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डी कंपनी में मचमच: छोटा शकील का वर्चस्व बढ़ा, भाई अनीस की भी नहीं सुन रहा दाऊद इब्राहिम

कानून के बढ़ते शिकंजे और परिवार के लोगों की गिरफ्तारी से अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम बेहद दहशत में है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अपने भाई इकबाल कासकर के बेटे रिजवान की गिरफ्तारी के अगले ही दिन दाऊद ने फहीम मचमच को बुलाकर उसे खूब फटकारा और गाली दी।

इधर, डी कंपनी में छोटा शकील और अनीस इब्राहिम के बीच वर्चस्व की लड़ाई भी चरम पर पहुँच गई है। सूत्रों की माने तो दाऊद भी बीते कुछ समय से भाई अनीस की बजाए छोटा शकील को ज्यादा भाव दे रहा है। मचमच भी छोटा शकील का ही शागिर्द है।

लेकिन, रिजवान की गिरफ्तारी से भड़के दाऊद ने मचमच को (जो उस समय यूएई में था) बुलाकर अपने परिवार की नई पीढ़ी को अपराध की दुनिया में घसीटने पर लताड़ा। रिजवान को मुंबई पुलिस ने धमकी देने और वसूली के आरोप में जून में गिरफ्तार किया था। कहा जा रहा है कि रिजवान मचमच के इशारे पर ही काम करता था और उसे अंडरवर्ल्ड में भी वही लेकर आया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि दाऊद नहीं चा​हता है कि परिवार की नई पीढ़ी अपराध से जुड़े। परिवार की नई पीढ़ी के ज्यादातर लोग विदेशों में पढ़ाई कर रहे हैं तो कुछ अन्य खाड़ी देशों में शॉपिंग मॉल और अन्य व्यवसाय चला रहे हैं। सूत्र की माने तो दाऊद अपने दिवंगत भाई नूरा के बेटे सोहेल कासकर की गिरफ्तारी से पहले से ही परेशान था। उसके बाद बीते साल इकबाल पकड़ा गया और अब रिजवान की गिरफ्तारी ने उसे हिला कर रख दिया है। इकबाल भारत में रहने वाला दाऊद का एकमात्र भाई है। उसकी बहन हसीना पारकर की दो साल पहले ही दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी।

बताया जा रहा है कि बेइज्जत होने के बाद से मचमच कराची में है। गैंग के लोग भी अब उससे कन्नी काट रहे हैं और वह उन्हें मनाने में लगा है।

इस बीच, मुंबई पुलिस दाऊद और उसके गुर्गों से जुड़ी हर जानकारी ऑनलाइन करने जा रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसके लिए महाराष्ट्र पुलिस ने ऑटोमेटेड मल्टीमॉडल बायोमेट्रिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम यानी एम्बिस (AMBIS) शुरू किया है। अधिकारियों के मुताबिक इस सिस्टम को बहुत जल्द नेशनल क्राइम ब्यूरो और इंटरपोल से भी कनेक्ट किया जाएगा।

शास्त्री जी के समय कॉन्ग्रेस नेताओं ने की थी 370 हटाने की वकालत, अपना ही इतिहास भूली पार्टी

अनुच्छेद 370 के मुख्य प्रावधानों को निरस्त करने के साथ ही जम्मू कश्मीर विशेष राज्य नहीं रहा और इसे 2 केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने का रास्ता भी साफ़ हो गया। केंद्रीय गृह मंत्री ने संसद में संविधान संशोधन विधेयक पेश कर इस मैराथन कार्य को अंजाम दिया। अब जम्मू कश्मीर विधायिका सहित केंद्र शासित प्रदेश होगा, वहीं लद्दाख विधायिका रहित केंद्र शासित प्रदेश होगा। संसद में दिए गए विभिन्न भाषणों में अमित शाह ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों से राज्य को हुए नुकसानों की चर्चा की। अब देश के अन्य हिस्सों के लोग जम्मू कश्मीर में संपत्ति ख़रीद सकते हैं। साथ ही राज्य में अब्दुल्ला व मुफ़्ती परिवार के एकछत्र राज का भी अंत हो गया।

जम्मू, कश्मीर और लद्दाख की राजनीतिक भागीदारी में जो विषमता थी, वो भी अब दूर हो जाएगी। यहाँ इतिहास भी याद करने की ज़रूरत है। क्या आपको पता है कि सितम्बर 1964 में जब लाल बहादुर शास्त्री देश के प्रधानमंत्री थे, तब संसद में इसी तरह का एक बिल पेश किया था। उस समय संसद में इस पर ज़ोरदार बहस हुई थी और कई सांसदों ने अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने का समर्थन किया था। उस समय आर्य समाज के नेता प्रकाश वीर शास्त्री ने जम्मू कश्मीर को मिले विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने सम्बन्धी प्राइवेट मेंबर बिल संसद में पेश किया था।

अनुच्छेद 370 पर प्रकाश वीर शास्त्री के बिल का कई कॉन्ग्रेस सांसदों ने किया था समर्थन

तब कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता के हनुमंथैया ने लोकतंत्र की भावना का हवाला देते हुए गृह मंत्री ने निवेदन किया था कि इस बिल को स्वीकार किया जाए। मैसूर के मुख्यमंत्री रह चुके के हनुमंथैया बंगलोर से चुन कर आते थे और कॉन्ग्रेस के अनुभवी नेताओं में से एक थे। रेलवे और उद्योग जैसे कई मंत्रालय संभाल चुके हनुमंथैया का प्रकाश वीर शास्त्री के बिल को समर्थन यह दिखाता है कि उस समय बड़े कॉन्ग्रेस नेता भी जम्मू कश्मीर को मिले विशेष राज्य का दर्जा हटाने और अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने के पक्ष में थे। प्रकाश वीर शास्त्री 1977 में एक ट्रेन दुर्घटना का शिकार हो गए थे, जिसके बाद उनकी मौत हो गई थी।

सत्ता पक्ष और विपक्ष भी इस मसले पर एक दिखा था। अनुच्छेद 370 पर चर्चा करते हुए दिसंबर 1964 में तत्कालीन गृहमंत्री गुलजारी लाल नंदा ने कहा था- “अनुच्छेद 370 को चाहे आप रखें या न रखें, इसकी सामग्री को पूरी तरह से खाली कर दिया गया है। इसमें कुछ भी नहीं छोड़ा गया है। हम इसे एक दिन, 10 दिनों या 10 महीने में विनियमित कर सकते है और इस पर विचार हम सभी ही करेंगे।” इससे पता चलता है कि लाल बहादुर शास्त्री की सरकार के मन में भी कहीं न कहीं ये बात थी कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के लिए क्या किया जाए?

आज कॉन्ग्रेस के कई बड़े नेता भरता सरकार के निर्णय का विरोध कर रहे हैं। ग़ुलाम नबी आज़ाद ने तो इस दिन को काला दिन तक बता दिया। कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं ने अगर अपनी ही पार्टी का संसदीय इतिहास देखा होता तो शायद वे ऐसा नहीं करते। ख़ुद भीमराव अम्बेडकर अनुच्छेद 370 के विरोधी थे। कॉन्ग्रेस आज अपनी ही पार्टी के पुराने शीर्ष नेताओं की भावना के प्रतिकूल कार्य कर रही है। जब दिसंबर 1964 में इस पर बहस चली थी तब कुछ सांसदों ने कहा था कि अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर और शेष भारत के बीच के बड़ी दीवार है।

कुछ सांसदों ने इस अनुच्छेद को जम्मू कश्मीर और शेष भारत के बीच एक बड़े पहाड़ की संज्ञा भी दी थी। तब गृहमंत्री नंदा ने कहा था कि ये न तो पहाड़ है और न ही दीवार बल्कि एक टनल है। पंजिम के सांसद पीटर अगस्टस ने पूछा कि आख़िर हमें किसी टनल की ज़रूरत ही क्या है? नंदा ने जवाब देते हुए कहा कि इसे आप एक पार्टीशन समझ लीजिए, जिसे हम जब चाहें तब हटा सकते हैं। उन्होंने कहा था कि इसे हटाने के रास्ते में कुछ नहीं आ सकता। आज जब इस पार्टीशन को केंद्र सरकार की मजबूत इच्छशक्ति के कारण हटा दिया गया है, यही कॉन्ग्रेस तिलमिलाई क्यों हुई है?

हालाँकि, जवाहरलाल नेहरू ने ये ज़रूर कहा था कि अनुच्छेद 370 घिसते-घिसते अपनेआप ख़त्म हो जाएगा लेकिन नवंबर 1963 में संसद में उन्होंने इसके समर्थन में अजीबोगरीब तर्क भी दिए थे। पंडित नेहरू ने कहा था कि अगर अनुच्छेद 370 नहीं रहा तो देश के अलग-अलग हिस्सों से सक्षम लोग जम्मू कश्मीर में संपत्ति ख़रीदने की होड़ में शामिल हो जाएँगे। तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने कहा था कि लोगों द्वारा राज्य में ज़मीन ख़रीदने से वहाँ की ज़मीन के भाव भी आसमान छूने लगेंगे, जिससे स्थानीय लोगों को घाटा होगा।

अगर किसी क्षेत्र में ज़मीन के भाव बढ़ते हैं तो इससे वहाँ के स्थानीय लोग को घाटा हो, ऐसा शायद ही देखा गया है। जहाँ भी विकास कार्य तेज़ी से होते हैं, विश्वविद्यालय खुलते हैं या बड़े उद्योग स्थापित होते हैं, उस क्षेत्र व आसपास के इलाकों में ज़मीन का भाव बढ़ना लाजिमी है और इससे स्थानीय जनता को फायदा ही होता है। हालाँकि, नेहरू ने अपने इस बयान के पीछे कोई तर्क नहीं दिया था कि ज़मीन के भाव बढ़ने से स्थानीय लोगों को घाटा क्यों होगा?

प्रेम मंदिर व श्रीकृष्ण जन्म स्थान को बम से उड़ाने की धमकी, मुन्ना को पुलिस ने किया अरेस्ट

उत्तर प्रदेश के मथुरा में कृष्ण जन्मस्थान मंदिर और वृंदावन के प्रेम मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। इस धमकी के बाद दोनों मंदिरों की सुरक्षा और बढ़ा दी गई है। सूचना मिलते ही भारी पुलिस फोर्स दोनों मंदिरों में तैनात किया गया। लोगों की चेकिंग और सख्त कर दी गई। मंदिर में डॉग स्कॉयड ले जाया गया। चप्पे-चप्पे की जाँच की गई। इधर खुफिया एजेंसियों को भी इसकी जानकारी दी गई। पुलिस ने उस मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगाया, जिससे मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। 

सर्विलांस से पता चला कि जिस नंबर से धमकी दी गई थी वह मुन्ना नाम के व्यक्ति का था। पुलिस ने उसको हिरासत में ले लिया है। पूछताछ में मुन्ना ने बताया कि वह एक ऑटो रिक्शा ड्राइवर है। गुरुवार (अगस्त 8, 2019) को उसके ऑटो में एक पर्यटक बैठा था। पर्यटक ने मुन्ना से कहा कि उसका मोबाइल खराब हो गया है और उसे इमरजेंसी में एक फोन करना है। उसने ड्राइवर का मोबाइल लिया और ऑटो से उतर गया। बात करते-करते वह व्यक्ति ऑटो से उतर गया और गायब हो गया।

पुलिस ने बताया कि सर्विलांस के दौरान पहले मोबाइल की लोकेशन बदलती रही और अब मोबाइल बंद है। जानकारी के मुताबिक, प्रेम मंदिर के एक कर्मचारी के मोबाइल पर गुरुवार दोपहर करीब 3:30 बजे एक फोन आया। फोन करने वाले ने प्रेम मंदिर और श्री कृष्ण जन्मस्थान को बम से उड़ाने की धमकी दी। इसके बाद फोन काट दिया गया। इस कॉल के बाद पुलिस ने मंदिरों में अलर्ट जारी कर दिया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ज्ञानेन्द्र सिंह ने बताया कि इस मामले की जाँच के लिए 7 टीमों का गठन किया गया है। जल्द ही आरोपित टूरिस्ट को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

Video Viral: पाक की शह पर हुर्रियत नेता करवाते हैं पत्थरबाजी, अलगाववादी नेत्री का खुलासा

कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है। लेकिन पाकिस्तान हमेशा से ही धरती के इस स्वर्ग को नरक बनाने पर तुला रहा है। इस बात की पुष्टि कश्मीर की अलगाववादी नेता और वीमेन एक्टिविस्ट तनवीर फ़ातिमा ने की है। दरअसल, सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है। 57 सेकेंड के इस वीडियो में तनवीर ने पाकिस्तान के आला अधिकारियों और हुर्रियत के कई बड़े नेताओं को बेनकाब कर दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत में अस्थिरता फैलाने के लिए पाकिस्तान कश्मीर में पत्थरबाजी करवाता है।

इस वीडियो में तनवीर फ़ातिमा ने हुर्रियत नेता सैय्यद अली शाह गिलानी, अलगाववादी नेता यासिन मलिक और मीर वाइज़ का भी नाम लेते हुए कहा है कि ये लोग बच्चों को गुमराह करते हैं। उन्हें आज़ादी के सपने दिखा पत्थरबाज़ी की राह पर ले जाते हैं। ये नेता सिर्फ़ अपने स्वार्थ के लिए बच्चों का इस्तेमाल करते हैं।

इस वीडियो में तनवीर फ़ातिमा भावुक होते हुए कह रही हैं कि हालात बेहद ख़राब हैं। उन्होंने कहा कि वो अपने बुज़ुर्ग माता-पिता से मिल नहीं पा रही हैं। आज पिछले 30 वर्षों से आज़ादी के नाम पर हमारे क़रीब 2-2.5 लाख जवान शहीद हो गए हैं।

उन्होंने कहा है कि हुर्रियत और अलगाववादियों ने आज़ादी के नाम पर हमारे बच्चों से पत्थरबाज़ी करवाई, बंदूकें चलवाई जो कि अच्छी बात नहीं थी। इस वजह से हम दुनिया की नज़र में एक अलग क़ौम बन गए जबकि हम पढ़ी-लिखी क़ौम है। हममें तहज़ीब है, हमारा इस्तेमाल पत्थरबाजी और बंदूकें चलाने के लिए किया गया।

MP में बनेगी 100 हाईटेक गोशाला, गोबर व मूत्र संग्रह के लिए लगा रहेगा फिल्टरेशन प्लांट

मुख्यमंत्री कमलनाथ की पहल पर बिड़ला ग्रुप के कुमार मंगलम बिड़ला ने मध्य प्रदेश में 100 हाईटेक गो-शालाओं का निर्माण करने पर अपनी सहमति दे दी है। ये गो-शालाएँ अगले 18 महीनों में बिड़ला ग्रुप की सामाजिक ज़िम्मेदारी निधि से बनाई जाएँगी। मध्य प्रदेश में निवेश के लिए उद्योगपतियों का भरोसा फिर से हासिल करने की मुहिम में जुटे कमलनाथ ने गुरुवार (8 अगस्त) को दूसरे दिन बिड़ला ग्रुप, महिंद्रा एड महिंद्रा, शापूरजी पालोनजी समेत अन्य औद्योगिक समूहों के प्रमुखों के साथ राउंड टेबल चर्चा की।

चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि बिड़ला ग्रुप ने मध्य प्रदेश में गोवंश के लिए बड़े पैमाने पर गोशाला खोलने का काम अपने हाथ में लिया है। बिड़ला ग्रुप ने प्रदेश परियोजना को सराहते हुए 100 हाईटेक गोशाला (व्यवस्थित शेड, घूमने के लिए अलग स्थान, चारा देने से लेकर गोबर व मूत्र संग्रह के लिए फिल्टरेशन प्लांट) का निर्माण करने की ज़िम्मेदारी अपने हाथों ली है।

इसके अलावा कमलनाथ सरकार को इस काम के लिए अन्य ग्रुप और दानदाताओं से भी उम्मीद है कि वो भी आगे आएँगे और गोवंश के लिए इस काम में अपना सहयोग देंगे। मीटिंग के दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ ने रोज़गार निर्माण के लिए नए उद्योगों में निवेश संभावनाओं को रेखांकित किया। कमलनाथ ने कहा कि निवेश और विश्वास परस्पर एक-दूसरे पर निर्भर हैं। इस संदर्भ में उन्होंने बताया कि हर क्षेत्र के लिए अलग से निवेश नीति बनाई जाएगी। साथ ही ड्राई पोर्ट, सैटेलाइट शहर, उच्चस्तरीय कौशल विकास केंद्र और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में मध्य प्रदेश को तेज़ी से आगे बढ़ाना है।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के प्रबंध संचालक पवन गोयनका से ई-रिक्शा और ई-ऑटो निर्माण की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के लिए आवास उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वहीं, ख़बर यह भी है कि देश के अन्य राज्यों में इस दिशा में हुए कामों का अध्ययन कर मध्य प्रदेश के लिए एक आदर्श नीति बनाई जाएगी।

एयरसेल-मैक्सिस केस: चिदंबरम पिता-पुत्र की गिरफ्तारी पर 23 अगस्त तक रोक

दिल्ली की एक विशेष अदालत ने पूर्व केन्द्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम की गिरफ्तारी पर 23 अगस्त तक रोक लगा दी है। मामला एयरसेल-मैक्सिस केस से जुड़ा है। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी सरकारी एजेंसियाँ इस मामले की जाँच कर रही हैं। इससे पहले भी कई बार चिदंबरम पिता-पुत्र को गिरफ़्तारी से अदालत राहत दे चुकी है। अदालत ने इस मामले में जमानत के लिए 23 अगस्त और संज्ञान लेने के लिए 6 सितम्बर की तारीख मुक़र्रर की है।

पी चिदंबरम पर आरोप है कि उन्होंने वित्त मंत्री रहते विदेशी निवेशकों के साथ मिल कर मनी लॉन्डरिंग को अंजाम दिया। चिदंबरम पर प्रवर्तन निदेशालय ने अपने पद और पावर के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। चिदंबरम ने 2006 में केंद्रीय वित्त मंत्री रहते मॉरीशस की एक कम्पनी को निवेश हेतु FIPB (Foreign Investment Promotion Board) क्लियरेंस दिया था।

ईडी ने कहा है कि चिदंबरम ने ऐसा करने के लिए एफडीआई के तमाम नियमों को ताक पर रख दिया। इस केस में चिदंबरम के पुत्र कार्ति चिदंबरम पर अनुचित लाभ हासिल करने का आरोप है। कार्ति को आईएनएक्स मीडिया से जुड़े एक अन्य मामले में मार्च 2018 में गिरफ़्तार भी किया गया था। पिछले वर्ष अदालत ने दोनों पिता-पुत्र को 1 नवम्बर तक गिरफ़्तारी से राहत प्रदान की थी। उसके बाद से कई मौकों पर इसे बढ़ाया गया है।

राम मंदिर पर जल्द फैसले की राह में नई अड़चन, दूसरे पक्ष के पैरोकार ने कहा- 5 दिन सुनवाई न करे SC

अयोध्या मामले में जल्द फैसले की राह में बाधा डालने की कोशिश शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में लगातार चौथे दिन शुक्रवार (अगस्त 9, 2019) को इस मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान दूसरे मजहब के पक्षकारों के वकील राजीव धवन ने मामले की सप्ताह में पॉंच दिन सुनवाई करने के फैसले पर आपत्ति जताई।

उन्होंने कोर्ट से पाँच दिन सुनवाई पर स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा अगर इतनी तेज सुनवाई हुई तो उनके लिए न्यायालय में पैरवी कर पाना संभव नहीं होगा।

धवन ने कहा, “यदि इस मामले पर कोर्ट में हफ्ते में पाँच दिन सुनवाई होती है तो यह अमानवीय होगा।” उनके मुताबिक हमें दिन रात अनुवाद के कागज पढ़ने और अन्य तैयारियां करनी पड़ती हैं। ऐसे में रोजाना सुनवाई में दलीलें रखने में वे असमर्थ हैं। उन्होंने बताया कि इस स्थिति में वह अदालत की तेजी के साथ तालमेल नहीं बिठा पाएंगे और वे केस छोड़ने को मजबूर होंगे।

अदालत ने उनसे कहा, “हमने आपकी बात सुन ली है, हम आपको जल्द ही सूचित कर देंगे “

गौरतलब है कि सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली इस पीठ में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एसए नजीर शामिल हैं।

बीते दिन पीठ ने अयोध्या मामले में रोजाना सुनवाई का फैसला लिया था। इससे पहले परंपरा के अनुसार मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को ही मामले की सुनवाई तय की गई थी। लेकिन गुरुवार को कोर्ट ने तय किया कि इस केस की सुनवाई हफ्ते के पाँचों दिन होगी। इससे उम्मीद बॅंधी थी कि नवंबर में सीजेआई गोगोई के रिटायर होने से पहले इस मामले में फैसला आ सकता है। इससे पहले सुनवाई के दूसरे और तीसरे दिन निर्मोही अखाड़े की ओर से राममंदिर के पक्ष में दलीलें रखी गई थी।

15 दिन में मौत की सजा: सोते माँ-बाप के बीच से उठाकर 9 महीने की बच्ची का किया था रेप-मर्डर

तेलंगाना की एक अदालत ने वारंगल जिले में 9 महीने की बच्ची के साथ पहले बलात्कार और बाद में हत्या करने के आरोप में दोषी को 2 महीने के भीतर मौत की सजा मुकरर्र कर दी। पुलिस के मुताबिक मामले की सुनवाई 24 जुलाई को शुरू हुई थी और वारंगल के प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के. जयकुमार ने 2 सप्ताह के अंदर ही मामले में फैसला सुना दिया।

मीडिया खबरों की मानें तो न्यायाधीश ने बृहस्पतिवार (अगस्त 8, 2019) को अभियोजन और बचाव पक्ष की आखिरी दलीलें सुनने के बाद आरोपित पी प्रवीण को बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या का दोषी ठहराया। और बाद में उसे मौत की सजा सुना दी।

जानकारी के अनुसार दोषी को आईपीसी की धारा 302 और धारा 376 के अलावा पॉक्सो अधिनियम के तहत मौत की सजा सुनाई गई है। साथ ही उस पर 20,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

पुलिस की मानें तो 19 जून की देर रात हनामकोंडा में बच्ची के माता-पिता ने घर की छत पर उसे अपने पास सुला रखा था, जब प्रवीन उसे उठाकर सुनसान जगह पर ले गया। उसने पहले बच्ची के साथ बलात्कार किया और फिर उसकी हत्या कर दी। घटना का पता उस समय चला जब बच्ची की माँ की नींद खुली और उसने मासूम को अपने करीब नहीं पाया। तलाश हुई तो प्रवीण बच्ची को तौलिए में लपेटकर ले जाते देखा गया। जैसे ही प्रवीण ने बच्ची के माँ-बाप को देखा वह उसे फेंक कर भागने लगा। लेकिन स्थानीय लोगों ने उसे दबोच लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। बच्ची के मिलने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया।

मामले की जाँच के बाद पुलिस ने प्रवीण को गिरफ्तार कर लिया और बाद में न्याययिक हिरासत में भेज दिया। मामले की सुनवाई कोर्ट में 24 जुलाई को पहुँची और 6 कामकाजी दिनों के भीतर गवाहों से उनकी गवाही ली गई। और फिर, कोर्ट की ओर से सराहनीय फैसला आया।

बता दें कि वारंगल के पुलिस आयुक्त वी रविन्द्र ने अदालत द्वारा कम समय में दोषी को सुनाई गई सजा को उत्कृष्ट निर्णय बताया है। साथ ही कहा कि उन्होंने गवाहों की गवाहियों और वैज्ञानिक तथा चिकित्सीय साक्ष्यों के आधार पर मामले की जाँच की गई।

गुजरातियों का इलाज नहीं करूँगी: सरकारी अस्पताल की डॉक्टर ने स्थानीय लोगों से की बदसलूकी

गुजरात में पदस्थापित एक डॉक्टर ने गुजरातियों का इलाज करने से मना कर दिया। यह हैरान कर देने वाली ख़बर नवसारी के बिलिमोरा में स्थित एक सरकारी अस्पताल से आई है। यहाँ की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉक्टर स्मिता तिवारी ने स्थानीय मरीजों का इलाज करने से मना कर दिया। एक महिला अपने 10 वर्षीय बच्चे के साथ 1 घंटे तक डॉक्टर के केबिन के बाहर इन्तजार करती रहीं लेकिन स्मिता ने बुखार से पीड़ित उस बच्चे का इलाज नहीं किया।

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, बीमार बच्चे की माँ सारे केस पेपर्स के साथ इन्तजार करती रहीं। ऐसा नहीं था कि डॉक्टर तिवारी किसी अन्य मरीज को देख रही थीं या अस्पताल के कार्यों में व्यस्त थीं। जब बीमार बच्चे की माँ व अन्य महिलाओं ने उनकी केबिन में जाकर देखा तो वह फोन पर किसी से बात कर रही थीं। जब महिलाओं ने डॉक्टर तिवारी से मरीजों का इलाज करने का आग्रह किया, तब उन्होंने अजीबोगरीब जवाब दिया। डॉक्टर ने कहा,

“मैं यहाँ गुजरातियों का इलाज करने के लिए नहीं आई हूँ। मैं केवल यूपी-बिहार के मरीजों का ही इलाज करूँगी। तुम गुजरातियों ने मुझे और मेरे पिता को प्रताड़ित किया था।”

इतना कहने के बाद डॉक्टर स्मिता तिवारी से निवेदन करने आई सभी महिलाओं को अपने चैंबर से तुरंत बाहर चले जाने को कहा। घटना की सूचना मिलने पर बिलिमोरा नगरपालिका भाजपा अध्यक्ष मुकेश नाइक नगरपालिका की कुछ अन्य महिलाओं के साथ अस्पताल पहुँचे। डॉक्टर स्मिता तिवारी ने उन सभी के साथ दुर्व्यवहार किया। इसके बाद डॉक्टर तिवारी के ख़िलाफ़ जाँच बिठाई गई। जाँच समिति ने मरीजों व अस्पताल के कर्मचारियों से बातचीत कर डॉक्टर तिवारी के ख़िलाफ़ रिपोर्ट सौंपी।

दोषी पाए जाने के बाद डॉक्टर स्मिता तिवारी को छुट्टी पर भेज दिया गया है। अस्पताल के अन्य डॉक्टरों ने भी कहा कि वह ठीक से काम नहीं करती थीं और उनका व्यवहार भी अजीबोगरीब था।

जाँघों पर हाथ फेरा, Kiss किया, प्राइवेट पार्ट्स भी… चर्च गई बच्चियों के साथ पादरी की हरकत

चर्च में फेस टू फेस कनफेशन के दौरान पादरी रेव अर्बनो वाज़केज़ ने दो बच्चियों के साथ छेड़छाड़ की थी। इस सिलसिले में आरोपित पादरी रेव अर्बनो वाज़केज़ को पिछले साल गिरफ्तार किया गया। उसके ऊपर बच्ची के साथ यौन शोषण का आरोप है, जिसमें दोनों बच्चियों के साथ किए गए दुर्व्यवहार और यौन उत्पीड़न भी शामिल हैं। दोनों पीड़ित बच्चियों ने अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी कोर्ट में आकर अपनी आपबीती बताई।

घुटने के ऊपर हाथ फेरा, फिर चूमने लगा

पीड़िता ने उस दिन की घटना बताते हुए कहा कि ये घटना 2015 की है। घटना वाले दिन के कुछ ही सप्ताह बाद उसका 14वाँ जन्मदिन आने वाला था। वो चर्च में कनफेशन के लिए गई थी। इस दौरान, रेव अर्बनो वाज़केज़, जो कि वॉशिंगटन के सैक्रेड हार्ट चर्च में सहायक पादरी था, उसने उसका एक कमरे में फेस टू फेस कनफेशन किया। कनफेशन करते समय पादरी ने अपना हाथ पीड़िता के घुटने के ऊपर रखा और सहलाने लगा। पीड़िता का कहना है कि उन्हें ये बहुत ही असहज लगा, लेकिन उन्होंने इसे रोका नहीं, क्योंकि उसे लगा था कि वो गलत समझ रही है। पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि उसे लगा कि हो सकता है कि वो जो महसूस कर रही है, वो गलत हो, क्योंकि वो एक पादरी था और एक पादरी से उसने ऐसा कुछ करने की उम्मीद नहीं की थी।

पीड़िता ने अपनी गवाही के तीसरे दिन कोर्ट को एक और घटना के बारे में बताया और कहा कि उसके साथ एक और बेहद शर्मनाक घटना घटी और इस दौरान उसे किसी तरह की कोई गलतफहमी नहीं थी। वर्तमान समय में 20 वर्षीय पीड़िता ने मंगलवार (6 अगस्त 2019) को बताया कि जब वो 16 साल की थी, तब पादरी ने एक बार फिर से उसके साथ बदसलूकी की और उसके मुँह पर चुंबन लिया था। यहीं नहीं, पीड़िता ने अपनी माँ को बताया कि 2015 के मई की शुरुआत में वो चर्च के ऑफिस में बैठकर फोन पर वीडियो देख रही था, तभी वहाँ पर पादरी आया और उसकी शर्ट के ऊपर हाथ रखा और उसके साथ बदतमीजी करने लगा। उसने पादरी को रोकने की कोशिश की, लेकिन वो फिर भी घिनौनी हरकत करता रहा।

बार-बार चूमता रहा

इसके साथ ही बुधवार (7 अगस्त 2019) को एक दूसरी 12 वर्षीय पीड़िता ने बताया कि जब वो 9 या 10 साल की थी, तभी उस पादरी ने उसके मुँह को बार-बार चूमा था और महीनों तक उसके प्राइवेट पार्ट्स के साथ छेड़खानी करता रहा था।