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जुम्मे की नमाज से पहले मस्जिद में महमूद पराचा ने दी लोगों को हथियार खरीदने की ट्रेनिंग

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में 26 जुलाई को एक मस्जिद के भीतर मॉब लिंचिंग से बचने के लिए समुदाय के लोगों को हथियार खरीदने की ट्रेनिंग दी गई। यह सब कोई और नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट के वकील महमूद पराचा की देख रेख में हो रहा है। पराचा खुद मस्जिद में जुम्मे की नमाज़ से पहले अपने मजहबी भाइयों को हथियारों के बारे में जानकारी दे रहे थे। इस कैंप में उन्होंने लोगों को ‘आत्मरक्षा’ के नाम पर बताया कि वे हथियारों के फॉर्म को कैसे भरें कि उनका फॉर्म रिजेक्ट न हो।

टाइम्स नॉउ द्वारा दिखाई वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि महमूद अपने मजहबी भाइयों से कहते नजर आ रहे हैं कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यकों को पूरे मुल्क में खतरा है। वे उत्तर प्रदेश में भी सुरक्षित नहीं हैं।

उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार एक नया कानून लेकर आने वाली है क्योंकि आज के जो कानून हैं और आज की जो पुलिस व्यवस्था है वो काफी नहीं है। इस दौरान महमूद ने वहाँ बैठे लोगों को ये भी बताया कि बहुत से ऐसी जगहें हैं जहाँ पर हथियार चलाना सिखाया जाता है।

इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट के वकील इस दौरान समुदाय के

लोगों को हथियार खरीदने के लिए उकसाते हुए भी नजर आए। उन्होंने कहा कि अगर हथियार खरीदने के लिए कीमती सामान बेचने की जरूरत हो तो उसे बेचकर भी हथियार खरीदें। महमूद की मानें तो इस तरह की ट्रेनिंग वे 12 जगहों पर देंगे। जिसमें अगली बारी दिल्ली की है।

गौरतलब है कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट के वकील महमूद पराचा ने शिया धर्मगुरू के साथ मिलकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरन इस कैंप के आयोजन का ऐलान किया था। उन्होंने बताया था कि इस कैंप में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को मॉब लिंचिंग से बचने के लिए हथियार खरीदने के बारे में जानकारी दी जाएगी। हालाँकि, इस घोषणा के बाद शिया धर्मगुरू और वकील महमूद पराचा को बहुत आलोचनाओं और FIR का सामना करना पड़ा था। जिसके बाद कल्बे जव्वाद ने अपनी सफाई में यू-टर्न लेते हुए कहा था कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। साथ ही बताया था कि इस कैंप के आयोजक महमूद पराचा ने इस आयोजन को स्थगित कर दिया है और इस कैंप में हथियार चलाने की ट्रेनिंग नहीं दी जाएगी।

‘मानसिक विकृति से ग्रस्त हैं आज़म खान, कड़ी सजा दी जाए’ जौहर यूनिवर्सिटी की 140 बीघा जमीन का पट्टा भी निरस्त

लोकसभा में बीजेपी महिला सांसद रमा देवी पर अपमानजनक टिप्पणी कर चौतरफा आलोचना झेल रहे समाजवादी पार्टी के नेता आज़म खान को एक और बड़ा झटका लगा है। दरअसल, रामपुर में कोसी नदी पर बने आज़म की जौहर यूनिवर्सिटी की करोड़ों की जमीन का पट्टा रद्द कर दिया गया है। आज़म खान ने इस जमीन को उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान लीज पर लिया था। इस जमीन को लीज पर लेते वक्त उन्होंने सभी नियम और कानून को ताक पर रख दिया था। वहीं पूर्व विदेश मंत्री ने ट्वीट करके आजम खान पर हमला बोला और उन्हें कड़ी सजा दिए जाने की माँग की।

जिसके बाद यह मामला एसडीएम अदालत पहुँचा, अब कोर्ट ने इस 140 बीघा जमीन का पट्टा निरस्त करने के आदेश दिए हैं। इस जमीन पर जौहर यूनिवर्सिटी का कैंपस बना हुआ है। इससे पहले भी कोर्ट ने जौहर यूनिवर्सिटी के बीच से गुजरने वाली सड़क को लेकर 3.27 करोड़ का जुर्माना लगाया था, साथ ही 15 दिन के भीतर यूनिवर्सिटी गेट को हटाने का आदेश दिया था।

एसडीएम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जौहर यूनिवर्सिटी की 140 बीघा जमीन के पट्टे को रद्द किया जाता है। यह जमीन 2013 में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने 30 साल से राज्य सरकार से लीज पर ली गई थी। कोर्ट ने माना कि यह कोसी नदी की रेतीली जमीन है, जो कि सार्वजनिक है। इस जमीन को गलत तरीके से लीज पर लिया गया था। रामपुर जिला प्रशासन ने अपनी जाँच में बताया कि जौहर यूनिवर्सिटी की आधी से ज्यादा जमीन को फर्जीवाड़ा कर हड़पा गया है।

गौरतलब है कि, जमीन कब्जाने के 23 से अधिक मामलों में फँसे आज़म खान को रामपुर प्रशासन ने भू-माफिया घोषित कर दिया है। साथ ही उनका नाम राज्य सरकार के एंटी-भू माफिया पोर्टल पर भी सूचिबद्ध कर दिया गया है। आजम खान और उनके साथी आलेहसन पर आलियागंज के 26 किसानों की जमीन हड़पने का आरोप है। पीड़ित लोगों का आरोप है कि आजम खान ने अपने ओहदे और पद का इस्तेमाल करते हुए जौहर विश्वविद्यालय के लिए जमीन हथिया ली। जौहर विश्वविद्यालय के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के शासन में भी इस तरह के आरोप लगे थे। लेकिन सरकार में होने के बावजूद उन पर कभी किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई थी।

वहींं, महिला सांसद रमा देवी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने को लेकर स्पीकर ओम बिड़ला ने शुक्रवार (जुलाई 26, 2019) को सर्वदलीय बैठक की, जिसमें सर्वसम्मति से ये फैसला लिया गया कि आज़म खान माफी माँगे, नहीं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। रमा देवी ने सरकार और स्‍पीकर के सामने माँग रखी कि आज़म खान सोमवार (जुलाई 29, 2019) को बिना शर्त लोकसभा में माफी माँगे और अगर वे माफी नहीं माँगते हैं तो उन्‍हें 5 साल के लिए निलंबित किया जाए। 

पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “आज़म खान द्वारा बार-बार दिए गए ऐसे बयान यह साबित करते हैं कि वह मानसिक विकृति से ग्रस्त हैं। कल संसद में महिला सभापति को संबोधित करते हुए दिया गया उनका बयान बदसलूकी की सारी हदें पार कर गया। संसदीय मर्यादा का तकाज़ा है कि आजम खान को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।”

सोनभद्र नरसंहार: 4 और आरोपितों को पुलिस ने किया गिरफ्तार, अब तक कुल 39 हिरासत में

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में जमीनी विवाद में हुई 10 लोगों की हत्या मामले में पुलिस ने 4 और आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में अब तक 39 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिसमें से 18 आरोपित नामजद हैं। पुलिस ने शुक्रवार (जुलाई 26, 2019) को हत्या मामले में नामजद आरोपित सोनू सिंह समेत मुन्नू, राम नगीना और विनय कुमार को हिरासत में लिया। इन चारों आरोपितों को घोरावल कोतवाली पुलिस ने नगर के मुक्खा तिराहे से गिरफ्तार किया।

गौरतलब है कि इससे पहले, पुलिस ने गुरुवार (जुलाई 25, 2019) को नामजद आरोपित रमेश को गिरफ्तार किया था। हत्या के मुख्य आरोपित ग्राम प्रधान यज्ञदत्त, उनके भाई और भतीजे को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में पुलिस ने 28 लोगों के खिलाफ नामजद जबकि 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।

उम्भा गाँव में हुए खूनी संघर्ष के बाद आईबी को कई युवाओं के अंडरग्राउंड होने की भी सूचना मिली है। ऐसे में खूफिया एजेंसी को डर है कि अगर संवेदनाओं का फायदा उठाकर बस्तर के नक्सली यहाँ पहुँचते हैं तो किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं। 1996 से लेकर 2012 तक ये गाँव नक्सल आंदोलन का शिकार रहा। लेकिन 17 जुलाई जैसी घटना यहाँ उस समय में भी नहीं हुई थी। 17 जुलाई से पहले इस इलाके को शांत माना जाता था लेकिन अब खूफिया एजेंसी को डर है कि नक्सली गाँव वालों की संवेदना को हथियार बनाकर यहाँ अपने पैर पसारने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए खुफिया एजेंसी उम्भा गाँव में होने वाली गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और नक्सलियों को चिह्नित करने की कोशिशों में भी जुटी हुई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए हत्या मामले में गठित जाँच समिति की संस्तुति पर सोनभद्र के घोरावल के SDM, CO घोरावल, इंस्पेक्टर घोरावल समेत पाँच अधिकारियों व कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था। वहीं, सीएम ने इस घटना के लिए स्पष्ट तौर पर कॉन्ग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा था कि इस घटना की नींव 1955 में ही पड़ गई थी, जब कॉन्ग्रेस की सरकार थी। सोनभद्र के विवाद के लिए 1955 और 1989 की कॉन्ग्रेस सरकार दोषी है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सोनभद्र में जो घटना घटी है, उसकी नींव 1955 में रखी गई थी। 1955 में कॉन्ग्रेस की सरकार ने सोनभद्र में पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के नाम पर जनजाति के लोगों की भूमि को एक पब्लिक ट्रस्ट के नाम कर दिया। वर्ष 1989 में उस ट्रस्ट से जुड़े लोगों के नाम पर वह जमीन कर दी गई। वर्ष 2017 में वह जमीन कुछ लोगों को बेची गई। यह कैसे हुआ, इसका परीक्षण भी जाँच कमिटी करेगी। इस गड़बड़ी की जाँच के लिये राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है।

महाराष्ट्र: पहाड़ी पर विराजमान भगवान शिव की मूर्ति टूटी, जॉंच जारी

सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के प्रतापगढ़ से भगवान शिव की एक मूर्ति टूटने की खबर सामने आई है। ट्विटर यूज़र के अनुसार शिव की यह मूर्ति करीब 400 साल पुरानी है जिसे एक हिन्दू राजा ने बनवाया था।

ट्विटर यूज़र ने आगे लिखा है कि इसी स्थान के पास ख्वाजा उस्मान गनी हारूनी की दरगाह भी है जो कि एक मुस्लिम शासक ने बनाई थी। इस कारण यह जगह हिन्दू और मुस्लिम दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

ट्विटर यूज़र ने लिखा है- “आज ही स्थानीय मीडिया में यह बात सामने आई है कि शिव की यह विशाल मूर्ति कुछ ‘शांतिदूतों’ ने तोड़ दी है। शांति दूतों ने असल में भगवान की प्रतिमा नहीं, बल्कि सौहार्द को तोड़ा है और यह सन्देश दिया है कि ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ कुछ नहीं होती है।”

हालाँकि प्रशासन का कहना है कि जाँच की जा रही है और प्राकृतिक बिजली गिरने के कारण भी मूर्ति टूट सकती है। अधिकारियों द्वारा आज इस स्थान का निरीक्षण भी किया गया। मूर्ति करीब 20 फुट ऊँची थी, जिस वजह से किसी व्यक्ति द्वारा इसे तोड़ा जाना संभव नहीं लगता है। अधिकारियों ने जल्दी ही यहाँ नई मूर्ति स्थापित करने की बात कही है।

राज्य के पूर्व मंत्री राजकुमार बदौले भी मौके पर पहुँचे और घटना के सन्दर्भ में अधिकारियों से जानकारी ली। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री स्वयं इस घटना पर नजर रख हुए हैं।

अक्षरधाम मंदिर पर हमले का मुख्य आरोपित यासीन बट अनंतनाग में गिरफ्तार

गुजरात में अक्षरधाम मंदिर पर हुए आतंकी हमले के मुख्या आरोपित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी यासीन बट को आज कश्मीर के अनंतनाग में गिरफ्तार कर लिया गया। उसे गुजरात एटीएस ने गिरफ्तार किया है। वर्ष 2002 में अक्षरधाम मंदिर पर हुए आतंकी हमले में 30 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 80 से ज्यादा घायल हो गए थे।

जम्मू-कश्मीर पुलिस की मदद से यासीन बट को साउथ कश्मीर के अनंतनाग से पकड़ा गया। वहाँ से गुजरात एटीएस की स्पेशल टीम उसे अहमदाबाद ले गई।

सितंबर 24, 2002 को गुजरात के गाँधीनगर के प्रसिद्ध अक्षरधाम मंदिर में 2 आतंकियों ने हमला किया था। एनएसजी के कमांडो की मदद से करीब 12 घंटे चले ऑपरेशन के बाद आतंकियों को मार गिराया गया था। हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों की यासीन बट ने मदद की थी। यासीन के अलावा, मोहम्मद फारूख शेख ने भी इस आतंकी हमले में वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई थी, जिसे गत वर्ष सऊदी अरब से लौटते हुए गिरफ्तार कर लिया गया था।

चौथी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने येदियुरप्पा, कुमारस्वामी के आदेशों पर लगाई रोक

करीब एक महीने से चल रहा था कर्नाटक का ‘नाटक’ खत्म हो चुका है। काफी जद्दोजहद के बाद आखिरकार बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा ने शुक्रवार (जुलाई 26, 2019) को सीएम पद की शपथ ले ली। वह चौथी बार मुख्यमंत्री का कमान संभालेंगे। कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला ने उन्हें शपथ दिलाई है। इसके साथ ही राज्‍यपाल ने उन्‍हें एक सप्‍ताह के अंदर अर्थात 31 जुलाई तक बहुमत साबित करने के लिए कहा है। उनके शपथ ग्रहण में बीजेपी के वरिष्‍ठ नेताओं के साथ ही कॉन्ग्रेस के निलंबित विधायक रोशन बेग भी शामिल हुए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लेते ही येदियुरप्पा के एक आदेश ने सरकारी महकमे में खलबली मचा दी है। दरअसल, मुख्‍य सचिव ने सभी उपसचिवों को पत्र लिखकर कुमारस्‍वामी द्वारा जुलाई में दिए गए सभी आदेशों को रोकने की सख्त हिदायत दे दी है।

बता दें कि कॉन्ग्रेस-जद (एस) गठबंधन सरकार के मंगलवार को शक्ति परीक्षण में असफल रहने के बाद से येदियुरप्पा सरकार गठन का दावा पेश करने के लिए पार्टी आलाकमान से निर्देश मिलने का इंतजार कर रहे थे। इसे लेकर जगदीश शेट्टार, अरविंद लिंबावली, मधुस्वामी, बसवराज बोम्मई और येदियुरप्पा के बेटे विजयेंद्र समेत कर्नाटक बीजेपी के नेताओं ने गुरुवार को नई दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात की थी और ऐसा बताया जा रहा है कि उन्होंने सरकार गठन के बारे में चर्चा की थी।

मूसा-बुरहान वानी की ज़मीन है त्राल: BJP से आगाह कर बोले उमर अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने त्राल को आतंकी बुरहान वानी और जाकिर मूसा की जमीन बताया है। लोगों से चुनाव का बहिष्कार नहीं करने और भाजपा से सावधान रहने की अपील करते हुए उन्होंने यह बात कही।

श्रीनगर में एक रैली को संबोधित करते हुए नेशनल कॉन्फ्रेन्स के उपाध्यक्ष उमर ने आतंकियों का महिमामंडन करने वाला यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि त्राल से एक बीजेपी विधायक को जीत मिली जहां का बुरहान वानी और जाकिर मूसा रहने वाला था। अब उनकी (बीजेपी) नजरें कुछ और दूसरी विधानसभाओं पर है।

उमर अब्दुल्ला ने कहा, “हमें इन साज़िशों से लड़ना होगा। हम कमज़ोर होते हुए भी इन साज़िशों से नहीं लड़ सकते। हमें शक्तिशाली होने की ज़रूरत है। फारूक अब्दुल्ला ने केवल 10 फ़ीसदी वोट हासिल करके चुनाव जीता। मैं उन्हें बताना चाहूँगा कि यह उनकी विफलता का प्रमाण है कि केवल 10 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया।”

अब्दुल्ला ने यह कहते हुए त्राल के मतदाताओं को रिझाने का प्रयास किया कि वे चुनाव का बहिष्कार न करें। उन्होंने कहा, मतदान का बहिष्कार करना एक ख़तरनाक स्थिति है। अगर मतदाताओं ने बहिष्कार किया तो वही हाल हो सकता है जो लोकसभा चुनाव में हुआ था। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव में उस इतिहास को दोहराना नहीं है।

यहाँ इस बात का उल्लेख करना जरूरी है कि पिछले साल, नेशनल कॉन्फ्रेन्स और पीडीपी दोनों ने जम्मू और कश्मीर में स्थानीय निकाय चुनावों का बहिष्कार किया था।

अनंतनाग ज़िले के कोकेरनाग क्षेत्र में 2016 में एक मुठभेड़ में हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान वानी को सशस्त्र बलों ने मार गिराया था। 23 मई, 2019 को अंसार ग़ज़ावत उल-हिंद के तथाकथित प्रमुख ज़ाकिर मूसा मारा गया था। मूसा अल-क़ायदा का कश्मीर प्रमुख था।

कहब त लग जाइ धक से, औरतन पर समाजवदियन के बोल बहके फक्क से

इसे समाजवादी पार्टी यानी सपा का चाल-चरित्र कहें या कमर के ऊपर सोच नहीं पाने की कुव्वत। पार्टी नेताओं में महिलाओं को लेकर ओछी टिप्पणी करने की होड़ लगी रहती है। इस होड़ और इससे मिलने वाली सुर्खियों का नशा इन पर कुछ ऐसा चढ़ता है कि वे बेहद सहजता से महिलाओं के साथ होने वाले हर अपराध के लिए पीड़िता को ही कठघरे में खड़ा कर देते हैं।

जब सपा की नींव रखने वाले मुलायम सिंह यादव सार्वजनिक तौर पर बलात्कार का यह कहकर बचाव करें कि “लड़के हैं, गलती हो जाती है” तो नीचे क्यों न होड़ लगे? इसी होड़ में लोकसभा के भीतर रामपुर से सपा सांसद आजम खान सदन की अध्यक्षता कर रहीं रमा देवी से कह बैठते हैं,“आप मुझे इतनी अच्छी लगती हैं कि मेरा मन करता है कि आपकी आँखों में आँखें डाले रहूॅं।” ये वही आजम खान हैं, जिन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान इशारों-इशारों में प्रतिद्वंद्वी महिला उम्मीदवार की अंडरवियर का कलर तक बता दिया था।

समस्या केवल बहके बोल ही नहीं है। बचाव में गढ़े जाने वाले तर्क बताते हैं कि इस पार्टी के लिए कामुक टिप्पणियॉं कितनी आम बात है। पार्टी आलाकमान के घर की पढ़ी-लिखी सांसद रह चुकी बहू महिला के अंडरवियर का रंग बताए जाने को ‘छोटी सी बात’ बताती हैं। आँखों में आँखें डालने को सपा अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ‘कविता’ बताते हैं। तो आजम खान की हमसफर तजीन फातिमा की दलील है कि उर्दू में मिठास ही इतनी है कि उनके पति के कहे का लोगों ने गलत मतलब निकाल लिया।

आगे बढ़ने से पहले एक नजर सपा नेताओं के बहके बोल पर डालिए।

मुलायम सिंह यादव

  • साल 2010 में महिला आरक्षण विधेयक के विरोध में टिप्पणी करते हुए कहा था, ”वर्तमान स्वरूप में महिला आरक्षण विधेयक पास हुआ तो संसद में उद्योगपतियों और अधिकारियों की ऐसी-ऐसी लड़कियाँ आ जाएँगी जिन्हें देखकर लड़के पीछे से सीटी बजाएँगे।”
  • साल 2012 में बाराबंकी में कहा था कि समृद्ध तबके की महिलाएँ ही अपने जीवन में आगे बढ़ पाएँगी। गाँव की महिलाओं को कभी मौक़ा नहीं मिलेगा, क्योंकि ये आकर्षक नहीं होतीं।
  • 2014 में बलात्कार के आरोपियों का बचाव करते हुए कहा “लड़कों से गलती हो जाती है, लेकिन उन्हें मौत की सजा देना गलत है। अगर हम सरकार में आए तो हम कानून में संशोधन करेंगे।”

अबु आजमी

  • साल 2013 में महिलाओं पर विवादित टिप्पणी देते हुए कहा था कि फैशन और नग्नता भारत की वर्तमान स्थिति के लिए जिम्मेदार है।अपने विवादास्पद बयान में आजमी ने यह भी कहा था कि अगर बलात्कार के दोषियों के लिए मौत की सजा का कानून हो सकता है तो ऐसा कानून भी होना चाहिए जो महिलाओं के देर रात तक घूमने और गैर मर्द के साथ घूमने पर रोक लगाए।
  • 2013 में ही कहा था कि औरतें सोने की तरह कीमती होती हैं, अगर उन्हें खुला छोड़ा तो उन्हें लूट लिया जाएगा।
  • एक बार कहा था, “महिलाओं को बाहर जाने की आजादी है लेकिन बस परिवार के साथ। मैं अपने बेटे को रात में बाहर भेज सकता हूँ लेकिन अपनी बेटी को नहीं। मैं पहले भी कह चुका हूँ कि महिलाएँ सोने की तरह कीमती हैं। आजकल कहीं भी महिलाओं के ऊपर हमला हो जा रहा है इसलिए हमें इससे बचने के उपाय करने चाहिए।”

सपा के अन्य नेता

  • तहलका संपादक तरुण तेजपाल पर बलात्कार का मुकदमा दायर होने के बाद तत्कालीन सपा नेता नरेश अग्रवाल ने बड़ा ही विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था, “जब महिला हिंसा को रोकने का कानून बनाया जा रहा था, तभी मैंने कहा था कि एंटी रेप बिल की वजह से अधिकारी महिलाओं को नौकरी पर रखने से कतराएंगे। मुझे पता चला है कि कई अधिकारी महिला पीए रखने से कतराते हैं।”
  • राम गोपाल यादव के अनुसार बॉलीवुड की हीरोइन मुंबई के बार डांसर्स से भी अश्लील हैं।
  • शिव चरण प्रजापति ने कहा बलात्कार के लिए महिलाएँ ज्यादा जिम्मेदार होतीं हैं।
  • साल 2013 में असम गैंगरेप मामले में प्रतिक्रिया देते हुए नरेश अग्रवाल ने कहा था,  “इस तरह कि चीजें दैनिक आधार पर होती रहती हैं। मैंने दिल्ली में भी हुई ऐसी घटनाओं के बारे में पढ़ा। मैं समझता हूँ कि आखिर क्यों मीडिया कई बार एक बलात्कार पर फोकस करता है, जबकि दूसरे को नजरअंदाज कर देता है।”
  • आजम खाम के बेटे अब्दुल्लाह आजम ने एक रैली में जया प्रदा को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा “अली भी हमारे…बजरंग बली भी चाहिए, लेकिन अनारकली नहीं चाहिए।”
  • मुरादाबाद से सपा सांसद एसटी हसन ने ट्रिपल तलाक बिल पर कहा “बीवी को गोली मारने या जला कर मरने से अच्छा है कि उसे तलाक दे दें।” जायरा वसीम के बॉलीवुड छोड़ने के फैसले का समर्थन करते हुए हसन साहब ने बॉलीवुड हीरोइनों को ‘तवायफ’ बता दिया था।

अब आप समझ ही गए होंगे कि समाजवादी पार्टी से जुड़े दिग्गज़ नेताओं के लिए सेक्सिस्ट कमेंट करना कोई बड़ी बात नहीं। वे चाहे न चाहे उनके भाषणों में उनकी सोच नजर आ ही जाती है। ये महिलाओं पर बात करते हुए सिर्फ़ राजनीति के नाम पर अपनी धूर्तता का प्रदर्शन करते हैं। उनकी छवि को बूस्ट करने में वे तथाकथित नारीवादी ढाल बनती हैं, जिन्हें एक विशेष पार्टी पर हमला करने के लिए महिला के सिंदूर और मंगलसूत्र से तो दिक्कत है, लेकिन सपा ‘नायकों’ की कथनी से उन्हें कोई दर्द नहीं होता।

लाल आतंक: 5 CPIM कार्यकर्ताओं को BJP नेता की हत्या के मामले में उम्रकैद

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के 5 कार्यकर्ताओं को एक सत्र अदालत ने शुक्रवार (जुलाई 2, 2019) को को 2008 में भाजपा कार्यकर्ता की हत्या करने के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। केरल स्थित थालास्सेरी के अतिरिक्त जिला सत्र न्यायालय के न्यायाधीश पीएन विनोद ने केवी सुरेंद्रन (62) की हत्या के दोषियों पर 1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह राशि भाजपा नेता केवी सुरेन्द्रन को देने के भी निर्देश दी गए हैं।

अदालत ने मामले में थिरुवांगोद निवासी अखिलेश (35 वर्ष), एम कलेश (36 वर्ष), एम लिजेश (32 वर्ष), विनेश (25 वर्ष) और पीके शैजोश (28 वर्ष) को सजा सुनाई। अदालत ने इस हत्या के मामले में दो व्यक्तियों को बरी कर दिया।

दोषियों ने राजनीतिक द्वेष के कारण मार्च 07, 2008 को भाजपा नेता केवी सुरेंद्रन की उनके घर पर धारदार हथियारों से हत्या कर दी थी। इसके बाद पुलिस घायल सुरेन्द्रन को लेकर अस्पताल पहुँची जहाँ उन्होंने दमतोड़ दिया था।

अन्य दलों के सदस्यों के खिलाफ वामपंथी हिंसा, विशेष रूप से भाजपा, अक्सर खूनी संघर्ष में बदलती देखी गई है। इस तरह के ही ताजा मामले में, विश्वविद्यालय के एक छात्र को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के सदस्य ने चाकू मार दिया था। SFI CPI-M की छात्र शाखा है। विश्वविद्यालय में छात्रों ने घटना के बाद विश्वविद्यालय में कम्युनिस्ट कैडर के आतंक का खुलासा किया था।

पाकिस्तानी क्रिकेटर की रंगीन मिजाजी ऐसी, सिंगल बता कई महिलाओं से डेट

पाकिस्‍तान के सलामी बल्‍लेबाज इमाम उल हक पर लड़कियों से अफेयर रखने और उन्‍हें धोखा देने का आरोप लगा है। एक ट्विटर यूजर के द्वारा लड़कियों के साथ उनकी कथित व्हाट्सऐप चैटिंग के स्‍क्रीनशॉट को लीक करने के बाद ये सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें इमाम कथित तौर पर लड़कियों को अश्लील संदेश भेजते थे। इसके वायरल होने के बाद उन पर स्टारडम का इस्तेमाल करते हुए लड़कियों का शोषण करने का आरोप लगाया गया है।

पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, ट्विटर उपयोगकर्ता ने दावा किया कि ये चैट पिछले 6 महीनों में हुई हैं, यानी कि हाल ही में संपन्न हुए आईसीसी क्रिकेट विश्व कप 2019 के दौरान भी वो इन लड़कियों से चैट किया करते थे। जिस ट्विटर हैंडल से चैट की स्क्रीनशॉट लीक हुई थी, खबर लिखते समय वो ट्विटर अकाउंट मौजूद नहीं था।

बता दें कि, इस ट्विटर हैंडल पर इमाम उल हक को टैग करते हुए कुछ स्क्रीनशॉट शेयर किए गए। जिसमें लिखा गया कि इमाम खुद को हमेशा सिंगल बताते रहते हैं, लेकिन वो 7 से 8 महिलाओं के साथ डेटिंग कर रहे थे और उनका शोषण भी कर रहे थे।

इमाम उल हक के चैट की फोटो लीक करने वाले ट्विटर हैंडल का स्क्रीनशॉट

इस ट्वीट पर विभिन्न ट्विटर यूजर्स और इमाम के प्रशंसकों की मिश्रित प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। जहाँ कुछ ने लड़कियों को दोषी ठहराते हुए पाकिस्तानी खिलाड़ी का बचाव किया, तो वहीं अन्य ने इमाम के व्यवहार की आलोचना की। कुछ लोगों ने तर्क दिया कि यह मामला #MeToo आंदोलन में सामने आए अन्य मामलों की तरह नहीं है, इसलिए इसे इस तरह से वर्गीकृत करना गलत होगा।

कुछ ऐसे भी लोग थे, जिन्होंने उस ट्विटर यूजर की आलोचना की, जिसने क्रिकेटर की बातचीत के इन स्क्रीनशॉट को शेयर किया और बाद में अपना अकाउंट डिलीट कर लिया। उन्होंने उसे अटेंशन सीकर बताया, जिसने माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर पब्लिसिटी पाने और ध्यान आकर्षित करने के लिए खिलाड़ी के चैट का इस्तेमाल किया।

जियो टीवी के खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने इस मुद्दे को व्यक्तिगत बताते हुए विवाद से दूर रहने का फैसला किया है।

इमाम उल हक हाल ही में संपन्न हुए विश्व कप में पाकिस्तानी क्रिकेट टीम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। उन्होंने इंग्लैंड में बेहतरीन प्रदर्शन किया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक अर्धशतक और बांग्लादेश के खिलाफ एक शतक बनाया था। हालाँकि, पाकिस्तान की टीम सेमीफाइनल में जगह नहीं बना सकी थी और इसकी वजह से टीम को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।