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नेहरू के देश पर हिन्दू प्रभुत्व वालों का कब्जा, भारत के परमाणु बमों पर ध्यान दे दुनिया: इमरान ख़ान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को हिन्दूफोबिया हो गया है। लगातार ट्वीट्स में पीएम नरेंद्र मोदी व भाजपा के लिए ‘हिन्दू प्रभुत्ववादी’ जैसे शब्दों का प्रयोग यह दिखाता है कि पाक पीएम को जम्मू कश्मीर मसले में केवल ‘हिन्दू एंगल’ ही दिख रहा है। इमरान ने एक के बाद एक चार ट्वीट कर भारत सरकार, पीएम मोदी और हिन्दुओं को भला-बुरा कहा। इमरान ख़ान ने लिखा कि जैसे जर्मनी पर नाज़ी ने कब्ज़ा कर लिया था, ठीक वैसे ही ‘फासिस्ट, रेसिस्ट और हिंदुत्व के प्रभुत्व’ वाले नेतृत्व ने भारत पर कब्ज़ा कर लिया है।

जम्मू कश्मीर को ‘भारत अधिकृत कश्मीर’ बताते हुए उन्होंने दावा किया कि वहाँ 90 लाख लोगों को 2 हफ्ते से नजरबंदी की हालत में रखा गया है। इमरान ने लिखा कि अब तक संयुक्त राष्ट्र को संज्ञान लेते हुए अपने प्रतिनिधियों को वहाँ भेज देना चाहिए था। भारत के राष्ट्रपिता और प्रथम प्रधानमंत्री का जिक्र करते हुए इमरान ने लिखा कि ‘इन हिन्दू प्रभुत्ववादियों’ से न सिर्फ़ भारत के अल्पसंख्यकों और पाकिस्तान को खतरा है, बल्कि गाँधी-नेहरू द्वारा जो भारत की संरचना बनाई गई थी, वो भी खतरे में है।

व्हाट्सप्प ज्ञान से फैलने वाले अफवाहों को बढ़ावा देते हुए खान ने लिखा कि गूगल सर्च कर के यह पता लगाया जा सकता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और नाज़ी की नरसंहार वाली विचारधाराओं में क्या समानताएँ हैं? उन्होंने दावा किया कि 40 लाख भारतीय मुस्लिम हिरासत में हैं और उन्हें विभिन्न कैम्पों में रखा गया है। इमरान के अनुसार, इन मुस्लिमों की नागरिकताएँ भी छीन ली गई हैं। हालाँकि, अपने इस झूठे दावे को साबित करने के लिए उन्होंने कोई सबूत पेश नहीं किया।

इमरान खान ने लिखा, “दुनिया को यह ज़रूर देखना चाहिए। आरएसएस के ‘गुंडे’ खुले तौर पर हिंसा कर रहे हैं। जिन्न अब बोतल से बाहर आ चुका है। अगर विश्व समुदाय ने समय पर कार्रवाई नहीं की तो नरसंहार और घृणा का यह सिद्धांत फैलता चला जाएगा।” भारत की परमाणु शक्ति से भयभीत इमरान ने विश्व समुदाय से अपील की कि भारत का परमाणु जखीरा ‘हिंदुत्व प्रभुत्ववादियों के चंगुल में है’ और इस पर ध्यान दिया जाए।

इमरान ख़ान इससे पहले भी आरएसएस और हिन्दुओं को लेकर भला-बुरा बोल चुके हैं। इससे पहले इमरान ने लिखा था कि कश्मीर में कर्फ्यू लगा है और जनता पर क्रैकडाउन किया जा रहा है। आर्थिक बदहाली से जूझ रहे इस्लामिक देश के प्रधानमंत्री ने लिखा था कि भारत सरकार जम्मू कश्मीर की भौगोलिक परिस्थितियों को जबरदस्ती बदलना चाहती है। उन्होंने पूछा था, “क्या दुनियाँ सिर्फ़ देखती रहेगी और समर्थन करती रहेगी, जैसा कि म्यूनिख में हिटलर के काल में हुआ था?“

‘मुस्लिम गुंडे नहाते समय मेरी माँ को घूरते’ – पीड़ित से The Wire के पत्रकार ने पूछा – तुम्हें बजरंग दल ने सिखाया?

बेगूसराय में दलितों को मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा लगातार अपना घर बेचने का दबाव बनाया जा रहा था। उन्हें संपत्ति बेच कर जाने को कहा जा रहा था। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उनके साथ मारपीट की गई। एक नाबालिग दलित को भी पीटा गया। समाजसेवी संजीव नेवर ने एक ऑडियो जारी किया है, जिसमें ‘द वायर’ और ‘इंडिया स्पेंड’ का पत्रकार पीड़ित पर दबाव डालकर कहवाना चाह रहा है कि यह कोई सांप्रदायिक घटना या हेट क्राइम नहीं है।

ऊपर दिए गए ऑडियो में उमेश ख़ुद का परिचय प्रोपेगंडा पोर्टल ‘द वायर’ और ‘इंडिया स्पेंड’ के पत्रकार के रूप में देता है। पीड़ित ने पत्रकार को अपने साथ की गई ज्यादतियों का वर्णन करते हुए बताया कि स्थानीय मुस्लिम गुंडे उसकी नहाती हुई माँ को ग़लत इरादे से घूरा करते थे। साथ ही उसने अपने साथ हुई मारपीट का वाकया भी सुनाया।

पीड़ित ने बताया कि उसकी बहन से जबरन सड़कें साफ़ करवाई गईं। इसके बाद प्रोपेगंडा पत्रकार ने पीड़ित से पूछा कि क्या वहाँ पर बसे अन्य हिन्दू परिवारों के साथ भी मुस्लिम समुदाय द्वारा ऐसा ही व्यवहार किया जाता है? पीड़ित ने बताया कि वहाँ रह रहे हिन्दुओं को मुस्लिमों द्वारा जो भी काम दिए जाएँ, उन्हें पूरा करना होता है।

वहाँ मुस्लिम समयदाय के लोग दलितों से जबरन काम करवाते हैं लेकिन पीड़ित ने उनकी बात मानने से इनकार कर दिया था। पीड़ित ने बताया कि उसके परिवार में कोई भी बाहर झाड़ू-पोछा या साफ़-सफाई का कार्य नहीं करता है, इसीलिए उसने मुस्लिम समुदाय की बात मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद पत्रकार उमेश ने पीड़ित लड़के से पूछा कि क्या पुलिस को शिकायत दिए जाने की प्रक्रिया में बजरंग दल भी शामिल था?

‘द वायर’ का पत्रकार यह जानना चाहता था कि क्या पीड़त ने बजरंग दल के कहने पर पुलिस में मामला दर्ज कराया? हालाँकि, पीड़ित ने पत्रकार द्वारा बार-बार बात घुमाने के बाद भी अपने बयान पर कायम रहते हुए बताया कि पुलिस को उसने जो बयान दिया है, वह उसका ख़ुद का है और उसने किसी के प्रभाव में आकर यह बयान नहीं दिया है। हालाँकि, पीड़ित ने यह ज़रूर कहा कि शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया में बजरंग दल ने समाजिक दायित्व निभाते हुए उसकी मदद की।

पत्रकार उमेश ने बेशर्मी दिखाते हुए पीड़ित से पूछा कि क्या मुस्लिमों ने उसे पीटते समय यह बताया कि उसे हिन्दू होने की वजह से पीटा जा रहा है? कथित फैक्ट चेकर वेबसाइट के पत्रकार की मानें तो जब तक आरोपित ख़ुद ऐसा नहीं कहता, तब तक यह नहीं माना जाएगा कि यह हेट क्राइम है। जून में आई स्वराज्य की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित महादलित परिवार ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा था कि 10 जून की रात अचानक से उसके घर में भीड़ घुस आई और घर की दो औरतों के साथ दुर्व्यवहार किया गया।

आरोपितों ने पिस्तौल के दम पर बलात्कार करने की भी कोशिश की थी। पीड़ित महादलित परिवार को न्याय दिलाने की माँग के साथ भाजपा व बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया था। बजरंग दल ने कहा था कि नूरपुर को कश्मीर एवं कैराना बनाने की कोशिश हो रही है, जिससे हिन्दू यहाँ से पलायन कर जाएँ।

सिर्फ अंग्रेजी से ही अच्छा पैसा कमाया जा सकता है, इस धारणा को बदलने की जरूरत: मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार (अगस्त 17, 2019) को कहा कि लोगों के बीच इस धारणा को बदलने की जरूरत है कि सिर्फ अंग्रेजी ज्ञान से ही अच्छा पैसा कमाया जा सकता है। उन्होंने मातृभाषाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि अध्ययन के अन्य विषयों के साथ आध्यात्मिक ज्ञान देने की भी जरूरत है।

संघ प्रमुख ने शिक्षा प्रणाली में भारतीयता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति आजीविका चलाने के लिए पढ़ता है, तो यह शिक्षा नहीं है क्योंकि समाज में ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ अशिक्षित लोगों ने शिक्षित लोगों को नौकरियाँ दी हैं।

भागवत ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय में आरएसएस से संबद्ध शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (एसएसयूएन) द्वारा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा में आध्यात्मिकता के बारे में बात की जाती है, तो कुछ लोगों की भौहें तन जाती हैं लेकिन मानविकी, वाणिज्य और विज्ञान जैसे अन्य विषयों के साथ इसकी भी आवश्यकता है। भागवत का कहना है कि लोगों ने ऐसी धारणा बना ली है कि कोई व्यक्ति केवल तभी अच्छा पैसा कमा सकता है, जब उसे अंग्रेजी भाषा का अच्छा ज्ञान हो। लेकिन, इस धारणा को बदलने करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि जो लोग सिर्फ अपनी मूल भाषा जानते हैं, वो भी वह अच्छा पैसा कमा सकते हैं। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विकसित देशों के उदाहरण दिए, जहाँ अधिकांश लोग केवल अपनी मातृभाषा को ही जानते हैं। मोहन भागवत ने कहा कि समाज में लोगों का कहना है कि शिक्षा प्रणाली को बदला जाना चाहिए, और यह लोगों द्वारा किया जा सकता है, क्योंकि भारत में शिक्षा प्रणाली पूरी तरह से सरकार द्वारा नियंत्रित नहीं है और समाज का भी इस पर कुछ नियंत्रण है। अगर समाज को लगता है कि शिक्षा प्रणाली में बदलाव होना चाहिए, तो यह निश्चित रूप से होगा।

वाह मोदीजी! आप प्रशंसा के लायक हैं, आप देश के मार्गदर्शक हैं: ‘बिहारी बाबू’ का हृदय परिवर्तन

वरिष्ठ अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा का हृदय परिवर्तन होता दिख रहा है। भाजपा में रहते हुए भी बार-बार अपनी ही पार्टी को कोसने वाले सिन्हा आज तो भाजपा में नहीं हैं लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफों के पुल बाँधे हैं। सिन्हा ने ट्विटर पर प्रधानमंत्री द्वारा स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिए गए भाषण को ‘साहसिक, तथ्यपरक और उत्तेजक’ बताया। बकौल शत्रुघ्न सिन्हा, प्रधानमंत्री ने उन सभी समस्याओं का काफ़ी अच्छी तरह से जिक्र किया, जिनसे देश आज जूझ रहा है।

जल-संकट पर बात करते हुए सिन्हा ने लिखा कि यह समस्या विकराल होती जा रही है और अगले 2 वर्षों में कई शहर सूखे की चपेट में आ जाएँगे। बता दें कि पीएम ने जल-संकट पर बात करते हुए जैन मुनि बुद्धिसागर की उस भविष्यवाणी का जिक्र किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि एक समय ऐसा आएगा जब पानी किराने की दूकान पर बिकने लगेगा। पीएम ने बताया कि सरकार आने वाले दिनों में जल जीवन मिशन को लेकर आगे बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि इस मद में साढ़े तीन लाख करोड़ से भी ज्यादा खर्च करने का संकल्प किया गया है।

पटना साहिब से लगातार दो बार सांसद रहे शत्रुघ्न सिन्हा ने प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले की प्राचीर से जनसंख्या नियंत्रण की तरफ ध्यान दिलाए जाने पर भी ख़ुशी जताई। ज्ञात हो कि स्वतंत्रता दिवस पर अपने सम्बोधन के दौरान पीएम ने जनसंख्या विस्फोट को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते हुए देशवासियों से छोटे परिवार की अपील की थी। उन्होंने देश में जनसंख्या विस्फोट पर चिंता जताते हुए कहा था कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए नयी चुनौतियाँ पेश करता है।

2019 लोकसभा चुनाव कॉन्ग्रेस के टिकट पर लड़ कर हार चुके सिन्हा इस बात से भी गदगद दिखे कि पीएम ने प्लास्टिक को ‘गुड बाय’ कह कर प्रदूषण नियंत्रण में योगदान देने की अपील की। साथ ही सिन्हा ने पीएम द्वारा भारतीय पर्यटन को एक नया आयाम देने के लिए भी धन्यवाद किया। सिन्हा ने ट्विटर पर लिखा:

“इन समस्याओं के बारे में बातें तो बहुतों ने की हैं लेकिन किसी ने ठोस क़दम नहीं उठाए या योजनाएँ बना कर आगे बढ़ने का प्रयास नहीं किया। वाह! आप (पीएम मोदी) प्रशंसा और सराहना के लायक हैं।”

दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जमाने में उनके विश्वस्त सहयोगियों में शामिल रहे सिन्हा ने सीडीएस के गठन को लेकर भी पीएम की प्रशंसा की। सिन्हा ने लिखा कि इससे बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश का मार्गदर्शक और मित्र होने के नाते इन समस्याओं पर बात करने के लिए सही समय, सही दिन और सही मंच चुना है। पूरा देश उनके साथ मजबूती से खड़ा है।“

2 कश्मीरी IAS-IPS ने दिखाया दम, सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा की कर दी छुट्टी

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 के पर कतरने के बाद से ही सोशल मीडिया पर फ़र्ज़ी ख़बरों को फैला कर लोगों को भ्रमित करने का काम पाकिस्तान बड़े ज़ोर-शोर से कर रहा है। फ़र्ज़ी ख़बरों के प्रचार-प्रसार के लिए पाकिस्तान फ़र्ज़ी फ़ोटो और वीडियो का जमकर सहारा ले रहा है। ऐसा करने के पीछे पाकिस्तान की मंशा दुनिया में भारत की छवि को ख़राब करना है।

पाकिस्तान की मंशा का पर्दाफ़ाश करने में भारत कभी पीछे नहीं रहा, उसकी इस हरक़त का मुँहतोड़ जवाब भी दिया गया, दिया जा रहा है। इन्हीं में एक हैं जम्मू-कश्मीर में पाक आतंकवादियों का काम तमाम करने वाले आईपीएस अधिकारी इम्तियाज़ हुसैन, जिन्होंने सबूतों और तर्कों के साथ सोशल मीडिया के मैदान में फर्जीवाड़ा और प्रोपेगेंडा फैला रहे पाकिस्तानियों को धूल चटाई।

श्रीनगर में तैनात आईपीएस अधिकारी इम्तियाज़ हुसैन ने रविवार (18 अगस्त) को ट्विटर पर लिखा, “पाकिस्‍तान के सिंध का एक डाकू कश्‍मीर में लड़ाई लड़ना चाहता है। जैसे कि अब तक जो लोग कश्‍मीर में लड़ने के लिए आए थे, वे कमजोर डाकू थे। पाकिस्‍तानी सेना हमेशा से ही अपना काम ऐसे डाकुओं को आउट सोर्स कर करती रही है। उसका काम भी डाकू जैसा ही है। इस डाकू का भी वही हश्र होगा जो पहले के डाकुओं का हुआ है।”

आईपीएस अधिकारी इम्तियाज़ हुसैन के अलावा आईएएस अधिकारी शाहिद चौधरी ने भी पाकिस्तानी प्रॉपेगैंडा की हवा निकालते हुए ट्विटर पर जम्मू-कश्मीर में शांति व्यवस्था की असली तस्वीर से लोगों को अपडेट करते रहे हैं।

एक विदेशी पत्रकार के ट्वीट जिसमें कश्मीर में अस्पतालों के फोन के काम नहीं करने के बारे में लिखा था, उसका जवाब देते हुआ आईएएस अधिकारी शाहिद चौधरी ने लिखा, “मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल और अन्‍य चिकित्‍सा सुविधाओं के प्रमुखों के टेलिफोन नंबर पूरे दिन काम कर रहे हैं। कृपया तथ्‍यों का सम्‍मान करें। आपके पास अटकलों के आधार पर ट्वीट करने के लिए और भी बहुत कुछ है।”


बिरयानी वाले परवेज ने 100km की स्पीड से चलाई जगुआर, बांग्लादेशी मोइनुन और फरहाना की कोलकाता में मौत

कोलकाता में बिरयानी चेन रेस्तरां के मालिक के बेटे परवेज ने अपनी जगुआर से एक मर्सिडीज को टक्कर मार दी। इसमें दो बांग्लादेशी नागरिकों की मौत हो गई। पुलिस ने परवेज को गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के मुताबिक, शनिवार (अगस्त 17, 2019) की सुबह परवेज की तेज गति से आ रही जगुआर ने शेक्सपियर सरानी और लाउडन स्ट्रीट के क्रॉसिंग पर पुलिस बूथ के समीप खड़ी एक मर्सिडीज को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि मर्सिडीज पलट कर पुलिस बूथ से टकरा गई और इसकी चपेट में आकर दो बांग्लादेशी नागरिकों की मौत हो गई। इसके अलावा एक अन्य शख्स घायल हो गया।

दुर्घटना में मारे गए लोगों की पहचान बंग्लादेश के ढाका निवासी काजी मोहम्मद मोइनुन आलम और फरहाना इस्लाम तानिया के रूप में हुई है। इसके अलावा इनके एक अन्य शख्स की पहचान काजी सफी रहमतुल्लाह के रूप में हुई है, जिन्हें कोलकाता के अस्पताल में भर्ती किया गया है। शहर के बांग्लादेश के उप उच्चायोग के मुताबिक, काजी आँख के इलाज के लिए कोलकाता में थे और फरहान ढाका में सिटी बैंक के लिए काम करते थे।

पुलिस ने बताया कि जिस कार से टक्कर मारी गई थी, वो कोलकाता में एक प्रसिद्ध बिरयानी रेस्तरां चेन अर्सलान के मालिक के बेटे परवेज का है और रेस्तरां के नाम पर रजिस्टर्ड है। इस गाड़ी का रजिस्ट्रेशन 2017 में करवाया गया था। परवेज लंदन में अपनी पढ़ाई पूरी करके 2 साल पहले कोलकाता वापस आया है।

बता दें कि आरोपित परवेज टक्कर मारकर भाग गया था, लेकिन अब पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपित परवेज के खिलाफ आईपीसी की धारा 279, 427 और 304 के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि परवेज 100 किलोमीटर की अधिक स्पीड से गाड़ी चला रहा था।

फॉरेंसिक अधिकारी ने बताया कि दोनो गाड़ियों की जाँच करने के लिए वो डेटा रिकॉर्ड निकालने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, कोलकाता में बांग्लादेश उप उच्चायोग अब विदेश मंत्राालय और पश्चिम बंगाल सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर रहा है ताकि शवों को वापस देश भेजने की व्यवस्था की जा सके।

हरियाणा कॉन्ग्रेस में टूट तय, पूर्व CM हुड्डा बोले- वसूलों पर जहॉं आँच आए वहॉं टकराना जरूरी है

हरियाणा में कॉन्ग्रेस का दो फाड़ होना तय हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा किसी भी वक्त पार्टी से किनारा करने का ऐलान कर सकते हैं। रोहतक में रविवार को महापरिवर्तन रैली में वे अपनी ही पार्टी कॉन्ग्रेस पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि देशहित के मसले पर वे कोई समझौता नहीं करेंगे।

दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रह चुके हुड्डा ने कहा है कि कॉन्ग्रेस अब पहले जैसी नहीं रही। वह रास्ता भटक गई है। उन्होंने कहा कि वो ख़ुद को अतीत से मुक्त करने जा रहे हैं। हरियाणा कॉन्ग्रेस में उनके इस बयान के बाद खलबली मच गई है। महापरिवर्तन रैली में कई अन्य नेताओं ने भी हरियाणा में हुड्डा को कमान न दिए जाने पर कॉन्ग्रेस नेतृत्व को परिणाम भुगतने की चेतावनी दी।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि जब सरकार कुछ अच्छा करती है तो वे उसका समर्थन करते हैं। उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि कॉन्ग्रेस नेताओं ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह वो कॉन्ग्रेस नहीं है, जो हुआ करती थी। हुड्डा ने साफ़ कर दिया कि ‘देशभक्ति और आत्मसम्मान’ के मुद्दे पर वह कोई समझौता नहीं कर सकते।

आर्टिकल 370 के मसले पर हुड्डा ने कहा, “मैं एक देशभक्त परिवार से हूॅं। जो आर्टिकल 370 पर फैसले का विरोध कर रहे मैं उनसे कहना चाहता हूॅं-वसूलों पर जहॉं आँच आए वहॉं टकराना जरूरी है, जो जिंदा है तो जिंदा दिखना जरूरी है।”

72 वर्षीय हुड्डा ने कहा कि वह राजनीति से संन्यास लेना चाहते थे, लेकिन ‘हरियाणा की हालत’ को देखते हुए उन्होंने संघर्ष करने का निर्णय लिया है। उन्होंने याद दिलाया कि उनकी परिवार की चार पीढ़ियों का कॉन्ग्रेस से नाता रहा है। रोहतक में हुई रैली को दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी सम्बोधित किया और भाजपा पर निशाना साधा। रोहतक से 4 बार सांसद रह चुके हुड्डा को कई अन्य नेताओं ने सलाह दी कि अगर बात नहीं बन रही है तो वह अलग पार्टी या मंच का गठन करें।

महाभारत के प्रसंगों को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं देवदत्त पटनायक: 33 ट्वीट कर IIM के पूर्व छात्र ने खोली पोल

देवदत्त पटनायक को आपने अक्सर टीवी पर ‘हिन्दू मिथोलॉजी’ पर बड़े-बड़े भाषण देते हुए देखा होगा और साथ ही लोगों के सवालों का जवाब देते हुए भी। ट्विटर पर अभिनव अग्रवाल ने पटनायक के प्रोपेगेंडा की पोल खोलते हुए उनकी पुस्तकों के कई ऐसे अंश निकाले, जो या तो ग़लत हैं या फिर उन्हें तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। अभिनव अग्रवाल ने पटनायक की पुस्तकों के अंश और ओरिजिनल धर्म-ग्रन्थ से समान विषयों की तुलना कर दिखाया कि पटनायक ने तथ्यों को छेड़छाड़ कर पेश किया है। इसके लिए उन्होंने पटनायक के परामर्श से लिखी गई किताब ‘The Illustrated Mahabharata’ का उदाहरण दिया।

  1. देवदत्त पटनायक लिखते हैं कि गांधारी ने अपने बच्चे को शरीर से बाहर निकालने के लिए अपनी दासियों को अपने पेट पर लोहे की छड़ से वार करने को कहा लेकिन गीताप्रेस के किसी भी पुस्तक में ऐसा कोई प्रसंग नहीं है। महाभारत के अनुसार, गांधारी ने ख़ुद से अपने पेट पर मारा और क्षणिक गुस्से में ‘Self-Abortion’ किया।
  2. सत्यवती राजा शांतनु की पत्नी थी। देवदत्त लिखते हैं कि पांडवों और कौरवों के बीच सार्वजनिक रूप से लड़ाई देखने के पश्चात उन्होंने महल छोड़ने के निर्णय लिया। लेकिन, महाभारत की मानें तो सत्यवती ने ऋषि व्यास के कहने पर ऐसा किया। व्यास ने सत्यवती को ऐसा करने को कहा ताकि उन्हें अपने ही वंश की दुर्गति न देखनी पड़े।
  3. पटनायक ने लिखा है कि इंद्र जैसे ही कर्ण के सम्मुख आए और उसके कवच-कुंडल की माँग की, कर्ण ने तुरंत उन्हें निकाल कर सौंप दिया। जबकि महाभारत की मानें तो कर्ण ने पहले कवच-कुंडल देने से मना कर दिया। बाद में अदला-बदली में उसने इसे दे दिया।
  4. ययाति और देवयानी के मामले में पटनायक ने तो हद कर दी। उन्होंने लिखा कि ययाति ने देवयानी का हाथ पकड़ लिया और परंपरा के अनुसार उन्हें शादी करने को बाध्य होना पड़ा। देवदत्त ने ‘परंपरा’ की तानाशाही दिखाने के लिए ऐसा लिखा है। जबकि सच्चाई यह है कि देवयानी ख़ुद ययाति से शादी करना चाहती थीं और उन्होंने अपने पिता से साफ़-साफ़ कह दिया था कि उन्हें कोई और व्यक्ति पति के रूप में स्वीकार्य नहीं है।
  5. देवदत्त पटनायक लिखते हैं कि जयद्रथ वध के बाद द्रोणाचार्य काफ़ी गुस्से में थे और उन्होंने अपनी सेना को सूर्यास्त के बाद भी लड़ते रहने का आदेश दिया। महाभारत के अनुसार, दुर्योधन ने द्रोण को खरी-खोटी सुनाई और इसके बाद द्रोण ने दुर्योधन से पूछा, “तुम सबके आस-पास रहते भी जयद्रथ की मृत्यु कैसे हो गई? तुम लोगों ने तो उसे बचाने की प्रतिज्ञा ली थी और अर्जुन को घेर भी रखा था?”
  6. देवदत्त पटनायक लिखते हैं कि महाभारत में शिखंडी को ज्यादा महत्व नहीं दिया गया है। यह झूठ है क्योंकि महाभारत में एक पूरा का पूरा अध्याय शिखंडी के ऊपर है। इसका नाम है अम्बोपाख्यान, जिसमें खुद भीष्म ने कई चीजें बताई हैं। अर्थात, शिखंडी और उसके किरदार के बारे में सब कुछ बताया गया है।
  7. एक ही पुस्तक में दो अलग-अलग स्थानों पर पटनायक ने विरोधाभाषी बातें लिखी हैं। एक जगह उन्होंने लिखा है कि बुजुर्गों की दुर्दशा ऐसी है कि उनके बच्चे-बच्चियाँ उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते। वहीं दूसरी तरफ ख़ुद को ही काटते हुए पटनायक लिखते हैं कि समाज में बुजुर्गों का प्रभुत्व है।
  8. परशुराम-भीष्म की लड़ाई पर तथ्यों को ग़लत तरीके से पेश करते हुए पटनायक ने लिखा है कि चूँकि भीष्म को मारना असंभव था, परशुराम ने हार स्वीकार कर ली। जबकि, परशुराम के हार मानने का कारण यह था कि भीष्म ने एक घातक अस्त्र निकाल लिया था, जिसे उन्होंने बाद में देवताओं की सलाह के बाद वापस ले लिया।

हालाँकि, देवदत्त पटनायक ने अभिनव अग्रवाल के इस ट्विटर थ्रेड का जवाब देते हुए लिखा कि इस पुस्तक को उनके परामर्श से लिखा गया है लेकिन उन्होंने इसे पूरी तरह लिखा नहीं है। इसके बाद अभिनव ने उनकी अन्य पुस्तकों का हवाला देते हुए बताया कि उन्होंने कई जगह ऐसे ही तथ्यों से छेड़छाड़ की है। उनकी किताब ‘जया’ में भी गांधारी वाले झूठ का वर्णन है। सत्यवती वाली कहानी भी ‘जया’ में हूबहू है।

(यह पूरा का पूरा लेख अभिनव अग्रवाल द्वारा देवदत्त पटनायक की पुस्तक पढ़े जाने के बाद उसमें निकाली गई खामियों पर आधारित है।)

अयोध्या: बाबर का वंशज रखना चाहता है राम मंदिर की पहली ईंट, कहा- शांति दूत बनाकर भेजो कश्मीर

अयोध्या मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जारी सुनवाई के बीच बाबर के वंशज ने एक बड़ा दावा किया है। खुद को मुगल साम्राज्य के अंतिम शासक बहादुर शाह जफर का वंशज बताने वाले याकूब हबीबुद्दीन तुसी ने अयोध्या में राम मंदिर की पहली ईंट रखने की ख्वाहिश जताई है। साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से खुद को शांति दूत बनाकर जम्मू-कश्मीर भेजने की अपील की है।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में तुसी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की इच्छा जताते हुए कहा कि हमारा परिवार उसकी पहली ईंट रखेगा और हम मंदिर की नींव के लिए सोने की शिला दान करेंगे। तुसी ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर खुद को अयोध्या मामले में पक्षकार बनाने की भी अपील की थी।

तुसी के मुताबिक जिस जमीन को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है उसके मालिकाना हक का कागज किसी के पास नहीं हैं। इसलिए वे चाहते हैं कि मुगल वंशज होने की हैसियत से उन्हें अदालत में अपनी बात रखने का मौका मिले।

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित तुसी का बयान

उन्होंने कहा कि बाबर ने अपने सैनिकों को नमाज पढ़ने की जगह देने के लिए बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया था। यह स्थान सिर्फ सैनिकों के लिए था और किसी के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि मैं इस विवाद में नहीं पड़ना चाहता कि वहॉं मस्जिद से पहले क्या था। लेकिन, यदि हिन्दू उस स्थान को भगवान राम का जन्मस्थान मानते हैं तो मैं उनकी भावना का सम्मान करूंगा।

तुसी ने कहा कि इस जमीन के मालिकाना हक से जुड़ा कोई दस्तावेज उनके पास नहीं है। लेकिन, मुगल वंश के उत्तराधिकारी की हैसियत से वे इस जमीन के अधिकारी माने जा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि यह जमीन उन्हें मिलती है तो वह इसे मंदिर निर्माण के लिए दान कर देंगे।

वहीं, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को लिखे एक पत्र में तुसी ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 के प्रावधानों को हटाने के फैसले की सराहना की है। पत्र में उन्होंने कहा है, “मेरी लोकप्रियता, मेरी विरासत और जम्मू-कश्मीर में मेरी पहचान को देखते हुए मैं कश्मीर में प्रत्यक्ष रूप से शांति संदेश फैलाने के लिए जनता और सरकार के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाना चाहता हूँ।”

CBI करेगी कुमारस्वामी सरकार के दौरान हुई फोन टैपिंग के आरोपों की जाँच: CM येदियुरप्पा ने लिया फैसला

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कुमारस्वामी सरकार के दौरान फोन टैपिंग स्कैंडल मामले की जाँच की जिम्मेदारी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का फैसला किया है। येदियुरप्पा ने रविवार (अगस्त 18, 2019) को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि सभी दल के नेताओं ने फोन टैपिंग मामले में उच्चस्तरीय जाँच की माँग की थी, इसलिए उन्होंने इस केस की जाँच सीबीआई से कराने का फैसला लिया है।

येदियुरप्पा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, ‘‘टेलीफोन टैपिंग के मुद्दे पर कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता सिद्दरमैया समेत कई नेताओं ने कहा कि इसकी जाँच होनी चाहिए और सच्चाई सामने आनी चाहिए, इसलिए मैंने सीबीआई जाँच का आदेश देने का फैसला किया है।”

गौरतलब है कि अयोग्य करार दिए गए जद (एस) विधायक ए एच विश्वनाथ ने पिछले सप्ताह एच डी कुमारस्वामी की सरकार पर फोन टैप करने और उनके समेत 300 से अधिक नेताओं की जासूसी कराने के आरोप लगाए। इसके बाद येदियुरप्पा ने यह घोषणा की है। सिद्दरमैया, एम. मल्लिकार्जुन खड़गे और गठबंधन सरकार में गृह मंत्री रहे एम बी पाटिल समेत कॉन्ग्रेस नेताओं ने जाँच की माँग की है, जबकि पार्टी के एक अन्य अहम नेता और पूर्व मंत्री डी के शिवकुमार ने आरोपों को खारिज कर दिया है।

पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार समेत कई भाजपा नेताओं ने कुमारस्वामी पर अपनी सरकार बचाने के लिए इस प्रकरण के पीछे होने का आरोप लगाया है। विधानसभा में विश्वास मत हारने के बाद पिछले महीने गठबंधन सरकार गिर गई थी। कुमारस्वामी ने इन आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘मुझे फोन टैप करके कुर्सी बचाने की कोई जरूरत नहीं है। इस मामले में कुछ लोगों ने मेरे खिलाफ जो आरोप लगाए हैं, वे सच्चाई से परे हैं।”