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‘PM मोदी की ताकत उनकी इमेज है, और मैं उसे खराब करके रहूँगा’: राहुल गाँधी

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री मोदी की छवि को लेकर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की ताकत उनकी इमेज है और वो इसे खराब कर देंगे। उन्होंने कहा कि वो हकीकत सामने लाकर रहेंगे और पीएम मोदी की छवि को खराब करने का काम शुरू भी कर चुके हैं।

इसके साथ ही उन्होंने चुनाव को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि यह चुनाव भाजपा या फिर मोदी नहीं जीत रहे, बल्कि कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में यूपीए सरकार बनाने जा रही है। राहुल गाँधी ने कहा कि यह जनता तय करेगी कि देश का अगला प्रधानमंत्री कौन बनेगा और 23 मई को जनता अपना फैसला सुना देगी। मगर साथ ही उन्होंने विश्वास भी जताया कि यूपीए सरकार का बनना तय है। इस साक्षात्कार के दौरान न्याय योजना पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि वो पीएम मोदी की तरह झूठे वादे नहीं करते। उन्होंने कहा कि इस न्याय योजना का लाभ हर परिवार को मिलेगा। इस योजना से हर परिवार को मदद मिलेगी और साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना का बोझ मिडिल क्लास पर नहीं पड़ने वाला है।

वहीं, राफेल डील के सवाल पर राहुल गाँधी ने कहा कि पीएम मोदी ने सभी नियमों को अनदेखा कर अनिल अंबानी को फायदा पहुँचाया है, जिसकी जाँच होनी चाहिए। कॉन्ग्रेस पार्टी शुरू से ही इसकी जाँच की माँग कर रही है। इसके साथ ही राहुल गाँधी ने सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर भी पीएम पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मनमोहन सरकार में तीन बार सर्जिकल स्ट्राइक हुए थे, लेकिन कॉन्ग्रेस ने कभी इसका कभी ढिढोरा नहीं पीटा।

चुनाव परिणाम के तुरंत बाद 24 मई को रिलीज होगी नरेंद्र मोदी की बायोपिक

लोकसभा चुनाव परिणाम 23 मई को घोषित होंगे। इसके तुरंत बाद 24 मई 2019 को प्रधानमंत्री मोदी पर बनी बायोपिक रिलीज होगी। एएनआई ने इस बात की जानकारी अपने ट्वीट के जरिए दी है। इससे पहले माननीय उच्चतम न्यायालय ने अप्रैल 15, 2019 को निर्वाचन आयोग से कहा था कि वह पहले नरेंद्र मोदी पर बनी बायोपिक देख लें उसके बाद निर्णय करे कि इस फिल्म को चुनाव के समय रिलीज़ करना है या नहीं।

सर्वोच्च न्यायालय ने आयोग को निर्देश दिया था कि वह फिल्म को देखें और 22 अप्रैल तक अपना मत एक सीलबंद लिफाफे में प्रदान करे। इस दौरान फिल्म के निर्माताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी थी कि निर्वाचन आयोग ने बिना फिल्म को देखे ही उसकी रिलीज़ पर बैन लगा दिया था। इसलिए न्यायालय ने आयोग से कहा था कि पहले वह फिल्म को देखे फिर उसकी रिलीज़ पर निर्णय ले। तब तक के लिए न्यायालय की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी।

बता दें इसके पहले निर्वाचन आयोग ने यह कहकर फिल्म को रिलीज़ होने से रुकवा दिया था कि इससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने में व्यवधान उत्पन्न होने की संभावना है। निर्वाचन आयोग ने अपने आदेश में कहा था कि फिल्म में दिखाए गए राजनैतिक दृश्य सोशल मीडिया में प्रचारित हो रही चीज़ों को सच मानने का भ्रम उत्पन्न कर सकते हैं।

निर्वाचन आयोग ने फिल्म को देखने के बाद अपने विचार न्यायालय के सामने रखे थे जिसके बाद न्यायालय ने आयोग के निर्णय को बरक़रार रखा था। अब फिल्म के प्रोडूसर संदीप सिंह ने जानकारी दी है कि 24 मई को फिल्म रिलीज़ की जाएगी।

राहुल ने गोद लेकर यतीम बना दिया अमेठी का गाँव: ग्रामीणों ने कहा अब नहीं देंगे वोट

संसदीय क्षेत्र अमेठी में पड़ने वाले जगदीशपुर गाँव के निवासियों ने राहुल गाँधी के दावों की पोल खोल दी है। गाँव के एक निवासी के अनुसार साल 2014 में सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने उनके गाँव को गोद लिया था। लेकिन बीते 5 सालों में राहुल गाँधी ने उनके गाँव में कोई विकास नहीं किया है।

स्वराज्य मैगज़ीन के सीनियर एडिटर अरिहंत पवारिया द्वारा जारी किए गए वीडियो में एक ग्रामीण को राहुल की नाकामियों को गिनाते हुए सुना जा सकता है। इस वीडियो में ग्रामीण बता रहे हैं कि साल 2014 के बाद राहुल ने दोबारा गाँव की तरफ मुड़कर नहीं देखा। ग्रामीण की शिकायत है कि राहुल गाँधी ने उनके गाँव में कोई विकास कार्य नहीं किया है।

हालाँकि इतनी निराशा के बाद भी ग्रामीणों ने ठान रखी है कि वो हर बार कॉन्ग्रेस को वोट देते हैं इसलिए इस बार भी कॉन्ग्रेस को ही वोट देंगे। लेकिन उस इलाके के अन्य लोग जिन्होंने आजीवन कॉन्ग्रेस के पक्ष में मतदान दिया है वो खुलकर कहते हैं कि इस बार वह नरेंद्र मोदी को ही वोट देंगे। इस सूची में एक दलित सब्जी विक्रेता भी शामिल है।

सब्जी बेचने वाले की मानें तो उन्होंने भी कभी मोदी को वोट नहीं दिया था लेकिन इन चुनावों में वो मोदी को ही वोट देंगे। कारण पूछने पर इस सब्जी वाले ने मोदी सरकार के अनेकों कार्यों को गिना दिया। जिसमें घर बनवाने से लेकर, गैस सिलिंडर देने का जिक्र हुआ। इतने पर जब वीडियो बनाने वाले ने पूछा कि क्या उन्हें इतना सब के लिए किसी तरह की घूस देनी पड़ी तो सब्जी विक्रेता ने नकारते हुए कहा कि ये सारा काम बिना एक रुपया दिए हुआ है।

प्रियंका ने लिया यू-टर्न, पर राहुल ने फिर कहा, ‘हाँ, हैं हम वोट-कटवा’

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने अपनी बहन और पार्टी महासचिव प्रियंका वाड्रा के ‘वोट-कटवा’ पर यू-टर्न का खंडन करते हुए दोहराया कि भाजपा को हराने के लिए उनकी पार्टी वोट-कटवा की भूमिका निबाहने के लिए भी प्रस्तुत है। एनडीटीवी को दिए साक्षात्कार में राहुल गाँधी ने प्रियंका वाड्रा के पहले स्टैंड को दोहराते हुए देश को ‘आश्वस्त’ किया कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में अपने लोगों को निर्वाचित कराने नहीं, महज भाजपा के वोट काटकर महागठबंधन को जिताने के लिए प्रत्याशी उतार रही है। इससे पहले प्रियंका ने भी ऐसे ही आशय का बयान दिया था, मगर बाद में उन्होंने कहना शुरू कर दिया कि कॉन्ग्रेस अपनी जीत के लिए लड़ रही है।

‘हमारे कैंडिडेट सेक्युलर जीत सुनिश्चित करेंगे’

राहुल गाँधी ने एनडीटीवी के पत्रकार से बात करते हुए कहा, “हमारा लक्ष्य भाजपा को हराना है। भाजपा और पीएम मोदी सत्ता में वापिस नहीं आ रहे हैं। जहाँ यूपी में हमारा प्रत्याशी मजबूत है, हम अपनी जगह के लिए लड़ेंगे। जहाँ हमारे अपने प्रत्याशी मजबूत हैं, हम सुनिश्चित करेंगे कि भाजपा का प्रत्याशी हारे और एक सेक्युलर कैंडिडेट विजयी हो।”

इसके अलावा राहुल ने इसकी भी ‘गारंटी’ दी कि मोदी दोबारा प्रधानमंत्री नहीं बनने वाले। पर यहाँ भी वह खुद के प्रधानमंत्री बनने का भी आश्वासन नहीं दे पाए। सब जनता की मर्जी पर छोड़ने की बात कहकर वह इस सवाल का जवाब देने से बचते दिखे।

Fact Check: ओबामा ने कहा भारत को चाहिए अखिलेश यादव जैसा प्रधानमंत्री?

एक ओर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष जी, यानी युवाओं की पसंद अखिलेश यादव महागठबंधन के साथ लोकसभा चुनाव की तैयारियों में व्यस्त हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी ऑनलाइन सेना ने अध्यक्ष जी को प्रधानमन्त्री बनाने की हर संभव मुहिम छेड़ रखी है।

सोशल मीडिया पर देश में चल रहे चुनावी माहौल में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की अखिलेश यादव से जुड़े एक पोस्ट ने नया तहलका मचा दिया है। दरअसल, आजकल सोशल मीडिया पर बराक ओबामा का एक ‘पोस्ट’ वायरल हो रहा है। लोग इस पोस्ट को शेयर करते हुए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव को ढेरों बधाइयाँ भी दे रहे हैं।

इस फेसबुक पोस्ट में बराक ओबामा समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव से प्रभावित नजर आ रहे हैं, लेकिन इसकी सच्चाई कुछ और ही है। इस पोस्ट में बराक ओबामा कह रहे हैं कि भारत को आगे ले जाने के लिए अखिलेश यादव जैसा प्रधानमंत्री चाहिए। इस ग्राफिक कार्ड के साथ किए दावे के मुताबिक, ओबामा ने ट्वीट किया है कि भारत को आगे ले जाने के लिए अखिलेश जैसा PM होना चाहिए। इस मैसेज के साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि ओबामा ने अखिलेश यादव के साथ मुलाकात की एक पुरानी तस्वीर भी पोस्ट की है।

इस ग्राफिक कार्ड में अखिलेश यादव और बराक ओबामा की हाथ मिलाते हुए तस्वीर भी है। यह ‘Lucknow ki Baat’ नाम के फेसबुक पेज पर शेयर किया गया है। इसके अलावा अखिलेश यादव फैन क्लब फेसबुक ग्रुप पर भी यह ग्राफिक कार्ड पोस्ट किया गया है। इसके साथ कैप्शन लिखा गया है, “बोलो सर ओबामा को भी सही गलत का फर्क पता है।”

क्या है तस्वीर की सच्चाई?

वास्तव में बराक ओबामा ने ऐसा कोई ट्वीट नहीं किया है। बराक ओबामा द्वारा अखिलेश यादव की तारीफ करने को लेकर कोई न्यूज रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं है। ओबामा के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से लेकर सोशल मीडिया में कहीं भी इस प्रकार की कोई खबर नहीं है, जिसमें बराक ओबामा ने अखिलेश यादव में भारत का प्रधानमंत्री देखा हो।

ग्राफिक कार्ड पर ओबामा और अखिलेश यादव की यह तस्वीर बराक ओबामा के जनवरी, 2015 में भारत दौरे के वक्त ली गई थी। ओबामा उस साल गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनकर भारत आए थे। राष्ट्रपति भवन में आयोजित रात्रि भोज के दौरान ओबामा और अखिलेश यादव एक-दूसरे से मिले थे। इस वायरल तस्वीर में गौर करने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि इसे शेयर करने वालों ने केवल अपनी बात को सूचना का रूप दे कर फोटो के साथ पोस्ट कर दिया है और कहीं भी ओबामा के एकाउंट से किए गए ट्वीट की तस्वीर नहीं है।

राहुल गाँधी झोंपड़ी में खाना खाकर भूल गए, मोदी ने दिलाया पक्का मकान

2008 में राहुल गाँधी बुन्देलखण्ड की जिस आदिवासी महिला भुंअन बाई की झोंपड़ी में भोजन कर चर्चा में आए थे, दस साल बाद उस महिला को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पक्का मकान दे दिया गया है। टीकमगढ़ के टपरियन ग्राम की भुंअन बाई के परिवार को आत्मनिर्भर बनाने में मदद का राहुल गाँधी ने वादा किया था। उस समय वह बाँदा के माधौपुर गाँव भी गए थे, टपरियन और माधौपुर को ‘गोद ‘ भी लिया था, पर दोनों ही गाँव आज तक बदहाल हैं। उस समय माधौपुर के जिस बीमार दलित अच्छे लाल से वह मिले थे, उन्हें भी घर 2017 में जाकर तत्कालीन अखिलेश सरकार की लोहिया आवास योजना में मिला था।  

‘राहुल ग्राम’ होकर भी टपरियन बेहाल, अच्छे लाल से किया था ‘बेटा बनने’ का वादा

दस साल से भी ज्यादा के बाद राहुल गाँधी ने अब जाकर टीकमगढ़ का रुख लोकसभा निर्वाचन के मद्देनजर पार्टी के प्रचार के लिए किया है, तो लोगों को उनका पिछले दौरा याद आ रहा है। टपरियन को तो जिला कॉन्ग्रेस कमेटी ने गोद भी ले लिया, जैसे माँ-बाप का नाम अपने नाम के साथ जोड़ा जाता है, वैसे ही टपरियन ने प्रवेश मार्ग पर ‘राहुल ग्राम’ लगा रखा है, लेकिन गाँव आज भी बदहाल है- मूलभूत सुविधाओं का अकाल है। कमोबेश यही हाल माधौपुर का भी है।  

भुंअन बाई के हवाले से जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार राहुल गाँधी के उनके घर में खाना खाने से पहचान तो मिली लेकिन जीवन की किसी समस्या का समाधान नहीं मिला। मकान भी पिछले साल प्रधानमंत्री आवास योजना में मिला। भुंअन बाई ने यह भी बताया है कि उनके चारों बेटे बेरोजगार हैं। राहुल गाँधी के दोबारा हालचाल पूछने के सवाल पर उन्होंने साफ़ किया कि कॉन्ग्रेस से कभी कोई नहीं आया- पर मकान बनवाने के लिए भाजपा नेताओं ने जरूर सम्पर्क किया था।

कुछ ऐसा ही अच्छे लाल का भी कहना है- उन्होंने बताया कि जब राहुल आए तो उनका परिवार उसी समय के आसपास हुई बेटे की मौत के गम से बेजार था। राहुल गाँधी ने कहा था कि वह उनका बेटा तो नहीं लौटा सकते लेकिन बेटे की तरह समस्याएँ सुलझाने में मददगार जरूर बनेंगे। 2017 में जब वह ‘यूपी को यह साथ पसंद है’ का प्रचार विधानसभा निर्वाचन के लिए करने महोबा आए थे तो किसी ने उन्हें 9 साल पुराना वादा याद दिलाया। तब उनके ‘दोस्त’ अखिलेश की पहल पर डीएम साहब ने खुद गाँव आकर घर बनवाया।

टपरियन में पाँचवीं तक ही स्कूल

टपरियन के पंचायत सदस्य दशरथ के मुताबिक उनके गाँव में प्राइमरी के आगे स्कूल न होने के कारण गाँव के अधिकांश बच्चे कक्षा 5 के आगे नहीं पढ़ पाते हैं। 1500 की आबादी वाला गाँव स्कूल ही नहीं, पेयजल और बेरोजगारी की समस्या से भी दो-चार है।

PUBG और सर्जिकल स्ट्राइक्स का अंतर समझने में ‘छोटा भीम’ को अभी वक़्त लगेगा

आए दिन सेना के राजनीतिकरण करने का रोना रोने वाली कॉन्ग्रेस को अचानक चुनावों के बीचों-बीच ध्यान आता है कि उनकी सरकार ने भी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की थी। राफेल फ़ाइल के घोटालों की ही तरह एक बार फिर बेशर्मी से राहुल गाँधी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस पार्टी मीडिया के सामने आई है। इस बार UPA के दौरान हुई सर्जिकल स्ट्राइक का दावा करने के लिए एक ऐसे सज्जन को आगे किया गया है, जिनकी जुबान तब नहीं खुली थी जब मीडिया के सामने आस्तीनें चढ़ाकर राहुल गाँधी ने मनमोहन सिंह की ही कैबिनेट द्वारा पारित एक अध्यादेश फाड़ दिया था।

जिस तरह के कल्पनालोक में कॉन्ग्रेस पार्टी वर्तमान में जी रही है और उसी कल्पनालोक के आधार पर 2019 का चुनाव जीतने का सपना भी देख रही है, ये हर हाल में उनका अपने समर्थकों के साथ किया गया धोखा है। 5 साल तक मोदी सरकार को घेरने के लिए सर से पाँव तक का जोर लगाने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी का हाल ये है कि उसके पास मोदी सरकार के खिलाफ मात्र एक ‘चौकीदार चोर है’ का नारा है और वो नारा भी कहीं ना कहीं मोदी सरकार की ही मार्केटिंग करता है। इसके अलावा राहुल गाँधी की अध्यक्षता वाली कॉन्ग्रेस पार्टी को जब कुछ भी ऐसा नहीं मिला, जिस पर कि वो सीना चौड़ा कर के मीडिया को बता सके, या कम से कम बता सके कि मोदी सरकार को घेरने के लिए उनके पास ‘फलाना’ तथ्य है और वो वाकई में तार्किक भी है, तब वो मनमोहन सिंह के मुँह में शब्द ठूँसकर चुनाव जीतने का यह आखिरी हथकंडा भी आजमा रही है।

UPA के दौरान 10 साल तक, 2G, आदर्श हाउसिंग, कॉमनवेल्थ और कोयला घोटाला पर जिन मनमोहन सिंह के मुँह में दही जमी रही, वही अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह अचानक से आम चुनावों के बीच प्रकट होकर कहते हैं, “रुको-रुको, याद आया कि हमने भी सर्जिकल स्ट्राइक की थी।”

वो दिन दूर नहीं जब पूरा दिन PUBG खेलने के बाद राहुल गाँधी PUBG को ही कॉन्ग्रेस द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक साबित कर देंगे। ऐसा करने के लिए उनके पास मीडिया गिरोह से लेकर नेहरुवियन सभ्यता वाले, किसी भी समय अवार्ड वापस करने वालों के गैंग स्लीपर सेल अवस्था में हर वक़्त मौजूद तो हैं ही।

जिन सैन्य एनकाउंटर्स के सर्जिकल स्ट्राइक का दावा मनमोहन सिंह कर रहे हैं, यदि उन्हें भी सर्जिकल स्ट्राइक नाम दे दिया जाए, तो इस तरह से शायद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सबसे ज्यादा वाहवाही के हकदार हैं।

यह जानना भी आवश्यक है कि UPA के दौरान 11 सर्जिकल स्ट्राइक्स का दावा करने वाले मनमोहन सिंह वही हैं, जिनके बारे में सेना ने कहा था कि मुंबई हमलों के बाद सेना की समस्त तैयारियों के बाद भी मनमोहन सिंह पाकिस्तान पर कोई कार्यवाही करने से पीछे हट गए थे।

टाइमलाइन में थोड़ा सा पीछे जाकर देखें, तो हमें पता चलता है कि कॉन्ग्रेस के ही होनहार नेताओं की बदौलत भाजपा आज सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दों पर जनता के बीच बढ़त (जैसा कि कॉन्ग्रेस का मानना है) बना रही है। यही वो कॉन्ग्रेस है, जो लगातार मोदी सरकार से सुबूत माँग कर उन पर सर्जिकल स्ट्राइक को जनता के बीच लाने का दबाव बनाती रही। हालात ये थे कि पाकिस्तान के F-16 विमान को मार गिराने के साक्ष्य सरकार को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से ज्यादा देश की मीडिया और कॉन्ग्रेस को देने पड़ रहे थे।

कॉन्ग्रेस का ऐसा भस्मासुरी दौर चल रहा है, जिसमें उनका हर दाँव उनके विपरीत हो जाता है। उनके नेता कदम उठाते तो हैं, लेकिन वही कहीं ना कहीं से उनके लिए नुकसानदायक साबित हो ही जाता है।

तमाम समीकरणों को देखते हुए बेहतर अभी यही होगा कि कॉन्ग्रेस समय के हाथों में अपने भविष्य को छोड़ दे। ऐसा इसलिए, क्योंकि ‘युवा नेतृत्व’ को बदल पाने के लिए उन्हें चमचागिरी और जी हजूरी से बाहर आना होगा और ऐसा कॉन्ग्रेस जैसे सत्तापरस्त दल के लिए इस युग में तो कम से कम संभव नजर नहीं आता है।

जाकिर नाइक की ₹50 करोड़ की संपत्ति ED द्वारा जब्त

दो समुदायों के बीच नफरत पैदा करने और आतंकवादी गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए युवकों को उकसाने जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रहे विवादास्पद इस्लामी प्रचारक जाकिर नाइक को झटका देते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लांड्रिंग निरोधी कानून के तहत उसके 50.46 करोड़ रुपए की संपत्ति को जब्त कर लिया है। ईडी ने जाकिर नाइक की 193.06 करोड़ रुपए की काली कमाई पहचान ली है। फिलहाल मलेशिया में रह रहे नाइक के खिलाफ यह मामला 22 दिसंबर 2016 को दर्ज किया गया था।

2017 में घोषित हुआ था अपराधी, 2016 में भारत छोड़ भागा था

जून 2017 में एनआइए की विशेष अदालत ने जाकिर नाइक को अपराधी घोषित किया था। शीर्ष आतंकरोधी एजेंसी ने 1 अक्टूबर 2017 को जाकिर नाइक के खिलाफ घृणा फ़ैलाने वाले भाषण देने, समुदायों के बीच दुश्मनी फ़ैलाने वाले भाषण देने, और लोगों को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसाने का भी आरोपपत्र दायर किया था। इससे पहले ही नाइक 2016 में हिंदुस्तान छोड़ भाग खड़ा हुआ था।

बांग्लादेश हमलावरों का था ‘प्रेरणास्रोत’

जाकिर नाइक भारत से तब भाग खड़ा हुआ जब 18 विदेशी नागरिकों समेत 29 लोगों को ढाका के आतंकी हमले (जुलाई 2016) में मारने वालों के प्रेरणास्रोत के तौर पर नाइक की ओर सूई घूमी। कुछ महीने पहले नाइक ने हिंदुस्तान की सरकार पर आरोप लगाते हुए यह भी दावा किया था कि उसे फँसाने के लिए हिन्दुस्तानी सरकार इंटरपोल पर उसके खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी करने के लिए दबाव बना रही है।

रामलिंगम हत्या मामला: PFI कार्यालय में NIA की छापेमारी

रामलिंगम की हत्या मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने आज तिरुचिरापल्ली के पलकराई में पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के कार्यालय में छापेमारी की। बता दें कि 6 फरवरी, 2019 को ‘पट्टली मक्कल काची’ (PMK) के 42 वर्षीय अधिकारी रामलिंगम की हत्या के उद्देश्य से हमला कर उनका हाथ काट दिया था।

रामलिंगम को धार्मिक रूपांतरण का विरोध करने के लिए अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के एक समूह द्वारा
पीएमके के एक अधिकारी 42-वर्षीय रामलिंगम पर, जो उस समय घर वापस जा रहे थे, उन पर हमला कर उनका हाथ काट दिया। गंभीर रूप से घायल रामलिंगम को कुंभकोणम के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया। अस्पताल के डॉक्टरों ने रामलिंगम को शहर के सरकारी मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में रेफर कर दिया। हालाँकि, अस्पताल ले जाते समय अत्यधिक रक्तस्राव के कारण रामलिंगम की मृत्यु हो गई। दरअसल, उन्होंने हिंदुओं के कन्वर्शन (मतांतरण) का विरोध किया था जिससे कुछ कट्टरपंथी धार्मिक संगठन उनसे परेशान हो गए थे।

पुलिस ने इस हत्या मामले में इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन PFI के एक सदस्य समेत पाँच लोगों को गिरफ़्तार किया था। गिरफ़्तार किए गए लोगों की पहचान एस निज़ाम अली, सरबुद्दीन, रिज़वान, मोहम्मद अज़रुद्दीन और मोहम्मद रायज़ के रूप में की गई थी। अब तक ग्यारह आरोपियों को गिरफ़्तार किया गया है, जिनमें से आठ PFI के हैं।

बता दें कि केरल, तेलंगाना, कर्नाटक, असम, पश्चिम बंगाल, और बिहार जैसे राज्यों में PFI सक्रिय है। झारखंड सरकार द्वारा इस साल फरवरी में आपराधिक क़ानून संशोधन अधिनियम की धारा 16 के तहत राज्य में राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने और ISIS जैसे आतंकी समूहों के साथ संबंध रखने के कारण इसे प्रतिबंधित कर दिया गया था। सरकार ने अन्य राज्यों से भी इसी तरह की कार्रवाई करने का आग्रह किया था। भाजपा नेता विनय सिंह ने आरोप लगाया था कि संगठन पीएम मोदी की हत्या की साज़िश रचने में भी शामिल था।

यह संगठन (PFI) हादिया मामले में भी सक्रिय रूप से शामिल था। इसने उच्चतम न्यायालय में मामले को आगे बढ़ाने के लिए 1 करोड़ रुपए खर्च करने का दावा भी किया था।

होमवर्क बनाम गृहकार्य में नहीं उलझती हैं अब लड़कियाँ… वो टॉप करती हैं और हेडलाइन बनती हैं

बीते कुछ सालों से लगातार लड़कियाँ हर बोर्ड परीक्षा में लड़कों को पछाड़ते हुए मीडिया को “लड़कियों ने फिर मारी बाजी” जैसी हेडलाइन लिखने पर मजबूर कर देती हैं। इसे लड़कियों के भीतर की इच्छाशक्ति और लगन समझिए या फिर ‘बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ’ जैसे अभियानों की सफलता। आप बीते कुछ सालों के रिकॉर्ड देख लीजिए – लड़कियों की छाप हर बोर्ड परीक्षा में लड़कों के मुकाबले ज्यादा प्रभावशाली रही है। आज CBSE के नतीजे इसके हालिया उदाहरण हैं। कुछ लोगों को लग सकता है कि ये बातें लिखते हुए मैं अपने भीतर हावी हुए नारीवाद के कारण लड़कों की मेहनत को कम आँकने की कोशिश कर रही हूँ। लेकिन यकीन करिए ऐसा कुछ भी नहीं है। हम जिस समाज में रहते हैं वहाँ लड़कियों का इस तरह उभरना वाकई किसी के लिए भी गर्व की बात है। जिनकी शिक्षा उचित दिशा में हुई है वो मेरी इस बात को जरूर समझ पाएँगे।

लड़कों के मुकाबले लड़कियों का अव्वल आना किसी भी प्रगतिशील समाज के लिए इसलिए इतना प्रफुल्लित करने वाला है क्योंकि लड़कियों की स्थिति ही समाज की मानसिकता का आईना होती है। अभी के समय से थोड़ा पीछे जाकर याद कीजिए। इतिहास में लड़कियों को उनके अधिकार दिलाने के लिए कितने आंदोलन हुए हैं? देश की पहली महिला डॉक्टर (आनंदी) जैसी अनेकों महिलाओं को अपनी डिग्री हासिल करने के लिए न जाने कितनी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। ऐसे में यदि इन संघर्षों के नतीजे परीक्षाओं के परिणामों में दिखने लगे हैं तो मेरे जैसे वो लोग क्यों न खुश हों, जिन्होंने देखा है कि पढ़े-लिखे माहौल में भी लड़की को होमवर्क बनाम गृह कार्य में किस तरह उलझ कर रह जाना पड़ता है। जिन्हें मालूम है कि समाज में लड़के का शिक्षित होना आम बात है लेकिन एक लड़की का शिक्षित होना पूरे समाज के लिए सफलता की बात है। आसपास देखिए और खुद सोचिए लड़की होने के जो मानदंड समाज द्वारा तय किए गए हैं, उन पर शत-प्रतिशत देते हुए लड़की की छोटी सी सफलता भी कितनी बड़ी बात है।

आज जब मैं ‘लड़कियों ने फिर मारी बाजी’ पर बात कर रही हूँ तो मैं सिर्फ़ उन लड़कियों तक सीमित नहीं हूँ जिन्होंने 500 में से 499 अंक लाकर किसी लड़के को पछाड़ा है। मैं उन सभी लड़कियों की बात कर रही हूँ जिन्होंने सामाजिक और परिवारिक जद्दोजहद के बावजूद अकादमिक क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देखा और उस सपने को पूरा करने के लिए उसने अपना एक-एक पल झोंक दिया। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि लड़कों की सफलता भी उनकी लगन और मेहनत का परिणाम होती है, लेकिन इस बात में भी कोई दो-राय नहीं है कि समाज द्वारा निर्धारित नियमों और मानदंडों के बाद लड़कियों की कामयाबी किसी भी क्षेत्र में ज्यादा ‘खास’ होती है।

आमतौर पर हम देखते हैं कि नारी सशक्तिकरण की बहसों के बीच समाज का एक बड़ा तबका लड़कियों को इमोशनली वीक कहता है, और हर दूसरी बात पर उन्हें ‘तुमसे न हो पाएगा’ कह कर दरकिनार कर देता है, लेकिन कभी किसी ने सोचा है कि लड़कियों को इमोशनली वीक बताने वाला समाज कैसे और कब तैयार हुआ है? इन गुणों की सूची तैयार करने वाले ये वही लोग हैं, जिनका एक समय तक मानना था कि लड़कियों को शिक्षित करना ‘परिवार के लिए और समाज के लिए खतरनाक है।’ आज जब लड़कियों को खुद को समाज में आगे बढ़ाने का मौका मिल रहा है तो यकीनन वो सभी पुरानी भ्रांतियों को तोड़ने के लिए प्रयासरत हैं, जिनका निर्माण समाज ने उनके लिए किया है।

लड़कियों की इन बोर्ड परीक्षाओं में जीत बताती हैं कि अब वो अपने भीतर निहित मूल्यों को पहचानने और समझने लगी हैं। वो समझ चुकी हैं कि शिक्षा यदि उनका एक मात्र लक्ष्य है तो फिर उन्हें कोई नहीं रोक सकता है। आज उनका अव्वल आना बताता है कि वो न केवल खुद के औचित्य और अपने सपनों को बचाए रखने के लिए बल्कि औरों के लिए प्रेरणा बनने को भी जुझारू रूप से जुटी हुई हैं। क्लासरूम की शिक्षा और गृहणी बनने की ट्रेंनिंग की लड़ाई में वह तालमेल बिठाना सीख चुकी हैं। वह जान चुकी हैं कि जिन गुणों को गलत परिभाषित करके समाज ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका है, उन्हें उन गुणों का इस्तेमाल अपनी बेहतरी के लिए कैसे करना है।

एक समय में लड़कियों की सृजनात्मकता को कढ़ाई, बुनाई और सिलाई के जरिए आँका जाता था, लेकिन आज लड़कियों के ये गुण उनकी उत्तर पुस्तिका में स्पष्ट देखा जाता है। एक समय में लड़कियों की लगन शक्ति और स्मरण शक्ति को अच्छी गृहणी होने का पर्याय माना जाता था, लेकिन अब उनके इन्हीं गुणों के सही प्रयोग से वह परीक्षा परिणामों में अव्वल आ रही हैं। समाज उन्हें जितना दबाने का प्रयास कर रहा है, लड़कियाँ अब उतना ही उभरने को तैयार हैं।

सीबीएसई के मुताबिक लड़कों की तुलना में 9 फीसदी अधिक लड़कियाँ इस बार पास हुईं हैं। सीबीएसई 12वीं बोर्ड में 88.70 फीसदी लड़कियाँ पास होने में सफल रहीं, जबकि लड़कों का पासिंग पर्सेंटेज 79.4 फीसदी रहा।
इस बार कुल 83.4 फीसदी बच्‍चे पास होने में सफल हुए। लेकिन पिछली बार की तरह इस बार भी लड़कियों ने बाजी मारी है। उम्मीद करती हूँ ऐसे परिणाम साल दर साल आएँगे और एक समय ऐसा आएगा जब लड़कियों का न सिर्फ शिक्षित होना बल्कि हर क्षेत्र में अव्वल होना सबके लिए ‘आम’ बात होगी। लोग समझ पाएँगे कि जिस तरह के समाज का निर्माण लड़कियों के लिए इतिहास में किया गया था, वो एक ब्लर तस्वीर जैसी थी जिसमें लड़की के अस्तित्व का पता तो उनकी शारीरिक बनावट से लग जाता था लेकिन उनके गुणों को धुंधला दिया जाता था।