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SC में तेजस्वी की याचिका ख़ारिज, लगाया 50 हजार का जुर्माना

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव को सुप्रीम कोर्ट से करारा झटका लगा है। कोर्ट ने राजद नेता तेजस्वी यादव की याचिका ख़ारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में देश रत्न मार्ग स्थित बंगला न. 5 को खाली करने का आदेश सुनाया है। इसके साथ ही कोर्ट ने तेजस्वी पर 50,000 रूपए का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने तेजस्वी को नेता विपक्ष के बंगले में रहने का फैसला सुनाया है।

हाई कोर्ट में भी बंगला के लिए दावा पेश कर चुके हैं तेजस्वी

जानकारी के लिए बता दें कि तेजस्वी को उपमुख्यमंत्री रहते हुए जो बंगला मिला था, उस बंगले को तेजस्वी खाली नहीं करना चाहते थे। सरकार के आदेश के ख़िलाफ़ तेजस्वी हाई कोर्ट पहुँच गए थे। हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने तेजस्वी की याचिका ख़ारिज कर दी थी। इसके बाद तेजस्वी ने सिंगल बैंच के फै़सले को पटना हाई कोर्ट के डबल बेंच में चुनौती दी। डबल बेंच ने भी तेजस्वी की याचिका को ख़ारिज कर दी। इसके बाद पटना हाई कोर्ट के डबल बेंच के फैसले के खिलाफ़ तेजस्वी सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए थे।

सुशील मोदी को अलॉट है यह बंगला

जिस बंगला के लिए तेजस्वी यादव सुप्रीम कोर्ट गए थे, वह बंगला राज्य के उप मुख्यमंत्री के लिए अलॉट है। ऐसे में नियम के मुताबिक वह बंगला बिहार के वर्तमान उपमुख्यमंत्री व भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी को अलॉट किया गया है। बिहार सरकार ने तेजस्वी के लिए बंगला 1-पोलो रोड पर अलॉट किया है।

SC का आदेश, मायावती को लौटाना होगा मूर्तियों पर ख़र्च किया धन

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (फरवरी 8, 2019) को आदेश दिया है कि बसपा अध्यक्ष मायावती को जनता का वो सारा धन लौटाना होगा जिसे उन्होंने अपने स्मारकों को बनाने में खर्च किया हैं।

यह आदेश न्यायलय ने एक वकील द्वारा दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। जिसमें शिकायत थी कि कोई भी राजनैतिक पार्टी जनता के पैसों का इस्तेामल अपने मूर्तियाँ बनवाने के लिए या फिर प्रचार- प्रसार करने के लिए नहीं कर सकती है।

साल 2009 में सुप्रीम कोर्ट में कुछ लोगों ने इस मामले पर याचिका को दायर किया था, जिसपर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह आदेश दिया है। इस सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने मायावती के वकील से कहा कि वो अपनी मुवक्किल से कहें कि वह मूर्तियों पर ख़र्च किया गया पूरा धन सरकारी खजाने में जल्द जमा करवाएँ।

लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के मुताबिक यूपी की तात्कालीन मुख्यमंत्री ने लखनऊ, नोएडा और ग्रेटर नोयडा में स्थित पार्कों और मूर्तियों पर कुल 5,919 करोड़ रुपए खर्च किए थे।

इसके अलावा मायावती ने नोएडा स्थित दलित प्रेरणा स्थल पर हाथी की पत्थर की 30 और काँसे की 22 मूर्तियाँ लगवाई थी। ध्यान देने योग्य बात यह है कि हाथी उनकी पार्टी का चुनाव चिह्न भी है। इसलिए जब उनके इस कार्य पर लोगों ने सवालों को उठाना शुरू किया तो उन्होंने बेहद ही बचकाना तर्क़ दिया कि हाथी हमारी भारतीय सभ्यता की शान हैं। इसलिए उन्होंने हाथी की प्रतिमाओं को बनवाया हैं। इन हाथियों की प्रतिमा निर्माण में क़रीब ₹685 करोड़ का खर्चा आया था।

रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली इस पीठ में जस्टिस दीपक गुप्ता और संजीव खन्ना भी शामिल थे। इस मामले पर पीठ अपना अंतिम निर्णय आगामी 2 अप्रैल 2019 को सुनाएगी।

आपको याद दिला दें मायावती द्वारा की गई चालाकियाँ सिर्फ़ इतनी ही नहीं थी। मायावती ने न सिर्फ़ जनता के पैसे का दुरुपयोग करके अप्रत्यक्ष रूप से अपना प्रचार-प्रसार करने की कोशिशें की बल्कि इसके अलावा सरकारी आवास को ट्रस्ट बनाकर हथियाने की कोशिशें भी की।

सरकारी बंगला हाथ से न चला जाए इसके लिए मायावती ने साल 2018 में 13-ए मॉल एवेन्यू स्थित बंगले पर ‘श्री कांशीरामजी यादगार विश्राम स्थल का बोर्ड लगा दिया। क्योंकि कांशीराम के नाम से दलितों की भावनाएँ जुड़ी हैं, जिसके कारण सरकार के लिए उस पर कब्ज़ा करना आसान नहीं होगा।

‘हलाला’ और ‘हलाल’ में अधिक अंतर नहीं, क्योंकि तिल-तिल मरते जीवन का कोई अर्थ नहीं

‘निक़ाह-हलाला’ एक ऐसी कुप्रथा है जिसे सुनकर ही रूह काँप उठे और जिस पर गुज़रती हैं उसके तन-मन की स्थिति का अंदाज़ा लगाना भी असंभव है। मेरी समझ से तो ‘हलाला और हलाल’ में कोई ख़ास अंतर नहीं है। एक मायने में हलाल प्रक्रिया तो फिर भी मृत्यु तक पहुँचा देती है, लेकिन हलाला प्रक्रिया तो न जीने देती है और न मरने। तिल-तिल मरने को मजबूर होते जीवन का जो मतलब बनता होगा वो तो मुस्लिम महिलाएँ ही जानती होंगी, हम और आप तो उस दर्दनाक जीवन की केवल कल्पना भर ही कर सकते हैं।

प्रतीत होता है कि ऐसी विषम स्थितियों का सामना कर रही मुस्लिम सम्प्रदाय की महिलाएँ इन कुरीतियों को मानने के लिए लिए जैसे दिमागी तौर पर पहले से ही तैयार रहती हों। लगता है कि विरोध करने की ताक़त तो जैसे उनमें कभी पनपी ही न हो। क्या धार्मिक कुरीतियों को मानने की बाध्यता इतनी प्रबल है जिसमें सर्वस्व जीवन अंदर ही अंदर घुटते बीते, तो भी कोई ग़म नहीं? ऐसे में यह प्रश्न निहायत ही ज़रूरी बन पड़ता है कि चुप्पी साधे रखने को अपनी नियति समझती महिलाएँ कहीं असल में अपने ही पतन का कारण तो नहीं?

मुस्लिम महिलाओं के इसी नियती स्वरुप को ऑपइंडिया के एक लेख में विस्तार से बताया गया है। जिसे हर महिला को एक बार ज़रूर पढ़ना चाहिए।  

शोषण के ख़िलाफ़ मुस्लिम महिलाओं ने किया अदालत का रुख़

कहते हैं बर्दाश्त करने की भी कोई हद होती है और जब ये पार होती है तो इतिहास कुछ नया रचने की दिशा में अग्रसर होता है। ऐसा ही कुछ ट्रिपल तलाक़ और निक़ाह-हलाला की कुरीतियों के ख़िलाफ़ हुआ जिसकी बदौलत कुछ मुस्लिम महिलाएँ कोर्ट की चौखट तक जा पहुँची। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक़ को असंवैधानिक करार देते हुए इस पर पूर्णत: रोक लगाने का आदेश दिया।

मुस्लिम महिलाओं के जीवन को बेहतरी और बराबरी के पायदान तक लाने के लिए पिछले साल (दिसम्बर, 2018) मोदी सरकार द्वारा ट्रिपल तलाक़ विधेयक लाया गया जो लोकसभा में तो पास हो गया लेकिन राज्यसभा में अटक गया था।

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने निक़ाह-हलाला की कुप्रथा का पुरज़ोर विरोध किया

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने मोदी सरकार द्वारा लाए गए ट्रिपल तलाक़ विधेयक को रद्द करने के लिए कॉन्ग्रेस के रुख़ की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने निक़ाह-हलाला कुप्रथा के बारे में एक ब्लॉग लिखा जिसमें कॉन्ग्रेस की मंशा पर सवालिया होते हुए उन्होंने लिखा “क्या बरेली” निक़ाह-हलाला “आपकी अंतरात्मा को झकझोरता नहीं?” अपने लेख में उन्होंने कई बिंदुओं को उजागर किया।

  • कुछ घटनाएँ इतनी बेहूदा और प्रतिकारक होती हैं कि वे समाज की अंतरात्मा को झकझोर देती हैं और उसे समाज से दूर करने के लिए मजबूर करती हैं। धार्मिक क़ानून (पर्सनल लॉ) द्वारा किया गया यह अन्याय इसका उदाहरण है।
  • पिछले कई दशकों में कई समुदायों द्वारा उनके पर्सनल लॉ में महत्वपूर्ण बदलाव लाए गए हैं। इन बदलावों में लैंगिक समानता सुनिश्चित की जाती है, महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा की जाती है और साथ ही सम्मान के साथ जीने का अधिकार सुनिश्चित किया जाता है। सदियों से चली आ रही कुछ प्रथाएँ इतनी अप्रिय थीं (जैसा कि सती और अस्पृश्यता) को अब असंवैधानिक माना जाता है।
  • बरेली के एक हालिया मामले ने मेरी अंतरात्मा को झकझोर दिया है। यह इस्लामिक पर्सनल लॉ में निक़ाह-हलाला की अप्रिय प्रथा से जुड़ी हुई है। 2009 में शादी करने वाली एक महिला को उसके पति ने ट्रिपल तलाक़ के माध्यम से एक बार 2011 में और उसके बाद 2017 में दो बार तलाक़ दिया। परिवार ने पत्नी को फिर से स्वीकार करने के लिए पति पर दबाव बनाया। दोनों अवसरों पर, पत्नी को बहकाया गया और निक़ाह-हलाला से गुज़रने के लिए कहा गया, पहले मौक़े पर अपने ससुर के साथ और बाद में अपने देवर के साथ हलाला की शर्त रखी गई।
  • दोनों ने उसके साथ बलात्कार किया। लगभग इसी तरह का मामला 2 सितंबर, 2018 को उत्तर प्रदेश के संभल ज़िले में भी हुआ था। 21वीं सदी में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में महिलाओं की गरिमा का इतना घोर उल्लंघन हो सकता है कि हर व्यक्ति को शर्म से सिर झुकाना पड़े।
  • इस महिला के साथ बलात्कार करने के बाद, ससुर और देवर दोनों ने पीड़िता को तलाक़ देने के लिए ट्रिपल तालाक़ के हथियार का इस्तेमाल किया ताकि उसे उसके पति द्वारा स्वीकार किया जा सके।
  • यदि भारत में ट्रिपल तलाक़ की अनुमति नहीं दी जाती, तो क्या इस तरह की घटनाएँ होतीं ? सर्वोच्च न्यायालय ने पहले ही तत्काल प्रभाव से तलाक़ को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। कई मुस्लिम रुढ़ीवादी पुरुषों द्वारा सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की अवहेलना की गई।
  • सुबह समाचार पत्रों में मानवीयता को ठेस पहुँचाने वाली इस इस ख़बर को पढ़ने के बाद इसका पुरज़ोर विरोध होना चाहिए था, लेकिन AICC के अध्यक्ष राहुल गाँधी ने अल्पसंख्यक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि संसद में लंबित ट्रिपल तलाक़ विधेयक को हटाने के लिए फिर से संसद में लाया जाएगा।
  • इतिहास ने ख़ुद को दोहराया है, न तो एक व्यंग्य के रूप में और न ही एक त्रासदी के रूप में। इसने ख़ुद को क्रूरता की मानसिकता के साथ दोहराया है। दिवंगत राजीव गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के शाह बानो के फ़ैसले को पलटते हुए विधायी ग़लती की, जो सभी मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी से संबंधित था।
  • बरेली में मुस्लिम महिला को जानवरों से भी बदतर जीवन जीने को मजबूर किया गया।
  • वोट भी महत्वपूर्ण हैं लेकिन इनकी निष्पक्षता भी ज़रूरी है। राजनीतिक अवसरवादी लोग केवल अगले दिन की सुर्ख़ियों को बटोरने की जुगत में दिखते हैं, जबकि राष्ट्र-निर्माण की सोच रखने वाले लोग अगली शताब्दी तक अपनी दूरदृष्टि बनाए रखते हैं।

इन सब में चिंता की बात है निक़ाह-हलाला और तलाक़ जैसी कुरीतियों के ख़िलाफ़ अगर कुछ मुस्लिम महिलाएँ सामने आती भी हैं, तो इस बात का क्या सबूत है कि उन्हें पूरी तरह से न्याय मिल ही जाएगा, शायद यही सवाल मुस्लिम महिलाओं के ज़ेहन में आज से नहीं बल्कि सदियों से रहा होगा, जिसका निदान आज के समय में तो हो ही जाना चाहिए।

अगर मोदी लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है, तो हमें बर्बाद लोकतंत्र ही चाहिए

विपक्षी नेतागण हद से ज्यादा बोरिंग हो गए हैं। उनके घिसे-पिटे बयानों से अब देश की जनता को खीझ और बोरियत होने लगी है, जो कभी-कभी ग़ुस्से में भी तब्दील हो जाता है। प्रधानमंत्री के अंध-विरोध में ये इतने पागल हो चुके हैं कि जब किन्हीं भ्रष्टाचार, अपराध या देशद्रोह के आरोपितों के यहाँ सरकारी एजेंसियों की दस्तक पड़ती है, तो सबसे पहले इन नेताओं के ही कान खड़े होते हैं। आतंक-विरोधी अभियान से लेकर भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई तक – विपक्षी दलों के ये नेता इन सभी का राजनीतिकरण करने की भरसक कोशिश करते हैं।

विजय माल्या को यूपीए कार्यकाल के दौरान हजारों करोड़ के लोन दिए जाते हैं। मोदी सरकार उसके प्रत्यर्पण में पूरी ताक़त झोंक देती है और उसकी सम्पत्तियों को एक-एक कर ज़ब्त करती है। लेकिन, लोकतंत्र की बर्बादी मोदी कर रहे हैं। अगस्ता-वेस्टलैंड हैलीकॉप्टर घोटाला यूपीए कार्यकाल में होता है। मोदी सरकार उस घोटाले के मामले में क्रिस्चियन मिशेल सहित अन्य दलालों के प्रत्यर्पण में सफल होती है। लेकिन, लोकतंत्र को बर्बाद मोदी कर रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय थाईलैंड में घुसकर आर्थिक भगोड़े मेहुल चौकसी की फैक्ट्री को ज़ब्त कर लेता है। लेकिन नहीं, मोदी तो लोकतंत्र को तार-तार करने में व्यस्त हैं।

चिटफंड घोटाले पश्चिम बंगाल में हुए, राज्य सरकार की नाक के नीचे। सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के कई नेताओं के ख़िलाफ़ जाँच चल रही है। लेकिन भ्रष्टाचार पसंद नेताओं के लिए किसी घोटाले की जाँच भी लोकतंत्र की हत्या है। केंद्रीय जाँच एजेंसियों का बड़ी मछलियों पर कार्रवाई करना भी अलोकतांत्रिक और सुपर इमरजेंसी है। अधीर विपक्षी नेताओं का इस तरह से दिशा-विहीन हो जाना बताता है कि उनके पास असली मुद्दों की कमी है, या फिर उनके भीतर इस धारणा ने घर कर लिया है कि आम जान के मुद्दों को उठा कर मीडिया की सुर्खियाँ नहीं बन सकते। आइए, कुछ बिंदुओं की पड़ताल कर बोरियत की पराकाष्ठा बन चुके इन मुद्दाविहीन नेताओं की मदांध अधीरता पर एक नज़र डालते हैं।

कुछ अलग बोलो या असली मुद्दे उठाओ

ताज़ा बयान कर्नाटक के सीरियल रोंदू मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी का है। वो और उनके पिता पूर्व-प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा रोते-रोते सत्ता की मलाई चाभने में माहिर हैं। 225 सदस्यीय विधानसभा में 37 सीटों वाली पार्टी कर्नाटक जैसे बड़े राज्य में सरकार चला रही है और साथ ही एक बहुमत वाली सरकार पर लोकतंत्र की हत्या के आरोप मढ़ रही है। यह सब देख कर विडंबनाओं ने भी अपना सर घूँघट से ढक लिया है। एचडी कुमारस्वामी ने कहा है कि पीएम मोदी देश के लोकतंत्र को बर्बाद कर रहे हैं और लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने विपक्ष के ईवीएम राग में अपना सुर मिलाते हुए कहा था कि भाजपा को अब सत्ता का ऐसा नशा चढ़ गया है कि वह हर कीमत पर सत्ता हथियाने के क्रम में लोकतंत्र की प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रुप से हत्या तक करने पर उतारु लगती है। अपने शासनकाल के दौरान पूरे यूपी को अपनी और अपनी पार्टी के चुनाव चिन्ह हाथी की मूर्तियों से पाट देने वाली मायावती लोकतंत्र की नई रक्षक हैं।

यूपी के ही एक और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी कहा था कि 2019 के संसदीय चुनाव में यदि बीजेपी जीत गई तो देश में लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। बम धमाके के दोषी आतंकियों के ख़िलाफ़ अभियोग वापस लेने का प्रयास करने वाली तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार को इलाहबाद उच्च न्यायालय ने कड़ी डाँट पिलाई थी, लेकिन मोदी सरकार लोकतंत्र की हत्यारी है क्योंकि अब आतंकियों को जहन्नुम का रास्ता दिखा दिया जाता है, उन्हें जल्द से जल्द सज़ा दिलाई जाती है।

कमोबेश यही हाल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी है। बंगाल में लोकतंत्र की जगह तानाशाही प्रेरित तृणमूलतंत्र चलाने वाली ममता को लोकतंत्र सिर्फ इसलिए ख़तरे में नज़र आ रहा है, क्योंकि सरकारी जाँच एजेंसियाँ सुचारू रूप से अपना कार्य कर रहीं हैं। बंगाल में ममता के कार्टून बनाने वाले भी जेल की हवा खाते हैं, लेकिन तृणमूलतंत्र सेक्युलर है, उसके ख़िलाफ़ आवाज उठाना गुनाह है।

राजद सुप्रीमो लालू यादव के सुपुत्र और बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को भी मोदी में लोकतंत्र के लिए ख़तरा दिखता है। तेजस्वी यादव के अनुसार, मोदी के कार्यकाल के दौरान लोकतंत्र तार-तार हो गया है। बिहार को 15 वर्षों तक अपने परिवार की जागीर समझ कर चलाने वाले लालू यादव फ़िलहाल तो जेल में अपने भ्रष्टाचार की सज़ा भुगत रहे हैं, लेकिन उनके ट्विटर हैंडल से लगातार लोकतंत्र रक्षा संबंधी ट्वीट्स आते रहते हैं।

अगर इस सूची में राहुल गाँधी की बात न करें तो शायद यह लेख अधूरा रह जाए। एक ही बेढंगे बात को दिन में 100 बार बोलने वाले राहुल तो हवा में ऐसी बोरियत फैलाते हैं, जिसे न्यूट्रलाइज़ करना किसी के भी वश की बात नहीं। देश में कभी आपातकाल लगाने वाली पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल ने कहा था कि वो किसी भी क़ीमत पर लोकतंत्र की रक्षा करेंगे। अब सोचने वाली बात यह है कि आखिर इन नेताओं का लोकतंत्र-प्रेम अभी ही क्यों जाएगा है?

अच्छा, तो घाव यहाँ है

दरअसल, दिक्कत कहीं और है। वो क्या है, हम बताते हैं। लोकतंत्र और संविधान की दुहाई देते नहीं थकने वाले इन मौक़ापरस्त नेताओं का संवैधानिक संस्थाओं से ही भरोसा उठ गया है। सीबीआई और सेना से लेकर न्यायपालिका तक- इन्होने सबका राजनीतिकरण करने की पूरी कोशिश की है। संसद के भीतर भ्रष्टाचार मिटाने की बात करने वाले ये नेता संसद के बाहर भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई होते ही तिलमिला उठते हैं।

रॉबर्ट वाड्रा के द्वारा ज़मीन खऱीद में की गई अनगिनत अनियमितताओं की जाँच चल रही है और दामाद जी को प्रवर्तन निदेशालय के दफ़्तर में हाज़िरी लगानी पड़ रही है। शारदा और रोज़ वैली चिटफंड घोटालों की आँच ममता तक जा पहुँची है और आरोपितों को शिकंजे में लेने की पूरी कोशिश की जा रही है। जीएसटी जैसे बड़े टैक्स सुधार क़ानून को लागू करने के लिए जिस इच्छाशक्ति और जनसमर्थन की ज़रूरत थी- मोदी सरकार ने वो सब सफलतापूर्वक जुटाया। फ़र्जी कंपनियों की पोल खुल रही है, आर्थिक अनियमितता करने वाले पकड़े जा रहे हैं। 20,000 विदेशी फण्ड से चलने वाले NGO बंद किए जा चुके हैं, लाखों शेल कम्पनियाँ बंद करके उन्हें टैक्स संबन्धित नोटिस थमा दिया गया।

क्या आर्थिक भगोड़ों और महाघोटालों के दलालों का प्रत्यर्पण लोकतंत्र के लिए ख़तरनाक है? क्या जनता के करोड़ों रुपए लेकर नेताओं और व्यापारियों को फ़ायदा पहुँचाने वाली चिटफंड कंपनियों पर कार्रवाई से लोकतंत्र तार-तार हो जाता है? क्या नोटबंदी और जीएसटी जैसे बड़े आर्थिक सुधार कार्यक्रमों से हजारों फ़र्जी कंपनियों का पकड़ा जाना लोकतंत्र की हत्या है? क्या संवैधानिक संस्थाओं का बड़े आरोपितों के खिलाफ़ स्वतंत्रतापूर्वक जाँच करना अलोकतांत्रिक है? अगर ये सब करने से लोकतंत्र बर्बाद होता है, तो देश की जनता को यही बर्बाद लोकतंत्र चाहिए।

अगर ऐसे बर्बाद लोकतंत्र से अपराधियों (आर्थिक भगोड़ों, घोटाले के बिचौलियों और फ़र्जी कंपनियों) में ख़लबली मचती है, तो देश की जनता को यही लोकतंत्र चाहिए। अगर इस बर्बाद लोकतंत्र से घोटालेबाज़ों से सहानुभूति रखने वाले नेताओं की नींद उड़ती है, तो देश की जनता इसी बर्बाद लोकतंत्र में चैन की नींद सोएगी। इसीलिए, अब समय आ गया है कि नेतागण किसानों, युवाओं और ग़रीबों के मुद्दे उठाएँ, बनावटी और काल्पनिक मुद्दे नहीं।

छत्तीसगढ़ में गरजे PM मोदी, पूछा ‘जब कुछ ग़लत किया नहीं तो CBI से डर कैसा?’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में एक विशाल जनसभा को सम्बोधित किया। बता दें कि मोदी अगले 5 दिनों में 10 राज्यों का दौरा करने वाले हैं। इसी क्रम में वो आज छत्तीसगढ़ पहुँचे। छत्तीसगढ़ की नई कॉन्ग्रेस सरकार से निराशा जताते हुए पीएम ने कहा कि राज्य में नई सरकार बनी तो मैंने बधाई दी और सोचा कि कुछ नया करेंगे लेकिन जो पहले बेहतर हो रहा था उसे भी ठप्प करने में लगे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि देश और छत्तीसगढ़ को आगे बढ़ाने में हमारे आदिवासी बहन-भाइयों का बहुत बड़ा योगदान है। आज़ादी में अनेक आदिवासी नायकों ने बलिदान दिए हैं। ऐसे नायकों से देश को प्रेरणा मिलती रहे इसके लिए देशभर में स्मारक स्थलों का निर्माण हो रहा है नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ सरकार पर निशाना साधते हुए उनके दो ताज़ा निर्णयों की चर्चा करते हुए कहा:

  • यहाँ की सरकार ने पहला काम किया आयुष्मान भारत योजना से छत्तीसगढ़ को हटाने का फ़ैसला लिया।
  • दूसरा फ़ैसला किया सीबीआई को इस राज्य में आने नहीं देंगे।

पीएम मोदी द्वारा छत्तीसगढ़ में कही गई बातों के प्रमुख अंश इस प्रकार हैं:

  • किसी ग़रीब को ₹5 लाख की सहायता मिले तो उससे कॉन्ग्रेस को क्या दिक्कत है? रायपुर से लेकर दिल्ली तक कॉन्ग्रेस की सल्तनत दलालों और बिचौलियों के मज़बूत तंत्र से फली-फूली है।
  • जय और पराजय जीवन का हिस्सा होता है। विधानसभा के इन चुनावों के बाद छत्तीसगढ़ के हर वर्ग के विकास के लिए हमारा संकल्प और अधिक मज़बूत हुआ है। चुनाव आते जाते रहते हैं, सरकारे आती जाती रहती हैं लेकिन सामान्य लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने का संकल्प अटल रहता है।
  • अटल जी, जिन्होंने छत्तीसगढ़ बनाया उनके प्रति यहाँ के लोगों की श्रद्धा अप्रतिम है।
  • कांग्रेस ने 55 साल ग़रीबों के नाम पर देश को गुमराह किया, ग़रीबों को बर्बाद किया, उनके सपनों को कभी अंकुरित तक नहीं होने दिया। हमने 55 महीने में ग़रीबों में जोश भरा है। उनके आगे निकलने के रास्ते खोजे हैं, इसलिए ग़रीब आज ग़रीबी के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ने के लिए अपने पैरों पर खड़ा हो रहा है।
  • घोटाले-घपलों की इसी नीति और नियत का ही परिणाम है कि यहाँ की सरकार ने सीबीआई की जाँच में भी अड़ंगा लगाने का फ़ैसला लिया।
  • अगर किसी ने कुछ किया नहीं है तो वो क्या किसी जाँच से डरेगा? क्या कोई भी एजेंसी बिना किसी कारण से पूछताछ कर सकती है? अगर राज्यों में देश के ईमानदार करदाताओं के पैसे से भ्रष्टाचार होता है, तो सीबीआई को कार्रवाई करने का अधिकार है या नहीं?
  • कॉन्ग्रेस के नामदार परिवार के क़रीब-क़रीब हर सदस्य के विरुद्ध अदालतों में गंभीर मामले चल रहे हैं। क्या मामले चल रहे हैं? टैक्स चोरी के, ज़मीन और प्रॉपर्टी में घोटाले के। हालत ये है कि परिवार के ज़्यादातर सदस्य जमानत पर पर बाहर हैं।
  • क़ानून से बचने की इनकी कोशिशों के बीच चौकीदार चौकस है, इनके हर राज़ को बाहर निकालने में जुटा है। देश विदेश से इनके राज़दारों को, इनके दलाल मामाओं और चाचाओं को भारत लाया जा रहा है और जाँच एजेंसियों के हवाले किया जा रहा है।
  • ये कितनी भी महा-मिलावट कर लें, चौकीदार चुप बैठने वाला नहीं है। मैं उनमें से नहीं हूँ जो अपनी किताब खुलने के डर से देश के शक्तिशाली सुल्तानों पर हाथ डालने से बचते थे।
  • क़र्ज़माफ़ी के नाम पर बिचौलियों का पेट भरने का काम करने वाली कॉन्ग्रेस के यही तौर-तरीक़े हैं। ये 10 वर्ष बाद क़र्ज़माफ़ी की योजना लेकर आते हैं। पहले 2009 का चुनाव जीतने के लिए लाए थे, अब 2019 में लेकर आए हैं।
  • अगर बहुत ईमानदारी से क़र्ज़माफ़ी की जाए, तो भी देश में 100 में से 25-30 किसानों को ही इसका लाभ मिल पाता है। बाक़ी के किसान, क्या खेती नहीं करते, क्योंकि वो और ज़्यादा ग़रीब हैं, इसलिए क्या उन्हें छोड़ दिया जाना चाहिए? जी नहीं, ये भेदभाव का रास्ता मोदी को मंज़ूर नहीं।
  • हमारी सरकार ग़रीब की सरकार है, ग़रीब के दर्द, उसकी तकलीफ़ को समझने वाली सरकार है। बीते साढ़े चार साल में हमने लगातार कोशिश की है कि ग़रीब की ज़िदगी आसान बने। सरकार के इन्हीं प्रयासों का असर है कि देश में ग़रीबी कम होना शुरू हुई है।
  • इस साल के बजट में प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना की घोषणा की गई है मेरे मज़दूर भाई-बहनों के लिए, श्रमिक परिवारों के लिए, जो घरों में काम करते हैं, सड़कों या घरों के निर्माण में जुटे हैं, मिट्टी या लेबर का काम करते हैं, रिक्शा चलाते हैं, ठेला चलाते हैं, ऐसे करोड़ों बहन-भाइयों के लिए देश के इतिहास में पहली बार कोई योजना बनी है।
  • जिन ईमानदार करदाताओं के पैसे से ये सुविधाएँ संभव हो पाती हैं, उनके लिए भी केंद्र सरकार ने पहली बार बहुत बड़ा क़दम उठाया है। ₹5 लाख रुपए तक की इनकम को टैक्स से बाहर कर दिया गया है। इससे सीधे-सीधे करीब 3 करोड़ करदाताओं को लाभ होगा।
  • अब कुछ शक्तियाँ मज़बूत सरकार बनाने के लिए जुट रही हैं, ताकि उनका लूट-खसूट का कोराबार फल-फूल सके। इस साज़िश के प्रति, इस महा-मिलावट के प्रति आप सभी को जागरूक रहना है।

NCP की बेहूदा क़रतूत: कुत्ते के गले में डाली मोदी, अमित शाह और CBI के नाम की तख़्ती


बंगाल में सीएम ममता बनर्जी और सीबीआई के बीच हुए विवाद के बाद अब मध्य प्रदेश में भी इसका असर दिखाई दे रहा है। ममता बनर्जी के समर्थन में आई राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के कार्यकर्ताओं ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सीबीआई के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया।

इस प्रदर्शन के दौरान एनसीपी के कार्यकर्ताओं नें कुत्तों के गले में पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की तख्तियाँ डाली। साथ ही सरकार पर आरोप मढ़ा कि सरकार ने सीबीआई का दुरुपयोग किया है।

प्रदेश की राजधानी में एनसीपी के मुखिया शरद पवार की पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सीबीआई के ख़िलाफ़ जो विरोध प्रदर्शन किया उसकी तस्वीरें एनएनआई द्वारा ट्वीट की गई। जिसमें दिख रहा है कि कुत्ते के गले में डली हुई तख्ती में उन्होंने लिखा हुआ था, “मोदी और शाह की सीबीआई।”

एनसीपी के कार्यकर्ताओं ने इन तख़्तियों पर पीएम मोदी और शाह के ख़िलाफ़ नारे भी लिखे हुए थे। एनसीपी का आरोप है कि सीबीआई, मोदी सरकार के पालतू कुत्ते की तरह बर्ताव कर रही है और मोदी सरकार भी सीबीआई का इस्तेमाल कर रही है।

बता दें कि हाल ही में प्रदेश में सत्ता का परिवर्तन हुआ है। ऐसे में एनसीपी द्वारा किए गए इस प्रदर्शन से पूरे प्रदेश में सीबीआई मामले में राजनीति तेज़ होने के आसार हैं।

‘PM मोदी के भाषण में कहे गए तथ्यों का जवाब देने की बजाए झूठ का सहारा न ले विपक्ष’: जेटली

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विपक्ष पर करारा प्रहार किया है। गुरुवार (फरवरी 7, 2019) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संसद में दिए गए भाषण की चर्चा करते हुए जेटली ने कहा कि विपक्ष को नारेबाज़ी व झूठ का सहारा लेने की बजाए तथ्यों का जवाब देना चाहिए। अरुण जेटली ने सोशल मीडिया पर लिखा:

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संसद में दिया गया जवाब सरकार के पांच वर्षों के काम का “रिपोर्ट कार्ड” है। क्या कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेता प्रधानमंत्री के भाषण में दिए गए तथ्यों का जवाब देंगे या फिर केवल नारों और झूठ का सहारा लेते रहेंगे। सत्य में अंतर्निहित शक्ति होती है। यह झूठी चर्चाओं को आसानी से ध्वस्त कर देता है।”

अरुण जेटली ने विपक्ष को चुनौती दी।

ज्ञात हो की प्रधानमंत्री ने गुरूवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार शाम (फरवरी 07, 2019) को विपक्ष की जमकर क्लास लगाई। उन्होंने विपक्ष के हर आरोप का जवाब देते हुए कॉन्ग्रेस के 55 साल और अपनी सरकार के 55 महीने के विकास की तुलना की।

रोजगार के बढ़ रहे अवसरों के बारे में नरेंद्र मोदी ने कहा, “पिछले 4 वर्षों में देश में ऐसे 6 लाख 35 हजार नए प्रोफेशनल्स जुड़े। क्या आपको लगता है कि एक डॉक्टर ने अपना क्लिनिक या नर्सिंग होम खोला है, तो उसने सिर्फ एक व्यक्ति को ही नौकरी दी होगी, या कोई चार्टर्ड अकाउंटेंट सिर्फ एक व्यक्ति को नौकरी पर रखकर अपना दफ्तर चला रहा होगा? नहीं।”

पीएम मोदी के द्वारा संसद में कही गई मुख्य बातों को आप ऑपइंडिया पर पढ़ सकते हैं। पीएम ने महात्मा गाँधी और बाबासाहब आंबेडकर का जिक्र करते हुए विपक्ष को आड़े हाथों लिया। पीएम ने कहा कि मोदी पर उंगली उठाने से पहले कांग्रेस को पता होना चाहिए कि जब वह मोदी पर उंगली उठाते हैं तो बाकी की चार उंगली उनकी तरफ ही होती है।

फिलहाल वित्त मंत्री अरुण जेटली का न्यूयॉर्क में इलाज़ चल रहा है। यही कारण है कि उनकी अनुपस्थिति में केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट पेश किया था। जेटली के शरीर में कैंसर की पहचान हुई थी। हाल ही में उनकी सर्जरी हुई है। 14 मई 2018 को जेटली का दिल्ली के एम्स में गुर्दा प्रतिरोपण भी किया गया था। मीडिया में आई खबरों के अनुसार उनके स्वास्थ्य में तेज़ी से सुधार हो रहा है।

‘जम्मू कश्मीर में 450 आतंकी सक्रिय, लड़ाई अब निर्णायक दौर में’: भारतीय सेना

भारतीय सेना के अनुसार, जम्मू एवं कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ़ लड़ाई अब निर्णायक दौर में पहुँच गई है। सेना के उत्तरी कमान प्रमुख लेफ़्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने बताया कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में 16 आतंकी कैम्प मौज़ूद हैं। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि उन सभी कैम्पों पर भारतीय सेना की पैनी नज़र है और जब भी घुसपैठ का प्रयास होता है, उसे विफल कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि इन्हीं कैम्पों में आतंकियों को प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि उन्हें भारतीय सीमा में घुसपैठ के लिए तैयार किया जा सके।

अलंकरण समारोह के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने कहा:

“कश्मीर में पीर पंजाल के उत्तर की तरफ आतंकियों की संख्या सबसे ज्यादा है। उत्तर कश्मीर में 350 से 400 सक्रिय हैं। पीर पंजाल के दक्षिण की तरफ 50 आतंकी सक्रिय है। पीरपंजाल के दक्षिण की तरफ सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा रखा गया है और शांति माहौल बना हुआ है। ज्यादातर आंतक विरोधी आपरेशन पीर पंजाल के उत्तर में ही होते हैं।”

लेफ़्टिनेंट जनरल सिंह ने कश्मीरी युवकों के आतंकवादी गुटों में शामिल होने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि स्थानीय युवकों के आतंकी संगठनों में शामिल होने को लेकर सेना चिंतित है। बकौल लेफ़्टिनेंट जनरल सिंह, वर्ष 2018 में 191 कश्मीरी युवाओं ने आतंकी संगठनों का दामन थाम लिया है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि सेना द्वारा युवाओं और उनके परिवारों तक पहुँच कर उन्हें जागरूक किया जा रहा है। ताज़ा आँकड़ों का हवाला देते हुए रणबीर सिंह ने बताया कि पिछले पाँच से छह महीने में युवाओं के आतंक की राह पकड़ने में कमी आई है।

सेना द्वारा आतंकियों के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे अभियान के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकियों के ख़िलाफ़ पूरी सख़्ती से कार्रवाई की जा रही है। सेना के अभियान की सफलता के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा:

“पिछले पाँच वर्षों में 836 आतंकियों को मार गिराया गया है। इनमें से 490 आतंकवादी पाकिस्तानी थे। 2016 में पथराव शुरू हुआ था तो सैकड़ों की संख्या में लोग पत्थर मारने के लिए बाहर निकलते थे, लेकिन अब इसमें कमी आई है। अब कभी कभार ही 15 -20 की संख्या में पत्थरबाज सामने आ रहे हैं।”

लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने पाकिस्तान को भी कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने पाकिस्तानी सेना को चेतावनी देते हुए कहा कि वो भारतीय सरजमीं को किसी भी प्रकार का नुक़सान पहुँचाने का प्रयास भी न करे। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान द्वारा ऐसी कोई हरकत की भी जाती है, तो भारतीय सेना उनका मुँहतोड़ जवाब देने में सक्षम है और तैयार भी है। उन्होंने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि किसी को भी देश के अंदर आतंक फैलाने की इज़ाजत नहीं दी जाएगी।

लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने बताया कि पाकिस्तान अब भारत में आतंक फैलाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए कश्मीर के युवाओं को भड़का कर हिंसा की तरफ ले जाने की कोशिश हो रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि कश्मीर में आतंकवाद समर्थक या सेना विरोधी बयानबाज़ी से भारतीय सेना के जवानों के हौसलों पर कोई असर नहीं पड़ता है।

उन्होंने उत्तरी कमान मुख्यालय उधमपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि सेना सिर्फ आतंक विरोधी गतिविधियों को ही सफलतापूर्वक नहीं संचालित कर रही है, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में भी लोगों के काम आ रही है।

ओवैसी ने भारत रत्न को कहा ब्राह्मणों का क्लब

AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष व संसद असदुद्दीन ओवैसी ने भारत रत्न को लेकर विवादस्पद बयान दिया है। अपने बयान में ओवैसी ने कहा कि सच तो यह है कि भारत रत्न ब्राह्मणों का क्लब है।

ओवैसी ने कहा कि सच यह भी है कि इस पुरस्कार के लिए कभी पारदर्शिता रही ही नहीं है। देश के सर्वोच्च पुरस्कार के बारे में ओवैसी द्वारा दिया गया यह बयान न सिर्फ दुखद है बल्कि बेहद शर्मनाक भी है।

दरअसल कुछ दिनों पहले सरकार ने भारत रत्न सम्मान सेनानाजी देशमुख, प्रणब मुखर्जी और भूपेन हजारिका को सम्मानित किया था। जानकारी के लिए आपको बता दें कि इससे पहले भी कर्नाटक जेडीएस के नेता दानिश अली ने देश के इस सर्वोच्च सम्मान के लिए विवादित बयान दिया था।

जनता दल सेकुलर (JDS) के नेता दानिश अली ने कहा था कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी नागपुर में आरएसएस मुख्यालय में एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे, इसलिए उन्हें भारत रत्न सम्मान दिया गया है।

आपको बता दें कि इस साल गणतंत्र दिवस के मौके पर सरकार ने भारत रत्न के अलावा 112 विभूतियों को पद्म पुरस्कारों से नवाजा , जिसमें चार पद्म विभूषण, 14 पद्म भूषण और 94 पद्म श्री शामिल हैं।

बिहार में 19 साल की लड़की का पिता के सामने गैंगरेप; फैज, अब्दुल, कालू, कासिम, तकसीर और अंसार आरोपित

बिहार के किशनगंज जिले में एक लड़की के साथ पिता के सामने 6 युवकों ने गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया। कोधोबड़ी थाना क्षेत्र में आरोपितों ने लड़की के पिता को बाँध कर उसकी 19 साल की बेटी के साथ गैंगरेप किया।

पीड़िता के पिता ने बताया, “कुछ लोगों ने देर रात पानी के बहाने उनके घर का गेट खुलवाया और उसके बाद उन्हें बंधक बनाकर गाँव से बाहर लेकर चले गए। उन्होंने कहा कि गाँव से बाहर ले जाकर दबंगों ने मुझे रस्सी से बाँध कर मेरे सामने मेरी बेटी का गैंगरेप किया।”

पीड़ित परिवार हाल ही उस गाँव में आकर रहने लगा था। पीड़िता के पिता ने थाने पहुँचकर आरोपितों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करवाया है। आरोपितों ने पीड़ित परिवार को मुक़दमा लिखाने पर जान से मारने की धमकी भी दी थी। पीड़िता के पिता ने बताया कि सभी आरोपी गाँव के ही रहने वाले हैं, इनमें फैज आलम, अब्दुल मन्नान, कालू, कासिम, तकसीर और अंसार शामिल हैं। इनमें से दो आरोपित बिजली मिस्त्री का काम करते हैं, और इन्होंने ही पानी के बहाने पीड़ित परिवार के घर का दरवाज़ा खुलवाया था।

फ़िलहाल पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए जगह-जगह छापेमारी कर रही है। घटनास्थल पर पहुँचे एसपी कुमार आशीष ने कहा कि जल्द आरोपितों को गिरफ़्तार किया जाएगा, और उनके ख़िलाफ़ स्पीडी ट्रायल चलाया जाएगा। एसपी ने कहा कि गाँव वालों ने शुरुआत में पीड़िता और उसके पिता को पंचायत के जरिए मामले को निपटाने के लिए मनाया था, लेकिन अब मामला दर्ज करते हुए हमने लड़की को मेडिकल के लिए भेज दिया है।

क्या कहते हैं अपराध से जुड़े ये आँकड़े?

आँकड़ों के हिसाब से बिहार में, लालू के राज की तुलना में अभी अपराध पर बहुत हद तक लगाम लगी है, 2001-05 के बीच कुल मिलाकर जहाँ 18,189 हत्याएँ बिहार में हुई थी, वहीं 2014-18 के बीच हत्याओं के आँकड़ों में 25% की गिरावट देखी गई है।

इसी तरह लूट और रोड डकैती के मामले में नीतीश सरकार में क्रमशः 55% और 43% की गिरावट आई है। लेकिन बलात्कार के मामलों में 23% की वृद्धि देखी गई है, और इस पर लगाम नहीं लगा तो ऐसे अपराध सरकार के लिए चिंता का सबब बन सकते हैं।