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कॉन्ग्रेस ने करोड़ों हिन्दुओं पर लगाया आतंकवाद का दाग, अंग्रेजों ने भी नहीं किया था ऐसा: मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र में एक विशाल जनसभा को सम्बोधित करते हुए कॉन्ग्रेस शासन काल में उछाले गए ‘हिन्दू आतंकवाद’ को लेकर पार्टी पर निशाना साधा। प्रधानमंत्री ने लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान वर्धा में आयोजित रैली में ये बातें कहीं। इस दौरान उन्होंने एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार को भी आड़े हाथों लिया। पीएम ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा:

“वोट-बैंक की राजनीति के लिए एनसीपी और कॉन्ग्रेस किसी भी हद तक जा सकती हैं। इस देश के करोड़ों लोगों पर हिंदू आंतकवाद का दाग लगाने का प्रयास कॉन्ग्रेस ने ही किया है। सुशील कुमार शिंदे जब भारत सरकार में मंत्री थे, तो उन्होंने इसी महाराष्ट्र की धरती से हिंदू आतंकवाद की चर्चा की थी। कुछ दिन पहले कोर्ट का फैसला आया है और इस फैसले से कॉन्ग्रेस की साज़िश की सच्चाई देश के सामने आई है।”

“कॉन्ग्रेस ने हिन्दुओं का जो अपमान किया है, कोटि-कोटि जनता को दुनिया के सामने नीचा दिखाने का जो पाप किया है, ऐसी कॉन्ग्रेस को माफ़ नहीं किया जा सकता है। आप मुझे बताइए, जब आपने हिन्दू आतंकवाद शब्द सुना तो आपको गहरी चोट पहुँची थी कि नहीं। हज़ारों साल के इतिहास में हिन्दू कभी आतंकवाद करे, ऐसी एक भी घटना नहीं है। अंग्रेजी इतिहासकारों ने भी कभी ‘हिन्दू हिंसक हो सकता है’ इस बात का जिक्र तक नहीं किया।”

प्रधानमंत्री ने कॉन्ग्रेस पर भारत की पाँच हज़ार वर्ष से भी पुरानी संस्कृति का अपमान करने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने कॉन्ग्रेस के इस ‘पाप’ की याद दिलाते हुए जनता से यह याद रखने को कहा कि ‘हिन्दू आतंकवाद’ जैसे शब्दों को किसने उछाला था? पीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने जिसे आतंकी कहा, वो शांतिप्रिय समाज अब जाग चुका है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का जिक्र करते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस ने पूरे विश्व को परिवार मानने वाले समाज को आतंकवादी बताया।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी कॉन्ग्रेस को इसी मुद्दे पर घेरा। यूपी के नगीना में एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए शाह ने कहा:

“समझौता ब्लास्ट को हिन्दू आतंकवाद बोलकर कॉन्ग्रेस ने अपने वोट बैंक के लिए पूरी दुनिया में शांति और सौहार्द के प्रतीक हिन्दू धर्म को बदनाम किया। आतंकवाद को हिंदू धर्म के साथ जोड़ने का पाप कॉन्ग्रेस ने किया। राहुल बाबा, आपको पता नहीं है हम तो चींटियों को भी आटा खिलाने वाले लोग हैं। कॉन्ग्रेस ने इसके साथ ही पाक प्रेरित लश्कर-ए-तैयबा के ब्लास्ट करने वाले असली गुनहगारों को छोड़कर देश की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ किया।”

राहुल गाँधी के वायनाड से चुनाव लड़ने और मुस्लिम तुष्टिकरण के जवाब में भाजपा अध्यक्ष शाह और पीएम मोदी द्वारा चुनावी मौसम में कॉन्ग्रेस की करतूत याद दिलाना भाजपा की आगामी रणनीति के बारे में बहुत कुछ कहता है। पार्टी ने अब कॉन्ग्रेस द्वारा हिन्दुओं को लेकर कही गई बातों को नए सिरे से उठाना शुरू कर दिया है। दोनों बड़े नेताओं के इस बयान के बाद कई अन्य भाजपा नेताओं ने भी ‘हिन्दू आतंकवाद’ को लेकर कॉन्ग्रेस को निशाना बनाया और जनता को ये सब याद दिलाने की कोशिश की।

गाली के बाद डिलीवरी एजेंट ने की सेक्स की माँग, Swiggy ने कहा – ‘Sorry, ये लो ₹200’

बेंगलुरु में Swiggy की अजीबोगरीब माफी का मामला सामने आया है। ऑन-डिमांड खाना पहुँचाने वाली कंपनी Swiggy के डिलीवरी एजेंट ने तथाकथित तौर पर एक महिला को गाली दी, उसके साथ अश्लील और अभद्र आचरण किया। महिला का आरोप है कि शिकायत करने पर कंपनी ने उसे एक “Sorry” नोट और ₹200 का कूपन दे कर मामला रफा-दफा करने का प्रयास किया।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक नेहा (नाम परिवर्तित) ने इसे नाकाफी मानते हुए कंपनी से उक्त व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है।

नेहा ने इस घटना के बारे में फेसबुक पर लिखते हुए बताया कि यह घटना गत बृहस्पतिवार की है। नेहा ने Swiggy से खाने का ऑर्डर दिया था। जब खाना लेने नेहा बाहर निकलीं तो डिलीवरी एजेंट ने कुछ कहा जिसे वह ठीक से सुन नहीं पाईं। एजेंट ने जब दोहराया तो नेहा को समझ में आया कि वह उनसे सेक्स की माँग कर रहा है और गाली दे रहा है।

नेहा ने लिखा, “मैं स्तब्ध रह गई… मुझे उससे literally खाना छीन कर दरवाज़ा बंद करना पड़ा। पर खाना खाना तो दूर, मुझसे उस खाने की ओर देखा भी नहीं जा रहा था।।”

नेहा ने जाहिर तौर पर Swiggy की उपभोक्ता सेवा (customer service) से इसकी शिकायत की, और जवाब में कंपनी ने उन्हें एक “Sorry” नोट और ₹200 के कूपन दिए। तभी नाराज़ होकर नेहा ने फेसबुक पर शिकायत करने का फैसला लिया।

फेसबुक पर कंपनी ने अपने ढीले रवैये से नेहा को हुए दुखद अनुभव के लिए माफी माँगी है और आगे कार्रवाई करने के लिए उनसे मामले से जुड़े तथ्य और विवरण देने का आग्रह किया है।

बेंगलुरु में खाना डिलीवर करने वाली कंपनियों के डिलीवरी एजेंट की बदतमीजी के मामले रह-रह कर सामने आते रहते हैं। पिछले ही साल एक महिला डीजे ने भी रात को खाना पहुँचाने आए एजेंट की बदतमीजी की शिकायत की थी।  

ऐसे में जब यह कंपनियाँ अपना दायरा बढ़ाने को लेकर इतनी उत्सुक हैं तो इन पर सरकार और समाज दोनों को यह दबाव बनाना चाहिए कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा को लेकर इनके इंतजामों और शिकायत निवारण तंत्र (grievance redressal systems) में भी सुधार उतनी ही तेजी से हो जितनी तेजी से यह व्यापार बढ़ाना चाहती हैं।

कॉन्ग्रेस के सहयोगी डीएमके नेता के ठिकानों पर IT विभाग की छापेमारी, लाखों रुपए बरामद

आयकर विभाग (IT) के अधिकारियों ने चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ तमिलनाडु में कॉन्ग्रेस की सहयोगी पार्टी द्रमुक के वरिष्ठ नेता दुरईमुर्गन के ठिकानों पर छापा मारा। बता दें कि आगामी लोकसभा चुनाव कॉन्ग्रेस और डीएमके मिलकर लड़ेंगे

ख़बर के अनुसार, वेल्लोर में डीएमके लीगल सेल के अधिकारियों द्वारा विरोध करने के बावजूद आयकर अधिकारियों ने छापे मारे। डीएमके लीगल सेल के अधिकारियों ने कर विभाग के इलेक्शन सर्विलांस, ज़िला स्टेटिक सर्विलांस और फ्लाइंग स्क्वॉड की टीमों को बिना वारंट तलाशी लेने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।

आईटी अधिकारियों ने दुरई मुरुगन के वेल्लोर निवास पर शनिवार (30 मार्च) को सुबह 10 बजे तक छापे मारे, जिनके बेटे डीएम कथिर आनंद वेल्लोर लोकसभा क्षेत्र में चुनाव लड़ रहे हैं। मुरुगन और उनके बेटे काथिर आनंद के स्वामित्व वाली जगहों जिनमें उनके आवास, किंग्स्टन इंजीनियरिंग कॉलेज और दुरई मुरुगन बी.एड कॉलेज आदि शामिल हैं वहाँ छापे मारे गए।

आईटी विभाग ने कहा कि तलाशी के दौरान 10 लाख रुपए की बेहिसाब नकदी ज़ब्त की गई है। इसके अलावा निवास स्थान से लगभग 19 लाख रुपए नकद बरामद किए गए। शनिवार को आईटी विभाग द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि चुनावी हलफ़नामे में 6 लाख रुपए नकदी घोषित करने का बाद, अतिरिक्त 10 लाख रुपए ज़ब्त किए गए हैं।

आयकर विभाग ने वेल्लोर में एक सीमेंट गोदाम से भारी मात्रा में नकदी भी बरामद की है। टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के अनुसार, 29-30 मार्च की मध्यरात्रि को दुरीमुरुगन कॉलेज से नकदी को यहाँ स्थानांतरित कर दिया गया था।

इस बीच, दुरई मुरुगन ने आईटी छापे को पूरी तरह से विशुद्ध राजनीतिक करार दिया है। मुरुगन ने कहा कि इसका उद्देश्य चुनाव में उनके बेटे की जीत में बाधा डालना है। मीडिया से बात करते हुए, दुरई मुरुगन ने कहा कि यह पूरी तरह से राजनीति है। यदि आईटी विभाग को इस तरह की छापेमारी करनी थी तो उन्हें यह छापेमारी पिछले महीने ही करनी चाहिए थी। वो इस समय क्यों की गई, हम क़ानूनी रूप से इसका सामना करेंगे।

हालाँकि, आईटी विभाग ने स्पष्ट किया है कि उन्हें वेल्लोर के ज़िला निर्वाचन अधिकारी द्वारा बुलाया गया था और राज्य पुलिस प्रमुख द्वारा जारी आधिकारिक ज्ञापन प्राप्त करने के बाद ही छापेमारी की गई।

लड़ाकू विमान उड़ाने और वॉरशिप पर पराक्रम दिखाने के बाद महिलाएँ अब ‘Defence Attache’ भी बन सकेंगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने महिलाओं को लेकर नए आयाम स्थापित किए हैं। एक समय था जब महिला सशक्तिकरण के नाम पर औरतों को सिलाई मशीन थमा कर सीमित कर दिया जाता था। लेकिन अब परिस्थितियाँ बदल गई हैं। मोदी के नेतृत्व में इंदिरा गाँधी के बाद देश को निर्मला सीतारमन के रूप में पहली महिला पूर्णकालिक रक्षा मंत्री मिलीं जिन्होंने सशस्त्र सेनाओं के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया तेज़ करने के साथ सैन्य क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति को भी में संवारा।

प्रायः देखा गया है कि सैन्य सेवाओं को पुरुषों का अधिकारक्षेत्र माना जाता रहा है। पूर्व में भारतीय वायुसेना से रिटायर हुईं एयर मार्शल पी.बंदोपाध्याय (भारत की पहली एयर मार्शल) जैसी महिलाओं ने इस मिथक को तोड़ा है। इस वर्ष (2019) की शुरूआत में फैसला लिया गया कि भारत अपने विदेशी मिशनों में ‘डिफेंस अताशे’ के रूप में महिला अधिकारियों को भी तैनात करेगा। इस फैसले के बाद तीनों सेनाओं से उन महिलाओं की पहचान करने के लिए कहा गया जो इन पदों के साथ न्याय कर सकती हैं। इस दिशा में पहले डिफेंस अताशे के रूप में महिला सैन्य अधिकारियों को यूरोप और अमेरिका के मिशन पर तैनात करने की योजना है।

हालाँकि ये सच हैं कि भारत में अब तक कई प्रतिष्ठित महिलाएँ राजदूत, राजनयिक यहाँ तक ​​कि विदेशी सचिव भी रही हैं, लेकिन डिफेंस अताशे के रूप में पुरुष अधिकारियों को प्राथमिकता दी जाती थी। यह स्वयं रक्षा मंत्रालय ने स्वीकार किया है। लेकिन अब इन पदों के लिए चुनी गईं महिला ऑफिसर्स अपनी तैनाती पर जल्द ही जा सकती है। किसी देश के राजनयिक मिशन में डिफेंस अताशे का पद महत्वपूर्ण होता है। किसी अन्य देश में भारतीय दूतावास में तैनात डिफेंस अताशे सैन्य विशेषज्ञ के रूप में काम करते हैं। वे रक्षा खरीद संबंधित निर्णय लेने में भारत सरकार की सहायता करते हैं।

बीते कुछ वर्षों में भारत की रक्षा और सुरक्षा व्यवस्था में हुए बड़े परिवर्तन के कारण डिफेंस अताशे पद पर तैनात हुए सैन्य अधिकारी की जिम्मेदारियाँ बढ़ गई हैं। रक्षा कूटनीति अब निश्चित रूप से प्रमुख देशों के साथ भारत की राजनयिक भागीदारी का एक अहम हिस्सा हैं।

मोदी नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी

कुछ महीने पूर्व रक्षा मंत्रालय द्वारा इस बात की घोषणा की गई गई थी की भारतीय सेना की 10 शाखाओं में महिलाओं को स्थाई कमिशन मिलेगा। इनमें सिग्नल, इंजीनियर, आर्मी एविएशन, आर्मी एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल इंजीनियर, आर्मी सर्विस कोर, आर्मी ऑर्डनेंस कोर और इंटेलिजेंस भी शामिल होंगे।

अवनी के रूप में देश को पहली लड़ाकू विमान पायट मिली

इसके अलावा भारतीय वायुसेना की सभी शाखाएँ अब महिलाओं के लिए खुली हुई हैं, इस सूची में लड़ाकू विमान के पायलट का पद भी शामिल है। इस दिशा में याद दिला दें कि गत वर्ष फ्लाइंग ऑफिसर अवनी चतुर्वेदी लड़ाकू विमान को उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं थी जिन्होंने मिग-21 उड़ाकर इतिहास रचा था। यहाँ अवनी के साथ मोहना सिंह और भावना कंठ को भी पहली बार लड़ाकू विमान उड़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

इन तीनों महिलाओं की नियुक्ति पूरे देश के लिए गर्व की बात थी, साथ ही मोदी सरकार की उपलब्धि भी। इसके अलावा मोदी सरकार द्वारा महिला सामर्थ्य पर दिखाया गया अटल विश्वास उस समय दिखा जब देश के 66 वें गणतंत्र दिवस के मौक़े पर तीनों सेनाओं के एक विशेष महिला दस्ते ने मार्च करते हुए अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया।

शुभांगी बनी पहली नेवी पायलट

नौसेना क्षेत्र में शुभांगी के रूप में जब पहली महिला पायलट मिली तो यह देश के लिए गर्व की बात थी। शुभांगी के साथ-साथ आस्था सहगल, रूपा ए. और शक्तिमाया को भी नेवी के आर्मामेंट इंस्पेक्शन ब्रांच में पहली बार नियुक्त किया गया है। पिछले साल नेवी चीफ एडमिरल सुनील लान्बा ने कहा था कि आज नहीं तो कल महिला नौसेना अधिकारियों को युद्धपोत पर तैनाती का अवसर दिया जाएगा।

महिलाओं को सैन्य सेवा में ‘कॉम्बैट रोल’

साल 2017 में थल सेना के प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि जल्द ही महिलाओं को कॉम्बैट रोल (लड़ाकू भूमिका) देने की तैयारी है। अभी तक दुनिया में कुछ चुनिंदा देश ही ऐसा कर पाए हैं। रावत ने कहा था कि महिलाओं को कॉम्बैट रोल, जिसमें अभी तक केवल पुरुष ही होते हैं, देने की प्रकिया तेजी से बढ़ रही है। शुरुआत में महिलाओं को मिलिट्री पुलिस में शामिल किया जाएगा। लेकिन बाद में जनरल बिपिन रावत द्वारा इस फैसले पर स्वयं ही सवालिया निशान लगा दिए गए। जिनको कई लोगों द्वारा वाजिब भी बताया गया।

2018 में इस विषय पर जनरल बिपिन रावत के बयान ने उस समय तूल पकड़ा जब उन्होंने महिलाओं को कॉम्बैट रोल पर संशय जताया। न्यूज़ 18 को दिए इंटरव्यू में कहा भारत अभी महिलाओं को कॉम्बैट रोल में देखने के लिए तैयार नहीं है। रावत ने कहा था कि महिलाओं की ज़िम्मेदारी माँ के रूप में है और उनको छह महीने का मातृत्व अवकाश देना भी मुश्किल है। साथ ही जनरल बिपिन रावत ने महिलाओं की सुरक्षा और सहजता को आधार बताकर भी उन्हें कॉम्बैट रोल देने के लिए असमर्थ बताया। उन्होंने साक्षात्कार में कहा कि ऐसा नहीं है देश में बच्चों की माँ नहीं मरती हैं, लेकिन आतंकी ऑपरेशन में आतंकवादियों को मारने के दौरान जैसे हमारे जवानों का शरीर वीरगति प्राप्त करके घर लौटता है, उस तरह से महिलाओं को देखने के लिए अभी हमारा समाज तैयार नहीं हैं।

इसके अलावा बिपिन ने अपने साक्षात्कार में अपने 2017 के बयान को बदलने के पीछे एक वजह यह भी बताई कि हमारी सेना में अधिकतर जवान गाँव से आते हैं। जो अभी इन चीजों को एकदम से स्वीकारने के लिए तैयार नहीं हैं। उनके अनुसार बहुत से सैनिकों के बहुत से कार्य (कपड़े बदलना, जिम जाना आदि) ऐसे होते हैं जिन्हें सुरक्षा पर तैनात जवान एक साथ कर लेते हैं, लेकिन महिलाएँ उसमें सहज नहीं होंगी।

हालाँकि इस विचार के बाद इसपर काफ़ी विमर्श चल रहा है और महिलाओं को माँ के रूप में दर्शाकर कई अटकलें भी लग रही हैं। लेकिन यकीनन जिस तरह से सरकार द्वारा महिलाओं को रक्षा के क्षेत्र में तैनात करने की प्रक्रिया तेज हैं। उस दिशा में जल्द ही कॉम्बैट रोल को लेकर भी संकोच वाली स्थिति जल्दी समाप्त होगी। बता दें जिन सवालों से आज भारत गुज़र रहा है, उन्हीं दुविधाओं से साल 2013 में अमेरिका को भी जूझना पड़ा था जब वह अपनी सेना में महिलाओं को कॉम्बैट रोल देने पर विचार कर रही थी, लेकिन बाद में इसपर स्टडी हुई और आखिरकार अमेरिका में महिलाएँ कॉम्बैट रोल में शामिल हुईं। अमेरिका के अलावा डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, जर्मनी, फ्रांस, इज़रायल ने भी इस मामले से जुड़ी मुश्किलों को समाप्त किया। यकीनन भारत में भी इसपर काम होगा।

आज भारत में अनेकों लिहाज से महिलाओं की भूमिका को संवारा जा रहा है। फिर चाहे वो महिलाओं के निजी जीवन से संबंधित हो स्थिति हो या फिर देश में रक्षा के लिए तैनात होने को लेकर। हर रूप में और हर क्षेत्र में महिलाओं के सशक्तिकरण की प्रक्रिया चालू है। निर्माला सीतारमन के रूप में देश को एक सशक्त रक्षा मंत्री का मिलना, राजपथ पर महिलाओं के दस्ते द्वारा भारत का गौरव बढ़ाना, अवनी द्वारा लड़ाकू विमान उड़ाना और शुभांगी का नेवी पायलट बनकर पहचान बनाना, इसके साथ ही अब डिफेंस अताशे के रूप में महिला अधिकारियों की नियुक्ति होना नए भारत की नई तस्वीर है।

कुश द्वारा बसाए, मुगलों ने बदली जिसकी पहचान… UP के उस जिले को अब मिलेगा नया नाम!

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सुल्तानपुर जिले का नाम बदलने के लिए खत लिखा है। इस खत में उन्होंने ‘राजपूताना शौर्य फाउंडेशन’ की माँग का जिक्र करते हुए सीएम योगी से सुल्तानपुर जिले का नाम बदलकर कुशभवनपुर करने की सिफारिश की है।

राम नाईक ने पत्र में लिखा, “राजपूताना शौर्य फाउंडेशन के प्रतिनिधि मंडल द्वारा मुझसे मुलाकात कर एक किताब ‘सुल्तानपुर इतिहास की झलक’ के साथ एक ज्ञापन सौंपा गया। इसमें उन्होंने सुल्तानपुर को हेरिटेज सिटी में शामिल किए जाने और उसका नाम बदलकर कुशभवनपुर किए जाने का अनुरोध किया है।” राम नाईक ने सीएम योगी से कहा है कि इस किताब के आधार पर उचित कदम उठाया जाए। उन्होंने खत के साथ वो पुस्तक भी सीएम योगी को भेजी है।

गवर्नर राम नाईक द्वारा सीएम योगी को लिखी गई चिट्ठी

सुल्तानपुर जिले का नाम बदलने की माँग नई नहीं है। ये माँग काफी दिनों से उठ रही है। हाल ही में सुल्तानपुर नगरपालिका में एक प्रस्ताव भी पास किया गया। इससे पहले सुल्तानपुर के लंभुआ से भाजपा विधायक देवमणि ने विधानसभा में जिले का नाम बदलने का प्रस्ताव रखा था। देवमणि का कहना था कि अयोध्या से सटे सुल्तानपुर को भगवान राम के पुत्र कुश ने बसाया था। इसलिए पौराणिक कथाओं में इसे कुशभवनपुर नाम से संबोधित किया गया था। उन्होंने कहा था, “देवी सीता यहीं ठहरी थीं। उनकी याद में आज भी सीताकुंड घाट है। सुल्तानपुर के गजेटियर में भी इस बात का उल्लेख है कि इसका नाम कुशभवनपुर ही था। बाद में मुगल शासकों ने इसका नाम बदल दिया था। ऐसे में इसका पुराना नाम होने से जहाँ गर्व की अनुभूति होगी, वहीं शहर का सांस्कृतिक महत्त्व भी बढ़ेगा।”

गौरतलब है कि इससे पहले योगी सरकार द्वारा इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज, फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या और मुगलसराय जंक्शन का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन किया गया है।

‘प्रधानमंत्री एक अनपढ़, जाहिल या रास्ते पर चलने वाले आदमी की तरह बात करते हैं’

वैसे तो प्रधानमंत्री को लेकर विपक्ष के बोल हमेशा से ही कड़वे रहे हैं लेकिन चुनाव के नज़दीक आते ही इन बयानों की संख्या काफ़ी ज्यादा बढ़ गई है। ऐसे में एनसीपी के नेता और 1993 में मुंबई धमाके के आरोपित याकूब मेमन के वकील मजीद मेमन ने इस बार पीएम को जाहिल और अनपढ़ जैसे शब्द कहे हैं।

नेशनल कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता माजिद मेमन ने सोमवार (अप्रैल 1, 2019) को एएनआई से पीएम मोदी के लिए कहा, “मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री भी एक अनपढ़, जाहिल या रास्ते पर चलने वाले आदमी की तरह बात करते हैं। वो इतने बड़े पद पर बैठे हैं, उनका पद एक संवैधानिक पद है। उस संवैधानिक पद के लिए प्रधानमंत्री रास्ते में नहीं चुना जाता।”

प्रधानमंत्री को उनके पद की गरिमा का एहसास दिलाने वाले मजीद मेमन द्वारा प्रधानमंत्री के लिए की गई ऐसी अभद्र टिप्पणी स्वयं ही दर्शाती है कि संवैधानिक पद का हवाला देने वाले खुद कितना उस पद का सम्मान करते हैं।

इससे पहले भी जब पीएम 2018 में बोहरा समाज के कार्यक्रम में शामिल हुए थे तो मेनन ने एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा था कि मोदीजी बोहरा समाज के पास गए। वो इस विचार से गए कि शायद समुदाय विशेष को रिझा लिया जाएगा, लेकिन न वे इधर के रहेंगे, न ही उधर के। धोबी के कुत्ते वाली बात हो जाती है।

मजीद मेमन के बारे में बता दें कि ये वही शख्स हैं, जिन्होंने याकूब को बचाने के पक्ष में तर्क दिया था कि याकूब को मौत की सज़ा सिर्फ़ इसलिए सुनाई जा रही है क्योंकि वो मुस्लिम है। आतंकी को मिली सज़ा को समुदाय से जोड़ कर दलील पेश करने वाले मजीद ने महाराष्ट्र सरकार पर इल्जाम लगाया था कि वह राजनीतिक कारणों, सांप्रदायिक कारणों, अतिरिक्त कानूनी विचारों के लिए याकूब को मारने में दिलचस्पी लेती दिखाई दे रही है।

‘मायावती हो गई हैं मनुवादी, फैला रही हैं ब्राह्मणवाद’: भीम आर्मी नेता चंद्रशेखर

भीम आर्मी चीफ़ चंद्रशेखर ने बसपा सुप्रीमो मायावती से पूछा है कि जिन सवर्णों को टिकट दिया गया है उनका बहुजन के उत्थान में क्या योगदान रहा है? इसके अलावा मायावती को घेरते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि बहुजन विरोधी मनुवादी सवर्णों को टिकट दिया जा रहा है और दूसरी तरफ मिशनरी कार्यकर्ताओं को एजेंट बताया जा रहा है।

ट्विटर के माध्यम से चंद्रशेखर ने मायावती को जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मायावती को सतीश चंद्र मिश्रा गुमराह कर रहे हैं, उन्होंने एक-एक करके कांशीराम की टीम के सहयोगियों को बाहर करवा दिया है। विरोधों के बावजूद ब्राह्मणवादी और संविधान विरोधी लोगों को टिकट देकर संसद भेजने कोशिश की जा रही है।

चंद्रशेखर ने ट्विटर पर वसीम अकरम त्यागी के उस ट्वीट को भी रीट्वीट किया जिसमें त्यागी ने मायावती पर मनुवादी होने का आरोप लगाया। अपने ट्वीट में त्यागी ने लिखा था कि गुजरात दंगों के बाद गुजरात जाकर मोदी का प्रचार करने वाली बहन जी सहारनपुर में दलितों के अत्याचार के ख़िलाफ़ जेल काटने वाले भीम आर्मी चीफ़ को भाजपा का एजेंट बता रही हैं, इससे शर्मनाक और क्या हो सकता है? बहन जी मनुवादियो से घिरी रहती हैं इसलिए ख़ुद मनुवादी बन बैठीं हैं।

मायावती ने चंद्रशेखर द्वारा वाराणसी से चुनाव लड़ने को लेकर भाजपा की साज़िश बताया और ट्वीट किया था कि भाजपा दलित वोट काटने की मंशा से चंद्रशेखर को वाराणसी से चुनाव लड़वा रही है। इसे मायावती ने भाजपा का षडयंत्र करार दिया था और कहा था कि भीम आर्मी का निर्माण भी भाजपा की चाल है जिससे दलित विरोधी मानसिकता की राजनीति की जा सके।

अपने एक अन्य ट्वीट में मायावती ने लिखा था कि चंद्रशेखर को बसपा में भेजने के पीछे भाजपा द्वारा जासूसी करने की मंशा थी, जो विफल हो गई है।


अनुच्छेद 370 की बहस में अब फ़िल्मी दुनिया की ‘सेलिब्रिटी’ हुईं शामिल, ट्विटर पर हुई नोकझोंक

अनुच्छेद 370 पर आए दिन सोशल मीडिया पर जुबानी जंग होती रहती है। इस बार यह जंग बिग बॉस की कंटेस्टेंट रह चुकी पायल रोहतगी और एक्ट्रेस गौहर ख़ान के बीच दिखी। पायल के एक ट्वीट ने बवाल मचा दिया है। यह ट्वीट उन्होंने अनुच्छेद 370 को लेकर किया जिसके बाद गौहर ख़ान और उनके बीच तीखी बहस का सिलसिला शुरू हो गया।

दरअसल, पायल रोहतगी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि अगर जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया जा सकता है तो वहाँ से मुस्लिमों को भी बाहर कर देना चाहिए। बहुत से ऐसे कश्मीरी लोग हैं जो अन्य शहरों में बस गए हैं। कश्मीर हमेशा भारत का हिस्सा रहेगा, फिर चाहे कोई कश्मीर में रहे या न रहे। पंडितों को बाहर निकाल दिया गया, अब मुस्लिमों को भी बाहर निकाल देना चाहिए।

इस ट्वीट के बाद एक्ट्रेस गौहर ख़ान ने चुटकी लेते हुए जवाब में लिखा कि ये बात वो शख़्स कर रहा है जो ख़ुद 90% मुस्लिम आबादी के बीच ख़ुशी से रह रहा है। मुझे अब, बिल्डिंग में रहने वाले मुस्लिमों पर गर्व है जो तुम्हारे जैसे शख़्स को बर्दाश्त कर रहे हैं।

इसके अलावा अपने एक अन्य ट्वीट में गौहर ने लिखा कि कुछ लोग दूसरे मजहब वालों को अपना घर किराए पर नहीं देते हैं। नफ़रत फैलाना आसान है, इस तरह के विचारों पर शर्म आती है। भारत अपनी विविधताओं की वजह से सुंदर है। ऐसे लोगों को शर्म आनी चाहिए जो भारत को बाँटने की बात करते हैं।

गौहर के इन ट्वीट्स का जवाब पायल रोहतगी ने दिया और लिखा कि एक आंटी जिसने बिग बॉस जीतने के लिए एक हिन्दू लड़के के साथ असफल रिश्ता बनाया वो मेरी बिल्डिंग की आबादी को जानती है। आपको पता होना चाहिए कि मैं फ्लैट की मालकिन हूँ। पायल ने गौहर को कहा, “क्या तुम हिजाब में वर्कआउट करती हो ? क्योंकि मेरी बिल्डिंग में काम करने वाली महिलाएँ ऐसा करती हैं।”

हाल ही में महबूबा मुफ़्ती ने भी कहा था कि अगर अनुच्छेद 370 हटाया गया तो इस पर विचार किया जाएगा कि कश्मीर, भारत का हिस्सा बनेगा या नहीं। उनकी यह टिप्पणी तब सामने आई थी जब वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करने की बात कही थी।

J&K: पुलवामा में लश्कर के 4 आतंकी ढेर, सर्च ऑपरेशन अब भी जारी

जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। आज तड़के पुलवामा जिले के लस्सीपोरा में आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच जारी मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने 4 आतंकियों को मार गिराया। सुरक्षाबलों को खुफिया सूत्रों से जानकारी मिली थी कि एक घर में कुछ आतंकी छिपे हैं। इसके बाद सेना, सीआरपीएफ और पुलिस ने संयुक्त रूप से तलाशी अभियान चलाया और इलाके को घेर लिया। जब आतंकवादी सुरक्षा बलों से घिर गए तो उन्होंने सुरक्षाबलों पर फायरिंग करना शुरू कर दिया, जिसका सुरक्षाबलों ने मुँहतोड़ जवाब दिया और इस दौरान हुए मुठभेड़ में चार आतंकवादी ढेर हो गए।

जानकारी के मुताबिक, सभी आतंकवादी लश्‍कर-ए-तैयबा के थे। सुरक्षाबलों ने आतंकियों के पास से 2 एके राइफल, एक एसएलआर और एक पिस्टल बरामद की है। सर्च ऑपरेशन अब भी जारी है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के अधिकारी ने बताया कि, मुठभेड़ के दौरान सेना के तीन जवान और एक पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह एक साफ ऑपरेशन था। मुठभेड़ के दौरान किसी तरह की नागरिक संपत्ति की क्षति नहीं हुई। मुठभेड़ स्थल से हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया है और मामला दर्ज कर लिया गया है।

गौरतलब है कि, इससे पहले सुरक्षा बलों ने 29 मार्च को दो आतंकवादी मार गिराए थे। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल राजेश कालिया ने बताया था कि श्रीनगर शहर के बाहरी क्षेत्र नौगाम में एक मुठभेड़ में आतंकवादी मारे गए। वहीं, 28 मार्च को जम्मू कश्मीर के शोपियां और कुपवाड़ा जिलों में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में चार आतंकवादी मार गिराए थे। आतंकियों के खिलाफ ‘ऑपरेशन ऑलआउट’ काफी लंबे समय से चल रहा है। इस ऑपरेशन के तहत इस साल अभी तक 250 से ज्यादा आतंकवादियों को मुठभेड़ में मारा गया है, जबकि पिछले साल 217 आतंकवादी ही मारे गए थे। पुलवामा आतंकी हमले के बाद सुरक्षाबलों ने कार्रवाई तेज कर दी है। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भी घाटी में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं।

EMISAT: शत्रु के रडार को पकड़ने में सक्षम भारत का इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस सैटेलाइट

इसरो ने आज सुबह 9:30 बजे PSLV C-45 रॉकेट से अन्य देशों के 28 सैटेलाइट सहित EMISAT को भी लॉन्च किया। यह भारत का इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस सैटेलाइट है।

इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस (ELINT) सैटेलाइट क्या होता है?

गुप्तचरी या ख़ुफ़िया तरीकों से सूचना जुटाना मानव इतिहास के सबसे पुराने पेशे में से एक माना जाता है। आधुनिक शब्दावली में इसे ‘Intelligence gathering’ कहा जाता है। जब व्यक्तियों के बीच जाकर सीधा सम्पर्क कर सूचना एकत्रित की जाती है तब उसे ह्यूमन इंटेलिजेंस या HUMINT कहते हैं। लेकिन जब मनुष्यों से सीधा सम्पर्क न कर के उनके द्वारा प्रयोग में लाए जा रहे डिवाइस के सिग्नल को पकड़ कर सूचना जुटाई जाती है तब उसे SIGINT कहा जाता है।

SIGINT दो प्रकार का होता है- एक जिसमें संचार या कम्युनिकेशन हो रहा हो, और दूसरा जिसमें कम्युनिकेशन न हो रहा हो। जब दो व्यक्ति बात कर रहे हों और उनकी बातचीत को सुना जाए तो उसे COMINT कहते हैं। लेकिन जब सिग्नल ऐसा हो जिसमें प्रत्यक्ष रूप से कोई कम्युनिकेशन न हो रहा हो जैसे कि रडार के सिग्नल, तब उसे इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस या ELINT कहते हैं। EMISAT भी शत्रु के रडार के सिग्नल को पकड़ने में सक्षम सैटेलाइट है। डीआरडीओ की 2013-14 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार ‘प्रोजेक्ट कौटिल्य’ के अंतर्गत इस सैटेलाइट का निर्माण किया गया। ‘कौटिल्य’ के अर्थशास्त्र में भी गुप्तचरी की भूमिका को सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है।

एमीसैट के अलावा PSLV C-45 लॉन्च वेहिकल द्वारा अमेरिका के 24, स्पेन का एक, लिथुआनिआ के दो और एक स्विट्ज़रलैंड का सैटेलाइट भी कक्षा में स्थापित किया गया। यह इसरो का 47वां मिशन था जिसे समय पर और सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया। इसरो ने इस मिशन को देखने के लिए आम जनता के लिए भी अपने द्वार खोल दिए। लॉन्च के पहले रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया अपनाई गई जिसके कारण सामान्य नागरिकों ने भी यह लॉन्च प्रत्यक्ष देखा।