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‘रीढ़विहीन लोग जो अपने जुबान पर कायम नहीं रहते’: ‘पंचायत’ वाले ‘विधायक जी’ ने अनुराग कश्यप के धोखे को किया याद, पंकज त्रिपाठी पर भी बरसे

अगर आपने ‘पंचायत’ का तीनों सीजन देखा है तो आपको ‘चंद्रकिशोर सिंह’ (चंदू) का किरदार याद होगा। अरे, वही अपने ‘विधायक जी’। इस किरदार को बिहार के सहरसा में जन्मे पंकज झा ने निभाया है। पंकज झा का ‘पंचायत’ में किरदार कॉमेडी वाला है, जिसे गंभीर रह कर कॉमेडी करनी है। अब उन्होंने बॉलीवुड के एक अन्य अभिनेता पंकज त्रिपाठी और निर्देशक अनुराग कश्यप पर निशाना साधा है। पंकज त्रिपाठी ‘मिर्जापुर’ सीरीज से शोहरत बटोर चुके हैं, वहीं अनुराग कश्यप ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ जैसी फिल्म सीरीज बना चुके हैं।

पंकज झा ने कहा है कि कुछ अभिनेता दूसरे बड़े अभिनेता की चप्पल चुराने के अपने ‘संघर्ष’ का भी महिमामंडन करते हैं। उनका इशारा पंकज त्रिपाठी की तरफ था, जिन्होंने बताया था कि कैसे संघर्ष के दिनों में जब वो किसी होटल में काम करते थे तो उन्होंने मनोज वाजपेयी की चप्पल अपने पास रख ली थी क्योंकि वो उनके पसंदीदा अभिनेता थे। पंकज झा ने इस दौरान पीठ पीछे राजनीति करने वालों पर भी निशाना साधा और कहा कि ऐसी चीजों से वो टूटने वाले नहीं हैं।

पंकज झा ने कहा कि उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनके पीठ पीछे कौन लोग क्या बात कर रहे हैं, ऐसे लोग डरपोक होते हैं क्योंकि वो सामने ये बातें नहीं कर सकते। वहीं उन्होंने अनुराग कश्यप की बात करते हुए कहा कि ‘सत्य’ और ‘गुलाल’ जैसी फ़िल्में सिर्फ अभिनेता ही नहीं, बल्कि निर्देशक भी बनाती हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ इतने डरपोक और रीढ़विहीन लोग हैं जो अपनी जुबान पर टिके नहीं रह सकते। बकौल पंकज झा, उन्हें पता चला कि निर्देशक खुद इतनी बुरी हालत में थे कि उन्हें काम नहीं मिल रहा था और एक साथ 36 जगह काम कर रहे थे।

अनुराग कश्यप की फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ के दिनों को याद करते हुए पंकज झा ने बताया कि जब वो शूटिंग के लिए पटना गए हुए थे तो वहाँ उन्हें अनुराग कश्यप का मैसेज मिला कि ‘आ जाओ।’ उन्होंने बताया कि पंकज झा ने जवाब दिया कि वो शूट के बीच में हैं और 2-3 दिन में आएँगे। बाद में उन्हें पता चला कि इस रोल में किसी और को कास्ट कर लिया गया है। उस रोल में पंकज त्रिपाठी को ले लिया गया। हालाँकि, झा कहते हैं कि उन्हें कश्यप से कोई शिकायत नहीं।

खालिस्तानी अमृतपाल सिंह खडूर साहिब में आगे, जेल से लड़ रहा है चुनाव: शुरुआती रुझानों के बाद बोले नेटीजन्स- शर्म आनी चाहिए

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुए हैं, लेकिन अभी तक के रुझानों में एनडीए गठबंधन बहुमत पाकर सरकार बनाती नजर आ रही है। इस बीच कुछ लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहाँ कुछ प्रत्याशियों की बढ़त हैरान करने वाली दिख रही है।

इसमें एक नाम खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह का है। अमृतपाल ने पंजाब के खडूर साहिब से लोकसभा सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन किया था। अब खबर है कि वो कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों से ज्यादा वोट पाकर लीड कर रहा है।

ताजे आँकड़ों के अनुसार, असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद अमृतपाल सिंह इस समय बड़ी मार्जिन से आगे चल रहा है। चुनाव आयोग की साइट के मुताबिक अभी अमृतपाल सिंह को 241540 वोट मिले है। वहीं कॉन्ग्रेस के कुलबीर सिंह जीरा और आम आदमी पार्टी ललजीत सिंह भुल्लर पीछे जा रहे हैं। ये नतीजे देख लोग कह रहे हैं कि मतदाताओं को शर्म आनी चाहिए कि वो खालिस्तान समर्थकों को वोट दे रहे हैं।

अमृतपाल सिंह का रुझानों में आगे जाना इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि उसने ये चुनाव असम की डिब्रूगढ़ जेल में रहते हुए लड़ा है। ‘वारिस पंजाब दे’ का मुखिया खालिस्तानी अमृतपाल सिंह पर अजानला पुलिस थाने पर हमला करके फरार होने का आरोप लगा हुआ है। पुलिस ने उसे काफी मशक्कत के बाद गिरफ्तार किया था।

गौरतलब है कि अमृतपाल सिंह का जन्म जल्लूपुर खेड़ा गाँव में 1993 में हुआ था। 12 क्लास पास करने के बाद वो दुबई गया। वहाँ उसे ट्रांसपोर्ट का बिजनेस किया और 2022 में दीप सिद्धू की मौत के बाद वो ‘वारिस पंजाब दे’ का नया प्रमुख बन गया। इसी के बाद से वो प्रशासन को चुनौती देने लगा था और 2023 में थाने पर हमला किया था।

24 साल बाद ओडिशा, 5 साल बाद आंध्र प्रदेश परिवर्तन की राह पर: चंद्रबाबू की आँधी में उड़ गए जगनमोहन, नवीन बाबू से सत्ता छीनती दिख रही BJP

लोकसभा चुनाव 2024 के साथ ही 4 राज्यों में विधानसभा चुनाव भी कराए गए थे। इनमें से 2 राज्यों सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए ने विपक्षी दलों का सूपड़ा साफ कर दिया, तो बाकी बचे दो राज्यों, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 जून 2024 को आ रहे हैं। इन दोनों ही राज्यों में मौजूदा सत्ताधारी पार्टियों को झटका लगा है।

आंध्र प्रदेश में एनडीए ने सत्ताधारी पार्टी YSRCP का सूपड़ा साफ कर दिया है। आंध्र प्रदेश में बीजेपी-जनसेना पार्टी और तेलुगू देशम पार्टी क्लीन स्वीप करते हुए सरकार बना रही है। इसके साथ ही ओडिशा में लंबे समय सत्ता में बने बीजेडी को बीजेपी सत्ता से बाहर करती दिख रही है। अभी तक के आँकड़ों में बीजेपी ओडिशा में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार अपने दम पर बनाती दिख रही है। ये आँकड़े दोपहर 12.30 बजे तक के है।

आंध्र प्रदेश में एनडीए का कमाल, YSRCP का सूपड़ा साफ

आंध्र प्रदेश में जगनमोहन रेड्डी की सत्ताधारी पार्टी YSRCP का सूपड़ा साफ होते दिख रहा है। यहाँ बीजेपी, तेलुगू देशम पार्टी और जनसेना पार्टी तीन चौथाई से भी अधिक सीटों पर जीत दर्ज कर रही हैं। आंध्र प्रदेश की कुल 175 विधानसभा सीटों में तेलुगू देशम पार्टी 131 सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज कर रही है। जनसेना पार्टी 20 सीटों पर आगे है। बीजेपी को 7 सीटों पर बढ़त मिलती दिख रही है, तो YSRCP को महज 17 सीटें मिलती दिख रही हैं। आंध्र प्रदेश में कॉन्ग्रेस पूरी तरह से गायब हो गई है। वो एक भी सीट पाती नहीं दिख रही।

ओडिशा में नवीन पटनायक को झटका, बीजेपी आगे

ओडिशा में साल 2000 से मुख्यमंत्री पद पर टिके नवीन पटनायक को इस चुनाव में सबसे बड़ा झटका लगता दिख रहा है। ओडिशा में बीजेपी अपने दम पर पूर्ण बहुमत पाती दिख रही है। ओडिशा की 147 विधानसभा सीटों में से 74 पर बीजेपी आगे है, तो बीजेडी सिर्फ 57 सीटों पर आगे है। कॉन्ग्रेस 13 विधानसभा सीटों पर आगे है, तो 2 निर्दलीय और एक सीपीआई(एम) का उम्मीदवार आगे है। यहाँ बहुमत का आँकड़ा भी 74 सीटों का ही है।

जिस हिन्दू मालिक ने विश्वास कर के दी नौकरी उसी की बेटी से किया रेप, अश्लील वीडियो बनाकर वसूले हजारों रुपए भी, लखनऊ पुलिस ने दानिश को दबोचा

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दानिश खान नाम के एक नौकर द्वारा अपने हिंदू मालिक की बेटी से रेप करने का मामला सामने आया है। दानिश ने पीड़िता का अश्लील वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया और पैसों की उगाही भी की। पुलिस ने इस मामले में 31 मई 2024 को FIR दर्ज की थी और अब आरोपित दानिश खान को 2 जून 2024 को गिरफ्तार कर लिया।

यह मामला लखनऊ के पूर्वी जोन में आने वाले थाना क्षेत्र पीजीआई का है। 31 मई को हिन्दू परिवार की पीड़िता ने पुलिस में तहरीर दी। तहरीर में महिला ने बताया कि उसका पति लोहे के सामानों की वेल्डिंग आदि का कारोबार करता है। अपने काम में सहयोग के लिए उसके पति ने अयोध्या निवासी दानिश खान को साथ रखा था। दानिश पीड़िता के मकान के ही बाहरी हिस्से में रहता था।

घटना के दिन महिला का परिवार रिश्तेदारी में गया था। घर में सिर्फ महिला की बेटी थी। वह B.Sc की छात्रा है। छात्रा को अकेला पाकर दानिश ने चोरी-छिपे आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उसके साथ रेप किया। इसी दौरान उसने पीड़िता की अश्लील वीडियो भी बनाई और उसे दिखाकर ब्लैकमेलिंग करने लगा। दानिश ने वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर छात्रा से कई बार रेप किया।

इतना ही नहीं, दानिश ने छात्रा से पैसे भी माँगे। डर की वजह से लड़की ने दानिश को घर में रखे 23,000 रुपए उसे दे दिए। परिवार जब वापस लौटा तो घर में रखे पैसे को खोजने लगे। पैसे नहीं मिलने पर महिला ने अपनी बेटी से इसके बारे में पूछा। आखिरकार छात्रा ने दानिश की सारी करतूत बता दी। बदनामी को देखते हुए महिला ने बेटी से इस घटना को भूल जाने के लिए कहा।

इसके साथ ही महिला ने अपनी बेटी को दानिश खान से दूर रहने की भी हिदायत दी। छात्रा ने ऐसा ही किया। इससे नाराज दानिश खान ने फिर से पीड़िता को कॉल करके पैसे माँगे। मना करने पर दानिश ने उसने सारे आपत्तिजनक फोटो और वीडियो पीड़िता के तमाम रिश्तेदारों को भेज दिए। अपनी बदनामी से आहत होकर छात्रा ने 2 बार आत्महत्या की कोशिश भी की।

आखिरकार पीड़िता की माँ ने दानिश खान के खिलाफ पुलिस में तहरीर दी। पहले यह मुकदमा IPC की धारा 376, 384 व 506 के तहत दर्ज हुआ। बाद में जाँच के दौरान केस में आईटी एक्ट की बढ़ोत्तरी की गई। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है। FIR दर्ज होने के बाद दानिश खान फरार हो गया था।

दानिश खान की गिरफ्तारी के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस उसकी तलाश में जुट गई और जगह-जगह दबिश देने लगी। आखिरकार, पुलिस को 2 जून 2024 (रविवार) को उसके लोकेशन की सटीक जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने दानिश खान को दबोच लिया। इस मामले में जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

मध्य प्रदेश, उत्तरांखड में BJP करती दिख रही क्लीन स्वीप, दिल्ली-गुजरात में INDI गठबंधन की हालत खराब: चौंका रहा UP

लोकसभा नतीजों के शुरुआती रुझान आना शुरू हो गए हैं। खबर लिखने वक्त तक के आँकड़ों में 543 लोकसभा सीटों पर बहुमत पाकर एनडीए गठबंधन आगे चल रहा है, लेकिन इस बीच इंडी गठबंधन उन्हें शुरू में कड़ी टक्कर देता दिख रहा है। ऐसे में कुछ राज्य अब भी ऐसे हैं जहाँ भाजपा के प्रति लोगों का विश्वास बना हुआ है। ये राज्य- दिल्ली, उत्तराखंड, गुजरात और मध्य प्रदेश है जबकि उत्तर प्रदेश के नतीजे चौंका रहे हैं

दिल्ली

  • दिल्ली की 7 लोकसभा सीटों पर इस समय भारतीय जनता पार्टी 6 सीटों पर लीड कर रही है। वहीं इंडी गठबंधन एक सीट पर आगे है। ये सीट चांदनी चौक की है जहाँ कॉन्ग्रेस के जय प्रकाश अग्रवाल ने बढ़त बनाई हुई है।

गुजरात

गुजरात की 26 लोकसभा सीटों पर भी दिल्ली जैसा हाल है। वहाँ करीबन 24 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी आगे हैं और 1 पर जीत दर्ज करा चुकी है। इसके अलावा कॉन्ग्रेस सिर्फ एक सीट पर आगे है।

उत्तराखंड

उत्तराखंड की तो पाँचों सीटों पर भाजपा का ही बोल बाला हो रखा है। अलमोड़ा में बीजेपी प्रत्याशी अजय टमता को कॉन्ग्रेस उम्मीदवार को कड़ी टक्कर मिल रही है।

मध्य प्रदेश

वहीं मध्य प्रदेश की बात करें तो 29 लोकसभा सीटों पर सुबह से भाजरा ने बढ़त बनाई हुई है। एक भी सीट पर कॉन्ग्रेस या कोई अन्य पार्टी आगे निकलती नहीं दिख रही है।

उत्तर प्रदेश

इसके अलावा सब उत्तर प्रदेश की बात करें तो 80 लोकसभा सीटों पर यहाँ भाजपा को कड़ाके की टक्कर मिली हुई है। शुरुआती रुझानों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के 35 प्रत्याशी आगे चल रहे हैं। समाजवादी पार्टी के 35। दोनों पार्टियों में टक्कर बराबर की है। वहीं कॉन्ग्रेस को 8 सीट पर बढ़त मिलती दिखी है और राष्ट्रीय लोक दल को 2 सीट पर और आजाद समाज पार्टी को 1 पर।

बता दें कि चुनावी नतीजों की तस्वीर लगातार बदल रही है। अभी तक लोकसभा चुनाव की 543 सीटों में से 541 सीटों पर शुरुआती रुझान दिखाए जा रहे हैं। फिलहाल एनडीए को 291 सीट मिलती दिखाई गई है और इंडी को 234 सीट मिली है और अन्य को 22 सीट मिली है।

‘बंदूक का जवाब बंदूक से देंगे’: ‘हमारे बारह’ का इस्लामी कट्टरपंथियों ने किया विरोध तो भड़के अन्नू कपूर, ‘जनसंख्या जिहाद’ पर बनी है फिल्म

अन्नू कपूर की एक फिल्म आ रही है, ‘हम दो हमारे बारह’, जिसे लेकर वो विवादों में घिर गए हैं। मुस्लिम कट्टरपंथी उनकी आलोचना कर रहे हैं, क्योंकि इस फिल्म में ‘जनसंख्या जिहाद’ की समस्या को दिखाया गया है और साथ ही जनसंख्या विस्फोट की समस्या को दर्शाया गया है। वहीं इस्लामी कट्टरपंथी कह रहे हैं कि इसके जरिए मुस्लिमों को निशाना बनाया गया है। फिल्म को ये भी दिखाया गया है कि कैसे मुल्ला-मौलवी महिलाओं को एक वस्तु की तरह समझते हैं।

फिल्म को प्रतिबंधित किए जाने की माँग के बीच फिल्म के कलाकारों को हत्या की धमकियाँ भी मिल रही है। वहीं फिल्म में मुख्य किरदार निभा रहे अन्नू कपूर ने कहा है कि वो अच्छे पैसों के लिए ये फिल्म कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेंसर बोर्ड (CBFC) ने इस फिल्म को पास कर दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग बंदूक की बात करेंगे, उन्हें वो भी बंदूक से ही जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत और अवैयक्तिक रूप से वो नास्तिक हैं। उन्होंने कहा कि निर्माता-निर्देशक को लगा कि इस कहानी को पर्दे पर उतारने के लिए वो सही आदमी हैं।

अन्नू कपूर ने कहा कि उन्होंने इस किरदार के साथ न्याय करने का पूरा प्रयास किया है, बाकी चीजों से उन्हें फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि उनका काम है फिल्म में अभिनय कर के अपने किरदार के साथ न्याय करना और उन्होंने अपना काम किया है। उन्होंने कहा कि वो धार्मिक इंसान नहीं हैं, उन्हें धर्म या राजनीति से कोई लेना-देना नहीं। उन्होंने कहा कि वो पैसे के लिए काम करते हैं, लेकिन वो न चोरी करेंगे, न जेब काटेंगे, न गला घोंटेंगे और न ही देश को बेचेंगे।

अन्नू कपूर ने कहा कि लोग हर समय प्रोपेगंडा की बात करते रहते हैं, वो इससे परेशान नहीं हैं। उन्होंने दर्शकों से निवेदन किया कि वो फिल्म को देखें और तय करें कि फिल्म कह क्या रही है। उन्होंने पूछा कि बिना फिल्म देखे लोग क्यों जज कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि जिसे उनकी फिल्म के खिलाफ आवाज़ उठानी है वो शब्दों का इस्तेमाल करें न कि बंदूकों का, अगर वो बंदूक ला सकते हैं तो हम भी लाएँगे। उन्होंने कहा कि फिल्म को गाली दिए जाने का अर्थ है कि वो हार गए हैं, हम जीत गए हैं।

कहीं गिरफ्तार हो रहे पोलिंग एजेंट तो कहीं भड़की हिंसा; भाजपा का पश्चिम बंगाल पुलिस पर एजेंटों को प्रताड़ित करने का आरोप, चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की माँग

पश्चिम बंगाल के बैरकपुर लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी अर्जुन सिंह के 2 काउंटिंग एजेंटों को पुलिस ने गिफ्तार कर लिया है। अर्जुन सिंह का आरोप है कि यह कार्रवाई सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के दबाव में काउंटिंग एजेंट प्रेम कुमार बांसफोर और शांतनु गांगुली हैं। प्रेम कुमार अनुसूचित जाति से हैं। भाजपा प्रत्याशी ने इस कार्रवाई के पीछे मतगणना में गड़बड़ी की साजिश बताया है। रविवार (2 जून 2024) को अर्जुन सिंह ने चुनाव आयोग से इस मामले में हस्तक्षेप की भी माँग की है।

अर्जुन सिंह ने रविवार को अपने X हैंडल पर पश्चिम बंगाल पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया। उन्होंने कहा कि उनके मतगणना एजेंट प्रेम कुमार बांसफोर को गिरफ्तार करके ममता सरकार ने यह साबित कर दिया कि उनके मन में दलित समुदाय के लिए कोई सम्मान नहीं है। अपने ट्वीट में अर्जुन सिंह ने संदेशखाली की भी याद दिलाई और बंगाल पुलिस को TMC का पिट्ठू करार दिया और चुनाव आयोग से गिरफ्तार करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की माँग की।

अपने एक अन्य ट्वीट में अर्जुन सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल पुलिस राजनैतिक दबाव में नाका चेकिंग के नाम पर भाजपा के एजेंटों को परेशान कर रही है। उन्होंने इस काम में बैरकपुर पुलिस के कमिश्नर तक को सीधे तौर पर शामिल बताया। चुनाव आयोग ने अर्जुन सिंह ने माँग की कि वो तय करें कि नाका चेकिंग के नाम पर एक भी भाजपा काउंटिंग एजेंट को न रोका जाए।

उधर भाजपा नेता अमित मालवीय ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल के श्रीरामपुर में मतगणना के दौरान हिंसा हो रही है। भाजपा नेता ने आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी प्रदेश का लॉ एन्ड आर्डर नहीं संभाल पा रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को इस्तीफा देने की सलाह दी है।

गौरतलब है कि एक दिन पहले 3 जून (सोमवार) को भाजपा ने आरोप लगाया था कि सिलीगुड़ी में उनके काउंटिंग एजेंट को पश्चिम बंगाल पुलिस ने धमकी दी है। धमकाने का आरोप नगर थाने के सब इंस्पेक्टर विश्वदीप बर्मन पर लगा था। उन्होंने भाजपा के काउंटिंग एजेंट्स को फोन कॉल कर के व्यक्तिगत विवरण माँगा था।

दक्षिण भारत में भी NDA कर रहा कमाल, केरल में बीजेपी का खाता खुलने की उम्मीद बनी: कर्नाटक-आँध्र प्रदेश-ओडिशा में कमल कर रहा कमाल

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे आने लगे हैं। शुरुआती रुझान के बाद सुबह 11 बजे तक बीजेपी पूरे देश में बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है। दक्षिण भारत, जिसे बीजेपी के लिए कमजोर कहा जा रहा था, वो एग्जिट पोल्स के मुताबिक ही, बीजेपी के अच्छी खुशखबरी ला रहा है। बीजेपी और उसके सहयोगी दक्षिण भारत में भी बेहतरीन प्रदर्शन करते दिख रहे हैं। आइए, आपको बताते हैं राज्यवार आँकड़े…

अंडमान से आँध्र तक, बीजेपी और सहयोगियों को भारी बढ़त

बीजेपी दक्षिण भारतीय राज्यों खास आँध्र प्रदेश, कर्नाटक में बेहतरीन प्रदर्शन करती दिख रही है, तो बाकी के राज्यों में उसके सहयोगी दलों ने मोर्चा थाम रखा है। अंडमान-निकोबार की इकलौती लोकसभा सीट पर बीजेपी आगे चल रही है। वहीं, आँध्र प्रदेश में विपक्षी पार्टी का सफाया हो गया है। पिछले लोकसभा चुनाव में लैंडस्लाइड विक्ट्री पाने वाली जगनमोहन रेड्डी की YSR कॉन्ग्रेस पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया है। तेलंगाना में भी बीजेपी का प्रदर्शन शानदार रहा है।

आँध्र प्रदेश में एनडीए कर रहा क्लीन स्वीप

आँध्र प्रदेश की कुल 25 लोकसभा सीटों में एनडीए 80 प्रतिशत से अधिक सीटें ला रही है। बीजेपी के सहयोगी दल टीडीपी और जनसेना (16+2) सीटें ला रही हैं, तो बीजेपी भी 3 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज कर रही है। वहीं, अब तक यहाँ सत्ता में रही YSRCP को महज 4 सीटें मिलती दिख रही हैं। ये नतीजे अभी बदल भी सकते हैं।

तेलंगाना में बीजेपी का अच्छा प्रदर्शन

तेलंगाना में बीजेपी ने अपने दम पर चुनाव लड़ा है। यहाँ भारत राष्ट्र समिति 1 सीट पर आगे है, तो एआईएमआईएम 1 सीट पर आगे है। हैदराबाद सीट पर असदुद्दीन ओवैसी को कड़ा मुकाबला चल रहा है। राज्य में कॉन्ग्रेस 8 सीटों पर आगे है, तो बीजेपी शानदार प्रदर्शन करते हुए 7 सीटों पर आगे है। खास बात ये है कि तेलंगाना में बीजेपी सत्ता में कभी नहीं रही है। ऐसे में उसका ये प्रदर्शन शानदार ही कहा जाएगा।

कर्नाटक में बीजेपी और JDS का कमाल

कर्नाटक में बीजेपी सत्ता में नहीं है, इसके बावजूद बीजेपी का प्रदर्शन अच्छा रहा है। राज्य की 28 लोकसभा सीटों में बीजेपी और उसकी सहयोगी जेडीएस कुल 21 (18+3) लोकसभा सीटों पर आगे है। कॉन्ग्रेस महज 7 सीटों पर आगे है। यहाँ के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने कहा था कि कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सब पर भारी पड़ेगी, लेकिन अभी तक नतीजे कॉन्ग्रेस को झटके देते दिख रहे हैं।

केरल में बीजेपी का प्रदर्शन अच्छा

केरल की कुल 20 लोकसभा सीटों में से बीजेपी 2 सीटों पर आगे है। बीजेपी अगर ये बढ़त बनाए रखती है, तो पार्टी राज्य में अब तक का सबसे शानदार प्रदर्शन करेगी। केरल में विपक्ष में बैठी कॉन्ग्रेस 13 सीटों पर आगे है। अन्य पार्टियों में मुस्लिम लीग 2, सीपीआई-एम 1, केरल कॉन्ग्रेस – 1 और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी 1 सीट पर आगे चल रही है।

तमिलनाडु में डीएमके-कॉन्ग्रेस का डंका

तमिलनाडु में डीएमके और कॉन्ग्रेस का इंडी गठबंधन बेहतरीन प्रदर्शन करता दिख रहा है। तमिलनाडु में राज्य की सत्ता पर काबिज दल लोकसभा चुनाव में कमोवेश अच्छा ही प्रदर्शन करता है। समाचार लिखे जाने तक 39 लोकसभा सीटों में 19 पर डीएमके आगे चल रही है, तो सहयोगी कॉन्ग्रेस 8 सीटों पर आगे है। वीसीके 2 सीटों पर, सीपीआई और सीपीआई (एम) 2-2 सीटों पर आगे है, तो पीएमके 1 सीट पर आगे है।

ओडिशा में बीजेपी का शानदार प्रदर्शन

ओडिशा में बीजेपी क्लीनस्वीप की ओर बढ़ती दिख रही है। कुल 21 लोकसभा सीटों में से 18 पर बीजेपी जीत दर्ज करती दिख रही है, तो बीजू जनता दल महज 2 सीटों पर, और कॉन्ग्रेस सिर्फ 1 सीट पर आगे है।

ओडिशा में विधानसभा चुनाव में बीजेपी को शुरुआती बढ़त

ओडिशा विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी अच्छा प्रदर्शन करती दिख रही है। कुल 147 विधानसभा सीटों में से 124 सीटों के शुरुआती रुझान सामने आए हैं, जिसमें से 64 पर बीजेपी आगे है, तो सत्ताधारी दल बीजेडी सिर्फ 44 पर आगे है। कॉन्ग्रेस महज 12 सीटों पर आगे है। अगर ये ट्रेंड आगे भी जारी रहता है, तो बीजेडी को दशकों बाद हार झेलना पड़ सकता है।

आँध्र प्रदेश में बीजेपी और सहयोगी कर रहे क्लीन स्वीप

आँध्र प्रदेश में बीजेपी और उसके सहयोगी दल विधानसभा चुनाव में क्लीन स्वीप करते दिख रहे हैं। आँध्र प्रदेश में कुल 175 लोकसभा सीटों में से 167 के रुझान आ गए हैं, जिसमें तेलुगू देशम पार्टी 122 सीटों पर आगे है। तो जनसेना पार्टी 17 सीटों और बीजेपी 7 सीटों पर। सत्ताधारी YSRCP महज 21 सीटों पर आगे दिख रही है।

असम-अरुणाचल -त्रिपुरा में भाजपा की आँधी, नागालैंड-मणिपुर में कॉन्ग्रेस ले रही साँस: पश्चिम बंगाल में TMC आगे

देश भर में लोकसभा चुनाव 2024 के रुझान सामने आ रहे हैं। उत्तरपूर्वी राज्यों में भाजपा बड़ी बढ़त बनाते हुए दिखाई दे रही है। असम, अरुणाचल प्रदेश में वह एकतरफा सफाए की तरफ बढ़ रही है। बाकी जगह भी वोटों की गिनती जारी है। जानिए उत्तरपूर्वी राज्यों के क्या हाल हैं। उत्तरपूर्वी राज्यों के अलावा पश्चिम बंगाल में TMC आगे है।

असम: भाजपा बड़ी बढ़त की तरफ

चुनाव आयोग की आधिकारिक जानकारी में असम की 14 में से 13 सीटों के रुझान आ गए हैं। असम में भाजपा 14 में से 8 सीटों पर आगे है। इसके अलावा UPPL भी 1 सीट पर आगे है। असम गण परिषद भी 1 सीट पर आगे चल रही है। कॉन्ग्रेस असम में 4 सीट पर आगे चल रही है।

अरुणाचल प्रदेश: भाजपा क्लीन स्वीप की तरफ

अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत के बाद भाजपा लोकसभा चुनाव में भी भाजपा बड़ी जीत की तरफ है। अरुणाचल प्रदेश की 2 सीटों पर भाजपा आगे चल रही है। भाजपा के किरेन रिजीजू और तापिर गाओ ने कॉन्ग्रेस के उम्मीदवारों के मुकाबले बड़ी बढ़त बनाई हुई है।

त्रिपुरा: कॉन्ग्रेस लेफ्ट पीछे

उत्तरपूर्व के एक और महत्वपूर्ण राज्य त्रिपुरा में भी भाजपा ने दोनों सीटों पर बढ़त बनाई हुई है। त्रिपुरा में भाजपा प्रत्याशी बिप्लब देब और कृति देवी देबबर्मन बड़ी बढ़त बनाए हुए हैं। भाजपा को 10 बजे तक की गिनती में यहाँ 71% वोट मिल चुके हैं।

मणिपुर: कॉन्ग्रेस-NPF ने बनाई बढ़त

मणिपुर कि दो सीटों पर कॉन्ग्रेस और NPF पार्टी 1-1 सीटों पर आगे हैं। मणिपुर में आंतरिक सीट पर कॉन्ग्रेस जबकि बाह्य सीट पर NPF सीट आगे है।

मेघालय: VOTPP-कॉन्ग्रेस बढ़त में

उत्तरपूर्व के राज्य मेघालय में कॉन्ग्रेस 1 सीट जबकि स्थानीय पार्टी VOTPP 1 सीट पर आगे है।

मिजोरम: ZPM जीत की तरफ

मिजोरम की 1 सीट पर सत्ताधारी ZPM आगे है। ZPM अभी यहाँ विपक्षी दल MNF से आगे चल रही है।

नागालैंड: कॉन्ग्रेस आगे

नागालैंड की 1 सीट पर कॉन्ग्रेस आगे चल रही है। हालाँकि यहाँ बढ़त का अंतर अभी काफी कम है।

सिक्किम: विधानसभा जैसा ही परिणाम

सिक्किम में लोकसभा परिणाम भी विधानसभा की ही राह पर है। सिक्किम की 1 सीट पर सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा आगे है। इसी पार्टी ने हाल ही में सिक्किम का चुनाव जीता है।

पश्चिम बंगाल: TMC की बड़ी बढ़त

पश्चिम बंगाल में TMC 24 सीट पर आगे है जबकि भाजपा 7 सीट पर आगे है। इसके अलावा कॉन्ग्रेस 3 सीट और लेफ्ट 1 सीट पर आगे है।

यह जानकारी 10:40 बजे तक की है। चुनाव आयोग के आँकड़ों पर आधारित है।

सिर पर कफन बांधकर आना… महाभारत होगी: नतीजों से पहले इंडी गठबंधन के नेताओं ने कार्यकर्ताओं को भड़काया, कर रहे भीड़ इकट्ठा

लोकसभा चुनाव के नतीजे साफ होने से पहले विपक्षियों ने अपने कार्यकर्ताओं को भड़काना शुरू कर दिया है। मतगणना वाले दिन से पहले मद्देनजर विरोधी दलों के नेताओं के अलग-अलग बयान सामने आए हैं जिसमें उकसाने का काम हो रहा है। किसी ने कार्यकर्ताओं से मतगणना वाले दिन सिर पर कफन बाँध कर आने को कहा है तो कोई बड़ी तादाद पर लोगों को मतगणना सेंटर के बाहर खड़े होने को बोल रहा है।

ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमेटी ने मतगणना से एक दिन पहले प्रेस रिलीज जारी करके अपने कार्यकर्ताओं से गिनती वाले दिन सतर्क रहने को कहा। उन्होंने कहा है कि कार्यकर्ता घर में बैठकर न्यूज चैनलों पर रिजल्ट न देखें बल्कि कॉन्ग्रेस के सभी कार्यकर्ता जिला कॉन्ग्रेस के दफ्तों और राज्यों में सुबह से पहुँचे। वहाँ देखते रहें कि अगर कुछ गड़बड़ हो तो रिकॉर्ड करके उसे तुरंत पार्टी द्वारा जारी नंबर पर भेजें। इतना ही नहीं कॉन्ग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओ को ये आइडिया भी दिया कि गड़बड़ी होगी तो उन्हें उसे रोकना होगा।

मतगणना सेंटर के बाहर कार्यकर्ताओं की भीड़ खड़ी करके कॉन्ग्रेस कैसे हालात बदलना चाहते हैं ये समझना ज्यादा मुश्किल नहीं है। कॉन्ग्रेस के साथ इंडी गठबंधन का हिस्सा सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी अपने भाषण में कार्यकर्ताओं को भड़काने का काम किया।

अखिलेश यादव का एक बयान वायरल हो रहा है जिसमें वह कहते सुनाई पड़ते हैं- जनता इस बार गाँधीजी को याद करते हुए करो या मरो की तरह आंदोलित हो गई है और अपने और अपने देश को बचाने के लिए नया स्वतंत्रता आंदोलन लड़ने को तैयार बैठी हुई है। जनता स्वतंत्रता सेनानियों की तरह तैयार है क्योंकि भाजपा काल में उनका जीवन तो वैसे ही दूभर हो गया है। देश का युवा फिर से सिर पर कफन बाँधकर कह रहा है- “मेरा रंग दे बसंती चोला।”

इसी प्रकार से बिहार के पूर्णिया से चुनावी मैदान में खड़े पप्पू यादव ने अपने समर्थकों से कहा- “मतगणना के लिए पूरी तैयारी से आना, कफन बाँध कर आना, मरने के लिए आना… कल पूर्णिया सीट पर लोकतंत्र की हत्‍या हुई तो महाभारत का संग्राम होगा। पूर्णिया के जिलाधिकारी और एसपी मतगणना प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ करें, हम उन्हें पूरा सहयोग करेंगे, लेकिन लोकतंत्र को बचाने के लिए हमारा एक-एक कार्यकर्ता कफन बाँधकर तैयार है।”

उल्लेखनीय है कि मतगणना से पहले जिस तरह से इंडी गठबंधन के नेता इस तरह के बयान देते दिखे उससे साफ पता चलता है कि वो अपने कार्यकर्ताओं को एक तरह से उकसा रहे हैं कि अगर नतीजे उनके पक्ष में नहीं आए तो वो हिंसा करें और हिंसा में जो भी अंजाम हो वो इसके लिए तैयार रहें। हम सब जानते हैं कि भीड़ को इकट्ठा करके उनसे हल्ला करवाने के कितने गंभीर परिणाम हो सकते हैं मगर कॉन्ग्रेस ऐसा कर रही है। उसने टीवी पर नतीजे देखने से अपने कार्यकर्ताओं को मना कर दिया है और मतगणना सेंटर पर बुलाया है ताकि कोई उपद्रव हो या कोई गुस्सा जाहिर करे तो सेंटर के बाहर सबके आगे करे। वे ये नहीं सोच रहे कि कार्यकर्ता हिंसक होने से गणना की प्रक्रिया बाधित हो सकती है। वहीं पप्पू यादव ने खुलेआम महाभारत की बात कही है। अखिलेश ने देश के युवाओं को इस चुनाव में सिर पर कफन बाँधकर बलिदान होने के लिए कह दिया है।

संभव है इन सब नेताओं के बयानों पर चुनाव आयोग बाद में संज्ञान भी ले, लेकिन उससे पहले जो ये लोग करने की सोचे बैठे हैं वो किस तरह से लोकतंत्र को बचाने की दिशा में है ये विचार करने का विषय है। हमने बंगाल में कार्यकर्ताओं को भड़काने के नतीजे देखे हैं कि वहाँ कितने बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। अब भी उस हिंसा का असर लोगों में देखने को मिलता है।