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इन ट्वीट्स को पढ़ कर लगता है पाकिस्तानी नेताओं की बुरी तरह से सुलग गई है…

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने के बाद 5 अगस्त से ही पाकिस्तानी आवाम  बौखलाई बैठी है। पिछले दिनों हमने सोशल मीडिया पर वहाँ की जनता से लेकर कलाकारों तक की टिप्पणियाँ सोशल मीडिया पर गौर की। लेकिन अब वहाँ के शीर्ष अधिकारियों की भाषा पर भी नजर डालिए, जो कश्मीर हाथ से जाने के कारण संयमित नहीं रह पा रही हैं।

वहाँ किसी नेता को भारत का ये कदम कश्मीरियों का दमन लग रहा है तो कोई नेता भारत के इस फैसले को उसका नाजीवादी चेहरा बता रहा है। किसी को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीफ़ खाने वाले लोगों के साथ बीफ का निर्यात करने वाले लोगों के हत्यारे दिख रहे हैं। ऐसे अनेकों उलाहनाएँ देकर पाकिस्तानी नेता और अधिकारी इन दिनों खुद को संतुष्ट करने में लगे हुए हैं। उनमें से कुछ के बयानों पर एक नजर:-

सरकार के फैसले के बाद पाकिस्तानी सेना के आधिकारिक ट्विटर से इस संबंध में कुछ ऐसे ट्वीट आए- “फोरम पूरे तरीके से सरकार (पाकिस्तान) के साथ है और कश्मीर पर लिए गए भारत के ऐक्शन को हम नकारते हैं। पाकिस्तान ने कभी भी सालों पहले दिखावटी ढंग से आर्टिकल 370 और 35-ए के जरिए जम्मू कश्मीर को कब्जाने को मान्यता नहीं दी है। पाकिस्तान की सेना, कश्मीरियों के साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ उनके साथ है।”

पाकिस्तान सेना के पब्लिसिटी स्टंटबाज मेजर जनरल गफूर खान भारत का फैसला आने के बाद धमकी भरे अंदाज में लिखते हैं। “यह खत्म नहीं हुआ। यह तब तक नहीं होगा जब तक कि हमारे कश्मीरियों का संघर्ष सफल नहीं हो जाता।” वह लिखते हैं कि वह कश्मीरियों के आत्मनिर्णय अधिकार के लिए किसी भी हद तक जाएँगे। एक अवैध पेपर उन्हें परेशान नहीं कर सकता।

पाकिस्तान सरकार के राज्य मंत्री शहरयार अफरीदी कहते हैं कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 निरस्त करके भारत ने कश्मीरियों के प्रति अपने दानवीय इरादों का उदाहरण पेश किया है। इसलिए अब पाक और अन्य जिम्मेदार राज्य संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के आदेश के तहत कश्मीर के आत्मनिर्णय के अधिकार को सुनिश्चित करेंगे। भारत अपने अमानवीय अजेंडे कश्मीरियों पर नहीं थोप सकता।

अकसर चर्चा में रहने वाले पाकिस्तान मंत्री फवाद चौधरी हुसैन भी इसपर 6 तारीख को ट्वीट करके अपनी भड़ास निकालते हैं। अपने ट्वीट पर लिखते हैं, “मोदी सरकार कश्मीर को दूसरा फिलिस्तीन बनाना चाहती है। वह वहाँ की जनसंख्या जनसांख्यिकी में बदलाव करने के लिए बाकी लोगों को कश्मीर में बसाना चाहती है। सांसदों को तुच्छ मुद्दों पर लड़ना बंद करके भारत को खून, आँसू और पसीने से जवाब देना चाहिए। अगर जंग थोपी जाए तो हमें जंग के लिए तैयार रहना चाहिए।”

नेशनल असेंबली के सदस्य मुराद सईद की मानें तो वो पूरी दुनिया से सवाल कर रहे हैं, “कब तक मोदी का नव-नाजी शासन सोचता है कि वो कश्मीर के हालात छिपा कर रख सकता है? कश्मीर दहाड़ के साथ गर्जना करेगा जो भारत की नींव हिला देगा।”

पाकिस्तान की राजनैतिक पार्टी पीटीआई के सदस्य असद उमर अपने ट्वीट में कश्मीर में तैनात हुए 10,000 सुरक्षबलों का हवाला दे रहे हैं, पाकिस्तान में बैठकर कश्मीर में लगे कर्फ्यू पर चिंता जाहिर कर रहे हैं। फोन पर बातचीत न हो पाने का रोना रो रहे हैं। इतना ही नहीं वह गुजरात में हुए दंगों का हवाला देकर दुनिया को बता रहे हैं कि मोदी की एंट्री पहले न केवल पाकिस्तान में बल्कि यूएस और यूएन में भी बैन थी। उनका इतिहास रहा है नरसंहार को समर्थन देने का।

ये सब देख कर तो यही याद आता है:

पाक बिल्ली-भारत शेर, लेकर रहेंगे POK : इमरान को मोदी के मंत्री का दो टूक

पाकिस्तान की युद्ध संबंधी गीदड़ भभकियों का केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास अठावले ने करारा जवाब दिया है। उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि वो आर-पार की लड़ाई चाहते हैं तो भारत भी इससे पीछे नहीं हटेगा और अब पीओके (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) भी वापस लेकर रहेगा।

दरअसल, जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने के बाद से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। उसने भारत के साथ व्यापारिक और राजनयिक रिश्ते खत्म करने जैसे कई कदम उठाए हैं। साथ ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री समेत कई मंत्रियों ने भारत को युद्ध की धमकी भी दी है।

इसके जवाब में अठावले ने कहा, “पाकिस्तान एक बिल्ली के समान है, जबकि भारत शेर है। इमरान खान को भारत के साथ दुश्मनी भारी पड़ेगी। फिर भी वे ऐसा चाहते हैं तो हमें भी एक बार आर-पार की लड़ाई लड़नी होगी और पीओके लेना ही पड़ेगा। हम भी हर स्थिति के लिए तैयार हैं। ईंट का जवाब पत्‍थर से दिया जाएगा।”

रामदास अठावले का कहना है कि पाकिस्तान केवल गीदड़ भभकियाँ ही दे सकता है, लेकिन इस बार किसी भी बात को हल्के में नहीं लिया जाएगा और हर स्तर पर उसे जवाब दिया जाएगा। अंगदान कार्यक्रम की शुरुआत करने मथुरा पहुँचे केंद्रीय राज्य मंत्री ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि वो अपने आपको सुधार लें, जिससे कि शांति बनी रहे, वरना भारत ने पाकिस्तान को पहले भी कारगिल के युद्ध में धूल चटाई थी और अगर इस बार भी नहीं माना, तो ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा।

…अब ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन ने की PM मोदी से Pak कलाकारों पर ब्लैंकेट बैन की माँग

कश्मीर से अनुच्छेद 370 पर पाकिस्तान लगातार अपनी प्रतिक्रियाएँ दे रहा है। पाकिस्तान ने कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से अलगवावादियों का समर्थन करते हुए भारत से सभी तरह के संबंध खत्म करने का फैसला लिया है। इसी कड़ी में एक दिन पहले पाकिस्तान ने भारतीय फिल्मों के पाकिस्तान में प्रदर्शन पर बैन लगा दिया है।

इसी कदम के जवाब में ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (एआईसीडब्ल्यूए) All Indian Cine Workers Association (AICWA) ने पीएम नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर बॉलीवुड में पाक कलाकारों पर ब्लैंकेट बैन की माँग की है।

एआईसीडब्ल्यूए के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने पाकिस्तान में जिस तरह भारतीय सिनेमा पर रोक लगाने की बात कही है, उसी प्रकार हम भी फिल्म इंडस्ट्री से अनुरोध करते हैं कि वे भी पाकिस्तानी आर्टिस्ट, म्यूजीशियन और डिप्लोमेट पर रोक लगाएँ। उन्होंने एक स्टेटमेंट जारी कर पाकिस्तानियों पर रोक लगाने की माँग की है। 

जब पाकिस्तानी ‘मोमिन’ गायक गुलाम अली ने बताया था भारतीय ‘काफिरों’ के रुपयों को जायज

दरअसल, पाकिस्तान में भारतीय सिनेमा पर रोक लगाने पर एक बयान सामने आया था। इसमें पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के आई एंड बी के स्पेशल असिस्टेंट ने कहा था कि पाकिस्तान के सिनेमाघरों में भारतीय फिल्मों की स्क्रीनिंग नहीं की जाएगी।

क्या है ब्लैंकेट बैन?

ब्लैंकेट बैन का मतलब किसी भी चीज पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाना है। इसके पहले AICWA ने फरवरी 2019 में पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के विरोध में भी पाकिस्तानी कलाकारों के बॉलीवुड में काम करने को लेकर पूर्ण प्रतिबंध की माँग की थी।

देखा जाए तो यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तानी कलाकार भारत से नफरत करने के बावजूद यहाँ रोजगार और रुपयों के लिए आते रहते हैं। ऐसा ही एक किस्सा आप यहाँ पढ़ सकते हैं, जब मशहूर ग़ज़ल गायक गुलाम अली को ‘काफिरों’ के पैसों को जायज बताने के चक्कर में करारा जवाब मिला था। उन्होंने कहा था कि एक ‘मोमिन’ होने के नाते वो भारत देश के काफ़िरों की सिर्फ शराब, शबाब और और पैसा पसंद करते हैं और इसमें उन्हें कोई परेशानी नहीं होती। लेकिन…

तालिबान ने डाँटा, चीन ने निराश किया: J&K पर दोस्त भी Pak के नहीं साथ

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी चीन के दौरे पर पहुँचे हैं। पाकिस्तान सदाबहार ‘दोस्त’ चीन से पक्ष में बयान दिलवाने के लिए आतुर है और इस सम्बन्ध में पाक विदेश मंत्री ने चीन से गुजारिश भी की। पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को द्विपक्षीय मुद्दा बताते हुए कहा है कि भारत द्वारा अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म करना ‘अवैध’ है। पाकिस्तान इस मसले को संयुक्त राष्ट्र तक ले जाने की बार-बार धमकी दे रहा है।

लेकिन, उसके इस रुख का चीन समर्थन करता नहीं दिख रहा। चीन ने दोनों ही देशों को बातचीत के जरिए मसला सुलझाने की सलाह दी। चीन ने अपने बयान में अनुच्छेद 370 का कोई जिक्र किए बिना क्षेत्र की शांति और स्थिरता बनाए रखने की अपील की है। उसने कहा कहा है कि दोनों देशों को ऐसे क़दम उठाने से बचना चाहिए, जिससे यथास्थिति पर कोई बुरा प्रभाव पड़े।

चीन द्वारा अनुच्छेद 370 और भारत पर प्रत्यक्ष टिप्पणी न करने से पाकिस्तान निराश है। उधर, तालिबान ने भी पाक को खरी-खरी सुनाई है। तालिबान ने कश्मीर को अफ़ग़ानिस्तान से न जोड़ने की हिदायत दी है। तालिबान के प्रवक्ता ने कहा है कि कुछ पक्षों द्वारा कश्मीर को अफ़ग़ानिस्तान से जोड़ कर देखना समस्या को खत्म नहीं करेगा, क्योंकि कश्मीर और अफ़ग़ानिस्तान अलग-अलग मसले हैं। तालिबान ने शांति बनाए रखने की अपील करते हुए सलाह दी है कि अफ़ग़ानिस्तान को थिएटर न बनाएँ।

कश्मीर मुद्दे पर तालिबान का बयान

तालिबान का इशारा पाकिस्तान के विपक्षी नेता शाहबाज़ शरीफ के बयान की तरफ था। शरीफ ने कहा था कि जहाँ एक तरफ अफ़ग़ान काबुल में शांति की बात करते हैं वहीं कश्मीर में ख़ून बहाया जाता है। शरीफ ने इसे अस्वीकार्य बताया था। यही बात तालिबान को नागवार गुजरी है। इसके बाद अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तान के एम्बेसडर को सफाई देनी पड़ी। पाकिस्तानी राजनयिक ने कहा कि कश्मीर मसले का अफ़ग़ानिस्तान की शांति प्रक्रिया पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा।

तालिबान द्वारा डाँटे जाने और चीन से अपेक्षित समर्थन न मिलने के बाद पाकिस्तान की स्थिति और बदतर हो चली है। संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका से उसे निराशा ही मिली ही है। बता दें कि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर भी रविवार (अगस्त 11, 2019) को चीन दौरे पर जाने वाले हैं।

बिहारियों पर केंद्र कब ध्यान देगा? क्या बिहारी भी उठा ले पत्थर?

शास्त्रीय संगीत के वाद्ययंत्र सितार का जिक्र जैसे ही होगा, वैसे ही पण्डित रविशंकर की याद आ जाती है। उनके खुद के सितार बजाने की कला सम्मानित है, लेकिन उनकी कला उन तक ही सीमित भी नहीं है। वो अपनी कला अपनी अगली पीढ़ी तक पहुँचाने में भी कामयाब रहे हैं। उनकी बेटियाँ, अनुष्का शंकर हों या नोरा जोन्स, दोनों ही संगीत के क्षेत्र में जानी-मानी हस्तियाँ हैं। ऐसा आम तौर पर लेखन में होता नहीं देखा गया।

संगीत, नृत्य आदि विधाओं में जहाँ माता-पिता अपने पुत्रों या पुत्रियों को अपने ही जैसा सिखा कर तैयार कर पाते हैं, वैसा किसी एक भी लेखक ने किया हो याद नहीं आता। हाँ, पत्रकारिता की नौकरी में जरूर लोग अपने बच्चों को एक नौकरी दिलवा देते हैं, मगर उसे लेखन की क्षमता तो नहीं कह सकते। ज्यादा से ज्यादा वो नौकरी ही रहेगी।

खैर, वापस संगीत और पण्डित रविशंकर पर चलें तो उन्होंने संगीत की शिक्षा उस्ताद अल्लाउदीन खां से ली थी। बाद में उस्ताद अल्लाउदीन खां की ही बेटी अन्नपूर्णा से उन्होंने शादी भी की थी। वो जब 1938 से 1944 के बीच संगीत सीखा करते थे, तो आज जैसा दौर नहीं था। छात्र-छात्राओं की पिटाई पर शिक्षक को जेल में डालने का कानून नहीं था। पण्डित रविशंकर के उस्ताद अल्लाउदीन खां इस मामले में कुछ ज्यादा सख्त भी थे।

सुर, लय, ताल कुछ भी जरा सा छूटे तो वो पण्डित रविशंकर को बाहर पेड़ में बांधकर डंडों से पिटाई करते! एक दिन इन सबसे दुखी पण्डित रविशंकर उस्ताद के पास से भाग निकले! थोड़ी देर बाद उस्ताद के बेटे ने उन्हें रेलवे स्टेशन पर ढूँढ निकाला।

वो आए और पण्डित रविशंकर के पास बैठे। उन्होंने पूछा, क्या हुआ, क्यों भाग आये हो? पण्डित रविशंकर ने बताया कि ये सख्ती कुछ ज्यादा है, मुझसे अब झेली नहीं जाती। उस्ताद के बेटे ने कहा तुम किस्मत वाले हो जो तुम्हें पिताजी इतने ध्यान से सिखाते हैं, मुझे वो कभी ऐसे नहीं सिखाते!

इस तरह से सिखाए जाने का नतीजा क्या हुआ इस बारे में कुछ भी कहने की कोई ख़ास जरूरत नहीं होती। जिसे इतने ध्यान से सिखाया जा रहा हो, उसे पद्म भूषण मिले या तीन बार ग्रैमी, आश्चर्य नहीं होना चाहिए। हमें ये कहानी इसलिए याद आती है क्योंकि हम बिहार में रहते हैं जहाँ की आबादी 13 करोड़ के लगभग है। हमें कश्मीर दिखता है जहाँ की आबादी यहाँ का मुश्किल से दसवाँ हिस्सा होगी। मुझे ये दिखता है कि वहाँ कितना ध्यान दिया जा रहा है और यहाँ कितन कम ध्यान दिया जाता है।

मुझे वहाँ की बाढ़ में बचाव कार्य दिखता है और राहत-बचाव के बाद चलते पत्थर दिखते हैं। मुझे बिहार की बाढ़ दिखती है जहाँ डूबने पर खबर इतनी बड़ी भी नहीं होती कि एक दिन नेशनल मीडिया पर चलाया जा सके। जंगल में सबसे सीधे पेड़ सबसे पहले काटे जाते हैं, ऐसा कहावतें कहती हैं और शैतान-शरारती बच्चों पर ज्यादा ध्यान और बेचारे भले सीधे आदमी को लात खाते देखने का दस साल का अनुभव तो जरूर है।

बाकी मुझे भी लगता है बिहारियों को हंगामा करने वाला होना चाहिए था। तोड़-फोड़ करते, असम से मुंबई तक दिगबोई का तेल नहीं पहुँचने देते, मुंबई-दिल्ली जाने वाली ट्रेन रोकते, हंगामा – या बिलकुल ही कहर बरपाया होता तो शायद हमपर भी ध्यान दिया जाता। हमारा अफ़सोस भी उस्ताद अल्लाउदीन खान के बेटे वाला ही है।

हम पर किसी का ध्यान ही नहीं रहता!

‘हेडलेस’ कॉन्ग्रेस ‘ब्रेनलेस’ हो गई है: Article 370 पर विलाप को लेकर बोले नकवी

जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी किए जाने पर कॉन्ग्रेस के विलाप को खारिज करते हुए केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि ‘हेडलेस’ कॉन्ग्रेस अब ‘ब्रेनलेस’ हो गई। ‘हेडलेस’ से उनका तात्पर्य काफी समय से खाली पड़े कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर था।

एएनआई को नकवी ने बताया, “पूरे देश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की नीतियों और नी​यत पर भरोसा है। इनमें जम्मू कश्मीर और लद्दाख के ज्यादातर लोग भी शामिल हैं और वे इस फैसले का जश्न मना रहे हैं।”

कॉन्ग्रेस के विरोध को लेकर उन्होंने कहा, “यह नया नहीं हैं। जब सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुआ था तब पाकिस्तान के साथ-साथ यहॉं भी कुछ लोग इसके सबूत मॉंग रहे थे। कॉन्ग्रेस के लोगों की यह हालत देख निराशा होती है। क्या ‘हेडलेस’ कॉन्ग्रेस ‘ब्रेनलेस’ भी हो गई है? वे नहीं समझ पा रहे हैं कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख के लोगों के लिए यह कितना बड़ा तोहफा है।”

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने के मौके पर यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गॉंधी और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी की अनुपस्थिति को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में नकवी ने कहा, “समझ नहीं आ रहा कि कॉन्ग्रेस को क्या हो गया है। हम अब तक यह समझ नहीं पाएँ हैं। प्रणब मुखर्जी किसी पार्टी के नहीं, बल्कि देश के नेता हैं। ऐसे में हमें उनके इस समारोह से दूर रहने का कारण समझ नहीं आता।”

महिला वार्ड में जबरन घुसने, दुर्व्यवहार करने पर AMU से निकाला गया था आजम खान को: मौलवी कल्बे जव्वाद

समाजवादी पार्टी के सांसद और भू-माफिया आज़म ख़ान, जिन्हें हाल ही में लोकसभा में एक महिला पीठासीन अधिकारी के प्रति अभद्र टिप्पणी करने के लिए माफ़ी तक माँगनी पड़ गई, उनके बारे में एक ख़बर सामने आई है। दरअसल, उन्हें 1975 में एक महिला के साथ दुर्व्यवहार करने पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया था।

‘…मन करता है कि आपकी आँखों में आँखें डाले रहूँ’

आज़म ख़ान के ख़िलाफ़ जिस समय यह कार्रवाई की गई थी, उस समय वो मास्टर ऑफ़ लॉ (LLM) की पढ़ाई कर रहे थे और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (AMUSU) के सचिव भी थे।

शिया मौलवी कल्बे जव्वाद के अनुसार, आज़म ख़ान ने एक स्थानीय अस्पताल में महिला वार्ड में जबरन घुसने की कोशिश की थी, जिसके बाद उन्हें यूनिवर्सिटी से एक साल के लिए निष्कासित कर दिया गया था।

मौलवी कल्बे जव्वाद ने बताया, “विश्वविद्यालय ने एक जाँच समिति गठित की थी और उन्हें दोषी पाया गया था। आख़िरकार, उन्हें 6 अक्टूबर, 1975 को निष्कासित कर दिया गया।”

रामपुर में ज़मीन कब्जाने और किताबों की चोरी के आरोपों के अलावा आज़म ख़ान ने बीजेपी नेता जया प्रदा के ख़िलाफ़ अपमानजनक टिप्पणी भी की थी।

उन्नाव रेप केस: MLA कुलदीप सिंह सेंगर पर आरोप तय, जानें पूरा घटनाक्रम

4 जून 2017 को विधायक कुलदीप सेंगर पर एक नाबालिग ने रेप का आरोप लगाया और 11 जून को पीड़िता अचानक गायब हो गई। इस संबंध में रिपोर्ट लिखवाई जाती है। पुलिस उसे 20 जून को ओरैया से बरामद करती है और अगले दिन उसे उन्नाव लाया जाता है। इस साल 29 जुलाई को रायबरेली के पास उस कार में ट्रक टक्कर मार देती है जिसमे पीड़िता सवार होती है। मामले की सीबीआई जांच कर रही है। जिसकी जाँच की जा रही है। जानें इस मामले में कब क्या हुआ

कार एक्सीडेंट के बाद का पूरा घटनाक्रम

  • 30 जुलाई को रेप पीड़िता की माँ द्वारा सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखा पत्र सामने आया।
  • 12 जुलाई को लिखे गए इस पत्र में पीड़िता और उसके परिजनों को आरोपितों द्वारा सुलह न करने पर दी जा रही धमकियों का जिक्र था।
  • 31 जुलाई को सीबीआई टीम जाँच के लिए एक्सीडेंट वाली जगह पहुँची।
  • सीबीआई ने कुलदीप सिंह सेंगर सहित 10 लोगों के खिलाफ नामजद और 15-20 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास, आपराधिक साजिश की धाराओं में केस दर्ज किया।
  • 1 अगस्त को BJP ने कुलदीप सेंगर को पार्टी से निकाला।
  • 1 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में सभी मामले उत्तर प्रदेश से दिल्ली की सीबीआई अदालत को ट्रांसफर करने का आदेश दिया।
  • 2 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता के चाचा को सुरक्षा कारणों से दिल्ली के तिहाड़ जेल शिफ्ट करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने जाँच के लिए सीबीआई को 15 दिन का समय दिया।
  • वीडियो में पुलिस को घूस देते दिखा कुलदीप सेंगर का सहयोगी।
  • 4 अगस्त को सीबीआई ने सबूत की तलाश में लखनऊ, उन्नाव, बाँदा और फतेहपुर में 17 ठिकानों पर छापेमारी की।
  • पीड़िता के गॉंव माखी में ग्रामीणों से पूछताछ।
  • माखी थाने में दस्तावेजों को खंगाला गया, पुलिसकर्मियों से पूछताछ।
  • सीसीटीवी फुटेज खंगाले और फोरेंसिक सबूत इकट्ठा किए।
  • पीड़िता के वकील के पड़ोसियों से भी पूछताछ।
  • आरोपित कुलदीप सिंह सेंगर के घर और दफ्तर पर छापेमारी कर अहम सबूत इकट्ठा किए।
  • फतेहपुर में कार को टक्कर मारने वाले ट्रक मालिक देवेंद्र किशोर पाल के घर और दफ्तर पर छापा, कई अहम दस्तावेज कब्जे में लिए।
  • बांदा में ट्रक ड्राइवर के माता-पिता से पूछताछ ।
  • मामले की सह आरोपी शशि सिंह का बेटा नवीन सिंह गिरफ्तार। 
  • नवीन पर पीड़िता के परिजनों ने धमकी देने का आरोप था।
  • 8 अगस्त को सीबीआई ने अदालत में बताया कि विधायक सेंगर के खिलाफ नाबालिग से रेप के पुख्ता सबूत हैं।
  • 9 अगस्त को दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने आरोपित कुलदीप सेंगर के खिलाफ आरोप तय किए।
  • सेंगर पर आईपीसी की धारा 120b, 363, 366, 109, 376(i) और पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप तय।

सीताराम येचुरी को श्रीनगर एयरपोर्ट से वापस दिल्ली भेजा गया

सीपीआइ (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी को श्रीनगर एयरपोर्ट से वापस उल्टे पाँव दिल्ली भेज दिया गया है। दरअसल, (कथित तौर पर) वो अपनी पार्टी के सदस्यों से मिलने के लिए जम्मू कश्मीर जा रहे थे, मगर श्रीनगर एयरपोर्ट पर उन्हें रोक दिया गया था। इससे पहले गुरुवार (अगस्त 8, 2019) को कॉन्ग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद को जम्मू-कश्मीर एयरपोर्ट पर रोक लिया गया था और फिर वापस दिल्ली भेज दिया गया था।

बता दें कि, येचुरी के साथ माकपा महासचिव डी. राजा भी गए थे। सीताराम येचुरी और डी. राजा का कहना है कि उन्होंने जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक को गुरुवार को पत्र लिखकर अपनी यात्रा की सूचना दी थी और उनसे अनुरोध किया था कि उन्हें प्रवेश की अनुमति दी जाए। उन्होंने राज्यपाल से अनुरोध किया था कि उनकी यात्रा में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए। इसके बावजूद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। 

येचुरी ने बताया कि हिरासत में लेने की वजह पूछने पर पुलिस ने उन्हें एक कानूनी आदेश दिखाया, जिसमें श्रीनगर में किसी को प्रवेश की अनुमति नहीं देने की बात कही गई थी। इसमें कहा गया था कि सुरक्षा कारणों से पुलिस संरक्षण में भी शहर में जाने की अनुमति नहीं है। येचुरी ने कहा था कि वो लगातार बातचीत की कोशिश कर रहे हैं। मगर, उन्हें अब वापस दिल्ली भेज दिया गया है।

बता दें कि, जम्मू-कश्मीर से आर्किटल 370 के ज़रूरी हिस्सों के निष्क्रिय होने के बाद किसी भी तरह की हिंसा की घटनाओं पर काबू पाने के लिए सुरक्षा के कड़े इतंजाम किए गए हैं, केंद्रशासित प्रदेश में धारा 144 लागू है, जबकि कुछ इलाकों में कर्फ्यू जैसे हालात हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ( NSA) अजित डोभाल खुद वहाँ पर मौजूद हैं और सुरक्षा-व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं।

कश्मीर पर पाकिस्तान की नहीं सुन रहा कोई, हर ओर से मिल रही है फटकार

जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 का पॉवर खत्म करके प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने जो ऐतिहासिक फैसला लिया है उसकी खुशी पूरे देश में मनाई जा रही है। लेकिन पाकिस्तान इससे खुश नहीं है। होना भी नहीं चाहिए!! दशकों से चले आ रहा कश्मीर के इस विवाद को भारत सरकार बिना हिंसा के सुलझा दे, ये पाकिस्तान कैसे पचा सकता है। अब चूँकि पाकिस्तान भारत के इस फैसले पर मूक होने के सिवा कुछ नहीं कर सका तो वो संयुक्त राष्ट्र के नाम पर भारत को गीदड़-भभकी देने लगा।

पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 के निष्प्रभावी होने पर अलग-अलग देशों से अलग-अलग तरीकों से मदद माँगी। लेकिन जवाब में फजीहत के सिवाय उनके हाथ कुछ नहीं लगा। 5 अगस्त को भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 समाप्त करके एक राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बाँट दिया- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख। पाकिस्तान ने इसका विरोध किया और यूएन के आदेश का उल्लंघन बताया। पाकिस्तान ने भारत के फैसले को गैरजिम्मेदार बताया और कहा- “इस्लामाबाद भारत के इस अवैध फैसले का मुकाबला करने के लिए सभी संभावित विकल्पों का इस्तेमाल करेगा।”

इसके बाद पाकिस्तान के एक्शन पर पॉवरफुल देशों ने क्या रिएक्शन दिया, आइए संक्षेप में जानें…

  • पाकिस्तान ने UNSC की अध्यक्षा को भारत द्वारा अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के संबंध में पत्र लिखा।
  • अफसोस! UNSC की अध्यक्षा ने इस पर कोई भी टिप्पणी देने से मना कर दिया। उन्होंने इस पर सिर्फ़ ‘नो कमेंट्स’ कहा।
  • वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने भी गुरुवार (अगस्त 8, 2019) को जम्मू और कश्मीर में मौजूदा स्थिति पर अधिकतम संयम बरतने की अपील की और कश्मीर के समाधान के लिए पाकिस्तान को द्विपक्षीय शिमला समझौते का निर्देश दिया।
  • अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी अपने जारी बयान में स्पष्ट किया कि कश्मीर मसले पर अमेरिका की नीतियों में कोई बदलाव नहीं होगा।
  • अमेरिका ने इस मसले को भारत का आंतरिक मामला बताया है और पाकिस्तान से कहा है कि वह इसमें किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करेंगे। 
  • भारत के विरोध में पाकिस्तान द्वारा भारतीय उच्चायुक्त को भेजने पर अमेरिकी सांसद रॉबर्ट मेनेनडेज और इलियट इनजेल ने बयान जारी कर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की थी।
  • इस दौरान दोनों नेताओं ने पाकिस्तान को भारत पर कार्रवाई करने से ज्यादा उनके मुल्क की सरजमीं पर पल रहे आतंकी गुटों से निबटने की हिदायत दी थी।
  • इधर, अमेरिका-आधारित समूह ‘वॉयस ऑफ कराची’ ने भी कहा था, “पाकिस्तान को कश्मीरियों के बारे में बोलने का कोई हक नहीं, क्योंकि उसने खुद अपने नागरिकों को मूलभूत अधिकारों से वंचित रखा।”
  • इस मसले पर चीन ने भी पाकिस्तान का साथ देने से मना कर दिया। जिसकी जानकारी खुद पाकिस्तानी नेता शाहबाज शरीफ़ ने दी। उन्होंने बताया- ‘चीन आज तक हर मसले पर हमारे साथ खड़ा होता था उसने इस मसले पर एक शब्द भी प्रतिक्रिया देना मुनासिब नहीं समझा।’
  • सऊदी अरब ने भी अपनी तरफ से पाकिस्तान के समर्थन में कोई प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया है।
  • शाहबाज शरीफ़ ने अपने ही प्रधानमंत्री के बारे में कहा है,” इमरान खान तो ट्रंप से मध्यस्थता करने की बात ही करते रह गए, हिंदुस्तान के पीएम नरेंद्र मोदी ने जो करना था वो कर दिया।”