Home Blog Page 5690

भोपाल रेप-मर्डर केस: 32 दिन के अंदर 8 साल की बच्ची के रेपिस्ट को फाँसी की सज़ा

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अदालत ने एक 8 साल की बच्ची के बलात्कार और हत्या के दोषी विष्णु बामोरे (35) को घटना के 32वें दिन फाँसी की सजा सुनाई है। इससे पहले बुधवार (जुलाई 10, 2019) को दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपित विष्णु को दोषी करार दिया था।

इस मामले में पुलिस ने 17 जून को 108 पेज का चालान पेश किया था और 19 जून को विष्णु पर आरोप तय हुए थे। जिसके बाद अदालत ने विष्णु बामोरे को बच्ची के साथ ज्यादती, अप्राकृतिक कृत्य और हत्या के आरोप में दोषी माना। इस मामले में पुलिस ने 40 लोगों को गवाह बनाया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक भोपाल के कमलानगर में 8 जून को 8 साल की बच्ची अपने घर से कुछ सामान लेने बाहर निकली थी, कि तभी उसका पड़ोसी विष्णु बच्ची को बहलाकर अपने घर ले गया। जहाँ विष्णु ने पहले बच्ची का बलात्कार किया और बाद में हत्या। लड़की का शव 9 जून को नाले से बरामद हुआ था। मामले की जाँच में पुलिस ने विष्णु के घर से बच्ची की चूड़ी और अन्य सबूत भी बरामद किए थे।

पुलिस ने घटना के बाद आश्वासन दिया था कि वे इस मामले में दोषी को एक महीने के भीतर सजा दिलाने का प्रयास करेंगे, जो कि हुआ भी। गिरफ्तारी के तुरंत बाद पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश किया और विष्णु को दोषी करार दे दिया गया। मामले के सुनवाई करने वाले मुख्य न्यायाधीश ने जब फैसला सुनाने के बाद विष्णु बामोरे से अपने पक्ष में कुछ कहने के लिए कहा तो उसका जवाब “कुछ नहीं” था। विष्णु को जब कोर्ट में पेश किया गया था तो वह रोने लगा था। उसने अदालत में कहा था कि उसे फाँसी दे दी जाए।

भोपाल बलात्कार और हत्याकांड का दोषी विष्णु

इसी तरह के अपराधों को रोकने के लिए कल मोदी कैबिनेट ने पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) को और सख्त करने के लिए संशोधन की मंजूरी दे दी है। जिसमें बच्चों का यौन उत्पीड़न करने पर मौत की सजा और चाइल्ड पोर्नोग्राफी रोकने के लिए जेल एवं जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, नाबालिगों के ख़िलाफ़ अन्य दूसरे अपराधों के लिए भी कड़ी सजा का प्रावधान शामिल है।

बाल यौन अपराध मामलों में होगी मौत की सजा, कैबिनेट ने दी POCSO एक्ट में संशोधन को मंजूरी

देश में बढ़ते बाल यौन उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने के लिए मोदी कैबिनेट ने 10 जुलाई को पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) को कड़ा करने के लिए इसमें संशोधन की मंजूरी दे दी।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने मीडिया से बातचीत में बताया, “कैबिनेट ने बच्चों के प्रति अपराधों की गंभीरता को देखते हुए इससे निपटने के लिए पॉक्सो कानून में संशोधनों को मंजूरी दी है।” सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से बाल उत्पीड़न पर अंकुश लगेगा, क्योंकि कानून में शामिल किए जाने वाले दंडात्मक प्रावधान निवारक का काम करेंगे।

उल्लेखनीय है कि प्रस्तावित संशोधनों में बच्चों का यौन उत्पीड़न करने पर मौत की सजा और चाइल्ड पोर्नोग्राफी रोकने के लिए जेल एवं जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साथ ही नाबालिगों के ख़िलाफ़ अन्य दूसरे अपराधों के लिए भी कड़ी सजा का प्रावधान शामिल है।

पॉक्सो एक्ट में संशोधन करके सरकार का उद्देश्य परेशानी में फँसे असुरक्षित बच्चों के हितों का संरक्षण करना और उनकी सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करना है। जिसके लिए पॉक्सो एक्ट की धारा 2, 4, 5, 6, 9, 14, 15, 34, 42 और 45 में संशोधन किया जा रहा है।

कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष से मिलें बागी MLA, इस्तीफे पर आज ही करें फैसला: सुप्रीम कोर्ट

कर्नाटक में जारी सियासी संकट के बीच सुप्रीम कोर्ट ने कॉन्ग्रेस-जद(एस) गठबंधन के 10 बागी विधायकों को गुरुवार शाम छह बजे विधानसभा अध्यक्ष के सामने पेश होने को कहा है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि इसके बाद यदि विधायक चाहें तो वे इस्तीफा दे सकते हैं। साथ ही विधानसभा अध्यक्ष को भी आज ही उनके इस्तीफे पर फैसला करने का निर्देश दिया गया है।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने बागी विधायकों से कहा, “कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष से शाम छह बजे मिलिए और अगर आपकी इच्छा इस्तीफा देने की है तो उन्हें (अध्यक्ष को) सौंप दीजिए।” अदालत ने कहा है कि दिन के बाकी बचे वक्त में अध्यक्ष को इस्तीफे पर फैसला लेना होगा। उनके फैसले से शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया जाएगा।

बागी विधायक फिलहाल मुंबई के एक होटल में ठहरे हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के डीजीपी को बागी विधायकों के मुंबई से बेंगलुरु पहुंचने के बाद हवाई अड्डे से विधानसभा तक सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश भी दिया है।

कर्नाटक सरकार के मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने कहा है कि उन्हें भरोसा है कि सभी विधायक सरकार के साथ हैं और अपना इस्तीफा वापस ले लेंगे। इससे पहले बुधवार को शिवकुमार बागी विधायकों से मिलने मुंबई भी गए थे। लेकिन, उन्हें होटल में एंट्री नहीं मिली। इसके बावजूद विधायकों से मुलाकात के लिए अड़े रहने पर उन्हें हिरासत में ले लिया गया था और बाद में रिहा कर बेंगलुरु भेज दिया गया।

बागी विधायकों ने यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था कि विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार पक्षपात पूर्ण तरीके से काम कर रहे हैं और जान-बूझकर उनके इस्तीफे स्वीकार नहीं कर रहे।

गौरतलब है कि 16 विधायकों के इस्तीफे के कारण एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस-जेडीएस सरकार पर गिरने का खतरा मंडरा रहा है। यदि विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए तो सरकार अल्पमत में आ जाएगी।

विदेशी फंडिंग के गलत इस्तेमाल का आरोप: इंदिरा जयसिंह और पति आनंद ग्रोवर के घर CBI की छापेमारी

सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह और उनके पति आनंद ग्रोवर के यहाँ CBI ने गुरुवार (11 जुलाई) को छापेमारी की है। CBI ने यह छापेमारी उनके एनजीओ ‘लॉयर्स कलेक्टिव’ के लिए विदेशी चंदा विनियमन अधिनियम (FCRA) के उल्लंघन मामले में की है। CBI प्रवक्ता ने बताया कि दिल्ली और मुंबई दोनों जगह छापे मारे जा रहे हैं।

CBI की छापेमारी के दौरान जब आनंद ग्रोवर से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने इस मामले में बात करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि CBI की ओर से उन पर जो आरोप लगाए गए हैं वो ग़लत हैं। दरअसल, CBI ने इंदिरा जयसिंह और उनके पति पर विदेशी फंड का ग़लत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। यह मामला उस समय का है, जब इंदिरा जयसिंह 2009 और 2014 के बीच एडिशनल सॉलिसिटर जनरल थीं। आरोप में यह भी कहा गया था कि उनकी विदेश यात्रा पर खर्च गृह मंत्रालय की मंज़ूरी के बिना उनके एनजीओ के फंड से किया गया था।

वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह और उनके पति आनंद ग्रोवर के यहाँ छापेमारी की ख़बरें जैसे ही बाहर आईं, वैसे ही इस पर प्रतिक्रिया भी आने लगीं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस छापेमारी की निंदा की और ट्वीट किया, “मैं जाने-माने वरिष्ठ वकीलों इंदिरा जयसिंह तथा आनंद ग्रोवर पर CBI छापों की कड़ी निंदा करता हूँ… कानून को अपना काम करते रहना चाहिए, लेकिन जो दिग्गज सारी ज़िन्दगी कानून के शासन और संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए संघर्ष करते रहे हैं, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई साफ़-साफ़ बदले की कार्रवाई है…।”

ख़बर के अनुसार, गृह मंत्रालय की तरफ से यह आरोप लगाया गया था कि विदेश से कुछ फंड इकट्ठा किया जा रहा है, जिसका इस्तेमाल HIV/AIDS बिल की मीडिया में वकालत करने के लिए किया जा रहा है। इसके पीछे इसी एनजीओ ‘लॉयर्स कलेक्टिव’ का नाम सामने आया था।

इसके अलावा, इस बात का भी ख़ुलासा हुआ था कि एनजीओ ने एक फ्री-ट्रेड एग्रिमेंट रैली का भी आयोजन किया था। इसमें क़ानून मंत्रालय के बाहर स्पॉन्सर्ड धरने करवाए गए थे, जो कि FCRA क़ानून का उल्लंघन है।

इससे पहले यह मामला मई 2019 में सामने आया था जब सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के एक स्वैच्छिक संगठन ‘लॉयर्स वॉइस’ द्वारा दायर जनहित याचिका के आधार पर सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह, आनंद ग्रोवर और उनके एनजीओ ‘लॉयर्स कलेक्टिव’ को एक नोटिस जारी किया था। यह नोटिस प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने जारी किया। इस याचिका में संबंधित संस्थाओं द्वारा विदेशी चंदा (नियमन) अधिनियम (FCRA) क़ानून के उल्लंघन पर केंद्र सरकार की निष्क्रियता के लिए SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) जाँच की माँग की गई है।

FCRA उल्लंघन की ख़बर सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने ग़ैर सरकारी संगठन के FCRA लाइसेंस को रद कर दिया था, लेकिन दोषियों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि इनके द्वारा जुटाए गए धन का राष्ट्र के ख़िलाफ़ गतिविधियों में उपयोग किया गया।

मेरे सिवा कोई और नहीं बन सकता था CM: पायलट का नाम लिए बिना गहलोत ने साधा निशाना

राजस्थान का बजट पेश करने के बाद बुधवार (जुलाई 10, 2019) को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने सीएम होने को लेकर एक बड़ा बयान दिया। अपने बयान में अशोक गहलोत ने सचिन पायलट का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके सिवा कोई और प्रदेश का मुख्यमंत्री नहीं बनाया जा सकता था। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में ग्रामीण लोगों की यह भावना थी कि वे (अशोक गहलोत) ही मुख्यमंत्री बनें।

गहलोत की मानें तो पूरे प्रदेश के लोग कह रहे थे कि अगर कोई मुख्यमंत्री बने तो सिर्फ़ अशोक गहलोत। इसलिए लोगों की भावनाओं का आदर करते हुए राहुल गाँधी ने उन्हें सीएम बनने का अवसर दिया।

राजस्थान के मुख्यमंत्री के मुताबिक लोगों ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के लिए विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस को वोट दिया था। इसलिए अगर किसी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया जाना था तो वह सिर्फ अशोक गहलोत था कोई और नहीं। उनके अनुसार उनका मुख्यमंत्री बनना तय था।

बता दें कि 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद कॉन्ग्रेस ने राजस्थान में अपनी सरकार बनाई थी। इस दौरान अशोक गहलोत के साथ सचिन पायलट भी मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल थे, लेकिन बाद में पार्टी ने अशोक गहलोत के लिए मुख्यमंत्री पद और सचिन के लिए उप-मुख्यमंत्री पद चुना था। गहलोत के सीएम बनने के बाद से सचिन पायलट और उनके बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा था, लेकिन इस बयान के आने के बाद तो स्पष्ट हो गया है कि वाकई दोनों नेताओं के बीच तनातनी है, जिसके चलते गहलोत ने यह बयान दिया।

हालाँकि दोनों नेताओं की मुख्यमंत्री पद के लिए रेस को लेकर कहा जाता है कि राहुल गाँधी ने स्वयं सचिन पायलट को सीएम रेस से बाहर होने के लिए मनाया था, क्योंकि अशोक गहलोत ने उनसे लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने का दावा किया था, लेकिन नतीजा कुछ अलग ही आया। लोकसभा चुनावों के बाद सचिन पायलट के समर्थकों ने भी अशोक गहलोत को हार के लिए जिम्मेदार बताया था।

राजस्थान: 150+ महिला प्रोफेसरों से अश्लील बातें और रेप की धमकी, COD गिफ्ट भेजने की बात करता है कॉलर

राजस्थान से पहली बार ऐसी खबर सुनने में आई है जहाँ 150 से ज्यादा महिलाओं को एक साथ फोन कॉल के जरिए प्रताड़ित किया जा रहा है। जी हाँ, राजस्थान के सबसे बड़े विश्वविद्यालय की महिला प्रोफेसरों को इन दिनों फोन कॉल के जरिए बलात्कार की धमकियाँ मिल रही हैं, जिसके चलते विश्वविद्यालय की लगभग 65 टीचरों ने इस मामले में पुलिस को कंप्लेंट दी है। उन्होंने बताया है कि उनके साथ-साथ उनके बच्चों को भी मारने की धमकी दी जा रही है। इन फोन कॉल्स के कारण सभी पीड़ित महिला प्रोफेसर काफ़ी डरी और सहमी हुई हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिलने के लिए वक्त माँगा है। इनमें से कई महिलाओं ने तो यूनिवर्सिटी भी आना बंद कर दिया है।

आजतक की खबर के अनुसार महिलाओं का कहना है कि उन्हें ये फोन कॉल किसी भी समय आ जाता है। चाहे फिर सुबह हो या आधी रात। फोन करने वाला शख्स महिलाओं से अश्लील बातें करता है और उनके साथ दुष्कर्म करने की धमकी देता है। इतना ही नहीं, इन महिलाओं को घर पर कैश ऑन डिलीवरी गिफ्ट भेजने के साथ बलात्कार की धमकियाँ भी दी जा रही हैं।

राजस्थान यूनिवर्सिटी में इन दिनों काफ़ी असहजता का माहौल बना हुआ है। यूनिवर्सिटी ने इन घटनाओं के कारण अपनी वेबसाइट से सभी महिला प्रोफेसरों के फोटो, मोबाइल नंबर, अड्रेस और दूसरी जानकारियाँ भी डिलीट कर दी हैं। जयपुर में लड़कियों के सबसे बड़े महाविद्यालय महारानी कॉलेज की प्रिंसिपल का कहना है कि इस मामले में पीड़ित प्रोफेसरों की संख्या 150 के आसपास पहुँच गई हैं। ये बेहद गंभीर मामला है।

गौरतलब है राजस्थान यूनिवर्सिटी के 35 विभागों में 230 महिला प्रोफेसर हैं। इनमें से लगभग 150 ने ऐसे मामलों की शिकायत प्रशासन से की है। इन सभी मामलों को पुलिस ने महेश नगर और गाँधी नगर थाने में दर्ज किया है। पुलिस ने बताया है कि अपराधी एक खास सॉफ्टवेयर से इंटरनेट के जरिए कॉल कर रहे हैं, जिस कराण उनका नंबर ट्रेस नहीं हो रहा रहा है, लेकिन आईटी एक्सपर्ट इसकी जाँच में जुटे हुए हैं।

इसके अलावा पुलिस ने कुछ नंबर जारी करते हुए उनसे एहतियात बरतने की सलाह दी है और कहा है कि अगर ये नंबर (+1226 793577, +92310 773 052, +1052 428 332, +1313 497 930) से कॉल आए तो सीधे पुलिस को फोन करें।

बता दें कि यौन उत्पीड़न संबंधी मामले में सिर्फ़ राजस्थान यूनिवर्सिटी की महिला प्रोफेसर ही नहीं, बल्कि छात्राओं ने भी शिकायत दर्ज करवाई है। उनका कहना है कि उन्हें विश्वविद्यालय के गेट पर ही अक्सर यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, लेकिन फिर भी इस पर कोई एक्शन नहीं लिया जाता है।

Video: 11.32 सेकंड में दूती चंद ने गोल्ड जीतकर रचा इतिहास, बनीं देश की पहली महिला एथलीट

भारतीय धाविका दूती चंद ने इटली के नेपल्स में 30वें वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स (30वाँ समर यूनिवर्सियाड) की 100 मीटर प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि को हासिल करने वाली वो देश की पहली महिला एथलीट हैं।

23 साल की दूती मात्र 11.32 सेकंड में रेस पूरी कर पहले पायदान पर रहीं। उनके नाम 100 मीटर में 11.24 सेकंड का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी दर्ज है। अपने ट्विटर हैंडल से उन्होंने लिखा, “मुझे नीचे गिराने की कोशिश करो, लेकिन मैं मज़बूती से वापसी करुँगी।”  

खेल मंत्री किरण रिजीजू ने दूती को बधाई देते हुए ट्वीट किया और लिखा, “मैं बचपन से इन खेलों में गोल्ड जीतने का इंतज़ार कर रहा हूँ। आख़िरकार भारत को गोल्ड मेडल मिला। दूती को विश्व यूनिवर्सिटी खेलों में गोल्ड जीतने पर बधाई।” इसके साथ ही उन्होंने गोल्ड मेडल की इस जीत वाली वीडियो को भी शेयर किया।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दूती को बधाई देते हुए ट्वीट किया और लिखा, “यूनिवर्सिटी खेलों में 100 मीटर फर्राटा जीतने पर दूती को बधाई। यह भारत का इन खेलों में पहला स्वर्ण है और हम बहुत गौरवान्वित हैं। इस प्रदर्शन को ओलंंपिक में क़ायम रखें।”

भारतीय धाविका दूती के गोल्ड मेडल जीतने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बधाई दी। उन्होंने ट्वीट किया, “एक असाधारण एथलीट की असाधारण उपलब्धि! अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत जीत हासिल करने के लिए बधाई दूती चंद… आप इसकी सही हक़दार हैं। आपने भारत को गौरवान्वित किया है।” 

स्विट्जरलैंड की डेल पोंटे 11.33 सेकंड के साथ दूसरे और जर्मनी के लीसा क्वायी 11.39 सेकंड के साथ कांस्य पदक जीतने में सफल रहीं।

पिछले साल, भारतीय स्प्रिंटर हेमा दास ने विश्व जूनियर एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में 400 मीटर में स्वर्ण पदक जीता था। दूती का अपना निजी राष्ट्रीय रिकॉर्ड 11.24 सेकंड है।

प्रेमी की हत्या, बेटी को मारी गोली: अफरोज़-नूरजहाँ ने दी अपनी बेटी को प्यार करने की सजा

उत्तर प्रदेश के बहादुरपुर इलाके से ऑनर किलिंग का चौंकाने वाला मामले सामने आया है। यहाँ बेटी के प्रेम संबंध के कारण उसके माता-पिता ने उसे गोली मार दी और फिर मृत समझकर झाड़ियों में फेंककर फरार हो गए। अगले दिन सुबह कुछ स्थानीय लोगों द्वारा घायल युवती को जिला अस्पताल भर्ती कराया गया और पुलिस को इसकी सूचना दी गया। यहाँ मजिस्ट्रेट ने उसका बयान लिया और फिर गंभीर स्थिति होने के कारण उसे अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। लड़की बारथर गाँव की रहने वाली है।

मजिस्ट्रेट को दिए बयान में लड़की ने बताया कि उसके पिता अफरोज़, उसकी माँ नूरजहाँ और मामा इफजाद ने उसे आमिर से प्रेम करने के कारण गोली मारी, क्योंकि वे उन दोनों के रिश्ते के ख़िलाफ़ थे। पुलिस के मुताबिक लड़की के परिजनों पर आमिर (लड़की के प्रेमी) को मारने का भी इल्जाम है। आमिर की हत्या के संबंध में सिविल लाइन पुलिस थाने में एफआईआर भी दर्ज हो रखी है।

जानकारी के अनुसार लड़की के परिजनों ने 6 जुलाई को आमिर की हत्या करने के बाद उसे भमोला में रेलवे लाइन पर फेंक दिया था और फिर लड़की को मारने की साजिश रची। आमिर की हत्या का पता चलते ही लड़की अपने घर वालों के ख़िलाफ़ हो गई थी, इसलिए वे उसे बाइक पर बैठाकर एटा चलने के लिए मलावन थाना क्षेत्र में ले आए। यहाँ तीनों ने युवती के गले में गोली मारी और मृत समझकर झाड़ियों में फेंककर फरार हो गए।

लड़की के बयान के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपितों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कर ली है, लेकिन फरार होने के कारण कोई गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है।

‘जय श्री राम’ कत्ल का नारा! हिन्दूफ़ोबिया से ग्रसित सिर्फ BBC नहीं, Western Media की लम्बी फेहरिस्त

BBC का हिन्दूफ़ोबिया अब बारिश में खुले गटर की तरह छलक-छलक कर बाहर आ रहा है। इस नफ़रती प्रोपेगंडा फ़ैलाने वाले मीडिया आउटलेट के लिए हिन्दुओं का “जय श्री राम” कत्ल का नारा हो गया है, इसलिए कि एक भीड़ ने किसी समुदाय विशेष के शख्स को चोरी के संदेह में पीटा (जोकि गलत ज़रूर है लेकिन ‘सेक्युलर’ रूप से सर्वव्यापी है), और कुछ दिन बाद वह हिरासत में मर गया। और यह वही बीबीसी है, जो 1500 के करीब ब्रिटिश युवा लड़कियों और बच्चियों का बलात्कार करने वाले पाकिस्तानी का पाप उन्हें ‘एशियन’ बता कर चीनी-जापानी-हिंदुस्तानी-लंकाईयों में बाँट देता है, और जिसे दहशतगर्दी का इस्लामिक कनेक्शन “अल्लाहू अकबर” चिल्ला कर बार-बार होने वाले बम धमाकों और गोलीबारी के बाद भी नहीं दिखता।

लेकिन बीबीसी इस गंदगी में अकेला नहीं है। इसके चाचा के साले, फूफा के लड़के और गाँव वाली भाभी के दामाद भी हैं इस खेल में- और इन सबकी भारत और हिन्दुओं के बारे में रिपोर्टिंग को आप वायर, स्क्रॉल, या कारवाँ से अलग करके नहीं बता सकते कि कौन सा हिन्दूफ़ोबिक कथन इंडिपेंडेंट के सम्पादक का है, कौन सा वायर के मौसमी संवाददाता का। वही हिन्दुओं का दानवीकरण, वही समुदाय विशेष के अपराधियों की पहचान ढकने की कोशिश, वही ‘डरा हुआ शांतिप्रिय’ का नैरेटिव और हिंदुस्तान को ‘लिंचिस्तान’ बताना।

बीबीसी के कारनामों की लम्बी फेहरिस्त

बीबीसी बेशक इस ‘क्लब’ का ‘क्वीन’ है- इसमें दोराय की कोई गुंजाईश नहीं। और यह इसका आज का खेल नहीं है। 2004 में एक एनजीओ ने बिना किसी आधार, बिना किसी आँकड़े के समुदाय विशेष के 2002 दंगों के पीड़ितों के पुनर्वास के लिए काम कर रहे ‘सेवा’ नामक एक हिन्दू संगठन पर गबन का आरोप लगाया। बीबीसी ने निराधार आरोप लगाने वाले को उस इस्लामी और वामपंथियों के संगठनों के आरोपों का जवाब देने के लिए ‘सेवा’ को महज़ एक-तिहाई समय दिया। उसी साल ‘ईश्वर’ के विषय पर बनी 90 मिनट की एक डॉक्यूमेंट्री में एक भी हिन्दू या सिख को अपना पक्ष रखने का मौका बीबीसी ने नहीं दिया था।

आज एक भीड़-हत्या में न केवल मज़हबी एंगल, बल्कि जय श्री राम को हत्या का नारा बना देने का औचित्य ढूँढ लाया बीबीसी इस बात पर मुँह में दही जमाकर बैठा है कि पिछले डेढ़ महीने में हिन्दुओं पर मज़हबी उन्माद में हुए डेढ़ दर्जन हमलों को मज़हबी हमले बोलने की इसे फुर्सत नहीं है।

साभार: आनंद रंगनाथन

बीबीसी के काले कारनामों की फेहरिस्त इतनी लम्बी है कि बाकी पापी बच के निकल जाएँगे, इसलिए नमूने के तौर पर ऊपर लगा शाम शर्मा का यह वीडियो देख लीजिए। इसी में उस घटना का ज़िक्र भी है जब बीबीसी ने पाकिस्तानियों के बलात्कार का पाप पूरे एशियाई-ब्रिटिश समुदाय के सर लादने का प्रयास किया था।

मुंबा देवी से इंडिपेंडेंट वालों की एलर्जी

इंडिपेंडेंट के ‘आखिरी प्रिंट सम्पादक’ ने, जोकि हिंदुस्तान के दुर्भाग्य से भारतवंशी है, और हिन्दुओं के किसी बुरे कर्म के चलते उनके जैसे नाम वाला भी है, ने मुंबई को ‘बम्बई/बॉम्बे’ पुकारे जाने की वकालत की थी। हिन्दू मुम्बा देवी के नाम पर शहर का नाम रखे जाना ही आपत्ति का कारण था। इसकी बजाय लाखों हिन्दुस्तानियों को भूखा तरसा कर मार देने वाले और गुलाम बनाकर रखने वाले औपनिवेशिक शासकों का दिया हुआ नाम इंडिपेंडेंट के सम्पादक को ज्यादा प्यारा था।

CNN के लिए अघोरी ही इकलौते हिन्दू

CNN, जोकि भारत में CNN-News18 का साझीदार भी है, ने अपनी ‘बिलीवर’ डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ में हिन्दुओं के प्रतिनिधित्व/चित्रण के लिए चुना अघोरियों को- और उनमें भी विशिष्ट रूप से उन अघोरियों को, जो जले शवों पर से मानव-माँस खाते हैं। हम हिन्दुओं को इस पंथ या आस्था के लोगों में कोई शर्म नहीं है, लेकिन बिना परिप्रेक्ष्य के इसे दिखाकर ‘स्कॉलर’ रेज़ा असलन ने समूचे हिन्दू समाज को ही श्वेत समुदाय के दिमाग में बने ‘कैनिबल’ यानी मानवभक्षी जंगलियों के समुदाय में फिट करने का प्रयास किया था।

हालाँकि यह ‘डिस्क्लेमर’ दे दिया कि अघोरी समस्त हिन्दू समुदाय के प्रतिनिधि नहीं हैं, लेकिन यह केवल एक कोरम पूरा करना भर था- अगर सचमुच हिन्दुओं को गलत चित्रित करना मकसद नहीं था, तो अघोरियों की जगह शाक्त, वैष्णव, कबीरपंथी, नाथपंथी से लेकर आदिवासी समुदाय भी हजारों नहीं तो सैकड़ों की तादाद में थे, और उन सभी की अपनी एक अनूठी संस्कृति थी। लेकिन उससे हिन्दूफ़ोबिया का मकसद कहाँ पूरा होता?

New York Times- खुले में शौच शास्त्रों के सर मढ़ दिया

न्यू यॉर्क टाइम्स में 13 जून 2014 को एक लेख छपा, जिसमें लेखक ने खुले में शौच की बात करते हुए हिन्दू धर्म शास्त्रों को हिन्दुओं के खुले में शौच करने के लिए ज़िम्मेदार बता दिया। यह दिमाग में पुराने शौच की तरह बजबजाते हुए हिन्दूफ़ोबिया के अतिरिक्त क्या हो सकता है? सौभाग्यवश हिन्दू अमेरिकन फाउंडेशन ने इसका विस्तृत खण्डन प्रकाशित कर दिया था, वरना साँप-मदारी वाले देश की तरह यह भी हिंदुस्तान और हिन्दुओं का अगला स्टीरियोटाइप बन गया होता कि हिन्दू खुले में शौच इसलिए करते हैं कि उनका धर्म उन्हें ऐसा करने के लिए कहता है।

सरस्वती नदी के अस्तित्व के वैज्ञानिक प्रमाण अब मिलने लगे हैं। लेकिन उन सभी को झुठला कर, केवल इसलिए कि इस नदी का नाम हिन्दुओं की एक देवी के नाम पर है, न्यू यॉर्क टाइम्स ने बाकायदा एक वीडियो प्रकाशित किया, जिसका मकसद विज्ञान, प्रमाण, तथ्य आदि ‘छोटी-मोटी’ चीज़ों को परे रखकर केवल हिन्दुओं की आस्था पर हमला करना था। इस बार उनका भंडाफोड़ हिन्दू लेखक और स्कॉलर राजीव मल्होत्रा ने किया।

अंत में तबरेज़ अंसारी के विषय पर एक अंतिम बात, जो बीबीसी जानता है, लेकिन बताता नहीं, क्योंकि वह हिन्दूफ़ोबिक नैरेटिव को काट देगी। तबरेज़ की जगह अगर कोई ‘राजू’ होता तो उसकी भी पिटाई, उसके साथ भी हिंसा तय बात थी। चोर-उचक्कों के साथ भीड़-हिंसा, कानून हाथ में लेकर अपराधियों को सजा देना, यह सब कतई समर्थन लायक नहीं हैं, शर्तिया दंडनीय हैं, लेकिन अंततः यह सब ‘सेक्युलर’ हैं। इसका सबूत यह है कि जिस झारखंड में तबरेज़ की हत्या हुई, उसी झारखण्ड में एक नसीम ने राजू बनकर, हाथ में कलावा पहनकर चोरी की कोशिश की। फिर भी पकड़े जाने पर पिटाई हुई ही

मीडिया का यह अंतरराष्ट्रीय गिरोह हिन्दूफ़ोबिया से पीड़ित है। इसीलिए इतनी घिनौनी कवरेज कर रहा है। इसके इन कुचक्रों को लगातार काटे जाने की ज़रूरत है, वरना जैसा कि ऊपर बताया है, यह गिरोह तैयार बैठे हैं हिन्दुओं को एक बार फिर दुनिया की नज़रों में साँप-मदारियों वाली कौम बना देने के लिए।

मैच के बाद माँजरेकर ने जडेजा को लेकर किया ऐसा ट्वीट की मिल रही हैं गालियाँ

कॉमेंटेटर और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व बल्लेबाज संजय माँजरेकर और विवाद का रिश्ता गहरा होने लगा है। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन को ट्विटर पर ब्लॉक करने वाले माँजरेकर का भारतीय क्रिकेटर रविंद्र जडेजा के साथ चल रहे विवाद ने आज एक नया मोड़ ले लिया।

विश्वकप क्रिकेट के सेमीफाइनल मैच में भारत की टीम को आज न्यूजीलैंड के हाथों हार का सामना करना पड़ा। लेकिन, इस मैच में रविंद्र जडेजा की पारी काफी सराहनीय रही। इसके बाद संजय माँजरेकर ने एक ऐसा ट्वीट कर दिया जिससे सभी क्रिकेट प्रेमी भड़क गए और अपनी प्रतिक्रियाएँ देने लगे।

दरअसल, न्यूजीलैंड के साथ सेमीफाइनल मुकाबला समाप्त होने के बाद माँजरेकर ने ट्वीट किया, “अच्छा खेला जडेजा।” और ट्वीट के आखिर में एक आँख मारने वाली इमोजी भी लगा दी। हो सकता है कि इस ट्वीट के माध्यम से माँजरेकर ने गरमा-गर्मी के माहौल को हल्का करने की कोशिश की हो, लेकिन ट्विटर यूज़र्स की प्रतिक्रियाएँ तो यही बताती हैं कि कम से कम वो तो ऐसा नहीं मानते हैं।

वो ‘ज्वलनशील’ ट्वीट जिससे क्रिकेट प्रेमी खफा हो गए
माँजरेकर के ट्वीट से ‘गब्बर’ भी गुस्सा है

दरअसल, बांग्लादेश के खिलाफ खेले जाने वाले मैच से पहले संजय माँजरेकर ने आईएएनएस से कहा था कि वह इंग्लैंड के खिलाफ खराब प्रदर्शन के बाद भी कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल को अगले मैच में जगह देते। रवींद्र जडेजा ने इस पर माँजरेकर से खिलाड़ियों का सम्मान करने को कहा था। इसके बाद जडेजा ने ट्विटर पर लिखा था, “मैंने आपसे दोगुने मैच खेले हैं और अभी भी खेल रहा हूँ। जिन्होंने कुछ हासिल किया है उसका सम्मान करना सीखिए।”