Home Blog Page 887

कॉलेज ने निलंबित किया, पुलिस ने दर्ज की FIR: कश्मीर में ईशनिंदा का आरोप लगा कर राजस्थान के छात्र के खिलाफ बवाल, मजहबी नारों के साथ बताया ‘बाहरी’

जम्मू कश्मीर में मुस्लिमों ने एक छात्र पर ईशनिंदा का आरोप लगा कर बवाल काटा है। इतना ही नहीं, पुलिस ने भी उक्त छात्र के खिलाफ गुरुवार (6 जून, 2024) को FIR दर्ज कर लिया। उक्त छात्र श्रीनगर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में पढ़ता है और राज्य के बाहर का रहने वाला है। आरोप लगाया गया है कि एक कॉलर एप पर उसने मजहबी रूप से संवेदनशील कंटेंट डाला। श्रीनगर पुलिस ने इसका संज्ञान लिया है। GMC श्रीनगर के उक्त छात्र के खिलाफ मजहबी भावनाओं को ठेस पहुँचाने की धाराएँ लगाई गई हैं।

उक्त छात्र को निलंबित भी कर दिया गया है। बुधवार को उसके खिलाफ जम कर बवाल मचाया गया और विरोध प्रदर्शन हुए। GMC को बयान जारी कर के कहना पड़ा कि उसके खिलाफ जाँच पूरी होने तक उसे त्वरित रूप से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही छात्रों से महाविद्यालय परिसर में शांति बनाए रखने का आग्रह किया गया है। 13 विभागाध्यक्षों (HoD) और 1 HoU को लेकर एक जाँच समिति बनाई गई है। उधर GMC के ‘रेसिडेंट्स डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA)’ ने भी छात्र की निंदा करते हुए उसके द्वारा पोस्ट की गई सामग्री को ईशनिंदा बताया है।

उक्त छात्र अभी सनातन की पढ़ाई कर रहा है। RDA ने GMC को प्रतिष्ठित संस्थान बताते हुए कहा कि यहाँ इस तरह की घटना खेदजनक है। संगठन ने कहा कि ये एक जघन्य अपराध है जो न सिर्फ मजहबी भावनाओं को गंभीर रूप से आहत करता है बल्कि जिस सामाजिक सद्भाव और आपसी सम्मान को हम प्रिय मानते हैं उसके मूल ढाँचे को भी नुकसान पहुँचाता है। संगठन ने कड़ी सज़ा की माँग करते हुए ये सुनिश्चित करने को कहा कि आगे इस तरह की घटना दोबारा न हो।

RDA ने कठोर कदम उठाए जाने की माँग करते हुए कहा कि इस मामले में आरोपित के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया जाए। बता दें कि सोशल मीडिया मैसेजिंग एप Whatsapp पर ये मामला पैगंबर मुहम्मद के अपमान के आरोप से जुड़ा है। आरोप है कि उन्हें गलत तरीके से प्रदर्शित किया गया। करण नगर में सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम मजहबी नारे लगाते हुए आए। आरोपित राजस्थान का रहने वाला है। मुस्लिमों ने इसे PG मेडिकल की 50% और MBBS की 10% सीटों को ‘ऑल इंडिया कोटा’ के तहत दूसरे राज्यों के छात्रों को आरक्षित किए जाने का दुष्परिणाम बताया।

‘मुगलों की जजिया कर की तरह है नगर निगम के भारी-भरकम टैक्स’: श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के मुख्य पक्षकार ने CM योगी को पत्र लिखकर माँगी मदद

उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि एवं शाही ईदगाह ढाँचा विवाद में हिंदू पक्ष के मुख्य पक्षकार महंत कौशल किशोर ठाकुर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी मथुरा वृंदावन नगर निगम द्वारा धर्मार्थ संस्थानों से जल कर एवं गृह कर के रूप में वसूली जा रही भारी-भरकम राशि से संबंधित है।

इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नगर निगम प्रशासन से मंदिरों, आश्रमों एवं धर्मार्थ संस्थानों से न्यूनतम कर वसूलने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया था। हालाँकि, महंत कौशल किशोर का कहना है कि अधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश की अनदेखी कर रहे हैं और धर्मार्थ संस्थानों से मनमानी कर वसूल कर रहे हैं।

कौशल किशोर ठाकुर ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि मथुरा वृंदावन नगर निगम द्वारा पहले आश्रमों, मंदिरों एवं धर्मार्थ संस्थानों से सीमित कर वसूला जाता है। उन्होंने अपनी चिट्ठी में आरोप लगाया है कि नगर निगम प्रशासन पिछले एक वर्ष से आश्रमों के संतों के पास 10-10 करोड़ रुपए की वसूली का नोटिस भेजा है।

संतों पर अत्याचार बताते हुए उन्होंने कहा, “संत समाज इसकी आपत्ति दर्ज कराने निगम कर्मचारियों के पास जाते हैं तो उनसे रिश्वत की माँग की जाती है और कहा जाता है कि बिल कम कराना है तो 20 प्रतिशत दो।” उन्होंने इसे जजिया कर बताते हुए मुख्यमंत्री से इससे बचाने का आग्रह किया। बता दें कि यूपी के नगर विकास एवं शहरी समग्र विकास, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन मंत्री एके शर्मा हैं।

उत्तर प्रदेश की सत्ता दूसरी बार संभालने के साथ ही सीएम योगी ने अप्रैल 2022 में अयोध्या पहुँचे थे अधिकारियों से साफ तौर पर कहा था कि मंदिरों, धार्मिक स्थलों और धर्मशालाओं से कमर्शियल के स्थान पर चैरिटेबल के रूप में टैक्स लिया जाए। अयोध्या नगर निगम बनने के साथ ही टैक्स के रेट में बड़ी बढ़ोतरी हुई थी। यही हाल दूसरे नगर निगमों के साथ भी हुई।

इतना ही नहीं, नवंबर 2023 में मथुरा-वृंदावन के आश्रमों को बढ़े हुए टैक्स का नोटिस दिए जाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से साफ कहा था कि आश्रमों पर न्यूनतम टैक्स लगाया जाए। इसके लिए धर्मगुरुओं से अधिकारी और जनप्रतिनिधि लगातार संवाद करें।

मुख्यमंत्री योगी ने यह भी कहा था कि यदि प्राइवेट कंपनी टैक्स वसूलती हैं तो उन पर भी अधिकारी नजर रखें। दरअसल, नगर निगम पिछले साल से ही मथुरा-वृंदावन में संचालित आश्रमों पर टैक्स बढ़ाकर नोटिस भेजने शुरू किए थे। संतों ने उस दौरान भी बढ़े टैक्स का विरोध किया था। यहाँ करीब 250 छोटे-बड़े आश्रम संचालित हैं।

‘मोदी 3.0’ में कैबिनेट मंत्री बन सकते हैं सुरेश गोपी, बताया क्षेत्र के विकास का एजेंडा: केरल में पहली बार खिला कमल तो PM मोदी ने बलिदानी कार्यकर्ताओं को किया याद

इतिहास में पहली बार भाजपा ने दक्षिण भारतीय राज्य केरल में खाता खोला है। त्रिशूर से अभिनेता सुरेश गोपी ने 74,686 मतों से जीत दर्ज की है। अब ये भी सामने आया है कि ‘मोदी 3.0’ में वो कैबिनेट मंत्री बनने वाले हैं। आलाकमान ने इशारों में उन्हें इसकी जानकारी भी दे दी है। रविवार (9 जून, 2024) को नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे और उनके साथ शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची में सुरेश गोपी का भी नाम है। इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई है, लेकिन ये तय माना जा रहा है।

सुरेश गोपी केरल से चुने जाने वाले पहले भाजपा सांसद हैं और जिस तरह से पार्टी क्षेत्रीयता का ध्यान रखती है, इसे देखते हुए भी तय माना जा रहा है कि वो मंत्री बनेंगे। वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी करीबी हैं, जनवरी में उनकी बेटी की शादी में खुद पीएम ने आकर आशीर्वाद दिया था। भाजपा के सेन्ट्रल लीडरशिप के कहने पर ही वो उम्मीदवार बनाए गए थे। मीडिया से बात करते हुए सुरेश गोपी ने कहा कि वो काफी खुश हैं, वो अपने सिर पर राज्य में पहला भाजपा सांसद होने का भार नहीं ढो रहे हैं।

सुरेश गोपी ने कहा कि वो सिर्फ एक सांसद हैं। उन्होंने कहा कि जो कोई और नहीं कर सकता, उस चीज को साहस एवं वीरता के साथ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईश्वर के हिसाब से सारी योजनाएँ चलती है। बकौल सुरेश गोपी, कई लोगों ने उन्हें फोन कॉल कर के केंद्रीय मंत्री बनाए जाने के संबंध में सलाह दी है, फ़िलहाल इस पर कुछ कहना नकारात्मक होगा। उन्होंने सिनेमा को अपना अभिभावक बताते हुए कहा था कि फ़िल्में करना उनका पैशन है, वो आगे भी मनोरंजन की दुनिया में सक्रिय रहेंगे।

सुरेश गोपी ने कहा कि महिला उत्थान उनकी प्राथमिकता में रहेगा, कोच्चि मेट्रो को त्रिशूर तक विस्तार देने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने शहर में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या से निजात दिलाने का वादा करते हुए पोन्नानी तक टूलेन सड़क बनवाने की भी बात कही। सुरेश गोपी ने कहा कि केरल के आगामी विधानसभा चुनावों में उन्हें भाजपा का चेहरा बनने से भी कोई गुरेज नहीं है। सुरेश गोपी अब तक 250 से भी अधिक फ़िल्में कर चुके हैं, 2005 के बाद से उन्होंने फिल्मों में सक्रियता कम कर दी। अब उन्होंने कहा है कि सभी विभागों के साथ मिल कर वो त्रिशूर के विकास के लिए काम करेंगे।

उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी केरल में कमल खिलने के बाद ख़ुशी जताई है। इस दौरान उन्होंने याद किया कि कैसे केरल में पार्टी के कई कार्यकर्ताओं ने बलिदान दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए केरल में काम करना जम्मू कश्मीर से भी अधिक कठिन था। उन्होंने कहा कि हमने केरल में भी जीत दर्ज की है। उन्होंने आरोप आया कि विपक्ष ने NDA की जीत को नकारने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि 10 साल झूठ फैलाने और झूठे वादों के बावजूद कॉन्ग्रेस 100 सीट भी नहीं जीत पाई।

‘ईदगाह के पास है बरगद का पेड़, नहीं करने देंगे पूजा’: बिहार के मधुबनी में वट सावित्री पूजा करने आई महिलाओं पर हमला, पिछले साल भी हुआ था बवाल

बिहार के मधुबनी में वट सावित्री व्रत के बाद पूजा कर रही हिंदू महिलाओं और पुरुषों पर मुस्लिमों की भीड़ ने धावा बोल दिया। इस हमले और मारपीट में एक दर्जन लोग घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि ईदगाह से करीब 50 फीट की दूरी पर पुराना बरगद का पेड़ है, जहाँ हिंदू समुदाय प्राचीन समय से ही पूजा करता आ रही है, लेकिन मुस्लिम समुदाय पिछले कुछ सालों से विरोध करता आ रहा है। इस बार भी जब हिंदू पूजा करने लगे, तो मुस्लिमों ने मना किया और फिर हमला बोल दिया।

लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के मधुबनी जिले में स्थित बासोपट्टी पूर्वी पंचायत के कौआहा में वट सावित्री पूजा के दौरान मुस्लिमों की भीड़ ने हिंदुओं पर हमला कर दिया। ये हमला गुरुवार (06 जून 2024) को हुआ, जहाँ पूजा कर रहे हिंदू पक्ष पर हमला बोल दिया गया, जिसके बाद दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई। इस हमले में कई लोग घायल हो गए, जिसमें कई महिलाएँ भी शामिल हैं। घायलों को बासोपट्टी सीएचसी में भर्ती कराया गया। इस दौरान मौके पर लोगों को समझाने पहुँची बासोपट्टी पुलिस के कई जवानों को भी चोटें लगी हैं। इस घटनाक्रम के बाद पूरे गाँव में तनाव का माहौल है और एसडीओ बीरेंद्र कुमार के नेतृत्व में पुलिस गाँव में कैम्प कर रही है।

ग्रामीणों के मुताबिक, कौआहा स्थान के एक सैरात के पोखरा के दक्षिणवारी भिंडा पर ईदगाह है। उसकी चारदीवारी से करीब 50 फुट की दूरी पट वट का वृक्ष है। यहाँ हिंदू पक्ष के लोग पूजा करते रहे हैं, तो मुस्लिम पक्ष इसे ईदगाह की प्रॉपर्टी बताता है और उस पर हक जमाता है। पिछले साल भी यहाँ पर विवाद हुआ था और इस साल भी जमकर दोनों पक्षों में मारपीट हुई है। प्रशासन का कहना है कि वट वृक्ष और जिस जमीन पर वृक्ष है, उस जमीन के कागजात किसी के भी पास नहीं है।

जानकारी के मुताबिक, हिंदू महिलाओं के पूजा करने के समय मुस्लिम पक्ष के दर्जनों लोग मौके पर पहुँच गए और पूजा-पाठ कर रही महिलाओं और पुरुषों को अपना निशाना बनाया। यही नहीं, यहाँ पर पथराव भी हुआ। सूचना मिलते ही मौके पर पहुँची पुलिस ने बीच-बचाव की कोशिश की, तो कई पुलिस कर्मी भी घायल हो गए, जिसके बाद कई अधिकारी मौके पर पहुँचे और एसएसबी जवानों ने गाँव में फ्लैग मार्च किया।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद थानाध्यक्ष अरविन्द कुमार, बीडीओ अजीत कुमार, सीओ पूजा कुमारी, इंस्पेक्टर सरवर आलम जैसे अधिकारियों ने पुलिस और एसएसबी जवानों के साथ फ्लैग मार्च किया। थानाध्यक्ष अरविन्द कुमार ने बताया कि गाँव में स्थिति नियंत्रण में है। थानाध्यक्ष अरविन्द कुमार ने बताया कि मामले को लेकर दोनो पक्षों से प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। तीसरी प्राथमिकी पुलिस के तरफ से भी दर्ज की गई है। इसमें दोनों पक्षों से 30 से ऊपर लोगों को नामजद किया गया है। आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है।

NDA का नेता चुने जाने के बाद नरेंद्र मोदी ने आडवाणी-मुरली मनोहर का लिया आशीर्वाद,9 जून को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की लेंगे शपथ

नरेन्द्र मोदी को शुक्रवार (7 जून, 2024) को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपना संसदीय दल का नेता चुना। इससे पहले पीएम मोदी भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलने पहुँचे।

पीएम मोदी ने इससे पहले आधिकारिक रूप से NDA के घटक दलों का समर्थन हासिल किया। पुराने संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में हुई NDA सांसदों की बैठक में घटक दलों ने उन्हें अपना समर्थन दिया। JDU मुखिया नीतीश कुमार, TDP मुखिया चंद्रबाबू नायडू, शिवसेना मुखिया एकनाथ शिंदे और लोजपा के मुखिया चिराग पासवान ने इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी को अपना नेता घोषित किया और उन्हें संसदीय दल का नेता चुना। इस दौरान NDA नेताओं ने भाजपा के साथ मिलकर काम करने की बात कही।

पीएम मोदी इसके बाद भाजपा नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और पूर्ण केन्द्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी से मिलने उनके दिल्ली स्थित आवास पर पहुँचे। वह पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भी मिले। यहाँ उन्होंने सरकार बनाने का दावा पेश करने से पहले दोनों नेताओं का आशीर्वाद लिया और बातचीत की।

नई सरकार का गठन रविवार (9 जून, 2024) को होगा। नरेन्द्र मोदी रविवार (9 जून, 2024) को राष्ट्रपति भवन में तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएँगी। उनके साथ ही नए मंत्रिमंडल को भी शपथ दिलाई जाएगी।

शपथ लेने के साथ ही वह जवाहर लाल नेहरू के बाद लगातार तीन बार सरकार बनाने वाले नेता बन जाएँगे। वह कुल कार्यकाल के मामले में भी अभी देश के इतिहास में तीसरे नम्बर पर हैं। उनसे अधिक समय तक केवल जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गाँधी ही प्रधानमंत्री रही हैं।

नरेन्द्र मोदी 26 मई, 2014 को पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने थे। 2019 में वह दोबारा देश के प्रधानमंत्री बने। इससे पहले वह गुजरात के मुख्यमंत्री रहे थे। उनके नेतृत्व में NDA ने 2024 लोकसभा चुनावों में 290 से अधिक सीटें हासिल की हैं जो कि स्पष्ट बहुमत है।

चिकन लाकर बनाया, पूरे परिवार ने खाया: प्रज्जवल रेवन्ना की हार की पीड़िता ने ऐसे मनाई खुशी, सेक्स स्कैंडल में कर्नाटक के नेता की न्यायिक हिरासत 10 दिन के लिए बढ़ी

सेक्स कांड मामले में प्रज्वल रेवन्ना हर ओर से घिरा है। एक ओर बेंगलुरु कोर्ट ने उसकी न्यायिक हिरासत 10 जून तक बढ़ा दी गई है। दूसरी ओर लोकसभा चुनावों में उसे करारी हाल मिली है। इन दोनों खबरों को सुनने के बाद सेक्स कांड की पीड़िताएँ जश्न मना रही हैं।

द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के अनुसार, सुनीता (बदला हुआ नाम) नाम की एक पीड़िता ने कहा कि वो खुश है कि प्रज्वल हार गया। शुरू में जब वो लीड कर रहा था तब बहुत डर लगा। मगर बूाद में श्रेयस पटेल को लीड करता देख राहत आई। सुनीता बोलीं, “मैं इतनी खुश थी मैं जाकर बाहर से मिठाई लाई और चिकन लाई। रात में हमने यही खाया।”

प्रज्वल को लेकर सुनीता* ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं। 10 साल के बेटे को नहीं पता कि प्रज्वल रेवन्ना ने किया क्या है, लेकिन वो भी रेवन्ना की हार सुन खुश हो गया। सुनीता कहती हैं कि उन्हें अच्छे से याद है ये मामला खुलने के बाद रेवन्ना की माँ ने उन्हें जब घर से निकाला था तो वो लोग बारिश में सोए थे। सुनीता कहती हैं कि उनकी माँ प्रज्वल रेवन्ना की माँ की रिश्तेदार थीं और बहुत समय से काम उनके घर में काम करती थीं।

कथिततौर पर रेवन्ना परिवार ने उनसे उनका घर बिकवाया, फिर उन्हें एक जमीन होलेनरसिपुरा शहर में दिलाई। यहाँ उन्होंने घर बेचकर जो पैसा आया था उससे फिर घर बनवाया, लेकिन बावजूद इसके उन्हें उस जमीन से बेदखल कर दिया गया था। ऐसे ज्यादती सहने के बाद जब प्रज्वल रेवन्ना की हार चुनावों में देखने को मिली तो सुनीता ने इसकी खुशी मनाई।

बता दें कि प्रज्वल रेवन्ना 4 जून को हासन लोकसभा सीट पर कॉन्ग्रेस के श्रेयस पटेस से 42 हजार 649 वोटों के अंतर से हारा। इस हार का एक प्रमुख खारण सुनीता और माँ गिरिजा है। उन्ही दोनों ने हिम्मत दिखाते हुए कन्नड़ टीवी पर रेवन्ना का असली चेहरा खोला था। इसके बाद रेवन्ना भारत से दजर्मनी भाग गया था। बाद में उसके भारत आते ही उसे गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने भी जाँच में पाया था कि लगबग 70 महिलाओ के 3000 वीडियो थे, जिनमें से 4 महिलाएँ रेवन्ना के खिलाफ आवाज उठाने को खड़ी हुई। शुरू मे आवाज उठाने के बदले उन्हें बहिष्कार झेलना पड़ा लेकिन बाद मे उनकी सुनवाई हुई और आरोपित पकड़ा गया।

पैर छूने के लिए झुके नीतीश कुमार, नरेंद्र मोदी ने पकड़ लिए हाथ… क्या बिहार के लिए आ गया है वह क्षण जिसकी 10 साल से प्रतीक्षा, लौटेगा ‘सुशासन’ का पहला दौर

NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के घटक दलों की बैठक शुक्रवार (7 जून, 2024) को नई दिल्ली में संपन्न हुई, जिसमें नरेंद्र मोदी को संसदीय दल का नेता चुन लिया गया। इस बैठक में सबका ध्यान नीतीश कुमार पर था, जो अब तक कई बार पलटी मार चुके हैं। 1998 से 2013 तक वो भाजपा के साथ रहे, फिर राजद के साथ मिल कर उन्होंने सरकार बना ली। 2017 में फिर भाजपा के साथ आ गए, 2019 का लोकसभा चुनाव भाजपा के साथ लड़े, फिर 2020 का चुनाव भाजपा के साथ लड़ने के बाद राजद के साथ चले गए। अब फिर से वो भाजपा के साथ आए हैं।

2024 का लोकसभा चुनाव में NDA को 40 में से 30 सीटें प्राप्त हुई हैं, जदयू-भाजपा दोनों ने 12-12 सीटों पर जीत दर्ज की। NDA की ताज़ा बैठक से पहले मीडिया में अटकलें थीं कि जदयू दबाव की राजनीति खेल रही है और रेल समेत कई मंत्रालय माँगे गए हैं। हालाँकि, जिस तरह से नीतीश कुमार ने इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पाँव छूने की कोशिश की और पीएम मोदी ने उन्हें रोकते हुए गले लगाया, उसके बाद स्पष्ट हो गया है कि जदयू और भाजपा में कम से कम फ़िलहाल के लिए तो कोई तनातनी नहीं है।

पाँव छुए, पीछे से जाने की कोशिश: नीतीश कुमार ने क्या-क्या कहा

एक और बात ध्यान देने लायक है कि मंच पर जब नीतीश कुमार बोलने के लिए जा रहे थे तो वो कुर्सी के पीछे से जाना चाहते थे, लेकिन पीएम मोदी ने हस्तक्षेप करते हुए उन्हें अपने से आगे से जाने के लिए कहा। इस गेस्चर को देख कर आप समझ सकते हैं कि दोनों के मन में एक-दूसरे के लिए कितना सम्मान है। इसके लिए हमें नीतीश कुमार के उस संबोधन को समझना होगा, जो उन्होंने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन दिए जाने के राजनाथ सिंह के प्रस्ताव का अनुमोदन करते हुए उन्होंने कहा।

नीतीश कुमार ने NDA की इस बैठक में कहा कि उनकी पार्टी जदयू खुल कर भाजपा संसदीय दल के नेता नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्थन देती है और ये बहुत ख़ुशी की बात है कि ये पिछले एक दशक से प्रधानमंत्री हैं और आगे भी बनने जा रहे हैं। उन्होंने इस दौरान बड़ी बात कही कि उन्हें भरोसा है कि हर राज्य का जो कुछ भी बचा हुआ है, इस कार्यकाल में PM नरेंद्र मोदी वो पूरा कर देंगे। उन्होंने साफ़ किया कि वो पूरे तौर पर आने वाले समय में पीएम मोदी के साथ रहेंगे।

नीतीश कुमार ने कहा, “जो कुछ भी है, और जिस तरह से आप करेंगे, बहुत अच्छा है। इस बार इधर-उधर जो लोग कुछ जीत गए हैं, अगली बार आप आइएगा तो ये लोग वो भी हारेंगे। इनलोगों ने बिना मतलब की बातें कर-कर के ये सब किया है। इन्होंने आज तक कोई काम नहीं किया है। देश की कोई सेवा नहीं की, लेकिन आपने सेवा की है और आपको मौका मिला है। आगे उनलोगों के लिए कोई गुंजाइश नहीं रहेगी, सब खत्म हो जाएगा। देश बहुत आगे बढ़ेगा, बिहार का भी जो कुछ बचा हुआ है सब कार्य हो ही जाएगा।”

नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार सबसे पुराना इलाका है, हम पूरे तौर पर हर तरह से आपके साथ हैं, आप जो चाहिएगा उसमें हम साथ देंगे। उन्होंने कहा कि सब कोई मिल कर चलेंगे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को आगे बढ़ाएँगे। इस दौरान वो नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण के लिए भी बेचैन दिखे और कहा कि जल्द से जल्द शपथग्रहण कर के काम शुरू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसी में देश का फायदा है, कोई इधर-उधर करना भी चाहता है तो इसका कोई फायदा नहीं है।

बिहार को मिल सकता है विशेष पैकेज, तेज़ी से होंगे कार्य

नीतीश कुमार के संबोधन की 3 बड़ी बातें हैं – उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व खुल कर स्वीकार है, गठबंधन में सभी दल एकदम खुश हैं और बिहार को कुछ विशेष मिलना चाहिए। बता दें कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नीतीश कुमार की पुरानी माँग है। इस बार उन्होंने NDA की बैठक में खुद कर ऐसा नहीं कहा लेकिन उनका ‘जो कुछ भी बचा हुआ है’ वाला बयान इसी तरफ इशारा करता है। यानी, विशेष दर्जा न सही तो कम से कम विशेष पैकेज तो मिल जाए राज्य को।

आपको पीएम नरेंद्र मोदी का एक 2015 का भाषण याद होगा। तब उन्होंने जनता से पूछ कर बिहार को पैकेज दिया था। उन्होंने पूछा था कि 50,000 करोड़ दिया जाए या कितना दिया जाए? फिर वो 71,000 करोड़ तक पहुँचे, 75,000 करोड़ तक पहुँचे, फिर इसी तरह 80-90 तक पहुँच गए। फिर उन्होंने वादा किया कि बिहार को सवा लाख करोड़ रुपए का पैकेज दिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि बिहार का भाग्य बदलने के लिए ये 1.25 लाख करोड़ रुपए दिए जाएँगे।

अब हो सकता है कि बिहार में डबल इंजन की सरकार है और सारी गलतफहमियाँ दूर हो गई हैं तो बिहार को सवा लाख करोड़ रुपए का पैकेज औपचारिक रूप से आवंटित कर दिया जाए। जहाँ तक मंत्रालय वगैरह की बात है, वो हर सत्ताधारी गठबंधन में चलता रहता है और भाजपा जब 2014-19 में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में थी तब भी उसने गठबंधन सहयोगियों को मंत्रालय दिए थे। नीतीश कुमार ने अब तक परिपक्वता का परिचय दिया है इस चुनाव में, आगे भी ऐसा रहा तो ये बिहार के लिए बहुत अच्छी बात है।

बिहार में विकास कार्यों में तेज़ी आएगी। 2005-2013 तक बिहार 8 वर्षों तक जिस रफ़्तार से दौड़ा था, वो रफ़्तार वो फिर से पकड़ लेगा। केंद्र सरकार का सहयोग होगा तो परियोजनाएँ सही समय पर पूरी होंगी। बिहार को अधिक मंत्री मिलेंगे तो जनता का काम ज़्यादा होगा। संसद में प्रतिनिधित्व अच्छा रहेगा। 11 विपक्षी सांसद भी हैं राज्य में, ऐसे में बिहार की आवाज़ वो भी उठाएँगे ही। नीतीश कुमार ने प्रतीकात्मक रूप से जनता को ये सन्देश दे दिया है कि इस बार वो कहीं नहीं जाने वाले हैं और उनकी पार्टी पूरी तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ है।

नीतीश कुमार को लेकर बिहार में कुछ आक्रोश हो सकता है, लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि उनकी छवि बेदाग़ रही है। पश्चिम बंगाल के गैसल में जब ट्रेन हादसे में 300 लोग मारे गए थे तब रेल मंत्री रहे नीतीश कुमार ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी देते हुए इस्तीफा दे दिया था। अगस्त 1999 का ये वीडियो आज तक वायरल होता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ये रेलवे की पूर्ण विफलता है, आपराधिक चूक है और इसीलिए वो इस्तीफा दे रहे हैं। लोग नीतीश कुमार को इसी छवि में देखना चाहते हैं।

2025 है चुनौती, गठबंधन का मौजूदा स्वरूप में रहना ज़रूरी

नीतीश कुमार ने एक तरह से साफ़ कर दिया है कि 2029 का लोकसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। इसका सीधा अर्थ है कि 2025 में भाजपा, RLJP, HAM(S), RLM और JDU साथ मिल कर लड़ेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, चिराग पासवान, जीतन राम माँझी और उपेंद्र कुशवाहा साथ आ गए तो 2025 में तेजस्वी यादव के बढ़ते ग्राफ को रोका जा सकता है, क्योंकि RJD ने कॉन्ग्रेस और CPI(ML) के साथ मिल कर एक बड़ा वोट बैंक अपने लिए तैयार कर लिया है।

बिहार का फायदा अभी स्थिरता में है और ये स्थिरता तभी बनी रह सकती है जब मौजूदा गठबंधन केंद्र और राज्य में साथ-साथ काम करता रहे। 2013 से लेकर अब तक नीतीश कुमार के बार-बार पलटी मारने और तेजस्वी यादव के दो-दो बार उप-मुख्यमंत्री बन जाने के कारण ‘जंगलराज’ का ट्रेलर जनता ने देखा और बिहार में हो रहे कामकाज में अड़चन आई। नीतीश कुमार ने जो परिपक्वता दिखाई है NDA की बैठक में, शायद आगे भी यही स्थिति रहे तो बिहार के लिए बेहतर है।

‘बीमार सास पोता-पोती संग खेलना चाहती है’: बीवी ने लगाई फरियाद, हाई कोर्ट ने हत्या के दोषी को संतान प्राप्ति के लिए 30 दिन की परोल दी, शादी के लिए भी मिली थी परोल

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हत्या के दोष में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 28 वर्षीय आनंद को संतान पैदा करने के लिए 30 दिन की परोल दी है। कैदी की 31 वर्षीय पत्नी ने संतान प्राप्ति के अपने अधिकार और अपनी सास की स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर अपने पति की रिहाई की माँग के लिए याचिका दाखिल की थी।

हाई कोर्ट के न्यायाधीश एसआर कृष्ण कुमार ने कैदी को नजदीकी थाने में हर हफ्ते हाजिरी देने का भी आदेश दिया। न्यायाधीश ने आनंद के आचरण के आधार पर पत्नी को परोल की अवधि बढ़ाने का अनुरोध करने की भी अनुमति दी। पत्नी ने याचिका में कहा कि उसे संतान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। उसकी सास बुजुर्ग और बीमार हैं। वह अपने पोते-पोतियों के साथ समय बिताना चाहती थी।

दरअसल, कोलार निवासी आनंद को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और साल 2019 में जिला सत्र न्यायालय ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। उसने इस फैसले को कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती दी, जिसने उसकी सजा को घटाकर 10 साल कर दिया। इस समय तक आनंद पहले ही पाँच साल जेल में बिता चुका था।

इससे पहले 5 अप्रैल से 20 अप्रैल 2023 तक की पिछली परोल के दौरान आनंद ने याचिकाकर्ता से विवाह किया था। शादी के बाद पत्नी ने अपने पति के साथ अधिक समय बिताने के लिए 60 दिन की विस्तारित पैरोल माँगी। आनंद के जेल लौटने के बाद उसने जेल अधिकारियों से 90 दिन की पैरोल माँगी, जिसे अस्वीकार कर दिया गया था।

फिर उसने गर्भधारण करने के उद्देश्य से कर्नाटक उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने अब संभावित विस्तार के साथ 30 दिन की पैरोल मंजूर की है। हाईकोर्ट के निर्देशानुसार परप्पना अग्रहारा केंद्रीय कारागार के जेल अधीक्षक आनंद को 5 जून से 4 जुलाई तक रिहा करेंगे। इस बार उसने बच्चा पैदा करने के अपने अधिकार के तहत अपने पति के लिए यह परोल माँगी है।

हाई कोर्ट ने हाल ही में एक याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें एक पति ने पारिवारिक अदालत द्वारा अलग रह रही अपनी पत्नी और नाबालिग बच्चे को दिए गए अंतरिम भरण-पोषण भत्ते पर सवाल उठाया था। न्यायमूर्ति सचिन शंकर मगदुम ने पति की दलील को खारिज कर दिया कि नौकरी छूटने के बाद वह बेरोजगार है और अंतरिम भरण-पोषण देने के लिए उसके पास आय के अन्य स्वतंत्र स्रोत नहीं हैं।

अदालत की एकल पीठ के न्यायाधीश सचिन शंकर मगदुम ने कहा कि पति की आर्थिक स्थिति चाहे जो भी हो, अगर उसने अपनी पत्नी और नाबालिग बच्चों को छोड़ दिया है तो वह उनका भरण-पोषण करने के लिए बाध्य है और वह अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकता। इसलिए उसे एक निश्चित रकम देनी होगी।

पारिवारिक अदालत ने पत्नी के लिए 7,000 रुपए और बच्चे के लिए 3,000 रुपए का अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। न्यायमूर्ति मगदुम ने कहा कि वर्तमान समय में महंगाई लगातार बढ़ रही है और जीवनयापन की लागत बहुत अधिक है। ऐसे में पत्नी को खुद का भरण-पोषण करने, नाबालिग बेटी का जीवन चलाने और चल रहे मुकदमे को लड़ने के लिए उक्त राशि की आवश्यकता होगी।

ओरेकल का इंजीनियर, U-19 में टीम इंडिया सितारा, अब बाबर की फौज को धूल चटाई: जानिए कौन हैं सौरभ नेत्रावलकर, T-20 वर्ल्ड कप के सुपर ओवर से हुए हिट

आईसीसी टी-20 क्रिकेट विश्वकप में अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर हुआ है। अमेरिका ने सुपर ओवर तक खिंचे मैच में पाकिस्तान को हरा कर सभी को चौंका दिया है। इस मैच में जीत के हीरो भारतीय मूल के खिलाड़ी रहे, जो अब काफी चर्चा बटोर रहे हैं। अमेरिका की जीत में जिन भारतीय खिलाड़ियों ने सर्वाधिक योगदान दिया, उनमें कप्तान मोनाँक पटेल, बाएँ हाथ के तेज गेंदबाज सौरभ नेत्रावलकर, स्लो लेफ्ट आर्म स्पिनर नोस्तुशा प्रदीप केन्जिगे का नाम शामिल है। इसके अलावा हरमीत सिंह, जसदीप सिंह, नीतीश कुमार का भी अहम योगदान दिया। मैन ऑफ द मैच कप्तान मोनाँक पटेल रहे, जिन्होंने शानदार अर्धशतकीय पारी खेली और अमेरिकी टीम को जीत दिलाई।

अमेरिकी जीत के हीरो रहे 3 सबसे बड़े खिलाड़ी

अमेरिकी क्रिकेट टीम ने जिस पाकिस्तानी टीम को हराया, उसके हारने की उम्मीद किसी को नहीं थी, लेकिन भारतीय मूल के जिन खिलाड़ियों की चर्चा हो रही है, उनमें सौरभ नेत्रावलकर, मोनाँक पटेल, नोस्तुशा प्रदीप केन्जिगे का नाम है। इसके साथ ही हरमीत सिंह ने भी शानदार प्रदर्शन किया। सौरभ, नोस्तुशा और हरमीत ने बॉलिंग में पाकिस्तान को बाँधकर रखा, तो मोनाँक पटेल ने शानदार अर्थशतक लगाते हुए अमेरिकी टीम को रनों का पीछा करते हुए कभी धीमा नहीं पड़ने दिया। आइए, जानते हैं इन खिलाड़ियों को…

सौरभ नेत्रावलकल, सॉफ्टवेयर इंजीनियर जिसने पढ़ाई के लिए छोड़ दिया था क्रिकेट

सौरभ नेत्रावलकर साल 2010 में भारतीय क्रिकेट के उदीयमान सितारे थे। आईसीसी क्रिकेट अंडर-19 विश्वकप में भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले सौरभ ने मुंबई के लिए रणजी ट्रॉफी भी खेला। पढ़ाई बीच में आड़े आई, तो 2 साल पढ़ाई भी छोड़ी और जब घरेलू क्रिकेट में ज्यादा मौके नहीं मिले, तो पढ़ाई पूरी करने के लिए अमेरिका चले गए। कभी रोहित शर्मा, धवल कुलकर्णी, के एल राहुल जैसे खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूप शेयर करने वाले सौरभ को अमेरिका में क्रिकेट से जुड़े एक ऐप को बनाने के लिए इंटर्नशिप और बाद में ओरेकल कंपनी में नौकरी मिल गई।

अमेरिका में घूम-घूम कर क्रिकेट खेलने वाले सौरभ की किस्मत खुली 2018 में। सौरभ ने अमेरिका में तीन साल पूरे किए और उसी समय आईसीसी ने सात साल की शर्त को घटाकर तीन साल कर दिया। जब अमेरिकी टीम ट्रेनिंग के लिए लॉस एंजिल्स आई तो वहाँ के कोच को सौरभ का खेल पसंद आया और धीरे-धीरे अमेरिकी टीम के दरवाजे उनके लिए खुलते गए। बाद में उन्होंने अमेरिका में मेजर लीग क्रिकेट, कैरेबियन प्रीमियर लीग और इंटरनेशनल लीग 20-20 में हिस्सा लिया।

सौरभ नेत्रावलकर अब अमेरिकी टीम के प्रमुख स्तंभ हैं। उनकी अगुवाई में अमेरिकी टीम ने बांग्लादेश को 2-1 से हराया, तो विश्वकप के पहले मैच में अमेरिका ने कनाडा को हराया। कनाडा के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान को हराया, जिसमें सौरभ ने खतरनाक पाकिस्तानी बल्लेबाज इफ्तिखार अहमद को 2 बार आउट किया। एक बार मुख्य पारी में, तो दूसरी बार सुपर ओवर में, उन्होंने मोहम्मद रिजवान जैसे धाकड़ बल्लेबाज को अपना शिकार बनाकर पाकिस्तान को पहला झटका दिया था। अब तक दोनों मैच जीत चुके अमेरिका के लिए सौरभ नेत्रावलकर उसके मिचेल स्टार्क साबित हो रहे हैं। सौरभ अमेरिका के लिए 48 वनडे मैचों में 73 विकेट ले चुके हैं, तो 29 टी-20 मैचों में 29 विकेट लेकर सबसे आगे हैं। सौरभ के नाम लिस्ट-1 क्रिकेट में 117 विकेट दर्ज हैं।

मोनाँक पटेल कौन हैं?

मोनाँक पटेल गुजरात के आणंद में पैदा हुए। वो 31 साल के हैं और विकेटकीपिंग भी करते हैं। गुजरात अंडर-19 खेलने के बाद वो अमेरिका की मेजर क्रिकेट लीग और माइनर क्रिकेट लीग में भी खेलते हैं। अमेरिका के कप्तान मोनाँक पटेल वनडे क्रिकेट में 2 शतक और 10 अर्धशतक लगा चुके हैं, तो टी-20 में भी 3 अर्धशतक उनके नाम है। हाल ही में बांग्लादेश के खिलाफ अमेरिकी टीम की 2-1 से सीरीज जीत में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी।

इसके अलावा नोस्तुश केनजिगे भी भारतीय मूल के हैं। हालाँकि वो अमेरिका में ही पैदा हुए। नोस्तुश बाएँ हाथ की स्पिन गेंदबाजी करते हैं और पॉवरप्ले में विकेट निकालने के लिए माहिर माने जाते हैं।

हरमीत सिंह, जो कभी माना जाता था भारतीय क्रिकेट का भविष्य

अमेरिकी टीम में भारतीय क्रिकेट के अहम सितारे रहे हरमीत सिंह भी शामिल हैं। वो बॉलिंग आल राउंडर हैं। कभी भारतीय क्रिकेट के बड़े खिलाड़ियों को चौंकाने वाले हरमीत सिंह मुंबई में ही पैदा हुए और मुंबई के अलावा त्रिपुरा के लिए भी खेल चुके हैं। उन्होंने आईपीएल में भी हिस्सा लिया था और राजस्थान रॉयल्स टीम के लिए मैच बी खेले थे। दिलीप सरदेसाई जैसे महान क्रिकेट को उनमें बिशन सिंह बेदी की छवि दिखती थी।

खास बात ये है कि हरमीत सिंह उन गिने-चुने खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने 2-2 अंडर-19 क्रिकेट विश्वकप में भारत के लिए हिस्सा लिया था। हालाँकि पाकिस्तान के खिलाफ उन्हें विकेट भले नहीं मिला, लेकिन उन्होंने अपनी स्पिन गेंदबाजी से पाकिस्तानी कप्तान बाबर आजम और शादाब खान को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया और सुपरओवर में बिना कोई बड़ा शॉट लगाए भी अमेरिकी टीम के लिए अहम रन जुटाए।

ऐसा रहा मैच का हाल

आईसीसी टी-20 विश्वकप के 11वें मैच में अमेरिका के कप्तान मोनाँक पटेल ने टॉस जीता और पहले गेंदबाजी का फैसला लिया। अमेरिकी गेंदबाजों ने पाकिस्तान पाकिस्तान को झटके पर झटके दिए और महज पाँचवें ओवर में ही 26 रनों पर पाकिस्तान के तीन विकेट गिरा दिए। मोहम्मद रिजवान (9), उस्मान खान (3) और फखर जमान (11) आउट हो गए। पाकिस्तान को पहला झटका रिजवान के रूप में सौरभ नेत्रावलकर ने दिया, तो उनके साथी नोस्तुश केनजिगे ने दूसरा झटका दिया। पाकिस्तान किसी तरह से 20 ओवरों में 7 विकेट पर 159 रन बनाने में सफल रहा। केन्जिगे ने 4 ओवरों में 30 रन देकर तीन विकेट लिए, तो सौरभ नेत्रावलकर ने 4 ओवरों में महज 18 रन देकर 2 विकेट लिए। एक-एक विकेट अली खान और जसदीप सिंह को मिला।

इसके जवाब में अमेरिकी टीम ने शानदार खेल दिया। अमेरिकी टीम ने 20 ओवरों में 3 विकेट खोकर 159 रन बनाए। कप्तान मोनाँक पटेल ने शानदार अर्धशतक लगाते हुए 50 रनों की पारी खेली। हालाँकि आखिरी गेंद पर नीतीश कुमार ने चौका लगाकर मैच को टाई कराया। हैरिस राउफ 15 रनों का बचाव नहीं कर सके। आरोन जोन्स ने छक्का और नीतीश कुमार ने चौका लगाकर 14 रन जुटा लिए। इसके बाद आया जादुई ओवर, जिसमें शाहीन शाह अफरीदी ने 18 रन दे दिए। लेकिन सौरभ नेत्रावलकर ने इफ्तिखाद अहमद जैसे बड़े खिलाड़ी को चकमा देकर आउट कर दिया और पाकिस्तान 5 रनों से पीछे रह गया।

इकलौती नहीं हैं कुलविंदर कौर, सिस्टम में भरे पड़े हैं आतंकवादियों-खालिस्तानियों के ‘हमदर्द’: लोकसभा चुनाव के नतीजे भी करते हैं तस्दीक, कौन करेगा व्यवस्था को इनसे मुक्त

अभिनेत्री और अब भाजपा सांसद कंगना रनौत पर गुरुवार (6 जून, 2024) को चंडीगढ़ एयरपोर्ट में हमला हुआ। यह हमला एक CISF सुरक्षाकर्मी ने किया। सुरक्षाकर्मी का नाम कुलविंदर कौर है और उसने किसान आन्दोलन को इस हमले का कारण बताया है। उसे CISF की सेवा से निलम्बित कर दिया गया है और मामले की आगे जाँच चल रही है।

इस हमले के बाद लोगों ने हैरानी जताई है कि कोई सरकारी कर्मचारी चुने हुए सांसद के विरुद्ध ऐसा काम कर सकता है क्या, लोगों का यह भी प्रश्न है कि सरकारी कर्मचारी कैसे कट्टरपंथी विचारों के घेरे में आ रहे हैं। कुलविंदर का एक सांसद के प्रति यह बर्ताव उसकी अनुशासनहीनता के साथ ही उसका अपनी विचारधारा के प्रति कट्टरता को भी प्रदर्शित करता है।

कुलविंदर कौर ने जो किया है, वह कोई नई बात नहीं है। वह ऐसी पहली सरकारी कर्मचारी नहीं है जिसने अनुशासनहीनता की। इससे पहले के सैकड़ों ऐसे उदाहरण हैं जो दिखाते हैं कि लोग इस राष्ट्र के करदाता का पैसा मोटी तनख्वाह के रूप में उठा कर भी अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं करते।

यह इकोसिस्टम तमाम दिनों से मौजूद है और इसके उदाहरण भी मौजूद हैं। देश में 2014 में NDA सरकार आने के बाद से कश्मीर में दसियों ऐसे कार्रवाई हुई है जिनमें सरकारी कर्मचारियों को आतंकियों से संबंध रखने, उनकी वित्तीय मदद करने, उनको शरण देने और आतंकी गतिविधियों में भाग लेने के कारण नौकरी से हटाया गया है। अकेले 2023 में ही कम से कम 7 ऐसे कर्मचारी नौकरी से निकाले गए जिनके आतंकियों से लिंक थे।

इस इकोसिस्टम ने जम्मू कश्मीर को बहुत नुकसान पहुँचाया है। सरकारी कर्मचारियों के देश से गद्दारी के कारण सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगती है, संस्थाएँ और उनमें आमजनों का विश्वास कमजोर होता है। हाल में ही इसका एक बड़ा उदाहरण सामने आया है।

अलगाववादियों को सरकारी कर्मचारियों का मत

लोकसभा चुनाव 2024 में ऐसा ही एक उदाहरण सरकारी कर्मचारियों द्वारा अलगाववादियों के पक्ष में मतदान किया जाना रहा है। 2024 लोकसभा चुनाव में पंजाब और जम्मू-कश्मीर से तीन अलगावादियों को जीत मिली है। पंजाब में जहाँ UAPA मामले में जेल में बंद भिंडरांवाले समर्थक अमृतपाल सिंह को खडूर साहिब से तो वहीं फरीदकोट से सरबजीत सिंह खालसा को विजय मिली। सरबजीत सिंह खालसा पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे का बेटा है।

कश्मीर में आतंक को फंडिग करने के मामले में जेल में बंद अलगाववादी राशिद को भी बारामूला से जीत हासिल हुई। इनके जीत हासिल करने का अर्थ है कि उनके लोकसभा क्षेत्र की जनता उनके कर्मों पर ध्यान नहीं देती। लेकिन इन सबके बीच इन तीनों ही लोगों को सरकारी कर्मचारियों के वोट भी हासिल हुए हैं। चुनाव आयोग का आँकड़ा दिखाता है कि अमृतपाल सिंह को खडूर साहिब में 1830 पोस्टल बैलट वोट मिले। पोस्टल बैलट के वोट सामायतः उन कर्मचारियों के होते हैं जो कि मतदान के काम में लगे होते हैं।

इसके अलावा सरबजीत सिंह खालसा को 1140 वोट पोस्टल बैलट से हासिल हुए।

इंजीनियर राशिद को 2907 वोट पोस्टल बैलट के जरिए हासिल हुए हैं।

क्या होता है पोस्टल बैलट, क्यों महत्वपूर्ण?

पोस्टल बैलट एक ऐसी सुविधा है जिसमें एक मतदाता अपने मत का प्रयोग बूथ पर ना जाकर उससे पहले ही निजी तौर पर करता है और उसे चुनाव अधिकारियों को भेज दिया जाता है। यह सुविधा मतदान में लगे सरकारी कर्मचारी, सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों, दिव्यांगो और मीडिया कर्मियों को मिलती है ताकि उनका मतदान नहीं छूटे। इन मतों में अधिकांश मत ऐसे होते हैं जो सरकारी कर्मचारियों द्वारा दिए गए होते हैं।

इंजीनियर राशिद, सरबजीत सिंह खालसा और अमृतपाल सिंह को मिले पोस्टल बैलट वोट में अधिकांश वोट इन सरकारी कर्मचारियों के रहे होंगे। ऐसे में यह माना जाना चाहिए कि इन सरकारी कर्मचारियों ने अलगाववाद की विचारधारा रखने वालों को वोट दिया। ऐसे कर्मचारियों का झुकाव सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता की बात होनी चाहिए।