अमेरिका के वर्जिनिया शहर में शुक्रवार को एक आदमी ने सरकारी दफ्तर की बिल्डिंग में अधाधुँध फायरिंग की। इस फायरिंग में 12 लोगों की मौत होने की खबर है, जबकि 6 लोग घायल बताए जा रहे हैं। खबरों के मुताबिक पुलिस ने बताया है कि गोली चलाने वाला डेवेन क्रैडॉक नाम का व्यक्ति एक सरकारी कर्मचारी था, जो वर्जीनिया बीच के पब्लिक यूलिलिटिज डिपार्टमेंट में एक सर्टिफाइड प्रोफेशनल इंजीनियर के रूप में काम करता था।
यह घटना अमेरिकी समयानुसार शाम 4 बजे की है। वर्जिनिया के पुलिस चीफ जेम्स सर्वेरा ने बताया हमलावर बिल्डिंग में घुसा और अचानक अंधाधुँध गोलियाँ चलाने लगा। घायल होने वालों में एक पुलिसकर्मी भी है जो बुलेटप्रूफ जैकेट पहनने की वजह से बच गया लेकिन पुलिस के साथ हुई भिड़ंत के बाद हमलावर मारा गया है। घायल लोगों को अस्पताल भर्ती करवा दिया गया है।
फिलहाल गोलीबारी करने के पीछे के हमलावर का क्या मकसद था इसका पता नहीं चल पाया है। इस घटना के बाद वहाँ के स्थानीय लोगों में काफ़ी डर का माहौल है। बता दें कि शुक्रवार को हुई यह घटना इस साल की 150वीं ऐसी घटना है जिसमें चार से ज्यादा लोगों पर हमला हुआ या फिर उनकी मौत हुई। मेयर बॉबी दायर ने इस घटना के बारे में कहा है कि ये दिन वर्जिनिया बीच के इतिहास का सबसे काला/विनाशकारी दिन है।
महाराष्ट्र में शराब कारोबारियों के साथ ही शराब पीने वालों के लिए भी राहत वाली खबर है। महाराष्ट्र सरकार ड्राइ डे की संख्या घटाने पर विचार कर रही है। दरअसल, शराब के कारोबार को आसान करने के लिए 30 जून 2018 को विभाग के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में एक सात सदस्यीय समिति बनाई गई थी। इस समिति ने अब अपनी रिपोर्ट सरकार को दे दी है। समिति ने इस रिपोर्ट में 70 अलग-अलग बिंदुओं पर सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपी हैं। इसमें ड्राइ डे पर कई सवाल भी उठाए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, समिति ने अपनी रिपोर्ट में ड्राइ-डे को प्रभावहीन माना है। समिति का मानना है कि ड्राइ-डे पर शराब पीने वाले अपने लिए किसी भी तरह से शराब की व्यवस्था कर लेते हैं। ऐसे में अवैध रूप से शराब की बिक्री का कारोबार पनपता है। वहीं, अवैध शराब बिकने से राज्य सरकार को राजस्व का नुकसान होता है। इसके साथ ही ड्राइ डे वाले दिन भी बड़े होटलों और क्लबों में शराब दी जाती है। ऐसे में तो यही सही होगा कि ड्राइ डे की संख्या घटा दी जाए।
महाराष्ट्र में साल भर में 9 दिन ड्राइ डे होते हैं, इस दौरान शराब की दुकानें और बार वगैरह बंद रहते हैं। इसके अलावा मतदान और मतगणना वाले दिन भी संबंधित क्षेत्र में ड्राइ डे घोषित कर दिया जाता है। इस ड्राइ डे को लेकर समिति का कहना है कि इस दिन शराब की दुकानें बंद रहने से मध्यम वर्ग के लोग इसके सेवन से वंचित रह जाते हैं, जबकि बड़े लोग तो इस दिस भी शराब का सेवन आसानी से करते हैं, क्योंकि ड्राइ डे वाले दिन भी बड़े-बड़े होटलों में शराब परोसी जाती है। ऐसे में लोगों के साथ भेद-भाव होता है। इसलिए इसकी संख्या कम कर देनी चाहिए। इसके साथ ही समिति ने मतदान व मतगणना वाले दिन उसकी अवधि खत्म हो जाने के बाद ड्राइ डे खत्म करने का सुझाव दिया है।
ऐसे मुद्दों को छोड़ दें तो बीस साल पुराने दौर में एक चीज़ और भी बदली हुई होती थी। किताबें अधिकांश खरीदी नहीं जाती थीं। आगे की कक्षा में पढ़ने वाले कक्षा पास करने पर अपने से छोटों को अपनी किताबें दे देते थे। हर साल नई किताबें खरीदने का बोझ शायद ही कभी, या बहुत कम छात्रों पर आता था। आज क्या किताबें इतनी बदल रही हैं कि हर साल हजारों रुपये की किताबें खरीदने की जरूरत पड़े?
सरकारी स्कूल जो मुफ्त में किताबें बांटते हैं, वो नई किताबें ही क्यों बाँट रहे हैं? बच्चों को अपने अग्रजों से किताबें मिल जाएँ तो एक तो उन्हें समय पर किताबें मिल जाएँगी, ऊपर से उनके खरीदने का खर्च, स्कूलों तक पहुँचाने की व्यवस्था में लगने वाला खर्च और समय सब बचाया जा सकता है। सरकारी प्रकाशन से आने वाली किताबों में शायद ही कोई अक्षर एक साल में बदल पाता है, इसलिए नई किताबें छापना जरूरी तो नहीं हो सकता।
दशकों पहले कभी यशपाल कमिटी ने शिक्षा सुधारों से सम्बंधित एक रिपोर्ट दी थी। उस समय शायद कोई अर्जुन सिंह मंत्री थे। इंट्रोडक्शन से लेकर अपेंडिक्स तक ये रिपोर्ट कुल 26 पन्ने की है। आमतौर पर समितियों की सिफारिश (अभी वाली नेशनल एजुकेशन पालिसी ड्राफ्ट भी) करीब पाँच सौ पन्ने का मोटा सा बंडल होता है जिसे कौन पढ़ता है, या नहीं पढ़ता, हमें मालूम नहीं। ऐसी सभी सिफारिशों से मेरी एक और आपत्ति ये भी होती है कि ये किस आधार पर बनी है ये पता नहीं होता। कभी-कभी कहा जाता है कि ये सर्वेक्षणों के आधार पर बनी हैं। ये वैसे सर्वेक्षण होते हैं जो अक्सर बताते हैं कि पाँचवीं-छठी कक्षा के बच्चों को दो का पहाड़ा नहीं आता।
क्यों नहीं आता? क्योंकि बिहार ही में बोली जाने वाली अनेक भाषाओँ में “पहाड़ा” अलग-अलग नामों से जाना जाता है। मैथिलि में इसे “खांत” कहते हैं तो मगही में “खोंढ़ा”। ऐसे क्षेत्रों में जब बच्चों से पूछा गया होगा कि पहाड़ा आता है? तो संभवतः उसे सवाल ही समझ में नहीं आया होगा। उसने ना में सर हिलाया होगा और वही लिख लिया गया। कोई खांत या खोंढ़ा पूछता तो शायद जवाब भी आता। हम आजादी के सत्तर सालों में बच्चों के लिए उनकी मातृभाषा में शिक्षा का इंतजाम भी नहीं कर पाए हैं। ऐसा तब है जब सभी वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि मातृभाषा में मिलने वाली शिक्षा से बच्चे सबसे आसानी से सीखते हैं।
अब जब सरकार बन चुकी है तो ये नजर आता है कि शिक्षा नीतियों पर पहले दिन से ही बात शुरू हो चुकी है। एमएचआरडी ने एक ड्राफ्ट पालिसी तैयार कर रखी है और इस पर जनता से राय भी मांगी गई है। अपनी आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए जरूरी है कि हम मीडिया के उठाये टीआरपी बटोरू मुद्दों के बदले अपनी जरूरतों पर ध्यान केन्द्रित करना सीखें। विवाद खड़ा करने में उनकी रुचि पिछले पांच वर्षों में सभी लोग देख चुके हैं। बाकी जरूरी मुद्दों के बारे में पढ़कर-जानकर उनपर अपनी राय सरकार तक पहुंचानी है, या सोशल मीडिया के हर रोज बदलते मुद्दों में मनोरंजन ढूंढना है, ये तो खुद ही तय करना होगा। सोचिये, क्योंकि सोचने पर फ़िलहाल जीएसटी नहीं लगता! आप मानव संसाधन विकास मंत्रालय तक अपनी राय ईमेल ([email protected]) के ज़रिये पहुँचा सकते हैं।
कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा की उम्मीदों पर मानो पानी फिर गया। दरअसल, उनकी दिली तमन्ना है कि वो कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनें और इसलिए वो काफी समय से प्रयासरत हैं कि कर्नाटक में कॉन्ग्रेस-जेडीएस गठबंधन किसी तरह से टूट जाए। उनकी इस मंशा पर विराम लगाते हुए प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने उन्हें निर्देश दिया है कि वो वर्तमान राज्य सरकार को अस्थिर करने का प्रयास न करें।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के बाद दिल्ली से रवाना होते समय शुक्रवार (31 मई) को येदियुरप्पा ने पत्रकारों से कहा, “पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने सख़्त निर्देश देते हुए कहा है कि गठबंधन सरकार को अस्थिर करने की कोशिश ना की जाए। यह फ़ैसला हो चुका है कि भाजपा गठबंधन सरकार को गिराने की कोशिश नहीं करेगी। मुझे पूरा विश्वास है कि सिद्धारमैया ख़ुद अपने कुछ विधायकों को मेरे पास भेज रहें हैं और वो राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।”
BS Yeddyurappa, BJP: I have just returned from Delhi. Our leaders have instructed me not to involve in any move that will scuttle the govt in the state. I believe that Siddaramaiah is sending some of his MLAs to me and is trying to take political leverage. #Karnataka (31.05.2019) pic.twitter.com/Vbozh2xYjy
इसके अलावा येदियुरप्पा ने यह भी कहा, “हम फिलहाल चुप रहेंगे। वे (कॉन्ग्रेस) आपस में लड़ सकते हैं और कुछ भी हो सकता है। हमें स्पष्ट रूप से सूचित किया गया है कि राज्य में सरकार को परेशान करने का प्रयास न करें।”
BS Yeddyurappa, BJP: We will remain silent for the time being. They (Congress) may fight with each other and anything can happen. We’ve been clearly informed not to disturb or attempt to topple the government in the state. #Karnataka (31.05.2019) https://t.co/svOAkefdUa
येदियुरप्पा ने इस बात का भी ज़िक्र किया कि फ़िलहाल पार्टी को सत्ता में आने की कोई जल्दी नहीं है क्योंकि राज्य इकाई के पास ज़िम्मेदार विपक्षी पार्टी होने के तौर पर काम करने की सभी क्षमताएँ मौजूद हैं। ख़बर के अनुसार, येदियुरप्पा ने मध्यावधि चुनाव की आशंका से पूरी तरह इनकार नहीं किया और कहा, “मैं इस समय मध्यावधि चुनाव को लेकर अटकलें नहीं लगाना चाहता।” येदियुरप्पा के इस बयान से ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्रीय नेतृत्व कर्नाटक राज्य में सरकार बनाने को लेकर चिंतित नहीं है।
मोदी सरकार की ऐतिहासिक जीत से पहले देश में मौजूद समुदाय विशेष के पत्रकार अपने लेखों के जरिए इस बात को साबित करने में जुटे थे कि मोदी सरकार की हर नीति, योजना और प्रयास आम लोगों के ख़िलाफ़ है। लेकिन, जब प्रचंड बहुमत के साथ मोदी सरकार सत्ता में वापस लौट आई है तो ‘द प्रिंट’ नामक पोर्टल के मालिक और एडिटर्स गिल्ड के चीफ़ शेखर गुप्ता ने एक चर्चा ‘How India Voted’ में स्वीकारा है कि चुनाव से पहले पत्रकारों ने मोदी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की सफलता को नजरअंदाज किया था।
शेखर गुप्ता ने कहा, “मुझे ये बात बहुत इमानदारी से कहनी है कि हम पत्रकारों ने मोदी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की अनदेखी करने का सोचा था और जब उनकी हकीकत (जिसमें लोगों को फायदा पहुँचा) हमारे सामने आती तो हम उसे नकारने की कोशिश करते।”
कॉन्ग्रेस की करारी हार के बारे में बात करते हुए गुप्ता जी ने ये तक कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी auto-immune disease (ऐसी बीमारी जिसके कारण पार्टी ने खुद ही को नुकसान पहुँचाया) से पीड़ित है। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के इतने दिनों में उन्होंने कभी नहीं सुना कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपनी सरकार के कार्यकाल में हुई किसी अच्छी चीज के बारे में बात की हो। वो हमेशा मोदी सरकार और मीडिया पर दोष देते रहे। गुप्ता जी कहते हैं कि देश में योजनाओं का झाँसा देकर हमेशा से वोट माँगा जाता रहा है इसलिए देश के मतदाता को कॉन्ग्रेस की योजनाओं पर भरोसा नहीं है।
The whole section from Shekhar Gupta is a gold mine for those wanting to know the intellectual vacuum that these libbies live in. Listen from about 1:33:50 or so to about 1:36:30 for the most self incriminating evaluation. @iMac_toohttps://t.co/Gah6cjsVsZ
इस चर्चा के दौरान एडिटर गिल्ड के चीफ ने स्वीकारा कि वो खुद भी मोदी सरकार की योजनाओं के ख़िलाफ़ सबूत ढूँढ रहे थे, लेकिन उन्हें कोई प्रमाण नहीं मिला। उन्होंने योजनाओं के तहत बाँटे गए गैस सिलिंडरों को देखने के लिए घरों के भीतर तक झाँका, लेकिन वहाँ सिलेंडर मौजूद होने के कारण, जो सोचा वो मुमकिन नहीं हो पाया।
अपनी बातचीत के दौरान निराश शेखर गुप्ता मानते हैं कि सरकार द्वारा चालू की गई जन-धन योजना, आधार और मुद्रा योजना ने लोगों को फायदा पहुँचाया है, जो लिबरलों के बर्दाश्त से बाहर हो गया था। वो कहते हैं कि उन्हें पहले खुद ही लगता था कि मुद्रा लोन योजना एक बकवास और फर्जी चीज है, लेकिन अब उनके पास वो वीडियो प्रमाण के रूप में हैं जो साबित करते हैं ये सब फर्जी नहीं है। अपनी बात में वो आजमगढ़ से 50 किलोमीटर दूर एक दलित व्यक्ति का जिक्र करते हैं जो बताता है कि उसे 50,000 रुपए का मुद्रा लोन मिला है, जिससे उसने चाय की दुकान की दुकान खोली और अब 1,300 वह हर महीने रुपए वापस करता हैं। और, जब वो पैसे वापस नहीं दे पाता तो बैंक मैनेजर किसी को उसके पास भेजता है।
चुनाव से पहले तक मोदी विरोध में सुर बुलंद करने वाले द प्रिंट के मालिक का कहना है कि उन्होंने बड़े आँकड़ों को जाँचा, जिसमें स्पष्ट था कि 4.81 करोड़ लोगों को मुद्रा लोन दिया जा चुका है जिसमें से 2.1 लाख का करोड़ चुका भी दिए गए हैं। इसलिए अब वो ईमानदारी से कहते हैं कि पत्रकारों ने मोदी सरकार द्वारा चालू की गई कल्याणकारी योजनाओं की अनदेखी की, और जब उन्हें योजनाओं के कारण प्रगति दिखी तो उन्होंने उसे भी नजरअंदाज करने की कोशिश ये कहकर की “उन्हें भले ही गैस सिलिंडर मिल गया, लेकिन वो अगला सिलेंडर खरीदने में सक्षम नहीं हैं, क्योंकि अगला सिलेंडर पूरी कीमत पर मिलेगा” जबकि ये तर्क बिल्कुल झूठ था। अगला सिलेंडर जिन्हें पूरे कीमत पर मिला, उनकी सब्सिडी कटकर उनके बैंक में आई।
मोदी सरकार की वापसी के बारे में बात करते हुए गुप्ता जी इस बातचीत में कहते हैं कि हकीकत ये है कि इससे पहले लोगों ने कभी किसी योजना को घर के भीतर तक पहुँचते हुए नहीं देखा था, और जिन चीज़ों की डिलीवरी देखी थी, उन्हें बिना घूस दिए नहीं देखी थी। वो मानते हैं कि ये देश में एक बहुत बड़ा बदलाव आया है। जिसे हो सकता है कुछ लोग पसंद न करें लेकिन समझदार लोग इससे बहुत कुछ सीख रहे हैं।
भारत सरकार ने इंडियन एयरस्पेस में लगाए गए सभी अस्थाई प्रतिबंधों को हटा दिया है। भारतीय वायुसेना ने शुक्रवार (मई 31, 2019) को ट्वीट करते हुए इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा, “27 फरवरी 2019 से इंडियन एयरफोर्स द्वारा भारतीय एयरस्पेस में सभी रूट्स पर लगाए गए अस्थाई प्रतिबंधों को हटा लिया गया है।”
#Information : Temporary restrictions on all air routes in the Indian airspace, imposed by the Indian Air Force on 27 Feb 19, have been removed.
पाकिस्तान के बालाकोट में 26 फरवरी को किए गए एयरस्ट्राइक के बाद 27 फरवरी को वायुसेना ने भारतीय एयरस्पेस के सभी रूटों पर प्रतिबंध लगा दिया था। जिसके बाद पाकिस्तान ने भी पूर्वी सीमा पर एयर स्पेस को प्रतिबंधित कर दिया है। पाक द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारतीय विमानों को दक्षिण एशिया और पश्चिमी देशों के लिए ज्यादा दूरी तय करनी पड़ रही है, तो वहीं भारतीय प्रतिबंध की वजह से पाकिस्तान की बैंकॉक और कुआलालंपुर जाने वाली उड़ानों पर असर पड़ा।
अब भारत के द्वारा उठाया गया ये कदम पाकिस्तान के लिए संकेत है कि वह भी अपने एयर स्पेस पर लगे प्रतिबंध हटा ले। इसके अलावा अब विदेशी एयरलाइंस, पाकिस्तान द्वारा एयर स्पेस पर लगे प्रतिबंध को लेकर यूएन की एविएशन विंग ICAO और IATA का ग्लोबल एयरलाइन फोरम से संपर्क कर सकती हैं, ताकि पाकिस्तान पर प्रतिबंध हटाने के लिए दबाव बनाया जा सके। हालाँकि, पाकिस्तान पहले 30 मई को प्रतिबंध हटाने की बात कह रहा था, लेकिन फिर इसे 14 जून तक के लिए बढ़ा दिया।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने शुक्रवार को बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के उनके समुदाय के लोगों को बीजेपी के सत्ता में आने से डरना नहीं चाहिए क्योंकि संविधान प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। उन्होंने एक सभा संबोधित करत हुए कहा, “अगर कोई ये समझ रहा है कि हिन्दुस्तान के वज़ीर-ए-आज़म 300 सीट जीत कर, हिन्दुस्तान पे मनमानी करेंगे नहीं हो सकेगा। वज़ीर-ए-आज़म से हम कहना चाहते हैं, संविधान का हवाला देकर, असदुद्दीन ओवैसी आपसे लड़ेगा, मज़लूमों के इंसाफ़ के लिए लड़ेगा।”
Asaduddin Owaisi, AIMIM: Agar koi ye samajh raha hai ki Hindustan ke Wazir-e-Azam 300 seat jeet ke, Hindustan pe manmani karenge, nahi ho sakega. Wazir-e-Azam se hum kehna chahte hain, Constitution ka hawala dekar, Asaduddin Owaisi aapse ladega, mazluumon ke insaaf ke liye ladega pic.twitter.com/E15KAlAyVX
इसके अलावा ओवैसी ने कहा कि हिन्दुस्तान को आबाद रखना है, हम हिन्दुस्तान को आबाद रखेंगे। हम यहाँ पर बराबर के शहरी हैं, किरायेदार नहीं हैं हिस्सेदार रहेंंगे।
Asaduddin Owaisi, AIMIM: Hindustan ko aabad rakhna hai, hum Hindustan ko aabad rakhenge. Ham yahan par barabar ke shehri hain, kirayedaar nahi hain hissedar rahenge. https://t.co/kiu7wFIx59
ख़बर के अनुसार, ओवैसी ने धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर भी कहा, “भारत का क़ानून, संविधान हमें इजाज़त देता है कि हम अपने धर्म का पालन करें।” उन्होंने कहा, “जब भारत के प्रधानमंत्री मंदिर जा सकते हैं तो हम भी गर्व के साथ मस्जिद जा सकते हैं।” इससे पहले ओवैसी ने बाबा रामदेव के उस बयान की कड़ी निंदा की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि देश की आबादी नियंत्रित करने के लिए तीसरे बच्चे पैदा करने वालों से वोट का अधिकार छीन लेना चाहिए। इस बयान की आलोचना करते हुए ओवैसी ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी से वोट का अधिकार केवल इसलिए नहीं छीन लेना चाहिए क्योंकि वो अपने माता-पिता की तीसरी संतान हैं।
अपने ट्वीट में ओवैसी ने लिखा था, “लोगों को असंवैधानिक बातें कहने से रोकने के लिए कोई क़ानून नहीं है, लेकिन रामदेव के विचारों पर अनुचित ध्यान क्यों दिया जाता है? वह अपने पेट के साथ कुछ कर सकते हैं या अपने पैरों को घुमा सकते हैं इसका मतलब यह नहीं है कि नरेंद्र मोदी अपना वोट देने का अधिकार सिर्फ़ इसलिए खो दें, क्योंकि वह तीसरी संतान हैं।”
There is no law preventing people from saying downright unconstitutiona things, but why do Ramdev’s ideas receive undue attention?
That he can do a thing with his stomach or move about his legs shouldn’t mean @narendramodi lose his right to vote just because he’s the 3rd kid https://t.co/svvZMa4aZy
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने लगातार हो रही गंगा की बेकदरी के लिए 3 राज्यों (बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल) को फटकार लगाई है, साथ ही इन राज्यों की लापरवाही के लिए इन पर 25-25 लाख का जुर्माना भी ठोंका है। एनजीटी ने जाँच में पाया है कि बिहार ने एक भी सीवेज प्रोजेक्ट पूरा नहीं किया जबकि पश्चिम बंगाल ने 22 में से केवल तीन प्रोजेक्टों को पूरा किया है। वहीं पीठ ने झारखंड की प्रगति को भी अपर्याप्त बताया।
एनजीटी की खंडपीठ का कहना है कि इन तीनों राज्यों ने ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद भी अपना प्रतिनिधि पेश करना तक जरूरी नहीं समझा। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले पर राज्यों का इस तरह का रवैया बिलकुल ठीक नहीं है। इतने गंभीर मामले में ऐसी असंवेदनशीलता बेहद चिंता का विषय है।
खंडपीठ ने कहा कि हम इन तीनों राज्यों पर 25-25 लाख रुपए बतौर जुर्माने का आदेश देते हैं। यह जुर्माना इन राज्यों को गंगा की लगातार हो रही दुर्गति पर ध्यान न देने के कारण देना होगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को यह रकम मिलने पर इसका इस्तेमाल पर्यावरण संरक्षण के लिए किया जाएगा।
एनजीटी ने इस दौरान क्रिकेट मैदान की सिंचाई में इस्तेमाल होने वाले पेयजल पर चिंता जताई है। उन्होंने एक विशेषज्ञ समिति को पानी बचाने के उपाय पर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल का कहना है कि पीने के पानी की कमी को देखते हुए आरओ को या तो खारिज किया जाना चाहिए या सीवर के पानी को संशोधित कर उसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना ने शुक्रवार (मई 31, 2019) को कहा कि उन्हें ईस्टर के मौके पर हुए हमले में शामिल आत्मघाती हमलावरों के भारत की यात्रा करने से संबंधित कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही। बिमस्टेक (BIMSTEC) देश के प्रमुखों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में आए सिरिसेना ने कहा कि 21 अप्रैल को हुए बम धमाकों को लेकर भारतीय खुफिया एजेंसी द्वारा भेजे गए अलर्ट के बारे में श्री लंका रक्षा प्रमुखों ने कोई जानकारी नहीं दी थी। उन्होंने कहा कि भारतीय एजेंसियों ने श्री लंका की सुरक्षा एजेंसियों को 4 अप्रैल को एक स्पष्ट रिपोर्ट भेजी थी जिसमें संभावित हमले की जानकारी दी गई थी। इस मुद्दे पर रक्षा सचिव और पुलिस महानिरीक्षक के बीच पत्रों और पत्राचार का आदान-प्रदान किया गया था।
An intelligence report earlier this week claimed that 15 terrorists belonging to the Islamic State had set off from Sri Lanka for the Lakshadweep islands on boats.https://t.co/JTDyTe3WLH
सिरिसेना ने कहा, “मैं 4 अप्रैल से 16 अप्रैल तक श्रीलंका में था। हालाँकि, किसी भी रक्षा प्रमुख ने मुझे इस तरह की खुफिया जानकारी के बारे में जानकारी नहीं दी थी। अगर मुझे इस संभावना के बारे में पता होता तो मैं देश छोड़कर कभी नहीं जाता और यही कारण है कि मैंने रक्षा सचिव और पुलिस महानिरीक्षक को हटाने की कार्रवाई की है।” इसके साथ ही सिरिसेना ने कहा कि हमलों की जाँच में श्रीलंका को भारत, ब्रिटेन और अमेरिका का साथ मिला। उन्होंने कहा कि जाँच में पाया गया कि अपराधियों ने एक अंतरराष्ट्रीय संगठन के तहत काम किया। श्री लंकाई आतंकवादियों ने उन देशों में प्रशिक्षण प्राप्त किया था, जहाँ अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी समूह काम कर रहे हैं।
गौरतलब है कि, मैत्रीपाल सिरिसेना के इस बयान से पहले श्रीलंका के सेना प्रमुख, लेफ्टिनेंट जनरल महेश सेनानायक ने कहा था कि 21 अप्रैल को हुए बम धमाकों को अंजाम देने वाले कुछ हमलावरों ने कश्मीर और केरल की यात्रा की थी। उन्होंने आशंका जताई थी कि हो सकता है कि वो लोग वहाँ पर आतंकी ट्रेनिंग लेने के लिए गए होंगे। वहीं, उन्होंने इस यात्रा के पीछे का उद्देश्य बताते हुए कहा था कि यह किसी तरह के प्रशिक्षण के लिए या देश के बाहर मौजूद संगठनों के साथ लिंक स्थापित करने के लिए की गई यात्रा हो सकती थी।
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने शुक्रवार (मई 31, 2019) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान 17 वीं लोकसभा के पहले सत्र से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं। उन्होंने बताया कि नवनिर्वाचित लोकसभा का पहला सत्र 17 जून से शुरू होकर 26 जुलाई तक चलेगा। इस बीच 5 जुलाई को प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली नई सरकार अपना बजट पेश करेगी। 40 दिन तक चलने वाले इस सत्र में 30 बैठकें होंगी।
सत्र के पहले दो दिन नवनिर्वाचित सांसदों को शपथ दिलवाई जाएगी जबकि लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव 19 जून को होगा। 20 जून को राष्ट्रपति कोविंद लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करेंगे। 4 जुलाई को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाएगा जिसमें देश की अर्थव्यवस्था पर चर्चा होगी।
17वीं लोकसभा का पहला सत्र 17 जून से 26 जुलाई तक, 19 जून को होगा लोकसभाध्यक्ष का चुनाव, जबकि 20 जून को राष्ट्रपति करेंगे संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित, आम बजट 5 जुलाई को किया जाएगा पेश pic.twitter.com/dFcPJBB732
5 जुलाई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन द्वारा बजट पेश किया जाएगा। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के बाद वह पहली महिला होंगी जो संसद में बजट पेश करेंगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रकाश जावडेकर के साथ केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी थे। दोनों मंत्रियों ने सदन के सत्र की तारीखों के अलावा कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसलों की भी जानकारी दी। नवनिर्वाचित मंत्रिमंडल की पहली बैठक में किसानों, पशुओं और छोटे व्यापारियों को लेकर 4 बड़े निर्णय लिए गए हैं। इन फैसलों में किसानों के लिए पेंशन योजना की शुरूआत की गई, प्रधानमंत्री किसान योजना का दायरा बढ़ाया गया, पशुओं को बीमारी से निजात दिलाने के लिए टीकाकरण पर चर्चा हुई है और सेल्फ एम्प्लॉयड को पेंशन देने का निर्णय लिया गया है।