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‘काश निर्भया की जगह तुम होती, एहसान मानो अभी तक जिंदा हो…’: स्वर्ण मंदिर में योग करने वाली लड़की को मिल रही रेप-हत्या की धमकी, गुजरात पुलिस ने सुरक्षा दी

योग दिवस (21 जून) के मौके पर श्री हरमिंदर साहिब गुरुद्वारे (स्वर्ण मंदिर) के भीतर जाकर ‘शीर्षासन’ करने वाली इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर अर्चना मकवाना के विरुद्ध अमृतसर में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने शिकायत दर्ज की है। संगठन ने अर्चना पर धार्मिक भावनाएँ आहत करने का आरोप लगाकर उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

इसके अलावा उनकी तस्वीरें वायरल होने के बाद उन्हें रेप और जान से मारने की धमकियाँ भी मिल रही हैं। इस सबंध में इन्फ्लुंसर ने खुद अपने सोशल मीडिया पर आकर बताया। साथ ही जानकारी दी कि इन धमकियों के मद्देनजर उन्हें गुजरात की वडोदरा पुलिस ने बिन माँगे सुरक्षा मुहैया कराई है जिसके लिए वह उनकी आभारी है। अपने पोस्ट में उन्होंने वडोदरा पुलिस के साथ गुजरात सरकार का भी धन्यवाद किया है। साथ ही अपने फॉलोवर्स को बताया है कि वो अभी सुरक्षित हैं।

बता दें कि 23 जून को अर्चना मकवाना की वीडियो वायरल होने के बाद उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ था। एसजीपीसी प्रमुख हरजिंदर सिंह धामी ने कहा था कि इस मामले में पुलिस आयुक्त को शिकायत भेजी गई है। उन्होंने एक बयान में कहा था कि किसी को भी स्वर्ण मंदिर में सिखों के आचरण के खिलाफ काम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती, मगर कुछ लोग जानबूझकर इस पवित्र स्थान की पवित्रता और ऐतिहासिक महत्व को नजरअंदाज करते हैं और आपत्तिजनक कार्य करते हैं।

वहीं मकवाना का कहना था कि उन्होंने इस मंशा के साथ स्वर्ण मंदिर में योग नहीं किया जैसा लोगों ने समझ लिया । उन्होंने सिर्फ पंजाब में योग को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए ऐसा किया था, मगर उनकी बात को गलत ले लिया गया। अपनी एक वीडियो में उन्होंने हाथ जोड़कर माफी तक माँगी थी। बावजूद इसके उन्हें धमकियाँ आने लगीं।

अर्चना ने कुछ स्क्रीनशॉट भी अपनी स्टोरी पर लगाए हैं जिसमें उन्हें मैसेज किया गया है- “काश निर्भया की जगह तुम होतीं”, “ये तो एहसान मानो अभी तक जिंदा हो वरना किसी ने अभी तक मार देना था तुमको।”

उल्लेखनीय है कि इस मामले में सिर्फ अर्चना मकवाना के खिलाफ कार्रवाई की बात नहीं हो रही बल्कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी), सर्वोच्च गुरुद्वारा निकाय ने भी अपने तीन कर्मचारियों को अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करने के लिए निलंबित कर दिए जाने की भी खबर है।

चर्च में फायरिंग, यहूदियों के धर्मस्थल को जलाया, पादरी का काटा गला: आतंकी हमले में रूस के 15 पुलिसकर्मियों की मौत, 6 आतंकवादी भी ढेर

रूस में रविवार (23 जून 2024) को दक्षिणी प्रांत दागेस्तान के दो शहरों (माखचकाला और डर्बेंट) में आतंकी हमला हुए। घटना में 15 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की मौत हो गई, पादरी का सिर कलम कर दिया गया और 25 से ज्यादा घायल बताए जा रहे हैं। जवाबी कार्रवाई में रूस के सुरक्षाबलों ने भी 6 बंदूकधारियों को मार गिराया है।

जानकारी के मुताबिक, रविवार को आतंकियों ने दो ऑर्थोडॉक्स चर्चों, एक यहूदी प्रार्थना घर और एक पुलिस चौकी पर हथियारों से लैस होकर हमला किया। अटैक में मरने वालों में ऑर्थोडॉक्स चर्च के पादरी भी थे। आतंकियों ने उन्हें अलग से गला काटकर मारा है। उनकी उम्र 66 साल थी। वह 40 साल से चर्च में सेवा दे रहे थे। इसके अलावा चर्च के बाहर तैनात सुरक्षा गार्ड को भी मौत के घाट उतार दिया गया।

वहीं रूसी यहूदी कॉन्ग्रेस ने इस संबंध में बताया है कि डर्बेंट और माखचकाला में एक-एक सिनेगॉग पर हमला किया गया है। डर्बेंट के सिनेगॉग में जब हमला किया गया, उसके 40 मिनट पहले प्रार्थना हो चुकी थी और वहाँ कोई मौजूद नहीं था। हमलावरों ने मोलोटोव कॉकटेल बम से सिनेगॉग (यहूदियों का धर्मस्थल) की बिल्डिंग में आग लगा दी। इस दौरान बाहर खड़े पुलिसकर्मी और सुरक्षा गार्ड हमले में मारे गए।

बता दें कि इस पूरे हमले पर अभी किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन TASS ने बताया कि हमलावर एक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन के सदस्य थे। वहीं रूस ने हमलों के पीछे पीछे यूक्रेन और NATO देशों को जिम्मेदार ठहराया है। दागिस्तान के नेता अब्दुलखाकिम गडजियेव ने टेलीग्राम पर लिखा, “इसमें कोई शक नहीं है कि ये आतंकी हमले किसी न किसी तरह से यूक्रेन और NATO देशों की खुफिया सेवाओं से जुड़े हैं।”

मालूम हो कि इससे पहले रूस में मार्च में आतंकी हमला हुआ था। उस हमले में 143 लोगों की मौत हो गई थी। हमले की जिम्मेदारी ISIS-K ने ली थी। हालाँकि, रूस ने इसमें यूक्रेन की मिलीभगत होने के आरोप लगाए थे। इस बार अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन ये सामने आया है कि दागेस्तान रूस का एक बड़ी मुस्लिम आबादी वाला प्रांत है, जो चेचन्या के पड़ोस में है। क्षेत्र में 14, 25, 26 जून को तीन दिनों के लिए शोक रखा गया है।

किसानों के आंदोलन से तंग आ गए स्थानीय लोग: शंभू बॉर्डर खुलवाने पहुँची भीड़, अब गीदड़-भभकी दे रहे प्रदर्शनकारी

पंजाब-हरियाणा सीमा पर स्थित शंभू बॉर्डर महीनों से जारी किसानों के कथित धरना-प्रदर्शन की जगह पर उस समय माहौल बिगड़ गया, जब आसपास के गाँवों के व्यापारी और किसान मौके पर पहुँच गए। उन्होंने किसान नेताओं से मुलाकात कराने और रोड को आँशिक तौर पर खोलने की बात कही। इस दौरान करीब 100 की संख्या में लोग पहुँचे। वहीं, धरना स्थल पर मौजूद किसानों ने आरोप लगाया कि धरनास्थल पर पहुँचे लोगों ने मंच को कब्जाने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि अंबाला से भी कुछ व्यापारी इस दौरान पहुँचे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्यापारियों ने करीब एक सप्ताह पहले किसान नेताओं को एक माँग पत्र सौंपा था, जिसका वो जवाब चाहते थे। इस माँग पत्र के जवाब को लेकर वो धरना प्रदर्शन की जगह यानी शंभू बॉर्डर पर पहुँचे, जिसके बाद माहौल तनाव पूर्ण माहौल हो गया। व्यापारियों ने शंभू बॉर्डर खुलवाने की माँग की और मंच तक पहुँच गए। इसके बाद किसान भड़क गए और उन पर मंच पर कब्जा जमाने का आरोप लगा दिया। किसानों ने इसकी शिकायत शंभू पुलिस चौकी में की। उसके बाद अंबाला शहर अनाज मंडी में मीडिया बुलाई, जिसमें साफ शब्दों में कहा कि आंदोलन खराब नहीं होना चाहिए। आंदोलन खराब करने वाला खुद भुगतेगा।

आपको बता दें कि किसानों का आंदोलन 13 फरवरी से चल रहा है। वह एमएसपी की माँग को लेकर दिल्ली कूच कर रहे थे, लेकिन शंभू बॉर्डर पर ही उनका रुकना पड़ा। दरअसल, उनको रोकने के लिए बॉर्डर पर कंकरीट की दीवार बना दी गई थी। किसान वहां से आगे ही नहीं बढ़ पाए, तो शंभू बॉर्डर पर मंच बना लिया। किसानों का आरोप है कि इसी मंच पर कब्जा जमाने के लिए रविवार को सौ व्यापारी वहाँ पहुँचे थे। उनकी किसानों से जमकर बहस हो गई थी।

तेपला रोड के गाँव निवासी मिंटू गिल, सोनू व अन्य ने बताया कि पिछले चार महीनों से ज्यादा समय से किसान जत्थेबंदियों की ओर शंभू बॉर्डर पर धरना दिया जा रहा है। धरने की वजह से नेशनल हाईवे बंद है। इस वजह से आसपास के तीन चार दर्जन गाँवों के लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। अगर कोई बीमार पड़ हो जाता है तो उसे अस्पताल ले जाने के लिए अंबाला हमें सबसे नजदीक है, लेकिन धरने की वजह से अंबाला नहीं जा सकते। ग्रामीणों ने बताया कि चार दिन पहले एक गर्भवती महिला की मौत हो गई है। लोगों का रोजगार खत्म हो गया है। बच्चे स्कूल नहीं जा सकते। अपनी परेशानियों को लेकर 16 जून को लोगों ने किसान नेता सवरन सिंह पंधेर से मिलकर उन्हे माँगपत्र सौंपा था। पत्र में कम से कम दोपहिया वाहन के लिए रास्ता खोलने में की माँग की थी। एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी रास्ता नहीं दिया गया।

लोगों ने आरोप लगाया कि दो किसान नेताओं ने पूरे पंजाब को सरकार के पास बेच दिया है। अब गाँव के लोगों की बात तक नहीं सुनी जा रही है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर इस सप्ताह रास्ता नहीं खोला तो वे हजारों की संख्या इकट्ठा होकर तेपला व शंभू रोड को पूरी तरह बंद कर देंगे। किसान नेता मान सिंह व सुरिंदर सिंह ने कहा कि शंभू बॉर्डर पर रास्ते केंद्र की भाजपा सरकार ने रोक रखा है, हमने नहीं। हम अपनी माँगों को लेकर सिर्फ दिल्ली जाना चाहते हैं। सरकार हमें जाने नहीं देती।

ट्रॉली में भर-भर कर जब्त हुए पत्थर, ईदगाह बवाल में छतों पर थी पूरी तैयारी: राजस्थान में अब तक 65 के खिलाफ FIR, 51 गिरफ्तार

राजस्थान के जोधपुर में शुक्रवार (21 जून 2024) को बवाल हो गया। तनाव को देखते हुए रविवार (23 जून 2024) को प्रशासन ने हिंसा के आरोपितों के खिलाफ तलाशी अभियान चलाया और ड्रोन से इलाके की छानबीन की, जिसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों की आँखें खुली की खुली रह गई, क्योंकि कई छतों पर भारी मात्रा में पत्थर मिले हैं, जिनका इस्तेमाल हिंसा के दौरान पत्थरबाजी में हुआ था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते शुक्रवार को जोधपुर के सूरसागर थाना इलाके में स्थित एक ईदगाह का गेट हिंदू मोहल्ले की तरफ खोले जाने का विरोध हुआ, तो मुस्लिमों ने जमकर पथराव किए। इस पथराव में कई गाड़ियाँ टूट गई, तो एक दुकान को भी आग के हवाले कर दिया गया। हिंसा की इन घटनाओं में एक महिला की आँख की रोशनी चली गई। इस मामले में अब तक 65 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, जिसमें से 51 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। इस बीच, पूरे इलाके में तनाव बरकरार है।

इस तनाव के बीच, पुलिस प्रशासन ड्रोन के जरिए पूरे क्षेत्र में स्थिति पर नियंत्रण बनाए हुए हैं। इस बीच सामने आया कि लोगों ने घरों पर पथराव करने के लिए पत्थर जमा कर रखे थे। पुलिस के अनुसार यह पत्थर करीब दो ट्रॉली थे। इस खुलासे के बाद चर्चा शुरू हो गई है कि विवाद को लेकर लोगों ने पहले ही पथराव करने की प्लानिंग कर रखी थी। इस दौरान जोधपुर के 5 थाना क्षेत्रों में धारा 144 लागू होने के कारण क्षेत्र रविवार को सन्नाटा छाया रहा। वहीं पुलिस बलों ने पूरी स्थिति पर नियंत्रण रखा।

पुलिस के अनुसार चिन्हित मकान पर करीब दो ट्रॉली पत्थर बरामद हुआ है। इस मामले में पुलिस ने घरों के लोगों को नामजद किया है और उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी हैं। घरों के ऊपर पत्थर मिलने की घटना से चर्चा तेज हो गई है कि लोगों ने इस विवाद को देखते हुए पहले से ही पथराव करने की प्लानिंग बना ली थी।

सूरसागर क्षेत्र में पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ की घटना को देखते हुए पुलिस आयुक्त ने पूरे इलाके में पुलिस तैनात कर धारा 144 लागू कर दी। इसको लेकर अब तक पुलिस 51 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन के अधिकारी पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। इसके अलावा ड्रोन के जरिए पूरे इलाके की छानबीन की जा रही हैं। हिंसा के इस मामले में अब तक 51 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, तो 65 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।

‘न झुकेंगे, न दबेंगे’: समुद्र में चीनी नौसैनिकों की हिंसा के बाद फिलीपींस के राष्ट्रपति ने ड्रैगन को चेताया, जानिए क्यों आमने-सामने आ गए हैं दोनों देश

फिलीपींस और चीन के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ गया है। फिलीपींस के राष्ट्रपति फ़ेरदिनानद मारकोस जूनियर ने चीन को खरी-खरी सुनाई है। उन्होंने कहा कि वो युद्ध नहीं चाहते, लेकिन किसी भी अत्याचारी के सामने झुकेंगे भी नहीं। बता दें कि ये लड़ाई साउथ चाइना सी को लेकर है, जहाँ हाल ही में फिलीपींस की नौसेना और चीन कोस्ट गार्ड के बीच हिंसक झड़प हुई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की रक्षा के रूप में हम फिलीपींस के सिद्धांतों का पालन करते हैं और शांति से मसला हल करने में विश्वास रखते हैं।

उन्होंने रविवार को फिलीपींस साउथ चाइना सी फोर्सेज के पलवान द्वीप स्थित मुख्यालय का दौरा भी किया। इस दौरान उन्होंने 80 सेलर्स को सम्मानित भी किया। उन्होंने कहा कि हम किसी के भी दबाव में नहीं आएँगे, न झुकेंगे। राष्ट्रपति फ़ेरदिनानद मारकोस जूनियर ने अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार, फिलीपींस अपने राष्ट्रीय हितों के समर्थन में अपनी स्वतंत्रता और अधिकारों का प्रयोग जारी रखने की प्रतिज्ञा लेते हुए कहा कि हम युद्ध शुरू नहीं करेंगे, लेकिन दबेंगे भी नहीं। चीन ने अपने कोस्ट गार्ड्स को 2021 के कानून के तहत विदेशी जहाजों पर खतरनाक हमलों की अनुमति दे दी है, जिसके बाद तनाव बढ़ गया है।

बता दें कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच सेकंड थॉमस शॉल (एक जलमग्न चट्टान) के पास हिंसा भड़क गई थी। ये पलवान से करीब 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, वहीं चीन के नज़दीकी जमीन से 1000 किलोमीटर की दूरी पर है। चीनी नौसेना ने इस दौरान फिलीपींस के कई सैनिकों को घायल कर दिया और उनके 2 नावों को भी क्षति पहुँचाई। इस दौरान उन्होंने कुल्हाड़ी, छुरा और हथौड़ा ले रखा था। फिलीपींस के एक सेलर को इस हिंसा में अपना अंगूठा गँवाना पड़ा।

साथ ही चीन के कोस्ट गार्ड्स ने न सिर्फ फिलीपींस की नावों और हथियारों को क्षतिग्रस्त किया, बल्कि उनके कई उपकरण चुरा कर भी ले गए। चीन ने इस झड़प के लिए फिलीपींस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उसके कोस्ट गार्ड्स ने तो पेशेवर और नियंत्रित तरीके से व्यवहार किया। चीन अपनी जमीन से हजारों किलोमीटर दूर स्थित समुद्री स्थलों पर भी दावा ठोकता रहा है। अमेरिका-EU समेत कई देशों ने चीन की निंदा की है। फिलीपींस ने इसे ‘हथियारबंद हमले’ की श्रेणी में नहीं डाला है, वरना करार के तहत अमेरिका को फिर मदद के लिए आना होगा।

‘PM मोदी ने किया जी अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन का उद्घाटन, गिर गई उसकी दीवार’: News24 ने फेक न्यूज़ परोस कर डिलीट की ट्वीट, झूठ फैलाने में लगा कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम

अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 दिसंबर 2023 को किया, जिसकी दीवार 6 माह के अंदर गिर गई। इस दावे के साथ एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल किया जा रहा है। कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम इसे मोदी सरकारी की नाकामी बता रहा है, तो कुछ लोग सिर्फ राजनीतिक वैमनस्यता के नाम पर इसे फैला रहे हैं। चूँकि मामला अयोध्या जैसी धार्मिक नगरी से जुड़ा है, ऐसे में अयोध्या के विकास को लेकर तंज कस कर ये लोग लोगों में गुस्सा भी भर रहे हैं। हालाँकि अब साफ हो गया है कि ये दावा न सिर्फ भ्रामक है, बल्कि तथ्यात्मक रूप से गलत भी है।

सचिन गुप्ता नाम के एक्स यूजर ने एक्स पर दावा किया कि अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन की 20 मीटर की बाउंड्रीवॉल एक ही बारिश में ढह घई। 30 दिसंबर 2023 को पीएम नरेंद्र मोदी ने इस रेलवे स्टेशन का उद्घाटन किया था। अपना पसंदीदा विषय पाते ही मोदी विरोध में कुँठित कथित पूर्व पत्रकार और अब यूट्यूबर अजित अंजुम ने तुरंत इसे मोदी सरकार की विफलता से जोड़ दिया और लिखा, “मोदी राज में ढहता विकास।”

वैसे, ये पोस्ट सचिन गुप्ता ने 12.40 बजे एक्स पर पोस्ट की थी और ठीक उसी समय अजित अंजुम ने भी इसे पोस्ट किया। ऐसे में ये सिर्फ इत्तेफाक ही है, इस बात पर संशय हो सकता है। हालाँकि इस पोस्ट को लेकर उत्तर रेलवे द्वारा जवाब भी आया है, जिसे न तो अजित अंजुम ने आगे बढ़ाना चाहा और न ही अपने द्वारा किया गया पोस्ट ही डिलीट किया।

उत्तरी रेलवे ने इस दीवार के गिरने की पूरी जानकारी देते हुए लिखा, “1-सूचित किया जाता है कि वीडियो में दिखाई गई दीवार मुख्य स्टेशन भवन का हिस्सा नहीं बल्कि रेलवे और निजी भूमि के बीच है। 2. दूसरे छोर से निजी लोगों द्वारा खुदाई कार्य करने और निजी क्षेत्र में जलभराव के कारण यह ढह गई। 3. रेलवे तुरंत कार्रवाई करेगी।”

खास बात ये है कि न्यूज24 जैसा चैनल भी इस झूठ को आगे बढ़ाने में लगा रहा, जबकि पीआईबी तक ने ये बात साफ कर दी है कि ये दावा बिल्कुल गलत है। हालाँकि बाद में न्यूज24 ने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया।

क्या है सच्चाई?

अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन से जुड़े जिस दीवार के दिसंबर 2023 में बने होने का दावा किया जा रहा है, वो दावा पूरी तरह से गलत है। दीवार पुरानी है और मुख्य रेलवे स्टेशन की संचरना से अलग है। ये दीवार आम रिहाइशी इलाके और रेलवे की भूमि को अलग करने के लिए बहुत पहले से बनी थी। दीवार की दूसरी तरफ की निजी भूमि पर खनन के चलते वहाँ गड्ढा हो गया था और पानी भरने की वजह से पुरानी दीवार गिर गई। इसका अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन से कोई लेना देना नहीं है और न ही दीवार दिसंबर 2023 में बनी।

ऐसे में इस वीडियो को गलत तथ्यों के साथ शेयर किया गया है, जिसके पीछे एक खास गैंग, एक खास इकोसिस्टम दिखाई पड़ता है। इस पोस्ट के माध्यम से लोगों में सरकार के प्रति गुस्सा भरने की कोशिश की जा रही है। गलत सूचना के साथ ऐसा करना कानूनन अपराध भी है।

गुदाद्वार और मुँह में डाल दिया लिंग, पाँव पर गिरा फिर भी नहीं पसीजा दिल… बाप-भाई से भी भयानक सूरज रेवन्ना की करतूतें, पार्टी कार्यकर्ता को ही बनाया शिकार

पूर्व प्रधानमंत्री HD देवगौड़ा का परिवार लगातार आ रहे दुष्कर्म के मामलों के कारण विवादों में है। उनके बेटे रेवन्ना पर बलात्कार का आरोप लगा, इसके बाद पोते प्रज्वल पर भी यही आरोप लगा, अब एक अन्य पोते सूरज पर तो पार्टी के पुरुष कार्यकर्ता के साथ ही कुकर्म करने का आरोप लगा है। सूरज और प्रज्वल, दोनों ही रेवन्ना के बेटे हैं। तीनों पिता-पुत्र फ़िलहाल जेल में बंद हैं। इनकी पार्टी JDS कर्नाटक में कई बार सत्ता में रह चुकी है। देवगौड़ा के एक अन्य बेटे HD कुमारस्वामी मुख्यमंत्री रहे हैं।

सूरज रेवन्ना ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ता के साथ उसकी आपत्तियों के बावजूद सेक्स किया और साथ ही कहा कि अगली बार सब कुछ और अच्छे से होगा। कर्नाटक के हासन जिले के गन्नीकडा स्थित अपने फार्महाउस में सूरज रेवन्ना ने पार्टी कार्यकर्ता के साथ कुकर्म किया। ये घटना 16 जून, 2024 की है। इस दौरान सूरज रेवन्ना ने पीड़ित से कहा कि ये उनके लिए उसके साथ पहली बार सेक्स का अनुभव है, अगली बार वो और अच्छे से करेंगे।

साथ ही पीड़ित को नौकरी का भी झाँसा दिया गया। 16 जून को सूरज ने पीड़ित को दोपहर के 2 बजे कहा कि वो शाम के 6-6:30 के बीच उनके फार्महाउस पर आ जाए। जैसे ही वो पहुँचा, दर्ज ने उससे दरवाजा बंद करने को कहा और उसके कंधे पर अपना हाथ रख दिया। इसके बाद वो उसके कानों को सहलाने लगे और उसके गाल पर किस कर लिया। उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ता के होंठों को काटना शुरू कर दिया। FIR के अनुसार, पीड़ित ने विरोध किया तो सूरज रेवन्ना ने उसकी हत्या तक की धमकी दे डाली।

इसके बाद उसके मुँह और गुदाद्वार का इस्तेमाल करते हुए सूरज रेवन्ना ने सेक्स किया। पीड़ित इस दौरान उनके पाँव पड़ कर माफ़ी माँगता रहा, लेकिन सूरज रेवन्ना का दिल नहीं पसीजा। उन्होंने कहा कि अगर पीड़ित जब वो बुलाते हैं तब आ जाता है और मैसेजों का सही से जवाब देता है तो उसे नौकरी दी जाएगी। पीड़ित इसके बाद अवसाद में चला गया और उसने हनुमनहल्ली के रहने वाले सूरज रेवन्ना के सहायक शिवकुमार को इसके बारे में बताया। शिवकुमार ने उलटे उस पर ही पैसे लेकर मामला शांत करने का दबाव बनाया और उसे ब्लैकमेल किया।

अनुपम खेर के दफ्तर में चोरी करने वाले निकले माजिद शेख और दलेर बहरीम खान: मुंबई पुलिस ने दोनों को दबोचा, ले गए थे कैश से भरी तिजोरी

फिल्म अभिनेता अनुपम खेर के ऑफिस का ताला तोड़कर चोरी करने के आरोप में पुलिस ने दो सीरियल चोरों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों की पहचान माजिद शेख और दलेर बहरीम खान के रूप में हुई है। दोनों ने बुधवार (19 जून 2024) की रात जोगेश्वरी इलाके में स्थित एक्टर के ऑफिस में चोरी की थी। इतनी जल्दी कार्रवाई होने पर अनुपम खेर ने मुंबई पुलिस को धन्यवाद दिया है और उनके लिए एक पोस्ट भी लिखा है। अनुपम खेर ने अपने इंस्टा अकाउंट पर चोरों की एक फोटो पोस्ट की है। इस फोटो में पुलिस ने चोरों को पकड़ रखा है और वे पुलिस थाने के सामने खड़े हैं।

अनुपम खेर ने अपने नोट में लिखा, “मुंबई पुलिस के प्रति मेरा हार्दिक आभार और प्रशंसा। मेरे दफ्तर में तोड़फोड़ करने वाले, मेरी तिजोरी और ‘मैंने गांधी को नहीं मारा’ के नेगेटिव को चुराने वाले दोनों चोरों को पकड़ लिया गया है। यह सब 48 घंटों के भीतर किया जाना पुलिस की अद्भुत दक्षता को दर्शाता है!! जय हो!”

बता दें कि अनुपम खेर के मुंबई के वीरा देसाई रोड स्थित ऑफिस से बुधवार की रात चोरी हुई थी। चोर उनके ऑफिस से कैश से भरी तिजोरी और फिल्म के नेगेटिव चुरा ले गए। जिसके बाद एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी, जिस पर पुलिस ने आश्वासन दिया था कि वे आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ लेंगे। इसक बाद 22 जून को पुलिस ने माजिद शेख और मोहम्मद दलेर बहरीम खान को अरेस्ट किया।

मुंबई पुलिस ने बताया कि दोनों सीरियल चोर हैं। चोरी करने के लिए ऑटोरिक्शा का इस्तेमाल करते हैं। दोनों ने अंबोली इलाके में वीरा देसाई रोड पर अनुपम खेर के ऑफिस का ताला तोड़ा था। वहाँ से एक्टर की कंपनी द्वारा निर्मित एक फिल्म के निगेटिव और 4.15 लाख रुपए चुरा लिए। इन चोरों उसी रात विले पार्ले में भी चोरी की थी। अगले दिन सुबह अनुपम खेर के ऑफिस के एक शख्स ने शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद कार्रवाई करते हुए अंबोली पुलिस स्टेशन की एक टीम ने दोनों चोरों को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास चोरी किए गए पैसों का एक हिस्सा बरामद कर लिया गया है।

DMK ने बताया अन्नामलाई की साजिश, कमल हासन ने पीड़ितों को कहा ‘लापरवाह’: तमिलनाडु में 56 मौतों के बाद BJP ने पूछा – दलितों की पीड़ा पर कैंडल मार्च वाले चुप क्यों?

तमिलनाडु में ज़हरीले शराब हुई 56 मौतों के बाद राजनीति भी गर्मा गई है। भाजपा ने I.N.D.I. गठबंधन की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। कल्लाकुरिची में हुई इस घटना को भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व जगन्नाथपुरी से सांसद संबित पात्रा ने कहा कि ‘राज्य द्वारा की गई हत्या’ करार देते हुए पूछा है कि आखिर कॉन्ग्रेस इस पर चुप क्यों है? उन्होंने मुख्यमंत्री MK स्टालिन से सफाई देने की माँग की। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय कलक्टर के मौतों को नकारते हुए मामला रफा-दफा करने की कोशिश की।

उन्होंने पूछा कि क्या राज्य के शीर्ष नेतृत्व ने प्रशासन को ऐसा करने का आदेश दिया था? उन्होंने ध्यान दिलाया कि कॉन्ग्रेस के किसी भी बड़े नेता ने इस घटना पर बयान नहीं दिया है। उन्होंने पूछा कि जो लोग दलितों के अधिकार के लिए लड़ने का दावा करते हैं और कैंडल मार्च निकालते हैं, वो आज इतने दलितों की मौत पर चुप क्यों हैं? बता दें कि दलित बहुल करुणापुरम की इस घटना में 200 से अधिक लोग अब भी अस्पताल में हैं जिनका इलाज चल रहा है।

DMK सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए 10-10 लाख रुपए के मुआवजे और घायलों के लिए 50-50 हजार रुपए की सहायता का ऐलान किया है। साथ ही रिटायर्ड न्यायाधीश B गोकुलदास के नेतृत्व में एक न्यायिक समिति बना कर 3 महीने में जाँच रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। वहीं अभिनेता कमल हासन ने अस्पताल पहुँच कर पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने इनके मनोवैज्ञानिक इलाज के लिए केंद्र बनाने की माँग की। उन्होंने कहा कि पीड़ित लापरवाह रहे, उन्हें शराब पीने के दौरान अपनी क्षमता का अंदाज़ा नहीं रहा।

उधर DMK ने दावा किया है कि जिस शराब को पीकर मौतें हुई हैं उन्हें बनाने के लिए भाजपा शासित पुडुचेरी से मेथनॉल आया था। DMK के संगठन सेक्रेटरी RS भारती ने इसे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई की साजिश करार दिया। उन्होंने इसे विकरावंडी उपचुनाव के लिए भाजपा की सोची-समझी साजिश करार देते हुए कहा कि पुडुचेरी के CM को इस्तीफा देना चाहिए। अन्नामलाई ने सीएम स्टालिन से इस्तीफा माँगा था, जिस पर डीएमके ने पूछा है कि क्या कंचनजंगा रेल हादसे के बाद मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस्तीफा दिया?

‘मोदी के दिए घरों में रहते हैं, 100% वोट कॉन्ग्रेस को देते हैं’: बोले असम CM सरमा – राज्य पर कब्ज़ा करना चाहते हैं बांग्लादेश मूल के लोग

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि बांग्लादेशी मूल के अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने कॉन्ग्रेस को बढ़-चढ़कर वोट दिया। उन्होंने कहा कि इससे जाहिर होता है कि सांप्रदायिकता में हिंदू नहीं, बल्कि सिर्फ एक समुदाय…. एक मजहब शामिल है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी मूल के अल्पसंख्यकों ने कॉन्ग्रेस को इसलिए वोट दिया, क्योंकि अगले 10 सालों में वे राज्य को कब्जा करना चाहते हैं।

शनिवार (22 जून 2024) असम के पार्टी मुख्यालय में भाजपा और सहयोगी दलों के विजयी उम्मीदवारों के अभिनंदन समारोह में सीएम सरमा ने कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन को लगभग 47% वोट मिले, जबकि कॉन्ग्रेस और उसके सहयोगी दलों को 39% वोट मिले। दरअसल, भाजपा-एजीपी-यूपीपीएल गठबंधन ने राज्य की 14 लोकसभा सीटों में से 11 सीटें जीतीं, जबकि कॉन्ग्रेस ने 3 सीटें जीतीं।

उन्होंने कहा, “मैं गर्व से कहता हूँ कि असम में हिन्दू समुदाय ने तुष्टिकरण की राजनीति नहीं की। हिंदुओं ने मेरिट पर वोट किया है, लेकिन एक विशेष समुदाय ने इस प्रकार की Tactical Voting की है कि उनके क्षेत्र में चाहे जितनी भी विकास हो, पूरी समुदाय ने अपना 100% वोट कॉन्ग्रेस को दिया है।”

उन्होंने कहा कि अगर कॉन्ग्रेस को मिले 39 प्रतिशत वोटों का विश्लेषण किया जाए तो यह पूरे राज्य से नहीं मिला है। इस वोट का 50 प्रतिशत हिस्सा 21 विधानसभा क्षेत्रों में केंद्रित है। ये विधानसभा क्षेत्र अल्पसंख्यक बहुल हैं। इन अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में भाजपा को सिर्फ 3 प्रतिशत ही वोट मिले हैं। उन्होंने कहा कि इससे जाहिर होता है कि सांप्रदायिकता हिंदू नहीं, बल्कि सिर्फ एक समुदाय है।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में भले ही सड़कें न हों… बिजली न हों, लेकिन वे कॉन्ग्रेस को भारी मत देते रहे हैं और ऐसा इस बार भी हुआ। उन्होंने कहा कि हालाँकि भाजपा असमिया लोगों और आदिवासियों के लिए काम करती रही है, लेकिन इन समुदायों ने भगवा पार्टी को 100 प्रतिशत वोट नहीं दिया है, उन्होंने कहा।

हिमंता ने आगे कहा, “अगर हम बांग्लादेशी मूल के लोगों की बहुलता वाले केंद्रों पर विचार करें तो करीमगंज को छोड़कर 99 प्रतिशत वोट कॉन्ग्रेस को गए हैं। वे (अल्पसंख्यक लोग) भले ही प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए घरों में रह रहे हों, मोदी द्वारा दी गई बिजली और अन्य सुविधाओं का लाभ उठा रहे हों, लेकिन जब वे वोट देने जाते हैं तो वे कॉन्ग्रेस को वोट देते हैं।”

उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी मूल के अल्पसंख्यक कॉन्ग्रेस को वोट देगा, क्योंकि वे अगले 10 वर्षों में राज्य पर नियंत्रण करना चाहते हैं। सीएम सरमा ने आरोप लगाया कि जब आचार संहिता लागू होने के कारण भाजपा सरकार सक्रिय नहीं थी तो इस समुदाय के सदस्यों ने बारपेटा के लखीमपुर गाँव में एक पुलिस स्टेशन पर हमला किया और कोकराझार में भूमि पर अतिक्रमण करने की कोशिश की।

असम के मुख्यमंत्री ने कहा, “जब राज्य में भाजपा की सरकार नहीं होगी तो इस तरह के कितने हमले होंगे, इसकी कल्पना की जा सकती है।” भाजपा नेता ने कहा, “इस बार हमें 47 प्रतिशत वोट मिले हैं। हमारा लक्ष्य 2026 के राज्य चुनावों में 50 प्रतिशत वोट हासिल करना है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा और उसके सहयोगियों ने इस लोकसभा चुनाव में 126 विधानसभा क्षेत्रों में से 92 पर जीत हासिल की है, जो राज्य में किसी भी सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए अब तक की सबसे बड़ी जीत है। उन्होंने यह भी कहा। कि भाजपा राष्ट्र निर्माण की राजनीति करती है और सभी भागों के विकास के लिए काम करती रहेगी, भले ही उसके उम्मीदवार उन क्षेत्रों से जीते हों या नहीं।