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CBI ने की लालू यादव की सज़ा बढ़ाने की माँग, हाईकोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार

सीबीआई ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव की सज़ा बढ़ाने के लिए अदालत में याचिका दाखिल की लेकिन इस पर सुनवाई नहीं हो सकी। झारखण्ड हाईकोर्ट की एक बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए ख़ुद को इससे अलग कर लिया। मंगलवार (जुलाई 9, 2019) को इस याचिका के आने के बाद जस्टिस केपी देव ने कहा कि वह काउंसल के तौर पर चारा घोटाला मामले में सीबीआई की तरफ से पैरवी कर चुके हैं, इसलिए वह ख़ुद को इस सुनवाई से अलग करते हैं।

इसके बाद जस्टिस केपी देव व जस्टिस अपरेश कुमार की खंडपीठ ने इस याचिका को किसी अन्य पीठ के पास भेजने का निर्देश दिया। सीबीआई की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा गया कि चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद सहित अन्य पर उच्च-स्तरीय षडयंत्र रचने का आरोप है, ऐसे में सजा भी बड़ी होनी चाहिए। सीबीआई लालू सहित 6 अन्य आरोपितों के लिए 7 वर्ष सश्रम कारावास की माँग कर रही है। लालू यादव पहले से ही चारा घोटाला के अन्य मामलों में दोषी करार दिए जाने के बाद राँची में जेल की हवा खा रहे हैं।

फिलहाल, स्वास्थ्य कारणों से लालू राँची स्थित रिम्स अस्पताल में भर्ती हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान उन पर जेल से ही हस्तक्षेप करने के आरोप लगे थे, जिसके बाद उनके वार्ड की गहन तलाशी ली गई थी। चुनाव से पहले उनसे मिलने के लिए विपक्षी नेताओं व राजद से टिकट के दावेदारों की लम्बी लाइन लगी रहती थी। वैसे अभी मीडिया में ऐसी ख़बरें भी चल रही हैं कि लालू की तबियत ज्यादा ख़राब हो गई है।

‘तस्वीरों में ही दिखा हौज काजी के कट्टरपंथियों का सद्भाव, मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा में नहीं किया सहयोग’

दिल्ली के चॉंदनी चौक इलाके के हौज काजी में 30 जून को मंदिर में तोड़-फोड़ की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। कट्टरपंथियों की हिंसक भीड़ ने यहाँ के एक दुर्गा मंदिर में घुसकर न केवल मूर्तियों को तोड़ा, बल्कि स्थानीय हिन्दुओं के मुताबिक मंदिर में पेशाब भी किया। 9 जुलाई यानी मंगलवार को इस मंदिर में मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए विहिप ने अनुष्ठान और स्थानीय लोगों के लिए भंडारा रखा था।

प्राण-प्रतिष्ठा के इस कार्यक्रम से आई एक तस्वीर जिसमें कुछ मुस्लिम हिन्दुओं को खाना परोसते नजर आ रहे थे, को मीडिया ने हाथोंहाथ लिया। इस तस्वीर के बहाने लुटियंस मीडिया ने मुस्लिमों के सद्भाव को दिखाने और हिन्दुओं के दर्द को दबाने की कोशिश की। लेकिन, इस कार्यक्रम के आयोजन से जुड़े हिन्दू एक्टिविस्टों का कहना है कि अनुष्ठान में हौज काजी के कट्टरपंथियों ने कोई सहयोग नहीं किया और उनका साम्प्रदायिक सद्भाव केवल तस्वीरें खींचवाने तक ही सीमित था।

अनुष्ठान की कई तस्वीरें सामने आई थी। इसमें से वायरल हुई तस्वीर में दो-तीन मुस्लिम हिन्दुओं को खाना बाँट रहे थे। मीडिया इस तस्वीर पर मंत्रमुग्ध हो गया। सीएनएन न्यूज 18 ने कहा कि अनुष्ठान के दौरान भोजन परोस हौज काजी के मुस्लिमों ने साम्प्रदायिक सद्भाव प्रदर्शित किया। हिन्दुस्तान टाइम्स ने एक कदम आगे बढ़ते हुए अपनी रिपोर्ट में यह भी दावा किया कि मुस्लिमों ने मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा में भी योगदान दिया।

लेकिन, हौज काजी में अनुष्ठान के दौरान मौजूद हिन्दू एक्टिविस्ट से जब ऑपइंडिया ने बात की तो एक अलग ही तस्वीर सामने आई। दुर्गा मंदिर में हुए अनुष्ठान में शामिल अविरल शर्मा ने बताया कि यह कार्यक्रम विहिप ने आयोजित किया था और इसके लिए मंदिर में तोड़-फोड़ से आहत पूरी दिल्ली के हिन्दुओं ने दान दिया था। लेकिन, हौज काजी के कट्टरपंथियों ने फूटी कौड़ी नहीं दी। शर्मा के मुताबिक प्राण-प्रतिष्ठा में कट्टरपंथियों द्वारा सहयोग किए जाने की खबरें झूठी हैं।

वायरल हुई तस्वीर को लेकर उन्होंने बताया कि फतेहपुरी मस्जिद के इमाम एक टेबल पर पानी बाँट रहे थे। इलाके के ज्यादातर हिन्दुओं ने इसे तवज्जो नहीं दी। यहाँ तक कि जिस टेबल पर खाना बाँटते हुए मुस्लिमों की तस्वीर सामने आई है, वह टेबल भी दुर्गा मंदिर के सामने विहिप की ओर से ही लगाया गया था।

अनुष्ठान में मौजूद एक अन्य एक्टिविस्ट आयुष गुप्ता ने भी अविरल की बातों का समर्थन करते हुए बताया कि अनुष्ठान में इलाके के कट्टरपंथियों ने कोई सहयोग नहीं किया। एक अन्य एक्टिविस्ट विशाल शर्मा ने बताया,“प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान वे मौजूद भी नहीं थे। तस्वीर केवल मीडिया में अपना पक्ष उभारने और हिन्दुओं के दर्द को दबाने की कोशिश है।” अविरल के अनुसार अमन समिति के सदस्य केवल तस्वीर खींचवाने पहुँचे थे और फोटो सेशन पूरा होते ही वहाँ से निकल गए।

‘हिन्दू क्रूरता’ का सामना करने के लिए एक हों: अलकायदा का कश्मीर में जिहाद का ऐलान

अलकायदा की नज़र अब भारत पर टिकी हुई है। ओसामा बिन लादेन के उत्तराधिकारी अल जवाहिरी ने जम्मू कश्मीर में जिहाद के लिए एकता बनाने की अपील की है। दुनिया के सबसे खूँखार आतंकवादियों में से एक माने जाने वाले जवाहिरी ने कहा कि कश्मीर की आज़ादी के लिए अब पाकिस्तान की फौज पर भरोसा नहीं किया सकता, इसीलिए ‘हिन्दू क्रूरता’ का सामना करने के लिए आतंकियों को एक होकर कश्मीर के लिए लड़ना पड़ेगा। इसके साथ ही यह साफ़ हो गया है कि अलकायदा अब भारतीय सेना से सीधे उलझने के मूड में है।

अपने वीडियो मैसेज ‘कश्मीर को न भूलें’ में जवाहिरी ने कहा कि कश्मीर में मुजाहिदीन की ज़रूरत है। उसने सेना व सरकार के ख़िलाफ़ ज़ंग छेड़ने की बात कही है। उसने भारत की सेना को निशाना बनाते हुए अर्थव्यवस्था को तबाह करने की धमकी दी है। जवाहिरी की इस वीडियो में कश्मीर में आतंकी सगठन का सरगना रहे ज़ाकिर मूसा की तस्वीर भी दिखती है। ज़वाहिरी ने पाकिस्तानी सेना को अमेरिका का पिट्ठू बताया।

जवाहिरी ने कहा कि कश्मीर में चल रहे संघर्ष को अलग कर के नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि यह पूरे विश्व में मुस्लिमों के द्वारा ‘बड़ी ताक़तों’ के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे जिहाद के अंतर्गत ही आता है। साथ ही जवाहिरी ने आतंकियों को यह हिदायत भी दी कि मस्जिदों व मुस्लिम बहुल स्थलों को निशाना न बनाएँ। ज़वाहिरी ने कहा कि पाकिस्तान जिहादियों का इस्तेमाल अपना राजनीतिक हित साधने के लिए करता है और बाद में धोखा दे देता है।

बता दें कि 2017 में अल कायदा ने ‘उपमहाद्वीप के मुजाहिदीनों के लिए आचार संहिता’ नाम से एक विस्तृत दस्तावेज जारी किया था, जिसमें यह बताया गया था कि आतंकी संगठन किन-किन लोगों को निशाना बनाएगा? इस दस्तावेज में लक्ष्य से लेकर प्रक्रिया तक, सबकुछ समझाया गया था। अलकायदा ने सेना के अधिकारियों पर जानलेवा हमले करने की बात कही थी। आतंकी संगठन ने कहा था कि सेना में जिस अधिकारी का रैंक जितना ऊपर होगा, वो उनके उतने ही ज्यादा निशाने पर होगा।

अलकायदा ने वॉर जोन से लेकर सेना के अधिकारियों के घरों तक, हर जगह उन्हें निशाना बनाने की बात कही थी। आतंकी संगठन ने कहा था कि सेना के जवान अगर छुट्टियों पर गए हों तब भी उन्हें नहीं बख्शा जाएगा, क्योंकि वे शरिया क़ानून को लागू करने के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ रहे हैं। साथ ही सेना के हाथ कश्मीरियों के ख़ून से रंगे होने की बात भी कही गई थी। इस दस्तावेज में कश्मीर का जिक्र कई बार आया था, तभी से यह अंदेशा लगाया जा रहा था कि कश्मीर पर अल जवाहिरी की नज़र है।

बुलंशहर के DM समेत यूपी के 3 जिलों में CBI रेड, मँगानी पड़ी नोट गिनने की मशीन

CBI ने एक जिलाधिकारी (DM) के सरकारी आवास पर जब छापा मारा तो इतनी नगदी बरामद हुई कि गिनने के लिए जाँच एजेंसी को मशीन मँगानी पड़ गई। मामला बुलन्दशहर का है, जिसके DM अभय सिंह के घर से मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सीबीआई ने भारी मात्रा में नगदी बरामद की है। हालाँकि मामला बुलन्दशहर नहीं, फतेहपुर का है जहाँ तैनाती के दौरान अभय सिंह पर अवैध खनन में भागीदारी का आरोप लगा था और जिसके सिलसिले में उपरोक्त कार्रवाई जाँच एजेंसी ने की है।

DM महोदय घर पर मौजूद

न्यूज़ स्टेट की खबर के मुताबिक सीबीआई ने पहले अभय सिंह के घर की सघन तलाशी ली। एक घंटे तक चली इस तलाशी के दौरान जिलाधिकारी खुद आवास पर मौजूद बताए जा रहे हैं। दो गाड़ियों में भरकर पहुँची सीबीआई की टीम ने जानकारी के अनुसार मुरादाबाद के प्रथमा यूपी ग्रामीण बाइक के महाप्रबंधक (जनरल मैनेजर) शैलेश रंजन के घर भी छापेमारी की।

आरोप है कि हाई कोर्ट द्वारा किसी भी नए खनन पट्टे के आवंटन पर 2013 में ही रोक लगा दिए जाने और पुराने पट्टों के नवीनीकरण पर रोक होने के बावजूद खनन जारी रहा। अभय सिंह इस दौरान लगभग 10 महीनों तक फतेहपुर के जिलाधिकारी थे। अंततः जुलाई 2016 में इलाहबाद हाई कोर्ट ने सात जिलों- कौशाम्बी, सहारनपुर, हमीरपुर, फतेहपुर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, शामली में अवैध खनन की सीबीआई जाँच के आदेश जारी किए। वही जाँच जारी है, और अभय सिंह जाँच के घेरे में हैं

जाँच में यह भी पता चला कि अवैध खनन की काली कमाई खाने में कई सफेदपोश नेता और अधिकारी भी शामिल हैं। अब जाँच के आधार पर लगातार सीबीआई छापेमारी कर रही है। जिसमें भारी मात्रा में नगदी पाए जाने की सूचना है।

कई नेता-अफसर शामिल

सीबीआई ने अपनी जाँच में पाया कि मामले में कई अफसरों और सफेदपोश नेताओं की भी मिलीभगत है। इसी जाँच के आधार पर सीबीआई की छापेमारी जारी है। इस मामले के हाई-प्रोफाइल संदिग्धों में चर्चित आईएएस अधिकारी बी. चन्द्रकला भी शामिल हैं, जिन पर बुलंदशहर की डीएम रहने के दौरान अवैध खनन मामले में संलिप्तता का आरोप है। एक बार पहले केंद्र सरकार के कैडर का रुख कर चुकीं चन्द्रकला आजकल शैक्षिक अवकाश (स्टडी लीव) पर हैं।

राहुल गॉंधी को लोकसभा की पहली पंक्ति में नहीं मिलेगी सीट, सरकार ने कॉन्ग्रेस की मॉंग ठुकराई

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वायनाड से सांसद राहुल गॉंधी को लोकसभा की पहली पंक्ति में सीट नहीं मिलेगी। कॉन्ग्रेस ने अपने पूर्व अध्यक्ष और गॉंधी परिवार के चिराग राहुल के लिए पहली पंक्ति में एक अतिरिक्त सीट की मॉंग सरकार से की थी। लेकिन, नियमों का हवाला देते हुए सरकार ने उसकी मॉंग ठुकरा दी है।

सरकार ने कहा है कि राहुल पहली पंक्ति में सीट पाने के हकदार नहीं हैं और अब वे पार्टी अध्यक्ष भी नहीं रहे कि उन्हें विशेष सुविधा दी जाए।

नियमों के मुताबिक कॉन्ग्रेस को लोकसभा की पहली पंक्ति में केवल दो सीट मिल सकती है। विपक्ष का नेता होने के नाते अधीर रंजन चौधरी और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गॉंधी इन दो सीटों की हकदार हैं।

संसद के निचले सदन में सीट आवंटन की जारी प्रक्रिया के बीच सरकार ने कॉन्ग्रेस की मॉंग ठुकराई है। पहली पंक्ति में विपक्ष से सोनिया और अधीर के अलावे टीएमसी तथा वाईएसआर कॉन्ग्रेस के एक-एक सांसद और सदन के दो वरिष्ठ सदस्यों फारूक अब्दुल्ला और मुलायम सिंह को सीट मिलने की उम्मीद है।

ऐसे में राहुल गॉंधी को दूसरी या तीसरी पंक्ति में सीट मिलने के आसार हैं। हालाँकि कॉन्ग्रेस ने उनके लिए अतिरिक्त सीट मॉंगने की खबरों का खंडन किया है।

संसद में सीटों का आवंटन लोकसभा संचालन की प्रक्रिया और आचरण के नियम 4 के तहत सदन के अध्यक्ष करते हैं। नियम यह भी कहते हैं कि सीटों के आवंटन में अध्यक्ष अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं। हर पंक्ति में पांच या उससे अधिक सदस्यों वाली पार्टी को सीट आवंटित करने का एक फॉर्मूला है। लोकसभा में कॉन्ग्रेस के 52 सदस्य हैं और पहली पंक्ति में केवल 20 सीटें हैं। इसलिए, कॉन्ग्रेस को केवल दो सीट ही मिल सकती है।

जिन दलों के सांसदों की संख्या पांच से कम होती है उनके लिए सीटों के आवंटन में अध्यक्ष अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल करते हैं। अमूमन बेहद वरिष्ठ सदस्यों को उनके दल के सदस्यों की संख्या कम होने पर भी पहली पंक्ति में सीट दी जाती है।

Fact Check: वित्त मंत्रालय में पत्रकारों के प्रवेश पर लगा प्रतिबन्ध? ‘गिरोह विशेष’ के झूठ की खुली पोल

वित्त मंत्रालय में पत्रकारों के प्रवेश को प्रतिबंधित करने को लेकर मीडिया में झूठी ख़बरें चलाई गईं। इस प्रक्रिया में शेखर गुप्ता की ‘द प्रिंट’, ‘द वायर’ और ‘स्क्रॉल’ समेत कई मीडिया संस्थान और ‘गिरोह विशेष’ के पत्रकार शामिल थे। वामपंथी नेता सीताराम येचुरी ने इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर का हवाला देते हुए लिखा कि पारदर्शिता छिपाने के लिए डेटा में हेराफेरी करने वाली सरकार पत्रकारों को मंत्रालय में नहीं घुसने दे रही है।

शेखर गुप्ता की ‘द प्रिंट’ में रेम्या नायर ने लिखा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंत्रालय में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगा दिया है।

रायटर्स ने भी लिखा कि वैलिड आईडी प्रूफ होने के बावजूद मीडिया कर्मियों को वित्त मंत्रालय में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।

इसी तरह अशोक स्वेन ने भी लिखा कि सरकार फ्रस्ट्रेशन के कारण नॉर्थ ब्लॉक में पत्रकारों की एंट्री पर पाबन्दी लगा रही है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने भी इस झूठ को बढ़ावा दिया।

इसी तरह न्यूज़लॉन्ड्री व अन्य मीडिया संस्थानों ने भी ऐसी ही ख़बरें चलाई। लेकिन, असलियत कुछ और ही है। वित्त मंत्रालय ने ऐसी किसी भी ख़बर को सिरे से नकार दिया है। मीडियाकर्मियों के प्रवेश के सम्बन्ध में बस एक प्रक्रिया तय की है, किसी भी प्रकार का कोई प्रतिबन्ध नहीं लगाया गया है। पत्रकारों को अधिकारियों से मिले अपॉइंटमेंट के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा लेकिन किसी प्रकार के प्रतिबन्ध की बात नहीं कही गई है। नीचे संलग्न किए गए फोटो में आप वित्त मंत्रालय का स्पष्टीकरण पढ़ सकते हैं:

वित्त मंत्रालय का स्पष्टीकरण: मीडिया के झूठ की खुली पोल

कई पत्रकारों व ‘गिरोह विशेष’ ने इसे मीडिया पर सरकार द्वारा हमला के रूप में प्रचारित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने ऐसा दिखाने की कोशिश की कि सरकार मीडिया से डर गई है और पत्रकारों को मंत्रालय में नहीं घुसने दे रही है। लेकिन, वित्त मंत्रालय के स्पष्टीकरण के बाद इन सभी की पोल खुल गई।

सूरत भीड़ हिंसा: कॉन्ग्रेस पार्षद असलम समेत 49 गिरफ़्तार, 5000 लोगों के ख़िलाफ़ दर्ज है मामला

सूरत में शुक्रवार (जुलाई 5, 2019) को मुस्लिमों द्वारा किए गए हंगामे के कारण कई पुलिसकर्मियों को चोटें आई थीं। अब तक इस मामले में 49 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है, जिनमें एक कॉन्ग्रेस नेता भी शामिल है। सूरत म्युनिस्पल कॉर्पोरेशन के पार्षद असलम साइकिलवाला के ख़िलाफ़ 6 जुलाई को मामला दर्ज किया गया था। दंगे फैलाने के मामले में पुलिस ने 5 हज़ार अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज किया है। मुस्लिम संगठनों द्वारा निकाली गई ‘मौन रैली’ के दौरान हुए बवाल को थामने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े थे।

ये लोग झारखण्ड में चोर तबरेज अंसारी की मॉब लिंचिंग के विरोध में सड़क पर उतरे थे। भीड़ ने पुलिस पर पथराव करना शुरू कर दिया था, जिसके बाद पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी थी। भीड़ ने पाँच सिटी बसों को भी निशाना बनाया और सार्वजनिक संपत्ति को जम कर नुकसान पहुँचाया। पूरे क्षेत्र में तनाव फैलने के बाद पुलिस को धारा 144 लागू करनी पड़ी। इसके बाद रैली के आयोजकों को हिरासत में ले लिया गया था। बता दें कि भीड़ अनुमति न होने के बावजूद प्रशासन को धता बताते हुए आगे बढ़ती जा रही थी।

इस मामले में पहले 9 लोग गिरफ़्तार किए गए थे, अब 40 अन्य आरोपितों को गिरफ़्तार किया गया है। ट्विटर पर पोस्ट किए गए वीडियो में भीड़ किसी अधिवक्ता बाबू पठान नामक व्यक्ति और उसके संगठन का बैनर हाथ में लेकर हिंसा पर उतारू दिख रही है। बाबू पठान के ट्विटर प्रोफाइल के अनुसार, वह सूरत सिटी कॉन्ग्रेस कमिटी का उपाध्यक्ष है। गिरफ़्तार आरोपितों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

वहीं सूरत के मुस्लिम संगठनों ने पुलिस को निर्दोष लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई न करने की सलाह दी है। मुस्लिम संगठनों ने डीएम को ज्ञापन सौंप कर केवल अभियुक्तों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की अपील की। संगठनों ने आरोप लगाया कि पुलिस निर्दोष लोगों को परेशान कर रही है।

गाय काटने वाली आसिया अंद्राबी के घर को टेरर फंडिंग मामले में NIA ने किया अटैच

टेरर फंडिंग के मामले की जाँच कर रही एनआईए ने अब जम्मू कश्मीर के अलगाववादियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इस मामले में एनआईए ने अलगाववादी आसिया अंद्राबी के श्रीनगर स्थित घर को अटैच कर लिया है। आतंकी गतिविधियों के के लिए इस्तेमाल किए जाने के कारण यूएपीए के तहत यह कार्रवाई की गई है। नीचे संलग्न किए गए पत्र में आप एनआईए की नोटिस को पढ़ सकते हैं। ये आसिया वही है जिसने 2015 में गाय काटी थी, वीडियो वायरल होने के बाद उसे गिरफ्तार भी किया गया था।

एनआईए ने आसिया अंद्राबी के घर को किया अटैच

आसिया अंद्राबी के इस घर का इस्तेमाल आतंकी संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत की गतिविधियों के लिए किया गया। अब आसिया अंद्राबी अपने इस घर को तब तक नहीं बेच सकती है, जब तक इस पूरे मामले की जाँच खत्म न हो जाए। कश्मीर घाटी में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने और युवाओं को भड़काने के कारण अलगाववादी नेता शब्बीर शाह, यासिन मलिक, आसिया अंद्राबी, पत्थरबाजों के पोस्टर बॉय मसरत आलम और हवाला एजेंट जहूर वटाली को पहले ही गिरफ़्तार किया जा चुका है।

दुख़्तरान-ए-मिल्लत की नेत्री आसिया अंद्राबी के बेटे ने मलेशिया में पढ़ाई की है और टेरर फंडिंग मामले में गिरफ़्तार ज़हूर वटाली ने उसका पूरा ख़र्च वहन किया था। एनआईए ने इस मामले में अंद्राबी से पूछताछ की। अंद्राबी ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि वह और उनका संगठन विदेश से रुपए जुटाता है और फिर कश्मीर में महिलाओं द्वारा प्रदर्शन कराने के लिए इन रुपयों का इस्तेमाल किया जाता है। अंद्राबी के बेटे मोहम्मद बिन वसीम ने मलेशिया में रहते हुए जिन बैंक खातों का प्रयोग किया, उसके बारे में अधिक जानकारी जुटाने के लिए एनआईए पहले ही सम्बद्ध अधिकारियों से संपर्क कर चुकी है।

नाबालिग की रेप और हत्या: फ़ारुख़ ने शव को बोरी में डाल भूसे में छिपाने की कोशिश की, गिरफ़्तार

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में एक नाबालिग बच्ची के साथ बलात्कार का मामला सामने आया है। यह घटना मंगलवार (जुलाई 8, 2019) देर रात की है, जब नशेड़ी फ़ारुख़ उक्त बच्ची को फुसला कर अपने घर ले गया। बच्ची उसके पड़ोस में ही रहती थी और उसकी उम्र महज 6 वर्ष थी। उसने बच्ची का बलात्कार किया और फिर उसकी हत्या कर दी। उसने बच्ची का मुँह भी दबाए रखा। मौके पर पुलिस अधीक्षक व फॉरेंसिक टीम ने पहुँच कर जायजा लिया।

दरअसल, बच्ची देर शाम अपने घर के बाहर खेल रही थी। तभी फ़ारुख़ ने उसे अपनी दरिंदगी का शिकार बनाने की सोची और उसे बहला-फुसला कर अपने घर में ले गया, जहाँ मुँह दबा कर बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसने शव को सफ़ेद रंग की बोरी में रख दिया। रात को आरोपित फ़ारुख़ बोरी में रखे बच्ची की लाश को भूसे में छिपाने जा रहा था।

जब कुकर्म करने के बाद वह लाश छिपाने जा रहा था, तभी ग्रामीणों की नज़र उस पर पड़ी और वह दबोचा गया। गुस्साए ग्रामीणों ने उसकी जम कर पिटाई की और फिर पुलिस के हवाले कर दिया। हत्यारोपित फ़ारुख़ से अभी पुलिस की पूछताछ चल रही है। फ़ारुख़ 3 वर्ष पहले भी बलात्कार के प्रयास के आरोप में जेल की हवा खा चुका है। उस समय उसने एक युवती के साथ बलात्कार करने की कोशिश की थी। फ़ारुख़ अव्वल दर्जे का नशेड़ी है और वह नशे की हालत में इधर-उधर भटकता रहता था।

ग्रामीणों की पिटाई के कारण वह घायल हो गया, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। पुलिस उसके पूर्व के आपराधिक इतिहास को खँगाल रही है। इस घटना के बाद ग्रामीणों में आरोपित के प्रति आक्रोश है।

₹1100 करोड़ का चीनी मिल घोटाला: माया के क़रीबी हाजी इक़बाल के ठिकानों पर CBI रेड

कई चीनी मिल ख़रीद कर अकूत संपत्ति अर्जित करने और बेटे के साथ मिल कर करोड़ों रुपए इधर-उधर करने के मामले में सीबीआई ने बसपा के पूर्व विधान पार्षद हाजी इक़बाल पर शिकंजा कसा है। कल मंगलवार (जुलाई 9 , 2019) को उसके कई ठिकानों पर सीबीआई ने छापेमारी की। मायावती के शासनकाल में बीमार बता कर 21 चीनी मीलों को बेच डाला गया था। मोहम्मद इक़बाल के मुंशी नसीम के घर में सीबीआई की टीम ने छापेमारी की। इक़बाल के दोनों बेटों- जावेद और वाजिद के ख़िलाफ़ पहले ही मामला दर्ज किया जा चुका है। अप्रैल 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चीनी मिल घोटालों की सीबीआई जाँच की सिफारिश की थी।

यह घोटाला 2011 में हुआ था। बताया जाता है कि कुल 1100 करोड़ रुपए के इस घोटाले को अंजाम देने के लिए ही चीनी मीलों को औने-पौने दाम पर बेच डाला गया था। जिन चीनी मीलों को बेचा गया था, उसमें से 10 सक्रिय थीं जबकि बाकि 11 बंद पड़ी हुई थीं। मंगलवार को सुबह 9 बजे शुरू हुई कार्रवाई शाम तक चली। हाजी इक़बाल के बारे में कहा जाता है कि पहले वह सिर्फ़ एक लकड़ी की टाल का मालिक था लेकिन कुछ ही वर्षों में उसने अपना एक बड़ा साम्राज्य खड़ा कर लिया। सहारनपुर में उसने एक यूनिवर्सिटी भी स्थापित की।

मोहम्मद इक़बाल ने कई मुखौटा कम्पनियाँ बनाईं, जिनके डायरेक्टर के रूप में उसने अपने लोगों को रखा।लेकिन, क़दम-क़दम पर धोखाधड़ी के कारण सीबीआई की नज़रों से वह बच नहीं सका। उसकी फ़र्ज़ी कंपनियों की नेट वर्थ से लेकर संपत्ति तक, बैलेंस शीट में सबकुछ काल्पनिक था। सहारनपुर में हाजी इक़बाल के आदमी सौरभ मुकुंद और मिर्जापुर में उसके मुंशी नसीम के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई। इक़बाल के भाई महमूद अली ने सीबीआई की इस कार्रवाई के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट जाने की धमकी दी है।

हाजी इक़बाल के बारे में कहा जाता है कि वह पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का क़रीबी है। उसका नाम खनन घोटाले में भी आ चुका है। हाजी इक़बाल को 2010 में बसपा से विधान पार्षद बनाया गया था, जबकि उसके भाई महमूद अली को भी विधान पार्षद बनाया गया है। हाजी इक़बाल का बेटा जावेद गिरफ़्तार होकर जेल भी जा चुका है। उसके मुनीम नसीम से एजेंसी ने लगभग 2 घंटे तक गहन पूछताछ की। इससे पहले नोटबंदी के दौरान फ़र्ज़ी संस्था खड़ी कर के करोड़ों की धोखाधड़ी की गई थी। उस मामले में भी इक़बाल का नाम आया था