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कश्मीर में केन्द्र ने भेजे 10 हजार और जवान, 35A खत्म करने की अटकलें

केन्द्र सरकार ने घाटी में अर्ध सैनिक बलों की 100 और कंपनियॉं यानी 10,000 अतिरिक्त जवानों की तैनाती का फैसला किया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल के जम्मू-कश्मीर दौरे के बाद यह फैसला किया गया है। जवानों की अतिरिक्त तैनाती के साथ अनुच्छेद 35ए को खत्म किए जाने की अटकलों ने भी जोर पकड़ लिया है।

केन्द्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि अतिरिक्त जवानों की तैनाती राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति और सुदृढ़ करने के लिए की गई है। सीआरपीएफ़ की 50, सीमा सुरक्षा बल की 30 और बीएसएफ तथा आईटीबीपी की 10-10 कंपनियॉं तैनात होंगी। यह फैसला आतंकवाद के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर में अभी राज्यपाल शासन है। इससे पहले देशभर से केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 100 कंपनियों को 24 फरवरी को कश्मीर भेजा गया था। उस समय लोकसभा चुनाव के दौरान सुरक्षा-व्यवस्था का हवाला देते हुए तैनाती की गई थी। अमरनाथ यात्रा के लिए भी राज्य में करीब 40 हजार अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं। 

कश्मीरी नेता बेचैन

अतिरिक्त जवानों की तैनाती के केन्द्र सरकार के फैसले ने कश्मीरी नेताओं को बेचैन कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इसका विरोध करते हुए ट्वीट किया है कि केन्द्र घाटी में डर का माहौल पैदा कर रहा है।

उन्होंने कहा है, “घाटी में अतिरिक्त 10 हजार जवान तैनात करने का केन्द्र का फैसला लोगों के मन में भय पैदा कर रहा है। कश्मीर में सुरक्षा बलों की कोई कमी नहीं है। जम्मू-कश्मीर की समस्या राजनीतिक है जिसे सैन्य संसाधनों से नहीं सुलझाया जा सकता है। भारत सरकार को दोबारा सोचने और अपनी नीति बदलने की जरूरत है।”

आईएएस से नेता बने शाह फ़ैसल ने कहा है कि अर्धसैनिक बलों की 100 अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती से घाटी में बेचैनी बढ़ गई है। कोई नहीं जानता कि ऐसा क्यों किया गया है। कुछ बड़ा होने की अफवाहों को इस फैसले से हवा मिली है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी ‘डर का माहौल’ बनाने का आरोप लगाया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के महासचिव अली मोहम्मद असगर ने कहा है कि एक तरफ़ केंद्र और राज्यपाल कश्मीर के हालात सुधरने की बात कर रहे हैं और दूसरी ओर अतिरिक्त सैनिक घाटी में भेजे जा रहे हैं।

चर्च का फसाद: 80 साल की चिन्नमा को दफनाने के लिए ऑर्थोडॉक्स समूह ने उसकी बेटी को किया ब्लैकमेल

केरल में 80 साल की चिन्नमा को दफनाने के लिए उसकी बेटी को ऑर्थोडॉक्स समूह की तरफ से भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल किए जाने का मामला सामने आया है। चिन्नमा जैकबाइट समूह से जुड़ी हुईं थी। उनकी इच्छा थी कि मृत्यु के बाद उन्हें उसी कब्रिस्तान में दफनाया जाए जहॉं उनके पति दफन हैं।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक यह कब्रिस्तान सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से ऑर्थोडॉक्स समूह के नियंत्रण में है। चर्चों के प्रशासन और संचालन को लेकर दो गुटों में विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में फैसला सुनाते हुए कहा था कि 1934 के मलांकारा गिरजाघर के दिशा-निर्देशों के अनुसार 1,100 पेरिश और उनके गिरजाघरों को ऑर्थोडॉक्स गुट द्वारा नियंत्रित किया जाना चाहिए। पेरिश एक छोटा प्रशासनिक जिला होता है जिसका अपना चर्च और पादरी होता है। फैसले पर पूरी तरह अमल नहीं होने को लेकर इसी साल जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार पर नाराजगी भी जताई थी।

मीडिया रिपोर्टों में चिन्नमा की बेटी मिनी के हवाले से बताया गया है कि मॉं की मौत के बाद ऑर्थोडॉक्स समूह में शामिल होने के लिए उस पर दबाव डाला गया। ऐसा करने पर ही सेंट थॉमस ऑर्थोडॉक्स चर्च ने जैकबाइट समूह से जुड़ी उसकी मॉं को पारिवारिक क्रिप्ट में दफनाने की अनुमति देने की बात कही।

मिनी के अनुसार, “मेरी माँ ने मुझसे कहा था कि उन्हें किसी और कब्रिस्तान में नहीं दफ़नाया जाना चाहिए। वह फैमिली क्रिप्ट में दफ़न होना चाहती थीं, लेकिन अब इस पर यह ऑर्थोडॉक्स गुट का नियंत्रण है। जब मैंने उनसे संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि यदि मैं उनके समूह में शामिल हो जाऊँ तो वे मेरी माँ को दफ़न करने के लिए तैयार हैं।”

हालाँकि सेंट थॉमस चर्च के विक्टर फादर जोसेफ मलयिल ने इससे इनकार करते हुए कहा है कि अंतिम संस्कार मानवता की बात है। लेकिन, जेकोबाइट पक्ष के एक सूत्र ने दावा किया है कि ऐसे कई उदाहरण हैं, जब ऑर्थोडॉक्स समूह ने दूसरे गट के ईसाइयों को दफ़न करने से मना कर दिया।

ईसाई समुदाय के भीतर गुटबाजी बहुत अधिक है। दावों के उलट भारत में चर्चों को जाति के आधार पर भेदभाव के लिए जाना जाता है।

जाते-जाते दोबारा उपयोग में लाई जाने मिसाइलों पर काम करने का मंत्र दे गए थे कलाम

भारतीय मिसाइल प्रोग्राम के जनक कहे जाने वाले एपीजे अब्दुल कलाम की आज पुण्यतिथि है। अपनी मौत से एक महीने पहले उन्होंने रक्षा अनुसंधान एवं संगठन (DRDO) के मौजूदा प्रमुख सतीश रेड्डी को दोबारा उपयोग में लाई जाने वाली मिसाइल प्रणाली पर काम करने की सलाह दी थी। उस समय रेड्डी रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार थे।

रेड्डी ने बताया कि कलाम के निधन से महीने भर पहले उन्होंने उनसे उनके आवास पर मुलाकात की थी। इस दौरान कलाम ने उन्हें दोबारा उपयोग में लाई जाने वाली मिसाइलों पर काम का सुझाव दिया था। एक ऐसी मिसाइल जो पेलोड ले जा सके, फिर वापस आ जाए और दूसरा पेलोड ले जाए। उन्होने रेड्डी से कहा कि इस तरह की प्रणाली पर काम करिए।  

DRDO प्रमुख ने बताया कि पहली बार एक युवा वैज्ञानिक के तौर पर वे 1986 में कलाम से मिले थे। 2012 में डीआरडीओ के तत्कालीन प्रमुख वीके सारस्वत ने दूरदर्शन को दिए साक्षात्कार में कहा था कि भारत दोबारा उपयोग में लाई जा सकने वाली मिसाइल प्रणाली विकसित करने की योजना बना रहा है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ‘फिर से उपयोग में लाए जा सकने वाले प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी प्रदर्शक’ (आरएलवी-टीडी) का सफल परीक्षण कर चुका है।

‘अग्नि’ मिसाइल देने वाले पूर्व राष्ट्रपति कलाम का IIM शिलॉन्ग में लेक्चर देते वक़्त दिल का दौरा पड़ने से 27 जुलाई 2015 को 83 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। 1981 में उन्हें पद्म भूषण, 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

अगस्ता वेस्टलैंड मामला: गिरफ़्तारी के डर से कमलनाथ का भांजा हुआ ED के दफ्तर से फरार

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी प्रवर्तन निदेशालय की कस्टडी से फरार हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक अगस्ता वेस्टलैंड मामले में पूछताछ के मद्देनजर ईडी ने उन्हें समन भेजकर बुलवाया था। जिसके बाद वह शनिवार (जुलाई 27, 2019) को ईडी के दफ्तर तो पहुँचे, लेकिन जब अधिकारियों ने उनसे इंतजार करने को कहा तो वह वहाँ से बिना कुछ बताए चले गए। बताया जा रहा है कि पुरी वीवीआईपी चॉपर घोटाले में गिरफ्तारी के डर से फरार हुए हैं।

गौरतलब है इससे पहले भी अप्रैल महीने में प्रवर्तन निदेशालय ने वीवीआईपी घोटाले में रतुल पुरी को पूछताछ के लिए बुलाया था। उनपर आरोप है कि अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले में उनकी कंपनी से दुबई रकम ट्रांसफर की गई थी। इसके अलावा इस मामले में हाल में सरकारी गवाह बने बिचौलिए और दुबई के कारोबारी राजीव सक्सेना द्वारा दर्ज बयान में पुरी का नाम आया था। जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय के विशेष लोक अभियोजक डीपी सिंह और एन के मट्टा ने दिल्ली की विशेष अदालत को बताया था कि एजेंसी ‘आरजी’ नाम के व्यक्ति की पहचान करना चाहती है।

दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक रतुल पुरी इस मामले में ईडी के अधिकारियों को पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे थे। जिसके कारण ईडी उन्हें गिरफ्तार करना चाहती थी। रतुल को अपनी गिरफ्तारी की भनक लग चुकी थी, इसलिए वह अधिकारियों को चकमा देकर फरार हुए। दफ्तर से निकलने के बाद रतुल दिल्ली की विशेष अदालत पहुँचे, जहाँ उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की। इस याचिका की सुनवाई आज अदालत में होगी।

मीट कारोबारी मोइन कुरैशी मामले में सतीश बाबू गिरफ्तार, CBI को घूस देने का किया था दावा

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मोइन कुरैशी केस में हैदराबाद के कारोबारी सतीश बाबू सना को दिल्‍ली में गिरफ्तार कर लिया। इसकी जानकारी प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने दी। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सतीश को मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (PMLA) के प्रावधानों के तहत शुक्रवार (जुलाई 26) की देर रात गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि सना से कुछ घंटों तक पूछताछ की गई और जाँच में सहयोग ना करने पर उसे हिरासत में ले लिया गया। जल्द ही उसे एक स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा।

बता दें कि, सतीश बाबू सना ने सीबीआई (CBI) के पूर्व विशेष निदेशक रहे राकेश अस्थाना पर 5 करोड़ रुपए की रिश्वत माँगने का आरोप लगाया था। इसके बाद तत्कालीन सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने अस्थाना एवं अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। सीबीआई को दिए अपने बयान में बाबू ने कहा था कि उसने मोइन कुरैशी से जुड़ी जाँच में किसी तरह की कार्रवाई ना करने के लिए अस्थाना को 2 करोड़ रुपए की रिश्वत दी थी। यह धन राशि दिसंबर 2017 से लेकर 10 महीने की अवधि में दी गई।

सतीश ने जब अस्थाना पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया था तब अस्थाना के नेतृत्व में सीबीआई का विशेष जाँच दल (SIT) उससे पूछताछ कर रहा था। सना की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए सीबीआई ने अस्थाना और एजेंसी के कुछ अधिकारियों समेत अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। बाद में अस्थाना ने तत्कालीन सीबीआई निदेशक वर्मा पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया था और सतीश को बचाने और एसआईटी को उसके खिलाफ कार्रवाई ना करने देने के आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई।

गौरतलब है कि, ईडी ने सीबीआई अधिकारियों के साथ कथित भ्रष्टाचार के आरोप में मोइन कुरैशी के खिलाफ साल 2017 में मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया था। सना मोइन कुरैशी का काफी करीबी माना जाता है। बता दें कि मोईन कुरैशी ने 1993 में रामपुर में एक बूचड़खाने से अपने कारोबार की शुरुआत की थी और 10 साल के भीतर ही वह देश का बड़ा मीट निर्यातक बन गया। सना अब तक मीट कारोबारी मोइन कुरैशी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय का गवाह था, जो कि अब आरोपित बन गया है।

कुरैशी 2014 में सुर्खियों में आया था। उसका सबसे पहले नाम तब सामने आया जब यह पता चला कि वो 15 महीने में कम से कम 70 बार तत्कालीन सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा के घर पर हाजिरी लगाई थी। इसके बाद आरोपित के साथ बैठक करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सिन्हा को कड़ी फटकार भी लगाई थी।

फोन पर तलाक, शौहर ने की दूसरी शादी, अब घर में रखने के लिए ससुर ने रखी हलाला की शर्त

एक ओर तीन तलाक को लेकर पूरी देश में बहस चल रही है। वहीं दूसरी ओर आए दिन तीन तलाक के नए-नए मामले सामने आ रहे हैं। मीडिया खबरों के अनुसार शुक्रवार (जुलाई 26, 2019) को छत्तीसगढ़ में राज्य महिला आयोग की सुनवाई में महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेड़िया के सामने तीन तलाक का ऐसा ही एक मामला सामने आया जिसमें पीड़िता ने अपनी आप बीती सुनाई

पीड़िता ने बताया फोन पर तलाक देने के बाद उसके शौहर ने दूसरी शादी कर ली है और उसे दोबारा घर में रखने के लिए उसका ससुर उससे हलाला की बात कह रहा है। उसके मुताबिक अपनी बात साबित करने के लिए वह आयोग के सामने प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकती है, लेकिन जो वो कह रही है वह सत्य है। पुलिस ने इस संबंध में आरोपितों के ख़िलाफ़ दहेज प्रताड़ना का मामला भी दर्ज किया है।

पीड़िता द्वारा पूरा मामला सुनने के बाद बाद राज्य महिला आयोग ने पीड़िता को दोषियों के ख़िलाफ़ न्यायालय जाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मुँह से तीन बार तलाक कह देने से तलाक नहीं हो सकता। इसका फैसला न्यायालय करेगा।

गौरतलब है पत्रिका की खबर के अनुसार राज्य महिला आयोग की सुनवाई में 25 प्रकरण रखे गए थे। जिसमें 19 प्रकरणों में दोनों पक्षों के लोग सामने थें। इन मामलों में 8 प्रकरणों को निराकृत बताकर बंद कर दिया गया और बाकी प्रकरणों से संबंधित विभाग से जानकारी आने के बाद सुनवाई होगी। इसके अलावा 2 मामलों में एसपी से कहकर तत्काल एफआईआर करने के लिए पत्र लिखा गया है।

7 साल के मासूम का बलात्कार करने वाले सीरियल रेपिस्ट सिकंदर उर्फ़ जीवाणु पर आरोप तय

जयपुर में भट्टा बस्ती की रहने वाली सात साल की मासूम का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म के मामले में सीरियल रेपिस्ट सिकंदर उर्फ़ जीवाणु पर अन्य अपराध सहित पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप तय कर दिए। यह आरोप महानगर की पॉक्सो मामलों की विशेष कोर्ट ने तय किए। इस मामले में पॉक्सो कोर्ट-1 के जज एके अग्रवाल ने शुक्रवार (26 जुलाई 2019) को जीवाणु को आरोप सुनाए, लेकिन उसने सभी आरोपों का खंडन करते हुए पूरे मामले में ट्रायल चाहा है।

इस पर कोर्ट ने अभियोजन के अधिवक्ता एमएस किशनावात को 3 अगस्त को केस से संबंधित साक्ष्य पेश करने के लिए कहा था कि वो पॉक्सो एक्ट के अपराध, चोरी, हत्या व दुष्कर्म जैसे अपराध करने का आदी है। जानकारी के अनुसार, सिंकदर उर्फ़ जीवाणु पर पॉक्सो कोर्ट ने आईपीसी की धारा-323, 341, 363, 376, 376 एबी और पॉक्सो की धारा 3,4,5,6 में आरोप तय किए हैं।

इस मामले में शास्त्री नगर थाना पुलिस ने 24 जुलाई 2019 को चार्जशीट दाख़िल की थी। जीवाणु इससे पहले भी बलात्कार के मामले में सज़ा काट चुका है। उस पर बलात्कार के कई अन्य मामले भी दर्ज हैं।

ग़ौरतलब है कि भट्टा बस्ती में मासूम बच्ची के साथ हुई इस घटना से पूरे इलाक़े में भारी तनाव था। इतना ही नहीं, जब पहली बार जीवाणु को कोर्ट में लाया गया था तो उस दौरान वकीलों अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए उसे पीट दिया था।

जम्मू-कश्मीर में जैश का शीर्ष कमांडर मुन्ना लाहौरी उर्फ बिहारी साथी संग ढेर

जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच शनिवार सुबह मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद के शीर्ष पाकिस्तानी कमांडर मुन्ना लाहौरी सहित दो आतंकवादी मारे गए। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि दूसरा आतंकवादी लाहौरी का स्थानीय साथी जिन्नत था।

जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक 19 वर्षीय लाहौरी जैश के लिए लोगों की भर्ती करता था। वह आईईडी बनाने में भी माहिर था और बेहद खतरनाक मंसूबों के साथ भारत आया था।

पीटीआई के अनुसार लाहौरी 30 मार्च को बनिहाल में सेना के काफिले को निशाना बना कर किए गए कार धमाके और पुलवामा के अरिहाल में 17 जून को सेना के वाहन पर किए धमाके में शामिल था, जिसमें दो सैनिकों की जान चली गई थी और नौ अन्य घायल हुए थे।

पुलिस ने बताया कि दक्षिण कश्मीर जिले के बोनबाजार क्षेत्र में आतंकवादियों के मौजूद होने की पुख्ता जानकारी मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने क्षेत्र का घेराव कर के तलाश अभियान शुरू किया था। अभियान के दौरान आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर गोलियां चलाईं जिसका बलों ने माकूल जवाब दिया। मुठभेड़ स्थल से हथियार और गोला बारूद भी बरामद किए गए हैं।

बसपा विधायक के फार्म में चल रही थी गोकशी: शकू, जाहिद, ओसफ, जुबैर, नानू और तस्लीम गिरफ्तार

यूपी के बिजनौर पुलिस ने बसपा विधायक रुचि वीरा के फार्म हाउस पर देर रात छापा मारकर गोकशी के आरोप में 6 लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि 7 लोग फरार हो गए। पुलिस ने गोकशी के मामले में 13 आरोपितों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की है।

एसपी लक्ष्मी निवास मिश्रा के मुताबिक, थाना कोतवाली शहर बिजनौर के झाकड़ी बांगर गाँव के पास कई बीघा जमीन पर पूर्व सपा विधायक रुचि वीरा का फॉर्म हाउस है। पुलिस को मुखबिर से लगातार सूचना मिल रही थी कि पूर्व विधायक के फार्म हाउस में काफी समय से गोकशी का धंधा चल रहा है। गुरुवार (जुलाई 25, 2019) को पुलिस इलाके में गश्त लगा रही थी कि एक मुखबिर ने उन्हें सूचना दी कि कुछ लोग खेत में गाय का वध कर रहे हैं। मुखबिर ने फार्म के गन्ने के खेत में गोकशी की बात कही। पुलिस जब खेत के लगभग 400 मीटर अंदर पहुँची, तो उन्होंने तकरीबन 12 से 13 लोगों को गाय काटते पाया। इस मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि 7 अन्य चकमा देकर फरार होने में सफल हो गए। मौके से करीब 2 क्विंटल गोमांस और छुरे आदि बरामद हुए।

एसपी ने बताया कि घटनास्थल पर जो माँस, सींग और चमड़ा जब्त की गई है, शुरुआती जाँच में ये पुष्टि होती है कि वो गाय के ही हैं। हालाँकि, बरामद शरीर के अंगों और माँसों के नमूने प्रयोगशाला में भेजे गए हैं। इसकी जाँच की जा रही है। आरोपितों की पहचान शकू, जाहिद, ओसफ, जुबैर, गुफरान, नेमुद्दीन, नानू, शकील, नवीन, तस्लीम, रईस, फेम और अबरार के रूप में हुई है। इनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। जिसमें से शकू, जाहिद, ओसफ, जुबैर, नानू और तस्लीम को गिरफ्तार किया गया है। इस गोकशी के मामले में पुलिस बसपा विधायक रुचि वीरा के खिलाफ भी संलिप्तता की जाँच कर रही है। विधायक की संलिप्तता पाए जाने पर पुलिस उनके खिलाफ भी कार्रवाई की बात कह रही है।

रुचि वीरा के पति और जिला पंचायत बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष उदयन वीरा ने कहा, “हमारा गो-वध से कोई लेना-देना नहीं है। यह सच है कि झाकरी बांगर में हमारा फार्म है। हमने वहाँ एक चौकीदार रखा है। उसके पास ही उसकी चाबी रहती है। गोहत्या करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। जहाँ भी नापाक हरकतें हो रही हैं, उसे रोकना पुलिस का काम है।”

पुलिस के मुताबिक, साकू रुचि का चौकीदार है और उसकी की मिलीभगत से चोरी छिपे गोकशी कराई जा रही थी। हालाँकि, रुचि वीरा साकू को अपना चौकीदार मानने से इनकार कर रही है। रुचि ने लोकसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी से इस्तीफा देकर बहुजन समाज पार्टी ज्वाइन किया था।

मोहम्मद मुनासिर ने कीर्ति का पीछा किया और भरे बाजार में उसे चाकू घोंपकर मार दिया

साउथ दिल्ली के भोगल इलाके में कल (जुलाई 26, 2019) एक 20-21 साल की लड़की को 25 वर्षीय मोहम्मद मुनासिर ने चाकू घोंपकर मार दिया। ये घटना शुक्रवार को भरे बाजार में शाम करीब 7.30 बजे हुई। इस दौरान मुनासिर ने कीर्ती की गर्दन, छाती और पेट पर कई वार किए।

हालाँकि, बाद में वहाँ मौजूद लोगों ने हत्यारे मुनासिर को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। साथ ही बताया कि उन लोगों के रोकने के बाद भी मुनासिर रुका नहीं और लड़की पर वार करता रहा।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक चश्मदीदों ने बताया कि करीब 7:30 बजे लड़की भोगल मार्केट से होकर मथुरा रोड की ओर जा रही थी कि तभी आरोपित उसके पीछे आया और उसे धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया। इसके बाद उसने लड़की की छाती, गर्दन और पेट चाकू घोंपना शुरू किया।

वहाँ मौजूद दुकानदारों और राहगीरों ने जब उसे रोकने का प्रयास किया तो मुनासिर हाथ में चाकू लेकर उन्हें डराने लगा। लेकिन जब उसने वहाँ से भागने की कोशिश की तो वहाँ मौजूद लोगों ने उसका पीछा किया और उसे पकड़ लिया। इस दौरान गुस्साए लोगों ने उसकी पिटाई भी की। लड़की को फौरन ऑटोरिक्शा करके एम्स अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, लेकिन पुलिस वालों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने हमले के समय इस्तेमाल किए जाने वाला चाकू को बरामद कर लिया है और हत्या के आरोप में मुनासिर पर आईपीसी की 302 धारा के तहत मामला भी दर्ज हो गया है। इलाके के डीसीपी चिनमॉय बिस्वॉल का कहना है कि लोगों द्वारा पीटे जाने के बाद आरोपित की चोटों का इलाज चल रहा है, उसके रिकवर करते ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

जानकारी के मुताबिक बता दें कीर्ती भोगल में अपने भाई के साथ किराए के घर में रहकर नैनी का काम करती थी। उसके माता-पिता तुगलकाबाद निवासी है। वे जब अपने भाई के साथ सराय काले खाँ में रहती थी तब मुनासिर ने उसे देखा था और तब से वो उसका पीछा करता था।