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रियासी, डोडा, पुँछ, कठुआ… जम्मू कश्मीर में फिर से सर उठा रहा है आतंकवाद, इस साल हुए ये 9 बड़े हमले

साल 2024 आधा बीत चुका है। इस बीच, जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों में काफी तेजी देखी गई है। खास बात ये है कि पहले जहाँ जम्मू क्षेत्र में आतंकी हमले न के बराबर होते थे, वहाँ आतंकी हमलों में काफी बढ़ोतरी हुई है। बीते कुछ माह में जम्मू क्षेत्र में हुए आतंकी हमलों में काफी संख्या में आम लोगों ने अपनी जान गवाँई है, तो जवानों को भी वीरगति प्राप्त हुई है। ऐसे ही आतंकी हमलों पर एक नजर..

कठुआ में 8 जुलाई को आतंकवादी हमला

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में 8 जुलाई को सेना के ट्रक पर हुए आतंकवादी हमले में 4 जवान वीरगति को प्राप्त हुए, तो छह घायल हो गए। घायल जवानों में से एक ने बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया। यह घटना बिलावर तहसील के लोई मल्हार क्षेत्र के बदनोटा गाँव में दोपहर करीब साढ़े तीन बजे हुई। यह कठुआ जिला मुख्यालय से करीब 120 किलोमीटर दूर है और डोडा जिले की सीमा से सटा हुआ है। एक पुलिस अधिकारी ने मीडिया को बताया, “सोमवार दोपहर बिलावर के लोई मल्हार क्षेत्र के बदनोटा गाँव में हथियारबंद आतंकवादियों ने सेना के ट्रक पर घात लगाकर हमला किया। माना जा रहा है कि दो से तीन की संख्या में आए आतंकवादियों ने पहले ग्रेनेड फेंका और फिर ऑटोमेटिक गनों से गोलीबारी शुरू कर दी। इस हमले में 4 जवानों ने मौके पर दम तोड़ दिया, तो 6 घायल हो गए। बाद में एक अन्य जवान की अस्पताल में साँस थम गई।”

कठुआ में 12 जून को आतंकवादी हमला

कठुआ में 12 जून को दो आतंकियों ने गोलीबारी की। दोनों आतंकियों को सेना ने मार गिराया। इस दौरान गोलीबारी में एक अर्धसैनिक बल का एक जवान भी वीरगति को प्राप्त हुआ। इसके साथ ही डोडा में सेना के बेस पर भी हमला हुआ, जिसमें 5 जवान और एक स्पेशल पुलिस ऑफिसर घायल हो गए। ये मुठभेड़ दूसरे दिन सुबह तक जारी रही।

कठुआ के हीरानगर में 11 जून को आतंकवादी हमला

कठुआ के हीरानगर इलाके में 11 जून को ग्रामीणों ने गोलियों की आवाज सुनी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची। हीरानगर सेक्टर के सेडा सोहल गाँव में संदिग्ध गतिविधि देखे जाने के बाद व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया और एक आतंकवादी को मार गिराया गया।

डोडा में 11 जून को हमला

डोडा के हीरानगर इलाके में 11 जून को सेना के अस्थाई कैंप पर हमला किया, जिसमें एक आतंकवादी ढेर हो गया। इस दौरान एक आम नागरिक भी घायल हो गया।

रियासी में 9 जून को तीर्थयात्रियों की बस पर आतंकवादी हमला

जम्मू-कश्मीर में 9 जून को तीर्थयात्रियों से भरी एक बस आतंकवादियों द्वारा की गई गोलीबारी के बाद गहरी खाई में गिर गई, जिसमें कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई। यह घटना रियासी जिले में हुई, जहाँ शिव खोरी मंदिर से तीर्थयात्रियों को ले जा रही बस पर आतंकवादियों ने भारी गोलीबारी की। बस शिव खोरी से कटरा जा रही थी। पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया और घटनास्थल पर पहुँचे। रिपोर्टों के अनुसार, सड़क से नीचे गिरने से पहले आतंकवादियों ने बस पर कम से कम 50 राउंड फायरिंग की। पीड़ितों में से एक ने एक बयान में कहा कि बस के खाई में गिरने के बाद भी आतंकवादी गोलीबारी करते रहे।

सुरक्षा बलों ने 22 मई को कुपवाड़ा के जंगल से गोला-बारूद बरामद किया

22 मई को सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ संयुक्त तलाशी अभियान में जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के एक जंगल से हथियार, गोला-बारूद और युद्ध जैसे भंडार बरामद किए । तलाशी अभियान के दौरान रॉकेट प्रोजेक्टाइल गन (आरपीजी) राउंड, हैंड ग्रेनेड और पिस्तौल के साथ गोला-बारूद और युद्ध जैसे भंडार बरामद किए गए हैं। इससे पहले 16 मई को उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा के तंगधार इलाके में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर सुरक्षा बलों ने घुसपैठ की एक बड़ी आतंकी कोशिश को नाकाम कर दिया था। सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के संयुक्त दस्ते ने घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया। घुसपैठ की कोशिश कर रहे चार आतंकवादियों को सशस्त्र बलों ने मार गिराया।

भारतीय वायुसेना के काफिले पर 4 मई को आतंकवादी हमला

पुंछ में 4 मई को भारतीय वायुसेना के काफिले पर आतंकियों ने गोलीबारी की, जिसमें एक जवान को वीरगति प्राप्त हुई। इस हमले में चार जवान घायल भी घायल हुए।

पुंछ में 12 जनवरी को सेना के काफिले पर हमला

जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में 12 जनवरी को गोलीबारी की घटना हुई , जिसके बाद सुरक्षा बलों ने तलाशी अभियान शुरू किया। रिपोर्टों के अनुसार, पुंछ के लोअर कृष्णा घाटी सेक्टर के धारा धुलियान इलाके में गोलीबारी की घटना दर्ज की गई। रिपोर्टों के अनुसार, गोलीबारी सुरक्षा बलों के वाहनों के काफिले को निशाना बनाकर की गई थी, और यह सुझाव दिया गया है कि हमलावर शुरुआती गोलीबारी के बाद भाग गए होंगे। हालाँकि इस पूरे अभियान में कोई घायल नहीं हुआ।

सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच 5 जनवरी को मुठभेड़

शोपियाँ में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच 5 मई को मुठभेड़ हुई। शोपियाँ जिले के चोटिगाम इलाके में तड़के सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ में आतंकी हताहत हुआ।

अभी तक माना जाता था कि कश्मीर का घाटी वाला इलाका आतंकवाद से ज्यादा प्रभावित है, लेकिन अब लगता है कि आतंकवादियों ने अपने गोलपोस्ट में बदलाव कर लिया है। अब वो दक्षिणी हिस्से यानी जम्मू-जोन में हमले कर रहे हैं। इस साल अधिकतर हमले जम्मू जोन में हुए हैं। जो ये इशारा करते हैं कि सेना को अब घाटी क्षेत्र के अलावा जम्मू क्षेत्र पर भी ज्यादा ध्यान देना पड़ेगा।

चीनी जालसाजों की कैद में 3000 भारतीय, महिलाओं से करवाते हैं न्यूड वीडियो कॉल: चंगुल से छूट कर आए युवक ने बताया – नौकरी के नाम पर फँसाते हैं

खुद को भुक्तभोगी बताते हुए तेलंगाना के एक युवक ने दावा किया है कि चीन के साइबर अपराधियों के चक्कर में कई भारतीय कम्बोडिया में गुलाम बना कर रखे गए हैं। इन पीड़ितों की तादाद लगभग 3000 के आसपास बताई गई है जिसमें कई महिलाएँ शामिल हैं। इन महिलाओं का प्रयोग हनीट्रैप जैसी घटनाओं में न्यूड कॉल तक के लिए किया जा रहा है। गुलाम बनाए गए लोगों में ज्यादातर तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बताए जा रहे हैं। अधिकतर लोगों को नौकरी दिलाने का झाँसा दे कर बुलाया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेलंगाना का रहने वाला मुंशी प्रकाश नाम का मीडिया के युवक सामने आया है। मुंशी प्रकाश ने आपबीती का दावा करते हुए कहा कि उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में B.Tech तक पढ़ाई की है। JT हैदराबाद में नौकरी करते हुए मुंशी प्रकाश ने अपना बायोडाटा इंटरनेट पर अपलोड किया था। इसी बायोडाटा को देख कर कम्बोडिया से विजय नाम के व्यक्ति ने प्रकाश को कॉल कर के ऑस्ट्रेलिया में नौकरी का ऑफर दिया। ट्रेवल हिस्ट्री बनाने के लिए मुंशी प्रकाश को पहले मलेशिया का टिकट दिया गया।

12 मार्च, 2024 को को मुंशी प्रकाश मलेशिया की राजधानी क्वालालम्पुर पहुँचे। यहाँ से उन्हें विजय का एक स्थानीय प्रतिनिधि मिला जिसने मुंशी प्रकाश से 85,000 डॉलर ले लिए। इसी दौरान एक चीनी व्यक्ति ने मुंशी प्रकाश का पासपोर्ट ले लिया और उन्हें अपने साथ ले कर कम्बोडिया के क्रांग बावेत ले गया। यहाँ मुंशी प्रकाश को एक टॉवर में ले जाया गया जहाँ कई अन्य भारतीय पहले से मौजूद थे। इस टॉवर में मुंशी प्रकाश को 10 दिनों तक फेसबुक पर लड़कियों की फर्जी ID बनाने की ट्रेनिंग दिलाई गई।

मुंशी प्रकाश ने बताया कि फेसबुक की ये ID तमिल और तेलगु सहित कई अन्य भाषाओं में बनवाई जा रही थी। काम के बाद पीड़ित को एक अँधेरे कमरे में बंद रखा जाता था। इनकार करने पर उसकी बेरहमी से पिटाई की जाती थी और खाना-पीना भी ठीक से नहीं दिया जाता था। फोटो आदि खींचने पर भी पाबंदी लगा दी गई थी। एक दिन मौका पाकर मुंशी प्रकाश ने अपनी बहन को ईमल कर के सारी समस्या बताई। तब मुंशी प्रकाश की बहन से तेलंगाना के प्रशासन को इस मामले से अवगत करवाया था।

स्थानीय स्तर पर समस्या का हल न निकलने पर मुंशी प्रकाश के परिजनों ने भारतीय दूतावास से मदद की गुहार लगाई। दूतावास की पहल पर कम्बोडिया की पुलिस एक्टिव हुई और मुंशी प्रकाश को बरामद कर लिया। इस बीच चीनी गिरोह ने मुंशी प्रकाश के खिलाफ तहरीर दे कर उन्हें गिरफ्तार करवा दिया। इस वजह पीड़ित को 12 दिनों तक जेल काटनी पड़ी थी। अंत में 9 अन्य भारतीयों के साथ मुंशी प्रकाश 5 जुलाई, 2024 को कम्बोडिया से भारत वापस भेज दिए गए। भारत आ कर मुंशी प्रकाश ने बताया कि उनकी ही तरह लगभग 3000 भारतीय कम्बोडिया में चीनी जालसाजों की वजह से फँसे हुए हैं।

मुंशी प्रकाश का दावा है कि 3000 बंधकों में कई महिलाएँ भी शामिल हैं। इन महिलाओं से हनीट्रैप का काम करवाया जा रहा है। लड़कियों को नग्न होकर वीडियो कॉल करने पर मजबूर किया जाता है। मुंशी ने बताया कि उन्हें कम्बोडिया में चीनी जालसाजों के जाल में फँसे केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, मुंबई और दिल्ली के लोग मिले। इन सभी को विदेश में नौकरी का झाँसा दे कर कम्बोडिया बुलाया गया था। जालसाजी के जुटाया गया ये पैसा पहले क्रिप्टो करेंसी में बदला जाता है। बाद में इसे अमेरिकी डॉलर और अंत में चीनी मुद्रा युवान में बदलवा ली जाती है।

1 बजे के बाद भी खुला था विराट कोहली का बेंगलुरु वाला पब, कर्नाटक पुलिस ने दर्ज की FIR: T20 विश्वकप जीतने के बाद लंदन में हैं क्रिकेटर

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में कई पब पर सीमा से अधिक समय तक चलने के कारण FIR दर्ज की गई है। इन पब में भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली के सह सवामित्व वाला वन8 कम्यून पब एंड रेस्टोरेंट भी है। इसके खिलाफ भी बेंगलुरु पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया है।

जानकारी के अनुसार, बेंगलुरु के कब्बन पार्क पुलिस थाने में विराट कोहली के सह स्वामित्व वाले इस पब एंड रेस्टोरेंट के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। वन8 पब एंड रेस्टोरेंट बेंगलुरु के मल्लेस्वरम इलाके में रत्नम टॉवर नाम की एक इमारत में स्थित है। इस इलाके में स्थित सभी पब को रात 1 बजे तक ही चालू रखने की इजाजत है।

हालाँकि, पुलिस को 6 जुलाई की रात गश्त के दौरान इस पर शक हुआ। पुलिस ने जब अंदर जाकर देखा तो यह पब एंड रेस्टोरेंट रात 1 बजे के बाद खुला था और ग्राहकों के आर्डर ले रहा था। पुलिस ने इसे बंद करवा दिया और इसके खिलाफ कार्रवाई की। इस पब एंड रेस्टोरेंट के खिलाफ एक FIR दर्ज कर ली गई है। इलाके के तीन अन्य पब के विरुद्ध भी FIR दर्ज हुई है।

पुलिस ने बताया कि यह बार 1:30 बजे के बाद भी खुले हुए थे। इनके खिलाफ तेज आवाज में संगीत बजाने की शिकायत मिली थी, इसके बाद यह कार्रवाई की गई। विराट कोहली के ब्रांड वाला यह पब एंड रेस्टोरेंट दिसम्बर, 2023 में खोला गया था।

इस ब्रांड की अन्य शाखाएँ अन्य पब एंड रेस्टोरेंट दिल्ली, मुंबई, पुणे और कोलकाता में हैं। वन8 ब्रांड नाम से विराट कोहली रेस्टोरेंट के अलावा जूते, कपड़े समेत तमाम सामान भी बेचते हैं। उनके इस ब्रांड का पूर्व में प्यूमा कम्पनी से भी टाई अप था।

विराट कोहली वर्तमान में लंदन में हैं। वह यहाँ अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा से मिलने गए हुए हैं। इससे पहले वह T20 विश्वकप विजेता टीम के साथ बार्बाडोस से भारत वापस आए थे। वह भारत में अपने परिवार और प्रशंसकों से मिले थे और फिर लंदन चले गए थे।

इधर आ जा, अभी भी आँखें नहीं खुलीं क्या… जिसे थप्पड़ मारा उसी के साथ ‘दूसरी पत्नी’ को देख भड़के अरमान मलिक, कृतिका की सफाई भी नहीं सुनी

बिग बॉस OTT में पिछले दिनों खूब हलचल रही। विशाल पांडे ने कृतिका मलिक को ‘भाभी सुंदर लगती हैं‘ कहा तो उनके पति अरमान मलिक इतना भड़क गए कि उन्होंने विशाल को झापड़ मार दिया। इसके बाद बिगबॉस में हर कंटेस्टेंट ने अलग-अलग इसकी चर्चा की। अनिल कपूर ने भी अरमान के हाथ उठाने की निंदा की। अब इतने ड्रामे के बाद एक नया ट्विस्ट शो में देखने को मिला जब कृतिका दोबारा जाकर विशाल के पास बैठीं और अरमान भड़क उठे।

दरअसल, ये नया विवाद तब हुआ जब बिग बॉस नॉमिनेशन अनाउंस कर रहे थे और सभी घरवाले लिविंग एरिया में एकत्रित हुए। इस दौरा कृतिका को वहाँ आने में लेट हो गई तो उन्हें सिर्फ विशाल के बगल में जगह मिली। ऐसे में अरमान ये देख नाराज हो गए और सबके सामने कृतिका को डाँटने लगे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार अरमान जब कृतिका को विशाल के बगल में बैठा देखते हैं तो कहते हैं, “इधर आ जा, अभी भी आँखें नहीं खुलीं क्या अब।” इस पर कृतिका कहती हैं “आंखे खुल गई हैं।” इस पर अरमान फिर कहते हैं, “मुझे अभी भी लगता है आंखों पर पट्टी पड़ी हुई है। तेरे लिए ना एक चश्मा बनवाना पड़ेगा लेंस वाला।” कृतिका अपनी सफाई देते हुए कहती हैं कि वो वहाँ इसलिए बैठीं क्योंकि शिवानी के बगल में जगह थी और कुछ नहीं।

वहीं अरमान इतने पर भी शांत नहीं होते। वह कहते हैं,”तुम हमेशा ही ये कहती रहती हो कि कोई दिख गया तो मैंने ये कर दिया। मुझे पता नहीं था तो मैंने ये कर लिया।” कृतिका फिर सफाई देते हुए कहती हैं, “मैं आपके बगल में बैठना चाहती थी लेकिन जगह नहीं थी इसलिए मैं शिवानी के पास आकर बैठ गई।” इस पर अरमान कहते हैं- “मुझे ऐसा लगता है मैं तेरे साथ ही नहीं आया।”

बता दें कि कृतिका और अरमान के बीच हुई इस नोंक-झोंक की वीडियो वायरल होने के बाद लोग कह रहे हैं कि ये लोग कहकर आए थे कि ये अकेले आए हैं, लेकिन वीडियोज देखकर ऐसा बिलकुल नहीं लग रहा है। अरमान को कृतिका को कंट्रोल करते देखा जा सकता है। इसके अलावा लोग ये भी कह रहे हैं कि अब अरमान हर बात में कृतिका पर शक करेंगे क्योंकि इनसिक्योर इंसान की आदत यही होती है।

आतंकियों के एनकाउंटर का ही बदला नहीं लेना चाहता था फैजान शेख, उनके परिवारों की भी कर रहा था मदद: बच्चों का ब्रेनवॉश भी, MP ATS की जाँच में खुलासा

मध्य प्रदेश के खंडवा से एटीएस की गिरफ्त में आया इंडियन मुजाहिद्दीन का आतंकी फैजान शेख बेहद खतरनाक निकला है। वो लंबे समय से आतंकवाद से जुड़े कामों को न सिर्फ अंजाम देने की कोशिश कर रहा था, बल्कि बम बनाने की तरकीब भी निकाल रहा था। वो बच्चों को कट्टरपंथ की तरफ ढकेल रहा था, तो मुठभेड़ में मारे गए सिमी के आतंकियों के परिवारों को आर्थिक मदद भी दे रहा था। यही नहीं, वो यासीन भटकल जैसे कुख्यात आतंकियों के घर भी जाता था, तो जेल में बंद आतंकी से भी मुलाकात करता था। आतंकी फैजान को एमपी एटीएस ने 4 जुलाई की सुबह खंडवा से गिरफ्तार किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फैजान शेख की गिरफ्तारी के बाद से सुरक्षा एजेंसियों को लगातार बड़ी जानकारियाँ मिल रही हैं। एटीएस की पूछताछ में पता चला है कि फैजान पाकिस्तानी आतंकियों के कॉन्टैक्ट में था और वो वीडियो के जरिए भी बम बनाने की ट्रेनिंग ले रहा था। इसके अलावा संदिग्ध आतंकी फैजान ने बताया था कि वह 2016 में भोपाल जेल ब्रेक में मारे गए 8 सिमी आतंकियों की मौत का बदला लेना चाहता था, और वो मारे गए आतंकियों के परिवारों को आर्थिक मदद भी देता था। यही नहीं, वो लोन वुल्फ अटैक के लिए खुद को पूरी तरह से तैयार कर रहा था, इसके लिए वो बीते 2 साल में कम से कम 14 शहरों की रेकी कर चुका था। वो कर्नाटक के भटकल से लेकर कश्मीर, पठानकोट और दिल्ली तक में रेकी कर चुका है। वो जवानों की हत्या करना चाहता था, और टॉप अधिकारियों को भी निशाना बनाना चाहता था।

सूत्रों के अनुसार, फैजान शेख के फोन में वरिष्ठ सुरक्षा कर्मियों की तस्वीरें मिली हैं। गिरफ्तार आतंकी के मंसूबे बेहद खतरनाक थे। वह आसपास के बच्चों को भी उग्रवाद के लिए उकसा रहा था। एटीएस ने गिरफ्तार आतंकी के पास से चार फोन जब्त किए हैं। उन फोन को रिकवर करने की कोशिश की जा रही है। उसके चार जब्त किए गए फोन में आतंकियों के ट्रेनिंग से जुड़े वीडियो पाए गए हैं।  फैजान आतंकी संगठन के लिए युवाओं का ब्रेन वॉश भी कर रहा था। वो कुछ बच्चों को कुरान की शिक्षा भी देता था, लेकिन उसके तरीके से स्थानीय लोग खुश नहीं थे। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि वो बच्चों का ब्रेनवॉश कर रहा था। उसके पास से इंडियन मुजाहिद्दीन, आईएसआई, सिमी और अन्य आतंकी संगठनों से जुड़े साहित्य भी मिले हैं। यही नहीं, आतंकी संगठन सिमी के लिए भर्ती करने वाले मेंबरशिप फॉर्म भी उसके पास से मिले हैं। फैजान के पास से एक पिस्टल और 5 कारतूस भी मिले हैं।

सिमी से जुड़े आतंकी रकीब कुरैशी का भी खास था और उससे मिलने कोलकाता की जेल भी जा चुका था। दरअसल, वो कोलकाता की जेल में रकीब से जब मिला, तभी से वो सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर आ गया था, तभी से उस पर एमपी पुलिस नजर रख रही थी। एनआईए की टीम जब मई 2023 में खंडवा में आतंकी नेटवर्क की छानबीन करने पहुँची थी, तब भी फैजान से पूछताछ की गई थी। 

बता दें कि 31 अक्टूबर, 2016 को जेल से भागने के बाद भोपाल के बाहरी इलाके में एनकाउंटर में मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा मारे गए 8 सिमी आतंकवादियों में से पाँच खंडवा के रहने वाले थे। फैजान इस एनकाउंटर का बदला लेना चाहता था। वह लोन वुल्फ अटैक करके खुद को इंडियन मुजाहिदीन के यासीन भटकल एवं सिमी सरगना अबू फैजल की तरह बड़ा मुजाहिद साबित करना चाहता था।

यह अखिलेश यादव की राजनीति है’: जिस दंपती के सुसाइड को सपा सुप्रीमो ने बेरोजगारी से जोड़ा, उनके परिजन बोले- महीने का ₹1 लाख से अधिक कमाता था

समाजवादी पार्टी के मुखिया और सांसद अखिलेश यादव ने हाल ही में एक युवक की आत्महत्या को लेकर झूठ फैलाया। उन्होंने वाराणसी में फांसी लगा आत्महत्या करने वाला हरीश और इसी kii सूचना पर आत्महत्या करने वाली उनकी पत्नी संचिता शरण को लेकर यह झूठे दावे किए।

अखिलेश यादव ने दावा किया कि 28 वर्षीय हरीश बागेश ने अपनी नौकरी जाने और दूसरी नौकरी ना मिलने के दबाव के कारण आत्महत्या की है। यादव ने भाजपा को इसमें घसीटते हुए दावा किया कि पति-पत्नी की आत्महत्या उत्तर प्रदेश में भाजपा की विफलता का प्रमाण है।

उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “नौकरी छूटने और फिर न लग पाने के दबाव में पति की आत्महत्या की सूचना मिलने पर पत्नी द्वारा भी आत्महत्या करने का दुःखद समाचार मिला। भाजपा सरकार की नाकामी का इससे बड़ा कोई और हलफ़नामा चाहिए क्या। भाजपा को सिर्फ़ सत्ता की राजनीति से मतलब है, जनता के दुख-दर्द, बेरोज़गारी या महंगाई से नहीं। भाजपा राज में हताश जनता से विनम्र आग्रह है कि ऐसा कोई भी क़दम न उठाएं क्योंकि आत्महत्या कोई समाधान नहीं है, समाधान है भाजपा सरकार का बदलना।”

इसी तरह के दावे कई सोशल मीडिया यूजर्स और विपक्ष समर्थक ‘पत्रकारों ने भी किए, जिनमें रणविजय सिंह भी शामिल हैं। रणविजय सिंह ने लिखा, ”ये संचिता और हरीश हैं। इनकी शादी 2 साल पहले हुई थी। हरीश ने एमबीए किया था, फिर उसकी नौकरी चली गई। काफी तलाश करने के बाद भी उसे नौकरी नहीं मिली। अब खबर है- बेरोजगारी से तंग आकर हरीश ने बनारस में आत्महत्या कर ली। यह खबर सुनकर पत्नी संचिता ने गोरखपुर स्थित अपने घर पर आत्महत्या कर ली। साल 2022 में देश में 15,783 लोगों ने बेरोजगारी के कारण आत्महत्या की।”

संचिता शरण के पिता ने नकारे दावे

सोमवार 8 जुलाई को मीडिया से बात करते हुए संचिता शरण के पिता डॉ. राम शरण ने अखिलेश यादव के दावों का खंडन कर दिया। उन्होंने कहा कि सपा नेता दंपत्ति की आत्महत्या पर राजनीति कर रहे हैं। शरण ने कहा कि हरीश मुंबई में नौकरी करते थे और उनकी सैलरी करीब ₹1 लाख/महीना थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं हरीश को गोरखपुर वापस बुलाया था, क्योंकि राम शरण और उनकी पत्नी (संचिता के माता-पिता) यहाँ अकेले थे और उनका बेटा इंग्लैंड में रहते हैं।

उन्होंने मीडिया से कहा, “यह अखिलेश यादव की राजनीति है। इस घटना का बेरोजगारी से कोई लेना-देना नहीं है। हरीश मुंबई में नौकरी करता था और उसकी सैलरी ₹1 लाख/महीना से अधिक थी। मैं उसे यहाँ वापस लाया, क्योंकि यहाँ दो बुजुर्ग लोग अकेले थे। मेरा बेटा यूके में रहता है। इसलिए मैंने हरीश को यहाँ आकर काम करने के लिए कहा। इसलिए अखिलेश यादव का दावा एकदम निराधार है।”

हरीश की कथित आत्महत्या से पहले की घटनाओं के बारे में बात करते हुए राम शरण ने बताया कि हरीश बागेश ने शुक्रवार (5 जुलाई, 2024) को संचिता को बताया था कि वह पटना जा रहा है। संचिता ने उसे रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया था। उन्होंने कहा कि दंपति ने आखिरी बार शनिवार शाम को बात की थी। रविवार सुबह पुलिस को परिवार से पता चला कि हरीश वाराणसी के सारनाथ के अटल नगर कॉलोनी में एक होटल के कमरे में लटका हुआ पाया गया।

आगे उन्होंने बताया कि जब संचिता को हरीश के आत्महत्या करने की सूचना मिली, तो उन्होंने फोन लगाया। डॉ शरण ने पुलिस को बताया कि जब वह वाराणसी जा रहे थे तब संचिता ने अपने पिता से बताया कि वह बागेश के बिना नहीं रह सकती और इमारत की दूसरी मंजिल से कूद गई। एसपी सिटी (शहर) केके विश्नोई ने सोमवार को कहा कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। अधिकारी ने बताया कि मामले में आगे की कार्रवाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।

गौरतलब है कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया था कि हरीश ने बेरोजगारी से हताश होकर आत्महत्या की है। इन रिपोर्ट्स में बताया गया था कि मृतक दंपति मुंबई से लौटने के बाद नई नौकरी नहीं पा सके थे। बताया गया था कि जहाँ हरीश HDFC बैंक में काम करते थे, जबकि संचिता पिछले बारह सालों से यहीं रहती थी। रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि संचिता के परिवार को दोनों के शादी करने से कोई समस्या नहीं थी लेकिन हरीश के पिता इससे खुश नहीं थे।

मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि हरीश किसी कारण से डिप्रेशन में चले गए थे और नशे के आदी हो गए थे। यह भी बताया गया कि संचिता भी बीमार थी और कथित तौर पर उसे नशे की लत लग गई थी। इस कारण से उनके जीवन में आर्थिक तंगी के अलावा आपसी तनाव भी बढ़ गया था। पुलिस को उनके कमरे से नशीला पदार्थ , सिगरेट, एक लाइटर, एक मोबाइल, एक पर्स और फांसी लगाने के लिए इस्तेमाल की गई रस्सी मिली थी।

हरीश और संचिता की शादी 2022 में हुई थी। बताया गया कि दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे और 11वीं में पढ़ते समय ही दोनों में प्यार हो गया था। जहाँ एक ओर इस मामले में जाँच जारी है, वहीं आत्महत्या के लिए बेरोजगारी को ढाल बनाते हुए अखिलेश यादव इस घटना का राजनीतिकरण कर रहे हैं। जहाँ उन्हें इस शोक की घड़ी में परिवार प्रति संवेदना प्रकट करनी चाहिए थी, वहीं वह इस मामले से अपना राजनीतिक एजेंडा साधने में जुट गए।

न्यूज एजेंसी ANI को बताया ‘मोदी सरकार का प्रचार टूल’, विकिपीडिया पर ठोका ₹2 करोड़ की मानहानि का केस: दिल्ली हाई कोर्ट ने माँगा जवाब

समाचार एजेंसी ANI ने विकिपीडिया के ऊपर 2 करोड़ रुपए का मानहानि मुकदमा दायर किया है। एएनआई का आरोप है कि विकिपीडिया अपने प्लेटफॉर्म पर उनके लिए अपमानजनक एडिटिंग करने की लोगों को अनुमति दे रहा है। इसी मामले में उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में केस दायर किया और कोर्ट ने सुनवाई करते हुए आज विकिपीडिया को समन जारी किया है। अब मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त 2024 को होगी।

लाइव लॉ के मुताबिक, ANI ने आरोप लगाया कि विकिपीडिया अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद समाचार एजेंसी के पेज पर कथित रूप से अपमानजनक सामग्री प्रकाशित करवा रहा है और उन्होंने कोर्ट से इसी सामग्री को हटाने व रोकने की माँग की है। इसके साथ ही अभी तक जो एडिटिंग करके अपमान किया गया उसपर 2 करोड़ रुपए का हर्जाना देने को कहा।

समाचार एजेंसी एएनआई को लेकर विकिपीडिया पर प्रकाशित जानकारी

बता दें कि विकिपीडिया के ऊपर समाचार एजेंसी एएनआई इसलिए इतना भड़का हुआ है क्योंकि जो जानकारी उनके प्लेटफॉर्म पर ANI के लिए है उसमें उन्हें समाचार पोर्टल की जगह सरकार का प्रचार उपकरण कहा गया है।

विकिपीडिया पर लिखा है- ये साइट (ANI) वर्तमान में केंद्र सरकार के लिए प्रचार उपकरण के रूप में काम करने, फर्जी समाचार वेबसाइटों के विशाल नेटवर्क से सामग्री वितरित करने और घटनाओं की गलत रिपोर्टिंग के लिए आलोचना की गई है। इसके अलावा विकिपीडिया पर ये भी लिखा है कि एएनआई के नए प्रबंधन में पत्रकारिता का आक्रमक मॉडल इस्तेमाल किया जा रहा है जहाँ सिर्फ और सिर्फ फोकस अधिक रेवेन्यू पर हैं। कई पूर्व कर्मचारियों ने यहाँ के मैनेजमेंट पर गलत अमानवीय बर्ताव का आरोप लगाया है।

ऐसे ही टेक्स्ट देखने के बाद एएनआई की ओर से शिकायत लेकर वकील सिद्धांत कुमार पेश हुए और उन्होंने याचिका में कहा कि विकिपीडिया पर उल्लेखित सामग्री मानहानिकारक है। ये प्लेटफॉर्म ऐसा मंच है कि जिसका उपयोग सार्वजनिक उपयोगिता के रूप में किया जाता है, लेकिन इस प्लेटफॉर्म ने एएनआई के पेज को समाचार एजेंसी द्वारा संपादन करने से रोक दिया है। ये सब सिर्फ समाचार एजेंसी की प्रतिष्ठा को धूमिल करने और इसकी साख को बदनाम करने लिए हुआ है।

सरकारी जमीन कब्ज़ा कर आज़म खान ने बनाया था ‘हमसफ़र रिजॉर्ट’, अब उस पर चला योगी सरकार का बुलडोजर: बीवी गई कोर्ट लेकिन नहीं मिली राहत

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान की अवैध सम्पत्तियों के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। आज़म खान के ‘हमसफ़र रिजॉर्ट’ पर बुलडोजर चलाया गया है। मंगलवार (9 जुलाई, 2024) को की जा रही इस कार्रवाई में भारी संख्या में पुलिस फ़ोर्स मौजूद है। आज़म की बीवी इस कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट गई थीं लेकिन उनको कोई राहत नहीं मिली। यह रिजॉर्ट सरकारी भूमि पर बनाया गया है। भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने इसके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार को रामपुर जिले का प्रशासन अपनी टीम के साथ आज़म खान के हमसफर रिजॉर्ट पहुँचा। इस टीम में राजस्व अधिकारी सहित पुलिस बल भी मौजूद है। इस टीम के साथ 3 बुलडोजर भी थे। सुबह शुरू की गई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अब तक जारी है। स्थानीय लोगों को कार्रवाई से दूर रखा गया है। कुल 380 स्क्वायर मीटर में हो रही इस कार्रवाई की जद में बॉउंड्री वॉल, लॉन और एक बिल्डिंग आ रही है। हमसफर रिसॉर्ट आजम खान की बीवी तंजीम फातिमा और उनके बेटे अब्दुल्ला के नाम पर दर्ज है।

प्रशासन ने ‘हमसफ़र रिजॉर्ट’ पर होने वाली कार्रवाई का नोटिस आजम खान के परिजनों को पहले ही तामील करवा दिया था। जिला प्रशासन का दावा है कि हमसफर रिजॉर्ट बनवाने के दौरान आज़म खान ने ग्राम समाज की जमीन कब्ज़ा ली थी। इस अतिक्रमण के खिलाफ साल 2019 में जिला प्रशासन ने रामपुर के नायब तहसीलदार की अदालत में केस भी दाखिल किया था। राजस्व विभाग की पैमाइश में ये दावे सही साबित हुए थे। इसी रिपोर्ट के आधार पर एक राजस्व अधिकारी ने आजम खान के कई परिजनों पर FIR दर्ज करवाई थी।

तब नयाब तहसीलदार के जी मिश्रा की तहरीर पर तंजीन फातिमा और दोनों बेटों अबदुल्ला आजम और अदीब आजम को नामजद किया गया था। जाँच के बाद पुलिस ने इन तीनों आरोपितों के खिलाफ लोक सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाने और सरकारी जमीन कब्जाने की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी। इस बीच रामपुर से भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने आज़म खान द्वारा किए गए इस कब्ज़े के खिलाफ आवाज उठाई। आखिरकार उनकी माँग पर मंगलवार को आज़म के हमसफर रिजॉर्ट पर बुलडोजर चला दिया गया।

BJP नेताओं पर कार्रवाई के लिए ठेकेदार मोहम्मद खलीउल्ला ने दाखिल की PIL, कर्नाटक हाई कोर्ट ने ‘राजनीति से प्रेरित’ बता किया खारिज

कर्नाटक हाई कोर्ट में मोहम्मद खलीउल्ला ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल की और कोर्ट ने माँग की कि वो बीजेपी नेताओं पर कार्रवाई करे। ये कार्रवाई इसलिए होनी चाहिए, क्योंकि बीजेपी के नेता भड़काऊँ भाषण देकर माहौल खराब करते हैं। हालाँकि हाई कोर्ट ने इस पीआईएल को खारिज कर दिया और पीआईएल को राजनीति से प्रेरित बताया।

ठेकेदार मोहम्मद खलीउल्ला ने एमपी रेणुकाचार्य, सीटी रवि, तेजस्वी सूर्या और प्रताप सिम्हा समेत राज्य के कई बीजेपी नेताओं के खिलाफ कथित रूप से नफरत भरे भाषण देने के लिए कार्रवाई की माँग की थी। पीआईएल दाखिल करने वाले ने दावा किया सोशल मीडिया पर उसने इन नेताओं के भाषणों को देखा है, जो समाज में नफरत फैलाते हैं।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पीआईएल पर सुनवाई करते हुए कर्नाटक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी अंजारिया की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि आरोप बहुत सामान्य हैं और प्रामाणिक भी नहीं हैं। ये पीआईएल ‘राजनीति से प्रेरित’ प्रतीत होती है। हाई कोर्ट ने कहा, “आप ऐसी याचिकाएँ दायर करके हाई कोर्ट के मंच का दुरुपयोग कर रहे हैं।”

याचिकाकर्ता ने ‘तहसीन पूनावाला’ मामले में नफरत फैलाने वाले भाषणों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशानिर्देशों के रेफरेंस के आधार पर पीआईएल दाखिल की थी। लेकिन हाई कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया और कहा कि इस PIL का उद्देश्य जनहित तो नहीं दिखता, बल्कि राजनीति दिखती है। ऐसे में ये पीआईएल सुनवाई योग्य नहीं है।

पीआईएल दाखिल करने वाले मोहम्मद खलीउल्ला ने हाई कोर्ट से माँग की थी कि वो सरकार को टीवी, रेडियो और अन्य मीडिया प्लेटफार्मों के साथ ही राज्य गृह विभाग और पुलिस की आधिकारिक वेबसाइटों पर यह संदेश प्रसारित करने के लिए कहे कि घृणा फैलाने वाले भाषणों से लिंचिंग जैसी घटनाएँ हो सकती है, ऐसे में हत्या जैसे गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। यही नहीं, ऐसे मामलों में सरकार खुद ही मामला दर्ज कराए।

याचिका में हरेक जिले में विशेष कोर्ट का भी प्रावधान किए जाने की माँग की गई थी, जो नफरत फैलाने वाले भाषणों और लिंचिंग के मामलों की रोजाना सुनवाई करे और 6 महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी कर के फैसला सुनाए। ऐसे ही दिशा निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं।

‘स्पष्ट कीजिए आप किस धर्म को मानते हैं’: सांसद बनने के बाद पहली बार रायबरेली पहुँचे राहुल गाँधी के विरोध में पोस्टर, पूछा – क्या आपको वोट देने वाले हिन्दू हिंसक हैं?

कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के अपने ही संसदीय क्षेत्र में उनके खिलाफ पोस्टर लग गए हैं, वो भी तब तब वहाँ से उनकी जीत हुए अभी डेढ़ महीने भी नहीं बीते हैं। राहुल गाँधी ने केरल के वायनाड और उत्तर प्रदेश के रायबरेली से जीत दर्ज की थी, हालाँकि, उन्होंने वायनाड की सीट बहन प्रियंका गाँधी के लिए खाली कर दी थी और रायबरेली अपने पास रखी। अब रायबरेली में उनके दौरे के दौरान ‘राहुल गाँधी जवाब दो’ के पोस्टर दिखाई दे रहे हैं।

इस पोस्टर में राहुल गाँधी से पूछा गया है कि क्या आपको अपना अमूल्य मत देने वाला रायबरेली का हिन्दू मतदाता हिंसक है? साथ ही सवाल दागा गया है कि आप हिन्दू धर्म को मानते हैं या नहीं। राहुल गाँधी को ये स्पष्ट करने को कहा गया है कि वो किस धर्म के हैं। लोगों ने सांसद से सवाल पूछा है कि क्या भविष्य में सायबरेली का हिन्दू मतदाता उन्हें गाली खाने के लिए वोट दे? राहुल गाँधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बने हैं, पहली बार वो किसी संवैधानिक पद पर बैठे हैं।

उन्होंने बतौर नेता प्रतिपक्ष अपने पहले ही भाषण में न सिर्फ हिन्दुओं को हिंसक बता दिया, बल्कि भगवान शिव को लेकर भी गलतबयानी की। उधर राहुल गाँधी लगातार डैमेज कंट्रोल में लगे हैं और उन्होंने रायबरेली के चुरुवा हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की है। इस दौरान उन्होंने गले में भगवा साफा लगा रखा था और तिलक भी लगाया हुआ था। बलिदानी अंशुमान सिंह की माँ से भी उन्होंने मुलाकात की। बताया जा रहा है कि लोकसभा में हुई फजीहत के बाद वो ये सब डैमेज कंट्रोल के लिए कर रहे हैं।

राहुल गाँधी को लोकसभा चुनाव 2024 में 6.87 लाख वोट मिले थे। यहाँ से पिछली बार उनकी माँ सोनिया गाँधी ने जीत दर्ज की थी, जो अब राज्यसभा संसद हैं। राहुल गाँधी ने भाजपा के दिनेश प्रताप सिंह को 3.90 लाख मतों से मात दी है। रायबरेली से सोनिया गाँधी 5 बार और इंदिरा गाँधी 3 बार सांसद रही हैं। वहीं राहुल गाँधी के पिता फिरोज गाँधी भी यहाँ से 2 बार सांसद बने थे। मात्र 3 बार ही यहाँ विरोधी दलों को कामयाबी मिली है।