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पाकिस्तान से हमदर्दी पर बोले ओवैसी- यकीन है एक दिन मुझे कोई भी गोली मार देगा

विवादित बयानों के कारण अक्सर चर्चा में रहने वाले हैदराबाद के सांसद और AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि उन्हें यकीन है कि एक दिन कोई उन्हें गोली भी मार देगा। अपने बयानों से पाकिस्तानी प्रोपगेंडा को हवा देने संबंधी आरोपों के जवाब में उन्होंने यह बात कही। जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी किए जाने के बाद से ही ओवैसी और अन्य विपक्षी नेता ऐसे बयान दे रहे हैं जिनकी मदद से पाकिस्तान कश्मीर पर अफवाहों को धार दे रहा है।

ओवैसी ने कहा, “मुझे यकीन है कि एक दिन मुझे कोई गोली भी मार देगा। मुझे यकीन है कि गोडसे की जो औलाद है वो मुझे ऐसा कर सकते हैं। हमारे मुल्क में अभी भी गोडसे की औलाद हैं।”

ओवैसी ने नगा अलगाववादियों जिक्र करते हुए कहा ,ये सरकार नगा अलगाववादियों से बात कर रही है, जिन्होंने अभी तक सरेंडर नहीं किया है।” उन्होंने कहा, “जब एक बड़े नगा नेता का निधन हुआ, तो तिरंगे के साथ वहाँ उनका अपना झंडा था, सरकार के लोग वहाँ गए, क्या तब उन्हें 2 झंडे याद नहीं आई? आप किसे मूर्ख बनाने की कोशिश कर रहे हैं?”

ओवैसी ने 35-ए पर बात करते हुए कहा, “मैं एक सांसद हूँ, लेकिन क्या मैं अरुणाचल प्रदेश और लक्षद्वीप जा सकता हूँ? मुझे इसके लिए परमिट लेना होगा। क्या मैं असम के अनुसूचित क्षेत्रों में जमीन खरीद सकता हूँ, मैं नहीं कर सकता। मैं नगालैंड, मिजोरम, मणिपुर, असम और हिमाचल के लोगों से कह रहा हूँ कि उनके यहाँ भी यही होगा।”

इससे पहले नरेंद्र मोदी की बौद्धिक क्षमता पर सवाल खड़े करते हुए ओवैसी ने कहा था कि मोदी की राजनीतिक बौद्धिक क्षमता उतनी नहीं है, जितनी नेहरू और पटेल की थी।

केजरीवाल के विधायक ने जल संकट का वीडियो पोस्ट करने पर AAP समर्थक को भेजा 1 करोड़ का मानहानि नोटिस

आम आदमी पार्टी के विधायक और दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष दिनेश मोहनिया ने अपने विधान सभा क्षेत्र के एक व्यक्ति को 1 करोड़ रुपए की मानहानि का नोटिस भेजा है। जिस व्यक्ति को नोटिस भेजा गया है उसने अपने इलाके में पानी की किल्लत को लेकर सोशल मीडिया में एक वीडियो पोस्ट कर मोहनिया को भ्रष्टाचारी कहा था।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक संगम विहार निवासी प्रदीप मौर्या को दिनेश मोहनिया के वकील द्वारा 1 करोड़ रुपए का मानहानि नोटिस भेजा गया है। इसमें सोशल मीडिया में वीडियो पोस्ट कर मौर्या पर मोहनिया की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया गया है।

प्रदीप मौर्या का दावा है कि उन्हें संगम विहार में पानी संकट की वास्तविक स्थिति बयान करने के कारण निशाना बनाया जा रहा है। प्रदीप बताते हैं, “मैं भी आप समर्थक था, लेकिन जब पिछले 4 सालों में हमारी परेशानी का समाधान नहीं हुआ तो मैंने समस्या को प्रकाश में लाने के लिए यूट्यूब पर वीडियो डाला। मैं यहाँ किराए पर रहता हूँ और मुश्किल से 9,000 रुपए कमाता हूँ। लेकिन मैं उनसे डरता नहीं हूँ। मैं कोर्ट में केस लड़ूँगा। उन्होंने मेरी वीडियो भी डिलीट कर दी है। हो सकता है प्रशासन की ताकत उनके साथ हो, लेकिन स्थानीय लोग मेरे साथ हैं।

वहीं, मोहनिया के वकील ने साफ़ किया है कि आप नेता को इस बात से दिक्कत है कि प्रदीप ने अपनी वीडियो में उनके ख़िलाफ़ झूठे आरोप लगाए। आप नेता के वकील अनिल तोमर कहते हैं कि मोहनिया को वीडियो में भ्रष्टाचारी कहा गया है। साथ ही उनपर आरोप लगाया गया है कि वे माफिया के नेक्सस में काम कर रहे हैं।

इस मामले इंडिया टुडे से बातचीत में दिनेश मोहनिया ने कहा कि मौर्या ने अपनी वीडियो के जरिए उनके ख़िलाफ़ गलत जानकारी फैलाने का प्रयास किया है। वह कहते हैं, “मैंने कभी किसी को इलाके की तस्वीर उतारने से मना नहीं किया। मैं हमेशा लोगों को अपने संसदीय क्षेत्र की जमीनी हकीकत दिखाने के लिए आमंत्रित करता हूँ। ये लोगों पर है कि वो निर्णय ले कि इलाके में काम हुआ है या नहीं।

गौरतलब है कि मोहनिया की इस मसले पर आप के एक अन्य विधायक प्रकाश जरवाल से ट्विटर पर झड़प भी हो चुकी है।

ऐसा लगता है कि विधानसभा चुनाव नजदीक देख आप विधायक सुर्ख़ियों में आने का नया-नया तरीका खोज रहे हैं। जनता की समस्या सुलझाने के बजाय 9000 की नौकरी करने वाले आम आदमी को 1 करोड़ की मानहानि नोटिस भेजना भी इसमें शामिल है।

देश छोड़कर जा रहे थे शाह फैसल, पुलिस ने लिया हिरासत में, कश्मीर में नजरबन्द

सिविल सर्विसेज़ छोड़कर नेता बने शाह फैसल भारत छोड़कर जा रहे थे, उन्हें नई दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर वापस कश्मीर भेज दिया गया है। शाह फैसल को कश्मीर में ही नजरबंद (House Arrest) किया गया है।

स्वराज्य की रिपोर्ट के अनुसार, शाह फैसल को नई दिल्ली एयरपोर्ट से भारत छोड़ने से रोका गया है। गौरतलब है कि शाह फैसल जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 से काफी नाखुश थे। और वो इसको लेकर लगातार बयान भी दे रहे थे।

इससे पहले रायटर्स के पत्रकार घोषाल ने दवा किया था, उन्होंने शाह फैसल से बात की। पत्रकार ने जम्मू-कश्मीर में ‘संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप्प’ होने का दावा करते हुए लिखा है कि सैटेलाइट टीवी चालू थे और कई लोगों को सरकार के निर्णय की ख़बर मिल चुकी थी। घोषाल से बातचीत में शाह फैसल ने कहा कि सुरक्षा कम होते ही कश्मीर के भभक उठने की संभावना है, क्योंकि लोग ख़ुद को छला महसूस कर रहे हैं। घोषाल ने दावा किया है कि इसके बाद पत्थरबाजी शुरू हो गई।

शाह फैसल ने कश्मीर को लेकर बुधवार (अगस्त 13, 2019) को विवादित बयान देते हुए कहा था कि हमारे सामने दो ही रास्ते हैं- कश्मीर कठपुतली बने या फिर अलगाववादी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। 370 पर केंद्र सरकार के फैसले के बाद शाह फैसल ने कहा था कि राजनीतिक अधिकारों को दोबारा पाने के लिए कश्मीर को लंबे, निरंतर और अहिंसक राजनीतिक आंदोलन की जरूरत है।

ईद-उल-अजहा (बकरीद) के अवसर पर भी शाह फैसल ने केंद्र सरकार पर बयानबाजी करते हुए कहा कि कश्मीर में ईद नहीं है। पूरी दुनिया में कश्मीर के लोग अपनी जमीन के गलत तरीके से भारत में शामिल होने से रो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे यहाँ तब तक ईद नहीं होगी जब तक 1947 से मिला विशेष राज्य का दर्जा हमें वापस नहीं किया जाएगा।

कॉन्ग्रेस और सपा नेता हड़प रहे आदिवासियों की जमीन: प्रियंका की सोनभद्र यात्रा पर बोलीं मायावती

सोनभद्र हत्याकांड मामले में बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सपा और कॉन्ग्रेस पर मंगलवार (अगस्त 13, 2019) को आधिकारिक रूप से गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने प्रियंका गाँधी द्वारा सोनभद्र कांड के पीड़ितों से मिलने पर भी निशाना साधा। साथ ही प्रदेश की भाजपा सरकार से सख्त कदम उठाकर आदिवासियों की जमीन उन्हें वापस दिलाने की गुहार लगाई।

पूर्व मुख्यमंत्री ने सोनभद्र हत्याकांड पर लगातार ट्वीट करते हुए पहले आदिवासियों की बात रखी। उन्होंने इस मामले में अपने पहले ट्वीट में कहा, “सोनभद्र काण्ड के पीड़ित आदिवासियों के मुताबिक पहले कॉन्ग्रेस व फिर सपा के भू-माफियाओं ने इनकी जमीन हड़प ली, जिसका विरोध करने पर, इनके कई लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया।”

फिर बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रियंका गाँधी द्वारा सोनभद्र में पीड़ितों के परिवारों से मिलने को लेकर कहा, “अब इस घटना को लेकर सपा व कॉन्ग्रेस के नेताओं को अपने घड़ियाली आँसू बहाने की बजाय, वहाँ पीड़ित आदिवासियों को, उनकी जमीन वापिस दिलाने हेतु आगे आना चाहिए। तो यह सही होगा।”

इसके अलावा मायावती ने अपने ट्वीट थ्रेड के आखिर में प्रदेश की भाजपा सरकार से गुहार लगाई है कि वो इस मामले के संबंध में सपा और कॉन्ग्रेस नेताओं पर सख्त कदम उठाएँ। साथ ही आदिवासियों को उनकी हड़पी हुई जमीनें वापस करवाएँ। बसपा अध्यक्ष ने यह माँग पूरी पार्टी की ओर से कॉन्ग्रेस और सपा नेताओं के ख़िलाफ़ उठाई है।

हैप्पी बर्थडे बेटा: हर पुत्र अपने पिता से जलता है…औलाद नालायक हो तो उसे भूल जाना चाहिए

आज ही के दिन 1947 में पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर भारत से अलग होकर अस्तित्व में आया था। इसलिए पाकिस्तान में स्वतंत्रता दिवस भारतीय स्वतंत्रता दिवस से 1 दिन पहले यानी 14 अगस्त को मनाया जाता है। जम्मू-कश्मीर पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समर्थन न मिलने के कारण बौखलाया पाकिस्तान अगर ट्विटर ट्रेंड्स देख ले तो उसे और मिर्ची लग सकती है।

इसकी वजह है कि ट्विटर पर लोग ‘हैप्पी बर्थडे बेटा’ हैशटैग को ट्रेंड कर रहे हैं। इसके तहत पाकिस्तान को अनोखे अंदाज में आजादी की बधाई दी जा रही है। हम यहाँ आपके लिए कुछ चुनिंदा ट्वीट्स लेकर आए हैं, जिसे देख कर आप भी खुद को हँसने से नहीं रोक पाएँगे। एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि आपने (पाकिस्तान) तो ब्लड बैंक को छोड़ के हर बैंक से लोन ले रखा है।

एक ट्विटर यूजर ने नेटफ्लिक्स की लोकप्रिय सीरीज ‘सेक्रेड गेम्स’ में पंकज त्रिपाठी के डयलॉग को पाकिस्तान के परिप्रेक्ष्य में पेश किया:

एक अन्य ट्विटर यूजर में पाकिस्तान में महँगे होते टमाटरों पर कटाक्ष करते हुए लिखा कि पाकिस्तान में लड़की को प्रोपोज करने के लिए अँगूठी नहीं बल्कि टमाटर का इस्तेमाल किया जाता है।

एक व्यक्ति ने तो ऐसा वीडियो खोज कर निकाला, जिसमें पाकिस्तानी नेता जब झंडोतोलन करते हैं तो झंडा ही नीचे गिर जाता है। आप भी देखें इस मजेदार वीडियो को:

एक व्यक्ति ने ‘102 नॉट आउट’ फ़िल्म में अमिताभ बच्चन के उस डायलॉग को याद किया जिसमें वह कहते हैं कि अगर औलाद नालायक हो तो उसे भूल जाना चाहिए।

‘कश्मीर के कुछ मुस्लिम रमजान का भी नहीं करते सम्मान, भारतीयता सिखाने की जरूरत’

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने ईकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत के दौरान इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। ईटी की खबर के मुताबिक, उन्होंने कहा है कि अब अगला काम कश्मीर के कुछ मुस्लिमों को भारतीयता सिखाने का होना चाहिए।

उन्होंने पुलवामा हमले का हवाला देते हुए कहा, “कश्मीर में एक खास तरह का इस्लाम धर्म है जो रमजान और ईद का भी सम्मान नहीं करता। ये सिर्फ़ हिंसा फैलाता है, जिसे पुलवामा हमले ने साफ़ कर दिया है। कश्मीर के मुस्लिमों को इस तरह के इस्लाम से दूर रहना चाहिए। देश भर की अन्य जगहों पर अन्य मुस्लिमों ने एक राष्ट्र, एक झंडा और एक संविधान और एक नागरिकता के सिद्धांत को स्वीकार किया है, और अब यही तरीका है जिससे घाटी का विकास हो सकता है।

कश्मीर घाटी में आरएसएस की ओर से पिछले 18 साल से काम करने वाले इंद्रेश कुमार जम्मू-कश्मीर में 30 अलग-अलग संस्थान चलाते हैं। ये संस्थान उन मुस्लिमों तक पहुँचने का काम करते हैं जो पाकिस्तान की बजाए भारत का समर्थन करते हैं। ये संस्थान उन तक पहुँचकर उनके साथ काम करते हैं और उन्हें शिक्षा- स्वास्थ्य जैसी सुविधाएँ उपलब्ध करवाते हैं।

राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के संयोजक इंद्रेश की मानें तो पूरा जम्मू, लद्दाख और घाटी के भी एक चौथाई लोग अनुच्छेद 370 हटने से खुश हैं। केंद्र के फैसले से पूरे जम्मू-कश्मीर की करीब दो-तिहाई आबादी में खुशी की लहर है। आरएसएस नेता बताते हैं कि इस कदम से कश्मीर के पंडितों, डोगरों, सिखों, शिया, गुर्जर और दलितों को न्याय मिला है।

उनका कहना है कि घाटी में सिर्फ़ कुछ मुस्लिम हैं जो इस फैसले को नकार रहे हैं। ये लोग स्वघोषित नेताओं और कट्टरपंथी इस्लाम द्वारा बरगलाए गए हैं। इसलिए इन्हें भारतीयता से परिचित कराने की आवश्यकता है।

वह कहते हैं कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग हैं। घाटी के लोगों को राष्ट्रवाद और राष्ट्रहित की अवधारणा से जोड़ने की दिशा में कार्य करना होगा। यहाँ कश्मीरी मुस्लिमों की बहुत बड़ी आबादी है जो शांति और विकास चाहती हैं, जो निश्चित ही सिर्फ़ भारत उन्हें दे सकता है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने पूर्व सेना अधिकारियों के साथ सीमा पार आतंकवाद, पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद, पाकिस्तान में भारतीयों के राज्य और कश्मीर घाटी में इस्लामी कट्टरपंथ का उदय जैसे विषयों पर बैठक की थी।

तिहाड़ में बंद यासीन मलिक की बीवी ने इस्लामाबाद के जलसे में पढ़ी भारत विरोधी कविता

पाकिस्तान की मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कश्मीरी अलगाववादी यासीन मलिक की पत्नी मशाल मलिक ने पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित इस
कार्यक्रम में मशाल मलिक ने एक कविता भी पढ़ी। इस कविता में ‘भारत द्वारा कश्मीर में किए जा रहे अत्याचार की चर्चा’ थी। ये वही मशाल मलिक हैं, जिन्होंने अपने पति यासीन मलिक के जेल जाने के बाद प्रेस कॉन्फ़्रेंस बुला कर रोने-धोने का नाटक किया था।

मशाल मलिक ने जिस कार्यक्रम में हिस्सा लिया, उसमें पाकिस्तानी वक्ताओं ने अपना अधिकतर समय भारत के ख़िलाफ़ बोलने में लगाया। भारत सरकार और सेना के ख़िलाफ़ भी काफ़ी ग़लतबयानी की गई। अपने सम्बोधन के दौरान मशाल मलिक ने भी भारत विरोधी सुर अलापा। उन्होंने कश्मीर को ‘भारत के कब्जे वाला क्षेत्र’ कहा और ‘कश्मीर की आजादी’ की माँग की। बता दें कि यासीन मलिक अभी दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल में बंद है।

उसकी गिरफ़्तारी के बाद मशाल मलिक ने अपनी 7 वर्षीय बेटी को प्रेस कॉन्फ़्रेंस में लाकर इमोशनल ब्लैकमेलिंग की कोशिश की थी। यासीन मलिक को एनआईए ने टेरर फंडिंग से जुड़े मामले में गिरफ़्तार किया था। यासीन और मशाल की शादी इस्लामाबाद में ही हुई थी। इस समारोह में पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर के कथित प्रधानमंत्री सहित पाकिस्तान व कश्मीर के कई नेता व अलगाववादी शामिल हुए थे।

यासीन मलिक की पत्नी द्वारा इस्लामाबाद में पाकिस्तानी स्वतंत्रता समारोह में हिस्सा लेने के बाद यह बहस और तेज़ हो गई है कि आखिर भारत सरकार इन अलगाववादियों को इतने दिनों से बर्दाश्त क्यों कर रही थी? अभी कुछ महीनों पहले तक इन्हें सरकार से सुरक्षा भी प्राप्त थी, जिसे गृह मंत्रालय ने वापस ले लिया। संसद में अमित शाह ने कहा था कि इन अलगावादियों के ख़ुद के बच्चे तो विदेशों में रह रहे हैं लेकिन ये कश्मीरी युवाओं के हाथों में पत्थर थमा देते हैं।

मणिशंकर अय्यर ने पकड़े पाँव: माफ़ कीजिए, मुझे कुछ याद नहीं, मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा

कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर अपने उस विवादित बयान से एकदम से पलट गए हैं, जिसमें उन्होंने नरेंद्र मोदी को कॉन्ग्रेस के कार्यक्रम में चाय बाँटने की सलाह दी थी। उन्होंने मोदी को ‘चायवाला’ कहा था। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने न सिर्फ़ अपने इस बयान के बारे में बात करने से इनकार कर दिया, बल्कि पत्रकार से कहा कि वह केवल जम्मू-कश्मीर पर ही सवाल पूछें।

इंटरव्यू के दौरान एक रोचक मौका तब आया, जब मणिशंकर अय्यर अजीब सी आवाज बना कर पत्रकार के पाँव छूने लगे। इंटरव्यू ले रहे पत्रकार ने मणिशंकर अय्यर से कहा कि वो इतने बड़े राजनेता हैं और राजनयिक भी रह चुके हैं, ऐसे में वो उनकी बहुत इज्जत करते हैं। इसके बाद अजीब सी आवाज बनाते हुए अय्यर ने कहा, “बहुत-बहुत धन्यवाद आपका। आपने मेरी प्रशंसा की। मैं आपके पाँव छूता हूँ।“‘

पत्रकार ने जब अय्यर को उनके ‘चायवाला’ बयान की याद दिलाई तो पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्हें कुछ याद नहीं है। उन्होंने कहा, “माफ़ कीजिए। मुझे कुछ याद नहीं है। मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा।” अय्यर इस बात से नाराज़ दिखे कि उनसे 5 वर्ष बाद भी उसी बयान को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं। बता दें कि 2014 में जब नरेंद्र मोदी भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे, तब मणिशंकर अय्यर ने कॉन्ग्रेस अधिवेशन के दौरान कटाक्ष करते हुए कहा था:

“21वीं शताब्दी में वह (नरेंद्र मोदी) प्रधानमंत्री बन पाएँ, ऐसा कतई मुमकिन नहीं है। लेकिन, यदि वह यहाँ (कॉन्ग्रेस अधिवेशन में) आकर चाय बेचना चाहें तो हम उनके लिए जगह बना सकते हैं।”

इंटरव्यू के दौरान इस बारे में सवाल किए जाने पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अय्यर ने हाथ जोड़ पत्रकार के पाँव छू लिए। अक्सर विवादित बयानों के कारण सुर्ख़ियों में रहने वाले अय्यर ने हाल ही में आंध्र प्रदेश के विभाजन को कॉन्ग्रेस की रणनीतिक भूल करार दिया था। वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता जयपाल रेड्डी का राजनीतिक करियर ख़त्म होने के लिए भी इसी निर्णय को दोषी ठहराया था।

इस्लाम से भी पुराना है हिन्दुस्तान, कभी पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बनेगा कश्मीर: ऑस्ट्रेलियाई इमाम

धर्म के नाम पर कश्मीर में आतंक को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान को एक इस्लामी विद्वान ने खरी-खरी सुनाई है।
ऑस्ट्रेलियाई इस्लामिक विद्वान इमाम मुहम्मद तौहीदी ने कहा है कि कश्मीर न कभी पाकिस्तान का हिस्सा रहा है और न कभी उसका हिस्सा बनेगा।

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के मामले पर ट्विटर पर अपनी राय रखते हुए इमाम ने यह बात कही है। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा है कि हिन्दुस्तान इस्लाम से भी पुराना है।

उन्होंने ट्वीट किया है, “पाकिस्तान और कश्मीर दोनों भारत के हैं। हिन्दुओं के धर्म बदलकर मुस्लिम बनने से इस सच को झुठलाया नहीं जा सकता कि वह पूरा इलाका हिन्दू भूमि है। हिन्दुस्तान इस्लाम से भी पुराना है।”

तौहीदी ने 11 अगस्त 2019 को यह ट्वीट किया था। अपने हालिया ट्वीट में उन्होंने लोकतंत्र का हवाला देते हुए पाकिस्तान से बलूचिस्तान की आजादी का भी समर्थन किया है। उन्होंने वहाँ महिलाओं की किडनैपिंग और उन पर अत्याचार को लेकर चिंता जताई है। साथ ही बलूचिस्तान को पाकिस्तान की सरकार और आईएसआई की कैद से छुटकारा दिलाने की बात भी कही है।

खुद को सुधारवादी बताने वाले इमाम तौहीदी अपनी चर्चित किताब ‘फॉर लेफ्ट, फॉर राइट, कीप अ बैलेंस इन लाइफ’ में कट्टरपंथ को सिरे से खारिज कर चुके हैं। अपने हालिया ट्वीट में उन्होंने बताया था कि उनके अधिकतर अनुयायी अच्छे लोग हैं, जिसके कारण उन्हें कट्टरपंथियों से लड़ने की ताकत मिलती है।

कश्मीर पर ओवैसी को याद आए कौरव-पांडव, कहा- मोदी में नेहरू जैसी सूझबूझ नहीं

हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के अहम प्रावधानों को निरस्त किए जाने को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया। विवादित बयानों के कारण अक्सर चर्चा में रहने वाले ओवैसी ने इस बार नरेंद्र मोदी की बौद्धिक क्षमता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। ओवैसी ने कहा कि मोदी की राजनीतिक बौद्धिक क्षमता उतनी नहीं है, जितनी नेहरू और पटेल की थी।

‘ईद मिलाप’ के मौके पर अपनी पार्टी एआईएमआईएम के कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए ओवैसी ने दुहराया कि भारत सरकार का जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन और अनुच्छेद 370 को लेकर उठाया गया क़दम संवैधानिक संधि का उल्लंघन है। ओवैसी ने कहा, “मोदी जी, आपके पास नेहरू और सरदार पटेल जैसी बुद्धिमत्ता नहीं है। जब अनुच्छेद 370 को लागू किया गया था तब इन नेताओं ने सारे पहलुओं पर विचार करने के बाद ही ऐसा किया होगा।

ओवैसी ने संसद में अधिक संख्या में बिल पेश किए जाने को लेकर नाराजगी जताई और कहा कि भाजपा एक दिन में 30-35 बिल संसद में पेश करती है और इससे सांसदों को उन्हें पढ़ने का समय ही नहीं मिलता है। उन्होंने पूछा, “भाजपा कैसे यह आशा कर सकती है कि इतने कम समय में इतनी अधिक संख्या में पेश किए गए बिल को सांसद पढ़ लें?” असदुद्दीन ओवैसी को इस बात से परेशानी है कि संसद में इतनी तेज़ी से काम क्यों हो रहा है?

साथ ही असदुद्दीन ओवैसी ने रजनीकांत के उस बयान पर भी तंज कसा जिसमें उन्होंने जम्मू-कश्मीर पर क्रन्तिकारी निर्णय लेने के लिए मोदी-शाह की तुलना कृष्ण और अर्जुन की जोड़ी से की थी। ओवैसी ने पूछा कि अगर मोदी-शाह को कृष्ण अर्जुन कहा जा रहा है तो पांडव और कौरव कौन हैं? क्या आप देश में एक और महाभारत देखना चाहते हैं?

ओवैसी ने मोदी की बुद्धिमत्ता को नेहरू से कमतर तो बता दिया लेकिन शायद वह भूल गए कि उन्हीं नेहरू के कार्यकाल में अनुच्छेद 370 के साथ ‘अस्थायी’ शब्द जोड़ा गया था, अर्थात यह हमेशा के लिए नहीं लाया गया था। इसे कभी न कभी ख़त्म होना था।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा संसद में बार-बार समझाया जा चुका है कि अनुच्छेद 370 के साथ जुड़े ‘अस्थायी’ शब्द का मतलब क्या है? अगर ओवैसी को इतना भी नहीं पता तो उन्हें अपने भाषणों व टीवी चर्चाओं में संविधान की दुहाई देना छोड़ देना चाहिए। नेहरू की बुद्धिमत्ता के तो कहने ही क्या? वो तो उतने बुद्धिमान थे कि उन्होंने सेना तक की ज़रूरत से इनकार कर दिया था। नेहरू की बुद्धिमत्ता तो इतनी है कि आज कोई भी विपक्षी नेता यह नहीं बता पाते कि अनुच्छेद 370 से जम्मू-कश्मीर की जनता को क्या फायदा हुआ?