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‘भीम’ के साथ ‘मीम’ को सवारी कराने से हाथी ने की तौबा: UP में BSP का खाता भी नहीं खुला, दिए थे 19 मुस्लिम उम्मीदवार, बोलीं मायावती- आगे सोच-समझकर ही दूँगी मौका

बसपा सुप्रीमो मायावती का भीम-मीम की सियासत से विश्वास उठ गया है। दलितों और वंचितों का दावा करने वाली बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने आगे से मुस्लिम उम्मीदवारों को सोच समझ कर मौक़ा देने की बात कही है। उत्तर प्रदेश के भीतर बसपा के मुस्लिम उम्मीदवारों की हार को देख कर साफ़ हो गया है कि यह भीम-मीम का फॉर्मूला तभी सफल है जब इसमें मुस्लिम वोटरों को अपना फायदा दिखता हो। इस बार उन्हें बसपा से फायदा नहीं दिखा, इसलिए बसपा के अपने समाज के उम्मीदवारों को भी किनारे कर दिया गया।

इस बात को बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी माना है। बसपा सुप्रीमो ने हताशाजनक परिणाम के बाद एक पत्र जारी किया गया है। इसमें का कहा गया है कि बसपा ने इस चुनाव में मुस्लिमों को काफी मौका दिया लेकिन मुस्लिम समाज उन्हें समझ नहीं पाया, ऐसे में वह पार्टी आगे सोच-समझ कर उनकी राजनीतिक भागीदारी पर निर्णय लेगी। यह एक तरह से बसपा का मुस्लिम राजनीति से दुराव का संकेत है, जिसको पत्र में स्पष्ट रूप से प्रकट किया गया है।

बसपा ने सबसे अधिक मुस्लिम उतारे, सभी हारे

बसपा ने लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश के भीतर सबसे अधिक मुस्लिम उम्मीदवार दिए थे। बसपा ने उत्तर प्रदेश में कई मुस्लिम बहुत और कई सामान्य सीटों पर भी मुस्लिम उम्मीदवार दिए थे। बसपा ने लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश के भीतर 19 मुस्लिमों को टिकट दिया था। उसने देश भर में 35 मुस्लिमों को टिकट दिया था। उसके सभी मुस्लिम उम्मीदवार हार गए हैं। उत्तर प्रदेश में उसके कोई भी मुस्लिम उम्मीदवार चुनावी लड़ाई में दूसरे नम्बर पर तक नहीं आ सके हैं।

कई सीटों पर उसके उम्मीदवारों को 1 लाख से भी कम वोट हासिल हुए हैं। इसके बाद ही बसपा सुप्रीमो का यह पत्र सामने आया है जिसमें उन्होंने मुस्लिम समाज के प्रति अपने गिले शिकवे कहे हैं। उनके इस पत्र से साफ़ है कि बसपा अब राजनीति का ट्रैक बदलेगी और उसमें मुस्लिमों का हिस्सा पहले से कम होगा।

मुस्लिम प्रभाव वाली सीटों पर भी हारे बसपा के उम्मीदवार

बसपा के मुस्लिम उम्मीदवार उन सीटों पर भी हार गए हैं जिन्हें बसपा के प्रभाव वाली माना जाता है। उत्तर प्रदेश के भीतर संभल, रामपुर, मुरादाबाद, सहारनपुर, अमरोहा, आजमगढ़, और पीलीभीत जैसी मुस्लिम प्रभाव वाली सीटों पर भी मुस्लिम उम्मीदवार दिए थे। यहाँ भी इसके कोई उम्मीदवार नहीं जीत सके। इन सभी सीटों पर बसपा के मुस्लिम उम्मीदवार तीसरे नम्बर पर रहे। वह कहीं टक्कर में भी नहीं आ सके।

पीलीभीत, सहारनपुर और अमरोहा छोड़ का कोई बाकी सारी मुस्लिम प्रभाव वाली सीटें सपा के खाते में गईं, जो दिखाता है कि मुस्लिमों ने इस चुनाव में काफी रणनीतिक तरीके से सपा को अपना वोट दिया। इसके अलावा बसपा के मुस्लिम उम्मीदवार वहाँ भी चुनाव नहीं जीत पाए जहाँ उनके सामने सपा ने हिन्दू उम्मीदवार दिए। इसका सबसे बड़ा उदाहरण मुरादाबाद की सीट है। यहाँ से सपा ने रूचि वीरा को टिकट दिया जबकि बसपा ने मोहम्मद इरफ़ान को, इस चुनावी लड़ाई में रूचि वीरा जीत गईं जबकि इरफ़ान बुरी तरह से हारे।

यह दिखाता है कि बसपा के भीम-मीम फॉर्मूला को नकारते हुए मुस्लिमों ने अपने पुराने मुस्लिम-यादव फॉर्मूला को बढ़त दिलाई। बसपा भी इस बात को समझ गई है कि दलितों को मुस्लिमों के साथ जोड़ने की सोशल इंजीनियरिंग उसके काम नहीं आने वाली और स्पष्ट रूप से उसने आगे से ऐसा करने से मना भी कर दिया है।

BJP की सीटें घटी, लोकसभा में बढ़ गए मुस्लिम: असम में रकीबुल 10 लाख+ से जीते, मुर्शिदाबाद में ‘बाहरी’ यूसुफ पठान ने 5 बार के सांसद अधीर रंजन को चटा दी धूल

लोकसभा चुनावों के नतीजे आने के साथ गौर करने वाली बात यह भी है कि इस चुनाव में जहाँ भारतीय जनता पार्टी की सीटें पहले के मुकाबले घट गई हैं तो वहीं दूसरी ओर लोकसभा में मुस्लिम सांसदों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। 2014 में संसद में मुस्लिम सांसदों की संख्या 22 थी। अब ये संख्या 28 पहुँच गई है। कल तक सामने आ रहा था कि 26 मुस्लिमों ने लोकसभा सीटें जीती हैं, लेकिन अब ये संख्या 28 हो गई है।

नए मुस्लिम सांसदों की बात करें तो इनमें एक टीएमसी द्वारा बहरहामपुर से उतारे गए युसूफ पठान हैं जिन्होंने पाँच बार से लगातार सांसद बन रहे अधीर रंजन चौधरी को हराकर अपनी जगह संसद में बनाई है। इस सीट पर 848, 152 मुस्लिम वोट थे जो कि वहाँ की जनता के 52 फीसद हैं। इसके अलावा इकरा चौधरी ने कैराना में सपा की ओर से भाजपा प्रत्याशी को हराया।

लद्दाख में मोहम्मद हनीफ ने, जम्मू में अब्दुल राशिद ने निर्दलीय चुनाव लड़कर जीता। इसके अलावा सपा प्रत्याशी मोहिबुल्लाह ने रामपुर से। सबसे बड़ी जीत अगर किसी मुस्लिम प्रत्याशी ने दर्ज कराई है तो वो असम के ढुबरी से रकीबुल हुसैन हैं। उन्होंने मोहम्मद बदरुरद्दीन अजमल को 10 लाख 12 हजार वोट से हराकर जीत हासिल की है।

इनके अलावा केरल के मल्लपुरम लोकसभा सीट पर 65 से 70 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं जहाँ से मुस्लिम लीग के मोहम्मद बशीर ने जीत हासिल की है। इसी तरह हैदराबाद में असदुद्दीन ओवैसी ने भी 6 लाख से ज्यादा वोट पाकर अपनी सांसदी बनाए रखी। मुख्तार अंसारी के बेटे अफजाल अंसारी ने भी गाजीपुर सीट जीती है।

बता दें कि कॉन्ग्रेस, टीएमसी, एसपी और राष्ट्रीय जनता दल, राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने मिलकर इस पर 78 मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। जबकि 2019 में 115 कैंडिडेट मैदान में थे और इनमें से 26 निर्वाचित होकर लोकसभा पहुँचे थे। इसके अलावा यदि उस साल की बात करें जब सबसे ज्यादा मुस्लिम प्रतिनिधियों ने लोकसभा में जगह बनाई थी तो वो साल 1980 का था। 1980 में मुस्लिम प्रतिनिधियों की संख्या 49 थी।

उल्लेखनीय है कि 2024 में हुए लोकसभा चुनाव के मतदान में एनडीए के हिस्से 293 सीट आई है जबकि इंडी गठबंधन को 235 सीट मिली है। इनमें भाजपा ने अकेले 240 सीट हासिल की है। उनके साथ गठबंधन में प्रमुख दल टीडीपी और जदयू हैं। पिछले चुनाव में भाजपा को अकेले 303 सीट मिली थी और एनडीए गठबंधन को 350 से ज्यादा। मगर इस बार पूरे विपक्ष ने एक साथ होकर नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ चुनाव लड़ा। उनका मकसद देश के विकास से ज्यादा भाजपा को सत्ता से बाहर करने का था। बावजूद इसके बीजेपी सबसे ज्यादा वोट पाने वाली पार्टी बनी।

दक्षिण भारत में भाजपा की कई मोर्चों पर जीत: तमिलनाडु में वोट प्रतिशत 300% बढ़ा, आंध्र प्रदेश में 10 गुना ज्यादा मत, तेलंगाना में सीट-वोट डबल, केरल में पहली बार खोला खाता

लोकसभा 2024 चुनाव के परिणाम सामने हैं। भाजपा 240 सीट के साथ देश की सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। इन चुनावों में अधिकांश चर्चा भाजपा की उत्तर भारत के कुछ राज्यों में सीटें घटने को लेकर है। दूसरी तरफ पार्टी ने दक्षिण में अपने पैर पसारे हैं, उसने कई राज्यों में वोट प्रतिशत बढ़ाया है और केरल जैसे राज्य में खाता भी खोला है।

तमिलनाडु में उसने अपना वोट प्रतिशत तीन गुना कर लिया है। आंध्र प्रदेश में उसके वोट प्रतिशत में 10 गुने की बढ़ोतरी हुई है। कर्नाटक में भी वह अपना किला बचाने में सफल रही है। तेलंगाना में उसने अपना वोट प्रतिशत और सीट दोनों ही लगभग दोगुने कर लिए हैं। इन राज्यों में भाजपा का यह विस्तार उसे आगे चुनावों में और बढ़त देगा। राज्यवार समीक्षा की जाए तो दिखाई देता है कि 2019 के मुकाबले दक्षिण में भाजपा कहीं अधिक प्रभावशाली ढंग से उभरी है।

भाजपा दक्षिण भारत

तमिलनाडु: 10% के पार पहुँचा वोट प्रतिशत

दक्षिण के सबसे बड़े राज्य तमिलनाडु में भाजपा ने 2024 लोकसभा चुनावों में 10% से अधिक वोट हासिल किए हैं। उसे 2024 लोकसभा चुनावों में 11.24% वोट मिले हैं। यह उसका तमिलनाडु में सबसे अच्छा प्रदर्शन है। इससे पहले 2019 चुनावों में उसे 3.62% वोट मिले थे। तमिलनाडु में भाजपा तीसरे सबसे अधिक वोट हासिल करने वाली पार्टी बनी है। उसे सत्ताधारी DMK और विपक्षी AIADMK के बाद राज्य में सबसे अधिक वोट हासिल हुए हैं। कॉन्ग्रेस इस मामले में तमिलनाडु में भाजपा से पीछे रही है।

तमिलनाडु में भाजपा की यह उपलब्धि उसे विधानसभा चुनावों में बड़ी बढ़त दे सकती है। हालाँकि, 11% से अधिक वोट पाने के बाद भी भाजपा तमिलनाडु में सीटें नहीं जीत सकी। लेकिन वह 11 सीटों पर राज्य में दूसरे स्थान पर रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि तमिलनाडु की जनता DMK-AIADMK के अलावा अन्य विकल्प भी तलाश रही है।

केरल: खाता खुला, वोट बढ़े

दक्षिण भारत में केरल अभी तक ऐसा राज्य रहा है जहाँ भाजपा को कभी भी सफलता नहीं मिली थी। 2024 लोकसभा चुनाव में केरल में भाजपा का सीट का सूखा समाप्त हो गया। भाजपा ने यहाँ त्रिशुर सीट जीत ली है। भाजपा उम्मीदवार सुरेश गोपी यहाँ सफलता हासिल करके विजयी हो गए हैं। इसी के साथ वामपंथी राजनीति के आखिरी गढ़ में भाजपा ने सेंधमारी कर दी है। राज्य में भाजपा का वोट प्रतिशत भी बढ़ा है, 2019 चुनाव में राज्य में भाजपा का वोट प्रतिशत 12.99% था।

2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा को 16.68% वोट मिले हैं। उसकी चुनावी सफलता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि राज्य वामदलों को भी 1 ही सीट हासिल हुई है। वह आँकड़े में भाजपा के बराबर आ गए हैं। केरल में भाजपा तिरुवनंतपुरम सीट भी मात्र 16,077 वोट से हारी है। केरल में भी भाजपा के बढ़ते आधार के चलते उसे आगे फायदा होने की उम्मीद है।

तेलंगाना: वोट, सीट सब दोगुने

दक्षिण भारत के एक और महत्वपूर्ण राज्य तेलंगाना में भाजपा का प्रदर्शन अभूतपूर्व रहा है। राज्य भाजपा 17 में से 8 सीट जीतने में सफल रही है। राज्य में सत्ताधारी कॉन्ग्रेस भी 8 ही सीट जीत सकी है। 2019 में यहाँ भाजपा ने 4 सीट जीती थी। ऐसे में भाजपा का आँकड़ा यहाँ दोगुना हो गया है। तेलंगाना में भाजपा अपना वोट प्रतिशत भी बढाने में सफल रही है। उसे 2019 में राज्य में 19.65% वोट मिला था जो कि 2024 में बढ़ कर 35.08% हो गया है।

तेलंगाना में भाजपा ने क्षेत्रीय पार्टी भारत राष्ट्र समिति का भी सफाया कर दिया है। वह हारी हुई 7 सीटों में दूसरे स्थान पर रही है, यानी मुकाबला भाजपा और कॉन्ग्रेस के बीच हुआ है। भारत राष्ट्र समिति यहाँ एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हुई है। राज्य में भाजपा अब दूसरे नम्बर की पार्टी बन रही है।

आंध्र प्रदेश: धमाकेदार जीत, 10 गुना वोट बढ़े

आंध्र प्रदेश में 2024 लोकसभा चुनावों में NDA गठबंधन की जोरदार जीत हुई है। उसकी सहयोगी TDP ने राज्य में सरकार बनाई है। BJP ने खुद भी राज्य में 3 सीट जीत ली हैं। भाजपा 2019 में यहाँ से एक भी सीट जीतने में विफल रही थी। भाजपा को आंध्र प्रदेश में 11.28% वोट मिले हैं। उसे 2019 में 1% वोट भी नहीं मिले रहे। उसके वोट प्रतिशत में 2019 के मुकाबले 10 गुने से अधिक उछाल देखी गई है। आंध्र प्रदेश में भाजपा TDP के साथ मिलकर राज्य में सरकार में भी आ गई है।

कर्नाटक: गढ़ बरकरार, वोट बरकरार

कर्नाटक में 2024 के चुनाव भाजपा के लिए नुकसान वाले रहे है। भाजपा को इन चुनावों में सीटों का नुकसान सहना पड़ा है। कर्नाटक में भाजपा और JDS ने 28 में से 19 सीट जीती हैं। उसकी 2019 चुनाव में 26 सीट थीं। उसका वोट प्रतिशत हालाँकि बचा हुआ है। उसने 46.06% वोट हासिल किए हैं, उसके सहयोगी JDS ने 5.6% वोट हासिल किए हैं। NDA गठबंधन राज्य में 51.6% हासिल करने में सफल रहा है, 2019 में भी भाजपा ने राज्य में 51.7% वोट ही हासिल किए थे। कर्नाटक में भाजपा का गढ़ माने जाने वाले बेंगलुरु में सभी सीट जीत ली हैं।

कभी अमेरिका में डॉक्टरी करते थे चंद्रशेखर, अब 48 साल की उम्र में गुंटूर से हासिल की जीत: मिलिए लोकसभा के सबसे अमीर सांसद से, ₹5705 करोड़ की प्रॉपर्टी

आंध्र प्रदेश के गुंटूर से तेलुगू देशम पार्टी के उम्मीदवार चंद्रशेखर पेम्मासानी इस बार लोकसभा चुनाव जीतने वाले सबसे अमीर उम्मीदवार बन गए हैं। उनकी कुल संपत्ति की कीमत 5705 करोड़ रुपए हैं। इन चुनावों में उन्होंने वाईएसआरसीपी के अपने प्रतिद्वंद्वी वेंकट रोसैया 3.4 लाख से ज्यादा मतों से हराया है।

48 वर्षीय डॉ चंद्र शेखर पेशे से एक डॉक्टर हैं। उन्होंने साल 1999 में डॉ एनटीआर यूनिवर्सिटी से अपनी एमबीबीएस की थी। इसके बाद उन्होंने 2005 में अमेरिका के अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में गीसिंजर मेडिकल सेंटर से इंटरनल मेडिसिन में एमडी की। बाद में वह विदेश में रहने लगे लेकिन अपने मातृभूमि को नहीं भूले।

इस बार उन्होंने भारत के लोकसभा चुनावों में अपनी किस्मत को आजमाया और उसमें वो सफल भी रहे। उन्होंने चुनावों के मद्देनजर अपना जो हलफनामा दायर कराया था उससे उनकी संपत्ति का पता चलता है। इस हलफनामे के अनुसार, उनके पास 55,98,64,80,786 रुपए की चल संपत्ति; 1,06,82,46,752 रुपए की अचल संपत्ति और 57,05,47,27,538 रुपए की कुल संपत्ति है। उन्होंने भारत और अमेरिका में 100 से अधिक कंपनियों और संपत्तियों में निवेश किया हुआ है।

बता दें कि राजनीति में अपनी शुरुआत कर चुके डॉक्टर पेम्मासानी अपने वेंचर्स के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने यूवर्ल्ड की शुरुआत की थी। एक ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म जो बच्चों को विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी करवाता है। इसके अलावा उन्होंने 2020 में अर्न्स्ट एंड यंग एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर अवार्ड जीता था। राजनीति की बात करें तो इस बार उन्होंने टीडीपी में अमरा राजा की जगह ली थी। अमरा राजा ने चुनावों से पहले ही राजनीति में संन्यास लेने की घोषण की थी।

वहीं पेम्मासानी ने कहा था कि वो इन चुनावों को जीतने के लिए सिर्फ ईमानदारी को ही सहारा बनाएँगे और सरकार में आने के बाद सड़क समेत पानी जैसी बुनियादी चीजों पर तमाम चीजों पर काम करेंगे। पुराने इंटरव्यू को देखें तो पता चलता है कि चुनाव जीतने के लिए वह 200 फीसद आश्वस्त थे।

तीसरे कार्यकाल में नया अध्याय लिखने की PM मोदी ने दी गारंटी, कहा- विरोधी मिलकर जितना नहीं जीत पाए उतनी अकेली BJP ने जीती है

लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा की अगुवाई वाली राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) को प्रचंड जीत मिली है। इसके साथ ही भाजपा को ओडिशा विधानसभा चुनाव में भारी जनादेश मिला है, जबकि आंध्र प्रदेश विधानसभा में NDA गठबंधन को भारी जीत मिली है। लगातार तीसरी बार सरकार बनाने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।

दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में मंगलवार (4 जून 2024) की शाम को पार्टी नेताओं को कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने मतगणना के इस दिन को मंगल बताया। उन्होंने कहा, “आज बड़ा मंगल है और इस पावन दिन NDA की लगातार तीसरी बार सरकार बननी तय है। हम सभी जनता-जनार्दन के बहुत आभारी हैं। देशवासियों ने भाजपा पर, NDA पर पूर्ण विश्वास जताया है।”

उन्होंने कहा, “मैं देश के हर मतदाता को, जनता-जनार्दन को विजय के इस पावन पर्व पर आदरपूर्वक नमन करता हूं। मैं देशभर के सभी दलों, सभी उम्मीदवारों का भी अभिनंदन करता हूँ। सभी की सक्रिय भागीदारी के बिना लोकतंत्र की ये विराट सफलता संभव नहीं थी। भाजपा के, NDA के हर कार्यकर्ता साथी को भी मैं हृदय से धन्यवाद करता हूँ।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “2019 में इसी प्रयास पर विश्वास व्यक्त करते हुए देश ने दोबारा प्रचंड जनादेश दिया। इसके बाद NDA का दूसरा कार्यकाल विकास और विरासत की गारंटी बन गया। 2024 में इसी गारंटी के साथ हम जन-जन का आशीर्वाद लेने देश के कोने-कोने में गए। आज तीसरी बार जो आशीर्वाद NDA को मिला है, मैं उसके सामने विनय भाव से नतमस्तक हूँ।”

उन्होंने आगे कहा, “10 वर्ष पहले देश ने बदलाव के लिए हमें जनादेश दिया था। वो समय था, जब देश निराशा की गर्त में डूब चुका था। हमें Fragile Five जैसे शब्दों से नवाजा जाता था, हर दिन अखबारों की हेडलाइन घोटालों से भरी रहती थीं, देश की युवा पीढ़ी अपने भविष्य को लेकर आशंकित हो गई थी। तब देश ने हमें निराशा के गहरे सागर से आशा के मोती निकालने का जिम्मा सौंपा था। हम सभी ने पूरी ईमानदारी से प्रयास किया, काम किया।”

प्रधानमंत्री ने अपनी माँ को याद करते हुए कहा, “आज का यह पल, निजी तौर पर मेरे लिए भी भावुक करने वाला पल है। मेरी माँ के जाने के बाद ये मेरा पहला चुनाव था, लेकिन सच मानिए देश की कोटि-कोटि माताओं-बहनों-बेटियों ने मां की कमी मुझे खलने नहीं दी। मैं पूरे देश में जहाँ-जहाँ भी गया माताओं-बहनों-बेटियों ने अभूतपूर्व स्नेह और आशीर्वाद दिया।”

जोर देकर पीएम मोदी ने कहा, “हमारे विरोधी एकजुट होकर भी उतनी सीटें नहीं जीत पाए, जितनी इस लोकसभा चुनाव में अकेले बीजेपी ने जीती है। मैं देश के कोने-कोने में उपस्थित भाजपा के कार्यकर्ता को कहूँगा, आपकी मेहनत, इतनी गर्मी में आपका बहाया पसीना ये मोदी को निरंतर काम करने की प्रेरणा देता है।”

‘मोदी की गारंटी’ को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “अगर आप (देशवासी) 10 घंटे काम करेंगे तो मोदी 18 घंटे काम करेगा, आप दो कदम चलेंगे तो मोदी चार कदम चलेगा। हम भारतीय मिलकर चलेंगे, देश को आगे बढ़ाएँगे। तीसरे कार्यकाल में देश बड़े फैसलों का एक नया अध्याय लिखेगा और ये मोदी की गारंटी है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “6 दशक बाद देश के मतदाताओं ने एक नया इतिहास रचा है। 6 दशक बाद किसी गठबंधन को, NDA को लगातार तीसरी बार देश की सेवा करने का अवसर दिया है। जनता-जनार्दन के साथ विश्वास का ये अटूट रिश्ता लोकतंत्र की बहुत बड़ी शक्ति है। आपका आशीर्वाद, नए उत्साह, नए उमंग के साथ काम करने की हमारी ऊर्जा है।”

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास सरकार चलाने का लगातार 23 वर्षों का बड़ा अनुभव है, लेकिन पहली बार वो ऐसी गठबंधन सरकार चलाने जा रहे हैं जिसमें भाजपा अल्पमत में होगी। कारण – लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा 240 सीटों पर रुक गई है, यानी उसे सरकार बनाने के लिए 23 अन्य सांसदों की भी ज़रूरत है। हालाँकि, इसमें कोई शक नहीं है कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे या फिर भाजपा की सरकार नहीं बनेगी, क्योंकि NDA के पास पूर्ण बहुमत से कहीं अधिक सीटें आई हैं।

NDA में भाजपा के 2 सबसे बड़े साथी बन कर उभरी है – चंद्रबाबू नायडू की TDP और नीतीश कुमार की JDU. आंध्र प्रदेश की तेलुगुदेशम पार्टी के खाते में जहाँ 16 सीटें आई हैं, बिहार की जनता दल (यूनाइटेड) को 12 सीटें मिली हैं। इन तीनों को मिला कर 268 सीटें होती हैं। इसके बाद 2 बड़े दल हैं – महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिव सेना (शिंदे) जिसने 6 सीटें अपने नाम की हैं, और बिहार में चिराग पासवान की LJP (रामविलास) जिसने 5 सीटों पर विजय की पताका लहराई है।

इस तरह से बहुमत का आँकड़ा पार करने के लिए BJP, TDP और JDU के अलावा भी SHS या LJPRV की ज़रूरत पड़नी ही पड़नी है। अन्य गठबंधन साथियों की बात करें तो ‘अपना दल (सोनेलाल)’ और अजीत पवार की NCP को एक-एक सीटें मिली हैं। कुल माल कर देखें तो NDA को 290 सीटें मिल रही हैं। गठबंधन को बहुमत से 18 अधिक सीटें मिली हैं। लेकिन, जदयू-टीडीपी में से कोई एक भी खिसकती है तो नरेंद्र मोदी के लिए समस्या खड़ी हो सकती है।

यानी, ये एक ऐसी सरकारी बनेगी जहाँ हर एक सांसद की अपनी एक वैल्यू होगी और हर पार्टी की इस गठबंधन में अच्छी हैसियत होगी। भाजपा के बाद NDA के जो दोनों सबसे बड़े दल हैं, उनके नेता कुछ महीनों पहले तक विपक्षी एकता बना रहे थे। चंद्रबाबू नायडू ने 2019 में राज्य-राज्य घूम कर विपक्षी एकता के लिए पहल की थी, 2023 में यही काम नीतीश कुमार ने किया। चंद्रबाबू नायडू की 2019 के लोकसभा और आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों में करारी हार हुई जिसके बाद वो ठंडे पड़ गए, नीतीश कुमार राजद से नाता तोड़ कर वापस भाजपा के साथ आ गए।

हालाँकि, अब स्थिति बदल चुकी है। चंद्रबाबू नायडू की TDP ने आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी YSRCP का सूपड़ा साफ़ कर दिया और 175 में से 134 सीटें अपने नाम कर के पूर्ण बहुमत से डेढ़ गुना अधिक सीटें अपने नाम की है। उसके साथ अभिनेता पवन कल्याण की ‘जन सेना’ भी है, जिसके 21 विधायक हैं। भाजपा 8 सीटें जीती हैं। इस हिसाब से देखें तो चंद्रबाबू नायडू अपने राज्य में काफी मजबूत हो चुके हैं। इधर नीतीश कुमार के स्वागत के लिए राजद हमेशा तैयार बैठा रहता है।

ऐसे में चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार पर भरोसा करना थोड़ा कठिन हो सकता है क्योंकि दोनों पिछले 5 दशकों से राजनीति करते रहे हैं और विभिन्न गठबंधनों के साथ काम कर चुके हैं, विभिन्न विचारधारा के नेताओं के करीबी रहे हैं और अपने-अपने राज्य में मजबूत हैं। चिराग पासवान के साथ 2020 के विधानसभा चुनाव में बात नहीं बन पाई थी और वो अकेले लड़े थे। उनके पिता रामविलास पासवान सत्ताधारी लहर के हिसाब से रुख बदलने के कारण ‘राजनीति के मौसम वैज्ञानिक’ कहे जाते रहे हैं।

वहीं एकनाथ शिंदे की बात करें तो वो हाल तक शिवसेना में थे और पार्टी तोड़ कर भाजपा के साथ आए और उन्हें मुख्यमंत्री पद से नवाज़ा गया। इस हिसाब से देखें तो इनमें से कोई भी ऐसा नेता नहीं है, जो पुराने समय से लगातार भाजपा के साथ रहा हो। बिहार, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के इन चारों दलों को नरेंद्र मोदी को साथ लेकर चलना होगा। ये अपने-आप में एक चुनौती होगी, क्योंकि अनुभवी प्रधानमंत्री के लिए ये इस तरह का पहला अनुभव होगा। हालाँकि, भाजपा के लिए नहीं।

हमें अटल बिहारी वाजपेयी का दौर याद है जिन्होंने अपनी पार्टी की 200 से भी कम सीटें होने के बावजूद पूरे 5 साल तक सरकार चलाई। 1999 में भाजपा को 182 सीटें मिली थीं, लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी ने 20 से भी अधिक पार्टियों के साथ तालमेल कर सरकार चलाई। इसी तरह 2004 में कॉन्ग्रेस पार्टी को 145 सीटें मिली थीं और 2009 में पार्टी 206 सीटों पर रुक गई थी। इसके बावजूद पार्टी ने UPA के बैनर तले गठबंधन बना कर पूरे 10 साल सरकार चलाई, मनमोहन सिंह को ‘कठपुतली PM’ बना कर सोनिया गाँधी ने रखा।

2001 में नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे तो उससे पहले 1998 के चुनाव में भाजपा को 182 में से 117 सीटें प्राप्त हुई थीं, वहीं 2002 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने गुजरात विधानसभा चुनाव लड़ा तो उसे पिछली बार से 10 अधिक सीटें यानी 127 सीटें प्राप्त हुईं। 2007 में पार्टी ने फिर से 117 सीटें जीतीं। वहीं गुजरात का अंतिम चुनाव जो नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लड़ा गया, उसमें 2012 में भाजपा ने 115 सीटें अपने नाम की। इसके बाद वो केंद्र की राजनीति में आ गए।

2014 में भाजपा ने 282 और 2019 में 303 सीटें अपने नाम की, जो कि बहुमत के 272 के आँकड़े से सुविधाजनक रूप से अधिक था। इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 वर्ष जो सरकार चलाई, उसमें राम मंदिर निर्माण से लेकर अनुच्छेद-370 और ‘तीन तलाक’ को निरस्त किए जाने जैसे बड़े फैसले हुएनई शिक्षा नीति बनी और नया दंड-कानून बना। विकास और जन-कल्याणकारी योजनाओं के अलावा कई नीतिगत फैसले हुए जो भाजपा और RSS के एजेंडे में वर्षों से शामिल थे।

संभावना जताई जा रही थी कि तीसरी बार सत्ता में लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार UCC (समान नागरिक संहिता), NRC (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स), जनसंख्या नियंत्रण और वक्फ बोर्ड को निरस्त किए जाने जैसे कानून बनाएगी। हालाँकि, अब इस तरह के फैसले जो भाजपा के कोर एजेंडे में शामिल थे, वो लागू हो पाएँगे या नहीं इस पर शक है। क्या UCC या NRC को सहयोगी दल स्वीकार करेंगे? विपक्षी दल हर फैसले को हिन्दू-मुस्लिम की नज़र से देखेंगे और सहयोगी दलों पर दबाव बनाएँगे कि वो बयान दें, बदले में सहयोगी दल सरकार पर दबाव बना सकते हैं।

जब नरेंद्र मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने थे तब इस पर शक जताया गया था कि क्या वो विदेश में कुशलता से भारत का प्रतिनिधित्व कर पाएँगे? इसके बाद उन्होंने जिस तरह से विदेशी राष्ट्रों में NRC भारतीयों को एकजुट किया और वहाँ सभाएँ की, अमेरिका-अरब जैसे देशों के राष्ट्राध्यक्षों को अपना मित्र बनाया, संयुक्त राष्ट्र में भारत मजबूत हुआ, इजरायल-फलिस्तीन और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी स्थितियों में बन सिर्फ भारतीयों बल्कि अन्य देशों के नागरिकों को भी सुरक्षित निकला गया, 100 से अधिक देशों को कोरोना वैक्सीन दी गई, पीएम मोदी की विदेश नीति की दुनिया कायल हो गई।

इसकी पूरी संभावना है कि गठबंधन सरकार चलाने में भी नरेंद्र मोदी उसी तरह खरे उतरें, लेकिन सवाल हिन्दुओं और खासकर भाजपा के उन कोर एजेंडों का है जिन पर आगे काम होना है। गठबंधन साथी किस हद तक सरकार में हस्तक्षेप करते हैं, ये इस पर निर्भर करेगा। 2008 में जब UPA सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामदलों ने अमेरिका से परमाणु करार का विरोध करते हुए कॉन्ग्रेस से समर्थन वापस लिया था, तब सपा ने सरकार बचाई थी। क्या भाजपा के साथ भी उस तरह की स्थिति ा सकती है? आएगी तो पार्टी उससे कैसे निपटेगी?

इन सबका जवाब समय के गर्भ में छिपा है। राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी जैसे अनुभवी नेतागण भी हैं मोदी सरकार में, जिन्हें गठबंधन सरकारों का पुराना अनुभव है। राजनाथ सिंह तो अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में भी मंत्री रहे हैं, नितिन गडकरी महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा सरकार में मंत्री थे। भाजपा अपने इन संसाधनों का इस्तेमाल करेगी। विकास और जन-कल्याण की नीतियाँ यूँ ही चलती रहेगी, सिर्फ नीतिगत फैसलों में अड़चनें आ सकती हैं।

मसलन, मोदी सरकार ने शत-प्रतिशत गाँवों का विद्युतीकरण किया, करोड़ों महिलाओं को गैस सिलिंडर मिला, हर घर नल सुविधा पहुँचाई गई, चंद्रयान-3 जैसा मिशन सफल हुआ और गगनयान की तैयारी चल रही है, कोरोना वैक्सीन की 200 करोड़ से अधिक खुराक दी गई, 80 करोड़ लोगों को राशन मिलता है, करोड़ों शौचालय बने, करोड़ों लोगों को घर मिला, देश की सुरक्षा सुदृढ़ हुई और पाकिस्तान पर एयर व सर्जिकल स्ट्राइक्स हुए, हजारों स्टार्टअप्स खड़े हुए – ये सब तो चलता रहेगा। बाकी UCC, जनसंख्या नियंत्रण, NRC और वक्फ बोर्ड को निरस्त किए जाने जैसे फैसले शायद ही हों।

इसके अलावा न्यायिक सुधारों को लेकर भी मामला अटक सकता है, कॉलेजियम सिस्टम के तहत जज ही जज को चुनते हैं। काशी और मथुरा में हिन्दुओं की जो लड़ाई चल रही है, वो कहाँ तक पहुँचेगा वो देखने लायक होगा। ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का एजेंडा था ताकि देश पर बार-बार पड़ने वाले चुनावी खर्च को कम किया जा सके, उसमें भी अड़चन आएगी। PoK (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) को वापस लाने की जो बातें हो रही थीं, क्या उस पर बात आगे बढ़ेगा? क्या वर्शिप एक्ट हटाया जाएगा, जिसके तहत काशी-मथुरा का अतिक्रमण नहीं हट पा रहा है?

जिस दिल्ली में केजरीवाल ने कहा- मुझे जेल जाने से बचाना है तो AAP को जिताएँ, वहाँ INDI का सूपड़ा साफ: जानिए और किन-किन राज्यों में BJP ने किया क्लीन स्वीप

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे आ चुके हैं। बीजेपी की अगुवाई में एनडीए ने लगातार तीसरी बार पूर्ण बहुमत प्राप्त किया है। लगातार 10 साल सत्ता में रहने के बावजूद एनडीए को तीसरी बार पूर्ण बहुमत का प्राप्त होना जनमानस का स्पष्ट संदेश है। इस बीच, बीजेपी ने कई राज्यों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। बीजेपी ने मध्य प्रदेश में अपना चुनावी प्रदर्शन बेहतर से भी बेहतरीन किया है। ऐसे कई राज्यों में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन ने एनडीए को तीसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में मदद की है। आइए, आपको बताते हैं कि किन-किन राज्यों में बीजेपी ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है।

मध्य प्रदेश : भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए सभी 29 लोकसभा सीटों पर प्रचंड जीत हासिल की है। लोकसभा चुनाव के इतिहास में सबसे बड़ी जीत इस बार इंदौर में मिली है। इंदौर में बीजेपी प्रत्याशी शंकर लालवानी ने 11.75+ लाख वोटों से जीत हासिल किया है। यही नहीं, इस बार बीजेपी ने कॉन्ग्रेस और कमलनाथ परिवार का गढ़ मानी जाने वाली छिंदवाड़ा की सीट भी फतह कर ली है।

अरुणाचल प्रदेश : भारत में सूर्य की किरणें जिस राज्य में सबसे पहले पड़ती हैं, वो राज्य है अरुणाचल प्रदेश। इस राज्य में 2 लोकसभा सीटें हैं और दोनों लोकसभा सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवारों को प्रचंड जीत हासिल हुई है। अभी दो दिन पहले ही 2 जून 2024 को आए विधानसभा चुनाव के नतीजों में भी बीजेपी ने अरुणाचल प्रदेश में क्लीनस्वीप करते हुए 2 तिहाई से भी अधिक सीटों पर जीत हासिल की थी।

त्रिपुरा : कभी कम्युनिष्टों का गढ़ रहा त्रिपुरा अब भगवा ध्वज उठाए हुए है। त्रिपुरा की दोनों लोकसभा सीटों पर बीजेपी को प्रचंड जीत मिली है। यहाँ विपक्षी दल कोई खास चुनौती तक पेश नहीं कर पाए।

उत्तराखंड : देवभूमि उत्तराखंड में 5 लोकसभा सीटें हैं। उत्तराखंड की पाँचों लोकसभा सीटों पर एक बार फिर से बीजेपी ने क्लीवस्वीप किया है। बीजेपी के हरेक उम्मीदवार को प्रचंड जीत मिली है। कॉन्ग्रेस पार्टी का कोई उम्मीदवार किसी भी सीट पर टक्कर देने की स्थिति में नहीं दिखा। यही वजह रही कि चुनाव प्रचार के दौरान भी कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं ने उत्तराखंड से दूरी बनाए रखी, मानों उन्हें पता हो कि हर बार की तरह इस बार भी जनता कॉन्ग्रेस को भाव नहीं देने वाली।

हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश राज्य की विधानसभा में कॉन्ग्रेस की सरकार है। इसके बावजूद हिमाचल की सभी 4 लोकसभा सीटों पर बीजेपी को प्रचंड जीत मिली है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ ही मंडी की सीट से कंगना रनौत तक ने बड़े अंतर से जीत हासिल की है। हिमाचल प्रदेश में बीजेपी ने अपने प्रदर्शन को सुधारा है।

अंडमान & निकोबार द्वीप समूह : देश के सुदूर दक्षिण-पूर्वी द्वीपीय केंद्रशासित प्रदेश की एकमात्र लोकसभा सीट पर बीजेपी को प्रचंड जीत मिली है। अंडमान & निकोलबार द्वीप समूह पर भी भगवा लहरा रहा है।

दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली में बीजेपी ने पिछले दो चुनावों में भी क्लीन स्वीप किया था। दिल्ली में बीजेपी द्वारा क्लीनस्वीप की हैट्रिक लगा दी गई है। यहाँ बीजेपी को रोकने के लिए कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी ने मिलकर जोर लगाया। आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के जेल में बंद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तो जनता से यहाँ तक अपील की थी कि अगर उन्हें जेल जाने से बचाना है, तो आम आदमी पार्टी को जिताना होगा। इसके बावजूद दिल्ली में विपक्षी दलों की सभी कोशिशों को ध्वस्त करते हुए बीजेपी ने सभी सातों सीटों पर जीत दर्ज की है।

3 राज्यों में शानदार जीत, बस एक कदम पीछे रह गई बीजेपी

गुजरात : लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी के विजय रथ को गुजरात में रोकने की कोशिश कर रहे कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी ने यहाँ भी हाथ मिला। इसके बावजूद दोनों ही दलों को असफलता का मुँह देखना पड़ा। गुजरात में बीजेपी ने गुजरात की 26 में से 25 लोकसभा सीटों पर प्रचंड जीत हासिल की। कॉन्ग्रेस को बनासकाँठा(सुरक्षित) सीट से एकमात्र जीत मिली, वहीं 2 सीटों पर लड़ी आम आदमी पार्टी को निराशा ही हाथ लगी।

छत्तीसगढ़ : बीजेपी ने छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों में से 10 पर प्रचंड जीत हासिल की। कॉन्ग्रेस को सिर्फ एक सीट पर जीत मिली। कोरबा सीट से कॉन्ग्रेस की प्रत्याशी को जीत मिली, बाकी की सभी 10 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता भूपेश बघेल को भी हार झेलनी पड़ी।

ओडिशा में बीजेपी का ऐतिहासिक प्रदर्शन : भारतीय जनता पार्टी ने ओडिशा में शानदार प्रदर्शन किया है। विधानसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत तो मिला ही, लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। ओडिशा की 21 लोकसभा सीटों में बीजेपी ने 19 सीटों पर जोरदार जीत दर्ज की है। ओडिशा में कॉन्ग्रेस और बीजेडी को महज 1-1 सीटों पर जीत मिली है।

इन राज्यों के अलावा भी बीजेपी ने कई राज्यों में शानदार प्रदर्शन किया है। फिलहाल बीजेपी की अगुवाई में एनडीए ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बहुमत से अधिक संख्या में सीटों को हासिल किया है। जल्द ही इस बात की घोषणा हो जाएगी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किस तारीख को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे।

लगातार तीसरी बार ट्रिपल डिजिट में नहीं पहुँच पाई कॉन्ग्रेस, फिर भी ‘राजपरिवार’ की खुशी किला फतह करने जैसी: नतीजों के बाद भी नहीं सुधर रहा विपक्ष

देश के 2024 लोकसभा चुनावों का परिणाम स्पष्ट हो गया है। भारतीय जनता पार्टी इन चुनावों में देश की सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। उसकी सीटें इस बार 240-45 रही हैं। NDA गठबंधन को देश ने स्पष्ट बहुमत दिया है। दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस की सीटें भी इस बार बढ़ी हैं, वह इस बार 98 सीट पाने में सफल रही है। भाजपा समर्थक जहाँ स्पष्ट बहुमत ना पाने पर चिंतित हैं तो वहीं कॉन्ग्रेस 100 सीट भी ना पाकर जोड़तोड़ की राजनीति में लग गई है।

भाजपा की सीट घटीं पर जीत अब भी बड़ी

भाजपा की इस लोकसभा चुनाव में सीटें घट गई हैं। वह 303 से 240 पर आ गई है, यह सत्ता में दस वर्ष रहने के बाद हुआ है। यह बात सही है कि यह परिणाम उसके अनुमानों के अनुसार नहीं रहा। उसे जहाँ अकेले दम पर बड़े बहुमत की उम्मीद थी, वहीं उसके गठबंधन को बहुमत मिला। लेकिन सत्ता में दस वर्षों तक रहने वाली किसी पार्टी के लिए यह प्रदर्शन खराब नहीं कहा जा सकता। भाजपा का यह प्रदर्शन अभूतपूर्व है और वह तीसरी बार सत्ता में लौटने में सफल रही है। यह कारनामा कर पाना ही अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

यदि आप 2014 को याद करें तो कॉन्ग्रेस 206 सीटों से 44 सीटों पर आ गई थी। वह विपक्ष का दर्जा नहीं ले पाई थी। ऐसे में भाजपा का सत्ता में लौटना ही बड़ी बात है। भाजपा को 2014 और 2019 जैसा बहुमत इस बार लोकसभा चुनावों में नहीं मिला लेकिन उसके गठबंधन NDA को साफ़ बहुमत जनता ने दिया है।

NDA का तीसरी बार सरकार में लौटना दिखाता है कि देश की जनता अभी भी उसमें विश्वास रखती है और सरकार के लिए उसे सबसे उपयुक्त मानती है। भाजपा इससे पहले 2014 और 2019 में भले ही अकेले दम पर बहुमत पाई हो लेकिन उसने सरकार को हमेशा से सहयोगियों के साथ मिलकर चलाया है। देश में चुनाव पूर्व के एक संयुक्त गठबंधन की राजनीति को भी भाजपा ने 1990 के दशक से ही बढ़ाया है।

कॉन्ग्रेस हारी पर दंभ जीत जैसा

वहीं दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस को देश ने एक बार फिर नकार दिया है। उसे देशवासियों ने भाजपा के विकल्प के रूप में मौका नहीं दिया। कॉन्ग्रेस की 2024 लोकसभा चुनावों में सीटें जरूर बढ़ी हैं लेकिन वह फिर से तीन अंकों वाली सँख्या में नहीं पहुँच सकी। मध्य प्रदेश और दिल्ली में उसका खाता नहीं खुल सका। इन सबके बाद भी कॉन्ग्रेस नेताओं की भावभंगिमा जीते हुए भाजपा नेताओं से भी अधिक जश्न वाली है। सत्ता में ना आने की समीक्षा करने की जगह राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी, मल्लिकार्जुन खरगे और प्रियंका गाँधी इसे अपनी बड़ी जीत की तरह दिखा रहे हैं।

इन चारों नेताओ की एक तस्वीर सामने आई है, जिसमें यह अपनी करारी हार को जीत तरह पेश कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस के नेता 100 सीटों से भी कम जीतने के बाद भी दंभ में हैं और इसे बड़ी जीत बताने में विश्वास कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार बनाने को लेकर तक दावा कर दिया। जनता के विपक्ष में बैठने में फैसले को स्वीकार करने की बजाय उन्होंने जोड़तोड़ की राजनीति करने का संकेत अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया।

कॉन्ग्रेस की इसी दंभ भरी राजनीति के चलते वह देश के 3 राज्यों में सिमट गई है। उसे लोकसभा में भाजपा जैसी क्लीन स्वीप वाली सफलताएँ राज्यों में नहीं मिल रही और उसका संगठन भी कमजोर होते जा रहा है। लेकिन उसी परिवारवादी राजनीति की यह मजबूरी है कि वह इसे भी राहुल गाँधी की जीत की तरह पेश करे ताकि उनके नेतृत्व पर प्रश्न ना उठें।

विपक्ष की भूमिका से न्याय करे कॉन्ग्रेस

कॉन्ग्रेस को 2024 लोकसभा चुनाव में एक बार फिर विपक्ष में बैठने का आदेश मिला है। उसे 2014 और 2019 में यही जनादेश मिला था लेकिन उसने इस भूमिका के साथ न्याय नहीं किया। लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में विपक्ष की बड़ी भूमिका होती है। कॉन्ग्रेस ने इस भूमिका को निभाने में कोताही बरती है और विपक्ष रहते हुए देश की तरक्की में भागीदार बनने की जगह अड़चने डालने का प्रयास किया है। कॉन्ग्रेस ने इस दौरान अपना एजेंडा चलाया है।

वह कई बार देश विरोधी ताकतों के साथ खड़ी दिखाई दी है। वह पीएम मोदी और भाजपा के विरोध में कई बार राष्ट्र विरोध तक पहुँची है। चाहे उसके नेताओं का सेना प्रमुख को गुंडा कहना हो या फिर सर्जिकल स्ट्राइक पर प्रश्न उठाना। इन घटनाओं ने उसके सशक्त विपक्ष होने की साख पर प्रश्न खड़े किए हैं। उसके इन स्टैंड के कारण वह चीन और पाकिस्तान की भाषा बोलते दिखाई दी है। उसकी जीत को लेकर भी पाकिस्तान से समर्थन आता रहा है।

तीसरी बार भी विपक्ष में बैठने के सन्देश को कॉन्ग्रेस स्वीकार करने की जगह वह अपनी विपक्ष की जिम्मेदारी से भाग रही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष खरगे ने साफ़ किया कि वह सहयोगियों से सरकार बनाने को लेकर बात करेंगे जो कि दिखाता है कि वह पुनः तोड़फोड़ वाली राजनीति में विश्वास कर रही है।

इसके अलावा यह भी सूचना आई कि INDI गठबंधन की तरफ से नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू से शरद पवार ने सम्पर्क साधा है। हालाँकि, इन खबरों का खंडन हुआ लेकिन राजनीति में ऐसी खबरें और उनके खंडन को पूरी तरह से सच और झूठ नहीं मानना चाहिए। राजनीति में शब्दों का कहने से अधिक एक्शन में मतलब होता है।

भाजपा की सीटें घटी हैं, यह बात सत्य है लेकिन इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि देश की जनता ने कॉन्ग्रेस को अपना विकल्प माना है। स्थानीय चुनावी कारणों से भाजपा के प्रदर्शन में अंतर जरूर आया है लेकिन जनादेश उसी के पास है। पीएम मोदी, जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गाँधी के बाद तीसरे ऐसे नेता होने जा रहे हैं जो तीन बार प्रधानमंत्री बनेंगे। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, ऐसे में कॉन्ग्रेस का अतिउल्लास दिखाना काफी भौंडा लगता है।

इस स्नेह-आशीर्वाद के लिए अपने परिवारजनों को नमन करता हूँ: नतीजों पर सामने आई PM मोदी की पहली प्रतिक्रिया, ओडिशा-आंध्र में जीत पर दी बधाई

लोकसभा चुनाव 2024 की मतगणना जारी है। खबर लिखे जाने तक भाजपा 240 सीटों पर आगे चल रही थी। भाजपा की अगुवाई वाली NDA गठबंधन को बहुमत मिल गया है। सामने आए नतीजों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (4 जून 2024) को पहली बार प्रतिक्रिया दी। उन्होंने देश की जनता को धन्यवाद दिया। इसके साथ ही ओडिशा और आंध्र प्रदेश विधानसभा में शानदार जीत के लिए भी बधाई दी।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने X पोस्ट में कहा, “देश की जनता-जनार्दन ने एनडीए पर लगातार तीसरी बार अपना विश्वास जताया है। भारत के इतिहास में ये एक अभूतपूर्व पल है। मैं इस स्नेह और आशीर्वाद के लिए अपने परिवारजनों को नमन करता हूँ। मैं देशवासियों को विश्वास दिलाता हूँ कि उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हम नई ऊर्जा, नई उमंग, नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ेंगे।”

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, “सभी कार्यकर्ताओं ने जिस समर्पण भाव से अथक मेहनत की है, मैं इसके लिए उनका हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, अभिनंदन करता हूँ।” बता दें कि लोकसभा में बहुमत के लिए 272 सांसदों की जरूरत पड़ती है। खबर लिखे जाने तक NDA गठबंधन को 290 सीटें मिली हैं।

ओडिशा विधानसभा चुनाव में जीत पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “ओडिशा का धन्यवाद! यह सुशासन और ओडिशा की अनूठी संस्कृति का जश्न मनाने की एक शानदार जीत है। भाजपा लोगों के सपनों को पूरा करने और ओडिशा को प्रगति की नई ऊँचाइयों पर ले जाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। मुझे अपने सभी मेहनती पार्टी कार्यकर्ताओं पर उनके प्रयासों के लिए बहुत गर्व है।”

बता दें कि ओडिशा विधानसभा में कुल 147 सीटें हैं। बहुमत के लिए 74 का आँकड़ा चाहिए। मतगणना में भाजपा को 78 मिली हैं। वहीं, मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की अध्यक्षता वाली सत्ताधारी बीजू जनता दल (बीजेडी) को 51 मिली हैं। कॉन्ग्रेस को 14 सीटें और सीपीएम को एक सीट मिली है, जबकि तीन निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए हैं।

आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा, “आंध्र प्रदेश ने एनडीए को असाधारण जनादेश दिया है! मैं राज्य के लोगों को उनके आशीर्वाद के लिए धन्यवाद देता हूँ। मैं एन चंद्रबाबू नायडू गारू, पवन कल्याण गारू और तेलुगु देशम पार्टी, जनसेना पार्टी और आंध्र प्रदेश भाजपा के कार्यकर्ताओं को इस शानदार जीत के लिए बधाई देता हूँ। हम आंध्र प्रदेश की सर्वांगीण प्रगति के लिए काम करेंगे और आने वाले समय में राज्य की समृद्धि सुनिश्चित करेंगे।”

बता दें कि लोकसभा चुनावों के साथ ही ओडिशा और आंध्र प्रदेश विधानसभा के भी चुनाव हुए हैं। आंध्र प्रदेश में विधानसभा की कुल 175 सीटें हैं। यहाँ बहुमत के लिए 88 सीटों की जरूरत है। यहाँ एनडीए गठबंधन को 163 सीटें मिली हैं। तेलुगु देशम पार्टी को 134, जनसेना पार्टी को 21 और भाजपा को 8 सीटें मिली हैं। वहीं, सत्ताधारी YSR कॉन्ग्रेस को सिर्फ 12 सीटें मिली हैं।

प्रवीण नेट्टारू की हत्या में शामिल रियाज को NIA ने मुंबई एयरपोर्ट से पकड़ा, विदेश भाग रहा था: BJYM नेता को इस्लामी कट्टरपंथियों ने कुल्हाड़ी से काट डाला था

कर्नाटक में भाजपा के युवा नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्या के मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने रियाज नाम के एक आरोपित को गिरफ्तार किया है। वह हत्या के बाद विदेश भाग गया था। उसके वापस आने के बाद NIA ने गिरफ्तार कर लिया। वह पकड़े जाने के समय देश से बाहर भागने का प्रयास कर रहा था।

NIA ने मंगलवार (4 जून, 2024) को युसूफ हरल्ली उर्फ़ रियाज को मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया। वह इस दौरान देश से बाहर जाने की कोशिश कर रहा था। रियाज PFI का कार्यकर्ता था और प्रवीण नेट्टारू के हत्या की योजना बनाने वाले को शरण दी थी और हथियार जुटाने में भी उसकी मदद की थी।

रियाज की गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में गिरफ्तार आरोपितों की संख्या 19 हो गई है, इस मामले में NIA ने चार्जशीट में 21 लोगों को आरोपित बनाया है। रियाज अपने हैंडलर अब्दुल रहमान के कहने पर भारत लौटा था। अब्दुल रहमान इस मामले में अब भी फरार है।

इससे एक माह पहले ही NIA ने इस मामले में मुस्तफा पायचार और मंसूर पाशा को पकड़ा था। पायचार इस मामले में मुख्य साजिशकर्ता था। उसने इस पूरे मामले के लिए हमलावरों की टीम इकट्ठा की थी, हमले के बाद वह भी देश से बाहर अपने साथियों के साथ भाग गया था। पकड़े गए यह सभी लोग प्रतिबंधित आतंकी संगठन PFI के सदस्य थे।

गौरतलब है कि 26 जुलाई 2022 को बेल्लारे में हमलावरों ने भाजपा नेता प्रवीण नेट्टारू को कुल्हाड़ी से उस वक़्त काट दिया था, जब वे दुकान बंद कर अपने घर जा रहे थे। बाद में इस मामले की जाँच स्टेट पुलिस से NIA को सौंप दी गई थी। प्रवीण नेट्टारू की हत्या उदयपुर में कन्हैयालाल की हत्या का विरोध करने की वजह से हुई थी। PFI अब तक इस मामले में 19 आरोपितों को पकड़ चुकी है। इस मामले की जाँच के बाद खुलासा हुआ था कि प्रवीण नेट्टारू की हत्या को लेकर PFI ने लम्बी योजना बनाई थी, उसके निशाने पर और भी लोग थे।