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कहीं भगवान पर थप्पड़, कहीं पेड़ में बांधकर हंटर… वामपंथन फेमिनिस्ट प्रियंका पॉल के हिंदू घृणा से सने पोस्ट, मुंबई पुलिस में शिकायत

सनातन धर्म के खिलाफ घृणा फैलाना लिबरल नारीवादियों का पसंदीदा काम रहा है। इसी क्रम में एक प्रियंका पॉल नाम की वामपंथी महिला की आईडी फिर चर्चा में है। प्रियंका पॉल अपने इंस्टाग्राम अकॉउंट के जरिए लंबे समय से हिंदू धर्म को अपमानित करने वाली सामग्री का प्रचार-प्रसार करती रही है।

उसकी आईडी सामने आने के बाद गिरफ्तारी की माँग हो रही है। मुंबई पुलिस को टैग कर करके प्रियंका पॉल के विरुद्ध एक्शन लेने को कहा जा रहा है। वहीं रैंडम सेना के ट्वीट के हिसाब से तो उनके कार्यकर्ता ठाणे के अंबरनाथ पुलिस स्टेशन भी पहुँच गए हैं। उन्होंने अपील की है कि लोग अपने करीबी थाने में जाकर शिकायतें दें।

बता दें कि हिंदू संगठनों का प्रियंका पॉल पर इतना गुस्सा इसलिए है क्योंकि उसने अपने हिंदू विरोधी पोस्टों में हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया हुआ है। इसमें डॉ भीम रॉव अंबेडकर को भगवान राम को थप्पड़ मारते दिखाया गया है। इसके अलावा प्रियंका पॉल ने एक फोटो शेयर की थी जिसमें उसके हाथ पर टैटू है। इस टैटू में भगवान राम को पेड़ में बंधा दिखाकर भीम राव अंबेडकर के हाथ में हंटर दिखाया गया है। इसे साझा करते हुए प्रियंका ने लिखा था कि लोगों ने उसे कहा कि ये टैटू उसे महंगा पड़ेगा। उसे वाकई महंगा पड़ा-24000 का।

फिलहाल प्रियंका पॉल ने अपनी आईडी को प्राइवेट कर लिया है। उसकी आईडी पर 74 हजार से ज्यादा फॉलोवर्स हैं। कहा जा रहा है कि पहले ये आईडी पब्लिक थी लेकिन हिंदुओं के आवाज उठाने के बाद प्रियंका ने अपनी करतूतें छिपाने के लिए इसे प्राइवेट किया है।

कुछ लोगों का कहना है कि हिंदू संगठन उसके खिलाफ ज्यादा कठोर हो रहे हैं। लड़की के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए। जबकि कुछ लोग कह रहे हैं कि ये सिर्फ हिंदू धर्म ही हैं जहाँ भगवान का ऐसा अपमान देखने के बाद भी लोग कानूनी तरीके से लड़की पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। अन्य मजहब को लेकर ऐसे घटिया प्रयास किए जाते तो क्या होता इसकी प्रतिक्रिया क्या होती ये छिपी नहीं है।

बता दें कि प्रियंका पॉल के खिलाफ पहले दफा मुकदमा दर्ज कराने की बात नहीं हो रही। 2022 में हिंदू आईटी सेल ने भी प्रियंका पर केस किया था। उन्होंने माँग की थी कि आईपीसी की धारा 153 ए, 298, 504, 505 के तहत केस हो। हालाँकि हिंदू आईटी सेल के मुताबिक, इस मामले पर एक्शन लिया जाना अभी बाकी है।

हर साधु-संन्यासी की बनने लगेगी समाधि, तो आम जनता कहाँ जाएगी: दिल्ली हाई कोर्ट, यहीं हैं 54 अवैध मस्जिद-मदरसे

दिल्ली हाई कोर्ट ने नागा साधुओं के नाम संपत्ति करने के मामले में एक अहम टिप्पणी की है। हाई कोर्ट ने कहा कि नागा साधु सांसारिक दुनिया और मोह से दूर रहते हैं। नागा साधुओं का जीवन पूरी तरह वैरागी का होता है, इसलिए उनके नाम संपत्ति की माँग मान्यताओं के अनुसार सही नहीं है। कोर्ट ने एक अहम मामले में फैसला सुनाते हुए दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस धर्मेश शर्मा ने कहा कि नागा साधु महादेव के भक्त होते हैं। वह सांसारिक मोह और दुनिया से पूरी तरह विरक्त होते हैं। कोर्ट ने कहा कि वह जितना हिंदू धर्म समझते हैं उसके मुताबिक, नागा साधु शिव भक्त होने के कारण संसार से जुड़ी किसी भी वस्तु से जुड़ाव नहीं बल्कि अलगाव रखते हैं, इसलिए उनके नाम पर संपत्ति माँगना हिंदू धर्म की मान्यताओं और प्रथाओं के मुताबिक गलत है।

महंत श्री नागा बाबा भोला गिरि बनाम जिला मजिस्ट्रेट व अन्य के मामले में याचिकाकर्ता ने त्रिवेणी घाट, निगमबोध घाट, जमुना बाजार की जमीन को उनके नाम करने के लिए स्थानीय प्रशासन को निर्देश देने की माँग की थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह जमीनें उनके कब्जे में 1996 से हैं। इस मामले में कोर्ट ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में साधु-संत, फकीर और गुरु होते हैं। सभी के लिए सार्वजनिक भूमि पर समाधि स्थल और मंदिर बनाने के नाम पर कुछ समूह अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए इसका लाभ उठा रहे हैं, जो कि आने वाले समय में बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

जस्टिस धर्मेश शर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ता ने सार्वजनिक जमीन पर कब्जा किया है, इसलिए वह अतिक्रमणकर्ता हैं, क्योंकि दिल्ली सरकार की ओर से हटाई गई झुग्गियाँ यमुना नदी के पुनरुद्धार के लिए थी, जो कि सभी के लिए लाभ में आने वाला है। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में यह कहीं भी प्रदर्शित नहीं है कि विवादित स्थान बाबा की समाधि या जनता को पूजा करने के लिए दिया गया है। कोर्ट ने साफ किया कि याचिकाकर्ता के पास किसी भी तरह का ऐसा सबूत नहीं है, जिससे यह साफ हो सके कि जमीन पर बनाई गई बाबा की समाधि एक ऐतिहासिक स्थान है। दिल्ली हाईकोर्ट ने पूरे मामले पर सुनवाई करते हुए याचिका को खारिज कर दिया। हालाँकि कोर्ट ने कहा कि अभी तक उक्त जमीन पर बने निर्माण को तोड़ने संबंधी कोई आदेश एलजी कार्यालय की ओर से जारी नहीं हुआ है।

तो क्या अवैध मजारों को भी हटाने का आदेश देगी कोर्ट?

देश में अनगिनत मजारें ऐसी हैं, जो सरकारी जमीनों पर बनी हुई हैं। यहाँ तो नागा बाबा समाधि के मामले में तो याचिकाकर्ता ने बताया ही है कि साल 1991 के कागजातों में उनकी जमीन दर्ज है, लेकिन अब उसका अता-पता नहीं है। ऐसे में दिल्ली हाई कोर्ट उनकी जमीन की पैमाइश करा दे, लेकिन हाई कोर्ट नहीं माना। ऐसे में देश भर में जो हर कुछ मील पर अवैध मजारें सरकारी जमीनों पर बनी हुई हैं, उनकी कानूनी स्थिति क्या होगी, इस पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। वैसे, साल 2020 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले दिल्ली में 54 से ज्यादा मस्जिद, मदरसे सरकारी जमीनों पर बने हुए थे, जिनकी पूरी लिस्ट उप-राज्यपाल को सौंप दी गई थी।

कोलकाता पहुँचने से पहले तय था बांग्लादेशी MP का मरना: पहले गर्दन काटी, उसके बाद शरीर की खाल छील बनाया ‘कीमा’

बांग्लादेश के सांसद अनवारुल अजीम अनार की हत्या मामले में सामने आया है कि सांसद को निर्ममता से मारने की साजिश उनके कोलकाता पहुँचने से कुछ सप्ताह पहले ही रची गई थी। नई रिपोर्ट्स में सीआईडी के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि हत्यारों ने उस टैक्सी को भी 30 अप्रैल 2024 को ही किराए पर लिया था जिसमें आवामी लीग के वरिष्ठ नेता कोलकाता, न्यू टाउन के फ्लैट पर गए थे।

अब पुलिस ने इस टैक्सी के चालक को हिरासत में लिया है। उससे पूछताछ भी हो रही है। अभी तक जो जानकारी उसने दी है उसमें विरोधाभास है। पुलिस की छानबीन में सामने आया है कि यह वही टैक्सी है, जिससे 14 मई को दो पुरुष और एक महिला एक ट्रॉली बैग के साथ फ्लैट से बाहर निकले थे। पुलिस को संदेह है कि उसी में मृत सांसद के शव के टुकड़े थे।

बता दें कि अनवारुल अजीम अनार की हत्या के इस मामले में बांग्लादेश से जासूसी विभाग के प्रमुख हारुन-या-रशीद अपनी टीम के साथ भारत आए हुए हैं। इस समय कोलकाता के उस फ्लैट की जाँच चल रही है जिसमें घटना को अंजाम दिया गया। जाँच में कोलकाता की सीआईडी टीम जुटी हुई है।

पिछले दिनों हारुन-या-रशीद ने बताया था, “…हमने पश्चिम बंगाल CID की मदद से उस डुप्लेक्स फ्लैट (हत्या की जगह) की सीवेज लाइन और सेप्टिक टैंक खुलवाया है, वहाँ हमें मांस मिला है। इसे फोरेंसिक और DNA टेस्ट के लिए भेजा जाएगा, उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है… फोरेंसिक और DNA टेस्ट के बाद ही हम बता सकते हैं कि यह किसके शरीर के मांस हैं…”

मालूम हो कि 12 मई को भारत आए बांग्लादेशी सांसद की हत्या को न्यू टाउन के फ्लैट में अंजाम दिया गया था। इस हत्या के लिए कसाई को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था, जिसने सांसद के शव के आगे बैठकर पहले खूब शराब पी, उसके बाद उनके शव से खाल उतारी थी और फिर उनके मांस को कीमा की तरह टुकड़ों में काटकर हल्दी लगाकर थैले में भरा। बाद में उन थैलों को सुनसान जगह देख फेंक दिया गया। हत्या के बाद शव से इतनी निर्ममता इतनी की गई थी कि अभी तक शव के पूरे टुकड़े नहीं मिले हैं। वहीं सांसद के परिजनों को यकीन नहीं हो पा रहा है कि ये हत्या अनवारुल के बचपन के दोस्त ने कराई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, बेटी ने कहा कि यकीन मानना मुश्किल है– “पापा का मर्डर अंकल ने करवा दिया।”

पश्चिम बंगाल में पत्थरबाजी में फूटा ANI के पत्रकार का सर, कई घायल: बमबाजी-मारपीट के बीच आखिरी चरण में 1 बजे तक 40% मतदान

लोकसभा चुनाव 2024 में आखिरी चरण के लिए मतदान जारी है। दोपहर एक बजे तक 40% से ज्यादा मतदान दर्ज किया गया है। हिमाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा मतदान हुआ है, तो बिहार सबसे फिसड्डी साबित हो रहा है। इस बीच, पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा जारी है। टीएमसी के कार्यकर्ताओं द्वारा मतदाताओं को धमकाने, बमबाजी की घटनाएँ हुई हैं, तो पश्चिम बंगाल के जयनगर लोकसभा सीट पर वोटिंग के दौरान टीएमसी के गुंडों की पत्थरबाजी के चपेट में आने से एएनआई के एक पत्रकार को गंभीर चोटें आई हैं, उन्हें कोलकाता के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, संदेशखाली से लेकर भांगड़ तक टीएमसी के बमबाजों की करतूतें सामने आ रही हैं।

TMC-BJP कार्यकर्ताओं की पत्थरबाजी में फूटा पत्रकार बंटी मुखर्जी का सर

पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव की वोटिंग को कवर कर रहे पत्रकार बंटी मुखर्जी का पत्थरबाजी में सर फूट गया है। एएनआई के साथ स्ट्रिंग के तौर पर जुड़े बंटी मुखर्जी जयनगर लोकसभा सीट में आने वाले कैनिंग इलाके में थे। तभी टीएमसी के गुंडों की ओर से बीजेपी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाकर की जाने वाली पत्थरबाजी की चपेट में आ गए। उन्हें गंभीर हालत में कोलकाता के मेडिका सुपरस्पेशालिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

संदेशखाली में टीएमसी के गुंडों का आतंक जारी

पश्चिम बंगाल के बशीरहाट लोकसभा क्षेत्र में आने वाले संदेशखाली में अब भी टीएमसी के गुंडों का कहर बरप रहा है। बमबारी के बीच टीएमसी के गुंडों ने बीजेपी के कार्यकर्ताओं-समर्थकों पर हमला किया है। महिलाओं को घर-घर में घुसकर टारगेट किया जा रहा है और उन्हें टीएमसी के लिए वोट करने के लिए धमकाया जा रहा है।

वोटिंग में हिमाचल आगे, बिहार फिसड्डी

लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में मतदान के क्रम में हिमाचल प्रदेश सबसे आगे है, तो बिहार फिसड्डी साबित हो रहा है। चुनाव आयोग द्वारा जारी आँकड़ों के मुताबिक, अब तक कुल 40.09% मतदान हो चुका है। सबसे अधिक मतदान हिमाचल प्रदेश में 48.63% दर्ज हुआ है, तो बिहार में सबसे कम 35.65%। वहीं, झारखंड में 46.80%, ओडिशा में 37.64%, पंजाब में 37.80%, उत्तर प्रदेश में 39.31%, पश्चिम बंगाल में 45.07%, चंडीगढ़ में 40.14% मतदान दर्ज हुआ है।

आखिरी चरण के मतदान में 57 लोकसभा सीटों पर मतदान जारी है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाराणसी सीट भी शामिल है। पंजाब और यूपी की 13-13 सीटें, पश्चिम बंगाल की 9 सीटें, बिहार की 8 सीटें, ओडिशा की 6 सीटें, हिमाचल प्रदेश की 4 सीटें, झारखंड की 3 सीट और चंडीगढ़ की एक सीट पर मतदान जारी है।

हिन्दू लड़की को बेहोश करके किया किडनैप, फिर मुंबई में धर्मांतरण, निकाह और रेप… UP पुलिस ने शकील को दबोचा, पीड़िता को जान से मारने की दी थी धमकी

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ एक हिन्दू लड़की का निकाह करके उसे मुंबई ले जाकर इस्लाम कबूल करवाया गया। लड़की से रेप किया गया और मुँह खोलने पर उसे जान से मार डालने की धमकी भी दी गई। पीड़ित परिवार ने पुलिस में FIR दर्ज करवाई है। पीड़िता को बरामद करके आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना सोमवार (20 मई 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना बांदा जिले के थानाक्षेत्र गिरवां की है। यहाँ 20 मई को पीड़िता के परिजनों ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने बताया कि महुआ गाँव के शकील ने उनकी बेटी को नशीला पदार्थ सुंघा कर पहले बेहोश किया फिर अपहरण कर के कहीं ले गया। अपहरण में शकील के साथ उसके कुछ साथी भी शामिल बताए गए। पुलिस ने तब IPC की धारा 366 के तहत FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी थी। लड़की को मुंबई से बरामद कर लिया गया था। यहीं से शकील को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

पीड़िता को बांदा लाकर पूछताछ की गई। लड़की ने बताया कि 20 मई को शकील ने पहले उसे कुछ सुंघा कर बेहोश किया। होश आने पर पीड़िता ने खुद को एक ट्रेन में पाया। शकील भी साथ था। उसने मदद माँगने पर मार डालने की धमकी दी और अपने साथ मुंबई ले गया। यहाँ लड़की को एक मस्जिद में ले जाया गया। मस्जिद में पीड़िता को इस्लाम कबूल कराया गया। इसी जगह लड़की का नाम इकरा रखा गया। इसके बाद शकील ने पीड़िता से जबरन निकाह करके बलात्कार किया।

पीड़िता के परिजनों ने बताया कि लड़की की मानसिक हालत ठीक नहीं है। शकील ने लड़की से निकाह करने के बाद उसके फोटो और निकाहनामा की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल कर दीं थीं। विश्व हिन्दू परिषद ने इस घटना को लव जिहाद बताते हुए प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने मीडिया को बताया कि पीड़िता की बरामदगी के बाद केस में उत्तर प्रदेश धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम व रेप की धारा 376 बढ़ाई गई है। शकील को जेल भेज दिया गया है। घटना में शामिल अन्य आरोपितों की संलिप्तता की जाँच करवाई जा रही है।

पाकिस्तान में ईद से पहले दिनदहाड़े हुई बकरों की चोरी, वीडियो सामने आया: लोग बोले- ये क्या हाल हो गए इस मुल्क के

पाकिस्तान में ईद उल अजहा से पहले डकैती का नया ट्रेंड सामने आया है। वहाँ बदमाश अब दिनदहाड़े लोगों की बकरियाँ चुराने लगे हैं। ये वो बकरियाँ होती हैं जिन्हें लोग अपने घर कुर्बानी देने के लिए खरीदकर लेकर आते हैं। इस संबंध में एक वीडियो भी सामने आई है।

वीडियो में देखा जा सकता है कि एक युवक खुली सड़क पर दिन के उजाले में अपनी बकरियों को घुमा रहा था। इसी बीच एक होंडा गाड़ी आई, उसमें से तीन लोग निकले और बकरी डकैती की घटना को अंजाम दिया गया।

वीडियो में देख सकते हैं कि गाड़ी से निकलकर पहले उस युवक को बंदूक दिखाकर एक बदमाश ने रोका और फिर बाकी दोनों बदमाशों ने बकरे पकड़े और गाड़ी में जबरदस्ती ठूँस कर खुद गाड़ी में बैठ गए। इसके बाद जो लड़का गन लेकर खड़ा था वो भी गाड़ी में बैठ गया और सब वहाँ से फरार हो गया।

बताया जा रहा है लाहौर के इकबाल शहर में दिन-दहाड़े बकरियों की डकैती हुई है। अब वहाँ लोग अपने जानवरों को घर से बाहर लाने-ले जाने से डरने लगे हैं।सोशल मीडिया पर भी इस घटना की सीसीटीवी फुटेज वायरल है।

इसे देख अन्य लोग हैरानी जता रहे हैं। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर सवाल खड़ा किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि क्या वहाँ ऐसी स्थिति हो गई कि लोगों को बकरे चुराकर अपने त्योहार मनाने पड़ रहे हैं। वहीं कुछ का कहना है कि महंगाई के कारण पाकिस्तान में ऐसी चोरियाँ आम हो रही हैं।

रवीश के लिए संदेशखाली छोटी बात, इसे बड़ा बनाया BJP और मीडिया ने… ये है ‘पिडी मीडिया’, विपक्ष के सामने दुम हिलाने वाला

कभी कॉन्ग्रेस के मुखपत्र की तरह रहे एनडीटीवी में बड़े ओहदे पर रहे रवीश कुमार आजकर यूट्यबर बन चुके हैं, लेकिन उनके अंदर बैठा एक खास विचारधारा का कार्यकर्ता यू-ट्यूब पर भी उनसे वही काम करा रहा है, जो वो न्यूज चैनल के पर्दे पर किया करते थे। खुद को ‘निष्पक्ष’ बताकर ‘भौकाल’ टाइट रखने वाले रवीश कुमार ने 30 मई 2024 को एक नया वीडियो अपने यू-ट्यूब चैनल पर पोस्ट किया है, जिसमें वो ममता बनर्जी की रैलियों के बारे में बता रहे हैं। बता तो क्या ही रहे हैं, खुद की जुबान से न सिर्फ ममता बनर्जी की भाषा बोल रहे हैं, बल्कि वो ये साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि दूसरे नेताओं की रैलियों को कवर करने वाले चैनल और पत्रकार गोदी मीडिया के लोग हैं और वो ‘महा पत्रकार’ हैं, जो ‘गरीबों’ यानी जिनको कोई पूछने वाला नहीं, उन्हें दिखा रहे हैं।

रवीश कुमार इस वीडियो में ममता बनर्जी की बातों को दोहराते दिख रहे हैं। कंटेंट और रिसर्च के नाम पर इस वीडियो में कुछ भी नहीं है, सिवाय ममता बनर्जी के आरोपों को दोहराने और बीजेपी-नरेंद्र मोदी से अपनी नफरत-खीझ दिखाने के।

रवीश कुमार संदेशखाली के वीभत्स मुद्दे को बीजेपी की साजिश से जोड़ते हैं और इसके बारे में पूरे देश को जानकारी हुई, तो गलती गोदी मीडिया की हुई। रवीश कुमार ये नहीं बताते कि संदेशखाली मुद्दे को कवर करते हुए कितने पत्रकारों को ममता बनर्जी की सरकार ने अपना शिकार बनाया। कितनी जमीनों को शेख शाहजहाँ और उसके आदमियों ने दशक भर से कब्जा किया था, कितनी कृषि योग्य भूमि को टीएमसी के गुंडों ने तालाब बना दिया था। चूँकि ममता बनर्जी ने कहा कि ये बीजेपी की साजिश थी और इसे गोदी मीडिया ने ही कवर किया, ऐसे में रवीश कुमार ने एकदम पालतू वाली स्टाइल में उन्हीं बातों को दोहरा दिया। उनकी ये बकवास 22.10 मिनट से 22.55 के बीच सुन सकते हैं।

जिन्हें कोई दिखा नहीं रहा, ये कैसा दावा?

रवीश कुमार का ये दावा कि नेशनल मीडिया पीएम नरेंद्र मोदी के अलावा किसी को नहीं दिखा रहा, ये सरासर झूठ है। बदमाशी है। प्रियंका गाँधी ने इस लोकसभा चुनाव में 100 से ज्यादा बार मीडिया से बातचीत की है। प्रियंका गाँधी का इंटरव्यू लेने राजदीप सरदेसाई (रविश के पुराने साथी) पूरे दल-बल और मालिकान के साथ गए थे, तो अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव जैसे नेताओं का मीडिया इंटरव्यू हर रोज आता है। अरविंद केजरीवाल, राहुल गाँधी की मीडिया कवरेज भी सबके सामने है।

बात करते हैं उनके इस वीडियो की मालकिन ममता बनर्जी की। जाधवपुर में चल रही उनकी पदयात्रा से राजस्थान के चुरु निवासी किसी व्यक्ति या मतदाता को क्या मतलब हो सकता है, जो वो ममता बनर्जी की पदयात्रा को लाइव टीवी पर देखे। उसे देखना ही होगा, तो वो यूट्यूब पर देख लेगा। आजकल सारी राजनीतिक पार्टियाँ यू-ट्यूब का इस्तेमाल कर भी रही हैं। ऐसे में रवीश कुमार का ये कहना, कि वो ममता बनर्जी को दिखा रहे हैं, इसलिए वो गोदी मीडिया नहीं, बल्कि सब गोदी मीडिया है, बेहद मचकानी बात है। खुद सोचिए, चूँकि रवीश ने बताया भी है कि साउथ कोलकाता में ममता बनर्जी ने 35 डिग्री सेल्सियस की गर्मी में 12 किमी की पदयात्रा की, जो बहुत जोरदार रही। ऐसे में मैं ये जानना चाहूँगा कि साउथ कोलकाता में ममता बनर्जी की पदयात्रा का शिमला में बैठे किसी आम आदमी का क्या लेना-देना?

वैसे, विपक्ष की रैली खूब दिखाई जा रही है, सभी के सोशल मीडिया हैंडल पर देखेंगे, तो ये दिखता जाएगा, लेकिन रवीश कुमार को नहीं दिखता, क्योंकि आँखों में एक खास पट्टी बाँध रखी है। रवीश की मानें, तो विपक्ष की रैली दिखानी चाहिए, तभी वो गोदी मीडिया में शामिल नहीं किया जाएगा। लेकिन सिर्फ ममता बनर्जी की रैली और ममता बनर्जी की बातों को दोहराने वाले को ‘तलवा चाटने वाला पत्रकार’ कह सकते हैं कि नहीं, ये रवीश से पूछा जाना चाहिए।

खैर, सर्टिफिकेट आजतक मुफ्त में बँटते हैं, तो रवीश कुमार भी अपनी एक ब्रांच ‘गोदी मीडिया’ और ‘पिडी मीडिया’ की खोलकर बैठ गए हैं। जिसे वो गोदी मीडिया बोल दें, उस पर गोदी मीडिया का ठप्पा लग जाता है और बाकी लोग ‘पिडी मीडिया’ के हिस्से हैं ही।

पुणे पोर्श केस में नाबालिग की माँ को पुलिस ने किया गिरफ्तार, अपने खून से बदला था बेटे का खून, ताकि टेस्ट में बेटा न निकले शराबी: जानें कहाँ तक पहुँची जाँच

पुणे पोर्श कार एक्सीडेंट केस में पुलिस ने नाबालिग आरोपित की माँ को गिरफ्तार कर लिया है। उसने ही अपने ब्लड सैंपल को बेटे के ब्लड सैंपल से बदला था, ताकि शराब पीकर एक्सीडेंट करने वाला उसका नाबालिग बेटा बच जाए। इस मामले की जानकारी सामने आने के बाद से वो फरार हो गई थी, लेकिन अब पुणे पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। इस बीच, नाबालिग के दोस्त ने बताया है कि आरोपित किशोर शराब के नशे में धुत होकर गाड़ी चला रहा था। हादसे के समय स्टेयरिंग उसी के हाथ में थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्लड सैंपल बदलने के मामले का खुलासा होने के बाद शिवानी अग्रवाल मुंबई भाग गई थी, लेकिन वो शुक्रवार (31 मई 2024) की रात पुणे लौट आई। उसके आते ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में ससून अस्पताल के दो डॉक्टर और एक वार्ड बॉय पहले से ही पुलिस की हिरासत में हैं। शिवानी अग्रवाल के साथ ही इस केस में विशाल अग्रवाल को भी नामजद किया गया है। वो डॉक्टरों से लगातार संपर्क में था और सैंपल बदलने के लिए उसी ने पैसों की पेशकश की थी।

बता दें कि पुलिस की जाँच में ये बात सामने आई है कि शराब के नशे में धुत नाबालिग के ब्लड सैंपल को उसकी माँ के ब्लड सैंपल से ही बदला गया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक नाबालिग लड़के की माँ शिवानी अग्रवाल ने पुणे के ससून जनरल अस्पताल में अपना ब्लड सैंपल दे दिया था। इस सैंपल को ही उनके बेटे के सैंपल के साथ बदल दिया गया। ये हेराफेरी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्रीहरि हलनोर और उनके स्टाफ ने की थी। इस फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद डॉ. हलनोर और डॉ. अजय तावड़े को गिरफ्तार कर लिया गया था।

दरअसल, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट में पहले ब्लड सैंपल में अल्कोहल नहीं पाया गया। संदेह होने पर एक दूसरे अस्पताल में फिर टेस्ट किया गया। यहाँ खुलासा हुआ कि ब्लड सैंपल दो अलग-अलग व्यक्तियों के थे। दूसरे टेस्ट की रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस को शक हुआ कि ससून अस्पताल के डॉक्टरों ने आरोपित को बचाने के लिए सबूतों के साथ छेड़छाड़ की है।

पश्चिम बंगाल में EVM-VVPAT की लूट, संदेशखाली और भाँगड़ में बमबाजी: महिलाओं को धमकाकर TMC के लिए वोट डलवा रहे पार्टी के गुंडे

लोकसभा चुनाव 2024 में सातवें और आखिरी चरण का मतदान जारी है। मतदान की शुरुआत से ही पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसाओं की खबरें सामने आने लगी हैं। हर बार की तरह इस बार भी टीएमसी कार्यकर्ताओं ने विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर हमला किया। कहीं बमबाजी की है, तो कहीं लाठियों का सहारा लिया है। वहीं, दक्षिण 24 परगना जिले में टीएमसी के गुंडों द्वारा धमकाने पर बिफरी भीड़ ने ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को तलाब के पानी में फेंक दिया। इस बीच, संदेशखाली और भाँगड़ में बम भी चलाए गए हैं।

चुनाव आयोग ने बताया है कि दक्षिण 24 परगना जिले के कुलताई में ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को निशाना बनाया गया है। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जानकारी दी है कि ‘आज (1 जून 2024) की सुबह 6.40 बजे 19-जयनगर (एससी) पीसी के 129-कुलतली एसी में बेनीमाधवपुर एफपी स्कूल के पास सेक्टर अधिकारी के रिजर्व ईवीएम और कागजात स्थानीय भीड़ द्वारा लूट लिए गए और 1 सीयू, 1 बीयू, 2 वीवीपीएटी मशीनों को एक तालाब के अंदर फेंक दिया गया… सेक्टर अधिकारी द्वारा एफआईआर दर्ज की गई है और आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सेक्टर के तहत सभी छह बूथों में मतदान प्रक्रिया निर्बाध रूप से चल रही है। सेक्टर अधिकारी को नए ईवीएम और कागजात उपलब्ध कराए गए हैं।’

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के कुलतई में बूथ संख्या 40, 41 पर भीड़ द्वारा कथित तौर पर ईवीएम और वीवीपैट मशीन को पानी में फेंक दिया गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि मतदाताओं को कथित तौर पर टीएमसी समर्थकों ने धमकी दी है। इससे गुस्साई भीड़ ने ईवीएम को निशाना बनाया और मशीनों को तालाब में फेंक दिया। हालाँकि यहाँ मशीनों को बदला गया और मतदान का काम जारी है।

पत्रकार सुभी विश्वकर्मा ने 2 जगहों पर बमबारी की घटना की जानकारी दी है। उन्होंने वीडियो भी पोस्ट किए हैं। पहली घटना जाधवपुर लोकसभा क्षेत्र के भाँगड़ इलाके की है, जहाँ बमबाजी की गई। वहीं, संदेशखाली में भी बमबाजी की वारदात सामने आई है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि अधिकारी महिलाओं और महिला बूथ कार्यकर्ताओं के साथ ही मतदाताओं को टीएमसी के पक्ष में वोटिंग के लिए धमका रहे हैं।

पश्चिम बंगाल बीजेपी ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा है। बीजेपी ने पूछा है कि ये बम कहाँ से आ रहे हैं। पश्चिन बंगाल बीजेपी ने एक्स पर लिखा, “सातवें चरण के मतदान में भी टीएमसी का आतंक जारी है। सतुलिया, भांगड़ में बम धमाके हो रहे हैं। ममता बनर्जी, जो जानती हैं कि ये बम कौन बना रहा है, फिर भी ये धमाके होने दे रही हैं। ममता बनर्जी, ये सारे बम कहाँ से आ रहे हैं?”

सुबह 9 बजे तक 11.31 प्रतिशत मतदान

लोकसभा चुनाव 2024 के अंतिम चरण में सुबह 9 बजे तक 11.31 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ है। चुनाव आयोग द्वारा जारी आँकड़ों के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में 14.35%, झारखंड में 12.15%, बिहार में 10.58%, चंडीगढ़ में 11.6%, यूपी में 12.94%, ओडिशा में 7.69%, पंजाब में 9.64% और पश्चिम बंगाल में 12.64% मतदान हुआ है।

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में 57 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाराणसी सीट भी शामिल है। जिन सीटों पर आज वोटिंग हो रही है, उसमें पंजाब और यूपी की 13-13 सीटें, पश्चिम बंगाल की 9 सीटें, बिहार की 8 सीटें, ओडिशा की 6 सीटें, हिमाचल प्रदेश की 4 सीटें, झारखंड की 3 सीट और एक चंडीगढ़ सीट शामिल है।

चायनीज लोन के जाल में फँसा नेपाल का पोखरा एयरपोर्ट: दिया 2% पर ऋण, ले रहा 5% – पोल खोलने वाले पत्रकार को चीन के राजदूत ने धमकाया

नेपाल में तैनात चीन के राजदूत चेन सॉन्ग ने नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार गजेंद्र बुधथोकी को धमकाने का प्रयास किया, लेकिन उसे मुँह की खानी पड़ी। दरअसल, वरिष्ठ पत्रकार गजेंद्र बुधथोकी ने पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बनाने के लिए चीन से मिले कर्ज को लेकर बड़ा दावा किया था, लेकिन चीनी राजदूत चेन सॉन्ग उनसे एक्स पर ही उलझ गए। उन्होंने पत्रकार के दावे को गलत बताते हुए माफी की माँग की थी, लेकिन पत्रकार ने कहा कि उनके पास आधिकारिक दस्तावेज हैं, ऐसे में चीन के राजदूत उन्हें धमकाने की कोशिश न करें।

इस विवाद की शुरुआत तब हुई, जब पत्रकार गजेंद्र बुधाथोकी ने दावा किया कि ‘पोखरा एयरपोर्ट के लिए लोन पर ब्याज दर का भुगतान 2% नहीं बल्कि 5% की दर से किया जा रहा है।’ इसे चीनी राजदूत चेन सॉन्ग ने सरासर गलत बताते हुए लिखा, ‘मैं अपने जीवन में इससे बड़ा झूठ नहीं देखा। सार्वजनिक तौर पर जो जानकारी उपलब्ध है, उसके बावजूद इतना बड़ा झूठ बोलने की हिम्मत कर रहे हो’।

पत्रकार ने इसके जवाब में कहा कि ‘मैं सबूतों के साथ पर्दाफाश करूँगा।’ इसके बाद चीनी राजदूत धमकाने वाली भाषा पर उतर आए। और लिखा, ‘मेरी माँग है कि ‘तुम और जिनकी भी तुम नुमाइंदगी करते हो, उनकी तरफ से औपचारिक तौर पर माफी माँगो।’

एक-दूसरे पर हमलावर हुए पत्रकार और चीनी राजदूत

क्या है पोखरा एयरपोर्ट से जुड़े कर्ज जाल का मामला?

दुनिया में बहुत सारे देश चीनी कर्ज के जाल में फँसकर तबाह हो चुके हैं। श्रीलंका, पाकिस्तान जैसे देशों की हालत किसी से छिपी नहीं है, तो नेपाल भी उसी जाल में फँस चुका है। चीन एक ओर अमेरिका से टक्कर लेने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी ओर वो छोटे-छोटे देशों को विकास परियोजनाओं का लालच दिखाकर कर्ज के जाल में फँसा रहा है। भारत के पड़ोसी नेपाल में भी ऐसी ही स्थिति बन गई है, जहाँ ड्रैगन ने प्रेशर डालकर पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनवा तो लिया, लेकिन अब ये प्रोजेक्ट नेपाल सरकार के गले की फाँस बन गई है। ऊपर से पोखरा एयरपोर्ट को बनाने वाली सरकारी कंपनी को इतना महँगा लोन मिला है कि वो मूलधन तो छोड़िए, ब्याज भी नहीं चुका पा रही है। ब्याज की बात तो काफी बाद में, वो अपने परिचालन का खर्च तक नहीं निकाल पा रही है।

इस बीच, ये बात सामने आ रही है कि चीन ने कागजों पर तो पोखरा एयरपोर्ट के लिए 2% की ब्याज दर से लोन दिया है, लेकिन पोखरा एयरपोर्ट अथॉरिटी से 5% प्रतिशत ब्याज दर की वसूली हो रही है। इस पूरे मामले की पोल नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार ने खोली, तो नेपाल में चीन का राजदूत उन्हें सोशल मीडिया पर ही धमकाने लगा। इसके बाद ये मामला बढ़ गया और नेपाल के साथ ही चीन भी बैकफुट पर आता दिख रहा है, क्योंकि जिस प्रोजेक्ट को लेकर चीन ने 2% ब्याज दर का दिखावा किया, वो 5% प्रतिशत निकला है, ऐसे में आम जन का आक्रोश भी बढ़ता दिखा है।

पोखरा एयरपोर्ट के निर्माण लागत पर 5% ब्याज की वसूली

क्या है ब्याज दर का मामला?

दरअसल, चीन ने आधिकारिक तौर पर इस एयरपोर्ट के निर्माण के लिए 2% पर ही लोन दिया है, लेकिन एयरपोर्ट परिचालन करने वाली कंपनी को इसे 5% पर ही लौटाना है। लोक ऋण प्रबंधन कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक, हवाई अड्डे के निर्माण के लिए सरकार द्वारा चीन से लिए गए लोन की ब्याज दर केवल दो प्रतिशत है। लेकिन चीनी सरकार और नेपाल सरकार के बीच समझौते में दो तरह के लोन हैं। पहली तरह का लोन- 2 % के हिसाब से और दूसरा 0% के हिसाब से। लेकिन मामला यहाँ पर ये फँसता है कि नेपाल के वित्त मंत्रालय और पोखरा एयरपोर्ट अथॉरिटी के बीच एक अन्य समझौता हुआ है, जिसमें चीनी पैसा सीधे एयरपोर्ट अथॉरिटी के पास न जाकर, नेपाल सरकार के पास गया। और अब पैसा नेपाल सरकार के माध्यम से चीन को जाएगा। चूँकि ये लोन गवर्नमेंट टू बैंक है। ऐसे में नेपाली वित्त मंत्रालय इस लोन पर 2% नहीं, बल्कि 5% की दर से एयरपोर्ट अथॉरिटी से पैसा वसूल रही है। ये 3% का मार्जिन नेपाल सरकार रख ले रही है। ऐसे में पोखरा एयरपोर्ट का परिचालन करने वाली कंपनी को लोन की दर 5% ही पड़ रहा है और ये जानकारी आधिकारिक है। यही दावा पत्रकार ने भी किया है।

वैसे, एक बात और है कि इस एयरपोर्ट का उद्घाटन जब 1 जनवरी 2023 को हुआ था, तो चीन ने दुनिया को ये बताने की कोशिश की थी कि ये प्रोजेक्ट उसके अति-महत्वाकाँक्षी प्रोजेक्ट बीआरआई का हिस्सा है, लेकिन नेपाल सरकार ने उसके दावे को खारिज करते हुए साफ कर दिया था कि अभी तक नेपाल में बीआरआई के तहत कोई भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ है। चीन का दावा झूठा है।

त्राहि-त्राहि कर रहा नेपाल, लोन को अनुदान में बदलने की माँग

वैसे, पोखरा एयरपोर्ट को बनाकर नेपाल सरकार बुरी तरह से फँस चुकी है। उसे जिस कमाई की उम्मीद थी, वो तो छोड़िए, अपने परिचालन का खर्च भी इस एयरपोर्ट से नहीं निकल पा रहा है। पोखरा एयरपोर्ट का संचालन करने वाली कंपनी ने ब्याज की एक किश्त दी है, लेकिन मार्च 2024 में जाने वाली दूसरी किस्त वो चुका नहीं पाई है। इसके बाद नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प दहाल प्रचंड ने चीन की यात्रा की तो पोखरा एयरपोर्ट की असलियत सामने आई। दरअसल, पोखरा एयरपोर्ट पर कमाई न होने की वजह से नेपाल अभी इसका ब्याज भी नहीं भर पा रहा है, ऐसे में मूल धन कैसे लौटाएगा? इसलिए नेपाल सरकार चाहती है कि चीन इस कर्जे को ‘अनुदान’ मान ले और उससे पैसों की वसूली न करे। बाकी चीन पूरी दुनिया में ऐसे देशों के साथ क्या कर रहा है, वो किसी से छिपा नहीं है। पड़ोसी श्रीलंका का मामला ही देख लीजिए।

शुरुआत से ही विवादों में घिरा रहा एयरपोर्ट, जमकर हुआ भ्रष्टाचार

पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन तो गया है, लेकिन इसकी कोई जरूरत नहीं थी। मार्च 2024 में नेपाल के महालेखा परीक्षक ने राष्ट्र को सरकारी खर्चों की ऑडिट रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें वित्त मंत्री वर्षमान पुन की भूमिका की जाँच की माँग की गई है। महालेखा परीक्षक ने कहा कि पोखरा एयरपोर्ट बनाने का फैसला बिना किसी स्टडी के लिए ही ले लिया गया। इसमें कई खामियाँ भी है। रिपोर्ट में कहा गया कि पोखरा में इंटरनेशनल एयरपोर्ट की जरूरी नहीं होने पर भी इसे बनाने की मंजूरी देना अपने आप में भ्रष्टाचार है। उस समय के वित्तमंत्री वर्षमान पुन, जो अब भी प्रचंड सरकार के वित्तमंत्री हैं, उन्होंने चीनी ठेकेदारों को फायदा पहुँचा है। यही नहीं, चीनी कंपनी को 2 अरब रुपये से ज्यादा की टैक्स छूट दी गई, ये भी भ्रष्टाचार है।

पिछले साल चीनी कंपनी के कर्मचारियों पर पड़ा था छापा

पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने वाली चीनी कंपनी पर भ्रष्टाचार में घिरे होने की वजह से पिछले साल 1 नवंबर 2023 को बड़ी छापेमारी हुई थी और कर्मचारियों के बैंक खातों को सील कर दिया गया था। नेपाल के भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी ‘अख्तियार दुरुपयोग अनुसंधान आयोग’ ने चीनी कंपनी सीएएमसी इंजीनियरिंग के दफ्तर पर छापेमारी की थी। एयरपोर्ट पर खराब गुणवत्ता का काम और कमीशनखोरी के आरोपों पर ये छापेमारी हुई थी। दरअसल, 1 जनवरी से 2023 से ही शुरु हो चुके इस एयरपोर्ट के रडार और वीएचएफ सिस्टम में कई बार खराबी आ चुकी है और जहाजों को आधे रास्ते से वापस भेजना पड़ रहा था। इसके बाद भ्रष्टाचार की शिकायत पर ये छापेमारी की गई थी।