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Info फीचर: मिडिल क्लास को क्या-क्या मिला मोदी सरकार से, ये 15 फोटो आपकी आँखें खोल देंगी

भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष की आलोचनाओं के बीच मध्यम वर्ग के लिए किए गए कार्यों को गिनाने का कार्य शुरू कर दिया है। पार्टी ने कई इन्फोग्राफिक चित्र सोशल मीडिया के माध्यम से ट्वीट कर बताया कि मोदी ने मिडिल क्लास के लिए क्या किया है। इन इन्फोग्राफिक्स में नरेंद्र मोदी के कार्यभार सँभालने से पूर्व से लेकर अब तक के डेटा की तुलना की गई है और पाँच वर्षों में हुए बदलावों के बारे में बताया गया है। आइए एक नज़र डालते हैं इन इन्फोग्राफिक्स पर:

1. उच्चतर शिक्षा एवं रिसर्च

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्य।

2. करदाताओं को राहत

करदाताओं को दिए गए विभिन्न फ़ायदे।
ताज़ा बजट में हुई घोषणाएँ।

3. सामान्य वर्ग के ग़रीब छात्रों को आरक्षण

सामान्य वर्ग के गरीब छात्रों की शिक्षा के लिए किए गए कार्य।

4. LED बल्ब की क़ीमत घटने से बिजली बिल में राहत

LED बल्ब की कीमतों में भारी कमी।

5. तीन करोड़ करदाताओं को टैक्स छूट

विभिन्न सेवाओं में टैक्स पर छूट।

6. कर्मचारियों के लिए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर

जॉब बदलने पर भी UAN समान रहेगा।

7. कामकाजी महिलाओं को मातृत्व अवकाश

कामकाजी महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश।

8. कई खाद्य पदार्थों पर कोई टैक्स नहीं

प्रमुख खाद्य पदार्थों पर ‘No Tax ‘

9. भूमाफियाओं से मुक्ति

रियल एस्टेट सेक्टर को संजीवनी।

9.1 होम लोन मिलने में आसानी

होम लोन भी हुआ सस्ता।

10. पासपोर्ट मिलना हुआ आसान

300 नए पासपोर्ट सेवा केंद्र।

11. हवाई यात्रा हुई सस्ती

4.5 वर्षों में 100 से भी ज्यादा एयरपोर्ट।

12. शिक्षा ऋण हुआ सस्ता

कम ब्याज़ पर शिक्षा ऋण।

13. पेट्रोल के मूल्य पर नियंत्रण

तेल के दाम हुए कम।

14. मनोरंजन अब सिर्फ अमीरों के लिए ही नहीं

सिनेमा टिकट पर अब कम टैक्स।

15. स्वास्थ्य ख़र्च अब बजट में

इन इन्फोग्राफिक चित्रों को कई केंद्रीय मंत्रियों द्वारा भी सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। ट्विटर पर #MiddleClassWithModi काफी देर तक ट्रेंड होता रहा। भाजपा द्वारा इन आँकड़ों का प्रचार करना अहम है, क्योंकि विपक्षी नेताओं ने दावा किया था कि केंद्र सरकार ने मिडिल क्लास के लिए कुछ नहीं किया है।

ममता को ‘सुप्रीम’ झटका: कमिश्नर राजीव कुमार पेश हों – SC का आदेश

धरने पर बैठी पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को तगड़ा झटका लगा है। शारदा चिटफंड घोटाले में कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ संबंधी सीबीआई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जाँच एजेंसी के सामने पेश होने का आदेश दिया। राजीव कुमार के लिए राहत की बात सिर्फ इतनी है कि कोर्ट ने फिलहाल उनकी गिरफ़्तारी पर रोक लगाई है।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने अपने आदेश में कहा कि राजीव कुमार को सीबीआई के सामने पेश होना चाहिए और उन्हें जाँच में सहयोग करना चाहिए। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावे जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की।

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर को मानहानि याचिका पर नोटिस भी भेजा है। इस मामले पर अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी।

ममता की किरकिरी, बच गया ‘लोकतंत्र’

आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार सीबीआई और केंद्र सरकार के खिलाफ पिछले तीन दिनों से धरने पर बैठी हुई है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से उनको झटका लगा है। हालाँकि यह झटका TMC के लिए तो प्रत्यक्ष तौर पर है, लेकिन परोक्ष तौर पर उन विपक्षी पार्टियों के लिए भी है, जो ममता के साथ धरना-पॉलिटिक्स को बढ़ावा दे रहे थे। यह झटका उनके लिए भी है जो, लोकतंत्र की ‘हत्या’ को लेकर ‘चिंतित’ थे।

CBI vs ममता: क्या-क्या हुआ ‘खेल’

कोलकाता में चल रही राजनीतिक खींचातानी के बीच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में सीबीआई में कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से शारदा चिट फंड मामले में सहयोग करने का निर्देश देने की मांग की थी। सीबीआई ने अपनी याचिका में यह भी कहा कि था कई बार तलब किए जाने के बावजूद, राजीव कुमार सहयोग करने में असफल रहे। साथ ही जाँच में बाधा भी पैदा की।

सीबीआई द्वारा सुनवाई के लिए याचिका को सूचीबद्ध करने के बावजूद, मुख्य न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई ने मंगलवार (5 फरवरी, 2019) को सुनवाई की तारीख़ दी थी। हालाँकि मुख्य न्यायाधीश ने चेतावनी वाले अंदाज़ में यह ज़रूर कहा था कि अगर कोलकाता पुलिस कमिश्नर मामले से जुड़े सबूतों को नष्ट करने की भी सोचेगा, तो कोर्ट उस पर बहुत भारी पड़ेगा, उसे पछतावा होगा।

इससे पहले रविवार (फरवरी 3, 2019) को शारदा चिटफंड घोटाला मामले में CBI की टीम जब कोलकाता में पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के निवास स्थान पर पहुँची, तो CBI टीम को पुलिसकर्मियों ने अन्दर जाने ही नहीं दिया। इतना ही नहीं, उन सीबीआई ऑफिसरों को कोलकाता पुलिस ने गिरफ़्तार भी कर लिया। हालाँकि कुछ घंटों बाद उन्हें रिहा भी कर दिया गया।

ममता बनर्जी ने सीबीआई के इस एक्शन को केंद्र सरकार से प्रेरित बताया। इसमें राजनीति को घुसाते हुए वो राजीव कुमार के समर्थन में धरने पर बैठ गईं। एक मुख्यमंत्री का किसी व्यक्ति विशेष के लिए उठाया गया ये धरनारूपी क़दम भारतीय राजनीति के लिए अनोखा है। ख़ुद को ‘धरना क्वीन’ बनाने वाली ममता को CBI की कार्रवाई पर भला ऐसी भी क्या आपत्ति हो सकती है कि वो आधी रात को ही धरने पर बैठ गईं!

How’s The ख़ौफ़: रांची-बोकारो-रोड के रास्ते CM योगी की पश्चिम बंगाल रैली पर ‘फ़िल्मी’ तंज

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज यानी मंगलवार (फरवरी 5, 2019) को ममता बनर्जी को चुनौती देने पश्चिम बंगाल (पुरुलिया) जाएँगे। यहाँ दोपहर 3.25 पर वह जनसभा को संबोधित करने वाले हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पश्चिम बंगाल में 3 फरवरी को दो जगहों पर जनसभा करनी थी, लेकिन वहाँ के प्रशासन से उनके हेलीकॉपटर को लैंडिंग की अनुमति नहीं मिली थी। बावजूद इसके योगी ने मोबाइल की मदद से दोनों सभाओं को संबोधित किया था। इस घटनाचक्र के बाद भाजपा समर्थकों का कहना था कि ममता बनर्जी की सरकार योगी आदित्यनाथ से डर गई हैं।

इस घटना के दो दिन बाद योगी आदित्यनाथ बंगाल में रैली की तैयारी कर रहे हैं। वो झारखंड के रास्ते (रांची से बोकारो होते हुए पुरुलिया जाएँगे) पश्चिम बंगाल में घुसेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे। इस राजनीतिक उठा-पटक पर उत्तर प्रदेश सरकार के इकलौते मुस्लिम मंत्री ने तृणमूल से पूछा – हाउ इज द खौफ? यानी डर कैसा है?

एक बार फिर से बंगाल की सरकार सीएम के हेलीकॉप्टर की लैंडिग में बाधक न बन सके, इसलिए योगी आदित्यनाथ का हेलीकॉप्टर झारखंड और बंगाल की सीमा स्थित बोकारो के नगेन मोड़ पर उतरेगा। यहाँ उतरने के बाद योगी सड़क मार्ग से जनसभा स्थल तक पहुँचेंगे। झारखंड में तो बीजेपी की ही सरकार है लेकिन यदि वहाँ तक पहुँचने के बाद बंगाल की सरकार ने उन्हें सभा करने की अनुमति नहीं दी तो योगी बनाम बंगाल सरकार का खबरों की सुर्खियों में आना तय है।

बता दें कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की पश्चिम बंगाल के बालुरघाट में एक रैली थी। किंतु, ममता सरकार से योगी को इसमें शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई। यहाँ तक की वहाँ की सरकार ने बिना किसी नोटिस के रैली को ख़ारिज भी कर दिया। इसके बाद वहाँ नाराज़गी का माहौल और तनातनी की स्थिति भी देखने को मिली।

इस पूरे मामले में सीएम के सूचना सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने योगी की रैली को लेकर ममता सरकार पर निशाना कसा। उन्होंने कहा कि यह यूपी के सीएम की लोकप्रियता का असर है कि ममता बनर्जी ने हेलीकॉप्टर लैंड करने की अनुमति नहीं दी।

इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में बीजेपी के नेता मुकुल रॉय ने भी इसपर खासी नाराज़गी जताई। उन्होंने बताया कि वहाँ एक रेगुलर एयरपोर्ट है, वहाँ पर हेलीकॉप्टर को लैंड करने की इज़ाजत देने में क्या परेशानी है। मुकुल ने पं. बंगाल सरकार के इस कदम को गैर-लोकतांत्रिक बताया था।

प्रशांत भूषण के ख़िलाफ़ SC में अवमानना याचिका, ईमानदारी पर शक का है मामला

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने वकील प्रशांत भूषण के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाख़िल किया है। प्रशांत भूषण द्वारा शुक्रवार (फरवरी 1, 2019) को दिए गए बयानों को लेकर यह अवमानना याचिका दाख़िल की गई है। याचिका में वेणुगोपाल ने कहा है कि भूषण ने उनकी ईमानदारी पर शक जताया। ज्ञात हो कि प्रशांत भूषण ने शुक्रवार को कई ट्वीट करते हुए लिखा था कि सीबीआई प्रमुख नागेश्वर राव की नियुक्ति के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को गुमराह किया।

प्रशांत भूषण ने अपने ट्वीट्स में लिखा:

मैंने विपक्ष के नेता श्री खड़गे से व्यक्तिगत रूप से पुष्टि की है कि ‘हाई पॉवर्ड कमेटी (HPC)’ की बैठक में सीबीआई निदेशक के रूप में नागेश्वर राव को पुनः बहाल करने से संबंध में कोई चर्चा नहीं हुई थी और इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया था। सरकार ने उच्चतम न्यायालय को गुमराह किया है और शायद HPC की बैठक के मनगढंत विवरण प्रस्तुत किए हैं!”

बता दें कि सीबीआई में दो उच्चाधिकारियों के बीच छिड़े विवाद के बाद केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए तत्कालीन निदेशक आलोक वर्मा को अक्टूबर 2018 में लम्बी छुट्टी पर भेज दिया था। प्रशांत भूषण ने केंद्र सरकार के इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने उच्चाधिकार प्राप्त समिति को नया सीबीआई निदेशक चुनने को कहा था। उस समिति में प्रधानमंत्री मोदी, मुख्य न्यायाधीश के प्रतिनिधि और विपक्ष के नेता खड़गे शामिल हैं।

87 वर्षीय वेणुगोपाल ने याचिका में कहा कि प्रशांत भूषण ने उनकी ईमानदारी एवं सत्यनिष्ठा पर जानबूझ कर संदेह प्रकट किया। 1 फरवरी को सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में HPC की बैठक का विवरण प्रस्तुत किया था। इसे सुनवाई के दौरान एक सीलबंद लिफ़ाफ़े में पेश किया गया था। इस दौरान वेणुगोपाल ने अदालत को बताया था कि केंद्र सरकार ने नागेश्वर राव को अंतरिम निदेशक नियुक्त करने से पहले HPC की अनुमति ली थी।

प्रशांत भूषण अक्सर केंद्र सरकार के फ़ैसलों के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट जाते रहे हैं। कोर्ट में प्रशांत भूषण के व्यवहार को देखते हुए वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने एक बार कहा था कि जजों को भूषण को धक्के देकर कोर्ट से बाहर कर देना चाहिए। सीबीआई विवाद के मामले में भी भूषण कई बार अदालत गए। कभी आलोक वर्मा की नियुक्ति का विरोध करने वाले भूषण ने वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने का भी विरोध किया।

ममता Vs CBI: राहुल गाँधी को झटका, बंगाल कॉन्ग्रेस ने की TMC सरकार को बरख़ास्त करने की माँग

ममता बनर्जी सरकार द्वारा सीबीआई के ख़िलाफ़ की गई कार्रवाई और फिर केंद्र सरकार के विरुद्ध धरने पर बैठने के मामले पर भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस (INC) का दोहरा रवैया सामने आ रहा है। जहाँ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी इस मामले में ममता बनर्जी के साथ खड़े नज़र आ रहे हैं, वहीं पश्चिम बंगाल कॉन्ग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी के ख़िलाफ़ राग छेड़ा है। उन्होंने ममता बनर्जी के रवैये और सीबीआई पर कार्रवाई को संविधान के ख़िलाफ़ बताया। सबसे पहले, संक्षेप में पूरे घटनाक्रम को समझते हैं।

रविवार (फरवरी 3, 2019) को जब CBI के अधिकारीगण कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के बंगले पर पहुँचे, तब बंगाल पुलिस ने न सिर्फ़ केंद्रीय एजेंसी के कामकाज में बाधा पहुँचाई, बल्कि उनके साथ दुर्व्यवहार करते हुए उन्हें अपराधियों की तरह उठा कर थाने ले गई। सैंकड़ों की संख्या में पुलिस फ़ोर्स ने केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के आधिकारिक परिसरों को घेर लिया। स्थिति की गंभीरता को भाँपते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सक्रिय हुईं और उन्होंने राज्य पुलिस की इस निंदनीय कार्रवाई को ढकने के लिए इसे राजनीतिक रंग से पोत दिया। फिर उन्होंने केंद्र सरकार पर ‘संवैधानिक तख़्तापलट’ का आरोप लगाया और धरने पर बैठ गईं।

इसके बाद राहुल गाँधी समेत कई विपक्षी नेता मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के समर्थन में उतर आए और उन्होंने ट्वीट कर केंद्र सरकार को घेरा। चंद्रबाबू नायडू, शरद यादव, उमर अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव सहित तमाम विपक्षी नेताओं ने ममता बनर्जी का समर्थन किया। राहुल गाँधी ने अपने बयान में कहा:

“मैंने ममता बनर्जी से फोन पर बात की। पूरा विपक्ष उनके साथ है और हम फ़ासीवादी ताक़तों को हरा कर रहेंगे। पश्चिम बंगाल में जो कुछ भी हुआ है, वह देश की संस्थाओं पर प्रधानमंत्री और भाजपा की तरफ से किए जा रहे हमलों का हिस्सा है।”

कॉन्ग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी रविवार को कहा कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और पीएम मोदी की ममता बनर्जी के प्रति नफ़रत जगज़ाहिर है। इसी बीच ख़बर आई बंगाल कॉन्ग्रेस से – ख़बर जो खुद कॉन्ग्रेस और विपक्षी दलों को चुभने वाली है, BJP के पक्ष में है। बंगाल कॉन्ग्रेस ने केंद्र सरकार से पश्चिम बंगाल की तृणमूल सरकार को बरख़ास्त करने की माँग की है। उन्होंने केंद्र सरकार से निवेदन किया है कि संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत पश्चिम बंगाल सरकार को तत्काल बरख़ास्त किया जाए। बता दें कि अधीर रंजन चौधरी यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं।

बंगाल प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के प्रमुख सोमेंद्र नाथ मित्रा ने भी ममता बनर्जी को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि अगर पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार निर्दोष हैं, तो फिर वह पूछताछ से क्यों बच रहे हैं? इसके अलावा बंगाल कॉन्ग्रेस ने 6 फरवरी को राज्यव्यापी प्रदर्शन का ऐलान भी कर दिया है। मित्रा ने कहा कि उनकी लड़ाई भाजपा और तृणमूल कॉन्ग्रेस- दोनों से ही है।

आपको बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है, जब कॉन्ग्रेस की प्रदेश इकाई ने किसी राज्य में आलाकमान से अलग राग अलापा हो। सबरीमाला मंदिर विवाद को लेकर भी केरल कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी की अलग-अलग राय थी। राहुल ने जहाँ सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया था, वहीं प्रदेश कॉन्ग्रेस श्रद्धालुओं के साथ खड़ी थी। बाद में राहुल गाँधी ने यू-टर्न लेते हुए अपना बयान बदल दिया था।

ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी कार्यालय में की गई जमकर तोड़फोड़

सीबीआई और ममता बनजी सरकार के बीच शुरू हुआ विवाद अब बढ़ता नज़र आ रहा है। कल रात ममता के धरने पर बैठने के बाद से प्रदेश में उनके कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं। अब ताजा मामला ममता बनर्जी के भवानीपोर निर्वाचन क्षेत्र से है, जहाँ भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय में तोड़फोड़ की गई है। जिसके बाद बंगाल बीजेपी ने अपने ट्वीटर हैंडल से तोड़फोड़ का वीडियो अपडेट किया है।

बीजेपी ने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए ट्विटर पर लिखा है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। आरोप है कि तोड़फोड़ तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा की गई है। ख़बरों के अनुसार इस मामले को लेकर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केएन त्रिपाठी ने केंद्रीय गृह सचिव राजनाथ सिंह को एक रिपोर्ट सौंप दी है। गृहमंत्री ने मामले को लेकर उनसे बातचीत करते हुए मामले की रिपोर्ट माँगी थी।

CBI नोटिस का पुलिस कमिश्नर ने नहीं दिया था कोई जवाब

सीबीआई के अधिकारियों की मानें तो आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार, जो शारदा चिटफंड घोटाले मामले में राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी के प्रमुख थे, उनसे पूछताछ करना चाहती थी। अधिकारियों के अनुसार राजीव को जाँच में शामिल होने के लिए एक नोटिस दिया गया था, लेकिन उन्होंने उसका जवाब नहीं दिया था। इसके बाद सीबीआई की टीम राजीव कुमार के आवास पर पहुँची थी। जिसके बाद CBI टीम को पुलिसकर्मियों को पुलिस आयुक्त के आवास के अन्दर नहीं जाने दिया गया था, साथ ही उन्हें गिरफ़्तार भी किया गया था। हालाँकि, कुछ देर बाद सीबीआई अधिकारियों को छोड़ दिया गया था।

मोदी सरकार की बड़ी कामयाबी, UK के गृह मंत्रालय ने विजय माल्या के प्रत्यर्पण को दी मंजूरी

ब्रिटेन के गृह सचिव ने भारत के भगौड़े कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण की मंजूरी प्रदान कर दी है। ये मोदी सरकार के लिए एक बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है। काफी समय से भारत सरकार कूटनीतिक तरीके से विजय माल्या के प्रत्यर्पण को लेकर प्रयासरत थी, जिसमें आज उसे सफलता मिल गई है।

कुछ दिन पहले ही केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने विजय माल्या से सम्बंधित बैंक खातों में धनराशि को अवरुद्ध करने के लिए स्विस अधिकारियों से अनुरोध किया था, साथ ही उसके खातों का विवरण प्रदान करने की भी माँग की थी। स्विटजरलैंड की शीर्ष अदालत द्वारा सूचना प्रदान करने को मंजूरी मिलने के बाद दोनों देशों के अधिकारियों द्वारा पहल शुरू की जा चुकी थी।

सीबीआई ने स्विस अधिकारियों से इस बात का अनुरोध किया था कि वो भगौड़े व्यापारी विजय माल्या के चार बैंक अकाउंट में आने वाले फंड को रोक दें। जिसके बाद जेनेवा के सरकारी वकील ने न केवल सीबीआई द्वारा किए इस अनुरोध का 14 अगस्त 2018 को पालन किया और माल्या के अन्य तीन बैंक अकाउंट की जानकारियों को भी साझा की थी। साथ ही उन पाँच कंपनियों की भी जानकारी सीबीआई को दी, जिनका संबंध माल्या से है।

आगरा में छोटी सी घटना से भड़का सांप्रदायिक तनाव, समुदाय विशेष ने किया पथराव और फायरिंग, 10 घायल

आगरा के संवेदनशील इलाकों में शामिल मंटोला के टीला नंदराम में रविवार (फरवरी 04, 2019) रात 8 बजे सांप्रदायिक बवाल हो गया। इसकी वजह अनुसूचित जाति की बस्ती के युवक प्रमोद को सलमान और शाहरुख़ नाम के 2 लड़कों द्वारा मुंडापाड़ा में पानी भरते वक़्त झड़प को बताया जाता है।

इस घटना में आरोप ‘समुदाय विशेष’ के लोगों पर लगा है। घटना के बाद दोनों ओर से लोग इकट्ठा हो गए। इसके बाद पथराव हुआ, फायरिंग हुई, बोतलें भी फेंकी गईं और सलमान, अकरम, शेरा अपने साथियों के साथ वहाँ से भाग गए। पथराव में 10 लोग घायल हो गए और भारी तनाव का माहौल बना हुआ है। इस घटना के बाद यहाँ पर 6 थानों की पुलिस फ़ोर्स तैनात की गई है।

क्या है मामला:

रिपोर्ट्स के अनुसार प्रमोद मुंडापाड़ा में आरओ प्लांट से पानी लेने गया था। वह पानी लेकर घर आ रहा था। आरोप है कि दूसरे समुदाय के युवक ने अपना पैर अड़ाकर उसे गिरा दिया। इस पर जब प्रमोद वहाँ अपने परिवार के लोगों को लेकर पहुँचा तो दूसरी तरफ से बल्लू, अकरम, यूसुफ, शेरा और मजीद समेत सैकड़ों लोग आ गए।

इसके बाद बल्लू, अकरम, यूसुफ, शेरा और मजीद ने अपने साथियों सहित अनुसूचित जाति की बस्ती पर हमला बोल दिया। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि पथराव दोनों ओर से हुआ। अकरम, शेरा पक्ष की ओर से बोतलें भी फेंकी गई और फायर भी किए गए। पथराव में प्रमोद पक्ष के अरुण प्रसाद, धीरज, प्रमोद, चंद्रा देवी, प्रेम चंद घायल हो गए। पुलिस के पहुँचने पर दँगाई वहाँ से भाग गए और घटना के बाद कई घरों पर ताले लटके मिले।

इस हिंसा और तनाव के कारण मुंडापाड़ा इलाके में पूरी सड़क पत्थरों और कांच से पट गई थी। प्रमोद ने बताया कि उनके परिवार के 3 घर हैं और तीनों में तोड़फोड़ की गई है। उधर, तनाव को देखते हुए छत्ता से लेकर सदर सर्किल तक की फोर्स तैनात की गई है। साथ ही खुफिया पुलिस भी लगा दी गई है।

उत्पात मचाने वाले अकरम और शेरा के समूह में शामिल रहे लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस के अनुसार सलमान और शाहरुख़ इस मामले में मुख्य आरोपित हैं। अब तक पुलिस की ओर से 50-60 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया है। वहीं मोहल्ले में तनावभरी शांति है। इस कारण पुलिस और पीएसी तैनात है। हालाँकि, तनाव के चलते आज सोमवार को लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकले।

एसपी सिटी प्रशांत वर्मा ने बताया कि हमलावरों की तलाश की जा रही है। पुलिस अपनी ओर से केस दर्ज करेगी। एहतियातन पूरे इलाके में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है।

फोटो फ़ीचर: मौनी अमावस्या पर संगम का नज़ारा अद्भुत, अविश्वसनीय, अकल्पनीय

कुम्भ मेला में आज दूसरे शाही स्नान के अवसर पर संगम का नज़ारा अविस्मरणीय रहा। आज माघी अमावस्या (मौनी अमावस्या) पर मध्यरात्रि से ही करोड़ों श्रद्धालु, साधु-संतों ने संगम पर पावन पुनीत गंगा में आस्था की डुबकी लगा अमृत पान किया।

मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में संगम तट पर जुटे श्रद्धालु

शाही स्नान को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स ने कई तस्वीरें शेयर की हैं। इनमें कुम्भ के अद्भुत दृश्य को देखकर सिर्फ़ तीन शब्द मुख से निकलते हैं अद्भुत, अविस्मरणीय, अवर्णनीय।

प्रातः कालीन आस्था के संगम की एक झलक

कुम्भ अर्थात आस्था का महासंगम, आप भारतीय हैं और अगर कुम्भ नहीं गए तो दिव्यता के अनुभव से चूक गए। सभ्यता के अगर जीवंत दस्तावेज से परिचित होना हो तो हो आइए कुम्भ।

मौनी अमावस्या पर दिव्यता के स्नान का एक और नज़ारा

आज प्रयागराज में अमरत्व स्नान के लिए संगम घाट पर सुबह से ही महानिर्वाणी और अटल अखाड़ा ने स्नान किया। इसके बाद श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा, तपोनिधि श्री पंचायती आनंद, पंचदशनाम जूना अखाड़ा, अग्नि, आह्वान अखाड़े के संतों ने डुबकी लगाई।

शाही स्नान का एरियल व्यू

आज मौनी अमावस्या के महास्नान में क़रीब चार करोड़ श्रद्धालुओं, संत, महात्माओं ने स्नान कर दिव्यता का अनुभव किया।

कोहरे में लिपटी तस्वीर

मौनी अमावस्या पर बड़ी संख्या में लोगों के आने की उम्मीद होने के मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। अपर पुलिस महानिदेशक एस.एन. साबत ने कहा, सोमवती अमावस्या होने की वजह से  ‘मकर संक्रांति’ के स्नान की तुलना में हमने ‘मौनी अमावस्या’ पर सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ा दी थी।

क्या कहा जाए, मंत्रमुग्ध हुआ जा सकता है

मेला प्रशासन ने घाटों पर सुगम स्नान के व्यापक प्रबंध किए थे। जाल के साथ बैरीकेडिंग की गई थी। पैरा मिलिट्री की 17 कम्पनियाँ, आरएएफ, बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी, आईटीबीपी और अन्य अर्धसैनिक बलों की 37 कंपनियों की तैनाती की गई थी।

एनडीआरएफ की 10 कम्पनियाँ मुस्तैद थी। होमगार्ड के 14 हजार जवानों को भी ड्यूटी पर लगाया गया था। 111 घुड़सवार पुलिस घाटों से लेकर संगम तक निगरानी कर रहे थे।

ऐसे नज़ारे इतिहास ने पहले शायद ही कहीं देखा हो। सोशल मीडिया पर आज पूरे दिन इन तस्वीरों ने लोगों को अभिभूत किया।

UNESCO के विश्व धरोहर स्थल हम्पी पर हुड़दंगियों ने मचाया उत्पात

कर्नाटक स्थित हम्पी नगर यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों में से एक है। यहीं पर हुड़दंगियों द्वारा मचाये गए उत्पात का एक वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो में 14वीं शताब्दी के विष्णु मंदिर के खंभे को तोड़ते हुए 3 लोगों को देखा जा सकता है। और तो और खंभों के टूट जाने के बाद तीनों उपद्रियों द्वारा उसका बहिष्कार करते भी देख सकते हैं।

राज्य के जल संसाधन मंत्री डी के शिवकुमार ने कहा कि नक़्क़ाशीदार खंभों को गिराने में जो लोग भी जिम्मेदार हैं, उन उपद्रवियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। शिवकुमार, जो बल्लारी के ज़िला प्रभारी मंत्री भी हैं, उन्होंने पुलिस बलों को अपराधियों पर नज़र रखने और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है।

उन्होंने कहा, “हम अपने ऐतिहासिक स्थलों पर इस तरह की बर्बरता बर्दाश्त नहीं करेंगे। बता दें कि बेल्लारी के पुलिस अधीक्षक अरुण रंगराजन ने कहा कि आरोपियों को जल्द ही गिरफ़्तार कर लिया जाएगा।

हालाँकि, हम्पी जैसे ऐतिहासिक स्थल पर ऐसी बर्बरता ने स्थानीय लोगों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी काफी ध्यान आकर्षित किया है। इस तरह के कृत्य पर लोगों ने काफी नाराज़गी भी जताई। ऐसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों पर पर्याप्त सुरक्षाकर्मियों की कमी और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के बारे में लोगों ने अपनी चिंता और ग़ुस्सा व्यक्त किया। हम्पी में स्थानीय लोगों ने बर्बरता से नाराज़ होकर, घटना के विरोध में सड़कों पर उतर कर प्राचीन स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा उपायों की माँग की।

आपको बता दें कि हम्पी के प्राचीन शहर की विरासत लगभग 42 वर्ग किलोमीटर तक फैली हुई है। इसमें 1,600 से अधिक स्मारक शामिल हैं। इन अवशेषों में मंदिर, महल, बाज़ार और सार्वजनिक स्नानघर भी शामिल हैं। अधिकांश संरचनाएँ 14वीं शताब्दी से 16वीं शताब्दी के बीच निर्मित की गई थीं।