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पत्थरबाजी कर तिरंगे को नुकसान: लंदन में आजादी का जश्न मना रहे भारतीयों पर 1000+ पाकिस्तानियों का हमला

15 अगस्त, 2019 को भारत के साथ-साथ लंदन में रहने वाले भारतीयों ने भी स्वतंत्रता दिवस मनाया। मगर, इस दौरान कुछ पाकिस्तानी और पाकस्तानी मूल के ब्रिटिश ने उनके ऊपर हमला कर दिया। दरअसल, लंदन में भारतीय उच्चायोग के सामने भारतीय मूल के लोग शांति से स्वतंत्रता दिवस मना रहे थे, तभी लगभग 1000 की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने उन पर हमला कर दिया।

इस दौरान उन पाकिस्तानी और पाकिस्तानी मूल के अंग्रेज हमलावरों ने बच्चों और महिलाओं को भी नहीं बख्शा। उन्होंने जश्न मना रहे भारतीयों पर पानी, जूस, आलू, टमाटर, अंडे और भी कई अन्य चीजें फेंक कर कर उन्हें नुकसान पहुँचाने की कोशिश की। इन प्रदर्शनकारियों की संख्या 1000 के आस-पास थी, जिन्होंने भारतीय मूल के लोगों के ऊपर हमला किया।

पुलिस ने काफी मुश्किल से मौजूदा परिस्थितियों पर नियंत्रण किया और इस दौरान चार लोगों की गिरफ्तारी की गई। पुलिस ने बताया कि इनकी गिरफ्तारी पुलिस के काम में बाधा पहुँचाने और आपत्तिजनक हथियार रखने के आरोप में की गई।

भाजपा के विदेश मामलों के विभाग प्रमुख डॉ विजय चौथवाले ने इस घटना को निंदनीय बताते हुए ट्वीट किया कि लंदन में भारतीय उच्चायोग के सामने जो हुआ, वह काफी निराशाजनक है। स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए आई महिलाओं और बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किया गया, पाकिस्तानी हमलावरों ने उनके ऊपर अंडे और पानी की बोतलें फेंकी। मगर BBCWorld इसकी रिपोर्टिंग कभी नहीं करेगा।

चौथवाले ने इस पूरे घटना के बारे में बताते हुए लिखा कि भारतीय मूल के लोग बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों से घिरे हुए थे, उन्हें प्रदर्शनकारियों द्वारा शारीरिक हमलों की धमकी दी जा रही थी। उच्चायोग की इमारत पर पत्थर फेंके गए और भारतीय ध्वज को नुकसान पहुँचाया गया। उन्होंने लंदन के मेयर सादिक खान और स्थानीय पुलिस को भी इस तरह की हिंसा को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई करने के लिए कहा है।

साथ ही उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी विदेश मंत्री एस जयशंकर को दे दी गई है, जो स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। चौथवाले ने कहा कि सभी भारतीयों को इमारत के अंदर लाया गया, उन्हें भोजन और पानी की पेशकश की गई और फिर उन्हें सुरक्षित रूप से उनके घर पहुँचाया गया। वहीं, सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए वहाँ पहुँचे भारतीयों और पीआईओ ने कहा कि पुलिस देर से पहुँची, जिसकी वजह से स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।

घर पहुँचने के बाद एक पीड़ित ने बताया कि वहाँं पर पहले तो कुछ पाकिस्तानियों ने प्रदर्शन करना शुरू किया, लेकिन फिर बाद में बहुत सारे आ गए और उन लोगों ने आजादी का जश्न मना रहे भारतीयों को दोनों तरफ से घेर लिया। वहाँ पर चल रहे सांस्कृतिक कार्यक्रम को रोक दिया गया। वो लोग जोर-जोर से नारे लगाने लगे। फिर कुछ देर के बाद उन लोगों ने अंडे, पानी से भरी बोतलें, जूस की बोतलें, आलू, केला और पता नहीं क्या-क्या फेंकना शुरू कर दिया। पीड़ित ने बताया कि एक अंडा उनके कंधे पर आकर लगा और उनके दोस्त के कान पर पानी से भरी बोतल लगी। उन्होंने बताया कि वहाँ की स्थिति काफी भयावह थी। हमलावरों ने उच्चायोग के सारे एंट्री गेट बंद कर दिए थे। तकरीबन 3 घंटे बाद पुलिस उन्हें सुरक्षित उच्चायोग के अंदर ले जाने में सक्षम हुई और वहाँ पर खाने-पीने के लिए दिया गया। पीड़ित का कहना है कि करीब 45 मिनट तक वहाँ रहने के बाद वो वहाँ से सुरक्षित अपने घर पहुँचे।

शादीशुदा आज़ाद अली के साथ 2 बार घर से भागी 19 साल की कंचन, अब दोनों ने की आत्महत्या

उत्तर प्रदेश के कानपुर में अलग-अलग समुदाय से संबंध रखने वाले एक प्रेमी जोड़े के ज़हर खाकर आत्महत्या करने की ख़बर सामने आई है। आत्महत्या करने वालों की पहचान आज़ाद अली (22 वर्षीय) और कंचन (19 वर्षीया) के रूप में हुई है। प्रेमी जोड़े को यह आभास था कि उनके रिश्ते को परिवार कभी मंज़ूर नहीं करेगा, इसकी एक वजह यह भी हो सकती है कि आज़ाद अली पहले से शादीशुदा था।

ख़बर के अनुसार, कुछ समय पहले घर से भागे आज़ाद अली और कंचन के शव कानपुर के पारस गाँव स्थित एक प्राथमिक विद्यालय परिसर में मिले। इन दोनों के पास से एक सुसाइड नोट के अलावा ज़हरीले पदार्थ की खाली शीशी भी बरामद हुई है। 

मामले की जाँच कर रहे अतिरिक्त निरीक्षक (अपराध) नवाब अहमद के मुताबिक़, “इस जोड़े ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि वे इतना बड़ा कदम इसलिए उठा रहे हैं, क्योंकि उनके परिवार ने उनके रिश्ते को स्वीकार नहीं किया है। अली पहले से शादीशुदा था।”

इसके अलावा उन्होंने बताया कि कंचन और अली ने दो महीने पहले अपना घर छोड़ दिया था। इसके बाद कंचन के परिवार वालों ने अली के ख़िलाफ़ अपहरण का मामला दर्ज करवाया था। शिक़ायत के आधार पर अली को गिरफ़्तार कर लिया गया था, लेकिन जल्द ही अली को ज़मानत पर रिहा कर दिया गया क्योंकि कंचन ने उसके पक्ष में गवाही दे दी थी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस घटना के कुछ दिन बीत जाने के बाद दोनों फिर से घर से भाग गए।

3.5 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा की योजना: 2024 तक हर घर में नल के जरिए पानी पहुँचाने का लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को 73वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लालकिले के प्राचीर से राष्ट्रध्वज फहराया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने हर घर में पाइप के जरिए पानी पहुँचाने के लिए जल जीवन मिशन को आगे बढ़ाने तथा आने वाले वर्षों में इस पर तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक रकम खर्च करने का संकल्प जताया। उन्होंने कहा कि अभी तकरीबन 50 फीसदी परिवारों को पाइप के जरिए पानी नहीं मिल पा रहा है।

प्रधानमंत्री ने लालकिले के प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा, “सरकार ने एक विशेष काम की तरफ बल देने का निर्णय लिया है और वह है-हमारे हर घर में जल कैसे पहुँचे? हर घर को जल कैसे मिले? पीने का शुद्ध पानी कैसे मिले? और इसलिए आज मैं लाल किले से घोषणा करता हूँ कि हम आने वाले दिनों में ‘जल-जीवन मिशन’ को आगे ले करके बढ़ेंगे।” उन्होंने कहा कि कितनी भी विपरीत परिस्थितियाँ हों देश का गरीब उसको झेलने की क्षमता रखता है। आजादी के 70 साल हो गए। बहुत सी सरकारों ने अपने-अपने तरीके से कोशिश की है, लेकिन यह भी सच्चाई है कि देश के आधे घर ऐसे हैं जिनके पास पीने का पानी नहीं है। माताओं और बहनों को मटकों को सिर पर लेकर कई किलोमीटर तक चलना पड़ता है।

पीएम मोदी ने कहा, ‘‘मैं लाल किले की प्राचीर से यह घोषणा करना चाहता हूँ कि हर घर में पीने का पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हम जल जीवन मिशन के साथ आगे बढ़ेंगे। केंद्र और राज्य साथ मिलकर इस दिशा में काम करेंगे। 3.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च किये जाएँगे। हमें जल संरक्षण के प्रयासों में अधिक तेजी लानी होगी। पानी के क्षेत्र में पिछले 70 साल में जो काम हुआ, 5 सालों में उससे चार गुना काम करना है। केंद्र और राज्य साथ मिलकर इस दिशा में काम करेंगे।” बता दें कि, सरकार ने 2024 तक हर घर में नल के जरिए पानी पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।

प्रधानमंत्री ने जल जीवन मिशन की तुलना स्वच्छ भारत से करते हुए कहा कि जल संरक्षण आंदोलन जमीनी स्तर पर होना चाहिए। जल संरक्षण पर यह अभियान केवल एक सरकारी पहल नहीं होना चाहिए। यह स्वच्छ भारत अभियान की तरह एक जन आंदोलन बन जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमें इस विश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए कि अगले 5 वर्षों में हमें पिछले 70 वर्षों में जल संरक्षण के लिए और पानी के स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए चार गुना से अधिक काम करना है। हम अब और इंतजार नहीं कर सकते।”

‘आज मैंने गोमांस खाकर पाकिस्तान की खु़शी में भाग लिया’ – रेहाना सुल्ताना के ख़िलाफ़ FIR दर्ज

असम पुलिस ने कथित तौर पर गोमांस के सेवन को लेकर की गई फेसबुक पोस्ट के लिए बुधवार (14 अगस्त) को गुवाहाटी विश्वविद्यालय की एक स्कॉलर के ख़िलाफ़ FIR दर्ज की है। यह पोस्ट दो साल पहले की गई थी। हालाँकि, इस पोस्ट को तुरंत हटा लिया गया था, बावजूद इसके यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी और अभी फिर से चर्चा में है।

ख़बर के अनुसार, रेहाना सुल्ताना (28 वर्ष) के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 153 A और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया है। डीसीपी, गुवाहाटी पश्चिम, केके चौधरी के अनुसार, “हमने इस पर स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया है। यह एक पुरानी पोस्ट है लेकिन हमने इस पर संज्ञान लिया क्योंकि यह फिर से सामने आया है।”

सुल्ताना की मूल पोस्ट, जो जून 2017 में असमिया में लिखी गई थी, उसके अनुवाद के अनुसार,

“आज मैंने गोमांस खाकर पाकिस्तान की खु़शी में भाग लिया। मैं जो खाती हूँ वह मेरी स्वाद का विकल्प है। गोमांस शब्द पढ़ने पर, कृपया न कोई षड्यंत्र शुरू करें और न अपने व्यवहार का परिचय दें।”

द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए सुल्ताना ने कहा, “एक विवाद चल रहा है कि मैंने इस बकरीद पर यह पोस्ट लिखी है। लेकिन मैंने इसे दो साल पहले लिखा था, जून 2017 में इसे डिलीट कर दिया था, लेकिन अब मेरी टिप्पणी को ग़लत तरीके से पेश किया जा रहा है और लोगों ने मुझे निशाना बनाना शुरू कर दिया है। 19 जून, 2017 को, मैंने एक स्पष्टीकरण भी लिखा था, जिसमें कहा गया था कि मेरी व्यंग्यात्मक पोस्ट का ग़लत अर्थ निकाला गया।”

यह पूछे जाने पर कि उन्होंने टिप्पणी क्यों पोस्ट की, सुल्ताना ने कहा,

“भारत-पाकिस्तान का मैच था और भारत बुरी तरह से खेला था। मैंने अपनी व्यथा व्यक्त करने के लिए उस व्यंग्यपूर्ण पोस्ट को लिखा था जिसमें भारत हार गया था और विराट कोहली जीरो पर आउट हो गए थे। उसी समय गोमांस खाने के बारे में विवाद और लोगों पर गोमांस खाने के लिए हमला किया जा रहा था, उस समय देश भर में ख़बरें बन रही थीं, और मैंने तब इसी संदर्भ में इसे लिखा था। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि कैसे पोस्ट को संदर्भ से परे देखकर एक विवाद का रूप देकर मामला दर्ज कर लिया गया।”

ना कोई निष्कर्ष, ना ही रखा जाएगा कोई रिकॉर्ड… कश्मीर पर UNSC में होगी सिर्फ अनौपचारिक बैठक

चीन की दखल के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आज (अगस्त 16, 2019) कश्मीर मामले पर सदस्य देशों की एक बंद कमरे में एक अनौपचारिक बैठक होने वाली है। जानकारी के मुताबिक इस बैठक में चीन ने जम्मू-कश्मीर मसले पर पाकिस्तान की शिकायतों को सुनी जाने की बात कही है।

उल्लेखनीय है कि केवल चीन के हस्तक्षेप के कारण आज कश्मीर मामले पर UNSC को अनौपचारिक तौर पर गौर करना पड़ रहा है, नहीं तो इससे पहले पाकिस्तान के बहुत कहने पर भी UNSC की अध्यक्ष ने इस पर टिप्पणी करने से साफ़ मना कर दिया था। आज 50 सालों बाद वहाँ इस मामले पर बंद कमरे में कोई बैठक होगी। आखिरी बार यूएनएससी में इस मसले पर 1971 में बैठक हुई थी। भारतीय समय के अनुसार ये बैठक शाम के 7:30 बजे बंद कमरे में होनी है।

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के मुताबिक इस बैठक के बारे में बताते हुए एक राजनियक ने बताया कि इस बैठक में कश्मीर मसले पर विचारों का आदान-प्रदान होगा। जिसमें आधिकारिक रूप से किसी की बात का कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा और न ही उन बातों का कोई रिकॉर्ड रखा जाएगा। साथ ही इस बैठक में हुई कोई बातचीत सार्वजनिक नहीं की जाएगी, क्योंकि ये परामर्श बैठक सिर्फ़ इस मसले पर सदस्यों को बोलने के लिहाज से प्रोत्साहित करने के लिए है। इस बंद कमरे की बैठक में UNSC के 15 सदस्य देशों के प्रतिनिधि मौजूद होंगे।

गौरतलब है कि अपने बीजिंग दौरे से तुरंत लौटने के बाद बीते मंगलवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने UNSC के सदस्यों को कश्मीर मसले पर आपात बैठक बुलाने के लिए चिट्ठी लिखी थी, जिसके बाद पाकिस्तान की गुहार पर चीन ने भी सुरक्षा परिषद के सदस्यों की बैठक बुलाने की माँग की थी। चीन ने इस दौरान अपनी ओर से पोलैंड को आधिकारिक तौर पर खत भी लिखा था। क्योंकि पोलैंड इस महीने UNSC का काउंसिल चेयरमैन है, जिस कारण इस बैठक के लिए उसकी मंजूरी जरूरी थी।

कल तक UNSC में होने वाली इस बैठक को लेकर केवल कयास लगाए जा रहे थे, पर अब खबर आ गई है कि इस मामले पर कोई आधिकारिक बैठक नहीं होगी, लेकिन चाइना के पत्र के मद्देनजर बंद कमरे की बैठक अनौपचारिक बैठक होगी।

बता दें कि एक ओर जहाँ पाकिस्तान अपनी कश्मीर मामले पर आधिकारिक रूप से आपात बैठक बुलाने की हर मुमकिन कोशिश कर रहा था, वहीं संयुक्त राष्ट्र के सदस्य रूस ने साफ कहा था कि वो इसमें तभी शामिल होंगे जब ये परामर्श बंद कमरे में होगा। जबकि मॉस्को का कहना है कि इस विवाद का हल केवल द्विपक्षीय बातचीत से हो सकता है, इसके अलावा इस मसले का कोई हल नहीं है।

वीरगति प्राप्त भाई की बंदूक को राखी बाँधकर बहन ने मनाया रक्षाबंधन, बलिदान को किया नमन?

देशभर में रक्षाबंधन के त्योहार को बड़ी धूमधाम से मनाया गया। जहाँ एक तरफ, बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा का सूत्र बाँधकर उनके मंगल की कामना करती दिखीं, वहीं एक बहन ऐसी भी है जिसने अपने भाई की बंदूक को राखी बाँधकर उसके समर्पण को नमन किया। दरअसल, पिछले साल (अक्टूबर-2018) दंतेवाड़ा में एक नक्सली हमले में असिस्टेंट कॉन्स्टेबल राकेश कौशल वीरगति को प्राप्त हो गए थे।

अरनपुर इलाक़े में हुए इस हमले में दो पुलिसकर्मी और दूरदर्शन के एक कैमरापर्सन की भी मौत हो गई थी।

राकेश कौशल की बहन कॉन्स्टेबल कविता कौशल को उनके भाई की जगह नौकरी मिली है। सर्विस जॉइन करने पर उन्हें वही बंदूक दी गई है, जो उनके भाई को अलॉट की गई थी।

गुरुवार (15 अगस्त) को कविता ने अपने भाई की तस्वीर के सामने बंदूक रखकर उसे राखी बाँधी। उन्हेंने कहा, “मुझे अपने भाई की जगह नौकरी मिली है। मैंने विभाग से अनुरोध किया था कि मुझे मेरे भाई की बंदूक ही दी जाए। नक्सली कायर हैं। मैं दंतेश्वरी फाइटर टीम को जॉइन करना चाहूँगी और अपने भाई की मौत का बदला लेना चाहूँगी।”

ग़ौरतलब है कि झारखंड के खूंटी ज़िले में 9 अगस्त को सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक नक्सली को ढेर कर दिया गया था। गुदड़ी के थोलकोबरा वन क्षेत्र में हुई इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने काफ़ी असलाह भी बरामद किया था। ख़बर के अनुसार, एक डबल बैरल बंदूक, 315 बोर राइफ, एके-47 मैगजीन समेत कई और हथियार बरामद किए गए थे। इसके अलावा मौके से दर्जनों मोबाइल फोन भी बरामद किए गए थे।

जल-संकट, प्लास्टिक जैसी कई समस्याएँ हल हो गईं होतीं, अगर हम अपना देसी ज्ञान सहेज पाते

युवक पढ़ा-लिखा था, किसान नहीं था। जिस उम्र में खेती सीखी जाती है, उस उम्र में काम करने पर संभवतः लोगों को आपत्ति होती। इसलिए जिस उम्र में सीखना चाहिए था, उस उम्र में उसने खेती सीखी नहीं थी। बिना सीखे, पहली बार पेड़ लगाने की कोशिश के अपने फायदे-नुकसान भी हैं। जो भी हो, नौजवान ने थोड़ी पूछताछ से यह तो पता कर ही लिया कि पेड़ लगाने के लिए बरसात से ठीक पहले का मौसम अच्छा रहेगा। बारिश होगी तो रोज-रोज कई छोटे पौधों में पानी नहीं देना होगा। चुनाँचे, नौजवान ने जुलाई के महीने में पौधे लगा दिए।

अफ़सोस! उस वर्ष बारिश हर साल जैसी नहीं हुई। वैसे तो ज्यादा हो जाने पर बाढ़ भी एक समस्या होती है, लेकिन उस वर्ष बारिश न होने के कारण पौधों के सूख जाने का खतरा बन आया। अब समस्या थी कि युवक खुद ही पेड़ लगाता और उनका रखरखाव करता था, यानी मजदूर रखकर पौधों में पानी डलवाने लायक आर्थिक स्रोत नहीं थे। हर रोज एक ही व्यक्ति हर पौधे में जुलाई के महीने में पानी डाल सके, इसके लिए पचास बाल्टी पानी भर कर कहीं रख लेना भी मुमकिन नहीं था।

इन समस्याओं के बीच भी नौजवान का भाग्य कुछ ठीक-ठाक था और उसके दादाजी जीवित थे। तो नौजवान अपने दादाजी के पास पहुंचा और पानी की कमी से पौधों के सूख जाने के अपने डर के बारे में बताया। मजदूर रखना सच में महंगा था, मगर दादाजी ने बताया कि घड़े खरीदना उतना महंगा नहीं। हर पौधे के बगल में एक गड्ढा कर के घड़े को मिट्टी में दबा देना था। घड़े की पेंदी में एक छोटा-सा छेद होता। अब जब इस घड़े में पानी डाला जाता तो वो थोड़ा-थोड़ा करके जमीन में रिसता रहता।

इस साधारण से तरीके से पानी डालने की मेहनत करीब एक-तिहाई हो जाती थी। घड़े में पानी करीब तीन दिन रहता था। सूखा पड़ा, लेकिन पौधे बच गए। ये नुस्खा बिलकुल साधारण, परम्परागत नुस्खा है। तथाकथित “विज्ञानी सोच” और शोध के नाम पर ऐसे देसी ज्ञान को भुला दिया गया। पिछले सत्तर वर्षों में ऐसी ज्यादातर जानकारी खो भी गयी होगी, क्योंकि जो लोग जानते थे उनसे किसी ने उनके जीवित रहते पूछा ही नहीं होगा। लिखने की बजाय बोलकर सीखने-सिखाने वाले देश से पारंपरिक ज्ञान जाता रहा।

वृक्षारोपण के साथ साथ ड्रिप-फार्मिंग का यह तरीका सिखाया जाना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पेड़ लगाने के साथ साथ इसमें प्लास्टिक कचरे का प्रबंधन भी शामिल हो सकता है। इस तकनीक के बारे में प्रोफेसर एस राजेश्वरण बताते हैं कि इसका दूसरा फायदा यह है कि इसमें अलग से कुछ खर्च नहीं करना पड़ता। कचरे की मदद से और कम मेहनत में इस तरीके से पौधों को लगातार पानी मिलना भी सुनिश्चित हो जाता है। हर पौधे के साथ दो लीटर का एक बोतल भी लगाई जा सकती है, जिसका एक सिरा पानी डालने के लिए खुला हो और दूसरे सिरे पर छेद करके पर रुई लगा दी गई हो ताकि थोड़ा-थोड़ा रिसकर पानी लगातार पौधे को मिलता रहे।

विकास प्रबंधन संस्थान (डीएमआई, पटना) के प्रोफेसर एस राजेश्वरण ने हाल ही में छात्रों को वृक्षारोपण कराते समय इस तकनीक की जानकारी दी। ऊपर की तरफ से भर देने पर इस तकनीक से दो से तीन दिन तक पौधों को पानी मिलता रहता है। एक बार इस्तेमाल करने के बाद फेंक दी जाने वाली बोतलों का इस तरह से दोबारा इस्तेमाल भी होता है। अब जबकि जल संकट एक खुली समस्या है, किसी आने वाले समय का भयावह फ़िल्मी दृश्य नहीं, तब ये तरीके और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। हमें अपने परंपरागत तरीकों को वापस नई तकनीकों से जोड़ने की भी जरूरत है।

आज प्रधानमंत्री ने लाल किले से जल की चर्चा करके सरकार की आगे की योजनाओं के बारे में भी इशारा कर दिया है। हम इशारों से कितना सीखते हैं और जनता अपनी चुनी हुई सरकार के साथ मिलकर योजनाओं को कितनी मजबूती से जमीन पर उतारती है, यह अब हम पर निर्भर होगा।

पाकिस्तान ने किया जम्मू-कश्मीर में संघर्ष-विराम का उल्लंघन, गँवाए 3 सैनिक

पाकिस्तान ने आज (15 अगस्त) नियंत्रण रेखा (LoC) के पास विभिन्न स्थानों पर गोलीबारी कर संघर्ष-विराम का उल्लंघन किया। भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई में उसे अपने तीन सैनिकों से भी हाथ धोना पड़ा है। पाकिस्तान ने 5 भारतीय सैनिकों को भी मारने का दावा किया है, लेकिन मीडिया खबरों के अनुसार सेना ने इस दावे को नकार दिया है।

कई सेक्टरों पर हुआ हमला

आ रही जानकारी के मुताबिक पाकिस्तानी हमला तीन सेक्टरों पर हुआ है। जिन सेक्टरों पर हमला हुआ है, वे हैं उरी, राजौरी और नांगी टेकरी इलाके का केजी (कृष्ण घाटी) सेक्टर। ज़ी न्यूज़ की खबर के मुताबिक हमला बिना किसी उकसावे के पाकिस्तान की तरफ से शुरू हुआ था। सेना की जवाबी कार्रवाई में तीन पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की खबर है।

‘इन्हें कायदे से जवाब दिया जाना चाहिए’

समाचार एजेंसी ANI ने स्थानीय कश्मीरी नागरिक मोहम्मद मुज़िर मुग़ल के हवाले से कहा कि अगर स्वतंत्रता दिवस पर ऐसा हमला होता है, तो प्रधानमंत्री मोदी को इसका कायदे से जवाब देना चाहिए। “मैं झंडारोहण समारोह में था। समारोह से लौटते हुए मैंने पाकिस्तानी छोर से गोलियों की आवाज़ सुनी।” ANI से ही बात करते हुए नांगी टेकरी के एक दूसरे निवासी चमनलाल ने कहा कि पाकिस्तान को यह समझना होगा कि यह पुराना हिंदुस्तान नहीं है जो ऐसी हरकतों पर चुप रहेगा।

तीन दिन में दूसरा हमला

पिछले तीन दिन के भीतर पाकिस्तान का यह सीमा पर दूसरा दुःसाहस है। इसके पहले 13-14 अगस्त, 2019 की रात भी पाकिस्तान ने जिहादियों की घुसपैठ कराने की कोशिश की थी, जिसे हिंदुस्तान की सेना ने नाकाम कर दिया। मीडिया सूत्रों के मुताबिक घुसपैठ में पाकिस्तानी सेना ने भी सहयोग किया था। अनुच्छेद 370 हटाकर हिंदुस्तान के जम्मू-कश्मीर का विलय पूर्ण कर लेने और इसकी मुख़ालफ़त में दुनिया में अलग-थलग पड़ जाने से पाकिस्तान की हताशा को देखते हुए सरकार को यह आदेश पहले से था, इसीलिए 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर में संविधान पूरी तरह लागू करने के पहले ही सरकार ने वहाँ हज़ारों की तादाद में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी थी।

मेरे भी वालिद हिंदुस्तान में पैदा हुए-मरे, और पाकिस्तान का ‘बाप’ भी: अदनान सामी की खरी-खरी

पाकिस्तानी मूल के हिंदुस्तानी गायक अदनान सामी ने ट्विटर पर एक पाकिस्तानी ट्रोल की बोलती उस समय बंद कर दी, जब वह उन्हें हिंदुस्तान का स्वतन्त्रता दिवस को मनाने और पाकिस्तान को आईना दिखाने पर ट्रोल करने की कोशिश कर रहा था। सामी ने पाकिस्तान मूवमेंट के ‘बाप’ माने जाने वाले शायर अल्लामा इक़बाल के खुद हिंदुस्तानी के रूप में पैदा होने और मरने का ज़िक्र किया था, तो इसपर उन्हें ट्रोल करने की कोशिश हुई थी।

हिंदुस्तानी मरे थे ‘सारे जहाँ से अच्छा’ के रचयिता

किसी समय हिंदुस्तान की शान में ‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा’ लिखने वाले सर मोहम्मद ‘अल्लामा’ इक़बाल पाकिस्तान मूवमेंट के जनक माने जाते हैं। अदनान सामी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उनकी इन्हीं पंक्तियों में ट्विटर पर शेयर किया था, इस तथ्य के साथ कि पाकिस्तान के ‘बौद्धिक पिता’ माने जाने वाले इक़बाल तकनीकी रूप से हिंदुस्तानी ही रहे, सारी उम्र। इक़बाल की मौत देश के विभाजन से 9 साल पहले 1938 में हो गई थी। उनका जन्म भी हिंदुस्तान में ही हुआ था। अदनान सामी ने इक़बाल की तस्वीर के साथ तिरंगा भी लगाया था।

इस ट्वीट से बिफ़रे पाकिस्तानी ट्रोल मुहम्मद शफ़ीक़ ने अदनान से पूछा कि उनके वालिद कहाँ पैदा हुए और मरे थे?

अदनान ने शफ़ीक़ के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए जवाब दिया कि उनके वालिद हिंदुस्तान में ही 1942 में पैदा हुए थे, और 2009 में हिंदुस्तान में ही उन्होंने अंतिम साँस ली।

‘जय हिन्द’, ‘भारत माता की जय’: बलूचिस्तानी आज़ादी के परवानों को हिंदुस्तान से आस

बलूचिस्तान की आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे क्रांतिकारियों और सेनानियों ने पाकिस्तान के चंगुल से आज़ाद होने के लिए हिंदुस्तान से मदद माँगी है। हमारे 73वें स्वतंत्रता दिवस पर बलूचिस्तानी एक्टिविस्ट अट्टा बलोच ने बधाई देते हुए कहा कि बलूचिस्तानी अपनी आज़ादी की लड़ाई में हिंदुस्तानियों द्वारा दिए जा रहे समर्थन के लिए शुक्रगुज़ार हैं। “हम चाहते हैं कि वे (हिंदुस्तानी) एक आज़ाद बलूचिस्तान के लिए आवाज़ उठाएँ। हमें उनका समर्थन चाहिए। शुक्रिया और जय हिन्द।”

एक दूसरे बलूच कार्यकर्ता अशरफ़ शेरजान ने हिंदुस्तान से UN समेत सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बलूचिस्तान की आवाज़ उठाने की गुज़ारिश की है। “बलूचिस्तान के लोगों पर पाकिस्तान और उसकी सेना के हाथों अत्याचार हो रहा है, उनका सामूहिक हत्याकाण्ड हो रहा है। बलूचिस्तान का खून बहाया जा रहा है।” हिंदुस्तान से बेआवाज़ों की आवाज़ बनने की याचना करते हुए शेरजान ने अपनी अपील का अंत “भारत माता की जय” से किया।

पाकिस्तान के स्वतन्त्रता दिवस (14 अगस्त) के दिन उसे शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था जब ट्विटर पर बलूचिस्तान के समर्थन में BalochistanSolidarityDay और 14thAugustBlackDay ट्रेंड करने लगा था। इन ट्रेंडों पर तकरीबन क्रमशः 100,000 और 54,000 ट्वीट्स हुए। पाकिस्तान द्वारा बलूचिस्तान में किए जा रहे जघन्य मानवाधिकार हनन के चलते उसे पहले भी कई बार शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है।

आज़ाद होते ही बलूचिस्तान को बनाया गुलाम

विभाजन के पहले बलूचिस्तान के 4 हिस्से होते थे- कलात, लसबेला, खारन और मकरान। बाकी तीनों हिस्से कलात के विभिन्न तरीकों से अधीन थे। बलूचिस्तानियों का दावा है कि बलूचिस्तान को अंग्रेज़ों से आज़ादी हिंदुस्तान-पाकिस्तान के पहले 11 अगस्त, 1947 को ही मिल गई थी।

पहले तो पाकिस्तान ने ब्रिटिश सरकार से अपनी सौदेबाज़ी में कलात को हिंदुस्तान से अलग एक सम्प्रभु, आज़ाद राज्य के रूप में मान्यता दे दी। उसके बाद जिन्ना ने बलूचिस्तान के पाकिस्तान में विलय का एकतरफ़ा निर्णय ले लिया। बलूचिस्तान की असेम्बली ने हालाँकि पाकिस्तान के साथ मिलने के प्रस्ताव को सिरे से नकार दिया था। इस विषय, और बलूचिस्तान से जुड़े अन्य विषयों पर, ऑपइंडिया की बलूचिस्तान लिबरेशन फ़्रंट के डॉ. अल्लाह नज़र के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत आप यहाँ पढ़ सकते हैं।