Home Blog Page 897

भव्य मंदिर में विराजे श्रीराम, विकास की बही गंगा, खड़ी हुई धर्म की अर्थव्यवस्था… फिर भी अयोध्या वाली फैजाबाद सीट से हार गए BJP के लल्लू सिंह, सपा के अवधेश प्रसाद जीते

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे आ चुके हैं। अधिकाँश सीटों पर जीत-हार के आँकड़े भी सामने आ चुके हैं। बीजेपी की अगुवाई में एनडीए स्पष्ट जनादेश पाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार सरकार बनाने के लिए तैयार है। देश की 543 लोकसभा सीटों में से एक सीट, जिसपर पूरे देश की नजर थी। वो सीट थी-फैजाबाद लोकसभा सीट। भगवान राम की नगरी अयोध्या की फैजाबाद लोकसभा सीट, जहाँ बीजेपी को हार का मुँह देखना पड़ा। हैरानी की बात ये है कि जिस राम मंदिर को लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी की जीत की गारंटी माना जा रहा था, उसी अयोध्या में बीजेपी को हार का मुँह देखना पड़ा, वो भी उस पार्टी के खिलाफ, जिसके दामन पर राम भक्तों के खून के छींटे पड़े।

फैजाबाद लोकसभा सीट पर लगभग 5 लाख वोट पाने वाले 2 बार के सांसद लल्लू सिंह को हार का मुँह देखना पड़ा है। उन्हें समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अवधेश प्रसाद पासी ने हराया। अवधेश प्रसाद पासी को लोकसभा चुनाव में कुल 5 लाख 54 289 मत मिले, तो बीजेपी के लल्लू सिंह को 54,567 कम वोट मिले और वो 4 लाख 99 हजार 722 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे। ये आँकड़े शाम 7.44 बजे तक के हैं।

फैजाबाद लोकसभा सीट पर सपा की जीत (फोटो साभार : चुनाव आयोग वेबसाइट)

इस साल की शुरुआत में जब राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई, तो सारी दुनिया में संदेश गया कि हिंदुओं का 500 साल का संघर्ष रंग लाया और भगवान राम अपने जन्मस्थान पर बने भव्य मंदिर में आ गए। इन पाँच सौ सालों के संघर्ष में 30 अक्टूबर 1990 को उस समय समाजवादी पार्टी के मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव यूपी के मुख्यमंत्री थे। उनके शासनकाल में कारसेवकों पर गोली चलाई गई और एक साथ 5 राम भक्तों को मार दिया गया। इस घटना के 3 दिन बाद ही 2 नवंबर को दूसरी बार पुलिस की बंदूकें गरजी थी और देढ़ दर्जन कारसेवकों को मौत के घाट उतार दिया गया, इन्हीं में कोठारी बंधु भी शामिल थे। इसके करीब 2 साल बाद बाबरी का विध्वंस हुआ और लंबे संघर्ष के बाद साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हुआ।

राम मंदिर के निर्माण के लिए पूरी दुनिया के भक्तों ने दिल-खोलकर दान दिया। मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई, तो हर लोग हजारों-लाखों लोग दर्शन के लिए पूरे देश से पहुँचने लगे। ऐसे में राजनीतिक जानकारों ने माना कि राम मंदिर की वजह से बीजेपी इस लोकसभा चुनाव में अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल कर लेगी, लेकिन नतीजे आए हैं, तो अयोध्या से ही राम मंदिर निर्माण के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक देने वाली पार्टी को ही हार का मुँह देखना पड़ गया और जिस पार्टी ने अयोध्या में राम भक्तों का खून बहाया, उस पार्टी के कैंडिडेट को जीत मिल चुकी है।

अयोध्या में विकास कार्यों की भरमार

राम मंदिर के शिलान्यास को ध्यान में रखकर अयोध्या में ढेरों प्रोजेक्ट्स की शुरुआत हुई। अयोध्या में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाया गया। रेलवे स्टेशनों को विश्वस्तरीय बनाया गया। शहर के अंदर सड़कों को मजबूत किया गया। सीवर लाइन, बिजली के तारों को अंडरग्राउंड किया गया। अयोध्या के लिए कनेक्टिविटी बढ़ाई गई। तमाम बड़े ग्रुपों ने अयोध्या में निवेश किया है। नए होटल्स बने हैं। 394 करोड़ से 4 लेन अयोध्या अकबरपुर बसखारी मार्ग, एनएच 27 से रामपथ तक रेलवे पार पथ, पंचकोसी परिक्रमा मार्ग पर बड़ी बुआ रेलवे क्रॉसिंग पर ओवर ब्रिज, दर्शन नगर के पास रेलवे ओवर ब्रिज आदि का कार्य पूरा किया गया। इसके अलावा, अमानीगंज में मल्टी लेवल पार्किंग, कलेक्ट्रेट के पास स्मार्ट वाहन पार्किंग, पंचकोसी और चौदहकोसी मार्ग पर इंटरप्रिटेशन वॉल का निर्माण, परिक्रमा मार्ग पर 25 से ज्यादा पयर्टन स्थलों और कुंडों का विकास, डेकोरेटिव पोल और हेरिटेज लाइटों की स्थापना का कार्य, कौशल्या सदन का निर्माण, मुक्ति वैकुंठ धाम के विकास का कार्य किया गया।

यही नहीं, अयोध्या के 7 वार्डों में 24 घंटे जलापूर्ति, सूर्यकुंड के पास आरओबी, मार्च में अयोध्या अकबरपुर मार्ग पर फतेहगंज आरओबी, अयोध्या बिल्हौरघाट 4 लेन सड़क, गुप्तार घाट का सौंदर्यीकरण, नया घाट से लक्ष्मण घाट तक पर्यटन सुविधाओं का विकास, अयोध्या सोलर सिटी का कार्य पूरा किया गया। अप्रैल में अवध बस स्टैंड के पास आश्रय गृह का निर्माण, नाका बाइपास के पास कल्याण भवन का निर्माण, चार ऐतिहासिक प्रवेश द्वारों का निर्माण पूरा किया गया, तो अयोध्या सीवरेज योजना का पार्ट वन पूरा कर लिया जाएगा। साथ ही 473 करोड़ से पंचकोसी परिक्रमा मार्ग चौड़ीकरण कार्य को पूरा कर लिया जाएगा और 1140 करोड़ से चौदह कोसी परिक्रमा मार्ग का विस्तारीकरण पूरा किया गया।

इसके साथ ही एनएच 27 में लखनऊ अयोध्या खंड का चौड़ीकरण और सुदृढ़िकरण का कार्य, ग्रीन फील्ड टाउनशिप परियोजना, वशिष्ठ कुंज आवासीय परियोजना, नगर निगम और विकास प्राधिकरण कार्यालय भवन, सीपेट केंद्र, गुप्तार घाट और राजघाट के बीच नए पक्के घाटों का निर्माण का निर्माण किया गया। इसके अलावा, पुराने घाटों का जीर्णोद्धार, राम की पैड़ी पर दर्शक दीर्घा, राम की पैड़ी से राजघाट तक और राजघाट से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तक श्रद्धालु भ्रमण पथ का सुदृढ़िकरण और सौंदर्यीकरण का कार्य भी योगी सरकार ने किया। आज अयोध्या पूरी दुनिया में सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहर के तौर पर उभर कर सामने आई है।

खास बात ये है कि अयोध्या में पिछले कुछ सालों में विकास के जितने काम हुए, उतने शायद ही पूरे देश में किसी टियर-3 शहर में हुए होंगे, इसके बावजूद आम जनमानस के दिल में शायद कोई कसक बाकी रह गई, तभी तो… विकास से लेकर धार्मिक कार्यों तक, जिस बीजेपी ने अयोध्या को आगे बढ़ाने के लिए अपना सबकुछ झोंक दिया, उसके लोकसभा चुनाव 2024 में अयोध्या की जनता एकजुट नहीं हो सकी।

आज EVM से निकले नंबरों का जश्न मना रहा विपक्ष, कल फिर देंगे गाली, क्योंकि दोगलई है जो जाती नहीं

किसी गाने की एक पंक्ति थी – ‘बदले-बदले से सरकार नज़र आते हैं’। आज ये पंक्ति भारत के विपक्षी दलों के ऊपर एकदम फिट बैठती है। बदले-बदले से इसीलिए नज़र आते हैं, क्योंकि आज कोई EVM को गाली नहीं दे रहा। अचानक से EVM हैक होने की चर्चा ही बंद हो गई है। अब चर्चा है जनता के नाराज़ होने की, नैरेटिव है भाजपा के हार की और आरोप अब EVM की जगह DM पर शिफ्ट हो गया है। बता दें कि आदर्श अचार संहिता लागू लागू होने के बाद सामान्यतः DM ही जिला निर्वाचन पदाधिकारी होते हैं और मतदान-मतगणना की प्रक्रिया उनकी ही निगरानी में होती है।

अब राहुल गाँधी के सलाहकार जयराम रमेश कह रहे हैं कि अधिकारियों को फोन कॉल जा रहा है ‘ऊपर से’ कि वो अंतिम परिणामों में हेरफेर करें, मतगणना की प्रक्रिया में देरी की जा रही है, चुनाव आयोग की वेबसाइट पर रिजल्ट्स अपडेट नहीं किए जा रहे हैं और मतगणना में धाँधली हो रही है। हालाँकि, इन सबमें कहीं EVM का नाम नहीं लिया जा रहा। कारण – कारण ये कि कॉन्ग्रेस पार्टी को पिछली बार के मुकाबले 47 सीटें अधिक मिल गई हैं। भाजपा की 64 सीटें कम हो गई हैं।

यही कारण है कि EVM पर निशाना नहीं साधा जा रहा है। विपक्षी दलों का पूरा ध्यान अब अधिकारियों को धमकाने पर है, मशीन पर हैं। याद कीजिए, एक समय था जब विधानसभा में लाइव दिखाया गया था कि EVM हैक हो सकता है। AAP विधायक सौरभ भारद्वाज एक कोई EVM जैसी दिखने वाली मशीन लेकर आए थे, साथ ही दावा किया था कि एक निश्चित कोड डाल कर इसे हैक किया जा सकता है। उनका कहना था कि मदरबोर्ड में गड़बड़ी की जा सकती है, इसे रिसेट किया जा सकता है ताकि टेस्ट के समय कुछ और परिणाम दिखें और असली पोलिंग के दौरान कुछ और।

हालाँकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया था कि ये संभव नहीं है। संस्था ने बताया था कि कैसे जो नए M3 EVM आ रहे हैं उनमें टैम्पर-डिटेक्शन है, यानी कोई मशीन को खोलने की कोशिश भर करता है तो इसके बाद वो काम करना बंद कर देगा। चुनाव आयोग समझाता रहा कि कैसे हर साल EVM को चेक किया जाता है, नियमित अंतराल पर अधिकारी उसका निरीक्षण करते हैं, कोई अनाधिकारिक व्यक्ति उसे इस्तेमाल नहीं कर सकता और उसमें डबल लॉक सिस्टम है – लेकिन कोई मानने को तैयार नहीं था।

वहीं अब ये सारी चर्चाएँ गायब हैं। याद कीजिए, कैसे ये लोग सुप्रीम कोर्ट भी पहुँचे थे कि सभी EVM को VVPAT (वोट देने के बाद निकलने वाली पर्ची) से लैस किया जाए और शत-प्रतिशत वेरिफिकेशन किया जाए, हालाँकि सर्वोच्च न्यायालय ने ये माँग रद्द करते हुए स्पष्ट कहा कि इससे देश बैलेट पेपर वाले युग में वापस चला जाएगा। सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि EVM सरल है, सुरक्षित है और इस्तेमाल करने में आसान है। इसी साल अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया था कि कैसे बैलेट पेपर के युग में बूथ लूटने की घटनाएँ होती थीं।

मतगणना वाले दिन मंगलवार (4 जून, 2024) की सुबह मैं TV पर न्यूज़ में चर्चा देख रहा था। इस दौरान विपक्षी दल के एक प्रवक्ता से पूछा गया कि EVM हैक है या नहीं? उन्होंने बड़ा अजीबोगरीब जवाब दिया कि अगर इन्होंने 5% EVM हैक किया होगा और जनता 10% इनके खिलाफ हो जाएगी तो इनकी हार ही होगी। यानी, जो ‘सर्वशक्तिमान’ सरकार EVM हैक कर सकती है, वो ये नहीं पता कर सकती कि किस पार्टी को किटें वोट मिले हैं और जीत के लिए उसे कितने वोट्स चाहिए।

ये बड़ा ही बचकाना लॉजिक देते हैं। अब ये कहेंगे कि इनके डर से EVM हैक करने में भाजपा सफल नहीं हुई। ये खुद को इसका श्रेय भी दे सकते हैं कि इनके कार्यकर्ताओं ने रात भर जाग कर निगरानी की इसीलिए EVM हैकिंग संभव नहीं हो पाया। इस पर एक कहानी बरबस ही याद आ जाती है। एक चिड़िया पाँव उठा कर सोती थी, किसी ने उससे इसका कारण पूछा तो उसने बताया कि आसमन गिरने की स्थिति में वो अपने पाँव पर आसमान को रोक सके, इसीलिए वो ऐसा करती है। विपक्ष की यही स्थिति है अभी।

2014 के बाद कई राज्यों में कॉन्ग्रेस को जीत मिली। मध्य प्रदेश, पंजाब, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में कॉन्ग्रेस ने राज किया। क्या इन राज्यों में जब कॉन्ग्रेस जीती तब EVM हैक नहीं था? जैसे ही लोकसभा चुनाव आते हैं, इनका रोना शुरू हो जाता है। भाजपा भले ही पूर्ण बहुमत से 33 सीटें पीछे रह गई, लेकिन किसी भाजपा के नेता या कार्यकर्ता को EVM को दोष देते हुए नहीं देखा गया। तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में तो विपक्ष का ही शासन है, वहाँ भाजपा को उतनी सीटें भी नहीं मिलीं, फिर भी कोई ईवीएम को दोष नहीं दे रहा।

आखिर क्या कारण है कि 3 जून, 2024 तक भारत में तानाशाही थी और EVM हैक हो सकता था, लेकिन इसके अगले ही दिन यही आरोप लगाने वाले लोग इसी EVM से निकले परिणाम का जश्न मना रहे हैं? अचानक से लोकतंत्र वापस आ गया है, चुनाव आयोग ठीक से काम कर रहा है और EVM में कोई गड़बड़ी नहीं है। कल तक यही लोग हिंसा की धमकी दे रहे थे। बलिया से सपा उम्मीदवार सनातन पांडेय कह रहे थे कि DM की लाश बाहर आएगी, तो पूर्णिया से निर्दलीय प्रत्याशी पप्पू यादव अपने कार्यकर्ताओं को कफ़न बाँध कर आने की सलाह दे रहे थे।

यानी, हम कह सकते हैं कि इस बार हर सीट पर भाजपा या कॉन्ग्रेस या कोई राजनीतिक पार्टी नहीं, इस चुनाव में EVM लीड कर रही थी। क्या अब विपक्ष ये वादा करेगा कि 2029 के लोकसभा चुनावों में अगर उसकी हार होती है तो वो EVM पर सवाल खड़ा नहीं करेंगे? EVM बनाने वाले भी आज चैन की साँस ले रहे होंगे क्योंकि कोई उन्हें नहीं कोस रहा। पश्चिम बंगाल में ममता बर्नजी की TMC को भी 29 सीटें आ रही हैं, ऐसे में वो भी ईवीएम पर कोई सवाल नहीं उठा रही हैं।

कभी इंडिया टुडे के स्टूडियो में राजदीप के साथ नाचे थे, आज लाइव रो पड़े प्रदीप गुप्ता: कहा- तीन राज्यों में हमारा Exit Poll पूरी तरह गलत रहा

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों से धुआँ छँट चुका है। भाजपा इन चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। NDA गठबंधन स्पष्ट बहुमत पाया है। हालाँकि, चुनाव के नतीजे एग्जिट पोल से एकदम अलग रहे हैं। अधिकांश एग्जिट पोल गलत साबित हुए हैं। ऐसी स्थिति में एग्जिट पोल के मामले में पुरोधा माने जाने वाले प्रदीप गुप्ता टीवी पर ही रो पड़े।

इंडिया टुडे -एक्सिस माय इंडिया एग्जिट पोल के मुखिया प्रदीप गुप्ता परिणामों के दौरान अपने अनुमान गलत साबित होने को लेकर दुखी हो गए। वह इंडिया टुडे चैनल पर दुखी हो कर लाइव शो के दौरान रो पड़े। उन्हें आसपास बैठे साथी एंकरों ने समझाया भी कि अनुमान किसी के भी गलत हो सकते हैं।

प्रदीप गुप्ता को इंडिया टुडे के एंकर्स ने समझाया कि एग्जिट पोल को लेकर वह ईमानदार रहे हैं और उन्होंने जमीन पर उतर कर मेहनत की है। ऐसे में एग्जिट पोल का गलत साबित होना उनकी मेहनत को कम नहीं करता है। यह भी कहा गया कि एग्जिट पोल एकदम सत्य नहीं होते हैं, वह भी अनुमान ही होते हैं।

दरअसल, एक्सिस माय इंडिया ने अनुमान लगाया था कि 2024 लोकसभा चुनाव में NDA गठबंधन 361-401 सीट NDA जीतेगी। एक्सिस माय इंडिया का अनुमान था कि INDI गठबंधन 133-166 सीट जीतेगा। भाजपा के लिए एक्सिस माय इंडिया ने अनुमान लगाया था कि वः उत्तर प्रदेश में 66-70 के बीच सीट जीत सकती है। यह अनुमान भी गलत साबित हुआ है।

NDA को मंगलवार को आए नतीजों में 290-295 के बीच सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं जबकि INDI गठबंधन को 230-35 सीट मिलती दिखाई दे रही हैं। भाजपा को उत्तर प्रदेश में 32-24 सीट मिलती दिख रही हैं। ऐसे में एक्सिस माय इंडिया के अनुमान गलत साबित हुए हैं।

प्रदीप गुप्ता ने स्वयं माना है कि तीन राज्यों में उनका एग्जिट पोल एकदम गलत रहा है जिससे नतीजों में बदलाव आया। प्रदीप गुप्ता ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 66-67 की जगह 30-35 सीट ही मिलती दिख रही हैं, जो कि कम हैं और अनुमानों को गलत सिद्ध करती हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल को लेकर बताया था कि यहाँ भाजपा को 26-31 सीट मिलनी चाहिए जबकि यहाँ 11 सीट ही मिली, यहाँ भी अनुमान गलत साबित हुआ। इसके अलावा महाराष्ट्र में भी NDA को 28 सीट मिलने की बात कही गई थी, जबकि उसे मिली 20 ही सीट।

प्रदीप गुप्ता पाने एग्जिट पोल्स को लेकर काफी गभीर रहे हैं। इससे पहले 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल के सही साबित होने पर वह लाइव टीवी पर नाचे भी थे। वह इंडिया टुडे के एंकर राजदीप सरदेसाई के साथ नाचे थे। उनके अनुमान के अनुसार ही दिल्ली में AAP में बड़ी जीत हासिल की थी।

जेल में ही रहेंगे मनीष सिसोदिया; सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज की जमानत अर्जी, पहले उच्च न्यायालय और ट्रायल कोर्ट से मिल चुकी है निराशा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (4 जून 2024) को दिल्ली शराब घोटाला केस में आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया को जमानत देने से इनकार कर दिया। मनीष सिसोदिया पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। हालाँकि कोर्ट ने पूर्व उपमुख्यमंत्री को नए सिरे से जमानत अर्जी डालने की छूट दी है। मनीष सिसोदिया की तरफ से अदालत में अभिषेक मनु सिंघवी ने बहस की।

बार एन्ड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जमानत अर्जी की सुनवाई न्यायमूर्ति अरविन्द कुमार और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की बेंच में हुई। मनीष सिसोदिया की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उनका मुवक्किल लगभग 15 महीनों से जेल में हैं और अभी ट्रायल भी शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट राजनैतिक रूप से संवेदनशील मामलों को सही समय पर नहीं निबटाती है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की स्वतंत्रता पर भी प्रश्नवाचक चिन्ह लगाया है। बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया और जमानत देने से इनकार कर दिया। मनीष सिसोदिया की जमानत अर्जी ख़ारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उनको फिर से गुण-दोष के आधार पर जमानत अर्जी दाखिल करने का अधिकार है।

हालाँकि, आदेश में यह स्पष्ट नहीं हुआ कि नए सिरे से जमानत अर्जी दाखिल करने के लिए मनीष सिसोदिया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएँ या ट्रायल कोर्ट का। सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि मनीष सिसोदिया के खिलाफ चल रही जाँच में 3 जुलाई 2024 तक चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी।

बता दें कि मनीष सिसोदिया 26 फरवरी 2023 को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद से वे जेल में हैं। वहीं, उनकी पत्नी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। इस मामले में जमानत के लिए उन्होंने ट्रायल कोर्ट और बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल की थी। हालाँकि, दोनों ही अदालतों में उनकी याचिका ख़ारिज हो चुकी है।

BJP की सीटें घटती देख पाकिस्तान में खुशी, इमरान खान के मंत्री रहे फवाद बोले- भारत ने नरेंद्र मोदी की विचारधारा को खारिज किया, राहुल गाँधी जीत गए

भारत के लोकसभा चुनावों में एनडीए की घटती सीटों को देखते हुए पाकिस्तान के लोग इसमें ज्यादा दिलचस्पी ले रहे है। अभी तक सामने आ रहे नतीजों की तस्वीर भाजपा की स्थिति को देखते हुए पूर्व मंत्री फवाद चौधरी ने खुशी जाहिर की है।

पूर्व मंत्री फवाद चौधरी ने कहा है कि उनको पूरा विश्वास था कि भारत की जनता नरेंद्र मोदी और उनकी विचारधारा को खारिज कर देगी और भाजपा को हराएगी। फवाद चौधरी ने ट्वीट करते हुए लिखा,

“भारतीय मतदाताओं पर हमेशा से विश्वास रहा है कि वे अतिवादियों और नफरत फैलाने वालों को खारिज कर देंगे। नतीजों से साफ नजर आ रहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कितनी मुश्किल से लोकसभा पहुँच रहे हैं। दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी अपनी दोनों सीट जीत रहे हैं।”

बता दें कि इससे पहले भी फवाद चौधरी ने भारत के लोकसभा चुनावों को लेकर कमेंट किया था। अपने ट्वीट में उन्होंने राहुल गाँधी को फायर का चिह्न देकर अच्छा नेता बताया था। बाद में इस ट्वीट पर भारत में खूब बवाल हुआ था। फवाद ने मई माह की शुरुआत में कमेंट करते हुए कहा था कि वो भारत की राजनीति को हमेशा से फॉलो करते हैं और यही चाहते हैं कि मोदी को छोड़कर कोई भी सत्ता में आए।

उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार की नीतियों से मुल्कों के बीच शांति प्रभावित हुई है। उनका मानना ये था कि जो कोई भी नरेंद्र मोदी की मुखालफत करता है उसके सत्ता में आने से कोई आपत्ति नहीं है।

मुस्लिमों का मिजाज कैसा? देश की 15 इस्लामी बहुल सीटों में से केवल 1 पर बीजेपी आगे, जानिए अन्य 14 सीटें किसके हाथ

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे लगभग साफ हो चुके हैं। बीजेपी की अगुवाई में एनडीए पूर्ण बहुमत हासिल करती दिख रही है। बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है। इस बीच, हम आपको बता रहे हैं देश की उन 15 लोकसभा सीटों का हाल, जहाँ मुस्लिम मतदाताओं का दबदबा है। ऐसी सीटों में जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल, बिहार, केरल और तेलंगाना की लोकसभा सीटे हैं। मुस्लिम मतदाताओं की बाहुल्य वाली 15 लोकसभा सीटों में महज 1 सीट पर बीजेपी को जीत मिली है, तो एक सीट निर्दलीय ने जीती है। हम आपको एक-एक कर ऐसी सभी 15 सीटों का हाल बता रहे हैं।

1- बारामूला (जम्मू-कश्मीर)

जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की बारामूला लोकसभा सीट पर 95 से 100% मतदाता मुस्लिम हैं। यहाँ से निर्दलीय प्रत्याशी अब्दुल राशिद शेख ने 4 लाख 57 हजार 298 मत हासिल किए हैं और वो जीत की ओर हैं। दूसरे नंबर पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला हैं। उमर अब्दुल्ला को 2 लाख 56 हजार 239 वोट मिले हैं। उन्हें 2 लाख 01 हजार 059 वोटों से हार मिली है।

2- श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर)

जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की श्रीनगर लोकसभा सीट पर 95 से 100% मतदाता मुस्लिम हैं। इस सीट से नेशनल कॉन्फ्रेंस के आगा सैय्यद रुहुल्लाह मेहंदी को कुल 3 लाख 42 हजार 328 से अधिक मत मिले हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के वहीद उर रहमान पारा पर 1 लाख 80 हजार 272 वोटों से बढ़त बना रखी थी। समाचार लिखे जाने तक वहीद को 1 लाख 62 हजार 056 मत मिले थे।

3- अनंतनाग (जम्मू-कश्मीर)

जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की अनंतनाग लोकसभा सीट पर भी 95-100 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं। यहाँ पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के मियाँ अल्ताफ अहमद को 5 लाख 17 हजार 489 वोट मिल चुके हैं। वो पीडीपी के महबूबा मुफ्ती से 2 लाख 79 हजार 279 वोटों से आगे चल रहे थे। समाचार लिखे जाने तक महबूबा मुफ्ती को 2 लाख 38 हजार 210 मत मिले थे।

4- लक्षद्वीप

केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप की इस लोकसभा सीट पर 95 से 100% मुस्लिम मतदाता हैं। यहाँ कॉन्ग्रेस पार्टी के मुहम्मद हमदुल्लाह सैयद 25 हजार 726 वोट पाकर सबसे आगे हैं। दूसरे नंबर पर एनसीपी-शरद पवार पार्टी के मोहम्मद फैसल हैं, जो निवर्तमान सांसद हैं। तीसरे नंबर पर एनसीपी के यूसुफ टीपी को महज 201 मत मिले।

5-किशनगंज (बिहार)

बिहार की किशनगंज लोकसभा सीट पर 65 से 70% मुस्लिम मतदाता हैं। यहाँ कॉन्ग्रेस के मोहम्मद जावेद 2 लाख 39 हजार 927 वोट पाकर सबसे आगे चल रहे थे। जेडीयू के मुजाहिद आलम 2 लाख 14 हजार 275 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर थे। तीसरे नंबर पर एआईएमआईएम के अख्तरुल इमाम भी 2 लाख से ज्यादा मत पाकर तीसरे नंबर पर चल रहे थे।

6-मालदा दक्षिण (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल की मालदा दक्षिण लोकसभा सीट पर 55 से 60% मुस्लिम मतदाता हैं। इस सीट पर कॉन्ग्रेस के इशा खान चौधरी को 5 लाख 26 हजार 363 मत हासिल हुए। बीजेपी की निर्भया दीवी कही जाने वाली श्रीरूपा मित्रा चौधरी को 4 लाख 14 हजार से अधिक मत मिले। तीसरे नंबर पर टीएमसी के शहनवाज अली रैहान रहे।

7- जंगीपुर (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल की जंगीपुर लोकसभा सीट पर 60 से 65% मतदाता मुस्लिम हैं। यहाँ से टीएमसी के खलीलुर रहमान को 4.40 लाख से अधिक मत मिल चुके थे। वो कॉन्ग्रेस के मुर्तजा हुसैन बोकुल से 1 लाख से अधिक वोट से आगे चल रहे थे। बीजेपी के धनंजय घोष 2.74 लाख मतों के साथ तीसरे स्थान पर चल रहे थे।

8- पोन्नानी (केरल)

केरल की पोन्नानी लोकसभा सीट पर 65 से 70% मुस्लिम मतदाता हैं। यहाँ से इंडियन नेशनल मुस्लिम लीग के डॉ एमपी अब्दुस्समद समदनी को 5.50 लाख से अधिक वोट मिले। सीपीआई के केएस हमला उनसे 2.36 लाख से अधिक वोट से पीछे रहे। तीसरे नंबर पर बीजेपी की एडवोकेट निवेदिता रहीं।

9-मलप्पुरम (केरल)

केरल की मलप्पुरम लोकसभा सीट पर 65 से 70% मुस्लिम मतदाता हैं। यहाँ से भी इंडियन नेशनल मुस्लिम लीग ने जीत हासिल की। मुस्लिम लीग के मोहम्मद बशीर को 6.39 लाख से अधिक मत मिल चुके थे। दूसरे नंबर पर सीपीआई-एम के वी वसीफ को 3.41 लाख से अधिक मत मिल चुके थे। बीजेपी के इकलौते मुस्लिम कैंडिडेट डॉ अब्दुल सलाम को महज 84 हजार से कुछ अधिक मत मिले थे।

10-हैदराबाद (तेलंगाना)

कुल 60 से 65% प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं वाली हैदराबाद लोकसभा सीट पर असदुद्दीन ओवैसी लगातार जीत दर्ज करते आ रहे हैं। उन्होंने इस चुनाव में भी 6.58 लाख से अधिक वोट हासिल किए। समाचार लिखे जाने तक वो बीजेपी की माधवी लता से लगभग दोगुना मत हासिल कर चुके थे। कॉन्ग्रेस प्रत्याशी को यहाँ से महज 62 हजार से थोड़े अधिक वोट मिले थे।

11- धुबरी (असम)

असम की धबरी लोकसभा सीट पर 55 से 60% मुस्लिम मतदाता हैं। इस सीट पर कॉन्ग्रेस के रकीबुल हुसैन को करीब 11 लाख मत मिल चुके थे। उन्होंने एआईयूडीएफ के मोहम्मद बदरुद्दीन अजमल से तीन गुने से भी अधिक मत हासिल किए। अगप के मुस्लिम कैंडिडेट को भी यहाँ 3 लाख से अधिक मत मिले।

12- करीमगंज (असम)

असम के करीमगंज लोकसभा सीट पर 55 से 60% मुस्लिम मतदाता हैं। इस सीट पर बीजेपी के कृपानाथ मल्लाह 2.75 लाख से अधिक मत पाकर आगे चल रहे थे। कॉन्ग्रेस के हाफिज राशिद अहमद 2.68 लाख से अधिक मत पाकर दूसरे स्थान पर थे।

13-बहरामपुर (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल की चर्चित बहरामपुर लोकसभा सीट पर 50 से 55% मुस्लिम मतदाता हैं। उन्होंने टीएमसी के यूसुफ पठान के पक्ष में जमकर वोटिंग की है। समाचार लिखे जाने तक 4.76 लाख से अधिक मत पाकर कॉन्ग्रेस के अधीर रंजन चौधरी पर 70 हजार से अधिक मतों से बढ़त बना चुके थे। बीजेपी कैंडिडेट डॉ निर्मल कुमार साहा साढ़े 3 लाख से अधिक मत पाकर तीसरे स्थान पर थे।

14- बरपेटा (असम)

असम की बरपेटा लोकसभा सीट पर 55 से 60% मुस्लिम मतदाता हैं। यहाँ असम गण परिषद के फाणी भूषण चौधरी 7 लाख ज्यादा मतों के साथ सबसे आगे थे। कॉन्ग्रेस के दीप बायन 5 लाख से ज्यादा वोट पाकर दूसरे नंबर पर थे। सीपीआई-एम के मनोरंजन तालुकदार 76 हजार 120 वोट पा चुके थे और तीसरे नंबर पर चल रहे थे।

15- मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल की मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट पर 70 से 75% मतदाता मुस्लिम हैं। यहाँ से टीएमसी के अबु ताहेर खान को 5 लाख से अधिक मत मिले थे और वो अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सीपीआई-एम के मोहम्मद सलीम से 1 लाख से अधिक वोटों से बढ़त बनाए हुए थे। बीजेपी के गौरी शंकर घोष 2 लाख से अधिक मत पा चुके थे।

डायरेक्ट धमकी दे रही कॉन्ग्रेस, IAS और ECI को कहा – ‘याद रखें कि सरकार बदल रही, बर्दाश्त नहीं किया जाएगा’: EVM के बाद अब DM वाला रोना

लोकसभा चुनाव 2024 की मतगणना के परिणाम जैसे-जैसे जारी हो रहे हैं, कॉन्ग्रेस पार्टी धमकी पर उतर आई है। कॉन्ग्रेस सोशल मीडिया का सहारा लेकर न सिर्फ जिलों के DM, बल्कि चुनाव आयोग तक को हड़का रही है। भले ही पार्टी के लिए 100 सीटें भी आफत हों, लेकिन अपनी जीत का दावा करते हुए कॉन्ग्रेस पार्टी गलतबयानी कर रही है। पार्टी के कम्युनिकेशन इंचार्ज जयराम रमेश, जो राहुल गाँधी के सलाहकार भी हैं, वो इसमें सबसे आगे हैं।

कॉन्ग्रेस पार्टी ने बिना किसी सबूत के दावा किया कि उत्तर प्रदेश के महराजगंज, बाँसगाँव, मेरठ और मुजफ्फरनगर सीटों पर जिलाधिकारियों को फोन कर-कर के भाजपा उम्मीदवार को जबरदस्ती जिताने का दबाव बनाया जा रहा है। जयराम रमेश ने प्रशासनिक अधिकारियों को धमकाते हुए कहा कि वो ये याद रखें कि सरकार बदल रही है और लोकतंत्र के साथ ये खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही सांसद जयराम रमेश ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को टैग भी किया।

कॉन्ग्रेस पार्टी ने भी इस ट्वीट का स्क्रीनशॉट लेकर अपने फेसबुक हैंडल पर शेयर किया। जयराम रमेश ने ये तक दावा कर दिया कि बिहार और उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर काउंटिंग बिलकुल धीमे हो रही है, साथ ही लिखा कि ये पूरी तरह से असामान्य है। उन्होंने चुनाव आयोग से सवाल दागा कि चुनाव आयोग और उसकी वेबसाइट पर नतीजे उस गति से क्यों नहीं अपडेट किया जा रहा है? साथ ही दावा किया कि 2 घंटे से ये प्रक्रिया एकदम धीमी है।

अधिकारियों-चुनाव आयोग को जयराम रमेश की धमकी

बता दें कि चुनाव आयोग की वेबसाइट पर हमेशा से नतीजों को अपडेट किए जाने में थोड़ी देरी आती है। जबकि जयराम रमेश का कहना है कि कहीं से आदेश आया है कि जानबूझकर ऐसा किया जाए। इससे पहले बलिया से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार सनातन पांडेय ने कहा था कि अगर उनकी हार हुई तो DM की लाश बाहर आएगी। लालू यादव की पार्टी RJD ने इस बयान की तारीफ़ की थी। अब कॉन्ग्रेस पार्टी अधिकारियों और चुनाव आयोग को धमका रही है।

‘नीतीश कुमार से बढ़िया PM कौन हो सकता है’: BJP की सीटें घटती देख जदयू MLC खालिद अनवर ने छेड़ा नया राग, ‘सुशासन बाबू’ को INDI से डिप्टी PM पद ऑफर किए जाने के भी चर्चे

देश में लोकसभा चुनाव के रुझान अब परिणामों में बदलने लगे हैं। भाजपा लोकसभा परिणामों में सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। भाजपा देश 240 से अधिक सीटों पर देश में जीत रही है। कॉन्ग्रेस का आँकड़ा भी 100 के आसपास है। देश में NDA गठबंधन सरकार के संकेत हैं। इस बीच नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री बनने की बात भी उठ गई है।

इस बीच NDA गठबंधन में शामिल JDU के नेता डॉ खालिद अनवर ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे योग्य व्यक्ति बताया है। JDU के MLC डॉ खालिद अनवर ने मीडिया से कहा, “नीतीश कुमार से बढ़िया प्रधानमंत्री कौन हो सकता है, नीतीश कुमार ने जिस तरह बिहार को आगे बढ़ाया है, उन्होंने कृषि मंत्री रहने के दौरान देश को आगे बढ़ाया, उसी रोडमैप पर देश आगे बढ़ रहा है। नीतीश कुमार पुराने राजनेता हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “वह लोकतांत्रिक संस्थाओं की इज्जत करते हैं। JDU अभी NDA गठबंधन का हिस्सा है। नीतीश कुमार को लोग पहले भी प्रधानमंत्री बनाना चाहते थे। लेकिन अब इस पर फैसला बाद में होगा।”

इस बीच यह भी खबर आई है कि नीतीश कुमार को INDI गठबंधन की तरफ से उपप्रधानमंत्री पद की पेशकश की गई है। उनसे INDI गठबंधन में शामिल होने का आग्रह किया गया है। हालाँकि, इस बात की पुष्टि अभी आधिकारिक तौर पर नहीं हो गई है। गौरलतब है कि 2024 लोकसभा चुनाव में NDA को बहुमत हासिल हुआ है। उसे लगभग 300 सीटें हासिल हुई हैं।

NDA की तरफ से अब सरकार बनाने पर मंथन चल रहा है। NDA गठबंधन के भीतर JDU की 12 सीटें हैं। उसने 17 में से 12 सीट जीती हैं और NDA सरकार बनाने के लिए 272 के बहुमत के आँकड़े में महत्वपूर्ण सहयोगी है। JDU लोकसभा चुनाव से कुछ दिन पहले ही NDA में शामिल हुई थी। वह बिहार में भी भाजपा के साथ सत्ता में है। वह इससे पहले INDI गठबंधन का हिस्सा थी और बिहार में RJD के साथ सरकार में थी।

बच्चों के झगड़े में भड़क गई मुस्लिम भीड़, अंजलि के घर पर पत्थरबाजी: घंटों सहमा रहा बरेली का हिंदू परिवार

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में सोमवार (3 जून 2024) को साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ एक हिन्दू परिवार पर मुस्लिम भीड़ द्वारा पत्थरबाजी की गई है। इस दौरान महिलाओं और बच्चों को भी निशाना बनाया गया। डर के कारण पीड़ित परिवार के लोग काफी देर तक खुद को घर में बंद रखा। पीड़ित परिवार एवं हिंदूवादी संगठनों ने हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना बरेली जिले के थाना क्षेत्र फरीदपुर की है। नई बस्ती रेशम बाग़ इलाके की रहने वाली अंजलि नाम की महिला ने सोमवार को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पीड़िता ने बताया कि उसके घर के आसपास मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं। सोमवार को उसका बेटा घर के बाहर खेल रहा था। इस दौरान उसकी मुस्लिम समुदाय के कुछ बच्चों से कहासुनी हो गई।

शिकायत में महिला ने आरोप लगाया है कि बच्चों की इस कहासुनी के बीच कुछ ही देर में मुस्लिम पक्ष के लोग जमा हो गए और उन्होंने अंजलि के घर पर हमला कर दिया। हमलावर भीड़ अंजलि के घर में घुसने पर आमादा थी। इस दौरान दर्जनों लोगों ने एकजुट होकर अंजलि के घर पर पत्थरबाजी की।

खुद को बचाने के लिए पीड़िता का परिवार घंटों घर को बंद करके बच्चों सहित दुबका रहा। घर से ही पीड़िता ने बाहर किसी काम से गए अपने पति को कॉल किया। बाद में मामले की सूचना पुलिस को मिली। पुलिस ने फ़ौरन ही घटनास्थल पर पहुँच कर हालात को काबू किया। पीड़िता की तहरीर पर केस दर्ज कर लिया गया है।

पीड़िता के साथ विश्व हिन्दू परिषद ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। विहिप के नगर अध्यक्ष सोमपाल राठौड़ ने कहा है कि अगर आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो हिन्दू संगठन सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। घटना के बाद कई हमलावर फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस ने हमलावरों को चिन्हित कर के गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए हैं।

‘राजनीति के भगवान हैं PM नरेंद्र मोदी’: कौन है वो ‘सुप्रीम स्टार’ जिसने केरल में पहली बार लहराया भगवा, बोले – चमत्कार तो होना ही था

दक्षिण भारतीय राज्य केरल में पहली बार भगवा लहराया है। मलयालम फिल्मों के दिग्गज अभिनेता सुरेश गोपी केरल के मध्य में स्थित त्रिशूर लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर सांसद चुन लिए गए हैं। यहाँ भाजपा के पक्ष में माहौल बनना बहुत बड़ी बात है, क्योंकि त्रिशूर जिले की बात करें तो राज्य का लगभग 13% क्षेत्रफल और 9% जनसंख्या इसके हिस्से आती है। ये पहली बार हो रहा है जब केरल में भाजपा का कोई सांसद जीता है, राज्य में आने वाले विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को इसका फायदा मिलेगा।

खबर लिखे जाने तक भाजपा के सुरेश गोपी ने 4.12 लाख वोट हासिल किए थे, जबकि राज्य के सत्ताधारी पार्टी CPI के उनके प्रतिद्वंद्वी VS सुनीलकुमार 3.37 लाख वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहें। वहीं कॉन्ग्रेस के K मुरलीधरन को 3.28 लाख वोट मिले और वो तीसरे स्थान पर रहे। सुरेश गोपी इस तरह लगभग 75,000 वोटों से आगे हैं। 66 वर्षीय सुरेश गोपी पिछले 38 वर्षों से मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं और उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है।

सुरेश गोपी ने इस विजय के बाद स्पष्ट कहा कि ये चमत्कार आसन्न था। उन्होंने कहा कि उन्हें सिर्फ त्रिशूर ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य के विकास के लिए काम करना है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को लगता है ये चमत्कार है, तो चमत्कार तो होना ही था। उन्होंने कहा कि इस जीत का प्रभाव आने वाले चुनावों में भी देखने को मिलेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘राजनीतिक भगवान’ करार दिया, साथ ही उन्हें और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को अपना सुपरहीरो बताया।

सुरेश गोपी 2006 के बाद से फिल्म इंडस्ट्री में कम सक्रिय हैं, लेकिन वो फ़िल्में करते रहते हैं। 2016-2022 तक वो राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत राज्यसभा सांसद भी रहे हैं। जनवरी 2024 में उनकी बेटी की शादी में आशीर्वाद देने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहुँचे थे। वो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के मलयालम वर्जन का 6 सीजन भी होस्ट कर चुके हैं। सुरेश गोपी अपने छात्र जीवन में वामपंथी संगठन SFI के लिए सक्रिय रहे हैं। वो त्रिशूर से 2019 में लोकसभा और 2021 में विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। 2021 में मात्र 3806 वोटों से उनकी हार हुई थी।