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निकाह, तीन तलाक, हलाला, फिर निकाह, फिर से तीन तलाक… दहेज़ में नहीं मिली कार तो महिला को ससुराल वालों ने नंगा कर के पीटा, नवजात बच्चा भी मर गया

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से तीन तलाक और हलाला का मामला सामने आया है। यहाँ लड़की के अब्बा ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी को ससुराल में नंगा कर के पीटा गया है। पीड़िता को दहेज़ के लिए भी शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी गई है। देखरेख के अभाव में पीड़िता के बच्चे की भी मौत हो गई। शनिवार (1 जून, 2024) को पुलिस ने महिला के शौहर सहित कुल 6 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। मामले की जाँच की जा रही है।

यह मामला पीलीभीत जिले के थाना क्षेत्र पूरनपुर का है। शनिवार को यहाँ पीड़िता के अब्बा ने थाने में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया कि उनकी बेटी का निकाह 21 सितंबर, 2017 को खुर्शीद खाँ से हुआ था। निकाह में खुर्शीद को दहेज़ में बाइक और अन्य घरेलू सामान दिए गए थे। निकाह के कुछ दिनों बाद ही दुल्हन पर घर से 4 पहिया वाहन लाने का दबाव बनाया जाने लगा। कार के लिए पीड़िता को परेशान करने वालों में शौहर खुर्शीद के अलावा जेठ खुशनूद, ससुर फरमूद, ननद तरन्नुम और तबस्सुम के साथ नन्दोई मन्ना भी शामिल थे।

प्रताड़ना के इसी दौर में पीड़िता ने एक बच्चे को जन्म दिया। ससुराल में देखभाल न होने की वजह से बच्चा कुछ दिनों में बीमार हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई। बीमार बच्चे के इलाज का भी खर्च लड़की के अब्बा ने उठाया। कुछ दिनों के बाद खुर्शीद ने पीड़िता को 3 तलाक दे कर घर से बेदखल कर दिया। पीड़िता की प्रताड़ना यहीं खत्म नहीं हुई। 3 तलाक देने के बाद उसके ससुराल वालों ने पीड़िता का किसी अज्ञात व्यक्ति से हलाला करवाया। हलाला के बाद पीड़िता से खुर्शीद ने फिर निकाह किया और दहेज़ के लिए प्रताड़ना देने लगा।

शिकायतकर्ता ने आगे बताया कि 27 मई 2024 को खुर्शीद, खुशनूद, फरमूद, तरन्नुम, तबस्सुम और मन्ना ने पीड़िता को नंगा कर के बेरहमी से पीटा। पीड़िता का गला दबा कर मार डालने की भी कोशिश की गई। जैसे-तैसे महिला ने अपने आप को बचाया। बाद में खुर्शीद ने एक बार फिर से पीड़िता को तीन तलाक दिया और पुराने कपड़े पहना कर घर से भगा दिया। इन दौरान सभी आरोपितों द्वारा पीड़िता को कहीं भी मुँह खोलने या शिकायत करने पर जान से मार डालने की भी धमकी दी।

अपनी शिकायत में पीड़िता के अब्बा ने सभी आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। इन तहरीर पर खुर्शीद, खुशनूद, फरमूद, तरन्नुम, तबस्सुम और मन्ना को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली गई है। इन सभी पर IPC की धारा 498- A, 323 और 506 के साथ दहेज़ प्रतिषेध अधिनियम के सेक्शन 3/4 और ट्रिपल तलाक एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

राजनीतिक हिंसा के लिए कुख्यात बंगाल में चुनाव खत्म, फिर भी राज्य में ही रहेंगे 32000 जवान: क्या काबू में रहेंगे TMC के गुंडे, जानिए क्यों पहली बार लेना पड़ा यह फैसला

लोकसभा चुनाव 2024 का समापन हो चुका है। अब सिर्फ मतगणना, रुझानों और अंतिम परिणाम का इंतज़ार है। लगभग सभी Exit Polls ने भाजपा के पूर्ण बहुमत से सत्ता में आने का अनुमान लगाया है, ऐसे में I.N.D.I. गठबंधन के कैम्प में उदासी का माहौल है। इन सबके बीच 42 लोकसभा सीटों वाला पश्चिम बंगाल भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि यहाँ पहली बार ऐसा होगा जब भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरेगी। इन सबके बीच चुनावी हिंसा के लिए कुख्यात इस राज्य में इस बार भी वही हाल रहा।

पश्चिम बंगाल में सातों चरणों में मतदान हुए। चुनाव के बीच में ही संदेशखाली का मुद्दा भी छाया रहा। बशीरहाट के इस क्षेत्र में सत्ताधारी TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) नेता शाहजहाँ शेख और उसके गुर्गों पर जनजातीय समाज की महिलाओं के यौन शोषण के आरोप लगे, उसकी गिरफ़्तारी हुई और राज्य सरकार को उसे संरक्षण देते हुए देखा गया। रामनवमी के त्योहार के ठीक बाद चुनाव शुरू हो गया, ऐसे में पश्चिम बंगाल में मुस्लिम ध्रुवीकरण का खेल भी जम कर खेला गया।

ज़्यादा पीछे जाने की ज़रूरत नहीं है, आप अंतिम चरण के मतदान को ही ले लीजिए। कोलकाता के जाधवपुर के भंगार स्थित सतौलिया में हिंसा हुई। हिंसा भाजपा-TMC के बीच नहीं थी, बल्कि फुरफुरा शरीफ दरगाह के मुखिया अब्बास सिद्दीकी की पार्टी ISF और राज्य में 34 वर्षों तक सत्ता में रही CPI(M) समर्थकों के बीच हुई। साउथ 24 परगना के कुलतली में तो उपद्रवी भीड़ पोलिंग स्टेशन के बहतर ही घुस गई और EVM को तालाब में फेंक दिया।

संदेशखाली में मामला इतना बढ़ गया कि स्थानीय महिलाओं को सुरक्षा के लिए बाँस की डंडियाँ लेकर सड़क पर उतरना पड़ा। उनका कहना था कि शाहजहाँ शेख से उन्हें अब भी खतरा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक के लोकसभा क्षेत्र डायमंड हार्बर में भाजपा समर्थकों के साथ TMC के गुंडों ने हिंसा की। जाधवपुर के गांगुली बागान में TMC वालों ने लेफ्ट वालों को पीटा। साउथ 24 परगना के इतखोला में मीडियाकर्मी भी पत्थरबाजी की चपेट में आ गए।

ये सिर्फ अंतिम चरण की घटनाएँ थीं, वो भी जो मीडिया में आ गईं, तो सोचिए पश्चिम बंगाल में सातों चरणों में किस माहौल में चुनाव हुआ है। और किस माहौल में वहाँ मतगणना होगी, किस माहौल में भाजपा कार्यकर्ता खुद को पाएँगे जब उनकी पार्टी सीटों की बढ़त लेगी। इसकी शुरुआत भी हो गई है। नदिया जिले में हाल ही में भाजपा में शामिल होने वाले हफीजुल शेख को मार डाला गया। चाय की टपरी पर उनके सिर में गोली मारी गई। उनका सिर क्षत-विक्षत हो गया।

यही कारण है कि भले ही चुनाव संपन्न हो गए, लेकिन पैरामिलिट्री की कंपनियाँ पश्चिम बंगाल में अभी अगले कुछ दिन भी डटी रहेंगी। ‘सेन्ट्रल आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स’ (CAPF) की 400 कंपनियाँ राज्य में तैनात की गई हैं। 4 जून को भले ही मतगणना पूरी हो जाए और परिणाम आ जाएँ, अगले 2 हफ्ते तक जवान यहाँ रहेंगे। 19 जून तक इन्हें यहाँ मोर्चा सँभालने को कहा गया है। 2023 में संपन्न हुए पंचायत चुनाव में भी 50 से अधिक लोग मारे गए थे।

पश्चिम बंगाल में ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है, अगर हम 2021 में हुए विधानसभा चुनावों को देखें तो उसमें भी CAPF की 1000 कंपनियाँ तैनात की गई थीं। तीसरे चरण के बाद 200 नई कंपनियाँ बुलाई गईं, वहीं 71 अतिरिक्त कंपनियाँ चौथे चरण के बाद बुलानी पड़ी। ऐसे में समझ जाइए कि चुनाव आयोग को पश्चिम बंगाल में मतदान संपन्न करवाने में कितनी दिक्कतें आती हैं। चुनाव भी 8 चरणों में कराने पड़े थे। इसी तरह 2019 का लोकसभा चुनाव भी हिंसा से अछूता नहीं रहा था।

पहली बार भाजपा ने पश्चिम बंगाल में 18 सीटें प्राप्त की, जबकि TMC 22 सीटें जीत कर सबसे बड़ी पार्टी बनी। लेकिन, बड़ी बात ये थी कि भाजपा 2 सीटों से 18 पर पहुँची थी, जबकि तृणमूल कॉन्ग्रेस 34 से 22 पर आ गई। अब पश्चिम बंगाल में मतगणना व उसके बाद के संभावित माहौल को देखते हुए संवेदनशील इलाकों को चिह्नित कर वहाँ सुरक्षा बढ़ाई जा रही है। पश्चिम बंगाल ऐसा राज्य है, जहाँ सिर्फ चुनाव के दौरान नहीं बल्कि उसके बाद भी जबरदस्त हिंसा होती है।

बड़ी बात ये है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कोई इस्तीफा नहीं माँग रहा, न ही कोई उन्हें तानाशाह बता रहा। न ही उनके खिलाफ YouTube पर ध्रुव राठी जैसे लोग वीडियो बना रहे, न ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान पश्चिम बंगाल के माहौल को लेकर ख़बरें प्रकाशित कर रहे। TV पर बुद्धिजीवियों को भी इस पर चर्चा करते हुए नहीं देखा गया। हाँ, जो भाजपा केंद्र में सत्ता में है और जिसके कार्यकर्ता मारे जा रहे हैं, उसे ज़रूर तानाशाह बता-बता कर एजेंडे के तहत एक अलग नैरेटिव फैलाया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार के भी कई मामले सामने आ रहे हैं। शाहजहाँ शेख भी राशन घोटाले में फँसा हुआ है, उसे गिरफ्तार करने गई ED की टीम पर हमला हुआ था। कलकत्ता हाईकोर्ट ने भर्ती घोटाले के बाद 25,000 से भी अधिक नव-नियुक्त शिक्षकों को हटा दिया। ऐसे ही 2010 के बाद जारी हुए OBC प्रमाण-पत्रों को रद्द कर दिया गया, क्योंकि मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए इसमें कई मुस्लिम जातियों को जोड़ दिया गया था। पश्चिम बंगाल ‘कट मनी’ वाले घूस के लिए भी जाना जाता है, ऐसे में भ्रष्टाचार वहाँ व्यवस्थागत हो चुका है।

लेफ्ट के समय ही पश्चिम बंगाल चुनावी हिंसा का जब बन गया था, TMC ने इस कल्चर को जोरदार तरीके से आगे बढ़ाया। TMC के नेताओं और इसके कैडर को समझना चाहिए कि ये लोकतांत्रिक चुनाव है, कोई युद्ध नहीं। यहाँ उँगली का इस्तेमाल कर के बटन दबाया जाता है, ट्रिगर नहीं दबाया जाता। यहाँ अपने मताधिकार का प्रयोग करना है, किसी का सर नहीं फोड़ना। जनादेश को स्वीकार किया जाता है, हार होने पर हिंसा नहीं की जाती। हिंसा की संस्कृति गलत है, ये इंसानों का काम नहीं।

BSF के पूर्व DG प्रकाश सिंह ने चुनाव आयोग के ताज़ा फैसले को समझाते हुए कहा है कि सामान्य परिस्थितियों में केंद्र में सरकार बन जाने और राज्य में प्रशासन राज्य सरकार के अधीन हो जाने के बाद केंद्र सरकार राज्य से सुझाव का इंतज़ार करती है कि वहाँ अर्धसैनिक बलों की ज़रूरत है या नहीं। प्रकाश सिंह का मानना है कि हालिया मामला असाधारण है, क्योंकि ECI ने ये आदेश दिया है। उनका कहना है कि सीटें TMC को ज़्यादा मिलें या BJP को, हिंसा की आशंका दोनों परिदृश्यों में है।

यानी, परिणाम जो भी हों लेकिन हिंसा की आशंका है ही है। हालाँकि, आशंका ये भी है कि केंद्रीय बलों का इस्तेमाल राज्य सरकार के अधीन रहता है, ऐसे में हिंसा की स्थिति में TMC सरकार इसका इस्तेमाल नहीं करती है तो सुरक्षा बलों के जवान Immobilised (अचल) अवस्था में रहेंगे। ऐसी परिस्थिति में क्या होगा, सवाल ये है? क्योंकि, हिंसा का आरोप सत्ताधारी दल पर है, अर्धसैनिक बलों का इस्तेमाल भी उनके हाथ में है। खैर, देखते हैं इस बार पश्चिम बंगाल के पिटारे में क्या है।

‘भिखमंगा पाक’ को कठपुतली की तरह नचा रहा चीन, बलोच जनता के दमन का बना रहा दबाव: चाहता है पाकिस्तानी फौज करे ऑपरेशन

आर्थिक रूप से कंगाल पाकिस्तान के भीतर अपने मार्च महीने में पाँच इंजीनियरों की मौत के बाद चीन लगातार पड़ोसी मुल्क पर दबाव बना रहा है वह उसके कहने पर चले। चीन के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल ही में पाकिस्तान के अधिकारियों के साथ बैठक की है जिसमें पाकिस्तान के भीतर चीनी लोगों की सुरक्षा पर बातचीत हुई। चीन पाकिस्तान की फ़ौज पर अपनी मर्जी चलाना चाह रहा है लेकिन पाकिस्तान इस बात को छुपाने में जोरशोर से लगा हुआ है।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि चीन ने पाकिस्तान से कहा है कि वह बलूचिस्तान में अपनी ही जनता के विरुद्ध ज़र्ब ए अज्ब की तरह एक आतंक विरोधी सैन्य ऑपरेशन चलाए। चीन का कहना है कि इससे यहाँ काम करने वाले उसके कामगार सुरक्षित महसूस कर पाएँगे। यह रिपोर्ट सबसे पहले पाकिस्तान के बिज़नस रिकॉर्डर अख़बार ने छापी थी और उसके बाद कई अन्य जगह भी यह बात सामने आई।

पाकिस्तान ने चीन की बलोच लोगों के विरुद्ध ऑपरेशन चलाने की माँग को नकार दिया है। इस खबर को बिजनेस रिकॉर्डर ने भी हटा दिया है। उस हटाई गई खबर के अनुसार, “योजना, विकास और विशेष पहल मंत्रालय के वरिष्ठ सूत्रों ने बिजनेस रिकॉर्डर को बताया कि चीन ने पाकिस्तान से एक और ज़र्ब-ए-अज्ब शुरू करने को कहा है।”

रिपोर्ट में बताया गया कि चीन के उप विदेश मंत्री सुन वेइडोंग ने पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के चीन दौरे से पहले बैठक की थी। सुन वेइडोंग ने इस दौरान चीनी हितों को साधने के लिए ज़र्ब ए अज्ब की जरूरत बताई। गौरतलब है कि बलोचिस्तान से गुजरने वाले चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) में काम करते हुए कई चीनी नागरिकों ने अपनी जान गँवाई है। बलोचिस्तान में रहने वाले लोगों ने इसे चीन का अवैध कब्जा बताया है और लगातार विरोध किया है।

स्थानीय लोगों के बढ़ते विरोध, पाकिस्तानी फ़ौज की पोस्ट पर लगातार होते हमलों के कारण चीन उससे खफा है। स्थानीय लोगों को यह भी शक है कि चीन पाकिस्तान से यह भी कह रहा है कि वह पाकिस्तानी फ़ौज हटाकर अपनी सेना लगा दे, यदि वह स्वयं रक्षा ना कर पाए। इससे यह बात भी साफ़ हो आएगी कि पाकिस्तान, चीन की कठपुतली बन कर रह जाएगा। यह भी सामने आया है कि चीन पाकिस्तान में अपने प्रोजेक्ट पर खुद की सेना लगाने की योजना भी बना रहा है।

यदि ऐसा होता है तो यह पाकिस्तान की संप्रभुता और उसकी फ़ौज की काबिलियत पर भी प्रश्न उठाएगा। चीन का यह पूरा प्रयास हालिया हमले के बाद ही सामने आया है। इस हमले में पाँच चीनी इंजीनियर मारे गए थे। इसके बाद चीन की कम्पनियों ने पाकिस्तान में अपना कामकाज रोक दिया था। चीन ने इसके बाद पाकिस्तान पर दबाव डाला था कि वह इन इंजीनियरों के परिवारों को 25 लाख डॉलर का मुआवजा दे।

इससे पहले 2016 में चीन जर्ब ए अज्ब ऑपरेशन की तारीफ़ कर चुका है। 2016 में पाकिस्तान में चीन के राजदूत रहे सुन वेइडोंग ने कहा था कि इस ऑपरेशन के कारण पाकिस्तान में सुरक्षा हालात बदले हैं। बताया गया है कि चीन के नागरिकों की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान ने 12,000 से अधिक अर्धसैनिक बल लगाए हैं।

स्थानीय जनसंख्या के नरसंहार की योजना थी ज़र्ब ए अज्ब

ऑपरेशन ज़र्ब-ए-अज्ब 15 जून 2014 को पाकिस्तान-अफ़गानिस्तान सीमा पर उत्तरी वज़ीरिस्तान प्रान्त में शुरू किया गया था। पाकिस्तान ने दावा किया था कि यह एक आतंकवाद विरोधी अभियान था। जबकि इस ऑपरेशन पर आरोप थे कि इससे पाकिस्तान समर्थक जिहादी समूह पनपे, स्थानीय लोगों को हत्याएँ हुई और पूरे इलाके में खून खराबा हुआ।

जर्मन मीडिया DW के अनुसार, पाकिस्तानी विशेषज्ञ और ओकलाहोमा विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय मामलों के असिस्टेंट प्रोफेसर अकील शाह ने बताया था कि पाकिस्तानी फ़ौज के आतंकवाद विरोधी अभियान में अंतर्विरोधी बातें हैं। शाह ने बताया कि फ़ौज पाकिस्तान में हमले करने वाले आतंकवादियों पर कार्रवाई करती है, लेकिन वह अपने दुश्मनों पर हमला करने वालों को संरक्षण देती है।

DW से बात करते हुए शाह ने बताया था, “फ़ौज ने टीटीपी के दुश्मन गुटों से लड़ाई लड़ी है, लेकिन वह भारत के खिलाफ आतंकवादी समूहों का इस्तेमाल करना जारी रखती है।” उन्होंने हक्कानी नेटवर्क और अफगान तालिबान का उदाहरण दिया, जिसने पाकिस्तान को अफगानिस्तान पर अपना प्रभाव बनाए रखने में मदद की, साथ ही लश्कर-ए-तैयबा, जो भारत के खिलाफ आतंकवादी हमलों की योजना बनाना और उन्हें अंजाम देना जारी रखता है।

अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने भी अपनी भारत यात्रा के दौरान यही बात कही थी। नई दिल्ली में केरी ने कहा था, “यह साफ़ है कि पाकिस्तान को अपने आतंकी समूहों के खिलाफ़ और अधिक कठोर कार्रवाई करने की आवश्यकता है जो आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े हैं।” उन्होंने पाकिस्तान से माँग की थी वह भारत में हमला करने वाले आतंकी को खत्म करने में सहायता करे ताकि दोंनो देशों के बीच शान्ति का वातावरण बन सके।

इस ऑपरेशन को लेकर कई विशेषज्ञों ने कहा था कि यह कभी आतंकियों को खत्म करने को लेकर चालू ही नहीं किया गया था। इस ऑपरेशन के दौरान पश्तूनों और बलोचों पर भी काफी अत्याचार हुए थे। बड़ी संख्या में लोगों को मारा गया था और काफी लोग गायब हो गए थे।

चीन के पाँच दिन के दौरे पर जा रहे PM शहबाज शरीफ

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ 4 से 8 जून तक चीन में रहेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है, क्योंकि वे विवादास्पद CPEC परियोजना के दूसरे चरण को शुरू करने की योजना बना रहे हैं।

इससे पहले इस महीने की शुरुआत में, पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने बीजिंग का दौरा किया और अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ बातचीत की। बैठक के दौरान, वांग ने पाकिस्तान में चीनी कर्मियों पर लगातार हो रहे आतंकवादी हमलों पर चिंता व्यक्त की और इस्लामाबाद से उनकी सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करने को कहा। इस पर पाकिस्तान ने कहा कि उसने देश में चीनी श्रमिकों की सुरक्षा के लिए 12,000-सदस्यीय अर्धसैनिक बल लगाया है।

नसीमुद्दीन ने बीवी का पहले गला घोंटा, फिर केरोसिन डाल जलाया, आखिर में अधजली लाश के किए 14 टुकड़े: 12 दिन बाद गिरफ्तार, सानिया के चाल-चलन पर था शक

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नसीमुद्दीन ने अपनी 22 वर्षीया बीवी सानिया खान की बेरहमी से हत्या कर दी। कत्ल के बाद उसने सानिया की लाश के कई टुकड़े किए और उन्हें कूड़े के डम्पिंग यार्ड में फेंक दिया। कत्ल की वजह आरोपित द्वारा अपनी बीवी के चरित्र पर शक करना बताया जा रहा है। वह पहले भी अपनी बीवी को लोगों के आगे नग्न घुमा चुका है। मृतका 21 मई 2024 से लापता थी। शनिवार (1 जून 2024) को पुलिस ने नसीमुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जाँच व अन्य कार्रवाई की जा रही है।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नसीमुद्दीन ने अपनी 22 वर्षीया बीवी सानिया खान की बेरहमी से हत्या कर दी। कत्ल के बाद उसने सानिया की लाश के कई टुकड़े किए और उन्हें कूड़े के डम्पिंग यार्ड में फेंक दिया। कत्ल की वजह आरोपित द्वारा अपनी बीवी के चरित्र पर शक करना बताया जा रहा है। वह पहले भी अपनी बीवी को लोगों के आगे नग्न घुमा चुका है। मृतका 21 मई 2024 से लापता थी। शनिवार (1 जून 2024) को पुलिस ने नसीमुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जाँच व अन्य कार्रवाई की जा रही है।

ऑटो ड्राइवर नसीमुद्दीन ने पूछताछ में बताया कि उसे लगता था कि उसकी बीवी का किसी और युवक से अफेयर था। 21 मई को उसने सानिया को कॉल करके भोपाल के एक स्थान पर बुलाया। यहाँ उसने सानिया का मोबाइल चेक किया तो उसमें एक वीडियो निकली। इस वीडियो को देख कर नसीमुद्दीन बहुत नाराज हुआ और अपनी बीवी को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। पिटाई के बाद आरोपित द्वारा गला घोंटने से सानिया की मौत हो गई। बीवी की हत्या के बाद नसीमुद्दीन ने उसका शव ठिकाने लगाने के लिए अपनी ऑटो में लाद लिया।

बताया जा रहा है कि लगभग 2 किलोमीटर बाद नसीमुद्दीन ने अपनी गाड़ी कूड़े के ढेर के पास खड़ी कर दी। यहाँ उसने सानिया की लाश को पहले केरोसीन से जलाया और बाद में अधजली लाश को 14 टुकड़ों में काट डाला। इन टुकड़ों को नसीमुद्दीन ने मिट्टी में दबाव की भी कोशिश की। गिरफ्तारी के बाद आरोपित ने अपनी बीवी की लाश के 14 टुकड़े बरामद करवाए। ये टुकड़े खोपड़ी, पैर और पसलियों के थे। इन मानव अंगों को जाँच के लिए पुलिस ने कब्ज़े में ले लिया है।

सानिया के ममेरे भाई अनस ने मीडिया से बात की। अनस के मुताबिक 12 साल पहले मृतका की माँ की मौत हो चुकी है। माँ के देहांत के बाद वह अपने नानी के घर पली-बढ़ी। 2020 में सानिया का निकाह ऑटो चलाने वाले नसीमुद्दीन से हुआ था। आरोप है कि निकाह के महज 5 दिनों बाद से ही नसीमुद्दीन बाइक की माँग को ले कर पीड़िता को परेशान कर रहा था। सानिया और नसीमुद्दीन को इस रिश्ते से एक बेटी हुई थी। लगभग ढाई महीने पहले खौलता हुआ पानी गिर जाने से बेटी की मौत हो गई थी। इसके बाद दोनों के रिश्तों में तल्खी आ गई थी। अनस ने यहाँ तक दावा किया है कि कुछ दिनों पहले नसीमुद्दीन ने गुस्से में पीड़िता को गाँव में निर्वस्त्र हो कर घूमने पर मजबूर किया था।

जिस अमान अहमद ने किया हिन्दू लड़की का रेप, मौलाना शाने आलम ने उसी से निकाह करवाया: गाजियाबाद पुलिस ने किया गिरफ्तार, 15 दिन से था फरार

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में पुलिस ने हिन्दू महिला को इस्लाम कबूल करवाने वाले मौलाना को गिरफ्तार किया है। मौलाना का नाम शाने आलम है। शाने आलम ने पीड़िता का रेप करने वाले युवक से ही उसका निकाह करवा दिया था। मौलाना लगभग लगभग 20 दिनों से फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 25 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया था। शाने आलम की गिरफ्तारी रविवार (2 जून 2024) को हुई है।

यह मामला गाजियाबाद के थानाक्षेत्र अंकुर विहार का है। यहाँ 16 मई को एक 18 वर्षीया हिन्दू लड़की ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में पीड़िता ने बताया था कि लगभग 4 महीने पहले वह एक फैक्ट्री में नौकरी करती थी। इसी फैक्ट्री में अनम नाम की एक अन्य मुस्लिम लड़की भी काम करती थी। दोनों में दोस्ती हो गई। एक दिन जब अनम काम पर नहीं आई तो उसके सहेली उसको खोजते हुए उसके घर पहुँच गई। यहाँ घर पर सिर्फ अनम का भाई अमान मिला। अमान ने पीड़िता से रेप किया और उसके बाद ब्लैकमेलिंग पर उतारू हो गया।

लगभग 2 माह पहले अमान पीड़िता को अपने साथ अमरोहा ले गया। यहाँ उन्हें मौलाना शाने आलम मिला जिसने उर्दू में लिखे 3 कागजातों पर पीड़िता के दस्तखत करवाए। इसके बाद मौलाना ने जबरदस्ती पीड़िता का इस्लामी तौर तरीकों से निकाह अमान से करवा दिया। लड़की का मूल नाम बदल कर कुलसुम रख दिया गया। इसके बाद अमान ने लड़की को 2 महीने तक अमरोहा की किसी गुमनाम जगह पर रखा। 2 महीने बाद वह लड़की को लेकर गाजियाबाद के DLF इलाके में शिफ्ट हो गया।

पीड़िता भी मूलतः गाजियाबाद के लोनी इलाके की रहने वाली थी। 14 मई को वह मौका पाकर अपने मायके भाग निकली। 16 मई को उसने आरोपित अमान और मौलाना शाने आलम के खिलाफ थाने में तहरीर दी। पुलिस ने इन दोनों पर IPC की धारा 376 के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/5(1) के तहत FIR दर्ज कर लिया। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। केस दर्ज करने के अगले ही दिन पुलिस ने 17 मई को अमान को गाजियाबाद से ही गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया था।

अमान की गिरफ्तारी और खुद पर केस दर्ज होने की बात जानकर 38 वर्षीय मौलाना शाने आलम फरार हो गया। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। आरोपित की तलाश में दबिश भी दी जा रही थी। रविवार (2 जून) को पुलिस को मौलाना की सटीक लोकेशन मिल गई। शाने आलम को पुलिस ने दबोच लिया। पूछताछ में शाने आलम ने अमान को अपना रिश्तेदार बताया। उन्होंने कहा कि अमान ने एक हिन्दू लड़की को ला कर उस से निकाह करवाने की गुजारिश की थी। मौलाना शाने आलम अमरोहा शहर के फिरदौस मस्जिद इलाके का रहने वाला है। जरूरी कानूनी कार्रवाई कर के उसे जेल भेज दिया गया है।

जिस महिला ने घूँसों से बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, उसने ‘सौतन’ की न्यूड तस्वीरें कर दी वायरल: गिरफ्तार करने आए अधिकारियों पर भी हमला, जानिए कौन है स्टेफी कोहेन

अमेरिका के फ्लोरिडा से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। प्रोफेशनल बॉक्सर और पॉवरलिफ्टिंग के क्षेत्र में वर्ल्ड रिकॉर्ड धारी स्टेफनी कोहेन ने अपने पूर्व बॉयफ्रेंड से बदला लेने के लिए उसकी वर्तमान गर्लफ्रेंड की न्यूड तस्वीरें वायरल कर दी। इसके लिए उसने अपने एक्स बॉयफ्रेंड का लैपटॉप हैक कर लिया। उसने उस लड़की को अपमानित करने और उसके बारे में दुनिया को बताने की मंशा से ऐसा किया। 32 वर्षीय स्टेफनी कोहेन पर अब मुकदमा चल रहा है।

स्टेफनी कोहेन पर आरोप लगाया गया है कि बिना अनुमति ने उसने अपने एक्स बॉयफ्रेंड के कम्प्यूटर का इस्तेमाल किया, साथ ही एक लड़की को ऑनलाइन यौन प्रताड़ना का निशाना बनाया और गिरफ़्तारी के समय हिंसा का सहारा लिया। स्टेफनी कोहेन मगरिकी जिस घर में अपने एक्स बॉयफ्रेंड के साथ रहती थी, वहीं जाकर उसने उसका लैपटॉप एक्सेस किया। मार्च 2022 में दोनों यहाँ साथ रहते थे। इंस्टाग्राम पर स्टेफी कोहेन के 10 लाख से भी अधिक फॉलोवर्स हैं, लेकिन उसने अपना अकाउंट प्राइवेट कर रखा है।

वो बतौर फिटनेस इन्फ्लुएंसर भी लोकप्रिय है। उसने कुछ कॉमन पासवर्ड्स का इस्तेमाल कर के अपने एक्स बॉयफ्रेंड के एप्पल आईक्लाउड का पासवर्ड गेस किया और उसमें से उसकी वर्तमान गर्लफ्रेंड की कई नंगी तस्वीरें निकाल ली। इसके बाद वेनेजुएला में जन्मी बॉक्सर ने एक चैट ग्रुप में इन तस्वीरों को शेयर किया, जिसमें कई लड़कियाँ मौजूद थीं। पुलिस की पूछताछ में उसने खुद कबूला कि वो पीड़िता को अपमानित करने की मंशा से ये सब कर रही थी।

नवंबर 2023 में ही स्टेफी कोहेन के एक्स बॉयफ्रेंड और उसकी वर्तमान गर्लफ्रेंड मियामी के डिटेक्टिव्स के समक्ष ये मामला लेकर गए थे। अब पुलिस ने आरोपित युवती को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया है। इस दौरान उसने सहयोग नहीं किया और भागने लगी। उसने एक अधिकारी के पाँव में हथकड़ी भी फँसा दी। किसी तरह हथकड़ी लगा कर उसे नियंत्रित किया गया। कोहेन को जमानत देते हुए एक्स बॉयफ्रेंड और उसकी गर्लफ्रेंड से दूर रहने को कहा गया है। इसके लिए उसे 3300 डॉलर (2.74 लाख रुपए) का बॉन्ड भरना पड़ा।

‘₹2500 करोड़ में CM, 500 करोड़ में मंत्री बनाती है BJP’: बेंगलुरु कोर्ट ने राहुल गाँधी को 7 जून को बुलाया, कहा- हर हाल में पेश हों

बेंगलुरु के एक कोर्ट ने आदेश दिया है कि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी 7 जून, 2024 को पेश हों। कोर्ट ने कहा है कि राहुल गाँधी को हर हाल में पेश होना होगा। कोर्ट ने भाजपा नेता द्वारा किए गए एक मुकदमे में यह आदेश दिया है। मामला 2023 विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा के विरुद्ध भ्रामक विज्ञापन चलाने से जुड़ा हुआ है।

बेंगलुरु के कोर्ट ने शनिवार (1 जून, 2024) को एक भाजपा नेता एस केशव प्रसाद द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे पर सुनवाई की। इस मुकदमे में कहा गया है कि कॉन्ग्रेस ने 2023 विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा को भ्रष्ट चलाने वाले विज्ञापन चलवाए जिनसे भाजपा की मानहानि हुई।

इस मामले में कर्नाटक प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी, मुख्यमंत्री सिद्दारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और राहुल गाँधी को आरोपित बनाया गया था। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सिद्दारमैया और शिवकुमार को जमानत दे दी। इस दौरान राहुल गाँधी नहीं पेश हुए। उनके ना पेश होने पर भाजपा नेता के वकील ने माँग की कि राहुल गाँधी के विरुद्ध गैर जमानत वारंट जारी किया जाए।

कोर्ट में राहुल गाँधी की तरफ से चुनावी व्यस्तताओं के चलते बेंगलुरु जाने में असमर्थता जताई गई थी, जिसे कोर्ट ने 1 जून को मान लिया लेकिन सख्त हिदायत दी कि वह 7 जून को जरूर पेश हों। राहुल गाँधी ने इससे पहले मार्च में अपने विरुद्ध समन जारी किए जाने पर जून में तारीख माँगी थी।

भाजपा नेता द्वारा दायर इस मुकदमे में आरोप लगाया है कि कॉन्ग्रेस ने भाजपा पर ₹2500 करोड़ में मुख्यमंत्री और ₹500 करोड़ में मंत्रिपद बेचने की बात कही, इससे भाजपा की छवि खराब हुई। इसके अलावा कॉन्ग्रेस ने मई, 2023 में अखबारों में विज्ञापन छपवा कर दावा किया कि राज्य की भाजपा सरकार के दौरान कोविड से जुड़े ठेकों में 75%, PWD ठेकों में 40% और धार्मिक संस्थानों में दान के मामले में 30% कमीशन लिया गया। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि इससे पार्टी की छवि धूमिल हुई।

गौरतलब है कि 2023 कर्नाटक विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस को बड़ी जीत हासिल हुई थी और भाजपा को सत्ता से बाहर होना पड़ा था।

जब मुस्लिम परिवार ने दिखाया ‘भाईचारा’ तो रवीना टंडन के काम न आया ‘खजूर प्रेम’, कठुआ से राफाह तक एक्टिव बॉलीवुड गैंग के मौन पर तमाचा है कंगना की मुखरता

बॉलीवुड गिरोह की सदस्य रवीना टंडन के साथ पिछले 2 दिन में जो कुछ हुआ उससे वो खुद सदमे में होंगी। अक्सर बकरीद पर बधाई का संदेश देने वाली, सोशल मीडिया पर सेवई के साथ फोटो डालने वाली, रवीना ने सोचा भी नहीं होगा कि कभी कोई मुस्लिम परिवार उनके खिलाफ ऐसा झूठा मुकदमा दर्ज करवाएगा कि मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक उनकी छवि पर सवाल उठने लगेंगे।

इस मामले के बाद रवीना को कुछ समझ आया हो या न आया लेकिन अपने गिरोह के लोगों की हकीकत तो वह जान ही गई होंगीं। इस गिरोह ने उनके लिए न तब आवाज उठाई जब उनपर आरोप लगे कि वो नशे में मारपीट कर रही थीं और न ही उन्हें तब समर्थन में कुछ बोला दिया जब पता चला कि सारे आरोप झूठे थे। इस मामले में मुंबई पुलिस ने बयान जारी करके उन्हें निर्दोष तक बताया लेकिन तब भी कोई बॉलीवुड सेलेब उनके समर्थन में बयान देने नहीं खड़ा हुआ। अगर कोई पूरे बॉलीवुड से उनकी आवाज बना तो सिर्फ वो कंगना रनौत हैं।

कंगना ने अपने इंस्टा पोस्ट में रवीना टंडन के साथ हुई घटना पर लिखा, “रवीना टंडन जी के साथ जो हुआ वह बेहद चिंताजनक है। अगर विपरीत समूह में पाँच से छह और लोग होते तो उन्हें मार दिया जाता। हम इस तरह के रोड रेज की निंदा करते हैं। उन लोगों को फटकार लगाई जानी चाहिए। उन्हें इस तरह के हिंसक और जहरीले व्यवहार से बचना नहीं चाहिए।”

रवीना टंडन और कंगना रनौत दोनों की विचारधाराएँ अलग रही हैं। रवीना उस ग्रुप का हिस्सा हैं जो कठुआ से लेकर राफाह तक मामले में प्रोपगेंडा फैलाने में सक्रिय दिखाई देते हैं। वहीं कंगना मुखर होकर हिंदुत्व की बात करती हैं। आज रवीना का सिर्फ कंगना ने साथ दिया है लेकिन यही रवीना जब कंगना पर तरह-तरह के इल्जाम लग रहे थे तब न तो महिला होने के नाते, न बॉलीवुड अभिनेत्री होने के नाते इस पर कुछ बोली थीं।

दरअसल, बॉलीवुड में रवीना जिस गिरोह का हिस्सा हैं वहाँ ईद की इफ्तारी में शामिल होना किसी भी सेलेब के लिए छवि निर्माण का तरीका होता है। रवीना ने अपने अभिनेत्री रहते हुए बॉलीवुड के प्रोग्रामों में शामिल होकर ऐसा खूब किया, मगर आज जब एक मुस्लिम परिवार ने उन्हें घेरकर उनकी लिंचिंग शुरू की, उनपर झूठे इल्जाम लगाए, उन्हें शराब के नशे में चूर बताना चाहा… तब उनका वो भाईचारा काम नहीं आ पाया जो उन्होंने ऐसी पार्टियों में जा जाकर बनाया था।

घटना की वायरल वीडियो को अगर देखें तो पता चलेगा कि रवीना टंडन बेबस और लाचार होकर कहती सुनाई पड़ रही थी कि उन्हें मारा न जाए उन्हें छोड़ दिया जाए यानी उस समय उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा था। अब जो रवीना को पर्सनली नहीं जानता उसके लिए समझना मुश्किल होगा क्या सही है क्या गलत, मगर जो सेलेब लोग रवीना को जानते हैं वो तो समझ पा रहे होंगे कि वीडियो में वो हकीकत में बेबस थीं थी या वो नशे में कर रही थी… सब जानते समझते हुए इस गिरोह के एक शख्स ने आवाज नहीं उठाई। बाद में पुलिस ने खुद जाँच करके सच्चाई बताई तब जाकर दूसरा एंगल सामने आया।

वीडियो में कहा जा रहा था कि रवीना ने उस परिवार के साथ गाली-गलौच की है जबकि हकीकत यह निकलकर आई कि उन्होंने गाली गलौच नहीं की थी उनके साथ गाली-गलौच हुई थी। रवीना टंडन गाड़ी से निकलकर सड़क पर सिर्फ अपने ड्राइवर को बचाने आई थीं उतने में वो भीड़ उनपर टूट पड़ी और बेबुनियादी इल्जाम लगाए जाने लगे। रवीना के साथ खींचतान हो रही थीं मगर उन्होंने फिर भी कुछ नहीं बोला। शायद उन्हें अंदाजा हो गया था कि जो भीड़ उनसे उलझी है वो उनके साथ कुछ भी कर सकती है। वो लगातार मामले को सुलझाने की बात करती रहीं, पर मामला नहीं सुलझा…। धीरे-धीरे खबरें मीडिया में चढ़ीं, रवीना टंडन पर सवाल उठे… लेकिन बॉलीवुड वाले चुप रहे।

अजीब बात तो ये है कि सारा मामला क्लियर होने के बावजूद बॉलीवुड के गिरोह के लोग अपने ही समूह की महिला के साथ हुई ज्यादती को मुद्दा नहीं बना रहे। राफाह तक पर उनके सोशल मीडिया पोस्ट हो रहे हैं पर रवीना के लिए कहीं नहीं। मीडिया में बयान देना तो दूर सोशल मीडिया पर सार्वजनिक तौर पर एक पोस्ट करके भी घटना का विरोध नहीं किया जा रहा है। कारण क्या है? शायद सब जानते है।

सोचिए क्या इस मामले में अगर कोई हिंदू रवीना टंडन के साथ ऐसी बदसलूकी कर देता तो क्या ये गिरोह शांत रहता? नहीं, तब उन्हें देश में लोकतंत्र खतरे में दिखाई देता और हिंदुत्व का भयावह चेहरा दिखता। मगर, अभी ऐसा कुछ नहीं है क्योंकि प्रताड़ित करने वाले एक निश्चित वर्ग से हैं। वो वर्ग जिसे खुद रवीना टंडन चाहती हैं कि वो उनसे नाराज न हो।

यही वजह है कि शायद सारे पक्ष अपने साथ होने के बावजूद रवीना टंडन ने इस मामले में कोई शिकायत नहीं दी जबकि वो अच्छे से जानती है कि अगर उनके पक्ष में सबूत नहीं मिलते तो वो परिवार पूरी तैयारी कर चुका था उनको जेल भेजने की। उनपर बुजुर्ग महिला को पीटने का आरोप लगा दिया गया था। लड़की की नाक फोड़कर खून निकालने जैसे दावे कर दिए गए थे, उन्हें बिन बात के नशेड़ी साबित किया जा रहा था… ये सब जानते हुए रवीना टंडन चुप हैं। शायद वह खुद घबराई हुई हैं ये सोचकर कि इस शांतिप्रिय समुदाय के खिलाफ आवाज उठाने के नुकसान उन्हें न झेलने पड़ें या शायद इस बात का डर है कि उन्हें वो गिरोह न खारिज कर दे जिनका काम ही प्रोपगेंडे को हवा देना। ऐसा भी हो सकता है कि रवीना जानती हों कि उनके साथ इस मुद्दे पर आवाज क्यों नहीं उठा रहे… उन्हें मालूम होगा कि ऐसी परिस्थिति में मीडिया को कैसे डील करना होता है… कैसे समुदाय विशेष की छवि को धूमिल करने से बचाना होता है।

मालदीव की हेकड़ी अब इजरायल ने निकाली, कहा- भारत के लक्षद्वीप जैसे समुद्री तटों पर घूमने जाएँ: यहूदी देश के पर्यटकों पर इस्लामी मुल्क ने लगाया है बैन

मालदीव और उसके राष्ट्रपति मुहम्मद मुइज्जु को अब इजरायल ने झटका दिया है। इजरायल ने अपने नागरिकों को कहा है कि वो भारत भ्रमण करें, साथ ही भारत के सुन्दर पर्यटन स्थलों की तस्वीरें भी शेयर की हैं। बता दें कि इस्लामी मुल्क मालदीव ने इजरायल के पासपोर्ट धारकों को अपने देश में प्रतिबंधित कर दिया है, इसीलिए इजरायल ने उसे सबक सिखाया है। भारत स्थित इजरायली दूतावास ने लक्षद्वीप, गोवा, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और केरल की मनोरम तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की।

साथ ही लिखा, “जैसा कि मालदीव ने अब इजरायलियों के आने पर बैन लगा दिया हैं, नीचे दिए यह कुछ खूबसूरत और अद्भुत भारतीय समुद्र तट हैं जहाँ इजरायली पर्यटकों का हार्दिक स्वागत होता है और बेहद आदर सत्कार दिया जाता हैं। हमारे डिप्लोमेट्स द्वारा यात्रा की गई जगहों के आधार पर ये हमारे कुछ सुझाव हैं।” नीचे कमेंट्स में भारतीयों ने भी दिल खोलते हुए कहा कि इजरायलियों का हमारे देश में स्वागत है, यहाँ उनका भरपूर स्वागत किया जाएगा।

बता दें कि इजरायल पर गाजा पट्टी में बमबारी और गोलीबारी का आरोप लगाते हुए मालदीव ने वहाँ के पर्यटकों पर बैन लगा दिया है। मुल्क के गृहक्षेत्र सुरक्षा एवं तकनीकी मंत्री अली इहुसान ने कहा कि राष्ट्रपति मुहम्मद मुइज्जु की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस बैन के लिए कानूनी बदलाव शुरू करने पर मुहर लगी। इसके लिए मंत्रियों की एक विशेष समिति भी बनाई गई है। मालदीव ने फिलिस्तीन की मदद के लिए एक विशेष राजदूत की नियुक्ति का भी निर्णय लिया है।

साथ ही फिलिस्तीनियों के लिए फंड भी जुटाया जाएगा। फिलिस्तीन के समर्थन में एक राष्ट्रीय मार्च का भी आयोजन किया जाएगा। दक्षिण अफ्रीका ने भी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में इजरायल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है। 7 अक्टूबर, 2023 को हमास आतंकियों ने इजरायल में घुस कर 1200 लोगों का नरसंहार किया था, जिसके बाद से ही इजरायल जवाबी कार्रवाई कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने कहा है कि इजरायल ने सीजफायर का नया प्रस्ताव क़तर के माध्यम से हमास को भिजवाया है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2024 में लक्षद्वीप का दौरा किया था और वहाँ से कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी, जिसके बाद मालदीव भड़क गया था। लक्षद्वीप की सुंदरता देख वहाँ पर्यटन भी बढ़ा। मालदीव के 3 मंत्रियों को पद से हाथ धोना पड़ा, उन्होंने पीएम मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। भारतीयों द्वारा बहिष्कार के बाद मालदीव के पर्यटन और राजस्व में भारी कमी आई। अब इजरायल का साथ भी भारत को मिल गया है।

जहाँ भारत में सबसे पहले उगता है सूरज, वहाँ कैसे डूब गई कॉन्ग्रेस: कभी था गढ़-अब उम्मीदवार के पड़े लाले, अरुणाचल में फिर से BJP सरकार

2024 लोकसभा परिमाणों में अभी कुछ समय शेष है। इससे पहले अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के विधानसभा चुनावों के नतीजे सामने आ गए हैं। देश के सरहदी राज्य अरुणाचल प्रदेश में भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है और अपनी सत्ता बरकरार रखी है। कॉन्ग्रेस राज्य में खाता खोलने में भी संघर्ष करते दिखाई दी है।

अरुणाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री पेमा खांडू की अगुवाई में भाजपा को 60 में से 46 सीटें हासिल हुई हैं। भाजपा की इस बार यहाँ 5 सीटें बढ़ गई हैं। 2019 में अरुणाचल प्रदेश में भाजपा को सीट मिली थी। भाजपा का वोट प्रतिशत भी राज्य में 50% के पार रहा है। भाजपा के सामने चुनाव लड़ रही कॉन्ग्रेस राज्य से लगभग समाप्त हो गई है।

कॉन्ग्रेस को राज्य में मात्र 1 सीट मिली है। अरुणाचल के मुख्यमंत्री रहे कॉन्ग्रेस नेता नबाम तुकी तक चुनाव हार गए हैं। राज्य में पार्टी को जहाँ चुनावी हार तो मिली ही है, उसका वोट प्रतिशत भी घट गया है। कॉन्ग्रेस से अधिक सीटें नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPEP) को मिली हैं, जिसने राज्य में 5 सीटें हासिल की हैं।

10 निर्विरोध जीते, दो तिहाई सीट से बनेगी भाजपा सरकार

भाजपा ने अरुणाचल प्रदेश में 60 में से 46 यानि दो तिहाई सीटें जीत ली हैं, उसका वोट प्रतिशत 54% रहा है। उसका यह प्रदर्शन 2019 के मुकाबले और भी बढ़िया है, तब राज्य में भाजपा ने 41 सीटें जीतीं थी और उसे 50% वोट मिले थे। भाजपा की जीत की पटकथा राज्य में पहले ही लिखी जा चुकी थी।

चुनाव के लिए मतदान से पहले ही राज्य में भाजपा की जीत चालू हो गई थी। मुख्यमंत्री पेमा खांडू समेत राज्य में भाजपा के 10 विधायक मतदान से पहले ही निर्विरोध निर्वाचित होने में सफल रहे थे। उसके बाद आए परिणामों में भाजपा ने और बड़ी जीत हासिल की।

अरुणाचल प्रदेश में भाजपा बीते कुछ सालों से लगातार मजबूत होती आई है। 2016 में भाजपा खेमे में पेमा खांडू के आने के बाद से यह राज्य की सत्ता में रही है। 2016 में राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार छोड़ कर पेमा खांडू 43 विधायकों के साथ भाजपा के साथ आ गए थे। वह राज्य के मुख्यमंत्री, जुलाई 2016 में बने थे।

पेमा खांडू के कॉन्ग्रेस से भाजपा में आने के बाद राज्य में कॉन्ग्रेस की स्थिति लगातार बदतर होती गई है। दूसरी तरफ भाजपा की राज्य सरकार को केंद्र की मोदी सरकार का लगातार समर्थन मिला है। इसका फायदा भी चुनावों में उसे हो रहा है। भाजपा की जीत में बड़ा योगदान विकास कार्यों का भी है।

अरुणाचल में इतिहास में सबसे बुरी स्थिति में कॉन्ग्रेस

अरुणाचल प्रदेश में कॉन्ग्रेस अपने इतिहास में सबसे बुरी स्थिति में है। उसे 2024 विधानसभा चुनावों में मात्र 1 सीट मिली है। उसका वोट प्रतिशत राज्य में 5.5% ही रह गया है। जहाँ भाजपा की जीत की पटकथा राज्य में चुनाव से पहले ही लिखी जा चुकी थी, वैसे राज्य में कॉन्ग्रेस की इस फटेहाल स्थिति को भी कोई पहले ही भाँप सकता था।

राज्य में कॉन्ग्रेस का इतना बुरा हाल रहा है कि उसे सभी 60 सीटों पर लड़ने के लिए उम्मीदवार ही नहीं मिले। जो लोग मिले भी उन्होंने चुनाव का पर्चा ही नहीं भरा। कॉन्ग्रेस ने राज्य के विधानसभा चुनाव के लिए मात्र एक ही सूची जारी की थी। इसमें भी कॉन्ग्रेस ने मात्र 34 ही नाम दिए थे। इनमें से भी कई ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया।

कॉन्ग्रेस जहाँ आज अरुणाचल प्रदेश में अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं, वहीं वह 2016 तक राज्य में सत्ता में काबिज थी। वह इससे पहले अरुणाचल की सत्ता से कभी बाहर नहीं हुई थी। राज्य में 2019 चुनावों में कॉन्ग्रेस मात्र 4 सीट ही जीत पाई थी। इनमें से भी कुछ विधायकों ने उसका साथ छोड़ कर भाजपा की सदस्यता ले ली थी।

कॉन्ग्रेस का राज्य में बुरा हाल है और उसका शीर्ष नेतृत्व भी राज्य पर ध्यान नहीं दे रहा है। राज्य में पार्टी के संगठन को मजबूत करने और नए नेता तलाशने में भी कॉन्ग्रेस विफल रही है। पेमा खांडू के कॉग्रेस से 2016 में निकलने के बाद पार्टी को कई संकटों का सामना करना पड़ रहा है।

पेमा खांडू: मैन ऑफ़ द मैच

राज्य में भाजपा की इस जीत का बड़ा श्रेय मुख्यमंत्री पेमा खांडू का है। पेमा खांडू देश के कुछ सबसे युवा मुख्यमंत्रियों में एक हैं। 44 वर्ष के पेमा खांडू राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दोरजी खांडू के बेटे हैं। 2011 में दोरजी खांडू की मौत के बाद वह सक्रिय राजनीति में आए थे। वह इसके बाद नबाम तुकी की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने थे। दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ने वाले खांडू ने 2016 में राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार को गिरा दिया था। उनके साथ 43 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी थी।

खांडू खुद भी मझे हुए नेता हैं, खांडू ने जुलाई 2016 में मुख्यमंत्री बनने के बाद कई बार राजनीतिक झंझावत झेले हैं और उनसे पार पाए हैं। खांडू दिसम्बर 2016 में भाजपा में शामिल हो गए थे। तबसे राज्य की कमान उनके हाथों में है। खांडू के नेतृत्व में राज्य में काफी विकास हुआ है। विशेष कर इन्फ्रा क्षेत्र में राज्य बड़ा बदलाव आया है। पेमा खांडू, गेगोंग अपांग के बाद सबसे लम्बे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले व्यक्ति हैं। वह 7 वर्षों से अधिक से राज्य के मुख्यमंत्री हैं।

एक बैठक से बदल गई पूर्वोत्तर की राजनीति

अरुणाचल प्रदेश में जहाँ कॉन्ग्रेस सबसे खराब दौर से गुजर रही है, वहीं उसकी स्थिति पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी कुछ ख़ास अच्छी नहीं है। पूर्वोत्तर के राज्यों में कॉन्ग्रेस का सफाया करने में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का भी बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने एक बार बताया था कि एक बैठक ने कैसे उन्हें कॉन्ग्रेस छोड़ने और कॉन्ग्रेस का उत्तरपूर्व में सफाया करने को लेकर उद्वेलित कर दिया। यह बैठक राहुल गाँधी और कुछ कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ हुई थी।

हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि उन्होंने सकारात्मक रूप से इस बैठक की शुरुआत की थी और कॉन्ग्रेस पार्टी के हित की बातें कर रहे थे। लेकिन, उन्होंने बताया कि पूरी बातचीत के दौरान राहुल गाँधी बैठक में कोई रुचि ही नहीं दिखा रहे थे और अपने कुत्ते के साथ खेल रहे थे। हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि उन्हें बाद में पता चला कि उसका नाम ‘पीडी’ है।

2016 के विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस को असम की सत्ता से उखाड़ फेंकने में बड़ी भूमिका निभाने वाले हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया, “बैठक के दौरान वहाँ उपस्थित नेताओं के लिए चाय-कॉफी लाई गई। राहुल गाँधी के कुत्ते ने टेबल के पास जाकर उस पर रखी प्लेट से एक बिस्किट निकाल लिया और खाने लगा। फिर राहुल गाँधी मेरी तरफ देख कर मुस्कुराने लगे। मैं ये सोच रहा था कि वो भला मुझे देख कर क्यों ऐसा कर रहे हैं?”

दरअसल, हिमंत बिस्वा सरमा इस हाथ में चाय का कप लेकर इस बात का इंतजार कर रहे थे कि राहुल गाँधी कब कुत्ते द्वारा जूठी की गई उस प्लेट के बदले दूसरी प्लेट मँगवाएँगे। उन्होंने 5 मिनट तक इंतजार किया लेकिन फिर देखा कि तरुण गोगोई और सीपी जोशी जैसे वरिष्ठ नेता उसी प्लेट से बिस्किट उठा कर खा रहे हैं। सरमा ने कहा कि वो हमेशा राहुल गाँधी से मिलने तो नहीं जाते थे, लेकिन उस दिन उन्हें एहसास हुआ कि ये सामान्य है।

उन्होंने कहा, “उसी दिन मुझे इसका एहसास हुआ कि अब बहुत हुआ, अब मैं इस व्यक्ति के साथ नहीं रह सकता। लेकिन, मैं उनका धन्यवाद भी करता हूँ। मैं आज इस पद पर हूँ, तो इसका श्रेय उस बैठक को भी जाता है और इस तथ्य को भी कि राहुल गाँधी को मेरा कॉन्ग्रेस में होना पसंद ही नहीं था।” बता दें कि सरमा ने कॉन्ग्रेस में 22 साल बिताए थे।