Homeदेश-समाज7 साल के मासूम का बलात्कार करने वाले सीरियल रेपिस्ट सिकंदर उर्फ़ जीवाणु पर...

7 साल के मासूम का बलात्कार करने वाले सीरियल रेपिस्ट सिकंदर उर्फ़ जीवाणु पर आरोप तय

सिंकदर उर्फ़ जीवाणु पर पॉक्सो कोर्ट ने आईपीसी की धारा-323, 341, 363, 376, 376 एबी और पॉक्सो की धारा 3,4,5,6 में आरोप तय किए हैं।

जयपुर में भट्टा बस्ती की रहने वाली सात साल की मासूम का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म के मामले में सीरियल रेपिस्ट सिकंदर उर्फ़ जीवाणु पर अन्य अपराध सहित पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप तय कर दिए। यह आरोप महानगर की पॉक्सो मामलों की विशेष कोर्ट ने तय किए। इस मामले में पॉक्सो कोर्ट-1 के जज एके अग्रवाल ने शुक्रवार (26 जुलाई 2019) को जीवाणु को आरोप सुनाए, लेकिन उसने सभी आरोपों का खंडन करते हुए पूरे मामले में ट्रायल चाहा है।

इस पर कोर्ट ने अभियोजन के अधिवक्ता एमएस किशनावात को 3 अगस्त को केस से संबंधित साक्ष्य पेश करने के लिए कहा था कि वो पॉक्सो एक्ट के अपराध, चोरी, हत्या व दुष्कर्म जैसे अपराध करने का आदी है। जानकारी के अनुसार, सिंकदर उर्फ़ जीवाणु पर पॉक्सो कोर्ट ने आईपीसी की धारा-323, 341, 363, 376, 376 एबी और पॉक्सो की धारा 3,4,5,6 में आरोप तय किए हैं।

इस मामले में शास्त्री नगर थाना पुलिस ने 24 जुलाई 2019 को चार्जशीट दाख़िल की थी। जीवाणु इससे पहले भी बलात्कार के मामले में सज़ा काट चुका है। उस पर बलात्कार के कई अन्य मामले भी दर्ज हैं।

ग़ौरतलब है कि भट्टा बस्ती में मासूम बच्ची के साथ हुई इस घटना से पूरे इलाक़े में भारी तनाव था। इतना ही नहीं, जब पहली बार जीवाणु को कोर्ट में लाया गया था तो उस दौरान वकीलों अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए उसे पीट दिया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -