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कर्नाटक में ‘जिन्न का साया’ बता कर नाबालिग लड़की से बलात्कार करता था मौलाना, भाई से भी करवाता था: MP में चाकू की नोंक पर मौलवी ने शादीशुदा हिन्दू महिला से किया रेप

कर्नाटक और मध्य प्रदेश के 2 अलग-अलग मामलों में 2 मौलवियों की करतूतें सामने आईं हैं। पहले मामले में कर्नाटक के एक मौलवी ने नाबालिग लड़की को जिन्नों का डर दिखा कर रेप किया है। आरोपित ने पीड़िता के भाई से भी उसकी बहन का रेप करवाया है। वहीँ दूसरे केस में मध्य प्रदेश के जबलपुर में मौलवी ने चाकू की नोक पर न सिर्फ हिन्दू महिला से रेप किया है बल्कि उसको इस्लाम भी कबूल करवा डाला। पुलिस ने दोनों केसों में FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

कर्नाटक: मौलवी ने नाबालिग को बनाया शिकार

पहला मामला कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले का है। यहाँ के महिला थाने में एक नाबालिग पीड़िता ने शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि वो दीनी और मजहबी तालीम लेने 3 साल से मस्जिद में जा रही थी। इस दौरान मस्जिद के मौलवी ने पीड़िता के अम्मी-अब्बा को विश्वास में ले लिया। उसने बताया कि पीड़िता पर जिन्नों का साया है। ये सब ठीक करने के लिए मौलवी ने एक खास इबादत की जरूरत बताई। इस इबादत के नाम पर मौलवी पीड़िता को 6 से 7 माह तक 1 दिन अपने पास रखने लगा।

बताया जा रहा है कि मौलवी नाबालिग लड़की और उसके भाई के साथ खुद को एक कमरे में बंद कर लेता था। यहाँ वो नाबालिग के साथ पहले खुद रेप करता था और बाद में लड़की के भाई से भी ऐसा ही करने को कहता था। यह सब 6 माह से भी अधिक समय तक चला। मौलवी ने इन हरकतों को अपने कैमरे में रिकॉर्ड भी किया। कुछ दिनों बाद पीड़िता को पेट में दर्ज की शिकायत हुई। डॉक्टर के आगे पीड़िता ने अपने यौन शोषण की बात परिजनों को बताई। परिजनों की शिकयत पर मौलवी और लड़की के भाई के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मौलवी ने चाकू दिखा कर किया रेप और धर्मान्तरण

वहीं दूसरा मामला मध्य प्रदेश के जबलपुर से है। यहाँ मौलवी दिलशाद मंसूरी पर एक शादीशुदा हिन्दू महिला से पहले चाकू दिखा कर रेप करने और बाद में उसका धर्म परिवर्तन करवाने का आरोप लगा है। मामला अधारताल थाना क्षेत्र का है। यहाँ रविवार (2 जून, 2024) को हिन्दू संगठन के सदस्यों ने पीड़िता के साथ थाने पहुँच कर शिकायत की है। शिकायत में बताया गया है कि मौलवी काफी पहले से पीड़िता के घर आया-जाया करता था।

30 जून 2021 को जब पीड़िता घर पर अकेली थी वो मौलवी घर में आया। उसने पीड़िता से रेप किया और उसके अश्लील वीडियो बना लिए। बाद में इन्हीं वीडियो को वायरल करने का डर दिखा कर दिलशाद मंसूरी ने कई बार महिला से रेप किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जुलाई 2021 में दिलशाद पीड़िता को काम दिलाने के बहाने घर से ले गया। इस दौरान उसने पीड़िता को दबाव दे कर इस्लाम कबूल करवा दिया। आरोप है कि विरोध करने पर दिलशाद महिला को चाकू दिखाया करता था। पुलिस ने शिकायत का संज्ञान ले कर जाँच शुरू कर दी है।

93 पत्रकारों और 42 चैनलों पर ‘बैन’, मोदी विरोधी प्रोपेगंडा को हवा: 17 YouTube कर्मचारियों के खिलाफ शुरू हुई जाँच, चुनाव को प्रभावित करने के लिए अपनाए हथकंडे

YouTube भारत में राष्ट्रवादी कंटेंट्स को सेंसर करने में लग गया है। जिस वीडियो में कॉन्ग्रेस की आलोचना की जाती है, उसे Demonetise कर दिया जाता है अर्थात उससे कंटेंट क्रिएटर को पैसे नहीं मिलते। कई युट्यूबर्स ने इस संबंध में केंद्र सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया था। आशंका जताई जा रही है कि YouTube India के कुछ कर्मचारी ये गड़बड़झाला कर रहे हो सकते हैं। ऐसे 17 कर्मचारियों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों ने जाँच की शुरुआत भी कर दी है।

बताया गया है कि YouTube के इन 17 कर्मचारियों की बातचीत भी केंद्र सरकार को सौंपी गई है। इनकी साजिश थी कि न्यूट्रल कवरेज को रोका जाए और ऐसे हैंडलों को शैडो बैन किया जाए। शैडो बैन का अर्थ होता है किसी अकाउंट के कंटेंट की रीच को सीमित कर देना, इससे उक्त कंटेंट उनके अपने ही सब्सक्राइबर्स तक नहीं पहुँच पाता। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रपंच को भी जम कर हवा दी जा रही थी। चुनावों को मशीनरी का इस्तेमाल कर के किसी विदेशी संस्था द्वारा प्रभावित करना एक आपराधिक कृत्य है।

ऐसे में केंद्र सरकार की जाँच एजेंसियों ने अपना काम शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि यूट्यूब के इन आरोपित कर्मचारियों में से 12 पुरुष हैं और 5 महिलाएँ। ये मुंबई, केरल और पश्चिम बंगाल से ताल्लुक रखते हैं। बताया जा रहा है कि इन्होंने YouTube के अल्गोरिदम के साथ छेड़छाड़ की। साथ ही 93 पत्रकारों और 42 चैनलों के खिलाफ शैडो बैन लगा दिया, जो इस चुनाव में न्यूट्रल थे और कॉन्ग्रेस का पक्ष नहीं ले रहे थे। ‘The New Indian’ ने इस संबंध में दिल्ली उच्च न्यायालय में भी सबूत सौंपे हैं।

कंटेंट क्रिएटर्स ने माँग की है कि YouTube के जिन अधिकारियों ने भारतीय लोकतंत्र के सबसे बड़े महापर्व के दौरान गड़बड़ी की है, उन्हें इसके लिए सज़ा दी जाए। जिन्होंने जनता के मूड को भाँपते हुए भाजपा की जीत का अनुमान लगाया, उन्हें भी शैडो बैन का सामना करना पड़ा। आरोप है कि वीडियो में राहुल गाँधी या अन्य विपक्षी नेताओं का नाम लेते ही उसकी रीच घटना दी जाती है। YouTube ‘स्ट्रिंग’ और ‘सब लोकतंत्र’ नामक बड़े दक्षिणपंथी चैनलों को पहले ही हटा चुका है।

निकाह, तीन तलाक, हलाला, फिर निकाह, फिर से तीन तलाक… दहेज़ में नहीं मिली कार तो महिला को ससुराल वालों ने नंगा कर के पीटा, नवजात बच्चा भी मर गया

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से तीन तलाक और हलाला का मामला सामने आया है। यहाँ लड़की के अब्बा ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी को ससुराल में नंगा कर के पीटा गया है। पीड़िता को दहेज़ के लिए भी शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी गई है। देखरेख के अभाव में पीड़िता के बच्चे की भी मौत हो गई। शनिवार (1 जून, 2024) को पुलिस ने महिला के शौहर सहित कुल 6 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। मामले की जाँच की जा रही है।

यह मामला पीलीभीत जिले के थाना क्षेत्र पूरनपुर का है। शनिवार को यहाँ पीड़िता के अब्बा ने थाने में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया कि उनकी बेटी का निकाह 21 सितंबर, 2017 को खुर्शीद खाँ से हुआ था। निकाह में खुर्शीद को दहेज़ में बाइक और अन्य घरेलू सामान दिए गए थे। निकाह के कुछ दिनों बाद ही दुल्हन पर घर से 4 पहिया वाहन लाने का दबाव बनाया जाने लगा। कार के लिए पीड़िता को परेशान करने वालों में शौहर खुर्शीद के अलावा जेठ खुशनूद, ससुर फरमूद, ननद तरन्नुम और तबस्सुम के साथ नन्दोई मन्ना भी शामिल थे।

प्रताड़ना के इसी दौर में पीड़िता ने एक बच्चे को जन्म दिया। ससुराल में देखभाल न होने की वजह से बच्चा कुछ दिनों में बीमार हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई। बीमार बच्चे के इलाज का भी खर्च लड़की के अब्बा ने उठाया। कुछ दिनों के बाद खुर्शीद ने पीड़िता को 3 तलाक दे कर घर से बेदखल कर दिया। पीड़िता की प्रताड़ना यहीं खत्म नहीं हुई। 3 तलाक देने के बाद उसके ससुराल वालों ने पीड़िता का किसी अज्ञात व्यक्ति से हलाला करवाया। हलाला के बाद पीड़िता से खुर्शीद ने फिर निकाह किया और दहेज़ के लिए प्रताड़ना देने लगा।

शिकायतकर्ता ने आगे बताया कि 27 मई 2024 को खुर्शीद, खुशनूद, फरमूद, तरन्नुम, तबस्सुम और मन्ना ने पीड़िता को नंगा कर के बेरहमी से पीटा। पीड़िता का गला दबा कर मार डालने की भी कोशिश की गई। जैसे-तैसे महिला ने अपने आप को बचाया। बाद में खुर्शीद ने एक बार फिर से पीड़िता को तीन तलाक दिया और पुराने कपड़े पहना कर घर से भगा दिया। इन दौरान सभी आरोपितों द्वारा पीड़िता को कहीं भी मुँह खोलने या शिकायत करने पर जान से मार डालने की भी धमकी दी।

अपनी शिकायत में पीड़िता के अब्बा ने सभी आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। इन तहरीर पर खुर्शीद, खुशनूद, फरमूद, तरन्नुम, तबस्सुम और मन्ना को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली गई है। इन सभी पर IPC की धारा 498- A, 323 और 506 के साथ दहेज़ प्रतिषेध अधिनियम के सेक्शन 3/4 और ट्रिपल तलाक एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

राजनीतिक हिंसा के लिए कुख्यात बंगाल में चुनाव खत्म, फिर भी राज्य में ही रहेंगे 32000 जवान: क्या काबू में रहेंगे TMC के गुंडे, जानिए क्यों पहली बार लेना पड़ा यह फैसला

लोकसभा चुनाव 2024 का समापन हो चुका है। अब सिर्फ मतगणना, रुझानों और अंतिम परिणाम का इंतज़ार है। लगभग सभी Exit Polls ने भाजपा के पूर्ण बहुमत से सत्ता में आने का अनुमान लगाया है, ऐसे में I.N.D.I. गठबंधन के कैम्प में उदासी का माहौल है। इन सबके बीच 42 लोकसभा सीटों वाला पश्चिम बंगाल भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि यहाँ पहली बार ऐसा होगा जब भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरेगी। इन सबके बीच चुनावी हिंसा के लिए कुख्यात इस राज्य में इस बार भी वही हाल रहा।

पश्चिम बंगाल में सातों चरणों में मतदान हुए। चुनाव के बीच में ही संदेशखाली का मुद्दा भी छाया रहा। बशीरहाट के इस क्षेत्र में सत्ताधारी TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) नेता शाहजहाँ शेख और उसके गुर्गों पर जनजातीय समाज की महिलाओं के यौन शोषण के आरोप लगे, उसकी गिरफ़्तारी हुई और राज्य सरकार को उसे संरक्षण देते हुए देखा गया। रामनवमी के त्योहार के ठीक बाद चुनाव शुरू हो गया, ऐसे में पश्चिम बंगाल में मुस्लिम ध्रुवीकरण का खेल भी जम कर खेला गया।

ज़्यादा पीछे जाने की ज़रूरत नहीं है, आप अंतिम चरण के मतदान को ही ले लीजिए। कोलकाता के जाधवपुर के भंगार स्थित सतौलिया में हिंसा हुई। हिंसा भाजपा-TMC के बीच नहीं थी, बल्कि फुरफुरा शरीफ दरगाह के मुखिया अब्बास सिद्दीकी की पार्टी ISF और राज्य में 34 वर्षों तक सत्ता में रही CPI(M) समर्थकों के बीच हुई। साउथ 24 परगना के कुलतली में तो उपद्रवी भीड़ पोलिंग स्टेशन के बहतर ही घुस गई और EVM को तालाब में फेंक दिया।

संदेशखाली में मामला इतना बढ़ गया कि स्थानीय महिलाओं को सुरक्षा के लिए बाँस की डंडियाँ लेकर सड़क पर उतरना पड़ा। उनका कहना था कि शाहजहाँ शेख से उन्हें अब भी खतरा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक के लोकसभा क्षेत्र डायमंड हार्बर में भाजपा समर्थकों के साथ TMC के गुंडों ने हिंसा की। जाधवपुर के गांगुली बागान में TMC वालों ने लेफ्ट वालों को पीटा। साउथ 24 परगना के इतखोला में मीडियाकर्मी भी पत्थरबाजी की चपेट में आ गए।

ये सिर्फ अंतिम चरण की घटनाएँ थीं, वो भी जो मीडिया में आ गईं, तो सोचिए पश्चिम बंगाल में सातों चरणों में किस माहौल में चुनाव हुआ है। और किस माहौल में वहाँ मतगणना होगी, किस माहौल में भाजपा कार्यकर्ता खुद को पाएँगे जब उनकी पार्टी सीटों की बढ़त लेगी। इसकी शुरुआत भी हो गई है। नदिया जिले में हाल ही में भाजपा में शामिल होने वाले हफीजुल शेख को मार डाला गया। चाय की टपरी पर उनके सिर में गोली मारी गई। उनका सिर क्षत-विक्षत हो गया।

यही कारण है कि भले ही चुनाव संपन्न हो गए, लेकिन पैरामिलिट्री की कंपनियाँ पश्चिम बंगाल में अभी अगले कुछ दिन भी डटी रहेंगी। ‘सेन्ट्रल आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स’ (CAPF) की 400 कंपनियाँ राज्य में तैनात की गई हैं। 4 जून को भले ही मतगणना पूरी हो जाए और परिणाम आ जाएँ, अगले 2 हफ्ते तक जवान यहाँ रहेंगे। 19 जून तक इन्हें यहाँ मोर्चा सँभालने को कहा गया है। 2023 में संपन्न हुए पंचायत चुनाव में भी 50 से अधिक लोग मारे गए थे।

पश्चिम बंगाल में ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है, अगर हम 2021 में हुए विधानसभा चुनावों को देखें तो उसमें भी CAPF की 1000 कंपनियाँ तैनात की गई थीं। तीसरे चरण के बाद 200 नई कंपनियाँ बुलाई गईं, वहीं 71 अतिरिक्त कंपनियाँ चौथे चरण के बाद बुलानी पड़ी। ऐसे में समझ जाइए कि चुनाव आयोग को पश्चिम बंगाल में मतदान संपन्न करवाने में कितनी दिक्कतें आती हैं। चुनाव भी 8 चरणों में कराने पड़े थे। इसी तरह 2019 का लोकसभा चुनाव भी हिंसा से अछूता नहीं रहा था।

पहली बार भाजपा ने पश्चिम बंगाल में 18 सीटें प्राप्त की, जबकि TMC 22 सीटें जीत कर सबसे बड़ी पार्टी बनी। लेकिन, बड़ी बात ये थी कि भाजपा 2 सीटों से 18 पर पहुँची थी, जबकि तृणमूल कॉन्ग्रेस 34 से 22 पर आ गई। अब पश्चिम बंगाल में मतगणना व उसके बाद के संभावित माहौल को देखते हुए संवेदनशील इलाकों को चिह्नित कर वहाँ सुरक्षा बढ़ाई जा रही है। पश्चिम बंगाल ऐसा राज्य है, जहाँ सिर्फ चुनाव के दौरान नहीं बल्कि उसके बाद भी जबरदस्त हिंसा होती है।

बड़ी बात ये है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कोई इस्तीफा नहीं माँग रहा, न ही कोई उन्हें तानाशाह बता रहा। न ही उनके खिलाफ YouTube पर ध्रुव राठी जैसे लोग वीडियो बना रहे, न ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान पश्चिम बंगाल के माहौल को लेकर ख़बरें प्रकाशित कर रहे। TV पर बुद्धिजीवियों को भी इस पर चर्चा करते हुए नहीं देखा गया। हाँ, जो भाजपा केंद्र में सत्ता में है और जिसके कार्यकर्ता मारे जा रहे हैं, उसे ज़रूर तानाशाह बता-बता कर एजेंडे के तहत एक अलग नैरेटिव फैलाया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार के भी कई मामले सामने आ रहे हैं। शाहजहाँ शेख भी राशन घोटाले में फँसा हुआ है, उसे गिरफ्तार करने गई ED की टीम पर हमला हुआ था। कलकत्ता हाईकोर्ट ने भर्ती घोटाले के बाद 25,000 से भी अधिक नव-नियुक्त शिक्षकों को हटा दिया। ऐसे ही 2010 के बाद जारी हुए OBC प्रमाण-पत्रों को रद्द कर दिया गया, क्योंकि मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए इसमें कई मुस्लिम जातियों को जोड़ दिया गया था। पश्चिम बंगाल ‘कट मनी’ वाले घूस के लिए भी जाना जाता है, ऐसे में भ्रष्टाचार वहाँ व्यवस्थागत हो चुका है।

लेफ्ट के समय ही पश्चिम बंगाल चुनावी हिंसा का जब बन गया था, TMC ने इस कल्चर को जोरदार तरीके से आगे बढ़ाया। TMC के नेताओं और इसके कैडर को समझना चाहिए कि ये लोकतांत्रिक चुनाव है, कोई युद्ध नहीं। यहाँ उँगली का इस्तेमाल कर के बटन दबाया जाता है, ट्रिगर नहीं दबाया जाता। यहाँ अपने मताधिकार का प्रयोग करना है, किसी का सर नहीं फोड़ना। जनादेश को स्वीकार किया जाता है, हार होने पर हिंसा नहीं की जाती। हिंसा की संस्कृति गलत है, ये इंसानों का काम नहीं।

BSF के पूर्व DG प्रकाश सिंह ने चुनाव आयोग के ताज़ा फैसले को समझाते हुए कहा है कि सामान्य परिस्थितियों में केंद्र में सरकार बन जाने और राज्य में प्रशासन राज्य सरकार के अधीन हो जाने के बाद केंद्र सरकार राज्य से सुझाव का इंतज़ार करती है कि वहाँ अर्धसैनिक बलों की ज़रूरत है या नहीं। प्रकाश सिंह का मानना है कि हालिया मामला असाधारण है, क्योंकि ECI ने ये आदेश दिया है। उनका कहना है कि सीटें TMC को ज़्यादा मिलें या BJP को, हिंसा की आशंका दोनों परिदृश्यों में है।

यानी, परिणाम जो भी हों लेकिन हिंसा की आशंका है ही है। हालाँकि, आशंका ये भी है कि केंद्रीय बलों का इस्तेमाल राज्य सरकार के अधीन रहता है, ऐसे में हिंसा की स्थिति में TMC सरकार इसका इस्तेमाल नहीं करती है तो सुरक्षा बलों के जवान Immobilised (अचल) अवस्था में रहेंगे। ऐसी परिस्थिति में क्या होगा, सवाल ये है? क्योंकि, हिंसा का आरोप सत्ताधारी दल पर है, अर्धसैनिक बलों का इस्तेमाल भी उनके हाथ में है। खैर, देखते हैं इस बार पश्चिम बंगाल के पिटारे में क्या है।

‘भिखमंगा पाक’ को कठपुतली की तरह नचा रहा चीन, बलोच जनता के दमन का बना रहा दबाव: चाहता है पाकिस्तानी फौज करे ऑपरेशन

आर्थिक रूप से कंगाल पाकिस्तान के भीतर अपने मार्च महीने में पाँच इंजीनियरों की मौत के बाद चीन लगातार पड़ोसी मुल्क पर दबाव बना रहा है वह उसके कहने पर चले। चीन के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल ही में पाकिस्तान के अधिकारियों के साथ बैठक की है जिसमें पाकिस्तान के भीतर चीनी लोगों की सुरक्षा पर बातचीत हुई। चीन पाकिस्तान की फ़ौज पर अपनी मर्जी चलाना चाह रहा है लेकिन पाकिस्तान इस बात को छुपाने में जोरशोर से लगा हुआ है।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि चीन ने पाकिस्तान से कहा है कि वह बलूचिस्तान में अपनी ही जनता के विरुद्ध ज़र्ब ए अज्ब की तरह एक आतंक विरोधी सैन्य ऑपरेशन चलाए। चीन का कहना है कि इससे यहाँ काम करने वाले उसके कामगार सुरक्षित महसूस कर पाएँगे। यह रिपोर्ट सबसे पहले पाकिस्तान के बिज़नस रिकॉर्डर अख़बार ने छापी थी और उसके बाद कई अन्य जगह भी यह बात सामने आई।

पाकिस्तान ने चीन की बलोच लोगों के विरुद्ध ऑपरेशन चलाने की माँग को नकार दिया है। इस खबर को बिजनेस रिकॉर्डर ने भी हटा दिया है। उस हटाई गई खबर के अनुसार, “योजना, विकास और विशेष पहल मंत्रालय के वरिष्ठ सूत्रों ने बिजनेस रिकॉर्डर को बताया कि चीन ने पाकिस्तान से एक और ज़र्ब-ए-अज्ब शुरू करने को कहा है।”

रिपोर्ट में बताया गया कि चीन के उप विदेश मंत्री सुन वेइडोंग ने पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के चीन दौरे से पहले बैठक की थी। सुन वेइडोंग ने इस दौरान चीनी हितों को साधने के लिए ज़र्ब ए अज्ब की जरूरत बताई। गौरतलब है कि बलोचिस्तान से गुजरने वाले चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) में काम करते हुए कई चीनी नागरिकों ने अपनी जान गँवाई है। बलोचिस्तान में रहने वाले लोगों ने इसे चीन का अवैध कब्जा बताया है और लगातार विरोध किया है।

स्थानीय लोगों के बढ़ते विरोध, पाकिस्तानी फ़ौज की पोस्ट पर लगातार होते हमलों के कारण चीन उससे खफा है। स्थानीय लोगों को यह भी शक है कि चीन पाकिस्तान से यह भी कह रहा है कि वह पाकिस्तानी फ़ौज हटाकर अपनी सेना लगा दे, यदि वह स्वयं रक्षा ना कर पाए। इससे यह बात भी साफ़ हो आएगी कि पाकिस्तान, चीन की कठपुतली बन कर रह जाएगा। यह भी सामने आया है कि चीन पाकिस्तान में अपने प्रोजेक्ट पर खुद की सेना लगाने की योजना भी बना रहा है।

यदि ऐसा होता है तो यह पाकिस्तान की संप्रभुता और उसकी फ़ौज की काबिलियत पर भी प्रश्न उठाएगा। चीन का यह पूरा प्रयास हालिया हमले के बाद ही सामने आया है। इस हमले में पाँच चीनी इंजीनियर मारे गए थे। इसके बाद चीन की कम्पनियों ने पाकिस्तान में अपना कामकाज रोक दिया था। चीन ने इसके बाद पाकिस्तान पर दबाव डाला था कि वह इन इंजीनियरों के परिवारों को 25 लाख डॉलर का मुआवजा दे।

इससे पहले 2016 में चीन जर्ब ए अज्ब ऑपरेशन की तारीफ़ कर चुका है। 2016 में पाकिस्तान में चीन के राजदूत रहे सुन वेइडोंग ने कहा था कि इस ऑपरेशन के कारण पाकिस्तान में सुरक्षा हालात बदले हैं। बताया गया है कि चीन के नागरिकों की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान ने 12,000 से अधिक अर्धसैनिक बल लगाए हैं।

स्थानीय जनसंख्या के नरसंहार की योजना थी ज़र्ब ए अज्ब

ऑपरेशन ज़र्ब-ए-अज्ब 15 जून 2014 को पाकिस्तान-अफ़गानिस्तान सीमा पर उत्तरी वज़ीरिस्तान प्रान्त में शुरू किया गया था। पाकिस्तान ने दावा किया था कि यह एक आतंकवाद विरोधी अभियान था। जबकि इस ऑपरेशन पर आरोप थे कि इससे पाकिस्तान समर्थक जिहादी समूह पनपे, स्थानीय लोगों को हत्याएँ हुई और पूरे इलाके में खून खराबा हुआ।

जर्मन मीडिया DW के अनुसार, पाकिस्तानी विशेषज्ञ और ओकलाहोमा विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय मामलों के असिस्टेंट प्रोफेसर अकील शाह ने बताया था कि पाकिस्तानी फ़ौज के आतंकवाद विरोधी अभियान में अंतर्विरोधी बातें हैं। शाह ने बताया कि फ़ौज पाकिस्तान में हमले करने वाले आतंकवादियों पर कार्रवाई करती है, लेकिन वह अपने दुश्मनों पर हमला करने वालों को संरक्षण देती है।

DW से बात करते हुए शाह ने बताया था, “फ़ौज ने टीटीपी के दुश्मन गुटों से लड़ाई लड़ी है, लेकिन वह भारत के खिलाफ आतंकवादी समूहों का इस्तेमाल करना जारी रखती है।” उन्होंने हक्कानी नेटवर्क और अफगान तालिबान का उदाहरण दिया, जिसने पाकिस्तान को अफगानिस्तान पर अपना प्रभाव बनाए रखने में मदद की, साथ ही लश्कर-ए-तैयबा, जो भारत के खिलाफ आतंकवादी हमलों की योजना बनाना और उन्हें अंजाम देना जारी रखता है।

अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने भी अपनी भारत यात्रा के दौरान यही बात कही थी। नई दिल्ली में केरी ने कहा था, “यह साफ़ है कि पाकिस्तान को अपने आतंकी समूहों के खिलाफ़ और अधिक कठोर कार्रवाई करने की आवश्यकता है जो आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े हैं।” उन्होंने पाकिस्तान से माँग की थी वह भारत में हमला करने वाले आतंकी को खत्म करने में सहायता करे ताकि दोंनो देशों के बीच शान्ति का वातावरण बन सके।

इस ऑपरेशन को लेकर कई विशेषज्ञों ने कहा था कि यह कभी आतंकियों को खत्म करने को लेकर चालू ही नहीं किया गया था। इस ऑपरेशन के दौरान पश्तूनों और बलोचों पर भी काफी अत्याचार हुए थे। बड़ी संख्या में लोगों को मारा गया था और काफी लोग गायब हो गए थे।

चीन के पाँच दिन के दौरे पर जा रहे PM शहबाज शरीफ

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ 4 से 8 जून तक चीन में रहेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है, क्योंकि वे विवादास्पद CPEC परियोजना के दूसरे चरण को शुरू करने की योजना बना रहे हैं।

इससे पहले इस महीने की शुरुआत में, पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने बीजिंग का दौरा किया और अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ बातचीत की। बैठक के दौरान, वांग ने पाकिस्तान में चीनी कर्मियों पर लगातार हो रहे आतंकवादी हमलों पर चिंता व्यक्त की और इस्लामाबाद से उनकी सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करने को कहा। इस पर पाकिस्तान ने कहा कि उसने देश में चीनी श्रमिकों की सुरक्षा के लिए 12,000-सदस्यीय अर्धसैनिक बल लगाया है।

नसीमुद्दीन ने बीवी का पहले गला घोंटा, फिर केरोसिन डाल जलाया, आखिर में अधजली लाश के किए 14 टुकड़े: 12 दिन बाद गिरफ्तार, सानिया के चाल-चलन पर था शक

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नसीमुद्दीन ने अपनी 22 वर्षीया बीवी सानिया खान की बेरहमी से हत्या कर दी। कत्ल के बाद उसने सानिया की लाश के कई टुकड़े किए और उन्हें कूड़े के डम्पिंग यार्ड में फेंक दिया। कत्ल की वजह आरोपित द्वारा अपनी बीवी के चरित्र पर शक करना बताया जा रहा है। वह पहले भी अपनी बीवी को लोगों के आगे नग्न घुमा चुका है। मृतका 21 मई 2024 से लापता थी। शनिवार (1 जून 2024) को पुलिस ने नसीमुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जाँच व अन्य कार्रवाई की जा रही है।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नसीमुद्दीन ने अपनी 22 वर्षीया बीवी सानिया खान की बेरहमी से हत्या कर दी। कत्ल के बाद उसने सानिया की लाश के कई टुकड़े किए और उन्हें कूड़े के डम्पिंग यार्ड में फेंक दिया। कत्ल की वजह आरोपित द्वारा अपनी बीवी के चरित्र पर शक करना बताया जा रहा है। वह पहले भी अपनी बीवी को लोगों के आगे नग्न घुमा चुका है। मृतका 21 मई 2024 से लापता थी। शनिवार (1 जून 2024) को पुलिस ने नसीमुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जाँच व अन्य कार्रवाई की जा रही है।

ऑटो ड्राइवर नसीमुद्दीन ने पूछताछ में बताया कि उसे लगता था कि उसकी बीवी का किसी और युवक से अफेयर था। 21 मई को उसने सानिया को कॉल करके भोपाल के एक स्थान पर बुलाया। यहाँ उसने सानिया का मोबाइल चेक किया तो उसमें एक वीडियो निकली। इस वीडियो को देख कर नसीमुद्दीन बहुत नाराज हुआ और अपनी बीवी को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। पिटाई के बाद आरोपित द्वारा गला घोंटने से सानिया की मौत हो गई। बीवी की हत्या के बाद नसीमुद्दीन ने उसका शव ठिकाने लगाने के लिए अपनी ऑटो में लाद लिया।

बताया जा रहा है कि लगभग 2 किलोमीटर बाद नसीमुद्दीन ने अपनी गाड़ी कूड़े के ढेर के पास खड़ी कर दी। यहाँ उसने सानिया की लाश को पहले केरोसीन से जलाया और बाद में अधजली लाश को 14 टुकड़ों में काट डाला। इन टुकड़ों को नसीमुद्दीन ने मिट्टी में दबाव की भी कोशिश की। गिरफ्तारी के बाद आरोपित ने अपनी बीवी की लाश के 14 टुकड़े बरामद करवाए। ये टुकड़े खोपड़ी, पैर और पसलियों के थे। इन मानव अंगों को जाँच के लिए पुलिस ने कब्ज़े में ले लिया है।

सानिया के ममेरे भाई अनस ने मीडिया से बात की। अनस के मुताबिक 12 साल पहले मृतका की माँ की मौत हो चुकी है। माँ के देहांत के बाद वह अपने नानी के घर पली-बढ़ी। 2020 में सानिया का निकाह ऑटो चलाने वाले नसीमुद्दीन से हुआ था। आरोप है कि निकाह के महज 5 दिनों बाद से ही नसीमुद्दीन बाइक की माँग को ले कर पीड़िता को परेशान कर रहा था। सानिया और नसीमुद्दीन को इस रिश्ते से एक बेटी हुई थी। लगभग ढाई महीने पहले खौलता हुआ पानी गिर जाने से बेटी की मौत हो गई थी। इसके बाद दोनों के रिश्तों में तल्खी आ गई थी। अनस ने यहाँ तक दावा किया है कि कुछ दिनों पहले नसीमुद्दीन ने गुस्से में पीड़िता को गाँव में निर्वस्त्र हो कर घूमने पर मजबूर किया था।

जिस अमान अहमद ने किया हिन्दू लड़की का रेप, मौलाना शाने आलम ने उसी से निकाह करवाया: गाजियाबाद पुलिस ने किया गिरफ्तार, 15 दिन से था फरार

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में पुलिस ने हिन्दू महिला को इस्लाम कबूल करवाने वाले मौलाना को गिरफ्तार किया है। मौलाना का नाम शाने आलम है। शाने आलम ने पीड़िता का रेप करने वाले युवक से ही उसका निकाह करवा दिया था। मौलाना लगभग लगभग 20 दिनों से फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 25 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया था। शाने आलम की गिरफ्तारी रविवार (2 जून 2024) को हुई है।

यह मामला गाजियाबाद के थानाक्षेत्र अंकुर विहार का है। यहाँ 16 मई को एक 18 वर्षीया हिन्दू लड़की ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में पीड़िता ने बताया था कि लगभग 4 महीने पहले वह एक फैक्ट्री में नौकरी करती थी। इसी फैक्ट्री में अनम नाम की एक अन्य मुस्लिम लड़की भी काम करती थी। दोनों में दोस्ती हो गई। एक दिन जब अनम काम पर नहीं आई तो उसके सहेली उसको खोजते हुए उसके घर पहुँच गई। यहाँ घर पर सिर्फ अनम का भाई अमान मिला। अमान ने पीड़िता से रेप किया और उसके बाद ब्लैकमेलिंग पर उतारू हो गया।

लगभग 2 माह पहले अमान पीड़िता को अपने साथ अमरोहा ले गया। यहाँ उन्हें मौलाना शाने आलम मिला जिसने उर्दू में लिखे 3 कागजातों पर पीड़िता के दस्तखत करवाए। इसके बाद मौलाना ने जबरदस्ती पीड़िता का इस्लामी तौर तरीकों से निकाह अमान से करवा दिया। लड़की का मूल नाम बदल कर कुलसुम रख दिया गया। इसके बाद अमान ने लड़की को 2 महीने तक अमरोहा की किसी गुमनाम जगह पर रखा। 2 महीने बाद वह लड़की को लेकर गाजियाबाद के DLF इलाके में शिफ्ट हो गया।

पीड़िता भी मूलतः गाजियाबाद के लोनी इलाके की रहने वाली थी। 14 मई को वह मौका पाकर अपने मायके भाग निकली। 16 मई को उसने आरोपित अमान और मौलाना शाने आलम के खिलाफ थाने में तहरीर दी। पुलिस ने इन दोनों पर IPC की धारा 376 के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/5(1) के तहत FIR दर्ज कर लिया। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। केस दर्ज करने के अगले ही दिन पुलिस ने 17 मई को अमान को गाजियाबाद से ही गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया था।

अमान की गिरफ्तारी और खुद पर केस दर्ज होने की बात जानकर 38 वर्षीय मौलाना शाने आलम फरार हो गया। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। आरोपित की तलाश में दबिश भी दी जा रही थी। रविवार (2 जून) को पुलिस को मौलाना की सटीक लोकेशन मिल गई। शाने आलम को पुलिस ने दबोच लिया। पूछताछ में शाने आलम ने अमान को अपना रिश्तेदार बताया। उन्होंने कहा कि अमान ने एक हिन्दू लड़की को ला कर उस से निकाह करवाने की गुजारिश की थी। मौलाना शाने आलम अमरोहा शहर के फिरदौस मस्जिद इलाके का रहने वाला है। जरूरी कानूनी कार्रवाई कर के उसे जेल भेज दिया गया है।

जिस महिला ने घूँसों से बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, उसने ‘सौतन’ की न्यूड तस्वीरें कर दी वायरल: गिरफ्तार करने आए अधिकारियों पर भी हमला, जानिए कौन है स्टेफी कोहेन

अमेरिका के फ्लोरिडा से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। प्रोफेशनल बॉक्सर और पॉवरलिफ्टिंग के क्षेत्र में वर्ल्ड रिकॉर्ड धारी स्टेफनी कोहेन ने अपने पूर्व बॉयफ्रेंड से बदला लेने के लिए उसकी वर्तमान गर्लफ्रेंड की न्यूड तस्वीरें वायरल कर दी। इसके लिए उसने अपने एक्स बॉयफ्रेंड का लैपटॉप हैक कर लिया। उसने उस लड़की को अपमानित करने और उसके बारे में दुनिया को बताने की मंशा से ऐसा किया। 32 वर्षीय स्टेफनी कोहेन पर अब मुकदमा चल रहा है।

स्टेफनी कोहेन पर आरोप लगाया गया है कि बिना अनुमति ने उसने अपने एक्स बॉयफ्रेंड के कम्प्यूटर का इस्तेमाल किया, साथ ही एक लड़की को ऑनलाइन यौन प्रताड़ना का निशाना बनाया और गिरफ़्तारी के समय हिंसा का सहारा लिया। स्टेफनी कोहेन मगरिकी जिस घर में अपने एक्स बॉयफ्रेंड के साथ रहती थी, वहीं जाकर उसने उसका लैपटॉप एक्सेस किया। मार्च 2022 में दोनों यहाँ साथ रहते थे। इंस्टाग्राम पर स्टेफी कोहेन के 10 लाख से भी अधिक फॉलोवर्स हैं, लेकिन उसने अपना अकाउंट प्राइवेट कर रखा है।

वो बतौर फिटनेस इन्फ्लुएंसर भी लोकप्रिय है। उसने कुछ कॉमन पासवर्ड्स का इस्तेमाल कर के अपने एक्स बॉयफ्रेंड के एप्पल आईक्लाउड का पासवर्ड गेस किया और उसमें से उसकी वर्तमान गर्लफ्रेंड की कई नंगी तस्वीरें निकाल ली। इसके बाद वेनेजुएला में जन्मी बॉक्सर ने एक चैट ग्रुप में इन तस्वीरों को शेयर किया, जिसमें कई लड़कियाँ मौजूद थीं। पुलिस की पूछताछ में उसने खुद कबूला कि वो पीड़िता को अपमानित करने की मंशा से ये सब कर रही थी।

नवंबर 2023 में ही स्टेफी कोहेन के एक्स बॉयफ्रेंड और उसकी वर्तमान गर्लफ्रेंड मियामी के डिटेक्टिव्स के समक्ष ये मामला लेकर गए थे। अब पुलिस ने आरोपित युवती को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया है। इस दौरान उसने सहयोग नहीं किया और भागने लगी। उसने एक अधिकारी के पाँव में हथकड़ी भी फँसा दी। किसी तरह हथकड़ी लगा कर उसे नियंत्रित किया गया। कोहेन को जमानत देते हुए एक्स बॉयफ्रेंड और उसकी गर्लफ्रेंड से दूर रहने को कहा गया है। इसके लिए उसे 3300 डॉलर (2.74 लाख रुपए) का बॉन्ड भरना पड़ा।

‘₹2500 करोड़ में CM, 500 करोड़ में मंत्री बनाती है BJP’: बेंगलुरु कोर्ट ने राहुल गाँधी को 7 जून को बुलाया, कहा- हर हाल में पेश हों

बेंगलुरु के एक कोर्ट ने आदेश दिया है कि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी 7 जून, 2024 को पेश हों। कोर्ट ने कहा है कि राहुल गाँधी को हर हाल में पेश होना होगा। कोर्ट ने भाजपा नेता द्वारा किए गए एक मुकदमे में यह आदेश दिया है। मामला 2023 विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा के विरुद्ध भ्रामक विज्ञापन चलाने से जुड़ा हुआ है।

बेंगलुरु के कोर्ट ने शनिवार (1 जून, 2024) को एक भाजपा नेता एस केशव प्रसाद द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे पर सुनवाई की। इस मुकदमे में कहा गया है कि कॉन्ग्रेस ने 2023 विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा को भ्रष्ट चलाने वाले विज्ञापन चलवाए जिनसे भाजपा की मानहानि हुई।

इस मामले में कर्नाटक प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी, मुख्यमंत्री सिद्दारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और राहुल गाँधी को आरोपित बनाया गया था। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सिद्दारमैया और शिवकुमार को जमानत दे दी। इस दौरान राहुल गाँधी नहीं पेश हुए। उनके ना पेश होने पर भाजपा नेता के वकील ने माँग की कि राहुल गाँधी के विरुद्ध गैर जमानत वारंट जारी किया जाए।

कोर्ट में राहुल गाँधी की तरफ से चुनावी व्यस्तताओं के चलते बेंगलुरु जाने में असमर्थता जताई गई थी, जिसे कोर्ट ने 1 जून को मान लिया लेकिन सख्त हिदायत दी कि वह 7 जून को जरूर पेश हों। राहुल गाँधी ने इससे पहले मार्च में अपने विरुद्ध समन जारी किए जाने पर जून में तारीख माँगी थी।

भाजपा नेता द्वारा दायर इस मुकदमे में आरोप लगाया है कि कॉन्ग्रेस ने भाजपा पर ₹2500 करोड़ में मुख्यमंत्री और ₹500 करोड़ में मंत्रिपद बेचने की बात कही, इससे भाजपा की छवि खराब हुई। इसके अलावा कॉन्ग्रेस ने मई, 2023 में अखबारों में विज्ञापन छपवा कर दावा किया कि राज्य की भाजपा सरकार के दौरान कोविड से जुड़े ठेकों में 75%, PWD ठेकों में 40% और धार्मिक संस्थानों में दान के मामले में 30% कमीशन लिया गया। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि इससे पार्टी की छवि धूमिल हुई।

गौरतलब है कि 2023 कर्नाटक विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस को बड़ी जीत हासिल हुई थी और भाजपा को सत्ता से बाहर होना पड़ा था।

जब मुस्लिम परिवार ने दिखाया ‘भाईचारा’ तो रवीना टंडन के काम न आया ‘खजूर प्रेम’, कठुआ से राफाह तक एक्टिव बॉलीवुड गैंग के मौन पर तमाचा है कंगना की मुखरता

बॉलीवुड गिरोह की सदस्य रवीना टंडन के साथ पिछले 2 दिन में जो कुछ हुआ उससे वो खुद सदमे में होंगी। अक्सर बकरीद पर बधाई का संदेश देने वाली, सोशल मीडिया पर सेवई के साथ फोटो डालने वाली, रवीना ने सोचा भी नहीं होगा कि कभी कोई मुस्लिम परिवार उनके खिलाफ ऐसा झूठा मुकदमा दर्ज करवाएगा कि मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक उनकी छवि पर सवाल उठने लगेंगे।

इस मामले के बाद रवीना को कुछ समझ आया हो या न आया लेकिन अपने गिरोह के लोगों की हकीकत तो वह जान ही गई होंगीं। इस गिरोह ने उनके लिए न तब आवाज उठाई जब उनपर आरोप लगे कि वो नशे में मारपीट कर रही थीं और न ही उन्हें तब समर्थन में कुछ बोला दिया जब पता चला कि सारे आरोप झूठे थे। इस मामले में मुंबई पुलिस ने बयान जारी करके उन्हें निर्दोष तक बताया लेकिन तब भी कोई बॉलीवुड सेलेब उनके समर्थन में बयान देने नहीं खड़ा हुआ। अगर कोई पूरे बॉलीवुड से उनकी आवाज बना तो सिर्फ वो कंगना रनौत हैं।

कंगना ने अपने इंस्टा पोस्ट में रवीना टंडन के साथ हुई घटना पर लिखा, “रवीना टंडन जी के साथ जो हुआ वह बेहद चिंताजनक है। अगर विपरीत समूह में पाँच से छह और लोग होते तो उन्हें मार दिया जाता। हम इस तरह के रोड रेज की निंदा करते हैं। उन लोगों को फटकार लगाई जानी चाहिए। उन्हें इस तरह के हिंसक और जहरीले व्यवहार से बचना नहीं चाहिए।”

रवीना टंडन और कंगना रनौत दोनों की विचारधाराएँ अलग रही हैं। रवीना उस ग्रुप का हिस्सा हैं जो कठुआ से लेकर राफाह तक मामले में प्रोपगेंडा फैलाने में सक्रिय दिखाई देते हैं। वहीं कंगना मुखर होकर हिंदुत्व की बात करती हैं। आज रवीना का सिर्फ कंगना ने साथ दिया है लेकिन यही रवीना जब कंगना पर तरह-तरह के इल्जाम लग रहे थे तब न तो महिला होने के नाते, न बॉलीवुड अभिनेत्री होने के नाते इस पर कुछ बोली थीं।

दरअसल, बॉलीवुड में रवीना जिस गिरोह का हिस्सा हैं वहाँ ईद की इफ्तारी में शामिल होना किसी भी सेलेब के लिए छवि निर्माण का तरीका होता है। रवीना ने अपने अभिनेत्री रहते हुए बॉलीवुड के प्रोग्रामों में शामिल होकर ऐसा खूब किया, मगर आज जब एक मुस्लिम परिवार ने उन्हें घेरकर उनकी लिंचिंग शुरू की, उनपर झूठे इल्जाम लगाए, उन्हें शराब के नशे में चूर बताना चाहा… तब उनका वो भाईचारा काम नहीं आ पाया जो उन्होंने ऐसी पार्टियों में जा जाकर बनाया था।

घटना की वायरल वीडियो को अगर देखें तो पता चलेगा कि रवीना टंडन बेबस और लाचार होकर कहती सुनाई पड़ रही थी कि उन्हें मारा न जाए उन्हें छोड़ दिया जाए यानी उस समय उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा था। अब जो रवीना को पर्सनली नहीं जानता उसके लिए समझना मुश्किल होगा क्या सही है क्या गलत, मगर जो सेलेब लोग रवीना को जानते हैं वो तो समझ पा रहे होंगे कि वीडियो में वो हकीकत में बेबस थीं थी या वो नशे में कर रही थी… सब जानते समझते हुए इस गिरोह के एक शख्स ने आवाज नहीं उठाई। बाद में पुलिस ने खुद जाँच करके सच्चाई बताई तब जाकर दूसरा एंगल सामने आया।

वीडियो में कहा जा रहा था कि रवीना ने उस परिवार के साथ गाली-गलौच की है जबकि हकीकत यह निकलकर आई कि उन्होंने गाली गलौच नहीं की थी उनके साथ गाली-गलौच हुई थी। रवीना टंडन गाड़ी से निकलकर सड़क पर सिर्फ अपने ड्राइवर को बचाने आई थीं उतने में वो भीड़ उनपर टूट पड़ी और बेबुनियादी इल्जाम लगाए जाने लगे। रवीना के साथ खींचतान हो रही थीं मगर उन्होंने फिर भी कुछ नहीं बोला। शायद उन्हें अंदाजा हो गया था कि जो भीड़ उनसे उलझी है वो उनके साथ कुछ भी कर सकती है। वो लगातार मामले को सुलझाने की बात करती रहीं, पर मामला नहीं सुलझा…। धीरे-धीरे खबरें मीडिया में चढ़ीं, रवीना टंडन पर सवाल उठे… लेकिन बॉलीवुड वाले चुप रहे।

अजीब बात तो ये है कि सारा मामला क्लियर होने के बावजूद बॉलीवुड के गिरोह के लोग अपने ही समूह की महिला के साथ हुई ज्यादती को मुद्दा नहीं बना रहे। राफाह तक पर उनके सोशल मीडिया पोस्ट हो रहे हैं पर रवीना के लिए कहीं नहीं। मीडिया में बयान देना तो दूर सोशल मीडिया पर सार्वजनिक तौर पर एक पोस्ट करके भी घटना का विरोध नहीं किया जा रहा है। कारण क्या है? शायद सब जानते है।

सोचिए क्या इस मामले में अगर कोई हिंदू रवीना टंडन के साथ ऐसी बदसलूकी कर देता तो क्या ये गिरोह शांत रहता? नहीं, तब उन्हें देश में लोकतंत्र खतरे में दिखाई देता और हिंदुत्व का भयावह चेहरा दिखता। मगर, अभी ऐसा कुछ नहीं है क्योंकि प्रताड़ित करने वाले एक निश्चित वर्ग से हैं। वो वर्ग जिसे खुद रवीना टंडन चाहती हैं कि वो उनसे नाराज न हो।

यही वजह है कि शायद सारे पक्ष अपने साथ होने के बावजूद रवीना टंडन ने इस मामले में कोई शिकायत नहीं दी जबकि वो अच्छे से जानती है कि अगर उनके पक्ष में सबूत नहीं मिलते तो वो परिवार पूरी तैयारी कर चुका था उनको जेल भेजने की। उनपर बुजुर्ग महिला को पीटने का आरोप लगा दिया गया था। लड़की की नाक फोड़कर खून निकालने जैसे दावे कर दिए गए थे, उन्हें बिन बात के नशेड़ी साबित किया जा रहा था… ये सब जानते हुए रवीना टंडन चुप हैं। शायद वह खुद घबराई हुई हैं ये सोचकर कि इस शांतिप्रिय समुदाय के खिलाफ आवाज उठाने के नुकसान उन्हें न झेलने पड़ें या शायद इस बात का डर है कि उन्हें वो गिरोह न खारिज कर दे जिनका काम ही प्रोपगेंडे को हवा देना। ऐसा भी हो सकता है कि रवीना जानती हों कि उनके साथ इस मुद्दे पर आवाज क्यों नहीं उठा रहे… उन्हें मालूम होगा कि ऐसी परिस्थिति में मीडिया को कैसे डील करना होता है… कैसे समुदाय विशेष की छवि को धूमिल करने से बचाना होता है।