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मदरसों में छात्र और मौलाना भगवा पहनेंगे तो उनकी ज़िंदगी में उजाला आएगा: मंत्री मोहसिन रज़ा

उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री मोहसिन रज़ा ने मुस्लिमों को भगवा पहनने की सलाह दी है। उन्होंने भगवा रंग को प्रकाश का प्रतीक बताया और कहा कि यह रंग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की देन नहीं बल्कि अल्लाह की देन है। उनका कहना है कि अगर मदरसों के मौलाना और छात्र भगवा रंग के वस्त्र पहनेंगे तो उनकी ज़िंदगी में उजाला आ जाएगा।

ख़बर के अनुसार, मोहसिन रज़ा ने चिश्तिया समुदाय के बारे में बताते हुए कहा कि इस सम्प्रदाय के लोग दरगाह आदि पर होते हैं। मुसलमान पहले से ही भगवा पहनते हैं, ख़्वाज़ा मोइनुद्दीन चिश्ती को मानने वाले चिश्तिया सिलसिले के सूफ़ी हमेशा से ही भगवा पहनते हैं। जो चिश्तियाँ हैं उनसे पूछें कि वो भगवा क्यों पहनते हैं? इसलिए मुस्लिमों को भगवा पहनने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। मोहसिन रज़ा ने मुस्लिमों को भगवा पहनने की सलाह देने के साथ-साथ RSS के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की निस्वार्थ सेवा करने वालों के संघ को ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कहते हैं।अगर RSS अच्छा काम कर रहा है तो इससे किसी को कोई परेशानी क्यों होती है? उन्होंने कहा कि RSS ने कोई पर्सनल लॉ बोर्ड नहीं खोल रखा है, वो तो राष्ट्र के सेवक हैं।

ख़बर के अनुसार, मोहसिन रज़ा ने इस बात पर भी चिंता जताई कि समाज में दो मज़हबों के मतभेदों में रंग तक बँट गए। लेकिन जिस मुसलमान के मन में ही मैल हो, उसे भगवा रंग पसंद नहीं आएगा।   

हाल ही में यूपी में एडवाइज़री जारी हुई है कि वे 15 अगस्त को तिरंगा फहराएँ, राष्ट्रगान गाएँ और महापुरुषों के बारे में बताएँ। इसके अलावा एक नए सरकारी नियम के मुताबिक़ अब ग़ैर उर्दू भाषी भी मदरसे में शिक्षक बन सकेंगे। हालाँकि, मदरसे वाले इस नियम को बीजेपी की चाल बता रहे हैं।

राज्य मंत्री ने अपने एक अन्य बयान में मदरसा बोर्ड की एडवाइज़री का समर्थन किया है। राज्य मंत्री मोहसिन रज़ा ने ट्रिपल तलाक़ बिल के पास होने पर प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। इतना ही नहीं उन्होंने इस बिल के पास होने पर पारिवारिक महिलाओं के साथ ख़ुशियाँ भी मनाई थी।

प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न: कार्यक्रम से नदारद रहे राहुल-सोनिया, बधाई के लिए एक ट्वीट तक नहीं

जिस नेता ने एक पार्टी को अपना पाँच दशक दे दिया और हमेशा चट्टान की तरह उसके साथ खड़े रहे, आज उसी पार्टी का नेतृत्व उस नेता से दूरी बना रहा है। प्रणब मुखर्जी हमेशा कॉन्ग्रेस के लिए संकटमोचक बने रहे। हर अच्छी-बुरी स्थिति में पार्टी के लिए निरंतर कार्य करते रहे। हाँ, उन्होंने राजीव गाँधी काल में 5 वर्षों के लिए अलग पार्टी ज़रूर बनाई लेकिन बाद में अपनी पार्टी का कॉन्ग्रेस के साथ विलय कर दिया। देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुँचे और राष्ट्रपति के रूप में भी उनका कार्यकाल यादगार रहा। उससे पहले यूपीए सरकार में उन्होंने रक्षा, वित्त और विदेश जैसे कई अहम मंत्रालय संभाले।

जैसा कि मीडिया में कल गुरुवार (अगस्त 8, 2019) को पूरे दिन छाया रहा- पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, असम के गायक भूपेन हजारिका और आरएसएस के सामाजिक कार्यकर्ता नानाजी देशमुख को भी भारत रत्न से नवाजा गया। हजारिका और देशमुख को यह सम्मान मरणोपरांत मिला। प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भारत रत्न से सम्मानित किया। कार्यक्रम में कई हस्तियाँ मौजूद थीं लेकिन गाँधी परिवार का कोई भी सदस्य नहीं दिखा। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी या पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी इस समारोह से नदारद क्यों थे?

83 वर्षीय प्रणब मुखर्जी देश के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं। दशकों से कई नेताओं द्वारा उनकी योग्यता और संविधान को लेकर उनके ज्ञान की प्रशंसा की जा चुकी है। जून 2018 में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यक्रम में शिरकत की थी, जिसके बाद उनकी अपनी ही पार्टी कुछ लोगों ने उनकी आलोचना भी की। आपको बता दें कि राहुल गाँधी ने प्रणब मुखर्जी को बधाई देने के लिए यहाँ तक कि एक ट्वीट भी नहीं किया है। हाल ही में एनडीटीवी के पत्रकार रवीश कुमार को मैगसेसे अवॉर्ड मिला था, तब राहुल ने उन्हें ट्वीट कर बधाई दी थी।

सोनिया-राहुल ने उस कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया जिसमें प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया। राहुल गाँधी को कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए आमंत्रित भी किया गया था। सवाल तो यह भी पूछा जाएगा कि क्या कॉन्ग्रेस का शीर्ष नेतृत्व आज प्रणब मुखर्जी के योगदानों को भूल गया है? यह भी कहा जाता है कि सोनिया गाँधी को राजनीति में लाने व उनका मागर्दर्शन करने वाले प्रणब मुखर्जी ही थे। कई दलों में मुखर्जी की पैठ व नेताओं से उनके प्रगाढ़ संबंधों का फायदा कॉन्ग्रेस को हमेशा मिला।

तलाक पेपर पर हस्ताक्षर नहीं किया तो मोहम्मद अफजल ने 2 बच्चों सहित बीवी को बनाया बंधक

तीन तलाक के ख़िलाफ़ केंद्र सरकार ने क़ानून तो बना दिया लेकिन जबरन तलाक के मामले अभी भी सामने आ रहे हैं। बिहार में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी व बच्चों को सिर्फ़ इसीलिए बंधक बनाए रखा क्योंकि वह अपनी बीवी से तलाक चाहता था। आरोपित की पत्नी ने तलाक सम्बंधित कागजात पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उसने अपने बीवी-बच्चों को ही बंधक बना लिया। मामला बिदुपुर थाना के अंतर्गत आने वाले दिलावरपुर का है।

पीड़िता ने बताया कि तलाक वाले कागजात पर हस्ताक्षर न करने से बौखलाए उसके पति मोहम्मद अफजल ने मारपीट भी की। उसने पीड़िता को अपने 2 बच्चों सहित कई दिनों तक घर में बंद कर के रखा। पीड़िता ने किसी तरह से इस घटना की सूचना पड़ोसियों के माध्यम से अपनी बहन को दी, जिसके बाद उसे आजाद कराया जा सका। महिला को सदर अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।

पीड़िता ने बताया कि उसका पति पटना की किसी महिला के साथ प्रेम में है और उससे निकाह करना चाहता है। इसीलिए उसने तलाक सम्बंधित दतावेज पर हस्ताक्षर कराने के लिए जबरदस्ती की। पीड़ित महिला ने अपने पति पर प्रताड़ना का आरोप भी लगाया। विरोध किए जाने पर उसके पति मोहम्मद अफजल ने उसे कई दिनों तक प्रताड़ित किया। पीड़िता ने थाने में शिकायत दर्ज कराने की बात भी कही है।

तलाक पेपर पर हस्ताक्षर कराने के लिए पति ने प्रताड़ित किया (वीडियो साभार: लाइव हिंदुस्तान)

पीड़िता की बहन ने आरोप लगाया कि मोहम्मद अफजल और उसका पूरा परिवार मिल कर उसकी बहन को प्रताड़ित करता था। उसने न सिर्फ़ पीड़िता को बंधक बनाया बल्कि 4 दिनों तक खाना-पीना भी नहीं दिया। पुलिस ने कहा कि अभी तक पीड़ित पक्ष की तरफ से कोई मामला नहीं दर्ज कराया गया है और मामला दर्ज होते ही कार्रवाई की जाएगी।

Pak ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्ष को लिखा लेटर, जवाब मिला – No Comments

भारत द्वारा कश्मीर पर लिए फैसले के बाद से पाकिस्तान लगातार संयुक्त राष्ट्र (UN) तक मामले को ले जाने की बात कर रहा था। जिसके संबंध में उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्ष को दखल देने के लिहाज से पत्र भी लिखा, लेकिन UNSC की अध्यक्ष ने पाकिस्तान के इस पत्र पर कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया है।

जानकारी के मुताबिक UNSC की अध्यक्ष ने न्यूयॉर्क में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पाकिस्‍तान द्वारा अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के संबंध में लिखे गए पत्र पर पूछे गए सवाल को गंभीरता से सुनने के बाद ‘नो कमेंट्स’ में जवाब दिया। साथ ही यूएन ने पाकिस्तान को 1972 शिमला समझौते का रास्ता भी दिखाया।

वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने भी गुरुवार (अगस्त 8, 2019) को जम्मू और कश्मीर में मौजूदा स्थिति पर अधिकतम संयम बरतने की अपील की और कश्मीर के समाधान के लिए पाकिस्तान को द्विपक्षीय शिमला समझौते का निर्देश दिया।

इसके अलावा अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी अपने जारी बयान में स्पष्ट किया कि कश्मीर मसले पर अमेरिका की नीतियों में कोई बदलाव नहीं होगा।

मंत्रालय की प्रवक्‍ता मॉर्गन ओर्टागस ने मीडिया से बातचीत में बताया वह कश्मीर मामले पर काफी नजदीक से नजर बनाए हुए हैं। और कई मुद्दों पर वह भारत और पाकिस्तान के साथ काफ़ी नजदीक से काम कर रहे हैं। उनकी मानें तो अमेरिकी विदेश मंत्रालय के उप-सचिव जल्द ही भूटान और भारत का दौरा करेंगे। जहाँ वह दोनों देशों के साथ अमेरिका के संबंधों को और अच्छा बनाने पर गौर करेंगे।

गौरतलब है कि अमेरिका द्वारा अलग-अलग तरीकों से पाकिस्तान की दरख्वास्त खारिज होने के बाद पाकिस्तान अब चीन की शरण भी ले सकता है। क्योंकि इन दिनों विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी चीन के दौरे पर हैं। जहाँ वे चीन के विदेश मंत्री वांग यी और अन्य नेताओं से मुलाकात करेंगे और मुमकिन है कि इस दौरान वे जम्मू-कश्मीर का मुद्दा प्रमुखता से उठाएँगे।

UNSC की अध्यक्ष द्वारा पाकिस्तान पर ‘नो कमेंट्स’ वाली टिप्पणी करने से पहले अमेरिका के दो नेता भी पाकिस्तान को भारत के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने से बचने की बात बोल चुके हैं और उन्हें कह चुके हैं कि वह अपनी सरजमीं पर पल रहे आतंकी गुटों से निबटने पर ध्यान दें।

इन सबके अतिरिक्त बता दें कि अभी तक पाकिस्तान ने जिन देशों ने भी इस मसले पर मदद की गुहार लगाई है, सबसे पाकिस्तान को निशारा ही हाथ लगी है। क्योंकि ज्यादातर देश इसे भारत का आंतरिक मामला ही मानते हैं।

‘जय श्री राम के दुष्परिणाम बताएँ’- बंगाल के स्कूल ने 10वीं की परीक्षा में पूछे अजीब सवाल

पश्चिम बंगाल में ‘जय श्री राम’ का नारा फिर से सुर्ख़ियों में लौट आया है। हुगली जिले के स्कूल में परीक्षा के दौरान छात्रों से इस नारे को लेकर ऐसे अजीब सवाल पूछे गए, जो हैरतअंगेज हैं। दसवीं की परीक्षा के दौरान छात्रों से पूछा गया– “जय श्री राम नारे से समाज को होने वाले दुष्परिणाम बताएँ“। यह स्कूल पोलबा क्षेत्र में स्थित है। हालाँकि, मामला प्रकाश में आने के बाद स्कूल के शिक्षक ने माफ़ी माँग ली है।

इसके अलावा ‘कट मनी’ को लेकर भी सवाल पूछे गए। बता दें कि बंगाल में ‘कट मनी’ एक बहुत बड़ा मसला है, जिसने एक तरह से खुलेआम भ्रष्टाचार को आम बना दिया है। यहाँ सरकारी परियोजनाओं को स्वीकृत करने के एवज में और लाभार्थियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने के एवज में कई तृणमूल नेता फंड में से अपना हिस्सा निकाल लेते हैं, जिसे ‘कट मनी’ नाम दिया गया है। जनता ने कई बार इसे लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया।

स्कूल के टेस्ट में पूछा गया- “कट मनी लौटाने के फायदे बताएँ।” तृणमूल सरकार बार-बार कह चुकी है कि ‘कट मनी’ लेने वाले जनप्रतिनिधियों व नेताओं को आरोपित बना कर उन पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, हुगली के स्कूल द्वारा ‘जय श्री राम’ और ‘कट मनी’ को लेकर पूछे गए सवाल सुर्ख़ियों में हैं।

इससे पहले दक्षिण 24 परगना जिले के विष्णुपुर थाना के अंतर्गत आने वाले बाखराहाट उच्च विद्यालय में बाहरी लोगों ने घुस कर छात्रों की सिर्फ़ इसीलिए पिटाई की थी क्योंकि उन्होंने ‘जय श्री राम’ बोला था। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि पुलिस को मौके पर पहुँच कर लाठीचार्ज करना पड़ा, तब जाकर बाहरी उत्पातियों को भगाया जा सका। इस मामले को लेकर छात्रों व अभिभावकों ने विरोध प्रदर्शन किया था।

मध्य हावड़ा स्थित श्रीरामकृष्ण शिक्षालय से भी एक गंभीर मामला सामने आया था। यहाँ कक्षा एक में पढ़ने वाले एक छोटे बच्चे की सिर्फ़ इसीलिए पिटाई की गई थी क्योंकि उसने ‘जय श्री राम’ कहा था। इस पिटाई के बाद वो बच्चा स्कूल जाने से डरने लगा।

‘अमर्यादित आजम खान को 45 साल पहले निकाल दिया गया था AMU से, लगा था प्रवेश पर आजीवन प्रतिबंध’

अपने विवादित बयानों और हरकतों के कारण सुर्खियाँ में रहने वाले सपा के भू-माफिया नेता आजम खान के नाम पर एक नया खुलासा हुआ है। दरअसल, भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक आकाश सक्सेना ने AMU की अनुशासन समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया है कि आजम खान को उनके अमर्यादित आचरण के कारण अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) से निकाला गया था।

हालाँकि भाजपा नेता के इस दावे पर आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम ने जवाब देने से मना किया है। वे कहते हैं कि वे इस तरह के तुच्छ आरोपों का जवाब देना उचित नहीं समझते। जबकि आकाश सक्सेना ने AMU की अनुशासन समिति की कॉपी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेजी है। साथ ही उनसे माँग की है कि आजम खान की सदस्यता समाप्त की जाए।

भाजपा नेता आकाश का दावा है कि आजम खान रामपुर के लोगों को झूठी कहानी सुनाते हैं कि आपातकाल के आंदोलन में भाग लेने की वजह से उनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी। जबकि हकीकत ये है कि साल 1973-74 में आजम खान को उनके अमर्यादित आचरण के कारण निष्कासित कर दिया गया था।

एएमयू से प्राप्त अनुशासन समिति की रिपोर्ट के आधार पर आकाश ने दावा किया है कि एएमयू के तत्कालीन वाइस चांसलर प्रोफेसर एएम खुसरो के नेतृत्व वाली 9 सदस्यीय कमिटी ने 26 सितंबर 1975 को आजम खान को दोषी करार देते हुए हमेशा के लिए विश्वविद्यालय में उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। उस दौरान आजम खान एलएलएम के छात्र थे।

गौरतलब है कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस 45 साल पुराने मसले पर आजम खान का पक्ष जानने की बहुत कोशिश की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया, जबकि उनके बेटे ने इस सवाल को निरर्थक करार समझते हुए कहा कि वे इन जवालों के जवाब देना उचित नहीं समझते। इन पर कानूनी कार्रवाई होगी।

शत्रु संपत्ति मामले में आजम पर एक और मुकदमा दर्ज

बता दें कि समय के साथ भू-माफिया आजम खान की मुश्किलें कम होने की बजाए बढ़ती जा रही हैं। एक ओर जहाँ भाजपा नेता ने उनकी सदस्यता रद्द करने की माँग की है, वहीं रामपुर शहर कोतवाली में आजम खान समेत 4 के खिलाफ शत्रु संपत्ति के मामले में मुकदमा भी दर्ज हुआ है। इस बार उन पर आरोप है कि रामपुर के तत्कालीन एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (ईओ) ने आजम खान और उनके जौहर विश्वविद्यालय ट्रस्ट को फायदा पहुँचाने के लिए कागजों में हेराफेरी कर गलत नोटिस जारी किया था। आजम खान पर यह मुकदमा नायब तहसीलदार की तरफ से दर्ज कराया गया है।

जानकारी के मुताबिक रामपुर में सींगनखेड़ा इलाके में स्थित शत्रु संपत्ति को पहले इन लोगों ने मिलीभगत से वक्फ में दर्ज कराया और फिर उस संपत्ति के बारे में कब्जा जमा होने का नोटिस जारी कर दिया। जिसके बाद आजम खान ने इसे अपने ट्रस्ट में शामिल कर लिया।

‘J&K में 435 ध्वस्त किए गए मंदिरों का पुनर्निर्माण करे सरकार, न कर सके तो हमें सौंप दे यह कार्य’

अनुच्छेद 370 के अहम प्रावधानों के जाते ही जम्मू कश्मीर विशेष राज्य नहीं रहा और राज्य के पुनर्गठन का भी निर्णय लिया गया। अब जम्मू कश्मीर विधायिका सहित केंद्र शासित प्रदेश होगा वहीं लद्दाख विधायिका रहित केंद्र शासित प्रदेश होगा। 370 के पर कतरे जाने के बाद अब अखिल भारतीय संत समिति और विश्व हिन्दू परिषद सहित तमाम हिन्दू संगठन भी सक्रिय हो गए हैं क्योंकि सवाल राज्य में तोड़ डाले गए सैकड़ों मंदिरों व देवस्थानों का है।

दोनों ही संगठनों ने माँग की है कि जम्मू कश्मीर में ध्वस्त कर दिए गए 435 मंदिरों का पुनर्निर्माण किया जाना चाहिए। संत समाज ने माँग की है कि अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो सरकार यह कार्य उन्हें ही सौंप दे। साथ ही मंदिरों को नुकसान पहुँचाने वाले असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई करने की माँग भी की गई है। हिन्दू संगठनों ने कहा कि कश्मीरी पंडितों के पलायन के बाद वहाँ की कई मंदिरों को तोड़ डाला गया।

दोनों संगठनों ने सरकार को याद दिलाया कि विस्थापितों को राज्य में बसाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। हिन्दू संगठनों ने कहा, “जो परिवार अपनी जन्मभूमि वापस नहीं जाना चाहते, उनकी संपत्ति का सरकार इस्तेमाल करे और ऐसे सभी परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। यह सब सरकार का दायित्व है।” संत समाज ने सरकार को अपने ही देश में शरणार्थी बन कर रह रहे कश्मीरी हिन्दुओं की याद दिलाते हुए उनकी भलाई के लिए काम करने को कहा।

राम मंदिर से सम्बंधित सुनवाई और अनुच्छेद 370 को लेकर शनिवार (अगस्त 10, 2019) को संत समाज की अहम बैठक भी होनी है, जिसमें महत्वपूर्ण मुद्दों व ताज़ा घटनाक्रम पर संगठन अपना रुख साफ़ करेगा। सम्मलेन में आगे की रणनीति भी तय जाएगी। संत समाज ने जनता को आश्वासन दिया कि राम मंदिर पर चल रही नियमित सुनवाई पर उसकी नजरें लगातार बनी हुई हैं।

MP: मुख्तयार खान ने 14 साल के लड़के से चटवाई टॉयलेट सीट, मोबाइल में रिकॉर्ड किया था Video

मध्य प्रदेश के भोपाल में जमीन हड़पने के मामले में पुलिस को आरोपित के मोबाइल से चौंकाने वाली वीडियो मिला। इसमें पुलिस ने पाया कि आरोपित पुलिस के सामने झूठी गवाही देने के लिए न केवल एक नाबालिग लड़के पर दबाव बना रहा है, बल्कि उसे जबरन टॉयलेट सीट चाटने पर मजबूर भी कर कर रहा है। आरोपित की पहचान 35 वर्षीय मुख्तयार खान के रूप में हुई है।

पुलिस ने गुरुवार (अगस्त 8, 2019) को इस वीडियो को देखने के बाद मुख्तयार पर मामला दर्ज कर लिया है। मीडिया खबरों की मानें तो एसएसपी रुचिवर्धन मिश्रा ने बताया कि उन्होंने स्थानीय कोर्ट के आदेश पर खान को जमीन खरीदने के लिए झूठे कागजात इस्तेमाल करने के मामले में गिरफ्तार किया था। लेकिन, जब जाँच के दौरान उसके मोबाइल को जाँचा गया, तो उसमें उन्होंने देखा कि मुख्तयार एक 14 साल के बच्चे पर अत्याचार कर रहा है। साथ ही उससे उसकी जीभ से टॉयलेट सीट साफ़ करवा रहा है।

एसएसपी के बयान के मुताबिक, खान और उसके साथी बच्चे को पुलिस के आगे झूठी गवाही देने के लिए मजबूर  कर रहे थे। वे चाहते थे कि 2 महीने पहले खान के बेटे पर हुए जानलेवा हमले के संबंध में नाबालिग पुलिस के सामने दो अमीर घरों के बच्चों पर भी आरोप लगाए। ताकि बाद में खान उन बच्चों के घरवालों से समझौते के नाम पर पैसे निकलवा सके।

एसएसपी मिश्रा का कहना है कि पुलिस ने खान के बेटे पर हुए हमले के मामले में पहले ही चार लोगों पर आईपीसी धारा 307 (हत्या की कोशिश) के तहत एफआईआर दर्ज कर लिया है। लेकिन अब इस हरकत के मालूम पड़ने के बाद पुलिस ने खान पर पॉक्सो एक्ट और आईपीसी IT एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। मामले में आगे की जाँच जारी है। मुख्यतार पुलिस की हिरासत में है।

‘The Wire’ ने J&K के कई हिस्सों को बताया ‘भारत के कब्जे वाला क्षेत्र’, Pak का भी यही रुख

प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ ने इस बार खुल कर पाकिस्तानी अजेंडे को आगे बढ़ाया है। अनुच्छेद 370 के अहम प्रावधानों को निरस्त कर जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने और राज्य का 2 केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में पुनर्गठन करने वाले सरकार के निर्णय के बाद कई राजनीतिक दलों, नेताओं व मीडिया पोर्टल्स का असली चेहरा पूरी तरह से बेनक़ाब हुआ है। जहाँ अधीर रंजन चौधरी ने संसद में कश्मीर को भारत का आंतरिक मुद्दा मानने से इनकार कर दिया, वहीं संसद के बाहर वे अपने ही बयान से पलट गए।

‘द वायर’ के सिद्धार्थ वरदराजन ने अपने पोर्टल के यूट्यूब चैनल पर पोस्ट की गई एक वीडियो में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने की चर्चा की। इस वीडियो में जम्मू कश्मीर का नक्शा दिखा कर वहाँ की भौगोलिक स्थिति पर प्रकाश डाला गया और सभी क्षेत्रों की स्थिति का विवरण दिया गया। लेकिन, नक़्शे में साफ़ देखा जा सकता है कि श्रीनगर सहित जम्मू कश्मीर के कई अन्य क्षेत्रों को ‘Indian Occupied Part’ यानी ‘भारत के कब्जे वाला भाग’ कहा गया है।

पाकिस्तान भी यही मानता है। पाकिस्तान का रुख है कि जम्मू कश्मीर के इस हिस्से पर ‘भारत का कब्जा’ है। ‘द वायर’ के वीडियो में पाक के कब्जे वाले हिस्से को ‘आजाद कश्मीर’ लिखा गया है। नीचे दिए गए स्क्रीनशॉट में आप देख सकते हैं कि कैसे श्रीनगर सहित अन्य हिस्सों को ‘भारत के कब्जे वाला भाग’ बताया गया है। इस वीडियो में 5:31 से 5:35 तक बताया गया कि जम्मू कश्मीर का श्रीनगर सहित अन्य हिस्सा ‘भारत के कब्जे’ में है। ताज़ा सूचना मिलने तक ‘द वायर’ ने इस वीडियो को ट्रिम कर के इस नक़्शे वाले हिस्से को हटा दिया है। आपको बता दें कि यूट्यूब पर अपलोड करने के बाद भी वीडियो को एडिट किया जा सकता है।

‘द वायर’ के वीडियो का हमारे द्वारा लिया गया स्क्रीनशॉट (नक़्शे ने निचले हिस्से पर नीले घेरे में देखिए’)

आपको बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले ही साफ़ कर दिया है कि जब जम्मू कश्मीर की बात की जाती है तो जम्मू और लद्दाख के अलावा कश्मीर के उन हिस्सों की भी बात की जाती है जो पाकिस्तान और चीन के कब्जे में हैं। जब भारत सरकार का रुख साफ़ है कि पूरा का पूरा जम्मू कश्मीर देश का अभिन्न अंग है और यह हमारा आंतरिक मुद्दा है, ऐसे में इन प्रोपेगेंडा पोर्टल्स द्वारा पाकिस्तानी अजेंडे को आगे बढ़ाना कहाँ तक उचित है?

राम मंदिर के लिए ईंट-बजरी तोड़ने भेजे गए हैं कश्मीर से 72 से 2 कम खूँखार आतंकी: विशेष सूत्र

आर्टिकल-370 के पर कतरे जाने और जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद आज एक नई बात जो सामने आई है वो ये कि 70 खूँखार आतंकियों और पाकिस्तान समर्थित अलगाववादियों की घाटी में ‘क्षमता’ देखते हुए उन्हें आगरा के जेल में शिफ्ट किया गया है।

कश्मीर से सीधा उत्तर प्रदेश भेजे जाने पर दिमाग में सबसे पहले 2 बातें याद आती हैं। पहला, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दूसरा, उत्तर प्रदेश की पुलिस। ये वही पुलिस है जो मात्र ठाँय-ठाँय के भयानक स्वर से ही अपराधियों की हवा टाइट करने के लिए जानी जाती है।

ऑपइंडिया तीखी-मिर्ची सेल की ख़ुफ़िया रिपोर्ट्स की मानें तो इन आतंकियों को उत्तर प्रदेश पुलिस की निगरानी में मात्र ‘ठाँय-ठाँय’ के ही स्वर से जन्नत-ए-फ़िरदौस की पहली यात्रा ट्रायल के तौर पर करवाई जाएगी।

आतंकियों के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस जो करने वाली है, उसका प्रतीकात्मक चित्र –

आतंक की फैक्ट्री हूरों के ख्वाब पर ही चलती है। कुत्ते जैसी मौत के बाद आतंकियों को 72 हूरें नसीब होती हैं कि नहीं, रब जाने। लेकिन, आगरा भेजकर सरकार ने इतना तो इंतजाम कर दिया है कि वे कम से कम ताज का दीदार कर लें। शायद भू-माफिया आजम खान को पहले ही इस दिन का एहसास हो गया था, तभी तो वे कई बार ताजमहल को गिरा देने की गुहार सरकार से लगा चुके हैं।

हालाँकि, नाम न बताने की शर्त पर कुछ ख़ुफ़िया सूत्रों का कहना है कि इन आतंकियों को अयोध्या राम मंदिर निर्माण की ईंट-बजरी ढुलवाने से लेकर लोहा सरिया पिघलाने तक का काम गधों की तरह करवाया जाना है। प्रधानमंत्री मोदी जी का कहना है कि इस बारे में अभी कोई पूर्वसूचना नहीं है लेकिन रामदेव का कहना है कि आखिर हैं तो वो भी राम, कृष्ण और शिव के ही वंशज

आखिर आतंकवादियों को राम मंदिर कार्य में सिर्फ पहाड़ तोड़कर पत्थर-बजरी बनाने तक ही क्यों सीमित रखा जा रहा? कुछ आतंकियों ने इसका जवाब देते हुए कहा- “यह शुभ कार्य मात्र राम-भक्तों के ही हाथों होना चाहिए।”

वहीं, इस कदम से पहले ही उत्तर प्रदेश में जनता ने पंचर टायर जमा करने शुरू कर दिए हैं। उनका मानना है कि सत्तर आतंकियों के उत्तर प्रदेश में आ जाने के बाद प्रदेश में टायरों के पंचर होने का प्रतिशत गिरने की सम्भावनाएँ बढ़ सकती हैं।