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मीका को मिली पाक में गाना गाने की सजा, सलमान खान ने साथ में परफॉर्म करने से किया मना

भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनावों के बावजूद कराची में जाकर परफॉर्म करने वाले भारतीय गायक मीका सिंह की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं हैं। पिछले दिनों उनकी हरकत पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए FWICE ने उन्हें बैन किया था और अब खबर है कि सलमान खान ने भी अपने ईवेंट से उनका नाम हटा दिया है।

दरअसल, जानकारी के अनुसार अमेरिका में 25 अगस्त से शुरू होने वाले सलमान खान के कॉन्सर्ट में मीका परफॉर्म करने वाले थे लेकिन अब उनकी परफॉर्मेंस को पोस्टपोन कर दिया गया है।

डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट की मानें तो सलमान खान की कई फिल्मों में हिट गाने गा चुके मीका सिंह के साथ सलमान ने इस इवेंट में परफॉर्म नहीं करने का फैसला किया है।

सलमान के इस फैसले पर उनके एक करीबी दोस्त ने बताया है कि सलमान के लिए उन तत्वों से खुद को दूर रखना जरूरी है जिनके देशप्रेम पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसलिए वह मीका के साथ परफॉर्म नहीं करेंगे।

डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट में सूत्रों का हवाला देकर कहा गया है, “आज के वक्त में आप बिना ‘पॉलिटिकली करेक्ट’ हुए कोई स्टार या सेलिब्रिटी नहीं बन सकते हैं। मीका ने भले ही पाकिस्तान में परफॉर्म करने पर माफी माँग ली है, लेकिन वह भीतरी तौर पर वैसे ही हैं। क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान में जाकर परफॉर्म किया और देश की भावनाओं को आहत किया।”

गौरतलब है कि सलमान खान हमेशा से उन विवादों से कटते नजर आए हैं जिसके कारण उनके देशप्रेम पर सवाल उठे। मीका की तरह जब सिद्धू के मामले ने भी तूल पकड़ा था तब भी उनके प्रोडक्शन हाउस में बन रहे द कपिल शर्मा शो से जज नवजोत सिंह सिद्धू को हटा दिया गया था।

कॉन्ग्रेस को दफन करने वाले के ज्ञान पर क्या बोलूॅं : अधीर रंजन चौधरी पर J&K के राज्यपाल का तंज

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के बयान पर पलटवार किया है। राज्यपाल ने कहा है कि अपनी पार्टी को दफन कर देने वाले नेता के ज्ञान पर वे क्या कह सकते हैं। चौधरी ने कहा था कि सत्यपाल मलिक जिस तरह की बातें कर रहे हैं उसे देखकर तो यही लगता है कि उन्हें जम्मू-कश्मीर बीजेपी का अध्यक्ष बना देना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा, “उन्होंने संसद में बोल कर अपनी पार्टी को दफन कर दिया। मैं उनके ज्ञान पर क्या कह सकता हूं? मैं पूरी ईमानदारी से अपना काम कर रहा हूॅं। इस तरह के आरोपों की मैं परवाह नहीं करता।”

राज्यपाल का संदर्भ लोकसभा में कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता चौधरी के उस बयान को लेकर था जिसमें उन्होंने जम्मू-कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मसला बता दिया था। लोकसभा में जम्मू-कश्मीर पर सरकार की ओर से लाए गए बिल पर बहस के दौरान चौधरी ने यह बात कही थी। उनके इस बयान ने कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी को भी असहज कर दिया था।

अधीर रंजन चौधरी ने कहा था, “जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल को राज्य बीजेपी इकाई का अध्यक्ष बना देना चाहिए। उनकी टिप्पणी और बयान बिलकुल बीजेपी नेताओं की तरह होते हैं। जिस तरह से वह बात करते हैं वह राज्यपाल के संवैधानिक कार्यालय की सत्यनिष्ठा को बरक़रार नहीं रखते ।”

इसके आगे उन्होंने कहा, “जम्मू और कश्मीर के स्कूल और कॉलेज बंद हैं। लोगों को बोलने की अनुमति नहीं है। जो लोग जम्मू-कश्मीर जाना चाहते हैं उन्हें अनुमति नहीं दी जा रही है।” बता दें कि शनिवार (24 अगस्त) को कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को श्रीनगर एयरपोर्ट से प्रशासन ने लौटा दिया था।

रविवार (25 अगस्त) को राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने बताया था कि अनुच्छेद-370 निरस्त किए जाने और लद्दाख व जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने के 20 दिनों बाद कोई जानलेवा हिंसात्मक घटना नहीं हुई है। उन्होंने कहा था कि अगर संचार संबंधी सुविधाएँ बंद हैं और इससे लोगों की जान बच सकती है तो इसमें किसी को क्या दिक्कत हो सकती है।

इसके अलावा, राज्यपाल मलिक ने इस बात से भी अवगत करायाथा कि जम्मू-कश्मीर में दवाइयों और आवश्यक चीज़ों की कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि ईद के ख़ास मौक़े पर सब्ज़ियाँ और मीट लोगों के घरों तक पहुँचाए गए। पिछले 20 दिनों में 23.31 करोड़ रुपए की दवाइयाँ रिटेल दुकानों तक पहुँचाई गईं, जो आम दिनों की तुलना में अधिक हैं।

370 पर सरकार के फैसले का समर्थन न करने पर AIATF के चेयरमैन ने TOI के पत्रकार को फटकारा

केंद्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय करने के फैसले को अधिकांश कॉन्ग्रेस नेताओं ने गलत बताते हुए इस पर अपनी असहमति व्यक्त की है। इस बीच, अखिल भारतीय आतंकवाद विरोधी मोर्चा (एआईएटीएफ) के अध्यक्ष और भारतीय यूथ कॉन्ग्रेस के पूर्व प्रमुख मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने अपने फेसबुक होमपेज पर एक वीडियो शेयर करते हुए टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार को लताड़ लगाई है। उन्होंने जम्मू कश्मीर से 370 को निष्प्रभावी करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने के मोदी सरकार के कदम का समर्थन न करने के लिए टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार की कड़ी आलोचना की है।

एमएस बिट्टा ने अपने पोस्ट के कैप्शन में लिखा है कि अभी भी देश में बहुत देशद्रोही हैं, जिनको अनुच्छेद 370 हटाने से परेशानी है। इस वीडियो में एमएस बिट्टा को पीएम मोदी के इस निर्णय को साहसिक बताते हुए उनकी प्रशंसा करते हुए देखा जा सकता है। एमएस बिट्टा टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार को धिक्कारते हुए कहते हैं, “आप काहे के पत्रकार हैं? पीएम मोदी ने इतना बड़ा काम कर दिया, आप लोगों पर असर नहीं है क्या? आप हिन्दुस्तानी हैं? क्या आप एक भारतीय हैं? भारतीय होने पर गर्व है? तो जो नरेंद्र मोदी ने किया है, उसको सैल्यूट करो न। पत्रकारिता की बात मत करो। राष्ट्र की बात करो। अगर आपको नरेंद्र मोदी का काम नज़र नहीं आता तो आप हिन्दुस्तानी हैं ही नहीं।”

एम एस बिट्टा ने इससे पहले अनुच्छेद 35 ए और 370 को खत्म करने के लिए संसद में वोट देने का आह्वान करते हुए कहा था, “संसद का सत्र चल रहा है और सरकार को यह जानने के लिए मतदान कराना चाहिए कि संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35-A को कौन-कौन रद्द कराना चाहते हैं। इससे राष्ट्र को राष्ट्रवादियों और गद्दारों के बारे में पता चल जाएगा।”

बिट्टा ने पीएम मोदी पर विश्वास जताते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री जल्द ही कश्मीर से आतंकवाद को समाप्त कर देंगे। उन्होंने आरोप लगाया था कि विदेश में बैठे मुट्ठी भर लोग, पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी आईएसआई द्वारा वित्त पोषित हैं, जो कश्मीर को बदनाम कर रहे हैं और स्थानीय व्यवसायों को नुकसान पहुँचा रहे हैं।

बता दें कि, 7 जुलाई 1992 को पंजाब के अमृतसर शहर में हुए एक बम धमाके में बिट्टा ने अपने एक पैर गँवा दिए थे। इस धमाके में 13 लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा, भारतीय यूथ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहने के दौरान 11 सितंबर, 1993 में ऑफिस के परिसर में हुए घातक हमले का शिकार होने से बचे थे। जिसमें 9 लोग मारे गए और 36 अन्य घायल हो गए। एम एस बिट्टा ने 2013 में दिल्ली में कॉन्ग्रेस सरकार पर हमला करते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर अपनी सुरक्षा वापस लेने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था आतंकवादियों की हिट लिस्ट में होने के बावजूद उनकी पार्टी ने उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया।

घुसपैठ की फ़िराक में थे 40 बांग्लादेशी गौ तस्कर, BSF ने अब्दुल को मार गिराया

दक्षिणी असम के करीमगंज में शनिवार (अगस्त 24, 2019) को पशु तस्करों और सीमा सुरक्षा बल के बीच मुठभेड़ हुई। भारत-बांग्लादेश सीमा पर हुई इस मुठभेड़ में बीएसएफ ने एक बांग्लादेशी गौ तस्कर को मार गिराया। एसपी मानवेन्द्र देब रे ने बताया कि ये मुठभेड़ तब हुई जब 40 से भी अधिक बांग्लादेशी भारत की सीमा में घुसने की चेष्टा कर रहे थे। मुठभेड़ के दौरान बीएसएफ ने पंप-एक्शन बंदूकें और पैलेट के प्रयोग किया।

मृतक की पहचान सिलहट स्थित मौलवीबाजार निवासी अब्दुल रउफ के रूप में हुई है। हालाँकि, पुलिस ने कहा कि ये पहचान फ़िलहाल अनौपचारिक रूप से हुई है। पशु तस्कर अब्दुल की छाती पर गोली लगी। बांग्लादेशी सीमा गार्ड्स ने असम पुलिस को अनौपचारिक रूप से मृतक की पहचान बताई है। बीएसएफ को मुठभेड़ से पहले ही ख़ुफ़िया सूचना मिली थी कि कुछ बांग्लादेशी गौ तस्कर भारत में घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं।

बॉर्डर फेन्स के दूसरी तरफ़ बीएसएफ की एक टीम को तैनात कर दिया गया था। यह जानने लायक बात है कि बॉर्डर फेन्स और अंतरराष्ट्रीय सीमा के बीच 150 मीटर की दूरी है। जब 40 के क़रीब बांग्लादेशी पशु तस्करों ने घुसपैठ की कोशिश की, तो बीएसएफ ने उन्हें रोका। इसके बाद एक तस्कर ने बीएसएफ की तरफ धारदार हथियार फेंका।

मुठभेड़ के कुछ देर बाद जब बीएसएफ क्षेत्र में तलाशी के लिए पहुँची तो एक मृत तस्कर दिखा। उसकी लाश बॉर्डर फेन्स से 20 मीटर की दूरी पर पड़ी मिली। पंप-एक्शन बन्दूक से दागे गए पैलेट बहुत ज्यादा नुक़सान पहुँचा सकते हैं अगर उनका उपयोग क़रीबी रेंज से किया गया हो।

भ्रष्टाचार पर मोदी सरकार ने कसी नकेल: 22 वरिष्ठ अधिकारियों को जबरन किया रिटायर

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में सरकारी विभागों से भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई करने का सिलसिला जारी है। इसकी कड़ी में आज केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने 22 वरिष्ठ अधिकारियों को जबरन रिटायर कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इन अधिकारियों को भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों की वजह से फंडामेंटल रूल 56 (जे) के तहत अनिवार्य रूप से रिटायर किया गया है।

जानकारी के अनुसार, सेवानिवृत्त किए गए ये सभी अधिकारी दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, मेरठ और चेन्नई टैक्स यूनिट से जुड़े हुए हैं। इनमें कुछ पर हजार की लाइन में रिश्वत माँगने का आरोप है तो कुछ पर लाख की श्रेणी में रिश्वत माँगने का आरोप हैं। इसके अलावा बताया जा रहा है कि इनमें से एक पर कथित रूप से दुबई से 1224 ग्राम सोना लेकर आए एक युवक से दिल्ली हवाई अड्डे पर 58 ग्राम सोना लेने का भी आरोप है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक जबरन रिटायर किए गए अधिकारियों के नाम वीपी सिंह, आरएस गोगिया, केसी मंडल, एमएस डमोर, केके उकई, एसआर पराते, कैलाश वर्मा, किशोर पटेल, जेसी सोलंकी, एसके मंडल, गोविंद राम मालवीय, एयू छापरगारे, एस अशोकाराज, दीपक एम गनेयन, प्रमोद कुमार, मुकेश जैन, नवनीत गोयल, अचिंत्य कुमार प्रमाणिक, वीके सिंह, डीआर चतुर्वेदी, डी अशोक, और लीला मोहन सिंह हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले मोदी सरकार ने जून महीने में केंद्र प्रत्यक्ष बोर्ड के 12 अधिकारियों समेत 27 उच्च रैंकिंग आईआरएस अधिकारियों को भी मौलिक नियम 56 के तहत अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया था। इस हिसाब से अब तक मोदी सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त 49 अफसरों को रिटायर कर चुकी है। जिनमें अधिकतर पर भ्रष्टाचार, घूसखोरी के आरोप हैं।

चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, सिब्बल बोले- सीबीआई पूछ रही ‘आपके पास है ट्विटर अकाउंट’

सुप्रीम कोर्ट से सोमवार को भी पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम को राहत नहीं मिली। शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि सीबीआई गिरफ्तारी के बाद इसका कोई मतलब नहीं रह जाता है। चिदंबरम फिलहाल INX मीडिया मामले में सीबीआई कस्टडी में हैं।

अब उनकी सारी उम्मीदें आज सीबीआई अदालत में होने वाली सुनवाई पर टिकी है। उनकी पॉंच दिन की रिमांड आज खत्म हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस भानुमति की पीठ ने कहा कि राहत पाने के लिए चिदंबरम को निचली अदालत में जाना होगा। दिल्ली हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज होने के बाद 21 अगस्त को सीबीआई ने चिदंबरम को गिरफ्तार कर लिया था। हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ चिदंबरम ने शीर्ष अदालत से राहत माँगी थी।

इसके अलावा ईडी ने भी चिदंबरम के रिमांड की माँग की है। ईडी की तरफ से दायर हलफनामे पर भी सुनवाई होनी है।

इससे पहले, सीबीआई ने चिदंबरम की अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि गिरफ्तारी के बाद याचिका अर्थहीन है। जस्टिस भानुमति ने भी कहा, “सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ के एक फैसले के मुताबिक गिरफ्तारी के बाद अग्रिम जमानत याचिका अर्थहीन हो जाती है।”

वहीं, चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में मेंशन किया कि कोर्ट ऑर्डर के बावजूद, आईएनएक्स मीडिया केस में सीबीआई रिमांड के खिलाफ दायर याचिका को सुनवाई के लिए लिस्ट नहीं किया गया। सिब्बल ने जीवन के अधिकार की दलील देते हुए याचिका के लिस्टिंग न होने के बावजूद सुनवाई के लिए कहा। इस पर जस्टिस भानुमति ने कहा कि जिस पेटिशन को औपचारिक नंबर न मिला हो, उसकी लिस्टिंग के लिए CJI की अनुमति ज़रूरी है। रिमांंड के खिलाफ अर्जी लिस्ट नहीं है और वो लिस्टिंग के लिए नहीं कह सकती हैं। उन्होंने कहा कि वो अग्रिम जमानत को रेग्युलर बेल में कन्वर्ट नही कर सकती हैं।

सिब्बल ने पीठ को बताया कि सीबीआई चिदंबरम से उनके खिलाफ लगाए गए आरोप के बारे में पूछताछ नहीं कर रही। उनसे विदेशी बैंक खाते के बारे में पूछा गया था, जिससे उन्होंने इनकार कर दिया था। इसके अलावा उनके मुवक्किल से पूछा गया था कि क्या उनके पास ट्विटर अकाउंट है। उन्होंने कहा कि इससे जाहिर होता है कि सीबीआई जॉंच को लेकर गंभीर नहीं है।

सिब्बल ने मीडिया ट्रायल का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जॉंच एजेंसी बगैर सत्यापित जानकारी मीडिया को लीक कर रही है।

जन्माष्टमी में डीजे पर बवाल: घर में घुस कर युवक की हत्या, गर्भवती पत्नी की हालत नाजुक

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में जनमाष्टमी के मौके पर डीजे बजाने को लेकर एक युवक की घर में घुसकर हत्या कर दी गई। हमले में युवक के पिता, भाई, बहन और पत्नी भी गंभीर रूप से ज़ख़्मी हो गए। गर्भवती पत्नी की हालत नाजुक बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक छह नामजद सहित 18 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। नामजदों में से तीन मुस्लिम हैं। पुलिस ने एहतियातन इलाके में धारा 144 लगा दी है। आरोपितों की तलाश की जा रही है। देवरिया के जिलाधिकारी अमित किशोर ने बताया कि 15 सितंबर तक धारा 144 लागू रहेगी।

घटना देवरिया ज़िले के बरहज नगर की है। शनिवार (24 अगस्त) की देर रात कुछ लोगों ने घर में घुस कर लाठी-डंडों से पीट-पीट कर 28 वर्षीय सुमित जायसवाल की हत्या कर दी। घटना के बाद से स्थानीय लोगों में काफ़ी गुस्सा है।

दैनिक जागरण के देवरिया संस्करण में छपी ख़बर

विरोध प्रकट करने के लिए लोगों ने दुकानें बंद रखीं। भारी तनाव को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस फ़ोर्स की तैनाती कर दी गई है। घटना की सूचना मिलते ही ज़िलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक घटना-स्थल पर पहुँचे। इसके अलावा, गोरखपुर के कमिश्‍नर व आइजी भी घटना-स्‍थल का मुआयना करने पहुँचे।

बताया जाता है कि बरहज के पटेल नगर वॉर्ड में जन्माष्टमी का डोल रखा हुआ था। मोहल्ले के ही रहने वाले मुन्नूलाल ने डीजे बंद करने को कहा। इसको लेकर कहा सुनी हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुँच कर मामला शांत कराया।

इसके बाद रात को करीब 12:30 बजे एक दर्जन से ज्यादा युवक मुन्नूलाल के घर पहुँचे। उनके बेटे सुमित ने जैसे ही दरवाजा खोला युवकों ने हमला बोल दिया। बचाव में आए मुन्नूलाल और उनके छोटे बेटे सचिन को भी युवकों ने पीटा और फरार हो गए। गम्भीर रूप से घायल सुनील ने अस्पताल लाते वक़्त रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

पुलिस अधीक्षक श्रीपति मिश्र ने बताया कि यह सांप्रदायिक घटना नहीं है। हमलावरों में से तीन की गिरफ़्तारी हो चुकी है।

राजस्थान: VHP की रैली पर जामा मस्जिद से पत्थरबाजी, धारा 144 लागू, इंटरनेट बंद

राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के गंगापुर सिटी कस्बे में रविवार (अगस्त 25, 2019) की दोपहर विश्व हिंदू परिषद की रैली पर दूसरे समुदाय के लोगों ने पत्थरबाजी की। रैली में करीब 500 लोग शमिल थे। फव्वारा चौक के पास जमा मस्जिद और आसपास के घरों से रैली पर पथराव किया गया। 5 लोग घायल हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही मौक़े पर पहुँची पुलिस ने उपद्रवियों को बल का प्रयोग करके वहाँ से खदेड़ा। तनाव को देखते हुए 1000 से ज्यादा पुलिसकर्मी इलाके में तैनात किए गए हैं। इलाके में धारा 144 भी लागू कर इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सवाई माधोपुर के एसपी सुधीर चौधरी ने बताया कि विहिप के स्थापना दिवस पर निकाली गई रैली जब जामा मस्जिद के पास पहुँची तो दूसरे समुदाय के लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ लोगो ने पत्थर फेंके। इससे भगदड़ मच गई।

जानकारी के मुताबिक इस मामले में पुलिस ने 25 पत्थरबाजों को हिरासत में लिया है। फिलहाल, हालात नियंत्रण में हैं। बताया जाता है कि रविवार रात भी पुलिस को पथराव की घटनाओं की सूचना मिली। इसके बाद देर रात लोगों की धड़पकड़ की गई।

पाकिस्तान में फँसे गोधरा के 80 मुस्लिमों ने वतन वापसी के लिए मोदी से लगाई गुहार

भारत-पाकिस्तान के बीच ट्रेन सेवाओं के आवागमन पर लगी रोक से गुजरात के गोधरा इलाक़े के लोग काफ़ी परेशानियों का समाना कर रहे हैं। ट्रेनों सेवा पर रोक लगने से लगभर 80 लोग पाकिस्तान में फँसे हुए हैं। इनके परिजनों ने मोदी सरकार से उन्हें भारत वापस लाने के लिए मदद की गुहार लगाई है।

ग़ौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को निरस्त कर दिए जाने के बाद से ही पाकिस्तान काफ़ी बौखलाया हुआ है। इसी बौखलाहट में उसने भारत-पाकिस्तान के बीच सप्ताह में दो दिन चलने वाली समझौता एक्सप्रेस ट्रेन को बंद कर दिया है। यह ट्रेन दिल्ली से अटारी वाघा बॉर्डर होते हुए पाकिस्तान के लाहौर तक जाती थी। 1972 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए शिमला समझौते के बाद 1976 में दोनों देशों के बीच समझौता एक्सप्रेस चलाई गई थी।

ख़बर के अनुसार, सामाजिक कार्यकर्ता हाजी फ़िरदौस का कहना है कि अल्पसंख्यक समुदाय के लगभग 80 लोग अपने रिश्तेदारों से मिलने पाकिस्तान गए थे। दोनों देशों के बीच चल रही समझौता एक्सप्रेस ट्रेन पर प्रतिबंध लगने के बाद वहाँ वे लोग फँस गए हैं और भारत नहीं लौट पा रहे हैं। इसलिए केंद्र सरकार से निवेदन है कि वे इन लोगों की मदद करें।

वहीं, ज़मीयत उलेमा-ए-हिंद की गुजरात इकाई के उपाध्यक्ष मुहम्मद इदरीश के अनुसार, पाकिस्तान में फँसे लोग सभी प्रक्रियाओं को पूरा करके पाकिस्तान गए थे। भारत सरकार से अनुरोध है कि उन्हें जल्द से जल्द भारत वापस लाया जाए। गोधरा के तहसीलदार एचए पंजाबी ने कहा, “हम इस बात की जाँच कर रहे हैं कि कितने लोग पाकिस्तान गए हैं और कब वापस आना था। सारी जानकारी एकत्र करके ज़िलाधिकारी को दी जाएगी। इसके बाद इस संबंध में केंद्र सरकार को अनुरोध भेजा जाएगा।”

J&K: पत्थरबाजों ने ट्रक ड्राइवर नूर मोहम्मद को सेना का जवान समझकर की हत्या

दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग के बिजबेहरा इलाके में रविवार को पत्थरबाजों ने सेना का जवान समझकर एक ट्रक ड्राइवर की बर्बरता से हत्या कर दी। घटना 25 अगस्त देर शाम 8 बजे घटी। मृतक की पहचान 42 वर्षीय नूर मोहम्मद डार के रूप में हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो नूर मोहम्मद अनंतनाग के ही जरादीपोरा उरहानहॉल इलाके का रहने वाला था। वह रविवार देर शाम ट्रक लेकर वापस घर लौट रहा था कि तभी वहाँ मौजूद कुछ पत्थरबाजों की नजर उस पर पड़ी। पत्थरबाजों ने उसके ट्रक को सुरक्षाबल की गाड़ी और उसे जवान समझ लिया। इसके बाद उन्होंने नूर पर पत्थरबाजी शुरू कर दी।

एक अधिकारी के मुताबिक पत्थरबाजी में एक पत्थर नूर के सिर पर लगाा, जिस कारण उसे गंभीर चोट आई। उसे जल्दबाजी में नजदीक के बिजबेहरा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहाँ डॉक्टरों ने उसे स्किम्स सौरा रेफर कर दिया। किंतु अस्पताल पहुँचने से पहले नूर ने मौत के आगे अपने घुटने टेक दिए।

मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस जाँच में जुटी और जल्द ही उन्होंने उस पत्थरबाज को ढूँढ निकाला, जिसने नूर पर हमला किया था। आरोपित के खिलाफ़ बिजबेहरा थाने में हत्या के आरोप में केस दर्ज किया गया और अब आगे की कार्रवाई जारी है।

उल्लेखनीय है कि जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद पूरे देश भर में खुशी का माहौल है। जम्मू-कश्मीर के अधिकांश लोग इस फैसले को सराह रहे हैं और शांति से इसे स्वीकार रहे हैं। लेकिन फिर भी घाटी में कुछ अराजक तत्व ऐसे मौजूद हैं जो लगातार माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। इन पर नकेल कसने के लिए सुरक्षा बल लगातार प्रयासरत है।