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कौन हैं कबिता सरकार, कोलकाता हॉरर में गिरफ्तार संजय रॉय की करेंगी पैरवी: रेप-हत्या से पहले RG Kar हॉस्पिटल के हॉस्टल में रहती थीं 160 महिला डॉक्टर, अब केवल 17 बचीं

आर जी कर अस्पताल में डॉक्टर के रेप और मर्डर के आरोपित संजय रॉय को अदालत में केस लड़ने के लिए एक वकील मिल गईं हैं। वकील का नाम कबिता सरकार है। 52 साल की कबिता के पास वकालत का 25 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने पूरे करियर में कई मुश्किल केसों का सामना किया है।

कबिता सरकार को इस केस की जिम्मेदारी तब दी गई जब कोई वकील संजय रॉय की ओर से केस लड़ने को तैयार नहीं था। जानकारी के मुताबिक कबिता सरकार ने यह केस इसलिए लिया क्योंकि वह अदालती सुनवाई के ज़रिए न्याय मिलने में विश्वास करती हैं, न कि सुनवाई से पहले के फ़ैसलों में। वह चाहती हैं कि किसी भी मामले में अभियुक्त समेत हर किसी को निष्पक्ष सुनवाई का मौका मिले ताकि वो मजबूरी से कोर्ट में अपना पक्ष रख पाए।

इसके अलावा रिपोर्ट्स बताती हैं कि कबिता सरकार सजा के तौर पर मृत्युदंड का भी विरोध करती हैं। उनका मानना है कि किसी अपराध के लिए अधिकतम सजा सिर्फ आजीवन कारावास होनी चाहिए ताकि अपराधी सोच सके कि उसने अपनी जीवन में किया क्या। उनका मानना है कि जब तक किसी का दोष साबित नहीं हो जाता तब तक उसे निर्दोष ही मानना चाहिए।

कबिता सरकार का करियर

कबिता सरकार ने हुगली कॉलेज से कानून में स्नातक किया हुआ है। उसके बाद उन्होंने अलीपुर कोर्ट से अपना कानूनी करियर शुरू किया जहाँ उन्होंने सिविल मामलों में विशेषज्ञता हासिल की। फरवरी​ 2023 से वह क्रिमिनल लॉ पर ध्यान देने लगीं, इसके लिए उन्होंने SALSA (दक्षिण एशियाई कानूनी सेवा संघ) को ज्वाइन किया। बाद में जून 2023 में, क्रिमिनल डिफेंस के कार्य किया। अब वही कबिता सरकार संजय रॉय के केस को लड़ेंगी। उन्होंने अपने वरिष्ठ सौरव बनर्जी से अनुरोध किया है कि वे पूरे केस में उनकी सहायता करें।

आरजी कर अस्पताल से कम हो रही एमबीबीएस महिला छात्राओं की संख्या

उल्लेखनीय है कि 9 अगस्त 2024 की घटना के बाद से आर जीकर अस्पताल लगातार चर्चा में बना हुआ है। कभी वहाँ सबूतों से छेड़छाड़ की बात सामने आती है तो कभी भीड़ के घुसने की। इन सबके बीच एक ताजा जानकारी सामने आई है वो ये कि इस अस्पताल से धीरे-धीरे महिलाओं की संख्या कम होने लगी है। इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट के अनुसार, एक एमबीबीएस महिला ने बताया कि हॉस्टल में पहले 160 जूनियर डॉक्टर रहती थीं लेकिन अब सिर्फ 17 ही बची हैं। वहीं कैंपस में पहले 700 रेजिडेंट डॉक्टर थे, जिसमें से 30-40 महिलाएँ डॉक्टर ही अब कैंपस में रहती हैं वहीं 60-70 पुरुष डॉक्टर। बाकी सब चले गए हैं। एमबीबीएस छात्राओं के अनुसार, 14 अगस्त को जो कुछ भी हुआ उसे बताया नहीं जा सकता। कई महिला नर्सें और डॉक्टर प्रदर्शन करने आई थी, लेकिन भीड़ ने हमला कर दिया। उस रात कोई छात्रा नहीं सो पाई थी।

घटना से एक दिन पहले संजय रॉय कर रहा था पीड़िता का पीछा

इसके अलावा इस मामले में एक और नई जानकारी सामने आई है वो आरोपित संजय रॉय को लेकर है। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि कोलकाता पुलिस द्वारा पूछताछ के दौरान रॉय ने कबूल किया कि उसने अपराध से एक दिन पहले 8 अगस्त को चेस्ट मेडिसिन वार्ड में पीड़िता को देखा था। वार्ड के सीसीटीवी फुटेज से भी पुष्टि होती है कि रॉय – सुबह करीब 11 बजे वार्ड में था – उसी समय जब पीड़िता और चार अन्य जूनियर डॉक्टर वार्ड में मौजूद थे। सूत्रों ने बताया, “सीसीटीवी फुटेज में रॉय को उनकी ओर घूरते हुए देखा जा सकता है।”

धारा 370 की वापसी, ‘आतंकियों’ को नौकरी… चुनाव जम्मू-कश्मीर का, वादे पाकिस्तान वाले: कॉन्ग्रेस+नेशनल कॉन्फ्रेंस का इरादा क्या- चुनाव जीतना या पत्थरबाजी का वही दौर लाना?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में साल 2019 में लगातार दूसरी बार एनडीए ने प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए केंद्र में सरकार बनाई और सबसे पहला बड़ा काम किया था जम्मू-कश्मीर पर लागू होने वाले आर्टिकल 370 को रद्द करने का। जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में करके केंद्र शासित प्रदेश बनाने का। मोदी सरकार ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसे अब कोई सरकार नहीं हटा पाई। ये अलग बात है कि कॉन्ग्रेस आर्टिकल 370 को हटाने का पुरजोर विरोध करती रही। खैर, अब कॉन्ग्रेस ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू एवँ कश्मीर के विधानसभा चुनाव के लिए फिर से अपने ऐसे पुराने सहयोगी के साथ ‘हाथ’ मिलाया है, जो जम्मू-कश्मीर को लेकर अलगाववादी शक्तियों की मदद करती है। अलगाववाद को बढ़ावा देती है। भारत के दुश्मन पाकिस्तान से दोस्ती की वकालत करती है और कश्मीरियों को भारतीयों से अलग बताती है।

जी हाँ, कॉन्ग्रेस के ‘बिना राजतिलक’ वाले युवराज राहुल गाँधी ने श्रीनगर का दौरा किया। वहाँ उन्होंने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की बात कही और कश्मीर से अपना ‘खून का रिश्ता’ बताया। उसके बाद राहुल गाँधी अपने ‘मुखौटे’ के साथ जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक़ अब्दुल्ला से मिले और फिर दोनों तरफ ये घोषणा की गई कि कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कॉन्ग्रेस पार्टी साथ चुनाव लड़ेंगी। इसमें माकपा भी सहयोगी रहेगी।

खैर, ये रिश्ता पहले भी रहा है। इस रिश्ते पर सवाल पहले नहीं उठते थे। खासकर 2019 से पहले तो बिल्कुल भी नहीं। चूँकि कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस की सोच कमोवेश एक जैसी ही रही है। बात चाहे पड़ोसी पाकिस्तान से रिश्तों को लेकर हो या आतंकवाद से निपटने को लेकर, लेकिन इस बार सारी हदें पार कर दी गई हैं।

हम ये बात यूँ ही नहीं कह रहे हैं, बल्कि ये बाते कह रही है कॉन्ग्रेस की रिश्तेदार नेशनल कॉन्फ्रेंस ही। दरअसल, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने बीते सोमवार (19 अगस्त 2024) को पार्टी का घोषणा पत्र जारी किया है। उन्होंने घोषणापत्र को एनसी का विजन डॉक्यूमेंट और शासन का रोडमैप बताया। घोषणापत्र में 12 व्यापक वादे किए गए हैं, जिनमें 2000 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा द्वारा पारित स्वायत्तता प्रस्ताव के पूर्ण कार्यान्वयन के लिए प्रयास करना शामिल है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस का घोषणा पत्र देखकर लगता ही नहीं कि ये किसी भारतीय राजनीतिक पार्टी का घोषणा पत्र है। ये बात सुनी-सुनाई सी लग रही होंगी, लेकिन इन्हें हल्के में मत लीजिए। हल्के में लेने की जगह जरा नेशनल कॉन्फ्रेंस के घोषणा पत्र की हाईलाइट्स पढ़ लीजिए…

नेशनल कॉन्फ्रेंस के घोषणा पत्र की 12 गारंटियों में—

  • हम (अनुच्छेद) 370-35ए को बहाल करने और 5 अगस्त, 2019 से पहले की स्थिति में राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रयास करते हैं।
  • हम जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर सरकार के कामकाज के नियम, 2019 को फिर से तैयार करने का प्रयास करेंगे।
  • जम्मू और कश्मीर के लोगों के भूमि और रोजगार के अधिकारों की रक्षा करेंगे, यानी पहले की तरह बाहरी (भारतीयों) लोगों पर बैन।
  • भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत को प्रोत्साहित करेंगे, जोकि मोदी सरकार नहीं कर रही है।
  • राजनीतिक कैदियों को एमनेस्टी देना, पीएसए व यूएपीए हटाना (जिन पर आतंकवादी कृत्यों के आरोप हैं) यानी माफी देकर जेल से रिहा करेंगे।
  • कर्मचारियों की “अन्यायपूर्ण” (आतंकवाद के समर्थन की वजह) बर्खास्तगी की बहाली की जाएगी और राजमार्गों पर लोगों के उत्पीड़न (सेना की कड़ाई, पूछताछ) को समाप्त करेंगे।

अब अगर इन बातों पर गौर करें तो आर्टिकल 370 को फिर से लागू करना? ये कैसे करेंगे, किसी को नहीं पता है। वो फिर से कश्मीरियों और पाकिस्तानी नागरिकों तक ही कश्मीर की जमीन को सीमित करने का प्रयास करेंगे, मानों पूरा भारत कश्मीर में बस ही गया हो। और जो रोजगार, कामधंधे, निवेश आया है, वो फिर से शून्य हो जाएगा।

ये पाकिस्तान के साथ बातचीत को बढ़ावा देंगे? क्यों भाई? उस पार से आने वाले आतंकवाद पर प्रहार हुआ है इसलिए? क्योंकि इससे आप (कुछ लोगों) का भला होता था? याद करें अभी कुछ दिन पहले ही जम्मू-कश्मीर बार एसोसिएशन का 20 साल तक अध्यक्ष रहा मियाँ अब्दुल कयूम भट्ट जून महीने में ही गिरफ्तार हुआ है। गिरफ्तार भी क्यों हुआ? क्योंकि उसने आतंकवादियों की मदद से एक विरोधी वकील को ‘रास्ते से’ हटवाया था। वो कश्मीरी आतंकवादियों का केस भी लड़ता रहा है। अब नेशनल कॉन्फ्रेंस उसे ‘राजनीतिक कैदी’ बताकर रिहा करेगी।

जरा सरकारी कर्मचारियों की अन्यायपूर्ण बर्खास्तगी वाली लाइन समझ लीजिए। ऐसे लोगों को नेशनल कॉन्फ्रेंस फिर से बहाल करेगी, जो आतंकवाद से जुड़े मामलों की वजह से बर्खास्त कर दिए गए हैं। ये वो लोग हैं, जिनके पति-पत्नी, भाई, पिता घोषित आतंकवादी हैं। सरकार से मिलने वाली सैलरी वो आतंकवादियों को देते हैं। या फिर आतंकवादियों की मदद करने, उन्हें सूचना पहुँचाने और देश के खिलाफ काम करने के मामले में जिनकी सेवाएँ समाप्त की गई हैं, नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार बनने पर उन्हें माफी दे दी जाएगी। खैर, ये तो तब होगा, जब जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलेगा और उसके इस लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद देगी कॉन्ग्रेस।

वैसे, एक वादा तो और भी किया है उमर अब्दुल्ला ने, कि साल 2000 में जो रिजोल्यूशन जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार रहते पास किया गया था, जिसमें जम्मू-कश्मीर को स्वायत्तता की माँग थी, उसे तत्कालीन एनडीए सरकार यानी अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने पूरी तरह से खारिज कर दिया था। उसे फिर से पास करके केंद्र सरकार के पास भेजने की। अब ये संविधान के 16वें संसोधन की मजबूरी कहें या कुछ और, कि नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर को अलग देश बनाने की बात नहीं कर रही, वर्ना वो ये भी कर देती। बाकी उनकी इस माँग में और पड़ोसी पाकिस्तान की माँग में कोई खास अंतर रह नहीं गया है।

जी हाँ, अगर अब तक आपके मन में ये सवाल आ रहा हो कि कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस का रिश्ता क्या कहलाता है? तो ये जवाब है। जवाब है कॉन्ग्रेस का ऐसी ताकतों के साथ हाथ मिलाना, जो देश को विभाजन की तरफ ढकेलने की कोशिश करते हैं। वैसे, कॉन्ग्रेस खुद आर्टिकल 370 के हटाने का भी विरोध करती रही है। वैसे, राहुल गाँधी के ‘खून वाले रिश्ते’ के बयान के बाद गाँधी खानदान का अब्दुल्ला खानदान से रिश्ता आप भी जानते ही होंगे, अगर नहीं जानतें तो यहाँ पढ़ लीजिए।

बहरहाल, अब जब पूरा देश कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के ना’पाक’ रिश्ते को जान ही चुका है, तो यहाँ ये भी जानना जरूरी है कि जिस अखिलेश यादव को इंडी गठबंधन खास कर सपा कार्यकर्ता देश का अगला ‘रक्षा मंत्री’ बनाने पर तुले हैं, उनके पिता मुलायम सिंह यादव रक्षा मंत्री रह भी चुके हैं, उनका राहुल गाँधी, उमर अब्दुल्ला से कितना याराना है। फिर इस गठबंधन के बाकी साथी चाहें वो शरद पवार हों, या ममता बनर्जी, इनके पाकिस्तान और ‘मजहब विशेष’ प्रेम से भी सभी वाकिफ हैं। साथ ही वामपंथी पार्टियों के 1962 से लेकर हमेशा किए जाने वाेल देश से छल से भी। ऐसे में इस गठबंधन को जम्मू-कश्मीर के असली देश वासी ही जवाब देंगे, इसमें कोई संदेह नहीं है।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव तीन चरणों में 18 सितंबर, 25 सितंबर और 1 अक्टूबर को होंगे। नतीजे 4 अक्टूबर को घोषित किए जाएँगे। पहले चरण के लिए नामांकन 27 अगस्त, दूसरे चरण के लिए 5 सितंबर और तीसरे चरण के लिए 12 सितंबर से दाखिल किए जाएँगे। इस चुनाव में कश्मीरी प्रवासियों के लिए दिल्ली, जम्मू और उधमपुर में स्पेशल पोलिंग बूथ बनाए गए हैं।

जम्मू-कश्मीर में कुल 90 निर्वाचन क्षेत्र हैं जिनमें से 74 जनरल, 9 अनुसूचित जाति और 7 अनुसूचित जनजाति के लिए हैं। केंद्रशासित प्रदेश में मतदाताओं की संख्या कुल 87.09 लाख हैं जिसमें 44.46 लाख पुरुष और 42.62 लाख महिला मतदाता हैं। जम्मू-कश्मीर में युवा मतदाताओं की संख्या 20 लाख है। पिछले साल दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को 30 सितंबर तक जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने का निर्देश दिया था।

1- जम्‍मू-कश्‍मीर से 5 अगस्‍त 2019 को आर्टिकल 370 को हटाया गया था।

2- आखिरी विधानसभा चुनाव 2014 में 87 सीटों पर हुआ था, जिनमें 4 सीटें लद्दाख की थीं।

3- जम्‍मू-कश्‍मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद सात विधानसभा सीटें बढ़ गई हैं।

4- 90 विधानसभा सीटों में से 74 सामान्‍य, 7 एससी और 9 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं।

5- जम्मू-कश्मीर सरकार का कार्यकाल पहले 6 साल होता था, अब 5 साल का होगा।

सवाल ये नहीं है कि कौन सी पार्टी किसके साथ गठबंधन करेगी। सवाल नीतियों का है। एक तरफ कॉन्ग्रेस देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी होने का दंभ भरती है, तो उसके नेता और कार्यकर्ता, उसके राजनीतिक सहयोगी देश में सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक स्तर पर तोड़फोड़ और अलगाववादी नीतियाँ अपनाते हैं। दक्षिण में कॉन्ग्रेस की सहयोगी द्रमुक की बात करें तो वो सनातन परंपरा को ही मिटाने का संकल्प लेती है, तो उत्तर में नेशनल कॉन्फ्रेंस भारत की शान जम्मू-कश्मीर को स्वायत्तता दिलाने, पाकिस्तान से बातचीत करने, आतंकवादियों को जेल से रिहा करने की बात करती है। ऐसी दो मुँही बातें कब तक चलेंगी मिस्टर युवराज?

5 साल का बैन, ₹25 करोड़ जुर्माना… शेयर बाजार में अनिल अंबानी पर प्रतिबंध: जानिए क्या है RHFL का लोन फर्जीवाड़ा जिसमें 25 लोगों पर SEBI ने लिया एक्शन

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) ने कारोबारी अनिल अंबानी समेत 25 लोगों और कम्पनियों पर बड़ी कार्रवाई की है। SEBI ने इन सभी के शेयर बाजार में हिस्सा लेने पर रोक लगा दी है। SEBI ने अनिल अंबानी पर ₹25 करोड़ का जुर्माना भी ठोंका है। कई अन्य लोगों पर भी जुर्माने लगाए गए हैं। SEBI ने यह कार्रवाई रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) के लोन गड़बड़ तरीके से दिए जाने पर की है।

SEBI ने क्या कार्रवाई की?

SEBI ने RHFL के लोन गड़बड़ी मामले में 222 पेज का अपना अंतिम आदेश दिया है। SEBI ने इस आदेश में अनिल अंबानी पर 5 साल तक शेयर बाजार में हिस्सा लेने से रोक लगाई है, उन पर ₹25 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। उनके ऊपर किसी कम्पनी में प्रमुख पद लेने पर भी रोक लगा दी गई है। उनके अलावा RHFL में प्रमुख पद पर रहे अमित बापना पर ₹27 करोड़, रविन्द्र सुधालकर पर ₹25 करोड़ और पिंकेश शाह पर ₹21 करोड़ का जुर्माना ठोंका है। इन पर भी बाजार शेयर बाजार में हिस्सा लेने पर रोक लगा दी गई है।

SEBI इनके अलावा RHFL पर 6 महीने का प्रतिबन्ध भी लगाया है और इस कम्पनी पर भी ₹6 लाख का जुर्माना ठोंका है। अनिल अंबानी से जुड़ी रिलायंस ग्रुप की कई अन्य कम्पनियों पर भी SEBI ने यही प्रतिबंध लगाया है। इनमें रिलायंस बिग इंटरटेनमेंट, रिलायंस कैपिटल लिमिटेड और रिलायंस ब्रॉडकास्टिंग लिमिटेड जैसी कम्पनियाँ शामिल हैं।

क्या है पूरा मामला?

SEBI ने पाया है कि वित्त वर्ष 2018-19 में RHFL ने कई ऐसे लोगों को हजारों करोड़ के लोन दिए जो इसके लायक नहीं थे। जिन्हें यह लोन दिए गए उनके पास इन्हें चुकाने के साधन ही नहीं थे और कई तो पहले ही बड़े कर्जे में डूबे हुए थे। RHFL ने इनकी पृष्ठभूमि पर ध्यान दिए बिना ही लोन बाँट दिए।

RHFL ने लगातार लोन देने सम्बन्धी प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया। RHFL यह सब तब भी करती रही जब कम्पनी के बोर्ड ने उसे इस पर ध्यान देने को कहा। इस दौरान प्रमोटर के तौर पर अनिल अंबानी ने इन सभी लोन को दिलाने में अपना प्रभाव डाला। इसके अलावा अमित बापना ने कम्पनी के CFO के तौर पर यह लोन जारी किए और CEO रविन्द्र सुधालकर ने इन लोन को आगे उन फर्जी कम्पनियों और लोगों तक पहुंचाने का काम किया।

SEBI ने जाँच में यह पाया कि जिन कम्पनियों को RHFL ने लोन दिया, असल में वह अनिल अंबानी से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में RHFL का पैसा घुमा फिरा कर अनिल अंबानी के पास पहुँचा। इन सब कामों के लिए नियमों का जम कर उल्लंघन किया गया। कंपनी का पैसा अनिल अंबानी तक पहुँचाने के लिए इसे लोन का नाम दिया गया था। RHFL ने जो लोन बिना देखे परखे दिए थे। उनमें से अधिकांश वापस नहीं आए। उन्हें NPA घोषित करना पड़ा।

RHFL दिए गए लोन वापस ना आने के कारण खुद भी दिवालिया होने की स्थिति में पहुँच गई। उसने अपने लोन पर डिफ़ॉल्ट करना चालू कर दिय़ा। इसके बाद कम्पनी के अपने संसाधन खत्म होने चालू हो गए। RHFL के निवेशकों को भी इससे बड़ा नुकसान हुआ। RHFL का शेयर 2018 में जहाँ लगभग ₹60-₹65 के आसपास था तो वहीं 2020 में यह ₹.75 पैसे पहुँच गया। SEBI की इस कार्रवाई के कारण रिलायंस की अन्य कम्पनियों के शेयरों पर भी प्रभाव पड़ा है।

हाथों में तिरंगा, जुबाँ पर भारत माता की जय… यूक्रेन में कुछ यूँ हुआ PM मोदी का स्वागत, रूस के साथ संघर्ष खत्म होने की लोगों ने जताई उम्मीद

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज ऐतिहासिक यात्रा के लिए यूक्रेन की राजधानी कीव पहुँचे। यहाँ उनकी मुलाकात यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से होनी है, लेकिन इस मुलाकात से पहले जो खबर चर्चा में है वो यूक्रेन में पीएम मोदी के कीव में हुए भव्य स्वागत की है।

दरअसल, एक वीडियो सामने आई है जिसमें दिख रहा है कि कीव के जिस होटल में प्रधानमंत्री मोदी गए वहाँ भारतीय लोगों का जमावड़ा था। इस दौरान सबने पीएम का का भव्य स्वागत किया। लोगों ने हाथ में तिरंगा लेकर जोर-जोर से मोदी-मोदी के नारे लगाए। इस दौरान पूरा होटल ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूँज उठा। वहीं कहा जा रहा है बीच-बीच में जय श्रीराम के नारे भी सुनाई पड़ते रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देख कीव में रह रहे भारतीय लोग अपनी खुशी नहीं रोक पाए। उन्होंने पीएम मोदी को देख अपनी अपेक्षाएँ व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वो पीएम मोदी की इस यात्रा से बेहद खुद हैं। सबने उम्मीद जताई की शायद पीएम मोदी यूक्रेन और रूस के बीच चल संघर्ष को समाप्त करने के लिए कोई संदेश लेकर आएँगे।

उ्लेखनीय है कि यूक्रेन में पीएम मोदी का रुकना 7 घंटे होगा। इस दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों, रक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में सहयोग को बढ़ावा देने के मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। पीएम मोदी की यूक्रेन की यह यात्रा ऐतिहासिक और चर्चा का विषय इसीलिए है क्योंकि 1991 में यूक्रेन के स्वतंत्र बोने के बाद यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की वहाँ पहली यात्रा है। यही वजह है कि केवल भारतीय ही नहीं, बल्कि यूक्रेन के स्थानीय भी इस यात्रा से काफी खुश हैं और हर ओर से मोदी-मोदी की गूँज सुनाई पड़ रही है। लोग हाथ में तिरंगा लेकर लहरा रहे हैं।

कुछ साल में फिर होंगे चांद पर, 2035 तक हमारा खुद का अंतरिक्ष स्टेशन होगा: ‘नेशनल स्पेस डे’ पर बोले PM मोदी-10 साल में 5X बढ़ेगी स्पेस अर्थव्यवस्था

भारत के महत्वाकांक्षी चंद्रयान-3 मिशन के चंद्रमा पर पहुँचने का एक वर्ष पूरा हो गया है। इस दिन को भारत सरकार नेशनल स्पेस डे के रूप में मना रही है। पहले स्पेस डे कार्यक्रमों का आयोजन दिल्ली के भारत मंडपम में हुआ है, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू भी शामिल हुई हैं। पीएम मोदी ने इस दिन की देश को बधाई दी है और कहा है कि आने वाले दिनों में भारत फिर से चाँद पर पहुँचेगा। पीएम मोदी ने भारतीयों के अन्तरिक्ष में जाने की बात भी कही है।

पीएम मोदी ने स्पेस डे की बधाई देते हुए कहा, “मंगलयान और चंद्रयान की सफलता और गगनयान की तैयारी ने भारत की युवा पीढ़ी को एक नया मिजाज दिया है। भारत ने हजारों साल पहले ही अन्तरिक्ष में देखना चालू कर दिया था…आने वाले 10 वर्षों में भारत की स्पेस अर्थव्यवस्था 5 गुना बढ़ जाएगी। भारत आने वाले दिनों में एक बड़ा ग्लोबल स्पेस कॉमर्शियल हब बनेगा। आने वाले कुछ वर्षों में हम चन्द्रमा पर फिर जाएँगे। शुक्र भी ISRO का लक्ष्य है। इसी अमृतकाल में भारत का अन्तरिक्ष यात्री भारत के ही रॉकेट से चन्द्रमा पर उतरेगा।”

पीएम मोदी ने कहा कि 2035 भारत का अपना स्पेस स्टेशन होगा। पीएम मोदी के अलावा राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू भी दिल्ली के भारत मंडपम में नेशनल स्पेस डे कार्य्रकम में शामिल हुईं। उन्होंने यहाँ ISRO प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरष्कार बाँटे। इसके बाद उन्होंने यहाँ मौजूद छात्रों को संबोधित भी किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि चंद्रयान-3 की सफलता पर मैं भी गर्वित हुई थी। उन्होंने नेशनल स्पेस डे की बधाई दी और ISRO की उपलब्धियों को गिनाया। उन्होंने हाल ही में प्रज्ञान रोवर द्वारा भेजी गई जानकारी का उल्लेख भी किया।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के अलावा ISRO मुखिया एस सोमनाथ ने भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि जब ISRO की सफलता के बाद 23 अगस्त को नेशनल स्पेस डे घोषित किया तो हमें बहुत प्रसन्नता हुई, हमने पहले ऐसा नहीं सोचा था। एस सोमनाथ ने प्रधानमंत्री को नए स्पेस मिशन को लेकर धन्यवाद भी दिया।

23 अगस्त, 2023 को भारत चंद्रयान-3 मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला मिशन बन गया था। इस मिशन को ISRO ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया था। प्रधानमंत्री मोदी ने इसके बाद चंद्रयान की लैंडिंग साईट का नाम शिवशक्ति पॉइंट रखा था और नेशनल स्पेस डे की घोषणा की थी।

घुमंतू पशुओं की करने जा रहा था हत्या… बदायूँ पुलिस ने 25000 के इनामी गोतस्कर नजीम को मुठभेड़ के बाद पकड़ा: छुरी, कुल्हाड़ी, तमंचा बराबद

उत्तर प्रदेश के बदायूं के इस्लामनगर थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक गोतस्कर को गिरफ्तार किया है। गोतस्कर की पहचान नाजिम के तौर पर हुई है। पुलिस ने उसे मुठभेड़ के बाद पकड़ा। वहीं उसके दो साथी शकील और मोनिश इस बीच अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए।

पुलिस के अनुसार, नाजिम और उसके साथी घुमंतू पशुओं की हत्या की योजना बना रहे थे। जैसे ही पुलिस को इस संबंध में पता चला उन्होंने 21 अगस्त को विक्रमपुर चरसौरा मोड़ पर घेराबंदी की, फिर संदेह होने पर एक टेंपो को रोकने का प्रयास किया, लेकिन तस्कर टेंपो रोकने की बजाय वहाँ से भागने लगे। जब पुलिस और एसओजी की टीम ने गोतस्करों का पीछा किया तो उन्होंने इस दौरान फायरिंग भी की।

पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई में गोली चलाई। इस दौरान नाजिम के पाँव में गोली लगी और वो वहीं गिर गया। जबकि बाकी साथी फरार हो गए। पुलिस ने नाजिम के पास से एक तमंचा, कारतूस, मांस काटने के उपकरण (दो छुरी, कुल्हाड़ी), रस्सा, लकड़ी का गुटका और टेंपो बरामद किया। इस मुठभेड़ में एक पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।

पुलिस अधीक्षक ने नाजिम की गिरफ्तारी पर बताया कि पुलिस ने उस पर पहले 25000 का इनाम रखा हुआ था। पुलिस ने उसे पकड़ लिया है। अब उसके फरार साथियों को भी जल्द ही कोर्ट में पेश किया जाएगा। इस संबंध में बदायूँ पुलिस ने भी ट्वीट किया है।

पहले बहन का कुचला सिर, फिर गला घोंटकर ली जान: दिल्ली से अब्दुल्लाह और अरीब गिरफ्तार, पड़ोसियों ने बताया था- राते में मिलने आ रहे थे लोग

दिल्ली के हौज काजी इलाके में दो भाइयों ने अपनी तलाकशुदा बहन की हत्या कर दी। भाइयों ने बहन के सर को भारी चीज कुचला और फिर भी उनका मन नहीं भरा तो उसका गला दबा दिया। दोनों ने महिला को एक युवक के साथ आपत्तिजनक हालत में देख लिया था। पुलिस ने अब दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 35 वर्षीय मृतका हौज काजी स्थित एक किराए के मकान में रहती थी। महिला का दो वर्ष पूर्व अपने पति से तलाक हो गया था। महिला का पति लक्ष्मी जगह पर बच्चों के साथ रहता है। महिला के तीन बच्चे हैं। महिला के पड़ोसियों ने उसके भाइयों को बताया था कि उनकी बहन के घर में कुछ लोग मिलने आते हैं।

महिला के पड़ोसियों ने शिकायत की थी कि यहाँ कुछ महिला के साथ रात में रुक जाते हैं। इसके बाद गुरुवार (22 अगस्त, 2024) सुबह 4 बजे के आसपास महिला के दोनों भाई अरीब और अब्दुल्लाह यहाँ पहुँच गए। यहाँ उन्होंने महिला को एक युवक के साथ आपत्तिजनक हालत में देख लिया।

महिला के साथ रुका हुआ युवक तो यहाँ से भाग गया लेकिन उसके भाइयों को यह बात नागवार गुजरी। भाइयों ने अपनी बहन से बहस और मारपीट चालू कर दी। उन्होंने अपनी बहन को इज्जत का हवाला दिया। इसके बाद विवाद इतना बढ़ा कि अरीब और अब्दुल्लाह ने बहन की हत्या करने की ठान ली।

महिला के दोनों भाइयों ने उसके सर पर भारी चीज से वार कर उसको घायल कर दिया इसके बाद भी जब नहीं मरी तो उसका गला दबा दिया। इसके बाद महिला की मौत हो गई। उसके दोनों भाई यहाँ से उसे मारने के बाद भाग गए। सुबह 4:30 बजे दिल्ली पुलिस को इस संबंध में सूचना मिली।

जब पुलिस यहाँ पहुँची तो उसे शव मिला। पुलिस ने सबसे पहले आसपास में पूछताछ चालू की। पुलिस ने इसके बाद यहाँ के CCTV खंगाले, जिसमें दोनों महिला के घर से निकलते दिखे। इसके बाद पुलिस ने दोनों की तलाश चालू की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। महिला की हत्या पर उसकी माँ और बाकी परिजन शांत हैं।

नहीं हटाई महिला पहलवानों की सुरक्षा, गलतफहमी के कारण ड्यूटी पहुँचने में लेट हुए PSO: नई दिल्ली DCP ने दिया विनेश फोगाट के आरोपों का जवाब, कोर्ट तक चला गया था मामला

कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला पहलवानों की सुरक्षा हटाए जाने की बात उठने के बाद नई दिल्ली के डीसीपी ने बयान जारी किया है। उन्होंने बताया है कि सुरक्षा हटाए जाने की बात सही नहीं है। उन्होंने महिला पहलवानों की सुरक्षा हटाई नहीं है बल्कि उसमें थोड़े बदलाव हुए हैं।

डीसीपी नई दिल्ली के ट्वीट के अनुसार, पहलवानों को दी गई सुरक्षा वापस नहीं ली गई है; बल्कि निर्णय यह लिया गया कि भविष्य में हरियाणा पुलिस से यह जिम्मेदारी संभालने का अनुरोध किया जाए, क्योंकि जिन्हें सिक्योरिटी दी गई है वो लोग वहीं पर रहते हैं।

डीसीपी नई दिल्ली के अनुसार, दिल्ली पुलिस के नियुक्त पीएसओ ने इस फैसले को गलत समझ लिया, इसलिए उन्हें रिपोर्ट करने में लेट हो गई। स्थिति को सुधार लिया गया है और पहलवानों को सुरक्षा मुहैया कराना जारी है।

बता दें कि बृजभूषण सिंह के खिलाफ गवाही देने वाली महिलाओं की सुरक्षा हटाए जाने की बात विनेश फोगाट ने अपने ट्वीट में कही थी। उन्होंने ट्वीट में कहा, “जिन महिलाओं को बृजभूषण के खिलाफ कोर्ट में गवाही देनी है, दिल्ली पुलिस ने उनकी सुरक्षा हटा दी है।”

हरियाणा की पहलवान विनेश फोगाट ने बृजभूषण शरण सिंह से जुड़े यौन शोषण मामले को लेकर बड़ा दावा किया है। विनेश ने अपनी इस पोस्ट में दिल्ली पुलिस, दिल्ली महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग को टैग किया है।

इसके अलावा ये मामला राउज एवेन्यू कोर्ट भी पहुँचा। वहाँ सुरक्षा हटाए जाने की बात कहकर अर्जी दाखिल की जिसके बाद कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित कर पुलिस को पहलवान को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया। साथ ही डीसीपी दिल्ली को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है।

डीसीपी को रिपोर्ट दाखिल कर बताना है कि किन वजहों से महिला पहलवानों की सुरक्षा को वापस लेने का फैसला लिया गया। इसी नोटिस के बाद डीसीपी नई दिल्ली ने अपना ट्वीट किया।

हिन्दू महिला का किया रेप, जबरन कबूल करवाया इस्लाम: रफीक को कर्नाटक HC ने जमानत देने से किया मना, कहा- हम देख रहे गरीबों का धर्मांतरण

कर्नाटक हाई कोर्ट ने हाल ही में एक मुस्लिम व्यक्ति को एक हिन्दू महिला के रेप और इस्लाम में धर्मांतरण मामले में जमानत देने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि गरीब हिन्दू महिला का इस्लाम में धर्मांतरण गंभीर मसला है और कोर्ट ऐसे मामले में काफी मुस्तैद है।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा, ““वर्तमान मामले में, निर्दोष और गरीब महिला को बहला-फुसलाकर जबरन इस्लाम में धर्मांतरित करना एक गंभीर घटना है। इसलिए, इस तरह की घटना से बचने के लिए, समाज को यह संदेश देना आवश्यक है कि कोर्ट ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए सतर्क हैं और समाज की निर्दोष और वंचित महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा कर रही हैं।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रफीक बेपारी नाम के एक शख्स ने एक हिन्दू महिला से पहले नजदीकियाँ बढ़ाईं और उससे दोस्ती कर ली। रफीक हिन्दू महिला से कहता रहा कि वह उसे नौकरी दिला देगा। रफीक ने इसके लिए हिन्दू महिला से उसके साथ चलने का दबाव डाला।

रफीक ने लगातार महिला का यौन शोषण भी किया। रफीक इसके बाद उसे जबरदस्ती अपने साथ बेलगावी ले गया और उसे एक जगह बंद कर दिया। हिन्दू महिला कहीं चली ना जाए, इसलिए यहाँ एक और महिला की चौकीदार के रूप में तैनाती कर दी गई। महिला को यहाँ कई दिनों तक बंद रखा गया।

हिन्दू महिला का बेलगावी में भी कई बार रेप हुआ। इसके बाद रफीक निकाह के लिए ने हिन्दू महिला का इस्लाम में धर्मांतरण करवा दिया। कुछ समय बाद महिला यहाँ से किसी तरह भाग निकली और पूरी कहानी अपने पति को बताई। इसके बाद महिला ने रफीक के विरुद्ध रेप और अवैध धर्मांतरण की FIR दर्ज करवाई।

कोर्ट में हिन्दू महिला के वकीलों ने रफीक की जमानत याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि उसने यह जानते हुए भी महिला को इस्लाम में धर्मांतरित किया कि वह विवाहित है और उसके दो बच्चे भी हैं। कहा गया कि रफीक का महिला को इस्लाम में धर्मांतरित करना असहनीय है।

वहीं रफीक ने खुद को निर्दोष बता कर जमानत माँगी। हालाँकि हाई कोर्ट ने कहा कि महिला ने उसकी कैद से छूट कर तुरंत ही अपने परिवार को फोन किया। यह दिखाता है कि महिला को किस प्रकार प्रताड़ना दी गई। कोर्ट ने इस मामले में रफीक को जमानत देने से मना कर दिया।

‘नरबलि के अपराधियों को मिले कड़ी सजा’: गुजरात विधानसभा में अंधविश्वास और जादू-टोना पर रोक वाला बिल पेश, संतों ने सरकार के कदम को सराहा

गुजरात विधानसभा में 21 अगस्त से तीन दिवसीय मानसून सत्र शुरू हो चुका है। गुजरात सरकार ने इस सत्र के दौरान नरबलि, अंधविश्वास और जादू-टोना पर रोक लगाने के लिए एक विधेयक भी पेश किया है। राज्य में अंधविश्वास और जादू-टोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। सरकार के मानव बलि और अंधविश्वास विरोधी बिल को अब साधु-संतों का भी समर्थन मिल गया है।

गुजरात के प्रमुख कथावाचकों और महंतों ने सरकार की सराहना करते हुए अंधविश्वास विरोधी विधेयक का स्वागत किया है। महंतों ने एक सुर में कहा है कि राज्य में ऐसे कानून की तत्काल आवश्यकता थी और यह भी जरूरी था कि नर बलि के अपराधियों को कानून द्वारा कड़ी सजा दी जानी चाहिए।

जानकारी के मुताबिक, 21 अगस्त को विधानसभा के मानसून सत्र में अंधविश्वास विरोधी विधेयक को लेकर साधु वत्सलदासजी महाराज ने कहा है, ”ऋग्वेद में भी अंधविश्वास और जीव हत्या को वर्जित माना गया है। यही बात कई संहिताओं में भी कही गई है। सभी देवताओं से भी यही कहा गया है कि किसी भी जीव को कष्ट नहीं पहुँचाना चाहिए। इसके लिए कानून बनाया जाना चाहिए और जीव हत्या के अपराधियों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए।”

डाकोर के प्रसिद्ध कथावाचक भाविनलालजी महाराज ने कहा , ”नरबलि और काला जादू की प्रथा को रोकने और अंधविश्वास को मिटाने का सरकार का विचार सराहनीय है। हम इसका स्वागत करते हैं। सरकार जो भी कानून और नियम लागू करती है, हम उसका पूरा समर्थन करते हैं। राज्य के हित में ऐसे कानूनों और नियमों की भी बहुत आवश्यकता है।”

इसके साथ ही उज्जैन के प्राचार्य डॉ. अर्जुन शर्मा ने गुजरात सरकार की भी तारीफ की है। डॉ अर्जुन शर्मा ने कहा, ”गुजरात सरकार द्वारा लाया जा रहा कानून बहुत अच्छा और सराहनीय कदम है। क्योंकि कई जगहों पर कई लोग अंधविश्वास फैलाते हैं। इस कानून से इस पर नियंत्रण होगा और सजा दी जाएगी। साथ ही ग्रामीण समाज के भोले-भाले लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा। अंधविश्वास हर पंथ के लोगों में पाया जाता है। इसे हटाना गुजरात सरकार का एक सही और बेहतरीन कदम है।” इसके अलावा गुजरात के कई धार्मिक समुदायों के प्रतिनिधियों ने इस कानून का स्वागत किया है।

गौरतलब है कि गुजरात में अंधविश्वास और काले जादू के प्रसार से निपटने के लिए एक सख्त कानून बनाने के लिए गुजरात उच्च न्यायालय के समक्ष एक जनहित याचिका दायर की गई थी। इसके लिए राज्य गृह विभाग के प्रभारी उप सचिव ने गुजरात हाई कोर्ट में हलफनामा देकर कानून बनाने के अहम फैसले की घोषणा भी की थी। इस आशय का एक विधेयक 21 अगस्त को गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी द्वारा विधानसभा में पेश किया गया है। गुजरात हाईकोर्ट में पेश हलफनामे में गृह विभाग के उप सचिव ने कहा था कि अंधविश्वास, जादू-टोना और काले जादू की आड़ में होने वाली अमानवीय गतिविधियों को कुचलने के लिए गुजरात विधानसभा में एक विधेयक पेश किया जाएगा।

मूल रूप से ये समाचार गुजराती भाषा में प्रकाशित किया गया है। मूल समाचार पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।