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जौनपुर की एक दरगाह से 17 साल की पूनम और 13 साल की पिंकी लापता, परिवार को मौलवी पर शक़

एक चौंकाने वाली घटना में, जौनपुर ज़िले के केराकत कोतवाली क्षेत्र के कढ़रा गाँव की दलित बस्ती की दो किशोरियाँ 27 जून, 2019 को एक दरगाह से लापता हो गईं। परिवार को अपनी बच्चियों के लापता होने में मौलवी पर संदेह है।

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में पुलिस थाना कोतवाली के तहत अहियापुर इलाक़े में मौला बाबा मज़ार पर महेंद्र की बेटी पूनम (17) अपनी माँ गुड्डी देवी के साथ दरगाह में दुआ माँगने के लिए गईं थी। गुड्डी देवी की भतीजी, पिंकी (13) भी उनके साथ गई थीं।

दुआ माँगने के बाद दोनों लड़कियाँ अचानक लापता हो गईं। मज़ार क्षेत्र में और उसके आसपास बड़े पैमाने पर उनकी तलाश के बावजूद, गुड्डी देवी उनका पता नहीं लगा सकीं। लापता होने के बाद इन लड़कियों के मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ़ हो गए।

गुड्डी देवी ने घर वापस जाकर अपने परिवार के सदस्यों को यह घटना सुनाई। परिजनों ने जन सुनवाई ऐप के माध्यम से जौनपुर पुलिस को इस घटना से अवगत कराया।

जन सुनवाई ऐप उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा शुरू किया गया एक मोबाइल ऐप है, जहाँ नागरिक अपनी शिक़ायतें और सुझाव दर्ज कर सकते हैं। यह यूज़र्स के अनुकूल इंटरफेस उत्तर प्रदेश सरकार के जन सुनवाई (IGRS) पोर्टल से जुड़ा है। इस ऐप के माध्यम से की गई हर शिक़ायत को ट्रैक भी किया जा सकता है।

एसपी बिपिन कुमार मिश्रा को लिखे पत्र के अनुसार, लड़कियों के अपहरण के पीछे परिवार ने मौला बाबा मज़ार के मौलवी पर संदेह जताया। उन्हें लगता है कि दरगाह के मौलवी की साज़िश से किशोरियों का अपहरण कर लिया गया है। डरे-सहमे परिजनों ने पुलिस अधीक्षक से किशोरियों की जान व इज्जत बचाने के लिए प्रभावी क़दम उठाए जाने का आग्रह किया।

इस बीच, जौनपुर पुलिस ने इस शिकायत को स्वीकार किया और बताया कि लापता लड़कियों की तलाश के लिए एक टीम का गठन किया गया है।

इस तरह की घटनाएँ नई नहीं हैं। पिछले महीने, हैदराबाद के बोरबंडा इलाक़े में घर से बुरी शक्तियों को बाहर करने के बहाने आज़म नाम के एक स्वयंभू मुस्लिम धर्मगुरू को एक लड़की के साथ बार-बार बलात्कार करने के ज़ुर्म में पकड़ा गया। पिछले साल सितंबर में, आसिफ़ ख़ान उर्फ ‘आशु महाराज’ के ख़िलाफ़ एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार करने के ज़ुर्म में POCSO की धारा-376 और संबंधित धाराओं के तहत लोगों को धोखा देने का मामला दर्ज किया गया था।

हजर खान का लव जिहाद: अप्राकृतिक सेक्स के लिए प्रताड़ित कर धर्म बदल चुकी बीवी से करवाता था गैंगरेप का झूठा केस

गुरुग्राम में बुधवार (जुलाई 3, 2019) को पुलिस ने 44 वर्षीय हजर खान को गिरफ्तार किया। हजर पर आरोप है कि वह अपनी 22 वर्षीय पत्नी पर जबरन दबाव बना रहा था कि वह गुरुग्राम अदालत के न्यायाधीश सहित कई लोगों पर यौन उत्पीड़न का झूठा आरोप लगाए, ताकि हजर उन लोगों से पैसे निकलवा सके।

लेकिन, हजर के मनसूबों का खुलासा उस समय हुआ जब उसकी पत्नी जिला और सत्र न्यायाधीश के ख़िलाफ़ उत्पीड़न की शिकायत करने थाने पहुँची। यहाँ काउंसलिंग के दौरान महिला ने स्वीकार लिया कि उसका पति न्यायाधीश के ख़िलाफ़ झूठा आरोप लगाने का दबाव बना रहा है। साथ ही इस बात का भी खुलासा किया कि वह इससे पहले भी लोगों को झूठे आरोप में फँसाने के लिए उसे धमका चुका है।

पुलिस के मुताबिक महिला ने बताया है कि हजर राजस्थान का रहने वाला है और वह उससे 2016 में मिली थी। इस दौरान वह प्राइवेट अस्पताल में नर्स के रूप में कार्यरत थी। हजर ने उसे खुद की पहचान एक डॉक्टर के रूप में बताई और जल्द ही उससे दोस्ती करके, उसे प्रपोज़ भी कर दिया। 2017 में उसने महिला को धर्मांतरण के लिए फोर्स किया और उससे निकाह कर लिया।

मीडिया खबरों के मुताबिक महिला का आरोप है कि हजर खान शादी के कुछ दिन बाद से ही उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगा था। इस दौरान हजर न उसे मारता-पीटता था बल्कि अप्राकृतिक सेक्स करने के लिए भी प्रताड़ित करता था।

महिला ने बताया है कि हत्या की कोशिश में चार महीने की जेल गुजारने वाला हजर 2018 से उसका इस्तेमाल लोगों को फँसाने के लिए करता था। जल्दी पैसे कमाने की चाहत में वह उससे बलात्कार के झूठे मामले दर्ज कराने को कहता था। जिसके चलते 1 मई को महिला ने रेवाड़ी के आठ लोगों पर गैंगरेप का आरोप लगाया था और बाद में सुलह के लिए पैसे की माँग की थी। इसके बाद में 29 जून को महिला ने न्यायाधीश के सामने मानेसर के 4 लोगों पर एक और गैंग रेप का आरोप लगाया था।

लेकिन इस बार जब वह अपने बयान को दर्ज करवाके पति के पास लौटी तो हजर ने गाड़ी में पूछा कि बयान दर्ज कराने में इतना समय क्यों लगा? और फिर उस पर आरोप लगाने लगा कि वो न्यायाधीश के साथ सोई है। नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक 1 जुलाई को वह उसे चंडीगढ़ ले गया और मारपीट कर जबरन एक वकील के पास बैठकर मैजिस्ट्रेट पर रेप का आरोप लगाते हुए शिकायत लिखवाई। उस शिकायत में लिखवाया कि बयान दर्ज करते समय मैजिस्ट्रेट ने रेप किया। फिर शिकायत पर जबरन साइन करवा लिए। महिला ने विरोध किया तो उसने उसकी बेटी को मारने की धमकी दी।

जानकारी के मुताबिक हजर पर केस दर्स हो चुका है और उसे गिरफ्तार भी कर लिया गया है। महिला ने पुलिस को दिए अपने बयान में स्पष्ट किया है कि उसके पति हजर को छोड़कर उसका रेप किसी ने नहीं किया है। अन्य लोगों को सिर्फ़ झूठे आरोप में फँसाया जा रहा था।

सोते वक्त 2 बेटियों से की छेड़खानी, विरोध करने पर निज़ाम, रियाज़, महताब और आफ़ताब ने माँ को मार डाला

उत्तर प्रदेश के भदोही ज़िले में एक महिला को बुरी तरह से पीट-पीटकर हत्या करने का चौंका देने वाला मामला सामने आया है। मामला भदोही ज़िले के औराई थाना क्षेत्र का है, जहाँ लड़कियों को छेड़ने का विरोध करने पर बिलिकिस बेगम (45 वर्षीय) पर कुछ लोगों ने लाठी से हमला बोल दिया। इस हमले में पाँच अन्य के घायल होने की भी ख़बर है।

ख़बर के अनुसार, औरंगाबाद में मंगलवार (2 जुलाई 2019) की रात पुरानी रंजिश को लेकर हुई मारपीट के बाद तनावग्रस्त परिजनों और ग्रामीणों ने मुआवज़ा और आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए हाईवे पर जाम लगा दिया। मौक़े पर पहुँचे उप जिलाधिकारी जीपी यादव और पुलिस क्षात्राधिकारी यादवेंद्र के काफ़ी समझाने-बुझाने के बाद मामला शांत हुआ। पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ़्तार भी कर लिया।

दरअसल, औराई कोतवाली क्षेत्र के औरंगाबाद निवासी मुदस्सिर और आफ़ताब के बीच पुरानी दुश्मनी थी। मंगलवार की रात गर्मी और उमस के चलते मुदस्सिर की दो बेटियाँ बाहर सो रही थीं। लड़कियों को सोता देख महताब और आफ़ताब ने उन पर फब्तियाँ कसनी शुरू कर दी। मुदस्सिर के लड़के मुजैइयम ने इस बात पर एतराज उठाया तो उनके बीच मारपीट शुरू हो गई। चीख-पुकार सुनकर उसकी माँ बिलिकिस बेगम बीच-बचाव करने पहुँची। विरोध करने पर आफ़ताब, महताब, निज़ाम और रियाज़ ने मुदस्सिर के घर में घुसकर पूरे परिवार पर लाठियाँ बरसाईं। इस बीच मुजैइयम, सफ़ीरुन, जन्नत और साफ़िया गंभीर रूप से घायल हो गए। आनन-फ़ानन में घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

पुलिस अधीक्षक राजेश एस के अनुसार, हमले में मुदस्सिर की बीवी बिलिकिस बेगम के सिर पर लाठियाँ लगने से वो गंभीर रूप से घायल हो गईं और उन्हें वाराणसी के लिए रेफर किया गया, जहाँ बुधवार की सुबह उनकी मौत हो गई। उन्होंने इस बात की भी जानकारी दी कि इस हमले में पाँच लोग घायल हुए हैं। आरोपित निज़ाम और उसके लड़के रियाज़ को गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया गया है। दो अन्य फ़रार (आफ़ताब, महताब) आरोपितों की तलाश जारी है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में तनाव के चलते अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

RSS मानहानि मामला: 15000 रुपए के मुचलके पर राहुल गाँधी को बेल, बोले – मैं निर्दोष

आरएसएस मानहानि मामले में कॉन्ग्रेस पार्टी के सांसद और पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गाँधी को जमानत म‍िल गई है। गुरुवार (4 जुलाई, 2019) को मुंबई की शिवड़ी कोर्ट ने उन्हें जमानत दी।

शिवड़ी कोर्ट में सुनवाई के दौरान राहुल गाँधी ने कहा कि वह दोषी नहीं हैं। कोर्ट ने राहुल गाँधी को 15000 रुपए के मुचलके पर बेल दी। कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्‍यक्ष की तरफ से पूर्व सांसद एकनाथ गायकवाड़ ने बेल बॉन्ड भरा।

आपको बता दें कि आरएसएस से जुड़ा मानहानि का यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या से संबंधित है। राहुल गाँधी ने 2017 में गौरी लंकेश की हत्या को RSS की विचारधारा से जुड़ा और प्रभावित बताया था। इसी मामले में उन पर यह केस दर्ज हुआ था।

राहुल गाँधी के मुंबई आगमन और कोर्ट पहुँचने के बीच कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। उनके समर्थन में जुटी भीड़ चिल्ला रही थी – आपकी लड़ाई में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता साथ हैं।

जायरा ने सिनेमा छोड़ा, मैंने अपनी कला जलाई, आखिरकार कश्मीरी जीत गए: कश्मीरी मॉडल

जायरा वसीम का यूँ मजहब का हवाला देकर बॉलीवुड को अलविदा कहना हर किसी को खटक रहा है। कुछ लोग इसे उनका निजी फैसला कहकर शांत हैं, तो कुछ लोगों के लिए यकीन कर पाना अब भी मुश्किल है कि कोई मजहब की वजह से अपने पूरे करियर को कैसे दाँव पर लगा सकता है? कोई नहीं जानता उनके इस फैसले के पीछे मजहब ही वास्तविक कारण है, या फिर मजहब के ठेकेदार। लेकिन एक बात निश्चित है कि उनके इस फैसले से कई लोग हताश हैं। जिनमें एक नाम कश्मीरी कलाकार सईद रुहानी का भी है। जिन्हें जायरा के फैसले में खुद की आपबीती याद आ गई।

रुहानी ने रवीना टंडन जैसे सेलीब्रेटियों की तरह जायरा पर अपना गुस्सा नहीं उतारा है, लेकिन उन्होंने कश्मीरियों पर चोट जरूर की है। उन्होंने जायरा वसीम का हवाला देकर लिखा, “एक और ने मान ली हार ..जायरा वसीम। तो कश्मीरी दिमाग को काबू करने में कामयाब हो गए हैं। जबरदस्ती भरा व्यवहार….वल्लाह!”

इंडिया टुडे को दिए अपने एक साक्षात्कार में रुहानी ने इस मुद्दे पर बात करते हुए बताया कि उन्हें जायरा से सहानुभूति है। क्योंकि वह भी उस राह पर चल चुकी हैं जहाँ उन्हें सिर्फ़ मजहब के कारण अपनी कला छोड़नी पड़ी थी। वह कहती हैं कि हर कोई इतना प्रतिभाशाली नहीं होता, लेकिन जायरा हैं।

रुहानी का कहना है कि जायरा ने बॉलीवुड छोड़ा क्योंकि शायद उन्हें ग्लानि महसूस होनी शुरू हो गई थी, जिसके पीछे का कारण सामाजिक प्रभाव है। उनका मानना है कि आस-पास का समाज हम पर इस प्रकार से असर डालता है कि यकीन होने लगता है कि हम अपने अल्लाह से दूर जा रहे हैं। वे बताती हैं कि वह खुद इस रास्ते पर जाकर अपने चार साल के काम को जला चुकी हैं।

उनके मुताबिक, हो सकता है कि जायरा ने अपना फैसला खुद लिया है, तो उन्होंने अपनी राह मोड़ ली हो, लेकिन रुहानी के लिए यह उनका रास्ता नहीं था। उनके लिए अपनी प्रतिभा को छोड़ना किसी चरम स्थिति से कम नहीं था, जहाँ उन्होंने कला त्यागकर खुद को भी खो दिया था। रुहानी का मानना है कि जायरा का फैसला कई हद तक समाज से प्रभावित होकर लिया गया है, जैसे उनका खुद का निर्णय भी लोगों की सुना-सुनी में ही लिया गया था।

अपने जीवन का एक लंबा समय कश्मीर में गुजारने के बाद रुहानी जानती हैं कि ‘समाज का प्रभाव’ किसी भी व्यक्ति के निर्णय को कैसे बदलता है, क्योंकि उन्होंने इसे बहुत करीब से महसूस किया है। आज खुद को एक कलाकार, कवियित्री और मॉडल के रूप में पहचान दिलाने वाली रुहानी कहती हैं कि उन्हें उनके काम की वजह से बहुत धमकियाँ मिलीं। कुछ लोगों ने यहाँ तक कहा कि वह अपने काम के कारण मरेंगी, जिस वजह उन्होंने हमेशा अंडर ग्राउंड रहकर काम किया।

अपने इस साक्षात्कार में रुहानी ने सपनों की उड़ान भरने के दौरान और समाज से प्रभावित होने के वक्त जो फर्क़ महसूस किया, उसके बारे में भी बताया है। उन्होंने कहा, “जब मैंने मॉडलिंग शुरू की, तो मैंने देखा कैसे लोग मुझे ट्रीट कर रहे हैं कि मुझे अच्छा लग रहा है, जबकि दूसरी ओर मदरसे में मुझे मारा जाता था, मुझे गाली दी जाती थी, मेरे साथ गलत बर्ताव होता था, और मुझे बंधक बनाकर रखा जाता था, सिर्फ़ इसलिए ताकि मैं अल्लाह के बारे में पढ़-सीख सकूँ।“

रुहानी के अनुभव कहते हैं कि कश्मीर एक ऐसी विचारधारा से चलता है जो समाज से प्रभावित है, जहाँ गृहस्थी संभालना बेहद जरूरी है। लेकिन, ऐसी विचारधारा में बढ़ने के साथ उन्हें अपना काम छोड़कर बिलकुल अच्छा नहीं लगा था, क्योंकि उन्हें अपने ही काम से खुशी मिलती थी। वे कहती हैं कि इस्लाम के अनुसार अश्लीलता हराम है, लेकिन ये कहीं नहीं लिखा कि खूबसूरती भी हराम है और जो वो करती थीं वो खूबसूरती की सूची में आता है।

रुहानी के अनुसार उन्हें उनके काम को छोड़ने के लिए बाहर का हर इंसान बहुत जोर डालाता था, दुकानदार से लेकर पड़ोसी तक ने उनसे बात करनी छोड़ दी थी। और फिर ये सब सिर्फ़ बाहरी समाज में नहीं चला बल्कि स्कूल में भी उन्हें कई सालों तक ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

रुहानी कहती हैं कि इस बीच उन्हें मदरसे में भेजा गया, जहाँ जाकर उन्होंने मौत तक को करीब से देखा। वहाँ उन्हें न केवल उन्हें शारीरिक रूप से आघात पहुँचाया गया बल्कि उन्हें कीड़े खिलाए गए। जिस कारण उन्हें आईसीयू तक में जाना पड़ा। मौत को इतने नजदीक देखकर उन्होंने खुद से वादा किया कि वो दोबारा इस तंत्र में पैर नहीं रखेंगी।

ये वही समय था जब उन्होंने बुर्के से भी आजादी पाने की ठान ली थी। क्योंकि वह इस कट्टर तरतीब से अपना विश्वास खो चुकी थीं। उनका मानना है कि ये मजहब के कट्टर ठेकेदार इस बात तक को नहीं जानते कि बुर्के का पर्याय क्या है।

रुहानी की कहानी एक संघर्ष की कहानी है, जिससे आज की लड़कियों को प्रभावित होना चाहिए, लेकिन ये कहानी ये भी बताती है कि कहीं न कहीं जायरा के बॉलीवुड से अलविदा कहने की वजह वही सब कारक हैं जो रुहानी द्वारा कला को जलाने के पीछे थे। शायद इसलिए ही रुहानी उम्मीद लगाती है कि जिस तरह से वे अपने काम पर वापस लौटीं, उसी तरह जायरा भी लौटेंगी। क्योंकि उनका मानना है एक कलाकार हमेशा कलाकार रहता है।

राज्यसभा चुनाव: अमित शाह गुजरात पहुँचे, विधायकों को लेकर ‘अज्ञात स्थान’ पर भागी कॉन्ग्रेस

आगामी राज्यसभा चुनावों को देखते हुए कॉन्ग्रेस ने अपने विधायकों को किसी ‘सुरक्षित जगह’ पर भेज दिया है। कॉन्ग्रेस ने गुजरात के सभी पार्टी विधायकों को राज्य के उत्तरी क्षेत्र में किसी ख़ास जगह पर रखा है। पार्टी ने अंदेशा जताया है कि विपक्षी पार्टी उसके विधायकों को ख़रीदने की कोशिश कर सकते हैं। विधायकों को पहले तो बस से अम्बाजी ले जाया गया, जिसके बाद सभी को पास ही किसी रिसोर्ट में ठहराने की बात सामने आई है। यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें राजस्थान के माउंट अबू भेजा गया है। लोकसभा चुनाव के दौरान कई विधायकों द्वारा भाजपा का दामन थाम लेने के बाद पार्टी चिंतित है।

कॉन्ग्रेस अपने विधायकों को गँवाना नहीं चाहती और इसीलिए सब पर कड़ी नज़र रखी जा रही है। पार्टी ने यह निर्णय उन मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर लिया है, जिसमें कहा जा रहा था कि कॉन्ग्रेस के कुछ विधायक भाजपा में जा सकते हैं। बता दें कि कॉन्ग्रेस में कई ऐसे विधायक हैं जो राज्य में पार्टी के नेतृत्व से ख़फ़ा चल रहे हैं और राज्यसभा चुनाव के दौरान उनके भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग करने की संभावना है। कॉन्ग्रेस ने चन्द्रिका चुडास्मा और गौरव पंड्या को उम्मीदवार बनाया है।

ज्ञात हो कि केंद्रीय विदेश मंत्री इस जयशंकर को गुजरात से ही राज्यसभा उम्मीदवार बनाया गया है। एक राज्यसभा सीट के लिए एस जयशंकर को उम्मीदवार बनाया गया है, वहीं दूसरे के लिए जुगलजी माथुरजी ठाकोर भाजपा उम्मीदवार होंगे। जेएम ठाकोर उत्तर गुजरात के नेता हैं और उन्हें सामाजिक उत्थान हेतु सक्रियता से किए गए कार्यों को लेकर जाना जाता है। चूँकि गुजरात से राज्यसभा सांसद रहे अमित शाह गाँधीनगर से जीत कर लोकसभा सांसद बन चुके हैं और उसी तरह स्मृति ईरानी अमेठी से कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को हरा कर लोकसभा पहुँच चुकी हैं, गुजरात में इन दोनों की जगह भरी जानी है।

कॉन्ग्रेस नेता आश्विन कोतवाल ने कहा कि भाजपा उनके विधायकों को ख़रीदने की कोशिश कर रही है और हॉर्स ट्रेडिंग से बचने के लिए विधायकों को छिपाया गया है। विधायक अल्पेश ठाकोर भी बाग़ी हो चुके हैं। कॉन्ग्रेस ने अपने विधायकों से कहा है कि वे चुनाव खत्म होने तक सीएम विजय रुपानी, उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल या किसी अन्य मंत्री से न मिलें, भले ही जनता का ही कोई काम क्यों न हो। अगस्त 2017 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान भी कॉन्ग्रेस ने अपने विधायकों को बंगलोर के एक रिसोर्ट में ठहराया था।

उधर कल बुधवार (जुलाई 3, 2019) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी गुजरात में कई नेताओं से मुलाकात की। गुजरात पहुँचे भाजपा अध्यक्ष ने आयकर फ्लाईओवर का उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने गुजरात विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। सरकार में पद संभालने के बाद यह उनकी पहली गुजरात यात्रा है। गाँधीनगर लोकसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं ने भाजपा की बड़ी जीत के लिए अमित शाह का सम्मान भी किया।

बच्चों के बीच झगड़े के बाद किस्मत अली व उसके दर्जन भर लोगों ने महिलाओं को पीटा, पुलिस पर पथराव

बहराइच में बच्चों के बीच हुए विवाद ने तब बड़ा रूप ले लिया, जब इसे लेकर मुस्लिम समाज के लोगों ने लाठी-डंडे से लैस होकर आतंक मचाया। दरअसल, कोतवाली नानपारा क्षेत्र के नूरीपुरवा गाँव में दो बच्चों के बीच कहासुनी हो गई। इस कहासुनी के बाद ‘विशेष समुदाय’ के लोगों ने न सिर्फ़ एक बच्चे के परिवार पर हमला बोल दिया, बल्कि सबकी पिटाई भी की। इस हमले में 6 लोग घायल हुए, जिसमें 4 महिलाएँ हैं। यहाँ भी पत्थरबाज़ी वाला ट्रेंड देखने को मिला और ‘समुदाय विशेष’ के लोगों ने पीड़ितों के घरों पर पत्थरबाज़ी भी की। यहाँ तक कि यूपी पुलिस को भी नहीं बख़्शा गया।

जब घटना की सूचना मिलने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस मौके पर पहुँची, तब पुलिस की गाड़ी पर भी पथराव किया गया। पुलिस ने जब हमलावरों को खदेड़ना शुरू किया तो वे गन्ने के खेतों का फायदा उठा कर भाग निकले। दोनों बच्चों के बीच बुधवार (जुलाई 3, 2019) को विवाद हुआ था। खेल-खेल में हुए इस विवाद को लेकर दोनों बच्चों ने अपने-अपने घरों में एक-दूसरे की शिकायत की। इसके बाद दोनों घरों की महिलाओं में कहासुनी हुई और बात हाथापाई तक भी पहुँची। हालाँकि, ग्रामीणों ने सही समय पर हस्तक्षेप करते हुए मामले को शांत करा दिया।

लेकिन, मामला शांत होने के बाद किस्मत अली दर्जन भर ‘अपने लोगों’ के साथ गाँव में पहुँचा, जिसमें शहीद और गोपासु नामक व्यक्ति भी शामिल था। उन्होंने लाठी-डंडे से लैस होकर तिलकराम के घर धावा बोल दिया। जब तिलकराम के परिजनों ने इसका विरोध किया, तब किस्मत अली व उसके लोगों ने तिलकराम के परिजनों की पिटाई की। महिलाओं तक को भी नहीं छोड़ा गया और उनकी भी पिटाई की गई। इस मामले में किस्मत अली समेत 20 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है।

हालाँकि, पुलिस ने बताया है कि गाँव में अब माहौल सामान्य है और तनाव की कोई स्थिति नहीं है। एएसपी रवींद्र सिंह ने पुलिस की गाड़ी पर पथराव की घटना से भी इनकार कर दिया। जानकारी के अनुसार, ग्रामीण पीड़ित परिजनों को बचाने मौके पर पहुँचे थे लेकिन हमलावरों के सनक को देख कर वे भी सहम गए।

112 अलगाववादी नेताओं के 210 बच्चे विदेश में जी रहे ऐशोआराम की ज़िंदगी, J&K के बच्चों को थमाते हैं पत्थर

जम्मू कश्मीर के अलगाववादी यूँ तो राज्य की कथित स्वतन्त्रता की वकालत करते हैं, आतंकियों की पैरवी करते हैं और विदेशों से करोड़ों रुपयों का चंदा इकट्ठा कर उसे भारत-विरोधी कार्य में लगाते हैं। लेकिन, क्या आप को पता है कि इन अलगाववादियों के बच्चे क्या कर रहे हैं? राज्य की जनता को बरगलाने वाले अलगावादी ख़ुद को उनका हितैषी दिखाते हैं लेकिन अपने बच्चों को विदेश में पढ़ाते हैं। राज्य की शिक्षा व्यवस्था से लेकर चुनावों तक में खलल डालने वाले अलगाववादी जनता को इन सबके ख़िलाफ़ भड़काते हैं लेकिन अपने बच्चों की उच्च शिक्षा सुनिश्चित करते हैं। आइए हम आपको इनकी सच्चाई बताते हैं।

अमर उजाला में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, 112 अलगाववादी नेताओं के 210 बच्चे विदेश में पढ़ रहे हैं। कश्मीर के बच्चों के हाथों में क़िताब की जगह पत्थर देकर उनका भविष्य बर्बाद करने वाले ये अलगावादी ख़ुद के बच्चों के भविष्य को लेकर काफ़ी सजग हैं। 4 हुर्रियत नेताओं के 21 पुत्र, पुत्रियाँ, बहनें और बहुएँ अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, इरान, तुर्की, मलेशिया और पाकिस्तान जैसे देशों में पढ़ाई कर रहे हैं लेकिन यही अलगावादी राज्य के बच्चों का भविष्य अधर में लटका कर रखते हैं। उनके सभी परिजन विदेश में ऐशोआराम की ज़िंदगी जी रहे हैं।

दुख़्तरन-ए-मिल्लत की नेता आसिया अंद्राबी के बेटे ने मलेशिया में पढ़ाई की है और टेरर फंडिंग मामले में गिरफ़्तार ज़हूर वटाली ने उसका पूरा ख़र्च वहन किया था। एनआईए ने इस मामले में अंद्राबी से पूछताछ की। अंद्राबी ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि वह और उनका संगठन विदेश से रुपए जुटाता है और फिर कश्मीर में महिलाओं द्वारा प्रदर्शन कराने के लिए इन रुपयों का इस्तेमाल किया जाता है। हुर्रियत के पुराने नेता सैयद अली शाह गिलानी के बेटे ने पाकिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई की है। इसी तरह कश्मीर की मस्जिदों में धमक रखने वाले अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फ़ारूक़ की बहन राबिया फ़ारूक़ भी डॉक्टर है और अमेरिका में रहती है।

इसी तरह एक अन्य कश्मीरी नेता बिलाल लोन का तो पूरा खानदान ही विदेश में रहता है। जहाँ उनकी बेटी-दामाद लंदन में रहते हैं, उनकी छोटी बेटी ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रही है। मुस्लिम लीग के मोहम्मद यूसुफ मीर और फारूक गतपुरी की बेटियाँ पाकिस्तान में हैं और वहीं पर मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। इन अलगावादियों को पाकिस्तान से फंडिंग भी मिलती रही है, जिस सिलसिले में एनआईए जाँच कर रही है। डीपीएम नेता ख्वाजा फिरदौस वानी का बेटा भी पाकिस्तान में ही रहता है और वह भी मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। तहरीक ए हुर्रियत के अशरफ लाया की बेटी भी पाकिस्तान से ही मेडिकल की पढ़ाई कर रही है।

वाहिदत ए इस्लानी के निसार हुसैन राथर ने अपने बेटे-बेटी को ईरान भेजा हुआ है। तहरीक ए हुर्रियत के अध्यक्ष अशरफ सेहराई के तो दोनों ही बेटे सऊदी अरब में रह रहे हैं और वहाँ ऐशोआराम की ज़िंदगी जी रहे हैं। अमीर-ए-जमात के जीएम भट्ट का बेटा भी सऊदी में ही रहता है और वह डॉक्टर है। डीपीएम के मोहम्मद शफी रेशी का बेटा अमेरिका में पीएचडी की पढ़ाई कर रहा है। जबकि जहूर गिलानी का बेटा सऊदी अरब में रहता है और सऊदी एयरलाइंस में काम कर रहा है।

जब मैं 17 बरस की थी तो पंचोली ने मुझे ड्रग्स दी और मेरा रेप किया: कंगना रनौत

“जब मैं 17 साल की थी तो आदित्य पंचोली ने मेरे ड्रिंक में ड्रग्स मिला दी और बाद में कार में मेरा रेप किया। उसने मेरी तस्वीरें भी ले ली और मुझे ब्लैकमेल करता था।” यह बयान अभिनेत्री कंगना रनौत ने पुलिस को दिया है। इसी बयान के आधार पर बीते हफ्ते मुंबई पुलिस ने अभिनेता-निर्माता आदित्य पंचोली के खिलाफ रेप का मामला दर्ज किया था। यह घटना करीब दशक भर पुरानी है।

मीडिया रिपोर्टो के मुताबिक कंगना ने ढाई पन्ने का बयान 26 जून को वर्सोवा पुलिस स्टेशन में दर्ज कराया था। इसके आधार पर वर्सोवा पुलिस ने अगले दिन सेक्शन 376, 328, 384, 341, 342, 323, 506 के तहत मामला दर्ज किया था।

इससे करीब दो हफ्ते पह​ले कंगना की बहन रंगोली चंदेल ने वर्सोवा पुलिस को ई-मेल भेजकर शिकायत की थी। इसमें रंगोली ने विस्तार से बताया था कि किस तरह पंचोली ने कंगना को शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया।

बाद में पंचोली ने आरोपों को नकारते हुए कहा था कि निजी खुन्नस में कंगना उन्हें कानूनी तौर पर फंसाने की कोशिश कर रही है। रेप के मामले में गिरफ्तारी की आशंका से बचने के लिए उन्होंने कंगना और उनके वकील रिजवान सिद्दिकी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। साथ ही सेशन कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका भी दाखिल की थी। इसके दो दिन बाद दो जुलाई को मुंबई सिटी सिविल ऐंड सेशन कोर्ट के जज एचबी गायकवाड़ ने 30,000 रुपए के निजी मुचलके पर पंचोली को 19 जुलाई तक के लिए अग्रिम जमानत दे दी।

रनौत ने अपने बयान में बताया है कि जब वह 17 साल की थीं तो पंचोली ने उन्हें ड्रग्स दी और उनका रेप किया। बयान में उन्होंने यह भी कहा है कि पंचोली ने ब्लैकमेल करने के लिए उनकी तस्वीरें भी खींची थी। उन्होंने दावा किया था कि 2004-06 में उन्होंने एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी से इसकी शिकायत भी की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

अपने बयान में कंगना ने बताया है कि वह कैसे बॉलीवुड पहुंचीं और पंचोली से मिलीं, जो उस वक्त फिल्म इंडस्ट्री के एक चर्चित नाम थे। उन्होंने लिखा है, “जब मैं आदित्य पंचोली से मिली वह 38 साल का था। मुझसे करीब 22 साल बड़ा। उस वक्त मैं लड़कियों के साथ एक हॉस्टल में रहती थी, जबकि वह शादीशुदा और दो बच्चों का बाप था। उसकी बेटी भी मेरे उम्र की थी।”

बयान में कंगना ने पंचोली पर उनकी ड्रिंक में नशा मिलाने और कार में रेप करने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया है, “2004 मेंं मैं एक पार्टी में उसके साथ गई थी। एक ड्रिंक लेने के बाद मुझे चक्कर आने लगा। मुझे संदेह हुआ कि उसने पंचोली मेरे ड्रिंक में कुछ मिला दिया था। पार्टी समाप्त होने के बाद पंचोली ने कहा कि वह मुझे घर छोड़ देगा। मैं उसके साथ उसके रेंज रोवर कार में चली गई। यारी रोड के बीच में उसने कार रोकी और मेरे साथ जबरदस्ती करने लगा। उसने तस्वीरें भी ली, जिसका मुझे पता नहीं था। जब हम अगली बार मिले तो उसने कहा कि अब हमें पति-पत्नी की तरह रहना चाहिए। मैंने उससे कहा कि वह मेरी पिता की उम्र का है और मैं किसी हमउम्र के साथ शादी करना चाहती हूं। तब उसने मुझे वो सारी तस्वीरें दिखाई जो उसने कार में ली थी और मुझे ब्लैकमेल करने लगा। उसने ये तस्वीरें दूसरों को दिखाने की धमकी दी। उस वक्त मैं युवा थी, मेरा मुंबई में कोई नहीं था और उसने इसका फायदा उठाया।”

रनौत के मुताबिक 2004-06 के बीच पंचोली कई बार उनसे मिला और जबरन शारीरिक रिश्ते बनाने की कोशिश की। एक बार जब वह उसके खिलाफ शिकायत करने के लिए पुलिस स्टेशन जा रही थी तो उसने बीच रास्ते रोककर धमकी दी। एक राहगीर ने उन्हें उससे बचाया। बकौल कंगना, उन्होंने इसकी शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी विपिन भंडारी से मिलकर की थी।

उसने बयान में कहा है, “2004-2005 में मैं अपनी आंटी के पल्लवी अपार्टमेंट में शिफ्ट हो गई। पंचोली हर वक्त उस फ्लैट में अपने दोस्तों के साथ आता और मेरे साथ जबर्दस्ती की कोशिश करता। हर बार वह मेरे ड्रिंक में मिलाने के लिए ड्रग्स लाता था। ड्रिक के बाद मुझे चक्कर आने लगता। जब वह मेरे अपार्टमेंट से जाता तो मुझे अंदर बंद कर देता। वह मुझे प्रताड़ित भी करता था। वह मुझे ड्रग्स देता और मेरी तस्वीरें खींचता। उस वक्त वह एमडीएमए वगैरह का इस्तेमाल करता था।”

अपने बयान में अभिनेत्री ने बताया है कि पंचोली ने उसके वर्सोवा फ्लैट की चाभी का भी जुगाड़ कर लिया था जहां वह 2006-07 में शिफ्ट हुई थी। यहां भी उसने नियमित तौर पर आना और उसे प्रताड़ित करना नहीं छोड़ा।

उससे आजिज आकर 2006-07 में मैंने वर्सोवा में एक फ्लैट खरीदा और अकेले रहने लगी। पंचोली यहां आया और डुप्लीकेट चाभी बना ली। मेरे कमरे में चोरी-छिपे वह घुसा और मुझे प्रताड़ित किया। उसने मेरे घर के सारे सामान तोड़ दिए और वह पूरी तरह नशे में धुत था। उसने मुझसे सारी चाभी छीन ली और मुझे अंदर बंद करके चला गया।

कंगना ने बताया है कि 2008-09 में वह बांद्रा के एक घर में शिफ्ट हो गई और अपनी बहन के साथ रहने लगी। यहां भी पंचोली आने लगा और उनकी बहन को भी प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। उसने कहा है, “मेरी बहन उस वक्त स्वस्थ नहीं थी। पह मेरे पास रहने के लिए आई थी। एक बार जब मैं शूटिंग के लिए बाहर गई तो वह मेरे घर आया और मेरी बहन को बुरी तरह पीटा। घर लौटने पर मैंने अपनी बहन को बदहवास पाया। मैंने उससे पूछा कि क्या हुआ तो उसने बताया कि पंचोली ने उसे बुरी तरह से पीटा है।”

कंगना ने अपने बयान में इस बात का भी उल्लेख किया है कि पंचोली ने उसकी बहन को परेशान नहीं करने के एवज में एक करोड़ रुपए की मांग की थी। उसने कहा, “उसने एक करोड़ की मांग की। मैंने उसे 50 लाख रुपए दिए भी और उसने कुछ वक्त के लिए हमें परेशान करना बंद कर दिया।”

रनौत के मुताबिक जब उसे स्टारडम मिल गया तो पंचोली ने फिर से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया और पुराने फोटो सबको दिखाने की धमकी देकर ब्लैकमेल करने लगा तथा पैसों की मांग की।

इस मामले में 19 जुलाई को सुनवाई होनी है।

नहीं महुआ मोइत्रा, दक्षिणपंथी लोग नहीं, वामपंथी ‘आसहोल्स’ हर जगह होते हैं एक जैसे

महुआ मोइत्रा ने जो ‘बहुत ही क्रांतिकारी’ भाषण संसद के पटल पर दिया था, उस में कुछ लोगों को मार्टिन लॉन्गमैन के 2017 के उस लेख से समानता मिली, जो लॉन्गमैन ने ट्रम्प के अमेरिका का राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर लिखा था। ज़ाहिर तौर पर यह समानता वायरल हो गई, और महुआ मोइत्रा पर ‘plagiarism’ यानि ‘बौद्धिक चोरी’ के आरोप लगने लगे। और इन आरोपों के जवाब में पहले तो लेखक मार्टिन लॉन्गमैन ने कूदते हुए महुआ मोइत्रा को ‘क्लीन चिट’ दे दी कि नहीं, महुआ ने नहीं की मेरे लेख से चोरी! (उन्होंने उसी म्यूज़ियम में लगी एक तख्ती पर यह पढ़ा जहाँ से उठा कर मैंने अपना लेख बना दिया) साथ ही उन्होंने लगे हाथ हिंदुस्तान के ‘राइट विंग’ को केवल ‘राइट विंग’ होने के कारण अपशब्द भी बोल डाले। उन अपशब्दों का लब्बोलुआब यह था कि हर देश के दक्षिणपंथी ‘एक जैसे’ होते हैं।

उसके बाद महुआ मोइत्रा भी ‘तलवार लहराते’ मैदान में आ डटीं और सार्वजनिक जीवन की सारी सभ्यता, सभी शिष्टाचार भुला कर उनके अपशब्दों को ज्यों-का-त्यों दोहराना शुरू कर दिया।

अपशब्दों के अलावा उन्होंने लगभग वही सब बातें दोहराईं जिन्हें गला फाड़कर चिल्लाते-चिल्लाते राहुल गाँधी की आज ‘संन्यास’ की नौबत आ गई है, भाजपा ने तृणमूल के गढ़ में सेंध नहीं लगाई है, बल्कि दीवार लगभग ढाह दी है, और ममता बनर्जी ‘मोन्जोलिका’ की तरह श्री राम का उद्घोष सुनकर लोगों पर झपट रहीं हैं। नई बात केवल एक आरोप है, और वह यह कि हर देश के ‘राइट विंग’ वाले एक जैसे होते हैं। इससे हास्यास्पद क्या हो सकता है कि वामपंथी, जिन्होंने एक ही मार्क्सवादी फॉर्मूले से रूस, चीन, पूर्वी जर्मनी, कम्बोडिया, क्यूबा, वेनेज़ुएला और न जाने कितने और मुल्कों में कत्लेआम मचाया है, वह अपने विरोधियों पर ‘एक जैसा’ होने का आरोप लगाएँ।

हर देश में ‘बराबरी’ के नाम पर बराबर खून-खराबा, बर्बादी और भ्रष्टाचार

अपनी ‘बराबरी’ की विचारधारा, ‘सर्वहारा के हित में, बुर्जुआ के ख़िलाफ़’ के नारे और हिंसा, कब्जा और पुनर्वितरण की विचारधारा का पालन करते हुए वह वामपंथ है, जिसने ‘कम्युनिस्ट प्रोजेक्ट’ हर देश में चलाया। हिटलर, नाज़ीवाद, फासीवाद ने तो 1920 के दशक में शुरू होकर 1945 में दम तोड़ दिया, लेकिन पूरी 20वीं शताब्दी भर अपने विरोधियों को ‘एनेमी ऑफ़ द स्टेट एंड द पीपल’ (राज्य और लोगों के दुश्मन) बना कर ‘राज्य और क्रांति के नाम पर’ उनकी हत्या, उनका दमन, उन्हें मजदूरी के कैम्प में भेजने वाला वामपंथ रहा है। वह वामपंथ रहा है, जिसने रूस के रशियन ऑर्थोडॉक्स ईसाई और ईसा-पूर्व के इतिहास से लेकर कम्बोडिया के हिन्दू और बौद्ध व चीन के डाओ इतिहास पर रोडरोलर चलाया, ताकि लोगों को ‘तुम तो हमेशा से अमीरों द्वारा प्रताड़ित किया जा सके’ का प्रोपेगैंडा पढ़ा कर उनकी हिंसक ब्रेनवॉशिंग की जा सके।

हिंदुस्तान में तृणमूल, अमेरिका के डेमोक्रैट भी एक जैसे

अगर 20वीं सदी को एक ओर करके अभी के कालखंड में भी लौटें तो भी वह ‘राइट’ नहीं, ‘लेफ्ट’ है, जो ‘एक जैसा’ सुनाई पड़ता है। कुछ कथनों पर नज़र डालिए- “हमारे विरोधी फासीवादी हैं”, “मुस्लमान खतरे में हैं, और बचने के लिए हमें ही वोट दें”, “वो नफरत फैला रहे हैं, हम प्यार बाँट रहे हैं”, “वे प्रतिभाविहीन, अनपढ़ जाहिल लोग हैं”, “वो मज़हब के आधार पर आपको बाँटना चाहते हैं, और हम आपसे उम्मीद करते हैं कि आप उन्हें ही नहीं, मज़हब को भी नकार दें”, से लेकर “हम इसलिए हारे क्योंकि निर्वाचन प्रणाली में खोट था”, “हम इसलिए हारे क्योंकि लोगों ने उनके बहकावे में आना स्वीकार किया”, “ये हमारी नहीं, लोकतंत्र की हार है”, “(जीतने वाले को) हम राष्ट्राध्यक्ष नहीं मानते”। मार्टिन लॉन्गमैन और महुआ मोइत्रा संयुक्त बयान जारी कर बताएँ कि यह वैचारिक और कथनों की समानता हिंदुस्तान और अमेरिका के राइट विंग में है या लेफ्ट?

और महुआ यह कहकर बच नहीं सकतीं कि उनकी पार्टी वामपंथी नहीं, बल्कि वामपंथ से लड़ने वाली है। उनकी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो राज्य में एक ही साथ अराजकता (लेफ्ट का चरम) और फासीवाद (राइट का चरम) का राज्य स्थापित कर लिया है- दुनिया के इतिहास में मुझे नहीं लगता कि और किसी राज्य या देश तो दूर, किसी गाँव के सरपंच ने भी एनार्को-फासिस्ट (अराजकतावादी-फासीवादी) का दोहरा ख़िताब जीता होगा। उनका कैडर मूल तृणमूल से ज्यादा माकपा के गुंडों से बना है, माकपा की ही तरह मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करतीं हैं, उसी की तरह तस्लीमा नसरीन को कठमुल्लों के दबाव में कोलकाता से भगा देतीं हैं, राजनीतिक विरोधियों की हत्याएँ होतीं हैं। अंतर क्या है ममता बनर्जी और कम्युनिस्टों के शासन में?

दक्षिणपंथ परम्पराओं का रक्षक है- परम्पराएँ अलग हैं तो रक्षक एक कैसे होगा?

दक्षिण पंथ, या ‘राइट विंग’ किसी देश, समाज या समूह की परम्पराओं का समर्थक होता है, उनकी रक्षा, पालन और क्रमबद्ध-विकास (evolution) के लिए काम करता है। अब अगर भारत (महुआ मोइत्रा का देश) और अमेरिका (मार्टिन लॉन्गमैन का देश) की परम्पराएँ एक हों, तभी उनके ‘राइट विंग’ एक हो सकते हैं! तो क्या अमेरिका और भारत की परम्पराओं में इतनी समानता है?

अमेरिकी और हिंदुस्तानी राइट विंग में समान केवल एक चीज़ है- अपने-अपने देश में संस्कृति के संरक्षण, और इस्लामी आतंकवाद से लड़ने के प्रति प्रतिबद्धता। अंतर इतने ज़्यादा हैं कि एक-दो अनुच्छेद तो क्या, एक पूरा लेख भी कम पड़ जाएगा। अतः बेहतर होगा कि महुआ मोइत्रा या मार्टिन लॉन्गमैन पहले ट्रम्प और मोदी के आगे घुटने टेकते अपने-अपने देश के वामपंथ को सुधारने, खड़ा करने और अपने-अपने देश के लोगों से जोड़ने पर ध्यान दें। दुनिया के बाकी देशों के राइट विंग की चिंता छोड़ दें।