एक चौंकाने वाली घटना में, असम के ढेकियाजुली में एक मंदिर में एक लड़की के साथ बलात्कार की घटना सामने आई है। यह घटना बुधवार (14 अगस्त) को ढेकुकुली के सिंगोरी क्षेत्र में विश्वकर्मा मंदिर के परिसर में हुई। आरोपित कुतुबुद्दीन अहमद को पुलिस ने पकड़ लिया है।
ख़बर के अनुसार, कुतुबुद्दीन पास के मिसामारी के एराबारी से लड़की को किसी बहाने से प्राचीन मंदिर के परिसर में लाया। वहाँ उसने उसे कुछ नशीली दवा खिला दी और फिर कई बार उसका बलात्कार किया। लेकिन, कुतुबुद्दीन की इस हरक़त को मंदिर परिसर की देखरेख करने वालों ने दो लोगों ने देख लिया। उन्होंने कुतुबुद्दीन को पकड़ लिया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। देखरेख करने वालों ने कुतुबुद्दीन की इस शर्मनाक़ हरक़त को सबूत के तौर पर रिकॉर्ड भी किया है।
पीड़िता ने भी पुलिस को घटना की पूरी जानकारी देत हुए आरोपित के ख़िलाफ़ शिक़ायत दर्ज कराई है। FIR के आधार पर, कुतुबुद्दीन अहमद को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है और मामले की जाँच शुरू कर दी है।
आपको बता दें कि सिंगोरी पहाड़ी एक प्राचीन विश्वकर्मा मंदिर के खंडहर का स्थान है, जो 11वीं-12वीं शताब्दी का है। यह असम में सोनितपुर ज़िले में सिंगोरी टी एस्टेट के अंदर स्थित है।
बांग्लादेश की राजधानी ढाका का धनमंडी। धनमंडी के रोड नंबर 32 का हाउस नंबर 677। 15 अगस्त 1975 को इस घर में एक के बाद एक 20 लोगों की हत्या कर दी गई।
इस नरसंहार से पहले 1971 में धनमंडी के इस घर को पाकिस्तानी फौजियों ने घेर रखा था। एक परिवार करीब नौ महीने से घर में बंधक बना हुआ था। किसी भी वक्त उस परिवार के हर सदस्य मौत के घाट उतारे जा सकते थे। लेकिन एक भारतीय कर्नल ने अपने तीन जवानों के साथ मिलकर उस परिवार को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
यह परिवार था बांग्लादेश के संस्थापक, उसके पहले राष्ट्रपति ‘बंगबंधु’ शेख मुजीब-उररहमान का। बंगबंधु के साथ उनके परिवार को बचाने वाले भारतीय कर्नल थे अशोक तारा।
लेकिन, 15 अगस्त 1975 को बांग्लादेश की सेना के ही कुछ बागी अफसरों ने बंगबंधु सहित उनके पूरे परिवार को मौत के घाट उतार दिया। केवल उनकी दो बेटियॉं बांग्लादेश की मौजूदा प्रधानमंत्री शेख हसीना और शेख रेहाना जीवित बचीं, क्योंकि दोनों उस वक्त जर्मनी में थीं।
बताते हैं कि भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ को इसका अंदेशा पहले से ही था। हत्या से सात महीने पहले दिसंबर 1974 में रॉ के संस्थापक आरएन काव ने शेख मुजीब से मुलाकात कर उन्हें आगाह किया था। लेकिन बंगबंधु का जवाब था, “ये मेरे बच्चे हैं मुझे नुकसान नहीं पहुँचाएँगे।”
अशोक रैना की किताब ‘इनसाइड रॉ’ के मुताबिक आरएन काव ने उस वक्त शेख मुजीब से कहा था कि उनके पास पुख्ता सूचनाएँ हैं और वे इससे जुड़े विवरण उन्हें भेजेंगे। मार्च 1975 में रॉ के एक शीर्ष अधिकारी ने ढाका पहुॅंच कर शेख मुजीब को इस साजिश में शामिल अधिकारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। लेकिन, वे फिर भी नहीं माने।
सलील त्रिपाठी ने अपनी किताब ‘द कर्नल हू वुड नॉट रिपेंट’ में बताया है कि बागी अधिकारियों के अपने मिशन पर निकलने के बावजूद शेख मुजीब को अंदाजा तक नहीं था कि उनकी हत्या का मिशन शुरू हो चुका है। बांग्लादेश के सेनाध्यक्ष जनरल शफीउल्ला को सेना की दो बटालियन के बिना किसी आदेश के शेख मुजीब के घर की ओर बढ़ने की सूचना मिली।
उन्होंने शेख मुजीब को फोन मिलाया, लेकिन लाइन व्यस्त थी। बहुत कोशिशों के बाद उनका शेख मुजीब से संपर्क हुआ। शेख मुजीब गुस्से में बोले, “शफीउल्ला तोमार फोर्स आमार बाड़ी अटैक करोछे। तुमि जल्दी फोर्स पठाओ (तुम्हारे फोर्स ने मेरे घर पर हमला किया है, जल्दी सेना भेजो)।” इसी दौरान पीछे से गोलियों की आवाज सुनाई पड़ी और पूरे परिवार का सफाया हो गया।
पूरे परिवार का सफाया (साभार: डेली स्टार)
एंथनी मैस्करेनहास अपनी किताब ‘बांग्लादेश ए लेगसी ऑफ ब्लड’ में इस घटना का जिक्र करते हुए लिखते हैं, “शेख मुजीब को देखते ही मोहिउद्दीन नर्वस हो गया। उसके मुॅंह से केवल इतना ही निकला, सर आपनी आशुन (सर आप आइए)। मुजीब ने चिल्ला कर कहा-क्या चाहते हो? क्या तुम मुझे मारने आए हो? भूल जाओ। पाकिस्तान की सेना ऐसा नहीं कर पाई। तुम किस खेत की मूली हो?”
तभी स्टेनगन लिए मेजर नूर ने प्रवेश किया और मोहिउद्दीन को धक्का देते हुए पूरी स्टेनगन खाली कर दी। मुजीब मुँह के बल गिरे। उनका पसंदीदा पाइप उनके हाथ में था।
‘द कर्नल हू वुड नॉट रिपेंट’ के मुताबिक एक नौकर शेख मुजीब को गोली लगने की खबर दौड़कर उनकी बीवी को देता है। पीछे से सैनिक भी वहॉं आ धमके और गोली चलानी शुरू कर दी। देखते-देखते सारे लोग मारे गए। तभी एक जीप शेख मुजीब के घर के सामने आकर रुकी और उसमें से मेजर फारूक रहमान बाहर निकला। मेजर हुदा ने उसके कान में फुसफुसाकर कहा ‘सब खत्म हो गए।’
2010 में कर्नल फारूक रहमान, मेजर हुदा सहित पॉंच हत्यारों को ढाका की केंद्रीय जेल में फॉंसी दी गई। सात हत्यारे अब भी फरार हैं। बांग्लादेश के इतिहास का ये सबसे लंबा चला मुकदमा है। अरसे तक इन हत्यारों पर मुकदमा ही नहीं चला। 1996 में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया।
73वें स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर देश के लिए वीरता और साहस का परिचय देने वाले वीर जवानों को पुरस्कार को सम्मानित किया जाएगा। जहाँ एक तरफ एयरफोर्स के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को वीर चक्र से सम्मानित किया जाएगा। तो वहीं, भारतीय वायुसेना की ही स्क्वैड्रन लीडर मिंटी अग्रवाल को युद्ध सेवा मेडल देने का ऐलान किया गया है। इसके अलावा केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के डेप्युटी कमांडेंट हर्षपाल सिंह को भी उनकी वीरता के लिए कीर्ति चक्र से सम्मानित किया जाएगा।
CRPF में शामिल होने के बाद से 38 वर्षीय हर्षपाल सिंह का यह पाँचवा वीरता पुरस्कार है। हर्षपाल और उनकी टीम ने जम्मू में झज्जर – कोटली में पिछले सितंबर में तीन आतंकवादियों का ख़ात्मा किया था। मुठभेड़ में गोली और छर्रे लगने से वो गंभीर रूप से घायल हो गए थे, पर वो आतंकियों के सामने मज़बूती से डटे रहे और उन्हें मार गिराने तक पीछे नहीं हटे।
कीर्ति चक्र मिलने से खुश हर्षपाल सिंह ने कहा, “इस पुरस्कार को पाकर मैं काफी गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। मैं अपनी बटालियन और संगठन के लिए भी अच्छा महसूस कर रहा हूँ। ऑपरेशन के दौरान जिन वीर साथियों ने मेरा साथ दिया और मेरे निर्णय के साथ खड़े रहे, मैं उन सभी को धन्यवाद देना चाहता हूँ।”
Deputy Commandant, CRPF, Harshpal Singh on being awarded the #KirtiChakra : I am elated. I am also feeling good for my Battalion, my organisation. I would like to thank all who supported me (at the time of operation) and stood by me after agreeing with my decision. #Chhattisgarhpic.twitter.com/xPPRjkuMmj
हर्षपाल सिंह को वीरता के लिए तीन पुलिस पदक और वीरता के लिए झारखंड के मुख्यमंत्री के पुलिस पदक से सम्मानित किया गया है। महानिदेशक, CRPF आरआर भटनागर ने कहा, “यह अत्यंत दुर्लभ है। हमें बेहद गर्व है। यह एक बहुत अच्छा सम्मान है।”
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में तैनात डिप्टी कमांडेंट हर्षपाल ने 31 मई 2008 को वीरता के लिए अपना पहला पुलिस पदक प्राप्त किया था। जिस ऑपरेशन के लिए उन्हें यह पुलिस पदक मिला था, वह झारखंड के खुंटी जिले के चुंदरमांडू में हुआ था। यहाँ उन्हें खुंटी में वरिष्ठ माओवादी नेताओं की बैठक के बारे में खुफिया जानकारी मिली थी। और इसी जानकारी के आधार पर ऑपरेशन चलाया गया था।
बता दें कि राष्ट्रपति एवं सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर रामनाथ कोविंद ने सशस्त्र सेनाओं एवं अर्द्धसैन्य बल के जवानों के लिए 132 पुरस्कार अनुमोदित किए हैं। इनमें से दो कीर्ति चक्र, एक वीर चक्र, 14 शौर्य चक्र, आठ बार टू सेना पदक (शौर्य), 90 सेना पदक (शौर्य) 5 नौसेना पदक (शौर्य), 7 वायु सेना पदक (शौर्य) और 5 युद्ध सेना पदक शामिल हैं।
ब्रिटेन के लोकप्रिय विश्वविद्यालय गोल्डस्मिथ्स, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन ने सभी प्रकार के बीफ प्रोडक्ट्स पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। कैम्पस में स्थित सभी दुकानों व कैफे को इस समबन्ध में सूचित कर दिया गया है। इतना ही नहीं, अगर किसी छात्र के पास से प्लास्टिक के बोतल या कप मिले तो उसे आर्थिक दंड दिया जाएगा। यूनिवर्सिटी ने 2025 तक कार्बन न्यूट्रल बनने का लक्ष्य रखा है और स्वच्छ ऊर्जा सप्लायर के रूप में अधिक से अधिक सोलर पैनल भी स्थापित किए जा रहे हैं।
छात्रों को बदलते वातावरण व इस पर पड़ रहे बुरे प्रभाव के बारे में अधिक जानकारी देने के लिए ‘क्लाइमेट चेंज’ पुस्तकें उनके सिलेबस में शामिल की जाएँगी। यूनिवर्सिटी प्रमुख ने कहा कि छात्र पर्यावरण को लेकर सजग दिख रहे हैं और ताज़ा नियम-कायदों से फायदा मिलेगा। यूनिवर्सिटी ने शाकाहार को भी बढ़ावा दिया है और स्थानीय स्तर तैयार किए गए खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल करने को कहा है।
1980 में स्थापित गोल्डस्मिथ्स में आर्ट्स से लेकर सोशल साइंस तक की डिग्रियाँ दी जाती हैं और यहाँ के 20% छात्र ब्रिटेन के बाहर से पढ़ने आते हैं। बीफ और मांस के ख़िलाफ़ अभियान में यह यूनिवर्सिटी अकेली नहीं है बल्कि कैम्ब्रिज-ऑक्सफॉर्ड के कई कॉलेजों के अलावा कई अन्य अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटीज ने ‘मीट फ्री मंडे’ मनाने का निर्णय लिया है। शाकाहारी भोजन खाने वाले छात्रों को बढ़ावा दिया जा रहा है और उन्हें कई ऑफर्स भी दिए जा रहे हैं।
Goldsmiths’ new Warden Professor Frances Corner has announced an ambitious drive for the College to be carbon neutral by 2025.
The plan includes the removal of all beef products from campus outlets and a 10p levy on plastic bottles https://t.co/sYRHZ0gxxa
बता दें कि भारत में बीफ को लेकर विपक्षी दल अक्सर सरकार को निशाने पर लेते रहते हैं। अगर हम उस स्थिति की कल्पना करें जब सरकार कोई खाद्य पदार्थ किसी यूनिवर्सिटी में प्रतिबंधित कर दे तो कथित एक्टिविस्ट्स झंडा लेकर उठ खड़े होंगे और इसे लोगों की खाने की आजादी पर हमला बता दिया जाएगा। यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन ने ये निर्णय पर्यावरण को बीफ से होने वाले नुकसानों को देखते हुए किया है, इसीलिए इसका वहाँ पर स्वागत किया गया।
अपने दूसरे कार्यकाल के पहले स्वतंत्रता दिवस सम्बोधन के दौरान पीएम मोदी ने कई बड़े ऐलान किए, जिनमें से एक है ‘Chief Of Defence Staff (CDS)’ पद की स्थापना। इसकी माँग कई वर्षों से होती आ रही है। सीडीएस पद की महत्ता पर कई जानकर व रिटायर्ड सेनाधिकारी भी प्रकाश डाल चुके हैं और सबने कहा था कि देश को ऐसे किसी पद की ज़रूरत है। 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान पहली बार इसकी माँग उठी थी। इस पद पर नियुक्त अधिकारी का मुख्य ध्येय होगा तीनों सेनाओं के बीच सुगम समन्वय स्थापित करना।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सम्बोधन के दौरान कहा कि भारत की सेना पर हमें गर्व है और तीनों सेनाओं के बीच परसस्पर सामंजस्य के लिए सीडीएस की नियुक्ति की जाएगी। पीएम ने कहा कि इससे तीनों सेनाओं का कमजाज और भी प्रभावी हो जाएगा। सीडीएस भारत सरकार के लिए ‘सिंगल पॉइंट सलाहकार’ की तरह होगा, वो सरकार को तीनों सेनाओं से जुड़े मसलों पर सलाह देगा। इसका फायदा यह होगा कि तीनों सेनाएँ एक औपचारिक पद के जरिए एकीकृत हो जाएँगी।
आर्मी एक्सपर्ट्स के अनुसार, इससे भारतीय सेनाओं के बीच एक ‘Jointmanship’ की तरह प्रयोग किया जाएगा। मिलिट्री सम्बन्धी निर्णय लेते समय सर्विस के आधार पर अलग-अलग राय-विचार हो सकते हैं या कुछ अस्थायी मतभेद हो सकते हैं, जिसे टालने और ठीक करने के लिए सीडीएस का पद क्रिएट किया गया है। इससे सेनाओं के बजट, ट्रेनिंग, पॉलिसी और साजोसामान खरीद के सम्बन्ध में सरकार को जल्द से जल्द को निर्णय लेने में आसानी होगी।
CDS पद के गठन को लेकर प्रधानमंत्री का बयान
कई एक्सपर्ट्स का यह भी मानना था कि जैसा कि दशकों से होता आ रहा है, भारत में एक ब्यूरोक्रेट को मिलिट्री और सुरक्षा सम्बन्धी निर्णय लेने के लिए रखा जाता था। वो ब्यूरोक्रेट किसी भी क्षेत्र से आया हुआ हो सकता था और उसे सेना व सुरक्षा ऑपरेशन्स की कितनी समझ है, इससे कोई लेना-देना नहीं था। इसीलिए सीडीएस का पोस्ट क्रिएट करना आवश्यक था। कारगिल युद्ध के समय सेनाध्यक्ष रहे जनरल वीपी मलिक ने पीएम के निर्णय का स्वागत करते हुए लिखा कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा ज्यादा प्रभावी और किफायती हो जाएगी।
Thank you PM Modi for announcing historic step of institution of CDS. This step will make our national security more effective and more economical. It will ensure better jointmanship and multi-disciplinary coordination. Salute!
कारगिल युद्ध के बाद सरकार द्वारा गठित समिति ने कहा था कि किसी फाइव-स्टार मिलिट्री अधिकारी को सीडीएस बनाया जाना चहिए। मंत्रिमंडलीय समूह ने भी यही बात दुहराई थी। आज 20 वर्ष बाद उस सलाह को अमल में लाते हुए सीडीएस पद का गठन किया गया है। इस सम्बन्ध में संसद में भी कई बार सवाल हुए थे। यह दिखाता है कि नेशनल सिक्यूरिटी के मामले में सरकार किसी भी प्रकार का कोताही बरतने के मूड में नहीं है।
‘यूनिवर्स बॉस’ के नाम से मशहूर कैरेबियाई विस्फ़ोटक बल्लेबाज ने संन्यास की खबरों को नकार दिया है। 39-वर्षीय धाकड़ बल्लेबाज ने ‘अगली नोटिस तक’ अपने वनडे क्रिकेट में सक्रिय रहने की बात की है। मालूम हो कि अटकलें लग रहीं थीं कि भारत-विंडीज़ के बीच का तीसरा अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय मैच क्रिस जेल का आखिरी हो सकता है, लेकिन क्रिस गेल ने इन अटकलों को विराम दे दिया है।
भारत-वेस्ट इंडीज़ के बीच पोर्ट ऑफ़ स्पेन में खेले गए तीसरे मैच में गेल की विस्फ़ोटक पारी ने दिखा दिया कि उनमें कितना ‘बारूद’ अभी बाकी है। 41 गेंदों में उन्होंने 72 रन बनाए, जिनमें से 62 केवल चौके-छक्कों से ही बने। हालाँकि वे अपनी टीम को जीत नहीं दिला पाए, और विराट कोहली की अगुआई में भारत ने तीसरा वनडे जीतने के साथ वनडे सीरीज़ 3-० से अपने नाम कर ली।
लेकिन जब क्रिस गेल खलील अहमद की गेंद पर कोहली को कैच थमाने के बाद हेलमेट को बल्ले पर टाँगकर मैदान के बाहर जा रहे थे तो दर्शक ही नहीं, विपक्षी टीम भी तालियों से उनका इस्तकबाल कर रही थी। 20 साल के करियर में अपना 301वां एक दिनी मैच खेल रहे दिग्गज ओपनर गेल ने जर्सी भी 301 नंबर की ही पहनी थी।
पूर्व क्रिकेटर भी हुए भ्रमित, ICC को करना पड़ा ‘फैक्ट-चेक’
गेल के साथ और उनके खिलाफ खेल चुके कई क्रिकेटर भी जब रिटायरमेंट की बधाईयाँ पोस्ट करने लगे तो ICC को आगे आकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। गेल को बधाई देने वालों में इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन और भारत के विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋद्धिमान साहा शामिल हैं।
The UNIVERSE BOSS retires – take a bow @henrygayle!
देश की तीनों सेनाओं यानी भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना और भारतीय नेवी का आने वाले दिनों में एक ही चीफ़ होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (15 अगस्त) को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ (CDS) के पद की घोषणा की।
दरअसल, 1999 में हुए कारगिल युद्ध के बाद जब 2001 में तत्कालीन डिप्टी पीएम लाल कृष्ण अडवाणी की अध्यक्षता में गठित ग्रुप ऑफ़ मिनिस्टर्स (GOM) ने समीक्षा की तो पाया कि तीनों सेनाओं के बीच समन्वय की कमी रही है। तब इस बात पर ग़ौर किया गया कि अगर तीनों सेनाओं के बीच तालमेल सही से होता तो भारी क्षति न होती। उस समय चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस के पद पर विचार किया गया, जिसका क़रीब 20 साल बाद स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से आज प्रधानमंत्री मोदी ने ऐलान किया।
फ़िलहाल, देश में तीनों सेनाओं के अलग-अलग चीफ़ हैं। भारतीय सेना के सेनाध्यक्ष जनरल विपिन रावत हैं, एयर फोर्स के चीफ़ बीएस धनोआ हैं और भारतीय नेवी की कमान एडमिरल करमबीर सिंह के हाथों में है। राष्ट्रपति तीनों सेनाओं के अध्यक्ष होते हैं और रक्षा मंत्री तीनों सेनाओं का कामकाज देखते हैं।
रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल (रिटायर्ड) के के सिन्हा ने सरकार के इस फ़ैसले को बहुत बड़ा कदम बताया है। मेजर जनरल (रिटायर्ड) विश्वम्भर दयाल ने भी सरकार के इस फ़ैसले का तहे दिल से स्वागत किया है। चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस पद के होने से अब तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बैठाने में किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। सिंगल प्वॉइंट से आदेश जारी होने से सेनाओं की मारक क्षमता और प्रभावी होगी क्योंकि अब सेना के तीनों अंगों के मध्य किसी तरह की कन्फ़्यूज़न की स्थिति नहीं बन पाएगी। जैसा कि पााकिस्तान और चीन के युद्ध के समय देखने को मिली थी।
लद्दाख के सांसद जामियांग त्सीरिंग नांग्याल ने न सिर्फ़ जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन के निर्णय का स्वागत किया बल्कि लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के लिए वहाँ की जनता की तरफ से पीएम मोदी व गृहमंत्री अमित शाह को धन्यवाद भी दिया। जामियांग ने इस मुद्दे पर संसद में जो भाषण दिया, वह पूरे देश भर में लोकप्रिय हुआ और उन्हें कोने-कोने से बधाई सन्देश मिले। पूरे देश ने एक सुर में कहा कि उन्हें जमियांग जैसे और युवा नेता चाहिए। साथ ही वो रातोंरात सोशल मीडिया हीरो भी बन गए।
अब सांसद जामियांग का एक नया विडियो सामने आया है, जिसमें वह स्वतंत्रता दिवस मनाते नजर आ रहे हैं। इस विडियो को सोशल मीडिया पर लोग हाथोंहाथ ले रहे हैं। भाजपा सांसद जामियांग इस विडियो में लद्दाख की जनता के साथ झूमते हुए नज़र आ रहे हैं। जनता खड़ी होकर अपने सांसद का डांस देख रही है। वैसे ये पहली बार नहीं है जब सांसद जामियांग का डांस वाला विडियो वायरल हुआ हो, वह पहले भी अपने डांस मूव्स से लोगों के दिलों में जगह बना चुके हैं।
The residents believe firmly in the principal of environmental conservation. Following this norm, they have taken a pledge of no crackers even for the celebrations. This video shows how celebrations can happen in an eco-friendly environment. #NewLadakhpic.twitter.com/tP3CNj0lym
संसद में अपना बहुचर्चित भाषण देते हुए जमियंग ने कहा था:
“लद्दाख के लोग पिछले सात दशकों से केंद्रशासित क्षेत्र के दर्जे की मांग कर रहे थे। लद्दाख की भाषा, संस्कृति अगर लुप्त होती चली गई तो इसके लिए अनुच्छेद 370 और कॉन्ग्रेस जिम्मेदार है। करगिल के लोग इस बिल का समर्थन करते हैं। मैं आपकी तरह (विपक्षी नेताओं) किताबें पढ़कर नहीं आता लेकिन ग्राउंड की रियलटी को महसूस करता हूँ।
भारत सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 पर लिए गए फैसले को हटाए जाने के खिलाफ पाकिस्तान की चिट्ठी पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में कोई भी प्रतिक्रिया देने के लिए चीन ने पहल की है। चीन ने शुक्रवार (अगस्त 15, 2019) को बंद कमरे में अनौपचारिक चर्चा की बात कही है।
पाकिस्तान के करीबी दोस्त माने जाने वाले चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council) से कहा है कि वे भारत की तरफ से जम्मू कश्मीर में खत्म किए गए विशेष दर्जे को लेकर ‘परामर्श करना बंद करे’ और इस पर चर्चा करे। रिपोर्ट्स के अनुसार, राजनयिक ने बताया कि इससे पहले, पाकिस्तान की तरफ से काउंसिल के प्रसिडेंट पोलैंड को इस मुद्दे पर पत्र लिख कर अगस्त में बैठक बुलाने की माँग की गई थी।
राजनयिक के अनुसार- “चीन ने सुरक्षा परिषद के एजेंडा आइटम से ‘इंडिया पाकिस्तान क्वेश्चन’ पर परामर्श बंद करने को कहा। यह अनुरोध पाकिस्तान की तरफ से संयुक्त राष्ट्र के अध्यक्ष के भेजे गए पत्र के संदर्भ में था।”
चीन चाहता है कि इस अनौपचारिक चर्चा में पाकिस्तान के विदेश मंत्री एसएम कुरैशी द्वारा यूएनएसी अध्यक्ष जोआना रोनकेका को लिखे पत्र (भारत द्वारा जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले) के बारे में सभी सदस्यों की राय ली जाए।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने अपने पत्र को UNSC के सभी सदस्य देशों को फैलाकर जल्द से जल्द मीटिंग बुलाने की माँग की है, लेकिन अभी तक कोई मीटिंग कॉल नहीं की गई है। इक्वेटोरियल गिनी, जो UNSC के गैर-स्थायी सदस्यों में से एक है, ने कहा है कि सभी सदस्य काउंसिल पोलैंड की कुर्सी के निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं।
UNSC में पोलैंड अगस्त महीने का काउंसिल चेयरमैन है, इसलिए किसी भी बैठक को बुलाने के लिए उसकी मंजूरी जरूरी है।
कमर मोहसिन शेख मूल रूप से पाकिस्तानी महिला हैं और सबसे ख़ास बात यह है कि वह लगातार पिछले 24 वर्षों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राखी बाँधती आई हैं। इस रक्षाबंधन के अवसर पर भी मोहसिन शेख ने पीएम को राखी बाँधी। मोहसिन ने प्रधानमंत्री की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह विश्व की शांति और देश-दुनिया के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण क़दम उठा रहे हैं। मोहसिन एक वाकया याद करती हैं जो काफ़ी रोचक है।
दरअसल, मोहसिन पीएम को तभी से राखी बाँधती आ रही हैं, जब वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के बाद भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता हुआ करते थे। एक बार मोहसिन ने उन्हें राखी बाँधते हुए दुआ माँगी कि वह गुजरात के मुख्यमंत्री बन जाएँ। इस पर मोदी ने हँसते हुए कहा कि वह भाजपा के एक साधारण कार्यकर्ता हैं और हमेशा यही रहना चाहते हैं क्योंकि राजकाज उन्हें रास नहीं आता है।
समय का पहिया घूमा और गुजरात को नरेन्द्र मोदी के रूप में नया मुख्यमंत्री मिला। मोदी ने देश की कमान सम्भालने तक गुजरात की बागडोर थामे रखी। मोहसिन बताती हैं कि एक बार राखी बाँधते समय उन्होंने दुआ करते हुए कहा कि मोदी देश के प्रधानमंत्री बनें। इसके बाद नरेन्द्र मोदी मुस्कुराने लगे थे। कमर मोहसिन मूल रूप से कराची की रहने वाली हैं। हमेशा की तरह इस बार भी मोहसिन ने पीएम मोदी के लिए बड़ी दुआ माँगी है।
Qamar Mohsin Shaikh, PM Modi’s rakhi sister: I get the opportunity to tie rakhi to elder brother once every year, I’m happy. I pray that the next 5 years go so well for him that the whole world recognizes the positive decisions he made. I pray for his good health. pic.twitter.com/ukmdpLbkcj
कमर मोहसिन ने इस बार पीएम मोदी को नोबल पुरस्कार मिलने की दुआ की है। कमर मोहसिन के अनुसार, मोदी गरीबी, भ्रष्टाचार और आतंकवाद को ख़त्म करने के लिए जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल से की गई दुआ ज़रूर पूरी होती है और मोदी को देश-दुनिया के कल्याण का प्रयास करने के लिए नोबल मिलना ही चाहिए।
यहाँ इस बात का जिर्क करना ज़रूरी है कि 1971 के युद्ध के बाद सिंध के कई लोग आकर भारत में बस गए थे जो अपने सम्बन्धियों से मिलने पाकिस्तान नहीं जा सके। पाकिस्तान इन्हें वीजा नहीं देता है। इनमें से कई ऐसे लोग हैं, जिन्हें भारत की नागरिकता दे दी गई हैं। ये सभी अब गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों में रह रहे हैं।