Homeराजनीतिमेरे मुँह पर करारा तमाचा पड़ा है, आगे और भी ज्यादा... : प्रकाश राज

मेरे मुँह पर करारा तमाचा पड़ा है, आगे और भी ज्यादा… : प्रकाश राज

प्रकाश राज ने लिखा, “ मेरे मुँह पर करारा तमाचा पड़ा है। आगे और भी ज्यादा गालियाँ, ट्रोलिंग और अपमान का सामना करना पड़ेगा। लेकिन मैं अपनी ज़मीन नहीं छोड़ूँगा। धर्म निरपेक्ष भारत के लिए मेरी लड़ाई जारी रहेगी।"

लोकसभा चुनाव की मतगणना जारी है। अभी तक के रुझान को देखें तो भाजपा ने निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है। रुझानों का परिणाम सामने आते ही प्रकाश राज की हार लगभग तय मानी जा रही है और इसके बाद से ही ट्विटर यूजर्स ने भी एक्टर को ट्रोल करना शुरू कर दिया है। ट्रोलिंग के बीच एनडीए के प्रचंड बहुमत को देखते हुए प्रकाश राज ने खुद ट्वीट करते हुए अपनी हार को स्वीकार कर लिया है।

मतगणना शुरू होने के कुछ ही घंटों बाद अपनी हार को स्वीकार करते हुए एक ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “ मेरे मुँह पर करारा तमाचा पड़ा है। आगे और भी ज्यादा गालियाँ, ट्रोलिंग और अपमान का सामना करना पड़ेगा। लेकिन मैं अपनी ज़मीन नहीं छोड़ूँगा। धर्म निरपेक्ष भारत के लिए मेरी लड़ाई जारी रहेगी। एक मुश्किल सफ़र अभी शुरू हुआ है। इस यात्रा में मेरा साथ देने वालों के लिए शुक्रिया। जय हिंद।”

प्रकाश राज के इस ट्वीट पर लोगों के खूब रिएक्शन्स आ रहे हैं। काफी लोग उन्हें ट्रोल भी कर रहे हैं। लोग उन्हें सांत्वना देते हुए लिख रहे हैं कि ये तो बस शुरुआत है। वहीं कुछ ट्रोल करने वाले लिख रहे हैं कि उनके (प्रकाश राज) पास अभी भी टाइम है, मोदी से नफरत करना छोड़ दें। कुछ ने तो उन्हें डूबकर मर जाने की भी सलाह दे डाली।

प्रकाश राज बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरे थे। इस सीट पर कॉन्ग्रेस के रिजवान अरशद सबसे आगे हैं, वहीं बीजेपी के पीसी मोहन दूसरे नंबर पर हैं। प्रकाश राज को अभी तक की मतगणना के अनुसार 12,000 से भी कम मत प्राप्त हुए हैं। उन्होंने पहले राउंड के आँकड़े जारी होने के तुरंत बाद मैदान छोड़ दिया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘यहाँ मस्जिद थी, है और रहेगी’: संभल दंगे की न्यायिक जाँच आयोग रिपोर्ट में सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का जिक्र 100+ बार, 199 साक्षियों...

संभल दंगों की न्यायिक जाँच आयोग की रिपोर्ट में सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का 100 बार से भी अधिक बार जिक्र। वो भी सबूतों के साथ।

100 नाराज़ ≠ 100 वोट: भारतीय राजनीति में सिर्फ़ ‘नाराज़गी’ का फ़ैक्टर कभी निर्णायक क्यों नहीं रहा

SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।
- विज्ञापन -