बिजली चोरी के एक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने अनोखी सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी को एक महीने में 50 पौधे लगाने का आदेश दिया है। केंद्रीय रिज रिजर्व वन, बुद्ध जयंती पार्क, वंदेमातरम मार्ग पर ये पौधे लगाए जाएँगे। साथ ही इसकी रिपोर्ट वन्य उपसंरक्षक (पश्चिम) के पास पेश करनी होगी।
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि जो भी पौधे लगाए उनकी उम्र कम से कम 3 साल होनी चाहिए और सभी पौधे अलग-अलग प्रजाति के होने चाहिए। आरोपी को जामुन, बरगद, आम, महुआ, गूलर, पिलखन और सागौन वगैरह के 50 पौधे लगाने होंगे। वन विभाग को इन पौधों की 6 महीने तक देखभाल करनी होगी।
कोर्ट ने आरोपी और वन विभाग दोनो को आदेश दिया है कि पौधे लगने का काम समाप्त होने के बाद वो शपथ-पत्र दाखिल करें। 6 महीने तक पौधों की देखभाल के बाद उनकी तस्वीर भी वन विभाग को पेश करने को कहा गया है। आदेश का पालन नहीं होने पर आरोपी को दोबारा मुकदमा चलाए जाने की चेतावनी दी है।
सार्वजनिक पोल से बिजली चोरी के आरोपी ने मुकदमा बंद करने के लिए कोर्ट से गुहार लगाई थी। उसका कहना था कि उसने दुकान किराए पर दी थी और किराएदार ने बिना उसकी जानकारी के बिजली चोरी की।
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में सोमवार (अगस्त 12,2019) को हरिद्वार से जल लेकर लौट रहे काँवड़ियों पर रास्ते में कुछ उपद्रवियों ने जमकर पथराव किया। इस पत्थरबाजी में कुछ काँवड़िए बुरी तरह घायल हो गए।
जानकारी के मुताबिक काँवडियों को बचाने पहुँची पुलिस पर भी उपद्रवियों ने पत्थर फेंककर हमला किया। इस घटना के बाद इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किए गए हैं। लेकिन तनाव की स्थिति बरकरार है
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो घटना इस्लामनगर क्षेत्र के बदायूं-बिसौली रोड पर हुई। यहाँ काँवड़िए अपनी ट्राली के साथ ईदगाह की तरफ़ से गुजर रहे थे कि तभी नमाज के दौरान ट्रॉली को निकाले जाने को लेकर और ट्रैक्टर पर डीजे बजाने पर उपद्रवियों द्वारा पथराव कर दिया गया। इसमें कई काँवड़िए घायल हुए।
पत्थरबाजी के बाद इलाके में तनाव की स्थिति है। पुलिसवालों ने भी पत्थरबाजों से भागकर अपनी जानें बचाईं जबकि काँवड़ियों ने 2 किलोमीटर तक अपनी ट्रॉली भगाकर अपनी जान बचाई।
पूरी घटना के बाद गुस्साए काँवड़ियों ने मौक़े पर सड़क को जाम कर दिया। जानकारी मिलने पर आला अधिकारी वहाँ पहुँचे, और अब पुलिस द्वारा काँवड़ियों को समझाने का प्रयास जारी है।
रिलायंस समूह के चेयरमैन मुकेश अम्बानी ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में निवेश को लेकर योजनाएँ तैयार करने की बात कही है। अम्बानी ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में उद्योग स्थापित करने और रोजगार को बढ़ावा देने का जो स्वप्न देखा है, रिलायंस परिवार उसे पूरा करने में सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है। अम्बानी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की जनता व क्षेत्र के विकास की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए वह प्रतिबद्ध हैं।
भारत के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अम्बानी ने वादा किया कि वे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए एक स्पेशल टास्क फाॅर्स का गठन करेंगे जो क्षेत्र के विकास कार्यों को बढ़ावा देने की योजनाएँ तैयार करेंगे। अम्बानी ने कहा कि आने वाले दिनों में दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के लिए रिलायंस परिवार की तरफ से कई बड़ी घोषणाएँ की जाएँगी। ज्ञात हो कि अगस्त 8, 2019 को राष्ट्र के नाम सम्बोधन में पीएम मोदी ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख के विकास के लिए कंपनियों से आगे आने की अपील की थी।
प्रधानमंत्री ने कंपनियों ने कहा था कि वे दोनों केंद्र शासित प्रदेशों की जनता के लिए नए अवसर पैदा करें। मुकेश अम्बानी ने एक और बड़ी घोषणा करते हुए पुलवामा हमले में वीरगति को प्राप्त जवानों के बच्चों की शिक्षा-दीक्षा की ज़िम्मेदारी लेने की बात कही। मुकेश अम्बानी ने कहा कि पुलवामा के बलिदानियों के सम्मान में रिलायंस परिवार ने उनके परिवार की आजीविका व उनके बच्चों की शिक्षा-दीक्षा की ज़िम्मेदारी लेने का निर्णय लिया है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अम्बानी ने उक्त बातें कम्पनी की 42वीं जनरल एनुअल मीटिंग (AGM) में कही। अम्बानी ने देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में रिलायंस द्वारा बड़ा योगदान देने का वादा किया। जब मुकेश अम्बानी ने बैठक को सम्बोधित करते हुए पुलवामा का जिक्र किया तब पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा।
रिलायंस की 42वीं वार्षिक बैठक के दौरान मुकेश अम्बानी का पूरा सम्बोधन
रिलायंस की जिओफाइबर योजना की बात करते हुए मुकेश अम्बानी ने कहा कि इसके लिए 1600 शहरों से 1.5 करोड़ से भी ज्यादा लोगों ने रजिस्टर किया है। अम्बानी के अनुसार, जिओफाइबर के जरिए 1 जीबी प्रति सेकेण्ड की दर से डेटा स्पीड मिलेगी। अम्बानी ने जिओ सेट-अप-बॉक्स लॉन्च करने की घोषणा की। अम्बानी ने कहा कि 2030 तक भारत 10 ट्रिलियन डॉलर की विशाल अर्थव्यवस्था बन सकता है और इस लक्ष्य को प्राप्त करना संभव है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भाँजे और कारोबारी रतुल पुरी के खिलाफ आयकर विभाग ने शिकंजा कस दिया है। आयकर विभाग ने बेनामी संपत्ति लेनदेन निषेध कानून, 1988 की धारा 24 (तीन) के तहत रतुल पुरी और उनके पिता दीपक पुरी की संपत्तियों को जब्त कर लिया है।
IT attaches FDI of USD 40 million of Ratul Puri, Deepak Puri; bungalow at Lutyens’ Delhi
जानकारी के मुताबिक, आयकर विभाग ने इस कार्रवाई के तहत दिल्ली के पॉश इलाके में 300 करोड़ रुपए के बंगले और चार करोड़ डॉलर की एफडीआई राशि जब्त की है। आयकर विभाग के अधिकारियों ने रविवार (अगस्त 11, 2019) को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि बंगला दिल्ली के लुटियन जोन के एपीजी अब्दुल कलाम रोड पर है और यह संपत्ति मोजर बेयर ग्रुप की कंपनी रामा एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर रजिस्टर्ड है, जिसके मालिक और प्रवर्तक रतुल पुरी के पिता दीपक पुरी हैं।
बता दें कि, आयकर विभाग अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर मामले के संबंध में धनशोधन के आरोपों की जाँच कर रहा है और रतुल पुरी के खिलाफ यह आयकर विभाग की इस तरह की दूसरी कार्रवाई है। इससे पहले आयकर विभाग ने रतुल पुरी के 254 करोड़ रुपए के बेनामी शेयर को जब्त किया था। अधिकारी ने बताया कि बेनामी प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन एक्ट के तहत रतुल के नाम पर बेनामी शेयर को जब्त करने का प्रोविजनल ऑर्डर जारी किया गया था। अधिकारी के मुताबिक, यह राशि ऑप्टिमा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड में एफडीआई निवेश के जरिए हासिल हुई।
न्यूज़लॉन्ड्री और टीमवर्क आर्ट्स द्वारा हर वर्ष ‘मीडिया रंबल’ का आयोजन किया जाता है। इस कान्क्लेव में ख़बरों और मीडिया इंडस्ट्री से सम्बंधित बातें की जाती हैं। 2-3 अगस्त को दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित इस सम्मलेन में ‘टीवी 9 भारतवर्ष’ के पूर्व संपादक विनोद कापड़ी ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान कापड़ी ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक रिपोर्टर को इसीलिए जॉब छोड़नी पड़ी थी क्योंकि मोदी-विरोधी स्टोरीज करने के लिए उसपर दबाव बनाए जा रहे थे।
कापड़ी से पूछा गया था कि क्या आज की मीडिया अपनी कवरेज से लोकतंत्र को नुकसान पहुँचा रही है? इसका जवाब देते हुए कापड़ी ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा मीडिया पर दबाव बनाकर अपना नैरेटिव चलाने की बातें कही जाती हैं लेकिन ये दबाव प्रत्येक सरकारों के दौरान रहा है। कापड़ी ने दावा किया कि आजकल सरकार के कुछ कहे बिना ही न्यूज़रूम में बैठे पत्रकार दबाव में रहते हैं और आजकल पत्रकार सरकार के नहीं बल्कि ख़ुद के ही दबाव में हैं।
न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यक्रम में कापड़ी का बयान
कापड़ी द्वारा यह बताना कि उनकी टीम के एक पत्रकार को इसीलिए अपनी जॉब छोड़ने को मजबूर होना पड़ा क्योंकि उस पर मोदी विरोधी कवरेज करने के लिए दबाव बनाया गया था, मीडिया के गिरोह विशेष की सच्चाई को उजागर करता है। विनोद कापड़ी ने इस घटना का जिक्र करते हुए कहा:
“2019 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी दौरे पर थे। उस समय ‘टीवी 9 भारतवर्ष’ के पत्रकारों की एक बैठक हुई जिसमें संस्थान की एडिटोरियल पॉलिसी के बारे में चर्चा हुई। मैंने अपने रिपोर्टर्स से कहा कि हमें सिर्फ़ ये चीजें दिखानी हैं कि किस तरह से गंगा अभी भी गन्दी है और सड़कों की हालत जर्जर है। मैंने रिपोर्टर्स से कहा कि प्रधानमंत्री के मंदिर दौरों को हमलोग कवर नहीं करेंगे।”
कापड़ी द्वारा ऐसी एडिटोरियल पॉलिसी थोपे जाने पर एक रिपोर्टर ने आपत्ति जताई। उसका कहना था कि कापड़ी मोदी विरोध के तहत एजेंडा चला रहे हैं। कापड़ी के अनुसार, उन्होंने उस रिपोर्टर को बताया कि वह एजेंडा नहीं चला रहे बल्कि सच्चाई दिखा रहे हैं। इस बैठक के अगले दिन उक्त रिपोर्टर ने जॉब छोड़ने का निर्णय लिया क्योंकि वह प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ एकतरफा कवरेज का हिस्सा नहीं बनना चाहता था।
कापड़ी ने यह भी दावा किया कि इस दौर में मीडिया इंडस्ट्री में ख़ुद ही अंदर से एक बड़ा दबाव है, बिना सरकार के कुछ कहे। ‘टीवी 9 भारतवर्ष’ अपने लॉन्च के समय से ही मोदी विरोध का एजेंडा चलाता रहा है। चुनाव के दौरान चैनल ने प्रधानमंत्री और भाजपा के ख़िलाफ़ एक तरह से प्रचार अभियान ही चला रखा था।
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस के एक पार्षद के चचेरे भाई को पूर्वी मिदनापुर के मारिशदा गाँव में भीड़ ने जमकर पीटा और उसके बाद चप्पलों की माला पहना कर घुमाया। ग्रामीणों की मानें तो पार्षद अतनु गिरी के भाई कंचन गिरी ने नौकरी दिलवाने के नाम पर उन लोगों से कट मनी के रूप में 1 करोड़ से अधिक रुपए लिए थे।
घटना का वीडिया बनाकर वायरल करने वाले समूह का दावा है कि अतनु गिरी के भाई ने कम से कम 100 ग्रामीणों से पैसे लिए थे। वहीं, अतनु गिरी का कहना है कि इस घटना के बाद से वह कंचन के संपर्क में नहीं थे।
मीडिया रिपोर्टों की मानें तो एक गाँव वाले ने बताया कि कंचन पिछले 4 सालों में नौकरी दिलाने के नाम उनके गाँव के कई निवासियों से 1 करोड़ से अधिक की वसूली कर चुका है। लेकिन जब कुछ समय बाद जब लोग नौकरियों के बारे में पूछने लगे तो उसने आना बंद कर दिया।
स्थानीय लोगों की मानें तो कंचन पास में ही रहता था, लेकिन उनसे मिलता नहीं था। शनिवार (10 अगस्त 2019) को लोगों ने उसकी कार को रोक लिया और उसे कार से बाहर निकाला।
लोगों ने दावा किया कि इस दौरान उन्होंने कंचन समेत एक ठेकेदार और एक संदिग्ध तृणमूल कार्यकर्ता की पिटाई की और बाद में उन्हें छोड़ दिया। वहीं, टीएमसी पार्षद अतनु ने अपने चचरे भाई के साथ सीधे संपर्क होने से इंकार किया है। अतनु ने मामले के संबंध में कहा, “मुझे इन नौकरी के आश्वासनों के बारे में नहीं पता था। मैं कंचन के संपर्क में नहीं रहता।”
हरियाणा के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले विश्वप्रसिद्ध महिला पहलवान बबीता फोगाट आज भाजपा में शामिल हो गईं। बबीता के साथ उनके पिता महावीर फोगाट ने भी पार्टी सदस्यता ली। दोनों ने दिल्ली में भाजपा नेता और केन्द्रीय राज्य मंत्री किरण रिजिजू की मौजूदगी में सदस्यता ली।
Delhi: Wrestler Babita Phogat and her father Mahavir Singh Phogat join Bharatiya Janata Party in the presence of Union Minister Kiren Rijiju. pic.twitter.com/p4itp7hxMX
द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित महावीर फोगाट ने सदस्यता ग्रहण करने से पहले हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा था कि उन्होंने काफी सोच-समझकर भाजपा में शामिल होने का फैसला किया है। उनका कहना है कि भाजपा सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म कर और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करके एक महान कार्य किया। साथ ही मनोहर लाल खट्टर की अगुवाई वाली हरियाणा सरकार ने पारदर्शी सरकार दी है और युवाओं की नियुक्ति निष्पक्ष तरीके से की है। अनुच्छेद 370 पर सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए भी बबीता ने ट्वीट किया था।
फोगाट परिवार के मुताबिक, बबीता ने हरियाणा पुलिस के इंस्पेक्टर के पद से इस्तीफा दे दिया है। ऐसी अटकलें हैं कि बबीता को दादरी जिले के बड़हरा या दादरी विधानसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है। इससे पहले महावीर दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) में स्पोर्ट्स विंग के प्रभारी थे।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है जिससे हमारी बहन बेटियों के बारे में गलत बोला गया हो मेरी मीडिया से प्रार्थना है कि उनके बयान को गलत तरीके से जनता के सामने पेश ना करें @mlkhattarhttps://t.co/9nsSYPGRJd
बता दें कि, बबीता फोगाट देश के लिए बहुतेरे पदक अपने नाम कर चुकी हैं। उनका परिवार दादरी के बलाली गाँव में रहता है। बबीता ने बीते दिनों मनोहर लाल खट्टर का समर्थन करते हुए कहा था, “हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है, जिससे हमारी बहन बेटियों के बारे में गलत बोला गया हो मेरी मीडिया से प्रार्थना है कि उनके बयान को गलत तरीके से जनता के सामने पेश ना करें।”
इराक के युद्ध प्रभावित क्षेत्र एरबिल से आने वाली दो मासूमों को दिल्ली के डॉक्टरों ने ईद के मौक़े पर रविवार को नई जिंदगी का तोहफा दिया है। जानकारी के मुताबिक दिल की बीमारी से जूझ रही इन दोनों बच्चियों में एक को सर्जरी के जरिए ठीक किया गया जबकि दूसरी को सिर्फ़ दवाई के माध्यम से नया जीवन प्रदान किया गया।
स्टैश आजाद खलील (2) और नवीन यासीन (7) नाम की इन दोनों बच्चियों को अगर यहाँ इलाज नहीं मिलता तो उनकी जान भी जा सकती थी, क्योंकि इराक के जिस इलाके से ये आतीं है, वहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी होने के कारण इनका उपचार नहीं हो पा रहा था। जिसके बाद नई दिल्ली स्थित इंडिया फाउंडेशन और इराक स्थित ब्रिंग होप ह्यूमैनिटेरियन के साझा प्रयासों से उन्हें दिल्ली लाया गया।
The girls, Staish Azad Khalil (2) and Naveen Yaseen (7), were critical and would not have survived long without medical attention, doctors said.https://t.co/qUqPQVqkeq
यहाँ गंगाराम अस्पताल के पेडिएट्रिक्ट कार्डिएक सर्जरी के चेयरमैन डॉ. राजा जोशी की अगुवाई में इलाज शुरू हुआ। जब जाँच हुई तो पता चला 2 साल की स्टैश का तो दिल का आधा हिस्सा ही जन्म से गायब है। जिस कारण वह बार-बार नीली पड़ती थी और उसको पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन न मिलने पर उसकी साँस भी फूलने लगती थी।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बच्ची की हालत देखने के बाद इकोकार्डियोग्राफी और कार्डिएक कैथीटेराइजेशन स्टडी के बाद सुनिश्चित किया गया कि स्टैश के लिए एक सर्जिकल विकल्प से सब ठीक हो सकता है।
इस जाँच के बाद ही डॉक्टर जोशी की अगुआई में सर्जरी को पूरा किया गया। बताया जा रहा है इस सर्जरी में स्टैश के दिल के पंप को लंग्स से जोड़ा गया है। जिसके बाद उसके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य है। साथ ही वह अब ठीक से साँस लेने में भी सक्षम है। लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक यह सर्जरी का पहला स्टेज था। अभी बच्ची की चार साल बाद एक और सर्जरी होगी।
लेकिन, फिलहाल उन्हें अपने घर जाकर ईद मनाने के लिए अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अब बच्ची को 4 साल बाद सर्जरी के लिहाज से भारत बुलाया जाएगा। स्टैश की माँ की मानें तो उन्हें बिलकुल उम्मीद नहीं थी कि यहाँ आकर इतने अच्छे इलाज के साथ उन्हें प्यार भी मिलेगा। वे यहाँ से बेहद संतुष्ट होकर घर लौट रही हैं। वहीं दूसरी बच्ची नवीन यासीन को अपनी दिल की बीमारी के लिए सर्जरी की आवश्कता नहीं पड़ी। उसे यहाँ के डॉक्टरों ने दवाई से ही ठीक कर दिया।
सेलिब्रिटी स्तंभकार शोभा डे पाकिस्तान के इशारों पर कश्मीर को लेकर प्रोपगेंडा रचती हैं। यह खुलासा नई दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रहे अब्दुल बासित ने किया है। बासित का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वे बता रहे हैं कि कैसे बुरहानी वानी के मारे जाने के बाद उन्होंने शोभा डे को लिखने के लिए राजी किया था।
आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहानी वानी को सुरक्षा बलों ने जुलाई 2016 में मार गिराया था। बासित वीडियो में कह रहे हैं कि बुरहान वानी की ‘शहादत’ के बाद यह देखा गया कि किस तरह से पैलेट गन्स का इस्तेमाल हुआ, इकॉनोमिक ब्लॉकेड हुआ, कश्मीर की इकॉनोमी बर्बाद हो गई थी। लेकिन भारत में ऐसा कोई शख़्स नहीं था जो कश्मीर की हालत का सही मायने में ज़िक्र कर सके। मेरे लिए यह चैलेंज था कि भारत के किसी जर्नलिस्ट को कश्मीर के हालात पर किसी अख़बार में कोई ‘अच्छा’ आर्टिकल लिखने के लिए राजी कर सकूँ। इसी वीडियो में बासित कहते हैं कि उन्होंने शोभा डे से इस मसले पर बात की और उन्होंने एक आर्टिकल लिखा था।
https://youtu.be/T53IGElN0rE
बासित ने शोभा डे के लेख की अंतिम लाइनों को ज़िक्र भी किया है, जिसमें उन्होंने लिखा था कि चलिए अब इस क्षेत्र में दर्द ख़त्म करें और कश्मीरियों को शांति से जीने दें, जिस सम्मान और सद्भाव के वो हक़दार हैं।
दरअसल, शोभा डे का यह लेख टाइम्स आफ़ इंडिया में 17 जुलाई 2016 को ‘Burhan Wani is dead but he’ll live on till we find out what Kashmir really wants’ शीर्षक से छपा था। इस लेख में उन्होंने कश्मीर के हालात पर विस्तृत रूप से लिखा था। मोटे तौर पर उनका कहना था कि बुरहान वानी को भले ही ‘अल्ट्रा-पेट्रियट’ आतंकी कहें या गद्दार, कश्मीर के लोगों का वो हीरो था, उसमें ‘करिज़्मा’ था। हिंदुस्तान के नेताओं को घेरते हुए उन्होंने लिखा था कि वे अपने घरों में आराम से बैठकर ‘शांतिप्रिय’ कश्मीरियों के बारे में खोखले भाषण देते हैं।
उन्होंने पूरे लेख में पाकिस्तान की ही लाइन पकड़े रखी- यहाँ तक कि हिंदुस्तान की सेना के जवानों को भी कश्मीरी पत्थरबाजों और जिहादियों के बराबर में खड़ा कर दिया।
अपने लेख के अंत में उन्होंने देश के नेताओं पर अपनी ‘अग्ली पॉलिटिक्स’ (गंदी राजनीति) के लिए कश्मीर की खूबसूरती को बर्बाद करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कश्मीर में जनमत संग्रह की भी वकालत की थी, जो हिंदुस्तान की कश्मीर को अपना हिस्सा मानने की नीति और इसी आशय से संसद से पारित प्रस्ताव के ठीक उल्टा था। और इसी की तारीफ़ अब्दुल बासित कर रहे थे।
कॉन्ग्रेस नेताओं के बाद अब आईएएस की नौकरी छोड़ राजनीति में आए शाह फैसल ने आर्टिकल 370 को लेकर विवादित बयान दिया है। फैसल ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को भड़काने का प्रयास करते हुए कहा है कि वे तब तक ईद नहीं मनाएँगे जब तक बेइज्जती का बदला नहीं ले लेते।
बौखलाए फैसल ने भारतीयों को चेताते हुए कहा है कि वे तब तक ईद नहीं मनाएँगे जब तक आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निरस्त करने और जम्मू-कश्मीर को दो केन्द्रशासित प्रदेशों में बॉंटने के फैसले से हुई ‘पीड़ा’ का बदला नहीं ले लेते।
उन्होंने ट्ववीट कर कहा है, “कैसी ईद। दुनिया भर के कश्मीरी अपनी जमीन पर अवैध कब्जे का शोक मना रहे हैं। तब तक कोई ईद नहीं मनेगी जब तक 1947 से हमसे छीनी गई हर चीज वापस नहीं ले ली जाती। जब तक हर अपमान का बदला पूरा नहीं होता ईद नहीं मनेगी।”
There is no Eid. Kashmiris across the world are mourning the illegal annexation of their land.
There shall be no Eid till everything that has been stolen and snatched since 1947 is returned back.
No Eid till the last bit of insult is avenged and undone.
फैसल का यह ट्वीट कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की सराहना मिलने के बाद सामने आया है। चिदंबरम ने अनुच्छेद 370 पर सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए फैसल के उस बयान का हवाला दिया था जिसमें उन्होंने इसे भारत सरकार द्वारा कश्मीरियों के साथ किया गया “सबसे बड़ा विश्वासघात” बताया था।
If Shah Faesal thinks so, imagine what millions of ordinary people of J&K think.
गौरतलब है सिर्फ़ शाह फैसल या घाटी में मौजूद अलगाववादी नेता ही नहीं, बल्कि आर्टिकल 370 का पॉवर खत्म होने पर देश की सबसे पुरानी राजनैतिक पार्टी कॉन्ग्रेस के चिदंबरम जैसे दिग्गज नेता भी लगातार भारत सरकार के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। जिस कारण शाह फैसल जैसे लोगों नफरत, डर और नकारात्मकता फैलाने के लिए एक नया अवसर मिल गया है।