Home Blog Page 5825

मोदी पर चिल्लाने वाले मीडिया गिरोह से कुछ सवाल जो राहुल गाँधी से नहीं पूछे गए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनसे पूछे जाने वाले सवाल आए दिन चर्चा का विषय बने रहते हैं। इसमें विपक्ष समेत कई बड़े मीडिया हाउस यह बताने का भरसक प्रयास करते हैं कि पीएम मोदी सवालों के जवाब नहीं देते या उनसे जो सवाल पूछे जाते हैं उनमें किसानों की समस्या और रोज़गार जैसे विषयों से संबंधित कठिन सवाल शामिल नहीं होते। दावा तो यहाँ तक किया जाता है कि पीएम मोदी के साक्षात्कार में केवल हँसी-ठिठोली, मनोरंजन और उनकी पसंद के व्यंजनों से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं।

विपक्ष की यह पुरज़ोर कोशिश रहती है कि पीएम मोदी द्वारा दिए गए साक्षात्कार में उन्हें किस तरह बेवजह के मुद्दों पर घेरा जा सके। इनमें कुछ मीडिया संस्थान और मीडियाकर्मी भी शामिल हैं जिन्हें दुष्प्रचार करने में महारत प्राप्त है। ऐसा ही एक नाम क्विंट के संस्थापक राघव बहल का भी है जिन्होंने हाल ही में राहुल गाँधी का साक्षात्कार लिया।

यूँ तो राघव ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी से कई मुद्दों पर पर बातचीत की, इनमें कई मुद्दे शामिल थे। राहुल गाँधी के इस साक्षात्कार का वीडियो जब सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म पर आया तो कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति दर्ज की। इस साक्षात्कार में पत्रकार राघव बहल ने अपनी चतुराई का खुला प्रदर्शन करते हुए राहुल गाँधी से वो सवाल नहीं पूछे जिनके जवाब देश की जनता जानना चाहती है। वो कुछ सवाल इस प्रकार हैं, जो अब पत्रकार राघव से पूछे जा रहे हैं।

क्या आपने 30 हज़ार करोड़ रुपए के आंकड़े के बारे में सवाल पूछा?

क्या आपने मोदी के उस “नए कानून” के बारे में पूछा जिसके तहत आदिवासियों को सीधे गोली मारी जा सकती है?

क्या आपने उनसे NYAY योजना के बारे में पूछा?

क्या आपने उनसे अलवर गैंग रेप को रोकने के लिए कहा?

क्या आपने उनसे अमेठी में हुए काम के बारे में पूछा?

क्या आपने नेशनल हेराल्ड और अगस्ता वेस्टलैंड के बारे में पूछा?

क्या राहुल गाँधी से यह नहीं पूछा जाना चाहिए कि सिख दंगों के आरोपी कमलनाथ को मुख्यमंत्री क्यों बना दिया गया?

ऐसे में यह कहने और स्वीकारने में गुरेज नहीं होनी चाहिए कि मीडिया गिरोह के निशाने पर केवल पीएम मोदी रहते हैं, जिनकी केवल आलोचना करना ही मीडिया गिरोह का एकमात्र ध्येय रहता है। जहाँ एक तरफ साक्षात्कार के नाम पर राहुल गाँधी से ‘समोसे के स्वाद’ और ‘गुड़ से बनी जलेबियों’ के बारे में सवाल पूछे जाते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ वो इस बात से भी खासे दु:खी हैं कि पीएम मोदी से कोई कठिन सवाल क्यों नहीं पूछता।

यहाँ जानकारी के लिए यह बताना ज़रूरी है कि प्रधानमंत्री मोदी से राजनीतिक और गै़र-राजनीतिक दोनों तरह के साक्षात्कार लिए गए। हाल में तो लगभग हर बड़े मीडिया संस्थान ने उनका साक्षात्कार लिया। लेकिन अगर हम कठिन सवालों भरे साक्षात्कार का रुख़ करें तो न्यूज़ एजेंसी ANI की पत्रकार स्मिता प्रकाश ने पीएम मोदी से एक घंटे से भी अधिक समय तक एनडीए सरकार की आर्थिक नीतियों, विमुद्रीकरण, जीएसटी और अन्य सभी चुनौतियों से जुड़े सवाल पूछे थे, जिन्हें सरल तो नहीं कहा जा सकता था। वहीं राहुल गाँधी ने इस साक्षात्कार को “व्यवहारिकता वाली पत्रकारिता” का नाम दिया था।

चुनाव पूरे होने के पहले ही चंद्रबाबू सरकार बनाने में जुटे, केजरीवाल और राहुल से मुलाकात

लोकसभा चुनाव सम्पन्न होने के पहले ही सरकार बनाने को लेकर विपक्ष के नेताओं में काफ़ी हलचल का माहौल बन गया है। महागठबंधन के नाम पर विपक्ष की एकजुटता ख़ासतौर पर पीएम मोदी के लेकर है। तेलुगू देशम पार्टी (TDP) अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू भी विपक्ष के नेताओं को एकजुट करने की कोशिश में जुट गए हैं। उन्होंने शुक्रवार (17 मई) को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाक़ात की। इस दौरान उनके बीच चुनाव के परिणाम के बाद की रणनीति को लेकर लंबी बातचीत हुई। इस मौक़े पर मनीष सिसोदिया और पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह भी मौजूद थे।

उधर, कॉन्ग्रेस भी तीसरे मोर्चे की सरकार बनाने के लिए विपक्ष की पार्टियों को एकजुट करने में जुट गई है। इसके लिए कॉन्ग्रेस ने नेताओं से मिलने की क़वायद भी शुरू कर दी है। शुक्रवार (17 मई) को कॉन्ग्रेस ने कहा था कि वो एक प्रगतिशील और धर्मनिरपेक्ष सरकार के गठन के लिए प्रतिबद्ध है। इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद ने कहा था कि अगर कॉन्ग्रेस को पूर्ण बहुमत मिल जाएगा तो भी वो राज्य स्तरीय नेता का समर्थन लेने में गुरेज नहीं करेगी। ख़बर के अनुसार, सोनिया गाँधी ने विपक्षी दलों को साथ लाने के लिए अपने विश्वासपात्र नेताओं से कहा है कि वो 23 मई को चुनाव परिणाम की घोषणा के साथ ही एक बैठक बुलाएँ।

इसके अलावा यह भी पता चला है कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी से भी मिलना चाहते थे पर किन्हीं कारणों की वजह से उनसे बातचीत संभव नहीं हो सकी। जानकारी के अनुसार, चंद्रबाबू नायडू आज राहुल गाँधी से मुलाक़ात करेंगे। इस मुलाक़ात में दोनों नेताओं के बीच चुनावी नतीजों के बाद की रणनीति पर गहन चर्चा होने की संभावना है। राहुल गाँधी से उनकी मुलाक़ात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि राहुल ने सरकार बनाने के लिए गठबंधन को हरी झंडी दिखाई थी। इस संकेत से राहुल गाँधी ने अपने लक्ष्य को साफ़ कर दिया था कि वो बीजेपी को सत्ता में वापसी नहीं करने देना चाहते और इसके लिए वो विपक्ष की हर शर्त मानने को तैयार हैं। ऐसी संभावना है कि चंद्रबाबू नायडू राहुल गाँधी से मुलाक़ात करने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश सिंह यादव से भी मुलाक़ात के लिए लखनऊ रवाना हो जाएँगे।

‘महागठबंधन’ तेरे कितने PM? अब नवीन पटनायक के पक्ष में भी आया बयान

बीजू जनता दल के उपाध्यक्ष व ओडिशा सरकार में मंत्री सूर्य नारायण पात्रो ने शुक्रवार (मई 17, 2019) को ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का नाम प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में सामने रखा है। मीडिया खबरों के मुताबिक उनका कहना है कि भारत और ओडिशा राज्य के लोग चाहते हैं कि नवीन पटनायक देश के प्रधानमंत्री बनें। सूर्य नारायण का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब चुनावी नतीजे आने में ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि यदि किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिलता है, और क्षेत्रीय पार्टियों के समर्थन से सरकार चुनी जाती है, तो स्पष्ट है कि बीजद इसमें अपने नेता को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहेगी इसकी संभावनाएँ प्रबल हो गई हैं।

हालाँकि बीजद उपाध्यक्ष ने यह भी कहा है कि नवीन पटनायक को प्रधानमंत्री बनने के लिए कॉन्ग्रेस का समर्थन नहीं लेना चाहिए, क्योंकि कॉन्ग्रेस का इतिहास रहा है, वह पहले तो किसी नेता को प्रधानमंत्री बनने के लिए समर्थन देती है, लेकिन कुछ ही महीनों बाद पीछे हट जाती है। वैसे, इस बयान को लेकर यह बात स्पष्ट नहीं हो पाई है कि सूर्य नारायण पात्रो के इस बयान में नवीन पटनायक की सहमति है या नहीं।

बहुत जल्द चुनाव का परिणाम आने वाला है और ज्यों-ज्यों ये तारीख करीब आ रही है, वैसे-वैसे पीएम पद के लिए दावेदारी भी बढ़ती जा रही है। गठबंधन के तमाम नेता पीएम बनने का ख्वाब संजोए बैठे हैं। परिणाम आने से पहले ही गठबंधन के कई नेताओं ने पीएम बनने की इच्छा जाहिर की है, तो कुछ ने डिप्टी सीएम बनने की शर्त रख दी है। गौरतलब है कि, नवीन पटनायक के पीएम पद के दावेदारी से पहले मायावती ने अपने आपको पीएम पद के लिए प्रबल दावेदार बताया था और साथ ही वर्तमान पीएम नरेंद्र मोदी को अनफिट करार दिया।

वहीं, पिछले दिनों तेलंगाना के मुख्यमंत्री और तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) अध्यक्ष केसीआर राव ने विपक्ष के सामने खुद को डिप्टी सीएम बनाने की शर्त रखी थी। उन्होंने कहा था कि अगर लोकसभा चुनाव में किसी एक दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, तो वो ग़ैर-बीजेपी गठबंधन की सरकार को अपना समर्थन देने के लिए तैयार हैं, मगर वो सभी उनका समर्थन करेंगे, जब उन्हें सरकार में उप-प्रधानमंत्री का पद दिया जाएगा और इसी भरोसे पर वो 21 मई को होने वाले विपक्ष की मीटिंग में शामिल होंगे।

विपक्ष के नेता जिस तरह से एक के बाद पीएम पद के लिए दावेदारी पेश कर रहे हैं, उससे समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर गठबंधन, पीएम बनाना किसको चाहता है। क्योंकि जिस तरह से नेताओं के बयान आ रहे हैं, उससे तो यही लग रहा है कि सभी लोग पीएम बनने के लिए लालायित हैं।

ऐसे में जब ये लोग खुद पीएम पद के लिए किसी एक नाम पर सहमत नहीं हैं, तो फिर ये लोग सत्ता में आने पर एक साथ मिलकर देश को कैसे चलाएँगे? क्योंकि बिना सत्ता के ही इनकी अंदरुनी खटपट सामने आ रही है, तो सत्ता में आने पर ये देश को किस दिशा में ले जाएँगे, इसके तो बस कयास ही लगाए जा सकते हैं।

दिल्ली में पूरा का पूरा मुस्लिम वोट कॉन्ग्रेस को शिफ्ट हो गया: अरविंद केजरीवाल

राजधानी दिल्ली की 7 लोकसभा सीटों पर 12 मई को मतदान हुआ। इस मतदान को लेकर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने एक बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि इस मतदान के दौरान आखिरी समय में सारे मुस्लिम वोट कॉन्ग्रेस की तरफ चले गए।

केजरीवाल चुनाव प्रचार के लिए शुक्रवार (मई 17, 2019) को पंजाब के राजपुरा पहुँचे थे, जहाँ पर 19 मई को मतदान होना है। यहाँ आम आदमी पार्टी 13 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इस दौरान जब इंडियन एक्सप्रेस ने उनसे पूछा कि आम आदमी पार्टी को दिल्ली में कितनी सीटें मिल रही हैं, तो उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि ये देखने वाली बात होगी कि क्या होता है। केजरीवाल ने आगे कहा कि चुनाव के 48 घंटे पहले तक उन्हें ऐसा लग रहा था कि सातों सीटें आम आदमी पार्टी को जाएँगी, मगर आखिरी वक्त पर पूरे मुस्लिम वोट कॉन्ग्रेस की तरफ शिफ्ट हो गए। उन्होंने कहा कि मतदान के एक दिन पहले वो ये पता लगाने की कोशिश में लगे थे कि आखिर हुआ क्या है और फिर उन्हें पता चला कि पूरा का पूरा मुस्लिम वोट कॉन्ग्रेस को शिफ्ट हो गया जो कि 12 से 13 फीसदी हैं।

अगले साल आम आदमी पार्टी को राजधानी दिल्ली की सत्ता में आए हुए 5 साल पूरे हो जाएँगे। वो दिल्ली में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर काफी आशान्वित नज़र आए। उन्होंने इस बारे में बात करते हुए कहा, “दिल्ली में काम बोलता है। लोग हमारे काम के आधार पर वोट देंगे।” केजरीवाल से जब ये पूछा गया कि क्या पार्टी फिर से पुराने चेहरों को ही दोबारा मौका देगी, तो केजरीवाल ने कहा कि ये फैसला हर किसी के परफॉर्मेंस का आकलन करने के बाद लिया जाएगा।

वहीं, जब उनसे लोकसभा चुनाव के नतीजों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि अगर ईवीएम के साथ छेड़छाड़ नहीं होती है, तो मोदी की सरकार वापस नहीं आएगी। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि वो लोग ऐसा करेंगे या नहीं। आगे केजरीवाल ने यह भी साफ किया कि अगर केंद्र में नरेंद्र मोदी और अमित शाह की सरकार नहीं आती है और आम आदमी पार्टी को पर्याप्त सीटें मिलती है, तो हम दिल्ली को संपूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की शर्त पर सरकार को समर्थन देंगे।

14 साल बाद NCERT बदलेगा स्कूली पाठ्यक्रम, जनता ने दिए थे 1 लाख सुझाव

स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में 14 साल बाद नैशनल करिकुलम फ्रेमवर्क की समीक्षा बहुत जल्द की जाएगी। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक एनसीईआरटी के निदेशक ऋषिकेश सेनापति ने खुद अखबार से हुई बातचीत में इसका खुलासा किया है।

खबर के मुताबिक ऋषिकेश बताते हैं कि साल 2005 में जारी हुए पिछले एनसीएफ की समीक्षा का प्रारंभिक कार्य शुरू हो चुका है। इसे लेकर कमिटी भी बहुत जल्द बनाई जाएगी। बता दें एनसीएफ का काम देश में टीचिंग प्रैक्टिस पर दिशा निर्देश देते हुए स्कूल में पढ़ाये जाने वाले पाठ्यक्रम बनाने और पाठ्यपुस्तकों के लेखन की रूपरेखा बनाने का होता है।

एनसीईआरटी निदेशक के मुताबिक उन्होंने पाठ्यपुस्तकों को तर्कसंगत बनाने पर जो कार्य किए हैं, वही 2005 में जारी हुए एनसीएफ की समीक्षा का आधार बनेंगे। उनके मुताबिक समाज में बदलाव की जरूरत है और उनका फोकस ‘एक्पेरिमेंटल लर्निंग’ पर है।

नवभारत की रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा चुनावों के नतीजों के बाद इसे मामले को लेकर आधिकारिक घोषणा होगी। निदेशक सेनापति का कहना है कि इस मामले पर अभिभावकों, छात्रों और बुद्धिजीवियों द्वारा 1 लाख सुझाव दिए गए हैं। इन सुझावों बारीकी से विश्लेषण होगा। इस प्रक्रिया में एक साल तक लग सकता है ।

इसके अलावा साल के अंत तक एनसीईआरटी 42 लाख सरकारी एलीमेंट्री स्कूल के टीचर्स के लिए बड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम पर भी विचार कर रहा है। इससे पहले इस तरह का एक प्रोग्राम त्रिपुरा में आयोजित किया जा चुका है जहाँ 3-4 महीने के भीतर 31000 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया था।

मोदी-शाह प्रेस कॉन्फ़्रेंस, रवीश-राजदीप, राहुल गाँधी की बचकानी हरकतें, और सोनिया का मिशन 272

इस वीडियो में हमने पिछले दिनों की कुछ खबरों पर चर्चा की है जिसमें आज हुए BJP प्रेस कॉन्फ्रेंस, राहुल गाँधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस, मीडिया के समुदाय विशेष के लोगों के ट्रोल बन कर सिमट जाने की बात और सोनिया गाँधी के मिशन 272 की बात शामिल है।

कॉन्ग्रेस उम्मीदवार की पत्नी का स्विस बैंक में एकाउंट, खुद ₹1.53 करोड़ की चल संपत्ति के मालिक

गुरदासपुर लोकसभा सीट से कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार सुनील कुमार जाखड़ ने अपने चुनावी हलफनामे में ₹1.53 करोड़ की चल सम्पत्ति के अलावा एक स्विस बैंक में पत्नी के नाम पर करीब ₹7 करोड़ जमा होने की जानकारी दी है। लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष दिवंगत बलराम जाखड़ के बेटे ने विभिन्न बैंक खातों में ₹1.23 करोड़ जमा होने की जानकारी दी है।

हलफनामे के अनुसार, उन्होंने स्विजरलैंड के ज्यूरिख स्थित ‘ज़ुरखर कैंटोनल बैंक में पत्नी सिल्विया जाखड़ के नाम पर ₹7.37 करोड़ जमा होने की जानकारी दी है। ‘ज़ुरखर कैंटोनल बैंक’ की वेबसाइट के अनुसार वह स्विजरलैंड का सबसे बड़ा बैंक है। वर्तमान में सुनील जाखड़ के पास ₹4.49 लाख रुपए नकद और उनकी पत्नी के पास ₹1.38 लाख रुपए नगद है।

उन्होंने हलफनामे में बताया कि उनके पास ₹2.88 करोड़ की अचल संपत्ति (जो स्वयं अर्जित और विरासत में मिली सहित) और उनकी पत्नी के पास ₹12.06 करोड़ की सम्पत्ति है। जाखड़ गुरदासपुर से मौजूदा सांसद हैं, जिनका मुकाबला अभिनेता से राजनेता बने अजय सिंह धर्मेन्द्र देओल (सनी देओल) से है। उन्हें भाजपा ने टिकट दिया है।

₹87.18 करोड़ है अजय सिहं धर्मेन्द्र देओल की संपत्ति

बॉलीवुड अभिनेता अजय सिंह धर्मेन्द्र देओल (सनी देओल) ने सपत्नी अपनी कुल संपत्ति की घोषणा करते हुए इसे
₹87.18 करोड़ बताई है। संपत्ति और देनदारियों पर उनके हलफनामे से यह पता चलता है कि 2017-18 में उनकी कुल आय ₹63.82 लाख, 2016-17 में ₹96.29 लाख और 2015-16 में ₹2.25 करोड़ थी। उन्होंने सपत्नी अपनी संपत्ति ₹87.18 करोड़ बताई है।

राहुल ने स्वीकारा कि कुछ पत्रकार ‘उनके साइड के हैं’ जो मोदी से कड़े सवाल पूछते हैं

वैसे तो तमाम पत्रकारों ने खुद ही अपने व्यवहार से अपनी ‘पक्षकारिता’ साबित की है लेकिन आज राहुल गाँधी की स्वीकृति ने उस पर मुहर भी लगा दी। राहुल गाँधी ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वयं स्वीकार किया कि कुछ पत्रकार उनके साइड के हैं जो विरोधियों से कॉन्ग्रेस पार्टी की ओर से कठिन सवाल पूछने का काम करते हैं।

आज एक तरफ जहाँ बीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस चल रही थी तो ठीक उसी समय राहुल गाँधी भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। उसी समय राहुल ने कहा, “मैंने अभी सुरजेवाला जी से कहा, उधर मोदी जी की प्रेस कॉन्फ्रेंस चल रही है तो जरा कुछ अपने पत्रकार भी भेज दीजिए जो हमारी तरफ से भी 1-2 सवाल पूछ लें, तो सुरजेवाला ने बताया कि दरवाजे वहाँ बंद कर दिए गए हैं।”

संभवतः यहाँ उन्ही पत्रकारों की बात हो रही है जो खुलेआम ‘पक्षकार’ होने के बाद भी ‘न्यूट्रल’ पत्रकार बने हुए हैं। ऐसे पक्षकार लगातार कॉन्ग्रेस की तरफ से पैडलिंग करते पाए जाते हैं जिन्हें राहुल गाँधी ने आज खुलेआम स्वीकार कर इस हकीकत को मान्यता प्रदान कर दी।

राहुल के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यह बहस छिड़ गई कि देखिए कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी खुद स्वीकार रहे हैं कि पार्टी के ‘पाले हुए’ कुछ पत्रकार है जो कॉन्ग्रेस के लिए काम करते हैं।

हमने पहले भी कई बार रिपोर्ट किया गया है कि कैसे कुछ कॉन्ग्रेसी ‘पक्षकार’ फेक न्यूज़ फैलाते, कॉन्सिपिरेसी थ्योरीज़ गढ़ते और यहाँ तक कि कॉन्ग्रेस के इलेक्शन कैम्पेन से लेकर स्ट्रैटजी प्लानिंग में भी खुलेआम अपने चवन्नी छाप विचार रखकर भी ‘निष्पक्ष’ बने हुए हैं।

मोदी ने राहुल का नाम लेकर कहा, ‘दया मत दिखाओ, मेरे माता-पिता की जो भी खबर है, ले आओ’

अक्सर देखने को मिलता है कि कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी कभी संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गले पड़ रहे होते हैं, तो कभी वो रैलियों में उनके नाम की माला जपते देखे जाते हैं। जबकि, इसके विपरीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शायद ही कभी राहुल गाँधी का नाम अपनी जुबान से लेते हैं। एक ओर राहुल गाँधी की मीडिया वार्तालाप से लेकर जनसभाएँ भी जहाँ नरेंद्र मोदी के नाम से शुरू होती हैं, वहीं नरेंद्र मोदी नामदार को लेकर बेखबर ही नजर आते हैं।

हाल ही में राहुल गाँधी ने एक बेहद भावुक भाषण में अपना दुःख व्यक्त करते हुए कहा, “मैं मर जाऊँगा, लेकिन नरेन्द्र मोदी के माँ-बाप के बारे में कभी बात नहीं करूंगा।” हालाँकि, इस पर उन्हें जनता ने सोशल मीडिया जवाब देते हुए कहा था कि बोफोर्स घोटाले में नरेंद्र मोदी के माता-पिता नहीं, बल्कि राजीव गाँधी ही मुख्य आरोपित थे, तो ऐसे में वो नरेंद्र मोदी के माँ-बाप पर आखिर कौन-सी टिप्पणी करना चाहते हैं?

आज ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘न्यूज़ 24’ समाचार चैनल को इंटरव्यू देते हुए पहली कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी का नाम लिया। पीएम मोदी ने कहा, “मैं राहुल गाँधी से आग्रह करता हूँ, अगर मेरे माता-पिता ने कुछ गलत किया हो तो आकर बताइये। मुझ पर दया करने की कोई ज़रूरत नहीं।” उन्होंने ने कहा, “मैं चुनाव आयोग से आग्रह करूँगा की राहुल जी को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने दी जाए, जहाँ वो मेरे माता-पिता के बारे में जो भी बोलना चाहते हैं, वो आकर कहें।”

‘मुझ पर दया करने की कोई ज़रूरत नहीं है’

समाचार चैनल को इंटरव्यू देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “श्रीमान राहुल गाँधी जी, आप कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष हैं, आपको 4-5 पीढ़ी का सार्वजनिक राजनीतिक जीवन का अनुभव है। मैं आज सार्वजनिक रूप से आप से हाथ जोड़कर विनती करता हूँ कि मेरे माता-पिता ने कुछ गलत किया हो, व्यक्तिगत जीवन में गलत किया हो, सामाजिक जीवन में गलत किया हो, तो खुलकर बाहर आकर बताइये। मुझ पर दया करने की कोई ज़रूरत नहीं है। आपके माता-पिता पर न मुझे कुछ कहने का अधिकार है और न इस देश के नागरिक का अधिकार है। लेकिन इस देश के पूर्व प्रधानमंत्री के संबंध में, इस देश के राज परिवार के संबंध में, सार्वजनिक जीवन जीने वाले लोगों को देश में चर्चा करने का हक है।”

इसके अलावा नरेंद्र मोदी ने कठोर शब्दों में कहा, “मैं नहीं चाहूँगा कि मेरे देश में मेरे माता-पिता ने कुछ गलत किया हो और माफ़ कर दे। दया जैसे शब्द बोलकर आप मेरे संस्कार और जमीर को चोट पहुँचा रहे हो। हाँ, उन्होंने मुझे जन्म दिया, ये अगर उन्होंने गलत किया तो आपको खुलकर कहने का अधिकार है।”

‘कॉन्ग्रेस के सामने बस नामदार को बचाने की समस्या है’

प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया कि बीजेपी यह चुनाव पिछले बार से बड़े बहुमत के साथ जीतेगी। इस इंटरव्यू में विपक्ष पर कड़ा हमला करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस के सामने यह समस्या है कि चुनाव की मार के बाद वो नामदार को कैसे बचाएँगे। मेरे दिमाग में चुनाव नतीजे के बाद देश को किस दिशा में ले जाना और कितनी तेजी से ले जाना है, बस यही चलता रहता है, इसके अतिरिक्त मैं कुछ नहीं सोचता।”

फ़ैक्ट-चेक के नाम पर विद्यासागर कॉलेज की हिंसा पर AltNews ने फैलाया झूठ

मंगलवार (14 मई) को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली में हिंसा की ख़बरों के बाद कोलकाता में हड़कंप का माहौल बन गया। इस हिंसा में विद्यासागर कॉलेज में ईश्वर चंद्र विद्यासागर की एक मूर्ति को तोड़ दिया गया। जैसे-जैसे यह मुद्दा बढ़ता गया, वैसे-वैसे इस मामले को लेकर सियासी-खेल भी परवान चढ़ता गया।

जहाँ एक तरफ़, ममता बनर्जी ने बंगाली क्षेत्रीय अराजकतावाद का आह्वान किया, वहीं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में तृणमूल पर हिंसा का आरोप लगाने और मूर्ति तोड़ने के सबूत पेश किए। AltNews ने इसी ख़बर का फ़ैक्ट-चेक करने का दावा किया।

अपने फ़ैक्ट-चेक में, AltNews ने एक ऐसे वीडियो को दिखाया गया जिसमें केवल भाजपा कार्याकर्ता कॉलेज परिसर के अंदर पत्थर फेंकते दिखे। जबकि सच्चाई यह है कि इस हमले की शुरूआत तृणमूल कॉन्ग्रेस ने की थी। इस वीडियो के माध्यम से AltNews ने यह दावा किया कि कॉलेज के अंदर से कोई पत्थर बाहर नहीं फेंका गया।

वहीं, फ़ैक्ट-चेक करने वाली वेबसाइट फ़ैक्ट हंट द्वारा उसी वीडियो को दिखाया गया जिसमें यह स्पष्ट है कि कॉलेज के अंदर से भी पत्थर बाहर फेंके जा रहे थे, यानी कि हमले की शुरूआत कॉलेज के अंदर से की गई थी। फ़ैक्ट हंट का यह वीडियो लगभग 1 मिनट 12 सेकंड का था, जबकि AltNews ने जिस वीडियो को दिखाकर फ़ैक्ट-चेक किया, असल में वो पूरा वीडियो न होकर मात्र 36 सेकंड का था। इसमें AltNews ने बड़ी आसानी से सच्चाई को नज़रअंदाज़ किया और फ़ैक्ट-न्यूज़ के नाम पर बीजेपी को दोषी ठहराने का भरसक प्रयास किया।

सच्चाई सामने आने पर AltNews को ग़लती स्वीकारते हुए अपने लेख को अपडेट करना पड़ा और यह लिखना पड़ा कि पत्थरबाजी कॉलेज के अंदर से भी हुई थी। AltNews ने इस पत्थरबाजी को ‘प्रतिशोध’ का नाम दिया और ऐसा प्रचारित किया कि पथराव की शुरूआत भाजपा के कार्यकर्ताओं ने की थी।


AltNews ने अपने पूरे फ़ैक्ट-चेक में यही सिद्ध करने की कोशिश की कि विद्यासागर कॉलेज में ईश्वर चंद्र विद्यासागर की प्रतिमा को तोड़ने वाले लोग केवल बीजेपी के ही कार्यकर्ता थे।

यह बड़ी हैरानी वाली बात है कि AltNews के इस फ़ैक्ट-चेक का आधार केवल भगवा वस्त्र है। उनके लिए भगवा पहनने वाले सभी लोग केवल भाजपा कार्यकर्ता ही हो सकते हैं। AltNews के पास इतना दिमाग नहीं है कि वो यह भी सोच सकें कि लोगों को बेवकूफ़ बनाने के लिए तृणमूल के गुंडे भी भगवा पहनकर अराजकता फैला सकते हैं।

इस मामले में कौन दोषी है, कौन दोषी नहीं है, यह पता करना पुलिस का काम है, न कि किसी तथाकथित फ़ैक्ट-चेक कंपनी का। AltNews के फ़ैक्ट चेक को देखकर लगता है कि वो टीवी पर आने वाले CID सीरियल को बहुत देखते हैं जहाँ वो ACP प्रद्युम्न और उनकी टीम से काफ़ी प्रेरित हैं। AltNews के संस्थापक और उसकी टीम को गंभीर होकर यह सोचना चाहिए कि यह कोई जासूसी सीरियल नहीं है, बल्कि असल घटना है जिसका दुष्प्रचार कतई नहीं किया जाना चाहिए।

AltNews के सह-संस्थापकों को प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ घृणा फैलाने जैसे अपने निजी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए झूठी ख़बरे फैलाने के लिए जाना जाता है। हाल ही में, प्रतीक सिन्हा ने नरेंद्र मोदी के दोषी सांसदों और विधायकों को जेल भेजने के चुनावी वादे के बारे में झूठ बोला था।

इससे पहले AltNews ने पत्रकार बरखा दत्त के फ़ैक्ट-चेक के क्लिप्ड वीडियो की माँग की। लेकिन दिलचस्प रूप से, उन बिंदुओं को छोड़ दिया, जहाँ वास्तव में घाटी में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार का संदर्भ था। AltNews ने आर्मी से सेवानिवृत्त प्रमुख का भी फैक्ट चेक किया, लेकिन बिना सोचे-समझे आर्मी चीफ़ के पक्ष को नज़रअंदाज़ कर दिया। इसके बाद AltNews ने एक फ़ेक इमेज का फैक्ट चेक करके उसे प्रसारित किया, वो भी बिना सही जानकारी दिए। AltNews के सह-संस्थापक बड़ी आसानी से झूठ फैला कर अपना मंतव्य सिद्ध कर लेते हैं। ऐसा ही उन्होंने कर्नाटक चुनाव से ठीक पहले भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा की एक फ़ेक इमेज साझा करके की थी।

कई युवाओं द्वारा भारत-विरोधी नारे लगाने की ख़बरों को ख़ारिज करने के लिए वेबसाइट ने कुछ अजीबो-गरीब विश्लेषण किया। जबकि बिहार के डीजीपी ने AltNews के दावों को एक सिरे से ख़ारिज कर दिया। हैरान कर देने वाली बात यह है कि AltNews के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा के चेहरे पर एक शिकन भी देखने को नहीं मिलती जब वो अपने फै़क्ट-चेक के फ़र्ज़ी होने के तथ्य से अवगत हो जाते हैं। AltNews और इसके सहयोगियों ने अतीत में भी बिना किसी सबूत के एक प्रत्यक्षदर्शी की बातों को ख़ारिज कर दिया क्योंकि यह उनके कथन के अनुकूल था। उनके द्वारा खुदरा FDI पर बीजेपी के रुख़ के बारे में और ख़ुद OpIndia.com के बारे में भी झूठ फैलाया गया।