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बाँटने की राजनीति, बाहरी ताकतों से हाथ मिला कर साजिश, प्रधान को तानाशाह बताना… क्या भारतीय राजनीति के ‘बनराकस’ हैं राहुल गाँधी?

आपने ‘पंचायत 3’ देखी? कई लोग इसके रिलीज की प्रतीक्षा कर रहे थे, कइयों ने ‘Amazon Prime’ पर इसे अपलोड किए जाने के साथ ही आठों एपिसोड देख डाले। ‘पंचायत’ के तीसरे सीजन में क किरदार की भूमिका काफी बढ़ाई गई है, उसका नाम है – भूषण। हालाँकि, गाँव के लोग उसे ‘बनराकस’ नाम से बुलाते हैं। ‘जंगल का राक्षस, यानी उसका स्वभाव कुछ ऐसा ही है। ‘पंचायत 2’ का उसका डायलॉग ‘देख रहे हो न विनोद’ काफी लोकप्रिय हुआ था।

यहाँ हमें ‘पंचायत 3’ की कहानी का भी हल्का-फुल्का जिक्र करना पड़ेगा, इसीलिए अगर आप Spoiler नहीं चाहते हैं तो सीरीज देखने के बाद ही इसे पढ़ें। भूषण का किरदार ‘पंचायत 3’ में 2 ग्रामीणों को लेकर घूमता है जो उसकी बातों में ऐसे आ जाते हैं कि ‘भइया-भइया’ कर के हमेशा उसके पिछलग्गू बने रहते हैं। इनमें से एक का नाम है विनोद और एक का नाम है माधव। दोनों गरीब होते हैं, जिनके पास अपना पक्का घर तक नहीं होता है। ऐसे में वो भूषण की बातों में आ जाते हैं।

भारत में भी वास्तविकता में भी एक ऐसा नेता है, लेकिन वो पंचायत नहीं बल्कि राष्ट्र स्तर का है। उसका नाम है – राहुल गाँधी। राहुल गाँधी में जनता को ऐसे ही बेवकूफ बनाते हैं, जैसे कि भूषण। भूषण बार-बार कहता है कि क्रांति लानी होगी, बलिदान देना होगा। वो बार-बार ग्राम प्रधान को तानाशाह बताता है। ठीक वैसे ही, जैसे राहुल गाँधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तानाशाह बताते हैं। जनता को बार-बार उकसाते हैं। एक ‘बनराकस’ तो राहुल गाँधी में भी है ही है।

‘बनराकस’ गाँव के खिलाफ जाकर उस विधायक से मिल जाता है, जो गाँव से नफरत करता है। ठीक वैसे ही, जैसे राहुल गाँधी कभी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ करार का हिस्सा बनते हैं तो कभी लंदन में जाकर भड़काऊ बयान देते हैं। मोदी सरकार के खिलाफ अरबपति कारोबारी जॉर्ज सोरोस भी तो करोड़ों डॉलर की फंडिंग कर रहा है। ऐसी ही ताकतों से राहुल गाँधी की भी मिलीभगत है। वो UK में वहाँ के सांसद जेरेमी कोर्बिन से मिलते हैं, जो जम्मू कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं मानता।

‘पंचायत 3’ के अंत में जब पूरे गाँव और विधायक के बीच लड़ाई का मौका आ जाता है, तब भूषण बीच में सफ़ेद झंडा लेकर पत्नी और दोनों चमचों के साथ बैठ जाता है। वो दिखावा करता है कि वो समझौता करा रहा है, शांति के लिए ये सब कर रहा है, जबकि असल में वो विधायक की तरफ होता है। दुनिया को दिखाने के लिए वो ‘बलिदान के लिए तैयार रहने’, निडर होने और शांति का पक्षधर होने का दावा करता है, उसके लिए नाटक करता है।

ये तो वैसे ही है न, जैसे लद्दाख में जाकर कहते हैं कि वहाँ की जमीन चीन ने कब्ज़ा ली है। वो खुद को साहसी और निडर दिखाने के लिए सीमा का दौरा करते हैं, लेकिन उनका एजेंडा भारत विरोधी रहता है। उनके समर्थन में पाकिस्तान से स्वर उठते हैं, उन्हें वोट देने की अपील होती है। गाँव का प्रधान ‘पंचायत’ में ‘बनराकस’ को नज़रअंदाज़ करता है, जब बर्दाश्त से बाहर हो जाता है तो डपट देता है। ठीक वैसे ही, जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को अहमियत नहीं देते, लेकिन चुनाव के समय उनके एजेंडे की धज्जियाँ उड़ा देते हैं।

लेकिन, ‘पंचायत’ के भूषण, या वास्तविक राहुल गाँधी की सबसे बड़ा पैंतरा है विभाजन पैदा करना। ‘बनराकस’ पूर्वी और पश्चिमी फुलेरा गाँव में विभाजन पैदा कर देता है। वो दावा करता है कि प्रधान खुद पूर्वी फुलेरा का है, इसीलिए उसने उधर के लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ अधिक संख्या में दिया है, जबकि पश्चिमी फुलेरा को नज़रअंदाज़ किया गया है। इसके बाद गाँव 2 हिस्सों में बँट जाता है। प्रधान के खिलाफ माहौल बन जाता है।

देखिए, राहुल गाँधी ठीक इसी तरह उत्तर भारत और दक्षिण भारत की बात करते हैं। केरल के वायनाड से सांसद राहुल गाँधी ने वहाँ भाषण देते हुए कहा था कि वो 15 वर्षों तक उत्तर भारत में सांसद रहे लेकिन दक्षिण भारत में आना उनके लिए काफी ताजगी भरा अनुभव था क्योंकि यहाँ के लोग न सिर्फ मुद्दों में रुचि लेते हैं बल्कि चीजों को डिटेल में देखते हैं। उन्होंने कहा था कि दक्षिण भारत के मतदाता उत्तर भारतीयों से अलग हैं। चुनाव आयोग में भी उनके उत्तर-दक्षिण को लेकर दिए गए एक बयान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी।

विनोद को भूषण वैसे ही फुसला कर रखता है, जैसे राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस समर्थकों को फुसलाते हैं। विनोद या माधव का प्रधान ने कुछ नहीं बिगाड़ा, लेकिन ‘बनराकस’ उसे कहता रहता है कि आवाज़ उठाओ, आवाज़ उठाओ। जैसे राहुल गाँधी जनता से कहते रहते हैं कि देश का माहौल ख़राब है, देश में तानाशाही आ गई है, सारी संस्थाएँ गुलाम हो गई हैं। हालाँकि, जनता को ऐसा नहीं लगता। ‘बनराकस’ की तरह ही राहुल गाँधी भी बाहरी ताकतों के साथ साँठगाँठ करते रहते हैं।

गाँव का माहौल ख़राब कर के और लड़ाई लगवा कर खुद शांति समझौते के लिए बैठने का दिखावा करना, ‘बनराकस’ के इसी किरदार को तो राहुल गाँधी ने शाहीन बाग़ आंदोलन और किसान आंदोलन को समर्थन देकर वास्तविकता में जिया है। जैसे भूषण विधायक आवास के दौरे पर साजिश रचने जाता है, राहुल गाँधी भी विदेश जाते ही रहते हैं। वहाँ गाँव का मामला है, यहाँ देश का। ‘बनराकस’ के कारण पूरे फुलेरा गाँव को हथियार निकालना पड़ा, राहुल गाँधी के चमचे 4 जून के बाद ‘जन-आंदोलन’ की बात कर रहे हैं।

‘बनराकस’ छोटी-छोटी बातों को बड़ा बना देता है, जैसे पिछले सीजन में उसने जबरन सड़क पर से गाड़ी हटवाई थी। एक चप्पल के लिए मंदिर का CCTV कैमरा देखा था। उसी तरह, राहुल गाँधी बिना मुद्दे के ही मुद्दों की बात करते रहते हैं। कभी कहते हैं कि LIC बिक गया, जबकि इस कंपनी की संपत्ति पाकिस्तान की GDP से भी दोगुनी हो जाती है। 4 जून के बाद फिर से हमें वास्तविकता में ‘बनराकस’ का ड्रामा देखने को मिल सकता है, या फिर वो ‘विधायक आवास’ निकल जाएगा?

मलयालम डायरेक्टर उमर लुलु ने एक्ट्रेस का कई बार किया रेप, अब आपसी सहमति का कर रहा दावा: केरल हाई कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत

मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के जायरेक्टर उमर लुलु ने अभिनेत्री का कई बार रेप किया। उसके साथ शादी का वादा भी किया और कई महीनों के रेप के बाद अब मुकर गया है। अभिनेत्री इंडस्ट्री में नई है। उसने कोच्चि पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसे एर्नाकुलम जिले में ट्रांसफर कर दिया गया है। इस बीच, उमर लुलु ने जमानत के लिए केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद उसे 6 जून तक की गिरफ्तारी से राहत मिल गई है।

ऑन मनोरमा की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘ओरु अदार लव’ फिल्म का डायरेक्शन करने वाले उमर लुलु ने केरल हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि रेप के आरोप झूठे हैं। उसने एक्ट्रेस की सहमति से उसके साथ संबंध बनाए थे। इस मामले में जस्टिस ए बदरुद्दीन ने उमर लुलु को अग्रिम जमानत दे दी है। इस मामले में अब 6 जून को अगली सुनवाई होगी।

जानकारी के अनुसार, केरल के एर्नाकुलम जिले के नेदुम्बस्सेरी थाने में उमर के खिलाफ यह मामला दर्ज हुआ था। अपनी FIR में अभिनेत्री ने बताया है कि उमर लुलु ने जनवरी, 2024 और अप्रैल, 2024 के बीच उसे कई जगह ले जाकर रेप किया। अभिनेत्री ने आरोप लगाया है कि उमर लुलु ने उसके साथ शादी का भी वादा किया। युवा अभिनेत्री ने आरोप लगाया है कि उमर लुलु ने उसे एक फिल्म में काम देने का झाँसा भी दिया था। अभिनेत्री ने पहले कोच्चि में इस मामले में शिकायत दर्ज करवाई थी लेकिन मामले की जाँच के बाद इसे नेदुम्बस्सेरी थाने को ट्रांसफर कर दिया गया। पुलिस ने इस मामले में उमर लुलु के खिलाफ धारा 376 के तहत FIR दर्ज की है और आगे की जाँच कर रही है।

गौरलतब है कि 2019 में आई ओरु अडार लव फिल्म ओ लुलु ने ही बनाया था। इस फिल्म के एक सीन से अभिनेत्री प्रिया प्रकाश वरियर काफी विख्यात हो गईं थी। इसके एक गाने पर काफी बवाल हुआ था। इस फिल्म के एक गाने ‘माणिक्य मलराया पूवी पर मुस्लिम संगठनों ने फतवा जारी किया था और कहा था इसमें पैगम्बर मुहम्मद की पत्नी खदीजा का जिक्र है। उमर लुलु और प्रिया प्रकाश पर इस गाने से मजहबी भावनाओं को भड़काने के लिए FIR भी करवाई गई थी।

33 साल पहले जहाँ से निकाली थी एकता यात्रा, अब वहीं साधना करने पहुँचे PM नरेंद्र मोदी: पढ़िए ईसाइयों के गढ़ में संघियों ने कैसे बनवा दिया ‘विवेकानंद शिला स्मारक’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के कन्याकुमारी स्थित ‘विवेकानंद शिला स्मारक’ पर अपनी साधना शुरू कर दी है। अब जब 7वें चरण के चुनाव के लिए प्रचार-प्रसार का शोर थम चुका है, पीएम मोदी भारत के सुदूर दक्षिणी छोर पर पहुँचे हैं जहाँ बंगाल की खाड़ी, हिन्द महासागर और अरब सागर का मिलन होता है। उनका ये 2 दिवसीय कार्यक्रम है। उन्होंने कन्याकुमारी के भगवती अम्मन मंदिर में भी दर्शन किया। पीएम मोदी यहाँ तपस्या कर के राष्ट्रीय एकता का भी सन्देश दे रहे हैं, क्योंकि पश्चिम बंगाल में जन्मे विवेकानंद ने यहीं ज्ञान प्राप्त किया था।

याद दिला दें कि आज से 33 वर्ष पूर्व भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहाँ पहुँचे थे, जिसकी तस्वीर भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। असल में 11 दिसंबर, 1991 को यहीं से दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी ने ‘एकता यात्रा’ निकाली थी, जो 26 जनवरी, 1992 को कश्मीर के श्रीनगर स्थित लाल चौक पर बलिदानी भगत सिंह के परिजनों द्वारा राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराने के साथ खत्म हुई थी। 14 राज्यों से होकर गुजरी इस यात्रा के जरिए आतंकवाद के खिलाफ राष्ट्रीय एकता का सन्देश दिया गया था।

आइए, आपको RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के सरकार्यवाह रहे एकनाथ रानडे द्वारा बनवाए गए इस स्मारक के बारे में बताते हैं। Organiser को दिए गए इंटरव्यू में एकनाथ रानडे के साथ 18 वर्षों तक काम कर चुके RN वेंकटरमनम ने इसके बारे में विस्तार से बताया है। उन्होंने बताया कि जब स्वामी विवेकानंद की जन्म-शताब्दी मनाने के लिए रामकृष्ण मठ और केंद्र सरकार की तैयारियाँ ज़ोरों पर थीं, तब तमिलनाडु में RSS के प्रांत-प्रचारक दत्ताजी डिडोलकर के साथ स्वयंसेवकों ने विवेकानंद शिला की चर्चा छेड़ी थी।

यहाँ स्वामी विवेकानंद तैर कर पहुँचे थे और 3 दिनों तक साधना की थी, जिसके बाद न सिर्फ उन्हें अपने जीवन का उद्देश्य पता चला बल्कि ‘भारत माता’ वाला विचार उनके मन में आया। तब S वेंकटरमनम उस इलाके में संघ के प्रान्त प्रचारक थे। उन्होंने दत्ताजी को विवेकानंद शिला के बारे में बताया। RN वेंकटरमनम बताते हैं कि ईसाइयों के गढ़ में इसके निर्माण में कई व्यवधान थे, ऐसे में राज्य स्तरीय समिति को राष्ट्रीय समिति बनाने के लिए इसमें एकनाथ रानडे को जोड़ा गया, जिन्होंने सरकार्यवाह का दायित्व तब तक भैयाजी दानी को दे दिया था।

एकनाथ रानडे उस समय तक विवेकानंद का अच्छी तरह से अध्ययन कर चुके थे, ऐसे में वो उनसे प्रभावित भी थे और फिर उन्होंने अपना पूरा जीवन इसी मिशन को समर्पित कर दिया। 300+ सांसदों के हस्ताक्षर उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को सौंपा, जिन्होंने तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री भक्तवत्सलम से बात की। उसी दौरान तमिलनाडु के प्रान्त प्रचारक रामगोपालन के माध्यम से एकनाथ रानडे ने RN वेंकटरमनम को उनकी कंपनी से इस्तीफा दिलवा कर इस काम से जोड़ा।

नवंबर 1964 में काम शुरू हुआ, 1970 में इसका उद्घाटन हुआ जिस कार्यक्रम की अध्यक्षता M करूणानिधि ने की जो तमिलनाडु के CM थे। करूणानिधि ने पहले अंग्रेजी फिर तमिल में भाषण दिया। अनुमान है कि ये 1.35 करोड़ रुपए में बन कर तैयार हुआ। इसमें से 80 लाख रुपए सिर्फ आम लोगों ने दान दिया था। राज्य व केंद्र सरकार के अलावा भारतीय सेना के जवानों ने भी दान दिया। आम लोगों से एक रुपए, 2 रुपए और 5 रुपए ही लिए जाते थे।

एकनाथ रानडे इस परियोजना को लेकर इतने समर्पित थे कि उन्होंने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा बनाने वाले कलाकारों को भी स्वमीजी के बारे में पढ़ने के लिए कहा, ताकि वो तन-मन से काम कर सकें और परिणाम सटीक हो। चेन्नई में गाँधी स्टेचू और वहाँ के मरीना बीच पर लेबर स्टेचू बनाने वाले DP रॉय चौधरी उन शिल्पकारों में से एक थे। अंत में सोनवडेकर द्वारा बनाई गई प्रतिमा का चयन हुआ। आज 110 एकड़ में विवेकानदंपुरम भी है। वहाँ संत तिरुवल्लुवर की प्रतिमा बगल की शिला पर स्थापित करने का विचार भी एकनाथ रानडे का ही था।

एकनाथ रानडे का मानना था कि बगल की जो छोटी शिला है, वहाँ राजनेता किसी कारण से अन्य किसी की प्रतिमा लगा सकते हैं जिनका कद स्वामी विवेकानंद जैसा न हो। संत तिरुवल्लुवर तमिलनाडु के एक महान संत एवं दार्शनिक थे। उस दौरान एकनाथ रानडे ने MGR से भी मुलाकात की थी, जो लोकप्रिय अभिनेता से राजनेता बने थे और मुख्यमंत्री थे। MGR ने सलाह दी थी कि ये काम सरकार को अपने हाथ में लेकर कराना चाहिए। ये काम सरकार ने किया, लेकिन उद्घाटन के मौके पर कमिटी में विवेकानंद केंद्र का भी नाम था।

चंदन यादव के बाद अब हर्ष पटेल गिरफ्तार: हर्ष राज हत्याकांड में बिहार पुलिस की कार्रवाई, कॉलेज के बाहर पीट-पीट कर मार डाला था

पटना लॉ कॉलेज के छात्र हर्ष राज की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। हर्ष राज के मुख्य हत्यारोपियों में से एक अमन कुमार उर्फ अमन पटेल को पटना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में चंदन यादव नाम के आरोपित को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में पुलिस 3 हत्यारोपियों की तलाश कर रही है। पुलिस ने कहा है कि वो अन्य आरोपितों के नाम-पतों के सत्यापन और उनकी तलाश में जुटी है, जल्द ही जब्ती-कुर्की की भी कार्रवाई की जाएगी। अमन पटेल पटना के मनेर का रहने वाला है।

पटना पुलिस ने अमन पटेल की गिरफ्तारी की सूचना दी। पटना पुलिस ने बताया है कि अमन पटेल ने अपनी भूमिका स्वीकार कर ली है। पटना पुलिस ने अमन से पूछताछ के बाद बयान जारी किया है, जिसमें बताया है कि ‘अमन पटेल हॉस्टल में ही रहता है और पिछले साल दशहरा के मौके पर डांडिया खेल में हर्ष के दो-3 साथियों ने उससे और रबिश से मारपीट की थी। चंदन भी उसी की तरफ से लड़ रहा था। पिटाई की वजह से हमें बेईज्जती महसूस हो रही थी। इसके बाद हम लोगों ने हर्ष को पीटने की प्लानिंग की। ऐसे में लॉ कॉलेज कैंपस के बाहर हर्ष का इंतजार कर उसके साथ मारपीट की।’

इस मामले में पुलिस अभी 1-राजा बाबू उर्फ मयंक, सुपौल जिला निवासी, 2-शिवम उर्फ लक्ष्य, मधेपुरा जिला निवासी और प्रकृति आनंद उर्फ आरूस, बेगूसराय जिला निवासी की तलाश कर रही है। पुलिस ने कहा है कि बाकी हत्यारोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है और वारंट-कुर्की की प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है।

बता दें कि बिहार की राजधानी पटना में लॉ कॉलेज के सामने सोमवार (27 मई, 2024) को हर्ष राज नामक छात्र की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी। वो परीक्षा देकर बाइक से निकल रहे थे, तभी वहाँ आए एक दर्जन से भी अधिक अज्ञात बदमाशों ने उन्हें गिरा दिया और लाठी-डंडे से पीट-पीट कर मार डाला। इस मामले में बिहार पुलिस ने बिहटा के अम्हारा गाँव के रहने वाले चंदन यादव को मुख्य साजिशकर्ता बताते हुए गिरफ्तार किया। हर्ष राज BN कॉलेज में पढ़ते थे। वो BA तृतीया वर्ष के छात्र थे।

‘हमें नहीं है ज़रूरत’: मणिपुर को मदद के नाम पर यूरोपियन यूनियन का मिशनरी एजेंडा, राज्य सरकार ने पैसे ठुकराते हुए कहा – हम चला रहे राहत कार्य

मणिपुर में मई माह के शुरुआत में आई भारी बारिश की वजह से मची तबाही से निपटने के लिए सरकार लगातार सक्रिय है। इस बीच, यूरोपीय यूनियन (ईयू) ने मणिपुर के लोगों की मदद के लिए ढाई लाख यूरो देने की घोषणा की थी, लेकिन उसे मणिपुर सरकार ने ठुकरा दिया है। ईयू ने जो ढाई लाख यूरो भेजे हैं, वो राशि भारतीय करेंसी में करीब सवा 2 करोड़ रुपए के बराबर बैठती है। मणिपुर सरकार ने कहा कि हमने प्रभावितों की मदद के लिए 30 करोड़ रुपए की व्यवस्था की है और लोगों तक राहत पहुँच रही है। ऐसे में हमें बाहरी मदद की जरूरत नहीं है।

बता दें कि ईयू ने 29 मई 2024 को घोषणा की थी कि वो मणिपुर के आपड़ा प्रभावितों की मदद के लिए 2.5 लाख यूरो भेज रही है। इससे 1500 परिवारों की मदद की जाएगी।

खास बात ये है कि ये मदद ईयू जिस एनजीओ की सहायता से पहुँचा रहा है, वो सेवेंथ डे एवेंटिट चर्च द्वारा ऑपरेट होता है। ऐसे में मणिपुर में चर्च के पैसों से खास समुदाय को पैसे देने की योजना बन रही थी, लेकिन मणिपुर सरकार ने इसे गलत बताया है और कहा कि हम समान भाव से अपने सभी नागरिकों का ख्याल रख रहे हैं। मणिपुर सरकार ने यूरोपीय यूनियन पर गलत जानकारियाँ फैलाने का भी आरोप लगाया है।

मणिपुर सरकार ने इस मामले में प्रेस रिलीज भी जारी की है। मणिपुर सरकार ने कहा, ‘हाल ही के दिनों में राज्य में जो तूफान आया था, उसे लेकर बचाव कार्य से जुड़े जो भी खर्चे हो रहे हैं, उसे नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स और राज्य डिजास्टर रिस्पांस फोर्स की ओर से पूरा किया जा रहा है। तूफान से जुड़े राहत कार्य संबंधित डिप्टी कमिश्नर, सुरक्षा बलों और सार्वजनिक स्वयंसेवकों के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं।’

सरकारी नोटिफिकेशन में ये भी साफ किया गया है कि राहत बचाव का कार्य किसी भी गैर सरकारी संगठन या नागरिक समाज संगठन को नहीं सौंपा गया है। इसके अलावा मणिपुर सरकार ने तूफान से प्रभावित राज्य के जिलों के डिप्टी कमिश्नर को 30 करोड़ रुपये पहले ही मँजूर कर दिए हैं।

बता दें कि मणिपुर में हिंसा के समय ईयू ने इस मुद्दे पर अपने संसद में बहस कराई थी। इसका भारत सरकार ने तीखा विरोध किया था। वहीं, ईयू ने जिस चर्च के एनजीओ के माध्यम से ये राहत राशि भेजी थी, वो काफी विवादों में घिरी रही है। वहीं, मणिपुर हिंसा में ईसाईयों के संगठनों का भी कनेक्शन निकल रहा है।

मूल रूप से ये खबर अंग्रेजी भाषा में लिखी गई है। मूल खबर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

जो पुराना फोन आप यूज नहीं करते उसके बारे में मुझे बताइए… कहीं अपनी ‘दुकानदारी’ में आपकी गर्दन न नपवा दे न्यूजलॉन्ड्री वाला ‘झबरा’

दिनभर फर्जी खबरें फैला कर पैसों की माँग करना अब पुराना शगल हो गया है। अब इसमें थोड़ा सा बदलाव आया है। प्रोपेगेंडा प्लेटफॉर्म Newslaundry के को फाउंडर अभिनंदन सेखरी ने अब लोगों से पुराने फोन माँगे है। सेखरी ने यह जानकारी एक्स (पहले ट्विटर) पर दी है।

‘झबरा’ की संज्ञा धारण करने वाले अभिनंदन सेखरी ने एक्स पर लिखा, “अगर आप दिल्ली में रहते हैं और आपके पास पुराने फोन हैं जो अभी भी काम करते हैं लेकिन आप उनका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं और उन्हें IIT फ्लाईओवर और वसंत विहार फ्लाईओवर के आस-पास रहने वाले बेघर लोगों को देना चाहते हैं (उन्हें फोन की बड़ी ज़रूरत है) तो कृपया मुझे मेल करें। मैं उन्हें एकत्र करवा लूँगा। धन्यवाद।”

इस ट्वीट में सेखरी ने बताया कि वह वसंत विहार और फ्लाईओवर और IIT फ्लाईओवर के पास रहने वाले बेघर यानि झुग्गी झोपड़ियों में रहने वालों को देना चाहता है। लेकिन असल में सेखरी की यह कोशिश किसी को जेल पहुँचा सकती है। सेखरी ने जिस वसंत विहार इलाके में फोन बाँटने की बात की है, यहाँ रहने वाली बड़ी बेघर आबादी रोहिंग्या घुसपैठियों की है। सेखरी ने लोगों को फोन बाँटने की बात तो कर दी लेकिन यह नहीं बताया कि इससे फोन देने वाले को क्या नुकसान हो सकता है।

पुराना फोन देने से क्या नुकसान?

पुराना फोन किसी अनजान व्यक्ति को देने के कई नुकसान है। सेखरी ने बताया है कि वह फोन यहाँ बेघर व्यक्तियों को देने जा रहा है। ऐसे में फोन देने वाले को नहीं पता होगा कि उसका फोन किसके हाथ में जा रहा है। वह व्यक्ति क्या काम करता है, उसका पेशा क्या है, उसका पक्का पता क्या है और उसके फोन का आगे किस काम के लिए उपयोग होने वाला है।

ऐसे में यदि कोई व्यक्ति सेखरी को फोन देता है और वह आगे किसी बेघर व्यक्ति को देता है जो कि इस फोन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों समेत किसी अवैध काम में करता है तो ऐसी स्थिति में पुलिस फोन के पहले मालिक के पास पहुँच सकती है।

ऐसा इसलिए होगा क्योंकि अपराध के मामले में पुलिस को यदि कोई मोबाइल नम्बर मिलता है, तो इसी से उस फोन की जानकारी भी मिलती है, जिसमें यह SIM डाला गया है। इससे पुलिस समेत एजेंसियों को फोन के IMEI नम्बर का पता लगता है। यह IMEI नम्बर किसी फोन का पहचान पत्र होता है।

जैसे किसी कार या बाइक का चेसिस और इंजन नम्बर होता है, जिससे उसकी पहचान की जा सके ऐसे ही फोन में IMEI नम्बर होता है। IMEI नम्बर से फोन के उपयोग की जानकारी भी निकाली जा सकती है। ऐसे में जाँच एजेंसियाँ किसी ‘बेघर’ के अपराध के लिए फोन दान देने वाले के घर पहुँच सकती हैं। यदि वसंत विहार में रहने वाला कोई रोहिंग्या घुसपैठिया ऐसा फोन पाता है और उससे कोई अपराध करता है, तो इस मामले में फोन दान देने वाले को फँसना पड़ सकता है।

इसके अलावा सेखरी जहाँ एक ओर लोगों से फोन लेने की बात कर रहा है, वहीं उसने यह नहीं बताया कि वह फोन लेने के बदले कोई रसीद भी उपलब्ध करवाएगा क्या। सामान्यतः, जो वेबसाइट पुराने मोबाइल खरीदती हैं, वह फोन बेचने वाले को इस बात की रसीद भी देती हैं कि उसने फोन बेचा है।

इसके अलावा वह बिना पहचान पत्र देखे फोन नहीं खरीदती-बेचतीं। यदि कोई ऐसा साक्ष्य नहीं होता तो फोन देने वाला किसी अपराध की स्थिति में कैसे साबित करेगा कि फोन का मालिकाना हक़ उसके पास नहीं था। क्या ऐसी परिस्थिति में अभिनंदन सेखरी उस कथित ‘बेघर’ के कृत्यों की जिम्मेदारी लेगा।

पहचान तक हो सकती है चोरी

साइबर एक्सपर्ट बताते हैं कि सामान्यतः आपको अपना फोन किसी को नहीं बेचना चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कि भले ही कोई व्यक्ति अपना फोन पूरी तरह से फॉर्मेट करके बेचता है तब भी इस बात की संभावना रहती है कि वह डाटा वापस पाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में जिस व्यक्ति को पुराना फोन मिला है, वह उसके निजी फोटो, पहचान सम्बन्धी कागज, परिवार की जानकारी, उससे जुड़े फोन नम्बर तक निकाल सकता है।

एक साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट ने ऐसा ही प्रयोग करके 30 डिवाइस खरीदे और उनमें से लगभग आधे में से पुराना डाटा निकालने में सफल रहे। ऐसे में इस बात की क्या गारंटी है कि सेखरी जिन लोगों को फोन दिया जाएगा, वह पुराने मालिक की जानकारियाँ नहीं चुराएगा।

क्या फोन माँगना सेखरी का निजी हित

वहीं अभिनंदन सेखरी के फोन माँगने में उसका निजी हित भी शामिल हो सकता है। दरअसल, बहुत सारे फोन एक जगह इकट्ठा करके उनका उपयोग कोई ट्रेंड सोशल मीडिया पर चलाने, किसी वीडियो को वायरल करने या किसी सूचना को प्रसारित करने में होता है। ऐसे में हो सकता है कि दिन भर सब्स्क्रिप्शन के बहाने पैसे की माँग करना वाला अभिनंदन सेखरी अपने ही व्यूज बढ़ाना चाहता हो या फिर कोई ट्रेंड चलाना चाहता हो।

अभिनंदन सेखरी जैसे लोगों को नित नित नए ‘फ्रॉड’ करने का आईडिया कहाँ से आता है, इसे आप उसके पोस्ट पर आए कमेंट्स को पढ़ कर भी समझ सकते हैं। कई ‘भोले-भाले’ यूजर्स उसे अपनी ओर से फोन देने की पहल भी कर रहे हैं, बिना यह सोचे समझे कि उनके लिए एक ‘बेकार फोन’ उनके जीवन में मुसीबतों का बवंडर ला सकता है।

‘मुझे मंदिर जाने दो’: फैजान, जीशान और फिरोज ने बुजुर्ग RSS कार्यकर्ता को मार डाला, CCTV फुटेज में दिखा कैसे सीने पर लात मार कर जमीन पर गिराया

राजस्थान में मंदिर में दर्शन करने जा रहे एक 65 वर्षीय बुजुर्ग की हत्या कर दी गई। पहले माना जा रहा था कि बीमारी की वजह से मौत हुई है, लेकिन अब CCTV फुटेज आमने आने के बाद खुलासा हुआ है कि बुजुर्ग के साथ मारपीट की गई थी। बदमाशों ने मामूली बात को लेकर उनके साथ मारपीट की, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। गंभीर हालत में सत्यनारायण गुर्जर को अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहाँ इलाज के दौरान ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

मृतक के बेटे ने घटना के 4 दिन बाद हत्या का मामला दर्ज कराया है। ये वारदात किशोरपुरा के भेरू चौक पर 22 मई को होती है। परिवार ने इस मामले में फैजान, जीशान और फिरोज नामक आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। किशोरपुरा थाने की पुलिस इस मामले की जाँच में लगी है। घटना देवनारायण मंदिर के पास की है, जहाँ सत्यनारायण खटाणा दर्शन के लिए गए थे। 22 मई को उनकी अचानक से तबीयत ख़राब हो गई थी।

इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उनकी मौत की वजह ब्रेन हेमरेज बताई गई। 23 मई को उनकी मृत्यु हुई थी। अब एक सप्ताह बाद इस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। आरोप है कि ब्रेन हेमरेज की वजह उनके सीने पर मुक्का मारा जाना है। उनके बेटे युधिष्ठिर खटाणा भाजपा युवा मोर्चा देहात के जिलाध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया है कि उनके पिता 22 मई को देवनारायण मंदिर दर्शन के लिए गए थे। मंदिर से पहले कुछ कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है।

कंस्ट्रक्शन का काम करवा रहे कुछ लोगों ने रास्ते में गिट्टी, बालू और सीमेंट डाल रखा था। इस कारण सत्यनारायण खटाणा मंदिर में नहीं जा पा रहे थे। उन्होंने वहाँ मौजूद आरोपितों से निवेदन किया कि वो उन्हें मंदिर जाने के लिए रास्ता दें। लेकिन, उनलोगों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। कुछ देर बाद वहाँ फैजान के 2 बेटे फिरोज और जीशान के अलावा बुंदू नामक शख्स भी पहुँचा। इन्होंने बुजुर्ग के सीने पर जोर से मुक्का मारा, जिसे वो साहब नहीं कर पाए और दूर जा गिरे।

इन सबने बुजुर्ग को जान से मार डालने की भी धमकी दी। पुलिस ने तीनों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है। SI रेवतीरमण का काना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए DSP खुद इस मामले की जाँच कर रहे हैं। ये भी बताया जा रहा है कि मृतक RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के कार्यकर्ता थे। दिनदहाड़े ये घटना हुई है, जिसने आपराधिक घटनाओं में अव्वल राजस्थान की साख पर फिर से बट्टा लगाया है। सरकार बदलने के बावजूद अपराधी बेख़ौफ़ घूम रहे हैं।

‘वह बुजुर्ग और बीमारी आदमी है, मैंने दया कर पार्ट टाइम नौकरी दी’: गोल्ड स्मलिंग में गिरफ्तार हुआ PA तो शशि थरूर ने झाड़ा पल्ला, कहा- मेरा लेना-देना नहीं, एजेंसी करें जाँच

कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर के पीए कहे जाने वाले शिव कुमार की सोना तस्करी मामले में गिरफ्तारी की न्यूज फैलने के बाद शशि थरूर ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक्स पर भी इस मुद्दे पर अपनी ओर से सफाई रखी है। साथ ही मीडिया को भी अपना पक्ष बताया है।

शशि थरूर ने X पर हैरानी जताते हुए लिखा- “अपने पूर्व स्टाफ से जुड़ी घटना के बारे में सुनकर मैं हैरान हूँ। वह (शिव कुमार प्रसाद) 72 साल के रिटायर्ड व्यक्ति हैं। उनका डायलिसिस होता है। हमने उन्हें सहानुभूति दिखाते हुए पार्ट टाइम आधार पर नौकरी पर रखा था। मैं किसी भी गलत काम की समर्थन नहीं करता हूँ। मैं मामले की जाँच में अधिकारियों का पूरा समर्थन करता हूँ। कानून को अपना काम करना चाहिए।”

इसके अलावा उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, “वो एक बुजुर्ग आदमी है जो रिटायर हो गया है। वो मुझे थोड़ी सी मदद दे रहा था वो भी पार्ट टाइम जब उनकी तबीयत ठीक होती थी। इस खबर से मैं शॉक्ड हूँ। इसलिए मैंने कहा जो प्रशासन को करना है करने दीजिए, मुझे इसमें कोई दिक्कत नहीं है। होने दीजिए, जो हो। अधिकारी जाँच करें। वो मेरे लिए नहीं गए थे एयरपोर्ट। मैं वहाँ हूँ ही नहीं। मैं यही हूँ। अगर वो दूसरे काम के लिए जा रहे हैं तो उसका जवाब उन्हें देना चाहिए।”

बता दें कि 29 मई 2024 को दिल्ली के इंदिरा गाँधी एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 पर शशि थरूर के पर्सनल असिस्टेंट शिव कुमार को गिरफ्तार किया गया था। बताया जा रहा है कि जिस समय कस्टम विभाग ने शिव कुमार को धरा उस समय वह दुबई से लौटे थे और अपने ही किसी विदेश से लौटे परिचित से सोने का हैंडओवर ले रहे थे। इसी बीच कस्टम विभाग ने शिव कुमार को पकड़ने की अपनी कार्रवाई की।

फिलाडेल्फी कॉरिडोर से लेकर रफाह क्रॉसिंग तक अब इजरायल का पूर्ण नियंत्रण, UNRWA को आतंकी संगठन घोषित करने की कवायद भी शुरू

इजरायल ने गाजा और मिस्र की सीमा पर स्थित फिलाडेल्फी कॉरिडोर पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया है। ये साल 2006 के बाद पहली बार है, जब इजरायल ने इस कॉरिडोर पर कब्जा किया है। इजरायल ने गाजा और मिस्र के बीच की सारी आवाजाही को अपने कब्जे में ले लिया है और रफाह क्रॉसिंग पर भी अपने जवान तैनात कर दिए हैं। अब तक इस कॉरिडोर और क्रॉसिंग पर मिस्र के सैनिक तैनात होते थे। इजरायल ने एक समझौते के बाद साल 2006 में इस कॉरिडोर और क्रॉसिंग की जिम्मेदारी मिस्र को सौंप दी थी।

इसके साथ ही इजरायल ने गाजा में फिलिस्तीनियों के लिए तैनात यूएन की राहत एजेंसी UNRWA को आतंकी संगठन घोषित करने की तरफ कदम बढ़ा दिए हैं, इस बारे में इजरायली संसद में एक बिल पेश किया गया था, जो भारी बहुमत से पास भी हो गया। अगर इजरायल की सरकार UNRWA को आतंकी संगठन घोषित करती है, तो गाजा में उसके कामों को रोकने के साथ ही वो UNRWA से जुड़ी चीजों को भी निशाना बना सकता है। फरवरी महीने में ही इजरायल की सरकार ने UNRWA के एक बैंक अकाउंट को जब्त कर लिया था, जिसके जरिए गाजा में वो राहत कार्यों को अंजाम दे रही थी। इजरायल ने आरोप लगाया है कि UNRWA के लोग हमास से मिले हुए हैं और 7 अक्टूबर 2023 के हमले में भी UNRWA के लोगों की मिली भगत थी।

क्या है फिलाडेल्फी कॉरिडोर? जिस पर इजरायल ने किया कब्जा

साल 2006 में गाजा और मिस्र की सीमा के बीच 14 किमी लंबे फिलाडेल्फी कॉरिडोर को बनाया गया था। इसे बफर जोन बनाया गया था कि यहाँ कोई सैन्य गतिविधि नहीं होगी और न ही दोनों तरफ से कोई निर्माम कार्य होगा। ये समझौता इजरायल, फिलिस्तीन अथॉरिटी और मिस्र के बीच हुआ था। लेकिन साल 2007 में हमास ने गाजा पट्टी पर कब्जा कर लिया और इस कॉरिडोर में भी अपनी गतिविधियाँ चलाई। कई सारी सुरंगे बनाई और सामानों की तस्करी शुरू कर दी।

इजरायली सेना ने बताया है कि फिलाडेल्फी कॉरिडोर के इलाके में उसे 20 सुरंगें मिली हैं, तो दर्जनों रॉकेट लॉन्चर भी बरामद किए हैं। यहाँ से इजरायल पर हमले किए जा रहे थे। जबकि फिलाडेल्फी कॉरिडोर को डि-मिलिटराइज जोन बनाया गया था। साल 1978 के कैंप डेविड समझौते के तहत यहाँ कोई भी सैनिक तैनात नहीं हो सकता था, लेकिन हमास ने लगातार इसका अतिक्रमण किया। ऐसे में साल 2006 के बाद इजरायल ने पूरे कॉरिडोर को पहली बार कब्जे में ले लिया है। इसके साथ ही उसने रफाह क्रॉसिंग पर भी अपने सैनिक तैनात कर दिए हैं। अब तक यहाँ मिस्र के सैनिक तैनात होते थे और यहीं से होकर गाजा के लिए लोगों और सामान की आवाजाही हो रही थी।

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी UNRWA को आतंकी संगठन घोषित करने की तरफ बढ़ाए कदम

इस बीच, इजरायल की संसद ने एक बिल पास किया है, जिसमें गाजा और फिलिस्तीन में राहत कार्यों को अंजाम देने वाली एजेंसी UNRWA को आतंकी संगठन घोषित किया गया है। ये एक बिल है, जिसपर आगे चर्चा होनी है। इस बिल के पूरी तरह से पास होने पर इजरायल यूएन की इस एजेंसी से सारे संबंध तोड़ सकेगा और गाजा में भी उसका कामकाज ठप कर देगा। ये बिल 42-6 के बहुमत से पास हुआ।

इजरायल की संसद में विपक्षी पार्टी बेईतुन के नेता एमके एविगडोर लिबरमैन ने कहा कि UNRWA ने 7 अक्टूबर के हमले में हमाज की मदद की थी। ये एजेंसी गाजा के अंदर आतंकवादियों की मददगार है। बता दें कि एजेंसी के कर्मचारियों पर 7 अक्टूबर 2023 के हमलों में शामिल होने के आरोप हैं। उसके 45 कर्मचारियों का नाम इसमें आया था। इजरायल की शिकायत के बावजूद उनपर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद से इजरायली अधिकारी माँग कर रहे हैं कि इस संगठन पर बैन लगाया जाए। बता दें कि इसी संगठन के लिए भेजे गए सामान को हमास ने अपने कब्जे में कर लिया था और अपने हथियारों के साथ ही तेल डिपो को बढ़ा लिया था, जिससे इजरायल के हमले का जवाब देने में उसे मदद मिली।

बता दें कि इजरायल के सबसे बड़े बैंक ने UNRWA के खाते को फ्रीज कर दिया था, क्योंकि उसके खाते के माध्यम से संदिग्ध लेन-देन हो रहा था। UNRWA इजरायली सवालों के जवाब नहीं दे पाई थी। इजरायली सेना ने आरोप लगाया था कि UNRWA का गाजा में हो हेडक्वॉर्टर है, उसके नीचे हमास का भी सेंटर था। यही नहीं, हमास के कंप्यूटर सर्वर सीधे UNRWA को मिल रही बिजली से जुड़े थे। कई बार UNRWA के सेंटर्स पर इजरायली सेना को हथियार मिल चुके हैं।

इस बीच इजरायल ने येरुशलम में स्थित UNRWA के ऑफिस को खाली करने का नोटिस दिया है। UNRWA को एक माह के अंदर ये जगह खाली करनी होगी। 7 साल में इस जगह के किराए और अन्य सुविधाओं के लिए इजरायली सरकार ने $7.3 मिलियन भी माँगे हैं। इसके लिए इज़राइल भूमि प्राधिकरण ने इज़राइली आवास मंत्री यित्ज़ाक गोल्डकनॉफ़ की अनुमति से UNRWA को पत्र जारी किया है।

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायली इलाकों में घुसकर तबाही मचाई थी। इस हमले में 1200 से ज्यादा इजरायली लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 252 लगों को हमास ने बंधक बना लिया था। अब भी हमास के कब्जे में 125 लोग हैं, जिसमें से 39 लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। इसके बाद ही इजरायल ने गाजा को आतंकवाद और हमास से मुक्त करने के लिए सफाई अभियान चलाया है, जिसमें तमाम आम नागरिक भी मारे गए हैं। गाजा में मरने वालों की संख्या हजारों में है।

कौन हैं पुणे के रईसजादे को बेल देने वाले एलएन दावड़े, अब मीडिया से रहे भाग: जिसने 2 को कुचल कर मार डाला उसे ‘300 शब्दों का निंबध’ पर दी थी राहत

पुणे पोर्श कार एक्सीडेंट केस में आरोपित रईसजादे को बेल देने वाले डॉक्टर एल.एन धनावड़े के खिलाफ जाँच के आदेश दिए गए हैं। इस बीच उनकी मीडिया से भागते वीडियो सामने आई है। वीडियो में वो बिन हेलमेट पहले रोड पर स्कूटी से जा रहे हैं। वहीं मीडियाकर्मी उनसे पूछ रहे हैं कि उन्होंने दो इंजीनियरों को मौत के घाट उतारने वाले आरोपित लड़के को क्यों बेल दी थी।

बता दें कि एलएन धनावड़े ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड का गैर न्यायिक सदस्य होने के बावजूद आरोपित रईसजादे को बेल देने का फैसला सुनाया था वो भी दो शर्तों पर। एक शर्त तो ये कि आरोपित रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस जाए और ट्रैफिक रूल्स के बारे में बढ़े और प्रेजेंटेशन उनके आगे जमा करे और दूसरा कि वो रोड एक्सीडेंट और उनके निवारण पर 300 शब्द का निबंध लिखे।

उनके इस निर्णय की बात जब मीडिया में फैली तो महाराष्ट्र के उप सीएम देवेंद्र फडणवीस समेत कई लोगों ने इस फैसले पर सवाल उठाए। पूछा गया कि क्या दो लोगों की जान लेने की की सजा ऐसी होती है। इसके बाद उनके खिलाफ जाँच के आदेश दिए गए।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, एलएन धनावड़े ने जुवेनाइल बोर्ड के सदस्य होने के नाते अपना यह फैसला तो दिया था लेकिन इस दौरान उन्होंने नियमों का पालन नहीं किया था। पुणेकर न्यूज के मुताबिक, ऐसे फैसले लेते समय जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के दो सदस्यों का होना जरूरी होता है। मगर फिर भी धनावड़े ने मामला अकेले सुना और बिन किसी बोर्ड के अधिकारी से संपर्क किए निर्णय़ ले लिया। बाद में 22 मई को दोबारा सुनवाई हुई और आरोपित की बेल कैंसिल हो गई।

कौन है रईसजादे को बेल देने वाले डॉ एलएन धनावड़े

जानकारी के मुताबिक, डॉ एलएन धनावड़े जुवेनाइल बोर्ड के सदस्य से पहले बालग्राम ‘SOS’ के बोर्ड में थे, जो कि रायगढ़ में है। वहाँ उन्हें एक नाबालिग लड़की की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में सस्पेंड किया गया था। इसके बाद इन्हें पुणे भेजा गया और यहाँ ये पुणे बाल कल्याण समिति से जुड़े। इसके बाद इन्हें जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में पद मिल गया। अब उन्होंने इसी पद का फायदा उठाते हुए अपना फैसला सुनाया है।