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सपा विधायक इरफान सोलंकी को 7 साल की सजा, छिन जाएगी विधायकी: करोड़ों रुपए का प्लॉट हड़पने के लिए गरीब महिला के घर में लगाई थी आग

समाजवादी पार्टी के विधायक इरफान सोलंकी की विधायकी चली गई है। इरफान सोलंकी को एमपी-एमएलए कोर्ट ने महिला का घर जलाने और उसके बेटे को पीटने का दोषी पाया है और 7 साल की सजा सुनाई है। इरफान के साथ ही उसके भाई रिजवान को भी दोषी पाया गया है। दोनों को एक माह पहले कोर्ट से दोषी पाया था और अब शुक्रवार (07 जून 2024) को कोर्ट ने उसे सजा सुनाई।

जानकारी के मुताबिक, एमपीएमए कोर्ट ने शुक्रवार शाम करीब साढ़े छह बजे यह फैसला सुनाया। कोर्ट के इस फैसले के बाद सपा विधायक इरफान सोलंकी की गई विधायकी भी चली जाएगी। इरफान सोलंकी को 8 नवंबर 2022 को करोड़ो का प्लॉट हड़पने के लिए महिला की झोपड़ी में आग लगाने के मामले में कोर्ट ने इस महीने की शुरुआत में ही दोषी ठहराया गया।

इरफान सोलंकी को आईपीसी की धारा 436, 427, 147, 504, 506, 323 में दोषी ठहराया गया था। कोर्ट में सोलंकी के खिलाफ आगजनी केस में सारे आरोप साबित हो गए थे। सजा मिलने के बाद इरफान सोलंकी समेत सभी दोषियों को पुलिस कड़ी सुरक्षा में लेकर रवाना हो गई।

कोर्ट में सरकारी वकील दिलीप अवस्थी ने कहा कि इरफान चार बार के विधायक है। लोक सेवक हैं, इसलिए आम आदमी से ज्यादा उनकी समाज के प्रति जवाबदेही है। ऐसी सजा दी जाए जो समाज मे नजीर बने। ज्यादा से ज्यादा सजा और जुर्माने की सजा दी जाए। वादिनी अत्यंत गरीब है। ज्यादा से ज्यादा जुर्माना लगाया जाए। जुर्माने की राशि पीड़िता को दी जाए।

गौरतलब है कि सपा विधायक इरफान सोलंकी, उसके भाई रिजवान सोलंकी व उनके साथियों पर जाजमऊ की डिफेंस कॉलोनी में रहने वाली नजीर फातिमा ने उनके घर में आग लगाने का आरोप लगाया था। फातिमा का आरोप था कि उनके घर में 7 नवंबर 2022 को आग लगी थी। उनका परिवार और वह एक रिश्तेदार की शादी में गई हुईं थी। शादी के बीच जब उनका बेटा किसी काम से अपने घर पहुंचा तो देखा कि उसके घर में आग लगी हुई है।

इरफान सोलंकी, उसके भाई रिजवान सोलंकी और उनके साथियों ने उनके बेटे से मारपीट भी की थी और उसे आग में धकेलने की कोशिश भी की थी। मामले को लेकर जब विधायक सोलंकी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई तो वह गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हो गए।

‘इंदिरा से लिया था बदला’: जिस CISF कॉन्स्टेबल ने कंगना रनौत को मारा थप्पड़ उसे सम्मानित करेंगे किसान नेता, पहलवान भी समर्थन में, विशाल डडलानी देंगे नौकरी

हिमाचल प्रदेश के मंडी से लोकसभा सासंद चुनी गईं बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत को थप्पड़ मारने वाली CISF कॉन्स्टेबल कुलविंदर कौर हिरासत में है। उसने अपनी करस्तानी से लिए माफी माँगी है। वहीं, आरोपित कुलविंदर कौर के समर्थन में किसान नेता से लेकर विपक्षी दलों के राजनेता, पहलवान और फिल्म निर्माता भी आ गए हैं। पहलवान बजरंग पुनिया ने कुलविंदर ने भी कुलविंदर का समर्थन किया है।

INDI गठबंधन के सांसद ने कुलविंदर का किया समर्थन

राजस्थान के सीकर से INDI गठबंधन के नवनिर्वाचित सांसद अमराराम ने कुलविंदर कौर का समर्थन किया है। अमराराम ने कहा, “किसान आंदोलन के खिलाफ बोलने पर जाबांज सिपाही ने जो जवाब दिया, इसके लिए मैं उन्हें धन्यवाद देता हूँ। हो सकता है कि उन्हें सस्पेंड किया जाए या फिर वह बर्खास्त हो, लेकिन शहीद-ए-आजम भगत सिंह तो फाँसी पर झूल गए थे।”

अमराराम ने कहा, “देश में जो भी काले कानून बने हैं, चाहे वह अग्निवीर हो या अन्य। देश के लिए मेडल लाने वाले खिलाड़ियों को बेइज्जत किया गया। किसानों का जो ऐतिहासिक आंदोलन हुआ, उसके खिलाफ बोलने पर एक जांबाज सिपाही ने जिस तरह से उत्तर दिया है, उसे मैं धन्यवाद करता हूँ। देश के लोगों के खिलाफ जो नीतियाँ हैं, उन्हें रद्द करने के लिए आंदोलन लगातार आगे बढ़ेगा।”

आरोपित को सम्मानित करेंगे किसान नेता

वहीं, संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा ने कंगना को थप्पड़ मारने वाली कुलविंदर कौर का समर्थन क‍िया है। किसान नेताओं ने एलान क‍िया क‍ि यदि कुलविंदर कौर के साथ कोई नाइंसाफी या अन्याय किया गया तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कुलविंदर कौर का पक्ष सुनने की भी माँग की।

किसान नेताओं ने यह भी कहा कि इस मामले की ईमानदारी व पारदर्शी तरीके से जाँच की माँग को लेकर 9 जून को पंजाब-हरियाणा के किसान मोहाली के गुरुद्वारा श्रीअम्ब साहिब में इकट्ठे होंगे। वहाँ से वे सब मोहाली के एसएसपी के दफ्तर तक पैदल “इंसाफ मार्च” करेंगे और माँग पत्र सौंपेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कुलविंदर कौर से मुलाकात का भी ऐलान किया है। 

किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने आरोपित महिला जवान का पक्ष लिया है। पंढेर ने कहा, “कंगना के साथ जो घटना हुई है, उसके पीछे किसान आंदोलन के दौरान अभिनेत्री द्वारा की एक अभद्र टिप्पणी जिम्मेदार है। इसलिए सीआईएसएफ की महिला सिपाही के खिलाफ हुई कार्रवाई को वापस नहीं लिया गया तो किसान मोर्चा अगली रणनीति पर विचार करेगा।”

पंजाब के किसान नेता हरेंद्र लक्खोवाल ने कहा, “कंगना रनौत को एक सिख लड़की ने थप्पड़ मारकर बदला लिया है। जालियावाला बाग कांड के आरोपित जनरल डायर और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “सरदार उधम सिंह ने इंग्लैंड में जाकर डायर से बदला लिया था। सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी से दिल्ली में बदला लिया था।”

इतना ही नहीं, हरियाणा के जींद में शुक्रवार (7 जून 2024) को उचाना उपमंडल कार्यालय में चल रहे धरने पर किसानों की बैठक हुई। इस दौरान किसानों ने कहा कि कुलविंदर कौर को रिहाई के बाद उचाना धरने पर बुलाकर सम्मानित किया जाएगा। धरना संयोजक आजाद पालवां ने कहा कि कुलविंद्र कौर के थप्पड़ की गूंज पूरी दुनिया में पहुँची है।

पहलवान बजरंग पुनिया भी आए समर्थन समर्थन में

पहलवान बजरंग पूनिया ने सोशल मीडिया साइट X पर अपने पोस्ट में आरोपित महिला कुलविंदर कौर का समर्थन किया है। पुनिया ने लिखा, “जब महिला किसानों के लिए अनाप शनाप बोला जा रहा था, तब कहाँ थे नैतिकता पढ़ाने वाले लोग! अब उस किसान माँ की बेटी ने गाल लाल कर दिया तो शांति का पाठ पढ़ाने आ गए। सरकारी जुल्म से किसान मारे गए, उस समय यह शांति पाठ पढ़ाना था हुकूमत को! घटाएँ उठती हैं, बरसात होने लगती हैं। जब आँख भर के फ़लक को किसान देखता है।”

गायक विशाल डडलानी ने कुलविंदर कौर को ऑफर की नौकरी

गायक-संगीतकार विशाल ददलानी ने CISF कॉन्स्टेबल कुलविंदर कौर का समर्थन करते हुए उसकी मदद करने की पेशकश की। विशाल डडलानी ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक नोट शेयर किया कहा कि अगर महिला कॉन्स्टेबल के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाती है तो CISF कॉन्स्टेबल को ‘नौकरी सुनिश्चित’ करनी चाहिए।

डडलानी ने लिखा, “मैं कभी भी हिंसा का समर्थन नहीं करता, लेकिन मैं इस CISF कर्मी के गुस्से की ज़रूरत को पूरी तरह समझता हूँ। अगर CISF द्वारा उसके खिलाफ़ कोई कार्रवाई की जाती है तो मैं यह सुनिश्चित करूँगा कि अगर वह इसे स्वीकार करना चाहे तो उसके लिए नौकरी की व्यवस्था हो। जय हिंद। जय जवान। जय किसान।”

कौन है कुलविंदर कौर?

CISF महिला जवान कुलविंदर कौर कपूरथला के सब-डिवीजन सुल्तानपुर लोधी स्थित गाँव मंड माहीवाल के एक किसान की बेटी है। वहीं, कुलविंदर कौर का भाई शेर शिंह माहीवाल किसान नेता हैं और किसान आंदोलन में उन्होंने बढ़-चढ़कर भाग लिया था। कुलविंदर कुल 6 भाई-बहन है। उसकी शादी छह साल पहले जम्मू के सिमरन सिंह के साथ हुई है।

कुलविंदर का पति भी CISF में जवान है। उनके दो बच्चे- एक बेटा और एक बेटी हैं। 35 वर्षीय कुलविंदर कौर साल 2009 में CISF में तैनात हुई थी। वह साल 2021 से चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर तैनात है। कुलविंदर कौर का कहना है कि कंगना ने कहा था कि किसान आंदोलन में 100-100 रुपए लेकर महिलाएँ आ रही हैं। इससे वह नाराज थी, क्योंकि उसमें उसकी माँ भी शामिल थी।

उधर, एयरपोर्ट पर सिक्योरिटी देने वाले केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने घटना की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दिए हैं। अधिकारियों ने कहा कि महिला जवान के खिलाफ अभी तक सतर्कता जाँच या सजा नहीं हुई है। महिला का पति भी उसी हवाई अड्डे पर तैनात है। कुलविंदर के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर हिरासत में ले लिया गया है। इसके साथ ही उसे सस्पेंड भी कर दिया गया है। 

तारीख़ – 9 जून, समय – शाम सवा 7, जगह – राष्ट्रपति भवन… महामहिम द्रौपदी मुर्मू ने दही-चीनी खिला कर PM मोदी को दिया सरकार बनाने का न्योता, नज़रें अब मंत्रिपरिषद पर

कार्यवाहक प्रधानमंत्री और एनडीए के नेता नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (07 जून 2024) को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति से मुलाकात कर सांसदों का समर्थन पत्र सौंपा। अब 9 जून 2024 को नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल का शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसमें वो तीसरी बार देश की बागडोर संभालेंगे।

9 जून को शाम 7.15 बजे शपथ लेंगे पीएम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 जून को शाम 7.15 बजे शपथ ग्रहण समारोह में तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के साथ ही उनकी तीसरी मंत्रिमंडल के अहम साथी भी मंत्री पद की शपथ लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी का शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया जाएगा।

पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति ने हमें सरकार बनाने के लिए न्यौता दिया है। उन्होंने हमसे मंत्रिमंडल के सदस्यों को शपथ दिलाने के लिए लिस्ट भी माँगी है। हमने बताया है कि रविवार को शाम के समय शपथ लेने में उन्हें सुविधा रहेगी। राष्ट्रपति भवन बाकी ब्योरे पर काम करेगा और तब तक हम मंत्रिपरिषद की सूची राष्ट्रपति को सौंप देंगे। उसके बाद शपथ समारोह होगा। राष्ट्रपति भवन ने भी इस बारे में जानकारी दी है।

राष्ट्रपति के एक्स हैंडल पर बताया गया है कि राष्ट्रपति ने संविधान के आर्टिकल 75(1) द्वारा दिए गए अधिकारों का प्रयोग करते हुए नरेंद्र मोदी देश का प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी से कैबिनेट मंत्रियों के नाम और शपथ ग्रहण समारोह का समय पूछा है।

राष्ट्रपति से मिलने के बाद नरेंद्र मोदी ने कहा कि एनडीए सरकार को तीसरी बार देश की सेवा करने का देशवासियों ने आदेश दिया है। ये अवसर देने के लिए मैं देशवासियों का एक बार फिर हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। मैं देशवासियों को यह विश्वास दिलाता हूँ, पिछले दो कार्यकाल में जिस गति से देश आगे बढ़ा उससे भी तेज गति से विकास कार्य किए जाएँगे। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार देश के सपनों को पूरा करने का काम करेगी। उन्होंने कि देश की आशा-आकांक्षाओं को पूरा करने में कोई कमी नहीं रहेगी।

पीएम मोदी ने कहा कि 18वीं लोकसभा एक प्रकार से नई ऊर्जा, युवा ऊर्जा और कुछ कर गुजरने के इरादे वाली लोकसभा है। आजादी के अमृत महोत्सव के बाद का यह पहला चुनाव है। यह वह 25 वर्ष है जो हमारे अमृत काल के 25 वर्ष है। तीसरी बार एनडीए सरकार को जनता ने देश की सेवा करने का मौका दिया है। मैं देश की जनता को विश्वास दिलाता हूँ कि पिछले दो कार्यकाल में देश जिस तेजी से आगे बढ़ा है, हर क्षेत्र में बदलाव दिख रहा है और 25 करोड़ लोगों का गरीबी से बाहर निकलना हर भारतवासी के लिए गर्व का क्षण है।

बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे 4 जून को आए, जिसमें पीएम मोदी की अगुवाई में बीजेपी 240 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी और 293 सांसदों के साथ एनडीए गठबंधन ने पूर्ण बहुमत प्राप्त किया। इन नतीजों के बाद एनडीए के घटक दलों की बैठक हुई, जिसमें पीएम मोदी को नेता चुना गया। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति से मुलाकात कर सरकार बनाने के लिए दावा किया। अब वो 9 जून को तीसरी बाद देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे।

मुस्लिम महिलाओं ने AAP के संजय सिंह और राघव चड्ढा की कार को घेरा, कहा – जो वादा किया था वो पैसे दो: कॉन्ग्रेस मुख्यालय के बाहर भी लगी थी लंबी कतार

चुनाव जीतने के लिए कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले I.N.D.I. गठबंधन ने बड़े-बड़े वादे किए थे और लालच दिया था, जो अब उसकी ही गले की फाँस बन रहे हैं। मुस्लिम महिलाओं ने विपक्षी दलों के इन नेताओं से रुपयों की माँग करते हुए अब हंगामा शुरू कर दिया है। अब AAP (आम आदमी पार्टी) के राज्यसभा सांसदों संजय सिंह और राघव चड्ढा के कार को घेर कर महिलाओं ने पैसों की माँग की है। विपक्षी दलों ने मुस्लिमों से ‘खटाखट पोसे भेजने’ का वादा किया था।

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में संजय सिंह और राघव चड्ढा से महिलाओं ने चुनावी वादे के एक-एक लाख रुपए माँगे। इन महिलाओं का कहना था कि उन्हें जो खटाखट-खटाखट पैसे दिए जाने के वादे किए गए थे, अब वो पैसे कहाँ हैं? बता दें कि इस चुनाव में विपक्षी दलों ने जम कर मुफ्त रेवड़ियाँ बाँटने का लालच देने की योजना पर काम किया। कॉन्ग्रेस अपने ही घोषणा-पत्र और आम लोगों में बाँटे गए गारंटी कार्ड में फँस गई हैं। कॉन्ग्रेस दफ्तरों पर भी महिलाएँ पहुँच रही है।

असल में कॉन्ग्रेस ने इन महिलाओं से वादा किया था कि 5 जून, 2024 से ही महिलाओं के खाते में पैसे पहुँचने शुरू हो जाएँगे। संजय सिंह और राघव चड्ढा को घेर कर ये महिलाएँ कह रही थीं आप हमसे दुआ लेकर ही जाना। हालाँकि, इस दौरान दोनों ही AAP नेता इन महिलाओं से बच कर निकलते हुए नज़र आए। कॉन्ग्रेस ने इन महिलाओं को हर साल एक लाख रुपए देने का वादा किया था। बेरोजगार युवाओं को भी नियमित वेतन देने का वादा किया गया था।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित कॉन्ग्रेस मुख्यालय के बाहर मुस्लिम महिलाओं की लंबी कतार लग गई थी। ये सभी 1 लाख रुपए की माँग कर रही थीं, साथ ही कह रही थीं कि उन्हें वित्तीय लाभ दिया जाए। मुस्लिम महिलाएँ अपना-अपना पहचान-पत्र समेत अन्य दस्तावेज लेकर कॉन्ग्रेस के दफ्तर पहुँची थीं। इन महिलाओं ने अपने हाथों में कॉन्ग्रेस का ‘गारंटी कार्ड’ भी थाम रखा था, जिसमें एक लाख रुपए के वेतन के अलावा हर शिक्षित युवा को पक्की नौकरी देने का वादा किया गया है। ‘इस गारंटी कार्ड’ में कर्जमाफी का भी वादा है। मुस्लिम महिलाओं ने इन कार्ड्स को भर भी रखा था।

मोदी 3.0 के बीच सेंसेक्स ने भरी उड़ान, ऑल टाइम हाई पर पहुँचा शेयर बाजार, BSE के साथ NSE ने भी तोड़े रिकॉर्ड

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों के बाद मोदी 3.0 की वापसी और रिजर्व बैंक के फैसले का सकारात्मक असर शेयर बाजार दिख रहा है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स ऑल टाइम हाई 76,795.31 तक पहुँच गया था, हालाँकि शाम तक ये थोड़ी गिरावट के साथ 1618.85 की बढ़त के साथ 76,693.36 पर बंद हुआ। ये किसी भी कारोबारी दिवस के बंद होने के समय का एक रिकॉर्ड है। सिर्फ सेंसेक्स ही नहीं, बल्कि निफ्टी ने भी उड़ान भरी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज भी 2.05 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,290.15 पर बंद हुआ।

बता दें कि रिजर्व बैंक ने आज एक बार फिर से रेपो-रेट की पुरानी दरों को बरकरार रखा है। यह लगातार 8वीं बार है जब रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं देखने को मिला है। दूसरी तरफ आज नरेंद्र मोदी एनडीए का नेता चुना गया है। इन दोनों बड़ी खबर का असर शेयर बाजार सीधा पड़ा है। आपको ये बताना जारूरी है कि सेंसेक्स और निफ्टी आज गिरावट के साथ खुले थे, लेकिन मोदी सरकार 3.0 के शपथ की तारीखों के सामने आने के साथ ही दलाल स्ट्रीट यानी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर नई बहार लौट आई है।

बीएसई सेंसेक्स ने शुक्रवार (07 जून 2024) को सारे रिकॉर्ड को तोड़ते हुए नए ऑल-टाइम हाई लेवल को टच कर लिया। सेंसेक्स में एक ही दिन में 1,618.85 अंक से ज्यादा की तेजी दर्ज करके 76,793.36 पॉइंट पर बंद हुआ है। इससे चुनाव परिणाम वाले दिन यानी 4 जून को शेयर मार्केट में आई गिरावट पूरी तरह रिकवर हो गई। बीएसई सेंसेक्स ने शुक्रवार (07 जून 2024) को सारे रिकॉर्ड को तोड़ते हुए नए ऑल-टाइम हाई लेवल को टच कर लिया।

सेंसेक्स एक ही दिन में 1,618.85 अंक से ज्यादा की तेजी दर्ज करके 76,793.36 पॉइंट पर बंद हुआ है। इससे चुनाव परिणाम वाले दिन यानी 4 जून को शेयर मार्केट में आई गिरावट पूरी तरह रिकवर हो गई। सेंसेक्स में शामिल सभी 30 कंपनियों के शेयर ग्रीन जोन में बंद हुए। अगर अलग-अलग शेयरों को देखें तो विप्रो, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, टीसीएस और एचसीएल टेक के शेयरों में जबरदस्त देखी गई है। ये सभी शेयर टॉप गेनर रहे हैं और ये 5 प्रतिशत तक चढ़ गए हैं।

सिर्फ सेंसेक्स ही नहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के स्टॉक इंडेक्स निफ्टी 50 में भी जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। ये 468.75 पॉइंट चढ़कर 23,290.15 अंक पर बंद हुआ। दिन में ट्रेडिंग के दौरान इसने 23,320.20 पॉइंट के नए हाई लेवल को टच किया था।

‘मोदी सरकार ने हटा दी आंबेडकर, गाँधी और छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति’: ‘मोदी 3.0’ के एक्शन में आने से पहले ही बौखलाई कॉन्ग्रेस, जान लीजिए क्या है सच

लोकसभा चुनाव 2024 में मुँह के बल गिरने के बाद INDI के प्रमुख सहयोगी कॉन्ग्रेस झूठ फैलाने में लग गई है। कॉन्ग्रेस ने दावा किया है कि संसद परिसर से महात्मा गाँधी, छत्रपति शिवाजी महाराज और बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर की मूर्ति को हटा दिया गया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह सब भाजपा द्वारा खीझ निकालने के लिए किया गया है। जबकि, सच्चाई ये है कि पुनर्विकास कार्यक्रम के तहत इन विभूतियों की प्रतिमाओं को दूसरी जगह स्थापित किया जा रहा है।

कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, “अभी नतीजे आ रहे थे, खीझ बढ़ती जा रही थी। साहब लोगों की खीझ ऐसी बढ़ी कि भवन संसद के परिसर में जहाँ हम सब लोग बैठकर संसदीय मर्यादाओं का, संविधान का, लोकतंत्र को बचाने के लिए महात्मा गाँधी जी का जो स्टैच्यू है, उनके चरणों में यही भाजपा जब विपक्ष में होती थी तो बैठा करती थी। ये लोग भी उन्हीं चरणों में बैठकर हमारे खिलाफ विरोध करते थे।”

पवन खेड़ा ने आगे कहा, “ये (भाजपा) एक अनोखे प्राणी हैं। बड़े बुजुर्ग कहा करते थे कि अगर कोई व्यक्ति बुराई की प्रतीक बन जाए तो वह अंगारे की माफिक हो जाता है। जलता है तो हाथ जला देता है और बुझता है तो हाथ काले कर जाता है। तो ये बुझते-बुझते भी हाथ काले करके जा रहे हैं।”

कॉन्ग्रेस नेता ने कहा, “महात्मा गाँधी का स्टैच्यू, वीर शिरोमणि छत्रपति शिवाजी महाराज का स्टैच्यू, बाबासाहेब डॉक्टर आंबेडकर का स्टैच्यू… ये तमाम स्टैच्यू वहाँ से हटा दिए गए। पीड़ा किस बात की है, खीझ किस बात की है। पीड़ा इस बात की है कि वन नेशन, वन इनकारनेशन… वन नेशन, वन गॉड… ये खुद बनना चाह रहे थे।”

पवन खेड़ा ने आगे कहा, “खीज निकालने के लिए इन्होंने महात्मा गाँधी की स्टैच्यू वहाँ से उखाड़ दिया और धकेल दिया कहीं पीछे जाकर। हमारे नेता राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी, मल्लिकार्जुन खड़गे… चुनाव प्रचार के दौरान संविधान बचाने की मुहिम छेड़ दी थी, क्योंकि संविधान पर जो खतरे के बादल मंडरा रहे थे, वहीं लोक कल्याण मार्ग से निकल कर आ रहे थे।”

पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि संविधान बचाने के मुहिम के कारण भाजपा ने डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की मूर्ति को वहाँ से हटा दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के लिए खराब आए नतीजों के कारण भाजपा ने महाराष्ट्र के लोगों से बदला लेने के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज की स्टैच्यू उखाड़कर पीछे लगा दिया।

कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा के इस दावे को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स उन्हें खूब खरी-खोटी सुना रहे हैं। लाला नाम के एक ट्विटर हैंडल ने लिखा, “देश को गुमराह करना और झूठ फैलाना ही कॉन्ग्रेस का एकमात्र एजेंडा है। गुजरात और महाराष्ट्र के लोगों को भड़काने के लिए झूठा दावा किया जा रहा है कि गाँधी और छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा हटाई जा रही है। दरअसल, पुरानी संसद के बाहर की प्रतिमाओं को नए संसद परिसर में स्थानांतरित किया जा रहा है। स्थानांतरित करने और पूरी तरह से हटाने में अंतर है।”

इन महान नेताओं की प्रतिमा को पुराने संसद भवन से नए संसद भवन परिसर में स्थानांतरित किया जा रहा है। इस संबंध में पहले खबरें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। खबरों में कहा गया है कि संसद भवन के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित इन प्रतिमाओं को संसद परिसर के प्रेरणा स्थल में स्थापित किया जा रहा है। यह सब परिसर के पुनर्विकास के तहत किया जा रहा है।

हालाँकि, सच्चाई को जानते हुए भी कॉन्ग्रेस और उसके नेताओं ने देश को गुमराह करने की कोशिश की। इसके पीछे आने वाले विधानसभा चुनावों में बढ़त हासिल करने के लिए जनता में भ्रम फैलाना है। कॉन्ग्रेस ये नहीं बता रही है कि इन प्रतिमाओं को संसद परिसर में दूसरी जगह स्थापित किया जा रहा है, बल्कि वह सीधे-सीधे इन्हें हटाने की बात कहकर झूठ फैलाने की कोशिश कर रही है।

महाराष्ट्र में BJP को हराने के लिए मुस्लिम हुए लामबंद, AIMPLB और मस्जिदों ने जारी किए फतवे, जानें- कैसे इंडी गठबंधन के पक्ष में एकमुश्त पड़े वोट

महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे बेहद चौंकाने वाले रहे। यहाँ मुस्लिमों ने बीजेपी के विरोध में इंडी गठबंधन को एकमुश्त वोटिंग की। यूपी, महाराष्ट्र, राजस्थान समेत कुछ राज्यों में भारी नुकसान की वजह से बीजेपी अपने दम पर पूर्ण बहुमत नहीं प्राप्त कर सकी। महाराष्ट्र में आश्चर्यजनक नतीजे आए, जहाँ सीएम एकनाथ शिंदे की अगुआई वाली शिवसेना ने 7 सीटें हासिल कीं और बीजेपी ने 9 सीटें जीतीं। वहीं, मुस्लिमों, कम्युनिष्टों का समर्थन पाने वाली एनसीपी (शरद पवार), भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) जैसी पार्टियों ने क्रमशः 8, 13 और 9 सीटें हासिल कीं। इससे यह साफ जाहिर होता है कि महाराष्ट्र के मुस्लिमों ने बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के मुकाबले में खड़ी पार्टियों के पक्ष में एकजुटता के साथ वोटिंग की।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बीजेपी की भारी हार की जिम्मेदारी लेते हुए नतीजों के तुरंत बाद इस्तीफा देने की पेशकश की। फडणवीस ने कहा, “महाराष्ट्र में लोकसभा चुनावों में हमें जो भी नुकसान हुआ है, मैं उसकी पूरी जिम्मेदारी लेता हूँ। इसलिए मैं शीर्ष नेतृत्व से आग्रह करता हूँ कि मुझे मेरे मंत्री पद से मुक्त कर दिया जाए क्योंकि मुझे पार्टी के लिए काम करने और राज्य विधानसभा चुनावों की तैयारियों में अपना समय देने की जरूरत है।”

फडणवीस ने आगे कहा, “कुछ सीटों पर किसानों के मुद्दों ने अहम भूमिका निभाई, तो संविधान में बदलाव किए जाने के झूठे प्रचार ने भी कुछ वोटरों को प्रभावित किया, जिसका मुस्लिमों और मराठा समुदाय के वोटरों पर भी असर पड़ा।” देवेंद्र फडणवीस ने संकेत दिया कि मुस्लिमों ने कॉन्ग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद पवार) को समर्थन दिया, जिससे बीजेपी के लिए प्रतिकूल परिणाम आए।

‘फतवों ने शिवसेना (यूबीटी) को मुंबई में सीटें जीतने में मदद की’: दीपक केसरकर

शिवसेना नेता और महाराष्ट्र के मंत्री दीपक केसरकर जो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खास माने जाते हैं। उन्होंने 6 जून 2024 को कहा कि मुस्लिमों द्वारा बीजेपी के खिलाफ जारी किए गए ‘फतवों’ की वजह से ही शिवसेना (यूबीटी) और कॉन्ग्रेस, एनसीपी (शरद पवार) मुंबई, सांगली, बारामती, शिरुर और डिंडोरी से अधिकाँश सीटें मिली। दीपक केसरकर ने कहा कि मुस्लिम वोटर इस बात को लेकर बिल्कुल आश्वस्त थे कि उद्धव ठाकरे ने हिंदुत्व की विचारधारा को छोड़ दिया है। केसरकर ने कहा, “फतवों ने शिवसेना (यूबीटी) को मुंबई में सीटें जीतने में मदद की। अगर आप इसे घटा दें, तो शिवसेना के हर उम्मीदवार को 1-1.5 लाख से ज़्यादा वोटों से हार का सामना करना पड़ता।”

दीपक ने कहा कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना को मुंबईकरों और मराठी मतदाताओं के वोट मिले हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करने के लिए पाकिस्तान में एक साजिश रची गई थी। उन्होंने दावा किया, “पाकिस्तान में दो मंत्रियों ने मोदी की हार की वकालत की और अफसोस की बात है कि यहाँ कुछ लोगों ने उनकी बातों पर ध्यान दिया।” केसरकर ने आगे कहा कि विपक्ष ने दलित समुदायों को गुमराह करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के दोबारा सत्ता में आने पर संविधान बदल दिया जाएगा। इसे देखते हुए यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि मुस्लिमों ने हकीकत में लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी के उम्मीदवारों के खिलाफ एकजुट होकर वोटिंग की।

पुणे में बीजेपी, शिवसेना (शिंदे) और एनसीपी (अजित पवार) के खिलाफ फतवा हुआ था जारी

मीडिया रिपोर्ट्स में 7 मई को दावा किया गया कि पुणे के इलाके में इस्लामी धर्मगुरुओं ने बीजेपी के खिलाफ फतवा जारी किया और मुस्लिम मतदाताओं से पुणे, शिरुर, बारामती और मावल निर्वाचन क्षेत्रों से क्रमशः कॉन्ग्रेस, एनसीपी (शरद पवार) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) का प्रतिनिधित्व करने वाले उम्मीदवारों को ही वोट देने को कहा। इस्लामी नेताओं ने 2 मई को कोंडवा क्षेत्र में जमाती तंजीम पुणे द्वारा आयोजित ‘हज़रत मौलाना सज्जाद नोमानी की तकरीर’ कार्यक्रम में ये फतवा जारी किया।

इस कार्यक्रम का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया था। कार्यक्रम के आयोजकों में से एक व्यक्ति वीडियो में कॉन्ग्रेस और एनसीपी-शरद पवार गुट को सपोर्ट करता दिख रहा है। वो व्यक्ति वीडियो में बोलता है, “कुल जमाती तंजीम ने पुणे से कॉन्ग्रेस के कैंडिडेट रवींद्र धांगेकर, बारामती और शिरुर से एनसीपी-शरद पवार की कैंडिडेट सुप्रिया सुले और अमोल कोल्हे और मावल से शिवसेना (यूबीटी) के कैंडिडेट संजय वाघेरे को समर्थन देने का फैसला किया है। हम इन चार कैंडिडेट्स का समर्थन करते हैं और आप सभी मुस्लिमों से अपील है कि उन्हें जिताएँ, साथ ही परिवार के सदस्यों और दोस्तों से भी उनके लिए वोटिंग की अपील की।

ये घोषणा मौलाना सज्जाद नोमानी के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में की गई, जिसमें ‘मौजूदा हालात और हमारी ज़िम्मेदारी’ सब्जेक्ट पर चर्चा की गई। अपने भाषण में नोमानी ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के सभी लोगों को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने मुस्लिमों के मन में ये डर भी पैदा किया अगर मोदी सत्ता में आए, तो सभी मजार और मदरसे तोड़ दिए जाएँगे।

नोमानी ने सरकार के खिलाफ मुस्लिमों को भड़काते हुए कहा, “अगर आप अपने अधिकारों (वोट) का सही दिशा में इस्तेमाल नहीं करेंगे तो आपका देश ऐसा है कि रोहिंग्याओं को भूल जाएगा। इस देश के नेता के पास इस देश में वक्फ व्यवस्था को खत्म करने की योजना है। आप ही हमारे मदरसों, मस्जिदों और मजारों को बचाएँगे। मोदी की यह एक योजना पूरे मुस्लिम समुदाय के लिए खतरा पैदा करने वाली है।”

शिवसेना-यूबीटी की मुंबई रैली में फहराए गए इस्लामिक झंडे

शिवसेना (यूबीटी) के उद्धव ठाकरे ने कुछ साल पहले अपने पिता और शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे द्वारा स्थापित हिंदुत्व विचारधारा को छोड़ दिया था, जिसकी वजह से एकनाथ शिंदे और उनके साथियों ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ दिया था। तब से उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी मुस्लिम समुदाय से अपने समर्थन की उम्मीद करता है। शिवसेना-यूबीटी के नेता मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भड़के मुद्दों पर चुप रहे, या उन्हें अच्छे से ‘संभाल’ लिया।

एक उदाहरण साल 2020 के पालघर में साधुओं की लिंचिंग के बाद राज ठाकरे की धमकी से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर लाउडस्पीकर पर अजान बंद नहीं की गई, तो वो हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। माना जाता है कि ऐसी घटनाओं ने उद्धव ठाकरे के पक्ष में काम किया और शिवसेना के झंडे-निशान के बिना भी महाराष्ट्र में 9 सीटें जीत ली। आपको याद दिला दें कि 14 मई 2024 की रिपोर्ट में ऑपइंडिया ने बताया था कि कैसे शिवसेना-यूबीटी की मुंबई रैली में इस्लामिक झंडे फहराए गए थे। इस्लामिक झंडे लहराने का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था, जिसमें इस्लामिक झंडे सबसे ऊपर फहराए दिख रहे थे और मुस्लिम समर्थकों के साथ शिवसेना-यूबीटी के कार्यकर्ता पटाखे फोड़ रहे थे।

इस बीच, बीजेपी के नितेश राणे ने शिवसेना (यूबीटी) पार्टी की आलोचना की और कहा कि महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव बालासाहेब ठाकरे को खुद को हिंदू नेता बालासाहेब ठाकरे का बेटा कहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि रैली में पाकिस्तानी झंडा फहराया गया था। हालाँकि बाद में ये साफ हो गया था कि उद्धव ठाकरे की रैली में पाकिस्तानी झंडा नहीं, बल्कि इस्लामिक झंडा फहराया गया था।

शिवसेना-यूबीटी की रैली में फहराए गए कम्युनिस्टों के लाल झंडे

शिवसेना-यूबीटी का समर्थन कम्युनिष्टों ने भी किया, जिन्होंने अप्रैल 2024 में उद्धव ठाकरे गुट की रैली में कम्युनिष्टों के लाल झंडे लहराए। इस बात से जुड़ी तस्वीरें भी इंटरनेट पर वायरल हो गई थी, जिसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उद्धव ठाकरे पर हिंदुत्व विचारधारा के अपमान का आरोप लगाया।

इस बीच, उद्धव ठाकरे ने घोषणा की कि वो पीएम मोदी का साथ कभी नहीं देंगे और न ही अपनी पार्टी का कभी बीजेपी में विलय करेंगे। ठाकरे ने पीएम मोदी को विश्वासघाती कहते हुए कहा कि वो लोकसभा का चुनाव हार जाएँगे। ठाकरे का ये बयान अजित पवार और एकनाथ शिंदे गुट के बीजेपी के साथ आने के बाद सामने आया था।

निष्कर्ष

मुंबई में मुस्लिम उद्धव ठाकरे की शिवसेना के लिए उस जोश के साथ काम कर रहे हैं जो 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद से नहीं देखा गया है जब आम आदमी पार्टी (आप) के अरविंद केजरीवाल ने उन्हें किनारे कर दिया था। उस समय मुस्लिमों के असंतोष से घबराई कॉन्ग्रेस ने उन्हें गुजरात 2002 का डर दिखाया और कोशिश की कि उसके वोट न बँटे। हालाँकि मुस्लिमों ने कॉन्ग्रेस की जगह आम आदमी पार्टी का साथ दिया और महाराष्ट्र में आम आदमी पार्टी के 48 उम्मीदवारों के पक्ष में लामबंद हो गए थे।

साल 2019 के लोकसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस-एनसीपी गठबंधन को महाराष्ट्र के मुस्लिम वोट डिफ़ॉल्ट रूप से मिले। उनके पास कोई विकल्प नहीं था, कि वो बीजेपी के खिलाफ किसे वोट करें। लेकिन इस बार इंडी अलायंस सिर्फ़ मुस्लिमों के लिए ही नहीं बल्कि बीजेपी के विरोधियों के लिए भी एक स्पष्ट विकल्प बन गया। मानो मुस्लिमों और बीजेपी विरोधियों के पास कोई खास थीम हो, ‘कैंडिडेट तो मजबूरी है, इंडी अलायंस जरूरी है।’

मुस्लिम मतदाताओं ने कॉन्ग्रेस, एनसीपी (शरद पवार) और शिवसेना (यूबीटी) जैसी पार्टियों का भरपूर समर्थन किया, जबकि इंडी गठबंधन ने एक भी मुस्लिम कैंडिडेट नहीं उतारा था। इंडी गठबंधन न केवल महाराष्ट्र में बल्कि पूरे देश में संयुक्त रूप से अभियान शुरू करने में विफल रहा, फिर भी ‘धर्मनिरपेक्षता’ में विश्वास रखने वाले मतदाताओं ने बीजेपी और पीएम मोदी के विरोध की वजह से इंडी गठबंधन का समर्थन किया। आने वाले सालों में विशेष रूप से गैर-मुस्लिम, जो मुस्लिम वोट पाने वाले एनसीपी (शरद पवार), शिवसेना (यूबीटी) और कॉन्ग्रेस का समर्थन करते हैं, वे समझेंगे कि बीजेपी के खिलाफ उन्हें समर्थन कर उन्होंने कितनी बड़ी गलती की।

यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित की गई है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

कॉलेज ने निलंबित किया, पुलिस ने दर्ज की FIR: कश्मीर में ईशनिंदा का आरोप लगा कर राजस्थान के छात्र के खिलाफ बवाल, मजहबी नारों के साथ बताया ‘बाहरी’

जम्मू कश्मीर में मुस्लिमों ने एक छात्र पर ईशनिंदा का आरोप लगा कर बवाल काटा है। इतना ही नहीं, पुलिस ने भी उक्त छात्र के खिलाफ गुरुवार (6 जून, 2024) को FIR दर्ज कर लिया। उक्त छात्र श्रीनगर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में पढ़ता है और राज्य के बाहर का रहने वाला है। आरोप लगाया गया है कि एक कॉलर एप पर उसने मजहबी रूप से संवेदनशील कंटेंट डाला। श्रीनगर पुलिस ने इसका संज्ञान लिया है। GMC श्रीनगर के उक्त छात्र के खिलाफ मजहबी भावनाओं को ठेस पहुँचाने की धाराएँ लगाई गई हैं।

उक्त छात्र को निलंबित भी कर दिया गया है। बुधवार को उसके खिलाफ जम कर बवाल मचाया गया और विरोध प्रदर्शन हुए। GMC को बयान जारी कर के कहना पड़ा कि उसके खिलाफ जाँच पूरी होने तक उसे त्वरित रूप से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही छात्रों से महाविद्यालय परिसर में शांति बनाए रखने का आग्रह किया गया है। 13 विभागाध्यक्षों (HoD) और 1 HoU को लेकर एक जाँच समिति बनाई गई है। उधर GMC के ‘रेसिडेंट्स डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA)’ ने भी छात्र की निंदा करते हुए उसके द्वारा पोस्ट की गई सामग्री को ईशनिंदा बताया है।

उक्त छात्र अभी सनातन की पढ़ाई कर रहा है। RDA ने GMC को प्रतिष्ठित संस्थान बताते हुए कहा कि यहाँ इस तरह की घटना खेदजनक है। संगठन ने कहा कि ये एक जघन्य अपराध है जो न सिर्फ मजहबी भावनाओं को गंभीर रूप से आहत करता है बल्कि जिस सामाजिक सद्भाव और आपसी सम्मान को हम प्रिय मानते हैं उसके मूल ढाँचे को भी नुकसान पहुँचाता है। संगठन ने कड़ी सज़ा की माँग करते हुए ये सुनिश्चित करने को कहा कि आगे इस तरह की घटना दोबारा न हो।

RDA ने कठोर कदम उठाए जाने की माँग करते हुए कहा कि इस मामले में आरोपित के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया जाए। बता दें कि सोशल मीडिया मैसेजिंग एप Whatsapp पर ये मामला पैगंबर मुहम्मद के अपमान के आरोप से जुड़ा है। आरोप है कि उन्हें गलत तरीके से प्रदर्शित किया गया। करण नगर में सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम मजहबी नारे लगाते हुए आए। आरोपित राजस्थान का रहने वाला है। मुस्लिमों ने इसे PG मेडिकल की 50% और MBBS की 10% सीटों को ‘ऑल इंडिया कोटा’ के तहत दूसरे राज्यों के छात्रों को आरक्षित किए जाने का दुष्परिणाम बताया।

‘मुगलों की जजिया कर की तरह है नगर निगम के भारी-भरकम टैक्स’: श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के मुख्य पक्षकार ने CM योगी को पत्र लिखकर माँगी मदद

उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि एवं शाही ईदगाह ढाँचा विवाद में हिंदू पक्ष के मुख्य पक्षकार महंत कौशल किशोर ठाकुर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी मथुरा वृंदावन नगर निगम द्वारा धर्मार्थ संस्थानों से जल कर एवं गृह कर के रूप में वसूली जा रही भारी-भरकम राशि से संबंधित है।

इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नगर निगम प्रशासन से मंदिरों, आश्रमों एवं धर्मार्थ संस्थानों से न्यूनतम कर वसूलने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया था। हालाँकि, महंत कौशल किशोर का कहना है कि अधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश की अनदेखी कर रहे हैं और धर्मार्थ संस्थानों से मनमानी कर वसूल कर रहे हैं।

कौशल किशोर ठाकुर ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि मथुरा वृंदावन नगर निगम द्वारा पहले आश्रमों, मंदिरों एवं धर्मार्थ संस्थानों से सीमित कर वसूला जाता है। उन्होंने अपनी चिट्ठी में आरोप लगाया है कि नगर निगम प्रशासन पिछले एक वर्ष से आश्रमों के संतों के पास 10-10 करोड़ रुपए की वसूली का नोटिस भेजा है।

संतों पर अत्याचार बताते हुए उन्होंने कहा, “संत समाज इसकी आपत्ति दर्ज कराने निगम कर्मचारियों के पास जाते हैं तो उनसे रिश्वत की माँग की जाती है और कहा जाता है कि बिल कम कराना है तो 20 प्रतिशत दो।” उन्होंने इसे जजिया कर बताते हुए मुख्यमंत्री से इससे बचाने का आग्रह किया। बता दें कि यूपी के नगर विकास एवं शहरी समग्र विकास, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन मंत्री एके शर्मा हैं।

उत्तर प्रदेश की सत्ता दूसरी बार संभालने के साथ ही सीएम योगी ने अप्रैल 2022 में अयोध्या पहुँचे थे अधिकारियों से साफ तौर पर कहा था कि मंदिरों, धार्मिक स्थलों और धर्मशालाओं से कमर्शियल के स्थान पर चैरिटेबल के रूप में टैक्स लिया जाए। अयोध्या नगर निगम बनने के साथ ही टैक्स के रेट में बड़ी बढ़ोतरी हुई थी। यही हाल दूसरे नगर निगमों के साथ भी हुई।

इतना ही नहीं, नवंबर 2023 में मथुरा-वृंदावन के आश्रमों को बढ़े हुए टैक्स का नोटिस दिए जाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से साफ कहा था कि आश्रमों पर न्यूनतम टैक्स लगाया जाए। इसके लिए धर्मगुरुओं से अधिकारी और जनप्रतिनिधि लगातार संवाद करें।

मुख्यमंत्री योगी ने यह भी कहा था कि यदि प्राइवेट कंपनी टैक्स वसूलती हैं तो उन पर भी अधिकारी नजर रखें। दरअसल, नगर निगम पिछले साल से ही मथुरा-वृंदावन में संचालित आश्रमों पर टैक्स बढ़ाकर नोटिस भेजने शुरू किए थे। संतों ने उस दौरान भी बढ़े टैक्स का विरोध किया था। यहाँ करीब 250 छोटे-बड़े आश्रम संचालित हैं।

‘मोदी 3.0’ में कैबिनेट मंत्री बन सकते हैं सुरेश गोपी, बताया क्षेत्र के विकास का एजेंडा: केरल में पहली बार खिला कमल तो PM मोदी ने बलिदानी कार्यकर्ताओं को किया याद

इतिहास में पहली बार भाजपा ने दक्षिण भारतीय राज्य केरल में खाता खोला है। त्रिशूर से अभिनेता सुरेश गोपी ने 74,686 मतों से जीत दर्ज की है। अब ये भी सामने आया है कि ‘मोदी 3.0’ में वो कैबिनेट मंत्री बनने वाले हैं। आलाकमान ने इशारों में उन्हें इसकी जानकारी भी दे दी है। रविवार (9 जून, 2024) को नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे और उनके साथ शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची में सुरेश गोपी का भी नाम है। इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई है, लेकिन ये तय माना जा रहा है।

सुरेश गोपी केरल से चुने जाने वाले पहले भाजपा सांसद हैं और जिस तरह से पार्टी क्षेत्रीयता का ध्यान रखती है, इसे देखते हुए भी तय माना जा रहा है कि वो मंत्री बनेंगे। वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी करीबी हैं, जनवरी में उनकी बेटी की शादी में खुद पीएम ने आकर आशीर्वाद दिया था। भाजपा के सेन्ट्रल लीडरशिप के कहने पर ही वो उम्मीदवार बनाए गए थे। मीडिया से बात करते हुए सुरेश गोपी ने कहा कि वो काफी खुश हैं, वो अपने सिर पर राज्य में पहला भाजपा सांसद होने का भार नहीं ढो रहे हैं।

सुरेश गोपी ने कहा कि वो सिर्फ एक सांसद हैं। उन्होंने कहा कि जो कोई और नहीं कर सकता, उस चीज को साहस एवं वीरता के साथ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईश्वर के हिसाब से सारी योजनाएँ चलती है। बकौल सुरेश गोपी, कई लोगों ने उन्हें फोन कॉल कर के केंद्रीय मंत्री बनाए जाने के संबंध में सलाह दी है, फ़िलहाल इस पर कुछ कहना नकारात्मक होगा। उन्होंने सिनेमा को अपना अभिभावक बताते हुए कहा था कि फ़िल्में करना उनका पैशन है, वो आगे भी मनोरंजन की दुनिया में सक्रिय रहेंगे।

सुरेश गोपी ने कहा कि महिला उत्थान उनकी प्राथमिकता में रहेगा, कोच्चि मेट्रो को त्रिशूर तक विस्तार देने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने शहर में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या से निजात दिलाने का वादा करते हुए पोन्नानी तक टूलेन सड़क बनवाने की भी बात कही। सुरेश गोपी ने कहा कि केरल के आगामी विधानसभा चुनावों में उन्हें भाजपा का चेहरा बनने से भी कोई गुरेज नहीं है। सुरेश गोपी अब तक 250 से भी अधिक फ़िल्में कर चुके हैं, 2005 के बाद से उन्होंने फिल्मों में सक्रियता कम कर दी। अब उन्होंने कहा है कि सभी विभागों के साथ मिल कर वो त्रिशूर के विकास के लिए काम करेंगे।

उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी केरल में कमल खिलने के बाद ख़ुशी जताई है। इस दौरान उन्होंने याद किया कि कैसे केरल में पार्टी के कई कार्यकर्ताओं ने बलिदान दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए केरल में काम करना जम्मू कश्मीर से भी अधिक कठिन था। उन्होंने कहा कि हमने केरल में भी जीत दर्ज की है। उन्होंने आरोप आया कि विपक्ष ने NDA की जीत को नकारने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि 10 साल झूठ फैलाने और झूठे वादों के बावजूद कॉन्ग्रेस 100 सीट भी नहीं जीत पाई।