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Article-370 पर सरकार के फैसले के विरोध में कश्मीर में 9 जगहों पर पत्थरबाजी, अजित डोभाल ने श्रीनगर में डाला डेरा

जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 के तहत मिले विशेषाधिकारों को अब हटा दिया गया है। केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद घाटी में सुरक्षा को बढ़ाया गया है, ताकि किसी भी तरह की स्थिति से निपटा जा सके। खुद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल भी इस वक्त श्रीनगर में हैं और काफी करीब से हालात पर नजर बनाए हुए है। अजित डोभाल केंद्र के फैसले को सही तरीके से लागू होने तक श्रीनगर में ही रुकेंगे। NSA अजित डोभाल लगातार वहाँ पर लोकल लोगों से बैठक कर रहे हैं।

इस बीच, मंगलावर (अगस्त 6, 2019) को श्रीनगर के कुछ इलाकों से पत्थरबाजी की घटना सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, श्रीनगर के हाजी बाग कैंप, सोम्यार मंदिर, इस्लामियां कॉलेज, छोटा बाजार समेत 9 इलाकों में अराजक तत्वों द्वारा पत्थरबाजी की गई है। जबकि कुछ अन्य इलाकों में लोगों के सड़कों पर उतर आने और पाबंदियों का विरोध करते हुए प्रदर्शन किए गए।

गौरतलब है कि, कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने के निर्णय लेने के पहले से ही सेना ने व्यापक तैयारी कर ली थी, जिसकी वजह से जम्मू कश्मीर से कोई बड़ी घटना सामने नहीं आ रही है। एहतियात के तौर पर कल (अगस्त 5, 2019) रात जम्मू कश्मीर के कई नेताओं को भी गिरफ्तार कर लिया गया था ताकि वे शांति भंग ना कर पाएँ।

केन्द्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर को लेकर सोमवार को किए गए महत्वपूर्ण व ऐतिहासिक फैसलों के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है। मंगलवार (अगस्त 6, 2019) को भी श्रीनगर और जम्मू में धारा-144 लागू है। इसके अलावा डोडा, किश्तवाड़, बनिहाल और रामबन में कर्फ्यू लगाया गया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षाबलों की 40 कम्पनियाँ जम्मू संभाग के जम्मू, डोडा, उधमपुर, रामबन, किश्तवाड़, राजौरी तथा पुंछ जिलों में तैनात की गई हैं। राज्य के ज्यादातर मार्गों पर कंटीली तार लगाकर लोगों की आवाजाही को रोका जा रहा है, ताकि कोई शरारती तत्व राज्य का शांतिपूर्ण माहौल खराब करने की हिम्मत न कर सके। इस दौरान रैलियों और राजनीतिक बैठकों पर भी प्रतिबंध लागू हैं।

कश्मीर मुस्लिम राज्य है, Article 370 श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आशीर्वाद से बना: MP हसनैन मसूदी

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल आने के बाद से घाटी की दोनों बड़ी पार्टियों नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के नेताओं का अनर्गल प्रलाप चालू है। अपने मुख्य नेताओं महबूबा मुफ़्ती और उमर अब्दुल्ला के गिरफ़्तार हो जाने से नेतृत्व-विहीन इन पार्टियों के नेताओं की हरकतें देखने लायक हैं। पीडीपी नेताओं ने राज्यसभा में पहले संविधान की प्रतियाँ फाड़ीं, फिर अपने कपड़े फाड़ डाले

उनके नहले पे दहला जड़ते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के लोकसभा सांसद हसनैन मसूदी ने कुतर्की बातों की झड़ी लगा दी है। उन्होंने आज लोकसभा में बहस करते हुए दावा किया कि संविधान का विवादस्पद अनुच्छेद 370 जनसंघ के संस्थापक-अध्यक्ष और भाजपा के पितृ-पुरुष श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आशीर्वाद से बना।

उन्होंने 370 के अस्थायी होने के भाजपा के तर्क पर भी सवाल उठाए और पार्टी को गोपालस्वामी अयंगर के भाषण पढ़ने तक की सलाह दे डाली। यही नहीं, इस विवादस्पद भाषण के एक शाम पहले वह News18 India के कार्यक्रम में भी कश्मीर को ‘मुस्लिम राज्य’ बता चुके थे।

कल राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम लाए जाने के बाद से ही विपक्ष के अजीबो-गरीब बयान जारी हैं। इसके पहले कॉन्ग्रेस संसदीय दल के लोकसभा में अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कश्मीर मसले पर बिल लाने की सरकार की हैसियत को ही चुनौती दे डाली थी। उनके इस बयान पर भड़के गृह मंत्री और भाजपा सुप्रीमो अमित शाह ने तो उन्हें खरी-खोटी सुनाई ही, खुद सोनिया गाँधी भौंचक्की नज़र आईं। इसके अलावा कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद और नेता विपक्ष गुलाम नबी आज़ाद के बयानों ने पाकिस्तान को भी हिंदुस्तान के आंतरिक मामलों में दखल देने वाले बयानों के लिए ज़मीन दे डाली

वामपंथी फट्टू तो होते थे, लेकिन JNU वालों ने कल रात नई मिसाल पेश की है

जेएनयू कुछ सालों से पढ़ाई के लिए कम और बकैती के लिए ज्यादा चर्चा में रहा है। लेनिनवंशी माओनंदन कामपिपासु वामभक्त मोलेस्टरों का गढ़ रह चुके जेएनयू में ‘आजादी गैंग’ और ‘टुकड़े-टुकड़े गिरोह’ अभी भी साँस ले रहा है। ‘डर का माहौल’ में जी रहे ये कामपंथी, ‘फासिस्ट हिन्दुस्तान’ को लानतें भेजते हुए, गले में खराश से जूझती आवाज में देशविरोधी प्रदर्शन करने के लिए रात के अंधेरे का इस्तेमाल करते दिखे।

जिस तरह की क्रांतिकारी आवाज इनका क्रांतिकारी लौंडा निकाल रहा था, लग रहा था कि भाड़े पर बुलाया है ताकि बेचारे फोरेंसिक जाँच में उसे फँसा दें, और खुद बच जाएँ। ऐसा हो भी सकता है क्योंकि वामपंथियों की पूरी लड़ाई सर्वहारा की रीढ़ पर लात रख कर आगे बढ़ते हुए ही हुई है। ‘आजादी’ की बात करता हुआ यह क्रांतिकारी बालक जिस हिसाब से चिल्ला रहा था, उससे तो यही प्रतीत हो रहा था कि इसके बाप जब कहते होंगे कि ‘सात बजे के बाद घर से बाहर कहाँ जा रहे हो’, तो घिघियाता हुआ कहता होगा, “जी, वो, मैं तो… जी देखने जा रहा था कोई दरवाजे पर आया तो नहीं’। फिर बाप जोर से डाँटते होंगे, और हमारा ये क्रांतिकारी बालक कोर्स की किताबों के बीच कामरेड अनमोल रतन रचित ‘सीडी माँगने के बहाने बलात्कार के सौ तरीके’ रख कर पढ़ने लगता होगा।

वामपंथी लम्पटों का यही जीवन है। घर में सुबह उठ कर बाप के डर से मूर्ति के आगे हाथ जोड़ते हैं, और बाहर में अपनी इन्डिविडुएलिटी और फ्रीडम पर ज्ञान देते हैं। ऐसे कई वामपंथियों को जानता हूँ जो जेएनयू में पढ़ते वक्त जब किसी को आईफोन इस्तेमाल करते देख दिमाग की नसें फुला लेते थे कि कोई इतना महँगा फोन कैसे इस्तेमाल कर सकता है, और बाद में कॉरपोरेट या सरकारी नौकरी करते हुए, न तो घूस लेने में लजाते हैं, न कामचोरी करने में।

इनका वैचारिक खुलापन इतना ज़्यादा खुला हुआ है कि खुलते-खुलते ये कब नंगे हो जाते हैं, इन्हें पता ही नहीं चलता। आपसी बातचीत में हार्डकोर वामपंथी बताता है कि ‘सरकार तो ठीक ही काम कर रही है’ लेकिन ज्योंहि वो पब्लिक में आता है, वो बताता है कि सरकार हर मामले में असफल रही है। घर में कॉफी पीने वाला लेनिनवंशी पब्लिक में लाल चाय पीने लगता है और छत पर मार्लबोरो फूँकता माओनंदन कॉलेज के स्टाफ क्लब में बीड़ी पीता दिखता है। ये मैं जानता हूँ क्योंकि विश्विद्यालयों में प्रोफेसरों के साथ मेरे ऐसे ही अनुभव रहे हैं।

ये क्रांतिकारी भी उसी ब्रीड का है। ये जानता है कि अब इनके बिलों में बारिशों में पानी भर रहा है, और सर्दियों में मिर्ची का धुआँ भरा जाएगा। इसलिए, लवचेरी क्रांतिकारी अंधेरे में क्रांति के गीत गा रहा था और ज्योंहि मीडिया वालों का कैमरा आया कि डर के मारे मुँह छुपा कर भागता नजर आया। दस कामपंथी और झामपंथनों के बीच लानतें भेजता यह क्रांतिबीज यह नहीं जानता कि सरकार भी बदल गई है, और उसके गढ़ों के खूनी झंडे को हिलाने वाली हवा भी अब मरी-मरी सी बह रही है।

वामपंथी हमेशा से ही एक फट्टू आबादी रहे हैं। इनसे बकैती चाहे जितनी करवा लो, समाधान इनके पास एक भी नहीं होता। बात ये वेनेजुएला से लेकर क्यूबा तक की करेंगे, लेकिन उसका मतलब कुछ नहीं होता। ये एक ऐसी ब्रीड है जो परजीवी की तरह गरीबों के खून का शरबत बना कर पीती है, उन्हें राजनैतिक और सामाजिक तौर पर कमजोर करती है, और जब और कुछ नहीं बचता तो उन्हें ह्यूमन शील्ड बना कर सैनिकों की गोलियों के आगे कर देती है।

ये फट्टू तो थे। ये विद्यार्थी जीवन में वास्तवकिताओं से भागने की शुरुआत करने से लेकर जीवन के उत्तरार्द्ध तक सच्चाई से आँख फेरने वाले भगोड़े और अश्लील विचारक तो रहे हैं, लेकिन वक्त के साथ-साथ इनकी नारेबाजी की हिम्मत भी चली जाएगी यह देख कर निजी तौर पर मुझे बुरा लग रहा है। कहाँ ज़ोर-शोर से अफजल गुरु की बरसी मनाने वाले देशद्रोही वामपंथी, और कहाँ ये फट्टू लौंडा जिसके मुँह से आवाज नहीं निकल रही। क्या इसी दिन के लिए अपनी नौकरानी से बच्चे पैदा कर, उसे छोड़ देने वाले, संबंध को अस्वीकार करने वाले मार्क्स ने ज्ञान की बातें लिखी थीं! लानत है ऐसे वामपंथियों पर!

मुझे तो अभी भी लगता है कि जेएनयू के वामपंथियों ने किसी असहाय लड़के को भोजन आदि का लालच देकर, या किसी फर्स्ट ईयर वाले नए बच्चे को ‘सीडी के बहाने सेटिंग कराने’ का वादा करके या ‘कल मलाना क्रीम पिलाएँगे तुमको’ कह कर अंधेरे में, टूटे-फूटे शब्दों में, घिसी हुई स्क्रिप्ट पकड़ा कर ‘फासिस्ट’ और ‘ले के रहेंगे आजादी’ कहलवा दिया। ये यही करते हैं, इनका पूरा इतिहास अनभिज्ञ लोगों का इस्तेमाल करते हुए सत्ता तक पहुँचने की कहानियों से भरा हुआ है। इन्होंने गरीबों, असहायों को अपनी ढाल बना कर राजनीति की है। तो यह मानने में बिलकुल भी समस्या नहीं है कि नया वामपंथी एक गाँजे की ज्वाइंट के लोभ में यह करने को तैयार हो गया हो। (वैधानिक चेतावनी: गाँजा पीना, चाहे वो मलाना क्रीम ही क्यों न हो, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।)

इनका जो हाल है, और जैसे-जैसे इनकी विचारधारा का पतन होता जा रहा है, अगले बार के प्रोटेस्ट में ये किसी मजदूर को ठग कर न ले आएँ और उससे ‘आजादी’ की बातें न कहलवा लें। जेएनयू में तो दो बार से सारे वामपंथियों के नितम्ब चिपक कर एक होने के बाद ही चुनाव जीते जा रहे हैं, इस साल कितने चिपकेंगे ये देखने की बात है क्योंकि इस बार तो कश्मीर का मुद्दा वाकई में इनके लिए मुद्दा है क्योंकि अगली बार से उनके पास ये मुद्दा रहेगा ही नहीं!

एक से दो चुनाव और बचे हैं जब जेएनयू भी कश्मीर की तरह बदल जाएगा। यहाँ से वामपंथ का कोढ़ समाप्त हो जाएगा और इनके रहनुमाओं को जनता हर जगह घेर कर सवाल करेगी कि ये जो पढ़-लिख कर चिरकुटों वाली हरकतें करते हो, वो क्यों करते हो। ये जो आजादी लेने की बातें करते हो, वो लेकर कहाँ रखोगे? भारत क्या परचून की दुकान है कि तुम्हें डब्बे में बंद आजादी दिख रही है, और गुल्लक में पैसे हैं नहीं, लेकिन एक दिन वो भरेगा और तुम आजादी ले कर रहोगे?

खैर, अंत में, सीरियसली वामपंथियो! मीडिया के कैमरे से बचते हो? इतने फट्टू हो गए हो! लानत है!

फट्टू वामपंथी की कमज़ोर आवाज़ वाला वीडियो

’14 महीने तक कॉन्ग्रेस के लिए गुलामों की तरह काम किया, लेकिन कभी सराहना नहीं मिली’

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस-जेडीएस के गठबंधन वाली सरकार गिरने के बाद जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने कई बातों का खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने 14 महीने कॉन्ग्रेस के लिए गुलाम की तरह काम किया, लेकिन उनके काम की कभी किसी ने सरहाना नहीं की। उनकी मानें तो उन्होंने सभी विधायकों और निगम अध्यक्षों को पूरी स्वतंत्रता दी थी, लेकिन फिर भी कॉन्ग्रेस सरकार गिरने का दोष उन्हें दे रही है।

गौरतलब है कि कर्नाटक में लंबे समय से चले राजनैतिक संकट के कारण 14 महीने पुरानी सरकार गिरने के बाद राज्य में येदियुरप्पा के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी है। जिसके बाद कुमार स्वामी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वह मुख्यमंत्री का पद छोड़ने के बाद बेहद खुश हैं। उनकी मानें तो उन्होंने 14 महीने तक राज्य के विकास के लिए काम किया। लेकिन उन्हें दुख सिर्फ़ ये हुआ कि किसी ने भी उनके काम की सराहना नहीं की।

एचडी कुमारस्वामी ने बातचीत के दौरान यह भी बताया कि राज्य में कई कॉन्ग्रेसी नेता गठबंधन की सरकार नहीं बनाना चाहते थे। लेकिन राज्य में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था। ऐसे में कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेता दिल से चाहते थे कि वह जेडीएस के साथ सरकार बनाएँ। हालाँकि, कुछ स्थानीय नेता इसमें दिलचस्पी नहीं रख रहे थे लेकिन फिर भी सरकार बनी।

मीडिया खबरों की मानें तो कर्नाटक के पूर्व सीएम कहते है कि सरकार के गठन के पहले दिन से ही कॉन्ग्रेस नेताओं के एक वर्ग ने जनता के साथ कैसा व्यवहार किया, यह सभी जानते हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने जेडीएस की तुलना में कॉन्ग्रेस विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अधिक धन आवंटित किया था ताकि विकास कार्य में दुविधा न आए।

अपना दुख जाहिर करते हुए कुमारस्वामी ने बताया कि जब भी कोई विधायक बिना अपॉइंटमेंट के उनसे मिलने आता था, तो भी वे उनसे मिलते थे। वह कहते है कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों के विकास के लिए उनके पास जो भी अनुरोध आए, उन्होंने तत्काल उन पर फैसला लिया।

पूर्व मुख्यमंत्री के अनुसार “मैंने 14 महीनों में जितना काम किया, पिछली कॉन्ग्रेस सरकार ने कुछ नहीं किया। मैंने कॉन्ग्रेस विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों को 14 महीनों में 19,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का आवंटन किया।”

बता दें कि कुछ मीडिया खबरों के मुताबिक कर्नाटक में जेडीएस-कॉन्ग्रेस की सरकार गिरने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री राजनीति छोड़ने की सोच रहे हैं। वह कहते हैं, “मैं घृणित हूँ, व्यक्तिगत रूप से मुझे राजनीति में बने रहने का कोई शौक नहीं है, लेकिन मेरी पार्टी के कार्यकर्ताओं के कारण, मैं निरंतर काम कर रहा हूँ। अब राजनीति जातिगत, बाहुबल और धन शक्ति से चल रही है। आजकल राजनीतिक गतिविधियों में कोई निष्पक्षता नहीं है। अच्छे लोगों के लिए, यह बहुत मुश्किल है।”

कॉन्ग्रेस सांसदों के बयान का प्रयोग कर पाकिस्तानी मंत्री कर रहा भारत को घेरने की कोशिश

जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने वाले अनुच्छेद-370 में किए गए बदलाव पर देश में ही दो गुट दिखाई दे रहा है। अपने ही देश में विपक्षी पार्टियों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है, जिसका फायदा हमारा दुश्मन देश पाकिस्तान उठा रहा है। सरकार ने जो कश्मीर पर फैसला लिया, वो हमारे देश के लिए है। यहाँ के लोगों के लिए है। तो जाहिर सी बात है कि पाकिस्तान का इस पर बोलने का कोई औचित्य ही नहीं बनता है, मगर जब अपने ही घर में फूट हो, तो पड़ोसी तो फायदा उठाएँगे ही। वो मौका देखकर वार करेंगे ही। 

सरकार के फैसले का विरोध करना या फिर उस पर अपनी बात रखना सही है, लेकिन राजनीति साधने के लिए नहीं, बल्कि देश हित के लिए, लोक हित के लिए। अगर आप देश हित को ताक पर रखकर सिर्फ अपनी राजनीति को चमकाने के लिए सरकार के फैसले का विरोध करेंगे तो पड़ोसी मुल्क को बोलने का मौका तो मिलेगा ही। जब देश हित की बात पर भी देश में लोग एकमत नहीं है, तो पड़ोसी मुल्क का इस पर बोलना तो वाजिब है और ये मौका हमारे देश के नेता ही दे रहे हैं।

सोमवार (अगस्त 5, 2019) को संसद में अनुच्छेद-370 पर जिस तरह से कॉन्ग्रेस के नेताओं ने हल्ला बोला, वो पड़ोसी मुल्क को बोलने का मौका देने के लिए काफी है। कॉन्ग्रेस के सीनियर लीडर गुलाम नबी आजाद ने 370 पर किए गए बदलाव के फैसले का विरोध करते हुए इसे भारतीय इतिहास का काला दिन बताया। उन्होंने कहा कि बीजेपी की सरकार ने सत्ता के नशे में और वोट हासिल करने के लिए एक झटके में अनुच्छेद 370 के साथ 35A को खत्म कर दिया। इसके साथ खिलवाड़ कर बहुत बड़ी गद्दारी की जा रही है।

इसके साथ ही गुलाम नबी ने कहा कि 370 को खत्म कर दिया और साथ ही राज्य को भी बाँटकर दो केंद्रशासित प्रदेश बना दिया। जम्मू-कश्मीर में अब उप राज्यपाल होगा। यह तो कभी सपने में नहीं सोचा जा सकता था कि एनडीए सरकार यहाँ तक जाएगी कि जम्मू कश्मीर राज्य का अस्तित्व खत्म कर देगी। उन्होंने बीजेपी की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इनको पता नहीं कि एक तरफ चीन की सीमा, एक तरफ पाकिस्तान सीमा है और एक तरफ POK की सीमा है। ऐसे में भाजपा सरकार ने इस तरह से राज्य के साथ खिलवाड़ करके देश के साथ गद्दारी करने का काम किया है। किसी सीमावर्ती राज्य में सिर्फ फौज की बदौलत दुश्मन को नहीं रोक सकते। इसके लिए स्थानीय लोगों का विश्वास होना चाहिए। भाजपा सरकार ने आज हमारे देश का सिर काट लिया। भाजपा की सरकार ने भारत को बिना सिर का बना दिया।

गुलाम नबी की इस तरह की बयानबाजी के बाद अब पाकिस्तान की तरफ से विरोधी सुर उठने शुरू हो गए हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के बाद अब वहाँ की सेना समेत अन्य मंत्री भी इस पर भारत के खिलाफ बोल रहे हैं। वहाँ के एक मंत्री ने तो ‘जंग का जवाब’ देने तक की बात कह डाली। बता दें कि, पाकिस्तान के मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने भी इस पर ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “मोदी सरकार कश्मीर को दूसरा फिलिस्तीन बनाना चाहती है। वह वहाँ की जनसांख्यिकी में बदलाव करने के लिए बाकी लोगों को कश्मीर में बसाना चाहती है। सांसदों को तुच्छ मुद्दों पर लड़ना बंद करके भारत को खून, आँसू और पसीने से जवाब देना चाहिए और अगर जंग थोपी जाए तो हमें जंग के लिए तैयार रहना चाहिए।”

‘पूरे बिल में कहीं भी POK का ज़िक्र नहीं, क्या हिंदुस्तान ने गुलाम कश्मीर को पाने की आशा छोड़ दी?’

लोकसभा में कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी के विवादस्पद बयानों की झड़ी लगी हुई है। पहले कश्मीर के हिन्दुस्तान का आंतरिक मसला होने और सरकार के उस पर बिल लाने के अधिकार पर ही सवाल उठाने के बाद अब वह सरकार पर POK (पाक-अधिकृत, गुलाम कश्मीर) से पल्ला झाड़ लेने का आरोप लगाते पाए जा रहे हैं।

मैंने पूछा था POK का क्या होगा

समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि उन्होंने सवाल यह पूछा था कि अब (जबकि सरकार ने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण विधानसभा वाला केंद्र-शासित प्रदेश बना दिया है) POK की स्थिति क्या होगी। उन्होंने यह भी कहा कि इसमें उन्होंने गलत क्या कहा है?

‘कहाँ लिखा है POK?’

अधीर चौधरी ने यह भी कहा कि इतने बड़े बिल (जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल) में कहीं भी POK भूभाग का ज़िक्र नहीं है। उनके अनुसार इसका अर्थ यह है कि हिंदुस्तान ने गुलाम कश्मीर को पाने की आशा छोड़ दी है।

इसके पहले उन्होंने कश्मीर मसले पर बिल लाने की सरकार की हैसियत को ही चुनौती दे डाली थी। उनके इस बयान पर भड़के गृह मंत्री और भाजपा सुप्रीमो अमित शाह ने तो उन्हें खरी-खोटी सुनाई ही, खुद सोनिया गाँधी भौंचक्की नज़र आईं। शाह ने सदन में यह भी साफ़ किया कि भाजपा नेता कश्मीर के लिए जान भी दे देंगे, और वह जब भी “कश्मीर” बोलेंगे, तो उनका तात्पर्य पाकिस्तान और चीन के कब्ज़े वाले गुलाम कश्मीर से भी होगा।

घाघरा-चोली पहनते हैं, गाँजा फूँकते हैं बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ‘तेजू’: पत्नी ऐश्वर्या राय

लालू के बेटे तेज प्रताप यादव कभी नीतीश-लालू की सरकार में बिहार का स्वास्थ्य महकमा संभाला करते थे। आज वे हमेशा गाँजे के नशे में चूर रहते हैं। यह दावा किया है उनकी पत्नी ऐश्वर्या राय ने फैमिली कोर्ट में, जहाँ वे तेज प्रताप द्वारा तलाक के मुकदमे में उन पर (ऐश्वर्या पर) लगाए गए आरोपों का जवाब दे रहीं थीं। 17 पन्नों के अपने दाखिल जवाब में ऐश्वर्या ने बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और तेज प्रताप यादव की माँ राबड़ी देवी पर भी चुप रहने का दबाव डालने के आरोप लगाए हैं।

कभी कृष्ण बनते हैं, तो कभी राधा

ऐश्वर्या ने आरोप लगाया कि नशे में चूर होने के बाद तेज प्रताप यादव अक्सर पौराणिक कथाओं में वर्णित देवी-देवताओं द्वारा पहने जाने वाले वस्त्रों जैसे कपड़े धारण कर लेते हैं। कभी कृष्ण, तो कभी राधा तक वे बन जाते हैं। साथ ही मेकअप और विग भी लगा लेते हैं।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा राय की पौत्री और आरजेडी विधायक चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय ने सास राबड़ी पर भी चुप कराने का आरोप लगाया। उनके अनुसार जब उन्होंने राबड़ी देवी और तेज प्रताप की बहन से इस बारे में बात की तो उन लोगों ने आश्वासन दिया कि तेज प्रताप दोबारा ऐसा नहीं करेंगे। इसके अलावा उन लोगों ने ऐश्वर्या से यह सब खुद तक सीमित रखने को कहा।

‘गलत संगत में कर रहा है ‘

बकौल ऐश्वर्या राय, राबड़ी ने उनसे कहा, “यह गलत संगत में ऐसा कर रहा है, तुम इसे गलत संगत से दूर करो।” और जब उन्होंने (ऐश्वर्या ने) तेज प्रताप से इस बाबत बात करने की कोशिश की तो वे भड़क उठे। उन्होंने कथित तौर पर ऐश्वर्या से कहा, “तुम अपनी औकात में रहो, और हमको सिखाओ मत, नहीं तो सब अंग्रेजी पढ़ाई निकाल देंगे।” ऐश्वर्या ने अपने लिए पुलिस सुरक्षा और अपने मायके वालों का उत्पीड़न रोके जाने की अपील अदालत में की है।

‘POK पर भी निकालेंगे हल बेटे!’ – Article 370 पर बौखलाए अफरीदी को गौतम का गंभीर जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर पर लिए गए फैसले के बाद पाकिस्तान के कई नामी चेहरों ने ट्विटर पर अपना गुस्सा जाहिर किया है। इसमें अब पाकिस्तानी क्रिकेट के पूर्व ख़िलाड़ी शाहिद अफरीदी भी शामिल हो गए हैं।

शाहिद अफरीदी ने कल रात डोनल्ड ट्रंप को टैग करते हुए कश्मीर मामले पर अपनी बौखलाहट निकाली। लेकिन भारत के पूर्व आक्रामक बल्लेबाज गौतम गंभीर और फिलहाल भाजपा के सांसद ने उन्हें जवाब देने में देर नहीं लगाई।

शाहिद अफरीदी ने 5 अगस्त को रात 8:41 पर अपने ट्विटर पर लिखा, “कश्मीरियों को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के आधार पर उनके अधिकार दिए जाने चाहिए। आजादी का अधिकार हम सभी को है। संयुक्त राष्ट्र की रचना क्यों की गई है और यह क्यों सो रहा है? कश्मीर में लगातार जो मानवता विरोधी अनुत्तेजित आक्रामकता और अपराध हो रहे हैं। उस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। डॉनल्ड ट्रंप (अमेरिका के राष्ट्रपति) को इस मामले में जरूरी रूप से मध्यस्थ की भूमिका अदा करनी चाहिए।”

इस पर गौतम गंभीर ने 6 अगस्त की सुबह-सुबह 6:35 पर अफरीदी के ट्वीट पर चुटकी लेते हुए लिखा, “दोस्तों शाहिद अफरीदी बिल्कुल ठीक हैं। वहाँ पर अनुत्तेजित आक्रामकता है, वहाँ मानवता के खिलाफ अपराध हो रहे हैं। वह यह मामला सामने लाए, इसलिए उनकी तारीफ की जानी चाहिए। बस वह इसमें एक बात लिखना भूल गए कि यह यह सब ‘पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर’ में हो रहा है।” उन्होंने आगे लिखा, “चिंता मत करो, हम इसका भी हल निकालेंगे बेटे!!!!”

गौरतलब है कि शाहिद अफरीदी और गौतम गंभीर के बीच होने वाली ये नोंक-झोंक नई नहीं है। इससे पहले शाहिद अफरीदी गौतम गंभीर के चुनाव जीतने पर भी विवादित बयान दे चुके हैं। जिसका जवाब उस समय भी गंभीर ने व्यंग्य करके ही दिया था। उस दौरान शाहिद ने कहा था कि गौतम में अक्ल ही नहीं है फिर भी लोगों ने उन्हें वोट दे डाला है। जिस पर उस समय भी गौतम ने उन्हें करारा जवाब देते हुए कहा था, “शाहिद अफरीदी तुम बहुत मजाकिया हो। वैसे हम अभी भी पाकिस्तान के लोगों को इलाज कराने के लिए भारत का वीजा दे रहे हैं। मैं तुम्हें खुद मनोचिकित्सक के पास ले जाऊँगा।”

देश जनता से बनता है न कि जमीन के टुकड़ों से कहकर राहुल गाँधी ने ट्विटर पर कई लोगों को किया ब्लॉक

भाजपा सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 में किए गए बदलाव और जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश घोषित किए जाने पर पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने इस फैसले पर चुप्पी तोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा है। राहुल गाँधी ने फैसले का विरोध करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर को एकतरफा फैसले के चलते टुकड़ों में बाँटा गया है, यह संविधान का उल्लंघन है। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ेगा। 

राहुल गाँधी ने ट्वीट करते हुए लिखा, “जम्मू-कश्मीर को 2 हिस्सों में बाँटकर, जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों को जेल में डालकर और संविधान का उल्लंघन करके देश को एकजुट नहीं रखा जा सकता। देश उसकी जनता से बनता है न कि जमीन के टुकड़ों से। सरकार द्वारा शक्तियों का दुरुपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंंभीर खतरा साबित हो सकता है।”

राहुल गाँधी का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब पार्टी के दिग्गज नेता सरकार के इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं। बता दें कि, वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता जनार्दन द्विवेदी और मुंबई कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा के साथ ही रायबरेली से कॉन्ग्रेस विधायक अदिति सिंह ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। जनार्दन द्विवेदी ने पार्टी के रुख के विपरीत राय रखते हुए कहा कि सरकार ने एक ‘ऐतिहासिक गलती’ सुधारी है। द्विवेदी ने कहा कि यह राष्ट्रीय संतोष की बात है कि स्वतंत्रता के समय की गई गलती को सुधारा गया है। उन्होंने कहा कि यह बहुत पुराना मुद्दा है। स्वतंत्रता के बाद कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नहीं चाहते थे कि अनुच्छेद 370 रहे। उन्होंने कहा, “मेरे राजनीतिक गुरु राम मनोहर लोहिया शुरू से ही अनुच्छेद 370 का विरोध करते थे। मेरे व्यक्तिगत विचार से तो यह एक राष्ट्रीय संतोष की बात है।”

राहुल गाँधी ने लोगों का महत्त्व तो बतलाया लेकिन इसी मुद्दे पर उनसे सवाल करने वाले कइयों को ट्विटर पर दनादन ब्लॉक भी मार दिया। आप नीचे उनमे से कुछ का ट्वीट भी देख सकते हैं।

राहुल गाँधी का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब पार्टी के दिग्गज नेता सरकार के इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं। बता दें कि, वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता जनार्दन द्विवेदी और मुंबई कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा के साथ ही रायबरेली से कॉन्ग्रेस विधायक अदिति सिंह ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। जनार्दन द्विवेदी ने पार्टी के रुख के विपरीत राय रखते हुए कहा कि सरकार ने एक ‘ऐतिहासिक गलती’ सुधारी है। द्विवेदी ने कहा कि यह राष्ट्रीय संतोष की बात है कि स्वतंत्रता के समय की गई गलती को सुधारा गया है। उन्होंने कहा कि यह बहुत पुराना मुद्दा है। स्वतंत्रता के बाद कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नहीं चाहते थे कि अनुच्छेद 370 रहे। उन्होंने कहा, “मेरे राजनीतिक गुरु राम मनोहर लोहिया शुरू से ही अनुच्छेद 370 का विरोध करते थे। मेरे व्यक्तिगत विचार से तो यह एक राष्ट्रीय संतोष की बात है।”

मिलिंद देवड़ा ने इस पर अपनी राय रखते हुए कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अनुच्छेद 370 को उदार बनाम रूढ़िवादी बहस में तब्दील कर दिया गया। पार्टियों को अपनी विचारधारा से अलग हटकर इस पर बहस करनी चाहिए कि भारत की संप्रभुता और संघवाद, जम्मू-कश्मीर में शांति, कश्मीरी युवाओं को नौकरी और कश्मीरी पंडितों के न्याय के लिए बेहतर क्या है?”

इसके अलावा, अदिति सिंह ने कहा कि वो पूरी तरह से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के पक्ष में हैं। इससे जम्मू-कश्मीर को देश के मुख्यधारा में जुड़ने के लिए मदद मिलेगी। यह एक ऐतिहासिक फैसला है। इस पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। एक विधायक के तौर पर वो इस फैसले का स्वागत करती हैं।

लोकसभा में अपने ही नेता से खफ़ा हो गईं सोनिया गाँधी, पलट कर माँगा स्पष्टीकरण: देखें Video

लोकसभा में कॉन्ग्रेस सांसद दल के मुखिया अधीर रंजन चौधरी ने ऐसी बयानबाजी कर डाली, जिससे सत्ताधारी भाजपा के साथ-साथ उनके अपने संप्रग की अध्यक्षा सोनिया गाँधी भी नाराज़ हो गईं। उन्होंने कश्मीर मसले पर बिल लाने की सरकार की हैसियत को ही चुनौती दे डाली। अधीर रंजन चौधरी के अनुसार चूँकि कश्मीर मामला 1948 से संयुक्त राष्ट्र (UN) में लंबित है, तो भला यह आंतरिक मसला कैसे हो गया, और सरकार इस पर कोई बिल कैसे ला सकती है

उनके इस बयान पर भड़के गृह मंत्री और भाजपा सुप्रीमो अमित शाह ने तो उन्हें खरी-खोटी सुनाई ही, खुद सोनिया गाँधी भौंचक्की नज़र आईं। इंडिया टुडे के पत्रकार शिव अरूर ने सोनिया गाँधी के रिएक्शन का वीडियो ट्विटर पर शेयर किया। इसमें सोनिया गाँधी अधीर रंजन चौधरी की बातों से न केवल हैरान नज़र आतीं हैं, बल्कि पीछे पलट अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं से स्पष्टीकरण माँगती भी दिखतीं हैं

उनके इस बयान पर गृह मंत्री अमित शाह ने कॉन्ग्रेस को घेरते हुए कहा, “आप ये स्पष्ट कर दें कि ये कॉन्ग्रेस का स्टैंड है कि संयुक्त राष्ट्र कश्मीर को मॉनिटर कर सकता है।” इस पर निचले सदन में दोनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। शाह ने सदन में यह भी साफ़ किया कि वह जब भी “कश्मीर” बोलेंगे, तो उनका तात्पर्य पाकिस्तान और चीन के कब्ज़े वाले गुलाम कश्मीर से भी होगा।