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गौ तस्करी में आरिफ़, क़ासिम और यासीन गिरफ़्तार, लंबे समय से थे फ़रार

नोएडा पुलिस ने तीन गौ तस्करों को गिरफ़्तार किया है। इन तीनों पर 25-25 हज़ार की इनामी राशि घोषित की गई थी। गौ तस्करों की गिरफ़्तारी को नोएडा पुलिस की एक बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है। ख़बर के अनुसार, ये तीनों गौ तस्कर लंबे समय से फ़रार थे। इनकी पहचान आरिफ़, क़ासिम और यासीन के रूप में हुई है।

पुलिस अधिकारी के अनुसार, नोएडा थाना सेक्टर-20 की पुलिस और स्वाट-1 व स्वाट-2 की संयुक्त टीमों ने नोएडा सेक्टर-8 की रेड लाइट से इन तीनों की गिरफ़्तारी की। इनके पास से 10 ज़िंदा कारतूस समेत तीन तमंचे भी बरामद किए। बता दें कि गिरफ़्तार किए गए इन तीनों तस्करों पर खुर्जा, बुलंदशहर और अलीगढ़ में 50 से अधिक मुकदमें दर्ज हैं। इसी वजह से इन तीनों पर 25-25 हज़ार की इनामी राशि घोषित की गई थी। इन तीनों का काम गौ वंश की तस्करी करना था।

इन तीनों तस्करों के बारे में कहा जाता है कि ये बहुत शातिर हैं, ये लोग कई वर्षों से गौ तस्करी से जुड़े हुए थे। इनके ऊपर गौ हत्या के भी मामले दर्ज हैं। अक्सर ये तीनों पुलिस की आँखों में धूल झोंक कर भाग जाते थे। ये तीनों कुख़्यात तस्कर खुर्जा, बुलंदशहर और अलीगढ़ में गौ तस्करी का काम काफ़ी लंबे समय से करते आ रहे थे।

इससे पहले भी गौ तस्करी के कई मामले सामने आ चुके हैं। कई जगहों पर ये गौ तस्कर इतने हिंसक हो जाते हैं कि पुलिस पर वार करने तक से नहीं चूकते, उन पर गोलीबारी की भी घटनाएँ सामने आ चुकी हैं।

ऑस्ट्रेलिया में नहीं है EVM जैसी अच्छी प्रणाली: ऑस्ट्रेलियाई राजनयिक ने माना EC का लोहा

विपक्षी दलों द्वारा लगातार ईवीएम को लेकर ग़लतफ़हमियां फैलाई गई हैं, जिसे चुनाव आयोग भी कई बार नकार चुका है। अब ऑस्ट्रेलिया के राजनयिक ने भी ईवीएम को लेकर बयान दिया है और बैलेट पेपर से इसकी तुलना करते हुए इसे बेहतर बताया है। ऑस्ट्रेलियाई राजनयिक ने भारत में ईवीएम से चुनाव मतदान कराने की प्रक्रिया को जानने और परखने के अनुभव को प्रेरणादायी बताया। राजनयिक हरिंदर सिद्धू ने कहा कि भारत की विशाल जनसँख्या को देखते हुए यहाँ बैलेट पेपर से मतदान कराना एक दुष्कर कार्य हो सकता है। इससे विपक्षी दलों के उन नेताओं को झटका लगना तय है, जो लगातार यह कहते हैं कि विदेशी राष्ट्र ईवीएम की व्यवस्था पर यकीं नहीं करते और बैलेट पेपर से मतदान को बेहतर मानते हैं। ऑस्ट्रेलियाई राजनयिक ने खुल कर ईवीएम का समर्थन किया।

हरिंदर सिद्धू ने ईवीएम से मतदान की व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए कहा, “भारत में ईवीएम आधारित मतदान की अच्‍छी प्रणाली है। यह पूरी तरह से व्‍यवस्थित है। चुनाव आयोग और उनके कर्मचारियों ने लोकसभा चुनाव 2019 को कुशलतापूर्वक संपन्‍न कराकर सराहनीय काम किया है। ऑस्‍ट्रेलिया में ये सुविधा उपलब्‍ध नहीं है।” सिद्धू ने ईवीएम की तारीफ़ करते हुए इससे वीवीपैट प्रणाली को जोड़े जाने को एक अच्छी पहल बताया। वहीं बैलेट पेपर की बात करते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी चुनाव प्रणाली पूरी तरह से दोषमुक्त नहीं है, सबमें कुछ न कुछ त्रुटियाँ हैं। सिद्धू ने कहा कि भारत ने वीवीपैट के विकास का कार्य कर सराहनीय कार्य किया है, जिससे गड़बड़ियों से बचा जा सकेगा।

बता दें कि भारत में विपक्षी दलों के नेताओं ने ईवीएम की व्यवस्था हटाने को लेकर चुनाव आयोग से लेकर अदालत तक के दरवाज़े खटखटाए थे। हाल ही में उन्होंने ईवीएम व वीवीपैट की 50% पर्चियों का मिलान करने की माँग की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। चुनाव आयोग लगातार कहता आ रहा है कि ईवीएम को हैक नहीं किया जा सकता और मामूली गड़बड़ियों को हैकिंग कहना सही नहीं है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि भाजपा ईवीएम में गड़बड़ियाँ कर चुनाव जीतती है। कभी-कभार ब्लूटूथ और वाई-फाई से भी ईवीएम को हैक करने की ख़बरें फैलाई जाती रही हैं।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तो यहाँ तक कहा था कि पूँछ इलाके में ईवीएम में कॉन्ग्रेस का बटन ही नहीं कार्य कर रहा है। ऑस्ट्रेलियाई राजनयिक ने न सिर्फ़ ईवीएम की तारीफ़ की बल्कि इतने बृहद स्तर पर इतने संगठित व अच्छे तरीके से चुनाव आयोजित कराने के लिए भारतीय चुनाव आयोग की भी प्रशंसा की। एक अनुभवी विदेशी राजनयिक द्वारा इस तरह से भारतीय मतदान प्रणाली की प्रशंसा करना बताता है कि चुनाव आयोग सही तरीके से कार्य कर रहा है।

सिंगापुर में जन्मीं हरिंदर सिद्धू पिछले 3 वर्षों से भारत में ऑस्ट्रेलिया की राजदूत के रूप में कार्य कर रही हैं। वह बॉलीवुड फिल्मों की फैन हैं और उन्हें भारत के इतिहास व संस्कृति में अच्छी रूचि है। हिंदी और पंजाबी भाषा बोलने में सक्षम सिद्धू के माता-पिता बचपन में ही ऑस्ट्रेलिया चले गए थे। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी से लॉ एवं इकोनॉमिक्स की डिग्री हासिल की है।

कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं और मंत्री के बीच झड़प, मारपीट के बाद BJP नेता अस्पताल में भर्ती

हरियाणा में छठे चरण के मतदान के दौरान कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने हंगामा खड़ा किया। राज्य के सहकारिता मंत्री और भाजपा नेता मनीष ग्रोवर ने बताया कि वो अपने कार्यालय में बैठे हुए थे, तभी उन्हें सूचना मिली कि विश्वकर्मा स्कूल के सामने बूथ संख्या 143-144 पर कॉन्ग्रेस नेता भारत भूषण बतरा, जोजो व अन्य 20 लोग घुसे हुए थे। ग्रोवर के अनुसार, जब उन्होंने वहाँ जाकर उनको रोका तो झड़प हो गई। ग्रोवर ने कहा कि उनके प्रयासों के बाद कॉन्ग्रेस नेताओं को बाहर निकाला जा सका। वहीं दूसरी तरफ़ मतदान केंद्र पर मंत्री ग्रोवर के पहुँचते ही पूर्व विधायक बतरा ने उन्हें वहाँ से जाने को कहा और पूछा कि आप यहाँ क्या कर रहे हैं? ग्रोवर द्वारा कड़ाई से जवाब देने के बाद दोनों में झड़प हो गई और माहौल तनावपूर्ण बन गया।

कॉन्ग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा ने रोहतक में मनीष ग्रोवर पर बूथ कैंचरिंग के आरोप लगाए हैं। मंत्री ने इसे हताशा में लगाया गया आरोप करार दिया। अधिकारी यश गर्ग को एक ज्ञापन देकर हुड्डा ने ग्रोवर पर बूथों पर जाकर गड़बड़ियाँ करने का आरोप मढ़ा। दीपेंद्र हुड्डा ने कहा, “मंत्री मनीष ग्रोवर एक बाहुबली के साथ बिनी किसी अनुमति के बूथ पर जा रहे हैं और वहाँ मतदाताओं को धमका रहे हैं। रोहतक में सरासर लोकतंत्र की हत्या हो रही है।” हुड्डा ने उक्त बाहुबली पर अपने समर्थकों को जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया। हुड्डा ने अदालत जाने की भी धमकी दी है।

दीपेंद्र हुड्डा रोहतक से चौथी बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले उन्होंने 2005, 09 और 14 में यहाँ से जीत दर्ज की थी। हुड्डा परिवार का पारम्परिक गढ़ माने जाने वाले रोहतक से उनके पिता भूपेंद्र सिंह हुड्डा 4 बार सांसद रह चुके हैं। इस सीट से प्रथम लोकसभा चुनाव जीतने वाले रणबीर सिंह हुड्डा दीपेंद्र के दादा थे। गढ़ बचाने की चुनौती का सामना कर रहे हुड्डा परिवार के लिए कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने भी रोड शो किया।यहाँ उनकी टक्कर भाजपा के अरविन्द शर्मा से है, जो चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए हैं।

हुड्डा के इन आरोपों के बाद भारी संख्या में पुलिस बन तैनात किए गए और डीसी ऑफिस को भी छावनी में तब्दील कर दिया गया। वहीं फतेहाबाद में बूथ नंबर 79 पर भाजपा और कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं में लड़ाई हुई। भाजपा के जिला उपाध्यक्ष हरमेश शर्मा और वार्ड नंबर 2 के कांग्रेसी पार्षद नरेश शर्मा बूथ के अंदर आपस में भिड़ गए। दोनों को ही इस झड़प के बाद चोटें आईं। भाजपा जिला उपाध्यक्ष को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनका आरोप है कि कॉन्ग्रेस नेता वोटरों को मतदान केंद्र पर बरगला कर वोट डलवा रहे थे, जब उन्होंने रोका तो उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्षद नरेश शर्मा पर हमला करने का आरोप लगाया।

हरियाणा में दोपहर एक बजे तक 37 प्रतिशत के आसपास वोटिंग हुई है। भले ही यह लोकसभा चुनाव हो लेकिन इसे मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के पिछले साढ़े चार सालों के परफॉरमेंस की परीक्षा माना जा रहा है। जहाँ कॉन्ग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा के बल पर चुनाव में उत्तरी है, भाजपा ने मोदी-खट्टर सरकारों के अच्छे परफॉरमेंस को मुद्दा बनाया है।

जब नर्स ही बन जाए हत्यारा: 300 मरीज़ों को मौत के घाट उतारने वाला शख़्स

जर्मनी में डेलमेनहॉर्स्ट अस्पताल के आईसीयू में नील्स होगेल नामक एक नर्स रेफरेंस लेटर के साथ पहुँचा। इस पत्र में उसकी ‘कर्तव्यनिष्ठा’ से संबंधित ब्यौरा दर्ज था। वह पहले ओल्डेनबर्ग के अस्पताल में काम करता था। ओल्डेनबर्ग के अधिकारियों द्वारा पत्र में ऐसा कोई संकेत नहीं दिया गया था कि नर्स, नील्स होगेल की ड्यूटी के दौरान अस्पताल में कितने मरीज़ों की मौत हुई थी।

इसके अलावा इस बात का भी उल्लेख नहीं था कि जब वो वहाँ कार्यरत था, तो अधिकारियों ने उसे रोगियों से सम्पर्क करने तक से रोक दिया था। काफ़ी समय बाद इस बात पर ग़ौर किया गया कि होगेल की देखरेख में चार महीनों के भीतर, एक मरीज़, ब्रिजिट ए की मृत्यु हो गई। इसके बाद हान्स एस, क्रिस्टोफ के और जोसेफ जेड की भी मृत्यु हो गई। जर्मनी के इतिहास में 42 साल के होगेल की पहचान आज सीरियल किलर के रूप में दर्ज़ हो गई है। अधिकारियों को संदेह है कि 2000 के बाद के वर्षों में क़रीब 300 मरीज़ उसके हाथों मौत के घाट उतारे जा चुके हैं।

बहरहाल, अधिकारियों को इस बात की पुष्टि करने के लिए लगभग एक दशक से अधिक समय लगा। होगेल ने 43 लोगों की हत्या करने की बात तो स्वीकार कर ली है, साथ ही अन्य 52 लोगों को मारने से भी इनकार नहीं किया। लेकिन, अन्य पाँच लोगों को मारने से इनकार किया है।

क्रिश्चियन मारबैक (जिनके दादा होगेल के शिकार थे) ने कहा, “अगर यह संभव है कि जर्मनी में 15 वर्षों में 300 से अधिक मौतों का राज़ कालीन के नीचे दफ़्न है, तो और क्या संभव होना बाक़ी है?”

फ्रैंक लाक्सटरमैन, जिन्होंने होगेल के साथ काम किया है उनका कहा कि होगेल ने दो रोगियों की हत्या करने के अलावा और चार अन्य की भी हत्याएँ की थी। 2006 के बाद से उनका यह तीसरा परीक्षण था। इस बार, उनके ऊपर 100 अन्य मरीज़ों की हत्या का आरोप है।

न्यायाधीश ने होगेल के पूर्व सहयोगियों में से आठ की भी जाँच करने का आदेश दिया है क्योंकि इसका संदेह है कि उन्होंने अदालत में झूठ बोला था। अस्पताल के अधिकारियों द्वारा स्पष्ट लापरवाही के ख़ुलासे से पहले ही अन्य आपराधिक जाँच शुरू हो चुकी है। डेलमेनहॉर्स्ट अस्पताल के दो डॉक्टरों और दो हेड नर्सों पर हत्या का आरोप लगाया गया था। जून में उनके मामले में फैसला आने के बाद वो शायद होगेल के मुकदमे में अपनी गवाही दे सकते हैं।

बिहार में मतदान के दौरान फायरिंग: BJP नेता को लगी गोली, RJD नेता हिरासत में

लोकसभा चुनाव के 6ठे चरण के मतदान के दौरान बिहार से हिंसक झड़प की घटना सामने आई है। मामला महाराजगंज लोकसभा क्षेत्र से जुड़ा है, जिससे सटे छपरा के इसुआपुर में फायरिंग की घटना हुई। इस घटना में गोली लगने से इसुआपुर के जिला पार्षद प्रियंका सिंह के देवर और भाजपा नेता प्रमोद सिंह जख्मी हो गए। जख्मी प्रमोद सिंह को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। भाजपा नेता प्रमोद सिंह को गोली मारने का आरोप राजद विधायक मुंद्रिका राय पर लगा है। इसके साथ ही उन पर महराजगंज के राजद प्रत्याशी के पक्ष में वोटरों के बीच पैसा बाँटने का भी आरोप है। पुलिस राजद विधायक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

जानकारी के मुताबिक, शनिवार (मई 11, 2019) को महाराजगंज लोकसभा क्षेत्र स्थित इसुआपुर के सतासी गाँव में राजद के विधायक मुंद्रिका राय और भाजपा नेता प्रमोद कुमार सिंह के बीच राजनीतिक चर्चा को लेकर विवाद हो गया। ये विवाद इतना बढ़ गया कि गोलियाँ चलने लगीं, जिसमें भाजपा नेता को गोली लग गई। वो बुरी तरह घायल हो गए। इस घटना से प्रमोद सिंह के समर्थक काफी आक्रोशित हो गए। उन्होंने राजद विधायक को बंंधक बनाकर बुरी तरह पीटा।

सारण के एसपी हर किशोर राय बंधक बनाए गए विधायक को किसी तरह से बचाकर पुलिस लाइन लाए, जहाँ उनका प्राथमिक उपचार किया जा रहा है। विधायक ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया है और इसे भाजपा की साजिश बताया। वहीं पैसे बाँटने के आरोप पर उन्होंने कहा कि उनके पास बाँटने के लिए कोई पैसे नहीं हैं। गोलीबारी की घटना से इलाके में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है। सारण के पुलिस अधीक्षक किशोर राय ने बताया कि घटना का असर आज की वोटिंग पर नहीं पड़े, इसके लिए पुलिस सतर्क है।

शोपियाँ मुठभेड़ में मारे गए 2 आतंकी: ‘क्या इसके लिए भी सैनिकों को EC की अनुमति लेनी होगी?’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक रैली के दौरान पुछा कि क्या अब हमारे जवान आतंकियों को मार गिराने से पहले चुनाव आयोग से परमिशन लेने जाएँगे? चुनाव के अंतिम चरण के लिए कुशीनगर में विशाल जनसभा को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कुछ लोगों को इस बात की चिंता सता रही है कि आज जब मतदान चल रहा है, तो सैनिकों ने आतंकियों को क्यों मारा? पीएम मोदी आज रविवार (मई 12, 2019) को जम्मू कश्मीर के शोपियाँ में आतंकियों व जवानों के बीच हुई मुठभेड़ को लेकर बोल रहे थे।

बता दें कि आज जम्मू-कश्मीर के शोपियाँ ज़िले में मुठभेड़ के दौरान दो आतंकियों को ढेर कर दिया गया है। सेना की तरफ से इसकी पुष्टि की गई। एक सैन्य अधिकारी ने अधिक जानकारी देते हुए बताया कि सुरक्षा बलों को दक्षिण कश्मीर के शोपियाँ ज़िले के हिन्दसीतापुर इलाके में आतंकवादियों के छिपे होने की सूचना मिली थी, जिसके बाद इलाक़े की घेराबंदी की गई और तलाशी अभियान चलाया गया। मारे गए दोनों आतंकी कई हमलों में शामिल रहे हैं। लश्कर-ए तैयबा के ये दोनों ही आतंकी वॉन्टेड की सूची में थे। दोनों ही आतंकियों की पहचान बशारत अहमद और तारिक अहमद के रूप में हुई है। बशारत अहमद निकलूरा और तारिक खारीपोरा का रहने वाला है।

तारिक के बारे में कहा जा रहा है कि वह पहले एसपीओ था और बाद में सर्विस राइफल के साथ फ़रार हो गया था। उसके बाद उसके आतंकी बनने की ख़बर आई थी। इस मुठभेड़ के बाद क्षेत्र में मोबाइल सेवा ठप्प कर दी गई है। वहीं आज छठे चरण का मतदान भी चल रहा है, जिसमें दिल्ली की सातों सीटें शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों घटनाओं को जोड़ते हुए कहा, “वो बम-बंदूक लेकर सामने खड़ा है, क्या वहाँ मेरा जवान चुनाव आयोग की परमिशन लेने जाए कि मैं इसके गोली मारूँ या ना मारूँ? कश्मीर में जब से हम आए हैं, हर दूसरे-तीसरे दिन सफ़ाई होती रहती है। ये सफाई अभियान मेरा काम है भाई।

बौद्ध धर्म के लिए पवित्र स्थल का दर्जा रखने वाले कुशीनगर की बात करें तो इस लोकसभा क्षेत्र में त्रिकोणीय लड़ाई हो रही है। यहाँ भाजपा ने पूर्व विधायक विजय दूबे को प्रत्याशी बनाया है। वहीं सपा-बसपा गठबंधन ने नथुनी कुशवाहा को प्रत्याशी बनाया है, जबकि कॉन्ग्रेस की तरफ से आरपीएन सिंह मैदान में हैं। खड़ा से विधायक रहे दूबे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के क़रीबी माने जाते हैं और वह उनके संगठन हिन्दू युवा वाहिनी में भी सक्रिय रहे हैं। मज़े की बात यह है कि महागठबंधन प्रत्याशी कुशवाहा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बैकग्राउंड से आते हैं और संघ में सक्रिय रहे हैं।

वहीं कॉन्ग्रेस के प्रत्याशी भी इस सीट पर ख़ासे मज़बूत हैं। आरपीएन सिंह यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे हैं और 2009 में उन्होंने इसी सीट से जीत दर्ज की थी। हालाँकि, 2004 में भाजपा के राजेश पांडेय ने उन्हें हरा दिया था। आरपीएन सिंह के पिता भी सांसद रहे हैं। इसी कारण कुशीनगर में बुआ-भतीजा के साथ-साथ कॉन्ग्रेस को भी पीएम ने ख़ासे निशाने पर रखा।

बुर्क़े और परदे में मतदान आ रहीं सभी महिलाओं की पहचान सुनिश्चित हो: EC

देश में आज लोकसभा चुनाव 2019 के तहत छठे चरण की मतदान प्रकिया जारी है। इसमें बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की सीटें शामिल हैं। चुनाव आयोग ने बुर्का और किसी भी तरह का पर्दा घारण करने वाली महिलाओं की पहचान सुनिश्चित करने का निर्देश जारी किया है।

दरअसल, संयुक्त मुख्य चुनाव अधिकारी रत्नेश सिंह की तरफ से भेजे गए एक पत्र में केंद्रीय चुनाव आयोग के 8 मई के निर्देश का हवाला दिया गया। ख़बर के अनुसार, यह आदेश उत्तर प्रदेश की 14 सीटों के सभी ज़िला निर्वाचन अधिकारियों को पत्र के माध्यम से जारी किया गया है। फ़िलहाल, यूपी की 27 सीटों पर मतदान होना अभी बाक़ी है।

इस आदेश में साफ़तौर पर यह कहा गया है कि जिन बूथ पर पर्दानशीं महिला वोटर संख्या में अधिक हों वहाँ पर महिला पुलिस कॉन्स्टेबल के अलावा एक महिला पुलिस अधिकारी की तैनाती भी की जाए। इससे बुर्का या पर्दा करने वाली महिलाओं की पहचान सुनिश्चित की जा सके।

आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 के पहले चरण में मुज़्ज़फ़रनगर से बीजेपी के उम्मीदवार संजीव बलियान ने इस बात की शिकायत की थी कि बुर्का पहनकर मतदान करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। इसके पीछे उन्होंने मतदाताओं की पहचान में दिक्कत और फ़र्ज़ी मतदान की संभावना जताई थी। इसी के मद्देनज़र चुनाव आयोग ने यह क़दम उठाया।

आतिशी का चुनावी कैंपेन संभालने वाले ने कहा: पैम्फलेट का लिंक भाजपा से नहीं, पुलिस कर रही जाँच

आप प्रत्याशी आतिशी ने 9 मई को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा के दिल्ली (पूर्व) प्रत्याशी गौतम गंभीर पर अपने खिलाफ अश्लील पर्चे बँटवाने का आरोप लगाया था। अब दिल्ली के ही कृष्णा नगर इलाके से खबर आ रही है कि यह पर्चे वहाँ प्रेस कॉन्फ्रेंस के हफ्ते पहले ही डाक से पहुँचे हुए थे। उन्हें प्राप्त करने वाले व्यक्ति ने स्थानीय आप कार्यकर्ताओं को सूचित भी किया था।

भेजने वाले का पता नहीं, कृष्णा नगर का ही लगा था डाक टिकट

कृष्णा नगर इलाके की एक हाउसिंग कॉलोनी के रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रमुख ने दावा किया कि उन्हें आतिशी के खिलाफ लिखे गए यह पर्चे 2 मई को ही डाक से मिल गए थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने पैम्फ्लेटों की जानकारी आप कार्यकर्ताओं को भी दी थी। पर्चे के स्रोत के बारे में अनभिज्ञता जाहिर करते हुए उन्होंने बताया कि लिफाफे पर भेजने वाले का पता नहीं था लेकिन डाक टिकट कृष्णा नगर का ही लगा था।

पर भाजपा से क्या कनेक्शन?

सबसे महत्वपूर्ण ‘भाजपा कनेक्शन’ को आम आदमी पार्टी स्थापित करने में नाकाम साबित हो रही है। आतिशी का चुनाव प्रबंधन संभालने वाले अक्षय मराठे खुद यह मान रहे हैं। बकौल अक्षय, “पार्टी इन पैम्फलेट्स का लिंक भाजपा से स्थापित नहीं कर पाई है। फिलहाल पुलिस इन पर्चों के सोर्स की जांच कर रही है।” (News 18)

महागठबंधन प्रत्याशी के समर्थकों ने मेनका गाँधी के समर्थकों को पीटा, दबंगई

लोकसभा चुनाव के छठे चरण के दौरान यूपी के सुल्तानपुर में भी वोटिंग जारी है। इस दौरान सुल्तानपुर से भाजपा उम्मीदवार मेनका गाँधी और गठबंधन से बसपा के प्रत्याशी चंद्रभद्र सिंह उर्फ सोनू सिंह के बीच बहस हो गई। दोनों के बीच दबंगई को लेकर बहसबाजी हुई। मेनका ने सोनू सिंह के समर्थकों पर वोटरों को डराने-धमकाने का आरोप लगाया। मेनका गाँधी का आरोप है कि महागठबंधन के प्रत्याशी सोनू सिंह के समर्थक मतदाताओं को डरा धमकाकर अपने पक्ष में मतदान करवा रहे हैं। जब मेनका ने कहा कि उनकी दबंगई नहीं चलेगी, तब चंद्रभद्र सिंह के समर्थक नारेबाजी करने लगे।

जानकारी के मुताबिक, इससे पहले शनिवार (मई 11, 2019) की देर रात को सुल्तानपुर में मेनका गाँधी के समर्थकों के साथ मारपीट की गई। सोनू सिंह के समर्थकों ने मेनका गाँधी के प्रचार में लगे लोगों के साथ मारपीट की और गाड़ियों को भी नुकसान पहुँचाया। वहीं, चंद्रभद्र सिंह के समर्थकों का कहना है कि मेनका गाँधी के समर्थक रात में गाँवों में लोगों को पैसे बाँट रहे थे। इस मामले पर सुल्तानपुर के पुलिस अधीक्षक अनुराग वत्स ने कहा कि रात में घटना की सूचना मिली है। मेनका समर्थक शिवकुमार सिंह के साथ प्रचार में लगे लोगों के साथ चंद्रभद्र सिंह के समर्थकों ने मारपीट की, जिसमें मेनका गाँधी के समर्थकों को काफी चोटें आईं हैं। मामले की जाँच करवाई जा रही है।

इस बीच मेनका गाँधी और सोनू सिंह के बीच के बहस का वीडियो भी सामने आया है जिसमें सोनू सिंह के समर्थक बेहद उग्र नजर आ रहे हैं। भाजपा विधायक सूर्यभान सिंह ने सुर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि बाहुबली सोनू सिंह की छवि को देखते हुए सुरक्षा के इंतजाम काफी नहीं हैं। गौरतलब है कि मेनका ने साल 2014 का चुनाव पीलीभीत से लड़ा था। इस बार पार्टी ने उन्हें सुल्तानपुर से टिकट दिया है।

BJP प्रत्याशी भारती घोष की छाती पर गुंडों ने कथित तौर पर किया हमला, बूथ कैप्चरिंग

लोकसभा चुनाव 2019 में हिंसक झड़पों की ख़बरों में पश्चिम बंगाल सबसे आगे है। छठे चरण के चुनाव में बंगाल से ही हिंसा की एक और ख़बर सामने आई है। राज्य के घाटल संसदीय क्षेत्र में बीजेपी उम्मीदवार भारती घोष जो कि पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं, उनके साथ तृणमूल कार्यकर्ताओं की हिंसक झड़प हो गई। इस दौरान उनके क़ाफ़िले पर हमला किया गया, उनकी गाड़ी पर हमला किया गया उसके शीशे तोड़े गए और भीड़ पर पत्थरबाज़ी के साथ-साथ गोलियाँ भी बरसाईं गई, इससे उन्हें गंभीर चोटें भी आईं।

इस हमले पर भारती घोष ने कहा, जब मैं पोलिंग बूथ पर गई, तो गुंडों ने मुझपर हमला कर दिया. उन्होंने मेरी चेस्ट पर हमला किया। TMC ने हर जगह अपने गुंडों को तैनात किया हुआ है ताकि मुझे रोका जा सके और मुझ पर हमला करें। वे बूथ कैप्चरिंग कर रहे हैं। पोलिंग बूथ में जाने से रोकने की शिकायत करने जब वो पोलिंग एजेंट के पास पहुँची तभी उनके साथ मारपीट की गई। इस मारपीट में वो गंभीर रूप से चोटिल भी हो गईं। सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हें किसी तरह से बचाया। वहीं, चुनाव आयोग ने इस मामले पर ज़िला प्रशासन से रिपोर्ट माँगी है।

दरअसल, भारती घोष बंगाली फ़िल्म स्टार और TMC उम्मीदवार दीपक अधिकारी के ख़िलाफ़ चुनावी मैदान में हैं। इससे पहले बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष ने अंदेशा जताया था कि छठे चरण के चुनाव में हिंसक घटनाएँ हो सकती हैं। भारती घोष पर केशवपुर गाँव में हुआ यह हमला तृणमूल कॉन्ग्रेस की उग्रता का खुला प्रदर्शन है। चुनावी दौर में वहाँ इस तरह की हिंसक घटनाओं की ख़बर सुर्खियाँ बनती नज़र आती हैं।