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अब जम्मू कश्मीर के कठुआ में आतंकी हमला, 4 जवान बलिदान: सेना के काफिले पर आतंकियों ने फेंके ग्रेनेड, पुँछ में वायुसेना को बनाया था निशाना

जम्मू कश्मीर के कठुआ जिले में सुरक्षा बलों पर आतंकी हमला हुआ है। इस हमले में 4 जवान बलिदान हो गए हैं। 6 जवान घायल हुए हैं जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। हमला सोमवार (8 जुलाई, 2024) को तब हुआ जब सेना का काफिला उधर से गुजर रहा था। इलाके को चारों तरफ से घेर लिया गया है। दोनों तरफ से मुठभेड़ जारी है। इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भेजा गया है। कश्मीर के अंदर पिछले 2 माह के अंदर सेना पर यह दूसरा आतंकी हमला है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना कठुआ के मल्हार ब्लॉक की है। यहाँ के मचहेडी इलाके के गाँव बडनोटा में सोमवार को भरतीय सेना की कोर 9 के जवानों का काफिला गुजर रहा था। इसी दौरान घात लगा कर छिपे आतंकियों ने इस काफिले पर हमला कर दिया। हमले में घातक और ऑटोमैटिक हथियारों का प्रयोग किया गया। अचानक हुए इस हमले में 10 जवान घायल हो गए। इनमें से 4 जवानों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया जबकि 6 अन्य घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

आतंकियों की तरफ से फेंके गए ग्रेनेड से सैन्य वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गया है। हमले के बाद इलाके को चारों तरफ से घेर लिया गया है। अतिरिक्त सुरक्षा बल घटनास्थल पर भेजे गए हैं। आतंकियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन जारी है। तलाशी के दौरान आतंकियों ने जवानों पर फायरिंग की जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई है। आतंकी रात में बढ़ रहे अँधेरे का फायदा उठा कर भागने की फिराक में थे। फ़िलहाल उनको घेर लिया गया है। अभी तक किसी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

बताते चलें कि पिछले 2 माह के अंदर सेना पर यह दूसरा आतंकी हमला है। इस से पहले 4 मई, 2024 को पुँछ के शाहसितार इलाके में वायुसेना के काफिले पर हमला हुआ था। इस हमले में 1 सैनिक को वीरगति मिली थी जबकि 4 अन्य जवान घायल हो गए थे। पुँछ में ही जनवरी 2024 में आतंकियों ने सैन्य बल पर एक और हमला किया था। इस हमले में सेना के सभी जवान सुरक्षित रहे थे। गोलीबारी के बाद आतंकी भाग निकले थे।

‘डॉक्टर ज़ुबैद और उसकी बीवी जुनैबा ने दलित नर्स को ज़हर का इंजेक्शन देकर मार डाला’: परिजनों ने बलात्कार का भी लगाया आरोप

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में एक दलित लड़की की संदिग्ध हालात में मौत हो गई है। मृतका के परिजनों ने इसे हत्या बताते हुए डॉक्टर जुबैद और उनकी बीवी जुनैबा के खिलाफ नामजद FIR दर्ज करवाई है। मृतका आरोपितों के शिफा अस्पताल में काम सीख रही थी। आरोप है कि डॉक्टर जुबैद और जुनैबा ने मृतका को जहर दे कर मारा है। हालाँकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह सामने नहीं आ पाई है। घटना शुक्रवार (5 जुलाई, 2024) की है।

यह घटना सहारनपुर जिले के थाना क्षेत्र बेहट की है। यहाँ मृतका की बहन ने शनिवार (6 जुलाई, 2024) को थाने में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया कि उनकी बहन 7 महीने से शिफा जच्चा-बच्चा अस्पताल में काम सीख रही थी। इस अस्पताल को डॉक्टर जुबैद और उनकी पत्नी जुनैबा संचालित करती हैं। 5 जुलाई को सुबह 8:30 पर पीड़िता घर से रोज की तरह अपनी ड्यूटी पर गई थी लेकिन 24 घंटे तक पीड़िता घर लौट कर नहीं आई। काम की अधिकता होने की वजह से पीड़िता पहले भी रात में अस्पताल में रुक चुकी थी, इसलिए घर वालों ने बाकी दिनों की तरह लड़की की व्यस्तता समझा।

शनिवार (6 जुलाई, 2024) को शिफा अस्पताल से सुबह 10:30 पर पीड़िता के घर कॉल आई। कॉल पर बताया गया कि पीड़िता की तबीयत काफी खराब है और जल्दी अस्पताल बुलाया गया। लड़की की बहन अपनी माँ के साथ अस्पताल पहुँची तो वहाँ डॉक्टर जुनैबा मिलीं। जुनैबा ने पीड़िता को बेहोश बताते हुए उसके घर वालों को जल्दी किसी अच्छे अस्पताल में ले जाने को कहा। पीड़िता का शरीर बाहर फोल्डिंग पर पड़ा था। बताया जा रहा है कि तब तक लड़की का शरीर नीला पड़ने लगा था।

पीड़िता से उसके परिवार वालों को डॉक्टर जुबैद ने अपनी क्लिनिक में बात भी नहीं करने दिया। लड़की के परिजनों ने खुद ही टेम्पो बुक किया और गंभीर हालात में ले कर जिला अस्पताल पहुँचे। यहाँ पीड़िता को मृत घोषित कर दिया गया। लड़की की बहन ने आशंका जताई है कि या तो उनकी बहन को शिफा अस्पताल में कोई जहरीला इंजेक्शन दिया गया है या जहर दे कर मारा गया है। परिजनों ने पीड़िता से रेप होने की भी आशंका जताई है। शिकायत में आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है।

पुलिस ने इस केस में डॉक्टर जुबैद, उनकी बीवी जुनैबा और अस्पताल के अन्य कर्मचारियों पर FIR दर्ज कर ली है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 103(1) के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने बताया कि मृतका के शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं पाए गए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत की सही वजह सामने नहीं आ पाई है। आगे की जाँच के लिए विसरा सुरक्षित रख लिया गया है। मामले में जाँच और अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

बजरंग दल ने उठाई कार्रवाई की माँग

इस मामले में सहारनपुर ‘बजरंग दल’ ने प्रदर्शन कर के आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया से बात करते हुए बजरंग दल के सहारनपुर जिले के पदाधिकारी अभिषेक पंडित ने बताया कि लड़की की आरोपितों द्वारा पूरी प्लानिंग के साथ हत्या की है। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी से इस बात की भी जाँच करवाए जाने की माँग की जाएगी कि क्या अस्पताल के सभी कागजात और मानक पूरे हैं ? अभिषेक का कहना है कि आरोपितों के खिलाफ संवैधानिक ढंग से सड़क से ले कर कोर्ट तक लड़ाई लड़ी जाएगी।

यूनिवर्सिटी में ‘युवा तुर्क’ बनने की शुरुआत, आपातकाल का विरोध, 4000 km भारत यात्रा… कभी मंत्री-CM नहीं रहे, लेकिन अस्थिरता के दौर में ‘दाढ़ी बाबा’ ने देश को दिया नेतृत्व

चन्द्रशेखर को भारतीय राजनीति के युवा तुर्क’ के रूप में जाना जाता है, लेकिन अपने गृह जनपद बलिया में वह ‘दाढ़ी बाबा’ के नाम से मशहूर थे। देश की संसद में अपने भाषणों से सबको प्रभावित कर देने वाले चन्द्रशेखर को सुषमा स्वराज भीष्म पितामह और एक समय में अपना राजनीतिक गुरु मानती थी। चन्द्रशेखर जी भारतीय राजनीति के प्रतिष्ठित व्यक्तित्व थे जिनका इस देश के लिए योगदान और व्यक्तित्व देश के राजनीतिक परिदृश्य पर एक अमिट छाप छोड़ गया है।

विनम्र शुरुआत से उठते हुए, भारत के 8वें प्रधानमंत्री बनने का सफर उनके अदम्य साहस, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता और जनता के साथ उनकी गहरी जुड़ाव का प्रमाण है। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के एक छोटे से गाँव इब्राहिमपट्टी में जन्मे चन्द्रशेखर का प्रारंभिक जीवन सामाजिक न्याय की गहरी भावना और प्रचलित व्यवस्था को चुनौती देने की स्वाभाविक इच्छा से चिह्नित था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में उनकी अकादमिक उपलब्धियाँ छात्र राजनीति में उनके जीवंत सहभागिता से परिभाषित थीं, जहाँ उन्होंने शीघ्र ही अपने ओजस्वी भाषणों और अन्याय के प्रति अडिग रुख के लिए ख्याति अर्जित की।

यहीं पर उनके ‘युवा तुर्क’ व्यक्तित्व के बीज बोए गए। एक युवा, गतिशील नेता जो सत्ता के सामने सच कहने से नहीं डरता था। मुख्यधारा की राजनीति में चन्द्रशेखर की प्रविष्टि ‘प्रजा सोशलिस्ट पार्टी’ (PSP) के साथ उनके जुड़ाव से हुई। उनके करिश्माई नेतृत्व और समाजवादी आदर्शों के प्रति उनकी निष्ठा ने वरिष्ठ राजनीतिक हस्तियों का ध्यान आकर्षित किया, और वे शीघ्र ही पार्टी की गतिविधियों के केंद्र में आ गए।हालाँकि, 1964 में भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस में उनके जुड़ाव ने वास्तव में उनके राजनीतिक करियर को प्रबल किया।

कॉन्ग्रेस के सदस्य के रूप में, चन्द्रशेखर की निर्भीक और निडर नेता के रूप में उनकी प्रतिष्ठा बढ़ती रही। 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के खिलाफ उनका कट्टर विरोध उनके करियर का एक निर्णायक क्षण था। चन्द्रशेखर का राजनीतिक दर्शन आचार्य नरेन्द्र देव, महात्मा गाँधी और जयप्रकाश नारायण की शिक्षाओं की गहराई से प्रभावित था। वे जमीनी आंदोलनों की शक्ति और नेताओं को जनता से जुड़े रहने की आवश्यकता में विश्वास करते थे।

इस विश्वास का उदाहरण 1983 में उनकी प्रसिद्ध भारत यात्रा थी, जो कन्याकुमारी से दिल्ली के राज घाट तक 4000 किलोमीटर से अधिक की दूरी को कवर करने वाली एक मैराथन यात्रा थी। यह यात्रा केवल शारीरिक यात्रा नहीं थी; बल्कि यह ग्रामीण भारत की नब्ज को समझने के उद्देश्य से एक आध्यात्मिक और राजनीतिक यात्रा थी। इस यात्रा के दौरान, चन्द्रशेखर जी ने अनगिनत ग्रामीणों के साथ बातचीत की, उन्होंने उनकी संघर्षों और आकांक्षाओं को पहली बार समझा।

इस पहल ने न केवल उन्हें जनता के नेता के रूप में उनके छवि को मजबूत किया बल्कि समावेशी विकास के प्रति उनकी समर्पण को भी उजागर किया। कॉन्ग्रेस नेतृत्व के प्रति अपने कठोर रुख के बावजूद, चन्द्रशेखर की ईमानदारी और दृष्टिकोण ने उन्हें पार्टी की सीमाओं के पार सम्मान दिलाया। 1990 में, राजनीतिक अस्थिरता के समय, उन्हें देश के प्रधानमंत्री के रूप में नेतृत्व करने के लिए बुलाया गया। हालाँकि, उनका कार्यकाल केवल 7 महीने तक चला लेकिन यह महत्वपूर्ण उपलब्धियों और राष्ट्रीय एकता के प्रति प्रतिबद्धता से चिह्नित था।

उनके उल्लेखनीय निर्णयों में से एक भारतीय अर्थव्यवस्था का उदारीकरण था, जिसने बाद के आर्थिक सुधारों की नींव रखी। उनका प्रशासनिक तौर तरीका सामाजिक न्याय, ग्रामीण विकास और भ्रष्टाचार को रोकने के प्रयासों को प्राथमिकता देता था। चन्द्रशेखर की नेतृत्व शैली सरलता, पारदर्शिता और गहरी सहानुभूति से चिह्नित थी। उन्होंने सत्ता के बाहरी तामझाम से परहेज किया, अक्सर सुरक्षा के बिना यात्रा करना और सीधे जनता से बातचीत करना पसंद करते थे। इस दृष्टिकोण ने न केवल उन्हें जनता के बीच प्रिय बना दिया बल्कि राजनीतिक जवाबदेही और विनम्रता के लिए एक मानक भी स्थापित किया।

अपने करियर के दौरान, चन्द्रशेखर लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक स्वतंत्रताओं के एक प्रबल समर्थक बने रहे। वे अधिनायकवाद के कट्टर आलोचक थे और लगातार सामाजिक न्याय की वकालत करते थे। वे संसद में अपने भाषण, वक्तव्य कला और स्पष्टता के लिए जाने जाते थे, संसद में चन्द्रशेखर जी के द्वारा कहे गए इस वक्तव्य को कौन भूल सकता है:

जिन हाथों में शक्ति भरी है राजतिलक देने की,
उन हाथों में ही ताकत है सर उतार लेने की।

चन्द्रशेखर का यह वक्तव्य सिर्फ एक वक्तव्य नहीं था बल्कि वास्तव में यह लोकतंत्र में जनता की ताकत को स्पष्ट करना था वह देश के हुक्मरानों को यह बताना चाहते थे की जनता यदि आपको सिंहासन पर बैठा सकती है तो वही जनता आपको जनहित में काम ना करने पर सिंहासन से उतार कर सड़क पर भी ला सकती है। देश की संसद मे 90 के दशक में चन्द्रशेखर, PV नरसिम्हा राव और अटल बिहारी वाजपेयी की तिकड़ी को कौन भूल सकता है।

अलग-अलग व्यक्तित्व, अलग-अलग राजनीतिक दल और अलग-अलग विचारधारा इसके बावजूद तीनों का संबंध व्यक्तिगत रूप से एकदम मधुर था। अटल बिहारी वाजपेयी को चन्द्रशेखर गुरुदेव कहकर संबोधित करते थे, बावजूद इसके लोकसभा में चर्चा के दौरान वह उनके राजनीतिक दल और उनके सरकार के क्रियाकलापों की आलोचना करने से कभी नहीं हिचकते थे। आज के राजनेताओं को चन्द्रशेखर से यह चीज सीखनी चाहिए। व्यक्तिगत जीवन में ईमानदारी के साथ-साथ बिना लाग लपेट अपनी बात कहने का साहस केवल चन्द्रशेखर में था।

एक राजनेता जो ना तो किसी राज्य में मंत्री या मुख्यमंत्री रहा ना ही केंद्र में किसी तरह का कोई पद लिया, लेकिन जब बना तो सीधा देश का प्रधानमंत्री बना। निश्चित रूप से राजनेताओं के लिए यह बहुत बड़ा जोखिम होता है लेकिन चन्द्रशेखर ने उसको भी स्वीकार किया। बहुत कम लोग जानते हैं कि जब देश में पहली बार गैर-कॉन्ग्रेसी सरकार बनी तो उस समय ‘जनता पार्टी’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्रशेखर ही थे लेकिन इसके बावजूद उन्होंने ‘जनता पार्टी’ की उस सरकार में कोई पद नहीं लिया।

प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के बाद भी, चन्द्रशेखर भारतीय राजनीति में एक प्रभावशाली व्यक्ति बने रहे लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता कई आकांक्षी नेताओं के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश बनी रही। उन्होंने 2007 में अपने निधन तक सांसद के रूप में इस देश की सेवा की, और साहस, ईमानदारी और राष्ट्र के प्रति अटूट सेवा की विरासत छोड़ी। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव से देश के सर्वोच्च पद तक उनका सफर दृढ़ता और समर्पण की कहानी है।

भारतीय राजनीति के ‘युवा तुर्क’ के रूप में, उन्होंने परंपराओं को चुनौती दी, पीढ़ियों को प्रेरित किया, और एक स्थायी विरासत छोड़ी जो सत्ता के गलियारों में गूंजती रहती है।आज ऐसे समय में जब राजनीतिक वाद-विवाद अक्सर ध्रुवीकृत और विवादास्पद हो जाते हैं, चन्द्रशेखर जी का उदाहरण ईमानदारी, सहानुभूति और लोगों की भलाई के प्रति गहरे प्रतिबद्धता के महत्व की याद दिलाता है। उनका जीवन इस तथ्य का प्रमाण है कि सच्चा नेतृत्व शक्ति का उपयोग करने के बारे में नहीं है, बल्कि विनम्रता के साथ सेवा करने का नाम है।

‘ये पता करना होगा कि पेपर लीक किस हद तक हुआ है’: सुप्रीम कोर्ट ने NEET परीक्षा रद्द करने से किया इनकार, सरकार से कहा – चिह्नित कीजिए इसमें किन लोगों को हुआ फायदा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इसमें कोई शक नहीं है कि 5 मई को आयोजित हुई NEET UG में गड़बड़ी हुई है। हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय ने परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश DY चंद्रचूड़, JB पार्दीवाला और मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि परीक्षा को रद्द करने और इसे फिर से आयोजित किए जाने का फैसला इस आधार पर लिया जाएगा कि पेपर लीक किस हद तक हुआ है। उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक है ही नहीं की परीक्षा की शुचिता प्रभावित हुई है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस पेपर लीक के दुष्परिणाम क्या होंगे ये इस पर निर्भर करता है कि ये किस हद तक हुआ है। अगर इसका स्तर बड़ा नहीं है, तो इसे लीक करने का फैसला नहीं लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परीक्षा पुनः आयोजित करने जाने का आदेश देने से पहले सावधान रहने की ज़रूरत है, क्योंकि हम 23 लाख छात्र-छात्रों के करियर की बात कर रहे हैं। लीक किस समय हुआ और कितना व्यापक था – इसे सुप्रीम कोर्ट ने इसका जवाब तलाशने पर जोर दिया।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये सवाल भी किया कि NTA व केंद्र सरकार ने इस पेपर लीक के संबंध में क्या कार्रवाई की है। साथ ही ये पता लगाने को कहा कि इससे किन्हें फायदा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर सोशल मीडिया में प्रश्न-पत्र लीक हुआ होता तो इसका प्रसार काफी अधिक होता। क्या ये लीक व्यवस्थित ढंग से हुआ, क्या ये इस स्तर का था कि परीक्षा की शुचिता को प्रभावित करता है, इसका फायदा जिन्हें पहुँचा उन्हें बाकी छात्रों से अलग चिह्नित किया जा सकता है या नहीं – सुप्रीम कोर्ट ने इन 3 सवालों को महत्वपूर्ण बताया

सुप्रीम कोर्ट ने NTA को ये पता लगाने के लिए कहा कि इस पेपर लीक का लाभ किन लोगों ने उठाया, किन परीक्षा सेंटरों से प्रश्न-पत्र लीक हुए। CBI से भी सर्वोच्च न्यायालय ने अब तक की जाँच की रिपोर्ट तलब की है। बता दें कि कई छात्र और विपक्षी राजनीतिक दल ‘ReNEET’, अर्थात NEET की परीक्षा पुनः आयोजित करने की माँग कर रहे हैं। इस मामले में बिहार-झारखंड के अलावा अन्य राज्यों से भी गिरफ्तारियाँ हुई हैं।

‘हिन्दुओं की भीड़ ने मुस्लिम युवक को पुलिस के आगे नंगा कर के पीटा’: इस्लामी हैंडलों ने वायरल किया वीडियो, सच्चाई जान कर चौंक जाएँगे आप

इस्लामी पोर्टल ‘सियासत’ ने रविवार (7 जुलाई, 2024) को अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया कि UP के अलीगढ़ में एक मुस्लिम व्यक्ति को हिन्दू लड़की से बात करने की वजह से भीड़ ने नंगा कर के पीटा। अलीगढ़ के क्वार्सी थानाक्षेत्र में घटी यह घटना 3 जून की थी जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। सियासत ने अपने एजेंडे के मुताबिक इस ढंग से पेश किया जिसमें हिन्दू भीड़ हमलावर और अरबाज़ नाम का युवक पीड़ित लगे।

पिटाई की वजह भी लव जिहाद बताने की कोशिश की गई थी। इसी खबर पर सियासत की ही राह एक अन्य पोर्टल मुस्लिम मिरर भी चल दिया था।

इस घटना का सोशल मीडिया के कई हिन्दू विरोधी हैंडलों ने भी खूब प्रचार किया। यह नैरेटिव गढ़ने की खूब कोशिश हुई कि हिन्दुओं ने एक मासूम मुस्लिम पर हमला किया है। X यूजर सबा खान ने अपनी एक पोस्ट में कहा, “3 जून को अलीगढ़ के क्वार्सी इलाके में एक हिंदू लड़की से बात करने पर हिंदूवादी संगठनों के सदस्यों ने पुलिस के सामने ही एक मुस्लिम युवक को नंगा करके पीटा। हिंदूवादी संगठनों ने लव जिहाद का आरोप लगाया।

भाजपा मेयर शकुंतला भारती ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि वे लव जिहाद के मामलों पर लगाम लगाएँ, नहीं तो वे खुद ही निपट लेंगीं।”

इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) ने भी इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। IAMC ने लिखा, “अलीगढ़ में हिंदूवादी संगठनों ने एक मुस्लिम युवक को हिंदू लड़की से बात करने पर ‘लव जिहाद’ के आरोप में नंगा कर के पीटा। भाजपा की मेयर शकुंतला भारती ने अधिकारियों को ऐसे मामलों पर लगाम न लगाने पर कार्रवाई की चेतावनी दी जिसके बाद पुलिस ने नाज़िम को उत्पीड़न के आरोप में गिरफ़्तार किया है।” IAMC का एक्स अकाउंट भारत में बैन है।

बताते चलें कि ‘इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल’ के संस्थापक शेख उबैद हैं। यह काउन्सिल प्रतिबंधित इस्लामिक आतंकी संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया (SIMI), लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जमात-ए-इस्लामी (JeI) का समर्थन करता है। पूर्व में इसने कथित तौर पर USCIRF (संयुक्त राज्य अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग) द्वारा भारत को ब्लैकलिस्ट करवाने की भी कोशिश की थी। IAMC को भारत में कट्टरवाद को बढ़ावा देने के लिए पहले भी कई फर्जी खबरें फैला चुका है। शेख उबैद पर साल 2021 में UAPA के तहत भी कार्रवाई की गई थी।

इस मामले में मीर फैसल ने भी इंट्री की है। उन्होंने अपने X हैंडल पर लिखा, “3 जून को अलीगढ़ के क्वार्सी इलाके में एक मुस्लिम युवक को हिंदू लड़की से बातचीत करने के चलते पुलिस की मौजूदगी में ही हिंदूवादी संगठनों के सदस्यों ने नंगा करके पीटा। इन संगठनों ने आरोप लगाया है कि ये मामला “लव जिहाद” का है। भाजपा मेयर शकुंतला भारती ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ऐसी घटनाओं पर लगाम न लगी तो संगठन मामले को अपने हाथ में ले लेंगे।”

अपना मूल एकाउंट बंद होने के बाद नया हैंडल बना कर मीर फैसल ने भी इस मामले में इंट्री की है। उन्होंने अपने ‘X’ हैंडल पर लिखा, “3 जून को अलीगढ़ के क्वार्सी इलाके में एक मुस्लिम युवक को हिंदू लड़की से बातचीत करने के चलते पुलिस की मौजूदगी में ही हिंदूवादी संगठनों के सदस्यों ने नंगा करके पीटा। इन संगठनों ने आरोप लगाया है कि ये मामला “लव जिहाद” का है। भाजपा मेयर शकुंतला भारती ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ऐसी घटनाओं पर लगाम न लगी तो संगठन मामले को अपने हाथ में ले लेंगे।”

X यूजर मुस्लिम वॉयस के अलावा फर्जी और हिंदू विरोधी खबरें प्रकाशित करने के लिए कुख्यात ‘X’ हैंडल हेट डिटेक्टर ने भी इस मामले में ट्वीट किया है। दिनों दोनों ने भी मीर फैज़ल वाली लाइनें दोहराई हैं।

अरबाज़ ने हिन्दू लड़की को किया था प्रताड़ित

इस मामले हकीकत इस्लामी हैंडलों द्वारा किए जा रहे दावों के उलट है। असलियत यह है कि 3 जून को अलीगढ़ पुलिस ने एक नाबालिग हिंदू लड़की को परेशान करने के आरोप में अरबाज़ को गिरफ्तार किया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अलीगढ़ के क्वार्सी इलाके में पशु अस्पताल के बगल रविवार की शाम 7 बजे कुछ नाबालिग लड़कियाँ ट्यूशन पढ़ कर घर लौट रहीं थीं। रास्ते में कुछ युवकों ने लड़कियों को रोका और उनसे छेड़खानी शुरू कर दी। लड़कियों ने शोर मचाया तो उनको पिस्टल दिखा कर चुप रहने को कहा गया। इसी दौरान उन्हें इस्लाम कबूलने और इनकार करने पर मार डालने की धमकी दी गई।

लड़कियों की चीख-पुकार सुन कर आसपास के लोग जमा हुए। लोगों को जुटता देख कर आरोपित भागने लगे। भीड़ ने दौड़ा कर एक युवक को पकड़ लिया और पिटाई कर दी। पकड़े गए आरोपित की पहचान हाजी मुन्ना के बेटे अरबाज़ के तौर पर हुई। अरबाज़ को पुलिस के हवाले कर दिया गया। बाद में पीड़िता लड़की के पिता ने पुलिस में शिकायत दी जिसके आधार पर FIR दर्ज कर ली गई। इसी शिकायत के आधार पर अरबाज़ को गिरफ्तार कर लिया गया। मामले में आगे की जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस ने अपने आधिकारिक हैंडल से इस कार्रवाई की पुष्टि की है। भाजपा नेत्री शकुंतला भारती ने इसे एक गंभीर मामला बताया है। उन्होंने कहा कि बहन बेटियों को परेशान किया जा रहा और हथियारों से डराया जा रहा। लड़कियों पर इस्लामीकरण के दबाव का आरोप लगाते हुए शकुंतला भारती ने पुलिस से आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। अलीगढ़ पुलिस के एडिशनल एश्पी अमृत जैन के मुताबिक मामले में जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई जारी है।

रोना- मोदी सरकार कोटा नहीं बढ़ा रही, हकीकत- कोटे का पूरा राशन भी नहीं ले रही केरल की वामपंथी सरकार: FCI के गोदाम में ही छोड़ दिया है 17,000 टन चावल

केरल की कम्युनिस्ट सरकार केंद्र सरकार से मिलने वाला राशन नहीं ले रही है। यह राशन केंद्र सरकार मुफ्त में देती है। इसके बाद भी राज्य सरकार जारी किए गए कोटे को पूरी तरीके से उपयोग में नहीं ला रही। यह राशन केंद्र सरकार के पास ही है।

ऑनमनोरमा की रिपोर्ट के अनुसार, केरल सरकार ने केंद्र सरकार से मुफ्त में मिला 17,000 टन चावल और 400 टन से अधिक गेंहू नहीं लिया है। यह समस्या मई से चलते आ रही है। केरल सरकार मई से ही यह राशन गोदामों से नहीं उठा रही है।

केंद्र सरकार देश के 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज दे रही है। केंद्र सरकार की यह योजना कोविड महामारी के समय से ही चालू है और केंद्र सरकार ने इस योजना को वर्ष 2028 तक बढ़ा दिया है। इसके अंतर्गत राज्यों को उनके यहाँ लाभार्थियों के हिसाब से अनाज जारी किया जाता है।

केरल को केंद्र सरकार राज्य में ही स्थित भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों से राशन उपलब्ध करवाती है। केरल के खाद्यान्न गोदामों से राशन उठाने का जिम्मा केरल की SUPPLYCO कम्पनी के पास है। यह केरल की सरकारी कम्पनी है। इसके जरिए केरल सरकार राशन समेत तमाम रोजमर्रा की जरूरत का सामान बेचती है।

केरल सरकार को केंद्र सरकार हर महीने 1.05 लाख टन चावल और 15,629 टन गेंहू जनता में बाँटने के लिए देती है। इसी में से केरल सरकार 17 हजार टन चावल और 400 टन गेंहू नहीं उठा पाई है। यह स्थिति तब है जब केरल सरकार लगातार केंद्र सरकार से अपना कोटा बढ़ाने की माँग करती आई है।

कोटा बढाने की बात करने वाली केरल सरकार खुद को पहले से मिलने वाला राशन ही नहीं ले पा रही है। केरल सरकार की इस नाकामी के पीछे राज्य के ट्रक डीलरों की हड़ताल मानी जा रही है। कहा गया है कि उनको पहले का भुगतान नहीं मिला है इसलिए वह नया राशन नहीं उठा रहे।

‘मुझे भाभी अच्छी लगती है’: ये सुनते ही 2 बीवियों वाले अरमान मलिक ने विशाल पांडेय को जड़ा थप्पड़, माता-पिता बोले – इसको Bigg Boss से निकालो, हमें न्याय चाहिए

‘बिग बॉस OTT’ के 2024 वाले संस्करण में अरमान मलिक अपनी दोनों पत्नियों कृतिका और पायल के साथ पहुँचे थे। पायल बाहर हो गई हैं, वहीं अरमान और कृतिका अभी भी इस रियलिटी शो वाले घर में टिके हुए हैं। इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर विशाल पांडेय भी Bigg Boss OTT 2024 का हिस्सा हैं। शो में कृतिका मलिक को लेकर की गई टिप्पणी के बाद अरमान ने विशाल पांडेय को थप्पड़ जड़ दिया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।

विशाल पांडेय ने कृतिका मलिक के संबंध में कहा था, “मुझे भाभी अच्छी लगती है।” ये सुनने के बाद अरमान मलिक ने उन्हें थप्पड़ जड़ दिया। वहीं शो से बाहर अरमान मलिक की पहली बीवी पायल ने भी ‘Bigg Boss OTT 3’ में विशाल पांडेय का विरोध किया, जिसके बाद कई यूजर्स ने उन पर विशाल पांडेय को बदनाम करने का आरोप लगाया। इसके बाद एक वीडियो में वो रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि वो सिर्फ अपने परिवार की तरफ से बोल रही हैं, इसमें गलत क्या है?

पायल मलिक ने कहा, “अपने परिवार के लिए स्टैंड लेना गलत है तो मैं आगे से स्टैंड नहीं लूँगी अपनी फैमिली के लिए। मुझे बस इतना बता दो कि मेरी गलती कहाँ है। मैं किसी को नीचा नहीं दिखाना चाहती हूँ, किसी के खिलाफ नहीं बोलूँगी। इतनी सारी जिम्मेदारी के बाद सब कुछ कर रही हूँ लेकिन फिर भी लोगों को लगता है कि इसको बाहर निकाल दिया है तो पागल हो गई है।” पायल ने कहा कि एक महिला को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना गलत है।

पायल ने शो में सरप्राइज विजिट के दौरान दावा किया था कि कृतिका को लेकर विशाल के इरादे ख़राब हैं। उधर विशाल पांडेय के माता-पिता ने भी न्याय की माँग की है। विशाल की माँ ने कहा है कि इस घटना से उनके दिल को ठेस पहुँची है। उन्होंने कहा कि हमलोगों ने अपने बेटे को थप्पड़ खाने के लिए नहीं भेजा है। वहीं विशाल के पिता ने कहा कि उनके बेटे ने जो कहा उसका मतलब गलत नहीं था। उन्होंने कहा कि अरमान मलिक को शो से बाहर निकाला जाना चाहिए। इस शो को अनिल कपूर होस्ट कर रहे हैं।

क्रिकेट में घुस गया कोरोना के टाइम ‘थूक जिहाद’ लाने वाला तबलीगी जमात, पाकिस्तानी खिलाड़ी हो गए ‘मुसलमान’ और खेल को बना दिया ‘उम्माह का मैदान’

पाकिस्तान के कुछ खिलाड़ी पिछले दिनों तबलीगी जमात के कार्यक्रम में दिखे तो उनके अपने ही लोगों ने उनसे सवाल करने शुरू कर दिए। कहा गया कि दीनी काम करना अच्छी बात लेकिन पाकिस्तान के क्रिकेट खिलाड़ी होने के नाते उन्हें खेल पर भी ध्यान देना चाहिए। साथ ही उस आवाम का भी ख्याल करना चाहिए जो उनसे हर मैच में उम्मीद लगाकर बैठती है और हमेशा निराश होती है।

एपेक्स स्पोर्स्ट द्वारा साझा वीडियो में मोहम्मद रिजवान, इफ्तिखार अहमद और अब्बास अफरीदी दिख रहे हैं। दावा है कि ये खिलाड़ी पेशावर में हुए तबलीगी जमात के कार्यक्रम में हैं। ये वीडियो ठीक रिजवान के उस पुराने बयान के बाद सामने आई है जहाँ उन्होंने एक इंटरव्यू में क्रिकेट और पाकिस्तान से ऊपर इस्लाम को बताया था।

रिजवान ने बताया खुद को इस्लाम का प्रतिनिधि

मीडिया इंटरव्यू में रिज़वान ने कहा था, “मैं ये समझता हूँ कि हर एक इंसान 2 चीजों का ब्रांड एम्बेसडर होता है। वो पहले इस्लाम का एम्बेसडर है। जब इस्लाम का एम्बेसडर होता है तब उसके लिए पाकिस्तान मायने नहीं रखता। वो अगर मुसलमान है तो पूरी दुनिया में इस्लाम का प्रतिनिधित्व करता है। दूसरी ओर अगर वह पाकिस्तान का ब्रांड एम्बेसडर है तब उसके लिए मायने नहीं रखता कि वह कौन से सूबे से है। वह फिर पाकिस्तान का प्रतिनिधि बन जाता है।”

पाकिस्तान के ये खिलाड़ी जिस तबलीगी जमात में दिखे हैं वो भारत में साल 2020 में खूब चर्चा में रहा था। उस समय तबलीगी जमात के लोगों पर कोरोना संक्रमण फैलाने के आरोप लगे थे। पुलिस की छानबीन में ये भी सामने आया था कि प्रशासन के मना करने के बावजूद ये लोग एक साथ इकट्ठा होकर रह रहे थे और जब इन्हें आइसोलेशन में डाला वहाँ भी ये लोग थूक फेंक फेंककर कोरोना फैलाते दिखे थे।

तबलीगी जमात क्या और इसके उद्देश्य

तबलीगी जमात की शुरुआत 1920 के आसपास सुन्नी इस्लाम के प्रचार के लिए भारत से हुई थी। आशीष नौटियाल अपने लेख में तबलीगी जमात के प्रमुख उद्देश्यों के बारे में बताते हैं और जानकारी देते हैं कि तबलीगी जमात का मकसद समुदाय के लोगों को प्राचीन इस्लामी पद्धतियों की ओर ले जाने की प्रेरणा देना था। इससे जुड़े लोग जुड़े लोग पारंपरिक इस्लाम को मानते हैं और इसी के मूल का प्रचार-प्रसार दुनियाभर में करते हैं। इन्हीं उद्देश्यों के जरिए वे इस्लाम को पुनर्जीवित करने का काम करते हैं। आज इस संगठन की पकड़ इतनी मजबूत हो गई है कि ये 213 देशों तक फैल चुका है। बताया जाता है कि दुनिया भर में इसके 15 करोड़ से ज्यादा सदस्य हैं और संगठन लगातार बढ़ ही रहा है।

तबलीगी जमात के उद्देश्य

  • कलिमा (एकेश्वरवाद के अंतर्गत यह घोषणा कि दुनिया में सिर्फ और सिर्फ एक अल्लाह ही भगवान है और प्रोफेट मोहम्मद उनके दूत हैं)
  • सलात (पाँच वक्त की नमाज)
  • इल्म-ओ-ज़िक्र (मजहबी ज्ञान)
  • इक्राम-ए-मुस्लिम (मजहब के लोगों का आपस में एक-दूसरे का सम्मान करना और मदद करना- भाईचारा)-
  • इख्लास-ए-निय्यत (इरादे की ईमानदारी)
  • तफ्रीह-ए-वक़्त (रोजाना के कामों से दूर रहकर समय का इस्तेमाल अल्लाह के संदेश को घर-घर तक पहुँचाना)
    इनके अलावा एक सातवाँ और शायद सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है- दावत-ओ-तबलीग (मस्जिद में आने की दावत: धर्मांतरण का हिस्सा)

तबलीगी जमात कई मुल्कों में बैन

तबलीगी जमात को लेकर जहाँ पाकिस्तान के खिलाड़ी तक इतने उत्साहित दिखते हैं तो वहीं कुछ देशों ने तो इसे कट्टरपंथी संगठन बताते हुए प्रतिबंध भी लगाया हुआ है। 2013 में कजाकिस्तान ने इस पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद ईरान, रूस, तजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान आदि देशों में भी यह प्रतिबंधित हुआ।

2021 में सऊदी सरकार ने इस ग्रुप को समााज के लिए खतरा और आतंकवाद के द्वारों में से एक बताया था। साथ ही सऊदी इस्लामिक मामलों के मंत्रालय ने मस्जिद में उपदेशकों को आदेश दिया था कि वे लोगों को तबलीगी जमात के बारे में आगाह करें। तब, सरकार ने मस्जिदों से इस संगठन के पथभ्रष्टता, विचलन और खतरे के बारे में भी बताने को कहा था।

कई पाकिस्तानी खिलाड़ी दिखे तबलीगी जमातों में

तबलीगी जमात जैसे मजहबी संगठनों के कार्यक्रमों में पाकिस्तान खिलाड़ियों का नजर आना कोई नया नहीं है। साल 2023 में पाकिस्तान के पूर्व खिलाड़ी शाहिद अफरीदी भी तबलीगी जमात के कार्यक्रम में भाग लेते हुए दिखे थे। कार्यक्रम में चाय पीते उनकी वीडियो और फोटोज भी सामने आई थी। शाहिद अफरीदी के अलावा शाहीन अफरीदी भी इसका हिस्सा हैं। वहीं पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर सईद अनवर भी तबलीगी जमात के प्रचारक बनकर खुलेआम धर्मांतरण को सही बताते दिख चुके हैं।

इसके अलावा पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान इंजमाम-उल-हक की बात करें तो माना जाता है कि इंजमाम के इस संगठन से जुड़ने के बाद ही तमाम खिलाड़ी तबलीगी जमात से जुड़े। पाकिस्तान का पूर्व क्रिकेटर मिस्बाह-उल-हक भी तबलीगी जमात का हिस्सा है…ऐसे ही तमाम नाम हैं जो पाकिस्तान क्रिकेट को छोड़कर मजहब का प्रचार-प्रसार करने में लगे हुए हैं… और पिछले कुछ सालों में देखें तो ये सब कुछ ज्यादा ही बढ़ा है।

याद करिए 90 के दशक में जब आप क्रिकेट देखते होंगे तो आपको ये सारी चीजें नहीं देखने को मिलती होंगी क्योंकि खिलाड़ियों में खेल वाला स्पिरिट रहता था, मगर अब खिलाड़ी मैच में अच्छा प्रदर्शन करें न करें पर इस्लाम की बातें करना नहीं छोड़ते। रिजवान की बात से साफ है कि वो इस्लाम को पहले नंबर पर मानते हैं और फिर पाकिस्तान को तो सोचिए ऐसी मानसिकता वाला व्यक्ति क्यों पिच पर मुल्क के लिए खेलने को प्राथमिकता देगा। इन खिलाड़ियों के रवैये को देखते हुए कई पाकिस्तानी खेल पत्रकार कहते भी चुके हैं कि 1990 से 2000 तक ऊँचाइयों पर रहने वाली टीम के गर्त में जाने का कारण सिर्फ यही है कि खिलाड़ियों में मजहब घुस गया है।

मजहब और खेल दो अलग चीज

मालूम हो कि किसी धर्म या मजहब का अनुसरण करना और देश के लिए खेलना दो अलग चीजें हैं। कई देशों के कई खिलाड़ी हैं जो काफी धार्मिक हैं मगर जब वो पिच पर उतरते हैं तो वो अपने देश और अपनी टीम के लिए शत-प्रतिशत देते हैं। उनका उद्देश्य वहाँ अपने धर्म का प्रचार नहीं होता बल्कि उद्देश्य होता है कि वो कैसे भी करके अपने देश और देशवासियों को गौरवान्वित करवाएँ। वो खेल को प्रोफेशनल जीवन का हिस्सा मानते हैं जबकि धर्म को निजी। भारत के विराट कोहली, साउथ अफ्रीका के केशव महाराज जैसे खिलाड़ी इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। पाकिस्तान के खिलाड़ियों को और कुछ नहीं तो इन्हीं से सीखने की जरूरत है कि खेल और मजहब को अलग-अलग रखा जाए और जैसे मजहब के लिए निष्ठा दिखाते हैं वैसे ही खेल में भी दिखाएँ।

काम था केरल की महिला क्रिकेटरों को कोचिंग देना, करने लगा यौन शोषण: नग्न तस्वीरें खींचकर कहता था- ये चयन के लिए जरूरी है

‘केरल क्रिकेट एसोशिएशन’ (KCA) के पूर्व कोच पर महिला खिलाड़ियों के यौन उत्पीड़न का आरोप लगा है। आरोपित का नाम मनु है जिसके खिलाफ POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। मनु पर महिला खिलाड़ियों की नग्न तस्वीरें खींचने और प्रशिक्षण के दौरान उनसे छेड़खानी करने का आरोप है। राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी इस घटना का संज्ञान लिया है और रविवार (7 जुलाई, 2024) को KCA को नोटिस जारी कर के स्पष्टीकरण माँगा है। फिलहाल आरोपित को गिरफ्तार कर के न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को केरल राज्य मानवाधिकार आयोग ने कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया था। इन रिपोर्ट्स में बताया गया था कि 10 साल से अधिक समय तक कोच रहे मनु ने कई नाबालिग खिलाड़ियों का यौन उत्पीड़न किया था। उसने क्रिकेट टीम में चयन के लिए जरूरी बता कर कई नाबालिग लड़कियों की नग्न तस्वीरें खींची थीं। उस पर तमिलनाडु के तेनकासी ले जा कर महिला खिलाडियों से छेड़छाड़ करने का भी आरोप है। इन्हीं रिपोर्ट्स के आधार पर मनु पर केस दर्ज कर लिया गया था।

राज्य मानवाधिकार आयोग ने इन आरोपों की पुष्टि के लिए एक पैनल का भी गठन कर लिया। मनु पर केस दर्ज होने के बाद 5 लड़कियाँ सामने आई हैं। इन्होंने मनु के खिलाफ अपने बयान दर्ज करवाए हैं। आखिरकार पुलिस ने 2 दिन पहले मनु को पॉक्सो एक्ट के तहत तिरुवनंतपुरम से गिरफ्तार कर लिया है। उसको रिमांड पर ले कर पूछताछ भी की गई। आखिरकार आरोपित को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। इस मामले में आयोग ने KCA को भी तलब किया। KCA ने आयोग को बताया है कि उनको इन घटनाओं की जानकारी नहीं थी।

मनु फ़िलहाल न्यायिक हिरासत में है। इधर केरल क्रिकेट एसोशिएसन (KCA) ने पीड़िताओं को हर सम्भव मदद का भरोसा दिया है। मनु पर पूर्व में भी एक महिला खिलाड़ी ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। हालाँकि, बाद में लड़की अपने बयान से मुकर गई थी।

पैसा SC/ST ‘कल्याण’ के लिए, लेकिन 37% फंड चुनावी गारंटी पूरा करने में लगाएगी कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार: ₹14,000 करोड़ के ‘कट’ से उबली भाजपा

कॉन्ग्रेस के कर्नाटक में चुनाव जीतने के लिए किए रेवड़ी वादे अब राज्य के दलितों आदिवासियों पर भारी पड़ रहे हैं। राज्य के दलित और आदिवासी समुदाय के कल्याण के लिए दिया जाने वाला पैसा अब कॉन्ग्रेस सरकार की चुनावी गारंटियाँ पूरा करने के लिए लगाया जा रहा है। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने फैसला लिया है कि वह राज्य के दलित-आदिवासियों के दिए गए ₹14,730 करोड़ फंड को अब अपनी गारंटियों में खर्च करेगी।

कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ₹39,121 करोड़ की धनराशि दलित और आदिवासियों के फंड के रूप में जारी किया था। कर्नाटक में नियमों के अनुसार ऐसा करना आवश्यक है। लेकिन अब कॉन्ग्रेस सरकार ने इसमें से लगभग एक तिहाई फंड काटने का इरादा कर लिया है। इस फंड का उपयोग करके कॉन्ग्रेस अब अपनी चुनावी गारंटियाँ पूरी करेगी। इसको लेकर अब राज्य में विरोध भी हो रहा है। वह पहले भी ऐसा ही कर चुकी है।

राज्य में जीत को कॉन्ग्रेस ने किए थे ‘रेवड़ी’ वादे

2023 में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए कॉन्ग्रेस ने पाँच गारंटी दी थी। इन्हें ‘रेवड़ी’ कहा गया था। कॉन्ग्रेस ने 2023 विधानसभा चुनाव में वादा किया था कि सत्ता में आने पर वह हर घर को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देगी। इसे गृह ज्योति योजना का नाम दिया गया था। इसके अलावा गृह लक्ष्मी नाम की योजना का भी एक वादा किया गया था। इसके अंतर्गत कॉन्ग्रेस ने वादा किया था कि वह राज्य की महिलाओं को ₹2000 प्रतिमाह देगी।

कॉन्ग्रेस ने कर्नाटक की आर्थिक स्थिति और मुफ्त सुविधाओं के वादों से अर्थव्यस्था पर पड़ने वाले बोझ को दरकिनार करते हुए हर परिवार को 10 किलो अनाज देने का भी वादा किया था, इसे अन्न भाग्य योजना का नाम दिया गया था। कॉन्ग्रेस ने राज्य में महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा का भी वादा किया था। इसके अलावा राज्य के बेरोजगार युवाओं को भी ₹1500 देने की बात कही गई थी। इनमें से कुछ योजनाएँ पूरी तरह से लागू कर दी गई हैं तो कुछ को आंशिक रूप से लागू किया गया है।

कॉन्ग्रेस के इन ‘रेवड़ी’ वादों का असर अब राज्य के खजाने पर दिख रहा है और वह राजस्व बढ़ाने के लिए नई-नई जुगत भिड़ा रही है। वह राज्य की आम जनता को अब नए कर और बढ़े करों से लादना चाह रही है। साथ ही वह कमाई के नए जुगाड़ भी लगा रही है।

भाजपा-DSS आर-पार के मूड में

भाजपा ने कॉन्ग्रेस सरकार के इस फैसले को लेकर उसकी आलोचना की है। भाजपा ने इसे कॉन्ग्रेस का दलित विरोधी कदम बताया है। भाजपा ने इसे फंड का दुरूपयोग बताया है। कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष R अशोका ने लिखा है, “दलित विरोधी कॉन्ग्रेस सरकार ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के विकास के लिए निर्धारित ₹14,730 करोड़ की राशि को अपनी गारंटी योजनाओं के लिए इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है।”

उन्होंने आगे लिखा, “सामाजिक न्याय के स्वयंभू चैंपियन सीएम, आपने वाल्मीकि ST कल्याण बोर्ड में दलितों के ₹187 करोड़ के पैसे लूट लिए, अब आप दलितों के विकास के लिए निर्धारित ₹14,730 करोड़ की राशि को गारंटियों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, क्या आपको सत्ता के लालच में दलितों को लूटने में शर्म नहीं आती? दलितों को अपने कल्याण की कीमत पर आपकी गारंटी योजनाओं के लिए क्यों पैसे देने होंगे?”

दलित संघर्ष समिति नाम के संगठन ने भी कॉन्ग्रेस सरकार के इस निर्णय के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। दलित संघर्ष समिति ने इस मुद्दे पर कॉन्ग्रेस सरकार का विरोध किया है। उसने इसे कॉन्ग्रेस सरकार का एकतरफा निर्णय बताया है।

पहले भी ले चुकी दलित-आदिवासी का पैसा

कॉन्ग्रेस सरकार ने जुलाई 2023 में राज्य के SC-ST समुदाय के कल्याण के लिए खर्च किए जाने वाले ₹11,000 करोड़ को भी इन गारंटियों के लिए उपयोग करने का फैसला लिया था, जिसके कारण इसकी काफी आलोचना हुई थी। कॉन्ग्रेस सरकार ने यह कह कर अपना बचाव करने का प्रयास किया था कि यह दूसरी योजनाओं को दिया जाने वाला यह पैसा भी गरीबों के विकास में लगेगा। हालाँकि, दलित संगठनों ने उसकी इस दलील को स्वीकार नहीं किया था।

मुफ्त वाली गारंटी ले गईं बजट का बड़ा हिस्सा

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार की यह गारंटियाँ बजट का एक बड़ा हिस्सा ले जा रही हैं। इससे बाकी के विकास कामों के लिए पैसा नहीं बच रहा है। वित्त वर्ष 2023-24 में इन पाँच चुनावी गारंटियों पर ₹39,825 करोड़ का खर्चा किया गया था। यह कर्नाटक के 2023-24 के बजट का लगभग 17% था। वित्त वर्ष 2024-25 में गारंटियों का यह खर्चा और बढ़ गया है। 2023-24 के मुकाबले इसमें लगभग एक तिहाई की वृद्धि हुई है।

वित्त वर्ष 2024-25 के लिए पेश किए गए बजट में कर्नाटक ने इन पाँच चुनावी गारंटियों पर ₹52,000 करोड़ खर्च करने की योजना बनाई है। राज्य की कई अन्य योजनाओं का असर इस खर्च के कारण पड़ रहा है।

जुलाई 2023 में ही कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी अपने विधायकों से स्पष्ट कर दिया था कि उन्हें कोई भी फंड नहीं दिए जाएँगे और पूरा फोकस गारंटियों को पूरा करने पर लगाया जाएगा। भाजपा ने कॉन्ग्रेस सरकार पर आरोप लगाया है कि वह राज्य के विकास का सारा पैसा अपने चुनावी वादे पूरे करने में फूँक रही है जिससे राज्य पिछड़ रहा है।