मध्य प्रदेश के डूंडा सिवनी में पशु माँस की तस्करी कर रहे चार लोगों पर पशु हत्या अधिनियम की धारा 4,5, 6 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें से 3 आरोपित गिरफ्तार हो चुके हैं जबकि एक आरोपित फरार है।
गौरतलब है 22 मई को हिंदू सेना के लोगों ने दिलीप मालवीय सहित अन्य तीन लोगों के पास से 140 किलो पशु माँस बरामद किया था। इसके बाद हिंदू सेना के लोगों ने इनसे मारपीट भी की, जिसकी वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। मामले के तूल पकड़ने पर पुलिस मौक़े पर पहुँची और 140 किलो पशु माँस जब्त किया। साथ ही 4 लोगों के ख़िलाफ़ मामला भी दर्ज हुआ।
पशु मांस लेकर जा रहे लोगों से हिंदू सेना के 8 सदस्यों ने की मारपीट, तस्करों सहित किए गए गिरफ्तारhttps://t.co/qRUxgv37Oa
इसके अलावा मारपीट और गाली-गलौच करने के आरोप में हिंदू सेना के 8 लोगों पर भी आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न प्रकरण में केस दर्ज हुआ है। इसमें 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि 3 अन्य फरार हैं। पशु चिकित्सक से माँस का परीक्षण करवा लिया गया है। जाँच में पुख्ता हो गया है कि जिस माँस की तस्करी की जा रही थी वो पशु का ही है।
पुलिस फरार आरोपितों की तलाश में जुटी हुई है। जी न्यूज की खबर के मुताबिक पुलिस को इस घटना के बारे में तब पता चला जब पुलिस को मारपीट का एक वीडियो मिला। पुलिस ने मौक़े से पहुँचकर मामले को शांत कराया और आरोपितों को गिरफ्तार किया।
अगले पाँच वर्षों के लिए देश की बागडोर एक बार फिर नरेंद्र मोदी के हाथों में आ गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने 28 मई को धर्म नगरी काशी जाने की घोषणा कर दी है, जिससे वो अपनी जीत का श्रेय वहाँ की जनता को दे सकें। काशी के मतदाताओं का आभार व्यक्त करने के साथ ही वो वहाँ बाबा विश्वनाथ का ठीक उसी विधि से कमल पुष्प से अभिषेक करेंगे जैसे भगवान श्रीराम ने लंका विजय से पहले की थी। पूजा की विशेष तैयारियों के तहत पीएम मोदी षोडशोपचार पूजन के बाद 501 या 108 कमल के फूलों से बाबा विश्वनाथ का अभिषेक करेंगे। काशी के पंडितों के अनुसार, भगवान श्रीराम ने भी शिवजी की पूजा-अर्चना इसी पूजन-विधि से की थी।
इससे पहले, साल 2014 में जब पीएम मोदी को बनारस से जीत मिलने के अगले ही दिन गंगा तट पर पहुँचे थे। लेकिन, इस बार उन्होंने पीएम पद की शपथ लेने से पहले वहाँ जाने का निर्णय लिया है। ख़बर के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोपहर के बाद काशी नगरी पहुँचेंगे। जनता से संवाद करने के बाद वो काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव व काशी विश्वनाथ मंदिर जाकर दर्शन और पूजन करेंगे। इसके बाद गंगा आरती में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) इसकी विस्तृत जानकारी शनिवार (25 मई) को ज़िला प्रशासन को देगा।
ख़बर है कि प्रधानमंत्री मोदी का बनारस में भव्य स्वागत किया जाएगा। उनका यह ऐतिहासिक स्वागत एक सांसद के रूप में नहीं बल्कि एक महानायक के रूप में किया जाएगा। पीएम मोदी 28 मई को विमान से बाबतपुर एयरपोर्ट आने के बाद जनता का आभार व्यक्त करने सड़कों पर निकलेंगे। शहर में प्रवेश के बाद गंगा तट तक जाने के लिए ‘विजय रथ’ क़रीब तीस किलोमीटर की दूरी तय करेगा। इस पूरे रास्ते की सजावट के लिए जिन संसाधनों का प्रयोग किया जाएगा, वैसा बनारस में पहले कभी नहीं किया गया होगा। माना जा रहा है कि 28 मई को मोदी आगमन पर उनके स्वागत में बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में उमड़ने वाला जनसैलाब इस बात का स्पष्ट संकेत होगा कि बनारस की जनता में उन्हें लेकर विश्वास काफ़ी बढ़ा है। वहीं, पीएम मोदी का विश्वास भी बनारस की जनता जीतने में कामयाब रही, तभी तो उन्होंने चुनाव प्रचार की सारी ज़िम्मेदारियाँ काशीवासियों पर ही छोड़ दी थी। तभी उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा था कि अब वो जीतने के बाद काशीवासियों का आभार व्यक्त करने वहाँ आएँगे।
लोकसभा चुनाव 2019 में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर भारतीय जनता पार्टी लगातार दूसरी बार केंद्र में सरकार बनाने जा रही है। इस जीत पर विश्वभर के नेताओं ने पीएम मोदी को बधाई और शुभकामनाएँ दीं। श्री लंका, इस्राएल, भूटान, पुर्तगाल, चीन, अफगानिस्तान समेत कई देशों से बधाईयाँ आने के बाद अब तिब्बत के बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा ने चुनाव में शानदार जीत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और NDA को बधाई दी है।
The Dalai Lama congratulated Prime Minister Narendra Modi & the National Democratic Alliance (NDA) on their “success in the Lok Sabha elections. It fills me with admiration and pride to see India, the world’s democracy, emerging as leader in the community of nations.” (File pic) pic.twitter.com/chxM1kO77O
उन्होंने एक पत्र में लिखा है कि वो प्रार्थना करते हैं कि पीएम मोदी भारत के लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को पूरा करने और आगे आने वाली चुनौतियों से निपटने में कामयाब हों। इसके साथ ही तिब्बतियों के लोकतांत्रिक रुप से निर्वाचित राष्ट्रपति लोबसांग सांग्ये ने भी पीएम मोदी और एनडीए को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं।
दलाई लामा 1959 से भारत में रह रहे हैं। पिछले 60 वर्षों से भारत में रह रहे दलाई लामा खुद को भारत में सबसे अधिक लंबे समय तक रहने वाले अतिथि मानते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, 2014 में वोट डालने का अधिकार मिलने के बाद इस बार तकरीबन 300 तिब्बतियों ने धर्मशाला में मतदान किया। इस दौरान कई भिक्षुओं और महिलाओं को भी लोकतंत्र के महापर्व में हिस्सा लेते देखा गया। भारतीय नागरिकता और अधिकार पाने के लिए संघर्ष कर रहे तिब्बती समुदाय के एक जाने-माने चेहरे लोबसांग वांग्याल ने यहाँ के भागसू पोलिंग बूथ पर अपना वोट डाला। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों ने तिब्बती शरणार्थियों के जीवन को प्रभावित किया है। उनका कहना है कि प्रत्येक पार्टी के बारे में तिब्बतियों के अपने विचार हैं और मतदाताओं ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर वोट डाला है। हालाँकि, इस दौरान कई तिब्बती कार्यकर्ताओं ने वोट डालने के कदम का विरोध करते हुए विभिन्न जगहों पर हंगामा भी किया।
दलाई लामा भारत के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि भारत की उदारता और दयाशीलता की वजह से ही वो लोग निर्वासन के बावजूद अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को बचा कर रख पाए। इसके साथ ही राष्ट्रपति सांग्ये ने भारत को तिब्बतियों का दूसरा घर बताया और कहा कि जितना भारत और वहाँ के उदार लोगों ने तिब्बतियों के लिए किया है, उतना किसी भी देश ने नहीं किया। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन ने साल 2018 में थैंक यू इंडिया कार्यक्रम का आयोजन कर भारत सरकार और यहाँ के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया था।
सन 1996 में एक विशेष प्रावधान के तहत 1989-90 के बाद से राज्य के बाहर निर्वासन में जीवन जी रहे कश्मीरी पंडितों को अपने मूल लोकसभा क्षेत्रों के लिए मतदान करने का अधिकार दिया गया था। इस अधिकार का प्रयोग करते हुए 2019 के लोकसभा निर्वाचन में करीब 13,537 कश्मीरी पंडितों ने मतदान किया। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक इन 13,537 लोगों में से 11,648 (86%) वोट भाजपा को मिले।
खास बात ये हैं कि घाटी की 2 सीटों (अनंतनाग और श्रीनगर) पर भाजपा प्रत्याशियों को ये वोट मिले हैं। आँकड़ों पर यदि गौर करें तो ज्ञात होगा कि अनंतनाग में भाजपा प्रत्याशी को मिले वोट में राज्य से बाहर रह रहे कश्मीरी पंडितों का बहुत बड़ा योगदान है। यहाँ भाजपा प्रत्याशी को मिले 10,225 वोटों में से 7,251 वोट कश्मीरी पंडितों ने दिए हैं। इसी प्रकार श्रीनगर में भाजपा प्रत्याशी को कुल 4,631 वोट मिले जिसमें से 2,584 वोट कश्मीरी पंडितों ने दिए। बारामूला इलाके में इसका अनुपात केवल 23 फीसद रहा।
गौरतलब है 1980 के दशक में आखिर में उग्रवाद के कारण घाटी के कई क्षेत्रों में कश्मीरी पंडितों को पलायन करना पड़ा था। इसके बाद मतदान तो दूर की बात उनका अपने घर को देखना भी मुश्किल हो गया था। ऐसे में 1996 में प्रावधान को लागू किया था ताकि राज्य से बाहर रह रहे नागरिकों के लिए मताधिकार का प्रयोग करना संभव हो पाए। निर्वाचन आयोग ने भी इस प्रावधान के तहत कश्मीरी पंडितों के वोट देने की प्रक्रिया को समय के साथ और भी अधिक सुविधाजनक बनाया है।
शुक्रवार (मई 24, 2019) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत केंद्रीय मंत्रिपरिषद ने राष्ट्रपति कोविंद को इस्तीफा सौंप दिया। राष्ट्रपति ने सभी का त्यागपत्र स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री से नई सरकार बनने तक पद पर बने रहने का आग्रह किया है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई, जिसमें 16वीं लोकसभा को भंग करने का प्रस्ताव पारित किया गया।
16 वीं लोकसभा का कार्यकाल 3 जून को समाप्त हो रहा है और 17वीं लोकसभा का गठन 3 जून से पहले किया जाना है। ऐसे में नए सदन के गठन की प्रक्रिया तीनों चुनाव आयुक्तों के राष्ट्रपति से मिलने के बाद शुरू होगी जब वह नवनिर्वाचित सदस्यों की सूची राष्ट्रपति को सौंपेंगे।
बता दें लोकसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की ऐतिहासिक जीत के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसी सिलसिले में आज शनिवार को एनडीए की संसदीय दल की बैठक शाम 5 बजे बुलाई गई है जिसमें गठबंधन के सभी नवनिर्वाचित सांसद शामिल होंगे। इस बैठक में औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसदीय दल का नेता चुना जाएगा। संसदीय दल के नेता को ही राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री के रूप में सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
लोकसभा चुनाव 2019 न्यूज़: NDA संसदीय दल की बैठक शनिवार को, बीजेपी ने विजयी सांसदों को दिल्ली बुलाया – nda parliamentary party will meet on saturday, formally can elect modi as their leader https://t.co/ung7Xxsygb
नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक इस बात को लेकर अटकलें तेज हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई कैबिनेट में किसे कौन सा पद मिलेगा। ऐसे में केंद्रीय कैबिनेट की एक बैठक भी हुई जिसमें सुषमा स्वराज, नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमन, मेनका गांधी, पीयूष गोयल, प्रकाश जावड़ेकर आदि शामिल हुए। स्वास्थ्य खराब होने के कारण अरुण जेटली इस बैठक में शामिल नहीं हुए थे। खबरों के अनुसार मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में अरुण जेटली वित्त मंत्री का कार्यभार नहीं लेंगे। इसका कारण उनकी बिगड़ी सेहत बताया जा रहा है। ऐसे में हो सकता है केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल को वित्त मंत्रालय या दोनों मंत्रालयों का प्रभार दिया जाए। इसके अलावा अमित शाह को रक्षा मंत्री का पद सौंपा जा सकता है।
देश की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट भोपाल से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह की जीत का दावा करने वाले और उनकी जीत के लिए 5 क्विंटल मिर्ची से यज्ञ करने वाले महामंडलेश्वर वैराग्यानंद गिरी महाराज उर्फ़ मिर्ची बाबा इन दिनों गायब चल रहे हैं। लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही बाबा की तलाश की जा रही है, लेकिन अभी तक कोई भी उनसे संपर्क नहीं कर पाया है। उम्मीदें लगाईं जा रही हैं कि शायद मिर्ची बाबा अंडरग्राउंड हो गए हैं।
मध्य प्रदेश की भोपाल लोकसभा सीट पर भाजपा की साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को करीब तीन लाख वोट से करारी शिकस्त दी है। दिग्विजय सिंह ने जीतने के लिए पूजा-पाठ का सहारा लिया था। पर इसका भी कोई असर नहीं हुआ।
दिग्विजय सिंह को भोपाल सीट से विजयी बनाने के लिए महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद ने कुल 5 क्विंटल मिर्च डालकर एक विशाल हवन किया था और वहीं प्रतिज्ञा ली थी कि अगर कॉन्ग्रेस ये सीट हारती है, तो वह इसी हवनकुण्ड में समाधि ले लेंगे। कॉन्ग्रेस के हारने के बाद स्वामी वैराग्यानंद उर्फ मिर्ची बाबा को लोग खोजना शुरू कर चुके हैं, पर वह कहाँ हैं इसके बारे में कोई पता ही नहीं चल रहा।
मिर्ची बाबा का फोन भी चुनाव परिणाम आने के बाद से बन्द ही बता रहा है। बता दें कि मध्य प्रदेश की 29 सीट पर भाजपा ने अपना परचम लहराया है। एक मात्र छिंदवाड़ा सीट ही कॉन्ग्रेस के हिस्से आई है। राज्य की सत्ता में होते हुए कॉन्ग्रेस की इतनी बड़ी हार पार्टी आलाकमान को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
दिग्विजय सिंह के लिए सिर्फ मिर्ची बाबा ने ही नहीं, बल्कि भाजपा से राज्यमंत्री रह चुके कम्पयूटर बाबा ने भी करीब 7 हजार साधू-संतों के साथ हवन-यज्ञ किया था। जिसके बाद बाबा और दिग्विजय सिंह पर चुनाव आयोग का कहर भी फूटा था, क्योंकि बाबा ने यज्ञ और प्रचार में खर्च हुई धनराशि का हिसाब नहीं दिया था। ऐसे में आयोग ने यज्ञ और साधु-संतों द्वारा दिग्विजय सिंह के पक्ष में किए प्रचार-प्रसार का पूरा खर्च भी दिग्विजय सिंह के ही खाते में जोड़ दिया था।
लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के एसपी-बीएसपी गठबंधन को मिली करारी हार से निराश समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के तहत अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सभी पार्टी प्रवक्ताओं को अपने पद से हटा दिया है। ये निकाले गए प्रवक्ता वही हैं, जो पार्टी का पक्ष रखने के लिए न्यूज चैनल्स पर बैठे नजर आते थे। मीडिया रिपोर्टस् के अनुसार पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने इस बारे में एक प्रेस रिलीज जारी कर सभी न्यूज चैनल्स से आग्रह किया है कि वह इन प्रवक्ताओं को अपने चैनल में डिबेट के लिए ना बुलाएँ।
Samajwadi Party chief Akhilesh Yadav dismisses the nomination of all the panelists of the party, and asks the media houses to not invite any SP office-bearer for debates. pic.twitter.com/CRK60X6Exh
जिन प्रवक्ताओं के खिलाफ अखिलेश यादव ने ये निर्णय लिया है, उनमें जूही सिंह, नावेद सिद्दीकी, जगदेव सिंह यादव, सुनील सिंह जैसे कई बड़े नाम भी शामिल हैं। न्यूज़ चैनल्स के साथ-साथ इस चिट्ठी को प्रवक्ताओं के पास भी भेज दिया गया है।
लोकसभा चुनाव में न केवल जातीय गणित फेल हुआ है, बल्कि वंशवादी राजनीति को भी भारी झटका लगा है। राजनीतिक परिवार से आने वाले अधिकांश उम्मीदवारों को इस बार हार का सामना करना पड़ा है। उत्तर प्रदेश की 80 सीटों पर हुए चुनाव में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी व राष्ट्रीय लोकदल के महागठबंधन के बावजूद भारतीय जनता पार्टी अपने दम पर 62 सीटें जीतने में कामयाब रही, जबकि 2 सीटों पर उसकी सहयोगी पार्टी अपना दल ने जीत हासिल की।
संसद के सेंट्रल हॉल में कल शाम 5 बजे बीजेपी संसदीय दल की बैठक होगी जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बीजेपी संसदीय दल का नेता चुना जाएगा। बीजेपी संसदीय दल की बैठक के बाद एनडीए की बैठक होगी। इस बैठक में उद्धव ठाकरे, रामविलास पासवान समेत सभी एनडीए नेता और सांसद रहेंगे। इस बैठक में भी नरेंद्र मोदी को एनडीए का नेता चुना जाएगा। इसके बाद मंत्रिमंडल गठन और पोर्टफोलियो को लेकर अमित शाह कल और परसों अलग-अलग एनडीए सहयोगियों के साथ भी विचार विमर्श करेंगे।
Please note that the National Democratic Alliance (NDA) Parliamentary Party will meet in Central Hall tomorrow, 25 May, at 5pm.
बता दें कि इस बार लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अकेले इतिहास रच दिया है। पार्टी ने अकेले अपने दम पर 303 सीट पर विजय हासिल की है, जो बहुमत से कहीं ज्यादा है। इसके बावजूद बीजेपी ने एनडीए के घटक दलों को साथ लेकर चलने की बात कही है। वहीं इस बार के चुनाव में यूपीए को 82 और महागठबंधन को महज 15 सीट हासिल हो पाई हैं।
आज केंद्रीय मंत्रियों के बैठक के बाद 16वीं लोकसभा भंग करने का प्रस्ताव पास हो गया। पीएम मोदी ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सौंप दिया है। राष्ट्रपति ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और नरेंद्र मोदी और मंत्रिपरिषद से अनुरोध किया है कि वे नई सरकार के पद ग्रहण करने तक बने रहे।
फ़र्ज़ी फ़ैक्ट-चेक और इंटरनेट पर घूमने वाले मीम की ‘सच्चाई’ खोजने में महारत प्राप्त वेबसाइट AltNews ने फिर ऐसा कारनामा किया है जिसकी जितनी निंदा की जाए वो कम है। AltNews के संस्थापक, प्रतीक सिन्हा ने खूंखार आतंकवादी ज़ाकिर मूसा के अपराधों पर पर्दा डालते हुए उसे आतंकवादी न कहकर ‘अलगाववादी’ के रूप में प्रदर्शित किया। बता दें कि 23 मई को, जम्मू और कश्मीर में आतंकवादी ज़ाकिर मूसा को भारतीय सुरक्षा बलों ने मार गिराया। मूसा हिज़्बुल का पूर्व कमांडर था और फ़िलहाल अल-क़ायदा से जुड़े आतंकी संगठन अंसार ग़ज़ावत-उल-हिंन्द का सरगना था। वो इस्लाम से जुड़े प्रोपेगेंडा चलाने के लिए जाना जाता था।
जहाँ एक तरफ़, मूसा को ढेर करने की ख़बर को लोगों ने सुरक्षाबलों की क़ामयाबी के रूप में देखा, तो दूसरी तरफ़ मीडिया गिरोह के कुछ ऐसे बड़े लोग मूसा की मौत की ख़बर को पचा नहीं सके। इनमें से एक नाम द वायर की वरिष्ठ संपादक आरफ़ा ख़ानम शेरवानी का है। मूसा की मौत पर BTVI के संपादक आदित्य राज कौल ने जब यह ख़बर शेयर की, जिसमें उन्होंने लिखा कि यह भारतीय लोकतंत्र की जीत है, तो आरफ़ा को यह बात बर्दाश्त नहीं हुई और जवाब में लिखा कि अब राइट विंगर्स (RW) ट्रोल्स और RW पत्रकारों के बीच अंतर करना कठिन है।
It’s tough to differentiate between RW trolls and RW journalists now. Most certainly new depths are waiting to be plumbed for Modi Media. https://t.co/ROjLzIEMaA
न्यूज़ 24 के संपादक मानक गुप्ता ने अरफ़ा के एक हिंदी ट्वीट का जवाब देते हुए हिंदी में ही जवाब दिया, जो 22 मई को पोस्ट किया गया था। उन्होंने लिखा था कि वह (मूसा) अब नहीं आएगा, और अगर कोई भी उससे मिलना चाहता है, तो वह ख़ुद ऊपर चला जाए।
वो अब नहीं नहीं आ पाएगा. जो उससे मिलना चाहता है, ख़ुद भी ऊपर जाएगा
(वैसे मैडम #ZakirMusa की बात नहीं कर रही हैं ?) Zakir Musa
लेकिन, प्रतीक सिन्हा, जो इन दिनों अपने चुटकुलों, मीम्स और फ़ोटो की काँट-छाँट कर फ़ैक्ट-चेक का दावा करने के लिए फेमस है, उसके लिए इतना पर्याप्त नहीं था। सिन्हा ने आतंकवादी ज़ाकिर मूसा को एक आतंकवादी की जगह ‘अलगाववादी’ के रूप में संदर्भित किया। यह मामला सतही तौर पर मामूली-सा लग सकता है, लेकिन वास्तव में ऐसा है नहीं। अलगाववादी एक ऐसा व्यक्ति होता है जो एक समूह, समाज, संस्कृति या धर्म को तोड़ने का समर्थन करता है, उसे अलगाववादी कहा जाता है। अलगाववादी अपनी माँग रखने के लिए विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन वो तरीक़े क़ानून के ख़िलाफ़ नहीं हो सकते। उदाहरण के लिए, ऐसे कई अलगाववादी हैं जो केवल अहिंसक तरीकों का उपयोग करते हैं।
दूसरी ओर, आतंकवादी हिंसा के ज़रिए आतंक पैदा करते हैं, नागरिकों और सशस्त्र बलों को निशाना बनाते हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि ज़ाकिर मूसा जैसे इस्लामी आतंकवादी इस्लामी शासन स्थापित करने के लिए लोगों में ख़ौफ़ पैदा करते हैं। इसलिए, एक आतंकवादी संगठन के सरगना को अलगाववादी नेता कहना न केवल भ्रम फैलाने जैसा है, बल्कि आतंकवादियों द्वारा मानवता पर किए गए क्रूर अत्याचारों पर पर्दा डालने के भी समान है, जो किसी अपराध से कम नही।
मीम से अब जीजा-साली शायरी और अकबर बीरबल के चुटकुलों के फैक्ट चेक से अपनी वृत्ति चलाने वाले प्रतीक सिन्हा ने उसी ट्वीट में एक शब्द का इस्तेमाल किया जो उसके कुत्सित कार्यों और निकृष्टता के हिसाब से हास्यास्पद है। प्रतीक सिन्हा ने अपनी नीचता की सीमा कई बार लाँघते हुए कई बार नवजात शिशु की जानकारी से लेकर किशोर वय बालकों तक की जानकारी डॉक्सिंग के जरिए इंटरनेट पर सार्वजनिक कर दी है, जिसके कारण उस लड़के को इस्लामी कट्टरपंथियों ने जान से मारने की धमकी तक दी। ऐसा निहायत ही बेशर्म व्यक्ति जब ‘classy’ शब्द का इस्तेमाल करता है तो विडम्बना घास चरने चली जाती है।
काबुल की एक मस्जिद में शुक्रवार (मई 24, 2019) की नमाज के दौरान विस्फोट में अफगानिस्तान के एक प्रतिष्ठित धार्मिक विद्वान की मौत हो गई और अन्य 16 लोग घायल हो गए। अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि विस्फोट कैसे हुआ। विस्फोट पूर्वी काबुल में अल-तक्वा मस्जिद में हुआ जहाँ मावलावी रैहान इमाम थे। जुमे की नमाज में और वो भी रमजान के पवित्र महीने में अच्छी-खासी संख्या में लोग शामिल होते हैं।
TOLOnews: In an explosion at a mosque in Paktia Kot area in Kabul’s PD9 during Friday prayers, Mawlawi Samiullah Raihan, the imam of the mosque was killed and nine other people were wounded https://t.co/pOlR4kppiD
गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता नसरत रहीमी ने कहा, ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण रूप से विस्फोट में मावलावी रैहान मारे गए और 16 अन्य नमाजी घायल हो गए।” विस्फोट दोपहर को करीब 01:20 मिनट पर हुआ। पुलिस प्रवक्ता फिरदौस फरामर्ज ने रैहान के मारे जाने की पुष्टि की और कहा कि जाँचकर्ता विस्फोट की प्रकृति की जाँच कर रहे हैं।