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₹2.6 लाख की जमीन ₹4.76 करोड़ में: ईसाई मिशनरी का 183 गुना लाभ कमाने वाला घोटाला

झारखंड में भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने एक मिशनरी संस्था पर CNT-SPT क़ानून का दुरुपयोग करते हुए ज़मीन की ख़रीद-फरोख़्त का गंभीर आरोप लगाया है। सोमवार (22 जुलाई 2019) को पार्टी प्रदेश मुख्यालय में उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बात की जानकारी दी कि नामकुम अंचल के खाता नंबर-3 और 142 के प्लॉट नंबर 170, 171, 172, 173, 174, 176, 177 के कुल 4.23 एकड़ की ज़मीन की ख़रीद-बिक्री में जमकर गड़बड़ी हुई है।

प्रतुल शाहदेव ने बताया कि इस ज़मीन को साल 2004-05 में पहले ब्रदर सिरिल लकड़ा ने कोड़ियों के भाव ख़रीदा। उस समय इस ज़मीन की क़ीमत ₹2.6 लाख थी और इसे बेचते समय इसकी क़ीमत ₹4.76 करोड़ हो गई। इतना ही नहीं, इस ज़मीन की ख़रीद और बिक्री के दस्तावेज़ों में तीन अलग-अलग पते लिखे हुए हैं जो कि ब्रदर सिरिल लकड़ा से संबंधित हैं। एक दस्तावेज़ में नामकुम का पता है तो दूसरे में गुमला का। वहीं, तीसरे में पुरुलिया रोड, राँची का पता लिखा हुआ है।

ब्रदर सिरिल लकड़ा ने व्यक्तिगत तौर पर ख़रीदी ज़मीन को गेल इंडिया लिमिटेड को बेचा
ज़मीन के इस दस्तावेज़ में गुमला का पता लिखा है

ख़बर के अनुसार, यह मिशनरी संस्था रोम की मोनफोर्ट ब्रदर्स ऑफ़ सेंट गेब्रियल है। ग्रेबियल सोसायटी शैक्षणिक संस्था के रूप में निबंधित है और उसका मुख्यालय रोम में है। बीजेपी प्रवक्ता का कहना है कि इस संस्था ने अवैध तरीके से ज़मीन की ख़रीद और उसकी बिक्री में 183 गुना तक कमाई की है। दरअसल, ब्रदर सिरिल लकड़ा ने इस 4.3 एकड़ ज़मीन को ₹4.76 करोड़ में गेल इंडिया लिमिडेट को बेच दिया था और इससे 13 साल में इस ज़मीन से 183 गुना लाभ कमाया गया।

प्रतुल शाहदेव के अनुसार, ब्रदर सिरिल लड़का ने जब यह ज़मीन ख़रीदी थी तो वो व्यक्तिगत तौर पर ख़रीदी थी, लेकिन उसी ज़मीन को बेचते समय मिशनरी सामने आ गई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मिशनरी संस्था में फ़ादर, ब्रदर और सिस्टर को ज़मीन रखने का अधिकार प्राप्त नहीं है, जबकि इस ज़मीन की रजिस्ट्री ब्रदर सिरिल लकड़ा ने अपने नाम कराई थी।

इस ज़मीन की रजिस्ट्री ब्रदर सिरिल लकड़ा ने अपने नाम कराई थी

इसी संदर्भ में प्रतुल का कहना है कि सोसायटी को ज़मीन ख़रीदने और बेचने का कोई अधिकार नहीं था, लेकिन जिस तरह से ख़रीद-फ़रोख़्त का यह प्रकरण सामने आया है, उससे पता चलता है कि सूबे में बड़े पैमाने पर ईसाई संस्थाएँ ग़लत कार्यों में लिप्त हैं। इसकी शिक़ायत उचित फोरम में ज़रूर की जाएगी।

‘कश्मीर मुद्दे पर ट्रंप का बयान न केवल बचकाना और भ्रांति फैलाने वाला बल्कि शर्मनाक भी’

एक ओर जहाँ अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा कश्मीर में मध्यस्ता वाले दावे के बाद कॉन्ग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने प्रधानमंत्री से बिना कुछ सोचे-समझे जवाब माँगा है तो वहीं कैलिफोर्निया से कॉन्ग्रेसमैन ब्रैड शेरमन ने ट्रंप द्वारा कश्मीर मुद्दे पर दिए बयान को खारिज किया है। साथ ही उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान को बचकाना और भ्रांतिमूलक (Amateurish and Delusional) बताया है।

शेरमैन ने ट्वीट करते हुए लिखा कि कोई भी प्रजातंत्रवादी जो साउथ एशिया की विदेश नीतियों से परिचित है, वो इस बात को जानता-समझता है कि भारत लगातार कश्मीर मुद्दे पर किसी भी तीसरी पार्टी की मध्यस्ता से इनकार करता रहा है। इतना ही नहीं, कॉन्ग्रेसमैन ने यहाँ तक कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस तरह का सुझाव कभी नहीं दे सकते। इसलिए उन्होंने ट्रंप के बयान को न केवल बचकाना और भ्रांतिमूलक बताया है बल्कि उन्होंने इसे शर्मनाक भी कहा है।

शेरमन की मानें तो उन्होंने इस मसले में यूएसए में मौजूद भारत के राजदूत हरीश सिंघला से बात करके ट्रंप की गलती के लिए माफ़ी माँगी है।

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने इमरान खान से मिलने के बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्ता करने के लिए उनसे मदद माँगी है, जिसके लिए उन्होंने हाँ कर दिया है। उनका ये बयान पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान के बयान के बाद आया था, जिसमें खान ने कहा था कि अमेरिका विश्व में सबसे शक्तिशाली देश है, इसलिए वे उम्मीद करते हैं कि दोनों पड़ोसी मुल्कों के इस मसले को सुलझाने में वे मदद करेंगे।

जबकि भारत ने डोनॉल्ड ट्रंप के इस दावे को तुरंत खारिज किया था और कहा था कि इस तरह की कोई बात प्रधानमंत्री की ओर से नहीं की गई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट करके साफ़ किया कि इस मुद्दे पर भारत का फैसला हमेशा से एकदम साफ़ है कि पाकिस्तान के साथ इन मुद्दों पर द्विपक्षीय बातचीत होगी।

ट्रंप के इस बयान को यूएस की राजनीति और वहाँ के मीडिया में चारों ओर से आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। एडवर्ड लूस जो कि यूएस के राष्ट्रीय समाचार पत्र “FINANCIAL TIMES” के एडिटर हैं, उन्होंने कहा है कि ट्रंप ने भारत के लिए बहुत गहरा और उत्तेजक बयान दिया है, भारत ने हमेशा तीसरी पार्टी मध्यस्थता से इनकार किया है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि भारत चीन के साथ अपनी प्रतिद्वंद्विता में अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण “प्राकृतिक सहयोगी” है। ट्रम्प ने जो कहा, उनकी मूर्खता और अज्ञानता पर काबू पाना मुश्किल है।

इसके अलावा कॉन्ग्रेस दिग्गज नेता शशि थरूर ने भी ट्रंप के बयान के बारे में एएनआई से बातचीत में कहा, “ट्रंप को मालूम ही नहीं है कि वे क्या कह रहे हैं, शायद उन्हें मसला समझ में ही नहीं आया या किसी ने उन्हें बताया ही नहीं। ये नामुमकिन है कि प्रधानमंत्री किसी और से इस बारे में कहें क्योंकि ये हमारी स्पष्ट नीति है कि हमें किसी तीसरी पार्टी से मध्यस्ता नहीं करवानी, हमें अगर पाक से बात करनी होगी तो हम खुद करेंगे।”

मैं सिर्फ एक गाँव का CM हूँ… पूरे राज्य का मुख्यमंत्री बनने में बहुत खर्चा हो जाएगा!

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने अपने पैतृक गाँव चिंतमडाका में रहने वाले प्रत्येक परिवार को ₹10 लाख देने का ऐलान किया है। इसका फायदा गाँव के कुल दो हजार परिवारों को मिलेगा। सोमवार (जुलाई 22, 2019) को गाँव में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुँचे मुख्यमंत्री ने ये घोषणा की। इस दौरान केसीआर ने कहा कि उनका जन्म सिद्दिपेट जिले के चिंतमडाका गाँव में हुआ है। वो इस गाँव के लोगों के आभारी हैं। उन्होंने कहा कि वो ऐलान करते हैं कि उनके गाँव चिंतमडाका के प्रत्येक परिवार को सरकार की तरफ से ₹10 लाख दिए जाएँगे। इस राशि से वो कुछ भी खरीद सकते हैं। इससे गाँव के लोग ट्रैक्टर, खेत और खेती की मशीनें भी खरीद सकते हैं।

मुख्यमंत्री की इस घोषणा से सरकारी राजस्व पर ₹200 करोड़ का बोझ पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे जल्द ही इस राशि को मंजूरी प्रदान कर देंगे और जल्द ही सभी परिवार को ये राशि मिल जाएगी। साथ ही सीएम ने विधायक और कलेक्टर से गाँव के लोगों का स्वास्थ्य प्रोफाइल भी तैयार करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि अमेरिका की तरह ही यहाँ भी सभी नागरिकों के ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट का डेटा एक माउस के क्लिक पर उपलब्ध होना चाहिए ताकि उन्नत चिकित्सा देखभाल प्रदान की जा सके। राव ने गाँव के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि वो लोग अपने पुराने मकानों को हटाकर नए मकान बनवा सकते हैं ।

सीएम के अनुसार यह मदद स्‍व-रोजगार के लिए है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गाँव के युवा जिस भी काम से पैसा कमाना चाहें, उनकी मदद की जाए। उन्‍होंने कहा कि आजीविका की तलाश में गाँव से बाहर गए लोगों को भी वापस लाया जाए। हाल ही में तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के वरिष्ठ नेता टी रामा राव ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री और टीआरएस के अध्यक्ष चंद्रशेखर राव की तारीफ करते हुए कहा था कि राव राज्य और उनके लोगों के लिए केंद्र सरकार या किसी भी राजनीतिक दल से लड़ सकते हैं।

तेलंगाना की सरकारी वेबसाइट से उठाई गई जानकारी

ऊपर के स्क्रीनशॉट को ध्यान से देखिए। तेलंगाना में ग्रामीण परिस्थिति के आँकडे़ को यह बखूबी दर्शाता है। चिंतमडाका गाँव की तो किस्मत अच्छी थी कि यहाँ श्रीमान मुख्यमंत्री जी का जन्म हुआ। बाकी के गाँव अपनी किस्मत को रो रहे होंगे। मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव अगर चाहते हैं कि अन्य गाँवों के साथ ऐसा सौतेला व्यवहार न हो तो उन्हें कुछ ज्यादा नहीं करना होगा। छोटा सा गणित (सिम्पल गुणा-भाग) सॉल्व करके वो पूरे राज्य के मुख्यमंत्री होने का दावा कर सकते हैं।

ऊपर मुख्यमंत्री की साइट से ही जो जानकारी ली गई है, उसके अनुसार एक परिवार की औसत साइज 4 लोगों की है। और ग्रामीणों की कुल संख्या है – 213.95 लाख। मतलब कुल परिवार हो गए – 213.95 में 4 से भाग देना। यानी कि 53,48,750 परिवार तेलंगाना के गाँवों में रहते हैं। अपने पैतृक गाँव के हर परिवार को 10 लाख रुपए देने वाले मुख्यमंत्री को अब बस गुणा करना होगा। मतलब 5348750 गुणा 10 लाख रुपए – बस। और इतने रुपए उनकी जेब से नहीं जाएँगे, जेब से तो खैर वो अपने गाँव वालों को भी नहीं दिए होंगे!

जब तब के चंद्रशेखर राव यह गुणा कर पाएँगे, बजट पास करेंगे… तब तक उन्हें खुद को चिंतमडाका गाँव का मुख्यमंत्री घोषित कर देना चाहिए। इसके लिए उन्हें राज्यपाल को चिट्ठी लिखना पड़े, विधानसभा का स्पेशल सत्र बुलाना पड़े या फिर राज्य में आपातकाल लगाना पड़े… करना उन्हें यही चाहिए। क्योंकि इसके बिना वो पूरे राज्य के मुख्यमंत्री तो निश्चित तौर पर नहीं हैं!

बिहार सेक्स रैकेट: MLA-अफसरों के घर भेजी जाती थीं 10-12 लड़कियाँ, दिल्ली-लखनऊ तक सप्लाई

बिहार के भोजपुर में जिला पुलिस ने एक सेक्स रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस को पता चला है कि इसमें नाबालिग लड़कियों से जबरन देह व्यापार कराया जाता था। इन लड़कियों को उच्च अधिकारियों से लेकर इंजीनियरों के पास तक पहुँचाया जाता था। खबरों के मुताबिक इस मामले में फिलहाल एक महिला और एक पुरूष को गिरफ्तार किया गया है जबकि महिला का जीजा अभी फरार है।

आरोपितों की पहचान भोजपुर निवासी अनीता देवी और संजीत कुमार के तौर पर हुई है। पुलिस इन से सख्ती से पूछताछ कर रही है। दोनों की निशानदेही पर तीन संभावित इलाकों में छापेमारी भी हुई है। इन जगहों से पुलिस कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

प्रभात खबर में प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट

खबरों की मानें तो इस मामले में गिरफ्तार महिला अनीता ने भोजपुर जिले के एक विधायक से संबंध होने की भी बात बताई है। उसका कहना है कि वह अक्सर एक विधायक के पास जाती थी। जिसके बाद से उस विधायक के नाम के कयास लगाए जा रहे हैं। प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक हो सकता है विधायक का पता लगाने के लिए पुलिस नाबालिग बच्ची से विधायक के फ्लैट का सत्यापन करवाए।

दिलेर है नाबालिग लड़की

गौरतलब है कि एक 12 वर्षीय किशोरी की शिकायत पर ये मामला सुर्खियों में आया है। इस नाबालिग लड़की को एक महीने पहले नगर थाना क्षेत्र के एक मुहल्ले में रहने वाली लाली नाम की महिला ने अनीता देवी के पास पहुँचाया था। दरअसल, भोजपुर की ये किशोरी पटना से किसी तरह भागकर जब अपने घर पहुँची तो बच्ची के परिजनों ने मामले को पुलिस में दर्ज करवाया।

पीड़ित बच्ची ने बताया कि पटना में उससे एवं अन्य लड़कियों को देह व्यापार का धंधा करवाने के लिए विधायक एवं इंजीनियर समेत अन्य वीआईपी के यहाँ पर भेजा जाता था, जिसके बदले उन्हें बहुत कम पैसे मिलते थे। इतना ही नहीं, बच्ची ने ये भी बताया कि आरोपित महिला इन किशोरियों को डिमांड के अनुसार उत्तर प्रदेश के लखनऊ एवं दिल्ली भी लेकर जाती थी। यहाँ उनके साथ जबरन देह-व्यापार कराया जाता था। लड़की का कहना है कि इस पूरे मामले में करीब 10-12 लड़कियों से ऐसा करवाया जाता था।

गुमनाम विधायक आखिर कौन?

अनीता ने पूछताछ में ये भी बताया कि वह पटना में संजय पासवान उर्फ पंडित उर्फ जीजा के कहने पर लड़कियों को गलत काम के लिए भेजती थी। अनीता के मुताबिक उससे खुद भी देह व्यापार का धंधा करवाया जाता था। धंधे में लिप्त लड़कियों को पटना के रामलखन पथ स्थित भोजपुर कॉलनी में रखा जाता था। यहीं से संजय पासवास इन लड़कियों को आला अफसरों के पास भेजता था। अनीता के मुताबिक एक महीने के भीतर उसने नाबालिग बच्ची को आरा के इंजीनियर के पास और विधायक के फ्लैट पर भेजा था।

मामले को पुलिस ने देह व्यापार अधिनियम, दुष्कर्म एवं पोस्को एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। साथ ही संजय पासवास और लाली की खोज में जुटी है पुलिस। हिंदुस्तान की खबर के मुताबिक भोजपुर के एसपी सुशील कुमार ने बताया कि किशोरी ने किसी विधायक का नाम नहीं लिया है। सिर्फ एक विधायक के पास भेजे जाने की बात कही है। इसके अलावा नगर थाना के अवर निरीक्षक विजय कुमार ने सोमवार को बताया कि पीड़ित किशोरी (12) का स्थानीय अदालत में न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान रिकार्ड किया गया है।

BJP नेता, उनकी पत्नी व बेटे की हत्या: 3 गोली चलाकर लोगों को डराया फिर कर दी अँधाधुंध फायरिंग

झारखंड के खूंटी स्थित मुरहू प्रखंड के हेठगोवा गाँव में रात के करीब 8:30 बजे कुछ वर्दीधारी बदमाशों ने भाजपा नेता मागो मुंडा के घर में घुसकर उनकी, उनकी पत्नी और उनके बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना के दौरान मृतक मागो मुंडा के भतीजे रमाय मुंडा की पत्नी नौरी देवी को भी कमर में गोली लगी, जिसके कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए सदर अस्पताल में भर्ती करवाया गया लेकिन बाद में रिम्स भेज दिया गया।

प्रभात खबर के मुताबिक इस घटना के संबंध में प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मुंडा कल (जुलाई 22, 2019) रात में अपने पूरे परिवार के साथ आँगन में बैठे हुए थे, तभी वहाँ कुछ वर्दीधारी अज्ञात बदमाश आए और घटना स्थल पर लगातार तीन गोलियाँ चलाईं। गोलियों की आवाज़ सुनकर आसपास के लोग डर कर अपने घरों में घुस गए। इसके बाद गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका गूँज उठा।

जब बदमाश वहाँ से चले गए तो लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकले। उन्होंने देखा कि मागो मुंडा और उनका बेटा लिपराय मुंडा मृत पड़े हैं जबकि लखमनी मुंडू (उनकी पत्नी) घायल हैं। घायल अवस्था में लखमनी को अस्पताल पहुँचाया गया लेकिन डॉक्टरों ने वहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया।

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस अपनी छानबीन में जुट गई है। लेकिन अभी तक इस बात की जानकारी नहीं मिल पाई है कि इस घटना के पीछे कौन था। घायल नौरी देवी की मानें तो जिस समय ये सब हुआ उस समय वह खाना खा रही थीं कि तभी उन्हें गोली चलने की आवाज़ सुनाई दी। उन्होंने मागो मुंडा की पत्नी लखमनी को अपनी ओर भागते देखा तो वह भी डरकर भागने लगीं। जिस कारण बदमाशों ने उन्हें भी गोली मारी और वहाँ से भाग गए।

गौरतलब है कि मागो मुंडा की बेटी राधा मुंडू कुदा पंचायत की मुखिया हैं। मागो मुंडा भाजपा के एसटी मोर्चा में प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य थे। इसके अलावा वह मुरहू के महर्षि में ही आश्रम से भी जुड़े हुए थे।

यूपी में जुर्म हुए कम, पुलिस के डंडे का दिख रहा दम

मुख्यमंत्री बनने के बाद से योगी आदित्यनाथ ने निरंतर उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को सुधारने को अपने एजेंडे में सबसे ऊपर रखा हुआ है, और नतीजा आँकड़ों में झलकने लगा है। विधान परिषद में दिए गए सरकार के आँकड़ों के अनुसार गंभीर अपराधों की दर में काफ़ी कमी आई है। इसमें हत्या, बलवा, बलात्कार, लूट जैसे हिंसक अपराधों के आँकड़े आधार रूप में लिए गए हैं। बलवा में भी 11% की कमी की बात सरकार ने कही है।

15 फीसदी कम हुआ दुष्कर्म, डकैती 44 फीसदी

उसके पिछले साल (2017-18) के मुकाबले बीते साल (2018-19) में उत्तर प्रदेश में हत्या के मामलों में 10%, बलात्कार में 15%, लूट में 30 और डकैती में 44% कमी आई है। कॉन्ग्रेस के एमएलसी दीपक सिंह के द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में सरकार ने यह आँकड़े सदन के पटल पर रखे। उत्तर के अनुसार दहेज हत्या में भी 4% और बलात्कार में 15% की कमी दर्ज की गई है।

सोनभद्र काण्ड के पृष्ठभूमि में आँकड़ा महत्वपूर्ण

सरकार के लिए यह आँकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सोनभद्र में एक साथ 10 से अधिक ग्रामीणों की जमीन विवाद के मामले से सरकार जूझ रही है। आज भी मामले से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर प्रकाश में आए हैं। हालाँकि योगी आदित्यनाथ ने इस मामले की जड़ कॉन्ग्रेस राज में होने का दावा किया है, लेकिन इसके बावजूद अपराध पर सख्ती की उनकी छवि पर एक प्रश्नवाचक चिह्न तो इस हत्याकांड के बाद लग ही गया है। ऐसे में इस जघन्य हत्याकांड के बावजूद कुल मिलाकर अपराध में कमी की खबर सरकार के लिए किसी छोटी-मोटी संजीवनी से कम नहीं है।

क्या कुमारास्वामी भी करेंगे फ्लोर टेस्ट ‘बंक’? इस्तीफ़े की कानाफ़ूसी शुरू

कर्नाटक में राज्यपाल द्वारा सरकार को विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए दी गई समय-सीमा को नज़रंदाज़ किए जाने के बाद भी सियासी प्रहसन लगातार जारी है। एक ओर विधान सौधा (विधानसभा) अध्यक्ष केआर रमेश कुमार सदन के पटल पर बहुमत का परीक्षण हुए बगैर सदन को और स्थगित न करने के लिए अड़ गए हैं, वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने कहा कि आज (सोमवार, 22 जुलाई, 2019) को बहुमत परीक्षण मुश्किल है क्योंकि सत्तापक्ष सुप्रीम कोर्ट में गई याचिका पर कल संभावित सुनवाई का नतीजा पहले जानना चाहता है। इसी खींचतान के बीच देर शाम को मुख्यमंत्री एचडी कुमारास्वामी के बिना बहुमत परीक्षण के इस्तीफा देने की अटकलें उड़नी शुरू हो गईं हैं।

‘मुझे बलि का बकरा न बनाओ’

सुप्रीम कोर्ट में बागी विधायकों के सरकार बचाने के आरोपों का सामना कर चुके स्पीकर रमेश कुमार आज सुबह से सदन को आज विश्वास मत निपटा लेने का आश्वासन पूरा करने का वादा याद दिलाते नज़र आए। पूरे दिन वह बार-बार सत्ता पक्ष के हुड़दंगी विधायकों को टोकते रहे। “हर कोई हमें देख रहा है। कृपया मुझे (सदन में विश्वास मत न हो पाने का) बलि का बकरा मत बनाइए। हमें आज अपने लक्ष्य (विश्वास मत पर मतविभाजन) तक पहुँचना है।”

अपडेट (रात 8:25): स्पीकर के चैंबर में मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री कुमारास्वामी, डिप्टी सीएम जी परमेश्वरा और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दरमैया समेत सदन के वरिष्ठ यूपीए नेताओं की स्पीकर के चैंबर में बैठक जारी है।

खबर लिखे जाने तक बसपा के इकलौते विधायक भी सदन में नहीं पहुँचे हैं।

‘अगर चंद्रयान नेहरू की देन, तो अमेरिका को चाँद पर हिटलर ने भेजा’

जैसी कि पूरे देश को उम्मीद थी, कॉन्ग्रेस ने चंद्रयान-2 की सफ़ल लॉन्चिंग होते ही उसका श्रेय लूटने के लिए प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को ‘पुनर्जीवित’ कर दिया। चंद्रयान अभी शायद पृथ्वी की कक्षा से निकला भी नहीं होगा कि कॉन्ग्रेस का ट्वीट आया:

अगर इनकी मानें तो चूँकि इसरो की पूर्ववर्ती संस्था ISPAR की स्थापना नेहरू ने की थी अतः इस सफ़लता का श्रेय भी आज के कॉन्ग्रेस के हिस्से जाएगा। इसके अलावा कॉन्ग्रेस ने कॉन्ग्रेसी प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा 2008 में चंद्रयान-2 मिशन अधिकृत किए जाने की याद भी दिलाई।

वैज्ञानिक का जवाब

जेएनयू के वैज्ञानिक डॉ. आनंद रंगनाथन ने कॉन्ग्रेस के इस प्रयास को ट्विटर पर ही आईना दिखाया। उन्होंने ट्वीट किया:

बकौल रंगनाथन, अगर कॉन्ग्रेस चंद्रयान-2 का श्रेय नेहरू को देना चाहती है तो ऐसे तो अमेरिका के मानव को चन्द्रमा पर भेजने का श्रेय भी हिटलर को जाएगा। दरअसल हिटलर के नाज़ी वैज्ञानिकों ने मैक्सिमिलियन वॉन ब्रॉन नामक रॉकेट और एयरोस्पेस इंजीनियर के नेतृत्व में V2 तकनीक के रॉकेट विकसित किए थे। बाद में नाज़ियों को दूसरे विश्व युद्ध में हराए जाने के बाद यह तकनीक अमेरिका के हाथ लगी, जिसने इसका इस्तेमाल अपने अंतरिक्ष अभियान में किया था। रंगनाथ ने यह भी कहा कि विचारों को ऐतिहासिक नहीं, समकालीन व्यक्तित्वों द्वारा समर्थन किए जाने की ज़रूरत होती है।

रंगनाथन यहीं नहीं रुके। कॉन्ग्रेस पर हमला जारी रखते हुए उन्होंने आगे ट्वीट किया:

रंगनाथन ने कहा कि विज्ञान और तकनीक जैसे क्षेत्रों में ‘ऐतिहासिक सशक्तिकरण’ (historical enabling) नहीं होती, यानि इतिहास से इनकी शक्ति या प्रासंगिकता नहीं आती। बड़े-से-बड़े शोध संस्थान सालों नहीं, महीनों में समाप्त हो जाते हैं। विचार इंसान की बुद्धि से आते हैं, न कि इमारतों से।

मिशन शक्ति में भी आलोचना हुई थी

इसी साल मिशन शक्ति की सफ़लता का श्रेय भी कॉन्ग्रेस ने नेहरू के नाम पर लूटने की कोशिश की थी। उस समय भी इसकी काफ़ी आलोचना हुई थी।

मोदी जी, एक हिन्दू को आपकी बजाय ट्रम्प से मदद की गुहार क्यों करनी पड़ रही है?

तीन बातें

एक. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति का एक अहम हिस्सा ‘एक्ट ईस्ट’ यानी पूर्वी एशिया और प्रशांत महासागर क्षेत्र में हिंदुस्तान की सक्रियता बढ़ाना है। माना जाता है कि इसके ज़रिए वह नेहरू-काल की गिनी-चुनी ढंग की विरासतों में से एक हिंदुस्तान की ‘सॉफ़्ट पावर’ का न केवल इसके लिए उपजाऊ भूमि पर विस्तार कर रहे हैं, बल्कि इसे एक परिकल्पना से हकीकत में परिवर्तित करने की दिशा में भी यह उनकी प्रयोगशाला है- जहाँ वह चीन के अत्यधिक दबदबे को सीधे-सीधे हस्तक्षेप करने में अनिच्छुक अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की पर्दे के पीछे की मदद से ‘न्यूट्रलाइज’ या संतुलित करते हुए हिंदुस्तान की कथित कूटनीतिक ताकत को कूटनीति की असली ज़मीन पर परखते हैं।

दो. भाजपा के 2014 के घोषणापत्र में एक कथन था, जिसका मजमून यह था कि दुनिया भर के मजहबी/पंथिक आधार पर सताए गए, प्रताड़ित हिन्दुओं के लिए हिंदुस्तान को उनका ‘प्राकृतिक घर‘ (या शरणस्थल) भाजपा ने माना था। इस घोषणापत्र को बनाने में मोदी की सीधी स्वीकृति से इनकार नहीं किया जा सकता- 2014 में वह न केवल भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे, बल्कि चुनाव प्रचार समिति के मुखिया भी। यानी घोषणापत्र में इतनी महत्वपूर्ण बात बिना उनकी सहमति के नहीं लिखी जा सकती थी। इसके अलावा भाजपा के बनाए हुए नागरिकता कानून मसौदे में भी तीन पड़ोसी देशों के 6 मज़हबी अल्पसंख्यकों, जिनमें हिन्दू भी शामिल हैं, को अपने देश में मज़हबी उत्पीड़न का शिकार होने पर नागरिकता देने की बात कही गई है।

तीन. मशहूर टीवी सीरीज़ ‘गेम ऑफ़ थ्रोन्स’ का किरदार लॉर्ड वैरिस, जिसे सीरीज़ का हम ‘कौटिल्य’ कह सकते हैं, राजनीतिक शक्ति की प्रकृति के बारे में टिप्पणी करता है, “शक्ति वहाँ होती है, जहाँ लोगों में उसके होने की अवधारणा होती है।” बहुत सपाट शब्दों में, राजनीति में जो लोगों की नज़रों में ताकतवर होता है, असली ताकतवर वही होता है। जिससे लोग मदद माँगें, जिससे लोगों को मदद की आस हो, और जो जितनी मदद करता हुआ दिखे, उसकी ताकत उतनी बढ़ी नज़र आती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण संघ ही है। आज भी मज़हबी उत्पीड़न का शिकार हिन्दू अपने इलाके की पुलिस या नेता की बजाय पहले संघ के अनुषांगिक संगठनों जैसे बजरंग दल, विहिप आदि की राह लेता है। खुद संघ अपनी ‘गुडविल’ बनाने के लिए चेन्नै से लेकर बिहार तक प्राकृतिक आपदाओं में लोगों का सहायक बनता है- यह लगातार हमलावर राज्य मशीनरी के बावजूद उसके बचे रहने के सबसे बड़े कारणों में से एक है।

अब अगर ऊपर कही गई तीनों बातों को एक साथ जोड़ा जाए तो स्वभाविक प्रश्न है कि हिन्दू होने के लिए सताए जाने पर बांग्लादेश की प्रिया साहा ने बगल में हिंदुस्तान की बजाय आधी दुनिया पार बैठे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मदद की गुहार क्यों लगाई? साथ ही यह भी सोचने की ज़रूरत है कि इस परिस्थिति, कि हिंदुस्तान से हिन्दुओं को बचाने की अपील नहीं हो रही है, का हिंदुस्तान की ताकत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

‘हिन्दू होमलैंड’ बनने का मौका

अमेरिका की धौंस का दुनिया के सुनते रहने का इकलौता कारण केवल उसकी धनाढ्यता और तकनीकी श्रेष्ठता ही नहीं है। बेशक इन घटकों का प्रभाव नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता, लेकिन दुनिया द्वारा धौंस चुप होकर सहते रहने का कारण अमेरिका का नैतिक श्रेष्ठता का वह दावा है, जो इस पर आधारित है कि अमेरिका दुनिया में किसी भी स्थान पर लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए खड़े लोगों के लिए लड़ने को तैयार रहता है, और अगर उस जगह पर उनकी लड़ाई में सहायता नहीं कर सकता तो उन्हें मानवीय आधार पर शरण देने के लिए तो बेशक उद्यत रहता है। यही नीति कई अन्य पश्चिमी देशों की भी है।

हिंदुस्तान में अभी समाज लोकतान्त्रिक और राजनीतिक तौर पर इतना परिपक्व नहीं हुआ है कि हम अपने नागरिकों को ही जो मर्ज़ी आए, जिसे मर्ज़ी आए, जब मर्ज़ी आए बोलने की आज़ादी दे दें- हिंसा से बचने के लिए कुछ तार्किक प्रतिबंध निकट भविष्य में नहीं हटने वाले। ऐसे में हम फ्री स्पीच या लोकतंत्र के लिए तो खड़े नहीं हो सकते। लेकिन हिन्दू अधिकार, हिन्दू ’cause’ न केवल हमारी नैसर्गिक ज़िम्मेदारी है एक देश, एक समाज के तौर पर, बल्कि करीब 500 साल अपने धर्म पर हमले झेलने और उसके बाद 700 साल से ज़्यादा अपने धर्म से घृणा करने वालों के शासन तले प्रताड़ित होने के चलते इस मुद्दे पर खड़े होने, स्टैंड लेने का हमारे पास अधिकार भी है और मौका भी।

हम ‘हिन्दू होमलैंड’ इज़राइल की तर्ज पर बना सकते हैं, जहाँ हर नागरिक के अधिकार उसकी आस्था को ध्यान में रखे बिना समान होंगे। लेकिन दुनिया भर में प्रताड़ित हिन्दुओं के विषय में यह ध्यान में रखते हुए कि उनके पास जाने के लिए कोई जगह नहीं जो उन्हें धार्मिक, नागरिक और राजनीतिक रूप से शरण दे सके, उनके लिए हिंदुस्तान ‘होमलैंड’ का प्रस्ताव दे सकता है। यह कूटनीतिक तौर पर अमेरिका जैसी ‘आदर्श’ स्थिति में तो हमें नहीं पहुँचाएगा, लेकिन किसी भी आदर्श या मूल्य के लिए ठोस स्टैंड न लेने, ठोस कदम न उठाने के ठप्पे से कम-से-कम किसी न किसी मुद्दे या व्यक्ति के लिए स्टैंड लेने वाले तो हम बन ही जाएँगे।

हम अब तक ऐसे हुए क्यों नहीं हैं?

इसके जवाब के लिए संघ और भाजपा को शायद बाकायदा एक ‘आत्मचिंतन शिविर’ लगाने की ज़रूरत है। आज किसी भी स्तर पर भाजपा यह दावा नहीं कर सकती कि उसके पास बहुमत का अभाव है, इसलिए वह चाह कर भी कुछ नहीं कर सकती। लोकसभा में अगर वह इस आशय का कानून या संविधान-संशोधन लाए तो पास होने से कोई नहीं रोक सकता, राज्य सभा में वह बहुमत के मुहाने पर खड़ी ही है, राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति उसी की विचारधारा में पगे हुए पूर्व स्वयंसेवक हैं, तीन राज्यों में हुई विधानसभा हार के बावजूद अभी भी अधिकाँश राज्यों में उसकी सरकारें हैं।

नौकरशाही में भ्रष्ट, निकम्मे और अक्षम लोगों की छुट्टी, विशेषज्ञों की बड़े अफसर के तौर पर सीधी नियुक्ति (‘लैटरल एंट्री’) की अपनी नीति, और लाखों लंबित नियुक्तियों के चलते सरकार हिन्दुओं के प्रति दुराग्रह न रखने वाले नौकरशाहों को लाने के लिए कई रूप से स्वतंत्र है। जनता भी मार्क्सवादी-सांस्कृतिक मार्क्सवादी वामपंथ के चरम से ऊबकर ‘राइट विंग’ के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखे हुए है। अगर सच में हिन्दुओं के लिए कुछ करना है, तो इससे स्वर्णिम अवसर शायद नहीं होगा।

सवाल ‘सेक्युलरिज़्म’ का

हिंदुस्तान का सेक्युलरिज़्म ‘पंथनिरपेक्षता’ न होकर मज़हबी अल्पसंख्यकवाद है, यह खुद भाजपा का स्टैंड रहा है। यहाँ तक कि संविधान-सभा के अध्यक्ष डॉ. अंबेडकर ने भी संविधान में सेक्युलर शब्द डाले जाने का विरोध किया था। वैसे भी ‘हिन्दू होमलैंड’ के आधार पर गैर-नागरिकों को नागरिक बनाने या न बनाने की नीति गैर-नागरिकों के प्रति है, और सेक्युलरिज़्म शब्द यह बताता है कि हिंदुस्तान अपने खुद के नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करेगा, कौन सी नीति अपनाएगा। अतः दोनों में तकनीकी रूप से विरोधाभास नहीं है।

अगर भाजपा विशुद्ध ‘राइट विंग’ की बजाय एक कल्याणकारी राज्य (वेलफेयर स्टेट) को अपना आदर्श मानती है, तो भी प्रताड़ित हिन्दुओं को प्रश्रय देने वाले राज्य के तौर पर हिंदुस्तान को दिशा देना उसके भी विरोध में नहीं है। आज ईसाईयों और समुदाय विशेष को मिला कर दुनिया की आधी से ज़्यादा आबादी मज़हब के तौर पर ऐसी विचारधारा का पालन करती है, जिसमें मूर्तिपूजा से बड़ा कोई अपराध शायद है नहीं। दोनों के ही हाथों दुनिया भर में मूर्तिपूजा करने वाले सम्प्रदायों और व्यक्तियों पर अत्याचारों की कहानी भी किसी से छिपी नहीं है- जो आज भी उनके मज़हबी प्रभाव वाले क्षेत्रों में पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में हिन्दू शरणार्थियों को शरण दे हिंदुस्तान वैश्विक मूर्तिपूजक/गैर-इस्लामी, गैर-ईसाई सम्प्रदायों के मानवाधिकार के पक्ष में भी एक सशक्त संदेश देगा। और एक सशक्त मानवाधिकार की पैरोकार आवाज़ के रूप में भारत की ‘सॉफ़्ट पावर’ में इज़ाफ़ा तो खुद-ब-खुद होगा ही।

छापे मारकर मुस्लिमों की छवि धूमिल कर रही NIA: तौहीद जमात

कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन तमिलनाडु तौहीद जमात (TNTJ) ने रविवार (जुलाई 21, 2019) को राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी एजेंसी पर समुदाय विशेष की छवि को धूमिल करने का आरोप लगाया। इस्लामिक संगठन ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) आतंकवाद विरोधी अभियानों के नाम पर मुस्लिमों के घरों में छापेमारी करके उनकी छवि को धूमिल कर रही है।

तौहीद जमात के तिरुचि इकाई के अध्यक्ष गुलाम दस्तगीर ने तिरुचि में आयोजित एक चिकित्सा शिविर के मौके पर मीडिया को संबोधित करते हुए ये बातें कही। उन्होंने कहा कि एनआईए ने अपनी छापेमारी के जरिए मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कार्रवाई की है। वहीं, वहादत-ए-इस्लामी के सदस्य एस अब्दुल्ला का कहना है कि आतंक विरोधी ऑपरेशन के नाम पर उनके सदस्यों के घरों और कार्यालयों में लगातार छापेमारी हो रही है।

श्री लंका में ईस्टर के मौके पर नेशनल तौहीद जमात के द्वारा किए गए भयंकर बम बिस्फोट के बाद तमिलनाडु जमात तौहीद का नाम काफी चर्चा में आ गया था। इस विस्फोट से उनका भी नाम जुड़ रहा था। हालाँकि, तमिलनाडु तौहीद जमात के जनरल सेक्रेटरी ई मोहम्मद ने इस घटना सेे किसी तरह के लिंक होने से मना किया था। उन्होंने कहा था कि यह एक गैरराजनीतिक इस्लामी संगठन है, जिसका नेशनल तैहीद जमात से कोई लेना-देना नहीं है। बता दें कि, तमिलनाडु तौहीद जमात और श्रीलंका नेशनल तौहीद जमात को एक दूसरे का सहयोगी माना जाता है। इसका नाम आतंकी घटनाओं से जुड़ता रहा है।

गौरतलब है कि, जाँच एजेंसी ने पिछले दिनों राज्य में अंसारुल्लाह आतंकी मामले में कई छापे मारे हैं। नागापट्टिनम से दो आतंकी संदिग्धों को गिरफ्तार करने और आतंकी आरोपों के आधार पर संयुक्त अरब अमीरात से 14 और निर्वासित लोगों को हिरासत में लेने के बाद एक सप्ताह से भी कम समय में छापे पड़े।