले दिनों पार्टी सांसद शशि थरूर के उस बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की थी। इसके बाद से केरल कॉन्ग्रेस के नेता इस मुद्दे पर थरूर के पीछे पड़ गए हैं। थरूर केरल की ही तिरुवनंपुरम सीट से सांसद हैं।

प्रधानमंत्री की सही चीजों के लिए प्रशंसा करने के थरूर के बयान की रविवार (अगस्त 25, 2019) को केरल कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने तीखी आलोचनी की। हालाँकि पार्टी नेताओं की आलोचनाओं से बेपरवाह थरूर ने कहा है कि उनके रुख में कुछ भी गलत नहीं है।

केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्नितला ने कहा कि मोदी सरकार की गलतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। वहीं प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने कहा कि थरूर का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है और कहा कि वो इस बारे में उनसे बात करेंगे।

थरूर ने कहा था कि सही चीज करने पर प्रधानमंत्री की सराहना करने से विपक्ष की आलोचना की साख बनेगी। उन्होंने और पार्टी के एक अन्य नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने पिछले हफ्ते पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश का समर्थन किया था। रमेश ने कहा था कि मोदी के काम को नहीं स्वीकारने और उन्हें हर समय उन्हें खलनायक की तरह पेश करने से कोई फायदा नहीं होने वाला है।

चेन्नितला ने अलप्पुझा के हरिपद में थरूर के बयान पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि केंद्र सरकार कई ऐसे निर्णय ले रही है, जो लोगों को अस्वीकार्य हैं और किसी एक अच्छे काम के लिए उनका महिमामंडन करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस मोदी सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी। मोदी सरकार के हजारों गलत काम के बाद एक अच्छे कार्य के लिए प्रधानमंत्री मोदी की गुणगान करने की जरूरत नहीं है।

रामचंद्रन ने तिरुवनंतपुरम में पत्रकारों से कहा कि थरूर ने 5 सालों तक भाजपा नीत एनडीए सरकार का खुलकर विरोध किया है। रामचंद्रन ने कहा कि वो नहीं जानते कि पिछले एक हफ्ते में क्या बदलाव आया है कि वो अचानक से मोदी सरकार का समर्थन कर रहे हैं।

थरूर ने रविवार को अपने, अभिषेक मुन सिंघवी और जयराम रमेश द्वारा की गई टिप्पणियों का बचाव करते हुए मलयालम टीवी पर कहा, “जयराम रमेश और सिंघवी ने जो कुछ कहा है, वह गलत नहीं है। अगर पीएम मोदी ने कुछ अच्छा किया है, तो हमें इसे स्वीकार करना चाहिए। अन्यथा हम लोगों के बीच अपना विश्वास खो बैठेंगे। यदि जरूरत हो, तो हमें उनकी कड़ी आलोचना भी करनी चाहिए।”

पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने 22 अगस्त को थरूर के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। उन्होंने कहा था कि थरूर को इस तरह के बयान सार्वजनिक तौर पर देने की बजाए कॉन्ग्रेस संसदीय दल के समक्ष रखना चाहिए था।

गौरतलब है कि, इससे पहले भी लोकसभा में कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी समेत अन्य नेताओं ने जयराम रमेश, अभिषेक मनु सिंघवी और शशि थरूर के बयान की आलोचना की थी।

बंगाल: निगम पार्षद ख़ालिद ख़ान की मौसेरे भाइयों ने की हत्या, भाजपा पर दोष मढ़ TMC ने मचाया उत्पात

पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। शनिवार (24 अगस्त) की देर रात क़रीब 11.40 बजे आसनसोल नगर निगम के वॉर्ड-66 के तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्षद ख़ालिद ख़ान (45 वर्षीय) की अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी।

मामले में खालिद के भाई अरमान की शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीन लोगों पर मुकदमा दर्ज किया हैं। ये हैं टिंकू शेख, शेख कादिर और शेख शाहिद। तीनों खालिदा खान के मौसेरे भाई हैं। लेकिन, इस हत्या का दोष भाजपा पर मढ़ने की कोशिश करते हुए तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जमकर उत्पात मचाया।

हत्या की य़ह घटना कुल्टी थाना के अंतर्गत बराकर-कल्याणोश्वरी रोड पर वॉर्ड-66 सिथित मनगड़िया की है। पुलिस ने आरोपित टिंकू शेख़ को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है, जबकि शेख़ क़ादिर और शेख़ शाहिद फ़रार हैं।

ख़बर के अनुसार, तीनों आरोपित सगे भाई हैं। तीनों आरोपित भी मनगड़िया में ही रहते हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हत्या के बाद बंगाल के उपभोक्ता मामलों के मंत्री साधन पांडे ने इसके पीछे भाजपा का हाथ बताया।

इसके बाद तृणमूल कार्यकर्ताओं ने जमकर उत्पात मचाया। मनगड़िया की ओर आने वाली सड़कों पर झाड़ियाँ रख दीं और टायरों को जलाकर मार्ग अवरोध किया। इसके अलावा बराकर बाज़ार को बंद करके अपना विरोध प्रदर्शन किया।

दैनिक जागरम के बंगाल संस्करण में छपी ख़बर

हत्या के बाद से तनाव की स्थिति बनी हुई है और दहशत का माहौल पसरा हुआ है। बता दें कि इससे पहले भी मृतक पर जानलेवा हमला हो चुका है। लोगों का कहना है कि शनिवार की रात को ख़ालिद ख़ान खाना खाने के बाद सड़क पर टहलने निकले थे। तभी पहले से घात लगाए हमलावरों ने उन पर गोलियों की बौछार कर दी।

गोली की आवाज़ सुनकर घटनास्थल पर लोगोंं की भाीड़ जुट गई। ख़ालिद को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। ख़ालिद को चार गोलियाँ लगी थीं। घटना की सूचना मिलते ही मेयर जितेंद्र तिवारी, उपमेयर तब्बसुम आरा, बोरो चेयरमैन गुललाम सरवर समेत कई पार्षद व अन्य नेता अस्पताल पहुँचे। तनाव के कारण मनगड़िया क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया।

J&K: राहुल गाँधी ने पाक न्यूज वेबसाइट्स को दिया कच्चा माल, कहा- ‘ बर्बरता महसूस की’

श्रीनगर एयरपोर्ट से ही वापस दिल्ली लौटा दिए कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी ने ट्वीट कर दावा किया कि उन्होंने उस बर्बरता को महसूस किया जो वहाँ के कश्मीरी झेल रहे हैं। इस बयान के बाद से वे पाकिस्तान की मीडिया में छाए हुए हैं। पाकिस्तानी मीडिया उनके बयानों को आधार बनाकर अपने प्रोपगेंडा को धार देने की कोशिश कर रहा है।

श्रीनगर से दिल्ली लौटने के बाद उन्होंने ट्वीट किया, “जम्मू-कश्मीर के लोगों की स्वतंत्रता और नागरिक आजादी पर अंकुश लगाए हुए 20 दिन हो गए हैं। लेकिन विपक्ष के नेताओं और मीडिया को जम्मू-कश्मीर के लोगों पर किए जा रहे कठोर बल प्रयोग और प्रशासनिक क्रूरता का अहसास तब हुआ, जब हमने शनिवार को श्रीनगर का दौरा करने की कोशिश की।”

जाहिर है इस समय पाकिस्तान का और कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेताओं का रोना एक ही हैं। इसलिए पाकिस्तान ने तुरंत राहुल गाँधी के बयान को अपनी मीडिया कवरेज में प्राथमिकता दी। पाकिस्तान के मशहूर अखबार द डॉन ने अपनी खबर में उनके शब्दों को हेडलाइन बनाकर लिखा कि कॉन्ग्रेस नेता ने अपने विक्षुब्ध अनुभवों के बारे में ट्वीट करते हुए बताया कि उन्हें प्रतिनिधिमंडल के साथ ‘भारत अधिकृत कश्मीर’ में जाने से रोका गया।

dawn की खबर का स्क्रीनशॉट

वहीं, टाइम्स ऑफ इस्लामाबाद में कश्मीर पर कवरेज करते हुए छापा गया कि मोदी सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के बाद वहाँ प्रतिबंध लगा दिए गए हैं, जिस कारण कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और अन्य 11 नेताओं को श्रीनगर में उतरने के बाद तुरंत दिल्ली भेज दिया गया। यहाँ इस अखबार ने कॉन्ग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा के नाम का भी जिक्र किया जो राहुल गाँधी के साथ उनके प्रतिनिधिमंडल में थे।

पाकिस्तानी मीडिया में छाए रहे राहुल गाँधी

इसी तरह फ्रंटियर पोस्ट और द स्टेट्समैन जैसी न्यूज वेबसाइट्स ने भी राहुल की दिल्ली वापसी की खबर प्रमुखता से चलाई। जैसे वहाँ भारतीय नेताओं का प्रतिनिधिमंडल नहीं, पाकिस्तान नेताओं का प्रतिनिधिमंडल कश्मीर का जायजा लेने दौरे पर पहुँचा हो।

स्पष्ट है कि इस समय अपना हित खोजने के लिए पाकिस्तानी राजनेता और वहाँ का मीडिया सिर्फ़ कॉन्ग्रेस नेताओं के बयानों पर आश्रित है। वह कश्मीर में अपने मनमुताबिक ‘अराजक’ स्थिति पर लिखने के लिए कॉन्ग्रेस के नेताओं को फॉलो कर रहा है। वर्तमान सरकार तो उनसे इस मसले को लेकर क्या किसी मसले पर बात करने को तैयार नहीं है। क्योंकि आतंकवाद के मुद्दे को लेकर भारत सरकार द्वारा पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अपनाया कड़ा रुख अभी तक बरकरार है।

गौरतलब है कि कश्मीर में बर्बरता महसूस किए जाने वाले बयान के अलावा राहुल कह चुके हैं कि कश्मीर में हालात सामान्य नहीं हैं। वायरल होती अपनी एक वीडियो में वह कहते नजर आ रहे हैं कि सरकार ने, गवर्नर ने उन्हें बुलाया था। वह बोलते हैं “सरकार कह रही थी कि सब नॉर्मल है, लेकिन अगर सब नॉर्मल है तो मुझे जाने क्यों नहीं दे रहे? हम किसी भी एरिया में जाने को तैयार हैं, अगर 144 लागू है तो हम जेल जाने को भी तैयार हैं।”

उनके इस वीडियो का भी पाकिस्तानी मीडिया धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रही है। इमरान सरकार में मंत्री फवाद हुसैन ने लिखा, “मोतीलाल नेहरू के परपोते, जवाहरलाल नेहरू के पोते, कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को उनके पूर्वजों के यहाँ नहीं जाने दिया गया। यह दिखाता है कि किस तरह आरएसएस और नाजी विचारधारा ने इंडिया पर कब्जा कर लिया है।”

कांचीपुरम में मंदिर के पास धमाका, आतंकी हमलों को लेकर हाई अलर्ट है तमिलनाडु

श्रीलंका से लश्कर आतंकियों की घुसपैठ के मद्देनजर तमिलनाडु हाई अलर्ट है। इस बीच, राज्य के कांचीपुरम में एक मंदिर के पास धमाके से एक की मौत हो गई और पॉंच अन्य जख्मी हो गए।

धमाका कैसे हुआ यह स्पष्ट नहीं है। हालॉंकि पुलिस का कहना है कि फिलहाल इस धमाके को हाई अलर्ट से जोड़कर नहीं देखा जा रहा।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक मनमपति मंदिर के एक टैंक की सफाई के दौरान धमाका हुआ। सफाई के दौरान एक अज्ञात वस्तु के अचानक फटने से रविवार (अगस्त 25, 2019) को धमाका हुआ। बम निरोधक दस्ता इस बात की जाँच कर रहा है कि किस कारण से धमाका हुआ और उसमें कौन सा विस्फोटक पदार्थ था।

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, “मनमपति में मंदिर के पास एक टैंक से गाद निकाला जा रहा था। इसी दौरान वहाँ के मजदूरों को एक अज्ञात वस्तु मिली। उन्होंने उसे खोलने की कोशिश तो वह फट गया, जिसमें के. सूर्या नामक एक शख्स की मौत हो गई और 5 अन्य लोग घायल हो गए।”

कुछ मीडिया रिपोर्टों में एक प्रत्यक्षदर्शी के हवाले से बताया गया है कि मंदिर के पास पांच संदिग्ध लोग घूम रहे थे। इनमें से एक के पास बॉक्स था। जब उसने बॉक्स को खोलने की कोशिश की, तो धमाका हो गया।

बता दें कि, प्रदेश में आतंकियों के घुसने की खबर के बाद अलर्ट जारी किया गया है, लेकिन पुलिस ने इस आतंकवादी को लेकर जारी अलर्ट से इसका किसी तरह का संबंध होने से इनकार किया है।

पुलिस अधिकारी का कहना है कि शुरू में तो धमाके की बात सुनकर वो भी हैरान थे, लेकिन जब घटनास्थल पर जाकर देखा तो यह अलग तरह का धमाका था। उन्होंने बताया कि घायलों को सरकारी अस्पतालों में भर्ती करवाया गया है।

गौरतलब है कि, श्रीलंका के रास्ते भारत में 6 लश्कर आतंकियों की घुसपैठ की खुफिया रिपोर्ट के बाद 4 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। जिसमें से एक महिला भी शामिल है। तमिलनाडु के कोयंबटूर और केरल के कोच्चि से दो-दो लोगों को पकड़ा गया था। केरल पुलिस ने इससे पहले लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। और फिर कोयंबटूर पुलिस ने 2 और संदिग्धों के उससे संबंध रखने के में हिरासत में लिया है।

कॉन्ग्रेस NSUI की राष्ट्रीय महासचिव ने सावरकर को बताया गद्दार, कहा- ‘कालिख पोत कर ठीक किया’

एनएसयूआई (NSUI) की राष्ट्रीय महासचिव सुरभि द्विवेदी ने सोशल मीडिया पर महान स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर को लेकर ज़हर उगला है। सुरभि ने वीर सावरकर को न सिर्फ़ देशद्रोही और गद्दार कह कर सम्बोधित किया बल्कि यह भी दावा किया कि वे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की हत्या में शामिल थे। सुरभि ने ट्विटर पर लिखा कि सावरकर की प्रतिमा उन स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमा के साथ नहीं लगाई जानी चाहिए, जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दे दी। सुरभि ने लिखा कि सावरकर अंग्रेजों को क्षमा याचिकाएँ लिखा करते थे।

यहाँ यह गौर करने वाली बात है कि कॉन्ग्रेस के संगठन नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया की राष्ट्रीय महासचिव ने दिल्ली विश्वविद्यालय में एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष अक्षय लकड़ा द्वारा वीर सावरकर की प्रतिमा के चेहरे पर कालिख पोतने और उन्हें जूतों का हार पहनाए जाने को सही ठहराया। इस कुकृत्य के लिए सुरभि ने अक्षय को बधाई भी दी। भारत के एक स्वतंत्रता सेनानी को देशद्रोही, गद्दार कह कर उनकी प्रतिमा का अपमान और फिर उस अपमान का समर्थन!

बता दें कि कॉन्ग्रेस के छात्र संगठन ‘नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI)’ ने आधी रात में वीर सावरकर की प्रतिमा को जूतों का हार पहनाया और चेहरे पर कालिख पोत दी थी। मंगलवार (अगस्त 20, 2019) को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैम्पस में आर्ट्स फैकल्टी गेट के बाहर सावरकर की प्रतिमा की स्थापना की थी।

वीर सावरकर की प्रतिमा को एनएसयूआई दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष अक्षय लकड़ा ने जूते की माला पहनाई थी। अक्षय ने समर्थकों संग मिल कर प्रतिमा के चेहरे पर कालिख पोत दिया था। इस दौरान एनएसयूआई के छात्रों की सुरक्षाकर्मियों से झड़प भी हुई थी।

मेरे देश के अनाड़ी PM को ट्रेनिंग की ज़रूरत, कहता है कि जर्मनी-जापान पड़ोसी हैं: हिना रब्बानी खार

पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने अपने ही देश के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को खरी-खरी सुनाई है। पाकिस्तान की संसद में बोलते हुए उन्होंने न सिर्फ़ इमरान के कॉमन सेन्स पर सवाल खड़े किए बल्कि पाक पीएम को अनाड़ी भी बता दिया। हिना रब्बानी खार ने कहा कि इमरान को न भूगोल का ज्ञान है और न ही इतिहास का। हिना रब्बानी ने कहा, “हमारे पीएम कहते हैं कि जापान और जर्मनी पड़ोसी हैं जबकि भूगोल कहता है कि जापान ईस्ट एशिया में है और जर्मनी यूरोप में है। हमारे पीएम कहते हैं कि वर्ल्ड वॉर 2 में दोनों मुल्क़ दुश्मन थे जबकि इतिहास कहता है कि दोनों मित्र थे।“

हिना रब्बानी खार का संसद में दिया यह भाषण सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अपने ही देश में बुरी तरह घिर गए हैं और उनके ही देश के नेता उन पर सवाल खड़े कर रहे। आप भी इस वीडियो को देखिए:

इमरान ख़ान से नाराज़ हिना रब्बानी ने कहा कि पाक पीएम ने पाकिस्तानियों को हँसी का पात्र बना दिया है। उन्होंने कहा कि इमरान देश को शर्मिंदा कर रहे हैं। हिना रब्बानी ने पाक पीएम को लताड़ते हुए कहा कि उन्हें ट्रेनिंग की ज़रूरत है। 2011 से 2013 तक पाक की विदेश मंत्री रहीं हिना रब्बानी खार पाकिस्तानी पीपल्स पार्टी (पीपीपी) की नेता हैं। मात्र 33 वर्ष की उम्र में वह पाकिस्तान की सबसे युवा विदेश मंत्री बनी थीं।

इससे पहले इमरान ख़ान की पूर्व पत्नी रेहम ने भी उनकी नीतियों पर सवाल खड़े किए थे। रेहाम ने कहा था कि इमरान ने कश्मीर पर भारत के साथ डील कर लिया है और वह बिक गए हैं। हाल ही में पाकिस्तानी संसद में एक नेता ने अपने ही मंत्री को कुत्ता और बेशर्म कह कर सम्बोधित किया था।

भारत G-7 का हिस्सा नहीं फिर भी वार्षिक सम्मलेन में PM मोदी को मिला बुलावा, जानिए वजह

जी-7 देशों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के बियारित्ज़ शहर में पहुँचे हैं। हाल ही में फ्रांस दौरे के बाद यूएई और बहरीन की यात्रा के बाद फिर से फ्रांस पहुँचे हैं। जी-7 राष्ट्र समूह में संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान शामिल हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि इस बैठक में भारत क्यों शामिल हो रहा है क्योंकि वह जी-7 का हिस्सा तो है ही नहीं? दरअसल, भारत जी-7 की वार्षिक समिट में फ्रांस के आमंत्रण पर शामिल हो रहा है।

फ्रांस की मेजबानी में हो रहे इस समिट में राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रॉन ने भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका, सेनेगल और रवांडा को इन्विटेशन भेजा है। उन्होंने कहा कि भारत का इस समिट में रहना ज़रूरी है क्योंकि कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर बिना भारत से राय लिए आगे नहीं बढ़ा जा सकता। जी-7 के आयोजक देश के रूप में फ्रांस के पास यह अधिकार है कि वह समूह के बाहर के अन्य देशों को भी बुला सकता है।

इस समिट में कई अहम वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। बियारित्ज़ पहुँचने से पहले पीएम मोदी ने बहरीन में 15,000 से भी अधिक प्रवासी भारतीयों को सम्बोधित किया। अरुण जेटली के निधन के बाद पीएम मोदी देश लौटना चाहते थे लेकिन जेटली की पत्नी व बेटे ने पीएम से फोन पर अपील की कि वे अपना विदेश दौरा बीच में न छोड़ें।

राजीव गाँधी को ‘आधुनिक भारत के पिता’ के रूप में पाठ्यक्रम में शामिल करेंगी राजस्थान और MP की सरकारें

मध्य प्रदेश और राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकारों ने राजीव गाँधी की जयंती से पहले कई ऐसे निर्णय लिए जो बहस का मुद्दा नहीं बने। अगर भाजपा ने किसी स्वतंत्रता सेनानी या किसी महापुरुष को लेकर ऐसा निर्णय लिया होता तो कई लोग बवाल खड़ा करते हुए कहते कि सरकार पाठ्यक्रम से छेड़छाड़ कर रही है या उसका भगवाकरण कर रही है। सबसे पहले बात मध्य प्रदेश की। मध्य प्रदेश की सरकार ने कॉलेजों में राजीव गाँधी के ‘जीवन, विचारधारा और नीतियों’ को पढ़ाने का निर्णय लिया था।

इसके लिए कॉलेजों में ख़ास सेशन आयोजित किए गए। ऐसे सेशन साल भर आयोजित किए जाते रहेंगे। स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर को लेकर हंगामा मचाने वाले लोगो ने इसपर चूँ तक नहीं किया। मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्री ने कहा कि छात्रों को राजीव गाँधी के बारे में ग़लत जानकारियाँ दी गई हैं? यहाँ सवाल उठता है कि ये गलत जानकारियाँ किसने दी? और कॉन्ग्रेस के पास इस बात के क्या सबूत हैं कि ये जानकारियाँ गलत हैं? क्या राज्य सरकारों का काम यही है कि राजीव गाँधी की पॉजिटिव इमेज तैयार की जाए।

सोचिए अगर भाजपा ने वीर सावरकर के बारे में पढ़ाने के लिए कॉलेजों में ख़ास सेशन का इंतजाम किया होता तो क्या-क्या आरोप लगते? और सावरकर की नेगेटिव इमेज बनाने में तो कॉन्ग्रेस का योगदान भी है क्योंकि नेहरू काल में उन पर मुक़दमे भी चले। हालाँकि, वे बाइज्जत बरी हुए। भाजपा ने कहा है कि कॉन्ग्रेस छात्रों को राजीव गाँधी के बारे में पढ़ाए लेकिन सिर्फ़ उन्हीं के बारे में क्यों? भाजपा का सवाल यह है कि बाकी महापुरुषों के बारे में क्यों नहीं पढ़ाया जाना चाहिए?

क्या कॉन्ग्रेस छात्रों को केवल राजीव गाँधी के बारे में पढ़ा कर पार्टी एक परिवार विशेष के लोगों को हाईलाइट नहीं कर रही? राजनीति तक तो ठीक है लेकिन अब शिक्षा व्यवस्था को भी इसके चपेट में लेने की कोशिश हो रही है। इसी तरह राजस्थान सरकार ने भी पाठ्यक्रम में राजीव गाँधी की प्रशंसा में लिखे आलेखों को पढ़ाने का निर्णय लिया है। भारत के इतिहास के अंतर्गत राजीव गाँधी को ‘आधुनिक भारत के पिता’ के रूप में पढ़ाया जाएगा।

राजीव गाँधी के बारे में क्या पढ़ाया जाना है, इस बारे में भी सरकार तय करेगी। सरकार इसके लिए कुछ लोगों को चुनेगी, जो राजीव गाँधी पर आलेख लिखेंगे। इन्हें पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। सीधा अर्थ है कि कॉन्ग्रेस सरकार अपने पसंद के इतिहासकारों व अकादमिक विशेषज्ञों को चुनेगी जो कॉन्ग्रेस पार्टी के अजेंडे के तहत राजीव गाँधी पर चैप्टर तैयार करेंगे।