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‘भारत का दामाद’ बना ब्रिटेन का PM, लेकिन एक दिक्कत है..

लंदन के पूर्व मेयर बोरिस जॉनसन (Boris Johnson) को ब्रिटेन का अगला प्रधानमंत्री चुना गया है। यह जानकारी ब्रिटिश मीडिया के हवाले से एएनआई ने दी है। बोरिस जॉनसन ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरेसा मे की जगह लेंगे। उन्होंने पीएम पद की रेस में जेरमी हंट को हराया। कंजर्वेटिव पार्टी के नेता जॉनसन बुधवार (जुलाई 24, 2019) को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। बोरिस जॉनसन ब्रिटेन के पूर्व विदेश मंत्री भी रह चुके हैं।

कभी खुद को बताते थे ‘भारत का दामाद’

बोरिस जॉनसन और उनकी पत्नी मैरीना व्हीलर की शादी को करीब 25 साल हो चुके हैं। मैरीना व्हीलर भारतीय मूल की हैं और पेशे से वकील हैं। हालाँकि, दोनों ही वर्ष 2018 में अपने रिश्ते के समाप्त होने की घोषणा कर चुके हैं। सितंबर 2018 को उन्होंने एक दूसरे से तलाक लेने की योजना बनाई थी। दरअसल, ऐसे दावे किए जा रहे थे कि जॉनसन ने अपनी पत्नी को धोखा दिया है।

लंदन के 2008 से 2016 तक मेयर रहने के दौरान जॉनसन ने खुद को ‘भारत का दामाद’ बताने के लिए अपनी पत्नी के भारतीय मूल का होने का कई बार जिक्र किया था। जॉनसन और व्हीलर के चार बच्चे हैं। 

चुनाव के दौरान गर्लफ्रेंड के साथ विवाद को लेकर चर्चा में रहे जॉनसन

एक ओर बोरिस जॉनसन का अपनी भारतीय मूल की पत्नी के साथ तलाक का केस चल रहा है, वहीं अपनी महिला मित्र के साथ विवाद को लेकर भी वो सुर्ख़ियों में रह चुके हैं। दरअसल, चुनाव के दौरान ही लंदन में उनकी महिला मित्र के साथ हुए उनके झगड़े की पुलिस में शिकायत दर्ज कर दी गई थी। पिछले साल जॉनसन का उनकी गर्लफ्रेंड कोरी साइमंड्स के साथ प्रेम संबंध सार्वजनिक हो गया था। जिसके बाद उनकी भारतीय मूल की पत्नी मरीना व्हीलर ने तलाक की अर्जी दी थी।

कश्मीर की स्थायी समस्या जवाहरलाल की ग़लतियों का परिणाम, नेहरू को Thank You बोलिए सुरजेवाला जी

कश्मीर मुद्दे पर ट्रम्प के बयान ने एक संवेदनशील मुद्दे को हवा दे दी है। फ़िलहाल, मीडिया और राजनीति के ट्रोलों ने MEA के स्पष्टीकरण के बावजूद भारत के रुख़ के बारे में झूठ फैलाया, लेकिन कॉन्ग्रेस के नेता शायद अपनी भयंकर ग़लती के इतिहास को भूल गए हैं।

अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमिटी के सदस्य व राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने कल रात ट्विटर पर दावा किया कि भारत ने कभी भी जम्मू-कश्मीर में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की।

उन्होंने ट्वीट किया, “पीएम मोदी द्वारा जम्मू-कश्मीर में मध्यस्थता करने के लिए एक विदेशी शक्ति से पूछना देश के हितों के साथ एक बड़ा धोखा है।” सुरजेवाला, इसमें एक एक बहुत छोटा सा विवरण देना भूल गए। उन्होंने यह नहीं बताया कि जम्मू और कश्मीर की जो स्थायी समस्या है वो तत्कालीन पीएम जवाहरलाल नेहरू द्वारा की गई ग़लतियों का परिणाम है।

अक्टूबर 1947 में पाकिस्तान ने जब पहली बार कश्मीर की तत्कालीन स्वतंत्र रियासत पर आक्रमण किया, तो महाराजा हरि सिंह ने अपनी रियासत के भारत में विलय के लिए विलय-पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए भारत से मदद माँगी। भारत ने मदद दी और उस समय भारतीय सेना ने कश्मीर के दो-तिहाई हिस्से को जल्दी से हासिल कर लिया था।

इसके बाद नेहरू ने 1 जनवरी, 1948 को संयुक्त राष्ट्र से शांति वार्ता में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था, जबकि उस समय सेना अपने ऑपरेशन में लगी हुई थी। आश्चर्य की बात तो यह है कि इन सबका भारतीय सैनिक के मनोबल पर क्या असर पड़ा होगा, जब उन्हें पता चला होगा कि उनकी सरकार पहले से ही शांति की माँग कर रही है। अगर इस मामले को नेहरू द्वारा संयुक्त राष्ट्र में ले जाने की बजाए सेना को पूरे कश्मीर पर फिर से क़ब्ज़ा करने की अनुमति दे दी जाती तो आज इतिहास कुछ और ही होता।

इस मामले पर हुआ ये कि संयुक्त राष्ट्र ने संघर्ष विराम की बात कह डाली और तभी से कश्मीर मुद्दा एक खुला घाव बन कर रह गया है, जबकि भारत ने यह बात स्पष्ट कर दी है कि उसके द्वारा अमेरिका के साथ ऐसी कोई बातचीत या अनुरोध नहीं किया गया।

ऐसे में तो यही लगता है कि कॉन्ग्रेस शायद अपने उसी इतिहास को फिर से उजागर करने में लगी हुई है। आख़िरकार, कॉन्ग्रेस की तो आदत ही है कि वो हर उपलब्धि का श्रेय नेहरू को ही देने पर तुले रहते हैं। यदि चंद्रयान-2 के लिए नेहरू को धन्यवाद दिया जाना चाहिए, तो उन्हें कश्मीर मुद्दे पर की गई भयंकर भूलों के लिए भी ‘धन्यवाद’ दिया जाना चाहिए।

JNU: पहले पूछा ‘बिहारी हो?’ हाँ कहते ही मारे थप्पड़, उठक-बैठक लगवाई

अक्सर विवादों में रहने वाली जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में सेंटर ऑफ जर्मन स्टडीज के बीए फर्स्ट ईयर के छात्र से रैगिंग का मामला सामने आया है। JNU में BA फर्स्ट इयर कोर्स में पढ़ने वाले छात्र ने पुलिस से रैगिंग की शिकायत दर्ज कराई है। छात्र का आरोप है कि एक पीएचडी स्काॅलर ने कैंपस में उसके साथ मारपीट की और कान पकड़कर उठक-बैठक भी लगवाई। यह घटना 18 जुलाई की है।

पीड़ित ने जेएनयू की एंटी रैगिंग कमिटी और वसंत कुंज नाॅर्थ थाना पुलिस में शिकायत दर्ज की है। पुलिस ने अभी तक आरोपित के खिलाफ कोई करवाई नहीं की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले की जाँच एंटी रैगिंग कमिटी कर रही है। पीड़ित स्टूडेंट ने ट्व‍िटर के जरिए MHRD और जेएनयू के वीसी से भी इसकी शिकायत की है।

‘यह दिल्ली है, यहाँ सलीके से रहा करो’

बिहार के रहने वाले 19 वर्षीय छात्र रवि राज ने बताया कि उसने 10 जुलाई को सेंटर ऑफ जर्मन स्टडीज में दाखिला लिया था। 18 जुलाई की शाम इंग्लिश स्टडीज का एक पीएचडी स्काॅलर विजय दहिया और दो अन्य युवक मिले। विजय ने पूछा- “तुम बिहारी हो?” हाँ में जवाब देते ही वह गाली देने लगा। आरोपित विजय ने रवि राज से कहा- “यह दिल्ली है, सलीके से रहा करो।” इसके बाद विजय ने रवि राज को फिर दाे थप्पड़ मारे, कान पकड़ उठक-बैठक लगवाने के बाद यह हिदायत भी दी कि आगे कभी भी मिलो तो नाक रगड़कर प्रणाम करना।

रवि राज ने 20 जुलाई को इस बारे में ट्वीट भी किया था, जिसमें उसने मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल और नित्यानंद राय समेत जेएनयू के वीसी को भी टैग किया है।

₹14 लाख की मैं गाड़ी खरीदूँगी, मुझे चंदा दो: कॉन्ग्रेस सांसद की डिमांड पर पार्टी में बवाल

केरल में कुछ दिन पहले कॉन्ग्रेस सांसद राम्या हरिदास ने पार्टी के कार्यकर्ताओं से 14 लाख की गाड़ी खरीदने के लिए चंदा देने की गुहार लगाई थी, लेकिन अब प्रदेश के पार्टी अध्यक्ष ने उनकी इस योजना पर रोक लगा दी है।

गौरतलब है कि राम्या हरिदास खेती करने वाले मज़दूरों के घर से आती हैं, इसलिए गाड़ी खरीदने के लिए वह अपने संसदीय क्षेत्र में आने वाले 1400 बूथों से इसके लिए पैसा इकट्ठा करना चाहती थीं। उनका मानना है कि उन्हें मिल रहे वेतन से उनके लिए गाड़ी खरीदना संभव नहीं हो पाएगा। इसलिए वे यूथ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं से चाहती थीं कि वे कम से कम उन्हें 1000 रुपए दें। ताकि वे मल्टी यूटीलिटी व्हीकल खरीद पाएँ।

राम्या इससे पहले भी चुनाव प्रचार में क्राउड फंडिंग के जरिए 67 लाख रुपए इकट्ठा करने में कामयाब हुई थीं। लेकिन इस बार जब उन्होंने अपनी कार के लिए ऐसा करना चाहा तो पार्टी में ही विवाद हो गया। पार्टी के सदस्य इस फैसले के औचित्य पर सवाल उठाने लगे। मामले ने तूल पकड़ा तो कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने कड़ी आपत्ति जताई।

इसके बाद राम्या हरिदास ने इस मामले पर कहा, “एक आज्ञाकारी कार्यकारी की तरह मैंने पार्टी अध्यक्ष की बातों को दिल में संजो लिया है। जो मुझे प्यार करते हैं, शायद उन्हें मेरा फैसला सही न लगा हो। मैंने अपने जीवन में बहुत मुश्किलें झेली हैं। ऐसे मौक़ो पर जनता ने जो सांत्वना दी, वही मेरा सहारा था।”

स्टेशन अधीक्षक की गलती से एक ही रेल लाइन पर दो ट्रेन, रेलवे ने दिया जबरन रिटायरमेंट की सजा

बिहार के गोरौल स्टेशन पर होते-होते बचे हादसे में रेलवे ने स्टेशन अधीक्षक को दोषी मानते हुए सेवानिवृत्ति की सजा दी है। जाँच में महकमे ने पाया कि अधीक्षक सुनील कुमार सिंह की भूल से 23 मई को दो ट्रेनों की भिड़ंत का भीषण हादसा हो सकता था। मुजफ्फरपुर-हाजीपुर रेलखण्ड के इस मामले में सोनपुर मण्डल ने जाँच समिति की रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर यह निर्णय लिया है।

एक ही लाइन पर दो ट्रेनें

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोनपुर मण्डल में यह इतनी बड़ी सजा का पहला मामला है। गोरौल स्टेशन पर 23 मई को दो ट्रेनें, सिवान-समस्तीपुर पैसेंजर ट्रेन और बिहार सम्पर्क क्रांति एक्सप्रेस, एक साथ एक ही लाइन पर आ गईं थीं। इसके बाद मामले की जाँच के लिए डीआरएम ने जाँच टीम गठित की थी, जिसकी जाँच में स्टेशन अधीक्षक सुनील कुमार सिंह की लापरवाही की बात सामने आई थी। इसके बाद डीएआर के तहत एक दूसरी टीम का गठन स्टेशन अधीक्षक का पक्ष जानने के लिए किया गया था। उसके सामने उन्होंने खुद को निर्दोष बताया था।

इस टीम ने स्टेशन अधीक्षक के अलावा 26 जून, 2019 को पीछे से आने वाली बिहार सम्पर्क क्रांति के चालकों (लोको पायलट व सहायक लोको पायलट) का भी बयान दर्ज किया था। उसके मुताबिक जिस समस्य एक नंबर लाइन पर पैसेंजर ट्रेन खड़ी थी, उसी दौरान कंट्रोल द्वारा थ्रो पास कराने को कहे जाने के बाद स्टेशन अधीक्षक ने सम्पर्क क्रांति को भी दो नंबर लाइन की बजाय एक नंबर लाइन का ही पास दे दिया था।

मच गई थी भगदड़

जब सम्पर्क क्रांति स्टेशन पर सिवान-समस्तीपुर पैसेंजर की ओर बढ़ी तो पैसेंजर के यात्रियों में भगदड़ मच गई थी। जान बचाकर भागते यात्रियों की चपेट में आकर शालू देवी, सविता देवी, चंदन कुमार और शौकत खातून ज़ख़्मी हो गए थे। सम्पर्क क्रांति के चालक रवि शंकर कुमार ने बताया कि अपनी लाइन पर दूसरी गाड़ी खड़ी देखते ही उन्होंने ब्रेक लगा दिया था, जिसके चलते एक्सप्रेस ट्रेन पैसेंजर से 200 मीटर पहले ठहर गई और बड़ा हादसा होते-होते बच गया था। उग्र यात्रियों ने बाद में स्टेशन पर तोड़फोड़ शुरू कर दी थी, जिसमें रिटायर किए गए स्टेशन अधीक्षक सुनील खुद भी ज़ख़्मी हो गए थे।

मोदी सरकार शुरुआत से ही अकुशल कर्मचारियों पर हमलावर रही है। कई बड़े अफसरों के तबादले, निलंबन या जबरन रिटायरमेंट कर सरकारी मशीनरी की गुणवत्ता को सुधारा जा रहा है। रेलवे मंत्री ने भी अपने महकमे में चाबुक चलने को लेकर पहले ही सतर्क कर दिया था।

बीजेपी शासित राज्यों की बात करें तो भ्रष्ट कर्मचारियों पर हर जगह सख्ती दिखाई जा रही है। योगी सरकार की बात करें तो उत्तर प्रदेश में 200 अधिकारी को जबरन रिटायर, 600 पर कार्रवाई, 100 को रडार पर रखा। जिन 100 अधिकारियों पर योगी सरकार की नज़र है, उनमें से अधिकतर IAS और IPS अधिकारी हैं। उधर उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लापरवाह और मनमानी करने वाले अधिकारियों को चेतावनी देते हुए उन्हें कंपल्सरी रिटायरमेंट का अल्टिमेटम दे दिया है।

भारत में पहली बार 75% आरक्षण: प्राइवेट जॉब में स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए आंध्र प्रदेश सरकार का ऐलान

आंध्र प्रदेश में हाल ही में जगन मोहन रेड्डी सरकार ने कमान संभाली है। सत्ता पर क़ाबिज़ होने के लिए उन्होंने कई चुनावी वादे किए थे। तमाम वादों में एक वादा रोज़गार में आरक्षण देना भी शामिल था, जिसे उन्होंने सोमवार (22 जुलाई 2019) को आंध्र विधानसभा में उद्योग/कारखाने अधिनियम, 2019 को पारित करके पूरा कर दिया। दरअसल, इस अधिनियम के तहत आंध्र प्रदेश सरकार अब स्थानीय अभ्यर्थियों को औद्योगिक नौकरियों में 75% आरक्षण देने जा रही है।

आंध्र प्रदेश सभी निजी औद्योगिक इकाइयों और कारखानों में स्थानीय लोगों के लिए नौकरियों को आरक्षित करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है, फिर भले ही इन कंपनियों को सरकार से वित्तीय या अन्य मदद मिले या न मिले।

हालाँकि, कई अन्य राज्य भी स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए निजी नौकरियों में आरक्षण की बात करते रहते हैं, लेकिन अभी तक इसे लागू करने वाले राज्यों में केवल आंध्र प्रदेश ही एक ऐसा राज्य है जिसने यह किया। मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार की ओर से 9 जुलाई को कहा गया था कि सरकार एक कानून लाएगी, जिसके माध्यम से स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए प्राइवेट क्षेत्र की 70% नौकरियों को आरक्षित किया जाएगा।

दिसंबर 2018 में, सत्ता में आने के तुरंत बाद, मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक औद्योगिक नीति की घोषणा की थी, जिसमें सरकार से आर्थिक और अन्य सहायता हासिल करने के लिए कंपनियों को 70% स्थानीय अभ्यर्थियों को नौकरी देना अनिवार्य कर दिया गया। ऐसा ही कुछ कर्नाटक, गुजरात और महाराष्ट्र में भी देखने को मिला।

आंध्र प्रदेश के नए कानून में कहा गया है कि यदि आवश्यक कौशल वाले स्थानीय अभ्यर्थी उपलब्ध न हों पाएँ, तो कंपनियों को राज्य सरकार के साथ मिलकर उन्हें प्रशिक्षित करना होगा और फिर उन्हें काम पर रखना होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके साथ ही कंपनियाँ कुशल श्रम न मिलने के बहाने छिप नहीं पाएँगी।

ख़बर के अनुसार, कंपनियों को अधिनियम के शुरू होने के तीन साल के भीतर इन प्रावधानों का पालन करना होगा और एक नोडल एजेंसी को स्थानीय नियुक्तियों के बारे में त्रैमासिक रिपोर्ट प्रदान करनी होगी।

तिरुपति स्थित अमारा राजा औद्योगिक समूह के अध्यक्ष और सीईओ व सीआईआई-एपी के चेयरमैन, विजय नायडू गल्ला ने इस अधिनियम को अच्छा और बुरा दोनों बताया। अच्छा इसलिए बताया क्योंकि इससे राज्य में स्थानीय भर्ती को बढ़ावा देने की सरकार की नीति स्पष्ट होती है। बुरा इसलिए बताया कि विनिर्माण और आईटी कंपनियों में अब सरकार को स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए राज्य में अपने कौशल विकास केंद्रों को किराए पर लेने के लिए तैयार रहना होगा।

पूर्व RJD विधायक सुनील पुष्पम को उम्रकैद की सजा: गर्भवती दलित महिला को बंदूक के कुंदे से मारा था

बिहार के समस्तीपुर कोर्ट ने पूर्व विधायक और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता सुनील पुष्पम को गर्भवती दलित महिला की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने पुष्पम पर ₹25 हजार का जुर्माना भी लगाया है और अगर सुनील पुष्पम ये जुर्माना नहीं भरता है, तो फिर उसे 6 महीने और कैद में रहना होगा। तकरीबन 14 साल पुराने केस में तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश प्रणव कुमार झा ने सोमवार (जुलाई 22, 2019) को ये सजा सुनाई। इसके साथ ही पुष्पम के राजनैतिक जीवन पर भी पूर्ण विराम लग गया है।

जानकारी के मुताबिक, बिथान थाना क्षेत्र में छेछनी गाँव की कबूतरी देवी व मंजू देवी 2 अगस्त 2005 को सुबह करीब 8 बजे सिरसिया बाँध होकर बाजार जा रही थीं। इसी दौरान सुनील की गाड़ी वहाँ से गुजर रही थी। गाड़ी आते देख दोनों सड़क किनारे खड़ी हो गईं। उसी समय गाड़ी से 5 आदमी उतरे और तत्कालीन विधायक सुनील कुमार पुष्पम ने अपने हाथ में लिए बंदूक के कुंदे से गर्भवती मंजू देवी के पेट पर मारा। पिटाई से उनकी हालत बिगड़ गई। कबूतरी देवी मंजू को रोसड़ा अस्पताल ले गईं। वहाँ उसकी हालत गंभीर देखकर समस्तीपुर के सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहाँ उनका गर्भपात हो गया। फिर परिजन आगे के इलाज के लिए मंजू को बेगूसराय ले गए और बेगूसराय में इलाज के दौरान ही मंजू ने 6 अगस्त, 2005 को दम तोड़ दिया।

जिसके बाद बेगूसराय थानाध्यक्ष ने कबूतरी देवी का बयान दर्ज किया और इस बयान के आधार पर हसनपुर थाने में हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई। 14 साल तक न्यायालय में मुकदमा चला। जिसमें सभी पक्षों का बयान लेने के बाद कोर्ट ने पूर्व विधायक को हत्या में दोषी पाकर सजा सुनाई। फिलहाल विधायक न्यायिक हिरासत में है। कोर्ट ने इस मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से 8 गवाहों का एवं बचाव पक्ष की ओर से 4 गवाहों का बयान दर्ज किया।

हत्याकांड की सुनवाई में अभियोजन पक्ष की तरफ से एपीपी गौरी शंकर मिश्रा और बचाव पक्ष की तरफ से वरीय अधिवक्ता परमेश्वरी सिंह ने कोर्ट में बहस किया। हालाँकि, कोर्ट के द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद भी पूर्व विधायक सुनील कुमार पुष्पम का कहना है कि वो निर्दोष है। उसने कहा कि राजनीतिक साजिश के तहत कहानी बनाकर मामला दर्ज कराया गया था, ताकि किसी तरह उन्हें चुनाव लड़ने से राेका जा सके। पुष्पम ने कहा कि वो अपने वकील से राय लेकर इस फैसले के विरोध में हाई कोर्ट में अपील करेगा।

‘मुस्लिमो को समझना होगा कि वो भी हिंदुओं की ही संतान हैं’ – B.Ed की किताब पर बवाल, FIR

बीएड द्वितीय वर्ष के वन वीक सीरीज में राजहंस प्रकाशन द्वारा समुदाय विशेष के खिलाफ विवादित और आपत्तिजनक बातें प्रकाशित कर दी गईं। इसको लेकर बवाल मचा हुआ है। समुदाय विशेष के लोगों ने इस पर आपत्ति जाहिर करते हुए राजहंस प्रकाशन के खिलाफ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है।

दरअसल, राजहंस प्रकाशन ने बीएड द्वितीय वर्ष का वन वीक सीरिज प्रकाशित किया है। जिसमें पृष्ठ संख्या 22 के प्रश्न संख्या 21 में पूछा गया है कि धर्म संबंधी रुढ़िवादिता एवं पूर्वाग्रह को समाप्त करने के लिए हमें कौन-कौन से प्रयास करने चाहिए? जिसका जवाब देते हुए लिखा गया है- मदरसों में धार्मिक शिक्षा न दी जाए, मुस्लिमों को समझना चाहिए कि वो हिंदुओं की ही संतान हैं। साथ ही इसमें लिखा गया है कि मुस्लिम सारी दुनिया में अपना साम्राज्य स्थापित करना चाहते हैं, फलस्वरुप उन्होंने आतंकवाद फैला रखा है, जिसे ‘जेहाद’ का नाम देते हैं, परंतु इस प्रकार आतंक फैलाकर वो अपना वर्चस्व कायम नहीं रख सकते हैं। उसके लिए भाईचारा और सद्भाव की आवश्यकता होती है, क्योंकि मृत्यु उपरान्त ‘दो गज जमीन’ की आवश्यकता होती है।

राजहंस प्रकाशन द्वारा समुदाय विशेष के खिलाफ प्रकाशित आपत्तिजनक सामग्री

धर्म संबंधी रुढ़िवादिता एवं पूर्वाग्रह को समाप्त करने के प्रयास के तौर पर ये भी लिखा गया है कि धार्मिक पूर्वाग्रहता के कारण साम्प्रदायिकता की भावना फैलती है। विशेषकर हिन्दू-मुस्लिम सम्प्रदाय पूर्वाग्रह व रुढ़िवादिता के कारण संघर्षरत रहते हैं। मूर्ति को तोड़ना, गौ-हत्या कर देना, मुस्लिमों पर रंग छिड़क देना, मस्जिदों के सामने बैंड बजाना और धार्मिक उत्सवों एवं जुलूसों में पथराव करने को उदाहरण के तौर पर पेश किया गया है।

इसके साथ ही ठाकुर प्रकाशन के ऊपर भी समुदाय विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक बातें प्रकाशित करने की बात सामने आई है। हालाँकि, इसके खिलाफ अभी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है, मगर जल्दी ही इसके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करवाने की तैयारी चल रही है। मुस्लिम परिषद संस्थान के प्रवक्ता असरार कुरैशी ने इस पुस्तक को नफरतों का पुलिंदा बताया और कहा कि अगर प्रकाशकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी तो वो आंदोलन करेंगे।  राजस्थान उर्दू शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष अमीन कायमखानी ने भी दोनों किताबाें में समुदाय विशेष को लेकर गलत बातें लिखे होने की बात कही है।

इस मामले पर ठाकुर पब्लिकेशन्स के डायरेक्टर सराेज ठाकुर ने सफाई देते हुए कहा ये  किताब साल 2014-15 में पब्लिश हुई थी। राजहंस ने पुरानी किताब लेकर पब्लिश कर दिया और शिकायत भी उन्हीं के खिलाफ हुई है। वहीं, राजहंस पब्लिकेशन्स के डायरेक्टर दीपक का कहना है कि किताब में छपी बाताें काे लेकर संगठनाें के प्रतिनिधियाें काे माफीनामा भेजा जा चुका है।

समुदाय विशेष को BJP समर्थक दुकानदारों से सामान न खरीदने की राय देने वाले MLA नाहिद हसन पर FIR

उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कैराना से समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक नाहिद हसन के खिलाफ बीजेपी समर्थकों की दुकानों का बहिष्कार करने की अपील करने को लेकर FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने मंगलवार (जुलाई 23, 2019) को यह जानकारी दी।

पुलिस ने कहा कि सोमवार शाम को एक वीडियो वायरल होने के बाद यह प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसमें विधायक नाहिद हसन समुदाय विशेष से अपील करते नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस अधीक्षक अजय कुमार ने कहा कि विवादास्पद वीडियो में, हसन लोगों से कह रहे हैं कि वे कैराना में भाजपा समर्थकों द्वारा चलाई जा रही दुकानों का बहिष्कार करें। कुमार ने कहा कि मामले की जाँच का आदेश दे दिया गया है और जाँच एएसपी राजेश श्रीवास्तव को सौंप दी गई है।

वायरल हो रहे इस वीडियो में MLA नाहिद हसनसमुदाय विशेष को सन्देश देते हुए कह रहे हैं कि उनके जैसे लोगों के सामान खरीदने से ही भाजपाइयों की दुकान और उनका घर चलता है। अगर वो लोग उनकी दुकान से सामान नहीं खरीदेंगे, तो उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ जाएगी। इसलिए वो सभी से अपील करते हैं कि बीजेपी समर्थित दुकानों से सामान लेना बंद करें। साथ ही विधायक ने कैराना के उच्च अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि वो लोग बीजेपी नेता और बीजेपी समर्थकों के इशारे पर काम कर रहे हैं।

नाहिद हसन वीडियो में यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि बाजार में बीजेपी के जो भी लोग हैं उनसे सामान न खरीदें और अगर आप सामान नहीं खरीदोगे तो 15 दिन में उनको पता चल जाएगा।

वीडियो में नाहिद हसन यह भी कह रहे हैं- “कुछ बीजेपी के लोगों ने और बीजेपी दिमाग वाले अधिकारियों ने सराय की भूमि पर मौजूद लोगों को यहाँ से उजाड़ दिया है। उन उजड़े हुए लोगों के लिए मेरी आप सभी से अपील है कि बीजेपी के लोगों से सामान लेना बंद कर दो इनकी तबियत में सुधार आ जाएगा। इन्हें पता चल जाएगा कि जब हम इनसे समान लेते हैं तभी इनका घर चलता है। इनके घर चलने की वजह से आज हम सब पर या जूता बजाया जा रहा है। हमारे जो लोग हैं, थोड़े दिन यहाँ से सामान लेना बंद कर दो।”

इस बारे में जब पीटीआई ने सपा विधायक नाहिद हसन से बात की तो उन्होंने इस बात को स्वीकारा कि यह वीडियो उनका है और यह उनकी निजी राय है। उन्होंने कहा, ‘‘जो छोटे दुकानदार (हिन्दू मुस्लिम दोनों) हैं, वे भाजपा समर्थक दुकानदारों से प्रताड़ित हैं क्योंकि जो बड़े दुकानदार हैं वे छोटे दुकानदारों को उनके परंपरागत बाजार से हटाना चाहते हैं। यहाँ पर हमारी (मुस्लिमों की) संख्या ज्यादा है और यह हमसे पैसा कमा रहे हैं।’’

इस बीच तेलंगाना में बीजेपी के इकलौते विधायक टी राजा सिंह ने सोमवार को नाहिद हसन पर उनकी उस कथित टिप्पणी के लिए निशाना साधा जिसमें उन्होंने जनता से बीजेपी कार्यकर्ताओं के स्वामित्व वाली दुकानों का बहिष्कार करने को कहा है। गोशमहल से बीजेपी विधायक सिंह ने कहा, “मैं उस विधायक को बताना चाहूँगा कि यदि हम भी वही सोच रखें और आपके लोगों की दुकानों का बहिष्कार करें तो आपके लोग भूखे मर जाएँगे और आप लोगों को भीख माँगकर खाना पड़ेगा।”

तीन तलाक के बावजूद शौहर बनाता रहा शारीरिक संबंध, अब मामा या भाई से करवाना चाहता है हलाला

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर नगर कोतवाली के मोहल्ला शाहमदनगर निवासी राबिया ने हलाला के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद की है। जानकारी के मुताबिक राबिया के पति मुनीर ने पहले उसे तीन तलाक दिया और फिर दोबारा निकाह के लिए अपने छोटे भाई सुहेल या मामा राव लईक अहमद से हलाला करवाना चाहा। जब राबिया ने हलाला से इनकार किया तो उसके साथ मारपीट हुई और उसे घर से निकाल दिया गया। इस मामले के संबंध में पीड़ित महिला ने जिलाधिकारी से आरोपितों पर कार्रवाई की माँग की है।

राबिया सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता फरहा फैज के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुँची। यहाँ उसने अपने पति पर पहले तीन तलाक का और फिर अपने मामा या भाई से हलाला करवाने का दबाव बनाने का आरोप लगाया। साथ ही बताया कि विरोध करने पर उसके साथ मारपीट भी हुई है। महिला का कहना है कि उसके ससुराल वालों ने उसे मारा-पीटा और पति की दूसरी महिला के साथ शादी करने की धमकी दी। पीड़िता की माँग है कि आरोपितों के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो।

गौरतलब है कि इससे पहले भी राबिया महिला थाने में अपने पति मुनीर, देवर सुहेल, सास शफीका और पति के मामा राव लईक अहमद के ख़िलाफ़ दहेज उत्पीड़न की रिपोर्ट दर्ज करवा चुकी है।

अमर उजाला में प्रकाशित खबर के अनुसार राबिया ने कहा कि 30 जनवरी 2017 को वह अपने पति के साथ रिश्तेदारी में जयपुर गई थी। वहाँ एक सप्ताह ठहरने के बाद जब उसने मुनीर को चलने के लिए कहा तो वे वहाँ एक दिन और रुकने को कहने लगा। महिला ने जब उसी दिन घर लौटने की जिद की तो वह नाराज हो गया और कहा कि उसके साथ (राबिया) रहने वाला नहीं है। जिसके बाद उसने राबिया को तीन तलाक दे दिया। वहाँ से लौटने के बाद मुनीर उस पर हलाला का दबाव बनाने लगा। जब राबिया राजी नहीं हुई तो शौहर मुनीर उससे होटल में मिलता रहा और शारीरिक संबंध बनाता रहा। इस दौरान वह 2 बार गर्भवती हुई तो गर्भपात कराया। उसने वापस ससुराल ले जाने की बात की तो पति ने दारुल उलूम का फतवा दिखाकर हलाला कराने की शर्त रख दी। 

मुनीर का मामा राव लईक पूर्व ब्लॉक प्रमुख है। वह सपा के पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल का भी करीबी है। नोएडा में कंपनी ग्रांड पीक इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड में दोनों पार्टनर भी हैं। जिन पर नोएडा के एक थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। शौहर मुनीर अपने इसी मामा या छोटे भाई से राबिया का हलाला करवाना चाहता है।

बता दें कि महिला थाने में दर्ज राबिया के मामले में पुलिस ने राबिया के बयान को सोमवार को कोर्ट में दर्ज करवाया। जहाँ उसने अपने पति और अन्य ससुरालवालों द्वारा किए गए उत्पीड़न के बारे में बयान दिया। यहाँ राबिया ने पति पर हलाला के लिए उसका 2 बार गर्भपात कराने का भी आरोप लगाया।

साथ ही राबिया ने महिला थाना प्रभारी सरिता सिंह पर आरोप लगाया कि वे इस मामले की जाँच कर रही हैं, लेकिन उन्होंने इस मामले की फाइल को मीडिएशन के लिए भेज दिया जबकि उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी। जब राबिया को इसकी जानकरी उनके रिश्तेदारों के माध्यम से पता चली तो उसने इस पर आपत्ति जताई। साथ ही इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी से की। जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद जाँच अधिकारी ने उसके बयान कोर्ट में दर्ज कराई।