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अरुण जेटली के स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया में उड़ी अफवाह निराधार, PIB ने कहा, वह स्वस्थ हैं

पिछले कई दिनों से केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के खराब स्वास्थ्य को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों को सरकारी प्रवक्ता ने खारिज कर दिया है।

प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) के प्रधान महानिदेशक और केंद्र सरकार के प्रवक्ता सितांशु कार ने ट्विटर पर ऐसी सभी रिपोर्ट्स को आधारहीन और कोरी अफ़वाह बताया। उन्होंने ट्वीट में लिखा, ”मीडिया के एक तबके में अरुण जेटली की स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने को लेकर जो खबरें चल रही हैं, वह पूरी तरह गलत और निराधार है।”

PIB के प्रवक्ता ने बताया, “23 मई को जब पार्टी मुख्यालय में बीजेपी बंपर जीत की ख़ुशी में जश्न मना रही थी, तब अरुण जेटली AIIMS से डिस्चार्ज हुए थे। और 24 मई को उन्होंने नई सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले 2019-20 के पूर्ण बजट को लेकर वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ अपने घर पर बैठक की थी।”

अफवाह यह भी उड़ी थी कि अरुण जेटली इस बार वित्त मंत्रालय नहीं संभालेंगे। उनके पिछले तीन सप्ताह से दफ्तर भी नहीं आने के कारण ऐसी अटकलों को आधार मिल गया था।

बता दें कि अरुण जेटली नरेंद्र मोदी सरकार के सबसे अहम नेता हैं और कई मौकों पर वह सरकार के लिए संकट मोचक साबित हुए हैं। लेकिन, खराब स्वास्थ्य के कारण वह अंतरिम बजट भी पेश नहीं कर पाए थे। तभी से उनके ख़राब स्वास्थ्य की ख़बरें लगातार आ रही थी। उस दौरान पीयूष गोयल को वित्त मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया था। इसलिए इस बार पियूष गोयल के वित्तमंत्री बनने की कई अफवाहें उड़ रही थीं। जो अभी तक कि ख़बरों के अनुसार निराधार हैं।

चारा घोटाले में सजायाफ्ता लालू ने RJD की हार के सदमे में छोड़ा दोपहर का खाना, रहते हैं चुप

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव की तबियत बिगड़ गई है। चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता लालू राँची स्थित बिरसा मुंडा कारावास में अपनी सजा काट रहे हैं। फिलहाल स्वास्थ्य ख़राब होने के कारण वह कई महीनों से रिम्स अस्पताल में भर्ती हैं। ताज़ा लोकसभा चुनाव में राजद को एक भी सीट नहीं मिली। कई पार्टियों के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन करने के बावजूद पार्टी का खाता तक नहीं खुला। बिहार में विपक्षी गठबंधन की बात करें तो कॉन्ग्रेस के खाते में सिर्फ़ 1 सीट आई। ख़ुद लालू यादव की बेटी मीसा भारती को पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र से रामकृपाल यादव के हाथों हार का सामना करना पड़ा। तेज प्रताप यादव की बग़ावत से भी पार्टी को ख़ासा नुक़सान पहुँचा।

ख़बरों के अनुसार, लोकसभा में राजद के सफाई और पारिवारिक कलह की वजह से पार्टी सुप्रीमो लालू यादव ने दिन का खाना भी छोड़ दिया है। वह अब ख़ामोश रहते हैं और कम बातें करते हैं। लालू का इलाज कर रहे डॉक्टर उमेश प्रसाद ने कहा,

“बीते दो-तीन दिन में लालू प्रसाद की दिनचर्या बदल गई है। वह नाश्ता करते हैं, रात का खाना खाते हैं, लेकिन दोपहर में खाना नहीं खाते। खाने-पीने का काेई टाइम टेबल नहीं है। इससे इंसुलिन देने में भी दिक्कत आ रही है। अगर जल्दी ही दिनचर्या में सुधार नहीं हुआ ताे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में उनकी काउंसलिंग की जा रही है। उन्हें समझाया जा रहा है कि समय पर भाेजन करें।

चारा घोटाले में 14 वर्षों की सजा काट रहे लालू को रोज 3 इन्सुलिन दी जाती है। उनके खाना न खाने के कारण उन्हें पहले की तरह दवाओं की डोज देने में भी दिक्कतें आ रही हैं। ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी लोकसभा चुनाव में राजद को एक सीट भी न मिली हो। पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद पार्टी 4 सीटें जीतने में कामयाब रही थी।

लालू यादव दर्जनभर बीमारियाें से पीड़ित हैं। उन्हें बहुत दिनों से हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज है। उनकी कार्डियक सर्जरी भी हो चुकी है। उनके हार्ट का वाॅल्व बदला जा चुका है। इसके अलावा वह क्राेनिक किडनी फेल्याेर (स्टेज थ्री) से भी पीड़ित हैं। इसके अलावा उन्हें प्राेस्टेट, हाइपर यूरीसिमिया, पेरिनियल इंफेक्शन, किडनी स्टाेन और फैटी लीवर की समस्या भी है। डॉक्टरों ने उनकी दिनचर्या को लेकर आगाह किया है कि इससे उनकी स्थिति और बिगड़ सकती है।

हाल ही में राजद के प्रदेश अध्यक्ष अभय सिंह और उनकी बायोग्राफी लिखने वाली नलिन वर्मा ने उनसे भेंट की। अभय सिंह ने बताया कि लालू को ठीक से नींद नहीं आती और वह सो नहीं पा रहे हैं। लालू बार-बार हतोत्साहित न होने की भी बात कहते हैं।

‘खून बहाने’ की धमकी देने वाले कुशवाहा की पार्टी का अस्तित्व संकट में, सभी विधायक JDU में शामिल

बिहार में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अस्तित्व पर ही संकट के बादल मँडराने लगे हैं। लोकसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस, राजद, वीआईपी और हम जैसी पार्टियों के साथ गठबंधन के बावजूद इन सभी पार्टियों को बुरी हार का सामना करना पड़ा। ख़ुद रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा दोनों ही सीटों से हार गए। कुशवाहा ने मतगणना से पहले इच्छित परिणाम न आने पर ख़ून-ख़राबे की धमकी भी दी थी। रामविलास पासवान ने उनके बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘जैसे को तैसा’ जवाब देने की बात कही थी। अब रालोसपा के सारे विधायक और विधान पार्षद जनता दल यूनाइटेड में शामिल हो गए हैं।

रालोसपा के 2 विधायक और एक विधान पार्षद जदयू में शामिल हो गए। विधायक ललन पासवान, सुधांशु शेखर और विधान पार्षद संजीव सिंह श्याम के जदयू में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा हो गई है। दोनों विधायकों के जदयू में शामिल होने के बाद नीतीश कुमार की पार्टी के विधायकों की संख्या बढ़ कर 73 हो गई है। बता दें कि 2015 विधानसभा चुनाव में राजद और जदयू, दोनों दलों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और राजद को 80 सीटें आई थीं। रालोसपा के ये सभी विधायक कुशवाहा के राजग छोड़ कर महागठबंधन में आने से नाराज़ थे।

नीतीश कुमार की जदयू ने इस लोकसभा चुनाव में 17 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिनमें से उसे 16 पर जीत मिली। बिहार में राजग ने एक तरह से महागठबंधन का सफाया ही कर दिया। रालोसपा की स्थापना उपेंद्र कुशवाहा ने 2013 में जदयू से अलग होने के बाद की थी। राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने 2014 में भाजपा के साथ मिलकर लोकसभा का चुनाव लड़ा था और पार्टी को तीनों सीटों पर विजय मिली थी।

उसके बाद उपेंद्र कुशवाहा को मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री बनाया गया था लेकिन 2019 के चुनाव से ठीक पहले सीटों की संख्या को लेकर उनकी बात राजग से नहीं बनी और वे महागठबंधन का हिस्सा बन गए। महागठबंधन ने उन्हें 5 सीटें दीं लेकिन पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई। कुशवाहा को ख़ुद उजियारपुर और काराकाट से बुरी हार मिली। काराकाट में जदयू के महाबली सिंह ने उन्हें 84,500 से भी अधिक मतों से मात दी। वहीं उजियारपुर में कुशवाहा को बिहार भाजपा के अध्यक्ष नित्यानंद राय ने पौने 3 लाख से अभी अधिक मतों से हराया।

मृतक सुरेंद्र के बच्चों की जिम्मेदारी स्मृति ईरानी ने ली, अमेठी पहुँच कर अर्थी को दिया कंधा

अमेठी में केंद्रीय मंत्री और वहाँ की सांसद स्मृति ईरानी के क़रीबी भाजपा नेता की हत्या के बाद इसमें राजनीतिक रंजिश की बात कही जा रही है। मृतक सुरेंद्र सिंह के परिवार ने कहा है कि उन सभी ने मिल कर ‘दीदी’ को जिताने के लिए प्रचार किया, इसी का बदला लिया गया। मृतक की पत्नी रुक्मणि देवी ने कहा है कि स्मृति ईरानी ने उनसे मिल कर उनके बच्चों का अपने बच्चों की तरह ख्याल रखने की बात कही है। रुक्मणि देवी ने कहा कि स्मृति ईरानी ने उनके बच्चों को सुरक्षा देने का भी आश्वासन दिया। स्मृति ईरानी ने अमेठी के बरौली गाँव के पूर्व प्रधान मृतक सुरेंद्र सिंह के शव को कंधा दिया और परिवार से मिल कर उन्हें ढाँढस बँधाया।

बता दें कि उत्तर प्रदेश के अमेठी से नवनिर्वाचित सांसद स्मृति ईरानी के करीबी माने जाने वाले भाजपा कार्यकर्ता और बरौलिया गाँव के पूर्व प्रधान सुरेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। जानकारी के मुताबिक, शनिवार (मई 25, 2019) की रात सोते हुए सुरेंद्र सिंह पर अज्ञात बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोली बरसा कर हत्या कर दी। गोली लगने से घायल सुरेंद्र सिंह को लखनऊ ट्रामा सेंटर ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।

अमेठी पहुँचीं स्मृति ने कहा कि सुरेंद्र 1977 से ही पार्टी के ज़मीनी कार्यकर्ता थे। अमेठी में पार्टी की जीत का जश्न मनाने के बाद उनकी हत्या को स्मृति ईरानी ने बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, “पूरी भाजपा और पार्टी के सभी कार्यकर्ता सुरेंद्र के परिवार के साथ हैं। हम चाहते हैं कि परिवार को न्याय मिले। गोली चलाने और चलवाने वालों को मृत्यु दंड दिया जाना चाहिए। आवश्यकता पड़ी तो न्याय के लिए उच्चतम न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाएँगे। यह वारदात अमेठी को आतंकित करने के लिए अंजाम दी गई है।“

सुरेंद्र सिंह की हत्या की वजह राजनीतिक रंजिश बताई जा रही है। पुलिस ने पुरानी रंजिश के कारण उनके मारे जाने की भी आशंका जताई है। कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने सीमाओं को सील कर तलाशी अभियान तेज कर दिया है। अतिरिक्त सुरक्षा के लिए गाँव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

30 मई को दोबारा प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे नरेंद्र मोदी, कई केंद्रीय मंत्री भी लेंगे शपथ

बीजेपी संसदीय दल के नेता चुने जाने के बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 30 मई को राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया जाएगा।

राष्ट्रपति भवन ने ट्वीट कर जानकारी देते हुए बताया, “राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 30 मई को शाम 7 बजे राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएँगे।”

इससे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भाजपा और राजग संसदीय दल नेता नरेंद्र मोदी को शनिवार (मई 25, 2019) को केंद्र में नई सरकार बनाने का न्यौता दिया था।

बता दें कि भारतीय जनता पार्टी और इसकी अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ओर से नरेंद्र मोदी को सर्वसम्मति से अपना नेता चुने जाने के बाद मोदी सरकार बनाने का दावा पेश करने शनिवार रात राष्ट्रपति भवन गए।

मोदी ने बाद में राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में संवाददाताओं को बताया कि राष्ट्रपति ने उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त करते हुए नई सरकार का गठन करने को कहा है। उन्होंने कहा, “भारत के लिए विश्व में काफी अवसर हैं, सरकार उनका पूरा इस्तेमाल करने के लिए काम करेगी और एक पल के लिए भी आराम नहीं करेगी।”

मिलिए ओडिशा के उस BJP सांसद से जो साधु बनना चाहते थे, सादगी के कायल हो रहे लोग

सोशल मीडिया पर एक तस्वीर ख़ूब वायरल हो रही है। ये तस्वीर देखने पर तो किसी ग़रीब किसान की लगती है लेकिन आप यह जान कर चौंक जाएँगे कि धोती और गमछे में लिपटा यह व्यक्ति सांसद है। ये तस्वीर है भाजपा सांसद प्रताप चंद्र सारंगी की। सारंगी ने ओडिशा के बालासोर से जीत दर्ज की है। ओडिशा में भाजपा ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की है, वहीं राज्य की सत्ताधारी पार्टी बीजद ने 12 सीटों पर जीत दर्ज किया। बालासोर में प्रताप सारंगी का मुक़ाबला बीजद के रविंद्र कुमार जेना और कॉन्ग्रेस के नवज्योति पटनायक से था। सारंगी ने सर्वाधिक 4,83,858 मत पाकर जेना को 12,000 से भी अधिक मतों से हराया।

ओडिशा और बंगाल में भाजपा का प्रदर्शन काफ़ी शानदार रहा और पार्टी ने पिछले चुनाव के मुक़ाबले अच्छी बढ़त दर्ज की। सांसद चुने जाने से पहले प्रताप चंद्र सारंगी ओडिशा के नीलगिरी विधानसभा से 2004 और 2009 में विधायक चुने जा चुके हैं। इससे पहले वह 2014 के लोकसभा चुनाव में भी खड़े हुए थे, लेकिन तब उन्‍हें हार मिली थी। प्रताप सारंगी को नरेंद्र मोदी का करीबी माना जाता है। ख़बरों के अनुसार, मोदी जब भी ओडिशा आते हैं, तो सारंगी से मुलाकात जरूर करते हैं।

नीलगिरि के गोपीनाथपुर में जन्मे सारंगी बचपन से आध्यात्मिक हैं और रामकृष्ण मठ में साधु बनना चाहते थे। मठ ने उन्हें उनकी विधवा माँ की सेवा करने का सुझाव दिया। सारंगी ने बालासोर और मयूरभंज के आदिवासी इलाकों में कई स्‍कूल बनवाए हैं। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरों को काफ़ी सम्मान के साथ शेयर किया जा रहा है।

समुदाय विशेष के ‘लिबरल’ पत्रकार ने मोदी की जीत पर मसूद अजहर को कहा: Thank You!

मोदी पर कालिख पोत-पोत कर उससे अपना कैरियर चमकाने वाले राजदीप सरदेसाई ने एक बार फिर मोदी के खिलाफ मीठा जहर उगला है। उनके अनुसार मोदी को अपनी जीत के लिए अमित शाह जैसे मित्रों और राहुल गाँधी जैसे कमजोर विपक्ष के साथ-साथ जैश-ए-मोहम्मद के सरगना और पुलवामा के षड्यंत्रकर्ता मौलाना मसूद अजहर का भी शुक्रगुज़ार हो उन्हें शुक्रिया करना चाहिए। राजदीप का यह बेतुका ज़हरीला सोच एक वीडियो के जरिए बाहर आया है।

ऊपरी तौर पर यह सामान्य सा व्यंग या हँसी-मजाक लग सकता है, लेकिन राजदीप सरदेसाई की बात को परिप्रेक्ष्य में समझा जाए तो मामला कुछ और ही हो जाता है। फर्जी लिबरल बन घूमने वाले पत्रकारिता के समुदाय विशेष के लोगों को यह तो बहुत दिनों से समझ में आ गया था कि ‘अमन की आशा’ का उनका पाकिस्तान-प्रेम वाला तमाशा जनता अब और नहीं झेलने वाली। तो उन्होंने दूसरा ही पैंतरा चलना शुरू कर दिया और भाजपा पर आतंकवाद के मुद्दे को, सेना के मुद्दे को ‘भुनाने’ का आरोप लगाने लगे। राजदीप का यह कथ्य भी उसी कथानक में है कि मोदी पुलवामा हमले और बालाकोट में दिए गए मुँहतोड़ जवाब के चलते ‘उभरे’ राष्ट्रवाद से जीत गए, वरना न जीतते।

राजदीप ने अपना 30 साल का कैरियर जिस तरह के प्रोपेगेंडा से बनाया है उसे देखते हुए यह बहुत आश्चर्यजनक नहीं है। एक तरफ वह खुद बार-बार मोदी को 2002 में नाहक लपेटते रहे और उसके बाद मनु जोसेफ के साथ साक्षात्कार में यह मानना पड़ा कि मोदी को दंगों के लिए दोषी ठहराना गलत था। इसके अलावा वह कॉन्ग्रेस नेता चिदंबरम के साथ भी अफस्पा के खिलाफ भ्रम पैदा करते पकड़े गए थे।

रोजा इफ्तार में न बुलाए जाने के कारण तीन मासूम बच्चों की गोली मारकर हत्या

रोजा इफ्तार में न बुलाए जाने के कारण बुलंदशहर, मेरठ (उत्तर प्रदेश) के सलेमपुर क्षेत्र में होस्ट परिवार के तीन बच्चों की गोली मार कर निर्ममता से हत्या कर दी गई। मृतकों में अब्दुल (8), आसमा (7) और अलीबा (8) वर्ष उम्र के तीन बच्चे शामिल हैं। जिनमें से दो लड़कियाँ और एक लड़का है। इतना ही नहीं बल्कि हत्या के बाद बच्चों के शव घटनास्थल से 15 किलोमीटर दूर ले जाकर सलेमपुर ठाणे के अंतर्गत आने वाले धतूरी गाँव एक कुएँ में फेंक दिए गए। हत्या का खुलासा तब हुआ जब बच्चों की लाश शनिवार सुबह पुलिस ने कुएँ से बरामद किया।

मीडिया में खबरों के अनुसार परिवार को शक है कि रोजा इफ्तार पर न बुलाए जाने से नाराज एक रिश्तेदार मलिक ने दो अन्य लोगों बिलाल और इमरान के साथ घटना को अंजाम दिया है। पुलिस की छानबीन जारी है। इसके बाद ही घटना की सही तस्वीर सामने आ पाएगी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पूरा मामला कुछ यूँ है कि तीनों बच्चों की हत्या कर शव दूर ले जाकर सलेमपुर धतूरी में फेंक दिया जाता है और पुलिस को भनक तक नहीं लगती है। यहाँ सवाल यह भी है कि अगर स्थानीय लोग शवों की सूचना नहीं देते तो क्या पुलिस उन्हें बरामद कर पाती।

कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह भी कहा जा रहा है कि आरोपित ने कुछ दिन पहले भी पिस्टल दिखाकर पीड़ित परिवार को धमकी भी दी थी। खैर, आरोपित जो भी हो उसे जल्द से जल्द सलाखों के पीछे होना चाहिए जो मात्र रोजा इफ्तार पार्टी में न बुलाए जाने से आहत होकर तीन मासूमों की जान लेने जैसा जघन्य अपराध कर सकता हो। पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है।

हालाँकि, पुलिस का यह भी कहना है कि उन्हें इस मामले में सूचना देर से दी गई। और थोड़ी लापरवाही पुलिस की तरफ से भी हुई है। फिर भी, तीन बच्चों के मर्डर के मामले में एसएसपी एन कोलांचि ने कहा कि हमने लापरवाही बरतने के ज़िम्मेदार लोगों पर त्वरित कार्रवाई की है। एसएसपी ने नगर कोतवाल ध्रुव भूषण दूबे और मुंशी अशोक कुमार शर्मा को इस मामले में लापरवाही बरतने के कारण निलंबित कर दिया है।

MP कॉन्ग्रेस में बगावत: कमलनाथ के मंत्री ने कहा ‘महाराज’ सिंधिया को बनाया जाए CM

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस की करारी हार के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ के ख़िलाफ़ बग़ावत के स्वर उठ रहे हैं। इसमें अब राज्य की एक कैबिनेट मंत्री का नाम भी शामिल हो गया है। मध्य प्रदेश की बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने कहा कि अब ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्यमंत्री बनाने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि अपने छोटे से कार्यकाल में राज्य सरकार ने विकास के लिए बहुत कुछ करने का प्रयास किया लेकिन लोकसभा चुनावों के बाद लगता है कि कहीं न कहीं कुछ कमी रह गई है। माना जा रहा है कि राज्य में सत्ता के दो केंद्र होने से बचने के कारण सिंधिया को यूपी का प्रभार दिया गया था।

इमरती देवी के बयान के बाद पार्टी में हलचल तेज़ हो गई। उन्होंने कहा कि पार्टी के नेतृत्व को अब सिंधिया को कमान देने के विषय में सोचना चाहिए। उन्होंने राहुल गाँधी से ‘महाराज’ को प्रदेश की कमान देने की माँग की। सिंधिया के समर्थन में उन्होंने आगे कहा, “मैं महाराज सिंधिया से बात करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही हूँ। गुना-शिवपुरी सीट से ज्योतिरादित्य सिंधिया की हार की वजह ईवीएम में गड़बड़ी भी हो सकती है।” इमरती देवी के बाद कई अन्य नेताओं ने भी बग़ावती तेवर दिखाए।

कमलनाथ मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी हैं, ऐसे में राज्य में कॉन्ग्रेस के कोषाध्यक्ष गोविन्द गोयल ने भी उन्हें हार की ज़िम्मेदारी लेने को कहा है। उन्होंने कहा कि कमलनाथ ने पहले ही कहा था कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके पास पार्टी के लिए समय नहीं रहेगा। बता दें कि कमलनाथ ने चुनाव से पहले राज्य कैबिनेट के मंत्रियों को अपने-अपने क्षेत्रों में कॉन्ग्रेस को बढ़त दिलाने को कहा था। मुख्यमंत्री ने पार्टी को घाटा होने की स्थिति में मंत्रियों पर कार्रवाई करने की बात भी कही थी।

विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस के बाग़ी हुए नेता निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह ठाकुर ने भी कहा कि पार्टी का कमजोर संगठन और ग़लत प्रत्याशी चयन हार का बड़ा कारण रहा। उन्होंने कहा कि खंडवा सीट पर अरुण यादव और भोपाल सीट पर दिग्विजय सिंह को उतारना पार्टी का ग़लत फैसला था। अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं जैसे लक्ष्मण सिंह और पीसी शर्मा ने भी बग़ावती तेवर दिखाते हुए बयान दिए। बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ख़ुद लगभग सवा एक लाख मतों से गुना लोकसभा सीट से हार चुके हैं।

Padm Shri से सम्मानित गोसेवा करने वाली जर्मन महिला को सुषमा दिलाएँगी वीसा

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित फ्रेडरिक इरीना ब्रूनिंग के वीजा की अवधि को बढ़ाने से इनकार करने पर अपने अधिकारियों से रिपोर्ट माँगी है। फ्रेडरिक का वीजा अगले महीने की 25 तारीख को समाप्त होने वाला है। 61 वर्षीय फ्रेडरिक इरीना ब्रूनिंग जर्मनी की रहने वाली है और वो पिछले 42 वर्षों से भारत में रहकर गौसेवा कर रही हैं। इन्हें सुदेवी दासी गोवर्धन के रुप में भी जाना जाता है। गौसेवा करने के लिए फ्रेडरिक को इसी साल 16 मार्च को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के हाथों पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

दरअसल, फ्रेडरिक भारत में ही रहना चाहती है और गौसेवा करना चाहती है। इसलिए उन्होंने वीजा बढ़ाने का आवेदन किया था, लेकिन विदेश मंत्रालय के लखनऊ ऑफिस में बिना कोई कारण बताए उनका आवेदन खारिज कर दिया गया है। जिसके बाद फ्रेडरिक एरीना ने कहा कि वो अपना पद्म श्री सम्मान वापस करना चाहती है। पुरस्कार लौटाने की बात पर एरिना का कहना है कि जब वो भारत में रहकर गायों की देखभाल नहीं कर सकती, तो फिर इसे रखने का क्या मतलब है? वो कहती हैं कि उन्‍हें पद्म श्री लौटाकर बहुत दुख होगा लेकिन अगर वीजा आवेदन को खारिज किया जाता रहा तो उनके पास इसे लौटाने के अलावा और कोई विकल्प भी नहीं है।

पाँच बीघा क्षेत्र में फैले सुरभि गौशाला का संचालन कर रही सुदेवी ने 1,500 से भी अधिक गायों को पाल रखा है, जिनकी वह लगातार देखभाल करती हैं। इन गायों में से अधिकतर बीमार, नेत्रहीन या अपाहिज हैं। इनमें से 52 गायें नेत्रहीन है जबकि 350 पैरों से अपाहिज है। उनके पैरों की नियमित मरहम-पट्टी की जाती है।