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150 MBBS छात्रों के सर मुड़वाने पर UP सरकार और MCI सख्त, लग सकता है 1.5 करोड़ रुपए का जुर्माना

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) ने सैफई मेडिकल कॉलेज के कुलपति को नोटिस जारी कर MBBS छात्रों के साथ हुई रैगिंग के संबंध में 24 घंटों के भीतर जवाब माँगा है। इतना ही नहीं, एमसीआई ने उन्हें चेतावनी दी है कि अगर 24 घंटों के भीतर वो जवाब नहीं दे पाते तो उन्हें 1.5 करोड़ रुपए का जुर्माना देना पड़ेगा। एमसीआई ने ये भी स्पष्ट किया है कि आने वाले एक साल के लिए अब वह अपने यहाँ न सीटों को बढ़ा सकते हैं और न ही कोई नया पाठ्यक्रम शुरू कर सकते हैं। इस प्रतिबंध को ‘गलत से समझौता’ करने के कारण आगे बढ़ाया भी जा सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस मामले में ईटावा के डीएम द्वारा रिपोर्ट जमा कराने के बाद इस संबंध में प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने मामले की जाँच के लिहाज से 3 लोगों की कमिटी बनाई है।

वहीं, यूनिवर्सिटी के रजिट्रार एससी शर्मा का कहना है कि एमसीआई के नोटिस का जवाब गुरुवार को भेज दिया गया है। उनके मुताबिक विश्वविद्यालय द्वारा की गई शुरुआती जाँच में अभी कुछ नहीं पता चला है। उन्होंने जाँच के बारे में बताते हुए कहा, “पूरी जाँच कल दोपहर तक पूरी होगी। निष्कर्ष जो भी आएगा उसे सरकार और प्रशासन को भेजा जाएगा।”

रजिट्रार के मुताबिक उन्होंने यूनिवर्सिटी स्तर पर भी 12 सदस्यों की टीम का गठन किया है, जिसमें एक पुलिस, एक पत्रकार और एक तहसीलदार शामिल हैं। यह टीम अपनी रिपोर्ट की डिटेल 28 अगस्त तक जमा करवा देगी।

इस मामले के मद्देनजर एमसीआई ने संस्थान से साफ़ कह दिया है कि अगर उन्हें 24 घंटे के अंदर जवाब नहीं मिला तो वह प्रति छात्र एक लाख रुपए का जुर्माना संस्थान पर लगाएँगे। इसके मुताबिक 150 छात्रों का 1.5 करोड़ रुपए का जुर्माना संस्थान को भरना होगा। इसके अलावा एमसीआई ने ये भी जवाब तलब किया है कि अभी तक सीनियर छात्रों को एक महीने के लिए सस्पेंड क्यों नहीं किया गया?

बता दें कि बीते दिनों सैफई मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले एमबीबीएस के नए छात्रों (फर्स्ट ईयर) के सिर के बाल मुंडवाकर परेड कराए जाने के मामला सामने आया था। मामला प्रकाश में उस समय आया जब ये सभी छात्र सिर झुकाए अपने कॉलेज पहुँचे। घटना का पता चलने के बाद कॉलेज प्रशासन ने इस मामले को ‘परंपरा’ बताकर खारिज करना चाहा। खुद वहाँ के डीन ने कहा कि छात्रों ने अपनी मर्जी से ही सिर के बाल मुड़वाए हैं, वैसे भी ये परंपरा है जो सभी जूनियर छात्र अपनी मर्जी से अपनाते हैं। फिर भी रैगिंग जैसी कोई बात सामने आती है तो वे कार्रवाई करेंगे।

High Alert: तमिलनाडु में घुसे लश्कर के 6 आतंकी, सभी मुस्लिम लेकिन लगा रखा है तिलक-भभूत

तमिलनाडु में सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट जारी किया है। एजेंसियों ने बताया है कि राज्य के कोयंबटूर में लश्कर-ए-तैयबा के 6 आतंकी घुस गए हैं। इन आतंकियों में 1 पाकिस्तानी और 5 श्रीलंकाई तमिल शामिल हैं। अलर्ट के बाद पूरे राज्य में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और सभी जरूरी कार्रवाई की जा रही हैं।

बताया जा रहा है कि श्रीलंका से इन आतंकियों ने समुद्र के रास्ते से भारत में प्रवेश किया है। ये सभी आतंकवादी मुस्लिम हैं लेकिन हिंदुओं की वेशभूषा में ये भारत में घुसे हैं। इन्होंने लोगों को बेवकूफ़ बनाने के लिए तिलक और भभूत भी लगाया हुआ है।

अलर्ट के बाद राजधानी चेन्नई में सुरक्षाकर्मियों की चौकसी बढ़ा दी गई हैं। साथ ही क्यूआरटी टीम को भी वहाँ तैनात किया गया है। चौराहों पर सुरक्षाकर्मी लगातार लोगों की जाँच कर रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो लश्कर के आतंकवादियों को श्रीलंका के कुछ लोगों ने भारत में घुसने में मदद की है।

चेन्नई के पुलिस कमिश्नर ने बताया है कि खुफिया एजेंसियों के अलर्ट को देखते हुए शहर में पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई है। प्रदेश के सभी होटल और लॉज चेक किए जा रहे हैं। विस्फोटक और हथियारों के लिए गाड़ियों की चेकिंग की जा रही है। इसके अलावा संवेदनशील और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।

डीजीपी ने सभी जिले के पुलिस अधिकारियों को आदेश दिया है कि उपद्रवियों और वांछितों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए, मंदिरों में सुरक्षा बढ़ा दी जाए और रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों और हवाई अड्डों पर सुरक्षा कड़ी की जाए।

इनके अलावा भारतीय नौसेना ने अपने सभी बेस और युद्धपोतों को हाईअलर्ट पर रखा हुआ है। साथ ही सभी समुद्री मार्गों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

‘गौ तस्करों ने मेरे भाई की जान ले ली, प्रतिबंधित पशुओं को बचाने के लिए वो अकेला ही लड़ गया कसाइयों से’

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में प्रतिबंधित पशुओं की तस्करी का विरोध करना 23 वर्षीय सोनू के लिए जानलेवा बन गया। कसाइयों ने उसे गोली मार दी और भाग गए। न सिर्फ सोनू बल्कि उसके बचाव में आए परिवार वालों को भी कसाइयों ने मारा-पीटा।

ख़बर के अनुसार, सोनू जागरण ऑर्केस्ट्रा पार्टी में पियानो बजाने का काम करता था। इसके अलावा उसने एक शॉर्ट फिल्म में भी काम किया था। सोनू खाना खाने के बाद रोज पियानो की प्रैक्टिस किया करता था। बुधवार को भी वो खाना खाने के बाद प्रैक्टिस कर रहा था। रात में अचानक उसे एक आहट सुनाई पड़ी। उसने उठकर देखा कि एक पिकअप गाड़ी में कुछ अज्ञात लोग प्रतिबंधित पशुओं को सड़क पर लाद रहे थे। सोनू ने इसका विरोध किया और उन्हें ललकारा। लेकिन सोनू को अकेला पाकर कसाइयों ने उसे बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया।

कसाइयों और सोनू के बीच मार-पीट के कारण उसके परिजन भी नींद से जागकर बाहर आ गए। इसके बाद परिजनों और कसाईयों के बीच भी मारपीट हुई। लेकिन जब समाज के और भी लोग जाग गए तो अपना पलड़ा हल्का होते देख कसाईयों ने हवा में फायरिंग शुरू कर दी। इसी बीच एक गोली सोनू को लग गई, तभी मौक़ा देख कसाई अपनी गाड़ी लेकर वहाँ से फ़रार हो गए।

गंभीर हालत में घायल सोनू को पहले बिलसंडा स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ उसकी हालत को देखते हुए उसे ज़िला संयुक्त चिकित्सालय रेफर कर दिया गया। यहाँ भी उसकी हालत गंभीर बताई गई, जिसके बाद सोनू को बरेली के अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई। लेकिन, रास्ते में ही सोनू ने दम तोड़ दिया।

मृतक सोनू की बहन रामगीता का कहना है कि गौ तस्करों ने उसके भाई की जान ली है। उधर, पुलिस अधीक्षक मनोज सोनकर, अपर पुलिस अधीक्षक रोहित मिश्र, एसडीएम सौरभ दुबे, पुलिस क्षेत्राधिकारी प्रवीण मलिक, थाना प्रभारी निरीक्षक एसके सिंह आदि फोर्स के साथ घटना स्थल पर पहुँचे। एसपी ने सोनू के परिजनों से बातचीत कर मामले की जानकारी ली।

पुलिस द्वारा FIR में कसाइयों का ज़िक्र न किए जाने से लोगों में आक्रोश पनप गया। इस पर हिन्दू युवा वाहिनी समेत कई संगठनों ने पुलिस अधिकारियों से शिक़ायत की। उन्होंने इस घटना के ख़ुलासे के लिए पुलिस प्रशासन को 48 घंटे की मोहलत दी है। साथ ही मृतक के परिजनों के लिए मुआवज़े के तौर पर 25 लाख रुपए की माँग भी की। एसपी ने घटना के ख़ुलासे के लिए पुलिस की कई टीमों का गठन किया है और अनहोनी घटना की आशंका को देखते हुए कई थानों की पुलिस को मोहनपुर गाँव में तैनात कर दिया।


मुझे घर का खाना चाहिए, कैंटिन का खाना नहीं खाऊँगा: कोर्ट की अनुमति नहीं होने से रात भर भूखे सोए चिदंबरम

पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने CBI की हिरासत में अपनी पहली रात बिना कुछ खाए-पिए बिताई। दरअसल, उन्होंने घर के खाने की माँग की थी, लेकिन बिना कोर्ट की अनुमति के ऐसा नहीं किया जा सका। इसके बाद चिदंबरम ने कैंटिन का खाना खाने से इनकार कर दिया। इसके अलावा, CBI द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब भी उन्होंने ठीक से नहीं दिए।

ख़बर के अनुसार, चिदंबरम पूरी रात शांत रहे, उन्होंने मुश्किल से ही CBI और डॉक्टर्स से बात की। डॉक्टर्स ने उनसे उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछा और रेग्युलर चेकअप किया, जो नॉर्मल रहा। चिदंबरम को ग्राउंड फ्लोर स्थित सूइट-5 में रखा गया है और उनकी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी CBI ऑफिसर्स की है। उनकी निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके तहत 24X7 उन पर नज़र रखी जा रही है।

CBI ने उनसे कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे, इसमें मनी लॉन्ड्रिंग मामले से संबंधित सवाल भी शामिल थे। विदेशी कंपनियों और पेमेंट मोड को लेकर भी उनसे सवाल किए गए। ज्ञात हो कि CBI ने इस संबंध में तीन देशों को पत्र लिखकर लेन-देन को लेकर जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। चिदंबरम से स्पष्ट तौर पर नॉर्थ ब्लॉक में पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी से उनकी मुलाक़ात के बारे में सवाल किया गया, इसके जवाब में उन्होंने दोनों से मुलाक़ात होने की बात से साफ़ इनकार कर दिया।

इसके अलावा, CBI ने चेस मैनेजमेंट कंपनी के बारे में उनसे पूछा, एडवांटेज और आसब्रिज कंपनी के संदर्भ में भी सवाल किए और कार्ति चिदंबरम की कंपनियों के बारे में भी सवाल पूछे गए। भास्कर रमन नाम के शख़्स के बारे में चिदंबरम से पूछा गया कि क्या आप उन्हें जानते हैं? साथ ही यह भी पूछा कि INX मीडिया ने आपके बेटे की कंपनी को किश्तों में करोड़ों रुपयों का भुगतान क्यों किया?

ग़ौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा चिदंबरम को अग्रिम ज़मानत नहीं मिली थी, जिसके बाद उनके वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख़ किया था।

YAK की सवारी पड़ी भारी: मेरठ बवाल में वॉन्टेड हाजी सईद को UP पुलिस ने फेसबुक देख किया गिरफ्तार

पिछले कुछ महीनों से लगातार पुलिस को चकमा देकर भाग निकलने वाला हिस्ट्रीशीटर अपनी छोटी सी गलती के कारण पकड़ा गया। हिंसा भड़काने समेत 9 मामलों के दोषी हाजी सईद को पुलिस ने सोशल मीडिया पर उसकी फोटो देखने के बाद गिरफ्तार कर लिया।

सईद की ये फोटो शिमला की है, जो सोशल मीडिया पर डलने के बाद खूब वायरल हुई। इस तस्वीर में सईद एक याक की सवारी करता नजर आ रहा है। इस फोटो के सोशल मीडिया पर पोस्ट होने के बाद पुलिस ने उसकी लोकेशन का फौरन पता लगाया और उसकी गिरफ्तारी संभव हुई।

पोस्ट की जानकारी मिलते ही पुलिस तुरंत एक्शन में आई और उसने अपनी एक टीम को शिमला भेज दिया। लेकिन सईद के कुछ जानकारों ने उसके ऊपर होने वाली कार्रवाई के बारे में उसे पहले ही इत्तेला कर दिया था, जिस कारण उसने अपनी लोकेशन बदलनी शुरू कर दी थी। पर पुलिस ने अपनी सूझ-बूझ से उसे आखिर में गिरफ्तार कर लिया ।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो एसएसपी अजय साहनी ने सईद की गिरफ्तारी के बाद बताया कि भूसा मंडी निवासी हिस्ट्रीशीटर हाजी सईद 9 मुकदमों में वांटेड था। 6 मार्च को भूसा मंडी-मछेरान में अवैध निर्माण तोड़ने को लेकर हुए बवाल और आगजनी में उस पर कुल 3 मुकदमे दर्ज हुए थे। हाजी सईद ने ही भीड़ को आगजनी और तोड़फोड़ करने के लिए उकसाया था।

इसके अलावा 1 जुलाई को भीड़ हत्या के खिलाफ फैज-ए-आम कॉलेज से निकले शांति मार्च में जो बवाल हुआ था, हाजी सईद उसका भी सह-अभियुक्त था। जानकारी के मुताबिक हाजी सईद और बदर अली ने मिलकर शांति मार्च के बहाने बवाल कराया था। कुल मिलाकर हाजी सईद पर सदर बाजार थाने में 5, कोतवाली में 1, रेलवे रोड में 2 और देहली गेट थाने में 1 मुकदमा दर्ज था।

दिल्ली में 10 PM-6 AM तक न्यूड वीडियो कॉल: नजमा, असगर, राजा गिरफ्तार; 20 साल की लड़की सहित कई गायब

दिल्ली के नंद नगरी इलाके में चल रहे सेक्स रैकेट का पर्दाफाश करते हुए दिल्ली पुलिस ने एक दंपत्ति समेत 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ये लोग कुछ समय से रोजाना एक ऐप के जरिए रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक युवतियों से न्यूड विडियो कॉल करवाते थे। आरोपितों की पहचान नजमा (27 साल), असगर (30 साल), कमर राजा (30 साल) के तौर पर हुई है। ये सभी नंद नगरी ए-3 इलाके के रहने वाले हैं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस को इस मामले की जानकारी पीसीआर कॉल के जरिए मिली थी। कॉलर ने पुलिस को बताया था कि इस इलाके के ए-1 ब्लॉक में लड़कियों से वेश्यवृति करवाई जा रही है। सूचना मिलते ही दिल्ली महिला आयोग की टीम वहाँ पहुँची और अपनी जाँच में जुट गई। जब पुलिस घर पर गई तो उसे दो लोग मिले। एक नजमा और दूसरी मंडावली की अस्मिता। जब मकान में रहने वाली नजमा से बारे में पूछताछ की गई तो नजमा ने बताया कि वह शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं।

नजमा के मुताबिक बीते 5-6 महीने से वह इस काम से जुड़ी है। काम तेज चले इसलिए उसने इस्तेमाल की जाने वाली मोबाइल ऐप पर अपना नंबर भी रजिस्टर करवा रखा है। जिससे लोग उसे संपर्क करते थे। इस काम में उसका पति असगर भी उसका पूरा सहयोग करता था। उनके पास न्यूड वीडियो के लिए कई लोगों के मैसेज और कॉल आते थे।

शुरुआती जाँच के बाद पुलिस ने आरोपितों के फोन और सिम कार्ड सीज कर लिए हैं। पुलिस आगे की जाँच कर रही है। पुलिस ने आईपीसी की धारा 328, आईटी और पॉक्सो ऐक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। 

बता दें कि इस मामले के संबंध में 14 अगस्त को एक महिला ने आयोग की हेल्पलाइन पर कॉल करके बताया था कि उसकी 20 साल की बेटी कृष्णा नगर से लापता है। जाँच की गई तो लड़की की बहन ने बताया कि उसकी एक दोस्त इस बारे में कुछ बता सकती है, लेकिन वो उन्हें बताने से इनकार कर रही है। आयोग की टीम लापता लड़की की बहन के दोस्त से मिली। बहुत समझाने-बुझाने के बाद उसने बता दिया कि नंद नगरी में कुछ लोग ऑनलाइन सेक्स रैकेट चला रहे हैं, जहाँ 15-20 लड़कियों से न्यूड वीडियो कॉल करवाई जाती है। उस लड़की ने ये भी बताया कि वह खुद वहाँ 15-20 दिन थी। उससे वहाँ रात के 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लोगों को न्यूड कॉल करवाई जाती थी। इस दौरान कई अंतराष्ट्रीय कॉल भी आती थी।

पूरा मामला जानने के बाद महिला आयोग की अध्यक्ष ने स्वाति मालिवाल कहती हैं, “मुझे हैरानी है कि कैसे इस तरह के हाईप्रोफाइल इंटरनैशनल सेक्स रैकेट पुलिस की नाक के नीचे चलते हैं? 20 साल की लड़की अभी भी कई लड़कियों के साथ गायब है। दिल्ली पुलिस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित वापस लाया जाए।”

मोदी है तो मुमकिन है: 2022 नहीं, अगले ही साल ‘सबको घर’ का सपना होगा हकीकत

मोदी सरकार अक्सर ‘मिनिमम गवर्नमेंट और मैक्सिम गवर्नेंस’ की बात करती है। यदि इस फलसफे पर अमल किया जाए तो किस तरह के बदलाव आ सकते हैं, इसका बेहतरीन नमूना बनकर प्रधानमंत्री आवास योजना उभरा है।

जून 2015 में जब इस योजना का ऐलान किया गया तो इसकी व्यावहारिकता पर कई तरह के सवाल उठाए गए थे। योजना के तहत 2022 तक सभी परिवार को घर मुहैया कराने का लक्ष्य रखा गया। लेकिन, इस योजना को सरकार जिस तेजी से आगे बढ़ा रही है उससे लगा रहा है कि शहरी क्षेत्र में 1.12 करोड़ घर बनाने का लक्ष्य अगले साल ही पूरा हो जाएगा। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 2.95 करोड़ घर बनाने का लक्ष्य भी जद में दिख रहा है।

रीयल एस्टेट क्षेत्र के उद्योगपतियों के संगठन नेशनल रीयल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) के 15वें राष्ट्रीय सम्मेलन में बीते दिनों केन्द्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा, “इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरा करने में कई तरह की चुनौतियॉं हैं। लेकिन उम्मीद है कि हर भारतीय को घर उपलब्ध कराने का सरकार का लक्ष्य दो साल पहले यानी 2020 में ही हासिल कर लिया जाएगा।”

पुरी के अनुसार इस साल के अंत तक एक करोड़ मकान तैयार हो जाएँगे। शेष 12 लाख घर अगले साल मार्च तक पूरा होने की उम्मीद है। योजना के तहत 1.4 लाख घर बनाने की मंजूरी सरकार ने बीते जुलाई में ही दी है।

जुलाई में ही सरकार ने लोकसभा में बताया था कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत कुल 83,68,861 आवास मंजूर किए गए हैं। इनमें से 48,37,466 आवास का निर्माण चल रहा है। 26,13,799 आवास बनकर तैयार हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) जो ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधीन चल रहा है के तहत 1,05,54,674 आवास अब तक मंजूर किए गए हैं। इनमें से 82,07,054 घर तैयार हो चुके हैं।

पुरी के मुताबिक शहरी क्षेत्र में तैयार मकानों की संख्या जल्द ही 75 लाख हो जाएगी। इस योजना के तहत अब तक 24 लाख परिवारों को घर दिए भी जा चुके हैं।

बीते साल दिसंबर में क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अनुमान लगाया था कि शहरी क्षेत्रों में एक करोड़ आवास का लक्ष्य पूरा करने के लिए सरकार को 2022 तक 1500 अरब रुपए खर्च करना होगा। शहरी विकास मंत्रालय में
पीएमएवाई के संयुक्त सचिव अमृत भंजन ने नारेडको के ही कार्यक्रम में बताया कि इस योजना के लिए फंड की कोई कमी नहीं है। 5 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया गया है। उन्होंने बताया कि करीब छह लाख रुपए के हिसाब से 85 लाख घरों के लिए पैसा मंजूर किया गया है। इसमें से 52,000 करोड़ रुपए केन्द्र सरकार जारी भी कर चुकी है।

योजना के ऐलान के वक्त विशेषज्ञों ने कई और तरह की भी आशंकाएँ उठाई थी। मसलन, नई तकनीक का अभाव, शहरी क्षेत्र में जमीन की कमी, महॅंगी जमीन, संपत्ति एवं भू-स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों में समस्या वगैरह। आवासीय अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र की 2017 की रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत को आवासीय क्षेत्र में मानव अधिकारों पर आधारित एक व्यापक और अधिक दूरदर्शी कानून की आवश्यकता है। ऐसा कानून जो असमानता को दूर करता हो और लंबे समय के लिये रोड मैप मुहैया कराता हो।

सरकार पर यह भी आरोप लगा था कि उसने पहले से चली आ रही इंदिरा आवास योजना पर ही नया मुलम्मा चढ़ाया है। लेकिन, 2014 की आधिकारिक ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार के दौरान आवास बनाने की सालाना दर 16.5 लाख आवास थी। बीजेपी सरकार के दौरान 2016 से 2018 के दौरान सालाना 18.6 लाख आवास तैयार किए गए।

बीते साल खुद प्रधानमंत्री ने बताया था कि यूपीए सरकार के कार्यकाल के आखिरी चार सालों में 25 लाख घर निर्मित किए गए थे, जबकि 2014 से सरकार में आने के बाद उनकी सरकार ने 1.25 करोड़ घर लोगों के लिए बनवाए हैं।

जाहिर है, मोदी सरकार जिस तरीके से इस योजना का कार्यान्वयन कर रही है उसके कारण अपने बुनियादी लक्ष्य में आकर्षक दिखने वाली प्रधानमंत्री आवास योजना अब हकीकत में भी वैसी ही दिख रही।

‘कुछ लोग नहीं चाहते मेरे पिता की मौत का रहस्य सुलझे’, बोस की बेटी ने की मोदी से अस्थियों के DNA टेस्ट की माँग

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के निधन से जुड़े विवाद के बीच बृहस्पतिवार अगस्त 22, 2019 को उनकी बेटी अनीता बोस फाफ ने नेताजी की मृत्यु से जुड़े रहस्य को सुलझाने के प्रयासों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की। इसके साथ ही नेता जी की बेटी अनीता बोस ने पीएम मोदी से जापान के रेनकोजी मंदिर में रखी नेताजी की अस्थियों की डीएनए जाँच कराने का अनुरोध किया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, नेता जी की मृत्यु से रहस्य उठाने के लिए नेता जी की बेटी अनिता बोस ने पीएम मोदी से हस्तक्षेप करने की माँग करते हुए दावा किया कि पिछली सरकारों में कुछ ‘खास लोग’ नहीं चाहते थे कि इस रहस्य से कभी पर्दा उठे। माना जाता है कि जापान के रेनकोजी मंदिर में रखी अस्थियां नेताजी सुभाष चंद्र बोस की हैं। अस्थियों के DNA टेस्ट की जाँच की माँग करते हुए अनीता ने कहा कि इससे उनके पिता की मौत की सच्चाई सामने आ सकेगी।

अनीता जर्मनी में रह रही प्रख्यात अर्थशास्त्री हैं। उन्होंने कहा कि जब तक कोई और बात साबित नहीं हो जाती, वह भी इस बात में यकीन करती हैं कि उनके पिता की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को विमान दुर्घटना में हुई थी। साथ ही उन्होंने कहा कि हालाँकि बहुत लोग इसे नहीं मानते इसलिए वो जरूर चाहती हैं कि जाँच हो।

अनीता बोस ने अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि रेनकोजी मंदिर में रखी अस्थियों के डीएनए परीक्षण की अनुमति देने के लिए अनुरोध करने की खातिर वह प्रधानमंत्री से और जापानी अधिकारियों से भी मिलना चाहेंगी।

नेता जी की बेटी की यह टिप्पणी 18 अगस्त को केंद्र सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के एक ट्वीट पर पैदा हुए विवाद के बाद आया है। पीआईबी ने एक ट्वीट में कहा था कि पीआईबी महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस को उनकी पुण्यतिथि पर याद करता है।

‘पिछली सरकारों में कुछ लोग नहीं चाहते थे कि यह रहस्य सुलझे’

नेताजी के परिवार के एक वर्ग द्वारा विरोध किए जाने के बाद इस ट्वीट को वापस ले लिया गया था। अनिता ने इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया कि क्या उन्हें लगता है कि पिछली सरकारों ने (कॉन्ग्रेस सरकार सहित) नेताजी की मौत के रहस्य को जानबूझकर नजरअंदाज किया? लेकिन अनिता ने कहा- “हालाँकि मेरे पास ऐसा कोई सबूत नहीं है कि कॉन्ग्रेस की सरकारों ने इस मुद्दे की अनदेखी की लेकिन पिछली सरकारों में ‘कुछ लोग’ नहीं चाहते थे कि यह रहस्य सुलझे और इसकी अनदेखी की गई।”

‘ईमानदार’ राजीव गाँधी के जन्मदिन पर सोनिया बोलीं- उन्होंने सत्ता का दुरुपयोग बिलकुल नहीं किया

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के पद पर हाल ही में अंतरिम तौर पर वापसी करने वालीं संप्रग अध्यक्षा सोनिया गाँधी भी मोदी सरकार पर ‘डर का माहौल’ बनाने का आरोप लगाने वालों में शामिल हो गईं हैं। उन्होंने राजीव गाँधी के 75वें जन्मदिवस के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी पर अप्रत्यक्ष निशाना साधते हुए यह बात कही। सोनिया गाँधी पूर्व प्रधानमंत्री के जन्मदिन कार्यक्रम पर दिल्ली में बोल रहीं थीं।

1984 में मिला था पूर्ण बहुमत

1984 में अपनी माँ इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद हुए आम चुनावों में राजीव गाँधी के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस को 404 सीटें मिलीं थीं, और जनसंघ को पुनर्जीवित कर बनी भाजपा महज़ 2 सीटों पर सिमट गई थी। सोनिया गाँधी ने उन्हीं चुनावों को याद कराते हुए कहा कि राजीव ने कभी ‘भय का वातावरण’ बनाने या लोगों की आज़ादी और अधिकारों का हनन करने के लिए बहुमत का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने कभी लोकतंत्र के मूल्यों को खतरे में नहीं डाला।

राजीव के फैसले याद दिलाए

सोनिया गाँधी ने इस मौके पर राजीव गाँधी के कई फैसले याद दिलाए। उन्होंने राजीव सरकार द्वारा मतदान की उम्र घटाकर 18 साल किए जाने, स्थानीय निकायों (पंचायतों और नगरपालिकाओं) को वैधानिक दर्जा मिलने, दूरसंचार क्रांति आदि का ज़िक्र किया।

साथ ही इस मौके पर सोनिया ने नरेंद्र मोदी पर भी भरपूर निशाना साधा। उन्होंने राजीव गाँधी के घमंड न करने, नारे न लगाने आदि का ज़िक्र कर मोदी को घेरने की भरपूर कोशिश की। साथ ही दावा भी किया कि जैसे 1989 में राजीव गाँधी ने ‘निःस्वार्थ’ ईमानदारी से पूर्ण बहुमत न होने के चलते सरकार बनाने से मना किया, वैसा आज कोई और नेता नहीं कर सकता।

दलित की इज्जत लूटने आने वाला मुस्लिम नंगा भी हो तो मीडिया गिरोह पीड़िता का ही मुँह दबा देता है

स्वराज्य की पत्रकार स्वाति गोयल-शर्मा ट्विटर पर अंग्रेजी मीडिया का वह घिनौना चेहरा नकाब उधेड़ कर सामने रखतीं हैं, जिसके बारे में सोशल मीडिया और “राइट-विंग” पत्रकारों के दौर से पहले भी हम सब अख़बार पढ़ते, टीवी देखते हुए जानते तो थे, लेकिन कहने की हिम्मत नहीं कर पाते थे। स्वाति बतातीं हैं कि कैसे दलितों का उत्पीड़न अगर ब्राह्मण-सवर्ण की बजाय मुस्लिम के हाथों हो, अगर ‘एंगल’ ऐसा बने कि दलित को हिन्दू पीड़ित के रूप में दिखाना पड़े, तो सच को झुठलाने के लिए पत्रकारिता का समुदाय विशेष और खुद को ‘फैक्ट-चेकर’ कहने वाले नफ़रती किस हद तक गिर जाते हैं।

न केवल पीड़ितों की गैसलाइटिंग (उनके दर्द, उनके अनुभव को अपने क्षुद्र एजेंडे के लिए दूसरों के ही नहीं, खुद पीड़ित के दिमाग में झुठलाने की कोशिश करना; अपने अनुभव को खुद झुठलाने के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से बरगलाना और भ्रमित करना) से वह बाज़ नहीं आते, बल्कि अगर कोई सच दिखाने की कोशिश कर भी रहा हो तो उसे जेल भेजने की कोशिश करने, धमकी से उसे चुप कराने की कोशिश करने में भी यह मीडिया गिरोह नहीं हिचकिचाता।

दलित-बनाम-मुस्लिम पर असहज हो जाता है मीडिया गिरोह

बेगूसराय के नूरपुर में एक महादलित परिवार की महिलाओं के साथ बलात्कार की कोशिश इलाके में बहुसंख्यक मुस्लिम समुदाय के लड्डू मियाँ और अन्य कुछ मुस्लिम पर लगा था। आरोप यहाँ तक लगा था कि बलात्कार करने मुस्लिमों में से एक बेधड़क नंगा आया था। इस पर स्वराज्य ने विस्तृत ग्राउंड-रिपोर्टिंग की थी, जिसे यहाँ पढ़ा जा सकता है।

उसी मामले की रिपोर्टिंग के अपने अनुभव ट्विटर पर साझा करते हुए स्वाति गोयल-शर्मा ने निम्न थ्रेड लिखा। इसमें पीड़ित परिवार के साथ Factchecker.in के संवाददाता की लीक हुई बातचीत का ज़िक्र करते हुए उन्होंने लिखा कि इससे यह साबित हो जाता है कि नैरेटिव के धंधा करने वालों के लिए मुसीबत खड़ी हो जाती है अगर दलितों पर अत्याचार करने वाला ‘सही’ समुदाय से ताल्लुक न रखे।

यहाँ स्वाति गोयल-शर्मा जिस रिकॉर्डिंग्स की बात कर रहीं हैं, वे पीड़ित परिवार के साथ Factchecker.in के संवाददाता की रिकॉर्डिंग हैं, जिन्हें ट्विटर पर जारी IIM-C और IIT-G से पढ़े (यानि मीडिया गिरोह के ‘अनपढ़-नाकारा लोग ही हिंदूवादी बनते हैं’ का मिथक तोड़ने वाले) हिंदूवादी सामाजिक कार्यकर्ता संजीव नेवर ने जारी किया था। वे शुरू से इस मामले से जुड़े रहे थे और इसे SC-ST आयोग तक भी लेकर गए। इन रिकॉर्डिंग में वायर और फैक्टचेकर के रिपोर्टर को पीड़ित परिवार पर अपना बयान बदलने या उसमें से हिन्दू-मुस्लिम ‘एंगल’ हटा मामूली सा ज़मीन विवाद बना देने का दबाव बनाते सुना जा सकता है।

सच बोलने के लिए जेल की धमकी

स्वाति गोयल-शर्मा ट्विटर पर आगे लिखतीं हैं कि अंग्रेजी मीडिया में से वह अकेली थीं जो इस मामले को कवर कर रहीं थीं। मीडिया के एक हिस्से ने उनके काम को, उनके द्वारा इस मामले की उजागर की गई सच्चाईयों को झुठलाने की भरसक कोशिश की। पहले मामले को नज़रअंदाज़ किया, फिर उसकी गंभीरता कम करके दिखाने की कोशिश की, फिर उसमें से साम्प्रदायिक एंगल हटाने की कोशिश की और फिर अंत में स्वाति को साम्प्रदायिक और पीड़ितों को झूठा दिखाने की कोशिश की गई।

स्वाति आगे तंज़ कसतीं हैं कि उनका ‘अपराध’ “मुस्लिम गाँव” छोड़ने के लिए एक गरीब दलित परिवार पर पड़ रहे दबाव और आधी रात में हुए हमले को रिपोर्ट करना था। इसके लिए एक ‘फैक्टचेकिंग’ वेबसाइट के सह-संस्थापक ने उन्हें गिरफ्तार करने की भी अपील की।

गवाहों के बारे में दोहरापन

स्वाति ने यह भी बताया कि एक न्यूज़ पोर्टल ने जब अपनी स्वतंत्र ग्राउंड-रिपोर्टिंग में पाया कि पीड़ित परिवार अपनी कहानी, अपने बयान पर कायम हैं, तो उसने 4 ऐसे लोगों से बात करके, जो मौके पर मौजूद नहीं थे, यानि मामले के गवाह नहीं थे, एक रिपोर्ट छाप दी कि गाँव वालों ने स्वराज्य की “मामले को साम्प्रदयिक रंग देने की कोशिश” को झुठला दिया है।

वे केस की आगे की प्रगति के बारे में बतातीं हैं कि जब संजीव नेवर की शिकायत पर राष्ट्रीय SC आयोग ने हस्तक्षेप किया तो जाँच में निकल कर आया कि पुलिस ने कई सारी गलतियाँ की थीं। SHO को मूल FIR बदलने के लिए निलंबित कर दिया गया, और बदले के इरादे से पीड़ित परिवार पर दाखिल दो काउंटर-FIRs नकली निकलीं, और पीड़ितों को पुलिस सुरक्षा दी गई।