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कुर्बानी पर PAK कप्तान का विवादित ट्वीट, ANI की संपादक ने पूछा- गोवंश से बात करते हो

हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच सीमा पर बढ़ते तनाव और कश्मीर में भी हिंदुस्तानी सुरक्षा बलों की गतिविधि का असर सोशल मीडिया पर भी दिखने लगा है। पाकिस्तान की क्रिकेट टीम के कप्तान सरफ़राज़ अहमद ने सोशल मीडिया पर ऐसा उकसावे वाला ट्वीट किया, जिसका साफ़ मकसद हिंदुस्तान की बहुसंख्य आबादी हिन्दुओं को भड़काना था। लेकिन ANI की सम्पादक स्मिता प्रकाश ने उलटे उन्हीं की चुटकी ले डाली।

‘बछड़े कुर्बान होने को बेताब’

सरफ़राज़ अहमद ने कल रात ट्वीट किया कि उनके बछड़े ईद-ए-कुर्बान पर कुर्बान होने के लिए ‘तैयार’ और ‘बेचैन’ हैं। साथ में उन्होंने एक तबेले में बँधे गौवंश की तस्वीर भी डाली।

यह साफ़ तौर पर हिन्दुओं को भड़काने और उकसाने के लिए की गई हरकत थी। पाकिस्तान और उनके द्वारा समर्थित हिंदुस्तानी जिहादी अक्सर हिन्दुओं (हिंदुस्तान के भी, और खुद अपने यहाँ के भी) का मज़ाक “गौमूत्र पीने वालों” कहकर उड़ाते हैं। पुलवामा के हमलावर आदिल डार से लेकर पाकिस्तान के नेता तक यही भाषा बोल चुके हैं

इसके अलावा हिन्दुओं की आस्था में गाय के अवध्य होने के कारण भी कई बार कट्टरपंथी इस्लामी केवल हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए गायों की हत्या करते रहते हैं। सरफ़राज़ का ट्वीट भी उसी भावना से लिखा गया प्रतीत होता है, जिसमें अपने मज़हब के त्यौहार की ख़ुशी मनाना नहीं, हिन्दुओं को नीचा दिखाना अलसी मकसद मालूम होता है।

‘गाय ने बताया या बछड़े से बात कर लेते हो?’

सरफ़राज़ अहमद की इस हरकत की प्रतिक्रिया में समाचार एजेंसी ANI की सम्पादक और पत्रकार स्मिता प्रकाश ने सरफ़राज़ अहमद से पूछा कि उन्हें कैसे पता बछड़ा अपना गला रेते जाने (हलाल होने) के लिए ‘बेताब’ है। उन्होंने क्या बछड़े से पूछा, या गाय ने उन्हें बताया?

उन्नाव रेप मामला: सीबीआई ने चार शहरों में तलाशे सबूत, MLA सेंगर के घर पर भी छापा

उन्नाव रेप पीड़िता की कार को टक्कर मारने के मामले में सीबीआई की टीम ने रविवार को उत्तर प्रदेश के चार शहरों में एक साथ छापेमारी की। सबूत की तलाश में लखनऊ, उन्नाव, बाँदा और फतेहपुर में 17 ठिकानों पर जॉंच एजेंसी ने दबिश दी।

सूत्रों ने बताया कि सीबीआई की एक टीम ने पीड़िता के गॉंव माखी में ग्रामीणों से पूछताछ की। माखी थाने में दस्तावेजों को खंगाला और पुलिसकर्मियों से पूछताछ की। जॉंच अधिकारी पीड़िता के वकील के पड़ोसियों से भी मिले। आरोपित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के घर और दफ्तर पर छापेमारी कर अहम साक्ष्य इकट्ठा किए।

धमकी देने के आरोप में सह आरोपी का बेटा गिरफ्तार

  • सबूत की तलाश में लखनऊ, उन्नाव, बाँदा और फतेहपुर में 17 ठिकानों पर सीबीआई ने दबिश दी।
  • पीड़िता के गॉंव माखी में ग्रामीणों से पूछताछ। माखी थाने में दस्तावेजों को खंगाला। पुलिसकर्मियों से पूछताछ। सीसीटीवी फुटेज खंगाले और फोरेंसिक सबूत इकट्ठा किए।
  • पीड़िता के वकील के पड़ोसियों से भी पूछताछ।
  • आरोपित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के घर और दफ्तर पर छापेमारी कर अहम साक्ष्य इकट्ठा किए।
  • सीतापुर जेल में बंद सेंगर से आज फिर हो सकती है पूछताछ।
  • फतेहपुर में कार को टक्कर मारने वाले ट्रक मालिक देवेंद्र किशोर पाल के घर और दफ्तर पर छापा, कई अहम दस्तावेज कब्जे में लिए।
  • बांदा में ट्रक ड्राइवर के माता-पिता से पूछताछ ।
  • मामले की सह आरोपी शशि सिंह का बेटा नवीन सिंह गिरफ्तार। नवीन पर पीड़िता के परिजनों ने धमकी देने का आरोप लगाया था।

सीतापुर जेल में बंद सेंगर से सीबीआई के अधिकारियों ने शनिवार को पूछताछ की थी। सूत्रों के मुताबिक आज फिर उससे जेल में पूछताछ हो सकती है। सीबीआई ने जेल प्रशासन से विधायक से मुलाकात करने के लिए जेल आने वाले लोगों का ब्योरा भी मॉंगा है। जॉंच टीम ने शनिवार को इस सिलसिले में आंगतुकों का रजिस्टर अपने कब्जे में ले लिया था।

सूत्रों ने बताया कि फतेहपुर में कार को टक्कर मारने वाले ट्रक मालिक देवेंद्र किशोर पाल के घर और दफ्तर में भी सीबीआई ने जाँच की। टीम ने कई अहम दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया है। सीबीआई की एक टीम बाँदा में ट्रक ड्राइवर के घर पहुॅंची और उसके माता-पिता से पूछताछ की। करीब दो घंटे तक जॉंच टीम वहॉं रही।

गौरतलब है कि 30 जुलाई को रायबरेली के गुरूबख्शगंज क्षेत्र में एक तेज रफ्तार ट्रक ने पीड़िता की कार को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में पीड़िता और उसके वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जबकि उसकी चाची और मौसी की मौत हो गई थी।

‘विधायक बनी रहूँगी लेकिन आम आदमी पार्टी से दे दूँगी इस्तीफ़ा’

चाँदनी चौक से आम आदमी की विधायक अलका लांबा का आखिरकार आम आदमी पार्टी से मोह भंग हो चुका है और वो जल्द ही इस्तीफा दे सकती हैं। अलका लांबा ने कहा कि उन्हें लगता है कि उन्हें इस बारे में लोगों से बात करनी चाहिए और फिर एक निर्णय पर आना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह तय किया गया है कि उन्हें आम आदमी पार्टी से सारे संबंध तोड़ लेने चाहिए और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे देना चाहिए। लांबा ने कहा कि जल्द ही वो लिखित में आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे देंगी। हालाँकि, उनका कहना है कि इसके बावजूद वो विधायक बनी रहेंगी।

बता दें कि, पिछले दिनों भी अलका लांबा ने आम आदमी पार्टी पर अपमानित करने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि उन्हें मीटिंग में नहीं बुलाया जाता है, बार-बार अपमानित किया जाता है। उन्होंने कहा था कि वो 20 साल कॉन्ग्रेस में रही और वहाँ भी संघर्ष किया, लेकिन आम आदमी पार्टी में उन्हें कभी सम्मान नहीं मिला। इस दौरान उन्होंने ये भी कहा था कि वो पार्टी छोड़ने का मन बना चुकी हैं और इसको लेकर 4 अगस्त को फैसला करेंगी कि वो निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में चुनाव लड़ेंगी या नहीं।

गौरतलब है कि, अलका लांबा और पार्टी नेतृत्व के बीच टकराव कोई नई बात नहीं है। वे कई मौकों पर अपनी ही पार्टी के फैसलों पर सवाल उठाती रहीं हैं। इस बीच, उन्होंने एक बार फिर से पार्टी छोड़ने की बात कही है। अलका लंबे समय से पार्टी से नाराज चल रही हैं और वह पार्टी लाइन के खिलाफ बयान देती रही हैं। लोकसभा चुनाव के बाद भी उन्होंने पार्टी के प्रदर्शन पर सवाल उठाए थे। 

इंदिरा के दुलारे जगमोहन कश्मीर के गुनहगार तो नेहरू-राजीव मसीहा कैसे?

“पिछले दिनों में जो घटनाएँ हुई हैं उससे जम्मू-कश्मीर और लेह-लद्दाख के लोग डरे हुए हैं। इससे 1990 की यादें ताजा हो गई हैं, जब वीपी सिंह की सरकार में बीजेपी ने जगमोहन को कश्मीर का राज्यपाल बनवाया था और फिर घाटी से कश्मीरी पंडितों को बसों में भर कर बाहर निकाला गया जो आज तक एक कलंक की तरह है।”
-गुलाम नबी आजाद, नेता विपक्ष, राज्यसभा

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रह चुके आजाद ने शनिवार को कॉन्ग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए यह बात कही। आजाद वही नेता हैं जिन्होंने बीते साल कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू होने के बाद कहा था ‘सेना का एक्शन नागरिकों के खिलाफ ज्यादा और आंतकियों के खिलाफ कम है।’ इस बयान के लिए उन्होंने सीमा पार खूब वाहवाही बटोरी थी। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने कहा था, “शुरू से ही हमारी राय वही है जो गुलाम नबी आजाद की है। हिंदुस्तान कश्मीर में राज्यपाल शासन लगाकर दोबारा जगमोहन युग की शुरुआत करना चाहता है और निर्दोषों का कत्लेआम करना चाहता है।”

सो, ताज्जुब नहीं कि आजाद ने कश्मीर की समस्या का ठीकरा जगमोहन के मत्थे मढ़ दिया। जम्मू-कश्मीर में जगमोहन की भूमिका पर गौर करने से पहले यह जानना जरूरी है कि जगमोहन को कसूरवार बताने की कोशिश कॉन्ग्रेसी पहले भी कर चुके हैं। ऐसा करना उनके लिए जरूरी भी है, क्योंकि इससे जवाहर लाल नेहरू से लेकर राजीव गॉंधी तक के बेतुके फैसलों पर पर्दा डल जाता है।

जैसा कि पत्रकार आदित्य राज कौल ने ट्वीट किया है, “2014 में वाराणसी में एक साक्षात्कार के दौरान ने गुलाम नबी आजाद ने मुझे जगमोहन के बारे में सवाल पूछने को कहा था ताकि वे भाजपा पर निशाना साध सकें।” कश्मीरी पंडितों के मसीहा जगमोहन को खलनायक साबित करने के लिए एक अन्य कॉन्ग्रेसी और केन्द्र में मंत्री रह चुके सैफुद्दीन सोज तो बकायदा एक किताब ‘Kashmir: Glimpses of History and the Story of Struggle’ भी लिख चुके हैं।

पंडितों के मसीहा, कॉन्ग्रेस के लिए खलनायक

अब आते हैं जगमोहन की भूमिका पर। वे दो बार कश्मीर के राज्यपाल रहे। आपातकाल के जमाने में उनकी गिनती संजय गॉंधी के वफादारों में होती थी। इंदिरा गॉंधी के भी वे आँख के तारे थे। उन्हें जम्मू-कश्मीर का पहली बार राज्यपाल इंदिरा ने तब बनाया था, जब वह फारूख अब्दुल्ला को हटाकर उनके बहनोई गुल शाह को मुख्यमंत्री बनाना चाहती थीं। रिश्ते में इंदिरा के भाई तत्कालीन राज्यपाल बीजू नेहरू ने ऐसा करने से इनकार कर दिया तो उनकी जगह जगमोहन लाए गए।

यह सही है कि दूसरी बार, उन्हें जब 1990 में कुछ महीनों के लिए जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया तो केन्द्र में वीपी सिंह की सरकार थी और वह भाजपा के समर्थन से चल रही थी। यह भी सच है कि उनके इस कार्यकाल में कश्मीरी पंडितों का बड़े पैमाने पर पलायन हुआ। लेकिन, इसका दूसरा पहलू यह भी है कि उनके राज्यपाल बनने से पहले 1987-88 से ही पंडितों ने घाटी छोड़ना शुरू कर दिया था। 14 सितंबर 1989 को भाजपा नेता पंडित टीका लाल टपलू की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इसके कुछ समय बाद ही जज नीलकंठ गंजू की हत्या कर दी गई। गंजू ने जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के नेता मकबूल भट्ट को मौत की सजा सुनाई थी। जुलाई से नवंबर 1989 के बीच 70 अपराधी जेल से रिहा किए गए थे। घाटी में हमें पाकिस्तान चाहिए। पंडितों के बगैर, पर उनकी औरतों के साथ जैसे नारे लग रहे थे।

ऐसे माहौल में श्रीनगर पहुॅंचे जगमोहन ने कश्मीरी पंडितों को घाटी से सुरक्षित निकलने का मौका मुहैया कराया, जिसके लिए पंडित उन्हें आज भी मसीहा मानते हैं। बाद में जगमोहन भाजपा में शामिल हो गए और वाजपेयी सरकार में मंत्री बने। जाहिर है इंदिरा के दुलारे को कॉन्ग्रेस का विलेन बनना ही था।

…और परिवार की प्रयोगशाला

कश्मीर की कहानी परिवारों की कहानी है। एक राजपरिवार और तीन राजनीतिक (नेहरू-गॉंधी, अब्दुल्ला और सईद) परिवार। बॅंटवारे के बाद पाकिस्तानी कबायली सेना ने हमला किया तो कश्मीर के महाराजा हरि सिंह (उनके बेटे कर्ण सिंह कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं) ने भारत के साथ विलय की संधि की। शेख अब्दुल्ला कश्मीर के प्रधानमंत्री बने। उन्हें नेहरू का समर्थन हासिल था। बाद में दोनों के रिश्तों में कड़वाहट आ गई। 1953 में अब्दुल्ला गिरफ्तार कर लिए गए।

बाद में नेहरू की बेटी इंदिरा ने शेख अब्दुल्ला से सुलह कर ली। उन्हें 1975 में कश्मीर का मुख्यमंत्री बनाया। यह रिश्ता इंदिरा ने शेख अब्दुल्ला के बेटे फारूक के साथ भी शुरुआत में निभाया। फिर इंदिरा ने 1984 में कैसे फारूख को हटाकर गुल शाह को सीएम बनवाया, ये आप ऊपर पढ़ चुके हैं। शाह ने जम्मू के न्यू सिविल सेक्रेटेरिएट एरिया के एक प्राचीन मन्दिर परिसर के भीतर मस्जिद बनाने की अनुमति दे दी ताकि मुस्लिम कर्मचारी नमाज पढ़ सकें। इस फैसले का जम्मू में विरोध हुआ और दंगे भड़क गए। घाटी में पंडितों पर अत्याचार का सिलसिला यहीं से शुरू हुआ।

इंदिरा की हत्या के बाद फारूक ने उनके बेटे राजीव से दोस्ती गांठी और 1986 में दोबारा सीएम बने। इधर, पंडितों के खिलाफ अलगाववादियों की साजिश चरम पर पहुॅंच गई थी। कई कश्मीरी पंडितों को मारा गया, लेकिन फारूक अब्दुल्ला ने कुछ नहीं किया। ऐसे वक्त में वे मार्तण्ड सूर्य मन्दिर के भग्नावशेष पर सांस्कृतिक कार्यक्रम करा रहे थे। इसी बीच, दिसंबर 8, 1989 को वीपी सिंह सरकार के मंत्री मुफ़्ती मुहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद अगवा कर ली गईं। बदले में आतंकी छोड़े गए।

इस तरह से कुछ परिवारों की गलती से बदतर हुए हालात पर काबू पाने के लिए जगमोहन दूसरी बार श्रीनगर भेजे गए। आलोचक कहते हैं कि सुरक्षित रास्ता देकर जगमोहन ने पंडितों को घाटी से पलायन के लिए प्रेरित किया। उनकी हिफाजत नहीं की। यानी, पंडितों को घाटी में मरने के लिए अकेले नहीं छोड़ना जगमोहन की गलती थी! बाद में भाजपा में शामिल होकर उन्होंने दूसरी गलती की और ‘सेक्युलर’ गिरोह के आसान निशाना बन गए!

Breaking: 9 की मौत, 16 घायल: अमेरिका में 12 घंटे के भीतर दूसरा हमला, अब तक कुल 30 की मौत

अमेरिका 12 घंटे के भीतर दो-दो भीषण हमलों से दहल उठा है। इस बार ओहायो राज्य के डेटन शहर में संदिग्ध बंदूकधारी ने रविवार (स्थानीय समय) को हमला कर नौ लोगों को मार डाला है, और 16 अन्य को घायल कर दिया है। द गार्जियन के मुताबिक हमलवार खुद भी मारा गया है।

तीसरी घटना

न्यू यॉर्क टाइम्स के मुताबिक यह एक हफ्ते में अमेरिका में सामूहिक गोलीकांड की तीसरी घटना है। समाचार पत्र ने यह भी लिखा है कि रात 1 बजे शुरू हुए इस हमले को पुलिस की फौरन कार्रवाई के चलते बहुत जल्दी काबू में कर लिया गया। हमला ईस्ट 5th स्ट्रीट पर हुआ है। घायलों को मियामी वैली अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

इसके पहले कल ही टेक्सास में एक शॉपिंग मॉल में भारी गोलीबारी की घटना में 20 लोगों के मारे जाने की खबर आई थी। साथ ही 26 लोग घायल हुए थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गोलीबारी की यह घटना अल पासो इलाके के सीएलो विस्ता मॉल में हुई।

TMC सांसद नुसरत जहां की तीज पर भड़के इस्लामी कट्टरपंथी

तृणमूल सांसद और बांग्ला अभिनेत्री नुसरत जहाँ को एक बार फिर कट्टरपंथियों की असहिष्णुता का शिकार होना पड़ा है। इस बार निशाने पर उनका सिंधारा (हरियाली) तीज मनाना है, जिसके लिए मजहबी कट्टरपंथियों ने उन्हें आड़े हाथों लिया और जम कर खरी-खोटी सुनाई।

इंस्टाग्राम फोटो पर बवाल

नुसरत जहां ने जैन धर्मावलम्बी और कोलकाता के बड़े कपड़ा व्यापारी निखिल जैन से हाल ही में शादी की है। 19 जून को हुई इस शादी के बाद वे अपने ससुराल के कई रीति-रिवाज निभा रही हैं। इसी शृंखला में उन्होंने कल (3 अगस्त, 2019) को हुई सिंधारा तीज, जिसे हरियाली तीज भी कहते हैं, पर यह त्यौहार मनाते हुए अपनी और अपने पति की तस्वीर इंस्टाग्राम पर शेयर कीं।

इससे भड़के इस्लामी कट्टरपंथियों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। किसी ने पूछा कि वे हिन्दू हैं या कुछ और, तो किसी ने कहा कि वो हिन्दुओं की तरह सिन्दूर लगाती हैं, इसलिए उसे (यूज़र को) नुसरत पर शर्म आती है। किसी ने पूछा कि वे इस्लाम का पैगाम भूल गईं क्या?

साभार: NBT गाज़ियाबाद संस्करण, 4 अगस्त 2019

मुफ़्ती शरीफ खान ने तो उन्हें इस्लाम से ही खरिज करते हुए कह दिया कि केवल नाम रखने से कोई इस्लाम का अनुयायी नहीं हो जाता है। इसके पहले भी बरेलवी मसलक के उलेमा बशीरहाट की सांसद नुसरत जहां को इस्लाम से ख़ारिज कर चुके हैं

होटल में करने वाले थे मीटिंग, पुलिस ने मना कर दिया… अब घर पर करेंगे: महबूबा मुफ्ती

जम्मू-कश्मीर के हालात पर जहाँ अफ़रा-तफ़री का माहौल है, वहीं नेताओं और सियासी खेमें में एक अजीब सा बेचैनी का माहौल बना हुआ है। राज्य में 35 हज़ार अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती के बीच एक ही चर्चा निकलकर सामने आ रही है कि आख़िर कश्मीर में क्या होने वाला है। 

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) नेता महबूबा मुफ्ती ने बताया कि राजनीतिक पार्टियों ने आज एक होटल में बैठक करने का फ़ैसला लिया, लेकिन पुलिस ने अडवाइजरी जारी की है कि होटल में कोई राजनीतिक बैठक न की जाए। इसलिए जो बैठक होटल में होने वाली थी वो आज शाम 6 बजे मेरे आवास पर बैठक होगी

केंद्र पर निशाना साधते हुए पीडीपी नेता ने कहा कि हमने इस देश के लोगों समझाने का प्रयास किया था कि अगर 35A या 370 से छेड़छाड़ करेंगे तो इसके क्या परिणाम होंगे। हमने अपील भी की है, लेकिन केंद्र की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिला है। वो ये भी नहीं कह रहे हैं कि सब कुछ ठीक हो जाएगा।

इसके अलावा, महबूबा मुफ़्ती ने मोदी सरकार के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अख़्तियार करते हुए कहा कि यात्रियों, पर्यटकों और छात्रों को कश्मीर से जाने को कहा गया है, कश्मीरियों को राहत देने की कोशिश नहीं की जा रही है। कहाँ गई इंसानियत, कश्मीरियत और जम्हूरियत?”

मेरे बाप को मार डाला, लाखों की रोजी-रोटी-बिजनेस छीन ली… आपको दोस्त की चिंता है राजदीप? – बॉलीवुड एक्टर

बॉलीवुड अभिनेता संजय सूरी ने पत्रकार राजदीप सरदेसाई को सोशल मीडिया पर आईना दिखा दिया। राजदीप ने कश्मीर में ‘होटल वालों के बिज़नेस’ की चिंता जताने की आड़ में सरकार को कश्मीर मुद्दे पर घेरने की कोशिश की थी, लेकिन संजय सूरी ने उन्हें जता दिया कि जिन कश्मीरियों की चिंता राजदीप को खाए जा रही है, उनसे कहीं अधिक तकलीफ कश्मीरी हिन्दुओं ने झेली है।

‘मेरे दोस्त का बिज़नेस बर्बाद’

राजदीप सरदेसाई, जो इंडिया टुडे ग्रुप के सलाहकार सम्पादक (कंसल्टिंग एडिटर) हैं, ने कश्मीर में सरकारी गतिविधियों पर आपत्ति जताते हुए बताया था कि कैसे सुरक्षा बलों की घाटी में आवाजाही बढ़ने और गैर-स्थानीय निवासियों को घाटी जल्दी-से-जल्दी छोड़ देने की सरकारी सलाह से उनके अनाम होटल मालिक मित्र का बिज़नेस चौपट हो गया है। उन्होंने यह टिप्पणी ट्विटर पर की थी।

‘शुक्र मनाइए फतवा नहीं है’

इस पर बॉलीवुड अभिनेता संजय सूरी ने उनके ट्वीट को रीट्वीट करते हुए कहा कि कम-से-कम सरकार सलाह दे रही है, फतवा नहीं। संजय ने याद किया कि कैसे उनके आरा मिल का सफल व्यापार चलाने वाले पिता को जिहादियों ने मार डाला था। उनकी नर्सरी चलाने वाली वनस्पतिशास्त्री माँ का भी काम-धंधा चौपट हो गया। लाखों का बिज़नेस बर्बाद हो गया।

इसरो ने जारी की Chandrayaan-2 द्वारा ली गई पृथ्वी की बेहद खूबसूरत तस्वीरें

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान-2 विक्रम लैंडर द्वारा कैप्चर की गई पृथ्वी की तस्वीरों का पहला सेट जारी किया है। यह तस्वीरें इसरो द्वारा माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर रविवार (4 अगस्त 2019) को जारी की गईं।

चंद्रयान-2 LI4 कैमरे द्वारा ली गई तस्वीरों में पृथ्वी को बड़ी ही ख़ूबसूरती के साथ क़ैद किया गया है। यह तस्वीरें शनिवार (3 अगस्त) को ली गईं।

बता दें कि इसरो ने 2 अगस्त को भारत के मून स्पेसक्राफ्ट चंद्रयान-2 की ऑर्बिट को चोथी बार सफलतापूर्वक बढ़ाया था। भारतीय स्पेस एजेंसी ने इसकी जानकारी देते हुए कहा था कि चंद्रयान-2 की कक्षा को 646 सेकेंड के लिए ऑनबोर्ड मोटर्स को चालू करके 277 X 89,472 किलोमीटर तक बढ़ा दिया गया।

इसके ऑर्बिट को 6 अगस्त को दोपहर 2.30 से 3.30 के बीच में पाँचवीं बार बढ़ाया जाएगा। ग़ौरतलब है कि चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को भारत के हेवी लिफ्ट रॉकेट जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल-मार्क तीन (GSLV MK3) के ज़रिए 170 X 45,475 किलोमीटर की कक्षा में इंजेक्ट किया गया था।

अमित शाह की हाई लेवल मीटिंग: सत्र के बाद कश्मीर दौरा, विपक्षी दलों में जबरदस्त हलचल

जम्मू कश्मीर में जारी तेज सियासी हलचल के बीच अब खबर आ रही है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 2 दिवसीय यात्रा के लिए जम्मू कश्मीर जाएँगे। जानकारी के मुताबिक, संसद सत्र समाप्त हो जाने के बाद अमित शाह 2 दिवसीय यात्रा के लिए जम्मू कश्मीर जाएँगे और राज्य की स्थिति पर समीक्षा बैठक करेंगे। 

फिलहाल, संसद भवन गृह मंत्रालय की उच्चस्तरीय बैठक जारी है। गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में जारी इस बैठक में एनएसए अजीत डोभाल और गृह सचिव राजीव गाबा भी मौजूद हैं। 

संसद का वर्तमान सत्र 7 अगस्त तक के लिए बढ़ा दिया गया है। पहले ये 27 अगस्त जुलाई को समाप्त होने वाला था। लेकिन, केंद्र सरकार ने तीन तलाक समेत अन्य बिलों को इसी सत्र में पास करवाने के लिए संसद सत्र बढ़ाने का फैसला लिया। अब दोनों सदनों का सत्र 7 अगस्त को खत्म होगा। यानी कि अमित शाह इसी महीने कश्मीर के दौरे पर जा सकते हैं।

अमित शाह का यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। हालाँकि, अभी आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि नहीं हो पाई है कि अमित शाह का दौरा कितने दिन का होगा, लेकिन माना जा रहा है कि वे दो दिन के लिए वहाँ पर ठहरेंगे। इस दौरान उच्चाधिकारियों से बातचीत के अलावा केंद्रीय गृहमंत्री स्थानीय जन प्रतिनिधियों से भी बातचीत करेंगे। कश्मीर में अतिरिक्त सैन्य बलों की तैनाती, अमरनाथ यात्रा को रोकना और सैलानियों व दूसरे राज्यों के नागरिकों को वापस आने की एडवायजरी के बीच अमित शाह के दौरे ने राजनीतिक दलों में जबरदस्त हलचल मचा दी है।