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70 साल की कमरजहाँ को शौहर ने दिया तलाक़: 5 बेटों ने छोड़ा साथ, टॉफी बिस्कुट बेच कर रहीं गुजारा

एक तरफ जहाँ मोदी सरकार तीन तलाक बिल पास कराने में जुटी है, वहीं शनिवार (जून 22, 2019) को गोंडा जिले में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। जहाँ एक शौहर ने अपनी 70 वर्षीय बीवी को तीन तलाक दे दिया। मामला कोतवाली नगर के हाफिज़ पुरवा से जुड़ा है। जहाँ की वृद्ध महिला कमरजहाँ का आरोप है कि उनके शौहर ने इस बुढ़ापे में उन्हें तलाक दे दिया।

महिला का आरोप है कि उनके शौहर का चाल-चलन ठीक नहीं है। इस वजह से वह रोजाना उसके साथ मारपीट किया करता था और उसी के चलते उसने एक साथ तीन तलाक बोल कर संबंध खत्म कर लिया। मामले की शिकायत लेकर महिला कई स्थानीय थाने पर गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जिसके बाद पीड़ित वृद्ध महिला ने परिवार न्यायालय में गुजारे के लिए अर्जी लगाई है।

वृद्ध महिला कमरजहाँ ने अपनी बात बताई। उसका कहना है कि इस उम्र में शौहर को खोने का मलाल तो है ही लेकिन उसके साथ बेटों का अलग होने का गम उसके कलेजे को छलनी करने जैसा है। महिला ने कहा कि पहले तो शौहर ने तलाक दे दिया। उसके बाद उनके 5 बेटों ने भी उनसे मुँह फेर लिया। ऐसे में उनके ऊपर गमों का पहाड़ टूट पड़ा। महिला का कहना है कि शौहर की मार से हाथ पैरों में इतना दर्द है कि वो ठीक से चल भी नहीं पा रही हैं। उन्होंने बताया कि जब उनके शौहर और बेटों ने उन्हें घर से निकाल दिया तो ऐसे में उनके सामने खाने-पीने की एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। घर के खर्च से बचाए हुए ₹1,000 से टॉफी-बिस्किट लाकर, उसे बेचकर जीवनयापन कर रही हैं।

तीन तलाक के मुद्दों पर छिड़ी जंग के बीच शौहरों का तीन तलाक देने का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा। इसी कड़ी में एक और ख़बर पीलीभीत से सामने आई है। जहाँ पर संभल जनपद के चंदौसी कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला गोलागंज निवासी नौशाद ने थाना कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला मोहम्मद फारूख निवासी रोशन को तीन तलाक दे दिया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उनके शौहर ने पहले तो उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित किया, उनके साथ मारपीट की और जब वो प्रताड़ना से तंग आकर मायके चली आई तो नौशाद ने वहाँ पहुँच कर उसे डराया धमकाया और उसे तीन तलाक दे दिया। साथ ही जान से मारने की धमकी भी दी।

जानकारी के अनुसार, नौशाद ₹2 लाख दहेज की माँग कर रहा था। रोशन ने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज करवाई और कहा कि नौशाद के साथ उनका निकाह 11 अप्रैल 2014 को हुआ था। पीड़िता की तहरीर पर शिकायत दर्ज कर ली गई है। वहीं, पुलिस का कहना है कि ये मामला पहले परिवार परामर्श केंद्र में जाएगा और अगर वहाँ पर समझौता नहीं हो पाया तो फिर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

तौसीफ़ इमरान ने नाबालिग छात्रा को बनाया हवस का शिकार, Tik Tok पर बनाता था बलात्कार का वीडियो

वडोदरा में एक मुस्लिम व्यक्ति ने 14 साल की दसवीं कक्षा की छात्रा के साथ न सिर्फ़ बार-बार बलात्कार किया बल्कि इस कुकृत्य को उसने अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड भी किया। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी ख़बर के अनुसार, कथित तौर पर इमरान उस छात्रा को विभिन्न धार्मिक स्थलों पर ले गया और उसका धर्म-परिवर्तन (इस्लाम में) कराने में लगा रहा।

19 वर्षीय तौसीफ़ इमरान ख़ान जिसने नाबालिग का यौन शोषण किया, वो 12वीं कक्षा का छात्र है और मंझलपुर का रहने वाला है। इमरान के ख़िलाफ़ POCSO अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि वह लड़की को लालबाग के बगीचे में ले जाता था और प्रतापनगर के ओएनजीसी परिसर के पास उसका यौन उत्पीड़न करता था। लड़की के माता-पिता ने दावा किया है कि फोन में रिकॉर्डिंग करने के लिए ख़ान नाबालिग पर सेक्शुअल एक्टिविटीज़ के लिए दबाव बनाता था।

पुलिस जाँच में पता चला है कि खान Tik Tok पर लड़की की तस्वीरें और वीडियो शेयर करता था। फ़िलहाल, उसने लड़की की कोई भी अश्लील सामग्री शेयर नहीं की। हालाँकि, उसने यह धमकी दी थी कि जब भी लड़की के माता-पिता उससे उलझेंगे तो वो उन वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर कर देगा।

लड़की के माता-पिता को अपनी बेटी के यौन शोषण का पता तब लगा जब उन्होंने 20 जून को उसका पीछा किया। तब उन्हें पता चला कि ख़ान उसे लालबाग बगीचे और फिर प्रतापनगर रोड पर हजीरा मकबरे में ले गया। लड़की के माता-पिता ने अपनी शिक़ायत में यह भी बताया कि ख़ान उनकी बेटी का धर्म-परिवर्तन कराने के मक़सद से उसे विभिन्न धार्मिक स्थलों पर ले जाता था। ख़ान द्वारा शादी का वादा करने पर लड़की ने रमज़ान पर रोज़ा रखना भी शुरू कर दिया था।

पुलिस के अनुसार, ख़ान गुजरात बोर्ड परीक्षा के दौरान एक परीक्षा केंद्र में इस लड़की से मिला था। उसने बार-बार लड़की का पीछा किया, उससे संपर्क किया और उससे शादी का वादा किया। इससे पहले साल 2017 में भी नाबालिग से छेड़छाड़ के लिए उसके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया था।

पिछले कुछ महीनों में नाबालिगों के बलात्कार की कई घटनाएँ सामने आईं हैं। कानपुर में एक मौलवी ने मदरसा में एक नाबालिग के साथ बलात्कार किया था। एक और चौंकाने वाले मामले में, 12 साल की लड़की से बलात्कार के आरोप में 2 मुस्लिम पुरुषों को गिरफ़्तार किया गया था।

गीता है Army Manual, USA ने अपने सैनिकों के लिए मँगाई थी 30000 प्रतियाँ: Maj Gen सुभाष शरण

मेजर जनरल सुभाष शरण ने श्रीमद्भगवद्गीता को लेकर महत्वपूर्ण बात कही है। जनरल शरण ने कहा की श्रीकृष्ण के मुख से निकली गीता एक ‘Military Manual (सैन्य नियमावली)’ है और सेना के हर जवान को इसका अनुसरण करना चाहिए। जनरल शरण उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में आर्मी में भर्ती के एडिशनल डायरेक्टर जनरल हैं। मेजर जनरल ने कहा कि गीता हमें हमारे जीवन में आने वाले सभी परिस्थितियों के लिए तैयार रखती है। रिक्रूमेंट रैली के पहले राउंड के बाद शुक्रवार (जून 21, 2019) को मेरठ पहुँचे जनरल शरण ने ये बातें कहीं। पहले राउंड की प्रक्रिया बागपत के बड़ौत में 25 मई से 15 जून तक चली थी।

मेजर जनरल शरण ने कहा कि गीता में वो सारी शिक्षाएँ हैं, जिसे एक युद्ध के मैदान में दी गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गीता किसी ख़ास रिलिजन की पुस्तक नहीं है, युवाओं को इसे ज़रूर पढ़ना चाहिए क्योंकि ये हमें जीवन में आने वाली हालातों के लिए पहले से ही तैयार करती है। उन्होंने कहा कि ये एक ऐसी सैन्य नियमावली है जो युद्ध के मैदान में सामने आई थी। उन्होंने कहा, “किसी युद्ध के मैदान में हम केवल युद्ध की ही बात करते हैं और इसीलिए गीता को मैं एक सैन्य नियमावली मानता हूँ।

मेजर जनरल सुभाष शरण ने इस बात की याद दिलाई कि अमेरिकी सेना ने अपने जवानों को इराक़ में तैनात करने से पहले भगवद्गीता की प्रतियाँ दी थीं और ये पुस्तकें उन्होंने भारत से ख़ास निवेदन कर के मँगवाई थी। शरण के अनुसार, अमेरिका ने भारत से भगवद्गीता की 30,000 प्रतियाँ मँगाई थी ताकि अपने सैनिकों को ‘कर्म योग’ का महत्व समझा सके। इसका अर्थ हुआ कि अपने शत्रु से बिना इस बात की परवाह किए लड़ाई करना कि अंत में क्या होने वाला है या क्या परिणाम निकलने वाले है।

भर्तियों व रोज़गार की बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष पिछले वर्ष के मुक़ाबले डेढ़ गुना ज्यादा भर्तियाँ निकाली गई हैं। उन्होंने कहा कि वे और भी ज्यादा भर्तियाँ चाहते हैं, ख़ासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश से। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए पिछले वर्ष 900 भर्तियाँ निकली थीं जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़ कर 1500 हो गई हैं।

मेजर जनरल शरण ने भारतीय महिलाओं द्वारा सेना में ‘जवान’ के रूप में शामिल होकर इतिहास रचने का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि महिलाओं की भर्तियाँ इसी वर्ष अगस्त-सितम्बर में शुरू हो जाएगी। ये प्रक्रिया लखनऊ में होगी। इन महिलाओं की ट्रेनिंग अगले वर्ष 2020 में जनवरी से शुरू होगी। जनरल शरण ने कहा कि यह तो सिर्फ़ एक शुरुआत है, जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता जाएगा, महिलाओं को सेना में अन्य प्रकार की भूमिकाएँ भी दी जाएँगी।

अफगानिस्तान पर भारत की जीत को पचा नहीं पाईं The Print की पत्रकार, सोशल मीडिया पर उगला जहर

वर्ल्ड कप में भारत-अफगानिस्तान क्रिकेट मैच के दौरान ‘द प्रिंट’ की पत्रकार ज्योति मल्होत्रा ने क्रिकेट को लेकर अपनी ‘विशेषज्ञता’ का प्रदर्शन किया। पड़ोसी मुल्क अफगानिस्तान पर भारत की रोमांचक जीत से जहाँ पूरा हिंदुस्तान बेहद खुश था तो वहीं, ज्योति काफी क्षुब्ध और व्यथित लग रही थीं। भारतीय टीम की जीत के बाद उन्होंने क्रिकेट के ज्ञान का प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम पर स्पोर्टमैनशिप न दिखाने का आरोप लगा दिया।

मैच तो खैर मैच ही था – एकदम रोमांचक! इसे जीतने के लिए दोनों देशों ने अपनी पूरी ताकत झोंंक दी। दोनों टीम ने खेल भावना के साथ पूरे जोश से खेला। अंत समय तक दोनों टीम के बीच काफी कड़ी टक्कर देखने को मिली, जिसके लिए दोनों देशों के फैंस ने टीम की सराहना भी की। भारतीय भी अपनी पड़ोसी देश की टीम के लिए खुश थे और उन्होंने अफगानिस्तान टीम द्वारा किए गए प्रदर्शन के लिए उसकी प्रशंसा भी की। हालाँकि, ज्योति मल्होत्रा जैसी ‘शांतिप्रिय’ लुटियन पत्रकार भारत की जीत के बाद बेहद परेशान लग रही थीं और उन्होंने अपनी निराशा और भड़ास को दूर करने के लिए ट्विटर का सहारा लिया। उन्होंने इस बारे में ट्वीट करते हुए खासकर भारतीय कप्तान विराट कोहली पर निशाना साधा।

अफगानी क्रिकेटर राशिद खान के आउट होने पर भारतीय टीम द्वारा जश्न मनाने के तरीके को लेकर ज्योति मल्होत्रा ने ट्वीट करते हुए लिखा, “हर अफगानी विकेट गिरने पर भारतीय जिस तरह से जश्न मना रहे हैं, उससे ऐसा प्रतीत हो रहा है, जैसे मैच अफगानिस्तान के साथ नहीं, बल्कि पाकिस्तान के साथ खेला जा रहा है।” ज्योति के ट्वीट से ऐसा लग रहा है जैसे वो चाहती थीं कि भारत अफगानिस्तान को आसानी से जीतने दे दे। शायद वो ये नहीं जानतीं कि भले ही भारत और अफगानिस्तान एक दूसरे के अच्छे पड़ोसी देश हैं, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि एक टीम दूसरे टीम को आसानी से जीतने दे। खेल में कोई भी टीम जीत की मंशा से मैदान पर उतरता है और आखिरी गेंद तक जीतने की कोशिश करता है।

यहाँ पर ये पेचीदा सा लगता है कि लिबरल्स जहाँ एक ओर राजनीति को खेल से बाहर रखने की बात करते हैं, वहीं भारत-अफगानिस्तान मैच में उनके लिए ये सब मायने रखता है। मल्होत्रा ने भारतीय कप्तान विराट कोहली पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें अफगानी टीम से ये सीखना चाहिए कि फाइटर अंत तक हार नहीं मानते हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय क्रिकेटरों को स्पोर्ट्समैनशिप सिखाने के लिए अफगानी क्रिकेटर नबी का शुक्रिया भी अदा किया।

हालाँकि, लोग वास्तव में ये नहीं जान पा रहे हैं कि ज्योति किस बात पर नाराज थीं। उनके ट्वीट से केवल ये अनुमान लगाया जा सकता है कि उनको विराट कोहली के आक्रामक खेल से दिक्कत है और उसी को वो बुरी खेल भावना बता रही हैं। उन्होंने शमी के हैट्रिक लेने पर भी ट्वीट करते हुए लिखा कि अब क्या होगा। इससे पहले भी जब भारत ने पाकिस्तान को हराया था, तो कई लिबरल्स चाहते थे कि पाकिस्तान जीते, वो भी सिर्फ इसलिए कि वो ‘अति-राष्ट्रवाद’ को हारते हुए देखना चाहते थे।

CPM नेता के बेटे के ख़िलाफ़ बलात्कार का मामला दर्ज, पिता ने कहा: हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं

मुंबई पुलिस ने केरल सीपीएम के राज्य सचिव कोडियेरी बालाकृष्णन के बेटे बिनॉय बालाकृष्णन के ख़िलाफ़ बलात्कार और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। शनिवार (22 जून) को कोडियेरी बालाकृष्णन ने इस मामले पर शर्मनाक बयान देते हुए कहा, “पार्टी या मैं अपने परिवार के सदस्यों की ग़लतियों की ज़िम्मेदारी नहीं ले सकते… उसे (बिनॉय को) अपने किए का परिणाम ख़ुद ही भुगतना पड़ेगा।”

राज्य सचिव बालाकृष्णन ने इस आरोप से भी इनकार किया कि उनके परिवार ने 33 वर्षीय महिला से संपर्क किया था जिसकी शिक़ायत पर मुंबई पुलिस ने मार्क्सवादी नेता के बड़े बेटे बिनॉय बालाकृष्णन के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है।

कोडियेरी बालाकृष्णन ने तिरुवनंतपुरम में संवाददाताओं से कहा, “जाँच में सच्चाई सामने आ जाएगी। मेरी पार्टी या मैं आरोपित की सुरक्षा या मदद करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं करेंगे। बिनॉय एक वयस्क युवक है, जो अपने परिवार के साथ अलग रह रहा है। यह उसकी ख़ुद की ज़िम्मेदारी है कि वो ख़ुद को कैसे निर्दोष साबित करे। मैं इस मुद्दे में कोई हस्तक्षेप नहीं कर रहा हूँ।”

उन्होंने शनिवार को संवाददाताओं से कहा कि वह अपने बेटे के ठिकाने को नहीं जानते हैं और पिछले कुछ दिनों से उन्होंने उसे देखा भी नहीं है। जब पत्रकार उनसे सवालों के जवाब के लिए अड़े रहे, तो उन्होंने कहा कि वो कोई मुंबई पुलिस के अधिकारी नहीं हैं।

मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR के अनुसार, महिला ने दावा किया कि मिस्टर बिनॉय ने उससे शादी करने का वादा किया था, लेकिन सालों बाद उसे पता चला कि वह पहले से ही शादीशुदा है। महिला ने दावा किया कि मिस्टर बिनॉय और उनका एक 8 साल का बेटा है।

बिनॉय बालाकृष्णन की अग्रिम ज़मानत सोमवार (24 जून) को होने की संभावना है। कुछ महीने पहले, उन्होंने शिक़ायतकर्ता के ख़िलाफ़ कन्नूर पुलिस स्टेशन में कथित रूप से ब्लैकमेल किए जाने के संदर्भ में शिक़ायत दर्ज की थी।ख़बर के अनुसार, इस मामले की जाँच के लिए पिछले कुछ दिनों से मुंबई पुलिस की एक टीम केरल में मौजूद है। हालाँकि, पुलिस कथित तौर पर आरोपित बिनॉय से संपर्क नहीं कर पाई है। मामले की जाँच कर रहे अधिकारियों के सामने पुलिस ने बिनॉय को एक नोटिस गुरुवार (20 जून) को भेजा, जिसमें उन्हें 72 घंटे के भीतर पेश होने को कहा गया।

बालाकोट के बाद वो लड़ाई जो भारतीय नौसेना ने लड़ी: कहानी गायब पाकिस्तानी सबमरीन की

बालाकोट में भारतीय वायुसेना द्वारा एयर स्ट्राइक किए जाने के बाद कई ऐसी घटनाएँ हुईं, जो आमजनों की नज़र से तो दूर रहीं लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में इन घटनाओं ने भारत की रणनीति पर असर डाला। पुलवामा हमले के तुरंत बाद भारत ने अपनी नौसेना को उस दौरान चल रही एक एक्सरसाइज से हटा लिया और इसे पाकिस्तान नियंत्रित जलक्षेत्र के आसपास लगा दिया। इसमें न्यूक्लियर कन्वेंशनल सबमरीन्स भी शामिल थे। भारतीय नौसेना के इस आक्रामक एक्शन से पाकिस्तान को ऐसा लगा था कि भारत पानी के रास्ते कोई कार्रवाई कर पुलवामा में वीरगति को प्राप्त 40 जवानों का बदला ले सकता है।

भारत ने पाकिस्तान की सेना के क्रियाकलापों पर कड़ी नज़र रखी थी लेकिन फिर भी हमारी वायुसेना ने पाया कि पाकिस्तान का सबसे एडवांस सबमरीन पीएनएस साद अचानक से गायब हो गया। पीएनएस साद अगोस्टा क्लास सबमरीन है। दरअसल, ऐसा पाकिस्तान ने जानबूझ कर किया था। पाक ने ‘Air Independent Propulsion’ तकनीक का प्रयोग कर के ऐसा किया था। इस तकनीक का प्रयोग कर के कोई एडवांस सबमरीन किसी नॉर्मल सबमरीन के मुक़ाबले काफ़ी ज्यादा देर तक पानी के भीतर रह सकता है। इसके बाद भारतीय नौसेना पाकिस्तान द्वारा किसी भी प्रकार की कार्रवाई की संभावना को लेकर ख़ुद को तैयार कर रही थी।

एएनआई में अजीत के दूबे के लेख के अनुसार, कराची में जिस आखिरी लोकेशन से पीएनएस साद गायब हुआ था, वहाँ से उसे गुजरात के तटीय स्थल तक पहुँचने में 3 दिन लगते और अगर वो मुंबई स्थित वेस्टर्न फ्लीट के मुख्यालय तक पहुँचने की चेष्टा करता तो उसे 5 दिन लगते। अगर सच में ऐसा होता तो यह देश की सुरक्षा के लिए ख़तरा हो सकता है, इसीलिए नौसेना ने सभी तैयारियाँ शुरू कर दी थीं। एंटी-सबमरीन वारफेयर स्पैशलिस्ट वॉरशिप्स और एयरक्राफ्ट्स को तैनात कर दिया गया था, ताकि गायब पाकिस्तानी पीएनएस साद की स्थिति का पता लगाया जा सके।

जहाँ-जहाँ उसके जाने की आशंका थी, वहाँ-वहाँ नौसेना ने नज़र रखनी शरू कर दी। अगर उसने भारतीय जलक्षेत्र में प्रवेश किया (ऐसा सोच कर) तो उसे बाहर लाने के लिए हरसंभव कार्रवाई की गई। गुजरात और महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों पर ख़ास निगरानी रखी गई। स्कॉर्पीन क्लास सबमरीन आईएनएस कलवरी को भी इस कार्य के लिए लगाया गया और नौसेना ने हर वो कोशिशें की, जिससे पाकिस्तान को एहसास हो जाए की भारतीय जलक्षेत्र में उसने कोई भी गड़बड़ी की तो उसे उसका खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा। पीएनएस साद को खोजने के लिए सैटेलाइट्स का भी प्रयोग किया गया और जब कुछ दिन बीत गए तब नौसेना को लगा कि इसे पाकिस्तान द्वारा जानबूझ कर छिपाया गया है।

21 दिनों के बाद भारतीय नौसेना ने पीएनएस साद को पाकिस्तान के पश्चिमी क्षेत्र में लोकेट किया। इसे पाकिस्तान ने इसीलिए छिपाया था, ताकि बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद उत्पन्न हुई युद्ध वाली परिस्थितियों में सही समय पर इसका प्रयोग किया जा सके। जैसे ही तनाव बढ़ा, भारत ने उत्तरी अरब सागर में 60 वॉरशिप तैनात कर दिए थे, जिसमें एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रमादित्य भी शामिल था। भारतीय नौसेना के आक्रामक रुख से डरे पाकिस्तान ने अपनी नौसेना को मकरन तट तक ही सीमित रखा। उसे खुले समुद्र में निकलने की हिम्मत ही नहीं हुई। ये वो ‘लड़ाई’ थी, जो दुनिया की नज़रों से परे चली।

सिद्धू, राजनीति छोड़ो: पंजाब में लगे पोस्टर, ‘गुरू’ की मुश्किलें बढ़ीं

लुधियाना की जनता सिद्धू को उनका वादा याद दिला रही है। जब स्मृति ईरानी ने दूसरी बार अमेठी के राजनीतिक अखाड़े में राहुल गाँधी को चुनौती दी थी तो कॉन्ग्रेस नेता और पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने उनकी खिल्ली उड़ाते हुए कहा था कि अगर वह (स्मृति) राहुल गाँधी को हरा ले गईं तो सिद्धू राजनीति छोड़ देंगे। अब लुधियाना की पखोवाल रोड पर उन्हें अपना ‘वचन’ निभाते हुए इस्तीफा देने की माँग करने वाले पोस्टर लगने लगे हैं।

अप्रैल में रायबरेली में सिद्धू ने चुनौती दी थी कि अगर अमेठी के गढ़ में स्मृति राहुल गाँधी को हरा दें तो वह (सिद्धू) राजनीति छोड़ देंगे। और अब पोस्टरों पर लिखा जा रहा है, “आप राजनीति कब छोड़ रहे हैं? अपने शब्दों पर टिके रहने का समय आ गया है। हम आपके इस्तीफे का इंतज़ार कर रहे हैं।” हालाँकि यह साफ नहीं हो पाया है कि यह पोस्टर किसने सड़क से लगी दीवारों पर चिपकाए हैं। इससे पहले मोहाली में भी ऐसे पोस्टर सामने आ चुके हैं।

सिद्धू को हाल ही में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने स्थानीय सरकार, पर्यटन, सांस्कृतिक मामले और म्यूज़ियम जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों से हटा कर ऊर्जा एवं नवीन ऊर्जा स्रोत मंत्रालयों का प्रस्ताव दिया था। इसे उनके पर कतरे जाना माना जा रहा था। लेकिन दो हफ्ते बीत जाने के बाद भी सिद्धू ने अब तक इस मंत्रालय का प्रभार नहीं संभाला है। माना जा रहा है कि उनकी माँग इस मंत्रालय के साथ प्रदेश कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष बनाए जाने की है।

‘एसपी मुखर्जी ने इस्लामिक अध्ययन शुरू करवाया था, आज की BJP को देखकर आत्महत्या कर लेते’

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि के अवसर पर पश्चिम बंगाल के तृणमूल कॉन्ग्रेस मंत्री शोभनदेब चटर्जी ने एक सभा का आयोजन कर बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर आज डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जीवित होते तो वो बीजेपी की आज की राजनीति को देखकर आत्महत्या कर लेते। वे भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे।

इंडिया टुडे टीवी से हुई बातचीत में चटर्जी ने कहा, “बीजेपी अपनी विभाजनकारी राजनीति के अनुकूल डॉ मुखर्जी को एक स्थानीय सांप्रदायिक नेता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है। मुखर्जी बंगाल के एक महान पुत्र थे, जिन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर के रूप में इस्लाम का अध्ययन शुरू करवाया था और इसलिए उनकी वास्तविक विरासत को लोगों के बीच उजागर किया जाना चाहिए। अगर आज मुखर्जी जीवित होते तो उन्हें बीजेपी की राजनीति पर शर्म आती।”

इसके आगे उन्होंने कहा, “आज जिस तरह की विभाजनकारी राजनीति बीजेपी कर रही है, उससे श्यामा प्रसाद मुखर्जी बेहद आहत होते और शायद वो आत्महत्या कर लेते। वह भारत में ऐसी राजनीति कभी नहीं करना चाहते थे। मुखर्जी ने जिस हिंदू धर्म की बात की थी वह हर किसी को साथ लेकर चलने वाला था। हिंदू धर्म का कोई भी व्यक्ति बीजेपी की संकीर्ण राजनीति को नहीं अपना सकता है।”

इससे पहले, बीजेपी ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि के अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधा था। बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने नेहरू द्वारा श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत की जाँच का आदेश नहीं देने के फैसले पर सवाल उठाया था।

बंगाल में टीएमसी सरकार दूसरी बार डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती और पुण्यतिथि आधिकारिक रूप से मना रही है। बंगाल के मंत्री शोभनदेब चटर्जी ने सरकार की ओर से कोकरताल श्मशान में मुखर्जी की प्रतिमा के समक्ष श्रद्धांजलि अर्पित की।

‘जनता की माँग के बावजूद नेहरू ने नहीं कराई डॉक्टर मुखर्जी की संदिग्ध मृत्यु की जाँच’

भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की संदिग्ध मृत्यु की जाँच नहीं होने दी। मुखर्जी नेहरू कैबिनेट में इंडस्ट्री एवं सप्लाई मंत्री का कार्यभार संभाल चुके थे। जून 23, 1953 को श्रीनगर में उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। आज रविवार (जून 23, 2019) को उनकी पुण्यतिथि के मौके पर नड्डा ने कहा कि पूरा देश चाहता था कि उनकी मृत्यु की जाँच हो, लेकिन नेहरू ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि नेहरू ने जनता की माँग नहीं मानी लेकिन भाजपा उनके बलिदान को कभी नहीं भूलेगी।

बता दें कि इस बार पश्चिम बंगाल सरकार ने भी डॉक्टर मुखर्जी की पुण्यतिथि को मनाने का निर्णय लिया है। ममता बनर्जी ने यह निर्णय लिया कि राज्य सरकार उनकी पुण्यतिथि मनाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के एक अधिकारी का मानना है कि तृणमूल को समझ में आ गया है कि देश में हिंदुत्व से जीतने के लिए बंगाली पहचान काफ़ी नहीं है, इसलिए वह अब डॉक्टर मुखर्जी को अपना नेता बताने की कोशिश कर रही है। कोलकाता के केयोरतला बर्निंग घाट पर केंद्र सरकार द्वारा डॉक्टर मुखर्जी की पुण्यतिथि मनाई गई व उनके बलिदान को याद किया गया।

जुलाई 6, 1901 को कोलकाता में जन्में मुखर्जी समूचे जम्मू कश्मीर को बिना किसी शर्त भारत का सम्पूर्ण और अभिन्न अंग बनाने की वकालत करते रहे थे। वे अनुच्छेद 370 को हटाने के लिए संघर्ष करते रहे थे। 1953 में जब वे जम्मू कश्मीर की यात्रा पर निकले, तब उन्हें नज़रबंद कर लिया गया था और उसी दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई थी। मुखर्जी ने नेहरू से विवाद होने व जम्मू कश्मीर पर कॉन्ग्रेस से अपनी राय अलग होने के कारण पार्टी से दूरी बना ली थी। उस समय शेख अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर के प्रधानमंत्री थे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी कह चुके हैं कि मुखर्जी नेहरू और अब्दुल्ला के ‘षड्यंत्र’ का शिकार हुए।

जनसंघ के संस्थापक मुखर्जी को भाजपा के अभिभावक के रूप के देखा जाता है क्योंकि जनसंघ ने ही बाद में जाकर भारतीय जनता पार्टी का रूप लिया। मुखर्जी व दीन दयाल उपाध्याय को भाजपा के वैचारिक स्तम्भ के रूप में देखा जाता है और पार्टी उनके आदर्शों पर चलने की बात कहती है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी डॉक्टर मुखर्जी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

’44 AC, 108 पंखे, 464 फैंसी लाइट्स, 35 क़ीमती सोफे: तेजस्वी ने सरकारी फंड से बंगले पर ख़र्च किए करोड़ों’

बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के उप-मुख्यमंत्री रहते अपने आवास के लिए किए गए इंतजाम बिहार की राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन रहे हैं। कहा जा रहा है कि देशरत्न मार्ग पर स्थित बंगले में तेजस्वी ने सुख-सुविधा के साजो-सामान पर बेहिसाब ख़र्च किए। उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने अपने द्वारा लगाए उन आरोपों को दुहराया है, जिसमें उन्होंने तेजस्वी के बेहिसाब ख़र्चे को लेकर सवाल खड़े किए थे। मोदी का कहना है कि तेजस्वी ने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए ये ख़र्चे किए। उन्होंने दावा किया कि तेजस्वी ने ब्रिज कंट्रक्शन कॉर्पोरेशन से अपने घर में 50 लाख रुपए के फर्नीचर फिट करवाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि अपने आवास नवीकरण में भी तेजस्वी ने करोड़ों ख़र्च किए।

बिहार भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सुशील कुमार मोदी ने आँकड़ों सहित इन चीजों को गिनाते हुए कहा, “किस नियम के तहत तेजस्वी ने अपने घर में 44 AC (जिनमें से कुछ बाथरूम में भी थे), 35 क़ीमती लेदर सोफे, 464 फैंसी LED लाइट्स, 108 पंखे, क़ीमती बिलियर्ड्स टेबल, दीवालों पर महँगी लकड़ियों के पैनल और इम्पोर्टेड ग्रेनाइट फ्लोरिंग- यह सब लगवाए?” सुशील मोदी ने कहा कि तेजस्वी द्वारा अपने घर में 7 सितारा होटल जैसी सुविधाएँ लगवाने के कारण ही बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट को मंत्रियों द्वारा इस तरह के ख़र्चे को रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी करना पड़ा, ताकि भविष्य में ऐसा न हो।

सुशील मोदी ने कहा कि अगर तेजस्वी ने अपने बंगले पर बेहिसाब ख़र्चे नहीं किए होते तो शायद सुप्रीम कोर्ट को उन पर बंगला खाली करने के लिए 50,000 का जुर्माना नहीं लगाना पड़ता। हालाँकि, बीसीडी के मुख्य सचिव चंचल कुमार ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा कि बीसीडी द्वारा जारी किए गए फंड्स को विभिन्न चीजों के लिए विभिन्न समय ख़र्च किया गया। उन्होंने दावा किया कि जारी किए गए बजट से ज्यादा ख़र्चे नहीं किए गए। उन्होंने कहा कि अगर इन सारे रुपयों को एक साथ ख़र्च किया गया होता तो इसके लिए कैबिनेट या वित्त विभाग की अनुमति लेनी पड़ती। चंचल कुमार ने कहा कि इस सम्बन्ध में कोई जाँच नहीं बैठाई गई है।

बता दें कि चंचल कुमार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भी मुख्य सचिव हैं। मुख्यमंत्री के विश्वस्त माने जाने वाले चंचल कुमार पिछले कई वर्षों से इसी पद पर बने हुए हैं। चंचल द्वारा तेजस्वी को क्लीन चिट देने के पीछे नीतीश कुमार और भाजपा के बीच कड़वाहट के रूप में भी देखा जा रहा है। तेजस्वी का देशरत्न मार्ग पर स्थित बंगला मुख्यमंत्री नीतीश के आधिकारिक निवास के बगल में ही स्थित था। ये बंगला तेजस्वी को उप-मुख्यमंत्री रहते जनवरी 2016 को आवंटित किया गया था। भाजप-जदयू की फिर से सरकार बनने के बाद 2017 में इस बंगले को सुशील मोदी को आवंटित किया गया।

तेजस्वी यादव इस बंगले को खाली करने के लिए तैयार नहीं थे और मामला अदालत तक पहुँचा था। अंततः, सुप्रीम कोर्ट ने तेजस्वी पर जुर्माना लगाते हुए उन्हें इस बंगले को खाली करने का आदेश दिया था। उससे पहले पटना हाईकोर्ट ने भी उन्हें बंगला खाली करने का आदेश दिया था लेकिन तेजस्वी उस निर्णय के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए थे।