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भारी हथियार से वार, सिर में मिले चोट के निशान : हरियाणा-राजस्थान बॉर्डर पर दो साधुओं की निर्मम हत्या, पुलिस जाँच में जुटी

राजस्थान के झुंझनू जिले में 2 साधुओं के शव लावारिस हालत में मिले हैं। दोनों की उम्र 40 से 45 साल के बीच बताई जा रही है। दोनों के शव हरियाणा बॉर्डर पर पड़े पाए गए हैं। इनके सिर पर चोट के निशान हैं। पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। मृतकों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। घटना शनिवार (1 जून 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना झुंझनू जिले के थानाक्षेत्र पचेरी कलां की है। यहाँ के गाँव नावता में शनिवार को 2 लोगों के शव पड़े होने की सूचना मिली। लाशें हरियाणा बॉर्डर की तरफ जाने वाले हाइवे के पास एक कच्चे रास्ते पर थीं। लोगों ने वहाँ पहुँच कर पाया कि दोनों शव साधुवेश धारियों के थे। इन दोनों के सिर पर किसी भारी चीज से वार किया गया था। आसपास के लोगों ने दोनों की पहचान करने का प्रयास किया लेकिन वो असफल रहे। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची।

पुलिस ने दोनों शवों को कब्ज़े में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शिनाख्त के लिए शवों को अस्पताल में रखा गया है। केस दर्ज कर के जाँच-पड़ताल की जा रही है। घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीमों ने दौरा किया और सबूत जमा किए हैं। मृतकों व कातिलों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। कुछ अन्य साधुओं को भी बुला कर दोनों मृतकों की पहचान के प्रयास जारी हैं। यह घटना कोई हादसा है या हत्या इस बारे में अभी तक पुलिस ने कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है।

थाने पर हमला करके पुलिस कार्रवाई से डरी इस्लामी भीड़, 200 मुस्लिम परिवारों ने घर छोड़ा: कर्नाटक के दावणगेरे मामले पर रिपोर्ट्स का दावा

कर्नाटक के दावणगेरे में एक पुलिस थाना पर हमले के बाद अब 200 मुस्लिम परिवार कार्रवाई होने पर गाँव छोड़ कर भाग गए हैं। दावणगेरे के कई गाँवों के मुस्लिम अब पुलिस की पहुँच से बचने के लिए घरों पर ताला लगाकर गायब हैं। पुलिस मामले की आगे जाँच के लिए इनकी तलाश में हैं।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, दावणगेरे के होन्नेबागी, नल्लुर और अग्राबनीहट्टी में कुल मिलाकर 100 घरों पर ताला लटका हुआ है। यह घर मुस्लिम समुदाय से जुड़े हुए हैं। यह सब 24 मई, 2024 को हुई घटना के बाद से फरार हैं। इनमें से कुछ के पास पुलिस हमले के सबूत जुटाने पहुँची थी, लेकिन कोई नहीं मिला। आसपास के कस्बों में अधिकांश दुकानें भी बंद है।

यह पूरा बवाल 24 मई, 2024 को चालू हुआ था। इस दिन मुस्लिम भीड़ ने दावणगेरे के चन्नागिरी पुलिस थाना पर हमला किया था। भीड़ पुलिस पर आदिल नाम के युवक को हिरासत में मार डालने का आरोप लगा रही थी। इस हमले में एक दर्जन पुलिसकर्मी घायल हुए थे जबकि 8 वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए थे। इस मामले में पुलिस 3 अलग-अलग FIR दर्ज कर के जाँच कर रही थी।

पुलिस के मुताबिक, मृतक आदिल को क्षेत्र में हो रहे जुआ के एक मामले में पूछताछ के लिए लाया गया था। यहाँ कुछ ही देर में उसकी तबीयत खराब हुई। आदिल को अस्पताल ले जाया गया जहाँ उसकी मौत हो गई। मौत की वजह भी ब्लड प्रेशर का लो होना बताया गया। आदिल पर पहले से केस दर्ज होने का भी दावा किया गया था।

आदिल के परिजनों ने पुलिस पर टॉर्चेर का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि पुलिस ने रिश्वत की माँग की थी जिसे न मिलने पर आदिल की पिटाई की गई जो बाद में मौत की वजह बनी। राज्य के गृहमंत्री ने पूरे घटनाक्रम की जाँच की बात कही थी। इसके बाद यह जाँच CID को सौंप दी गई थी। हमले के बाद एक इंस्पेक्टर और एक सिपाही को सस्पेंड कर दिया गया था। इस मामले में लगभग 30 लोगों को अबतक गिरफ्तार किया गया है।

दिल्ली में बिगड़ रहा कन्हैया कुमार का खेल, गिरिडीह में जयराम महतो को मिलती दिखी मात: Exit Polls में जानें रवीन्द्र भाटी के लिए क्या लगे अनुमान

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए मतदान संपन्न हो चुका है। 4 जून को नतीजे आ जाएँगे, कौन जीता किसे मिली हार, इसका अंतिम फैसला तो ईवीएम खुलने के बाद ही होगा, लेकिन उससे पहले के तमाम एग्जिट पोल्स उम्मीदवारों की-जीत हार का अनुमान लगा रहे हैं। इस चुनाव में तीन युवा चेहरों ने खूब चर्चा बटोरी, ये नाम हैं दिल्ली की उत्तर-पूर्वी सीट से चुनाव लड़ रहे कन्हैया कुमार, जो साल 2019 का भी लोकसभा चुनाव हार चुके हैं। दूसरा नाम है रविंद्र भाटी का, जो राजस्थान के बाड़मेर में निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं, और तीसरा नाम है जयराम महतो का, जो झारखंड के गिरिडीह लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। इन युवा चेहरों की जीत-हार को लेकर एग्जिट पोल्स क्या कह रहे हैं, ये जानना दिलचस्प है।

कन्हैया कुमार का मामला फंसा

दिल्ली में कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है, सिवाय चाँदनी चौक लोकसभा सीट के। ऐसे में कॉन्ग्रेस में सबसे चर्चित उम्मीदवार कन्हैया कुमार के लिए एग्जिट पोल निराशा ही दिखा रहे हैं। एक्सिस माय इंडिया एग्जिट पोल के मुताबिक नॉर्थ ईस्ट सीट पर मनोज तिवारी लगातार तीसरी बार कमल खिला सकते हैं और कन्हैया कुमार को लगातार दूसरे लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ सकता है। इससे पहले वह अपने गृहनगर बेगूसराय से भी लोकसभा का चुनाव हार चुके हैं। एक्सिस माय इंडिया के एग्जिट पोल के अनुमान के मुताबिक यदि इंडिया गठबंधन को दिल्ली में एक सीट मिलती भी है तो वह कॉन्ग्रेस के खाते में जाएगी और आम आदमी पार्टी को एक बार फिर खाली हाथ रहना पड़ सकता है। अधिकाँश एग्जिट पोल्स में बीजेपी को 6-7 सीटें और कॉन्ग्रेस को 0 से 1 सीट मिलती दिख रही है, जबकि आम आदमी पार्टी का खाता खुलता नहीं दिख रहा है।

जयराम महतो की चुनौती तगड़ी, लेकिन रह जाएँगे पीछे

लोकसभा चुनाव 2024 में झारखंड की गिरिडीह लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं जयराम महतो। लेकिन झारखंड में न्यूज 24 टुडेज चाणक्या के एग्जिट पोल की मानें तो बीजेपी+ 12 (+2/-2) सीटें जीत सकती है, तो कॉन्ग्रेस 2 (+2/-2) सीटें। इंडी गठबंधन और एनडीए के अलावा किसी का खाता खुलते नहीं दिख रहा है। ऐसे में गिरिडीह लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे जयराम महतों के पीछे रह जाने की बात सामने आ रही है। वैसे भी, लोकसभा चुनाव में किसी निर्दलीय का जितना हमेशा चुनौती भरा होता है।

रविंद्र भाटी के लिए आशा भरे नतीजे

देश की कई ऐसी लोकसभा सीटें हैं, जो हॉट सीट बनी हुई हैं और सभी लोगों की नजरें उन पर टिकी हैं, इन्हीं सीटों में से एक है राजस्थान की बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट। यहाँ निर्दलीय उम्मीदवार रविंद्र सिंह भाटी, कॉन्ग्रेस उम्मीदवार उम्मेदाराम बेनीवाल और बीजेपी के कैलाश चौधरी मैदान में हैं। हालाँकि इस लोकसभा सीट पर सीधा मुकाबला रविंद्र भाटी और कॉन्ग्रेस उम्मीदवार उम्मेदाराम बेनीवाल के बीच है। इंडिया टुडे एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल के मुताबिक बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट पर भाटी हावी नजर आ रहे हैं। उनके पक्ष में माहौल बनता दिख रहा है। ऐसे में बीजेपी और कॉन्ग्रेस के लिए बड़ा झटका हो सकता है। हालाँकि बाड़मेर-जैसलमेल लोकसभा सीट क्षेत्रफल के मामले में देश की सबसे बड़ी लोकसभा सीटों में से एक है, ऐसे में रविंद्र सिंह भाटी का नेटवर्क कितना प्रभावी रहा, इसका पता तो 4 जून को ही लगेगा। चूँकि बाकी दोनों राष्ट्रीय पार्टियाँ हैं, ऐसे में उनके कार्यकर्ताओं की फौज अहम भूमिका अदा करती है।

बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 के लिए तमाम एग्जिट पोल्स में भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिलता दिख रहा है। कम से कम तीन एग्जिट पोल्स में बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रखे गए 400 सीटों के लक्ष्य के आसपास पहुँचते दिखाया जा रहा है। चाणक्या के सर्वे में एनडीए 415 सीटों तक पहुँचती दिख रही है।

पेरिस से मुंबई आ रही विस्तारा फ्लाइट को मिली बम की धमकी, एयरपोर्ट पर आनन-फानन में इमरजेंसी अलर्ट: एक हफ्ते में तीसरा मामला

पेरिस से मुंबई आ रही विस्तारा एयरलाइन्स की एक फ्लाइट को बम से उड़ाने की धमकी दी गई। यह धमकी विमान के भीतर एक कागज पर लिखी हुई मिली। यह धमकी बाद में फर्जी साबित हुई। इसकी वजह से मुंबई एयरपोर्ट पर इमरजेंसी घोषित कर दी गई।

रविवार (2 जून, 2024) को पेरिस से चार्ल्स डी गाले एयरपोर्ट से मुंबई आ रहे विस्तारा की UK 024 विमान में यात्रियों को दिए जाने वाले एक बैग में एक नोट मिला। यह बैग यात्रियों को इसलिए दिया जाता है ताकि वह उल्टी महसूस होने पर इसका इस्तेमाल कर सकें। इसमें विमान में बम होने की बात कही गई थी। यह धमकी मिलने के बाद विमान में इमरजेंसी घोषित की गई। इस विमान में कुल 306 लोग सवार थे।

विमान में धमकी कि यह घटना सुबह 7 बजे के आसपास हुई और यह विमान मुंबई में 10 बजे के बाद उतरा। इसके बाद विमान को पार्किंग में ले जाकर उसकी जाँच की गई। सुरक्षा एजेंसियों को विमान की जाँच में कुछ नहीं मिला। विस्तारा एयरलाइंस ने इस घटना पर कहा, “हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि 2 जून 2024 को पेरिस से मुंबई के लिए उड़ान भरने वाली विस्तारा की उड़ान यूके 024 में सवार होने के दौरान हमारे कर्मचारियों को सुरक्षा सम्बन्धी एक समस्या का सामना करना पड़ा।”

उन्होंने आगे बताया, “प्रोटोकॉल का पालन करते हुए, हमने तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित किया। फ्लाइट छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, मुंबई पर उतरी है और हम सभी अनिवार्य जांच के लिए सुरक्षा एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं।”

गौरतलब है एक सप्ताह के भीतर भारतीय एयरलाइन्स को विमान में बम की धमकी मिलने की तीसरी घटना है। इससे पहले 1 जून, 2024 को वाराणसी से दिल्ली जाने वाली इंडिगो की वाराणसी से दिल्ली जाने वाले उड़ान 6E 2232 को भी बम की धमकी मिली थी। एक महिला ने फोन करके इस विमान में बम होने की सूचना दी थी। महिला ने दिल्ली पुलिस को फोन करके बताया कि उसके पति इस विमान में सफ़र कर रहे हैं और उनके पास बम है।

महिला की इस धमकी पर विमान को दिल्ली में लाकर जाँच की गई थी। यह धमकी बाद में फर्जी साबित हुई। इस विमान में महिला का पति विमल कुमार नाम का व्यक्ति सफ़र कर रहा था जिसकी जाँच की गई। विमल कुमार ने बताया कि उसकी पत्नी की मानसिक हालत ठीक नहीं है और उसके ऐसी ही एक खबर देख कर फोन कर दिया थ।

इससे पहले भी 28 मई, 2024 को दिल्ली से वाराणसी जा रहे इंडिगो के एक विमान में बम की धमकी वाला एक नोट मिला था। इसके बाद लोगों को आनन फानन में निकाला गया था। इस मामले में इंडिगो के 6 कर्मचारियों पर भी एयरलाइन ने कार्रवाई की थी।

नशे में चूर रवीना टंडन पर लगा बुजुर्ग महिला को पीटने का आरोप, पीड़ित परिवार थाने पहुँचा: समझौते से इनकार, Video सामने आई

पुणे में नशे में धुत होकर पोर्श कार से 2 इंजीनियरों को कुचलने का मामला शांत नहीं है कि अब मुंबई से एक और हाई प्रोफाइल एक्सीडेंट का केस सामने आया है। इसमें आरोपित और कोई नहीं बल्कि बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री रवीना टंडन खुद हैं।

आरोप है कि रवीना टंडन की गाड़ी एक महिला से टकराई इसके बाद उनके ड्राइवर और उन्होंने खुद निकलकर उस परिवार के अन्य लोगों से मारपीट की और बाद में जब लोग उनकी वीडियो बनाने लगे तो वो पीछे से चिल्लाने लगीं- ‘प्लीज मुझे मत मारो।’ इसके अलावा उन्होंने फोटो खींचने से भी मना किया।

उनकी ये वीडियो अब हर जगह वायरल है। घटनास्थल रिजवी लॉ कॉलेज के नजदीक का है। कहा जा रहा है कि जब ये घटना हुई उस समय रवीना टंडन ने शराब पी हुई थी और नशे में चूर थी। वहीं पीड़िता के बेटे ने कहा- “हम लोग अपनी बिटिया का रिश्ता तय करने कहीं बाहर निकले थे। रास्ते में रिजवी लॉ कॉलेज के पास रवीना की गाड़ी खड़ी थी। हम लोग वहां से निकल ही रहे थे तभी गाड़ी थोड़ी रिवर्स हो गई। इसकी वजह से मेरी मां को जोरदार टक्कर लग गई। हम लोगों ने आपत्ति जताई तो ड्राइवर अनाप-शनाप बकने लगा। गाड़ी में रवीना टंडन भी मौजूद थीं। वे भी गाड़ी से निकलकर हमसे बहस करने लगीं। वे शराब के नशे में चूर थीं और मेरी मां के साथ मारपीट करने लगीं।”

पीड़ित परिवार विरोध के बाद उनकी शिकायत खार पुलिस थाने में कराने भी पहुँचा। इस बीच रवीना टंडन के पति और मशहूर ड्रिस्ट्रीब्यूटर अनिल थडानी भी पुलिस स्टेशन पहुँचे। उन्होंने पीड़ित परिवार के साथ मामला सुलझाने की कोशिश की, लेकिन वे केस दर्ज कराने पर अड़े रहे।

बताया जा रहा है कि अभी तक इस मामले में पुलिस ने FIR रजिस्टर नहीं हुई है। मोहसिन शेख द्वारा साझा किए गए वीडियो के मुताबिक उन लोगों ने इस मामले में कोई भी समझौता करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने न्याय की गुहार लगाई है।

वहीं इस मामले में रवीना की मैनेजर और उनकी टीम ने एक्ट्रेस पर लगाए गए सभी आरोपों का खंडन किया है। रवीना की मैनेजर कहा कि एक्ट्रेस ने किसी के साथ मारपीट नहीं की है। उल्टा जिन लोगों ने शिकायत की है उन्होंने रवीना को मारा है। रवीना को बहुत चोट भी आई है।

भ्रष्टाचारी पति की हुई मौत तो पत्नी को भेजो जेल: मद्रास HC ने दिया हैरान करने वाला फैसला, बेंच ने कहा- आय से अधिक संपत्ति में था अधिकार, तो सजा में भी हो

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में सरकारी कर्मचारी की पत्नी भी सहभागी होती है, ऐसे में उसे भी सजा मिलनी चाहिए। मदुरै बेंच ने पाया कि मुख्य आरोपित पति की मौत हो चुकी है और पत्नी को 1 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। पत्नी ने सजा को कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया और कहा कि ‘भ्रष्टाचार घर से शुरू होता है और यदि गृहिणी ही भ्रष्टाचार में भागीदार है तो इसका कोई अंत नहीं होगा।’

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट्स के मुताबिक, जस्टिस केके रामकृष्णन ने तिरुचि में भ्रष्टाचार रोकथाम मामलों की विशेष अदालत द्वारा देवनायकी को सुनाई गई एक साल की जेल की सजा को रद्द करने से इनकार कर दिया। देवनायकी के पति के खिलाफ 2017 में मामला दर्ज कराया गया था, उसके एसआई पति शक्तिवेल की बाद में मौत हो गई थी। लेकिन शक्तिवेल की पत्नी देवनायकी को कोर्ट ने सजा सुनाई थी, इसी सजा के खिलाफ उसने अपील की थी, लेकिन कोर्ट ने अपील को खारिज कर दिया और ये महत्वपूर्ण टिप्पणी की।

मदुरै हाई कोर्ट ने कहा, “एक सरकारी कर्मचारी की पत्नी का यह कर्तव्य है कि वह अपने पति को रिश्वत लेने से रोके। जीवन का मूल दर्शन रिश्वत से दूर रहना है। अगर कोई रिश्वत लेता है, तो वह और उसका परिवार बर्बाद हो जाएगा। अगर उन्होंने गलत तरीके से कमाए गए पैसे का आनंद लिया है, तो उन्हें भुगतना चाहिए। इस देश में भ्रष्टाचार अकल्पनीय रूप से व्याप्त है। भ्रष्टाचार घर से शुरू होता है और अगर घर की मालकिन भ्रष्टाचार में भागीदार है, तो भ्रष्टाचार का कोई अंत नहीं है। गलत तरीके से कमाए गए पैसे की वजह से देवनायकी को फायदा पहुँचा और अब उसे सजा भी भुगतनी चाहिए।

हाई कोर्ट ने पाया कि तिरुचि डीवीएसी पुलिस ने शक्तिवेल और उनकी पत्नी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति जमा करने के आरोप में मामला दर्ज किया था, जिसकी अनुमानित कीमत 1 जनवरी 1992 से 31 दिसंबर 1996 की अवधि के दौरान 6.77 लाख रुपये थी। मामले के लंबित रहने के दौरान शक्तिवेल की मृत्यु हो गई। अदालत ने शक्तिवेल की पत्नी को दोषी करार देते हुए एक साल की कैद और 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया। हाई कोर्ट ने कहा, “ट्रायल जज द्वारा लगाई गई सजा में कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। इसलिए उनके द्वारा निष्पादित जमानत बांड को रद्द किया जाता है।”

वैसे, अगर ये फैसला कुछ दशक पहले आता, तो बिहार को शायद ही राबड़ी राज झेलना पड़ता और शायद ही बिहार जैसे राज्य को इतने गर्त में जाना पड़ता। अगर उस समय ऐसा कोई फैसला आया होता, तो शायद बिहार की किस्मत में राबड़ी जैसी अनपढ़ मुख्यमंत्री न आती। चूँकि मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने जो टिप्पणी की है, उसे अगर कानूनी दाँवपेंच से परे रखकर सोचें तो बेहद प्रैक्टिकल फैसला है। भ्रष्टाचार की कमाई से फायदा पूरा परिवार उठाता है। वैसे, यहाँ अंगुलिमान से जुड़ी जातक कथा का भी उदाहरण रख सकते हैं।

ध्रुव राठी गाता था AAP के लिए गाना, फेमस होकर डिलीट किए वीडियोज: एल्विश यादव की वीडियो में कई खुलासे, CAA दंगों से भी राठी का निकाला कनेक्शन

प्रोपेगेंडा वीडियो बनाने वाले यूट्यूबर ध्रुव राठी की पोल एल्विश यादव ने खोल दी है। ध्रुव राठी के आम आदमी पार्टी से जुड़ाव समेत उसके द्वारा चलाए गए दुष्प्रचार की भी सच्चाई एल्विश यादव ने सामने रखी है। इसमें बताया गया है कि कैसे ध्रुव राठी ने लगातार झूठ पर आधारित वीडियो बनाए और उसके कहाँ कहाँ लिंक हैं।

ध्रुव राठी के निष्पक्ष होने के दावे को लेकर एल्विश यादव ने सबूतों के साथ बताया है कि ध्रुव राठी आम आदमी पार्टी के आईटी सेल के लिए काम करते थे। वह आम आमदी पार्टी के लिए बनाए गए गाने फेसबुक पर डाला करते थे। वह इस टीम के एक सक्रिय सदस्य थे। एल्विश ने यह भी बताया कि ध्रुव राठी AAP का घोषणा पत्र बनाने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं, इसी पुष्टि AAP पदाधिकारियों ने भी की थी।

एल्विश ने खुलासा किया कि ध्रुव राठी ने दिसम्बर 2014 में अरविन्द केजरीवाल के लिए एक गाना भी बनाया था और इसके अलावा 2015 में भी एक गाना AAP कार्यकर्ताओं पर बनाया था। AAP के लिए बनाई गई कई वीडियो ध्रुव राठी ने बाद में डिलीट भी की हैं, इनसे उनके लिंक का खुलासा हो रहा था।

इसी तरह की एक वीडियो में राठी ने दिल्ली की ऑड इवन स्कीम को लेकर बात की थी, इसे बाद में डिलीट कर दिया गया था। निष्पक्षता का दावा करने वाले ध्रुव राठी भाजपा के खिलाफ फर्जी दावे भी करते आए हैं। एक वीडियो में ध्रुव राठी ने AAP नेताओं के अपराधों को छुपा कर भाजपा नेताओं को अपराध में संलिप्त बताया था।

एल्विश यादव ने ध्रुव राठी के अन्य ऐसे ही लोगों से लिंक के खुलासे भी किए जो लगातार भारत विरोधी प्रोपेगेंडा में लगे रहे हैं। एल्विश ने खुलासा किया कि ध्रुव राठी का एक साथी आदिल अमन लगातार पीएम मोदी और अमित शाह की मौत की बात कर रहा था। वह ब्राम्हणों और महिलाओं को लेकर भी जहर उगल रहा था। ध्रुव राठी के एक प्रदर्शन में वामपंथी छात्र संगठन के सदस्य भी शामिल हुए थे।

ध्रुव राठी से जुड़े आदिल अमन का जुड़ाव हर्ष मांदर से है। हर्ष मांदर CAA विरोधी दंगों के दौरान भड़काऊ भाषण दे रहे थे। वह पूर्व IAS हैं और भाजपा और पीएम का विरोध करते रहते हैं। आदिल अमन, हर्ष मांदर भी ध्रुव राठी के बाद जर्मनी भाग चुके हैं। हर्ष मांदर दंगा विरोधी बिल भी लाया था, जिसके जरिए हिन्दुओं की प्रताड़ना की साजिश रची जा रही थी। वह जॉर्ज सोरोस के नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।

एल्विश ने हर्ष मांदर और ध्रुव राठी के वीडियो के बीच के लिंक को भी सामने रखा। हर्ष मांदर जिन मुद्दों को उठाते हैं, उन पर ध्रुव राठी वीडियो बनाते हैं। इनमें कई बार वह झूठ बोलते हैंध्रुव राठी के एक वीडियो के पीछे हर्ष मांदर का एक लेख था जो कि वीडियो से दो दिन ही पहले लिखा गया था।

एल्विश ने बताया कि ध्रुव राठी की अधिकांश वीडियो हर्ष मांदर के लेख के बाद आती हैं। इसके अलावा ध्रुव राठी के तार इरफ़ान मेहराज से जुड़े हैं, जो कि भारत विरोधी लेख और वीडियो सामग्री बनाता रहा है, उसे NIA ने भी गिरफ्तार किया था, यह जानकारी भी एल्विश यादव ने दी है।

ध्रुव राठी ने जहाँ एक तरफ पीएम मोदी को तानाशाह बताया वहीं वह स्वयं आलोचना नहीं सुनते। ध्रुव राठी अपने विरोध में बनने वाली हर एक वीडियो को रिपोर्ट करवाते हैं, उनके समर्थक उस पर उलटे सीधे कमेन्ट करते हैं। यहाँ तक कि लोगों पर हमला भी करवाया जाता है। एल्विश ने बताया कि जर्मनी के भीतर एक यूट्यूबर पर राठी समर्थकों ने हमला किया था। ध्रुव राठी पर एल्विश का यह वीडियो आप नीचे लगे लिंक पर सकते हैं।

ध्रुव राठी छत्रपति शिवाजी पर भी झूठ फैलाता रहा है। उसने अपने हिसाब से तथ्य बताए और अपने नैरेटिव को साधने का प्रयास किया। एल्विश ने खुलासा किया कि ध्रुव राठी की वीडियो को एक और सहयोगी विजेता दहिया लिखती हैं, इसकी टीम के तीन और सदस्य वीडियो से जुड़े बाकी काम करते हैं। ध्रुव राठी ने एक क्रिप्टोकरेंसी को भी बढ़ावा दिया था, इसमें लोगों के पैसे डूबे थे। इसके अलावा ध्रुव राठी लगातर हिन्दुओं को अपने वीडियो में आतंकी बताता रहा है।

गौरतलब है कि ध्रुव राठी को लगातार लिबरल और वामपंथी गैंग प्रमोट करता आया है, वह ध्रुव राठी को एक बुद्धिजीवी बताते हैं और सच सामने रखने वाला पत्रकार बताते हैं, असल में जबकि वह हिन्दुओं से घृणा करने वाला एक्टिविस्ट है। उसके काले कारनामों का अब धीमे धीमे खुलासा होने लगा है। एल्विश का यह वीडियो ध्रुव राठी पर और सच्चाई को सामने लाता है।

बंगाल में BJP नेता को मारी गोली, सर काटकर ले गए TMC के गुंडे: ‘खेला होबे’ का खूनी खेल शुरू

लोकसभा चुनाव 2024 के आखिरी चरण के मतदान के दिन शनिवार (1 जून 2024) को पश्चिम बंगाल में टीएमसी ने बताया कि राजनीतिक हत्याओं को कैसे अंजाम दिया जाता है। टीएमसी के नेता और गुंडे बीजेपी कार्यकर्ता के घर पहुँचे, उसे गोली मार दी और फिर उसका गला धड़ से अलग कर दिया और सिर उठाकर ले गए। बीजेपी कार्यकर्ता का शव पड़ा रहा, लोग चीखते रहे, लेकिन टीएमसी के गुंडों का दिल नहीं पसीजा। हत्यारों में कासिम, सोहोज, नसीम, सोबुज, अली, बंडू के साथ ही कई अन्य लोग भी थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये वारदात नादिया जिले के चाँदपुर गाँव की है, जहाँ टीएमसी नेता की अगुवाई में 10-12 गुंटे बीजेपी कार्यकर्ता के घर पहुँचे और उसकी हत्या कर दी। मृतक की पहचान हाफिजुल शेख के रूप में हुई है, उसने कुछ समय पहले ही बीजेपी ज्वॉइन की थी। टीएमसी के लोग इससे नाराज थे। ऐसे में उन्होंने हाफिजुल शेख की दिनदहाड़े हत्या कर दी।

मृतक के भाई ने बताया कि टीएमसी के लोगों ने पहले हाफिजुल शेख को 2 गोलियाँ मारी, फिर उसका गला काट दिया और सिर वाले हिस्से को अपने साथ लेकर चले गए।

मृतक के भाई ने टीएमसी के गुंडों के नाम भी पुलिस को बताए हैं। हाफिजुल की हत्या करने वालों के नाम कासिम, सोहोज, नसीम, सोबुज, अली, बंडू है। इनके साथ टीएमसी के अन्य गुंडे भी थे। मृतक के भाई ने बताया कि मृतक हाफिजुल पहले सीपीआई-एम में थे, लेकिन वो कुछ समय पहले बीजेपी में शामिल हो गए थे। उन्होंने सीबीआई जाँच की माँग की है।

बता दें कि इस बार के लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में अकेले शनिवार को 2.5 हजार से ज्यादा शिकायतें सिर्फ पश्चिम बंगाल से मिली हैं। शनिवार को पश्चिम बंगाल की 9 लोकसभा सीटों दम दम, बारासात, बशीरहाट, जयनगर, माथुरपुर, डायमंड हार्बर, जादवपुर, कोलकाता दक्षिण और कोलकाता उत्तर पर मतदान हुआ था, जिसमें राजनीतिक पार्टियों की तरफ से 2500 से ज्यादा शिकायतें मिलीं, जिसमें ईवीएम में गड़बड़ी, पोलिंग बूथ पर एजेंट्स को जाने से रोका जाना और वोटर्स को धमकाना शामिल था। बीजेपी ने आरोप लगाया कि टीएमसी कार्यकर्ता वोटर्स को धमका रहे हैं।

ये फर्जी यूट्यूबर आपको बीमार… बहुत बीमार कर रहे, हवा-हवाई दावों से रोज गिराते हैं मोदी सरकार: खुद कर रहे करोड़ों की कमाई, आपका समय हो रहा बर्बाद

देश म लोकसभा चुनाव 2024 समाप्त हो चुके हैं। 1 जून, 2024 को मतदान का आखिरी चरण समाप्त हो गया, देश ने क्या फैसला दिया है, यह 4 जून को सामने आ जाएगा। इससे पहले तमाम एग्जिट पोल ने भविष्यवाणी की है कि भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाला NDA एक बार फिर देश की सत्ता में वापसी कर रहा है। चुनावी आँकड़ों के अनुमान लगाने वाले अधिकांश राजनीतिक पंडित भी यही कह रहे हैं। लेकिन एक जमात फिर भी इस पूरे रवैये के खिलाफ एक अलग माहौल बना रही है। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने इसी को लेकर एक्स (पहले ट्विटर) पर अपनी व्यक्त की है।

उन्होंने लिखा, “अगली बार चुनाव और राजनीति की बात हो तो अपना कीमती वक्त खाली बैठे फर्जी पत्रकार, बड़बोले नेताओं और सोशल मीडिया के स्वयंभू विशेषज्ञों की फिजूल की बातों और विश्लेषण पर बर्बाद मत करिए।” पीके का इशारा उन कथित चुनावी विशेषज्ञों की तरफ था जो बिना जमीनी सच्चाई जाने जनमत को स्वीकार करने से इनकार कर रहे हैं।

दरअसल, प्रशांत किशोर ने बीते दिनों अपने साक्षात्कारों में बताया था कि भाजपा की अगुवाई वाला NDA फिर से देश में सरकार बना रहा है। उन्होंने यह भी बताया था कि भाजपा को 2019 के मुकाबले अधिक सीटें मिलने वाली हैं। पीके ने बताया था कि कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाला INDI गठबंधन यह चुनाव भी बीती के लड़ा है।

पीके ने कहा था कि INDI गठबंधन जनता को विकल्प देने में नाकामयाब रहा है। उनके इन दावों पर कॉन्ग्रेस समेत पूरे इकोसिस्टम ने उनको काफी ट्रोल किया था। सोशल मीडिया पर उनके दावों को लेकर बड़ा अभियान चलाया गया था। उनको भाजपा का करीबी बता दिया गया था।

हालाँकि, अब एग्जिट पोल सामने आ गए हैं। अधिकांश एग्जिट पोल में NDA को 350 से अधिक सीट मिलती दिखाई दे रही हैं। कुछ एक एग्जिट पोल NDA को 400 सीट भी दे रहे हैं। ऐसे में NDA को पूर्ण बहुमत मिलने की प्रशांत किशोर की बात पर मुहर लग रही है। हालाँकि, प्रशांत किशोर की बात के और भी निहितार्थ हैं।

यूट्यूबरों की कमाई ही भ्रम से

जहाँ एक ओर साफ है कि NDA सत्ता में वापसी कर रहा है, वहीं यूट्यूब पर लगातर कॉन्ग्रेस समेत विपक्ष का प्रोपेगेंडा दिन भर कुछ पूर्व पत्रकार और यूट्यूबर चला रहे हैं। इनका पूरा धंधा भाजपा और पीएम मोदी के विरोध पर टिका है।

करोड़ों सब्सक्राइबर वाले इन चैनल पर भ्रामक खबरों के अलावा हास्यास्पद विश्लेषण भी होते हैं। इनका पूरा जोर यह साबित करने में रहता है कि यदि किसी चुनाव में विपक्ष जीता है तो यह जनता का आदेश और उनकी चुनावी कुशलता है, जबकि भाजपा का जीतना लोकतंत्र पर खतरा और चुनावी गड़बड़ी है।

यह चैनल दिन भर ‘फंस गई भाजपा’, ‘हो गया बड़ा खेल’, ‘कॉन्ग्रेस ने पलट दिया गेम’ और ‘खरगे/राहुल ने कह दी ऐसी बात’ टाइप के थम्बनेल अपने वीडियो पर लगाते हैं। पूरा का पूरा ध्यान इस बात पर रहता है कि कैसे यह बात सिद्ध की जाए कि भाजपा सत्ता से दूर रहने वाली है और लोग कॉन्ग्रेस को सत्ता में ला रहे हैं। यह सच्चाई के बिलकुल विपरीत है लेकिन इन यूट्यूबरों की कमाई का मुख्य स्रोत यही है।

असल में यह एक विशेष प्रकार के ग्राहक की डिमांड पूरी कर रहे हैं। पत्रकारिता के नाम पर यह कंटेंट परोसने की दुकानें हैं। इसे एक प्रकार का ‘राजनीतिक पोर्न’ कहा जाना चाहिए। जिस प्रकार पोर्न में आदमी अपनी पसंद तय करता है और बाजार उसकी माँग पूरी करता है। उसी तरह से यह दुकानें एक सीमित संख्या के ग्राहकों को उनकी पसंद का कंटेट परोस रही हैं।

इसमें इनका बड़ा फायदा है, लगातार सत्ता का तार्किक-अतार्किक विरोध करने से देश में आप निष्पक्ष पत्रकार कहे जा सकते हैं। विपक्षी पार्टियों का एक बड़ा समर्थक वर्ग आपको इस आशा से देखता है कि शायद इनकी ही बात सही हो जाए और कॉन्ग्रेस या अन्य कोई पार्टी सत्ता में आ सके। इसके अलावा, इसका सबसे बड़ा फायदा वित्तीय मोर्चे पर है।

राजनीतिक रिपोर्टिंग के यूट्यूब चैनल चलाने वाले अधिकांश लोग पूर्व पत्रकार हैं। यह कभी अच्छे संस्थानों में काम किया करते थे लेकिन जब वहाँ उनका प्रोपेगेंडा नहीं चला तो उन्हें यूट्यूब की शरण लेनी पड़ी। ऐसे में यूट्यूब चैनल चला कर और फर्जी खबरें, मनचाहे विश्लेषण दे कर यह यूट्यूबर अपनी जेबें गरम कर रहे हैं।

नुकसान आम आदमी का

जहाँ एक ओर यह यूट्यूबर एक पक्ष में माहौल बना कर खूब पैसा छाप रहे हैं, उनके वीडियो को देख कर प्रसन्न होने वाले अपना समय बर्बाद कर रहे हैं। इनके वीडियो को देखने वाले लोग अपना समय गँवाते हैं, और उन्हें अधकचरा राजनीतिक ज्ञान और प्रोपेगेंडा मिलता है। प्रोपेगेंडा फैलाने वाले पत्रकार जहाँ इस कमाई से विदेश घूमते हैं, उनके समर्थक उनकी बनाई वीडियो से मात्र कुंठा ही मिलती है। इस अधकचरे ज्ञान का उपयोग जब वह समाज में करते हैं तो उन्हें तथ्यों का सामना करना पड़ता है।

‘पिडी’ कुमार का दावा, इंडी गठबंधन को मिल रही 295+ सीटें : नीरो की तरह बंसी बजाकर मुस्करा रहे रवीश कुमार, साम्राज्य तो पहले से तबाह

पूरी दुनिया में कहावत है, कि ‘जब रोम जल रहा था, तब नीरो बाँसुरी बजा रहा था।’ नीरो कौन था, ये हर कोई जानता है। लेकिन आज हम जिस नीरो की बात कर रहे, वो राजा नहीं है, बल्कि ‘पिडी’ है। ‘पिडी’ को तो जानते ही होंगे आप। कई सारे पिडी बाजार में यूट्यूबर बने घूम रहे हैं। मालिक जो बोलता है, उसे दोहराने तक ही उनका मुँह चलता है। और मालिक के चुप होते ही वो भी भाग खड़े होते हैं। खैर, यहाँ जिस रोम की बात हो रही है, वो लोकसभा सांसद संख्या रूपी साम्राज्य तो पिडी के मालिक का 2014 से ही जल रहा है, लेकिन उसके ‘पिडी’ रूपी नीरो सांत्वना देने और फर्जी हवा भरने के ही काम आ रहे हैं। ऐसे ही ‘पिडी’ में से हैं रवीश कुमार, जिनके बारे में बताने की बहुत जरूरत है भी नहीं। फिर भी, अब चूंकि छुट्टी पर जा रहे हैं, मालिक की तरह… तो बता ही देते हैं।

लोकसभा चुनाव 2024 में सातों चरण के मतदान हो चुके हैं। 4 जून को नतीजे आ जाएंगे। एग्जिट पोल्स में भी विपक्षी दल कहीं नहीं टिके हैं और जमीन पर भी कमोवेश यही हालात हैं। लेकिन रवीश कुमार जैसे यू-ट्यूबर 1 जून को दिल्ली में इंडी गठबंधन की एक तस्वीर दिखा कर ये बता रहे हैं कि विपक्षी गठबंधन लोकसभा चुनाव 2024 को 295+ महारथियों के जुटान से जीत रहा है। ये शब्द तो मालिक के हैं, लेकिन मालिक भी ‘मुखौटा’ है, ऐसे में ‘पिडी’ बाबू जीत का ये ऐलान कर रहे हैं। क्योंकि न्यूज चैनल पर आने वाली खबरों को कोई नहीं देखता, लोग देखते हैं तो सिर्फ ‘पिडी नीरो’ कुमार का यूट्यूब चैनल।

खैर, इन सब बातों को लिखने का सिर्फ एक ही मतलब है कि रात में कमबख्त यूट्यूब ने सजेस्ट किया कि ये ‘शाबाश विपक्ष’ वाला वीडियो देख लीजिए मालिक, काहे से कि पिछला वीडियो भी देखे थे। ये वीडियो करीब 22 मिनट का है, जिसमें 8 मिनट मालिकों ने बक-बक की है, और 8-10 मिनट में मालिकों की बात को ‘पिडी मीडिया’ के स्वयंभू महारथी दोहराते दिखे। बाकी के मिनटों में वो ये बताते रहे है कि उनके चैनल के सब्सक्राइबर कितने हो गए और कितना चैनल देखा गया, साथ ही छुट्टियों पर जाने की बात। दुख तो साफ दिख रहा था कि वो टाई नहीं पहन पा रहे, और न्यूजरूम का हिस्सा नहीं बन पा रहे, लेकिन कुछ तो बोलना ही था, वाले तर्ज पर बोल गए कि खुश हैं।

इस वीडियो में रवीश कुमार कह रहे हैं कि 295+ सीटें आएँगी, ऐसा मल्लिकार्जुन खडगे ने कहा है। कुल 2 दर्जन नेता दिल्ली में जुट गए, ये ऐतिहासिक मौका रहा। बाकी रवीश कुमार ने जिन बातों पर जोर दिया, वो सब सफेद झूठ रही।

सफेद झूठ- डटा रहा एकजुट विपक्ष

इस बात पर क्या ही बोला जाए? इंडी गठबंधन में होने का दावा करने वाली ममता बनर्जी ने कॉन्ग्रेस और लेफ्ट को पश्चिम बंगाल में लात मारकर भगा दिया। पंजाब में अरविंद केजरीवाल से ज्यादा भगवंत मान ने अपनी चलाई और कॉन्ग्रेस को यहां भी रुखसती दे दी, दिल्ली-गुजरात में दोनों साथ आए, लेकिन तब तक लड़ाई मुड़ चुकी थी। यूपी में गठबंधन हुआ, तो ममता ने बंगाल में भले ही एक भी सीट न छोड़ा हो, यूपी में अखिलेश से सेटिंग करके अपना आदमी सेट कर लिया। बेचारे अखिलेश एमपी में एक सीट पाए भी तो नामांकन रद्द हो गया। कॉन्ग्रेस के कहीं कैंडिडेट भाग गए, तो कहीं प्रस्तावक तक नहीं मिले। महाराष्ट्र में एनसीपी-शिवसेना के बचे हुए हिस्सों और कॉन्ग्रेस के बीच कितना तालमेल रहा, ये भी पूरी दुनिया ने देखा। कहाँ तो शरद पवार नेता बन रहे थे इंडी गठबंधन के, कहाँ तो उनके पास पार्टी ही नहीं रह गई, उद्धव ठाकरे का भी हाल हुआ।
ऐसे में मुझे समझ नहीं आता कि जिस नीतीश कुमार ने इंडी गठबंधन को बनाया, जिस ममता बनर्जी ने उसका नामकरण किया, अगर वही इस गठबंधन में नहीं, तो फिर जिस गठबंधन की एकता की बात ये ‘पिडी’ कह रहा है, वो है कहाँ?

बाकी खुद को टीआरपी से, न्यूजरूम की चकाचौंध से दूर रखने का जो अभिनय ‘पिडी’ कुमार कर रहे हैं, उसका मजा लूटने के लिए इन्होंने सड़क वाली पत्रकारिता ‘रवीश की रिपोर्ट’ खुद बंद की थी, ताकि प्राइम टाइम वाले स्पेस में ये सूट-बूट और टाई में बैठ सकें। एक दशक से ज्यादा ऐसा इन्होंने किया भी, अब खुद को निरीह और भिखारी दिखाकर लोगों से चैनल को लाइक, शेयर और कमेंट वाली यूट्यूब पत्रकारिता तक सिमटते देख दुखी हो रहे हैं।