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ब्रिटानिया के लिए बंगाल की फैक्ट्री बनी बोझ, बंद करने का लिया फैसला: नैनो प्लांट पर विवाद के बाद टाटा ने भी छोड़ा था राज्य, BJP बोली- ये तोलाबाजी का नतीजा

देश में बिस्किट बनाने वाली प्रमुख कंपनी ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित अपनी 77 वर्ष पुरानी फैक्ट्री को बंद करने का निर्णय लिया है। ब्रिटानिया ने इस निर्णय के संबंध में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को सूचित किया है।

ब्रिटानिया ने 20 जून, 2024 को स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में बताया है कि कोलकाता के तारातला स्थित फैक्ट्री के स्थायी कर्मचारियों ने कम्पनी द्वारा दी गई स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति को स्वीकार कर लिया था। तारातला फैक्ट्री, मुंबई के बाद ब्रिटानिया की भारत में दूसरी सबसे पुरानी फैक्ट्री है। इसकी स्थापना 1947 में हुई थी।

ब्रिटानिया ने यह भी बताया है कि कम्पनी पर इस फैक्ट्री के बंद होने का कोई असर नहीं पड़ने वाला है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रिटानिया प्रबंधन ने कम्पनी के संविदा कर्मचारियों के साथ VRS को लेकर चर्चा भी शुरू कर दी है।

तारातला फैक्ट्री के बंद होने का असर लगभग 150 कर्मचारियों पर असर पड़ने की उम्मीद है। ब्रिटानिया का यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है जब कम्पनी लागत के मुकाबले मुनाफा निकालने की चुनौतियों से जूझ रही है। इससे पहले मुंबई और चेन्नई में भी ब्रिटानिया की पुरानी फैक्ट्रियों को भी बंद किया गया था।

बताया गया है कि कंपनी ने अपने कर्मचारियों के साथ VRS पर सीधे समझौता कर लिया है और उनकी बचे हुए नौकरी के सालों के आधार पर उनको ग्रेच्युटी और पीएफ के अलावा ₹13 लाख से ₹22 लाख तक के VRS पैकेज की पेशकश की है।

बताया गया है कि ब्रिटानिया ने 2018 में इस फैक्ट्री के 11 एकड़ के प्लॉट के लिए लीज को रिन्यू किया था। यह लीज 2048 तक वैध है। हालाँकि, ब्रिटानिया ने अब इस फैक्ट्री में उत्पादन जारी रखना लागत के अनुरूप नहीं पाया है। तब फैक्ट्री को बंद नहीं किया गया था लेकिन अब यह भी बताया कि ब्रिटानिया इस जमीन के बड़े हिस्से को इसके असल मालिक SMPT (पूर्व में कलकत्ता पोर्ट ट्रस्ट) को जमीन का कुछ हिस्सा वापस करने पर विचार कर रहा है।

इस बीच, ब्रिटानिया के निकलने पर राज्य की विपक्षी पार्टी भाजपा ने भी हमला बोला है। भाजपा आईटी सेल के मुखिया ने कहा है कि बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस ‘तोलाबाजी’ (अवैध वसूली या कमीशन लेना) और ‘यूनियनबाजी’ में लगी हुई है, जिसके कारण लगातार उद्योग धंधे राज्य से बाहर जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पहले CPM ने इसे बर्बाद किया और फिर TMC ने इसके ताबूत में आखिरी कील ठोंक दी। वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर भी ब्रिटानिया फैक्ट्री के बंद होने को कई यूजर्स ने राज्य में कुछ साल पहले टाटा के बाहर जाने जैसा बताया है।

भारत में खाने पीने का सामान बनाने वाली बड़ी कम्पनियों में से एक ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज बंगाल को अपना तीसरा सबसे बड़ा बाजार मानती है, बंगाल कम्पनी के लिए ₹900 करोड़ से अधिक का व्यापार देता है। ब्रिटानिया कोलकाता के अलावा बिहार, ओडिशा, असम और उत्तर प्रदेश में अपने प्लांट चलाती है।

ब्रिटानिया ने 2016 में बंगाल में दूसरी इकाई की योजना पर बातचीत चालू की थी। ब्रिटानिया की योजना थी कि वह 2018 तक इससे उत्पादन चालू कर देगी लेकिन राज्य में कई जगह जमीन की तलाश करने के बावजूद, योजना साकार नहीं ही सकी। वहीं दूसरी तरफ कंपनी ने 2018 में अपने असम प्लांट का उद्घाटन भी कर दिया दिसम्बर 2023 में बिहार में भी एक फैक्ट्री लगा दी।

गौरतलब है कि ममता बनर्जी की वाली टीएमसी सरकार के व्यापार विरोधी रवैये के कारण पश्चिम बंगाल से बाहर निकलने वाली ब्रिटानिया कोई पहली कंपनी नहीं है। इससे पहले टाटा मोटर्स ने भी सिंगूर में टाटा नैनो प्लांट को लेकर विवादों के चलते राज्य छोड़ दिया था।

वर्ष 2006, में बंगाल की वामपंथी सरकार ने सिंगूर और हुगली में लगभग 1,000 एकड़ जमीन अधिग्रहित की थी। इसके बाद, इसने राज्य में रोजगार बढ़ाने के लिए यह जमीन टाटा मोटर्स को दे दी थी। टाटा मोटर्स यहाँ नैनो कार का प्लांट लगाना चाहती थी।

हालाँकि तब बंगाल में विपक्ष की नेता और तृणमूल कॉन्ग्रेस मुखिया ममता बनर्जी ने जमीन अधिग्रहण का विरोध किया था। इसको लेकर काफी बवाल हुआ था। टाटा मोटर्स के शोरूम पर तक हमले हुए थे। परिणामस्वरूप, टाटा मोटर्स को सिंगूर प्लांट को स्थगित करना पड़ा था, टाटा मोटर्स तब तक सिंगूर संयंत्र में ₹1,000 करोड़ से अधिक का निवेश कर चुकी थी।

बंगाल में हुए इस हंगामे के बाद टाटा मोटर्स ने गुजरात के सानंद में अपना प्लांट स्थापित किया था। टाटा मोटर्स ने गुजरात में इस प्लांट का 2010 में उद्घाटन किया था। टाटा नैनो के साणंद प्लांट का उद्घाटन गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और टाटा समूह के अध्यक्ष रतन टाटा ने किया था।

शिखर बन जाने पर नहीं आएँगी पानी की बूँदे, मंदिर में कोई डिजाइन समस्या नहीं: राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेन्द्र मिश्रा ने बताया

श्रीराम मंदिर निर्माण समिति के मुखिया नृपेन्द्र मिश्रा ने बताया है कि श्रीराम मंदिर में कोई भी डिजाइन सम्बन्धी समस्या नहीं है। उन्होंने बताया है कि मंदिर में जल निकासी समेत बारिश का पानी आने समेत सभी चीजों पर पहले ही विचार कर लिया गया था। उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में पानी की निकासी ना बनाए जाने को लेकर गलत बताया है।

नृपेन्द्र मिश्रा ने बताया, “मैं अयोध्या में हूँ। मैंने मंदिर की पहली मंजिल से बारिश का पानी गिरते देखा। ऐसा पहले से अनुमानित था क्योंकि गुरु मंडप अभी आखुले आकाश में हैं और मंदिर के शिखर के पूरा होने से यह खुलापन बंद हो जाएगा। मैंने निकास से कुछ रिसाव भी देखा है क्योंकि पहली मंजिल पर काम चल पर है। काम पूरा होने पर, यह निकास बंद कर दिया जाएगा।”

नृपेन्द्र मिश्रा ने श्रीराम मंदिर के गर्भगृह में जल निकासी ना बनाए जाने को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा, “गर्भगृह में कोई जल निकासी व्यवस्था नहीं है क्योंकि सभी मंडपों में पानी की निकासी के लिए ढलान माप कर बनाई गई है, इसके अलावा गर्भगृह के पानी हाथों से निकाला जाता है।”

उन्होंने आगे बताया, “इसके अलावा, भक्त अभी श्रीराम पर अभिषेक नहीं कर रहे हैं। गर्भगृह में कोई डिज़ाइन या निर्माण सम्बन्धी समस्या नहीं है। जो मंडप खुले हैं उनमें बारिश की बूंदें गिर सकती हैं, इस पर बनाने के पहले बहस हुई थी लेकिन बाद में फैसला लिया गया कि उन्हें नागर शैली के अनुसार खुला रखा जाए।”

हाल ही में यह दावा किया गया था कि श्रीराम मंदिर के गर्भगृह में जल निकासी की व्यवस्था ही नहीं की गई है। दावा किया गया था कि इस कारण से प्रभु श्रीराम के अभिषेक के बाद जमीन पर पानी इकट्ठा हो रहा और निकल नहीं रहा है। इससे ही मिलता जुलता दावा राम मंदिर के मुख्य पुजारी सत्येन्द्र दास ने भी किया था। हालाँकि, अब निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेन्द्र मिश्रा ने साफ़ कर दिया है कि ऐसी कोई समस्या नहीं है।

अयोध्या में बन रहे श्रीराम मंदिर का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो कम्पनी कर रही है। अभी श्रीराम मंदिर का कुछ काम बाकी है। आशा है कि मार्च, 2025 तक यह काम पूरा हो जाएगा। मंदिर निर्माण समिति के मुखिया नृपेन्द्र मिश्रा ने बताया है कि 22 जनवरी, 2024 को मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अब तक 1.75 करोड़ श्रृद्धालु यहाँ दर्शन कर चुके हैं।

दर-दर भटकता रहा एक बाप पर बेटे की लाश तक न मिली, यातना दे-दे कर इंजीनियरिंग छात्र की हत्या: आपातकाल की वो कहानी, जिसमें कॉन्ग्रेसी CM को देना पड़ा था इस्तीफा

भारत में कभी आपातकाल लगा था। कॉन्ग्रेस पार्टी ने लगाया था। नेहरू-गाँधी परिवार की इंदिरा ने प्रधानमंत्री रहते लगाया था। सारे आलोचकों को जेल में ठूँस दिया गया था। आज कॉन्ग्रेस पार्टी 18वीं लोकसभा के शपथग्रहण के दौरान संविधान की पुस्तकें दिखाती हैं, लेकिन ये भूल जाती है कि कभी इसी संविधान को बदल दिया गया था उसके द्वारा। भाजपा पर संविधान बदलने का आरोप लगाने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी ये भी भूल जाती है कि उसने ही कभी मीडिया का गला घोंटा था, उसके ही नेता ने कइयों की जबरन नसबंदी कराई थी।

यहाँ तक कि आपातकाल से जुड़े कई दस्तावेज भी गायब कर दिए गए, जिससे किसी को भी इस गुनाह की सज़ा न मिले। 25 नवंबर, 1977 को नई दिल्ली स्थित आकाशवाणी भवन के 2 कमरों में भीषण आग लग गई, जिसमें कई रिकार्ड्स जल कर स्वाहा हो गए। वार्ताओं के टेप, फाइलें और फर्नीचर तक नहीं बचे। उस समय के अख़बार में भी छपा कि इसके पीछे राजनीतिक साजिश नज़र आती है। हरदुआगंज बिजलीघर में आग लगने से लेकर रेलवे दुर्घटना की कई घटनाएँ हुईं।

माना गया कि आपातकाल के रिकार्ड्स को मिटाने के लिए ये सब किया गया था। रेलवे दुर्घटना के ऐसे ही एक मामले में आर्यसमाजी सांसद प्रकाशवीर शास्त्री भी नहीं रहे। आपातकाल के दौरान किस तरह लोगों को यातनाएँ दी गई थीं, इसकी कहानी हमें जाननी चाहिए। एक छात्र था B राजन नाम का, जो कालीकट इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ता था। वो हिंदी के रिटायर्ड प्रोफेसर एचरा वारियर का एकलौता बेटा था। अभिनय, संगीत और पढ़ाई – तीनों में वो होनहार था।

बलबीर दत्त अपनी पुस्तक ‘इमरजेंसी का कहर और सेंसर का ज़हर‘ में बताते हैं कि आपातकाल के दौरान एक थाने पर कुछ नक्सलियों ने हमला किया था। कॉलेज के कला सेक्रेटरी B राजन को इस दौरान पुलिस उठा कर ले गई। ये मार्च 1976 की घटना है। उसके साथी जोसेफ बाली को भी गिरफ्तार किया गया था। कॉलेज ने उसके पिता को पत्र लिखा, पत्र ने बेटे को छुड़ाने के लिए दिन-रात एक कर दिया। वो केरल के तत्कालीन गृह सचिव, गृह मंत्री, मुख्यमंत्री और पुलिस अधिकारियों से मिले।

बेचारे पिता ने राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक को पत्र लिखा, लेकिन उन्हें कहीं से कोई राहत भरी खबर नहीं मिली। इसी तरह 1 वर्ष बीत गया। उन्होंने अदालत में हैबियस कार्पस का केस दर्ज किया गया। बता दें कि किसी के गायब होने की सूरत में ये मामला दर्ज कराया जाता है, 2021 में आई सूर्या अभिनीत तमिल फिल्म ‘जय भीम’ इसी कानूनी प्रावधान पर आधारित है। आपातकाल खत्म होने के बाद राजन के पिता ने किसी केस का सहारा लिया और अपने बेटे को वापस लाने के लिए अदालत में अर्जी दी।

जब राजन के पिता अपने बेटे के लिए गुहार लगाने K करुणाकरण से मिले थे, तब वो केरल के गृह मंत्री थे। हालाँकि, आपातकाल बाद वो राज्य के मुख्यमंत्री बने। करुणाकरण से दोबारा उन्होंने गुहार लगाई। मुख्यमंत्री ने जब अधिकारियों से पूछा तो उन्हें जवाब मिला कि हम किसी राजन को नहीं जानते। पुलिस ने तो किसी राजन को गिरफ्तार किए जाने की घटना से भी इनकार कर दिया। केरल सरकार ने हाईकोर्ट में दिए गए हलफनामे में भी यही बात दोहरा दी।

हालाँकि, उच्च न्यायालय इस मामले में पड़ा और उसने जाँच का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि CM का कथन विश्वास के लायक नहीं है। गवाहों ने भी बताया कि राजन को 1 मार्च, 1976 को गिरफ्तार किया गया था। फिर उसे किसी टूरिस्ट बँगला पर ले जाया गया था, जहाँ उसे जम कर यातनाएँ दी गईं। अदालत को भी कहना पड़ा कि ऐसा सिर्फ फिल्मों में ही देखा गया है या उपन्यासों में पढ़ा गया है। राजन को टॉर्चर करने वालों में 6 पुलिस वाले शामिल थे।

इतना दबाव पड़ा कि आखिरकार मुख्यमंत्री को ही इस्तीफा देना पड़ा। आज तक नहीं पता चल पाया है कि राजन का क्या हुआ। इस घटना पर मलयालम में फ़िल्में भी बन चुकी हैं। गवाहों ने बताया कि पुलिस ने उनके हाथ-पाँव बाँध कर उन्हें प्रताड़ित किया था, उनसे ऐसे 2 नक्सलियों का पता माँगा जा रहा था, जिनसे इनका कोई लेना-देना नहीं था। कॉन्वन टूरिस्ट बँगले में दोनों को साथ रखा गया था, फिर अलग कर दिया गया। जोसेफ को कह दिया गया कि राजन की मृत्यु हो गई है।

कॉन्वन बाँध में भी राजन के शव की तलाश की गई थी, जो नहीं मिली। सोचिए, इस प्रकरण के दौरान एक पिता पर क्या गुजरी होगी। आपातकाल के बाद जब संजय गाँधी गिरफ्तार हुए तो राजन के पिता ने उन्हें पत्र लिख कर कहा कि आप भी एक माँ हैं, मैं कामना करता हूँ कि आपको वो सब न झेलना पड़े जो राजन की माँ को झेलना पड़ा। राजन के पिता ने उन्हें याद दिलाया कि कैसे उन्होंने राजन की माँ की तरफ से उनकी व्यथा उन्हें बताई थी, लेकिन उन्होंने नहीं सुनी।

15 मई, 1977 को CM के इस्तीफे की खबर तब ‘इंडिया टुडे’ में छपी थी और उसमें भी इस प्रकरण का विवरण था। राजन को मेरिट स्कॉलरशिप मिला हुआ था, वो फाइनल ईयर का छात्र था। पूरे राज्य के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया, कई राजनीतिक दलों व संस्थाओं के प्रयासों के बाद राजन को रिहा किया गया। वडक्कन नाम के पादरी ने 3 दिन का अनशन किया। राजन का परिवार त्रिचूर के मला का रहने वाला था। करुणाकरण 1967 से वहीं से विधायक बन रहे थे।

10 मार्च, 1976 को जब वो गृह मंत्री थे तब उनसे मिलने आए राजन के पिता से उन्होंने कहा था कि उनका बेटा एक गंभीर मामले में फँसा हुआ है, लेकिन वो उसकी मदद के लिए सब कुछ करेंगे। जब मामला हाईकोर्ट में पहुँचा तो करुणाकरण ने इस मुलाकात से ही इनकार कर दिया और पलट गए। राजन की गिरफ्तारी के बाद उसकी बहनों रीमा और चाँदनी को पिता ने इस घटना के बारे में नहीं बताया, क्योंकि डर था कि दोनों की यूनिवर्सिटी परीक्षाओं में प्रदर्शन पर इससे असर पड़ेगा।

मुख्यमंत्री अच्युत मेनन से मुलाकात करने से लेकर सभी सांसदों को पत्र लिखने तक, प्रोफेसर वारियर ने क्या नहीं किया। राजन को गिरफ्तार कर के पुलिस सादी वर्दी में उसे लेकर गई थी। उसे बेहोशी की हालत में ले जाए जाते हुए भी एक गवाह ने देखा। हाईकोर्ट को पूरा विश्वास था कि उसे कस्टडी में रखा गया है, ऐसे में उसने समयसीमा दी कि उसे पेश किया जाए। राज्य सरकार ने अक्षमता जता दी। राजन के पिता ने ‘Memories of a Father‘ नामक पुस्तक में अपनी इस लड़ाई का विवरण दिया है।

केरल हाईकोर्ट ने CM करुणाकरण के अलावा डिप्टी IGP जयराम पड्डीकल और एसपी K लक्ष्मण पर भी गलत साक्ष्य देने का मामला चलाने का आदेश दिया। कहाँ राजन यूथ फेस्टिवल में हिस्सा लेने कॉलेज पहुँचा था, कहाँ उसे पुलिस पकड़ कर ले गई। कोझिकोड के चथमंगलम स्थित ये कॉलेज आज NIT है लेकिन यहाँ आज भी राजन केस की चर्चा होती है। खैर, इस घटना को लेकर कॉन्ग्रेस को छात्र विरोधी नहीं बताया जा सकता, न संविधान विरोधी, आपातकाल का दोष भी शायद उसे नहीं दिया जा सकता।

‘ये मेरा पुनर्जन्म है, कच्छ के भूकम्प में मैं मर गई थी’, बनासकांठा में 4 साल की दक्षा का दावा: फर्राटे से बोलती है हिंदी, बाकी परिवार को आती है सिर्फ गुजराती

हिंदू धर्म में पुनर्जन्म की मान्यता है। हमारे शास्त्रों और पुराणों में भी पुनर्जन्म की बात की गई है। हाल-फिलहाल में भी कई ऐसे उदारहण सामने आए हैं, जहाँ लोगों ने खुद के पुनर्जन्म का दावा किया है। ऐसा ही एक मामला गुजरात के बनासकांठा से सामने आया है। बनासकांठा के एक अनपढ़ गुजराती परिवार में जन्मी बच्ची जन्म से ही हिंदी बोलती है, उसने अपने पुनर्जन्म का दावा भी किया है।

इस बच्ची का दावा है कि यह उसका पुनर्जन्म है और वह इससे 24 साल पहले कच्छ जिले के अंजार में रहती थी। बच्ची का दावा है कि भूकंप में उसकी और उसके परिवार की मौत हो गई थी। बनासकांठा की इस बच्ची का मामला अब सोशल मीडिया में छाया हुआ है। उसका वीडियो वायरल होने के बाद ऑपइंडिया सच्चाई जानने के लिए बनासकांठा के खासा गाँव तक पहुँच गया। ऑपइंडिया ने बच्ची के पिता जेताजी ठाकोर और बच्ची दक्षा से भी बात की। बातचीत के दौरान बच्ची ने कई हैरान करने वाली बातें बताईं। उसे पुनर्जन्म की कहानियाँ भी याद थीं।

बच्ची के पिता- दक्षा हमेशा हिंदी में करती है बात

ऑपइंडिया ने सबसे पहले खासा गाँव के सरपंच से संपर्क किया। उन्होंने भी इस घटना के बारे में कुछ जानकारी दी है। उन्होंने कहा, “प्रकृति हमें कभी-कभी वाकई हैरान कर देती है। जिस लड़की के पुनर्जन्म का दावा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, वह हमारे परिवार की ही है। बच्ची ने जो कहा है, वह काफी हद तक सच भी है।”

ऑपइंडिया सरपंच के ज़रिए बच्ची के परिवार तक पहुँचा। लड़की के पिता जेताजी ठाकोर ने हमें दक्षा के बचपन के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि वे खासा गाँव के वलजीभाई पटेल के खेत में मज़दूरी करते हैं। उनके तीन बच्चे हैं। उनका एक बेटा और दो बेटियाँ हैं।

बच्ची के पिता जेठाजी ठाकोर

उन्होंने बताया कि जबसे उनकी छोटी बेटी दक्षा ने जब से बोलना सीखा है, तब से वह हिंदी में ही बात करती है। वह अपनी बहनों से भी हिंदी में ही बात करती है। उसे गुजराती भाषा बोलने में दिक्कत होती है। उसे कुछ कहना भी होता तो वह हिंदी में ही बोलती है। जैसे, “मां मुझे पानी दे”। दक्षा के के माता-पिता अनपढ़ हैं। उनकी माँ गीताबेन को भी हिंदी का कोई ज्ञान नहीं है।

शुरू में दक्षा हिंदी बोलती थी, लेकिन परिवार ने उस पर ध्यान नहीं दिया। जब दक्षा डेढ़ साल की हुई तो वह हिंदी में बात करने लगी, ”मेरी मम्मी कहाँ है… मेरा बिस्तर कहाँ है… मेरे पापा कहाँ है।” दक्षा के माता पिता को पहले उन्हें लगा कि लड़की कुछ शरारत कर रही है। दक्षा को बिना स्कूल गए, बिना किसी तरह के मोबाइल-टीवी, सिनेमा या सोशल मीडिया देखे हिंदी अच्छी तरह से आती है।

ऑपइंडिया ने जब दक्षा के पिता से घटना की शुरुआत के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि शुरू में परिवार ने दक्षा पर ध्यान नहीं दिया। लेकिन समय के साथ वह समझदार और बड़े लोगों की तरह की तरह बात करने लगी। 6 महीने पहले उसने अचानक अपने पिता को बताया कि यह उसका दूसरा जन्म है।

उसने अपने पिता को बताया कि पिछले जन्म में वह अंजार में रहती थी और उसका नाम प्रिंजल था। उसके माता-पिता भी अंजार में ही रहते थे। उसने अपने पिता को बताया कि भूकंप के दौरान छत गिरने से उसकी मौत हो गई। यह बताने के बाद उसके पिता और परिवार समेत गाँव के लोग हैरान रह गए।

दक्षा का परिवार

लड़की के पिता ने बताया, “चार साल की बच्ची को अंजार के बारे में क्या मालूम? उसे तो अपने खुद के जिले के बारे में भी नहीं पता। फिर भी वह अंजार और भूकंप के बारे में बात कर रही है। उसे यह भी पता है कि 24 साल पहले कच्छ में भूकंप आया था और उसमें ही उसकी मौत हो गई थी।”

दक्षा ने कहा- मैं वापस अंजार नहीं जाना चाहती

ऑपइंडिया ने 4 साल की बच्ची दक्षा से भी बात की। दक्षा से जब भूकंप की घटना के बारे में पूछा गया तो उसने बताया, “मैं बालमंदिर में पढ़ने जाती थी। वहाँ से मैं अपनी बहनों के साथ खेलती हुई घर आ रही थी। तभी अचानक जमीन फटने लगी और ऊपर से छत मेरे सिर पर गिर गई और मेरी मौत हो गई।”

दक्षा ने साथ ही में यह भी बताया कि इस भूकंप में उसके माता-पिता की भी मौत हो गई थी। वह अपने परिवार के सदस्यों का नाम नहीं बता पाई, लेकिन उसने बताया कि जब वह अंजार में रहती थी तो उसका नाम प्रिंजल था। बच्ची ने अंजार के परिवार के बारे में भी बताया।

बच्ची दक्षा

बच्ची ने बताया कि अंजार में उसके पिता केक बनाने वाली फैक्ट्री यानी बेकरी में काम करते थे और वे लाल कपड़े पहनते थे। उसकी माँ फूलों वाली साड़ी पहनती थीं और कभी-कभी वे ड्रेस भी पहनती थीं। अंजार में उनका एक बड़ा घर था। उसके माता-पिता उनसे बहुत प्यार करते थे। बच्ची ने बताया वह तीन भाई बहन थे। इनमें सबसे बड़ा भाई था, उसके बाद एक बेटी और दक्ष (प्रिंजल) सबसे छोटी थी। हालाँकि, दक्षा अब दोबारा अंजार नहीं जाना चाहती। वह अपने भाई-बहनों और माता-पिता के साथ यहीं रहना चाहती है।

भगवान ने भेजा है मुझे- दक्षा

ऑपइंडिया से बात करते हुए दक्षा ने बताया कि अब वह दोबारा अंजार नहीं जाना चाहती। उसने बताया, ”मुझे अंजार में डर लगता है। भगवान श्रीराम ने मुझे मना कर दिया है। श्रीराम ने कहा है कि अगर तुम वापस आओगी तो मैं तुम्हें दोबारा जन्म नहीं दूंगा। इसलिए अब मैं अंजार नहीं जाऊँगी। अगर फिर से भूकंप आया तो भगवान मुझे वापस नहीं भेजेंगे। भगवान ने मुझे यहाँ भेजा है और अब उन्होंने कहा है कि वे दोबारा जन्म नहीं देंगे।”

दक्षा की उम्र 4 साल है, वह अशिक्षित परिवार से है, बिना स्कूल गए, बिना किसी तरह का मोबाइल-टीवी सिनेमा या सोशल मीडिया मीडिया देखे, बच्ची का हिंदी बोलना और सभी पुनर्जन्मों के बारे में बात करना अब एक पहेली है। लेकिन बच्ची जिस तरह से बात कर रही है, वह विज्ञान के लिए भी एक पहेली हो सकती है।

फिलहाल दक्षा अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाई कर रही है और उसका सपना सेना में भर्ती होकर दुश्मनों से लड़ना है। ऑपइंडिया से बात करते हुए दक्षा ने कहा कि वह अंग्रेजी में शिक्षा प्राप्त करना चाहती है और दुश्मनों को खत्म करने के लिए सैनिक बनना चाहती है। उसके पिता ने भी बच्ची के भविष्य के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि बच्ची अपनी उम्र से ज्यादा समझदार और परिपक्व है। इसलिए उसे पढाएंगे और उसके सपने को पूरा करने की कोशिश करेंगे।

क्या कहते हैं मनोचिकित्सक?

पुनर्जन्म संभव है या नहीं, इस पर पहले भी कई बार बहस उठ चुकी है और इसके आगे भविष्य में जारी रहने की भी उम्मीद है। चूंकि हिंदू धर्म विज्ञान पर आधारित है, हमारा दर्शन वैदिक विज्ञान और गणित पर आधारित है, इसलिए पुनर्जन्म के विषय को सिरे से नकारना एक भूल होगी।

लड़की से बात करने के बाद ऑपइंडिया ने भावनगर के मनोचिकित्सक डॉ हितेश पटेलिया से बात की। मनोचिकित्सक ने हमें बताया,”पुनर्जन्म का सिद्धांत गलत और निरर्थक नहीं है। इस लड़की के आसपास कोई हिंदी भाषी माहौल नहीं है, कोई टीवी या मोबाइल नहीं है फिर भी वह हिंदी बोलती है, यह पुनर्जन्म का संकेत है। इसलिए बनासकांठा के मजदूर परिवार के बच्चे के पुनर्जन्म का दावा सही भी हो सकता है।”

उन्होंने आगे कहा, “डॉ. ब्रेन वाइज का जन्म 1944 में अमेरिका में हुआ था। उन्होंने पुनर्जन्म पर कई शोध भी किए हैं और उसमें सफलता भी पाई है। इसलिए पुनर्जन्म को मनोविज्ञान में भी माना जाता है। पुनर्जन्म की कुछ घटनाएँ अचेतन मन में जीवित हो सकती हैं, जो कभी-कभी याद आती हैं। इस लड़की के मामले में भी ऐसा ही हुआ है। भगवद गीता में भी पुनर्जन्म को अकाट्य सिद्धांत माना गया है। इसलिए यह पुनर्जन्म का मामला हो सकता है।”

गौरतलब है कि 26 जनवरी, 2001 को कच्छ में भयानक भूकंप आया था। इस भूकंप ने गुजरात समेत पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इस आपदा में हजारों लोग मारे गए थे। चली गई थी। पूरे के पूरे गाँव जमीन में समा जाने की खबरें आई थीं। यह इतनी भयानक घटना थी कि आज भी गुजरात उस घाव को भर नहीं पाया है।

अब्बा-चाचा की बात सुन लड़के ने घर से उठाया चाकू, ताबड़तोड़ वार कर 55 साल के बुजुर्ग को मार डाला: पैगंबर मुहम्मद के अपमान का आरोप, Pak में ईशनिंदा में एक और हत्या

पाकिस्तान में एक लड़के ने ईशनिंदा का आरोप लगा कर एक 55 साल के शख्स की हत्या कर दी है। ये पिछले एक सप्ताह में इस्लामी मुल्क में दूसरी इस तरह की घटना है। उक्त किशोर लड़के ने पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ बोलने का आरोप लगाते हुए उस व्यक्ति को मार डाला। घटना पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त की है। रविवार (23 जून, 2024) को हुई ये घटना पिछले 4 दिनों में दूसरी है और पिछले एक महीने में पाकिस्तान में तीसरी ऐसी घटना है।

ये घटना पंजाब प्रान्त के गुजरात स्थित कुन्जाह में हुई है। ये लाहौर से लगभग 170 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मृतक का नाम नज़ीर हुसैन शाह है, वो भी मुस्लिम समुदाय से ही ताल्लुक रखता है। हालाँकि, वो शिया समाज से है जो पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हैं। शिया और अहमदिया समुदाय पर वहाँ लगातार अत्याचार किया जाता है। उस लड़के ने अपने अब्बा और चाचा को उस शख्स के खिलाफ बोलते हुए सुना था, यही से भड़क कर उसने उसे मार डाला।

वो घर से चाकू लेकर गया और रविवार की दोपहर को ही उसने नज़ीर हुसैन शाह से आमना-सामना हुआ। उसने कई बार उन पर चाकू से वार किया, जिस कारण मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इसके बाद वो लड़का वहाँ से भाग खड़ा हुआ। पुलिस का कहना है कि उसकी गिरफ़्तारी के लिए एक टीम गठित की गई है। उसके अब्बा और चाचा पर भी FIR हुई है। इसी तरह हाल ही में खैबर पख्तूनख्वा के स्वात में मुस्लिम भीड़ ने एक पर्यटक को ही मार डाला था।

उसे पूरे शहर में घसीटा गया, उसके बाद खुलेआम सबके सामने उसे फाँसी पर लटका दिया गया। कुरान के अपमान का आरोप लगा कर ऐसा किया गया। मुहम्मद इस्माइल पर कुरान के कुछ जले हुए पन्ने उसके पास मिलने का आरोप लगाया गया। उसकी गिरफ़्तारी के बाद थाने के बाहर एक बड़ी भीड़ जमा हो गई और गोलीबारी कर के उसे ले गई। उसके शव को जला या गया था। पाकिस्तान में हाल ही में ईसाइयों पर भी हमले हुए हैं। मुल्क में मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून भी बनाया गया है।

CPM नेता शानवास खान ने 50 साल छोटी महिला वकील को घर बुलाया, फिर जबरदस्ती गले लगाया, किस किया, अब लगा रहा जमानत का जुगाड़

केरल के कोल्लम में CPM के एक नेता और वरिष्ठ वकील ने एक जूनियर महिला वकील को घर पर बुलाकर उसका यौन उत्पीड़न किया। CPM नेता ने अपना घर दिखाने के बहाने महिला वकील के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की। महिला ने अब उसके खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवा दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केरल के कोल्लम जिले के CPM नेता और वकील E शानवास खान (74) के खिलाफ एक 24 वर्षीया वकील ने यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज करवाया है। महिला ने बताया है कि वह 14 जून, 2024 को अपनी एक साथ के साथ एक काम के लिए शानवास के घर पर गई हुई थी।

जब महिला वकील वापस जाने लगी तो खान ने उसे हाथ का इशारा देकर बुलाया और पूछा कि क्या वह उनका घर देखना चाहेगी। घर दिखाने के बाद उन्होंने महिला वकील से कहा कि क्या वह जाने से पहले उन्हें किस नहीं करेगी। महिला ने जब मना किया तो खान ने उसे जबरदस्ती पकड़ लिया और फिर माथे पर किस भी किया।

खान ने महिला वकील से यह भी कहा कि वह अगली बार उनके ऑफिस अकेली आए। महिला वकील ने वापस आने के बाद यह बात अपने वरिष्ठ वकील को बताई और फिर इस मामले में FIR दर्ज हुई। महिला वकील ने CPM नेता खान को 20 जून, 2024 सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगने का मौका भी दिया था लेकिन उन्होंने माफ़ी नहीं माँगी।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि CPM नेता खान ने घटना के बाद महिला वकील को फोन करके उससे सुलह-समझौते की कोशिश भी की। खान ने महिला वकील से कहा कि यह सब उन्होंने यह सब उन्हें अपनीं बेटी की तरह समझ कर किया था। खान ने इसके बाद महिला वकील से फोन पर माफी माँगी।

यह भी बताया गया है कि इस मामले में कई वरिष्ठ वकील महिला वकील पर मुकदमा वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। शानवास खान की गिनती केरल के बड़े वकीलों में होती है। वह केरल की बार काउंसिल के अध्यक्ष भी रहे हैं। शानवास खान CPM के बड़े नेता भी हैं और कोल्लम में CPM की ट्रेड यूनियन CITU के अध्यक्ष भी हैं।

उनके खिलाफ पुलिस ने शीलभंग, महिला का यौन उत्पीड़न करने और अश्लील टिप्पणियाँ करने समेत कई धाराओ में मुकदमा दायर किया है। बताया जा रहा है कि शानवास खान अब अंतरिम जमानत की कोशिश कर रहे हैं।

हरदीप सिंह निज्जर ने किया था पाकिस्तान का दौरा, चलाता था आतंकी कैम्प: जिस कनाडा ने उसकी हत्या पर संसद में रखा मौन, वहीं की मीडिया ने खोल दी पोल

‘ग्लोब एन्ड मेल’ ने शनिवार (22 जून, 2024) को खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसकी हत्या पर कनाडा की संसद में 1 मिनट का मौन तक रखा गया। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे निज्जर न सिर्फ इस्लामी आतंकियों से संबंध रखता था, बल्कि उसने पाकिस्तान का दौरा भी किया था। वो भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल थे। 18 जून, 2023 को उसकी हत्या हुई थी। मई 2024 में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के 4 लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया।

हरदीप सिंह निज्जर का जन्म 1970 के दशक में हुआ था। उस दौरान जाँच एजेंसियों से भागे फिर रहे खालिस्तानियों को उसका परिवार भोजन और छत उपलब्ध कराता था। निज्जर शुरू से ही खालिस्तानी विचारधारा से प्रभावित था और सिखों के लिए अलग देश चाहता था। 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह व 17 अन्य की हत्या के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने खालिस्तान के विरोध में बड़ा अभियान चलाया। उसी दौरान छद्म हिन्दू पहचान के साथ निज्जर ने भारत छोड़ कर कनाडा में शरण ली।

पासपोर्ट पर उसने अपना नाम ‘रवि शर्मा’ लिख रखा था। उसने अपनी सिख पहचान छिपाने के लिए पगड़ी को भी अलविदा कह दिया था और दाढ़ी तक कटा ली थी। कनाडा में उसे न सिर्फ स्थायी नागरिकता मिली, बल्कि उस पर वहाँ किसी भी तरह का मामला नहीं चलाया गया। फिर उसने प्लंबिंग का कारोबार शुरू किया, स्थानीय सिख समुदाय में प्रभावशाली व्यक्ति बन गया। गुरु नानक सिख गुरुद्वारा से वो जुड़ा, फिर खालिस्तानियों का नेटवर्क तैयार करने लगा।

हरदीप सिंह निज्जर पर 2015 में ब्रिटिश कोलंबिया में एक आतंकी कैम्प चलाने का आरोप लगा था। उसके खिलाफ जाँच शुरू हुई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। 2021 में उसने शांति की बात करने वालों की आलोचना की, सिखों को हथियार उठाने के लिए उकसाया। उसके समर्थक उसे योद्धा कौम सिख का प्रतिनिधि बताते थे लेकिन भारत सरकार ने उसे ख़तरा माना। न्यूयॉर्क के खालिस्तानी वकील और SFJ के गुरपतवंत सिंह पन्नू के साथ उसके संबंध थे।

अलग सिख देश के लिए SFJ द्वारा चलाए जा रहे खालिस्तानी रेफरेंडम का उसने खुल कर समर्थन किया, उसमें हिस्सा भी लिया। 2007 में लुधियाना में सिनेमा हॉल में बम ब्लास्ट और 2021 में हत्या के एक प्रयास में उसका नाम आया। हिन्दू नेता कमलदीप शर्मा की उसने हत्या कराने की कोशिश की। 2015 में भारतीय एजेंसियों द्वारा सरे के रहने वाले मनदीप सिंह धालीवाल को दबोचा गया, उसने बताया कि उसे निज्जर ने कुछ हत्याओं का टास्क देकर भेजा है, पाकिस्तानी आतंकियों से उसे हथियार और गोला-बारूद मिल रहा है।

धालीवाल के साथियों का कहना है कि 2015 में उसने हथियारों की प्रशिक्षण वाले कैम्प में हिस्सा लिया था। 5 अन्य सिख कट्टरपंथियों को भी इस कैम्प में प्रशिक्षण दिया गया था। गैंगस्टर से आतंकी बने अर्शदीप सिंह गिल उर्फ़ अर्श दल्ला से भी निज्जर के संबंध थे। 1995 में जगतार सिंह तारा को बेअंत सिंह हत्याकांड में आजीवन कारावास हुई, लेकिन 2004 में वो हाथ से ही 94 फुट का टनल खोद कर भाग खड़ा हुआ और पाकिस्तान चला गया। वो वहीं से ‘खालिस्तान कमांडो फोर्स’ और ‘खालिस्तान टाइगर फ़ोर्स’ चलाता रहा।

2013 में हरदीप सिंह निज्जर भी पाकिस्तान पहुँचा और उससे मिला। पाकिस्तान में एक गुरुद्वारा में दोनों साथ दिखे, जिसकी तस्वीर भी सामने आई। ये लाहौर की फोटो थी। तारा ने KTF चलाने के लिए निज्जर को भी देना चाहा था। भारत का मानना है कि वो उसका मुखिया बन भी गया था। अब जब कनाडा के राष्ट्रपति जस्टिन ट्रूडो भारत पर उसकी हत्या का आरोप लगाते थे, कनाडा के ही मीडिया संस्थान बता रहे हैं कि वो आतंकी गतिविधियों में लिप्त था।

‘ये हमारी परंपरा नहीं’: जिस ताजिकिस्तान में 90 लाख मुस्लिम, उसने हिजाब और ‘ईदी’ पर लगाया बैन, पहना तो होगा लाखों का जुर्माना

95% से अधिक मुस्लिम आबादी वाले मध्य एशियाई देश ताजिकिस्तान ने हिजाब लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। ताजिकिस्तान ने हिजाब के साथ ही ईद को लेकर भी नए प्रतिबंध लगाए हैं। हिजाब को लेकर ताजिकिस्तान ने जुर्माने का भी ऐलान किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में इन नए प्रतिबंधों को लेकर नया कानून पास किया गया है। इस कानून को 19 जून, 2024 को ताजिकिस्तान की संसद के ऊपरी सदन से मंजूरी मिल गई। इस कानून के तहत ताजिकिस्तान में हिजाब की बिक्री, उसे पहनना या उसे बढ़ावा देने अपराध होगा।

ताजिकिस्तान के इस नए कानून में हिजाब को ‘विदेशी संस्कृति’ बताया गया है। यदि ताजिकिस्तान में अब कोई हिजाब पहनता या बेचता है तो उसे 750 डॉलर (₹62,000) से लेकर 3724 डॉलर (₹3.10 लाख) तक का जुर्माना देना पड़ सकता है।

ताजिकिस्तान ने इस कानून में ईद के त्यौहार पर बच्चों को दिए जाने वाले पैसे, जिसे ‘ईदी’ भी कहा जाता है, पर भी रोक लगा दी है। इसे अब बच्चों को नवरोज, ईद और बकरीद के त्यौहार पर नहीं दिया जा सकेगा। ताजिकिस्तान के इस फैसले पर दुनिया भर में हैरानी जताई जा रही है, क्योंकि यह लगभग पूर्णतया मुस्लिम राष्ट्र है।

ताजिकिस्तान की आबादी लगभग 1 करोड़ है, इसमें से लगभग 95 लाख मुस्लिम हैं। इसके बाद भी ताजिकिस्तान की सरकार ने यह निर्णय लिया है। दरअसल, ताजिकिस्तान की सरकार ने यह निर्णय अपने देश की स्थानीय परम्पराओं को बचाने के लिए लिया है। उसने हिजाब पहनने को खुले में मजहब का प्रदर्शन माना है।

ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति एमोमाली रहमोन लगातार देश को धर्मनिरपेक्ष बनाने में जुटे हुए हैं। वह 1994 से ही ताजिकिस्तान की सत्ता पर काबिज हैं। ताजिकिस्तान इससे पहले सोवियत संघ का हिस्सा था। सोवियत संघ में भी धर्म के खुले में प्रदर्शन और बढ़ावे को रोकता था और ताजिकिस्तान में भी अब यही प्रयास हो रहा है।

बछड़े का सिर मिलने के बाद हिन्दुओं ने सैकड़ों की संख्या में किया प्रदर्शन, थाने-कलेक्ट्रेट का घेराव: पुलिस बोली – कुत्ता लेकर आया था

छत्तीसगढ़ के दुर्ग में गाय के बछड़े का कटा हुआ सिर मिलने के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है, हिन्दू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया है। मामला गया नगर इलाके का है। सोमवार (24 जून, 2024) की सुबह हिन्दू कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट का घेराव भी किया। ‘हिन्दू युवा मंच’ और ‘राष्ट्रीय बजरंग दल’ के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए समाहरणालय का घेराव किया। ये लोग पहले इंद्रा मार्केट में इकट्ठे हुए, इसके बाद रैली निकालते हुए DM ऑफिस तक पहुँचे।

भिलाई के SSP सुखनंदन राठौड़ का कहना है कि CCTV फुटेज के आधार पर जाँच की जा रही है, बछड़े के सिर को लैब टेस्ट के लिए भेजा गया है। उन्होंने कहा कि मामला सिद्ध होने पर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। पिछली रात भी इसे लेकर जब तक विरोध प्रदर्शन हुआ। थाने का घेराव करने पहुँचे हिन्दू कार्यकर्ताओं ने इसे मुस्लिमों की करतूत बताया। उन्हें शांत कराने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया। पुलिस ने बताया कि एक कुत्ता मरे हुए बछड़े का सिर लेकर आया था।

पुलिस-प्रशासन की मानें तो इसी घटना को प्रदर्शनकारियों ने दूसरे रूप में ले लिया। गया नगर पानी की टंकी के पास ये सिर मिला था। पटेल चौक पर इसके लिए विरोध प्रदर्शन हुआ। सूचना मिलने के बाद मोहन नगर थाने की पुलिस पहुँची और सिर को जब्त कर लिया। ‘दैनिक भास्कर’ की टीम का भी कहना है कि बछड़े का सिर किसी ने काट कर नहीं फेंका बल्कि जहाँ मरे हुए जानवरों को फेंका जाता है वहाँ से कुत्ता उसे लेकर गया नगर लेकर आ गया था।

गिरधारी नगर स्थित वार्ड संख्या 4 में बछड़े का ये सिर मिला था। प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प में पुलिस निरीक्षक को चोटें भी आई हैं। CCTV फुटेज से ही पता चला कि बछड़े का सिर कुत्ता लेकर आया है। दुर्ग के शीला होटल से कलेक्ट्रेट तक हिन्दुओं ने रैली निकाली। ASP अशोक झा ने कहा कि शाम के साढ़े 7 बजे इसकी सूचना मिलने के बाद पुलिस ने जब गोवंशीय सिर को जब्त करने का प्रयास किया तो उसे लेकर लोग प्रदर्शन करने लगे। मामले की शीघ्र विवेचना के लिए एक टीम गठित की गई है।

‘तू क्यों नहीं करता पत्रकारिता?’: नाना पाटेकर ने की ऐसी खिंचाई कि आह-ओह करने लगे राजदीप सरदेसाई, अभिनेता ने पूछा – तुझे सिर्फ बुरा ही क्यों दिखता है?

सौरभ द्विवेदी के ‘The Lallantop’ के शो ‘गेस्ट इन द न्यूज़रूम’ में बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता नाना पाटेकर इंटरव्यू देने के लिए पहुँचे। लगभग 4 घंटे तक नाना पाटेकर वहाँ रहे। इसका वीडियो रविवार (23 जून, 2024) को ‘दी लल्लनटॉप’ के YouTube चैनल पर प्रकाशित किया गया। नाना पाटेकर ने इस वीडियो में कई मुद्दों पर बात की, लेकिन उसमें सबसे रोचक रहा उनके द्वारा राजदीप सरदेसाई की खिंचाई करना। दर्शकों में बैठे राजदीप सरदेसाई ने माइक लेकर उनसे संवाद किया।

‘इंडिया टुडे’ में कंसल्टिंग एडिटर के पद पर कार्यरत राजदीप सरदेसाई ने न्यूज़रूम में पहुँचने के बाद मराठी में कुछ देर तक संवाद किया फिर सौरभ द्विवेदी को ‘हिंदीभाषी संसार का’ बता दिया। इस पर नाना पाटेकर ने कहा कि तमिल, उर्दू, कन्नड़, पंजाबी हो या हिंदी – जिस दिन हम तय करेंगे कि ये एक है, सब कुछ आसान हो जाएगा। उन्होंने बताया कि अपनी सहेली गिरिजा ओक की सलाह पर वो यहाँ आए हैं, गिरिजा ओक ने बताया था कि सौरभ द्विवेदी उनके दोस्त हैं।

राजदीप सरदेसाई ने कहा कि बतौर संपादक सौरभ द्विवेदी अस्थायी हैं, उनका सपना अनुराग कश्यप की तरह फिल्म निर्माता-निर्देशक बनने का है। इसके बाद नाना पाटेकर ने सौरभ द्विवेदी के बोलने के अंदाज़ और उनके संबोधन की प्रशंसा की। इस पर राजदीप सरदेसाई ने कहा, “सौरभ द्विवेदी की हिंदी बहुत अच्छी है, इनकी पूरी टीम बहुत अच्छी है। मैं यहाँ आता हूँ क्योंकि आजकल न्यूज़ की दुनिया में इतना शोरगुल है कि यहाँ शांति मिलती है। ये मुझे पसंद है।”

राजदीप सरदेसाई ने कहा कि ‘The Lallantop’ ने वाकई में पत्रकारिता के नियम को निभाया है, जिस पर नाना पाटेकर पूछ बैठे कि तू क्यों नहीं इसको फॉलो करता है? इस पर राजदीप सरदेसाई ‘आहाहाहा-ओहोहोहो’ करने लगे और कहा कि वो प्रयास कर रहे हैं। नाना पाटेकर ने पूछा कि तुझे बुरे के सिवा अच्छा क्यों नहीं देखना, तू अपना ख्याल क्यों नहीं रखता? उन्होंने इस दौरान राजदीप के पिता दिलीप सरदेसाई की बल्लेबाजी की तारीफ़ की और कहा कि राजदीप की प्रोफेसर माँ के साथ भी उनके अच्छे रिश्ते हैं।