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असली दिक्कत ‘ध्वनि प्रदूषण’ नहीं, हिन्दू भक्त हैं: मंदिर ‘इकोसिस्टम’ ध्वस्त करने की साज़िश

खबर आ रही है कि केरल के वन विभाग के मुताबिक सबरीमाला के मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले भक्तों (भगवान अय्यप्पा के भक्त) के ‘स्वामिये शरणं अय्यप्पा’ का जप करने से आसपास के जंगलों में ध्वनि प्रदूषण होता है। इसे रोकने के लिए वन विभाग द्वारा केंद्र सरकार को दी गई रिपोर्ट में अय्यप्पा के दर्शन के लिए आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या पर लगाम कसने की अनुशंसा की गई है। इस खबर की कोई ‘व्याख्या’ बेकार है क्योंकि रिपोर्ट लिखने वाले, पढ़ने वाले, जिसे अनुशंसा दी गई है- उन सभी को पता है कि यह क्यों किया गया है। यह ‘सेक्युलर’ सरकारी मशीनरी द्वारा एक और हिन्दूफ़ोबिक आघात है हिंदुत्व/हिन्दू धर्म पर।

महज़ अपमान नहीं, खुला हमला है

मंदिर में श्रद्धालुओं की आवक रोकने का यह प्रयास केवल एक मंदिर, एक आस्था या धार्मिक भावना, एक परम्परा का “अपमान” नहीं है- यह एक पूरे ‘इकोसिस्टम’ पर, मंदिरों के इर्द-गिर्द बुने हुए सामाजिक ताने-बाने पर हमला है। यह कोशिश है अय्यप्पा के आसपास खड़े पतनमतिट्टा जिले के (जहाँ सबरीमाला मंदिर स्थित है), और केरल राज्य के पूरे हिन्दू समाज के आपसी धार्मिक संबंध को नष्ट करने की।

यह कोशिश है सबरीमाला और अय्यप्पा के प्रति श्रद्धा की वो डोर तोड़ने की, जिससे लोग ऐसे जुड़े कि सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के मुकदमे के खतरे के बाद भी देश के हर कोने से लाखों (या शायद करोड़ों) लोगों ने अपनी प्रोफाइल पिक्चर में ‘स्वामिये शरणम्’ लिखकर अपना आक्रोश जताया, अपने स्थानीय संघ-भाजपा-कॉन्ग्रेस नेताओं से मिलकर इस फ़ैसले को बदलने का दबाव बनाया और लिबरल गैंग के खिलाफ सबरीमाला-अय्यप्पा संघर्ष और प्रतिरोध के देवता बन गए हैं।

मंदिरों की महत्ता

मंदिर कई स्तरों पर हिन्दू धर्म या हिंदुत्व (Hindu-ness) को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह केवल एक ‘प्रतीक’ मात्र नहीं हैं ईश्वर का, जिसका केवल ‘कथित’ महत्त्व हो। अध्यात्म और योग के स्तर पर भी मंदिर महत्वपूर्ण हैं, और सामाजिक स्तर पर भी। हिन्दू समाज मंदिरों के इर्द-गिर्द बना समाज रहा है, और हर गाँव-शहर के छोटे-बड़े ग्राम देवता-कुल देवता के मंदिर से लेकर ज्योतिर्लिंग, शक्तिपीठ आदि श्रद्धालुओं के समुदाय के, उनके ‘इकोसिस्टम’ की धुरी रहे हैं।

जब लोग शाम को काम-धंधे से घर लौटते समय मंदिर में भगवान को हाथ जोड़ने जाते थे, या रात को खाना खाने के बाद शयन-आरती में शामिल होते थे, तो उनमें से अधिकाँश केवल वहाँ पंद्रह मिनट बैठकर भजन-ध्यान-जप नहीं करते थे, बल्कि महत्वपूर्ण बातों का आदान-प्रदान, आस-पास के समाज में क्या चल रहे है, फलाने विषय पर धर्म और शास्त्र क्या कहता है, किस हद तक सैकड़ों या हज़ारों वर्ष पहले कही गई वह बात समकालीन महत्व रखती है- इन सब पर चर्चा होती थी।

धर्म की धारा ऐसे ही हर स्थानीय समुदाय में अपने विशिष्ट ‘स्वाद’ के साथ जीवित और जीवंत रहती थी। वही शिव ऐसे ही स्थानीय आस्था और भक्ति के प्रभाव के चलते नेपाल में पशुपतिनाथ हैं, गुजरात में सोमनाथ, और झाखण्ड में बैद्यनाथ और तमिल नाडु में रामेश्वरम्- और फिर भी सभी शिव हैं, इसमें कोई शंका नहीं। और ऐसा दैनिक जुड़ाव होने के चलते मंदिर और धर्म केवल एक विचार या विचारधारा नहीं थे, सामुदायिक जीवन के केंद्र में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते थे।

और इसी की बानगी सबरीमाला में देखने को मिली। मंदिर के ‘क्षेत्रम्’, उसके आगम शास्त्र के नियम और मंदिर के देवता की ही शास्त्रोक्त इच्छा के विपरीत जाने वाले सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को लागू करने में केरल की कम्युनिस्ट सरकार को नाकों चने चबाने पड़ गए। दो-तीन महीने तक श्रद्धालु वहाँ घेरा बनाकर पहरा देते रहे ताकि कोई अविश्वासी महिला उनके देवता के क्षेत्रम् को भङ्ग न कर दे।

अंत में केवल अपने अभिमान की तुष्टि के लिए दो महिलाओं का प्रवेश भी आसुरिक केरल सरकार को अँधेरी रात में ही कराना पड़ा- और उन दो के बाद पूरा मामला फिर से ठप हो गया। लेकिन इस अनुभव से हिन्दूफ़ोबिकों की इस पीढ़ी को वह समझ में आ गया जो उनसे पहले कम्युनिस्ट इतिहासकारों और नीति-निर्माताओं, उससे पहले हिंदुस्तान में ईसाईयत फैलाना चाह रहे ईसाई मिशनरियों को समझ में आया था (इस्लामिक आक्रांताओं को यह शुरू से पता था, यह उनके हमलों से साफ़ पता चलता है)- बिना मंदिर-इकोसिस्टम को विखंडित किए, उससे लोगों का ‘तलाक’ कराए, ‘कॉकरोच’ की तरह न मरने की ज़िद पकड़े हिन्दू धर्म को नहीं मारा जा सकता।

हर मंदिर, हर परम्परा पर हमले का template एक ही होता है

हिन्दूफ़ोबिक मीडिया, राजनीतिक और सरकारी गिरोह का एक ही template है- जो वे बार-बार इस्तेमाल करते हैं हिन्दू मंदिरों और परम्पराओं को प्रतिबंधित करने के लिए। और हिन्दू हर बार उसमें फँस जाते हैं- और इसका अहसास उन्हें तब होता है, जब बहुत देर हो जाती है।

पहले चरण में पर्यावरण, प्रगतिशीलता, नारी-अधिकार आदि की आड़ लेकर हिन्दुओं की परम्पराओं का दानवीकरण होता है। और कुछ नहीं मिलता तो केवल ‘चलो, सुधार-के-लिए सुधार करते हैं’ के बहाने हिन्दू आस्था पर कीचड़ उछाला जाता है। (उदाहरण के तौर पर, एक महिला के हिन्दू रीति-रिवाजों से इतर शादी करने के निजी निर्णय को, जिसमें अपने-आप में किसी को आपत्ति नहीं हो सकती, हिन्दूफोबिया की मानसिकता के चलते हिन्दू विवाह-प्रणाली को पूरी तरह दानवीकृत करने के लिए इस्तेमाल किया गया) इस चरण में मीडिया (पहले मुख्यधारा, और अब मुख्यधारा के अलावा सोशल मीडिया भी) के इस्तेमाल से ‘माहौल’ बनाया जाता है।

याद करिए दही-हांडी, जल्ली-कट्टू, दिवाली पर ‘प्रगतिशील’ प्रतिबंध लगने के सालों पहले से कैसे इन उत्सवों के खिलाफ विभिन्न राजनीतिक, सांस्कृतिक, और यहाँ तक कि ‘लाइफस्टाइल’ पत्र-पत्रिकाओं में लेख छपने लगे थे। यही सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है- इसमें टीवी पर आ रहे विज्ञापन, फ़िल्में, पत्रकार, और यहाँ तक कि स्कूल की किताबों की सहायता से ‘हिन्दू धर्म समाज के लिए खराब है’ का संदेश धीरे-धीरे करके घोला जाता है।

दूसरे चरण में मीडिया के माहौल बना लेने के बाद सरकारी और गैर-सरकारी मशीनरी ‘सक्रिय’ हो जाती है। अदालतों में दही-हांडी और दिवाली के खिलाफ याचिकाएँ लगने लगतीं हैं, सरकारों में बैठे व्यक्ति अय्यप्पा भक्तों के द्वारा ध्वनि-प्रदूषण की सरकारी ठप्पे वाली रिपोर्ट देकर ऐसे प्रोपेगण्डे पर अपनी मुहर लगाकर उसकी विश्वसनीयता बढ़ाते हैं, और इस चरण का अंत सरकारी या अदालती आदेश से हिन्दूफ़ोबिया गिरोह के मंसूबों की पूर्ति में होता है।

लेकिन इनका ‘गेम’ यहीं खत्म नहीं होता, चालू रहता है। इनका मन केवल एक बार किसी प्रथा को क़ानूनी रूप से प्रतिबंधित कर के नहीं भरता, बल्कि अगर उसके ख़िलाफ़ कोई व्यक्ति अगर अपने आस्था, अपने धर्म का पालन जारी रखे तो उसे ‘कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट’ के डंडे से सीधा कर दिया जाता है। सबरीमाला में यही हुआ, यही दही-हांड़ी के मामले में हुआ, और यही दिवाली के मामले में हुआ।

हिन्दू है कि जागता नहीं

हर बार, हर एक बार शुरुआती चरणों में इन आसुरिक वृत्ति वालों की हाँ-में-हाँ मिलाने के बाद हिन्दू यह उम्मीद करते हैं कि अंत में नतीजा अलग होगा। यह खुद को छलने या पगला जाने के अलावा कोई तीसरी चीज़ नहीं हो सकती। और अभी भी यही हो रहा है। इस रिपोर्ट पर ना कहीं कोई जनाक्रोश है, न ही हिन्दू आक्रोश की सोशल मीडिया में फसल काटने वालों में से अधिकांश ने इस पर एक ट्वीट भर भी करने की जहमत उठाई है।

और जब इस रिपोर्ट के आधार पर कुछ सालों में वामपंथी दो-चार सौ लेख लिख डालेंगे, उन लेखों के आधार पर कोई सरकार को ज्ञापन या अदालत में याचिका दे देगा, सबरीमाला में श्रद्धालुओं की आवक कम या बंद हो जाएगी, तो उसके बाद ‘जागा हुआ हिन्दू’ सड़कों पर तब उतरकर सोचेगा कि वह ‘सेक्युलर’ मशीनरी को झुका लेगा।

लोहिया हिंदूवादी नहीं थे, शायद अपने समकालीनों की तरह उनके लिए भी हिन्दूफ़ोबिया सार्वजनिक जीवन का सामान्य स्तर रहा हो (मैंने लोहिया को पढ़ा नहीं है, इसलिए उनकी पीढ़ी के एवरेज पर बात कर रहा हूँ) लेकिन उनका कथन ‘ज़िंदा कौमें पाँच साल इंतज़ार नहीं करतीं।” अगर हिन्दू सीख कर आत्मसात कर लें, अपना उद्धार खुद, और आज से ही, अपने जीते-जी करने की कमर कस लें तो बड़ी कृपा होगी।

आगे की राह

आगे की राह किसी ‘कल्कि अवतार’ के आने या ‘भगवान विष्णु के ‘एक्स्ट्रा’ वाले अवतार’ के भरोसे बैठे रहने की बजाय अगर ‘अप्प दीपो भव’ की हो तो बेहतर होगा। सबसे पहले तो हिन्दुओं को ‘स्व-केंद्रित’ सामाजिक और सामुदायिक जीवन की मानसिकता से बाहर आना होगा। चाहे आप स्वयं ईश्वर में विश्वास रखें या न रखें, अगर आप हिन्दू शब्द से अपनी पहचान जोड़ते हैं, या हिन्दू संस्कृति और सभ्यता के हितैषी हैं तो अपने स्थानीय मंदिर और पुजारी का हाल-चाल लेना प्रारंभ करें।

पता करें कि वह सरकार के चंगुल में है, किसी निजी व्यक्ति या संस्था द्वारा संचालित है या एक सार्वजनिक ट्रस्ट के अंतर्गत आता है। उसके कार्यकलापों में भागीदार बनें- भले वह भागीदारी साल में एक बार बंदनवार लगाने जितनी ही क्यों न हो।

जिन्हें पढ़ने में रुचि हो, वे कोई भी शास्त्र– नाट्यशास्त्र, व्याकरण, पुराण, चित्रकला यहाँ तक कि कामशास्त्र भी, उठाकर यह जानने का प्रयास करें कि किसी भी विषय पर हिन्दू मत क्या है। योग, ध्यान, तंत्र, क्रिया- इस सब को आप सीखना शुरू कर सकते हैं। बाबा रामदेव, श्री श्री रविशंकर से लेकर जग्गी वासुदेव और ओम स्वामी तक बड़ी आध्यात्मिक संस्थाओं की कमी नहीं है, और हर शहर में छोटे-छोटे योग गुरु भी मौजूद हैं।

अपने बच्चों की किताबों को जानें- और उन्हें किताबों से इतर हिंदुत्व का, हिन्दू धर्म का असली सत्य बताएँ। एक मशहूर लेखक (शायद प्रेमचंद, लेकिन यकीन के साथ नहीं कह सकता) अंग्रेज़ों के समय में इतिहास के सरकारी अध्यापक थे। एक घंटे की क्लास में 20-25 मिनट में इम्तिहान में सवाल के जवाब में क्या लिखा जाना है, इसकी बात खत्म कर बाकी का समय किताबों में हिन्दुस्तानियों के खिलाफ जो प्रोपेगैंडा भरा था वह कितना झूठा था, उसे काटने में बिताते थे। अंग्रेज़ों के समय में जेल जाने और नौकरी खोने का खतरा उठाकर कोई अगर यह कर सकता था तो आपको अपने बच्चों को आज़ाद देश में सच बताने से कौन रोक रहा है?

हिन्दू धर्म न किसी एक मसीहा, किसी एक किताब की बदौलत पैदा हुआ है, न किसी एक माई-बाप के भरोसे इसका संरक्षण किया जा सकता है। आपके हाथ में केवल यह निर्णय है कि आप इसके संरक्षण में कुछ करेंगे, या किसी मसीहा के चुटकी बजाने का इंतजार करेंगे।

‘आगे की राह’ खण्ड के कुछ विचार लेखक नितिन श्रीधर के इंडियाफैक्ट्स ब्लॉग से साभार।

12 साल की नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म में परवेज़ और टनटन गिरफ़्तार, साहिल फ़रार

उत्तर प्रदेश के जौनपुर से एक 12 साल की बच्ची के साथ हैवानियत की ख़बर सामने आई है। अपने घर से कूड़ा फेंकने के लिए निकली बच्ची को परवेज़, साहिल समेत तीन दरिंदों ने उसका अपहरण किया। सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम देने के बाद सभी वहाँ से फऱार हो गए। 

पीड़ित बच्ची के परिजनों को जब इस घटना के बारे में पता चला तो उन्होंने पुलिस में शिक़ायत दर्ज कराई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज कर लिया और परवेज़ व उसके एक साथी को धर-दबोचा। दुष्कर्म में शामिल साहिल फ़िलहाल फ़रार है।

दरअसल, जौनपुर शहर कोतवाली क्षेत्र के मछलीशहर पड़ाव के एक मोहल्ले में 12 साल की मासूम शाम के समय कूड़ा फेंकने के लिए घर से बाहर निकली थी। पहले से घात लगाए आरोपितों ने उसे पकड़ लिया और पास के हाते में ले गए। वहाँ परवेज़, साहिल, टनटन समेत अन्य साथियों ने उसका सामूहिक बलात्कार किया। काफ़ी देर बाद जब बच्ची घर नहीं पहुँची तो परिजनों ने परेशान होकर उसकी तलाश शुरू कर दी।

काफ़ी तलाश के बाद परिजनों को बच्ची बदहवास हालत में मिली, उसे उसी अवस्था में घर लाया गया, जहाँ होश आने के बाद उसने आपबीती बताई। एसपी मिश्रा ने बताया कि मामला दर्ज कर वारदात को अंजाम देने वाले दो आरोपित टनटन और परवेज़ को गिरफ़्तार कर लिया गया है और साहिल अभी भी फ़रार है जिसे जल्द गिरफ़्तार कर लिया जाएगा।

मुल्ला साबित करें कि सिंदूर व बिंदी लगाना हराम है: सैयद वसीम रिज़वी

शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सैयद वसीम रिज़वी ने तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद नुसरत जहां के सिंदूर और बिंदी लगाने के माममले में उलेमा के फ़तवों पर कड़ी आपत्ति जताई।

उन्होंने कहा कि हर मुस्लिम शादीशुदा महिला को अपने हिसाब से सजने-सँवरने का हक़ है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि मुल्ला को यह साबित करना चाहिए कि आख़िर सिंदूर और बिंदी लगाना हराम है।

ख़बर के अनुसार, रिज़वी ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि कोई भी मुस्लिम महिला सिंदूर लगाती है, चूड़ियाँ पहनती है, मंगलसूत्र पहनती है या बिंदी लगाती है तो यह शरियत के तौर पर हराम नहीं है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि वो दुनिया के सभी मुल्लाओं को चैलेंज करते हैं और यह साबित करके दिखाएँ कि किस शरियत में लिखा है कि सिंदूर लगाना हराम है। 

TMC सांसद नुसरत जहां के ख़िलाफ़ जारी किए गए फ़तवे की निंदा करते हुए रिज़वी ने कहा कि हिन्दुस्तान में यह तालिबानी मानसिकता का प्रचार है। इस तरह का फ़तवा जारी करने वाले लोगों से कड़ाई से निपटने की आवश्यकता है।

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल बोर्ड के अध्यक्ष सैयद वसीम रिज़वी ने कहा था कि अगर समय रहते प्राथमिक मदरसे बंद न किए गए तो 15 साल बाद देश का आधे से ज़्यादा अल्पसंख्यक ISIS की विचारधारा का समर्थक हो जाएगा। इसके पीछे वजह उन्होंने बताई कि दुनिया में देखा गया है कि कोई भी मिशन चलाने के लिए बच्चों को निशाना बनाया जाता है।

इरशाद ने किया शिवलिंग पर पेशाब, पुलिस ने किया गिरफ़्तार, इलाके में तनाव

दिल्ली के चाँदनी चौक इलाके में दुर्गा मंदिर में तोड़-फोड़ की ख़बरों का सिलसिला अभी थमा भी नहीं था कि साम्प्रदायिक तनाव को बढ़ाने की एक और कोशिश की गई। इरशाद उर्फ़ ईरानी नाम के एक शख़्स ने शहर के जहाँगीरबाद में महादेव के मंदिर में शिवलिंग पर पेशाब किया। जिससे इलाके में तनाव का माहौल है। प्राचीन शिव मंदिर की पवित्रता को तार-तार करने वाले इरशाद के ख़िलाफ़ बजरंग दल के सदस्यों ने पुलिस में शिक़ायत दर्ज की। इसके बाद बुलंदशहर पुलिस ने उसे तुरंत गिरफ़्तार कर लिया।

सुदर्शन न्यूज़ की एक ख़बर के अनुसार, बजरंग दल के सदस्य यतिंदर गेहना ने बताया:

“ईरानी नाम के एक मुस्लिम व्यक्ति को जहांगीराबाद क्षेत्र की पुरानी मंडी के प्राचीन शिव मंदिर के शिवलिंग पर पेशाब करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। वह अक्सर मंदिर परिसर के आसपास छिपा हुआ पाया जाता था। यहाँ के लोग उसके कृत्य से नाराज़ हैं। वह वहाँ से भाग गया है। उसके ख़िलाफ़ पुलिस शिक़ायत दर्ज की गई थी और उसे घर से भगा दिया गया था।”

बुलंदशहर पुलिस ने इस घटना की पुष्टि करते हुए ट्वीट किया कि आरोपी ‘इरशाद’ को भारतीय दंड संहिता धारा-295 के तहत (धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल पर चोट पहुँचाना या परिभाषित करना) और धारा-153 ए (विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के तहत मामला दर्ज किया गया है और उसे तुरंत जेल भेज दिया गया।


JNU: छात्र संघ अध्यक्ष सहित 20 छात्र निलंबित, प्रवेश परीक्षा में धाँधली का है आरोप

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ एकबार फिर धरने पर जाने के कगार पर है। दरअसल, यूनिवर्सिटी ने जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष एन साई बालाजी के साथ बीस छात्रों को निलंबित कर दिया है। निलंबित किए गए छात्रों में पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष का नाम भी शामिल है। छात्रसंघ अध्यक्ष एन साई बालाजी ने विवि प्रबंधन पर अकादमिक गतिविधियों से निलंबित करने का आरोप लगाया है। इस बारे में जेएनयू की फ्रीलांस प्रोटेस्टर शेहला रशीद ने ट्वीट कर के जानकारी दी है।

इन सभी लोगों पर प्रवेश परीक्षा में गड़बड़ी करने का आरोप है। पूर्व में एमफिल की डिग्री रोकने के बाद विवि कुलपति ने अध्यक्ष एन साई बालाजी समेत अन्य छात्र नेताओं को अकादमिक गतिविधियों से निलंबित कर दिया है।यह मुद्दा शुक्रवार (जून 05, 2019) को तब सामने आया जब जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष एन साई बालाजी ने यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स पोर्टल पर अपडेट चेक करने के लिए लॉग इन किया। लॉग इन करते हुए ही उन्हें निलंबन की सूचना दिखाई दी। जिसके बाद यूनिवर्सिटी के दूसरे छात्रों ने भी इस बात की शिकायत की है।

ऑनलाइन पंजीकरण के दौरान दिखाई जा रही जानकारी के अनुसार उन्हें चीफ प्रॉक्टर की तरफ से निलंबित किया गया है। हालाँकि, जेएनयू प्रशासन ने छात्रसंघ अध्यक्ष के आरोपों पर कोई जवाब नहीं दिया है। निलंबित छात्रों का कहना है कि इस मामले में वे यूनिवर्सिटी के आधिकारिक नोटिस आने का इंतजार करेंगे फिर कोई फैसला लेंगे।

4 बीवियों वाले ससुर ने बहू को बनाया हवस का शिकार, FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक बहू ने अपने ससुर पर रेप का आरोप लगाया है। बहू के मुताबिक उसके ससुर की पहले से ही 4 बीवियाँ, लेकिन फिर भी उसकी हवस की भूख मिटी नहीं और एक दिन अपनी बहू को बाथरूम में पीठ पर साबुन लगाने के बहाने से बुलाकर उसका रेप कर दिया।

किसी तरह पीड़ित बहू ने शोर मचाया तो पीड़िता की आवाज सुनकर परिवार के अन्य लोग जब वहाँ इकट्ठा हुए तो ससुर ने तुरंत सारा आरोप अपनी बहू पर जड़ दिया, जिसके बाद उल्टा उसके घरवालों ने उसे ही कमरे में बंद कर दिया। पीड़िता ने कई घंटे बाद अपने परिजनों को पूरी घटना की सूचना दी और 100 नंबर पर फोन करके पुलिस को बुलाया।

खबरों के अनुसार बदनामी के डर से परिवारवालों ने घटना को दबाने का पूरा प्रयास किया था, लेकिन पीड़िता ने किसी की नहीं सुनी और न्याय की गुहार लगाने पुलिस के पास पहुँच गई।

मुबारकपुर थाने की रहने वाली पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामले को दुष्कर्मी ससुर के ख़िलाफ़ FIR दर्ज कर लिया है और बताया है कि महिला अपने ससुर से निजात पाने की बात कर रही है।

कर्नाटक में अब तक 14 MLA ने दिया इस्तीफा, संकट में कॉन्ग्रेस-JDS की कुमारस्वामी सरकार

कर्नाटक में राजनीतिक संकट गहराया हुआ है। जानकारी के मुताबिक, अभी तक कॉन्ग्रेस और जेडीएस के 14 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है। अगर इनका इस्तीफा मंजूर हो जाता है तो कुमारस्वामी सरकार अल्पमत में आ जाएगी। उपमुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता डीके शिवकुमार इन विधायकों को मनाने में जुटे हुए हैं। इस मामले पर विधानसभा स्पीकर रमेश कुमार ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी को लेने जाना था, इसलिए वह घर चले गए। रविवार (जुलाई 7, 2019) को छुट्टी है और सोमवार (जुलाई 8, 2019) को वह बेंगलुरु में नहीं हैं। इसलिए अब इस मामले को वह मंगलवार (जुलाई 9, 2019) को देखेंगे।

जेडीएस नेता एच विश्वनाथ ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार के खिलाफ अब तक 14 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है। उनका कहना है कि वो लोग राज्यपाल से भी मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि उन लोगों ने इस्तीफे को मंजूर करने के लिए स्पीकर को पत्र भी लिखा है। जेडीएस नेता का कहना है कि गठबंधन सरकार लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है।

बता दें कि, विधायकों का इस्तीफा ऐसे वक्त पर आया है, जब मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी अमेरिका में हैं। वहीं इनमें से 3 विधायकों का कहना है कि वह पूर्व सीएम सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं। अगर आलाकमान सिद्धारमैया को सीएम बनाता है तो वे इस्तीफा वापस लेने को तैयार हैं। 

इससे पहले, इस्तीफे को लेकर कॉन्ग्रेस विधायक रामालिंगा रेड्डी का बयान सामने आया था। उन्होंने कहा था कि वो विधानसभा अध्‍यक्ष को अपना इस्‍तीफा सौंपने आए हैं। रेड्डी ने कहा कि वो अपनी बेटी (कॉन्ग्रेस विधायक सौम्‍या रेड्डी) के अगले कदम के बारे नहीं जानते। साथ ही उन्‍होंने कहा था कि वो पार्टी में किसी को भी इसका दोष नहीं दे रहे हैं। रेड्डी का कहना था कि उन्हें लगता है कि कुछ मुद्दों पर पार्टी में उनकी उपेक्षा की जा रही है। इसीलिए उन्होंने इस्‍तीफा देने का फैसला लिया।

पुलिस की लापरवाही से फरार हुआ बलात्कारी असलम, बहन ने दोबारा करवाया गिरफ्तार

आगरा में सामूहिक दुष्कर्म के बाद फरार आरोपित असलम को उसकी बहन ने खुद ही पुलिस बुलाकर गिरफ्तार करवा दिया। असलम नामक यह आरोपित पुलिस की लापरवाही से गुरुवार (जून 4, 2019) को जेल से फरार होकर अपनी बहन के पास पहुँचा था, जहाँ बहन ने उसे बातों में उलझाकर, पुलिस को उसकी जानकारी दे दी और एक बार फिर उसे आगरा पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया।

अमर उजाला की खबर के मुताबिक सामूहिक दुष्कर्म के मामले में असलम को गुरुवार को अन्य बंदियों के साथ दीवानी पेशी पर लाया गया था। लेकिन जिला कारागार ले जाते हुए कैदियों की ठीक ढंग से गिनती नहीं हुई, जिसके चलते आरोपित वहाँ से भागकर अपनी बहन के घर पहुँच गया। वहीं, जब शाम को पुलिसकर्मी, बंदियों को जेल में दोबारा दाखिल करने गए तो उन्हें गिनती में असलम नहीं मिला। जिसके बाद उसके फरार होने की जानकारी पुलिसकर्मियों को मिली।

बताया जा रहा है, इस मामले में पुलिस ने इस हद तक लापरवाही दिखाई कि जब उनसे पूछा गया कि असलम की पेशी हुई थी या नहीं? तो वह जवाब तक नहीं दे पाए। असलम के फरार होने के मामले की जाँच एसपी प्रोटोकॉल डा. एमपी सिंह ने की। जिसमें पुलिसकर्मियों की लापरवाही से बंदी के भागने की बात सामने आई।

दीवानी पेशी से फरार हुए असलम को जब उसकी बहन ने अपने घर देखा तो वह हैरान रह गई। बहन ने उससे पूछा जब वह जेल में था तो यहाँ कैसे आ गया। इस पर उसने जवाब दिया कि वह हवालात में रह गया था इस कारण वह भटकता हुआ उसके घर आ गया है।

असलम की बात सुनते ही उसकी बहन ने उसे अपने घर में बैठा लिया और बातों में उलझाए रखा। फिर उसने असलम की जानकारी न्यू आगरा पुलिस को दे दी, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

आरोपित के फरार होने के इस मामले में पुलिस लाइन के एसआई उदयवीर सिंह ने मुख्य आरक्षी समुंद्र सिंह, आरक्षी अरविंद कुमार (ड्यूटी वितरण), शेर सिंह (चेकिंग ड्यूटी), प्रवीण (निगरानी एवं चेकिंग ड्यूटी), सिपाही अजय प्रताप सिंह, आरक्षी साजिद और बंदी असलम के खिलाफ धारा 223, 224 में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

गढ़चिरौली नक्सली हमले में NCP नेता गिरफ़्तार, 1 नागरिक समेत 16 पुलिसकर्मी हुए थे ब्लास्ट का शिकार

राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के कुरखेड़ा तहसील अध्यक्ष, कैलाश रामचंदानी को गढ़चिरौली में IED ब्लास्ट मामले में गिरफ़्तार किया गया। इस हमले में 15 पुलिसकर्मी और एक नागरिक मारे गए थे। इस विस्फोट मामले को स्थानीय पुलिस द्वारा राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंप दिया जाएगा।

ख़बर के अनुसार, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली ज़िले में नक्सलियों द्वारा एक सुरक्षा वाहन को निशाना बनाया गया था। नक्सलियों ने कुरखेड़ा तहसील में उस समय IED ब्लास्ट किया था जब राज्य अपना स्थापना दिवस मना रहा था। इस ब्लास्ट में 15 पुलिसकर्मियों और एक नागरिक की जान चली गई थी।

इससे पहले, इस मामले में गढ़चिरौली पुलिस ने टॉप नक्सली कमांडर नर्मदक्का और उसके पति किरण कुमार को गिरफ़्तार किया था। उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए इनपुट और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने दिलीप हिदामी, परसाराम तुलवी, सोमनाथ मडावी, किसान हिडामी और सुक्रु गोटा को भी गिरफ़्तार किया।

इन 5 आरोपितों को हिरासत में लेने के बाद, उनके पूछताछ के बाद कुरखेड़ा तहसील अध्यक्ष, कैलाश रामचंदानी का नाम हमले में शामिल होने का पता चला। कैलाश एक इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान के मालिक हैं और पिछले कई महीनों से NCP के ज़िला अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे हैं। पुलिस का मानना है कि इस धमाके में कई अन्य बड़े नाम भी शामिल हो सकते हैं।

अगले 2-3 दिनों में गढ़चिरौली पुलिस NIA को जाँच सौंप देगी। यह पूछे जाने पर कि NIA को जाँच क्यों सौंपी जा रही है, गढ़चिरौली के पुलिस अधीक्षक शैलेश बलकवडे ने कहा कि NIA ने कुछ नक्सली मामलों को उठाने का फ़ैसला किया है। उन्होंने कहा, “उन्होंने छत्तीसगढ़ और झारखंड में भी कुछ मामले उठाए हैं।”

प्रदेश की 1 लाख बेटियों का सामूहिक विवाह कराएँगे CM योगी, प्रत्येक बेटी को मिलेंगे ₹51 हजार

उत्तर प्रदेश में होने वाले उपचुनाव की तैयारियों में जुटे सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक और बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने यह निर्णय लिया है कि अगले साल मार्च तक एक लाख गरीब कन्याओं का विवाह कराया जाएगा। सीएम पहले से ही कई सामूहिक विवाह कार्यक्रमों में गरीब घर की बेटियों की शादी करवा चुके हैं। इसके जरिए योगी 2 लाख घरों तक अपनी पहुँच बना लेंगे। इसमें एक लाख कन्याओं के साथ-साथ उनके पति के घर तक योगी की पहुँच बनेगी।

इस बार सामूहिक विवाह कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया जाएगा। इसमें बड़े स्तर पर विवाह कराए जाएँगे। इसके लिए विवाह की चार शुभ तिथियाँ निर्धारित की जाएँगी। समाज कल्याण विभाग इसकी पूरी रुपरेखा तय करेगा। विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार ने इसकी जानकारी प्रशासन और क्षेत्र के अधिकारियों को दे दी है। विशेषकर जिलाधिकारियों से कहा गया है कि इन आयोजनों को सफल बनाने में पूरा सहयोग करें।

मुख्यमंत्री द्वारा करवाई जा रही इन शादियों में सांसद और विधायक के अलावा समाज के प्रतिष्ठित लोगों को भी बुलाया जाएगा। इसके साथ ही कन्या को दी जाने वाली राशि भी इस बार बढ़ा दी गई है। पहले एक बेटी को सरकार की तरफ से 35 हजार रुपए मिलते थे लेकिन अब 51 हजार रुपए कन्यादान के रूप में दिए जाएँगे।

समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में 9 फरवरी को हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम में दस हजार बेटियों की शादी करवाने का लक्ष्य था, लेकिन 15 हजार बेटियों की शादी करवाई गई थी। इस बार भी हर जिले से रिपोर्ट माँगी गई हैं जिसके बाद पता चलेगा कि किस जिले में कितनी बेटियाँ हैं और किस जिले में कितनी बेटियों का सामूहिक विवाह होगा। फिर उसी हिसाब से शादी की तैयारियाँ की जाएँगी।