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मंत्रालय छिना, सलाहकार समूहों से बाहर, सिद्धू हुए घर में ही बाहरी

पंजाब सरकार में पर्यटन मंत्रालय गँवाने के बाद अब नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह के आठ महत्वपूर्ण परामर्शदाता समूहों में भी जगह नहीं मिली है। यह समूह मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ नौकरशाहों को मिलाकर बने हैं और इनका काम पंजाब की राज्य सरकार की महत्वपूर्ण परियोजनाओं की निगरानी करना है। समूहों के सदस्यों की घोषणा कल (8 जून, शनिवार) को की गई है। एक प्रेस विज्ञिप्ति के मुताबिक मुख्यमंत्री खुद शहरी नवीनीकरण और ड्रग्स-विरोधी मुहिम से जुड़े समूहों की अध्यक्षता करेंगे।

गहराई दरार, राहुल गाँधी से मिल सकते हैं सिद्धू

लोकसभा निर्वाचन और उससे पहले पुलवामा–बालाकोट प्रकरण के दौरान कॉन्ग्रेस को अपनी अनर्गल बयानबाजी से नुकसान पहुँचाने वाले सिद्धू को कैप्टेन ने लोकसभा चुनाव के बाद हुए अपने कैबिनेट पुनर्गठन में पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। 1965 की जंग में सेना में सेवाएँ दे चुके कैप्टेन बालाकोट पर सिद्धू के बयान से खासा नाराज़ चल ही रहे थे। जब कैप्टेन ने सीधे-सीधे सिद्धू के पाकिस्तानी सेना प्रमुख को गले लगाने पर निशाना साधा था, तभी पक्का हो गया था कि वह सिद्धू पर कार्रवाई करेंगे। पुनर्गठन में सिद्धू को अपेक्षाकृत ‘हल्के’ माने जाने वाले ऊर्जा और अक्षय ऊर्जा मंत्रालय का प्रभार दिया गया था, जो उन्होंने खबर लिखे जाने तक ग्रहण नहीं किया है।

इस बीच खबर यह भी है कि दिल्ली में डेरा डाले सिद्धू ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी से मिलने के लिए समय माँगा है। नवजोत सिंह सिद्धू को कैप्टेन ने किनारे पर खड़ा कर दिया है। जैसे कैप्टेन ने सिद्धू को सीधे बाहर कर विक्टिम-कार्ड खेलने का मौका देने की बजाय कम वरीयता के मंत्रालय पकड़ा कर ‘घर में ही बाहरी’ कर दिया है, उसी तरह भाजपा ने भी ‘शॉटगन’ शत्रुघ्न सिन्हा को उकसावे के हद तक जाने वाली अनुशासनहीनता के बावजूद बाहर निकालने की बजाय पार्टी के अंदर रखेे-रखे ही इतना अप्रासंगिक कर दिया कि खिसिया कर शत्रुघ्न को खुद ही पार्टी छोड़नी पड़ी।

महासागर पर निगरानी के लिए भारत ने बनाया CSRS रडार, PM ने मालदीव में किया उद्घाटन

दोबारा प्रधानमंत्री निर्वाचित होने के बाद नरेंद्र मोदी अपनी पहली विदेश यात्रा पर शनिवार (8 जून) को मालदीव पहुँचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलेह ने शनिवार को भारत द्वारा निर्मित तटीय निगरानी रडार प्रणाली का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। दोनों नेताओं ने रक्षा और समुद्री सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपना द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर वार्ता की।

ख़बर के अनुसार, इस रडार प्रणाली का उद्घाटन बहुत महत्वपूर्ण है, इसकी वजह यह है कि चीन हिंद महासागर में अपनी समुद्री रेशम मार्ग परियोजना के लिए मालदीव को महत्वपूर्ण मानता है। चीन इसके लिए श्री लंका में हंबनटोटा बंदरगाह और अफ्रीका के पूर्वी छोर पर स्थित जिबूती पर अपना प्रभाव क़ायम कर चुका है।

तटीय निगरानी रडार, एकीकृत तटीय निगरानी प्रणाली के लिए प्राथमिक सेंसर है। दोनों देशों ने भारतीय नौसेना और मालदीव राष्ट्रीय रक्षा बल के बीच ‘व्हाइट शिपिंग’ सूचनाओं का आदान-प्रदान करने संबंधी एक तक़नीकी समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हैं।

दरअसल, ‘वाइट शिपिंग’ समझौते के तहत दो देश एक दूसरे के समुद्री क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों के बारे में दोनों देशों की नौसेना के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बचाया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति सोलेह ने संयुक्त रूप से गर्मजोशी से चर्चा की। उन्होंने ट्विटर पर कहा कि परस्पर लाभकारी साझेदारी के तहत दोनों नेताओं ने एक तटीय निगरानी रडार प्रणाली और मालदीव रक्षा बलों के लिए एक प्रशिक्षण केंद्र का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया।


पाकिस्तान में 13 साल की हिन्दू बच्ची को जबरन शराब पिलाकर दुष्कर्म

पाकिस्तान में हिन्दू लड़कियों के साथ बलात्कार और हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है। पाकिस्तान के सिंध में 13 साल की हिन्दू लड़की को जबरन शराब पिलाकर उसके साथ बलात्कार का मामला प्रकाश में आया है। बलात्कारी बच्ची को बेहोश छोड़ कर फरार हो गए। फ़िलहाल पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है।

7 जून को टांडो मुहम्मद खान जिले की घटना

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यह वाकया परसों (7 जून) का है। बच्ची घर से दुकान कुछ सामान खरीदने के लिए निकली थी। पाकिस्तान के एक अख़बार की खबर के मुताबिक आरोपियों ने उसे बुलाया और जबरदस्ती शराब पिलाई, जिसके बाद उन्होंने उसके साथ बलात्कार किया।

जब लड़की घर नहीं पहुँची तो उसके पिता और भाई उसकी तलाश में निकले। उन्हें वह एक चीनी मिल के पास बेहोश और ज़ख़्मी हालत में मिली। पीड़िता के पिता के अनुसार उन्होंने पहले अपनी बेटी को अस्पताल पहुँचाया और फिर पुलिस में तहरीर दी। प्राथमिक तहकीकात के बाद स्थानीय पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को स्थानीय अदालत ने 4 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है।

पीड़िता ने भी की बलात्कार की पुष्टि

होश आने पर पीड़िता ने भी बलात्कार की पुष्टि की है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून अख़बार ने हैदराबाद (पाकिस्तानी शहर) के सिविल अस्पताल में उसकी मेडिकल जाँच में भी बलात्कार की पुष्टि का दावा किया है। दावा जिले के डिस्ट्रिक्ट हेल्थ अफसर मकबूल मल्लाह के हवाले से किया गया है।

केजरीवाल रावण से ज्यादा घमंडी: अलका लाम्बा का आरोप, AAP में घमासान

चाँदनी चौक से विधायक अलका लाम्बा ने आम आदमी पार्टी संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री के खिलाफ फिर से मोर्चा खोल दिया है। केजरीवाल को रावण से ज्यादा घमंडी बताते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि पार्टी का भविष्य खतरे में है; इतना घमंड तो रावण को भी नहीं था लेकिन उसका घमंड उसे ले डूबा। उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल पार्टी को बाँट रहे हैं, और कार्यकर्ताओं को पार्टी या विधायक (लाम्बा) में से किसी एक को चुन लेने के लिए कह रहे हैं।

ट्विटर पर घमासान, अप्रैल से लाम्बा के बागी तेवर

ट्विटर पर अलका लाम्बा ने केजरीवाल पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया:

इस आरोप का फ़िलहाल केजरीवाल या आम आदमी पार्टी की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। लेकिन अलका लाम्बा का यह पार्टी या केजरीवाल के साथ पहला टकराव नहीं है। इससे पहले अप्रैल में भी ग्रेटर कैलाश के विधायक सौरभ भरद्वाज से उनकी तीखी नोंक-झोंक हुई थी। उस समय उन्होंने जामा मस्जिद पर जनता के सामने खुली बहस की चुनौती भरद्वाज को दी थी। उसके पहले भरद्वाज ने उनपर पार्टी छोड़ने का तंज़ किया था।

लाम्बा का आरोप था कि उनके पार्टी छोड़ कॉन्ग्रेस में लौटने की अफवाह फैला कर उन्हें राजनीतिक रूप से कमज़ोर किया जा रहा है। इसके लिए उन्होंने पार्टी नेतृत्व को ही दोषी करार दिया था। बता दें कि केजरीवाल के साथ आने से पहले अलका लाम्बा महिला कॉन्ग्रेस में थीं।

लापता विमान AN-32 की जानकारी देने पर ₹5 लाख का इनाम, IAF ने दिए फोन नंबर

भारतीय वायु सेना के लापता विमान AN-32 का सुराग अभी तक नहीं मिल पाया है। विमान की खोज में जुटी विभिन्न एजेंसियों के काफी प्रयासों के बावजूद अब तक कोई सफलता हाथ नहीं लगी है। शुक्रवार (जून 7, 2019) की सुबह भारतीय नौसेना के पी8आई विमान ने तमिलनाडु के अरक्कोणम से सर्च ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन उसे भी असफलता ही हाथ लगी। जिसके बाद भारतीय वायु सेना ने विमान के संबंध में पुख्ता जानकारी देने वाले को ₹5 लाख के पुरस्कार की घोषणा की है। एयर मार्शल आरडी माथुर, AOC इस्टर्न एयर कमांड ने विमान का सुराग देने वाले किसी भी व्‍यक्ति या दल को ₹5 लाख का नकद पुरस्कार देने की बात कही। इस संबंध में फोन नंबर भी जारी किया गया है।

विमान की जानकारी देने वाले भारतीय वायुसेना से 0378-3222164, 9436499477/ 9402077267/ 9402132477 नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं। वायु सेना के प्रवक्ता विंग कमांडर रत्नाकर सिंह ने बताया कि इसरो के उपग्रहों सहित विभिन्न एजेंसियों के उन्नत तकनीक और सेंसर के साथ विमान का पता लगाने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि, विमान सोमवार (जून 3, 2019) को चालक दल के 8 सदस्य और 5 यात्रियों समेत 13 लोगों के साथ लापता हुआ था। विमान के लापता हुए 6 दिन बीत चुके हैं।

इस बीच वायु सेना प्रमुख, एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने जारी खोज अभियान की समीक्षा के लिए वायु सेना स्टेशन जोरहाट का दौरा किया। उन्हें संचालन के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई और अब तक प्राप्त इनपुट से अवगत कराया गया। उन्होंने विमान में सवार अधिकारियों और हवाई यात्रियों के परिवारों के साथ बातचीत भी की।

बंगाल में 3 BJP कार्यकर्ता की हत्या, चुनाव बाद भी राजनीतिक हिंसा जारी

पश्‍च‍िम बंगाल में लोकसभा चुनाव के दौरान से शुरू हुई राजनीतिक हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। चुनाव परिणाम आने के बाद भी पश्चिम बंगाल में लगातार सियासी हिंसा जारी है। शनिवार (जून 8, 2019) की देर शाम पश्चिम बंगाल के 24 परगना में टीएमसी और भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई। जिसमें चार लोगों की मौत की खबर है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि उसके तीन कार्यकर्ताओं को टीएमसी के लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी है, वहीं टीएमसी का आरोप है कि उनके एक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई है।

भाजपा नेता मुकुल रॉय ने इस घटना के बाद ट्वीट कर बताया कि उनके 3 कार्यकार्ताओं को टीएमसी के गुंडों ने संदेशखली में गोली मार दी है। उन्होंने लिखा कि बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ हो रही हिंसा के लिए सीएम ममता बनर्जी सीधे तौर पर जिम्मेदार है। उन्होंने लिखा कि इस पूरे मामले की शिकायत वो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से करेंगे। खबर के अनुसार, मुकुल रॉय ने अमित शाह से मुलाकात की और उन्हें बंगाल की घटना से अवगत कराया। घटना की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल बीजेपी नेताओं से फोन पर बात की और गृह सचिव राजीव गाबा को राज्य सरकार से संवाद करने के निर्देश दिए।

जानकारी के मुताबिक, उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट लोकसभा क्षेत्र के संदेशखली इलाके में भाजपा का झंडा खोलने को लेकर तृणमूल व भाजपा समर्थकों के बीच विवाद शुरू हुआ। देखते ही देखते विवाद गहराता चला गया। इस बीच वहाँ दोनों गुटों के लोगों के बीच हाथापाई शुरू हो गई, जिससे पूरा इलाका रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। इस दौरान जमकर गोलीबारी हुई। जिसमें सुकांत मंडल, प्रदीप मंडल और तपन मंडल की गोली लगने से मौत हो गई, वहीं कई पार्टी कार्यकर्ताओं के घायल होने की खबर है।

पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रमुख विजयवर्गीय ने भी इस झड़प और पार्टी के कार्यकर्ताओं की हत्या पर दुख जताया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “अभी अभी मिली दुःखद ख़बर के अनुसार पश्चिम बंगाल के बशीरहाट लोकसभा के क्षेत्र संदेशखली में भाजपा के तीन कार्यकर्ताओं की तृणमूल के गुंडों ने हत्या कर दी।” इसके साथ ही आसनसोल से सांसद और मंत्री बाबुल सुप्रीयो ने ट्वीट कर कहा कि अब बंगाल की जनता सब कुछ समझ चुकी है और जल्द ही टीएमसी का अंत होने वाला है।

राहुल के वायनाड जाते ही ‘टोंटी-चोर’ के भुट्टे पर मर-मिटा मीडिया

लोकसभा चुनावों के बाद ‘लगभग’ बेरोजगार चल रहे समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की आज एक अँधेरे को चीरती हुई सनसनी जैसी खबर सामने आई है और ये खबर लाने का काम किया है ‘आज तक’ नाम के न्यूज़ चैनल ने। इसके बाद अन्य कई समाचार चैनल्स ने इस खबर को हवा देने का काम किया।

आज तक ने ट्विटर पर अखिलेश यादव का एक ‘एक्सक्लूसिव’ वीडियो शेयर करते हुए बड़े ही मार्मिक शब्दों में लिखा है – “U.P के पूर्व मुख्यमंत्री @yadavakhilesh का काफिला आज सड़क किनारे ठेले पर भुट्टा देखकर अचानक रुक गया। अखिलेश ने ठेले पर भुट्टा बेच रहे व्यक्ति से भुट्टे का रेट पूछा और एक भुट्टा भी लिया। उनकी ये सादगी देखकर बाराबंकी की जनता उनकी कायल हो गई।”

गठबंधन के भविष्य पर मंडरा रहे संकट के बादलों से पर्दा हटाते हुए अब बुआ-बबुआ संबंधों से भी मीडिया की उम्मीदें ध्वस्त हो चुकी हैं। ऐसे में आज तक वाले अगर ‘टोंटी-चोर’ के भुट्टों की रिपोर्टिंग करते नजर आ जाएँ, तो समझ जाइए कि मीडिया के लिए राहुल गाँधी अब प्रासंगिक नहीं रहे।

आज तक ने अखिलेश यादव की भुट्टे का भाव पता करने की इस मार्मिक घटना को सनसनी बनाकर साबित कर दिया है कि मीडिया को अपने केजरीवाल तलाशने के लिए ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं है। वर्तमान राजनीति केजरीवालों से भरी पड़ी है। चुनाव से पहले कुछ निष्पक्ष पत्रकार जब राहुल-प्रियंका नामक भाई-बहनों की क्यूट तस्वीरों द्वारा माहौल बनाकर थक गए, तब उन्होंने गठबंधन के मंच पर चढ़कर बुआ-बबुआ के ऐतिहासिक क्षण को अपनी आँखों से देखकर कवर करने का फैसला लिया था और उनका फोटोग्राफर बनना तक पसंद किया।

लेकिन तैमूर की दिनचर्या और राजनीति के खानदान विशेष के मोह से निकलकर अखिलेश यादव के भुट्टों की ओर पलायन कर लेना एक सकारात्मक बदलाव है। आज तक को इस तरह के बदलाव के लिए पुरस्कार भी मिलना चाहिए। अगर अब भुट्टों की ओर नहीं बढ़ेंगे तो मीडिया के लाडले अरविन्द केजरीवाल आखिर कब तक सड़कों पर यहाँ-वहाँ रैपट खाकर खबरों में बने रहेंगे? चुनाव में भी अभी काफी समय बाकी है।

अखिलेश यादव इसी तरह सड़कों पर भुट्टे और खीरा का भाव पूछकर मीडिया का नया युवराज बन सकें तो यह मोदी सरकार के दौरान जनता को एक और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। हालाँकि, आज तक भी ये बात खूब जानता है कि अगर उनके प्यारे युवराज को अमेठी की जनता वायनाड न भगाती तो आज वो भुट्टों के भाव पूछने के लिए कहीं और खड़े होते। खैर, आजादी के बहुत साल बाद ही सही, लेकिन मीडिया को इस तरह से एक विशेष परिवार से बाहर निकलते हुए देखना अच्छा अनुभव है।

वैसे हकीकत तो ये भी है कि जनता भुट्टों की नहीं बल्कि ‘चाय’ की दीवानी है। फिर भी अगर मीडिया अभी भी भुट्टों के पीछे भाग रही है तो हो सकता है अभी भी एक आखिरी उम्मीद बाकी हो।

हिन्दू-बहुल इलाके में भी डरा हुआ, पुलिस से निराश ‘काफिर’ लाठियाँ रखने को मजबूर

मथुरा हिन्दू-बहुल है- पत्रकारिता के समुदाय विशेष, ‘शैम्पेन लिबरल्स’ और वामपंथियों के हिसाब से यहाँ मजहब विशेष वालों को डर कर रह रहा होना चाहिए। मथुरा जिस उत्तर-प्रदेश में है, वहाँ भाजपा का शासन है- भाजपा और मीडिया दोनों बताते हैं कि हिन्दू भाजपा-शासन में भयमुक्त हैं (दोनों का मतलब अलग-अलग होता है “भयमुक्त” या “बेख़ौफ़” का, लेकिन दावा एक ही होता है)। लेकिन फिर ऐसा क्यों होता है कि हिन्दू-बहुल, भाजपा-शासित मथुरा के चौक बाजार में पंकज और भरत यादव की इस्लामी भीड़ का एक झुंड भरपूर पिटाई करता है, “बेख़ौफ़” होकर करता है, लोकसभा निर्वाचन जब चल रहे होते हैं, हर तरफ कड़ा पहरा होता है, तब कर देता है? कैसे उस झुण्ड में मौजूद औरत कह देती है कर दे एफआईआर, नहीं डरते, छूट जाएँगे?

स्वराज्य पत्रिका की संवाददाता स्वाति गोयल शर्मा जब ग्राउंड रिपोर्टिंग करने उतरतीं हैं 18 मई को हुई दो भाईयों की उनकी ही लस्सी दुकान पर हुई ‘मॉब-लिंचिंग’ की, तो रूह फना कर देने वाली चीज़ें उनके कैमरे में कैद होतीं हैं। भरत की तो एक हफ्ते बाद सिर पर लगी गंभीर चोटों से मृत्यु हो गई, लेकिन पंकज बच गए। स्वाति के कैमरे पर वह बताते हैं कि कैसे उस झुण्ड में शामिल औरत उन्हें काफ़िर कह रही थी, कैसे गल्ले से ₹10,000 उठा लिए गए, माँ-बहन की गालियाँ दी गईं, हाथ-पैर जोड़कर माफ़ी माँगने और वहाँ से चले जाने की गुज़ारिश की भाईयों ने।

एक चश्मदीद गवाह कैमरे के सामने तो नहीं आते, लेकिन माइक पर वह भी वही ब्यौरा देते हैं, कि कैसे समुदाय विशेष वालों ने खुद ही “मोदी-योगी से हम नहीं डरते” कह कर मारपीट की।

मुस्लिम महिला को पूरा विश्वास था, आसानी से मिल जाएगी जमानत।

भाजपा- राज में भी क्या सुरक्षित हैं हिन्दू?

अपने राज में सबको सुरक्षा देने का दावा करने वाली भाजपा को भी यह सोचना होगा कि क्या उसकी “सबका” की परिभाषा से हिन्दू गायब हो रहे हैं? यह कैसी विडंबना है कि एक ओर मीडिया मोदी-राज, योगी-राज, भाजपा-राज को हिन्दुओं की गुंडागर्दी का पर्याय बता रहा है, दूसरी ओर हिन्दू बता रहे हैं कि उन्हें थाने से भगाने को उत्सुक पुलिस “मोहम्मडन लेडीज़” की आवभगत में लग गई? मथुरा के हिन्दुओं को भाजपा-राज में पुलिस पर इतना भी भरोसा नहीं कि अब वह अपनी सुरक्षा के लिए लाठी-डंडे दुकानों में रख रहे हैं।

हिन्दुओं के अच्छे दिन कब आने वाले हैं?

अक्षय पात्र विवाद पर The Hindu में दोफाड़, दो बड़े नाम पब्लिक में फेंक रहे कीचड़

अक्षय पात्र फाउंडेशन के विवाद में The Hindu के अंदर से ही दो तरह की आवाज़ें आनी शुरू हो गईं हैं। एक तरफ सह-चेयरपर्सन और सम्पादकीय निदेशक मालिनी पार्थसारथी हैं, जिन्होंने अक्षय पात्र पर हुई ‘हिट जॉब’ कवरेज को गलती बताते हुए इसके लिए स्तम्भ लेखिका अर्चना नातन और दैनिक सम्पादन देखने वाले सुरेश नंबात को दोषी ठहरा दिया। वहीं दूसरी ओर चेयरमैन और पूर्व मुख्य सम्पादक एन राम ने इन दोनों के बचाव में आ कर विरोध करने वालों को साम्प्रदायिक और कट्टर करार दे दिया।

नूराकुश्ती/दोफाड़ राउंड- 1

इस नूराकुश्ती या दोफाड़ का पहला चरण तब प्रारंभ हुआ जब PGurus पोर्टल के संपादक श्री अय्यर ने ‘संघी’ अक्षय पात्र फाउंडेशन के सह-संस्थापक टीवी मोहनदास पई से The Hindu के हिट-जॉब के बारे में यूट्यूब पॉडकास्ट कर उसे ट्विटर पर डाला। उसके जवाब में उसे रीट्वीट करते हुए मालिनी पार्थसारथी ने उक्त ट्वीट में उस लेख के छपे को तो गलती माना, लेकिन उसकी जिम्मेदारी से खुद को किनारे कर लिया।

दूसरी ओर फोटोशॉप से राफेल में घोटाला साबित करने को लेकर (कु)चर्चित एन राम ने एक के बाद एक (देखें ऊपर) तीन अलग-अलग ट्वीट से लेखिका अर्चना नातन और सम्पादक सुरेश नंबात सहित लेख का बचाव और उसे गलत ठहराने, या उस पर सवाल खड़ा करने वालों को कोसना शुरू कर दिया। इस प्रहसन पर कटाक्ष करते हुए पत्रकार शेफाली वैद्य ने ट्विटर पर इसे कोरा नाटक करार दिया:

नूराकुश्ती/दोफाड़ राउंड- 2

दूसरे राउंड में एन राम के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए मालिनी पार्थसारथी ने अपनी बात दोहराई। साथ ही अपने ओहदे का हवाला देते हुए यह भी साफ़ कर दिया कि अक्षय पात्र विवाद पर उनकी राय और विचार महज़ उनके निजी तौर पर नहीं है, बल्कि हिन्दू ग्रुप के सम्पादकीय निदेशक के हैं। उसके बाद एन राम ने The Hindu की सम्पादकीय मूल्यों की संहिता (Code of Editorial Values) से कॉपी-पेस्ट कर ताबड़तोड़ ट्वीट करने शुरू कर दिए।

सबसे पहले ही ट्वीट में “आंतरिक हस्तक्षेप” का ज़िक्र यूँ ही नहीं है। यह मालिनी पार्थसारथी की ही ओर इशारा है, जिनके “बतौर संपादकीय निदेशक” ट्वीट का अर्थ यह लगाया जा रहा था कि शायद वे इस बतौर संपादकीय निदेशक अक्षय पात्र की स्तम्भकार और लेख को पास करने वाले संपादक पर कार्रवाई करें, या आगे से ऐसे किसी लेख को बतौर सम्पादकीय निदेशक रोक दें।

अगर दोफाड़ है तो पहली नहीं है

दोनों पक्षों (एन राम और मालिनी पार्थसारथी) की भाषा से साफ है कि यह महज़ एक संस्था के भीतर दो विभिन्न मतों का मसला नहीं है। या तो The Hindu का प्रबंधन इस मुद्दे पर सच में दोफाड़ है, या यह केवल एक नूरा कुश्ती चल रही है। शेफाली वैद्य ने जहाँ इसे नूरा कुश्ती मानते हुए तंज किया है, वहीं इसे The Hindu में अंदरूनी संघर्ष और अक्षय पात्र वाली ‘भूल’ को एक-दूसरे के गुट के खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल किए जाने से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

इससे पहले भी तत्कालीन संपादक सिद्धार्थ वरदराजन (द वायर वाले) को The Hindu के शेयरधारक परिवारों की खींचतान में इस्तीफ़ा देना पड़ा था। वह The Hindu Group के शेयरधारक परिवारों के बाहर के पहले संपादक थे। लेकिन 2.5 वर्ष के भीतर ही उन्हें भी बाहर का रास्ता तलाशना पड़ा। मजे की बात यह है कि उन्हें लाने और बाहर करने वाले, दोनों ही एन राम थे।

कुल मिलाकर…

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि चाहे यह नूरा कुश्ती हो या सच में इस मुद्दे ने The Hindu में एक और शक्ति-संघर्ष और सत्ता-परिवर्तन का मौका पैदा कर दिया हो, पत्रकारिता के समुदाय विशेष को शायद यह अब समझ में आने लगा है कि हिन्दू अपने ऊपर और हिट-जॉब बर्दाश्त नहीं करेंगे। बेहतर होगा कि वह इस सबक को हमेशा के लिए याद रखें। बाकी रही The Hindu की बात, तो ट्विटर यूज़र नयनिका का निम्न ट्वीट एक वाक्य में उनकी कवायद का साराँश है…

अलीगढ़ काण्ड: शाहिस्ता के दुपट्टे में बाँध फ्रीज़ में रखा, कूड़े के ढेर में फेंक दिया… SIT जाँच में खुलासा

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में ढाई साल की बच्ची की बेरहमी से हत्या के मामले में SIT जाँच में कई बड़े ख़ुलासे हुए हैं। इस मामले में आरोपित मोहम्मद ज़ाहिद और मोहम्मद असलम ने यह बात क़बूल कर ली कि उन्होंने मासूम बच्ची की हत्या उसके परिवार से बदला लेने के लिए की थी। ख़बर के अनुसार, इस बात का ख़ुलासा हुआ है कि इस हत्याकांड में ज़ाहिद के छोटे भाई मेहंदी और ज़ाहिद की पत्नी शाहिस्ता (सबुस्ता) ने भी हत्या को अंजाम देने के लिए ज़ाहिद और असलम की मदद की थी। दोनों को भी गिरफ़्तार कर लिया गया है।

आरोपितों से हुई पूछताछ के बारे में पुलिस ने बताया कि बच्ची की लाश असलम के घर में भूसे में रखी गई थी। लेकिन, पुलिस को अंदेशा है कि लाश को नमी वाली जगह पर या फ्रिज़ में रखा गया था। ढाई साल की बच्ची की हत्या गला घोंटकर की गई थी और फिर बच्ची के शव को जिस दुपट्टे से लपेटा गया था वो ज़ाहिद की पत्नी शाहिस्ता का था।

SIT की जाँच में इस बात का भी ख़ुलासा हुआ कि बच्ची के साथ दरिंदगी करने वाला मोहम्मद ज़ाहिद पक्का जुआरी है इसलिए उसके दोस्त उसे सट्टा किंग बुलाते हैं। असलम के बारे में पता चला है कि इससे पहले भी वो कई वारदातों को अंजाम दे चुका है। उसने अपने ही रिश्तेदार की बच्ची का बलात्कार किया था जिसके लिए उसे साल 2014 में गिरफ़्तार भी किया गया था। दूसरा मामला, दिल्ली के गोकुलपुरी का है जब उस पर 2017 में छेड़छाड़ और अपहरण का मामला दर्ज हुआ था।

मीडिया में आई अन्य ख़बर के अनुसार, पुलिस को घटना स्थल का मुआयना करने के बाद ऐसा लगा जैसे कि बच्ची के शव को फेंकने के बाद फ्रिज़ को साफ़ किया गया हो। पुलिस सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए ज़ाहिद की पत्नी और मेहंदी से पूछताछ में जुटी हुई है। इससे पहले, अलीगढ़ के एसएसपी आकाश कुलहरि ने बताया था, “हम इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाने की कोशिश करेंगे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किसी भी एसिड पदार्थ या बलात्कार का उल्लेख नहीं है। परिवार चाहता है कि आरोपी को कड़ी से कड़ी सज़ा मिले।”