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जनादेश से पहले PM मोदी का जनता से आह्वान, कहा- अगले 25 वर्ष राष्ट्र के लिए समर्पित करें: कन्याकुमारी में साधना के बाद देश से ‘नए संकल्पों’ का किया संवाद

लोकतंत्र की जननी में लोकतंत्र के सबसे बड़े महापर्व का एक पड़ाव आज 1 जून को पूरा हो रहा है। तीन दिन तक कन्याकुमारी में आध्यात्मिक यात्रा के बाद, मैं अभी दिल्ली जाने के लिए हवाई जहाज में आकर बैठा ही हूँ। काशी और अनेक सीटों पर मतदान चल ही रहा है। कितने सारे अनुभव हैं, कितनी सारी अनुभूतियां हैं, मैं एक असीम ऊर्जा का प्रवाह स्वयं में महसूस कर रहा हूँ।

वाकई, 2024 के इस चुनाव में, कितने ही सुखद संयोग बने हैं। अमृतकाल के इस प्रथम लोकसभा चुनाव में मैंने प्रचार अभियान 1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम की प्रेरणास्थली मेरठ से शुरू किया। माँ भारती की परिक्रमा करते हुए इस चुनाव की मेरी आखिरी सभा पंजाब के होशियारपुर में हुई। संत रविदास जी की तपोभूमि, हमारे गुरुओं की भूमि पंजाब में आखिरी सभा होने का सौभाग्य भी बहुत विशेष है। इसके बाद मुझे कन्याकुमारी में भारत माता के चरणों में बैठने का अवसर मिला।

उन शुरुआती पलों में चुनाव का कोलाहल मन-मस्तिष्क में गूँज रहा था। रैलियों में, रोड शो में देखे हुए अनगिनत चेहरे मेरी आँखों के सामने आ रहे थे। माताओं-बहनों-बेटियों के असीम प्रेम का वो ज्वार, उनका आशीर्वाद, उनकी आंखों में मेरे लिए वो विश्वास, वो दुलार, मैं सब कुछ आत्मसात कर रहा था। मेरी आँखे नम हो रही थीं, मैं शून्यता में जा रहा था, साधना में प्रवेश कर रहा था।

कुछ ही क्षणों में राजनीतिक वाद विवाद, वार-पलटवार, आरोपों के स्वर और शब्द, वह सब अपने आप शून्य में समाते चले गए। मेरे मन में विरक्ति का भाव और तीव्र हो गया, मेरा मन बाह्य जगत से पूरी तरह अलिप्त हो गया। इतने बड़े दायित्वों के बीच ऐसी साधना कठिन होती है, लेकिन कन्याकुमारी की भूमि और स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा ने इसे सहज बना दिया। मैं सांसद के तौर पर अपना चुनाव भी अपनी काशी के मतदाताओं के चरणों में छोड़कर यहाँ आया था।

मैं ईश्वर का भी आभारी हूँ कि उन्होंने मुझे जन्म से ये संस्कार दिये। मैं ये भी सोच रहा था कि स्वामी विवेकानंद जी ने उस स्थान पर साधना के समय क्या अनुभव किया होगा, मेरी साधना का कुछ हिस्सा इसी तरह के विचार प्रवाह में बहा। इस विरक्ति के बीच, शांति और नीरवता के बीच, मेरे मन में निरंतर भारत के उज्जवल भविष्य के लिए, भारत के लक्ष्यों के लिए निरंतर विचार उमड़ रहे थे।

कन्याकुमारी के उगते हुए सूर्य ने मेरे विचारों को नई ऊँचाई दी, सागर की विशालता ने मेरे विचारों को विस्तार दिया और क्षितिज के विस्तार ने ब्रह्मांड की गहराई में समाई एकात्मकता, का निरंतर एहसास कराया। ऐसा लग रहा था जैसे दशकों पहले हिमालय की गोद में किए गए चिंतन और अनुभव पुनर्जीवित हो रहे हों।

कन्याकुमारी का ये स्थान हमेशा से मेरे मन के अत्यंत करीब रहा है। कन्याकुमारी में विवेकानंद शिला स्मारक का निर्माण श्री एकनाथ रानाडे जी ने करवाया था। एकनाथ जी के साथ मुझे काफी भ्रमण करने का मौका मिला था। इस स्मारक के निर्माण के दौरान कन्याकुमारी में कुछ समय रहना, वहाँ आना-जाना, स्वभाविक रूप से होता था।

कश्मीर से कन्याकुमारी, ये हर देशवासी के अन्तर्मन में रची-बसी हमारी साझी पहचान हैं। ये वो शक्तिपीठ है जहाँ माँ शक्ति ने कन्या कुमारी के रूप में अवतार लिया था। इस दक्षिणी छोर पर माँ शक्ति ने उन भगवान शिव के लिए तपस्या और प्रतीक्षा की जो भारत के सबसे उत्तरी छोर के हिमालय पर विराज रहे थे। कन्याकुमारी संगमों के संगम की धरती है। हमारे देश की पवित्र नदियाँ अलग-अलग समुद्रों में जाकर मिलती हैं और यहाँ उन समुद्रों का संगम होता है। और यहाँ एक और महान संगम दिखता है- भारत का वैचारिक संगम।

यहाँ विवेकानंद शिला स्मारक के साथ ही संत तिरुवल्लूवर की विशाल प्रतिमा, गांधी मंडपम और कामराजर मणि मंडपम हैं। महान नायकों के विचारों की ये धाराएँ यहाँ राष्ट्र चिंतन का संगम बनाती हैं। इससे राष्ट्र निर्माण की महान प्रेरणाओं का उदय होता है। जो लोग भारत के राष्ट्र होने और देश की एकता पर संदेह करते हैं, उन्हें कन्याकुमारी की ये धरती एकता का अमिट संदेश देती है।

कन्याकुमारी में संत तिरुवल्लूवर की विशाल प्रतिमा, समुद्र से माँ भारती के विस्तार को देखती हुई प्रतीत होती है। उनकी रचना ‘तिरुक्कुरल’ तमिल साहित्य के रत्नों से जड़ित एक मुकुट के जैसी है। इसमें जीवन के हर पक्ष का वर्णन है, जो हमें स्वयं और राष्ट्र के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने की प्रेरणा देता है। ऐसी महान विभूति को श्रद्धांजलि अर्पित करना भी मेरा परम सौभाग्य रहा।

स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था- हर राष्ट्र को एक सन्देश देना होता है, एक लक्ष्य पूरा करना होता है, एक नियति तक पहुँचना होता है। (Every Nation Has a Message To deliver, a mission to fulfil, a destiny to reach.)

भारत हजारों वर्षों से इसी भाव के साथ सार्थक उद्देश्य को लेकर आगे बढ़ता आया है। भारत हजारों वर्षों से विचारों के अनुसंधान का केंद्र रहा है। हमने जो अर्जित किया उसे कभी अपनी व्यक्तिगत पूँजी मानकर आर्थिक या भौतिक मापदण्डों पर नहीं तौला। इसीलिए, ‘इदं न मम’ यह भारत के चरित्र का सहज एवं स्वाभाविक हिस्सा हो गया है।

भारत के कल्याण से विश्व का कल्याण, भारत की प्रगति से विश्व की प्रगति, इसका एक बड़ा उदाहरण हमारी आज़ादी का आंदोलन भी है। 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। उस समय दुनिया के कई देश गुलामी में थे। भारत की स्वतन्त्रता से उन देशों को भी प्रेरणा और बल मिला, उन्होंने आजादी प्राप्त की।

अभी कोरोना के कठिन कालखंड का उदाहरण भी हमारे सामने है। जब गरीब और विकासशील देशों को लेकर आशंकाएँ व्यक्त की जा रही थीं, लेकिन, भारत के सफल प्रयासों से तमाम देशों को हौसला भी मिला और सहयोग भी मिला।

आज भारत का गवर्नेंस मॉडल दुनिया के कई देशों के लिए एक उदाहरण बना है। सिर्फ 10 वर्षों में 25 करोड़ लोगों का गरीबी से बाहर निकलना अभूतपूर्व है। प्रो-पीपल गुड गवर्नेंस, एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट , एस्पिरेशनल ब्लॉक जैसे अभिनव प्रयोग की आज विश्व में चर्चा हो रही है। गरीब के सशक्तिकरण से लेकर लास्ट माइल डिलीवरी तक, समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को प्राथमिकता देने के हमारे प्रयासों ने विश्व को प्रेरित किया है।

भारत का डिजिटल इंडिया अभियान आज पूरे विश्व के लिए एक उदाहरण है कि हम कैसे तकनीक का इस्तेमाल गरीबों को सशक्त करने में, पारदर्शिता लाने में, उनके अधिकार दिलाने में कर सकते हैं। भारत में सस्ता डेटा आज सूचना और सेवाओं तक गरीब की पहुँच सुनिश्चित करके सामाजिक समानता का माध्यम बन रहा है। पूरा विश्व तकनीक के इस लोकतांत्रिकरण को एक शोध दृष्टि से देख रहा है और बड़ी वैश्विक संस्थाएँ कई देशों को हमारे मॉडल से सीखने की सलाह दे रही हैं।

आज भारत की प्रगति और भारत का उत्थान केवल भारत के लिए बड़ा अवसर नहीं है। ये पूरे विश्व में हमारे सभी सहयात्री देशों के लिए भी एक ऐतिहासिक अवसर है। G-20 की सफलता के बाद से विश्व भारत की इस भूमिका को और अधिक मुखर होकर स्वीकार कर रहा है। आज भारत को ग्लोबल साउथ की एक सशक्त और महत्वपूर्ण आवाज़ के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। भारत की ही पहल पर अफ्रीकन यूनियन G-20 ग्रुप का हिस्सा बना। ये सभी अफ्रीकन देशों के भविष्य का एक अहम मोड़ साबित हुआ है।

नए भारत का ये स्वरूप हमें गर्व और गौरव से भर देता है, लेकिन, साथ ही ये 140 करोड़ देशवासियों को उनके कर्तव्यों का अहसास भी करवाता है। अब एक भी पल गँवाए बिना हमें बड़े दायित्वों और बड़े लक्ष्यों की दिशा में कदम उठाने होंगे। हमें नए स्वप्न देखने हैं। अपने सपनों को अपना जीवन बनाना है, और उन सपनों को जीना शुरू करना है।

हमें भारत के विकास को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखना होगा, और इसके लिए ये जरूरी है कि हम भारत के अंतर्भूत सामर्थ्य को समझें। हमें भारत की शक्तियों को स्वीकार भी करना होगा, उन्हें पुष्ट भी करना होगा और विश्व हित में उनका सम्पूर्ण उपयोग भी करना होगा। आज की वैश्विक परिस्थितियों में युवा राष्ट्र के रूप में भारत का सामर्थ्य हमारे लिए एक ऐसा सुखद संयोग और सुअवसर है जहाँ से हमें पीछे मुड़कर नहीं देखना है।

21वीं सदी की दुनिया आज भारत की ओर बहुत आशाओं से देख रही है। और वैश्विक परिदृश्य में आगे बढ़ने के लिए हमें कई बदलाव भी करने होंगे। हमें रिफॉर्म को लेकर हमारी पारंपरिक सोच को भी बदलना होगा। भारत रिफॉर्म को केवल आर्थिक बदलावों तक सीमित नहीं रख सकता है। हमें जीवन में हर क्षेत्र में रिफॉर्म की दिशा में आगे बढ़ना होगा। हमारे रिफॉर्म 2047 के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप भी होने चाहिए।

हमें ये भी समझना होगा कि किसी भी देश के लिए रिफॉर्म कभी एकाकी प्रक्रिया नहीं हो सकती। इसीलिए, मैंने देश के लिए रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म का विज़न सामने रखा। रिफॉर्म दायित्व नेतृत्व का होता है। उसके आधार पर हमारी ब्यूरोक्रेसी परफॉर्म करती है और फिर जब जनता जनार्दन इससे जुड़ जाती है, तो ट्रांसफॉर्मेशन होते हुए देखते हैं।

भारत को विकसित भारत बनाने के लिए हमें श्रेष्ठता को मूल भाव बनाना होगा। हमें स्पीड, स्केल, स्कोप और स्टैंडर्ड्स, चारों दिशाओं में तेजी से काम करना होगा। हमें मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ क्वालिटी पर जोर देना होगा, हमें जीरो डिफेक्ट- जीरो इफेक्ट के मंत्र को आत्मसात करना होगा।

हमें हर पल इस बात पर गर्व होना चाहिए कि ईश्वर ने हमें भारत भूमि में जन्म दिया है। ईश्वर ने हमें भारत की सेवा और इसकी शिखर यात्रा में हमारी भूमिका निभाने के लिए चुना है।हमें प्राचीन मूल्यों को आधुनिक स्वरूप में अपनाते हुये अपनी विरासत को आधुनिक ढंग से पुनर्परिभाषित करना होगा।

हमें एक राष्ट्र के रूप में पुरानी पड़ चुकी सोच और मान्यताओं का परिमार्जन भी करना होगा। हमें हमारे समाज को पेशेवर निराशावादियों के दबाव से दबाव से बाहर निकालना है। हमें याद रखना है, नकारात्मकता से मुक्ति, सफलता की सिद्धि तक पहुँचने के लिए पहली जड़ी-बूटी है। सकारात्मकता की गोद में ही सफलता पलती है।

भारत की अनंत और अमर शक्ति के प्रति मेरी आस्था, श्रद्धा और विश्वास भी दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। मैंने पिछले 10 वर्षों में भारत के इस सामर्थ्य को और ज्यादा बढ़ते देखा है और ज्यादा अनुभव किया है। जिस तरह हमने 20वीं सदी के चौथे-पांचवे दशक को अपनी आज़ादी के लिए प्रयोग किया, उसी तरह 21वीं सदी के इन 25 वर्षों में हमें विकसित भारत की नींव रखनी है। स्वतंत्रता संग्राम के समय देशवासियों के सामने बलिदान का समय था। आज बलिदान का नहीं निरंतर योगदान का समय है।

स्वामी विवेकानंद ने 1897 में कहा था कि हमें अगले 50 वर्ष केवल और केवल राष्ट्र के लिए समर्पित करने होंगे। उनके इस आह्वान के ठीक 50 वर्ष बाद, 1947 में भारत आज़ाद हो गया। आज हमारे पास वैसा ही स्वर्णिम अवसर है। हम अगले 25 वर्ष केवल और केवल राष्ट्र के लिए समर्पित करें। हमारे ये प्रयास आने वाली पीढ़ियों और आने वाली शताब्दियों के लिए नए भारत की सुदृढ़ नींव बनकर अमर रहेंगे। मैं देश की ऊर्जा को देखकर ये कह सकता हूँ कि लक्ष्य अब दूर नहीं है। आइए, तेज कदमों से चलें…मिलकर चलें, भारत को विकसित बनाएँ।

(यह विचार पीएम मोदी ने 1 जून को कन्याकुमारी से दिल्ली लौटते समय विमान में शाम 4:15 बजे से 7 बजे के बीच लिखे हैं।)

यह लेख प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने ब्लॉग पर लिखा है, इस लिंक पर क्लिक करके आप मूल लेख पढ़ सकते हैं।

कोल्हापुर की जेल में मोहम्मद अली खान को कैदियों ने मार डाला, 1993 के बम धमाकों का था दोषी: RDX-हैंडग्रेनेंड लेकर आया था मुंबई, नाली का ढक्कन सिर पर मारकर हत्या

1993 मुंबई बम धमाका मामलों में सजा पाए हुए मोहम्मद अली खान उर्फ़ मुन्ना उर्फ़ भंवरलाल गुप्ता की साथी कैदियों ने हत्या कर दी। वह महाराष्ट्र के कोल्हापुर की कलाम्बा सेंट्रल जेल में बंद था। उसे साथी कैदियों ने पीट पीट कर मार दिया।

जानकारी के अनुसार, कलाम्बा जेल में सुबह कैदियों की गिनती के बाद नहाने के दौरान यह घटना हुई। मोहम्मद अली खान जब सुबह नहाने गया तो यहाँ उसकी साथी कैदियों से बहस हो गई, इसके बाद साथी कैदियों ने उस पर हमला किया। उससे मारपीट के बाद एक कैदी ने पास ही में नाली के ढक्कन से पीटना चालू कर दिया। यह ढक्कन उसके सर पर मारा गया जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया, इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया जहाँ उसकी मौत हो गई।

मोहम्मद अली खान जेल के सर्कल 2 की बैरक 4 में बंद था। बताया गया कि नहाने को लेकर झगड़े से पहले उसका बैरक के अंदर इन्हीं हमलावरों से विवाद हुआ था। इसके बाद जब यह बाहर पहुँचा तो फिर से उसकी कहासुनी हुई और विवाद हो गया जिसके बाद यह हत्या हुई। मोहम्मद अली खान पर हत्या करने वालों के नाम प्रतीक उर्फ़ सुरेश पाटिल, दीपक नेताजी, संदीप शंकर चव्हाण, ऋतुराज विनायक इनामदार और सौरभ विकास हैं।

कोल्हापुर के एसपी महेंद्र पंडित ने इस मामले में बताया कि इन हमलावरों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जा रहा है। उन्होंने बताया, “मोहम्मद अली गुस्सैल स्वभाव का था और छोटी-छोटी बातों पर आरोपितों से झगड़ा करता था। पुराना कैदी होने के कारण वह बाकी कैदियों पर हुक्म चलाता था था और अगर उसकी बात नहीं मानते थे तो गाली-गलौज करता था। मैंने जेल का दौरा किया और आरोपितों से उस झगड़े के बारे में पूछताछ की जिसके कारण मुन्ना की मौत हुई।” पुलिस अब इस मामले में जाँच जारी है।

बताया गया कि मोहम्मद अली खान उर्फ़ मुन्ना मुर्फ़ भंवर लाल गुप्ता 1993 के बम धमाकों में हथियार और RDX सप्लाई करने के मामले में दोषी पाया गया था और इसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। वह 2013 में कलाम्बा जेल में लाया गया था। इससे पहले वह मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद था।

इंस्टाग्राम पोस्ट को इस्लाम विरोधी बता हिंदू के घर पर चढ़ गई ‘भीड़’, पत्थरबाजी के बाद 106 पर केस: 8 गिरफ्तार, MP के बुरहानपुर का मामला

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में सोशल मीडिया पर शेयर हुई एक पोस्ट को इस्लाम विरोधी बता मुस्लिम भीड़ ने जमकर हंगामा किया। हिंसक भीड़ पोस्ट करने वाले हिन्दू युवक के घर पर चढ़ गई, जिससे दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। इस दौरान पत्थरबाजी भी हुई। पुलिस ने दोनों पक्षों से कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। उपद्रव करने वाली भीड़ में शामिल लोगों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। इलाके में पुलिस की चौकसी बढ़ा दी गई है। घटना शनिवार (1 जून 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना बुरहानपुर जिले के थाना गणपति नाका इलाके की है। शनिवार की रात यहाँ के रहने वाले शोहराबुद्दीन कुरैशी ने पुलिस में जतन नाम के हिन्दू युवक के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में शोहराबुद्दीन ने जतन द्वारा इंस्टाग्राम पर शेयर की गई एक पोस्ट का जिक्र करते हुए उसे इस्लाम विरोधी बताया। पुलिस ने शिकायत पर जाँच शुरू की। लेकिन पुलिस जाँच का निष्कर्ष आए बिना ही मुस्लिम समुदाय के 100 से अधिक लोग उपद्रव पर उतारू हो गए। इस हंगामे का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

उपद्रवी भीड़ की शक्ल में बुरहानपुर के ही इतवारा गेट इलाके में रहने वाले जतन के घर की तरफ बढ़ने लगे। जतन के घर पहुँच कर भीड़ हंगामा करते हुए उन्मादी नारे लगाने लगी। हंगामे की सूचना पर जतन के पक्ष में भी लोग जमा हो गए। दोनों तरफ से भीड़ जुटने की वजह से तनावपूर्ण हालत में पत्थरबाजी शुरू हो गई। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और भीड़ को तितर-बितर किया। बताया जा रहा है कि हमलावरों द्वारा पुलिस पर भी पत्थर फेंके गए थे। वीडियो में भीड़ को ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाते सुना जा सकता है।

घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। इंस्टाग्राम पर पोस्ट करने वाले युवक जतन को गिरफ्तार कर लिया गया है। जतन पर IPC की धारा 295- A व 188 के तहत कार्रवाई की गई और उसे जेल भेज दिया गया है। वहीं जतन के घर बवाल करने पहुँची भीड़ पर भी पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी। 6 नामजदों सहित कुल 106 हमलावरों पर IPC की धारा 147, 336, 353 व अन्य के तहत FIR दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है। हमलावरों को चिन्हित कर उनकी धरपकड़ के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।

बॉर्डर पर तैनात BSF जवान को बांग्लादेश में खींचने की कोशिश, तस्करों ने हमला कर छीने हथियार और रेडियो सेट: अश्लील इशारे कर उकसाया, लोहे की रॉड से मारपीट

त्रिपुरा के सिपाहीजाला के कलमचेरा में भारत-बांग्लादेश सीमा पर तैनात बीएसएफ जवान पर बांग्लादेशी उपद्रवियों ने हमला किया। बताया जा रहा है कि इस दौरान उनपर बांस के डंडों और लोहे की छड़ों से हमला किया गया। घटना में उन्हें गंभीर चोट आई। बाद में बांग्लादेश में बीएसएफ ने समकक्ष के साथ इस मुद्दे पर मीटिंग की और घटना का विरोध दर्ज कराया।

समाचार एजेंसी पर प्रकाशित खबर में इस घटना के संबंध में जानकारी दी गई- जिस समय यह घटना घटी उस समय बीएसएफ कांस्टेबल भोले भारत-बांग्लादेश सीमा पर चौकी ड्यूटी कर रहे थे और उन्हें बाड़ गेट को संचालित करने का काम सौंपा गया था। लगभग डेढ़ बजे बांग्लादेशी तस्करों का एक बड़ा समूह अवैध रूप से अंतर्राष्ट्रीय सीमा पार कर गया और चीनी की तस्करी के इरादे से बाड़ लगाने वाले गेट के पास इकट्ठा हो गया। इसके अलावा, उन्होंने अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया और ड्यूटी पर तैनात बीएसएफ कांस्टेबल को उत्तेजक भाषा और अश्लील इशारों से उकसाया।

इसके बाद बांग्लादेशी तस्करों ने कांस्टेबल भोले को घेर लिया और उसके साथ मारपीट की और उसे बांग्लादेश की ओर खींचने का प्रयास किया। इस दौरान उनसे उनका रेडियो और हथियार भी छीन लिया गया। कांस्टेबल किसी तरह अपने भोले भागने में सफल रहे, हालाँकि, उन पर बांस के डंडों और लोहे की छड़ों से हमला किया गया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं।

इस घटना के बाद समकक्ष के साथ कमांडेंट स्तर की फ्लैग मीटिंग हुई और बीएसएफ ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। छीने गए हथियार और रेडियो सेट को बीजीबी ने बीएसएफ को वापस सौंप दिया। बीएसएफ भारत-बांग्लादेश सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) के साथ मिलकर काम करना जारी रखता है।

गौरतलब है कि इससे पहले एक ऐसा ही मामला मार्च महीने में आया था। उस समय जवान मगरोली में अपनी ड्यूटी पर थे। उसी समय सुरक्षाकर्मियों ने 15-20 बदमाशों को सिर में सामान लादे भारत की तरफ से बांग्लादेश की सीमा में घुसते हुए देखा।

जवानों ने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी। उलटा जवानों को घेर लिया गया। इस मामले में बीएसएफ जवानों पर फायरिंग मामले में एक जवान घायल हो गया था। बाद में डॉक्टरों ने अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया इस दौरान जवानों से उन बांग्लादेशी बदमाशों ने उलझकर हथियार लेने की भी कोशिश की थी।

कोलकाता में BJP एजेंट का सर फोड़ा, संदेशखाली की महिलाओं को ‘विधवा’ बनाने की धमकी… चुनाव खत्म होते ही बंगाल में हिंसा, राज्यपाल ने कहा – एक्शन लो

2024 के लोकसभा चुनाव पूरे देश में खत्म हो चुके हैं। पश्चिम बंगाल में भी शनिवार (1 जून, 2024) को अंतिम राउंड की वोटिंग हो गई, हालाँकि, राज्य में चुनावी हिंसा का दौर चुनावों के बाद भी जारी रहा। संदेशखाली से लेकर कोलकाता तक भाजपा कार्यकर्ताओं के हमलों में घायल होने की सूचना है।

जनवरी, 2024 के बाद से हिंसा झेल रहे संदेशखाली में फिर से एक बार पुलिस और महिलाओं के बीच तकरार हुई है। यहाँ प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर पुलिसिया कार्रवाई की जा रही है। एक गिरफ्तारी का विरोध करने वाली महिलाओं पर पुलिस से बल प्रयोग किया। यह महिलाएँ एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने का विरोध कर रही थीं।

भाजपा आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने इसका एक वीडियो साझा किया है। उन्होंने इसमें बताया है कि चुनाव के एक दिन बाद TMC कार्यकर्ता संदेशखाली में जाकर कह रहे हैं कि 4 जून के बाद वह सबको विधवा बना देंगे। उन्होंने पश्चिम बंगाल पुलिस पर आरोप लगाया कि वह TMC के गुंडों के साथ मिलकर महिलाओं को धमका रही है।

संदेशखाली में चुनाव वाले दिन भी जम कर हिंसा हुई थी। इस दिन पुलिस ने आसू गैस के गोले दागे थे। चुनाव के दौरान एक भाजपा कार्यकर्ता का हमले में सर भी फट गया था। अन्य लोकसभा क्षेत्रों से भी हिंसा की खबरें आई थी। वर्तमान में संदेशखाली धारा 144 लगा दी गई है।

इस हिंसा को लेकर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने राज्य सरकार से एक्शन लेने को कहा है। उन्होंने कहा कि वह वोटिंग के बाद महिलाओं पर हमले की सूचना सुन कर चिंतित हैं। उन्होंने हमले जारी रहने पर राजभवन के दरवाजे खोलने की बात कही है।

वहीं मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि कोलकाता में एक भाजपा पोलिंग एजेंट को TMC कार्यकर्ताओं ने काफी मारापीटा। कोलकाता उत्तर मध्य के भाजपा उम्मीदवार तापस रॉय के पुल्लिंग एजेंट भाजपा कार्यकर्ता रमेश साव ने आरोप लगाया कि चुनाव खत्म होने के बाद उन्हें TMC के गुंडे एक जगह उठा ले गए और उनको काफी मारापीटा।

रमेश का सर भी फोड़ दिया गया, उनको यातनाएँ दी गईं। भाजपा ने आरोप लगाया कि यह उसके कार्यकर्ता को मारने की साजिश थी। वहीं नैहाटी में एक भाजपा कार्यकर्ता के घर के बाहर बम रख दिया गया। इसका आरोप भी TMC के लोगों पर ही लगा है।

वहीं नादिया में अघोषित कर्फ्यू की स्थिति है। यहाँ एक भाजपा कार्यकर्ता हफीजुल शेख को गोली मार दी गई थी। उसका सर काटने की भी खबरें है। पुलिस इस मामले में जाँच कर रही है। पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा की आशंका के चलते चुनाव आयोग ने निर्णय लिया है कि वह परिणाम के 15 दिन बाद तक यहाँ से केन्द्रीय सुरक्षा बल नहीं हटाएगा।

न गाड़ी की हुई टक्कर, न रवीना टंडन ने पी रखी थी शराब: हिरोइन पर मुस्लिम परिवार के आरोप झूठे, जाँच के बाद मुंबई पुलिस का बयान

बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन से जुड़े मारपीट के मामले में अलग-अलग एंगल्स से वीडियो वायरल होने के बाद अब पुलिस का बयान सामने आया है। इस बयान को सोशल मीडिया पर अभिनेत्री ने खुद शेयर किया है और अपनी बिन कुछ बोले मामले में अपनी सफाई दी है।

इस पोस्ट के अनुसार जोन 9 के डीसीपी राजतिलक रौशन ने बताया कि इस मामले में शिकायतकर्ताओं ने फर्जी जानकारी दी थी। पुलिस ने सारी सीसीटीवी फुटेज चेक की है और पाया कि अभिनेत्री का ड्राइवर कार रिवर्स कर रहा था ताकि सड़क से गाड़ी सोसायटी में जाए, उसी समय परिवार भी उसी लेन से जा रहा था। इसी दौरान परिवार ने गाड़ी रोकी और कहा कि ड्राइवर को गाड़ी पीछे करने से पहले चेक करना चाहिए। इसी के बाद उनके बीच सारा बवाल शुरू हुआ।

डीसीपी ने बताया कि इसी बात के बात बहस बढ़ी और बात गाली-गलौच तक आ गई। इतने में रवीना टंडन भी स्पॉट पर पहुँची कि न जाने ड्राइवर के साथ कैसी बहस हुई। अभिनेत्री ने ड्राइवर को भीड़ से बचाने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ उनके ऊपर टूट गई। बाद में रवीना टंडन और वो परिवार दोनों थाने गए और लिखित शिकायतें दी। बाद में दोनों ने निर्णय लिया कि उन्हें मामला नहीं दर्ज कराना।

इस पोस्ट के अनुसार डीसीपी राजतिलक रौशन ने बताया हुआ है कि घटना में कोई घायल नहीं हुआ है। सीसीटीवी फुटेज चेक कर ली गई है और कार ने भी किसी को नहीं मारा है। न ही अभिनेत्री नशे में चूर थी। ड्राइवर और अभिनेत्री के ऊपर जो आरोप लगाए गए थे वो सारे फर्जी थे।

बता दें कि रविवार (2 जून 2024) को एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसमें एक मुस्लिम परिवार दावा कर रहा था कि रवीना टंडन ने शराब के नशे में चूर होकर उनसे मारपीट की है। उनके परिवार की बुजुर्ग महिला का सिर फोड़ा है और लड़की की नाक पर मारा है। इस वीडियो में रवीना टंडन बार-बार- मुझे मत मारो, वीडियो मत बनाओ जैसी बातें कह रही थीं। शुरू में लोगों ने अंदाजा लगाया कि शायद सच में अभिनेत्री ने ऐसा किया होगा, लेकिन बाद में दूसरे एंगल की वीडियो सामने आने के बाद क्लियर हुआ कि अभिनेत्री ने कुछ नहीं किया था। न कार टकराई थी, न किसी को चोट आई थी और न ही अभिनेत्री ने शराब पी थी। परिवार द्वारा चिल्ला-चिल्ला कर लगाए गए आरोप फर्जी थे

‘कॉन्ग्रेस नेता फैला रहे भ्रम, अमित शाह ने 150 जिलाधिकारियों को किया कॉल तो सबूत दिखाएँ’ : जयराम रमेश को चुनाव आयोग ने भेजा नोटिस

कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने शनिवार (1 जून 2024) को अपने X हैंडल पर एक विवादित पोस्ट किया था। इस पोस्ट में उन्होंने दावा किया था कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कई जिलों के DM को सीधे कॉल करके धमका रहे हैं। जयराम रमेश ने यह भी दावा किया था कि अब तक 150 जिलाधिकारियों से अमित शाह की बात हो चुकी है। अब इस पोस्ट का चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने नोटिस जारी करके जयराम रमेश से इस दावे के सबूत माँगे हैं। इन सबूतों के साथ कॉन्ग्रेस नेता को जवाब देने के लिए रविवार (2 जून) तक का समय दिया गया था। जवाब देने के बजाय जयराम रमेश ने उलटे चुनाव आयोग की ही निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दरअसल, जयराम रमेश ने शनिवार (1 जून) को अपने X हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की थी। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा, “निवर्तमान गृह मंत्री आज सुबह से ज़िला कलेक्टर्स से फ़ोन पर बात कर रहे हैं। अब तक 150 अफ़सरों से बात हो चुकी है। अफ़सरों को इस तरह से खुल्लमखुल्ला धमकाने की कोशिश निहायत ही शर्मनाक है एवं अस्वीकार्य है। याद रखिए कि लोकतंत्र धमकियों से नहीं बल्कि जनादेश से चलता है। 4 जून को आ रहे जनादेश के अनुसार नरेन्द्र मोदी, अमित शाह और भाजपा सत्ता से बाहर होगी। INDIA जनबंधन विजयी होगा। अफ़सरों को किसी प्रकार के दबाव में नहीं आना चाहिए व संविधान की रक्षा करनी चाहिए। उन पर हमारी नजर है।”

जयराम रमेश द्वारा की गई इसी पोस्ट के अगले दिन रविवार (2 जून) को भारत निर्वाचन आयोग के अधिकारी सुमन कुमार दास ने उन्हें नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि आचार संहिता के दौरान सभी जिलाधिकारी सीधे तौर पर चुनाव आयोग को रिपोर्ट कर रहे हैं लेकिन अब तक किसी ने भी इस प्रकार की कोई शिकायत दर्ज नहीं करवाई है। आयोग ने बताया है कि जयराम रमेश द्वारा किए गए दावों से भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। चुनाव आयोग ने कॉन्ग्रेस नेता से 2 जून तक उनके दावों को प्रमाणित करने वाले सबूत देने को कहा है।

खुद को मिली इस नोटिस पर जयराम रमेश ने सीधे-सीधे कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने चुनाव आयोग की ही निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े कर दिए। दावों का सबूत पेश करने के बजाय जयराम रमेश आरोप लगाने लगे कि चुनाव आयोग उन शिकायतों पर ध्यान नहीं देता जो भाजपा के विरोध में की जाती हैं। टाइम्स नाउ से बात करते हुए उन्होंने यह भी साफ़ नहीं किया कि वो चुनाव आयोग की इस नोटिस का क्या और कब जवाब देंगे।

केरल में ईसाइयों ने BJP के लिए किया भारी संख्या में मतदान: Exit Poll देख पूर्व केंद्रीय मंत्री का दावा- राज्य में दोगुना होगा पार्टी का वोट शेयर

एग्जिट पोल आने के बाद पूर्व केंद्रीय मत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कुछ खास दावे किए हैं। उन्होंने केरल में भाजपा के पॉजिटिव रिजल्ट की ओर इशारा करते हुए कहा कि इस बार ईसाई समुदाय ने भाजपा को भारी संख्या में वोट दिया है।

उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा केरल में भाजपा को 20-24 प्रतिशत वोट शेयर मिलेगा, उन्होंने कहा कि ईसाई समुदाय ने भारी संख्या में पार्टी को वोट दिया है।

वह बोले, “मैं केरल का प्रभारी था, जिस तरह से हमारे सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चुनाव के लिए प्रचार किया था। हमारे वोट पिछली बार के 12 प्रतिशत से लगभग दोगुने हो गए हैं, यह 20-24 प्रतिशत तक जा सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि ईसाई समुदाय ने मतदान किया है भारी संख्या में।”

उन्होंने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “केरल में कॉन्ग्रेस भी कम्युनिस्ट पार्टी की तरह सांप्रदायिक राजनीति करने लगी। यह पीएम मोदी के कारण हुआ है। राज्य के 3.5 करोड़ लोगों में से 2 करोड़ लोगों को केंद्रीय योजनाओं से लाभ मिला है। बुनियादी ढाँचे में विकास से भी लोग प्रभावित है।”

उन्होंने दावा किया कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी दक्षिणी राज्यों से सबसे ज्यादा सांसदों वाली पार्टी बनकर उभरेगी। वह बोले “केरल के बहुत से लोग भारत के बाहर काम करते हैं, उन्हें यह भी लग रहा है कि भारत की प्रतिष्ठा विश्व स्तर पर बढ़ी है और उन्हें भाजपा को वोट देना चाहिए … लोगों ने पीएम मोदी के नेतृत्व पर भरोसा किया है, उन्होंने देश के भविष्य और उनके लिए वोट किया है बच्चों, और हमें विश्वास है कि हम एग्ज़िट पोल के पूर्वानुमानों से भी बेहतर प्रदर्शन करेंगे।”

‘हाँ, पी थी शराब… लेकिन अब कुछ याद नहीं’: पुणे पोर्श कार केस के नाबालिग आरोपित ने 1 घंटे की पूछताछ में कबूली नशे में होने की बात, बाकी सवालों पर चुप रहा

पुणे पोर्श कार एक्सीडेंट मामले में आरोपित लड़के ने पुलिस के आगे स्वीकार कर लिया है कि उसने शराब पीकर ड्राइविंग की थी। सूत्रों से मीडिया में आई इस जानकारी में कहा गया है कि लड़के ने पुलिस को अपने शराब पीने की बात के साथ ये भी कहा है कि उसे नहीं याद उस दिन क्या हुआ था।

रिपोर्ट के अनुसार, एक घंटे से अधिक समय तक चली पूछताछ के दौरान (सुबह 11:30 से दोपहर 12:30 बजे तक) चली पूछताछ के दौरान, लड़के ने पुणे पुलिस को बताया था कि दुर्घटना के समय वह नशे में था, इसलिए उसे कुछ भी याद नहीं है।

बताया जा रहा है कि लड़के से पूछताछ उसकी माँ की मौजूदगी में की गई थी। माँ को भी पुलिस ने 1 जून को गिरफ्तार किया था। आरोप था कि एक्सीडेंट के ठीक बाद अस्पातल में लड़के के ब्लड सैंपल माँ के सैंपल से ही बदले गए थे।

इस केस में पुलिस का कहना है कि उन्होंने लड़के से बार-बार पूछताछ की लेकिन वो बार-बार यही कहता रहा कि उसे कुछ याद नहीं है। अधिकारियों ने उससे पोर्श कार की ड्राइविंग, सबूतों से छेड़छाड़, मेडिकल टेस्ट आदि को लेकर सवाल किए लेकिन वो कहता रहा उसे कुछ याद नहीं हैं।

प्रारंभित जाँच में पता चला कि नाबालिग और उसके दोस्तों ने पबों में शराब पी थीं। इसके बाद उन्होंने 48000 का बिल चुकाया था।

उल्लेखनीय है कि इस मामले में अब तक कई गिरफ्तारी हो गई हैं। लड़का जहाँ हिरासत में है। वहीं उसके माता-पिता सबूतों से छेड़छाड़ करने के आरोप में गिरफ्तार हैं और साथ ही उसके दादा को भी अरेस्ट किया गया है क्योंकि उन्होंने ड्राइवर को बंधक बनाकर उसे धमकाया था कि वो अपने ऊपर सारा इल्जाम लेले। वहीं लड़के की माँ शिवानी अग्रवाल ने बताया है कि उनसे खून का सैंपल बदलने का आइडिया उन्हें सैसन अस्पताल के डॉक्टर ने ही दिया था।

न टकराई कार, न कोई हुआ घायल… फिर भी रवीना टंडन पर टूटा मुस्लिम परिवार, लगाए फर्जी आरोप: घटना की दूसरी वीडियो से खुलासा

बॉलीवुड अदाकारा रवीना टंडन की गाड़ी से एक परिवार को टक्कर लगने की जो घटना मीडिया में आई थी उसमें एक वीडियो के जरिए नया अपडेट सामने आया है। शुरू में इस केस में आरोप लगाया गया कि अभिनेत्री की गाड़ी से एक महिला को टक्कर लगी, जिसमें वो गंभीर रूप से घायल हो गई और नशे में चूर अभिनेत्री ने उनसे मारपीट की। वहीं ये घटना की वीडियो है जो दिखा रही है कि गाड़ी से कोई टक्कर नहीं लगी थी। उलटा वो भीड़ रवीना टंडन को पीटने पर आमादा थी। इसके अलावा जहाँ ये दावा हुआ था कि रवीना टंडन नशे में होकर सबसे वीडियो न बनाने को कह रही थीं, वहीं अब सामने आया है कि अभिनेत्री अपने ऊपर हमले के बाद लगातार कह रही थीं कि उन्हें मारा-पीटा न जाए और न वीडियो बनाई जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटनास्थल मुंबई का बांद्रा इलाका है। जहाँ विवाद हुआ वहाँ रवीना टंडन का बंगला है। रवीना का ड्राइवर कार को रिवर्स गियर में डाल कर बंगले में ले जाने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान एक दूसरी कार रवीना के बंगले के बाहर पहुँच गई। इस कार में मोहम्मद नाम का व्यक्ति अपने परिवार के साथ सवार था। उसने आरोप लगाना शुरू कर दिया कि रवीना टंडन की कार ने उसकी गाड़ी को टक्कर मार दी। मोहम्मद ने यह भी दावा किया कि टक्कर की वजह से उसकी भतीजी, अम्मी और अप्पी (बहन) घायल हो गईं थीं।

इस घटना का 47 सेकेंड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। रवीना टंडन पर लगे आरोपों पर खबरें भी मीडिया में आईं। वहीं 2 जून (रविवार) को इस मामले पर अमिताभ चौधरी (@MithilaWaala) ने अपनी X प्रोफ़ाइल पर एक नई वीडियो डाली। वीडियो में दिख रहा है कि रवीना टंडन को एक भीड़ ने घेर रखा है। इस भीड़ में पुरुष के साथ बुर्का पहने एक महिला भी दिख रही है। भीड़ रवीना टंडन पर बुर्के वाली महिला को टक्कर मारने का आरोप लगा कर पीटने पर आमादा है। रवीना टंडन खुद को बचाने की कोशिश करते हुए वीडियो बना रहीं हैं।

जद्दोजहद करती रवीना को वीडियो में ‘हाथ नहीं लगाना, धक्का मत दो, प्लीज मुझे मत मारो’ जैसी तमाम गुजारिश करते साफ़ सुना जा सकता है। हालाँकि उनकी मिन्नत का हमलावर भीड़ पर कोई असर नहीं पड़ा। उलटे हमलावर भीड़ में मौजूद महिला को कहते सुना गया, “तुम्हे रात जेल में बितानी पड़ेगी। मेरी नाक से खून यह रहा है।” वह महिला रवीना टंडन पर खुद को पीटने का आरोप लगा रही थी। महिला के साथ मौजूद शोरगुल करता एक युवक रवीना टंडन पर नशे में होने का आरोप लगाता सुनाई दे रहा है। उसका आरोप था कि रवीना टंडन की वजह से उसकी माँ के सिर में चोट लग गई।

अमिताभ चौधरी द्वारा शेयर किए गए वीडियो के आधे फ्रेम में एक अन्य CCTV फुटेज है। इस फुटेज में दिख रहा है कि अभिनेत्री की कार से किसी को भी टक्कर नहीं लगी। मुंबई पुलिस के DCP राजतिलक ने भी किसी महिला के सिर में चोट लगने जैसे दावों का खंडन किया है। इसके अलावा टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने दावा किया है कि रवीना टंडन के नशे में होने जैसे आरोप असत्य और निराधार हैं। मुंबई पुलिस को अभी तक रवीना टंडन या मोहम्मद के परिवार की तरफ से कोई शिकायत नहीं मिली है।