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झारखंड में गिरा करोड़ों की लागत से बन रहा वो पुल, जिसे JMM-कॉन्ग्रेस सरकार बनवा रही थी: नहीं झेल पाया एक भी बारिश

झारखंड के गिरिडीह जिले में करोड़ों की लागत से बनाया जा रहा एक पुल बारिश के बीच गिर गया। निर्माणाधीन पुल बारिश की एक मार भी नहीं झेल सका और उसका बड़ा हिस्सा गिर गया। अब पुल के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गिरिडीह के देवरी थाना क्षेत्र में अरगा नदी पर एक पुल का निर्माण हो रहा था। जिस सड़क के लिए यह पुल बनाया जा रहा था, वह इस इलाके के डुमरीटोला और कारिपहरी गाँवों को जोड़ती है। इसके निर्माण के बीच ही शनिवार (29 जून, 2024) को तेज बारिश हुई जिससे अरगा नदी का जलस्तर बढ़ गया।

नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण इस पुल के लिए डाला गया गार्डर गिर गया। यह गार्डर एक पिलर से सहारे खड़ा था, पिलर नदी में पानी बढ़ने के कारण नीचे धंस गया, इसके कारण इसका ढाँचा अस्थिर हो गया। इसके कुछ देर बाद ही यह गिर कर नदी में समा गया।

इस पुल का निर्माण झारखंड का पथ निर्माण विभाग कर रहा था। इसके लिए ओम नमः शिवाय नाम की एक कम्पनी को ठेका मिला हुआ था। यह भी जानकारी सामने आई है कि यह पुल ₹5.5 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा था।

अब इस पुल के गिरने के बाद इसकी निर्माण की गुणवत्ता को लेकर प्रश्न झारखंड सरकार पर प्रश्न उठ रहे हैं। इससे पहले बारिश के कारण बिहार में पुल गिरने पर भी खूब बवाल हुआ था। इन पुलों के गिरने को लेकर बिहार सरकार को घेरा गया था। मामले में स्थानीय अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया है।

गिरिडीह के पथ प्रमंडल विभाग के इंजीनियर बिनय कुमार भी इस घटनास्थल पर पहुँचे हैं। ऑपइंडिया को बिनय कुमार ने बताया है कि बड़ा नुकसान नहीं है। मामले की जाँच के लिए आगे बातचीत चल रही है। निर्माण का जिम्मा लेने वाली कम्पनी ने अपने खर्च पर दोबारा पुल तैयार करने की सहमति दी है।

वीडियो में देखिए पश्चिम बंगाल की ‘शरिया अदालत’, भीड़ के सामने महिला को जमीन पर पटक कर पीटता ताजेमुल उर्फ़ JCB: भाजपा बोली – TMC विधायक हमीदुल रहमान का है करीबी

पश्चिम बंगाल से हिंसा का एक और वीडियो सामने आया है। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान यहाँ TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) के गुंडों द्वारा भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा की खबरें आई थीं। कइयों को पलायन करना पड़ा था, भाजपा ने एक जाँच समिति बना कर भी वहाँ भेजा था जिसकी रिपोर्ट पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा को भी सौंपी जा चुकी है। अब नया वीडियो सामने आने के बाद पार्टी के IT सेल के मुखिया व राज्य में प्रभारी अमित मालवीय ने निशाना साधा है।

उन्होंने इस वीडियो को शेयर करते हुए कहा है कि पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शासन का ये एक एक भयावह चेहरा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ के बीच एक महिला और एक पुरुष को जमीन पर पटक कर पीटा जा रहा है। आरोपित की पहचान ताजेमुल के रूप में हुई है, जिसे स्थानीय लोग JCB नाम से बुलाते हैं। वो ‘त्वरित न्याय’ देने के लिए जाना जाता है, उसकी नज़र में पुलिस-कोर्ट की कोई हैसियत नहीं। अमित मालवीय ने बताया है कि चोपरा के विधायक हमीदुल रहमान का वो करीबी है।

अमित मालवीय ने कहा, “भारत को TMC द्वारा संचालित पश्चिम बंगाल में शरिया अदालतों की वास्तविकता से अवगत होना चाहिए। हर गाँव में एक संदेशखाली है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी महिलाओं के लिए अभिशाप हैं। पश्चिम बंगाल में कानून और व्यवस्था का कोई नामोनिशान नहीं है। क्या ममता बनर्जी इस राक्षस के खिलाफ कार्रवाई करेंगी या उसका बचाव करेंगी जैसे उन्होंने शेख शाहजहाँ के लिए खड़ी हुई थीं?” बता दें कि संदेशखाली में जनजातीय समाज की महिलाओं का यौन शोषण करने वाले शेख शाहजहाँ और उसके गुर्गों को बचाने के लिए बंगाल सरकार ने दिन-रात एक कर दिया था।

ये घटना पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर स्थित चोपरा के लक्ष्मीकांतपुर की बताई जा रही है। ‘राष्ट्रीय महिला आयोग’ (NCW) को भी इससे अवगत करा दिया गया है। पश्चिम बंगाल में इस तरह से एक इस्लामी कट्टरपंथी द्वारा ‘कंगारू कोर्ट’ चलाए जाने का वीडियो आने के बाद एक बार फिर से राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। भाजपा के कई कार्यकर्ता अब तक पार्टी दफ्तर में परिवार के साथ रहने को मजबूर हैं। गाँव के गाँव खाली हो गए हैं।

‘फेसबुक-इंस्टाग्राम से रोकना भी क्रूरता, कोई निश्चित परिभाषा नहीं’: पत्नी रहती थी मायके, तेलंगाना हाई कोर्ट ने पति की तलाक की याचिका स्वीकार की

तेलंगाना हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि एक पति या पत्नी द्वारा दूसरे की प्रति प्रतिष्ठा या सामाजिक कार्यों की संभावनाओं को नुकसान पहुँचाने वाला कोई भी कार्य क्रूरता के अंतर्गत आएगा। कोर्ट ने कहा कि विवाह केवल वचनों के आदान-प्रदान या एक समारोह से कहीं बढ़कर है। इसके लिए ईंट-दर-ईंट से एक साझा घर बनाने की आवश्यकता होती है, जो एक साथ जीवन जीने की निरंतर इच्छा से जुड़ा होता है। जब विश्वास दरक जाए तो उस संबंध का कोई अर्थ नहीं होता।

तेलंगाना हाई कोर्ट की न्यायाधीश मौसमी भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति एमजी प्रियदर्शिनी की पीठ ने कहा कि यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि जीवनसाथी को फेसबुक और इंस्टाग्राम पर रहने से वंचित करना भी क्रूरता के समान हो सकता है। इसके बाद पीठ ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक माँगने की पति की अपील को स्वीकार कर लिया।

न्यायालय ने कहा कि विवाह को व्यक्तियों पर जबरन थोपा नहीं जा सकता। हाई कोर्ट ने यह भी कहा, “यह तथ्य कि दो व्यक्ति अब एक साथ जीवन की कल्पना नहीं कर सकते, विवाह को भंग करने और तलाक का आदेश देने के लिए पर्याप्त आधार के रूप में देखा जाना चाहिए।” कोर्ट ने माना की विवाह में संबंध में इतना टूट चुका है कि उसे सुधारा नहीं जा सकता।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत की खंडपीठ ने कहा, “पूरे मामले में न्यायालय की भूमिका सीमित है और उसे जल्लाद या परामर्शदाता के रूप में कार्य नहीं करना चाहिए, ताकि पक्षकारों को पति-पत्नी के रूप में बने रहने के लिए मजबूर किया जा सके। उनके बीच मन की बात हमेशा के लिए समाप्त हो गई हो। इस तरह की कवायद अनुचित और निरर्थक है।”

न्यायालय ने यह भी कहा कि मानसिक क्रूरता को एक निश्चित सूत्र में परिभाषित नहीं किया जा सकता, क्योंकि जिसे मानसिक क्रूरता माना जा सकता है, उसे ऐसे व्यवहार के रूप में देखा जा सकता है जो परेशान करने वाला या अवांछित हो, लेकिन क्रूर न हो। दरअसल, पति ने मानसिक एवं शारीरिक क्रूरता के आधार पर अपनी पत्नी से तलाक माँगा था।

दरअसल, यह मामला एक पति-पत्नी से जुड़ा हुआ है जिनकी शादी साल 2010 में हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच गंभीर वैवाहिक कलह शुरू हो गई। पत्नी ने साल 2011 में ससुराल छोड़ दिया और अपने पति के खिलाफ पाँच आपराधिक मामले दर्ज कराए। इनमें धारा IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता और दहेज उत्पीड़न के आरोप भी शामिल हैं।

मई 2015 में पत्नी कुछ दिनों के लिए अपीलकर्ता पति के साथ रहने आई, लेकिन जल्द ही घर छोड़कर चली गई। इसके बाद उसने पति के खिलाफ और भी आपराधिक मामले दर्ज कराए। इनमें से कुछ मामलों में पति को बरी कर दिया गया। इसके बाद पति ने न्यायालय में तलाक की अर्जी दाखिल की। नवंबर 2021 में ट्रायल कोर्ट ने पत्नी के व्यवहार को क्रूरता नहीं मानते हुए तलाक देने से मना कर दिया।

इसके बाद ट्रायल कोर्ट के फैसले को अपीलकर्ता ने तेलंगाना हाई कोर्ट में चुनौती दी। पति ने दलील दी कि उसकी पत्नी ने उसके खिलाफ एक के बाद एक आपराधिक मामला दर्ज कराके शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया है। वहीं, पत्नी के वकील ने तर्क दिया कि पति को पत्नी की वित्तीय जरूरतों के लिए जिम्मेदार है और उसे भरण-पोषण सुनिश्चित किए बिना तलाक नहीं दिया जाना चाहिए।

उच्च न्यायालय ने माना कि पत्नी की हरकतें मानसिक क्रूरता के बराबर थीं और विवाह इतना टूट चुका था कि उसे सुधारा नहीं जा सकता था। हाई कोर्ट ने कहा, “क्रूरता ढहते ढाँचे के टुकड़ों में से एक है, जहाँ विवाह का आधार इस तरह से टूट गया है कि उस ढाँचे को न तो बचाया जा सकता है और न ही फिर से बनाया जा सकता है।”

संविधान का करो संशोधन, और ज्यादा आरक्षण के लिए कोर्ट की लगाई 50% सीमा हटाओ, जाति जनगणना भी हो: कॉन्ग्रेस

कॉन्ग्रेस मीडिया इंचार्ज और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने कहा है कि संसद में कानून लाकर 50% आरक्षण की सीमा को खत्म कर दिया जाए। उन्होंने कहा है कि सरकार ऐसा कानून लाए जिससे सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण पर लगाई गई 50% की सीमा टूट जाए। उन्होंने साथ ही में जातिगत जनगणना की माँग भी है।

जयराम रमेश ने कहा है कि आरक्षण की सीमा को 50% से बढाकर उसे संविधान की नवीं अनुसूची में डालना पर्याप्त नहीं है क्योंकि देश के कोर्ट इसकी समीक्षा कर सकते हैं और इस पर रोक लग सकती है। उन्होंने कहा है कि संविधान में संशोधन करके 50% आरक्षण की सीमा हटाकर SC-ST और OBC को आरक्षण दिया जाए।

मीडिया से बात करते हुए जयराम रमेश ने कहा, “अलग-अलग राज्यों के आरक्षण को संविधान को नवीं अनुसूची में शामिल किया जाए। तमिलनाडु का आरक्षण नवीं अनुसूची में शामिल है लेकिन 2007 में न्यायपालिका ने कहा है कि वह नवीं अनुसूची का भी परीक्षण कर सकती है। हमने अपने घोषणा पत्र में भी 50% सीमा को संविधान संशोधन से हटाने का वादा किया था।”

जयराम रमेश ने आगे कहा, “संविधान में कहीं नहीं लिखा कि आरक्षण 50% होना चाहिए। यह न्यायपालिका के दिए गए निर्णयों से आया है। हम चाहते हैं कि संविधान का संशोधन हो और आरक्षण की 50% सीमा हटा दी जाए। इसके अलावा राज्यों को अधिकार दिए जाएँ।”

जयराम रमेश ने आरक्षण के लिए संशोधन पर बात करते हुए जेडीयू पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जेडीयू ने 65% आरक्षण के लिए नवीं अनुसूची की बात की है लेकिन वह भाजपा पर इस बात के लिए दबाव नहीं डाल रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी प्रश्न पूछे।

जयराम रमेश ने देश भर में जातिगत जनगणना की माँग भी की है। जयराम रमेश ने कहा कि जातिगत जनगणना जरूरी है। उनका कहना है कि देश होने वाली आगामी जनगणना में जाति का नाम भी शामिल कर लिया जाए।

गौरतलब है कि हाल ही में पटना हाई कोर्ट ने बिहार सरकार के 65% आरक्षण देने के फैसले पर रोक लगा दी थी। पटना हाई कोर्ट ने इसके पीछे 50% सीमा का हवाला दिया था। इसके बाद से जातिगत आरक्षण पर बहस दोबारा से चालू हो गई है।

जिस रियासी में आतंकी हमला कर 10 को मार डाला था, अब वहाँ शिव मंदिर में तोड़फोड़: अमरनाथ यात्रा के बीच वीडियो से तनाव, हिन्दुओं का प्रदर्शन

जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में एक हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़ किए जाने का मामला सामने आया है। हमलावरों ने शिव मंदिर को अस्त-व्यस्त कर दिया है। शनिवार-रविवार (29-30 जून, 2024) की रात हुए इस तोड़फोड़ में दीवालों पर टंगी देवी-देवताओं की तस्वीरों तक को नहीं छोड़ा गया है। इस घटना के वीडियो और तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं हैं। हिन्दू संगठनों ने इस हरकत पर नाराज़गी जताते हुए आक्रोश रैली निकाली है। पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है। इस करतूत को अमरनाथ यात्रा के दौरान तनाव बढ़ाने की साजिश भी माना जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना रियासी के धर्ममाड़ी इलाके की है। यहाँ एक प्राचीन शिव मंदिर है जो आसपास के हिन्दुओं की आस्था का प्रतीक है। शिवरात्रि व अन्य धार्मिक अवसरों पर यहाँ काफी भीड़ जमा होती है। रविवार (30 जून, 2024) को स्थानीय लोगों ने सुबह देखा कि मंदिर में तोड़फोड़ की गई है। तोड़फोड़ के वीडियो और फोटो बनाए गए जो कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इन तस्वीरों को देखते हुए पूरे जम्मू में तनाव फ़ैल गया। रियासी में बंद का एलान कर दिया गया।

मंदिर की दीवालों पर लगे चित्रों को उखाड़ कर जमीन में पटक दिया गया। मंदिर में पूजा-पाठ और अन्य उपयोगी साजोसामान को एक जगह ला कर बड़े बेढंगे तरीके से फेंक दिया गया है। शिवलिंग को भी नुकसान पहुँचाया गया है। घटना के विरोध में रियासी जिले में सड़क पर उतर कर प्रदर्शन हुआ है। उन्होंने पुलिस से माँग की है कि वो तत्काल मामले का खुलासा करेंगे और आरोपित को सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के जुर्म में फाँसी की सजा दिलाएँ। कार्रवाई के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया है। हालात देखते हुए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

बताते चलें कि 29 जून से अमरनाथ यात्रा की भी शुरुआत हो चुकी है। इसमें शामिल होने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु जम्मू के रास्ते अमरनाथ पहुँच रहे हैं। ऐसे में जम्मू के रियासी में हुई इस घटना को अमरनाथ यात्रा में व्यवधान डालने व इस दौरान साम्प्रदायिक तनाव फैलाने की साजिश माना जा रहा है। इस घटना के विरोध में रियासी के RSS (राष्ट्रीय स्वय सेवक संघ) कार्यालय में भी एक बैठक हुई। इस बैठक के बाद एक आक्रोश जुलूस निकाला गया। इस बीच पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है साथ ही जल्द खुलासे का भरोसा भी दिया है।

‘मुख से जो कुछ निकला, उसके लिए भक्त क्षमा करें’: प्रदीप मिश्रा ने बरसाना में राधा रानी के सामने जमीन पर नाक रगड़ माँगी माफ़ी, प्रेमानंद महाराज सहित साधु-संत थे आक्रोशित

मध्य प्रदेश के सीहोर के कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने राधा रानी के बारे में कुछ दावे किए थे, जिसके बाद मथुरा के वृन्दावन स्थित श्रीहित आश्रम के प्रेमानंद महाराज उनसे नाराज़ हो गए थे। अब प्रदीप मिश्रा ने वृन्दावन स्थित राधा रानी के दरबार में पहुँच कर दण्डवत प्रणाम कर के उनसे क्षमा माँगी है। उन्होंने बरसाना स्थित मंदिर में नाक रगड़ कर श्रीकृष्ण की प्रिय राधा से माफ़ी माँगी। श्रीकृष्ण में श्रद्धा रखने वाले कई साधु-संत उनका विरोध कर रहे थे। प्रदीप मिश्रा ने कहा कि उनके मुख से जो कुछ निकला, उसके लिए राधा रानी और उनके भक्त उन्हें माफ़ करे।

इतना ही नहीं, प्रदीप मिश्रा ने कहा कि वो अपनी हर कथा में इसे दोहराएँगे। उनके बरसाना दर्शन के दौरान बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था। ‘ब्रजतीर्थ देवालय न्यास’ की तरफ से उनके खिलाफ महापंचायत भी बुलाई थी और प्रदीप मिश्रा को ब्रज में न घुसने देने का ऐलान करते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का भी आह्वान किया था। असल में प्रदीप मिश्रा ने कहा था कि राधा रानी का जन्म बरसाना नहीं, बल्कि रावलगाँव में हुआ था।

उन्होंने बताया था कि राधा के पिता बरसाना में कचहरी लगाते थे। उन्होंने बताया था कि राधा रानी साल में 1 बार बरसाना जाती थीं, न तो श्रीकृष्ण की रानियों में राधा का नाम आता है और न राधा के पति के नाम में श्रीकृष्ण आता है। उन्होंने राधा के पति का नाम अनय घोष, उनकी सास का नाम जटिला और उनकी ननद का नाम कुटिला था। उन्होंने दावा किया था कि राधा का विवाह छात्रा गाँव में हुआ था। उन्होंने अब पूरे विवाद का पटाक्षेप होने की कामना की है।

प्रेमानंद महाराज ने कहा था कि आजकल ऐसे प्रवक्ता लोग हैं जो प्रसंग को छुए बिना ही कुछ भी बोल देते हैं, प्रसंग को पहले जानना चाहिए। उन्होंने कहा था कि आप एक गृहस्थ कथावाचक हो, हम श्रीजी के गुलाम हैं। प्रेमानंद मिश्रा ने कहा कि तू बस यहाँ पर साष्टांग दण्डवत होकर बैठ जा, तुझे यहाँ की रज कण बता देगी कि श्रीजी कौन हैं। उन्होंने शास्त्रों को पढ़ने की सलाह देते हुए कहा था कि हम लाड़ली जी के लिए जीते हैं। प्रेमानंद महाराज के गुस्से वाला वीडियो भी खूब वायरल हुआ था।

अब प्रदीप मिश्रा ने उनके कहे का न सिर्फ अनुसरण किया है, बल्कि हाथ जोड़ कर ब्रजवासियों का अभिनन्दन भी किया है। उन्होंने ब्रजवासियों के प्रेम का जिक्र करते हुए कहा कि राधा रानी ने स्वयं ही इशारा कर के उन्हें बुलाया है। उन्होंने सभी से निवेदन किया कि सब राधे-राधे कहें, हर-हर महादेव कहें। प्रेमानंद महाराज ने उनके लिए कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि 4 लोगों से पैर पुजवा कर खुद को भागवताचार्य समझता है, तू नरक में जाएगा।

मोहम्मद अजहर ने 15 साल की हिंदू लड़की का रेप किया, मार डाला… जज ने दिया था मृत्युदंड: अब उत्तराखंड हाई कोर्ट ने पलटा फैसला, आरोपों से कर दिया बरी

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने एक नाबालिग हिंदू लड़की की रेप के बाद हत्या के मामले में मृत्युदंड पाए मोहम्मद अजहर खान की सजा पर रोक लगाते हुए आरोपों से बरी कर दिया। साथ ही आरोपित को जेल से तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। ट्रायल कोर्ट ने मोहम्मद अजहर की मौत की सजा दी थी। हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में कई खामियाँ बताईं और कहा कि आरोपित की भूमिका ‘संदिग्ध’ थी।

उत्तराखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रितु बाहरी और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की पीठ ने कहा कि आरोपित के चोटों को देखते हुए असंभव लगता है कि वह मोटरसाइकिल चलाकर मृतका को घटनास्थल पर ले गया हो, बलात्कार किया हो और फिर उसकी हत्या करने के बाद शव को वापस लाकर पेड़ से लटका दिया हो।

इसको देखते हुए हाई कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के पूरे बयान को संदिग्ध माना। इसके बाद देहरादून के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश / एफटीसी / विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) द्वारा पारित निर्णय और आदेश को खारिज कर दिया। इसमें आरोपित को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी। हाई कोर्ट ने यह फैसला 11 जून 2024 को दिया है।

दरअसल, 1 जनवरी 2016 को 15 साल की नाबालिग मृतका लापता हो गई थी। अगले दिन देहरादून के त्यूणी में सेता बेंड के पास एक पेड़ पर उसका लटका हुआ शव बरामद हुआ था। मृतका के भाई ने दावा किया था कि उसने अपनी बहन को आखिरी बार आरोपित मोहम्मद अजहर और उसके एक किशोर साथी के साथ देखा था।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सके बाद मोहम्मद अजहर खान को पुलिस ने 5 जनवरी 2024 को गिरफ्तार कर लिया। अभियोजन पक्ष का कहना था कि नाबालिग से बलात्कार करने के बाद आरोपित ने उसकी हत्या कर दी और इसे आत्महत्या का मामला दिखाने के लिए उसके शव को पेड़ से लटका दिया था।

सुनवाई के दौरान उत्तराखंड हाई कोर्ट ने कहा कि यह बात संदिग्ध है कि रेप-मर्डर करने वाला व्यक्ति शव को ऐसी जगह लटकाएगा, जहाँ से सभी उसे देख सकें। कोर्ट ने यह भी कहा कि मृतका के भाई ने ट्रायल कोर्ट में कहा था कि पिछली दुर्घटना के कारण आरोपित चारपहिया वाहन नहीं चला सकता था। इस तरह उसके मोटरसाइकिल चलाने पर भी संदेह है। इस पर शव को लाने का दावा किया गया है।

खंडपीठ ने कहा, खंडपीठ ने कहा, “यह बयान अत्यधिक संदिग्ध है। यदि उसने (आरोपित ने) बलात्कार और हत्या की होती तो वह शव को वहीं छोड़ देता। विशेष रूप से उसे लगी चोटों को ध्यान में रखते हुए यह संदिग्ध लगता है कि वह शव को मोटरसाइकिल पर लाकर उसे पेड़ पर लटका दे।” कोर्ट ने यह भी कहा कि मृतका के कपड़ों पर वीर्य के अंश नहीं मिले हैं। इसलिए मामला संदिग्ध है।

TISS में 100 लोगों की गई नौकरी, टाटा ने रोकी फंडिंग: यहाँ सेना को बताया जाता है ‘रेपिस्ट’, शरजील इमाम के समर्थन में लगते हैं नारे

वामपंथियों का अड्डा माने जाने वाले टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस (TISS) ने 100 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। इन कर्मचारियों को फंड की कमी के कारण नौकरी से बाहर किया गया है। बताया जा रहा है कि टाटा समूह के TISS को फंड ना देने के कारण यह नौकरियाँ गई हैं। TISS इससे पहले कई विवादों में घिरा रहा है। TISS में पढ़ने वाले छात्रों पर राजद्रोह के मुकदमे में बंद शरजील इमाम के समर्थन में नारे लगाने के आरोप लग चुके हैं। यहाँ कश्मीर की आजादी को लेकर पोस्टर भी छपे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, TISS ने 55 शिक्षकों और 60 अन्य स्टाफ को नौकरी से निकाल दिया है। यह एक्शन शुक्रवार (28 जून, 2024) को लिया गया है। TISS ने अपने मुंबई कैम्पस से 20, हैदराबाद कैम्पस से 15, गुवाहाटी कैम्पस से 14 और तुलजापुर कैम्पस से 6 लोगों को निकाला है।

बताया गया है कि इन लोगों को TISS की तरफ से भेजे गए इमेल में इसका कारण टाटा एजुकेशन ट्रस्ट से पैसे का ना मिलना बताया है। TISS प्रशासन ने मीडिया को बताया है कि उसने कई बार टाटा एजुकेशन ट्रस्ट को पैसे भेजने की माँग की, लेकिन इस पर कोई जवाब नहीं मिला।

TISS से निकाले गए यह सभी कर्मचारी संविदा पर थे। इनमें से कुछ 10 साल से अधिक समय से यहाँ काम कर रहे थे। निकाले गए कर्मचारियों ने कहा है कि उनका TISS के साथ काम करने का अनुबंध मई महीने में खत्म हो गया लेकिन वह फिर भी इस उम्मीद में काम करते रहे कि उन्हें आगे भी काम पर रखा जाएगा।

उन्होंने बताया कि उनका अनुबंध नवीनीकृत नहीं किया गया है, जिसके कारण अब वह नौकरी नहीं कर पाएँगे। दूसरी तरफ TISS प्रशासन ने कहा है कि अगर उसे टाटा एजुकेशन ट्रस्ट से पैसा मिल गया तो इन लोगों को नौकरी पर वापस बुला लिया जाएगा, अगर ऐसा नहीं होता तो इनकी नौकरी चली जाएगी। TISS इससे पहले भी कई बार विवादों में रहा है।

TISS के छात्र बने थे आतंकी, NIA का आरोप

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने भीमा कोरेगाँव हिंसा मामले में जाँच करते हुए बताया था कि TISS और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के कुछ छात्रों को आतंकी संगठन CPI (माओवादी) ने भर्ती किया था। यह संगठन इनसे आगे आतंकी गतिविधियाँ करवाना चाहता था। इनके पकड़े जाने पर छात्र होने के आधार पर सहानुभूति बटोरने की भी योजना बनाई गई थी। इन छात्रों को भीमा कोरेगाँव हिंसा के आरोपितों ने भर्ती किया था। यह चाहते थे कि भारत में एक समानांतर सरकार खड़ी की जाए। यह सारी जानकारी NIA ने कोर्ट में दी थी।

गौरतलब है कि CPI (माओवादी) भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठन है। यह भारत में नक्सलवाद के सहारे दशकों से आंतरिक सुरक्षा का खतरा बना हुआ है। इस संगठन के कारण हजारों अर्धसैनिक और पुलिस बलों समेत आम नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं।

TISS में लगते हैं शरजील के समर्थन में नारे, सेना को बताते हैं रेपिस्ट

TISS के भीतर वामपंथी जहर ने अपने पैर लम्बे समय से पसारे हुए हैं। ऑपइंडिया ने वर्ष 2020 में TISS के कुछ छात्रों से बातचीत की थी। इन छात्रों ने ऑपइंडिया को बताया था कि पुलवामा हमले में 40 जवानों के मारे जाने के बाद TISS के एक व्हाट्सएप ग्रुप में इन भारतीय सेना के जवानों पर निर्दोषों की हत्या और रेप करने का आरोप लगा कर उनकी वीरगति का मजाक उड़ाया था। TISS का एक छात्र इन जवानों के मारे जाने पर हंस रहा था।

TISS के भीतर लगातार देश विरोधी कृत्य भी होते हैं। यहाँ प्रधानमंत्री मोदी को गाली दिए जाने वाले पोस्टर छात्र अपने कमरों पर लगाते हैं। TISS के छात्रों ने मुंबई के गेटवे ऑफ़ इंडिया पर CAA और NRC के खिलाफ प्रदर्शन किया था। यह लोग बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में प्रताड़ित होने वाले हिन्दुओं को भारत में नागरिकता दिए जाने पर गुस्सा थे।

TISS के छात्र संगठन ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटाए जाने को लेकर भी प्रलाप किया था। TISS के भीतर पूर्वोत्तर को भारत से काटने की बात करने वाले शरजील इमाम के समर्थन में भी नारे लगे थे। यहाँ ABVP की कब्र खुदेगी जैसी बाते हुई थीं।

TISS में छपते रहे हैं कश्मीर की आजादी वाले रिसर्च पेपर-पोस्टर

TISS में भारत को तोड़ने की बाते खुले तौर पर चलती आई हैं। फरवरी, 2020 में एक समीक्षा कार्यक्रम के दौरान TISS में ‘कश्मीर को आजाद करो’, ‘कश्मीर पर से कब्जा हटाओ’ जैसे पोस्टर दिखाई दिए थे। इन्हें कलाकारी के नाम पर लगाया गया था। इनमें CAA-NRC हटाने की बात कही गई थी। इसके अलावा TISS में छपने वाले रिसर्च पेपरों में भी लगातार कश्मीर पर जहर उगला जाता रहा है। प्रगतिशील होने का दावा करने वाले वामपंथी यह जहर फैलाते रहे हैं।

ऐसे ही एक रिसर्च पेपर में अनन्या कुंडू नाम की एक रिसर्चर ने लिखा था, “भारत ने कश्मीर पर कब्जा करने के लिए यहाँ की आवाजों को दबाया और नैरेटिव को नियंत्रित किया। कश्मीर की कहानी कश्मीर नहीं, भारत ने लिखी। आज जिस कश्मीर को हम जानते हैं, वो भारतीय सोच के हिसाब से ही। महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा हुई। पितृसत्तात्मक भारतीय सेना कश्मीरी समाज को तोड़ने के लिए महिलाओं के शरीर को निशाना बनाती है।”

‘गौमाता और भगवान विष्णु भी नहीं दिला सकते T20 वर्ल्ड कप’: हिंदू-घृणा में जिस पाकिस्तानी ने लिखा यह सब, उसने मानी रोहित-बुमराह की जादूगरी

भारत और हिन्दुओं के प्रति पाकिस्तान के इस्लामियों का रवैया हमेशा से ही अपमानजनक रहा है। भारत के वर्ल्डकप मैच के दौरान एक बार यह फिर दिखा है। पाकिस्तान के एक यूट्यूबर सोहराब बरकत ने भारत और दक्षिण अफ्रीका के फाइनल मैच के दौरान गौमाता और भगवान विष्णु को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की। जब भारत मैच जीत तो यह बन्दा पलट गया और इसे जसप्रीत बुमराह और कप्तान रोहित शर्मा की जादूगरी बताने लगा।

सोहराब बरकत यूट्यूब पर खबरों पर कमेंट्री का एक चैनल चलाता है। उसकी भारत और दक्षिण अफ्रीका के मैच पर की गई टिप्पणी की एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इसमें सोहब बरकत कहता है, “साउथ अफ्रीका के खिलाफ ये फाइनल वाले मैच में ये ठप्पा लग चुका था। मैंने खुद जाकर लिखा था कि गौमाता भी नहीं बचा सकती इंडियंस को। सवाल ही पैदा नहीं होता। भगवान विष्णु अगर खुद नीचे आ जाएँ तो भी नहीं बचा सकते। सवाल ही नहीं पैदा होता इनके जीतने का।”

सोहराब बरकत ने यह वीडियो भारत के जीतने के बाद बनाई थी। बरकत ने मैच के बीच में हिन्दुओं, गौआता और उनके आराध्य विष्णु को लेकर कई अपमानजनक पोस्ट किए थे। भारत के मैच जीतने के बाद उसने यह डिलीट कर दिए और इसका ऐलान भी किया।

सोहराब बरकत जहाँ भारत के मैच में फंसने पर गौमाता और भगवान विष्णु को लेकर अपमानजनक टिप्पणियाँ कर रहा था तो वहीं मैच जीतने के बाद उसके सुर बदल गए। उसने रोहित शर्मा और बुमराह की तारीफ़ करना चालू कर दिया। उसने इन दोनों को जादूगर बताया।

बरकत ने वीडियो में कहा, “रोहित शर्मा गेम ऐसे नहीं जीता है, इसके पास जादू है। इसने कुछ जादू किया है, इसने कुछ पढके फूँका है। इसके पास ऐसी कोई शक्ति है जो ये बन्दा कर गया है। इसका एक फैसला इसे वर्ल्ड कप दे गया है।” इसने फेसबुक पर से भी अपनी गाय और विष्णु भगवान वाली पोस्ट हटा ली।

बरकत ने इसके बाद वीडियो में बताया कि जसप्रीत बुमराह ही रोहित शर्मा के जादू रहे। उनको खतरनाक बन चुके हेनरी क्लासेन के खिलाफ लाना रोहित का जादू वाला फैसला रहा। बरकत ने बताया कि जसप्रीत बुमराह रोहित शर्मा के अकेले जादू हैं। बरकत ने कहा कि जसप्रीत बुमराह जादू कर रहा था।

गौरतलब है कि 29 जून, 2024 को बारबाडोस में खेले गए T20 विश्व कप मुकाबले में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को सात रनों से हरा कर ट्रॉफी अपने नाम कर ली। भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 177 रनों का लक्ष्य दिया था। दक्षिण अफ्रीका 20 ओवर में मात्र 169 रन ही बना पाया।

PM मोदी ने अपने तीसरे कार्यकाल में की पहली ‘मन की बात’: चुनाव से लेकर ओलंपिक और आंध्र प्रदेश के अरकू कॉफी पर भी चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (30 जून 2024) को अपने तीसरे कार्यकाल में ‘मन की बात’ के पहला एपिसोड को संबोधित किया। यह ‘मन की बात’ कार्यक्रम का 111वाँ एपिसोड है। इस दौरान उन्होंने लोकसभा चुनावों के सफल आयोजन के लिए देश की जनता का आभार जताया। इसके साथ ही पेरिस ओलंपिक, आंध्र प्रदेश के अरकू कॉफी आदि की भी बात की।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस ओलिंपिक में जाने वाले भारतीय दल को शुभकामनाएँ दीं और कहा कि इस बार ओलिंपिक में कुछ चीजें पहली बार देखने मिलेंगी। पीएम मोदी ने कहा, “अगले महीने इसी समय तक पेरिस ओलिंपिक शुरू हो जाएँगे। मैं भारतीय दल को शुभकामनाएँ देता हूँ।”

खिलाड़ियों की मनोबल को बात करते हुए उन्होंने आगे कहा, “इस बार हमारा हैशटैग #Cheer4Bharat है। इसके जरिए हमें अपने खिलाड़ियों को चीयर करना है। टोक्यो की यादें अब तक ताजा हैं। तभी से हमारे खिलाड़ी तैयारियों में जुटे थे। 900 प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। इस बार कुछ चीजें पहली बार देखने मिलेंगी।”

पीएम मोदी ने कहा, “मैं आज देशवासियों को धन्यवाद करता हूँ कि उन्होंने हमारे संविधान और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं पर अपना अटूट विश्वास दोहराया।” उन्होंने आगे कहा, “2024 का चुनाव दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव था। दुनिया के किसी देश में इतना बड़ा चुनाव कभी नहीं हुआ, जिसमें 65 करोड़ लोगों ने वोट डाला हो।”

हर महीने के अंतिम रविवार को होने वाला यह मासिक रेडियो प्रोग्राम चार महीने बाद हुआ। इससे पहले यह फरवरी में प्रोग्राम हुआ था। तब प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि राजनीतिक मर्यादा का पालन करते हुए लोकसभा चुनाव के इन दिनों में तीन महीने ‘मन की बात’ का प्रसारण नहीं होगा। बता दें उस समय देश में चुनाव की प्रक्रिया चल रही थी।

लोकसभा चुनाव के बाद के पहले कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हूल दिवस की भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि 30 जून को आदिवासी भाई-बहन ‘हूल दिवस’ के रूप में मनाते हैं। यह दिन वीर सिद्धो-कान्हू के अदम्य साहस से जुड़ा है, जिन्होंने विदेशी शासकों के अत्याचार का पुरजोर विरोध किया था। दोनों भाइयों ने 1855 में अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठा लिया था।

उन्होंने कुवैत सरकार द्वारा अपने नेशनल रेडियो पर हिंदी में आधे घंटे के एक कार्यक्रम को शुरू करने पर खुशी जाहिर की। इसके साथ ही 30 जून को आकाशवाणी का संस्कृत बुलेटिन अपने प्रसारण के 50 साल पूरे करने को लेकर भी देशवासियों को बधाई। उन्होंने कहा, “50 साल से लगातार इस बुलेटिन ने कितने ही लोगों को संस्कृत से जोड़े रखा है।”

प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के अरकू कॉफी की भी बात की। उन्होंने कहा कि भारत के कई प्रोडक्ट्स की दुनिया-भर में बहुत डिमांड है। ऐसा ही प्रोडक्ट अरकू कॉफी है। यह आंध्र प्रदेश के अल्लुरी सीता राम राजू जिले में पैदा होती है। ये अपने रिच फ्लेवर-अरोमा के लिए जानी जाती है। अरकू कॉफी की खेती से करीब डेढ़ लाख आदिवासी परिवार जुड़े हुए हैं। 

बता दें कि ‘मन की बात’ को 22 भारतीय भाषाओं, 29 बोलियों और 11 विदेशी भाषाओं में ब्रॉडकॉस्ट किया जाता है। इनमें फ्रेंच, चीनी, इंडोनेशियाई, तिब्बती, बर्मी, बलूची, अरबी, पश्तू, फारसी, दारी और सिंहली भाषा शामिल हैं। कार्यक्रम का ब्रॉडकास्ट आकाशवाणी के 500 से अधिक केंद्रों द्वारा किया जाता है। मन की बात का पहला एपिसोड 3 अक्‍टूबर 2014 को प्रसारित हुआ था।