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‘नीतीश कुमार से बढ़िया PM कौन हो सकता है’: BJP की सीटें घटती देख जदयू MLC खालिद अनवर ने छेड़ा नया राग, ‘सुशासन बाबू’ को INDI से डिप्टी PM पद ऑफर किए जाने के भी चर्चे

देश में लोकसभा चुनाव के रुझान अब परिणामों में बदलने लगे हैं। भाजपा लोकसभा परिणामों में सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। भाजपा देश 240 से अधिक सीटों पर देश में जीत रही है। कॉन्ग्रेस का आँकड़ा भी 100 के आसपास है। देश में NDA गठबंधन सरकार के संकेत हैं। इस बीच नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री बनने की बात भी उठ गई है।

इस बीच NDA गठबंधन में शामिल JDU के नेता डॉ खालिद अनवर ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे योग्य व्यक्ति बताया है। JDU के MLC डॉ खालिद अनवर ने मीडिया से कहा, “नीतीश कुमार से बढ़िया प्रधानमंत्री कौन हो सकता है, नीतीश कुमार ने जिस तरह बिहार को आगे बढ़ाया है, उन्होंने कृषि मंत्री रहने के दौरान देश को आगे बढ़ाया, उसी रोडमैप पर देश आगे बढ़ रहा है। नीतीश कुमार पुराने राजनेता हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “वह लोकतांत्रिक संस्थाओं की इज्जत करते हैं। JDU अभी NDA गठबंधन का हिस्सा है। नीतीश कुमार को लोग पहले भी प्रधानमंत्री बनाना चाहते थे। लेकिन अब इस पर फैसला बाद में होगा।”

इस बीच यह भी खबर आई है कि नीतीश कुमार को INDI गठबंधन की तरफ से उपप्रधानमंत्री पद की पेशकश की गई है। उनसे INDI गठबंधन में शामिल होने का आग्रह किया गया है। हालाँकि, इस बात की पुष्टि अभी आधिकारिक तौर पर नहीं हो गई है। गौरलतब है कि 2024 लोकसभा चुनाव में NDA को बहुमत हासिल हुआ है। उसे लगभग 300 सीटें हासिल हुई हैं।

NDA की तरफ से अब सरकार बनाने पर मंथन चल रहा है। NDA गठबंधन के भीतर JDU की 12 सीटें हैं। उसने 17 में से 12 सीट जीती हैं और NDA सरकार बनाने के लिए 272 के बहुमत के आँकड़े में महत्वपूर्ण सहयोगी है। JDU लोकसभा चुनाव से कुछ दिन पहले ही NDA में शामिल हुई थी। वह बिहार में भी भाजपा के साथ सत्ता में है। वह इससे पहले INDI गठबंधन का हिस्सा थी और बिहार में RJD के साथ सरकार में थी।

बच्चों के झगड़े में भड़क गई मुस्लिम भीड़, अंजलि के घर पर पत्थरबाजी: घंटों सहमा रहा बरेली का हिंदू परिवार

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में सोमवार (3 जून 2024) को साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ एक हिन्दू परिवार पर मुस्लिम भीड़ द्वारा पत्थरबाजी की गई है। इस दौरान महिलाओं और बच्चों को भी निशाना बनाया गया। डर के कारण पीड़ित परिवार के लोग काफी देर तक खुद को घर में बंद रखा। पीड़ित परिवार एवं हिंदूवादी संगठनों ने हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना बरेली जिले के थाना क्षेत्र फरीदपुर की है। नई बस्ती रेशम बाग़ इलाके की रहने वाली अंजलि नाम की महिला ने सोमवार को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पीड़िता ने बताया कि उसके घर के आसपास मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं। सोमवार को उसका बेटा घर के बाहर खेल रहा था। इस दौरान उसकी मुस्लिम समुदाय के कुछ बच्चों से कहासुनी हो गई।

शिकायत में महिला ने आरोप लगाया है कि बच्चों की इस कहासुनी के बीच कुछ ही देर में मुस्लिम पक्ष के लोग जमा हो गए और उन्होंने अंजलि के घर पर हमला कर दिया। हमलावर भीड़ अंजलि के घर में घुसने पर आमादा थी। इस दौरान दर्जनों लोगों ने एकजुट होकर अंजलि के घर पर पत्थरबाजी की।

खुद को बचाने के लिए पीड़िता का परिवार घंटों घर को बंद करके बच्चों सहित दुबका रहा। घर से ही पीड़िता ने बाहर किसी काम से गए अपने पति को कॉल किया। बाद में मामले की सूचना पुलिस को मिली। पुलिस ने फ़ौरन ही घटनास्थल पर पहुँच कर हालात को काबू किया। पीड़िता की तहरीर पर केस दर्ज कर लिया गया है।

पीड़िता के साथ विश्व हिन्दू परिषद ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। विहिप के नगर अध्यक्ष सोमपाल राठौड़ ने कहा है कि अगर आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो हिन्दू संगठन सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। घटना के बाद कई हमलावर फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस ने हमलावरों को चिन्हित कर के गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए हैं।

‘राजनीति के भगवान हैं PM नरेंद्र मोदी’: कौन है वो ‘सुप्रीम स्टार’ जिसने केरल में पहली बार लहराया भगवा, बोले – चमत्कार तो होना ही था

दक्षिण भारतीय राज्य केरल में पहली बार भगवा लहराया है। मलयालम फिल्मों के दिग्गज अभिनेता सुरेश गोपी केरल के मध्य में स्थित त्रिशूर लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर सांसद चुन लिए गए हैं। यहाँ भाजपा के पक्ष में माहौल बनना बहुत बड़ी बात है, क्योंकि त्रिशूर जिले की बात करें तो राज्य का लगभग 13% क्षेत्रफल और 9% जनसंख्या इसके हिस्से आती है। ये पहली बार हो रहा है जब केरल में भाजपा का कोई सांसद जीता है, राज्य में आने वाले विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को इसका फायदा मिलेगा।

खबर लिखे जाने तक भाजपा के सुरेश गोपी ने 4.12 लाख वोट हासिल किए थे, जबकि राज्य के सत्ताधारी पार्टी CPI के उनके प्रतिद्वंद्वी VS सुनीलकुमार 3.37 लाख वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहें। वहीं कॉन्ग्रेस के K मुरलीधरन को 3.28 लाख वोट मिले और वो तीसरे स्थान पर रहे। सुरेश गोपी इस तरह लगभग 75,000 वोटों से आगे हैं। 66 वर्षीय सुरेश गोपी पिछले 38 वर्षों से मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं और उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है।

सुरेश गोपी ने इस विजय के बाद स्पष्ट कहा कि ये चमत्कार आसन्न था। उन्होंने कहा कि उन्हें सिर्फ त्रिशूर ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य के विकास के लिए काम करना है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को लगता है ये चमत्कार है, तो चमत्कार तो होना ही था। उन्होंने कहा कि इस जीत का प्रभाव आने वाले चुनावों में भी देखने को मिलेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘राजनीतिक भगवान’ करार दिया, साथ ही उन्हें और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को अपना सुपरहीरो बताया।

सुरेश गोपी 2006 के बाद से फिल्म इंडस्ट्री में कम सक्रिय हैं, लेकिन वो फ़िल्में करते रहते हैं। 2016-2022 तक वो राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत राज्यसभा सांसद भी रहे हैं। जनवरी 2024 में उनकी बेटी की शादी में आशीर्वाद देने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहुँचे थे। वो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के मलयालम वर्जन का 6 सीजन भी होस्ट कर चुके हैं। सुरेश गोपी अपने छात्र जीवन में वामपंथी संगठन SFI के लिए सक्रिय रहे हैं। वो त्रिशूर से 2019 में लोकसभा और 2021 में विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। 2021 में मात्र 3806 वोटों से उनकी हार हुई थी।

चित्रदुर्ग-जयपुर भाजपा जीती, जालंधर कॉन्ग्रेस के खाते में: देश में गठबंधन सरकार के संकेत

लोकसभा चुनाव 2024 के रुझान परिणामों में परिवर्तित होने लगे हैं। कुछ सीटों का परिणाम भी सामने आ गया है। देश में जहाँ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है, वहीं कॉन्ग्रेस को भी बड़ा फायदा हुआ है। भाजपा के 2 और कॉन्ग्रेस के 1 उम्मीदवार चुनाव जीत भी गए हैं। रुझानों से देश में गठबंधन सरकार के संकेत लग रहे हैं।

भारतीय जनता पार्टी की जयपुर शहर से उम्मीदवार मंजू शर्मा को जीत हासिल हो गई है। उन्होंने कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार प्रताप सिंह खाचरियावास को हराया है। मंजू शर्मा को 8.86 लाख वोट मिले हैं, उन्होंने 3.31 लाख वोट से खाचरियावास को हराया है। खाचरियावास को 5.55 लाख वोट मिले हैं। चित्रदुर्ग से भाजपा प्रत्याशी गोविन्द करजोल भी जीत गए हैं। उन्हें 6.84 लाख वोट मिले हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस उम्मीदवार बीएन चन्द्रप्पा को 48,000 वोट से हराया है।

वहीं कॉन्ग्रेस ने भी पंजाब से अपना खाता खोला है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी जीत हासिल की है। वह जालन्धर लोकसभा सीट से जीते हैं। उन्होंने भाजपा के सुशील रिंकू को हराया है। चरणजीत सिंह चन्नी को 3.9 लाख हासिल हुए हैं। उन्होंने सुशील रिंकू को 2.14 लाख से हराया है। आम आदमी पार्टी से भाजपा में आए सुशील रिंकू को 2.14 लाख वोट मिले। वह 2019 में AAP से सांसद बने थे।

इसके अलावा रायबरेली और वायनाड से राहुल गाँधी की जीत तय मानी जा रही है। इसके अलावा अमेठी से किशोरी लाल शर्मा की जीत भी तय है। उत्तर प्रदेश के अंदर सपा 30 से अधिक सीट पर आगे चल रही है। भाजपा को 240 के आसपास सीटों पर देश में आगे है। हालाँकि, NDA को स्पष्ट बहुमत मिल चुका है। NDA को 290 से अधिक सीट मिली हैं। ऐसे में देश आगे NDA की गठबंधन सरकार बनेगी। इसको लेकर बुधवार (4 जून, 2024) को NDA की दिल्ली में बैठक है, जिसमें NDA पार्टियाँ शामिल होंगी।

मंडी की ‘क्वीन’ बनीं कंगना रनौत, मथुरा में जीत की हैट्रिक लगाने की राह पर हेमा मालिनी: जानिए निरहुआ से लेकर पवन सिंह तक भोजपुरी स्टारों का क्या है हाल

साल 2024 के लोकसभा चुनावों में कई टीवी-फिल्मों के जाने-माने चेहरे भी प्रत्याशी बनकर उतरे थे। मतगणना वाले दिन उनकी अपनी-अपनी सीटों पर क्या स्थिति है ये देखने लायक हैं। इस बार के चुनावी मैदान में हिमाचल के मंडी से बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत पहली बार उतरी हैं। वहीं तीसरी बार मथुरा से हेमा मालिनी, पूर्वी दिल्ली से मनोज तिवारी और गोरखपुर से रवि किशन हैं। मेरठ से अरुण गोविल हैं, पवन सिंह काराकाट से हैं और दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ आजमगढ़ से हैं।

आइए जानते हैं कि इन सभी नेताओं की स्थिति क्या है।

कंगना रनौत

हिमाचल के मंडी से कंगना रनौत भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी हैं। अभी तक इस सीट पर नतीजे घोषित नहीं हुए लेकिन सुबह से लेकर अभी तक कंगना रनौत ने यहाँ से बढ़त बनाई हुई है। कंगना खबर लिखने तक 71 हजार वोटों से आगे चल रही हैं। उन्हें अब तक 5 लाख 12 हजार वोट मिले हैं। वहीं कॉन्ग्रेस प्रत्याशी विक्रमादित्य सिंह को 4लाख 41 हजार के आसपास वोट मिले हैं।

अरुण गोविल

मेरठ सीट से भाजपा प्रत्याशी बनकर खड़े हुए अरुण गोविल को अभी तक के आँकड़ों के हिसाब से 3 लाख 85 हजार वोट मिले हैं, लेकिन इतने वोट पाने के बाद अभी वो दूसरे नंबर पर हैं क्योंकि समाजवादी पार्टी की सुनीता वर्मा को 3 लाख 92 हजार वोट मिले हैं। ईसी साइट के अनुसार सुनीता वर्मा करीबन 7603 वोटों से आगे हैं।

हेमा मालिनी

उत्तरप्रदेश राज्य की मथुरा लोकसभा सीट से खड़ी हेमा मालिनी धर्मेंद्र यादव 2 लाख 24 हजार के आसपास वोटों से लीड कर कर रही हैं। अभी तक उन्हें 3 लाख 64 हजार+ वोट मिले हैं। वहीं कॉन्ग्रेस प्रत्याशी मुकेश ढांगर के हिस्से सिर्फ 1 लाख 39 हजार वोट मिले हैं।

रवि किशन

उत्तरप्रदेश की गोरखपुर लोकसभा सीट से भाजपा ने रवि किशन को उतारा हुआ है। रवि किशन को इस समयट तक 3 लाख 42 हजार वोट मिले हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी की काजल निशाद को 43 हजार वोटों से पीछे किया हुआ है।

दिनेश लाल यादव

आजमगढ़ की लोकसभा सीट से किस्मत आजमाने उतरे दिनेश लाल यादव दूसरे नंबर पर है। उन्हें 1 लाख 36 हजार वोट मिले हैं और जो समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव इस सीट से लीड कर रहे हैं उन्हें 2 लाख 27 हजार के आसपास वोट मिल चुके हैं। वो 91 हजार वोटों से आगे हैं।

पवन सिंह

बिहार के काराकाट से चुनावी मैदान में निर्दलीय उतरे पवन सिंह तीसरे नंबर पर हैं। उन्हें अब तक 1 लाख 18 हजार+ वोट मिले हैं, लेकिन उनसे आगे उपेंद्र कुशवाहा हैं तो 1 लाख 25 हजार के करीब वोट पाकर और फिर सीपीएम पार्टी के राजा राम सिंह हैं जो इस सीट पर लीड कर रहे हैं। राजा राम सिंह को अभी तक 1 लाख 81 हजार के करीब वोट मिला है।

मनोज तिवारी

राजधानी की उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट से चुनावी मैदान में खड़े मनोज तिवारी 5 लाख 67 हजार वोट पाकर आगे हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस के कन्हैया कुमार को 1 लाख 37 हजार वोटों से पीछे किया हुआ है। कन्हैया को 4 लाख 30 हजार वोट मिलते दिखाई दे रहे हैं।

बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे अभी स्पष्ट सामने नहीं आए हैं। लेकिन एनडीए गठबंधन को इस समय 294 सीट मिल चुकी है और इंडी गठबंधन को 232 सीट मिलती दिखाई दे रही है। भाजपा के प्रत्याशी 241 सीट पर लीड कर रहे हैं। इनमें से 3 की जीत हो चुकी है।

इंदौर में बीजेपी उम्मीदवार शंकर लालवानी की 11.75+ लाख वोटों के अंतर से रिकॉर्ड तोड़ जीत : 2 लाख मतों के साथ दूसरे नंबर पर नोटा

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे आ रहे हैं। मध्य प्रदेश में सभी 29 लोकसभा सीटों पर बीजेपी को जीत मिल रही है। इसमें से इंदौर लोकसभा सीट पर बीजेपी उम्मीरवार ने रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की है। ये वही सीट है, जहाँ से कॉन्ग्रेस कैंडिडेट ने आखिरी समय में अपना नाम वापस ले लिया था। इस सीट पर बीजेपी कैंडिडेट ने 1,17,5092 मतों से जीत दर्ज की है। हालाँकि यहाँ सबसे ज्यादा चौंकाने वाला प्रदर्शन नोटा ने किया है। बीजेपी कैंडिडेट के बाद दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा वोट नोटा को मिले हैं, जो 2 लाख से भी ज्यादा है।

इंदौर लोकसभा सीट पर मतगणना में बीजेपी कैंडिडेट को 12 लाख 26 हजार 751 वोट मिले हैं। दूसरे नंबर पर नोटा है। नोटा को 2 लाख 18 हजार 674 वोट मिले हैं। तीसरे नंबर पर बीएसपी का कैंडिडेट है, जिसे नोटा के चौथाई से भी कम वोट मिला है। बीएसपी कैंडिडेट संजय को 51 हजार 659 वोट ही मिल पाए। बीएसपी कैंडिडेट के मुकाबले नोटा को 4 गुना से भी ज्यादा वोट मिले हैं।

इंदौर में शंकर लालवानी की रिकॉर्ड जीत (फोटो साभार : चुनाव आयोग वेबसाइट)

इंदौर में बना रिकॉर्ड, बीजेपी कैंडिडेट को अब तक की सबसे बड़ी जीत

लोकसभा चुनाव में अब तक सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड माकपा के अनिल बसु के नाम था। उन्होंने साल 2004 में पश्चिम बंगाल में बीजेपी के स्वप्न कुमार नंदी को 5 लाख 92 हजार 502 वोटों से हराया था। आज तक लोकसभा चुनाव में कोई भी उम्मीदवार 6 लाख के अंतर से नहीं जीता था, लेकिन इंदौर में नोटा को हटा दें कि 11 लाख 75 हजार 092 वोटों से बीएसपी उम्मीदवार को हार मिली है। हालाँकि दूसरे नंबर पर नोटा को कैंडिडेट माना जाए, तो भी ये अंतर 10 लाख से ज्यादा का है।

गौरतलब है कि इंदौर से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार अक्षय कांति बम ने नामांकन वापसी के आखिरी दिन अपना पर्चा वापस ले लिया था और वो बीजेपी में शामिल हो गए थे। इस सीट पर कॉन्ग्रेस का कोई उम्मीदवार ही नहीं था। ऐसे में कॉन्ग्रेस पार्टी ने नोटा को वोट देने की मुहिम चलाई, जिसकी वजह से नोटा को 2 लाख से ज्यादा वोट मिले।

पुलिस ने रोका तो गोतस्कर बरसाने लगे गोलियाँ; छाती में गोली लगी पर बुलेटप्रूफ जैकेट से बची SHO की जान, राजस्थान में महमूद और इदरीस गिरफ्तार

राजस्थान के डीग जिले में रविवार (2 जून 2024) को पुलिस और गोतस्करों के बीच मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में पुलिस ने इदरीस और महमूद के पैरों में गोली मारकर गिरफ्तार कर लिया। मुठभेड़ में थाना प्रभारी के सीने में गोली लगी है। हालाँकि, बुलेट प्रूफ जैकेट की वजह से उनकी जान बच गई। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। कुल 3 गोवंशों को मुक्त भी करवाया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना डीग जिले के थानाक्षेत्र कामां की है। यहाँ रविवार को पुलिस टीम गश्त कर रही थी। तभी SHO मनीष शर्मा को अपने क्षेत्र में गोतस्करों के मौजूदगी की सूचना मिली। पुलिस को पता चला कि 2 गोतस्कर 3 गोवंश लेकर चनिया खुर्द के जंगल वाली राह पर जा रहे हैं। सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर तस्करों को घेर लिया और उन्हें खुद को पुलिस के हवाले करने के लिए कहा।

सरेंडर करने के बजाय दोनों आरोपितों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। एक गोली SHO के सीने में लगी। बुलेटप्रूफ जैकेट पहने होने के कारण थानेदार की जान बच गई। आखिरकार पुलिस को अपने आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी। जवाबी कार्रवाई में महमूद और इदरीस घायल हो गए। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। महमूद इलाके में भोला नाम से कुख्यात है और उस पर 19 मुकदमे दर्ज हैं।

दोनों गोतस्करों को आरबीएम अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। इनके पास से काटने के लिए ले जाए जा रहे 3 गोवंश बरामद किए गए हैं। महमूद पर दर्ज 19 मुकदमों में अधिकांश गोतस्करी के हैं। दोनों आरोपितों के पास से 3 देसी कट्टे, 6 जिंदा कारतूस और 3 खाली कारतूस बरामद हुए हैं। अस्पताल में इन दोनों ने भविष्य में कभी गोहत्या न करने का वादा किया है।


                

जम्मू कश्मीर के दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों की हार, संसद नहीं पहुँच पाए उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती: जम्मू की दोनों सीटों पर लहराया भगवा

जम्मू कश्मीर में बड़ा उलटफेर हो गया है। वहाँ दशकों से प्रभावशाली रहीं दोनों प्रमुख दलों के मुखिया चुनाव है गए हैं। ‘जम्मू एन्ड कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस’ (JKNF) के उपाध्यक्ष उमर अब्दुला और ‘जम्मू एन्ड कश्मीर पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी’ (JKPDP) अपने-अपने सीटों से चुनाव हार गए हैं। उमर अब्दुल्ला बारामूला तो महबूबा मुफ़्ती अनंतनाग-राजौरी से लोकसभा चुनाव 2024 में ताल ठोक रही थीं। जम्मू कश्मीर में भाजपा 2 सीटें जीत रही हैं, JKNF 2 और एक पर निर्दलीय की जीत हो रही है।

सबसे पहले बात करते हैं बारामूला की। यहाँ से निर्दलीय अब्दुल रशीद शेख की जीत हो रही है। खबर लिखे जाने तक उन्हें 3.12 लाख वोट मिल चुके थे, वहीं उमर अब्दुल्ला 1.44 लाख वोटों से पीछे 1.68 लाख वोटों पर अटके हुए थे। उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया पर अपनी हार भी स्वीकार कर ली है। उन्होंने अपने विजय सांसदों रहुल्लाह मेहंदी और मियाँ अल्ताफ को बधाई देते हुए कहा कि वो इसके लिए माफ़ी माँगते हैं कि संसद में उनका साथ नहीं दे पाएँगे, लेकिन उन्हें विश्वास है कि दोनों वहाँ जम्मू कश्मीर का सही तरीके से प्रतिनिधित्व करेंगे।

अब बात करते हैं अनंतनाग-राजौरी सीट की, जहाँ से PDP की मुखिया महबूबा मुफ़्ती लड़ रही हैं। यहाँ से उमर अब्दुल्ला की ही पार्टी के मियाँ अल्ताफ अहमद की जीत हो रही है। उन्हें खबर लिखे जाने तक 4.59 लाख वोट मिले थे, जबकि महबूबा मुफ़्ती 2.22 लाख वोट ही पा सकी थीं। इस तरह से वो 2.36 लाख वोटों से पीछे चल रही हैं। ‘जम्मू एन्ड कश्मीर अपनी पार्टी’ के ज़फर इक़बाल खान मन्हास ने भी इस चुनाव में 1.17 लाख वोट अब तक बटोरे हैं।

उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती, दोनों जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उमर अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से 1998, 1999 और 2004 में लगातार जीत कर जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं। उनके पिता फारूख अब्दुल्ला भी 4 बार यहाँ से जीत चुके हैं। वहीं महबूबा मुफ़्ती 2004 और 2014 में अनंतनाग से सांसद रही हैं। उनके पिता भी यहाँ से 1998 में जीत दर्ज कर चुके हैं। फारूख अब्दुल्ला और मुफ़्ती मुहम्मद सईद, दोनों मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

परषोत्तम रूपाला, महेश शर्मा, ढुल्लू महतो, अतुल गर्ग… जिन-जिन का सोशल मीडिया में ‘खास समूह’ कर रहा था ‘प्रचंड विरोध’, सारे चल रहे हैं आगे

लोकसभा चुनाव 2024 के रुझान लगातार आ रहे हैं। वोटों की गिनती के साथ ही चुनाव के दौरान रहे फैक्टर्स पर भी विश्लेषण चालू हो गया है। 2024 लोकसभा चुनावों में कई सीटों को लकर सोशल मीडिया में भी बड़ा अभियान चलाया गया था। यह अभियान राजपूत वोटरों को लेकर था।

अधिकांश सीटों पर भाजपा को हराने की बात कही गई थी। भाजपा नेता परषोत्तम रुपाला का बयान और राजपूत नेताओं के टिकट बदलने को लेकर सोशल मीडिया पर कई एकाउंट्स ने भाजपा को वोट ना देने के लिए अभियान चलाया था। इसमें दावा किया गया था कि भाजपा राजपूतों का राजनीतिक नेतृत्व घटा रही है। जिन सीटों को लेकर यह आरोप लगाए गए थे, उनकी स्थिति जान लेते हैं।

राजकोट: परषोत्तम रुपाला पर कोई असर नहीं

राजपूत विरोध का सबसे बड़ा केंद्र गुजरात के राजकोट से भाजपा प्रत्याशी परषोत्तम रुपाला थे। उनके एक बयान को लेकर राजपूतों के बड़े वर्ग ने नाराजगी जताई थी। उनके विरोध में सोशल मीडिया पर अभियान चलाया गया था। परषोत्तम रुपाला ने इस बयान को लेकर माफ़ी भी माँगी थी। हालाँकि, चुनावों तक उनके विरुद्ध बड़ा कैम्पेन चलाया गया और उन्हें हराने की बात कही गई। रुपाला के खिलाफ चलाए गए अभियान का उन पर कोई असर पड़ता नहीं दिखा है।

रुपाला गुजरात की राजकोट सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें 1:30 बजे तक 6.78 लाख वोट हासिल हो चुके थे। वह कॉन्ग्रेस प्रत्याशी धनानी परेश से 3.96 लाख वोट से आगे हैं। ऐसे में उनकी जीत तय मानी जानी चाहिए। राजपूत विरोध का असर जमीन पर नहीं दिख रहा है।

नोएडा: जमीन पर नहीं दिखा विरोध

उत्तर प्रदेश की गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) सीट पर भी भाजपा के उम्मीदवार महेश शर्मा का विरोध हुआ था। महेश शर्मा को लेकर सोशल मीडिया पर विरोध जताया गया था और उनके बदले सपा और बसपा को वोट देने की अपील की गई थी। हालांकि, जमीन पर यह असर नहीं दिखा। गौतम बुद्ध नगर सीट पर महेश शर्मा को 12:30 तक 4.4 लाख से अधिक वोट मिल चुके थे। वह सपा से 2.72 लाख वोट मिले हैं। यहाँ सोशल मीडिया पर गुर्जरों के मुद्दे उठाने को लेकर समर्थन को लेकर भाजपा का विरोध करने को कहा गया था जिसका असर नहीं दिख रहा।

धनबाद: टिकट काटने को लेकर विरोध

झारखंड की धनबाद सीट पर मौजूदा सांसद पशुपति नाथ सिंह का टिकट काट कर ढुल्लू महतो को देने को लेकर काफी विरोध जताया गया था। इसे राजपूत उम्मीदवार की राजनीति खत्म करने का प्रयास बताया गया था।

ढुल्लू महतो विरुद्ध सोशल मीडिया पर अभियान चला था और इस सीट पर कॉन्ग्रेस की अनुपमा सिंह को जिताने की अपील की गई थी। इस सोशल मीडिया के विरोध का असर जमीनी मतदाताओं पर नहीं दिखा है। ढुल्लू महतो 2.05 लाख वोटों के साथ अनुपमा सिंह से आगे चल रहे हैं। उन्हें 57,594 वोटों की बढ़त हासिल है। ऐसे में इस सीट पर सोशल मीडिया का असर नगण्य हुआ है।

गाजियाबाद: अतुल गर्ग आगे

गाजियाबाद सीट को लेकर भी सोशल मीडिया पर अभियान चलाया गया था। गाजियाबाद की सीट से सांसद रहे जनरल वीके सिंह ने सांसद चुनाव ना लड़ने का निर्णय किया था। जिसके बाद भाजपा ने अतुल गर्ग को टिकट दिया था। सोशल मीडिया पर यह अभियान चलाया गया था कि राजपूत उम्मीदवार का टिकट काट कर वैश्य समाज को दिया गया है। इसको लेकर सोशल मीडिया पर राजपूत हैंडल्स ने भाजपा के बायकाट करने को कहा था।

हालाँकि, यह सोशल मीडिया का विरोध जमीन पर नहीं पहुँचा। अतुल गर्ग 3.6 लाख वोट पा चुके हैं और अपनी प्रतिद्वंदी डॉली शर्मा से 1.24 लाख से आगे हैं। आगे यह अंतर और बढ़ने के कयास हैं। सोशल मीडिया पर चले इस अभियान को लेकर यह भी आरोप लगे गए थे कि राजपूत राजनीति के नाम पर सोशल मीडिया चलाने वाले कई लोग मुस्लिम हैं जो कि हिन्दू वोटों को बाँटना चाहते हैं।

कॉन्ग्रेस के नफरती एजेंडे पर राहुल कँवल ने किया सवाल तो दर्द से बिलबिला उठे राजदीप सरदेसाई, डिबेट छोड़ इंडिया टुडे के स्टूडियो से निकले की दी धमकी

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए 4 जून (मंगलवार) की सुबह मतगणना शुरू हो गई। भाजपा को मिल रही बढ़त के बाद विपक्ष के कई नेताओं और पत्रकारों में निराशा की लहर दौड़ गई। इन्हीं में से एक हैं इंडिया टुडे के ‘पत्रकार’ राजदीप सरदेसाई। एक बहस के दौरान राजदीप ने चुनावी कवरेज के बीच में ही स्टूडियो छोड़ने की धमकी दे डाली। इस धमकी की वजह उनके सहयोगी राहुल कँवल द्वारा कॉन्ग्रेसी नेताओं द्वारा फैलाए जा रहे उत्तर-दक्षिण जैसी विभाजनकारी मुद्दे को उठाना था।

दक्षिण भारत में भाजपा के प्रदर्शन के बारे में चर्चा के दौरान राहुल कँवल ने कॉन्ग्रेस पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “फर्जी बातें फैलाई गईं और दक्षिण व उत्तर भारत को अलग-अलग रूप में पेश करने की कोशिश की गई।” उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष ने दक्षिण भारत और उत्तर भारत को अलग-अलग कहानी के रूप में पेश करने का प्रयास किया गया। विपक्ष के कई नेताओं ने कहा कि मोदी का जादू दक्षिण में काम नहीं करता। यह अलग है। उत्तर भारत अलग है, क्योंकि वे इसे दो अलग-अलग देशों के रूप में देखते है।”

राहुल कँवल की यह टिप्पणी कॉन्ग्रेस के वफादार राजदीप सरदेसाई को नागवार गुजरी। राजदीप सरदेसाई ने राहुल कँवल को ‘एंग्री यंगमैन’ बताया। हालाँकि, इस पर ध्यान नहीं देते हुए राहुल कँवल ने राजदीप से ही पूछ लिया कि कॉन्ग्रेस उत्तर और दक्षिण की बातें करती है या नहीं। जवाब में सच्चाई कबूल करने के बजाय राजदीप ने राहुल कँवल को ऐसी टिप्पणी करते समय सावधानी बरतने की सलाह दे दी। राजदीप ने कॉन्ग्रेस नेता डीके सुरेश द्वारा दक्षिण भारत के अलग देश बन जाने जैसी टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बयान जरूर कहा, लेकिन कई मौकों पर वो कॉन्ग्रेस का बचाव करते दिखे।

अंत में राजदीप सरदेसाई ने इस पूरी चर्चा को आँकड़ों की तरफ मोड़ दिया। शो के एक पैनलिस्ट ने जब डीके सुरेश की टिप्पणी को देशद्रोही बयान बताया तो राजदीप सरदेसाई ने उत्तर और दक्षिण भारत के बीच नफरत फैलाने का आरोप लगाते हुए चर्चा को बीच में ही छोड़ देने की धमकी दी। दरअसल, दिसंबर 2023 में भी कॉन्ग्रेस के कुछ नेताओं ने छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनावों में अपनी हार को तर्कसंगत बनाने के लिए उत्तर-दक्षिण विभाजन को हवा दी थी।

यहाँ ध्यान देने वाली ये बात है कि इसी साल 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024 का अंतरिम बजट पेश किया था। तब इस बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉन्ग्रेस नेता डीके सुरेश ने केंद्र पर बजट में दक्षिण भारतीय राज्यों की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए एक तरह से धमकी दे डाली थी। इसको लेकर काफी बवाल हुआ था।

डीके सुरेश ने कहा था कि भविष्य में दक्षिण भारतीय राज्य अपने लिए एक अलग देश की माँग कर सकते हैं और इसे बनवा भी सकते हैं। कॉन्ग्रेस नेता ने आगे कहा था कि दक्षिण भारतीय राज्यों का पैसा उत्तर भारत में प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने इसे अन्याय बताते हुए चेतावनी दी थी कि यही हाल रहा तो दक्षिणी राज्य एक अलग देश की माँग कर सकते हैं।