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सऊदी अरब सहित कई मुस्लिम देशों ने पाकिस्तानी डॉक्टरों पर लगाई रोक, डिग्री पर उठे सवाल

सऊदी अरब सहित कई मुस्लिम देशों ने पाकिस्तान को झटका देते हुए उसके द्वारा दी जाने वाली मेडिकल पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री की मान्यता रद्द कर दी है। इससे पाकिस्तान में पढ़ाई करने वाली कई मेडिकल छात्रों के सामने भविष्य का संकट खड़ा हो गया है। सऊदी में प्रैक्टिस कर रहे पाकिस्तानी डॉक्टर्स को देश छोड़ने का आदेश दिया गया है।

2016 में सऊदी अरब ने पाकिस्तान के कई बड़े शहरों में इंटरव्यू कर डॉक्टरों की बहाली की थी। इसके अलावा पाकिस्तान के डॉक्टर्स अरब देशों में प्रैक्टिस करने जाते हैं और आगे की पढ़ाई के लिए भी वहाँ का रुख करते हैं। पाकिस्तान की एमएस और एमडी की डिग्री में खामियाँ गिनाते हुए सऊदी के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि ऐसे कोर्सेज में वहाँ स्ट्रक्चर्ड ट्रेनिंग प्रोग्राम की कमी है, जिससे वहाँ के डॉक्टर्स विभिन्न पदों पर बहाल किए जाने योग्य नहीं हैं। क़तर, यूएई और बहरीन ने भी पाकिस्तान की एमएस और एमडी की डिग्री की मान्यता रद्द कर दी।

सऊदी में कार्यरत कई डॉक्टरों को नोटिस थमा दिया गया है। इस नोटिस में कहा गया है कि यहाँ के नियम-क़ानून के मुताबिक आपकी डिग्री मान्य नहीं है। पाकिस्तान ने इन आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि ये देश के सबसे योग्य व जानकार डॉक्टरों का अपमान है। पाकिस्तान ने इसे झटका बताते हुए कहा है कि उसकी यूनिवर्सिटी के बारे में मनगढंत तथ्य पेश किए जा रहे हैं।

कई पाकिस्तानी डॉक्टरों ने दुःख व्यक्ति करते हुए कहा है कि उन्होंने पाकिस्तान में मेडिकल की डिग्री ली और फिर ट्रेनिंग में हिस्सा लिया, जिसके आधार पर उन्हें सऊदी अरब में नौकरी मिली। इस पूरी प्रक्रिया में कई वर्ष लग गए। अब ताज़ा निर्णय के बाद उनकी नौकरियाँ छिन गई हैं और वह देश लौटने को मजबूर हैं। पंजाब यूनिवर्सिटी में एमएस/एमडी प्रोग्राम 1914 में प्रारम्भ किया गया था और डॉक्टर जीबी कपूर इस डिग्री को प्राप्त करने वाले प्रथम व्यक्ति थे।

आतंक पर फिर बेनकाब हुआ पाकिस्तान, 26/11 का गुनाहगार हाफिज सईद जेल से बाहर

पाकिस्तान ने 26/11 मुंबई हमले के साजिशकर्ता हाफिज सईद को रिहा कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा दावा किया गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के अमेरिका दौरे से पहले 17 जुलाई को वह गिरफ्तार किया गया था। वह रावलपिंडी के कोट लखपत जेल में बंद था।

कई लोगों का मानना था कि इमरान खान के अमेरिका दौरे के मद्देनजर ही जमात-उद-दावा का मुखिया सईद गिरफ्तार किया गया है। हालॉंकि न्यूज एजेंसी एएनआई ने पाकिस्तानी मीडिया के हवाले से बताया है कि अब उसका मामला गुजरांवाला कोर्ट से पाकिस्तान के गुजरात ट्रांसफर कर दिया गया है। उसकी रिहाई की खबर ऐसे वक्त में आई है जब जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पास हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी होने के बावजूद हाफिज सईद के पाकिस्तान में खुलेआम घूमते रहने की खबरें पहले भी आती रही हैं। भारत द्वारा कई बार सबूत दिए जाने के बाद भी पाकिस्तान उस पर कार्रवाई करने से हिचकता रहा है। पहले भी उसे कई बार दिखावटी तौर पर कुछ दिनों के लिए गिरफ्तार किया जा चुका है।

ख़बरों के अनुसार, यह नौवीं बार था जब हाफिज सईद को गिरफ्तार किया गया या हिरासत में लिया गया। इस मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी अपनी किरकिरी करा चुके हैं। ट्रम्प ने कहा था कि हाफिज सईद को ‘खोज कर गिरफ्तार’ किया गया जिसके बाद लोगों ने ट्रम्प को याद दिलाया कि वह पाकिस्तान में छिप कर नहीं रहता बल्कि खुला घूमता है।

इस्लामाबाद में लगे शिवसेना के बैनर: ‘आज J&K लिया है, कल POK लेंगे’

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पर चर्चा के दौरान शिवसेना सांसद संजय राउत के बयान वाले पोस्टर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में कई जगहों पर लगे मिले। इनमें राजधानी का अतिसुरक्षित माना जाने वाला इलाक़ा भी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जिन इलाकों में पोस्टर लगाए गए वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के मुख्यालय के नजदीक हैं।

इस मामले में इस्लामाबाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज किया है। साथ ही रेड जोन इलाके में रेड डालकर तीन लोगों को हिरासत में लिया है। पाकिस्तान के जिला प्रशासन ने इस मामले में नगर निगम को भी नोटिस जारी करके 24 घंटों के अंदर जवाब माँगा है कि पोस्टरों को हटाने में 5 घंटे क्यों लगे?

गौरतलब है कि इस पोस्टर पर शिवसेना नेता संजय राउत का वो बयान लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था,”आज जम्मू और कश्मीर लिया है, कल बलूचिस्तान लेंगे, पीओके लेंगे और मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री अखंड भारत का सपना पूरा करेंगे।”

मीडिया की खबरों में थाना सेक्रेटिएट के इंचार्ज इंस्पेक्टर असजद महमूद ने बताया कि बैनर सिर्फ़ उनके इलाक़े में ही नहीं लगाए गए, बल्कि अन्य जगहों पर भी लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि जानकारी मिलने के बाद उन्होंने तुरंत बैनरों को उतारना शुरू कर दिया। पत्रकारों को इन पोस्टरों की तस्वीर लेने से मना कर दिया गया।

पुलिस ने रेड जोन में स्थित एक पाँच सितारा होटल के अलावा आसपास की इमारतों पर लगे सीसीटीवी कैमरों से रिकॉर्डिंग हासिल कर ली है, जिसमें एक आदमी को वहाँ के एफ-6 इलाके में ये पोस्टर लगाते दिख रहा है।

बता दें कि इस्लामाबाद में बैनर लगाने के लिए प्रशासन की अनुमति अनिवार्य है। इलाके में धारा 144 भी प्रभावी है।

370 पर पुलवामा दोहराने की धमकी देने के बाद डरे हुए पाकिस्तान ने बंद की अपनी वायुसीमा

प्रधानमंत्री निवास की भैंसे नीलाम कर और नान-रोटी के दामों से अर्थव्यवस्था सुधारने की कोशिश कर रहे इमरान खान ने जम्मू-कश्मीर पर भारत के शख्त निर्णय के बाद पाकिस्तानी संसद के संयुक्त सत्र में भारत को धमकी दी थी कि इसका अंजाम हिंदुस्तान को पुलवामा जैसे हमलों से भुगतना पड़ेगा, लेकिन अब वह खुद रक्षात्मक बैकफ़ुट पर आ गए हैं। पाकिस्तान ने पुलवामा का मज़ा चखाने के लिए हुई बालाकोट एयर-स्ट्राइक जैसे किसी कदम की पुनरावृत्ति की आशंका में अपनी वायुसीमा फिर से हिंदुस्तानी नागरिक हवाई जहाजों के लिए बंद करने की घोषणा की है।

टाइम्स ऑफ़ इस्लामाबाद में छपी एक खबर में पाकिस्तान एयर लाइन्स के प्रवक्ता मशूद तजवार के हवाले से दावा किया गया है कि चूँकि पाकिस्तान फरवरी के बालाकोट हमले जैसी प्रतिक्रिया से सशंकित है, इसलिए अपनी वायुसीमा को बंद करना ज़रूरी समझता है। उनके हवाले से दावा यह भी किया गया है कि हिंदुस्तान के लिए अपनी एयर-स्पेस खोलने का पाकिस्तान एयर लाइन्स को कोई खास फ़ायदा नहीं हुआ है। हिंदुस्तान जाने वाली फ्लाइटें चलाना कम यात्रियों के चलते घाटे का सौदा है।

अपने इस ट्वीट में बीबीसी से जुड़े रहे पत्रकार जान अचाकज़ाई दावा करते हैं पाकिस्तान ने अपनी हवाई सीमा बंद करने के अलावा अपने हाई कमिश्नर को हिंदुस्तान न लौटने का निर्देश दिया है।

‘ऑपरेशन बंदर’ के छद्म-नाम से हुए बालाकोट हवाई हमले के बाद पाकिस्तान ने अपनी हवाई सीमा हिंदुस्तानी हवाई जहाजों के लिए बंद कर दी थी। एक तरफ वह दावा करता रहा कि हिंदुस्तान की वायु सेना ने ‘केवल कुछ पेड़ जलाए’, दूसरी ओर हवाई सीमा खोलने के लिए शर्त भी लगा दी थी कि हिंदुस्तान वादा करे कि बालाकोट जैसा हमला दोबारा नहीं होगा। जुलाई में जाकर उसने अपनी वायु-सीमा फिर से खोली।

2024 तक रहने दो राष्ट्रीय पार्टी: तृणमूल और CPI ने EC से लगाई गुहार

तृणमूल कॉन्ग्रेस और सीपीआई (कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया) ने चुनाव आयोग से गुजारिश की है कि 2024 तक राष्ट्रीय पार्टी का उनका दर्जा बरकरार रखा जाए। दोनों दलों ने आयोग से कहा कि इस सम्बन्ध में कोई भी निर्णय 2024 में लोकसभा चुनाव संपन्न हो जाने के बाद ही लिए जाए।

हालिया लोकसभा चुनावों में ख़राब प्रदर्शन के बाद दोनों दलों को मिले ‘राष्ट्रीय पार्टी’ के दर्जे पर तलवार लटक रही है। इन दोनों दलों के अलावा शरद पवार की एनसीपी पर भी तलवार लटक रही है। 18 जुलाई को चुनाव आयोग ने इन तीनों पार्टियों को नोटिस जारी कर पूछा था कि उनका ‘राष्ट्रीय पार्टी’ का दर्जा क्यों ख़त्म नहीं किया जाए? इन दलों से 5 अगस्त तक जवाब देने को कहा गया था।

चुनाव आयोग द्वारा तय मानकों के अनुसार नेशनल पार्टियों को कम से कम चार राज्यों में लोकसभा चुनाव में कम से कम 6% मत प्राप्त करने होते हैं। अगर कम से कम तीन राज्यों में कुल लोकसभा सीटों की संख्या का 2% प्राप्त होता है, तो भी नेशनल पार्टी का दर्जा बरकरार रहता है। अगर कोई पार्टी इन दोनों ही शर्तों को पूरा करने में नाकाम साबित होती है तो उसे स्टेट पार्टी का ही दर्जा मिलेगा। अगर किसी पार्टी को 4 अलग-अलग राज्यों में स्टेट पार्टी का दर्जा मिला हुआ है, तो भी वह नेशनल पार्टी कहलाएगी।

तृणमूल कॉन्ग्रेस ने आयोग की नोटिस का जवाब देते हुए कहा है कि उसे नेशनल पार्टी का दर्जा 2016 में ही मिला है, अतः उसे कम से कम 2024 तक समय दिया जाना चाहिए। बसपा सहित कई अन्य दलों को रियायत देते हुए चुनाव आयोग ने उन्हें नेशनल पार्टी का दर्जा बचाए रखने के लिए अतिरिक्त समय दिया था। अगर किसी पार्टी से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा छिन जाता है तो वह एक ही चुनाव चिह्न पर पूरे देश में चुनाव लड़ने के योग्य नहीं रह जाती है।

भाजपा विधायक जी, शर्म नहीं आई ‘गोरी लड़कियों’ के बारे में बेहूदगी से बोलते हुए

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 का पावर खत्म होने के बाद उद्योगपतियों से लेकर आम जनता को वहाँ हर क्षेत्र में संभावनाओं का विस्तार दिख रहा है। सोशल मीडिया पर लोग सक्रियता से इस कदम की सराहना कर रहे हैं और इससे जुड़े कई विषयों पर चर्चा भी हो रही है। लेकिन इस गंभीर मुद्दे पर कुछ मीम भी शेयर हो रहे हैं, जिसमें कुछ सोशल मीडिया यूजर्स कश्मीर में प्लॉट लेने की बात कर रहे हैं, तो कुछ वहाँ बसने की। कुछ को ये फैसला कश्मीरी लड़कियों से इश्क फरमाने का N0C लग रहा है, तो कुछ में कश्मीरी दामाद बनने का उतावलपन दिख रहा है।

इन सूची में सिर्फ़ ओछी और घटिया मानसिकता से लबरेज सोशल मीडिया यूजर्स ही नहीं हैं, बल्कि इसमें नेताओं के नाम भी शामिल हैं। जी हाँ, भाजपा नेता और उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर के खतौली सीट से भाजपा विधायक विक्रम सिंह जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 खत्म होने के पीछे सिर्फ़ यही उपलब्धि समझते हैं कि अब वे वहाँ कि गोरी-गोरी लड़कियों से शादी कर सकेंगे।

वे खुलेआम जनता के बीच जाकर निहायत बेशर्मी से बयानबाजी करते हुए कह रहे हैं कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता 370 खत्म होने के बाद इसलिए उत्साहित हैं क्योंकि अब वह कश्मीर की गोरी लड़कियों से शादी कर पाएँगे। सोचिए, जिस पार्टी ने कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया, जिससे अन्य पार्टियाँ हमेशा बचती रहीं। उस पार्टी से जुड़ा यह नेताजी कैसी ओछी मानसिकता दिखा रहा है। उन्हें न पार्टी के उद्देश्य से कोई लेना-देना है, न देश से और न ही कश्मीर से। उन्हें सिर्फ़ गोरी लड़कियों से मतलब है। जो उनके लिए सुंदरता का मानक हैं और उनकी फैंटसी का चेहरा।

वायरल वीडियो में वह कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म होने पर खुशी मनाते नजर आ रहे हैं, लेकिन उन्हें शाय़द यही नहीं मालूम कि भारत सरकार ने ऐसा क्यों किया है। सोशल मीडिया की मीम मानसिकता से ग्रसित नेताजी अपनी पार्टी के शीर्ष नेताओं के बलिदान और उनके समर्पण को अपनी हँसी-ठिठोली में नकार चुके हैं, वह आतंकवाद की गंभीरता को गोरी लड़कियों से रिप्लेस कर चुके हैं। उन्हें कोई मतलब नहीं है कि उनके बयानों का असर पार्टी की छवि पर क्या पड़ेगा?

विक्रम सिंह का बयान सुनकर और सोशल मीडिया पर पसरे गंध को देखकर लगता है कि कुछ पुरूषों की मानसिकता सिर्फ़ लड़की और लड़की के रंग तक सीमित होती जा रही है। वह न केवल ऐसे बयान देकर खुद की दबी इच्छाओं को जगजाहिर कर रहे हैं, बल्कि सरकार द्वारा लिए बड़े फैसले की भी जगहँसाई करवा रहे हैं। इसके अलावा विरोधियों को जो बोलने का मौक़ा मिल रहा है वो अलग…।

विक्रम सिंह जैसे लोग प्रमाण हैं कि भाजपा के शीर्ष नेताओं की नीतियों और कार्यशैली से प्रभावित होकर जनता ने कुछ घटिया लोगों को भी सत्ता का हिस्सा बनवा दिया है जो न राजनीति की जमीन के लिए ठीक है और न ही इंसानियत के लिए।

वायरल वीडियो में विक्रम सैनी कहते नजर आ रहे हैं, “कार्यकर्ता बहुत उत्सुक हैं और जो कुँवारे हैं, उनकी शादी वहीं करवा देंगे, कोई दिक्कत नहीं है। क्या दिक्कत है? पहले वहाँ महिलाओं पर कितना अत्याचार था। वहाँ की लड़की अगर किसी उत्तर प्रदेश के छोरे (लड़के) से शादी कर ले, तो उसकी नागरिकता खत्म। भारत की नागरिकता अलग, कश्मीर की अलग… और जो मुस्लिम कार्यकर्ता हैं यहाँ पर, उनको खुशी मनानी चाहिए… शादी वहाँ करो न, कश्मीरी गोरी लड़की से। खुशी मनानी चाहिए। ये पूरे देश के लिए उत्साह का विषय है।”

हैरानी की बात ये है कि जब इस बयान के बाद मीडिया ने जोर देकर इस विषय पर उन्हें एहसास दिलाने की कोशिश की कि उन्होंने विवादित बयान दिया है, तब भी उन्होंने कहा, “मैंने कुछ गलत नहीं बोला। अब कोई भी बिना किसी विवाद के कश्मीरी लड़की से शादी कर सकता है। मैंने यही तो कहा है और यह सच्चाई है। यह कश्मीर के लोगों की आजादी है। इसलिए हमने मंगलवार को यह कार्यक्रम आयोजित किया। अब कश्मीरियों ने आजादी हासिल कर ली है।”    

वीडियो में विक्रम सैनी जनता को कहते नजर आ रहे हैं, “… कि मोदी जी आपने मेरा सपना पूरा कर दिया। पूरा भारत खुश है। सारी जगह नगाड़े बज रहे हैं। पूरा उल्लास है। चाहे वो लद्दाख हो, लेह हो। मैंने कल फोन किया… हमारे एक जानने वाले हैं। कोई मकान है…”

उनके मुताबिक वह कश्मीर में घर बनाना चाहते हैं क्योंकि वहाँ हर चीज़ खूबसूरत है, “जगह, पुरुष और महिलाएँ। सबकुछ।”

हम आजम खान जैसे नेताओं के सेक्सिस्ट कमेंट पर हैरान नहीं होते क्योंकि जिस पार्टी के वो नेता हैं उसके संस्थापक ही रेप जैसी घटनाओं को जस्टिफाई करते हैं, लेकिन भाजपा से जुड़े लोग भी जब ऐसी ही भाषा में बात करने लगे और वह भी 370 के संदर्भ में तो यह केवल महिलाओं को लेकर उनकी ओछी सोच ही नहीं है, बल्कि उनको भी नीचा दिखाता है जिन्होंने एक विधान-एक निशान के लिए अपनी जिंदगी खपा दी।

पार्टी ने अपनी कट्टर राष्ट्रवाद वाली छवि के कारण भले ही तथाकथित सेकुलर’ विपक्ष की बहुत आलोचनाएँ सहीं लेकिन महिलाओं के नाम पर इस तरह के कीचड़ पार्टी पर कभी नहीं उछले। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का जम्मू-कश्मीर से 370 खत्म करने के पीछे जो उद्देश्य था वह सबके सामने स्पष्ट है। पार्टी ने आतंकवाद से लड़ने के लिए और जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए इस अनुच्छेद को निष्प्रभावी किया है। पार्टी ने इस फैसले के साथ उस नासूर को ठीक करने का प्रयास किया है जिसने दशकों से हजारों जिंदगियों को प्रभावित किया, जिसने कश्मीरी पंडितों का पलायन करवाया, जिसने कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग होने के बावजूद भी संशय की स्थिति में बनाए रखा।

ये बात सच है कि कश्मीर में महिलाओं पर अत्याचार हुए। उन्हें प्रेम करने के नाम पर राज्य की सीमा में बाँधा गया। उनमें उनके हकों से वंचित करने का डर भरा गया। कभी इस आर्टिकल 370 के कारण किसी दूसरे राज्य के प्रेमी को अपनी जान गँवानी पड़ी तो कभी सब कुछ छोड़कर फरार होना पड़ा। लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाकर दूसरे युवकों को अवसर दिए है कि वो वहाँ जाए और लड़कियों से सिर्फ़ इसलिए शादी करें कि क्योंकि वो अव्वल कश्मीरी हैं और दूसरा गोरी हैं।

मोदी सरकार का फैसला उन प्रेमी जोड़ो को उनके हक दिलाने के लिए आया है जिन्होंने सीमा की परवाह किए बिना एक-दूसरे का हाथ थामा। न कि रंग-जाति-धर्म देखकर। 

शिक्षा के लिहाज से हो या फिर सुरक्षा के लिहाज से, प्रेम के लिहाज से हो या विकास के लिहाज से हर रूप में मोदी सरकार का फैसला उचित उद्देश्यों के तहत लिया गया है। सोशल मीडिया पर हतोत्साहित होकर यूजर्स द्वारा फैलाया गया गंध और विक्रम सिंह जैसे नेता सिर्फ़ इस बात का सबूत हैं कि इस फैसले के महत्व से कुछ लोग कितने बेखबर हैं। ऐसा नहीं होता तो इतने बड़े फैसले के बाद हमें ऐसे घटिया मीम और बयान नहीं देखने पड़ते।

विक्रम सिंह के बयान में न केवल पितृसत्ता का दंभ है, बल्कि गोरेपन को लेकर भारतीय समाज का पागलों वाला ऑब्सेशन भी है। साथ ही मूर्खतापूर्ण बयानबाज़ी से नित नए प्रतिमान स्थापित करने की नेताओं के बीच लगी होड़ का भी यह नमूना है।

Breaking: अफगानिस्तान में तालिबान का कार बम धमाका, 95 घायल

अभी-अभी खबर आ रही है कि अफगानिस्तान के काबुल पश्चिम में 95 लोग एक कार बम धमाके में घायल हो गए हैं। मृतकों की संख्या का पता नहीं चल पाया है। घायलों में महिलाएँ और बच्चें भी शामिल हैं। सुबह के ‘रश आवर’ (व्यस्त समय) में हुआ यह धमाका कार को एक पुलिस चेकपॉइंट पर रोके जाने के बाद हुआ। आंतरिक मंत्रालय के प्रवक्ता नसरत रहीमी ने बताया कि हताहतों में पुलिस और सेना के भी लोग हैं।

यह धमाका अप्रत्याशित था क्योंकि अमेरिका और तालिबान के सुलह के अंतिम समझौते के करीब पहुँचने की खबरें आ रहीं थीं।

यह डेवलपिंग स्टोरी है। सूचनाएँ मिलने पर इसे अपडेट किया जाएगा।

शिवलिंग पर पैर रखकर कराया फोटोशूट, यूपी पुलिस ने कहा- ‘आरोपितों की तलाश जारी’

उत्तर प्रदेश में धार्मिक भावनाएँ भड़काने के लिए 2 लोगों द्वारा भगवान शिव का अपमान करने का मामला सामने आया है। यदुनंदन पांडेय नामक व्यक्ति ने एक फोटो ट्वीट कर यूपी पुलिस को टैग किया और लिखा- “यह तस्वीर उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर स्थित कोरझा गाँव की है। हिन्दुओं की भावनाओं को SC/ST एक्ट को ढाल बनाकर कुचला जा रहा है।” अभिषेक आजाद नामक व्यक्ति ने भी इस फोटो को ट्वीट कर सीएम योगी आदित्यनाथ को टैग किया है।

तस्वीर में देखा जा सकता है कि 2 लोग शिवलिंग पर पाँव रख कर खड़े हैं। लोगों ने पुलिस से पूछा है कि उक्त मामले में क्या कार्रवाई की गई है? अम्बेडकर नगर पुलिस ने ट्वीट का जवाब देते हुए कहा कि जैतपुर थाने ने इस मामले में शिकायत दर्ज कर ली है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। हालाँकि, अभी तक दोनों आरोपितों की पहचान सामने नहीं आई है, इसीलिए फिलहाल व्यक्तिगत ट्वीट्स में बताए जा रहे पहचान की पुष्टि नहीं की जा सकती।

हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसमें हिन्दू प्रतीक चिह्नों और देवी-देवताओं का अपमान किया गया। कुछ दिनों पहले इरशाद नामक व्यक्ति द्वारा शिवलिंग पर पेशाब करने की बात सामने आई थी। ताज़ा मामले में पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।

Article370: महबूबा, उमर अब्दुल्ला पर मुराद अली ने दर्ज कराया देशद्रोह का मुकदमा

बिहार के बेतिया की सत्र अदालत में एडवोकेट मुराद अली ने कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों महबूबा मुफ़्ती, उमर अब्दुल्ला और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल का विरोध कर रहे अन्य नेताओं के खिलाफ देशद्रोह समेत कई संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। बकौल मुराद अली, इन नेताओं ने देश में शत्रुता और वैमनस्य बढ़ाने और हिंसा भड़काने वाले बयान दिए हैं।

24 सितंबर को सुनवाई

मुराद अली ने समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुआ बताया कि अदालत ने उनकी बात को सुना और केस न्यायिक मजिस्ट्रेट केके शाही के हवाले कर दिया। उन्होंने बताया, “मैंने मुकदमा भारतीय दंड विधान की धाराओं 124A (देशद्रोह), 153A (विभिन्न पंथिक समूहों, नस्लों, जन्मस्थान वालों, भाषाई समूहों और स्थान पर रहने वालों के बीच दुश्मनी बढ़ाना), 153B किसी भी समूह पहचान पर उनकी राष्ट्रीय निष्ठा पर सवाल उठाना या उनके हक़ छीनने की वकालत करना), 504 (अशांति भड़काने के इरादे से अपमानजनक बात कहना) और 120B (आपराधिक षड्यंत्र) में मुकदमा दर्ज कराया है।” मुराद ने बताया कि उनको अगली तारीख 24 सितंबर की मिली है।

मुराद ने कहा है कि विभिन्न संचार माध्यमों से मुफ़्ती और अब्दुल्ला ने देश की सरकार के ख़िलाफ़ जनता को भड़काते हुए 370 हटाने का विरोध किया है। उनके मुताबिक, “इन नेताओं ने देश के अन्य राज्यों के लोगों के बीच दुश्मनी बढ़ाने की कोशिश की है। उन्होंने देश की एकता और अखंडता चोट पहुँचाई है।”

गौरतलब है कि महबूबा ने भारत को कश्मीर में ‘कब्जा की हुई ताकत’ (occupation force) बताया था और कश्मीर को ‘मुस्लिमों का राज्य’ कहा था, वहीं उमर अब्दुल्ला ने भी इस बिल का विरोध किया था।

बाबरी मस्जिद के पैरोकार को CJI गोगोई ने फटकारा, कहा- मर्यादा में रहिए

सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मामले की नियमित सुनवाई का दौर बुधवार (अगस्त 6, 2019) से शुरू हो गया। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने निर्मोही अखाड़ा ने अपनी दलीलें रखीं। अखाड़ा ने अदालत को बताया कि ये ज़मीन बाबरी मस्जिद की नहीं है। अखाड़ा के वकील सुशील कुमार ने कहा कि उस स्थल को मस्जिद कहा ही नहीं जा सकता, क्योंकि वहाँ नमाज नहीं पढ़ी जाती है। अखाड़ा ने कहा कि राम जन्मस्थान का प्रबंधन और स्वामित्व हमेशा से निर्मोही अखाड़ा के पास ही रहा है।

इस दौरान बाबरी मस्जिद की तरफ से पैरवी कर रहे वकील राजीव धवन को सीजेआई गोगोई ने फटकार लगाई। निर्मोही अखाड़ा द्वारा दलील पेश किए जाने के दौरान धवन बीच में टोक रहे थे, जिसके बाद सीजेआई गोगोई ने उन्हें अदालत की मर्यादा बनाए रखने को कहा। इस पर धवन ने कहा कि वो सिर्फ़ अदालत द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे। सीजेआई गोगोई ने कहा- “सवाल का जवाब देने का एक लहजा होता है। अदालत के तौर-तरीकों से आप परिचित हैं।”

वहीं, निर्मोही अखाड़ा ने कहा कि वे सैकड़ों वर्षों से राम जन्मस्थान के आंतरिक परिसर से लेकर बाहरी परिसर में मौजूद ‘सीता रसोई’, ‘चबूतरा’ और ‘भंडार गृह’ का भी स्वामित्व रखते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सब उनके अधिकारों के दायरे में रहा है। अखाड़ा ने खुद को एक पंजीकृत संस्था बताते हुए कहा कि विवादित भूमि पर उसका दावा 1934 से है, जबकि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने इस पर अपना दावा उसके कई वर्षों बाद 1961 में किया था। वकील सुशील कुमार जैन ने कहा कि कई दशक पहले मुस्लिमों ने वहाँ नमाज पढ़ना बंद कर दिया था।

बता दें कि राम मंदिर मुद्दे की नियमित सुनवाई चालू हो गई है, जिसके अंतर्गत सप्ताह में 3 दिन सुनवाई की जाएगी। विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि कुछ ही महीनों में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय आ जाएगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमीन को तीनों पक्षों- निर्मोही अखाड़ा, रामलला विराजमान और सुन्नी वक्फ बोर्ड के बीच तीन हिस्सों में बाँटने का आदेश दिया था।