Home Blog Page 888

‘मोटी रकम मिली होगी इसे खालिस्तानियों से’ : कंगना रनौत के साथ बदसलूकी पर भड़कीं बहन रंगोली चंदेल; अभिनेत्री ने बॉलीवुड की चुप्पी पर उठाए सवाल​

बॉलीवुड अभिनेत्री और भाजपा की नवनिर्वाचत सांसद कंगना रनौत को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर CISF की महिला जवान द्वारा थप्पड़ मारने की घटना को लेकर रंगोली चंदेल काफी नाराज हैं। अपने इंस्टाग्राम पर रंगोली ने स्टोरी पोस्ट करते हुए महिला जवान के खिलाफ और सख्त कार्रवाई डिमांड की है।

उन्होंने खालिस्तान विचारधारा पर बनाए गए कंगना रनौत के वीडियो को शेयर करते हुए स्टोरी में लिखा, प्रतिक्रिया की वीडियो को साझा करते हुए, “खालिस्तानियों, बस यही औकात है तुम लोगों की। पीछे से प्लान करना और अटैक करना… लेकिन, मेरी बहन की रीढ़ की हड्डी बहुत मजबूत है। स्टील की बनी है। उसे तुम तोड़ नहीं सकते। वो अपने दम पर इस स्थिति को हैंडल कर लेगी।”

उन्होंने आगे पंजाब पर लिखा, “पंजाब तेरा क्या होगा? किसानों का आंदोलन खालिस्तानियों का अड्डा था एक बात और कि ये बात साबित हो चुकी है कि ये सिक्योरिटी की बहुत बड़ी गलती है? इस तरह से नहीं होना चाहिए था। हम सभी को इसके खिलाफ आवाज उठानी होगी।” इसके अलावा एक अन्य स्टोरी में रंगोली ने कहा, “सस्पेंड करने से इसको फर्क नहीं पड़ेगा, मोटी रकम आ गई होगी खालिस्तानियों से। रिमांड पर लेना होगा इसको।”

बता दें कि कंगना रनौत ने मारपीट के मामले में वीडियो शेयर की थी। इसमें वह बताती नजर आई थी कि एयरपोर्ट पर क्या हुआ। इसके अलावा उन्होंने पंजाब में बढ़ते आतंकवाद और उग्रवाद के मुद्दे को भी उठाया था। इसके अलावा मीडिया में कहा जा रहा है कि उन्होंने इस घटना के बाद अपने इंस्टा अकॉउंट पर कुछ स्टोरी और लगाई थी जिसमें उन्होंने इस मामले में बॉलीवुड की चुप्पी पर सवाल उठाए थे।

रंगोली के अकॉउंट पर कंगना की स्टोरी को शेयर किया गया। इस स्टोरी में लिखा था- “डियर फिल्म इंडस्ट्री आप सभी लोग या तो एयरपोर्ट पर मुझ पर हुए हमले को सेलिब्रेट कर रहे हैं या फिर इस पर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन याद रखना अगर कल को आप अपने देश की किसी सड़क पर या दुनिया में कहीं और चल रहे होंगे, तब कुछ इजरायली/फिलिस्तानी आप या आपके बच्चे पर हमला करते हैं…बस इसलिए क्योंकि आप सभी राफा के लिए खड़े थे, इजरायली होस्टेज के समर्थन में थे…तब आप देखेंगे मैं आपके बोलने की आजादी के लिए लड़ूंगी… अगर किसी दिन आपको लगे कि मैं क्यों, मैं कहाँ हूँ या याद रखना मैं आपमें ही हूँ।”

रिपोर्ट के मुताबिक, एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा, “ऑल आइज ऑन राफा’ गैंग ये आपके और आपके बच्चों के साथ भी हो सकता है, जब आप किसी पर आतंकी हमले को सेलिब्रेट करते हैं, उस दिन के लिए तैयार हो जाओ जब ये सब आपके साथ होगा।”

बता दें कि कंगना रनौत को 6 जून को एक सीआईएसएफ महिला जवान ने चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर थप्पड़ मारा था। वह पिछले 15 सालों से सीआईएसएफ में काम कर रही थी। कंगना ने फिलहाल इस केस में कोई एफआईआर नहीं कराई है। लेकिन बहन ने माँग की है कि उस महिला जवान को हिरासत में लेकर पूछताछ हो।

‘हर दिन आती है चुनावी हिंसा की खबरें, बंगाल में 5 साल के लिए तैनात कर देंगे CAPF’: ममता सरकार को हाई कोर्ट ने फटकारा, DGP से माँगी FIR की सूची

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने लोकसभा चुनाव 2024 के बाद पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा पर चिंता व्यक्त की है। हाई कोर्ट ने गुरुवार (6 जून 2024) को कहा कि अगर राज्य सरकार हिंसा को रोकने में विफल रहती है तो वह केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) को अगले पाँच वर्षों तक राज्य में तैनात रहने के लिए कह सकता है।

एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति कौशिक चंदा और न्यायमूर्ति अपूर्व सिन्हा रे की खंडपीठ ने राज्य की ममता बनर्जी की सरकार को निर्देश दिया कि वह हिंसा से प्रभावित लोगों को ईमेल के माध्यम से राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को शिकायत दर्ज करने की अनुमति दे। पीठ ने कहा, “हम किसी भी कीमत पर राज्य के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं।”

यह याचिका राष्ट्रवादी आइनजीवी नाम के संगठन द्वारा दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि याचिकाकर्ताओं को लोकसभा आम चुनाव 2024 के तुरंत बाद एक विशिष्ट राजनीतिक दल से जुड़े होने के कारण चुनाव के बाद की हिंसा का सामना करना पड़ा था। याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि स्थानीय पुलिस अधिकारियों द्वारा उनकी शिकायतें दर्ज नहीं की जा रही हैं।

अदालत ने डीजीपी संजय मुखोपाध्याय को 10 दिनों के भीतर चुनाव बाद हिंसा की मिली शिकायतों की संख्या, दर्ज की गई एफआईआर की संख्या और उसके बाद की गई कार्रवाई (यदि कोई हो) पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी आदेश दिया। अदालत ने पुलिस को प्राप्त शिकायतों को तुरंत अपनी वेबसाइट पर अपलोड करने का भी निर्देश दिया।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता सुस्मिता साहा दत्ता की वकील ने अदालत को बताया कि पिछले शनिवार (1 जून 2024) को राज्य में सात चरणों के मतदान समाप्त होने के बाद से 11 लोगों की मौत हो चुकी है। दत्ता ने अदालत को बताया, “1 जून को चुनाव प्रक्रिया पूरी हो गई थी। उसके बाद गुरुवार तक चुनाव बाद की हिंसा में 11 लोगों की मौत हो चुकी है।”

इसके बाद दो जजों की खंडपीठ ने पूछा, “हम कैसे मान लें कि 11 लोग मारे गए हैं?” इस पर दत्ता ने जवाब दिया, “हमारे पास पर्याप्त दस्तावेज हैं।” राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, “ये सच नहीं हैं।”

जस्टिस कौशिक चंदा ने कहा, “हम हर दिन मीडिया में चुनाव के बाद की हिंसा के बारे में देख रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के बाद जो हुआ, वही इस बार भी हो रहा है। आपको (राज्य को) शर्म आनी चाहिए। अगर राज्य इस हिंसा को नियंत्रित करने में विफल रहता है तो हमें यह निर्णय लेना होगा कि अगले पांच वर्षों तक केंद्रीय बल इस राज्य में रहेंगे।”

बता दें कि पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी गुरुवार (6 जून 2024) को राज्यपाल सीवी आनंद बोस को पत्र लिखकर चुनाव बाद की हिंसा में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की कथित भूमिका पर चिंता जताई। उन्होंने अपने पत्र में राज्यपाल से साल 2021 में चुनाव के बाद ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल को लिखे पत्र में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि 4 जून 2024 के संसदीय चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद पश्चिम बंगाल में ‘सत्तारूढ़ सरकार के गुंडे’ भाजपा के कार्यकर्ताओं को लेकर पागल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि यह हिंसा पश्चिम बंगाल के लिए पर्याय बन चुकी है।

भाजपा नेता ने कहा, “यह बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद हुई घटनाओं की पुनरावृत्ति प्रतीत होती है, जिसके परिणामस्वरूप कई भाजपा कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी।” उन्होंने कहा कि चुनावों के बाद केंद्रीय सशस्त्र बलों का उपयोग बिगड़ती स्थिति को नियंत्रित करने के लिए नहीं किया जा रहा है और सत्तारूढ़ पार्टी के गुंडे भाजपा कार्यकर्ताओं को निशाना बना रहे हैं।

NDA ने नरेंद्र मोदी को चुना नेता: नीतीश बोले – अगली बार भी आपके नेतृत्व में ही लड़ेंगे, आपके हर फैसले में साथ रहेंगे; नायडू ने बताया गर्व का क्षण

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में NDA के सभी सांसदों की बैठक हुई, जिसमें नरेंद्र मोदी को संसदीय दल का नेता चुन लिया गया। इसके साथ ही अब NDA गठबंधन राष्ट्रपति के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश करेगा और इसे स्वीकार किए जाने के साथ ही शनिवार (8 जून, 2024) को नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस दौरान TDP के चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने हमेशा जनता के लिए काम किया है और वो NTR के मानवता के सिद्धांतों पर चलते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ये उनके जीवन में सबसे गर्व का क्षण है। वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उनकी पार्टी JDU भाजपा के संसदीय दल के नेता नरेंद्र मोदी को भारत के प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन देती है। उन्होंने इसे ख़ुशी की बात बताते हुए कहा कि 10 वर्षों से ये PM हैं और फिर बनने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने देश की सेवा की और जो कुछ भी बचा है सब पूरा कर देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सब दिन पीएम मोदी के वो साथ रहेंगे और वो जो भी करेंगे उसका समर्थन करेंगे।

इस दौरान उन्होंने महागठबंधन को मिली सीटों का जिक्र करते हुए कहा कि इस बार तो उनलोगों को कुछ सीटें मिल भी गई हैं, आगे हम सब मिल कर चुनाव लड़ेंगे तो ये एक भी सीट नहीं जीत पाएँगे। नीतीश कुमार ने कहा कि विपक्षियों ने देश में कोई काम नहीं किया है, लेकिन नरेंद्र मोदी ने देश की बहुत सेवा की है और इसीलिए उन्हें ये मौका मिला है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के लिए अब कोई गुंजाइश नहीं रहेगी, बिहार और देश बहुत आगे बढ़ेगा।

नीतीश कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो भी चाहेंगे, उस हिसाब से हम सब चलेंगे और हमेशा उनके साथ रहेंगे, वो देश को आगे बढ़ाएँगे। उन्होंने आग्रह किया कि जल्द से जल्द प्रधानमंत्री पद का शपथग्रहण हो जाए, आज भी हो जाए तो अच्छा है क्योंकि काम तेज़ी से शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर कोई इधर-उधर करना भी चाहता है तो इसका कोई लाभ नहीं है। उन्होंने कहा कि हम सब नरेंद्र मोदी की बात को मानते हुए आगे चलेंगे।

इसके बाद नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पाँव भी छुए। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये उनके लिए लिए खुशी की बात है कि इतने बड़े समूह का स्वागत करने का उन्हें मौका मिला है। उन्होंने कहा कि जो साथी विजयी होकर आए हैं वो सभी अभिनंदन के अधिकारी हैं, लेकिन जिन लाखों कार्यकर्ताओं ने दिन-रात परिश्रम किया है, इतनी भयंकर गर्मी में हर दल के कार्यकर्ता ने जो पुरुषार्थ और परिश्रम किया है – वो आज उनको सिर झुका कर नमन करते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि ये उनका सौभाग्य है कि उन्हें NDA के नेता के रूप में सभी साथियों ने सर्वसम्मति से चुनकर एक नया दायित्व दिया है। उन्होंने सभी सहयोगी दलों का बहुत-बहुत आभार जताते हुए कहा कि हिंदुस्तान के इतने महान लोकतंत्र की ताकत देखिए कि NDA को आज देश के 22 राज्यों में लोगों ने सरकार बनाकर उनको सेवा करने का मौका दिया है, हमारा ये अलायंस सच्चे अर्थ में भारत की आत्मा है। बकौल पीएम मोदी, हिंदुस्तान की राजनीतिक इतिहास में और हिंदुस्तान की राजनीति के गठबंधन के इतिहास में चुनाव पूर्व गठबंधन इतना सफल कभी भी नहीं हुआ है, जितना कि NDA हुआ है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “एनडीए के सत्ता प्राप्त करने का या सरकार चलाने का कुछ दलों का जमावड़ा नहीं है। ये राष्ट्र प्रथम की मूल भावना से नेशन फर्स्ट के प्रति प्रतिबद्ध समूह है। NDA सरकार ने देश को गुड गवर्नेंस दिया है और एक प्रकार से NDA कहते ही गुड गवर्नेंस का पर्यायवाची बन जाता है। हम सबके केंद्र बिंदु में गरीब कल्याण और गुड गवर्नेंस सर्वोपरि रहा है। मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ कि अगले 10 साल में गुड गवर्नेंस, विकास, नागरिकों के जीवन में क्वॉलिटी ऑफ लाइफ – मेरा व्यक्तिगत रूप से एक सपना है। सामान्य मानवी के जीवन में से सरकार की दखल जितनी कम होगी, उतनी ही लोकतंत्र की मजबूती होगी।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम विकास का नया अध्याय लिखेंगे, गुड गवर्नेंस का नया अध्याय लिखेंगे, जनता-जनार्दन की भागीदारी का नया अध्याय लिखेंगे, और सब मिलकर के विकसित भारत के सपने को साकार करके रहेंगे। बता दें कि इस बैठक में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने नरेंद्र मोदी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका सभी ने अनुमोदन किया। पीएम मोदी ने कहा कि इस चुनाव में दक्षिण भारत में एनडीए ने एक नई राजनीति की नींव मजबूत की है।

उन्होंने जिक्र किया कि कैसे कर्नाटक और तेलंगाना, जहाँ अभी हाल ही में कॉन्ग्रेस की सरकारें बनी थीं, लेकिन पल भर में इनसे लोगों का विश्वास टूट गया और NDA को गले लगा लिया। उन्होंने तमिलनाडु की टीम को भी बधाई देते हुए कहा कि आज तमिलनाडु में काफी तेजी से NDA का वोट शेयर बढ़ा है। उन्होंने बताया कि कैसे इसी तरह पहली बार केरल से हमारा प्रतिनिधि बन कर आया है। बता दें कि केरल से अभिनेता सुरेश गोपी त्रिशूर से जीत कर भाजपा सांसद बने हैं।

स्तन काटे, प्राइवेट पार्ट्स जलाए, हड्डियाँ तोड़ी, जाँघें मसली… भाग्यशाली हैं कंगना रनौत कि उन्हें बलजीत जैसी ‘सजा’ नहीं मिली, क्योंकि थप्पड़ जितने समय में ही गोली भी मारी जा सकती है

लोकसभा चुनाव में मंडी से सांसदी जीतने के बाद कंगना रनौत के साथ एयरपोर्ट पर जो घटना घटी है वो सामान्य नहीं है। उनके सांसद बनने के बाद उन्हें सरेआम थप्पड़ मारा गया है। अब कुछ लोग इस मामले में उनकी ओर से बोलना तो दूर उलटा उन पर ही सवाल उठा रहे हैं। वहीं सीआईएसएफ की कर्मी कुलविंदर कौर को ‘नायिका’ बनाकर पेश कर रहे हैं।

उदाहरण के लिए कॉन्ग्रेस की महिला नेत्री को लीजिए। वो इस मामले में दिखावे के लिए सांसद को थप्पड़ मारे जाने की निंदा जरूर करती हैं, लेकिन बाद में ये दिखाने की कोशिश करती हैं कि कंगना ने सोचो कैसी बात कही होगी जिसकी टीस सीआईएसएफ कर्मी के मन में रह गई और उसने ऐसा कदम उठाया।

ऐसी घटना को जस्टिफाई करना दिखाता है कि इकोसिस्टम के लोगों के मन में घटना की गंभीरता को लेकर चिंता बिलकुल नहीं है बल्कि खुशी इस बात की है कि भाजपा की सांसद को थप्पड़ पड़ा तो सही हुआ और थप्पड़ मारने वाला निर्दोष ही होगा… जबकि ये मामला पूर्ण रूप से सोचने वाला है।

आज के समय में हर राजनेता अपने आप को सिद्ध करने के लिए कहीं न कहीं से कुछ न कुछ उदाहरण देता है। कभी किसी मामले पर तो कभी किसी प्रतिद्वंद्वी पर… ऐसे में कुछ लोग होते हैं तो राजनेताओं की बातों से कभी असहमत होते हैं या आहत होते हैं कानूनी कार्रवाई की माँग करते हैं, मानहानि का केस दर्ज करते हैं…लोकतांत्रिक देश में ऐसे मामलों में यही विकल्प सबसे अच्छा होता है। मगर, वहीं दूसरी ओर अगर बातें बुरा लगने पर जनता में बैठे लोग इस तरह हिंसा पर उतर जाएँगे तो क्या स्थिति अराजकता वाली पैदा नहीं हो जाएगाी। क्या हम ऐसी घटनाओं को सोच भी सकते हैं कि राजनेताओं को उनके बयानों के लिए सरेआम मारा जा रहा है। ऊपर से लोग ऐसे कृत्यों का समर्थन भी कर रहे हैं।

घटना के बाद जब कंगना रनौत ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब में बढ़ रही खालिस्तानी विचारधारा पर सवाल उठाए तो इसके खिलाफ शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि कंगना के नफरत भरे बयान पंजाबियों का अपमान हैं। उन्हें नहीं भूलना चाहिए कि आज अगर देश में बहुजातीय व बहुभाषी संस्कृति जीवित है तो उसके पीछे का कारण पंजाबियों द्वारा दी गई कुर्बानियाँ हैं। SGPC ने अपील की है कि भाजपा उन्हें नैतिकता का पाठ पढ़ाए और एयरपोर्ट पर हुई घटना के कारणों की जाँच करे।

हैरानी की बात है कि एसजीपीसी जिस सक्रियता से कंगना के विरोध में उतरा है, उतनी सक्रियता से खालिस्तान समर्थकों के विरुद्ध उनसे कुछ नहीं कहा जा रहा। अभी 1 दिन पहले की ही बात है, स्वर्ण मंदिर में खालिस्तान समर्थन में नारेबाजी हुई है। लेकिन, कहीं इसका किसी सिख संगठन ने विरोध नहीं किया। उलटा आज वो लोग कुलविंदर कौर को महान दिखाने के लिए उसके घर पहुँचे हुए हैं। उसे सम्मान दे रहे हैं, उनके परिवार को पीड़ित दिखा रहे हैं।

हाथ में गोली होती तो…

सोचिए, जो काम कुलविंदर कौर ने आवेश में आकर किया है, उसकी चरम क्या हो सकती थी। गुस्से में उन्होंने थप्पड़ मारा, थोड़ा और गुस्सा आता और हाथ में हथियार मिलता तो वो गोली भी मार देतीं… वहीं वो लोग जो आज कुलविंदर के झापड़ मारने को केवल आवेश में उठाया गया कदम बताकर हल्का दिखाने का प्रयास कर रहे हैं वो तो गोली चलाने की घटना को भी ऐसा ही कह देते और कई संगठन पहुँच जाते तब भी कुलविंदर को सम्मानित करने।

मालूम हो गोली वाली घटना का जिक्र करना कोई अतिशयोक्ति नहीं है। अगर लगे, तो 1984 में इंदिरा गाँधी के साथ क्या हुआ था उसे याद कर लीजिए। ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद इसी तरह कुछ लोग इंदिरा गाँधी से नाराज हुए थे और बाद में उन्हें सरेआम गोली मार दी गई थी…। ऐसी मानसिकता के लोग तो उस घटना को भी जायज दिखा देते जबकि उस समय की रिपोर्ट्स खुद बताती हैं कि ऑपरेशन ब्लू स्टार में जिस भिंडरावाले और उसकी सोच के खात्मे का काम हुआ था उसने स्वर्ण मंदिर के परिसर में ही कई लोगों की हत्या को अंजाम दिया था। इन लोगों की लिस्ट में एक नाम बलजीत कौर का भी था।

बलजीत कौर की निर्मम हत्या

बलजीत कौर वह महिला थीं, जिन्होंने भिंडरावाले के दाएँ हाथ सुरिंदर सिंह सोढी की हत्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जब भिंडरावाले को इस संबंध में पता चला तो उसने पहले मुख्य साजिशकर्ता का गला कटवाया और उसके बाद भिंडरावाले के लोगों का मारने का अंजाम क्या होता है, ये संदेश देने के लिए बलजीत कौर को अकाल तख्त में लाया गया।

बलजीत ने चूँकि सोढी पर गोली दागी थी, तो उसे सजा और भयानक मिली। हत्या से पहले उसे तमाम प्रताड़नाएँ दी गईं। अंत में उसके दोनों स्तनों को काट कर उसे वहीं मार दिया गया। रिपोर्ट बताती हैं कि बलजीत के प्राइवेट पार्ट्स को जला दिया गया था। उसकी हड्डियाँ तोड़ी जा चुकी थीं। जांघें और हाथ बुरी तरह मसल दिए गए थे। शुरू में किसी को समझ भी नहीं आ रहा था कि ये शव किसका है। हालाँकि बाद में पुलिस ने कयास लगाए कि ऐसी बर्बरता खालिस्तानी सिर्फ बलजीत के साथ कर सकते हैं, जिसने सोढी को मारा था।

नाराजगी नहीं, नफरत

सोचिए, अगर कोई भिंडरावाले की भावनाओं का हवाला देकर बलजीत कौर की निर्मम हत्या को जस्टिफाई करने लग जाएँ तो क्या आप अपेक्षा करेंगे कि लोगों में कानून का सम्मान बचा है। एक सामान्य नागरिक भी जानता है कि किसी बात से आहत होने पर कानून का सहारा लेकर कार्रवाई करने का अधिकार लोकतांत्रिक देश में हर नागरिक पर होता है। कानून का सहारा लेने का काम सिर्फ वो नहीं करते देश को, उसके संविधान को नकारते हैं और कट्टरपंथ की विचारधारा के रास्ते पर होते हैं जैसे भिंडरावाला था। लेकिन खुद सरकारी ड्यूटी पर तैनात कुलविंदर कौर ने ऐसा क्यों किया होगा ये सोचने का विषय है… अगर उनका देश के सामान्य नागरिक जैसा बर्ताव होता तो वो उस भाषण के विरोध में अपनी शिकायत दे सकती थीं, मानहानि का मुकदमा डाल सकती थीं, आहत होने की बात लोगों को खुलेआम बता सकती थीं… मगर उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया। पहले थप्पड़ मारा, फिर सफाई देती घूमीं। उनकी सीधा आकर कंगना को थप्पड़ मारने की हरकत साफ बताती है कि उनके मन में सिर्फ एक नाराजगी नहीं बल्कि नफरत थी। ऐसी नफरत जिसे सही समय पर नहीं रोका जाए तो देश में अराजक माहौल हो सकता है।

कंगना को थप्पड़ मारा, बदले में कुलविंदर के परिवार को सम्मान दे रहे सिख संगठन: SGPC ने भी बीजेपी MP को ही बताया कसूरवार, कहा- उनका बयान माहौल खराब कर रहा

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने भाजपा सांसद कंगना रनौत पर चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर हुए हमले को सही ठहराते हुए एक बयान जारी किया है। धामी ने CISF महिला सुरक्षाकर्मी कुलविंदर कौर के हमले को लेकर कहा है कि कंगना का वह पंजाब और पंजाबियों को लगातार निशाना बना रही थीं जो कि काफी पीड़ादायक है।

SGPC मुखिया कंगना के इस दावे को नकार दिया कि पंजाब में आतंकवाद बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि कंगना के बयान से देश का माहौल खराब हो रहा है। उन्होंने कंगना रनौत को पंजाबियों के देश के लिए किए बलिदान भी याद दिलाने की बात कही। धामी का कहना था कि लोकप्रियता हासिल करने के लिए देश के नागरिकों की आपसी शान्ति और उनके सामाजिक मेलजोल को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन कंगना इसी रास्ते पर चल रही हैं।

एडवोकेट धामी ने भाजपा नेताओं से आग्रह किया कि वे कंगना रनौत को संयम और नैतिकता की शिक्षा दें। उन्होंने लिखा, “चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर हुई घटना के कारणों की गहन जाँच होनी चाहिए कि कहीं कंगना रनौत ने पंजाब के खिलाफ नफरत का माहौल बनाने के लिए कोई शरारती बात तो नहीं की। केंद्रीय सुरक्षा बल द्वारा की गई जाँच बिना किसी राजनीतिक या व्यक्तिगत प्रभाव के होनी चाहिए ताकि किसी के साथ गलत व्यवहार ना हो।”

सिख संगठनों ने किया कुलविंदर के परिवार को किया सम्मानित

इस बीच, यह बात भी सामने आई कि एक सिख संगठन ने चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर कंगना रनौत पर हमला करने वाली निलंबित CISF अधिकारी कुलविंदर कौर के परिवार के लोगों को सम्मानित किया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें सिख संगठन के सदस्यों को कुलविंदर कौर के परिवार के सदस्यों को सम्मानित करते देखा जा सकता है।

वीडियों में कुछ सिख सत श्री अकाल और अन्य नारे लगाते हुए देखे जा सकते हैं, वह एक बुजुर्ग पुरुष और महिला को शाल ओढ़ाते हैं और बधाई भी देते हैं। वह महिला के गले भी मिलते हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इससे पहले शिवसेना UBT की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कंगना रनौत पर हुए हमले को सही ठहराने की कोशिश की थी।

गौरतलब है कि CISF सुरक्षाकर्मी कुलविंदर कौर ने गुरुवार (6 जून, 2024) को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर दिल्ली जा रहीं सांसद कंगना रनौत को सुरक्षा जाँच के दौरान थप्पड़ मार दिया था। उसने इसके बाद एयरपोर्ट पर हंगामा भी मचाया था, इसकी कुछ वीडियो भी सामने आईं थी। इसमें वह कहते सुनी जा सकती है, ‘इसने ₹100-₹100 में महिलाओं बैठने को कहा था, ये बैठेगी वहाँ पर, मेरी माँ बैठी थी।”

कुलविंदर कौर का कहना था कि उसने कंगना रनौत को इसलिए थप्पड़ मारा क्योंकि उन्होंने किसान आंदोलन में बैठी महिलाओं को लेकर बयान दिया था। उसने बताया था कि इस किसान आंदोलन में उसकी माँ भी शामिल थी और उसे कंगना का बयान अखर रहा था।

कंगना रनौत ने इस मुद्दे के बाद एक वीडियो जारी किया था। उन्होंने बताया, “मैं बताना चाहती हूँ कि मैं पूरी तरीके से ठीक हूँ, सुरक्षित हूँ। आज जो चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर जो हादसा सुरक्षा जाँच के दौरान हुआ। मैं सुरक्षा जाँच के बाद जैसे ही निकली, इसके बाद दूसरे केबिन में बैठी एक सुरक्षाकर्मी ने आकर मेरे मुँह पर मारा। वह गालियाँ देने लगी, उन्होंने पूछने पर बताया कि वह किसान आंदोलन का समर्थन करती हैं। मैं सुरक्षित हूँ लेकिन मैं पंजाब में उग्रवाद और आतंकवाद के बढ़ने को लेकर चिंतित हूँ।”

बीजेपी का एक कार्यकर्ता ऐसा भी! काउंटिंग के दौरान पार्टी पिछड़ी तो देवी माँ से माँगी ‘मन्नत’, कमल खिलने के बाद अपनी ‘उंगली’ काट मंदिर में कर दिया अर्पित

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में एक युवक ने देश में भाजपा की जीत की मन्नत पूरी करने के लिए देवी को अपनी उंगली अर्पित कर दी। युवक भाजपा का समर्थक है और वह 4 जून को आए आ रहे रुझानों से हताश हो रहा था, इसके बाद उसने यह कदम उठाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बलरामपुर जिले के डीपाडीह निवासी कृषक दुर्गेश पांडेय भाजपा के बड़े समर्थक हैं। 4 जून, 2024 को लोकसभा चुनाव 2024 को दोपहर तक आ रहे रुझानों और कॉन्ग्रेस नेताओं के बयानों से वह चिंतित हो गए थे। उनकी चिंता थी कि देश में तिबारा भाजपा सरकार नहीं बनेगी।

दुर्गेश पांडेय ने भाजपा की जीत के लिए सावंत सरना स्थित पुरातन काली मंदिर जाकर भाजपा की जीत लिए पूजा अर्चना की। देवी माँ के सामने उन्होंने भाजपा की जीत की मन्नत मानते हुए अपनी तर्जनी उंगली काट कर माता को चढ़ा दी और बहते हुए रक्त से उनका अभिषेक भी किया।

अत्यधिक खून बहने के बाद वह स्थानीय अस्पताल अपनी कटी हुई उंगली लेकर गए। यहाँ शंकरगढ़ में उनका प्राथमिक उपचार करने बाद अंबिकापुर के बड़े अस्पताल भेज दिया गया। यहाँ उनका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने किया। उनकी उंगली को दोबारा जोड़ा गया है। उनको अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। उनका स्वास्थ्य अब ठीक है।

दुर्गेश पांडेय ने बताया कि वह भाजपा या उसके किसी अनुषांगिक संगठन से सीधे तौर पर नहीं जुड़े हैं लेकिन वह पीएम मोदी और पार्टी के समर्थक हैं। उन्होंने मीडिया को बताया है कि वह केंद्र में NDA की 400 सीटों पर जीत चाहते थे। उन्होंने कहा है कि NDA सरकार बनने से खुश हैं। उनका कहना है कि NDA सरकार बनती तो वह दोगुना खुश होते।

गौरतलब है कि 4 जून, 2024 को आए नतीजों में भाजपा को 240 सीटें मिली हैं जबकि NDA गठबंधन को स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ है। NDA पार्टियों ने नरेन्द्र मोदी को अपना नेता चुना है और सरकार गठन का काम तेज हो चुका है। रविवार (9 जून, 2024) को देश की नई सरकार के शपथ लेने की संभावना है।

मुस्लिमों के बीच रहने को कश्मीर लौटा एक हिंदू परिवार, चुनावी नतीजों के बाद वही हुआ जो आप सोच रहे हैं: देखिए Video, पुलिस बोली – सरकारी जमीन को लेकर हुआ झगड़ा

अपडेट: अनंतनाग प्रशासन ने कहा है कि ये मामला किसी एक द्वारा दूसरे को घर बनाने से रोकने का नहीं, बल्कि 2 पड़ोसियों के बीच स्थित छोटी सी सरकारी जमीन के इस्तेमाल को लेकर है। जिला प्रशासन के अनुसार, इस जमीन का इस्तेमाल प्राइवेट पार्किंग के लिए दोनों पक्ष कर रहे थे, एक पक्ष ने जब बाउंड्री पर दीवार बनानी चाहिए तो विवाद उत्पन्न हुआ। जिला प्रशासन और पुलिस ने मौके पर पहुँच कर दोनों पक्षों का समझौता करा दिया है।

जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में एक बार फिर एक कश्मीरी पंडित परिवार का उत्पीड़न किया गया। घाटी में शांति लौटने के बाद फिर से बसने की कोशिश कर रहे एक कश्मीरी पंडित परिवार पर हमला किया गया। उसे घर बनाने से रोका गया और सारा सामान तहस नहस कर दिया गया। कश्मीरी पंडित के मुस्लिम पड़ोसियों ने घाटी छोड़ने को लेकर उसे धमकाया।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अनंतनाग के वेरीनाग इलाके में संजय वली नाम के एक कश्मीरी पंडित ने 1990 के नरसंहार के बाद दोबारा से हिम्मत करके यहाँ अपना घर बनाना चालू किया था। वह पुरानी हिंसा भूल कर अपने इलाके में लौटे थे। यह घर उन्होंने अपनी जमीन बनाना चालू किया था। जहाँ वह घर बना रहे हैं वहाँ अन्य सभी मुस्लिम परिवार रहते हैं।

संजय वली ने बताया कि वह अपने घर का निर्माण करवा रहे हैं लेकिन इसमें आसपास के मुस्लिम अड़ंगा डाल रहे हैं। उनको मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा है। संजय वली के परिवार को लगातार गालियाँ दी जाती हैं और और उनके घर बनाने के निर्णय को लेकर नाराजगी जताई जाती है।

चुनाव परिणाम के बाद हमला

कश्मीरी पंडित संजय वली ने बताया है कि 4 जून, 2024 को लोकसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद उनके परिवार पर हमला कर दिया गया। कुछ लोगों ने आकर उनके परिवार से अभद्रता की और उन पर हमला कर दिया। उनका घर बनाने का सारा सामान बाहर फेंक दिया गया। उनका घर बनाने का सारा सामान दूसरे लोग उठा ले गए। उनके परिवार की पिटाई की गई।

संजय को धमकियाँ दी गई और कहा गया कि वह यह इलाका छोड़ दें और अपना घर दोबारा ना बनाएँ। संजय के परिवार के साथ हुई इस मारपीट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर अब वायरल हो रहा है। इसमें कुछ लोग महिलाओं से झगड़ा करते हुए दिखाई देते हैं। संजय वली अब इस घटना के बाद से डरे हुए हैं। उनका डर है कि 1990 वाली त्रासदी कहीं उनके साथ दोबारा ना घटित हो जाए। चुनाव परिणाम के 24 घंटों के भीतर इस हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई गई है।

सोशल मीडिया में बताया जा रहा जमीन विवाद

संजय वली का सोशल मीडिया में कई जगह नाम सुनील वली बताया जा रहा है। एक्स (पहले ट्विटर) पर कुछ लोगों ने इस मामले के निपटने का दावा किया है। कश्मीर में काम करने वाली से शारदा कमेटी नाम की एक संस्था के रविंदर पंडिता ने इस मामले का अपडेट दिया है। उन्होंने बताया, “वेरीनाग कमेटी ने इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप किया और जिला प्रशासन से वेरीनाग में पंडित परिवार के साथ हुए विवाद के बारे में बात की। प्रशासन ने हमें आश्वस्त किया है कि चिंता की कोई बात नहीं है और हमलावरों पर कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है।”

रविंदर पंडिता ने आगे बताया है कि इस मामले को संजय/सुनील वली के परिवार ने हमलावरों के साथ सुलझा लिया है और आगे विवाद ना होने को लेकर भी दोनों में सहमति बनी है। जिस अनंतनाग क्षेत्र में संजय वली के परिवार पर हमला हुआ है, वहाँ 4 जून को मियाँ अल्ताफ अहमद जीते हैं। वह नेशनल कॉन्फ्रेंस से उम्मीदवार थे, उन्होंने PDP मुखिया महबूबा मुफ़्ती को हराया है। मामले में अभी प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

गौरतलब है कि कश्मीर घाटी में 1990 में कश्मीरी पंडितों का नरसंहार किया गया था। उन्हें घाटी से भगा दिया गया था और उनकी संपत्तियों पर कब्जा कर लिया गया था। बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित मार दिए गए थे। इस्लामी आतंकियों ने कश्मीरी पंडित महिलाओं के साथ बलात्कार भी किया था। तब से कश्मीरी पंडित देश के अलग अलग हिस्सों में रहने को मजबूर हैं।

कासिम, मोनिस और शोएब… संसद में घुसपैठ करते CISF ने पकड़ा, फर्जी आधार कार्ड मिले: पूछताछ में जुटी दिल्ली पुलिस

लोकसभा चुनावों में नतीजे आने के बाद संसद में घुसपैठ की कोशिश का मामला सामने आया है। आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि संसद परिसर में प्रवेश करने का प्रयास करते हुए तीन मजदूरों को CISF कर्मियों ने पकड़ा और बाद में इनकी गिरफ्तारी हुई।

इन तीनों के नाम कासिम, मोनिस और सोएब है। इनके खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी से संबंधित आईपीसी धाराएँ लगाई गई हैं। खबरों के अनुसार, इन तीनों की गिरफ्तारी उस समय हुई जब तीनों नियमित सुरक्षा और पहचान जाँच के दौरान संसद भवन के फ्लैप गेट एंट्री से घुस रहे थे। इसी बीच सीआईएसएफ कर्मियों को इनकी एक्टिविटी संदिग्ध लगी।

सीआईएसएफ कर्मियों ने तीनों को रोका और हिरासत में लिया जाँच हुई तो ये भी सामने आया कि उन लोगों के आधार कार्ड जाली थे और तीनों ही डीवी प्रोजेक्ट्स लिमिटेड में कार्यरत थे, जिसे संसदर परिसर के अंदर सांसदों के लिए लाउंज बनाने का ठेका दिया गया है।

सीआईएसएफ ने तीनों को दिल्ली पुलिस को सौंप दिया है। उन्होंने इनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर ली है और आईपीसी की धाराओं 465, 419, 120 बी, 471, 468 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

गौरतलब है कि साल 2023 में भी संसद में सुरक्षा चूक का मामला सामने आया था, जिस पर हाल की खबरें बताती हैं कि उस केस के 6 आरोपितों के विरुद्ध गैरकानूनी गतिविधिया रोकथाम अधिनियम के तहत केस चलेगा। इन 6 आरोपितों के नाम  ललित झा, सागर शर्मा, मनोरंजन डी, अमोल धनराज शिंदे, नीलम रानोलिया और महेश कुमावत हैं।

इन लोगों ने संसद में उपद्रव मचाने के लिए कई समय से प्लानिंग की थीं। इसके अलावा इन्होंने एक मोची से विशेष जूते बनवाए थे जिनके तलवे में 2.5 इंच गहरी जगह थी। ये लोग धुएँ के केन इसी स्पेस में छिपाकर संसद में लाए थे। हालाँकि सांसदों की तेजी के बाद ये सारे पकड़ लिए गए और इनके पास से पर्चे बरामद हुए थे जिनपर प्रधानमंत्री के लापता होने जैसी बात लिखी थी।

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने ‘हमारे बारह’ को किया बैन, फिल्म का विरोध कर रहे हैं इस्लामी संगठन: अन्नू कपूर को मिल चुकी है हत्या की धमकी

मुस्लिम महिलाओं की स्थिति दिखाने वाली ‘हमारे बारह’ फिल्म को कर्नाटक सरकार ने बैन करने का फैसला किया है। कहा जा रहा है कि तमाम मुस्लिम संगठनों से शिकायत पाने के बाद कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने यह निर्णय लिया।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, “कर्नाटक सिनेमा (विनियमन) अधिनियम, 1964 की धाराओं के तहत कर्नाटक सरकार ने फिल्म ‘हमारे बारह’ के प्रसारण या रिलीज पर दो सप्ताह या अगले आदेश तक रोक लगा दी है।”

ANI के ट्वीट में आगे बताया गया कि सरकार का इस मामले में कहना है कि अगर इसे राज्य में रिलीज होने दिया गया तो इससे सांप्रदायिक तनाव पैदा होगा। कर्नाटक सरकार के मुताबिक उन्होंने यह फैसला फिल्म का ट्रेलर देखने के बाद कई अल्पसंख्यक संगठनों और प्रतिनिधिमंडलों के अनुरोध पर लिया गया है।

बता दें कि कर्नाटक सरकार के इस फैसले से पहले ‘हमारे बारह’ फिल्म की रिलीज पर बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा भी रोक लगाई गई थी। हालाँकि बाद में इस रोक को हटा लिया गया है।

कोर्ट ने पहले इसके निर्माताओं को फिल्म की रिलीज 14 जून 2024 तक स्थगित करने को कहा था। फिल्म रुकवाने के लिए अजहर तंबोली द्वारा इस मामले में याचिका दायर की गई थी। उन्होंने याचिका में फिल्म के खिलाफ कानूनी हस्तक्षेप की माँग की थी। इसके अलावा फिल्म की विषय वस्तु को चुनौती दी गई थी जिसमें इस्लामी भावनाओं को ठेस पहुँचाने की बात थी।

वहीं केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के अधिवक्ता अद्वैत सेठना ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा था कि फिल्म का ट्रेलर सीबीएफसी समिति द्वारा फिल्म की जाँच के बाद रिलीज हुआ था। प्रमाणन देने से पहले कई सीन को एडिट करने के लिए कहा गया था। उन्होंने कहा था कि यह सीबीएफसी फिल्म की सीमाओं को नियंत्रित करता है मगर प्रचार और ट्रेलर के नियंत्रण इसके पास नहीं हैं।

बता दें कि कोर्ट का पहले वाला निर्देश कई घटनाओं के बाद दिया गया था। इन घटनाओं में इस्लामी संगठनों का विरोध तो था ही, साथ में मुख्य अभिनेता अन्नू कपूर को मिल रही जान से मारने की धमकियाँ भी शामिल थी। हाल में इस संबंध में, एक्टर ने महाराष्ट्र सीएम एकनाथ शिंदे से मुलाकात भी की थी।

‘ये बैठेगी वहाँ पे, मेरी माँ वहाँ बैठी थी’: कंगना रनौत को थप्पड़ मारने वाली कुलविंदर का भाई है ‘किसान नेता’, CISF में पति भी तैनात

हिमाचल प्रदेश के मंडी से सांसद चुनी गई अभिनेत्री कंगना रनौत को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर थप्पड़ मारने वाली CISF सुरक्षाकर्मी कुलविंदर कौर के बारे में कई जानकारियाँ निकल कर सामने आई हैं। उसके खिलाफ CISF ने कार्रवाई भी चालू कर दी है।

यह सामने आया है कि वह पंजाब के सुल्तानपुर लोधी की रहने वाली है। उसकी आयु 35 वर्ष है। पता चला है कि कुलविंदर कौर का पति भी CISF में तैनात है। कुलविंदर का भाई शेर सिंह किसान मजदूर संघर्ष कमेटी का संगठन सचिव है। वह किसान आन्दोलन में सक्रिय रहा है। कुलविंदर कौर के भाई शेर सिंह ने इस घटना के बाद अपनी बहन का समर्थन किया है।

कुलविंदर कौर को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर दो वर्ष पहले तैनात किया गया था। घटना के बाद उसे हिरासत में ले लिया गया है। CISF ने उसके विरुद्ध निलम्बन की कार्रवाई की है। CISF ने इस घटना की जाँच के लिए एक पैनल का गठन किया है।

कुलविंदर कौर ने गुरुवार (6 जून, 2024) को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर दिल्ली जा रहीं सांसद कंगना रनौत को सुरक्षा जाँच के दौरान थप्पड़ मार दिया था। उसने इसके बाद एयरपोर्ट पर हंगामा भी मचाया था, इसकी कुछ वीडियो भी सामने आईं थी। इसमें वह कहते सुनी जा सकती है, ‘इसने ₹100-₹100 में महिलाओं बैठने को कहा था, ये बैठेगी वहाँ पर, मेरी माँ बैठी थी।”

कुलविंदर कौर का कहना था कि उसने कंगना रनौत को इसलिए थप्पड़ मारा क्योंकि उन्होंने किसान आंदोलन में बैठी महिलाओं को लेकर बयान दिया था। उसने बताया था कि इस किसान आंदोलन में उसकी माँ भी शामिल थी और उसे कंगना का बयान अखर रहा था।

कंगना रनौत ने इस मुद्दे के बाद एक वीडियो जारी किया था। उन्होंने बताया, “मैं बताना चाहती हूँ कि मैं पूरी तरीके से ठीक हूँ, सुरक्षित हूँ। आज जो चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर जो हादसा सुरक्षा जाँच के दौरान हुआ। मैं सुरक्षा जाँच के बाद जैसे ही निकली, इसके बाद दूसरे केबिन में बैठी एक सुरक्षाकर्मी ने आकर मेरे मुँह पर मारा। वह गालियाँ देने लगी, उन्होंने पूछने पर बताया कि वह किसान आंदोलन का समर्थन करती हैं। मैं सुरक्षित हूँ लेकिन मैं पंजाब में उग्रवाद और आतंकवाद के बढ़ने को लेकर चिंतित हूँ।”